Author: bharati

  • सिनेमा का सबसे विशाल सेट: बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन के महिष्मती राज्य ने रचा इतिहास

    सिनेमा का सबसे विशाल सेट: बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन के महिष्मती राज्य ने रचा इतिहास

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत में बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन एक ऐसी ऐतिहासिक फिल्म के रूप में जानी जाती है, जिसने अपने शानदार निर्माण और विशालता से एक नया मानक स्थापित किया। इस फिल्म की सफलता के पीछे केवल कहानी या अभिनय ही नहीं, बल्कि इसकी भव्य प्रस्तुति और विशाल सेट भी बड़ी वजह रहे।

    फिल्म में दिखाया गया महिष्मती साम्राज्य वास्तव में एक कल्पनात्मक दुनिया था, जिसे बेहद वास्तविक रूप देने के लिए विशाल स्तर पर निर्माण कार्य किया गया। हैदराबाद के प्रसिद्ध रामोजी फिल्म सिटी में करीब 100 एकड़ क्षेत्र में इस सेट को तैयार किया गया। इस भव्य सेट को खड़ा करने में लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च हुए और 500 से अधिक लोगों ने मिलकर इसे तैयार किया।

    इस विशाल प्रोजेक्ट के पीछे कला निर्देशक साबू सिरिल और उनकी टीम की अहम भूमिका रही। उन्होंने हर एक संरचना, महल और युद्धस्थल को इस तरह डिजाइन किया कि वह पर्दे पर पूरी तरह जीवंत नजर आए। सेट की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे दर्शकों को एक वास्तविक साम्राज्य का अनुभव मिल सके।

    फिल्म की शूटिंग केवल स्टूडियो तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई महत्वपूर्ण दृश्यों को प्राकृतिक लोकेशनों पर भी फिल्माया गया। केरल के प्रसिद्ध अथिरप्पिल्ली जलप्रपात जैसे स्थानों पर शूट किए गए दृश्य फिल्म की खूबसूरती और भव्यता को और बढ़ाते हैं। खासकर झरनों के आसपास फिल्माए गए सीन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने।

    एक रोचक तथ्य यह भी है कि फिल्म के पहले भाग की शूटिंग के दौरान ही दूसरे भाग के कुछ हिस्सों को पहले ही शूट कर लिया गया था। इससे फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया गया और समय की बचत भी हुई। बाद में शेष हिस्सों को पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ पूरा किया गया।

    फिल्म की लोकप्रियता इतनी अधिक रही कि इससे जुड़ी चीजों को संरक्षित रखने के लिए एक विशेष संग्रहालय भी बनाया गया, जहां फिल्म में इस्तेमाल किए गए हथियार, कवच और सेट के हिस्से आज भी सुरक्षित रखे गए हैं। यहां आने वाले लोग उस भव्य दुनिया को करीब से महसूस कर सकते हैं, जिसे उन्होंने पर्दे पर देखा था।

    इस तरह बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन ने यह साबित कर दिया कि अगर कल्पना, तकनीक और मेहनत का सही तालमेल हो, तो सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक भव्य अनुभव भी बन सकता है।

  • गुरु को सम्मान, युवाओं को संदेश: Virat Kohli ने किया नए क्रिकेट हब का शुभारंभ..

    गुरु को सम्मान, युवाओं को संदेश: Virat Kohli ने किया नए क्रिकेट हब का शुभारंभ..

    नई दिल्ली में एक खास अवसर देखने को मिला, जब भारतीय क्रिकेट के स्टार बल्लेबाज Virat Kohli ने अपने शुरुआती क्रिकेट सफर से जुड़े एक अहम पड़ाव को फिर से जिया। उन्होंने अपने बचपन के कोच Rajkumar Sharma की क्रिकेट अकादमी के नए ब्रांच का उद्घाटन किया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसमें भावनाएं, यादें और प्रेरणा तीनों का संगम देखने को मिला।

    इस नए प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत के साथ ही स्थानीय युवा खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं का रास्ता खुल गया है। यहां आधुनिक संसाधनों और अनुभवी मार्गदर्शन के जरिए उभरते क्रिकेटरों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान कई लोग मौजूद रहे, जिससे इस पहल की अहमियत साफ नजर आई।

    मौके पर मौजूद छात्रों से बातचीत करते हुए कोहली ने अपने जीवन के शुरुआती अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने कम उम्र में ही क्रिकेट को लेकर अपनी सोच स्पष्ट कर ली थी और उसी दिशा में पूरी लगन से काम करना शुरू कर दिया था। उनके अनुसार, जीवन में लक्ष्य तय करना और उसके प्रति ईमानदार रहना बेहद जरूरी है।

    उन्होंने छात्रों को यह भी समझाया कि स्कूल का समय केवल पढ़ाई के लिए नहीं होता, बल्कि यह वह दौर होता है जहां इंसान अपने व्यक्तित्व को आकार देता है। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि छात्रों को अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और ध्यान बनाए रखना चाहिए, क्योंकि वही उन्हें सही दिशा दिखाते हैं।

    अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कोहली ने बताया कि उन्होंने बहुत छोटी उम्र से ही नियमित अभ्यास शुरू कर दिया था। इस अकादमी के साथ उनका गहरा जुड़ाव रहा है और आज भी जब समय मिलता है, वह यहां आकर अपने पुराने दिनों को याद करते हैं। उनके लिए यह जगह केवल अभ्यास का मैदान नहीं, बल्कि उनके सपनों की शुरुआत का केंद्र है।

    उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने क्रिकेट को अपने करियर के रूप में चुनने का फैसला लिया, तब उन्होंने अपने परिवार और शिक्षकों से पूरी ईमानदारी के साथ यह बात साझा की। यही पारदर्शिता और समर्पण आगे चलकर उनके सफल करियर की नींव बनी।

    इस नए ब्रांच के शुरू होने से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यहां से कई नए खिलाड़ी निकलेंगे, जो क्रिकेट के क्षेत्र में अपना नाम बनाएंगे। कार्यक्रम के अंत में कोहली ने सभी युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अगर वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहेंगे, तो सफलता जरूर मिलेगी।

    यह आयोजन न केवल एक नई शुरुआत का प्रतीक बना, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि कड़ी मेहनत, सही मार्गदर्शन और स्पष्ट लक्ष्य के साथ कोई भी अपने सपनों को हकीकत में बदल सकता है।

  • सोमनाथ दौरे पर अमित शाह, पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सामाजिक पहलों की शुरुआत

    सोमनाथ दौरे पर अमित शाह, पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सामाजिक पहलों की शुरुआत

    नई दिल्ली। गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ धाम में एक विशेष धार्मिक अवसर देखने को मिला, जब देश के गृह मंत्री अमित शाह ने यहां पहुंचकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।

    मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। ध्वजा पूजा, तग पूजा और महापूजा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने अपनी आस्था प्रकट की। इस दौरान एक विशेष भेंट भी अर्पित की गई, जो भारतीय परंपरा और ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित थी। इस पूरे आयोजन ने मंदिर की प्राचीन परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

    पूजा के बाद मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराने की परंपरा भी निभाई गई, जिसे अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान मंदिर प्रशासन द्वारा उनका स्वागत किया गया और उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह पूरा दृश्य श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहा।

    इस अवसर पर एक विशेष धार्मिक आयोजन की शुरुआत भी की गई, जिसमें भक्तों को भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन के तहत भगवान शिव का अभिषेक पंचामृत, दूध और अन्य पवित्र सामग्री से किया जाएगा। साथ ही वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच पूजा संपन्न होगी। इसमें गौ-पूजा, ब्राह्मण भोजन और अन्य पारंपरिक अनुष्ठान भी शामिल किए गए हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

    धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक और ज्ञानवर्धक पहल भी इस मौके पर शुरू की गई। इसके तहत एक डिजिटल माध्यम के जरिए प्राचीन भारतीय ज्ञान और परंपराओं को लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना और उन्हें भारतीय परंपरा के महत्व से अवगत कराना है।

    इसके अलावा, सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए जरूरतमंद लोगों के लिए एक विशेष पहल भी की गई। स्वास्थ्य से जुड़ी इस पहल के अंतर्गत पोषण सामग्री का वितरण किया गया, जिससे जरूरतमंदों को सहायता मिल सके। यह कदम दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ समाज सेवा को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है।

    इस पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में आस्था, संस्कृति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। यह दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं रहा, बल्कि इसमें समाज और संस्कृति के प्रति समर्पण का व्यापक संदेश भी निहित था, जिसे वहां मौजूद लोगों ने गहराई से अनुभव किया।

  • गुजरात की विरासत ने जीता दुनिया का दिल, कच्छ की तांबे की घंटियां अब विदेशों में भी लोकप्रिय

    गुजरात की विरासत ने जीता दुनिया का दिल, कच्छ की तांबे की घंटियां अब विदेशों में भी लोकप्रिय

    नई दिल्ली। गुजरात के कच्छ क्षेत्र की पारंपरिक कॉपर बेल कला आज अपनी सीमाओं को पार करते हुए वैश्विक पहचान हासिल कर रही है। पीढ़ियों से चली आ रही यह हस्तकला अब केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी खास जगह बना चुकी है। कच्छ के गांवों में रहने वाले कारीगर इस परंपरा को आज भी पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

    कॉपर बेल बनाने की प्रक्रिया बेहद मेहनत और कौशल से जुड़ी होती है। इसमें सबसे पहले धातु की शीट से घंटी का ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद उस पर तांबे या पीतल की परत चढ़ाई जाती है और फिर इसे भट्टी में पकाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद घंटियों को अंतिम आकार दिया जाता है और उनमें एक विशिष्ट ध्वनि उत्पन्न की जाती है, जो इन्हें खास बनाती है।

    इस कला की खास बात यह है कि इसमें परिवार के सभी सदस्य शामिल होते हैं। अलग-अलग चरणों में सभी अपनी भूमिका निभाते हैं, जिससे यह केवल एक काम नहीं बल्कि पारिवारिक परंपरा का हिस्सा बन जाता है। समय के साथ कारीगरों ने इसमें नए डिजाइन और आधुनिक रूप भी शामिल किए हैं, जिससे इसकी मांग और अधिक बढ़ गई है।

    पहले ये घंटियां मुख्य रूप से पशुओं के गले में बांधने के लिए बनाई जाती थीं, लेकिन अब इनका उपयोग सजावट के रूप में भी व्यापक रूप से होने लगा है। घरों, होटलों और विभिन्न आयोजनों में इनका उपयोग बढ़ने से इनकी उपयोगिता और लोकप्रियता दोनों में इजाफा हुआ है।

    सरकारी सहयोग और योजनाओं के चलते इस पारंपरिक कला को नई दिशा मिली है। नए डिजाइनों और तकनीकों के जरिए इसे आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है। इससे कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूती मिल रही है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

    जीआई टैग मिलने के बाद इस कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। अब कच्छ की कॉपर बेल्स अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में निर्यात की जा रही हैं, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

    इस बढ़ती लोकप्रियता ने न केवल कच्छ की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूती दी है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। आज यह कला भारत की पारंपरिक विरासत का एक ऐसा उदाहरण बन चुकी है, जो वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना रही है।

  • गंगा एक्सप्रेसवे पर तैयार हो रहा हाई-इंसेंटिव मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर..

    गंगा एक्सप्रेसवे पर तैयार हो रहा हाई-इंसेंटिव मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर..

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बनाए जा रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स अब तेजी से एक बड़े निवेश केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। यह पूरा क्षेत्र अब सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं रहा, बल्कि इसे एक हाई-इंसेंटिव इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में तैयार किया जा रहा है।

    इस क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्योगों के लिए सरकार की ओर से कई स्तरों पर आर्थिक लाभ दिए जा रहे हैं। इसमें पूंजी निवेश पर आकर्षक सब्सिडी, टैक्स में छूट और अन्य वित्तीय प्रोत्साहन शामिल हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य उद्योग स्थापित करने की लागत को कम करना और निवेशकों के लिए माहौल को अधिक अनुकूल बनाना है।

    भूमि आवंटन और उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। निवेशकों को कम कागजी प्रक्रिया और तेज मंजूरी व्यवस्था का लाभ मिल रहा है, जिससे प्रोजेक्ट जल्दी शुरू हो सके। इसके साथ ही विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए भी विशेष रियायतों का प्रावधान किया गया है।

    ऊर्जा क्षेत्र में भी उद्योगों को राहत दी जा रही है। कुछ श्रेणियों के निवेशकों को निर्धारित अवधि तक बिजली शुल्क में छूट दी जा रही है, जिससे उनके संचालन खर्च में कमी आए। इसके अलावा पर्यावरण के अनुकूल उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं।

    नवाचार और तकनीकी विकास को मजबूत करने के लिए अनुसंधान आधारित परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत नए विचारों और आधुनिक तकनीकों को अपनाने वाले उद्योगों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

    निवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए एक डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है, जहां सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। इससे निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और समय की बचत होती है।

    इन सभी प्रयासों के चलते गंगा एक्सप्रेसवे के आसपास का क्षेत्र तेजी से एक आधुनिक औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभर रहा है, जो आने वाले समय में राज्य की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा सकता है।

  • दिल्ली विधानसभा में हंगामा, महिला आरक्षण बिल पर BJP का प्रदर्शन, सत्र से पहले गरमाया माहौल

    दिल्ली विधानसभा में हंगामा, महिला आरक्षण बिल पर BJP का प्रदर्शन, सत्र से पहले गरमाया माहौल

    नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में आज का दिन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और तनावपूर्ण बन गया है। महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर आयोजित विशेष सत्र शुरू होने से पहले ही माहौल गर्म हो गया, जब भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन उस राजनीतिक असंतोष को दर्शाता है, जो लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर बना हुआ है।

    सत्र की शुरुआत से पहले ही विधानसभा परिसर के बाहर और भीतर हलचल बढ़ गई। भाजपा विधायकों ने महिला आरक्षण बिल को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और नारेबाज़ी करते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस प्रदर्शन ने पूरे राजनीतिक वातावरण को एक अलग दिशा दे दी।

    वहीं, सत्र के दौरान इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की संभावना जताई गई है। महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव को लेकर सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया है कि इस पर गंभीर विचार किया जाएगा। मंत्री स्तर से यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री स्वयं इस विषय पर एक प्रस्ताव लेकर आई हैं, जिस पर सदन में चर्चा की जाएगी।

    दूसरी ओर विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव से पहले किए गए वादों को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है। इसी क्रम में महिलाओं को दिए गए आर्थिक सहायता वादों का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    सत्र से पहले हुई इस राजनीतिक हलचल ने साफ कर दिया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल विधायी चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे को अपने-अपने दृष्टिकोण से पेश कर रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर टकराव का माहौल स्वाभाविक है, क्योंकि यह सीधे सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ मामला है। ऐसे में हर पक्ष अपनी बात को मजबूती से रखना चाहता है।

    सत्र के दौरान आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस चर्चा से कोई ठोस नतीजा निकलता है या यह केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक ही सीमित रह जाता है। फिलहाल, दिल्ली विधानसभा का यह विशेष सत्र अपने शुरुआती चरण में ही राजनीतिक गर्मी का केंद्र बन चुका है, और आगे की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • सरकारी नौकरी मिलने पर खुशी की लहर, अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया को बताया निष्पक्ष और साफ-सुथरी

    सरकारी नौकरी मिलने पर खुशी की लहर, अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया को बताया निष्पक्ष और साफ-सुथरी

    नई दिल्ली। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में सैकड़ों युवाओं के लिए खुशी का बड़ा मौका देखने को मिला, जब उन्हें सरकारी सेवा में चयन का नियुक्ति पत्र सौंपा गया। इस मौके पर पूरे आयोजन स्थल पर उत्साह और गर्व का माहौल था। लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह दिन उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया।

    कार्यक्रम में शामिल अभ्यर्थियों के चेहरे सफलता की खुशी से चमक उठे। कई युवाओं ने इसे अपने जीवन की पहली बड़ी उपलब्धि बताया, जबकि कुछ ने इसे अपने परिवार के सपनों की पूर्ति के रूप में देखा। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद युवाओं में आत्मविश्वास और संतोष साफ झलक रहा था।

    चयनित अभ्यर्थियों ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बताया। उनका कहना था कि इस बार चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश नहीं रही, जिससे मेहनत करने वाले उम्मीदवारों को उनका सही हक मिला है। इसी वजह से युवाओं का सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

    कई अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि इस तरह की पारदर्शी प्रक्रिया से युवाओं में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। उनका मानना है कि जब चयन प्रक्रिया साफ और ईमानदार होती है, तो मेहनत का परिणाम भी सही दिशा में मिलता है। इस अवसर पर कई युवाओं ने अपने परिवार के साथ इस खुशी को साझा किया और इसे जीवन का यादगार पल बताया।

    कार्यक्रम के दौरान अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि सरकारी सेवा में चयन होना केवल नौकरी नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है, जिसे वे पूरी ईमानदारी के साथ निभाएंगे। उनका कहना था कि अब उनका लक्ष्य प्रशिक्षण पूरा करके सेवा में योगदान देना है।

    कुछ चयनित युवाओं ने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में और अधिक युवाओं को ऐसे अवसर मिलेंगे, जिससे रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। उनका कहना था कि यह अवसर न केवल उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में जिम्मेदारी निभाने का भी मौका देता है।

    पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल बेहद सकारात्मक रहा और हर ओर खुशी और संतोष का भाव दिखाई दिया। यह अवसर उन युवाओं के लिए एक नई शुरुआत साबित हुआ, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है।

  • सतना में सुरक्षा में बड़ी चूक वन स्टॉप सेंटर से तीन लड़कियां फरार पहले भी घर से भाग चुकी थीं

    सतना में सुरक्षा में बड़ी चूक वन स्टॉप सेंटर से तीन लड़कियां फरार पहले भी घर से भाग चुकी थीं


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना शहर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहां जवाहर नगर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर से तीन नाबालिग लड़कियां देर रात खिड़की तोड़कर फरार हो गईं। यह मामला सामने आते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार तीनों बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के आदेश पर वन स्टॉप सेंटर में अस्थायी आश्रय दिया गया था। इनमें से एक लड़की उत्तर प्रदेश के बिजनौर की रहने वाली बताई जा रही है जबकि अन्य दो सतना जिले के पौराणिक टोला और रामपुर बघेलान क्षेत्र से हैं। ये सभी पहले भी अपने घरों से भाग चुकी थीं जिसके बाद उन्हें सुरक्षा और देखरेख के लिए सेंटर में रखा गया था।

    बताया जा रहा है कि जिस डोरमेट्री में तीनों रह रही थीं वहां की खिड़की को उन्होंने रात के समय तोड़ दिया और एक-एक कर बाहर निकल गईं। इसके बाद वे सेंटर परिसर से बाहर निकलने में सफल हो गईं। हैरानी की बात यह है कि सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और मुख्य द्वार पर चौकीदार की तैनाती भी रहती है इसके बावजूद लड़कियों का इस तरह भाग जाना सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।

    प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि सेंटर के पीछे स्थित मैदान की ओर से तीनों ने भागने का रास्ता चुना। पीछे की दिशा में सीएम राइज स्कूल मैदान होने के कारण वहां निगरानी अपेक्षाकृत कम थी और इसी का फायदा उठाकर वे फरार हो गईं।

    घटना की जानकारी मिलते ही सेंटर की अधीक्षिका नीता श्रीवास्तव ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। इसके बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने अलग-अलग टीमें गठित की हैं जो संभावित स्थानों पर लड़कियों की तलाश कर रही हैं। रेलवे स्टेशन बस स्टैंड और शहर के अन्य प्रमुख स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    इसके साथ ही स्मार्ट सिटी और रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि लड़कियों की मूवमेंट का पता लगाया जा सके। पुलिस उनके परिजनों और परिचितों से भी संपर्क कर रही है जिससे यह अंदाजा लगाया जा सके कि वे किन संभावित ठिकानों पर जा सकती हैं।

    यह घटना केवल एक फरारी का मामला नहीं है बल्कि यह बालिकाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह भी खड़ा करती है। जिस जगह को सुरक्षित आश्रय माना जाता है वहीं से इस तरह नाबालिगों का भाग जाना चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्दी इन लड़कियों को सुरक्षित ढूंढ पाती है और साथ ही प्रशासन इस घटना से सबक लेकर सुरक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत करता है।

  • 1 से 30 मई तक बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान ,नई कार्यसमिति जल्द राम नगरी ओरछा में होगी अहम बैठक

    1 से 30 मई तक बीजेपी का मेगा प्रशिक्षण अभियान ,नई कार्यसमिति जल्द राम नगरी ओरछा में होगी अहम बैठक


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है जहां भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। राजधानी भोपाल स्थित पार्टी कार्यालय में हुई अहम बैठक में आने वाले दिनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में प्रदेश स्तर के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने पर जोर दिया गया।

    इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 1 मई से 30 मई तक व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण सत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं को कुल 11 अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। उनका कहना था कि भाजपा की कार्यप्रणाली में नियमित प्रशिक्षण का विशेष महत्व है और इसी के माध्यम से कार्यकर्ताओं को विचारधारा संगठनात्मक कौशल और जनसंपर्क के तरीकों में दक्ष बनाया जाता है।

    बैठक में डॉ. मोहन यादव सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए। इसके अलावा राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश प्रदेश प्रभारी डॉ महेन्द्र सिंह और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल समेत अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी प्रशिक्षण महाअभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    इस पूरी प्रक्रिया के बीच सबसे महत्वपूर्ण घोषणा प्रदेश कार्यसमिति को लेकर सामने आई। हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट संकेत दिए कि नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची जल्द जारी की जाएगी। यह कार्यसमिति आगामी समय में पार्टी के संगठनात्मक फैसलों और राजनीतिक रणनीति का केंद्र होगी। कार्यसमिति के गठन को लेकर कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्सुकता भी बढ़ गई है क्योंकि इसमें शामिल नाम भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

    खास बात यह है कि नई कार्यसमिति के गठन के बाद उसकी पहली बैठक ऐतिहासिक स्थल ओरछा में आयोजित की जाएगी। यह बैठक भगवान राम के दरबार में आयोजित करने की योजना है जिससे इसे सांस्कृतिक और वैचारिक महत्व भी दिया जा रहा है। पार्टी इसे केवल एक संगठनात्मक बैठक नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक और प्रेरणादायक शुरुआत के रूप में देख रही है।

    निगम मंडलों में नियुक्तियों को लेकर भी प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई बार सभी की सहमति एक नाम पर नहीं बन पाती इसलिए प्रक्रिया में समय लगता है लेकिन सरकार और संगठन योग्य और काबिल लोगों को ही जिम्मेदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध और मतभेद हर युग में रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो भाजपा ने मध्यप्रदेश में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। मई का महीना पार्टी के लिए बेहद अहम रहने वाला है जिसमें प्रशिक्षण अभियान के साथ-साथ नई कार्यसमिति का गठन और उसकी पहली बैठक राजनीतिक रूप से कई संकेत देने वाली होगी।

  • सिक्किम दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी ने खेला मैच, आज कई बड़ी परियोजनाओं का करेंगे शिलान्यास

    सिक्किम दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी ने खेला मैच, आज कई बड़ी परियोजनाओं का करेंगे शिलान्यास

    नई दिल्ली। सिक्किम की स्थापना के 50 गौरवशाली वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बेहद ऊर्जावान और अनूठे अवतार में नजर आए। गंगटोक की ठंडी और ताजी सुबह में प्रधानमंत्री ने प्रोटोकॉल से हटकर स्थानीय बच्चों और युवाओं के साथ फुटबॉल के मैदान पर समय बिताया। स्पोर्ट्स जैकेट पहने प्रधानमंत्री ने न केवल गेंद पर अपने हाथ आजमाए, बल्कि युवाओं के साथ मैदान की दौड़ भी लगाई।

    खेल के प्रति प्रधानमंत्री का यह समर्पण और उनका ‘सुपर एनर्जेटिक’ अंदाज़ वहां मौजूद खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया। प्रधानमंत्री ने इस पल को यादगार बताते हुए युवाओं की असीमित ऊर्जा की जमकर सराहना की।

    प्रधानमंत्री का यह दो दिवसीय दौरा केवल खेल और उत्साह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिक्किम के भविष्य की नई इबारत लिखने वाला है। आज के विशेष कार्यक्रम में वे राज्य के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती देने के लिए 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं का उपहार देंगे। इन योजनाओं का मुख्य केंद्र शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी है।

    गंगटोक के पलजोर स्टेडियम से प्रधानमंत्री एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे और राज्य के पहले मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ सिक्किम विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर का भी लोकार्पण करेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रदेश के 160 स्कूलों को आधुनिक आईटी सुविधाओं से लैस कर बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जाएगा।

    सिक्किम की दुर्गम भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बड़ा निवेश किया जा रहा है। तीस्ता नदी पर दो विशाल स्टील आर्च पुलों का निर्माण शुरू होगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए यात्रा सुगम हो सकेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेद और सोवा रिग्पा अस्पतालों की आधारशिला रखी जाएगी।

    इसके अलावा, पर्यटन और पर्यावरण को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आधुनिक ऑर्किड सेंटर और कैलाश मानसरोवर यात्रा की नई सुविधाओं का उद्घाटन भी प्रस्तावित है। कृषि क्षेत्र में किसानों की समृद्धि के लिए नए प्रोसेसिंग प्लांट और खेल प्रतिभाओं के लिए इनडोर क्रिकेट स्टेडियम जैसी सुविधाएं सिक्किम के समग्र विकास को एक नई गति प्रदान करेंगी।