Author: bharati

  • लीबिया में तेल-गैस खोज से बढ़ी भारत की वैश्विक ऊर्जा ताकत, केंद्र ने बताया बड़ा कदम

    लीबिया में तेल-गैस खोज से बढ़ी भारत की वैश्विक ऊर्जा ताकत, केंद्र ने बताया बड़ा कदम


    नई दिल्ली| भारत की ऊर्जा कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि लीबिया में भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा की गई तेल और गैस की खोज देश की बढ़ती वैश्विक ऊर्जा उपस्थिति का संकेत है।

    सरकार के अनुसार, Oil India Limited और Indian Oil Corporation Limited ने स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर लीबिया के घदामेस बेसिन में यह खोज की है। यह कार्य अल्जीरिया की एसआईपीईएक्स के साथ एक भारतीय कंसोर्टियम के तहत किया गया।

    यह खोज कॉन्ट्रैक्ट एरिया 95/96 में हुई, जहां कुओं की खुदाई लगभग 8,440 फीट गहराई तक की गई। परीक्षण के दौरान इस कुएं से प्रतिदिन करीब 13 मिलियन क्यूबिक फीट गैस और 327 बैरल कंडेनसेट उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसे एक सकारात्मक और व्यावसायिक रूप से उपयोगी संकेत माना जा रहा है।

    केंद्र सरकार ने इस उपलब्धि पर दोनों कंपनियों को बधाई देते हुए कहा कि यह खोज भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय तेल कंपनियां अब घरेलू बाजार से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

    सरकार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए ऊर्जा संपत्तियों में निवेश और खोज से भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।

    इसी बीच सरकार ने यह भी दोहराया कि देश में कच्चे तेल के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर 2030 तक 29 मिलियन टन से 35 मिलियन मीट्रिक टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने और नई नीतियों के तहत तेजी से खोज एवं विकास कार्य किए जा रहे हैं।

    बाजार में भी इस खबर का असर देखा गया, जहां Oil India Limited के शेयर में मजबूती दर्ज की गई, जबकि Indian Oil Corporation Limited में मामूली गिरावट देखने को मिली।

    कुल मिलाकर यह खोज भारत की ऊर्जा रणनीति और वैश्विक विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा दे सकती है।

  • पावरप्ले में ऐतिहासिक शर्मिंदगी: दिल्ली कैपिटल्स 13/6 पर ढही, IPL इतिहास का सबसे खराब आगाज़ दर्ज

    पावरप्ले में ऐतिहासिक शर्मिंदगी: दिल्ली कैपिटल्स 13/6 पर ढही, IPL इतिहास का सबसे खराब आगाज़ दर्ज


    नई दिल्ली।
    क्रिकेट के मैदान पर अनिश्चितताओं का दौर हमेशा बना रहता है, लेकिन दिल्ली कैपिटल्स ने सोमवार को जो कर दिखाया, उसने प्रशंसकों को हतप्रभ कर दिया है। शनिवार को जिस टीम ने विपक्षी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए 264 रनों का पहाड़ खड़ा किया था, वही टीम मात्र 48 घंटे के भीतर ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
    अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ आईपीएल इतिहास का सबसे शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। टीम महज 75 रनों पर सिमट गई, लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला प्रदर्शन पावरप्ले के दौरान रहा। दिल्ली की टीम शुरुआती 6 ओवरों के भीतर केवल 13 रन बना सकी और इस दौरान उसने अपने 6 प्रमुख बल्लेबाजों को गंवा दिया, जो कि टूर्नामेंट के इतिहास में अब तक का सबसे खराब पावरप्ले प्रदर्शन है।

    मैच की शुरुआत से ही दिल्ली के बल्लेबाजों में आत्मविश्वास की भारी कमी दिखी और बेंगलुरु के गेंदबाजों ने इसका भरपूर फायदा उठाया। भुवनेश्वर कुमार की स्विंग और सटीक गेंदबाजी के आगे दिल्ली का शीर्ष क्रम पूरी तरह बेबस नजर आया। पहले ही ओवर की दूसरी गेंद पर विकेट गिरने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह थमने का नाम ही नहीं ले रहा था।

    आलम यह था कि महज 8 रन के स्कोर तक दिल्ली कैपिटल्स के आधे से ज्यादा बल्लेबाज पवेलियन वापस लौट चुके थे। केएल राहुल, समीर रिज्वी, ट्रिस्टन स्टब्स और अक्षर पटेल जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी क्रीज पर टिकने का साहस नहीं जुटा पाए। पावरप्ले में 13 रन पर 6 विकेट का यह स्कोर अब राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के उन पुराने रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ चुका है, जहां टीमें 14 रन बनाकर संघर्ष कर रही थीं।

    दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह हार न केवल तकनीकी रूप से एक झटका है, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी यह टीम को झकझोर देने वाली घटना है। एक मैच में रनों का अंबार लगाने वाली टीम का अगले ही मैच में 100 रन के आंकड़े तक न पहुंच पाना खेल की अनिश्चितता और टीम के अस्थिर प्रदर्शन को उजागर करता है।

    बेंगलुरु के कप्तान के टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने के फैसले को उनके गेंदबाजों ने बिल्कुल सही साबित कर दिखाया। पूरी पारी के दौरान दिल्ली का कोई भी बल्लेबाज पिच के मिजाज को नहीं समझ सका और गलत शॉट चयन की वजह से विकेट गंवाते चले गए। अब यह टीम मैनेजमेंट के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण है कि कैसे एक ही सीजन में टीम का प्रदर्शन इतनी बुरी तरह अर्श से फर्श पर आ गया।
  • हॉर्मुज स्ट्रेट से तनाव के बीच पहली बार निकला LNG टैंकर, शिपिंग रूट पर फिर हलचल

    हॉर्मुज स्ट्रेट से तनाव के बीच पहली बार निकला LNG टैंकर, शिपिंग रूट पर फिर हलचल


    नई दिल्ली| मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट से पहली बार एक लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकर सफलतापूर्वक गुजरने में कामयाब रहा है। यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर बना हुआ है।

    शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह LNG टैंकर मार्च की शुरुआत में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दास द्वीप प्लांट से लोड होकर रवाना हुआ था। इसके बाद यह टैंकर भारत के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र से गुजरता हुआ आगे बढ़ा। बताया जा रहा है कि तनाव के चलते यह टैंकर कई हफ्तों तक फारस की खाड़ी में ही रुका रहा और इसके ट्रांसमिशन सिग्नल 31 मार्च के आसपास बंद हो गए थे, जो बाद में भारत के नजदीक आने पर फिर से सक्रिय हुए।

    हॉर्मुज स्ट्रेट, जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक बेहद संकरा और रणनीतिक समुद्री मार्ग है, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस का निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

    हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां काफी प्रभावित हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने इस स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है, जबकि अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं।

    इसी तनाव के बीच कई LNG टैंकरों को कतर से रवाना होने के बाद वापस लौटना पड़ा था। हालांकि अब इस नए टैंकर के गुजरने को एक संभावित राहत संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती।

    सूत्रों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत भी चल रही है। ईरान ने एक नया शांति प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें हॉर्मुज स्ट्रेट खोलने की बात शामिल है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर असहमति के चलते अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है।

    इस बीच यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में यह समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य होता है या फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर और गहराता है।

  • उज्जैन में सनसनी: कृषि अध्ययनशाला के गेट पर धमकी भरा संदेश, लिखा- “तुम सब मरोगे”

    उज्जैन में सनसनी: कृषि अध्ययनशाला के गेट पर धमकी भरा संदेश, लिखा- “तुम सब मरोगे”


    नई दिल्ली| उज्जैन में स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की कृषि अध्ययनशाला में सोमवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब परिसर के मुख्य गेट पर अज्ञात लोगों द्वारा डरावना संदेश लिखा पाया गया। दीवार पर कुंकू से “तुम सब मरोगे” लिखा हुआ मिला, जिससे शिक्षक, कर्मचारी और छात्र भयभीत हो गए।
    यह घटना रात करीब 2 से 3 बजे के बीच की बताई जा रही है। रविवार की छुट्टी के बाद जब सोमवार सुबह चौकीदार आशीष बोरिंग चालू करने पहुंचे, तो उन्होंने गेट के पास मटकी, लाल कपड़ा और तंत्र क्रिया जैसे प्रतीक देखे। इसी दौरान दीवार पर लिखा यह डरावना संदेश भी सामने आया।
    घटना स्थल पर मिले इन संदिग्ध सामानों ने पूरे परिसर में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। बताया जा रहा है कि यह नई बिल्डिंग है, जहां करीब 10 दिन पहले ही कक्षाएं शुरू हुई हैं और लगभग 1100 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।
    घटना के समय चौकीदार ने बताया कि रात करीब 2 बजे तक स्टाफ परिसर में मौजूद था, लेकिन इसके बाद यह घटना घटित हुई। सुबह जैसे ही यह मामला सामने आया, शिक्षकों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया और तुरंत प्रशासन को सूचना दी गई।
    सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भवन के बाहर CCTV कैमरे नहीं लगे हैं, जिसके कारण अज्ञात शरारती तत्वों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन और अधिकारी मामले की जांच में जुटे हुए हैं।
    घटना के बाद दीवार पर लिखा संदेश पुताई कर मिटा दिया गया है, लेकिन परिसर में भय और असुरक्षा का माहौल अभी भी बना हुआ है। अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि यह किसी अंधविश्वास से जुड़ी हरकत है या जानबूझकर दहशत फैलाने की कोशिश।

  • सड़क सुरक्षा पर हाईकोर्ट का सवाल- अवैध कट और धीमी एंबुलेंस सेवा पर मांगा जवाब

    सड़क सुरक्षा पर हाईकोर्ट का सवाल- अवैध कट और धीमी एंबुलेंस सेवा पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली|  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए अहम सवाल खड़े किए हैं। चीफ जस्टिस Sanjeev Sachdeva और जस्टिस Vinay Saraf की डिविजन बेंच ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि जब ओला-उबर जैसी कैब सेवाएं कुछ ही मिनटों में उपलब्ध हो जाती हैं, तो आपात स्थिति में एंबुलेंस समय पर क्यों नहीं पहुंचती?

    कोर्ट ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एनएचएआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि यह मामला सीधे लोगों की जान से जुड़ा है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

    याचिका डिंडोरी निवासी सेवानिवृत्त अधिकारी Mahavir Singh द्वारा दायर की गई है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि सड़क दुर्घटनाओं में जान बचाने के लिए ओला-उबर जैसी रियल टाइम एंबुलेंस सेवा लागू की जाए। उनका कहना है कि समय पर मेडिकल सहायता न मिलने के कारण कई जिंदगियां बचाई नहीं जा पातीं।

    याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। खासतौर पर भोपाल-जबलपुर हाईवे का जिक्र करते हुए बताया गया है कि यहां डिवाइडर तोड़कर करीब 300 अवैध कट-प्वाइंट्स बना दिए गए हैं, जो लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।

    कोर्ट में यह भी कहा गया कि इन अवैध कट-प्वाइंट्स के कारण न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि एंबुलेंस की आवाजाही भी प्रभावित होती है, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है।

    हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से विस्तृत जवाब और रिपोर्ट तलब करते हुए अगली सुनवाई में पूरी जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस टिप्पणी के बाद अब सड़क सुरक्षा और एंबुलेंस सिस्टम को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।


  • ग्वालियर में सनसनीखेज वारदात, जीजा ने साले पर किया जानलेवा हमला, सड़क पर तड़पता छोड़ा

    ग्वालियर में सनसनीखेज वारदात, जीजा ने साले पर किया जानलेवा हमला, सड़क पर तड़पता छोड़ा


    नई दिल्ली| मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से एक रूह कँपा देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ रिश्तों का कत्ल करने की कोशिश की गई। थाटीपुर थाना क्षेत्र की मेहरा कॉलोनी में एक जीजा ने अपने ही साले पर क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। महज एक मामूली बहस के बाद, आवेश में आए जीजा ने सब्जी काटने वाले चाकू से अपने साले के शरीर को छलनी कर दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, हमला इतना तेज और बेरहम था कि पीड़ित को संभलने तक का मौका नहीं मिला। गर्दन, पेट, पीठ और सीने पर एक के बाद एक 24 वार किए गए, जिससे युवक खून से लथपथ होकर सड़क पर ही गिर पड़ा और तड़पने लगा।

    सुलह की कोशिश बनी खूनी संघर्ष की वजह
    पुलिस जांच में सामने आया है कि इस विवाद की जड़ें चार साल पुरानी हैं। मुरैना निवासी देवेंद्र रजक की बहन की शादी ग्वालियर के कृष्णा रजक के साथ हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष पति कृष्णा, उसका भाई सोनू और पिता राम अवतारलगातार विवाहिता को प्रताड़ित कर रहे थे। 25 अप्रैल को देवेंद्र अपनी बहन के दुखों को दूर करने और मामले में बीच-बचाव कर सुलह कराने के उद्देश्य से मुरैना से ग्वालियर आया था। उसे उम्मीद थी कि बातचीत से मसला हल हो जाएगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

    जब देवेंद्र ने अपनी बहन को साथ भेजने की बात कही, तो कृष्णा आग बबूला हो गया। बात गाली-गलौज से शुरू होकर हाथापाई तक पहुँच गई। इसी बीच कृष्णा घर के अंदर से चाकू निकाल लाया और अपनी बहन के सामने ही उसके भाई पर टूट पड़ा।

    वीडियो में कैद हुई दरिंदगी, दो आरोपी गिरफ्तार
    इस पूरी वारदात का एक विचलित करने वाला वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आरोपी कृष्णा अपने साले पर ताबड़तोड़ हमला करता दिख रहा है। हमले के दौरान देवेंद्र की बहन अपने भाई को बचाने की गुहार लगाती रही, लेकिन पत्थर दिल हमलावर नहीं रुका। वारदात को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी अपनी बाइक उठाकर मौके से फरार हो गया।

    स्थानीय लोगों और बहन ने तत्परता दिखाते हुए घायल देवेंद्र को अस्पताल पहुँचाया, जहाँ वह फिलहाल जीवन और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक खून बह जाने और महत्वपूर्ण अंगों पर चोट लगने के कारण उसकी हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

    पुलिस की कार्रवाई: ससुर की तलाश जारी
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और वायरल वीडियो को साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करते हुए दबिश दी। सीएसपी मुरार, अतुल सोनी ने पुष्टि की है कि मुख्य आरोपी कृष्णा रजक और उसके भाई सोनू को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, उनका पिता राम अवतार अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस की टीमें फरार आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस ने हत्या के प्रयास की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है।

  • बीजेपी की अहम बैठक ओरछा में तय, प्रदेश अध्यक्ष ने दी जानकारी, जल्द आएगी सदस्यों की सूची

    बीजेपी की अहम बैठक ओरछा में तय, प्रदेश अध्यक्ष ने दी जानकारी, जल्द आएगी सदस्यों की सूची


    नई दिल्ली| भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक अहम बैठक के दौरान मध्यप्रदेश की सियासत से जुड़ा बड़ा फैसला सामने आया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026 के तहत आयोजित इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष Hemant Khandelwal ने घोषणा की कि आगामी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक ऐतिहासिक नगरी ओरछा में आयोजित की जाएगी।

    यह बैठक मई 2026 में होने जा रही है और इसे खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह Hemant Khandelwal के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पहली प्रदेश कार्यसमिति बैठक होगी। संगठन के भीतर इसे नई रणनीति और दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    हालांकि, अभी तक प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह सूची एक या दो दिनों में जारी की जा सकती है, जिसके बाद संगठनात्मक ढांचे को और स्पष्ट रूप दिया जाएगा।

    इस बैठक में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे, जिनमें राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री Shivprakash, प्रदेश प्रभारी Dr. Mahendra Singh, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री Ajay Jamwal और प्रशिक्षण महाअभियान के जोन प्रभारी केसी पटेल प्रमुख रूप से मौजूद थे।

    बैठक में संगठनात्मक मजबूती, कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और बूथ स्तर तक संगठन विस्तार पर विस्तार से चर्चा की गई। पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026 के तहत पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ओरछा में होने वाली यह बैठक भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि इससे आने वाले समय में संगठन की दिशा और गति दोनों तय होंगी।

  • इंदौर में पानी संकट पर पार्षद का बड़ा बयान, बोले- अब महापौर-निगम कमिश्नर से लेंगे पानी

    इंदौर में पानी संकट पर पार्षद का बड़ा बयान, बोले- अब महापौर-निगम कमिश्नर से लेंगे पानी


    नई दिल्ली| इंदौर में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी की किल्लत ने एक बार फिर हालात बिगाड़ दिए हैं। शहर के कई इलाकों में जल संकट गहराता जा रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच वार्ड 75 से एक अनोखी और गंभीर स्थिति सामने आई है, जहां पार्षद ने खुद ही महापौर और नगर निगम कमिश्नर से पानी की मांग कर दी है।
    वार्ड 75 के पार्षद कुणाल सोलंकी ने नगर निगम महापौर Pushyamitra Bhargav और निगम कमिश्नर Kshitij Singhal को पत्र लिखकर 10 पानी के टैंकर उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वार्ड का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में आता है, जहां नर्मदा जल आपूर्ति ठीक से नहीं पहुंच पा रही है।
    पार्षद के मुताबिक, स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई इलाकों में बोरिंग भी सूखने लगे हैं, जिससे लोगों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि गर्मी के चलते पानी की खपत बढ़ गई है, लेकिन सप्लाई बेहद सीमित है।
    हालांकि, प्रशासन की ओर से समय पर टैंकर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण पार्षद ने खुद ही कुछ अस्थायी व्यवस्था की है, लेकिन वह भी पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। उन्होंने साफ कहा है कि यह व्यवस्था केवल आंशिक राहत दे पा रही है, जबकि समस्या व्यापक है।
    पार्षद कुणाल सोलंकी ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे वार्ड के लोगों के साथ महापौर और नगर निगम कमिश्नर के घर जाकर पानी की मांग करेंगे। इस बयान ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मियों में ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता। इस बार भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं और लोग पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।
    अब देखना होगा कि नगर निगम इस समस्या को कितनी जल्दी हल करता है या फिर इंदौर के इस वार्ड में पानी संकट और गहराता है।

  • संजय दत्त का बड़ा कदम: विवाद के बाद मांगी माफी, अब 50 बच्चों को कराएंगे शिक्षा

    संजय दत्त का बड़ा कदम: विवाद के बाद मांगी माफी, अब 50 बच्चों को कराएंगे शिक्षा


    नई दिल्ली| बॉलीवुड अभिनेता Sanjay Dutt एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार किसी फिल्म या किरदार को लेकर नहीं, बल्कि विवादित गाने ‘सरके चुनर तेरी’ को लेकर उठे विवाद के कारण। मामला तब और गंभीर हो गया जब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस गाने के कथित आपत्तिजनक बोलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए उन्हें और अभिनेत्री Nora Fatehi को तलब किया।
    रविवार को Sanjay Dutt सरिता विहार स्थित आयोग के कार्यालय पहुंचे, जहां उनसे करीब एक घंटे तक पूछताछ हुई। पूछताछ के बाद उन्होंने आयोग के सामने अपनी सफाई दी और कथित विवादित बोलों को लेकर खेद भी व्यक्त किया। उनके वकील हेमंत शाह के अनुसार, अभिनेता ने स्पष्ट किया कि जिस समय शूटिंग हुई थी, उस दौरान गाना कन्नड़ भाषा में था और उन्हें इसके अर्थ की पूरी जानकारी नहीं थी। बाद में हिंदी डबिंग के दौरान इसके कुछ शब्दों पर आपत्ति उठी।
    मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब संजय दत्त ने न सिर्फ माफी मांगी, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का बड़ा फैसला भी लिया। उन्होंने घोषणा की कि वे 50 आदिवासी बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाएंगे, जिससे यह विवाद एक सकारात्मक पहल में बदलता नजर आ रहा है।
    हालांकि, दूसरी ओर Nora Fatehi लगातार दूसरी बार आयोग के सामने पेश नहीं हुईं। उनके वकील ने आयोग के समक्ष पक्ष रखा, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नोरा फतेही को 27 अप्रैल 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का अंतिम अवसर दिया गया है।
    इस पूरे मामले ने मनोरंजन जगत में हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ विवादित गीत को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर संजय दत्त के सामाजिक कदम को लेकर उनकी चर्चा भी हो रही है। अब देखना होगा कि आने वाली सुनवाई में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा- भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र, घोषित करने की आवश्यकता नहीं

    मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा- भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र, घोषित करने की आवश्यकता नहीं

    नई दिल्ली। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अयोध्या राम मंदिर और भारत की सांस्कृतिक पहचान को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण सत्ता में बैठे लोगों की प्रतिबद्धता और देशभर के लोगों के सहयोग से संभव हुआ है।

    यह कार्यक्रम डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा उन लोगों के सम्मान में आयोजित किया गया था, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण में नेतृत्व और योगदान दिया। भागवत ने कहा कि राम मंदिर भगवान राम की इच्छा का प्रतीक है और इसके निर्माण में पूरे समाज की भागीदारी रही है। उन्होंने इसकी तुलना गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से करते हुए कहा कि जैसे भगवान कृष्ण की उंगली पर पर्वत टिक गया था, वैसे ही यह मंदिर भी सामूहिक सहयोग से संभव हुआ।

    भागवत ने योगी अरविंद का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन धर्म के पुनरुत्थान के लिए भारत का उभार आवश्यक है। उनके अनुसार यह प्रक्रिया 1857 से ही शुरू हो गई थी। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनावों का जिक्र करते हुए ‘द गार्डियन’ के एक लेख का हवाला दिया, जिसमें भारत की राजनीतिक और ऐतिहासिक दिशा पर टिप्पणी की गई थी। भागवत ने कहा कि तकनीकी रूप से आजादी 1947 में मिली थी, लेकिन वास्तविक आत्मविश्वास बाद में मजबूत हुआ।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि सत्ता में बैठे लोग प्रतिबद्ध नहीं होते और जनआंदोलन नहीं चलता, तो राम मंदिर का निर्माण संभव नहीं था। भागवत के अनुसार, पहले ‘हिंदू राष्ट्र’ की बातों को लोग गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन अब यह विचार व्यापक रूप से स्वीकार किया जाने लगा है।

    उन्होंने कहा कि जैसे सूरज का पूर्व से उगना एक प्राकृतिक सत्य है और उसे घोषित करने की आवश्यकता नहीं होती, वैसे ही भारत का हिंदू राष्ट्र होना भी एक वास्तविकता है। अंत में उन्होंने कहा कि अब समय है देश को और अधिक समृद्ध और मजबूत बनाने की दिशा में काम करने का, और भारत का उदय पूरी दुनिया के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएगा।