Author: bharati

  • आज पेट्रोल-डीजल के दाम: दिल्ली मुंबई कोलकाता से लेकर हैदराबाद तक लेटेस्ट रेट्स

    आज पेट्रोल-डीजल के दाम: दिल्ली मुंबई कोलकाता से लेकर हैदराबाद तक लेटेस्ट रेट्स


    नई दिल्ली :सूरज की पहली किरणों के साथ ही न केवल दिन की शुरुआत होती है बल्कि आम आदमी की जेब पर असर डालने वाले पेट्रोल और डीजल के नए रेट भी सुबह 6 बजे अपडेट होते हैं देश की प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियां यानी इंडियन ऑयल बीपीसीएल और एचपीसीएल इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये के एक्सचेंज रेट के आधार पर रोजाना लेटेस्ट रेट जारी करती हैं यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराती है ताकि कोई गुमराह न हो

    आज आपके शहर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं नई दिल्ली में पेट्रोल 94.72 और डीजल 87.62 मुंबई में पेट्रोल 104.21 और डीजल 92.15 कोलकाता में पेट्रोल 103.94 और डीजल 90.76 चेन्नई में पेट्रोल 100.75 और डीजल 92.34 अहमदाबाद में पेट्रोल 94.49 और डीजल 90.17 बेंगलुरु में पेट्रोल 102.92 और डीजल 89.02 हैदराबाद में पेट्रोल 107.46 और डीजल 95.70 जयपुर में पेट्रोल 104.72 और डीजल 90.21 लखनऊ में पेट्रोल 94.69 और डीजल 87.80 पुणे में पेट्रोल 104.04 और डीजल 90.57 चंडीगढ़ में पेट्रोल 94.30 और डीजल 82.45 इंदौर में पेट्रोल 106.48 और डीजल 91.88 पटना में पेट्रोल 105.58 और डीजल 93.80 सूरत में पेट्रोल 95.00 और डीजल 89.00 नासिक में पेट्रोल 95.50 और डीजल 89.50

    पिछले दो साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है इसके पीछे केंद्र और कई राज्यों द्वारा लागू की गई टैक्स में कटौती एक मुख्य कारण है मई 2022 के बाद से यह स्थिरता बनी हुई है जबकि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी है स्थिरता उपभोक्ताओं के लिए राहत का कारण बनी हुई है

    फ्यूल की कीमतें कई फैक्टर्स पर निर्भर करती हैं सबसे पहला और बड़ा कारण है क्रूड ऑयल की कीमतें पेट्रोल और डीजल मुख्य रूप से क्रूड ऑयल से बनते हैं जब इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं इसका असर भारतीय मार्केट पर भी पड़ता है दूसरा कारण डॉलर के मुकाबले रुपये की ताकत है क्योंकि भारत ज्यादातर क्रूड आयात डॉलर में करता है अगर रुपया कमजोर होता है तो कीमतें बढ़ जाती हैं तीसरा कारण सरकारी टैक्स और ड्यूटी है केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल और डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं यही कीमतों में अंतर का मुख्य कारण है

    इसके अलावा रिफाइनिंग कॉस्ट भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाती है क्रूड ऑयल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया में लागत आती है यह लागत क्रूड ऑयल की क्वालिटी और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है अंत में फ्यूल की डिमांड और सप्लाई का बैलेंस भी कीमतें तय करता है त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में खपत बढ़ जाती है जिससे दाम में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है

    अगर आप मोबाइल से अपने शहर के पेट्रोल और डीजल के दाम जानना चाहते हैं तो प्रक्रिया आसान है इंडियन ऑयल कस्टमर अपने शहर कोड को RSP के साथ 9224992249 पर भेज सकते हैं बीपीसीएल कस्टमर 9223112222 पर RSP टेक्स्ट करें और एचपीसीएल कस्टमर 9222201122 पर HP Price भेजकर अपने शहर की कीमतें जान सकते हैं

    रोजाना अपडेट रहना न सिर्फ समझदारी है बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता सही और पारदर्शी जानकारी के आधार पर अपने खर्च का प्रबंधन कर सकें पेट्रोल और डीजल की कीमतें सीधे आपकी जेब पर असर डालती हैं इसलिए समय पर जानकारी रखना महत्वपूर्ण है

  • दो दशक बाद नया राजनीतिक कदम नीतीश कुमार राज्यसभा जाना चाहते हैं नई सरकार को मार्गदर्शन देने का वादा

    दो दशक बाद नया राजनीतिक कदम नीतीश कुमार राज्यसभा जाना चाहते हैं नई सरकार को मार्गदर्शन देने का वादा


    नई दिल्ली:
    बिहार की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने साफ कर दिया है कि वे राज्यसभा जाना चाहते हैं उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में जो भी नई सरकार बनेगी उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संदेश में जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले दो दशक से भी अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर भरोसा और समर्थन बनाए रखा है इसी विश्वास के कारण उन्हें राज्य की सेवा करने का अवसर मिला उन्होंने कहा कि जनता के भरोसे की ताकत से ही बिहार आज विकास और सम्मान की नई पहचान बना रहा है उन्होंने इस भरोसे और समर्थन के लिए एक बार फिर लोगों का धन्यवाद भी दिया

    अपने पोस्ट में उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की एक पुरानी इच्छा का भी जिक्र किया उन्होंने लिखा कि जब उन्होंने संसदीय जीवन की शुरुआत की थी तभी से उनके मन में यह इच्छा थी कि वे बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें इसी क्रम में अब वे राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं

    नीतीश कुमार ने अपने संदेश में यह भी भरोसा दिलाया कि जनता के साथ उनका रिश्ता आगे भी पहले की तरह बना रहेगा उन्होंने कहा कि एक विकसित बिहार बनाने का उनका संकल्प आगे भी जारी रहेगा और वे भविष्य में भी जनता के साथ मिलकर राज्य के विकास के लिए काम करते रहेंगे उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में जो भी नई सरकार बनेगी उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा

    गौरतलब है कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक माने जाते हैं वे पिछले करीब दो दशकों से राज्य की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं वर्ष 2025 में उन्होंने दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी इसके साथ ही वे राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बन चुके हैं

    उनका राजनीतिक सफर भी काफी लंबा और दिलचस्प रहा है वर्ष 1985 में वे पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए थे इसके बाद वर्ष 1989 में उन्होंने पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया इसके बाद वे लगातार 1989 से 2004 तक बाढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने जाते रहे

    मार्च 2000 में उन्होंने पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में पद संभाला था हालांकि उस समय उनकी सरकार बहुमत साबित नहीं कर सकी और मात्र सात दिनों में ही गिर गई इसके बाद वर्ष 2001 से 2004 के बीच उन्होंने केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया और रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली

    बिहार में वर्ष 2005 के बाद से नीतीश कुमार की राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत होती गई हालांकि वर्ष 2014 से 2015 के बीच कुछ समय के लिए Jitan Ram Manjhi मुख्यमंत्री बने थे लेकिन उसके बाद फिर से नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली और तब से अब तक वे राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेता बने हुए हैं

    अब उनके राज्यसभा जाने की इच्छा जाहिर करने के बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला राज्य की भविष्य की राजनीति और सत्ता संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है

  • कांग्रेस ने घोषित किए राज्यसभा के लिए 6 उम्मीदवार, तेलंगाना से अभिषेक मनु सिंघवी को फिर चुना

    कांग्रेस ने घोषित किए राज्यसभा के लिए 6 उम्मीदवार, तेलंगाना से अभिषेक मनु सिंघवी को फिर चुना



    नई दिल्ली । कांग्रेस ने गुरुवार को राज्यसभा चुनावों के लिए छह उम्मीदवारों की घोषणा की। जिनमें वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी को तेलंगाना से फिर उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी ने सिंघवी के अलावा छत्तीसगढ़ से फूलो देवी नेताम, हरियाणा से करमवीर सिंह बौद्ध, हिमाचल प्रदेश से अनुराग शर्मा, तमिलनाडु से एम. क्रिस्टोफर तिलक तथा तेलंगाना से वी नरेंद्र रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है।

    वी नरेंद्र रेड्डी ने जताया आभार
    नरेंद्र रेड्डी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा “कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में मेरी घोषणा करने के लिए माननीय सोनिया गांधी, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, एआईसीसी सचिव केसी वेणुगोपाल, सांसद प्रियंका गांधी, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, कांग्रेस कार्यपालिका प्रभारी मीनाक्षी नटराजन, उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क, पीसीसी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ और कांग्रेस पार्टी हाई कमांड को मेरा हार्दिक धन्यवाद।”

    राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 मार्च को
    देश के 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 मार्च को निर्धारित है और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना होगी। महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना से निर्वाचित 37 सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो जाएगा, जिससे नए सदस्यों के चुनाव के लिए सभी सीटें खाली हो जाएंगी।

    बता दें कि चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिसूचना 26 फरवरी को जारी की गई थीं। नामांकन की अंतिम तिथि आज यानी 5 मार्च है, जिसके बाद 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। उम्मीदवार 9 मार्च तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं।

  • मौसम का बदला मिजाज दिल्ली में चुभती धूप तेज हवाएं यूपी बिहार में बढ़ेगा तापमान पहाड़ों पर फिर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ

    मौसम का बदला मिजाज दिल्ली में चुभती धूप तेज हवाएं यूपी बिहार में बढ़ेगा तापमान पहाड़ों पर फिर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ

    नई दिल्ली:  देशभर में मार्च की शुरुआत के साथ ही मौसम के मिजाज में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है होली के आसपास तापमान में उतार चढ़ाव के बीच अलग अलग राज्यों में मौसम का अलग रूप नजर आ रहा है भारतीय मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 5 मार्च को देश के कई हिस्सों में गर्मी का असर बढ़ेगा जबकि पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है

    राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मार्च की शुरुआत के साथ ही तापमान तेजी से बढ़ने लगा है मौसम विभाग के अनुसार दिन में तेज धूप और हल्की तेज हवाओं के कारण लोगों को गर्मी का एहसास होने लगा है पिछले 24 घंटों के दौरान दिल्ली का अधिकतम तापमान करीब 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया जबकि न्यूनतम तापमान 14 से 16 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा यह अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 3 से 5 डिग्री अधिक बताया गया है

    सफदरजंग मौसम केंद्र के आंकड़ों के अनुसार अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया जो सामान्य से लगभग 5.8 डिग्री अधिक है वहीं न्यूनतम तापमान 15.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले सात दिनों में राजधानी का तापमान करीब 6 डिग्री तक और बढ़ सकता है जिससे गर्मी का असर और तेज होने की संभावना है

    दिल्ली के अलग अलग इलाकों में तापमान में हल्का अंतर जरूर देखने को मिला पालम मौसम केंद्र में अधिकतम तापमान 30.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि लोधी रोड में 32.8 डिग्री दिल्ली रिज में करीब 33 डिग्री और आयानगर में 32.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल राजधानी में मौसम शुष्क बना रहेगा और बारिश की संभावना नहीं है

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय उत्तर भारत में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है और 6 मार्च से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है हालांकि इसका असर दिल्ली और आसपास के मैदानी इलाकों पर ज्यादा देखने को नहीं मिलेगा लेकिन पहाड़ी राज्यों में मौसम में बदलाव जरूर आएगा

    उत्तर प्रदेश और बिहार में भी गर्मी धीरे धीरे अपने तेवर दिखाने लगी है उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है लखनऊ कानपुर बरेली आगरा मथुरा गोरखपुर और बांदा जैसे शहरों में दिन के समय तेज धूप के कारण लोगों को गर्मी का एहसास हो रहा है मौसम विभाग के अनुसार लखनऊ में अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान लगभग 17 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है

    बिहार में भी मौसम फिलहाल साफ बना हुआ है और दिन में तापमान बढ़ता नजर आ रहा है पिछले 24 घंटों में बांका राज्य का सबसे गर्म जिला रहा जहां अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया इसके अलावा पटना और गया में भी गर्मी का असर महसूस किया जा रहा है मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों में बिहार के तापमान में 1 से 4 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है और आने वाले एक सप्ताह में कई जिलों में तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है

    वहीं झारखंड के कुछ जिलों में मौसम थोड़ा अलग नजर आ रहा है दक्षिणी जिलों पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में न्यूनतम तापमान करीब 17 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है जिससे सुबह और रात के समय हल्की ठंडक महसूस हो रही है जबकि देवघर गोड्डा और दुमका जैसे उत्तर पूर्वी जिलों में अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है

    देश के अन्य राज्यों की बात करें तो पंजाब और हरियाणा में मौसम सामान्य रहने की संभावना है सुबह हल्की ठंडक और दिन में धूप के कारण तापमान में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में आंशिक बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है

    गुजरात और महाराष्ट्र में भी गर्मी का असर बढ़ने लगा है अहमदाबाद सूरत मुंबई पुणे और नागपुर जैसे शहरों में दिन के समय तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है वहीं दक्षिण भारत के राज्यों कर्नाटक केरल तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में गर्मी का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है जहां तापमान 32 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है

    इधर पहाड़ी राज्यों में मौसम फिर करवट ले सकता है हिमाचल प्रदेश में 7 मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है जिसके कारण लाहौल स्पीति किन्नौर चंबा और कुल्लू के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी हो सकती है वहीं उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में भी बारिश के आसार जताए गए हैं

  • ईरान ने होर्मूज स्ट्रेट से सिर्फ चीनी जहाजों को दी इजाजत; भारत को नहीं, जानिए वजह

    ईरान ने होर्मूज स्ट्रेट से सिर्फ चीनी जहाजों को दी इजाजत; भारत को नहीं, जानिए वजह

    तेहरान। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति केवल चीनी जहाजों को देने की घोषणा की है। इस फैसले को चीन के समर्थन के प्रति ईरान की कृतज्ञता के रूप में देखा जा रहा है।
    ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्ध के दौरान China ने तेहरान का खुलकर समर्थन किया, इसलिए उसके तेल टैंकरों और जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। वहीं अन्य देशों—खासकर पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों—के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने से रोका जा सकता है।

    भारत के लिए बड़ा झटका

    ईरान के इस फैसले से India को बड़ा झटका लग सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है और इनका अधिकांश परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही होता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% से अधिक हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड का दावा

    ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने दावा किया है कि इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका “पूर्ण नियंत्रण” है। ईरानी समाचार एजेंसी Fars News Agency के मुताबिक IRGC नौसेना के अधिकारी Mohammad Akbarzadeh ने कहा कि क्षेत्र में गुजरने वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

    अमेरिका ने दी सुरक्षा की चेतावनी

    इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा के लिए तैनात की जाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि जहाजरानी कंपनियों को जोखिम बीमा उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।

    बढ़ी वैश्विक चिंता

    तनाव के कारण तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ बीमा कंपनियों ने खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए प्रीमियम बढ़ा दिए हैं। वहीं समुद्री डेटा कंपनी Lloyd’s List Intelligence के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में करीब 200 तेल टैंकर फंसे हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

  • वानखेड़े में आज फैसला भारत या इंग्लैंड किसे मिलेगी फाइनल की टिकट पीटरसन बोले न्यूजीलैंड से होगा इंग्लैंड का मुकाबला

    वानखेड़े में आज फैसला भारत या इंग्लैंड किसे मिलेगी फाइनल की टिकट पीटरसन बोले न्यूजीलैंड से होगा इंग्लैंड का मुकाबला

    नई दिल्ली :टी20 वर्ल्ड कप 2026 अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और अब सभी की नजरें दूसरे सेमीफाइनल पर टिकी हुई हैं जहां गुरुवार शाम मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड आमने सामने होंगे इस मुकाबले का महत्व इसलिए और भी बढ़ गया है क्योंकि जो टीम यह मैच जीतेगी वह 8 मार्च को अहमदाबाद में होने वाले फाइनल में न्यूजीलैंड से भिड़ेगी न्यूजीलैंड पहले ही कोलकाता में खेले गए पहले सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुकी है

    भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाला यह मुकाबला सिर्फ एक सेमीफाइनल नहीं बल्कि दो मजबूत टीमों के बीच प्रतिष्ठा की बड़ी लड़ाई माना जा रहा है भारतीय टीम को घरेलू मैदान का फायदा मिल सकता है और इसी वजह से कई क्रिकेट विशेषज्ञ भारत को इस मुकाबले में थोड़ा आगे मान रहे हैं वानखेड़े की पिच और यहां की परिस्थितियां भारतीय खिलाड़ियों के लिए जानी पहचानी हैं जो टीम इंडिया के आत्मविश्वास को और मजबूत बनाती हैं

    हालांकि इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन की राय इससे अलग है उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भविष्यवाणी करते हुए कहा कि टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच खेला जाएगा पीटरसन का यह बयान न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए पहले सेमीफाइनल के बाद आया उन्होंने लिखा कि रविवार को होने वाला फाइनल न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच एक शानदार मुकाबला होगा उनके इस बयान के बाद क्रिकेट फैंस के बीच चर्चा और तेज हो गई है

    दरअसल भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप के पिछले कुछ मुकाबले भी बेहद दिलचस्प रहे हैं टी20 वर्ल्ड कप 2022 के सेमीफाइनल में दोनों टीमों का सामना हुआ था उस मैच में इंग्लैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को हराया था और बाद में फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताब अपने नाम किया था इसके बाद टी20 वर्ल्ड कप 2024 के सेमीफाइनल में फिर से दोनों टीमों की भिड़ंत हुई इस बार भारतीय टीम ने जोरदार वापसी करते हुए इंग्लैंड को मात दी और फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर ट्रॉफी जीत ली

    यही वजह है कि भारत और इंग्लैंड के बीच यह सेमीफाइनल मुकाबला क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद खास माना जा रहा है पिछले दो वर्ल्ड कप में इन दोनों टीमों के सेमीफाइनल से ही चैंपियन टीम निकली है इसलिए माना जा रहा है कि इस बार भी सेमीफाइनल का विजेता खिताब की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार होगा

    अगर हेड टू हेड रिकॉर्ड की बात करें तो आंकड़े भारतीय टीम के पक्ष में नजर आते हैं भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक कुल 29 टी20 मुकाबले खेले गए हैं जिनमें भारत ने 17 मैच जीते हैं जबकि इंग्लैंड को 12 मुकाबलों में जीत मिली है हालांकि क्रिकेट में आंकड़े हमेशा जीत की गारंटी नहीं देते हर मैच की अपनी परिस्थितियां और दबाव होता है

    वानखेड़े स्टेडियम में होने वाला यह मुकाबला इसलिए भी खास होगा क्योंकि यहां की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती है ऐसे में दर्शकों को एक हाई स्कोरिंग और रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत अपने घरेलू मैदान का फायदा उठाकर फाइनल में जगह बनाता है या फिर इंग्लैंड पीटरसन की भविष्यवाणी को सच साबित करते हुए न्यूजीलैंड से खिताबी मुकाबला खेलने पहुंचता है

  • ईरान ने तुर्की की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, ईरानी राजदूत तलब

    ईरान ने तुर्की की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, ईरानी राजदूत तलब


    अंकारा। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक Iran ने बुधवार को Turkey की दिशा में एक बैलिस्टिक मिसाइल दाग दी। हालांकि NATO की एयर डिफेंस प्रणाली ने मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। इस घटना के बाद तुर्की में हड़कंप मच गया और इसे युद्ध में नाटो की पहली प्रत्यक्ष एंट्री के रूप में देखा जा रहा है।

    नाटो की प्रवक्ता Allison Hart ने बयान जारी कर कहा कि संगठन तुर्की को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करता है और अपने सभी सहयोगी देशों के साथ मजबूती से खड़ा है।

    इराक और सीरिया के एयरस्पेस से गुजरी मिसाइल

    तुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल Iraq और Syria के हवाई क्षेत्र से गुजरते हुए तुर्की की ओर बढ़ रही थी। इससे पहले कि वह लक्ष्य तक पहुंचती, पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में तैनात नाटो एयर डिफेंस सिस्टम ने उसे मार गिराया।

    तुर्की प्रेसिडेंसी के कम्युनिकेशन निदेशालय ने बताया कि इंटरसेप्टर का मलबा देश के दक्षिणी प्रांत Hatay Province में गिरा। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    रणनीतिक सैन्य ठिकानों के पास गिरा मलबा

    जिस इलाके में मिसाइल का मलबा गिरा, वह तुर्की के प्रमुख सैन्य अड्डे Incirlik Air Base से लगभग 60 मील दूर बताया जा रहा है। वहीं तुर्की के Kürecik क्षेत्र में नाटो का एक महत्वपूर्ण अर्ली-वॉर्निंग रडार सिस्टम भी मौजूद है, जो बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा माना जाता है।

    तुर्की ने ईरानी राजदूत को किया तलब

    घटना के बाद तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने अपने ईरानी समकक्ष Abbas Araghchi से बातचीत कर कड़ी आपत्ति जताई। इसके साथ ही तुर्की ने Iran के राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब कर घटना पर जवाब मांगा।

    तुर्की के अधिकारियों ने चेतावनी दी कि देश के खिलाफ किसी भी दुश्मनी भरे कदम का जवाब देने का अधिकार उनके पास सुरक्षित है।

    विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो यह संघर्ष और ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व और यूरोप की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
  • ईरान की धरती पर नहीं उतरेंगे अमेरिकी सैनिक? जानिए वजह

    ईरान की धरती पर नहीं उतरेंगे अमेरिकी सैनिक? जानिए वजह


    वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए व्यापक हवाई हमलों के बाद मध्य पूर्व में युद्ध भड़क गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरानी जनता के लिए ‘आजादी’ बताया है। आसमान से बरसती मिसाइलों और भयानक बमबारी के बीच ट्रंप का ‘एंडगेम’ यानी अंतिम लक्ष्य बिल्कुल साफ हो चुका है- ईरान में पूरी तरह से सत्ता परिवर्तन। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के असली लक्ष्य को हासिल करना- बिना जमीनी सेना के लगभग असंभव है।

    इस संघर्ष ने अपने शुरुआती दिनों में ही पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। शनिवार तड़के हुए अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई शीर्ष अधिकारी और सैकड़ों नागरिक मारे गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों, अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। इराक स्थित ईरान-समर्थित गुटों और लेबनान के हिज्बुल्लाह ने भी युद्ध में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान पर जमीनी हमले की योजना की भी खबरें हैं।
    क्या केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन संभव है?

    राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी जनता से अपील करते हुए कहा है- जब हम अपना काम खत्म कर लेंगे, तो अपनी सरकार पर कब्ब्जा कर लेना। यह आपकी होगी। हालांकि, विशेषज्ञ इस रणनीति पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

    अल-जजीरा से बात करते हुए स्टिम्सन सेंटर थिंक टैंक के केली ग्रीको ने कहा कि जमीनी सेना के बिना इतना बड़ा राजनीतिक बदलाव लाना लगभग असंभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप हवाई हमलों की ताकत को लेकर कुछ ज्यादा ही मुग्ध हो गए हैं। सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी के मैथ्यू डस ने स्पष्ट किया कि इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन हुआ हो। उन्होंने 2011 के लीबिया युद्ध का उदाहरण दिया, जहां नाटो के हवाई हमलों के बावजूद मुअम्मर गद्दाफी को हटाने के लिए जमीनी स्तर पर विद्रोहियों को ही लड़ना पड़ा था।
    हालिया रॉयटर्स सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 25% अमेरिकी इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं। इसकी तुलना में 2003 के इराक युद्ध को शुरुआत में लगभग 55% जनसमर्थन प्राप्त था। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल ने एक खुफिया ब्रीफिंग के बाद चिंता व्यक्त की है कि अमेरिका ईरान में जमीनी सेना उतारने की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बहुत अधिक बढ़ जाएगा।
    ट्रंप का ‘मास्टरप्लान’: हवा और समंदर से तबाही

    ट्रंप प्रशासन की रणनीति इराक या अफगानिस्तान जैसी नहीं है, जहां लाखों सैनिक भेजकर कब्ज़ा किया गया था। ट्रंप का दांव है कि आसमान और समंदर से ही इतना भयानक प्रहार किया जाए कि ईरान का पूरा सिस्टम ताश के पत्तों की तरह ढह जाए। इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत है।

    ट्रंप का मानना है कि नेतृत्व को खत्म करने से व्यवस्था अपने आप पंगु हो जाएगी। अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता, उसकी नेवी और उसके परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर रहा है ताकि ईरान के पास पलटवार की कोई ताकत ही न बचे।
    ‘बूट्स ऑन द ग्राउंड’ से परहेज क्यों?

    ट्रंप हमेशा से अमेरिका को दूसरे देशों के ‘अंतहीन युद्धों’ में फंसाने के खिलाफ रहे हैं। किसी देश में पैदल सेना भेजने का मतलब है अमेरिकी सैनिकों की लाशें वापस आना और खरबों डॉलर का खर्च। ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ का नारा इसके सख्त खिलाफ है।

    ट्रंप खुलेआम ईरानी जनता से कह रहे हैं कि वे इस मौके का फायदा उठाएं और खुद अपनी सरकार को उखाड़ फेंकें। ट्रंप को उम्मीद है कि भारी बमबारी और बदहाली से टूटकर ईरानी जनता खुद बगावत कर देगी और अमेरिका को सेना उतारने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
    ट्रंप प्रशासन के भीतर और बाहर अलग-अलग सुर

    इस युद्ध के उद्देश्यों को लेकर अमेरिकी नेताओं और प्रशासन के बयानों में काफी विरोधाभास देखने को मिल रहा है। विदेश मंत्री मार्क रूबियो ने कहा कि लक्ष्य ईरान के परमाणु और ड्रोन कार्यक्रमों तथा नौसेना को नष्ट करना है ताकि वह विदेशी हमलों से न बच सके।

    वहीं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं होगा; हम स्पष्ट उद्देश्यों के साथ काम कर रहे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा, ‘यह एक अवैध युद्ध है जो झूठ पर आधारित है। ट्रंप प्रशासन के पास ईरान को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं है।’

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध की आवश्यकता और इसके सटीक लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से जनता के सामने नहीं रखा है। यह संघर्ष अब उस त्वरित सैन्य कार्रवाई से कहीं अधिक लंबा खिंचता दिख रहा है, जिसके लिए ट्रंप जाने जाते हैं, जैसे जनवरी में वेनेज़ुएला के निकोलस मादुरो का अपहरण या जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले।

  • थाईलैंड की अनोखी शादी : एक ही मंडप में दो दूल्हों संग दुल्हन ने रचाई शादी

    थाईलैंड की अनोखी शादी : एक ही मंडप में दो दूल्हों संग दुल्हन ने रचाई शादी


    बैंकॉक। शादी-ब्याह के इस सीजन में आपने कई तरह के विवाह समारोह देखे होंगे, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी शादी की तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। इस अनोखी शादी में एक दुल्हन ने एक ही मंडप में दो दूल्हों के साथ विवाह रचा लिया।

    यह अनोखा मामला Thailand का बताया जा रहा है, जहां 37 वर्षीय महिला Duangduan Ketsaro ने दो ऑस्ट्रियाई पुरुषों से शादी की। बताया जाता है कि डुआंगडुआन पहले सिंगर और सॉन्गराइटर रह चुकी हैं। शादी का समारोह सादा लेकिन पारंपरिक तरीके से आयोजित किया गया, जिसमें परिवार और करीबी दोस्त मौजूद रहे। समारोह की तस्वीरें सामने आने के बाद यह शादी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

    पहले एक से प्यार, फिर दूसरे से भी बना रिश्ता

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डुआंगडुआन की मुलाकात सबसे पहले ऑस्ट्रिया के रिटायर्ड पुलिस अधिकारी Roman से थाईलैंड के मशहूर पर्यटन शहर Pattaya में हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच रिश्ता गहरा हुआ और वे करीब पांच साल तक साथ रहे।

    कुछ समय बाद उनकी मुलाकात Macky नाम के दूसरे ऑस्ट्रियाई युवक से हुई। दोनों के बीच भी प्यार हो गया। डुआंगडुआन के मुताबिक उन्होंने अपने इस रिश्ते को कभी छिपाया नहीं और तीनों ने आपसी समझ से भविष्य को लेकर खुलकर बातचीत की।

    परिवार की सहमति से हुआ विवाह

    डुआंगडुआन ने बताया कि शादी से पहले उन्होंने अपने माता-पिता और बच्चों से भी सलाह ली थी।

    उनकी पहले की शादी से तीन बेटियां हैं और वे नानी भी बन चुकी हैं।

    उन्होंने बताया कि संगीत करियर में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्हें आर्थिक और व्यक्तिगत संघर्षों का सामना करना पड़ा। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए उन्होंने पटाया में काम शुरू किया, जहां उनकी मुलाकात पहले रोमन और फिर मैकी से हुई।

    समय के साथ दोनों पुरुष न केवल उनकी जिंदगी का हिस्सा बने, बल्कि परिवार की जिम्मेदारियों में भी साथ देने लगे। डुआंगडुआन के अनुसार, उनके माता-पिता और बच्चे भी इस शादी से खुश हैं।

  • अमेरिका नहीं चाहता भारत बने ताकतवर, ईरानी अधिकारी का बड़ा आरोप

    अमेरिका नहीं चाहता भारत बने ताकतवर, ईरानी अधिकारी का बड़ा आरोप

    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भारत में ईरानी सुप्रीम लीडर के विशेष प्रतिनिधि Abdul Majid Hakim Elahi ने कहा कि अमेरिका अपने वैश्विक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए दुनिया में जानबूझकर युद्ध जैसी स्थितियां पैदा करता है। उनका दावा है कि ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष के पीछे भी अमेरिका की यही रणनीति है, ताकि भारत और चीन जैसे देशों को उभरने से रोका जा सके।

    खास बातचीत में इलाही ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि भारत या चीन जैसे देश वैश्विक ताकत के रूप में सामने आएं। उनके मुताबिक, अमेरिका की कोशिश रहती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसकी ताकत को कोई चुनौती न दे और इसी वजह से वह विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध की स्थितियां पैदा करता है।

    भविष्य में भारत भी होगा बड़ी ताकत

    इलाही ने कहा कि आने वाले समय में भारत, चीन, रूस और अमेरिका दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में शामिल होंगे। हालांकि, उनका आरोप है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर अपनी ताकत को साझा नहीं करना चाहता और इसी कारण वह वैश्विक स्तर पर टकराव की स्थितियां बनाए रखता है।

    ईरान ने नहीं, अमेरिका ने शुरू किया संघर्ष

    ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि मौजूदा युद्ध की शुरुआत ईरान ने नहीं की, बल्कि अमेरिका और इजरायल ने सैन्य कार्रवाई कर इसे शुरू किया। इससे पहले ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी Ali Larijani ने भी कहा था कि ईरान केवल अपनी रक्षा कर रहा है। उनके अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरानी नागरिकों और ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिसके जवाब में ईरान प्रतिक्रिया दे रहा है।

    लारिजानी ने यह भी कहा कि चूंकि संघर्ष की शुरुआत अमेरिका की ओर से हुई है, इसलिए इसे खत्म करने की जिम्मेदारी भी उसी की है।

    लंबा खिंच सकता है संघर्ष

    इस बीच विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य ढांचे और नौसैनिक अड्डों पर किए गए हमलों के बाद यह संघर्ष लंबा चल सकता है। इन हमलों में ईरान के कुछ वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने की खबरें भी सामने आई हैं।

    जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत होने और कई अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है।