पोषक तत्वों से भरपूर
डायबिटीज नियंत्रण में सहायक
घाव और सूजन में फायदेमंद
इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार
उपयोग से पहले रखें सावधानी

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समारोह के दौरान एंकर हर्षा भोगले ने वैभव सूर्यवंशी, हार्दिक पांड्या, संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा के साथ एक मजेदार रैपिड-फायर राउंड खेला। बातचीत के दौरान जब अभिषेक से उनकी पसंदीदा फिल्म और एक्टर के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “मेरी पसंदीदा फिल्म 3 इडियट्स है। मुझे यह फिल्म बहुत पसंद आई। फेवरेट एक्टर समय के साथ बदलते रहते हैं।”
यह बयान दर्शाता है कि आमिर खान की फिल्मों का प्रभाव सिर्फ आम जनता पर ही नहीं, बल्कि क्रिकेटरों और अन्य सार्वजनिक हस्तियों पर भी गहरा है। अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ी भी आमिर खान की फिल्मों के दीवाने हैं। 2009 में 55 करोड़ रुपये के बजट में बनी और बॉक्स ऑफिस पर लगभग 400 करोड़ रुपये कमाने वाली 3 इडियट्स आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखती है।
आमिर खान की फिल्मों की खासियत यह है कि वे मनोरंजन के साथ-साथ संदेश भी देती हैं। चाहे लगान, तारे जमीन पर या पीके जैसी फिल्में हों, इनकी कहानी और प्रदर्शन दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। यही कारण है कि क्रिकेटर्स जैसे अभिषेक शर्मा भी अपनी फिल्मों की पसंद में आमिर खान को सबसे ऊपर रखते हैं।
इस बीच, आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनने वाली नई फिल्म एक दिन भी चर्चा में है। इस फिल्म में साई पल्लवी और जुनैद खान लीड रोल में होंगे, जबकि निर्देशन सुनील पांडे का है। फिल्म के प्रोड्यूसर्स आमिर खान, मंसूर खान और अपर्णा पुरोहित हैं। यह फिल्म 1 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है।
अभिषेक शर्मा के बयान से यह साफ हो गया है कि क्रिकेट और बॉलीवुड के बीच एक खास रिश्ता है। खिलाड़ी केवल खेल के मैदान में ही नहीं, बल्कि मनोरंजन की दुनिया में भी आम जनता के साथ जुड़ते हैं। आमिर खान की फिल्मों की लोकप्रियता और उनका संदेशात्मक कंटेंट आज भी लोगों के दिलों को छूता है।
इस तरह यह कार्यक्रम और अभिषेक शर्मा का खुलासा दर्शाता है कि बड़े सुपरस्टार्स और उनके काम का प्रभाव जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों तक फैलता है। क्रिकेट और फिल्म उद्योग के इस संगम ने फैंस के लिए एक नई प्रेरणा और चर्चा का विषय भी पेश किया है।

गाने को मंगली ने गाया है, रकीब आलम ने लिखा है और संगीत अर्जुन जान्या का है। शुरुआत में गाना सामान्य लगता है, लेकिन जैसे-जैसे गीत आगे बढ़ता है, इसके बोल सीधे-सीधे अश्लील और स्पष्ट हो जाते हैं। कई यूजर्स का कहना है कि गाने में डबल मीनिंग की बजाय स्पष्ट अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिसे सोशल मीडिया पर बर्दाश्त नहीं किया जा रहा।
नोरा फतेही ने गाने में अपनी एनर्जेटिक डांसिंग दिखाई है, जिसमें पल्लू गिराने जैसे स्टेप्स शामिल हैं। संजय दत्त भी खलनायक वाले अंदाज में डांस करते दिखाई देते हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे भोजपुरी गानों से भी घटिया बताया और आलोचना का स्तर काफी बढ़ गया। इससे पहले कुछ दिन पहले बादशाह के गाने टटीरी को लेकर भी इसी तरह का विवाद उठ चुका था।
फिल्म केडी- द डेविल कन्नड़ सिनेमा की बड़ी परियोजना है और इसे पैन-इंडिया स्तर पर रिलीज किया जाएगा। फिल्म में ध्रुव सरजा लीड रोल में हैं, जबकि शिल्पा शेट्टी, वी रविचंद्रन और अन्य कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। गाने और फिल्म के निर्देशन का काम प्रेम ने किया है।
यह गाना पांच भाषाओं में रिलीज किया गया है, और इसे पार्टी एंथम बनाने की कोशिश की गई थी। हालांकि, सोशल मीडिया पर आलोचना ने इसे सुर्खियों में ला दिया। कई लोगों ने नोरा फतेही की डांसिंग और गाने के बोल को अशोभनीय बताया है, जिससे फिल्म रिलीज से पहले ही विवाद का सामना कर रही है।
फिल्म की रिलीज़ तारीख 30 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। इस गाने के वायरल होने और आलोचना में आने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि मेकर्स इसे किस तरह संभालते हैं। गाने और फिल्म की यह प्रतिक्रिया बॉलीवुड में अश्लीलता और सेंसरशिप के मुद्दे पर नई बहस को जन्म दे सकती है। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पैन-इंडिया रिलीज़ वाले बड़े प्रोजेक्ट्स में दर्शकों की संवेदनाओं और सांस्कृतिक सीमाओं का कितना ध्यान रखा जाना चाहिए।

पुलिस के अनुसार, रुद्र 12 मार्च को घर से निकला था। उसने अपने पत्र में भावुक शब्दों में लिखा था: “मैं रुद्र पांडेय आ रहा हूं महाराज जी, आपके चरणों में। मैं अपने असली परिवार के पास जा रहा हूं। मम्मी-पापा मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना। आपके साथ मेरा जीवन पूरा हो गया, अब मैं चलता हूं।”
छात्र ने पुलिस को बताया कि वह सोशल मीडिया पर संतों के प्रवचन और रील्स देखता था और उन्हीं से प्रभावित होकर आध्यात्मिक खोज में घर छोड़कर निकला। रुद्र ने अपने परिवार को पत्र में यह भी लिखा कि उसके जाने का कारण आध्यात्मिक मार्ग की तलाश है और वे उसे ढूंढने की कोशिश न करें।
रुद्र ने घर से निकलते समय लगभग ₹500 अपने साथ लिए थे। उसने पत्र में लिखा था कि पैसे उसके दोस्त के पास हैं और बाद में माता-पिता को लौटवा दिए जाएंगे। बेटे के अचानक गायब होने और पत्र मिलने से परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने तुरंत खजराना थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
तलाश के दौरान पुलिस को शक था कि रुद्र वृंदावन की ओर गया होगा। इसी बीच, किशोर ने अपने पिता को फोन किया और आधार कार्ड की जरूरत बताई, जिससे पुलिस को उसकी लोकेशन पता चली। इसके बाद इंदौर पुलिस ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग पुलिस की मदद से उसे गुप्तकाशी क्षेत्र से बरामद किया।
बरामदगी के बाद रुद्र को उसके माता-पिता को सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किशोर पूरी तरह सुरक्षित है और अब उसे काउंसलिंग के माध्यम से समझाइश दी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन वीडियो किशोरों पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। रुद्र के इस प्रकरण ने यह दिखाया कि माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की मानसिक स्थिति और डिजिटल आदतों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

दरअसल, सनराइजर्स ग्रुप की टीम सनराइजर्स लीड्स ने इंग्लैंड की क्रिकेट लीग द हंड्रेड (The Hundred) 2026 के ऑक्शन में पाकिस्तानी स्पिनर अब्रार अहमद को £190,000 यानी लगभग 2.32 करोड़ रुपये में खरीदा। इस फैसले के बाद गावस्कर ने सोशल मीडिया और अपने कॉलम के जरिए स्पष्ट किया कि यह कदम भारतीय संवेदनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अनुचित है।
गावस्कर ने कहा कि जब कोई भारतीय मालिक किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को पैसा देता है, तो उस राशि का एक हिस्सा टैक्स के रूप में वहां की सरकार को जाता है। यह पैसा अंततः हथियार खरीदने में इस्तेमाल हो सकता है, जिससे सीमा पर भारतीय सैनिकों और नागरिकों की जान को खतरा पैदा होता है। उन्होंने तर्क दिया कि क्या किसी टूर्नामेंट को जीतना भारतीय जिंदगियों की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी है, जिसे दुनिया के केवल कुछ देश खेलते हैं।
पूर्व दिग्गज ने टीम के कोच डेनियल विटोरी पर कोई आरोप नहीं लगाया, लेकिन मालिकों सन टीवी नेटवर्क और काव्या मारन की समझ पर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2008 के मुंबई हमलों के बाद आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बैन लगा हुआ है। दक्षिण अफ्रीका की SA20 लीग में भी सभी टीमों के भारतीय मालिक होने के बावजूद कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं चुना गया। द हंड्रेड में चार अन्य भारतीय मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइजियों ने इस शैडो बैन का पालन किया, लेकिन सनराइजर्स लीड्स इसका अपवाद बन गई।
गावस्कर ने चेतावनी दी कि इस फैसले का असर आगामी आईपीएल सीजन में देखने को मिल सकता है। उनके अनुसार, सनराइजर्स हैदराबाद को अपने घरेलू और बाहरी मैचों के दौरान फैंस के भारी विरोध और प्रदर्शन का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने मैनजमेंट को सुझाव दिया कि अभी भी समय है और वे इस गलती को सुधार सकते हैं, अन्यथा टीम को खिलाड़ियों और प्रबंधन दोनों के लिए मुश्किल हालात का सामना करना पड़ सकता है।
इस विवाद ने टीम के लिए पहले ही से दबाव बढ़ा दिया है। फैंस, पूर्व खिलाड़ी और क्रिकेट विशेषज्ञ इस मामले पर लगातार अपनी राय दे रहे हैं। गावस्कर का गुस्सा केवल एक आलोचना नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है कि क्रिकेट में व्यापारिक निर्णय हमेशा भावनाओं, राष्ट्रीय हित और संवेदनाओं के संतुलन के साथ लेने चाहिए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सनराइजर्स हैदराबाद इस विवाद से कैसे निपटती है और क्या टीम आईपीएल 2026 में अपनी स्थिति को सुरक्षित रख पाएगी।

मोनालिसा के परिवार का कहना है कि वह अभी नाबालिग हैं। उनके चाचा विजय भोंसले के अनुसार मोनालिसा का जन्म वर्ष 2009 में हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया के दौरान उसके दस्तावेजों में उम्र बढ़ाकर दर्ज कर दी गई, जिससे बाद में शादी को कानूनी दिखाया जा सका। परिवार के एक सदस्य ने यह भी कहा कि फरमान पहले मोनालिसा को बहन कहकर संबोधित करता था और हिंदू प्रतीकों का भी इस्तेमाल करता था।
मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में मिश्रा ने कहा कि मध्यप्रदेश में राष्ट्रवादी सोच वाली सरकार है और उन्हें उम्मीद है कि राज्य नेतृत्व इस मामले को गंभीरता से देखेगा। मिश्रा ने आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम युवती को फंसाने का सुनियोजित तरीका है। उन्होंने बताया कि मोनालिसा को उनकी आगामी फिल्म “द डायरी ऑफ मणिपुर” में मुख्य भूमिका के लिए चुना गया था, जिसका विषय धर्म परिवर्तन से जुड़ा है। मिश्रा का कहना है कि इसी कारण उन्हें और उनकी सनातनी विचारधारा को निशाना बनाया गया।
उन्होंने आगे सवाल उठाया कि यह विवाह वामपंथी शासित राज्य केरल में ही करवाई गई, जबकि कोई अन्य राज्य क्यों नहीं चुना गया। मिश्रा ने कहा कि इस रिश्ते को मोनालिसा और फरहान के बीच सांप्रदायिक सौहार्द का उदाहरण बताकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि अगर लड़का हिंदू और लड़की मुस्लिम होती, तो क्या इसे इसी तरह प्रचारित किया जाता।
मुलाकात के दौरान मोनालिसा का परिवार भावुक नजर आया। उनकी दादी, बुआ, छोटी बहन और अन्य रिश्तेदारों ने इस पूरे विवाद को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त की। परिवार ने कहा कि इस घटना के कारण उन्हें समाज में अपमान का सामना करना पड़ रहा है।
फिल्म निर्देशक मिश्रा का कहना है कि अब परिवार को भी स्पष्ट हो गया है कि मोनालिसा का फंसाया जाना किसी संकल्पित स्क्रिप्ट की तरह किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने के बाद इस मामले में उचित कार्रवाई की उम्मीद जताई।

यह भूमिगत कॉरिडोर भोपाल रेलवे स्टेशन से नादरा बस स्टैंड तक लगभग 3.39 किलोमीटर लंबा होगा। इस हिस्से में मेट्रो ट्रेन के संचालन के लिए दो समानांतर सुरंगें बनाई जाएंगी। इंजीनियरों का कहना है कि यह चरण तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि सुरंग पुराने शहर के व्यस्त और संवेदनशील इलाकों से गुजरने वाली है।
TBM मशीन को दिसंबर 2025 में बेंगलुरु से भोपाल लाया गया था। मशीन कई हिस्सों में आती है जिन्हें क्रमिक रूप से जमीन के नीचे उतारकर असेंबल किया जाता है। पूरी तरह स्थापित होने के बाद यह मशीन लगभग 19 से 20 मीटर की गहराई पर सुरंग खोदने का काम शुरू करेगी। इसकी तकनीकी क्षमता प्रतिदिन लगभग 15 मीटर तक खुदाई करने की है।
परियोजना के तहत पुल पातरा और सिंधी कॉलोनी क्षेत्र में अंडरग्राउंड रैंप भी बनाए जाएंगे, जिससे मेट्रो ट्रेन सतह से भूमिगत स्टेशन तक आसानी से पहुंच सके। यह कार्य मेट्रो परियोजना के पैकेज BH-04 के अंतर्गत किया जा रहा है।
भोपाल के पुराने शहर में कई इमारतें दशकों पुरानी हैं और कुछ संरचनाएं अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती हैं। निर्माण कार्य के दौरान विशेष सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक भूमिगत तकनीक की मदद से ऊपर की इमारतों और सड़कों पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा और यातायात सामान्य रूप से चलता रहेगा।
तेजी से बढ़ती आबादी और यातायात दबाव को देखते हुए मेट्रो परियोजना को शहर के सार्वजनिक परिवहन के लिए अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमिगत कॉरिडोर तैयार होने के बाद पुराने भोपाल और नए शहर के बीच आवागमन अधिक तेज और सुगम होगा। इससे ट्रैफिक जाम कम होने और यात्रियों को समय की बचत होने की उम्मीद है।
मेट्रो परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि आगामी महीनों में सुरंग निर्माण की प्रगति के साथ अन्य चरणों पर भी तेजी से काम किया जाएगा। यदि कार्य तय समय के अनुसार चलता रहा तो आने वाले वर्षों में भोपाल को आधुनिक और बेहतर शहरी परिवहन प्रणाली मिल सकेगी।
भोपाल मेट्रो की यह प्रगति शहरवासियों के लिए बेहतर और सुविधाजनक आवागमन का संकेत है। भूमिगत तकनीक और सुरक्षित निर्माण पद्धति के संयोजन से यह परियोजना शहरी परिवहन में नए मानक स्थापित करेगी।

फिल्म की कहानी भारत-चीन सीमा पर हुए ऐतिहासिक गलवान घाटी संघर्ष से प्रेरित बताई जा रही है। यह घटना भारतीय सैनिकों की बहादुरी और साहस की मिसाल के रूप में जानी जाती है। हालांकि मेकर्स ने स्पष्ट किया है कि फिल्म किसी एक घटना का प्रत्यक्ष चित्रण नहीं होगी, बल्कि इसमें देशभक्ति, बलिदान और मानवता जैसे बड़े सामाजिक और भावनात्मक विषयों को प्रमुखता दी जाएगी।
सलमान खान के इस प्रोजेक्ट को उनके सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। फिल्म का नया नाम युद्ध की बजाय शांति का संदेश देता है। इसका उद्देश्य दर्शकों को कहानी के भावनात्मक और नैतिक पहलुओं से जोड़ना है। नया पोस्टर भी इसी संदेश को उजागर करता है, जिसमें युद्ध के माहौल के बावजूद शांति और मानवीय मूल्य प्रमुख दिखाई दे रहे हैं।
मेकर्स ने यह भी कहा है कि फिल्म केवल एक एक्शन या वॉर ड्रामा नहीं होगी। इसे दर्शकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव पैदा करने वाली कहानी के रूप में तैयार किया जा रहा है। देशभक्ति और वीरता पर आधारित फिल्मों को हमेशा दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और यही कारण है कि इस फिल्म से बड़ी उम्मीदें हैं।
सोशल मीडिया पर नए नाम और टैगलाइन के साथ फिल्म की चर्चा तेज हो गई है। कई यूजर्स ने “May War Rest in Peace” को सकारात्मक और शक्तिशाली संदेश वाला बताया है। फिल्म इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि टाइटल में यह बदलाव फिल्म को अलग पहचान देगा। पहले फिल्म केवल युद्ध और संघर्ष की कहानी प्रतीत हो रही थी, जबकि अब इसका नया नाम व्यापक सामाजिक और नैतिक संदेश भी प्रस्तुत करता है।
फिल्म की रिलीज की तारीख अभी फाइनल नहीं हुई है, लेकिन मेकर्स का दावा है कि यह अगले साल बड़े पर्दे पर आएगी। फिल्म भारत-चीन सीमा संघर्ष और भारतीय सैनिकों की वीरता को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास करेगी। सलमान खान का यह प्रोजेक्ट दर्शकों को देशभक्ति, साहस और मानवता के भावनात्मक संदेश के साथ जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित होने वाला है।
फिल्म के नए पोस्टर और टैगलाइन ने इसे सिर्फ एक मनोरंजक फिल्म से बढ़कर एक संदेशवाहक फिल्म बना दिया है, जिससे दर्शकों में उत्सुकता और उम्मीद दोनों बढ़ गई हैं। इस बदलाव के साथ, सलमान खान की फिल्म अब सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि शांति और मातृभूमि के प्रति सम्मान की कहानी के रूप में पेश की जाएगी।

घटना के तुरंत बाद किए गए स्कैन में पता चला कि जैकब्स के घुटने की किनारे की हड्डी में चोट लगी है, जिसे बोन ब्रूज़िंग कहा जाता है। टीम ने यह भी बताया कि जैकब्स के दोबारा खेलने की समय सीमा तय करने के लिए अभी और मेडिकल जांच की आवश्यकता है। उनके बाहर होने से न्यूजीलैंड की टीम को अब रणनीति में बदलाव करना पड़ा।
बेवन जैकब्स की अनुपस्थिति में टीम ने कैटेन क्लार्क को टीम में शामिल किया है। क्लार्क को मूल रूप से चौथे और पांचवें टी20 मुकाबलों के लिए टीम में रखा गया था, लेकिन अब वे पहले और दूसरे मैच के लिए भी उपलब्ध होंगे। इससे टीम की बल्लेबाजी और संतुलन पर काफी असर पड़ सकता है।
इससे पहले न्यूजीलैंड क्रिकेट ने बताया था कि लेग-स्पिनर ईश सोढ़ी ट्रेनिंग के दौरान अंगूठा टूटने के कारण पूरी टी20 सीरीज से बाहर हो गए हैं। सोढ़ी को बे ओवल में गेंदबाजी करते समय चोट लगी थी और स्कैन में उनके अंगूठे में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। इस चोट के कारण उन्हें कम से कम चार हफ्तों तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ेगा। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने साफ कहा कि सोढ़ी की जगह किसी अन्य खिलाड़ी को टीम में नहीं बुलाया जाएगा।
टी20 सीरीज का पहला मैच न्यूज़ीलैंड ने बे ओवल में साउथ अफ्रीका के हाथों 7 विकेट से गंवा दिया था। दूसरे मैच के लिए टीम सोमवार को हैमिल्टन पहुंच गई है और मंगलवार को सेडन पार्क में यह मुकाबला खेला जाएगा।
दोनों देशों के बीच पांच मैचों की सीरीज के शेष मुकाबले क्रमशः 17 मार्च को हैमिल्टन, 20 मार्च को ईडन पार्क, 22 मार्च को वेलिंगटन और 25 मार्च को क्राइस्टचर्च में खेले जाएंगे। इन मैचों में टीम की रणनीति और खिलाड़ियों का प्रदर्शन दोनों ही अहम भूमिका निभाएंगे।
न्यूज़ीलैंड को अब क्लार्क की भूमिका और टीम के अन्य खिलाड़ियों की जिम्मेदारी पर भरोसा करना होगा। जैकब्स की चोट और सोढ़ी की अनुपस्थिति के बावजूद ब्लैककैप्स टीम पूरी ताकत के साथ शेष मैचों में उतरने की तैयारी कर रही है। यह सीरीज अब अधिक रोमांचक और चुनौतीपूर्ण होने वाली है।

भारतीय टीम की दाएं हाथ की तेज गेंदबाज अरुंधति रेड्डी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर तीन मैचों की टी20 सीरीज में भारत की गेंदबाजी की कमान संभाली। उन्होंने इस सीरीज में कुल आठ विकेट लिए और 10.87 की औसत से सर्वाधिक विकेट लेने वाली खिलाड़ी के रूप में उभरीं। पहले मैच में उन्होंने 22 रन देकर चार विकेट हासिल किए, जबकि दूसरे मैच में 30 रन देकर दो विकेट और तीसरे मैच में 35 रन देकर दो विकेट झटके। उनकी लगातार विकेट लेने की क्षमता ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखने में निर्णायक रही और अंततः भारत ने यह सीरीज 2-1 से अपने नाम की।
वहीं श्रीलंका की टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज हर्षिता समरविक्रमा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 57 की औसत से कुल 171 रन बनाए और सीरीज में सर्वाधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाई। हर्षिता ने तीनों मैचों में 66, 35 और 70 रन बनाए। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ भी चुना गया। उनकी बल्लेबाजी ने श्रीलंका को सीरीज जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनकी क्रीज़ पर धैर्य और तकनीक ने दर्शकों और आलोचकों दोनों का ध्यान आकर्षित किया।
पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना ने भी फरवरी माह में बल्ले और गेंद दोनों से प्रभावित किया। उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में 39 की औसत से 117 रन बनाए। सीरीज के दूसरे मैच में 52 रन और दो विकेट हासिल किए जबकि तीसरे मैच में 60 रन और दो विकेट लिए। टी20 सीरीज में फातिमा सर्वाधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी रही। उन्होंने कुल 146 रन बनाए जिसमें पहले मैच में 90 रन, दूसरे मैच में नौ रन और तीसरे मैच में नाबाद 47 रन शामिल थे। अंतिम मैच में उन्होंने साथ ही दो विकेट भी झटके। उनके प्रदर्शन ने पाकिस्तान की टीम को हर चुनौतीपूर्ण मुकाबले में मजबूत बनाए रखा।
आईसीसी की इस घोषणा ने यह साबित कर दिया कि महिला क्रिकेट में लगातार उभरते हुए खिलाड़ियों की प्रतिभा और खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को पूरी दुनिया मान्यता दे रही है। अरुंधति रेड्डी की तेज गेंदबाजी, हर्षिता समरविक्रमा की तकनीकी और निडर बल्लेबाजी, और फातिमा सना की ऑल-राउंड क्षमता ने फरवरी माह को महिला क्रिकेट के लिए यादगार बना दिया।
इन नामित खिलाड़ियों का चयन न केवल उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर हुआ बल्कि उन्होंने अपनी टीमों को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान भी दिया। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इन खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, रणनीतिक खेल और मानसिक दृढ़ता उन्हें भविष्य में और बड़े पुरस्कार और सम्मान दिलाने में मदद करेगी।