Author: bharati

  • अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल: हवा और जमीन पर हमला करने वाला बहु भूमिका फाइटर

    अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल: हवा और जमीन पर हमला करने वाला बहु भूमिका फाइटर

    नई दिल्ली । ईरान द्वारा अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराने के दावे ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान एफ 15ई स्ट्राइक ईगल पर केंद्रित कर दिया है। यह विमान अमेरिकी वायुसेना के सबसे भरोसेमंद और बहु भूमिका वाले फाइटर जेट्स में से एक माना जाता है। यूएस एयरफोर्स की आधिकारिक वेबसाइट एएफडॉटएमआईएल के अनुसार एफ 15ई स्ट्राइक ईगल को विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह न केवल हवा में दुश्मन के विमानों से लड़ सके बल्कि जमीन पर स्थित लक्ष्य पर भी सटीक हमला कर सके।

    एफ 15ई में दो सदस्यीय क्रू होता है, जिसमें एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर शामिल होता है। यह संयोजन जटिल मिशनों को अधिक कुशलता और सुरक्षा के साथ अंजाम देने में सहायक होता है। विमान किसी भी मौसम में दिन रात उड़ान भरने में सक्षम है और इसमें अत्याधुनिक एवियोनिक्स और रडार सिस्टम लगे हैं, जो लंबी दूरी से लक्ष्यों की पहचान और उन पर सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करते हैं।

    एफ 15ई का एपीजी 70 रडार सिस्टम हवा और जमीन दोनों प्रकार के लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। इसके साथ ही एलएएनटीआईआरएन सिस्टम लो एल्टीट्यूड नेविगेशन एंड टारगेटिंग इंफ्रारेड इसे अत्यंत कम ऊंचाई पर उड़ान भरने और खराब मौसम या रात के समय भी सटीक हमले करने की सुविधा देता है। यह सिस्टम पायलट को जमीन के करीब सुरक्षित उड़ान भरने में मदद करता है, जिससे मिशन अधिक प्रभावी बनते हैं।

    प्रदर्शन के मामले में भी एफ 15ई बहुत शक्तिशाली है। इसकी अधिकतम गति लगभग 1,875 मील प्रति घंटा मैक 2.5 से अधिक है और यह लगभग 60,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है। इसकी लंबी रेंज और भारी हथियार ले जाने की क्षमता इसे दुश्मन के गहरे इलाके में जाकर भी हमला करने में सक्षम बनाती है।

    हथियारों की बात करें तो एफ 15ई में 20 मिमी की आंतरिक तोप लगी होती है। इसके अलावा यह एम 9 साइडवाइंडर और एम 120 अमराम जैसी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी ले जा सकता है। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के प्रिसिजन गाइडेड और पारंपरिक बमों को भी वाहन कर सकता है, जो इसे बहु भूमिका फाइटर बनाते हैं।

    एफ 15ई स्ट्राइक ईगल का निर्माण अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने किया है। शुरुआत में इसकी कीमत लगभग 31 मिलियन डॉलर थी, लेकिन आधुनिक अपग्रेड और तकनीकी सुधारों के साथ इसकी कीमत बढ़कर लगभग 100 मिलियन डॉलर हो गई है। यूएस एयरफोर्स के अनुसार इसकी लंबी रेंज, भारी पेलोड क्षमता और मिशन पूरा करते समय सुरक्षा इसे अमेरिकी वायुसेना की एक प्रमुख ताकत बनाती है।

    इसलिए, चाहे ईरान का दावा सही हो या नहीं, एफ 15ई स्ट्राइक ईगल अपने आधुनिक रडार, हथियार प्रणाली और उड़ान प्रदर्शन के कारण दुनिया के सबसे खतरनाक और भरोसेमंद लड़ाकू विमानों में शुमार है।

  • हनीमून के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन 2026: प्यार भरे सफर के लिए ये लोकेशन्स चुनें

    हनीमून के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन 2026: प्यार भरे सफर के लिए ये लोकेशन्स चुनें


    नई दिल्ली। इस समय का मौसम अभी ठीक-ठाक है ना तो ज्यादा गर्मी लग रही है ना ही ठंडा है। इस मौसम में इस मौसम में अगर आप घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आराम से घूम सकते हैं या फिर अगर आप हनीमून जा रहे हैं तब आप बिना कुछ सोच भारत की कुछ जगहों पर जा सकते हैं जहां आपको काफी अच्छा अनुभव होगा। अगर आपको उन जगहों के बारे में नहीं पता है तो चलिए आपको इस खबर में उन जगहों के बारे में बताते हैं जहां जाकर आप अपनी अच्छी यादें बना सकते हैं।

    हिमाचल प्रदेश जाना रहेगा बेस्ट
    हिमाचल प्रदेश में अगर आप हनीमून ट्रिप प्लान करने की सोच रहे हैं। तो आपको एक बार डलहौजी की खूबसूरती को देखने आना चाहिए। बता दें कि डलहौजी में ही ‘मिनी स्विट्जरलैंड ऑफ इंडिया’ के नाम से फेमस खजियार मौजूद है। यहां पर आप अच्छा पल बिता सकते हैं। यहां पर आपको चारों तरफ हरियाली पहाड़ देखने को मिल जाएंगे यहां पर आप अपने कमरे में भी काफी अच्छी-अच्छी तस्वीर कैप्चर कर सकते हैं इसके साथ ही अपने पार्टनर के साथ यहां घूमने के लिए काफी कुछ है।

    इस मौसम में शिमला भी रहेगा बेस्ट
    अप्रैल के महीने में शिमला जाना भी काफी अच्छा ऑप्शन हो सकता है। शिमला में आपको काफी कुछ घूमने को मिल जाएगा। शिमला से कुछ ही दूर पर मौजूद मसूरी भी घूमने के लिए काफी अच्छी जगह मानी जाती है हनीमून के लिए यह जगह परफेक्ट हो सकती है। यह जगह काफी अच्छी मानी जाती है यहां पर काफी ज्यादा पर्यटक आते हैं।

    इस मौसम में शिमला भी रहेगा बेस्ट
    अप्रैल के महीने में शिमला जाना भी काफी अच्छा ऑप्शन हो सकता है। शिमला में आपको काफी कुछ घूमने को मिल जाएगा। शिमला से कुछ ही दूर पर मौजूद मसूरी भी घूमने के लिए काफी अच्छी जगह मानी जाती है हनीमून के लिए यह जगह परफेक्ट हो सकती है। यह जगह काफी अच्छी मानी जाती है यहां पर काफी ज्यादा पर्यटक आते हैं।

  • 4 अप्रैल जन्म वाले जातकों के लिए विशेष राशिफल, सत्ता और सफलता के नए अवसर

    4 अप्रैल जन्म वाले जातकों के लिए विशेष राशिफल, सत्ता और सफलता के नए अवसर


    नई दिल्ली । 4 अप्रैल को जन्म लेने वाले जातकों के लिए यह वर्ष विशेष अवसर और चुनौतियों से भरा होने वाला है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आपका नया वर्ष शनिवार 4 अप्रैल 2026 से शुरू होगा और सत्ता व्यापार और व्यक्तिगत संबंधों के क्षेत्र में उतार चढ़ाव लेकर आएगा। वर्ष की शुरुआत में सत्ता पक्ष और प्रशासन से जुड़े कार्यों में सफलता मिलने के योग हैं। सरकारी क्षेत्र से जुड़े जातकों या किसी सरकारी टेंडर की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के लिए यह समय लाभकारी रहेगा। परिवार के भीतर भाइयों और करीबी रिश्तेदारों का सहयोग व्यापार और व्यवसाय में विशेष वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।

    साल के मध्य में सावधानी की आवश्यकता है। राजनीति में सक्रिय जातकों को अधिक परिश्रम करना होगा और इस वजह से शारीरिक और मानसिक थकान महसूस हो सकती है। मित्रों या परिचितों के साथ छोटे वाद विवाद भी बड़े तनाव का कारण बन सकते हैं। ऐसे समय में संयम और समझदारी बनाए रखना आवश्यक है।

    वर्ष के अंतिम चरण में परिस्थितियां फिर से आपके नियंत्रण में आ जाएंगी। अटके हुए शासन या प्रशासनिक कार्य पूरे होंगे और आर्थिक लाभ की स्थिति बनेगी। स्वजनों का सहयोग मिलेगा और कुछ महत्वपूर्ण अनुबंध भविष्य के लिए मजबूत नींव साबित होंगे।

    विशेष राशियों के लिए यह वर्ष अलग अलग क्षेत्रों में अलग अवसर लेकर आएगा। मेष और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह समय साहसिक निवेश और नवीन योजनाओं के लिए उपयुक्त है। इन राशियों के लोग अपनी योजनाओं में पूंजी निवेश करेंगे और लंबी अवधि में इसका बड़ा लाभ उठा सकते हैं।

    वृष और तुला राशि के जातकों के लिए शासन प्रशासन और कानूनी मामलों में सफलता मिलने के संकेत हैं। सरकारी योजनाओं या अनुबंधों में लाभ प्राप्त होगा। कर्क राशि के जातकों को सत्ता पक्ष से मानसिक संतोष और सुख मिलेगा। सिंह राशि वाले जातक अपने परिवार और स्वजनों के सहयोग से व्यापारिक अनुबंध करने में सफल रहेंगे।

    मकर और कुम्भ राशि के जातकों के लिए यह वर्ष आराम का नहीं बल्कि कड़ी मेहनत का रहेगा। हर कार्य को सिद्ध करने के लिए उन्हें अत्यधिक परिश्रम करना होगा और यही मेहनत उनकी सफलता का आधार बनेगी। धनु और मीन राशि के जातकों को वर्ष के दौरान मानसिक तनाव और मित्रों के साथ हुए वाद विवाद से बचना होगा। सकारात्मक ऊर्जा का सही उपयोग लाभकारी रहेगा।

    मिथुन और कन्या राशि वाले जातकों के लिए दैनिक कार्यों में व्यस्तता अधिक रहेगी। लक्ष्य प्राप्ति के लिए उन्हें सामान्य से अधिक भागदौड़ करनी पड़ेगी लेकिन संयम और लगन से वे अपने उद्देश्यों में सफलता प्राप्त करेंगे।

    इस प्रकार 4 अप्रैल जन्म वाले जातकों के लिए यह वर्ष नए अवसर चुनौतियों और लाभकारी परिणामों से भरा रहेगा। सही दिशा में प्रयास और संयम के साथ कार्य करने से सत्ता व्यापार और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन और सफलता प्राप्त होगी।

  • शनि देव को प्रसन्न करने का आसान उपाय: शनिवार का व्रत और पूजा विधि पूरी जानकारी

    शनि देव को प्रसन्न करने का आसान उपाय: शनिवार का व्रत और पूजा विधि पूरी जानकारी


    नई दिल्ली।क्या आप भी शनिवार का व्रत रखने का सोच रहे हैं? तो जानिए कब और कैसे शुरू करें
    शनि देव को प्रसन्न करने के लिए रखना चाहिए शनिवार का व्रत, जानिए कब रखना चाहिए ये व्रत और कैसे करें शुरू इससे जुड़ी सारी जानकारी।

    शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन लोग उनकी पूजा अर्चन करते है। कई लोग आज के दिन व्रत भी रखते हैं ताकि उनकी कृपा पा सकें। अगर आप भी शनिवार का व्रत रखना चाहते हैं और ये समस्या आ रही हैं कि, इसकी शुरूआत कैसे करें। तो चलिए इस व्रत से जुड़ी सारी जानकारी आपको बताते हैं।

    कब से शुरू करें व्रत
    शनिवार का व्रत किसी भी शनिवार से शुरू किया जा सकता है, लेकिन शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार से आरंभ करना अधिक शुभ माना जाता है। व्रत शुरू करने से पहले मन में संकल्प लेना चाहिए कि आप कितने शनिवार तक व्रत रखेंगे आमतौर पर 11, 21 या 51 शनिवार का व्रत रखा जाता है।

    व्रत के दिन की पूजा विधि
    व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे काले या नीले रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद शनि देव की पूजा करें। पूजा के दौरान शनि देव की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों का तेल चढ़ाएं, काले तिल अर्पित करें और दीपक जलाएं। इसके साथ ही “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना बेहद फलदायी माना जाता है।शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।

    व्रत का महत्त्व
    शनिवार का व्रत नियमित रूप से करने से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और मानसिक शांति मिलती है। शनि देव की कृपा से व्यक्ति को न्याय, सफलता और स्थिरता प्राप्त होती है। इसलिए श्रद्धा और नियम से यह व्रत करने से अच्छे फल मिलते हैं।

    शनि देव की आरती
    जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
    सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

    जय जय श्री शनिदेव…॥

    श्याम अंग वक्र दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
    नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

    जय जय श्री शनिदेव…॥

    क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है ललाट।
    मुक्तन की माला गले शोभित बलिहाट॥

    जय जय श्री शनिदेव…॥

    मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
    लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

    जय जय श्री शनिदेव…॥

    देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
    विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥

    जय जय श्री शनिदेव…॥

  • अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बंपर रेट बढ़ोतरी! 60k टिकट हुआ 1.5 L, यात्रियों के लिए अलर्ट

    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बंपर रेट बढ़ोतरी! 60k टिकट हुआ 1.5 L, यात्रियों के लिए अलर्ट


    नई दिल्ली। इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराये में भारी उछाल, ₹60 हजार का टिकट अब ₹1.5 लाख के पार। दिल्ली से लंदन, दुबई और न्यूयॉर्क की उड़ानें महंगी। पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-इज़राइल-अमेरिका तनाव का असर अब हवाई यात्रा पर साफ दिखने लगा है। कई देशों के एयरस्पेस बंद होने की वजह से एयरलाइंस को लंबा रूट अपनाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई है और टिकट की कीमतों में भारी उछाल आया है।

    दिल्ली से लंदन का किराया दोगुने से ज्यादा
    दिल्ली से London जाने वाली फ्लाइट्स के किराये में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है। मौजूदा समय में इकोनॉमी क्लास का नॉन-स्टॉप टिकट करीब ₹1.49 लाख तक पहुंच गया है, जबकि बिज़नेस क्लास का किराया ₹1.79 लाख तक जा चुका है। पहले यही टिकट ₹45,000 से ₹65,000 के बीच मिल जाता था, यानी अब कीमत दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। सिर्फ लंदन ही नहीं, Dubai और New York City जाने वाली फ्लाइट्स के किराये भी तेजी से बढ़े हैं। दिल्ली-दुबई का इकोनॉमी टिकट अब ₹28,000 से ऊपर पहुंच गया है, जो पहले ₹12,000 से ₹20,000 के बीच होता था। वहीं दिल्ली-न्यूयॉर्क का किराया ₹1.26 लाख से लेकर ₹2 लाख से ज्यादा तक पहुंच गया है, जबकि सामान्य दिनों में यह ₹55,000 से ₹80,000 के बीच रहता था।

    ATF और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल
    किराये में इस बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उछाल भी है। ATF के दाम $85-90 प्रति बैरल से बढ़कर $150-200 प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड ऑयल भी $72 से बढ़कर $105 प्रति बैरल हो गया है, जिससे एयरलाइंस की लागत और बढ़ गई है।

    यूरोप रूट पर फ्लाइट्स रद्द और किराया बढ़ा
    यूरोप जाने वाली उड़ानों पर भी इस संकट का असर पड़ा है। मार्च के शुरुआती हफ्तों में 700 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द हुईं और किराये में 40% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मौजूदा हालात में इंटरनेशनल हवाई यात्रा काफी महंगी हो गई है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में किराये और भी बढ़ सकते हैं, जिससे यात्रियों की जेब पर और बोझ पड़ना तय है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने हवाई यात्रा को काफी महंगा बना दिया है। अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले समय में इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराये और भी बढ़ सकते हैं। यात्रियों को फिलहाल यात्रा से पहले किराये और रूट की अच्छी तरह जांच करने की सलाह दी जा रही है।

  • वैशाख मास के दिव्य उपाय जो बदल दें आपकी किस्मत और भर दें जीवन में सुख समृद्धि

    वैशाख मास के दिव्य उपाय जो बदल दें आपकी किस्मत और भर दें जीवन में सुख समृद्धि


    नई दिल्ली । वैशाख मास सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में इस शुभ महीने की शुरुआत 3 अप्रैल से हो चुकी है और यह 1 मई तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा जप और दान करने से अनेक गुना फल प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस दौरान किया गया साधना और सेवा का कार्य हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर पुण्य देता है। यही कारण है कि इस माह को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वैशाख मास में कुछ विशेष उपाय अपनाने से जीवन के कई क्षेत्रों में सुधार संभव है। यदि कोई व्यक्ति अपने घर में सुख समृद्धि बढ़ाना चाहता है तो उसे प्रतिदिन भगवान विष्णु को तुलसी पत्र के साथ शहद अर्पित करना चाहिए और उनके माधव अनंत और अच्युत स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। ऐसा करने से घर का वातावरण शांत और समृद्ध बनता है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

    अगर जीवन में शत्रुओं या विरोधियों की समस्या अधिक है तो इस मास में भगवान विष्णु के माधव के साथ केशव और दामोदर स्वरूप का ध्यान करना लाभकारी माना गया है। तुलसी दल से विधिपूर्वक पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और शत्रु स्वतः ही दूर होने लगते हैं। इसके साथ ही जीवन में सच्चे मित्रों का साथ भी मिलने लगता है।

    जो लोग प्रतियोगी परीक्षाओं या किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा में सफलता पाना चाहते हैं उन्हें वैशाख मास में भगवान विष्णु के माधव पद्मनाभ और हृषिकेष स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। भगवान को गंध और तुलसी पत्र अर्पित करने से मन एकाग्र होता है और सफलता के मार्ग खुलते हैं। यह उपाय आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है।

    दाम्पत्य जीवन को सुखद और मधुर बनाने के लिए इस पवित्र महीने में माधव श्रीधर और पद्मनाभ स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। तुलसी पत्र के साथ मिठाई या मिश्री अर्पित करने से पति पत्नी के बीच प्रेम और समझ मजबूत होती है और संबंधों में मधुरता आती है।

    आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए वैशाख मास में माधव गोविंद और नारायण स्वरूप की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। भगवान को आटे की पंजीरी में तुलसी दल मिलाकर भोग लगाने से धीरे धीरे धन लाभ के योग बनते हैं और आर्थिक स्थिरता आती है।

    इस प्रकार वैशाख मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सफल बनाने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए ये छोटे छोटे उपाय जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से हर क्षेत्र में उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

  • दिव्या भारती और श्रीदेवी की जिंदगी में छुपा है चौंकाने वाला कनेक्शन, मौत और फिल्म ‘लाडला’ तक का राज

    दिव्या भारती और श्रीदेवी की जिंदगी में छुपा है चौंकाने वाला कनेक्शन, मौत और फिल्म ‘लाडला’ तक का राज


    नई दिल्ली।80 और 90 के दशक में श्रीदेवी हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार थीं। उनकी खूबसूरती और अदाकारी के दीवाने पूरे देश में थे। 1992 में जब दिव्या भारती ने बॉलीवुड में कदम रखा, तो दर्शकों और इंडस्ट्री में उनकी तुलना श्रीदेवी से होने लगी। दोनों की शक्ल, बड़ी आंखें और कर्ली बाल इतने मिलते-जुलते थे कि दिव्या को ‘मिनी श्रीदेवी’ कहा जाने लगा।

    पहली मुलाकात और हॉलीवुड जैसी तारीखें

    दिव्या और श्रीदेवी की पहली मुलाकात केवल एयरपोर्ट पर हुई थी, जहां उन्होंने सिर्फ ‘हाय’ कहा। लेकिन उनके जीवन में संयोग और भी दिलचस्प थे। दिव्या का जन्म 25 फरवरी को हुआ और श्रीदेवी की मौत 24 फरवरी को, यानी दिव्या के जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले।

    दुखद मौतें और रहस्य

    दिव्या भारती की मौत चौथी मंजिल से गिरने से हुई, लेकिन इसे लेकर आज तक रहस्य बना हुआ है कि यह हादसा था या हत्या। उनके पति और निर्माता साजिद नाडियाडवाला भी शक के घेरे में रहे। श्रीदेवी की अचानक बाथटब में डूबने और कार्डियक अरेस्ट से हुई मौत ने भी देश को हिला दिया। उनके पति और निर्माता बोनी कपूर पर भी शक जताया गया, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

    ‘लाडला’ फिल्म का कनेक्शन

    फिल्म ‘लाडला’ भी दोनों की जिंदगी से जुड़ी है। शुरुआत में इसे दिव्या भारती अनिल कपूर के साथ करने वाली थीं और शूटिंग का आधा हिस्सा पूरा हो चुका था। दिव्या की मौत के बाद यह फिल्म श्रीदेवी के हाथ में चली गई। दोनों का लुक, डायलॉग और अंदाज इतना समान था कि सेट पर लोग दंग रह जाते थे।

    करियर और निजी जिंदगी में समानताएं

    दोनों ने दक्षिण भारतीय फिल्मों से करियर की शुरुआत की और बाद में बॉलीवुड पर राज किया। इसके अलावा, दोनों ने फिल्म निर्माता से शादी की थी। इस तरह उनके जीवन और करियर में कई अनजाने और रहस्यमय संयोग देखने को मिलते हैं।

    दिव्या भारती और श्रीदेवी के जीवन में संयोग और समानताएं लगातार नजर आती हैं—जन्म और मौत की तारीख, फिल्म ‘लाडला’, करियर की शुरुआत और निजी जीवन। हालांकि दोनों की मौत ने बॉलीवुड को हिला दिया, उनके योगदान और यादें आज भी जीवंत हैं।

  • सफर से सिनेमा तक! दिल्ली-मुंबई यात्रा में मनोज कुमार ने जन्म दी ‘उपकार’ की कहानी

    सफर से सिनेमा तक! दिल्ली-मुंबई यात्रा में मनोज कुमार ने जन्म दी ‘उपकार’ की कहानी


    नई दिल्ली।आज हम याद कर रहे हैं मनोज कुमार को, जिनकी पुण्यतिथि है। उन्हें देशभक्ति और किसान-जवान-कहानी कहने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता था। फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जाना गया।

    बचपन से संघर्ष और अभिनय की राह

    मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को ऐबटाबाद में हुआ था। असली नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था। 1947 के बंटवारे के समय उनका परिवार दिल्ली आ गया और शरणार्थी कैंप में रहने लगा। बचपन से ही वे दिलीप कुमार के बड़े प्रशंसक थे और उनकी नकल किया करते थे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने सिलाई मशीन का काम भी किया।

    मुंबई की शुरुआत और पहले सफलता

    अभिनय का सपना लेकर मनोज कुमार मुंबई पहुंचे। साल 1957 में फिल्म ‘फैशन’ से उन्होंने शुरुआत की। पांच साल बाद विजय भट्ट की ‘हरियाली और रास्ता’ से उन्हें पहली बड़ी सफलता मिली। 1965 में आई ‘हिमालय की गोद में’ ने उन्हें और मजबूती दी।

    उसी साल उन्होंने भगत सिंह पर फिल्म ‘शहीद’ बनाने का फैसला किया। प्रेम चोपड़ा और गीतकार प्रेम धवन के साथ यह फिल्म भगत सिंह के जीवन पर सबसे प्रामाणिक मानी गई।

    ‘उपकार’ की रचना: दिल्ली से मुंबई की ट्रेन में

    मनोज कुमार के करियर में दो पहलू थे रूमानी नायक और देशभक्ति से ओत-प्रोत ‘भारत कुमार’। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उनसे कहा था, “क्या मेरे नारे ‘जय जवान जय किसान’ पर फिल्म नहीं बन सकती?”

    दिल्ली से मुंबई लौटते समय मनोज कुमार ने रजिस्टर और नए पेन खरीदे और ट्रेन की यात्रा में कहानी लिख डाली। दिल्ली से मुंबई पहुंचते-पहुंचते फिल्म ‘उपकार’ की पूरी कहानी तैयार हो गई।

    गाने की पृष्ठभूमि: ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’

    ‘उपकार’ के गानों में सबसे खास है ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’। गीतकार गुलशन बावरा रेलवे में क्लर्क थे और पंजाब से आने वाली गेहूं की बोरियां उतारते समय उनकी डायरी में यह पंक्ति दर्ज हुई। बाद में मनोज कुमार ने इसे फिल्म में शामिल किया। महेंद्र कपूर की आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया।

    बाद की उपलब्धियां

    1970 में मनोज कुमार ने ‘पूरब और पश्चिम’ बनाई, जो भारतीय परंपरा और पश्चिमी संस्कृति के टकराव पर आधारित थी। यह फिल्म भी खूब सराही गई।

    मनोज कुमार ने देशभक्ति और आम आदमी की कहानियों को पर्दे पर जीवंत किया। ट्रेन में लिखी ‘उपकार’ की कहानी और ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’ जैसे गाने आज भी उनके योगदान की याद दिलाते हैं।

  • Dhurandhar के ‘रहमान डकैत’ रोल पर हुआ ड्रामा! तीन स्टार्स ने कहा ‘ना’, कास्टिंग डायरेक्टर ने सब बताया


    नई दिल्ली। फिल्म जगत में अक्सर देखा जाता है कि कई ऐसी फिल्में होती हैं जो बड़े-बड़े सेलेब्स को ऑफर की जाती है।लेकिन उनमें से कई उसे ठुकरा देते हैं। बीते साल 2025 के दिसंबर में रिलीज हुई फिल्म Dhurandhar ने काफी तबाही मचाई थी इस फिल्म ने काफी अच्छा खासा कलेक्शन किया था। इस फिल्म में Ranveer Singh और Akshaye Khanna की बेहतरीन एक्टिंग देखने को मिला था। आज भी इसका दूसरा पार्ट लगातार सिनेमाघरों में तूफान लेकर आया है और जबरदस्त कलेक्शन करता जा रहा है।

    रहमान डकैत के किरदार में छाए थे अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna)
    आपको बता दें, इसके पहले पार्ट में अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna) ने रहमान डकैत का किरदार निभाया था इसलिए उनकी काफी तारीफ हुई लोगों ने उन्हें काफी पसंद किया। अक्षय खन्ना ने अब तक कई बेहतरीन फिल्में की है लेकिन इस फिर मैं उनके करियर में चार चांद लगा दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं इस फिल्म में इस किरदार को उनसे पहले कई बड़े एक्टर्स को ऑफर किया गया था लेकिन उन्होंने इस किरदार को करने से मना कर दिया था अब इसका खुलासा फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर ने खुद किया है।

    तीन कलाकारों ने ठुकराया था यह किरदार
    हाल ही में फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर ने इस बारे में दिलचस्प खुलासा किया है, जिसने फैंस को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉलीवुड हंगामा के साथ एक इंटरव्यू में कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने बताया कि रहमान डकैत का रोल पहले तीन अलग-अलग एक्टर्स को ऑफर किया गया था, लेकिन सभी ने इसे करने से मना कर दिया। इनमें से एक एक्टर साउथ इंडस्ट्री से थे और दो बॉलीवुड के थे. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने बताया कि सब ने यह कहकर मना कर दिया कि यह फिल्म रणवीर सिंह की है तो इसमें उनका किरदार उतना खास नहीं दिखेगा।

    डायरेक्टर ने अक्षय खन्ना की तारीफ की
    इसके बाद उन्होंने अक्षय खन्ना के बारे में सोचा। खास बात ये रही कि अक्षय ने तुरंत स्क्रिप्ट सुनी और एक ही दिन में फिल्म के लिए हां कर दी। मुकेश ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि अक्षय उन कलाकारों में से हैं, जो दिल से फैसले लेते हैं।

    फिल्म की कहानी किरदार
    धुरंधर’ की कहानी कराची के लयारी इलाके पर है, जो अपराध के लिए जाना जाता है. फिल्म में अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया. वहीं रणवीर सिंह एक स्पाई एजेंट के रोल में दिखे, जो पाकिस्तान में घुसकर मिशन को अंजाम देता है। फिल्म में अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन और राकेश बेदी भी नजर आए हैं। ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था।

  • राज कपूर के एक बयान से टूटा सपना लता ने छोड़ी फिल्म जो बाद में बनी ब्लॉकबस्टर

    राज कपूर के एक बयान से टूटा सपना लता ने छोड़ी फिल्म जो बाद में बनी ब्लॉकबस्टर


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो समय के साथ और भी दिलचस्प हो जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी जुड़ी है सुरों की मलिका लता मंगेशकर और शोमैन राज कपूर की महत्वाकांक्षी फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम से। यह फिल्म साल 1978 में रिलीज हुई और अपने अनोखे विषय और प्रस्तुति के कारण सुपरहिट साबित हुई लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म के लिए पहली पसंद जीनत अमान नहीं बल्कि खुद लता मंगेशकर थीं।

    फिल्म की कहानी रूपा नाम की एक ऐसी लड़की के इर्दगिर्द घूमती है जिसका चेहरा बचपन में जल जाता है लेकिन उसकी आवाज इतनी मधुर होती है कि हर कोई उसका दीवाना बन जाता है। राज कपूर ने इस किरदार की कल्पना एक साधारण चेहरे और दिव्य आवाज वाली महिला के रूप में की थी और उनके मन में इस छवि के लिए लता मंगेशकर बिल्कुल फिट बैठती थीं। यही वजह थी कि वह उन्हें इस फिल्म में कास्ट करना चाहते थे और यह किरदार उनके इर्दगिर्द ही गढ़ा गया था।

    लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब राज कपूर का एक बयान गलत तरीके से लिया गया। उन्होंने सुंदरता को लेकर एक दार्शनिक बात कही थी जिसमें उन्होंने यह समझाने की कोशिश की थी कि असली सुंदरता बाहरी रूप में नहीं बल्कि दृष्टिकोण में होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी कभी बेहद खूबसूरत आवाज सुनने के बाद जब हम उस व्यक्ति को देखते हैं तो वह हमारी कल्पना से अलग हो सकता है। इस बात को लता मंगेशकर से जोड़कर देखा गया और यह उन्हें बेहद चुभ गया।

    इस टिप्पणी ने उन्हें इतना आहत किया कि उन्होंने फिल्म में काम करने से साफ इनकार कर दिया। बात यहीं नहीं रुकी उन्होंने फिल्म के लिए गाना गाने से भी मना कर दिया जो अपने आप में एक बड़ा झटका था क्योंकि उनकी आवाज इस कहानी की आत्मा मानी जा रही थी। राज कपूर और संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल थी क्योंकि फिल्म की परिकल्पना ही लता की आवाज के इर्दगिर्द बनी थी।

    हालांकि बाद में काफी मनाने और समझाने के बाद लता मंगेशकर इस बात के लिए राजी हुईं कि वह फिल्म का टाइटल ट्रैक गाएंगी। उनके गाए इस गीत ने फिल्म को एक अलग ही ऊंचाई दी और आज भी वह गाना लोगों के दिलों में खास जगह रखता है।

    दूसरी ओर फिल्म में रूपा का किरदार जीनत अमान को मिला और उन्होंने अपने अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस से इस भूमिका को यादगार बना दिया। उनके साथ शशि कपूर की जोड़ी ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता बनकर उभरी।

    यह घटना न केवल फिल्म इतिहास का एक दिलचस्प अध्याय है बल्कि यह भी दिखाती है कि कभी कभी एक छोटी सी बात किस तरह बड़े फैसलों को प्रभावित कर देती है। अगर उस वक्त हालात अलग होते तो शायद यह फिल्म और इसकी पहचान कुछ और ही होती लेकिन यही अनिश्चितता सिनेमा को इतना खास बनाती है।