राजस्थान रबड़ी वाला शाही मालपुआ
बिहार केला मालपुआ
मथुरा पारंपरिक मालपुआ
ओडिशा अंपुआ
झारखंड होली पर घर घर में मालपुआ

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अक्सर लोग जानते हैं कि नई दुल्हन को शादी के बाद पहली होली नहीं देखनी चाहिए, लेकिन शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार कुछ अन्य महिलाओं और बच्चों के लिए भी होलिका दहन की अग्नि के दर्शन शुभ नहीं माने जाते।
सबसे पहले बात करें गर्भवती महिलाओं की, तो उन्हें होलिका दहन से पूरी तरह दूर रहने की सलाह दी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, यह अग्नि भक्त प्रहलाद को जलाने के लिए जलाई गई थी, जो एक नकारात्मक भाव का प्रतीक है। ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोणों से, अग्नि का तीव्र ताप और उससे निकलने वाला धुआं गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसी महिलाओं को होलिका की परिक्रमा करने से भी बचना चाहिए।
इसी तरह, नवजात शिशुओं को भी होलिका दहन के स्थान पर नहीं ले जाना चाहिए। माना जाता है कि पूर्णिमा की इस रात को नकारात्मक शक्तियां अत्यंत प्रबल होती हैं, जिससे छोटे बच्चों को “बुरी नजर” लगने का खतरा रहता है। उनकी कोमल सेहत के लिए धुआं और शोर भी हानिकारक हो सकता है।
एक दिलचस्प सामाजिक मान्यता सास-बहू के रिश्ते को लेकर भी है। कई क्षेत्रों में यह माना जाता है कि सास और बहू को कभी भी एक साथ खड़े होकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने से उनके आपसी रिश्तों में खटास आ सकती है और घर में कलह का वातावरण बन सकता है। परिवार की सुख-शांति के लिए दोनों का एक साथ वहां मौजूद होना वर्जित बताया गया है।
इसके अलावा, इकलौती संतान की मां को भी होलिका दहन देखने से परहेज करना चाहिए। इसके पीछे का तर्क भक्त प्रहलाद से जुड़ा है, जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। अंत में, ऐसी लड़कियां जिनकी शादी तय हो चुकी है और कुछ ही महीनों में उनका विवाह होने वाला है, उन्हें भी जलती हुई होली देखने से बचना चाहिए। चूंकि वे जीवन के एक नए और मांगलिक पड़ाव में कदम रखने जा रही हैं, इसलिए उन्हें इस “दहन” की प्रक्रिया से दूर रहकर केवल सकारात्मक उत्सवों में ही भाग लेना चाहिए।

जैसे ही सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगेशनि का तेज कम होने लगेगाजिससे उनके क्रूर या अशुभ फलों में भारी कमी आएगी। यह समय विशेष रूप से उन तीन राशियों के लिएमहा-भाग्योदय का मार्ग प्रशस्त करेगाजिन्हें शनि अब तक कड़ी परीक्षा में डाल रहे थे। इनमें मेषवृश्चिक और कुंभ राशि शामिल हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि शनि का यह अस्त काल 13 मार्च से शुरू होकर 22 अप्रैल 2026 तक रहेगाऔर इन 40 दिनों में इन राशियों के करियर और आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
मेष राशि के जातकों की बात करें तो उन पर वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती का प्रथम चरण चल रहा है। शनि का अस्त होना इनके लिए किसी बड़ी मानसिक और आर्थिक राहत जैसा होगा। अब तक जो काम अटके हुए थे या जिन प्रयासों का फल नहीं मिल रहा थावहां से सफलता मिलनी शुरू होगी। फिजूलखर्ची पर लगाम लगेगी और संचय की गई पूंजी में वृद्धि होगी। यदि आप लंबे समय से किसी विदेशी स्रोत से धन लाभ की प्रतीक्षा कर रहे थेतो वह इच्छा अब पूर्ण हो सकती है। साथ हीनौकरीपेशा जातकों को नए और बेहतर अवसर प्राप्त होंगेजिससे करियर की गाड़ी पटरी पर लौट आएगी।
वहींवृश्चिक राशि के लिए शनि का अस्त होना आत्मविश्वास के नए द्वार खोलेगा। इस अवधि में आपके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होगाजो आपको साहसी निर्णय लेने के लिए प्रेरित करेगा। रुके हुए कार्यों में गति आएगी और व्यापारिक क्षेत्र में आप कोई बड़ी डील फाइनल कर सकते हैं। जो लोग नौकरी में प्रमोशन या वेतन वृद्धि की उम्मीद लगाए बैठे थेउनके लिए यह समय बेहद अनुकूल रहने वाला है। हालांकिइस दौरान संतान पक्ष को लेकर थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती हैलेकिन कुल मिलाकर यह समय आपके वैभव और सम्मान में वृद्धि करने वाला साबित होगा।
अंत मेंकुंभ राशि के जातकों के लिए यह गोचर अत्यंत महत्वपूर्ण हैक्योंकि उन पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम और तीसरा चरण चल रहा है। शनि के अस्त होते ही आपके कंधों से भारी बोझ उतरता हुआ महसूस होगा। आय के नए स्रोत बनेंगे और किसी पुरानी संपत्ति के क्रय-विक्रय से आपको मोटा मुनाफा होने के योग हैं। कार्यक्षेत्र में आपके प्रदर्शन की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। बस एक बात का विशेष ध्यान रखें कि अपनीवाणी पर संयम रखेंक्योंकि छोटी सी बहस बड़े विवाद का रूप ले सकती है। 13 मार्च से 22 अप्रैल के बीच का यह समय इन राशियों के लिएगोल्डन पीरियड की तरह हैजहां संयम और सही योजना के साथ ये जातकों अपने जीवन की दिशा बदल सकते हैं।

पीड़िताओं में 30 वर्षीय सलोनी बदला हुआ नाम और 22 वर्षीय श्रीधी बदला हुआ नाम सामने आई हैं। सलोनी ने बताया कि वह दो बच्चों की मां है और आर्थिक तंगी के कारण काम की तलाश में भोपाल आई थी। इवेंट कैटरिंग का काम अस्थायी था इसलिए उसे स्थायी नौकरी की जरूरत थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात आशिमा मॉल में आफरीन से कराई गई जहां उसे बच्ची की देखरेख के नाम पर नौकरी की पेशकश की गई।
सलोनी का आरोप है कि शुरुआत में कम वेतन पर काम कराया गया फिर घर में रहने का दबाव बनाया गया। कुछ समय बाद उसे पार्टियों में ले जाया जाने लगा जहां एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर पेय पदार्थ में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया और उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता का कहना है कि इस घटना का वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया गया और देह व्यापार के लिए मजबूर किया गया।
इसी तरह श्रीधी को भी कथित तौर पर बेहतर कमाई और सुविधाओं का लालच देकर जोड़ा गया। आरोप है कि उसे अलग-अलग शहरों में भेजा गया और जबरन संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया। पीड़िताओं का दावा है कि आरोपित महिलाएं उन्हें धार्मिक गतिविधियों के लिए भी प्रेरित करती थीं और विश्वास में लेने की कोशिश करती थीं।
सलोनी के अनुसार इस नेटवर्क में कई अन्य लड़कियां भी फंसी थीं लेकिन बदनामी और सामाजिक दबाव के कारण सामने नहीं आ पा रहीं। आरोप है कि यह गिरोह कॉलेज छात्राओं से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की युवतियों को निशाना बनाता था।
करीब एक साल पहले दोनों बहनों के अहमदाबाद शिफ्ट होने की जानकारी सामने आई। बाद में पीड़िताओं ने हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बाग सेवनिया थाने में एफआईआर दर्ज होने से पहले कई दिनों तक पूछताछ और प्रक्रिया चली। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संभावित मानव तस्करी ब्लैकमेल और दुष्कर्म के पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल पुलिस आधिकारिक रूप से जांच जारी होने की बात कह रही है।


यह मिशन दो एलसीएच लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के फॉर्मेशन में संचालित किया गया। राष्ट्रपति ने पहले विमान में ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ उड़ान भरी जबकि दूसरे विमान में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और ग्रुप कैप्टन ए. महेंद्र सवार थे। लगभग 25 मिनट तक चले इस मिशन में राष्ट्रपति ने गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी। अभ्यास के दौरान एक टैंक लक्ष्य पर आक्रमण का प्रदर्शन भी किया गया।
उड़ान के बाद राष्ट्रपति ने आगंतुक पुस्तिका में लिखा भारत के स्वदेशी रूप से विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरना मेरे लिए एक समृद्ध अनुभव रहा है। इस उड़ान ने मुझे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराया है। मैं भारतीय वायु सेना और वायु सेना स्टेशन जैसलमेर की पूरी टीम को इस उड़ान के सफल आयोजन के लिए बधाई देती हूं।
राष्ट्रपति शाम को जैसलमेर में आयोजित भारतीय वायु सेना के वायु शक्ति अभ्यास का भी अवलोकन करेंगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्वदेशी रक्षा उपकरणों के साथ राष्ट्रपति की यह उड़ान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की बढ़ती सामरिक क्षमता का प्रतीक है।

अर्जुन और सानिया की शादी 5 मार्च को मुंबई में आयोजित की जाएगी लेकिन उससे पहले जामनगर में हुए इस आयोजन की झलकियां सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। समारोह में सचिन अपनी पत्नी अंजलि और बेटे अर्जुन के साथ पहुंचे। दुल्हन बनने जा रहीं सानिया चंडोक का परिवार भी इस खास अवसर पर शामिल हुआ।
कार्यक्रम के दौरान नीता अंबानी ने स्वागत भाषण देते हुए नवयुगल को नए जीवन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जामनगर को अपने परिवार के लिए बेहद खास स्थान बताया और कहा कि यहां कई यादगार पारिवारिक अवसर जुड़े रहे हैं। अंबानी परिवार ने पूरे स्नेह और गर्मजोशी के साथ मेहमानों का स्वागत किया। समारोह में Anant Ambani और Radhika Merchant के साथ ही Akash Ambani और Shloka Mehta भी मौजूद रहे।
इस खास शाम का सबसे भावुक पल तब आया जब सचिन तेंदुलकर ने अपने बेटे के लिए मंच से संबोधन दिया। उन्होंने अंबानी परिवार के आतिथ्य के लिए आभार जताते हुए कहा कि इससे बेहतर आशीर्वाद देने वाले लोग और जगह मिलना मुश्किल है। अपने बेटे के बारे में बात करते हुए सचिन भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि जब बेटा किसी लड़की को घर लाकर परिवार से मिलवाता है तब एहसास होता है कि वह बड़ा हो गया है। यह पल उनके लिए गर्व और भावनाओं से भरा हुआ था।
सचिन ने आगे कहा कि अर्जुन और सानिया एक दूसरे से बेहद प्यार करते हैं और उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके बेटे ने जीवनसाथी के रूप में एक खास और समझदार साथी चुना है। समारोह में मौजूद मेहमानों ने तालियों के साथ इस पल का स्वागत किया।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में समारोह की भव्यता साफ नजर आ रही है। नीता अंबानी पारंपरिक साड़ी और हीरलूम ज्वेलरी में दिखीं जबकि सानिया सिल्वर साड़ी में सादगी और गरिमा के साथ नजर आईं। सचिन और अर्जुन कढ़ाईदार बंदगला में बेहद आकर्षक लग रहे थे।
बताया जा रहा है कि इससे पहले सचिन तेंदुलकर ने प्रधानमंत्री को भी बेटे की शादी का व्यक्तिगत निमंत्रण दिया था जिससे इस शादी को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं। अब सभी की नजरें 5 मार्च को होने वाली भव्य शादी पर टिकी हैं जहां खेल और उद्योग जगत की कई बड़ी हस्तियां शामिल हो सकती हैं।

खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई होली के त्योहार से पहले की गई है। त्योहार के चलते मिठाई और डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में विभाग ने होटलों, रेस्टोरेंट और डेयरी संचालकों पर विशेष निगरानी रखी हुई है। विभाग के अमले ने लगातार दुकानों, वाहनों और गोदामों में छापेमारी कर नमूने इकट्ठा किए हैं।
इस दौरान मावा और पनीर के पांच-पांच नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मिलावट पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य आम जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।
अधिकारियों के अनुसार पिछले एक महीने में विभाग की टीम ने भोपाल के विभिन्न इलाकों में नमकीन, मिठाई, पनीर, तेल, मैदा, बेसन सहित अन्य खाद्य पदार्थों के कुल 234 नमूने लिए हैं। इन नमूनों की जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे संदिग्ध या मिलावटयुक्त खाद्य पदार्थों की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें। विभाग ने कहा कि त्योहारों के दौरान गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। मावा और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों में मिलावट होने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
भोपाल में यह कार्रवाई विभाग की सतर्कता और त्योहारों से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के प्रति जागरूकता को दर्शाती है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे समय पर मिलावट रोकने के लिए नियमित जांच और वाहन चेकिंग जरूरी है। साथ ही, टोल प्लाजा जैसी संवेदनशील जगहों पर कार्रवाई से अवैध व्यापारियों पर भी नियंत्रण रखा जा सकता है।
इस बड़ी बरामदगी के साथ ही विभाग ने चेतावनी दी है कि मिलावट और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का व्यापार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता से आग्रह किया गया है कि वे अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा के लिए केवल प्रमाणित और भरोसेमंद उत्पाद ही खरीदें।

बस संचालकों ने अपनी मांगों के समर्थन में बसों पर हड़ताल के पोस्टर लगाए हैं। मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन ने सरकार को पहले भी कई बार अपनी चिंताएं और विरोध पत्र सौंपे हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा लागू होने पर ऑपरेटरों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और कई लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसके अलावा, यदि नई नीति लागू होती है तो बस किराया लगभग 35 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जिससे आम यात्रियों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा।
प्राइम रूट बस संगठन के अध्यक्ष पंडित गोविंद शर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकार ने 24 दिसंबर को मोटर अधिनियम के तहत नई कंपनी बनाकर बस संचालन की घोषणा की है। नई नीति के अनुसार, जो भी कंपनी टेंडर में अधिक राशि देगी, वही बस सेवा का संचालन करेगी। यह कदम ऑपरेटरों के लिए अनुचित और अस्तित्व संकट का कारण बन सकता है। अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो 2 मार्च से प्रदेश भर में बसों के पहिए थम जाएंगे।
हालांकि, सरकार का दावा है कि अप्रैल में नई कंपनी के तहत बसों का संचालन शुरू होगा। इसके लिए बसों को अनुबंधित (लीज पर लेने) किया जाएगा और संचालन चरणबद्ध तरीके से होगा। इंदौर संभाग में बस संचालन एआइसीटीएसएल के हाथ में रहेगा, जबकि अन्य संभागों में अलग-अलग सहायक कंपनियां जिम्मेदारी संभालेंगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से यात्रियों को सुरक्षित, अनुशासित और नियमित बस सेवा मिलेगी, और ऑपरेटरों की आय भी मौजूदा व्यवस्था से बेहतर होगी।
बस ऑपरेटरों और सरकार के बीच यह टकराव यात्रियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञ और यात्री संगठन हड़ताल से पहले वैकल्पिक परिवहन के लिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। निजी वाहन या ट्रेन के जरिए यात्रा की संभावना बढ़ सकती है। विशेषकर होली के समय यह हड़ताल लाखों यात्रियों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है।
इस पूरे मामले से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में परिवहन नीति लागू करने से पहले सरकार और ऑपरेटरों के बीच संवाद और समाधान जरूरी है। दोनों पक्षों को साझा समाधान निकालना होगा ताकि यात्रियों की परेशानियां कम से कम हों। हड़ताल से आम जनता पर भारी असर पड़ सकता है, इसलिए प्रशासन को भी यातायात व्यवस्था के वैकल्पिक इंतजाम करने की आवश्यकता है।
यदि बस ऑपरेटरों की मांगें नहीं मानी गईं तो 2 मार्च से प्रदेशभर में बस संचालन ठप रह सकता है, जिससे होली के समय यात्रा करने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। यात्रियों को अपने यात्रा प्लान में बदलाव करने और वैकल्पिक साधनों के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है।