Author: bharati

  • बॉक्स ऑफिस पर बड़ा टकराव तय, यश की ‘टॉक्सिक’ और महेश बाबू की फिल्म आमने-सामने

    बॉक्स ऑफिस पर बड़ा टकराव तय, यश की ‘टॉक्सिक’ और महेश बाबू की फिल्म आमने-सामने

    नई दिल्ली। साउथ फिल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर बड़े बॉक्स ऑफिस क्लैश की स्थिति बनती दिखाई दे रही है, जहां यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ अपनी रिलीज को लेकर चर्चा के केंद्र में है। पहले भी इस फिल्म की रिलीज डेट कई बार बदली जा चुकी है, लेकिन अब एक बार फिर नई परिस्थितियों के कारण इसकी रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    ताजा स्थिति के अनुसार ‘टॉक्सिक’ की संभावित रिलीज खिड़की पर एक नई बड़ी फिल्म के आने से टकराव की स्थिति बन गई है। यह नई फिल्म महेश बाबू से जुड़े प्रोजेक्ट के रूप में सामने आ रही है, जिसे ‘राव बहादुर’ नाम से जाना जा रहा है। दोनों फिल्मों की रिलीज समय के बेहद करीब होने के कारण बॉक्स ऑफिस पर सीधा मुकाबला लगभग तय माना जा रहा है।

    ‘टॉक्सिक’ को लेकर पहले भी कई बार अनिश्चितता बनी रही है। कभी प्रोडक्शन से जुड़े कारण, तो कभी रिलीज रणनीति में बदलाव के चलते इसकी रिलीज आगे खिसकती रही। हर बार फिल्म किसी न किसी बड़े प्रोजेक्ट से टकराने की स्थिति में आ जाती है, जिससे इसकी रिलीज योजना लगातार प्रभावित होती रही है।

    दूसरी ओर, ‘राव बहादुर’ भी अपने अनोखे विषय और प्रस्तुति को लेकर चर्चा में है। फिल्म की कहानी एक अलग और गंभीर पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है, जिसमें रहस्य और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को प्रमुखता दी गई है। इसकी घोषणा के बाद से ही दर्शकों में इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

    दोनों फिल्मों की शैली और विषय अलग होने के बावजूद रिलीज का समय इतना करीब है कि दर्शकों का बंटना तय माना जा रहा है। यही कारण है कि फिल्म व्यापार से जुड़े विशेषज्ञ इसे एक बड़ा क्लैश मान रहे हैं, जिसका असर दोनों फिल्मों के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

    यश की ‘टॉक्सिक’ अपने बड़े बजट, एक्शन और स्टार पावर के कारण चर्चा में रहती है, जबकि दूसरी ओर ‘राव बहादुर’ अपनी कहानी और गंभीर ट्रीटमेंट के कारण एक अलग दर्शक वर्ग को आकर्षित कर सकती है। ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ फिल्मों का नहीं, बल्कि दर्शकों की पसंद और बाजार की दिशा का भी बन सकता है।

    फिलहाल दोनों फिल्मों की रिलीज डेट को लेकर अंतिम निर्णय स्पष्ट नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ा आमना-सामना देखने को मिल सकता है।

    कुल मिलाकर, ‘टॉक्सिक’ एक बार फिर बड़े टकराव के केंद्र में आ गई है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में रिलीज रणनीति में कोई बदलाव होता है या फिर यह सीधा मुकाबला सिनेमाघरों में देखने को मिलेगा।

  • पाकिस्तान में लश्कर कमांडर की हत्या, अज्ञात हमलावरों ने बरसाईं गोलियां

    पाकिस्तान में लश्कर कमांडर की हत्या, अज्ञात हमलावरों ने बरसाईं गोलियां


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान में एक बार फिर ‘अननोन गनमैन’ की कार्रवाई सामने आई है। इस बार निशाना आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े वरिष्ठ कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी बने, जिन्हें अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया।
    पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अफरीदी पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी, हालांकि अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

    हाफिज सईद का करीबी बताया जाता था
    शेख यूसुफ अफरीदी को हाफिज सईद का करीबी सहयोगी माना जाता था।

    बताया जाता है कि वह लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहा था और खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में नेटवर्क संभालता था। आरोप है कि वह युवाओं को तैयार कर उन्हें कश्मीर समेत अन्य क्षेत्रों में भेजने में सक्रिय भूमिका निभाता था। अफरीदी कई मौकों पर सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी सईद के साथ नजर आ चुका था।

    टारगेट किलिंग का शक, जांच जारी
    स्थानीय पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह मामला टारगेट किलिंग का प्रतीत होता है।

    हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

    ‘अननोन गनमैन’ की घटनाएं बढ़ीं
    गौरतलब है कि पाकिस्तान में हाल के महीनों में अज्ञात हमलावरों द्वारा इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं, जिनमें कई विवादित और भारत-विरोधी गतिविधियों से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया है। हालांकि इन घटनाओं के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है।

    भारत का स्पष्ट रुख
    इन घटनाओं को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाते रहे हैं, लेकिन भारत सरकार ने हमेशा साफ किया है कि वह किसी भी देश की संप्रभुता का सम्मान करती है और ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं है।

    कुल मिलाकर, अफरीदी की हत्या ने पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी नेटवर्क से जुड़े समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • बांग्लादेश में मंदिर पुजारी की संदिग्ध मौत, पेड़ से लटका मिला शव; हत्या का आरोप

    बांग्लादेश में मंदिर पुजारी की संदिग्ध मौत, पेड़ से लटका मिला शव; हत्या का आरोप


    ढाका। बांग्लादेश में एक हिंदू मंदिर से जुड़े पुजारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। घर से लापता होने के तीन दिन बाद उनका शव पेड़ से लटका मिला, जिसके बाद अल्पसंख्यक समुदाय ने इसे हत्या बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, कोक्स बाजार सदर उपजिला के खुरुशकुल यूनियन स्थित शिव-काली मंदिर के पुजारी और संरक्षक 40 वर्षीय नयन साधु का शव चटगांव जिले के दोहाजारी क्षेत्र के पास पहाड़ी इलाके में बरामद किया गया। वे मंदिर की देखरेख के साथ पूजा-अर्चना का कार्य भी संभालते थे।

    तीन दिन पहले हुए थे लापता

    स्थानीय पुलिस के मुताबिक 19 अप्रैल की शाम दो अज्ञात व्यक्ति नयन साधु को अपने साथ ले गए थे। इसके बाद से वह लापता थे। तीन दिन बाद गांव के बाहरी क्षेत्र में उनका शव मिला। पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का।

    समुदाय ने उठाए सवाल

    घटना के बाद बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

    परिषद से जुड़ी काजल देबनाथ ने सवाल उठाया कि एक छोटे और दूरदराज मंदिर के साधारण देखरेखकर्ता को निशाना बनाने के पीछे क्या कारण हो सकता है।

    वहीं बांग्लादेश पूजा उत्सव परिषद की कोक्स बाजार इकाई के महासचिव जॉनी धर ने कहा कि लापता होने के तीन दिन बाद शव मिलने से हत्या की आशंका और गहरी हो गई है।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। नयन साधु की पत्नी ने 19 अप्रैल को गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई।

    सांप्रदायिक घटनाओं पर चिंता

    गौरतलब है कि बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद की हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 की पहली तिमाही में देश में सांप्रदायिक हिंसा की 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इससे अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

    इस घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • छत्रपति शिवाजी महाराज पर बयान से विवाद, रितेश देशमुख का तीखा रिएक्शन—‘ऐसी बातें स्वीकार नहीं’

    छत्रपति शिवाजी महाराज पर बयान से विवाद, रितेश देशमुख का तीखा रिएक्शन—‘ऐसी बातें स्वीकार नहीं’

    नई दिल्ली। छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए गए एक बयान के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला उस समय और गर्मा गया जब अभिनेता और फिल्ममेकर रितेश देशमुख ने इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। रितेश ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए साफ शब्दों में कहा कि महान ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के बारे में इस तरह की बातें किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकतीं।

    जानकारी के अनुसार, हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़ा एक कथन सामने आया था, जिसे लेकर विवाद शुरू हो गया।

    इस कथन में महाराज के संघर्ष और उनके निर्णयों को लेकर टिप्पणी की गई थी, जिसे उनके समर्थकों और इतिहास से जुड़े जानकारों ने गलत और भ्रामक बताया। इसके बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया और अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    रितेश देशमुख, जो खुद शिवाजी महाराज के जीवन और विचारों से गहरी प्रेरणा लेने की बात करते रहे हैं, इस बयान से काफी आहत नजर आए। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्वों की विरासत को कमजोर करने या गलत तरीके से पेश करने की कोशिशें स्वीकार नहीं की जाएंगी। उनके अनुसार, शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक नाम नहीं, बल्कि प्रेरणा और स्वाभिमान का प्रतीक हैं, जिनका सम्मान हर हाल में बनाए रखना जरूरी है।

    विवाद बढ़ने के बाद संबंधित पक्ष की ओर से स्पष्टीकरण और खेद व्यक्त किया गया। कहा गया कि बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है और किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का उद्देश्य नहीं था। इसके बावजूद मामला शांत होता नहीं दिखा और सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर बहस जारी रही।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर टिप्पणी करते समय कितनी सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इतिहास से जुड़े विषय केवल तथ्यों के आधार पर ही प्रस्तुत किए जाने चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी या विवाद से बचा जा सके।

    इसी बीच, रितेश देशमुख अपनी आगामी ऐतिहासिक फिल्म को लेकर भी चर्चा में हैं, जिसमें वह छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार में नजर आने वाले हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही उत्सुकता बनी हुई है, और यह विवाद इसे और अधिक सुर्खियों में ले आया है।

    पूरा मामला अब सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह इतिहास, भावनाओं और अभिव्यक्ति की सीमाओं पर एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है।

  • कोलंबिया में बस में भीषण धमाका, 14 की मौत; सरकार ने बताया आतंकी हमला

    कोलंबिया में बस में भीषण धमाका, 14 की मौत; सरकार ने बताया आतंकी हमला


    नई दिल्ली! दक्षिण-पश्चिमी कोलंबिया में शनिवार को एक यात्री बस को निशाना बनाकर किए गए भीषण विस्फोट में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 38 से अधिक यात्री घायल हो गए। कोलंबियाई सेना ने इस घटना को आतंकी हमला बताया है।

    यह धमाका काउका क्षेत्र के काजिबियो नगर स्थित पैनअमेरिकन हाईवे पर उस समय हुआ, जब बस वहां से गुजर रही थी। स्थानीय प्रशासन के अनुसार विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि बस के परखच्चे उड़ गए और आसपास का इलाका दहल उठा।

    घायलों में बच्चे भी शामिल

    काउका क्षेत्र की स्वास्थ्य अधिकारी कैरोलिना कामार्गो ने बताया कि घायलों में पांच बच्चे भी शामिल हैं। सभी घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है, जबकि कई लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    आतंकी गुटों पर आरोप

    कोलंबिया सेना के कमांडर जनरल ह्यूगो लोपेज ने हमले के लिए इवान मोर्दिस्को गिरोह और जैमी मार्टिनेज गुट को जिम्मेदार ठहराया है। ये दोनों गुट पूर्व विद्रोही संगठन एफएआरसी (FARC) के असंतुष्ट धड़े माने जाते हैं, जिन्होंने वर्ष 2016 के शांति समझौते को स्वीकार नहीं किया था।

    राष्ट्रपति की कड़ी प्रतिक्रिया

    कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों, विशेषकर आदिवासी समुदाय के लोगों को निशाना बनाना आतंकवाद है। उन्होंने हमलावरों को मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े हिंसक गिरोह बताया।

    क्षेत्र में बढ़ रही हिंसा

    दक्षिण-पश्चिमी कोलंबिया में हाल के दिनों में हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दिनों में ही क्षेत्र में 26 से अधिक हिंसक घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें सार्वजनिक ढांचे और आम नागरिकों को निशाना बनाया गया।

    मेक्सिको में भी गोलीबारी

    इसी बीच मेक्सिको में भी एक अलग घटना सामने आई है। टियोटिहुआकन पिरामिड परिसर में एक हथियारबंद व्यक्ति ने पर्यटकों पर गोलीबारी कर दी। इस हमले में एक कनाडाई नागरिक की मौत हो गई, जबकि 13 अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। बाद में हमलावर ने खुद को गोली मार ली।

    घायलों में विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हैं और सभी का उपचार जारी है।

  • आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र 'गरुड़ घंटी': जानिए पूजा के दौरान इसे बजाने के पीछे छिपे गहरे रहस्य

    आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र 'गरुड़ घंटी': जानिए पूजा के दौरान इसे बजाने के पीछे छिपे गहरे रहस्य

    नई दिल्ली। सनातन संस्कृति में पूजा-पाठ के दौरान घंटी बजाने का विधान सदियों पुराना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के छोटे से मंदिर में इस्तेमाल होने वाली घंटी का भी अपना एक विशेष विज्ञान और महत्व है? हिंदू परिवारों में मुख्य रूप से ‘गरुड़ घंटी’ का उपयोग किया जाता है, जिसके ऊपरी भाग पर भगवान विष्णु के वाहन और संदेशवाहक गरुड़ देव की आकृति बनी होती है।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गरुड़ देव को भगवान विष्णु का द्वारपाल माना गया है, इसलिए घर में इस घंटी का होना और इसे बजाना साक्षात श्रीहरि और माता लक्ष्मी को आमंत्रित करने के समान है।

    धार्मिक ग्रंथों में इस विशेष घंटी की ध्वनि को ‘ब्रह्म नाद’ की संज्ञा दी गई है। माना जाता है कि जब सृष्टि का निर्माण हुआ था, तब जो पहली आवाज गूँजी थी, घंटी की ध्वनि उसी का सूक्ष्म रूप है। यही कारण है कि पूजा के दौरान इसे बजाने से वातावरण शुद्ध हो जाता है और व्यक्ति का मन संसार की मोह-माया से हटकर सीधे ईश्वर की ओर केंद्रित होने लगता है।

    गरुड़ घंटी बजाने से घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तेज होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिन घरों में नियमित रूप से गरुड़ घंटी का नाद होता है, वहां कभी दरिद्रता का वास नहीं होता और परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बना रहता है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी घंटी बजाने के कई फायदे बताए गए हैं। घंटी से निकलने वाली विशेष तरंगें और सूक्ष्म कंपन वातावरण में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा, इसकी सुरीली आवाज हमारे मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को सक्रिय कर देती है, जिससे मानसिक तनाव और थकान कम होती है।

    आरती के समय घंटी बजाना हमारे एकाग्रता स्तर को बढ़ाता है, जिससे भक्त पूरी तरह से पूजा में लीन हो जाता है। गरुड़ जी की उपस्थिति इस बात का भी प्रतीक है कि हमारी प्रार्थनाओं को भगवान तक पहुँचाने का कार्य स्वयं उनके संदेशवाहक कर रहे हैं।

    शास्त्रों के अनुसार, घंटियों के मुख्य रूप से चार प्रकार होते हैं। ‘गरुड़ घंटी’ का प्रयोग व्यक्तिगत पूजा और छोटे मंदिरों में किया जाता है। इसके अलावा ‘द्वार घंटी’ होती है जो घरों या मंदिरों के प्रवेश द्वार पर शुभता के लिए लगाई जाती है। ‘हाथ घंटी’ पीतल की एक गोलाकार प्लेट की तरह होती है जिसे लकड़ी के डंडे से बजाया जाता है, जबकि ‘बड़ा घंटा’ मंदिरों के विशाल प्रांगण में स्थापित किया जाता है जिसकी गूँज मीलों दूर तक सुनाई देती है।

    इन सभी में गरुड़ घंटी को घर की सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सबसे उत्तम और प्रभावी माना गया है। घर में नियमित इसका प्रयोग न केवल सौभाग्य लाता है बल्कि जीवन में अनुशासन और शांति का भी संचार करता है।

  • लंदन में नीलामी के लिए तैयार जयपुर राजघराने का ‘सुपरकंप्यूटर’, 25 करोड़ तक लग सकती है बोली

    लंदन में नीलामी के लिए तैयार जयपुर राजघराने का ‘सुपरकंप्यूटर’, 25 करोड़ तक लग सकती है बोली


    जयपुर। राजस्थान के शाही इतिहास और वैज्ञानिक विरासत से जुड़ा एक दुर्लभ खगोलीय यंत्र ‘एस्ट्रोलेब’ अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 17वीं सदी का यह ऐतिहासिक उपकरण 29 अप्रैल को लंदन में नीलामी के लिए पेश किया जाएगा। विशेषज्ञ इसे उस दौर का ‘सुपरकंप्यूटर’ और ‘प्राचीन स्मार्ट डिवाइस’ बता रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि यह यंत्र कभी जयपुर राजघराने के शाही संग्रह का हिस्सा था। सवाई मानसिंह द्वितीय के निधन के बाद यह महारानी गायत्री देवी के पास रहा और बाद में निजी संग्रह में शामिल हो गया। अब पहली बार इसे सार्वजनिक नीलामी में उतारा जा रहा है।

    आकार, बनावट और कीमत खास

    पीतल से निर्मित यह एस्ट्रोलेब आकार और उपयोगिता दोनों में विशेष माना जा रहा है। इसका वजन करीब 8.2 किलोग्राम और ऊंचाई लगभग 46 सेंटीमीटर है, जो सामान्य यंत्रों की तुलना में काफी बड़ा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इसकी दुर्लभता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसकी कीमत 1.5 से 2.5 मिलियन पाउंड (करीब 15 से 25 करोड़ रुपये) तक जा सकती है।

    17वीं सदी का बहुउपयोगी यंत्र

    जानकारों के मुताबिक, यह यंत्र अपने समय में कई जटिल गणनाओं के लिए उपयोग किया जाता था। इसके माध्यम से सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तारों की स्थिति, इमारतों की ऊंचाई तथा कुओं की गहराई तक मापी जा सकती थी।

    इसके अलावा धार्मिक दिशा निर्धारण और पंचांग आधारित ज्योतिषीय गणनाओं में भी इसका उपयोग होता था।

    मुगलकालीन विरासत की झलक

    यह एस्ट्रोलेब 17वीं सदी की शुरुआत में लाहौर के प्रसिद्ध कारीगर कायम मुहम्मद और मुहम्मद मुकीम द्वारा तैयार किया गया था। इसकी विशेषता यह है कि इसमें तारों के नाम फारसी भाषा तथा उनके संस्कृत समकक्ष देवनागरी लिपि में अंकित हैं, जो उस दौर में विज्ञान और संस्कृति के अद्भुत संगम को दर्शाते हैं।

    वैश्विक स्तर पर बढ़ी दिलचस्पी

    इस यंत्र में 94 शहरों के अक्षांश-देशांतर और 38 तारों के संकेतक अंकित हैं, जिन्हें आज भी काफी सटीक माना जाता है। यही वजह है कि दुनिया भर के संग्रहालयों और निजी कलेक्टरों में इसे लेकर खास रुचि देखी जा रही है।

  • वित्तीय साक्षरता शिविर में पहुंचकर आरबीआई गवर्नर ने दिया आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश

    वित्तीय साक्षरता शिविर में पहुंचकर आरबीआई गवर्नर ने दिया आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश

    नई दिल्ली। देहरादून जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम के दौरान आर्थिक जागरूकता और वित्तीय सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े लोगों को वित्तीय प्रणाली की बुनियादी समझ देना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना था।

    कार्यक्रम के दौरान यह बात विशेष रूप से सामने रखी गई कि आज के समय में आर्थिक स्थिरता केवल बचत पर निर्भर नहीं है, बल्कि सही जानकारी और योजनाओं के उपयोग पर भी आधारित है। लोगों को बताया गया कि पेंशन और बीमा जैसी योजनाएं भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हर नागरिक को इनके बारे में जागरूक होना चाहिए।

    इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। यह भी कहा गया कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक बैंकिंग और वित्तीय सुविधाएं सरल तरीके से पहुंचनी चाहिए, ताकि वे मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जुड़ सकें।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने अपने स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन भी किया। उनके प्रयासों की सराहना करते हुए यह संदेश दिया गया कि ऐसे समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और इन्हें और अधिक प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है।

    लोगों को यह भी समझाया गया कि वित्तीय जानकारी को केवल व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों के साथ भी साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें।

    इस दौरान बैंकिंग सेवाओं को आसान बनाने के लिए मौके पर ही कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे लोगों को सीधे लाभ मिला। छोटे स्तर पर नकद और सिक्कों के आदान-प्रदान जैसी सेवाओं ने भी ग्रामीण लोगों के लिए सुविधा का काम किया।

    इसके अलावा, वित्तीय सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए मोबाइल बैंकिंग जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया, जिससे लोगों को अपने क्षेत्र में ही बैंकिंग सेवाएं प्राप्त हो सकें।

    कार्यक्रम में विभिन्न वित्तीय संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और वित्तीय समावेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि वित्तीय शिक्षा ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर समाज की नींव है।

  • ट्रंप का दावा- पुतिन और जेलेंस्की से ‘अच्छी बातचीत’, जल्द खत्म हो सकता है युद्ध

    ट्रंप का दावा- पुतिन और जेलेंस्की से ‘अच्छी बातचीत’, जल्द खत्म हो सकता है युद्ध


    वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही है तथा जल्द समाधान निकलने की उम्मीद है।

    फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम ‘द संडे ब्रीफिंग’ में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दोनों देशों के बीच हालात सामान्य करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी पुतिन और जेलेंस्की दोनों से बातचीत होती रही है, हालांकि आखिरी बातचीत कब हुई, इस पर उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी।

    ‘नफरत से नहीं सुलझेगा विवाद’

    ट्रंप ने दोनों नेताओं के बीच बढ़ती कटुता पर चिंता जताते हुए कहा कि आपसी नफरत किसी भी समाधान में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने इसे “हास्यास्पद और पागलपन” बताया तथा कहा कि शांति स्थापित करने के लिए संवाद ही सबसे जरूरी रास्ता है।

    गौरतलब है कि फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने का वादा ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान किया था। हालांकि उनके दूसरे कार्यकाल में भी संघर्ष जारी है।

    जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण

    इधर युद्ध क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यूक्रेन के निप्रो शहर पर रूस के ड्रोन और मिसाइल हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार हमले में एक मकान पूरी तरह नष्ट हो गया।

    वहीं रूस के बेलगोरोद क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमले में एक महिला की मौत और एक व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। यह घटनाएं हाल ही में युद्धबंदियों की अदला-बदली के बाद सामने आई हैं।

    रूस का दावा

    रूस के विशेष दूत रोदियोन मिरोशनिक ने दावा किया कि फरवरी 2022 से अब तक यूक्रेनी हमलों में 8 हजार से अधिक रूसी नागरिक मारे गए हैं और करीब 20 हजार घायल हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन ने नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है।

  • इंडिगो शेयर को झटका, ग्लोबल फर्म ने डाउनग्रेड कर बदला नजरिया..

    इंडिगो शेयर को झटका, ग्लोबल फर्म ने डाउनग्रेड कर बदला नजरिया..

    नई दिल्ली। विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंडिगो को लेकर वित्तीय बाजार में एक अहम बदलाव देखने को मिला है, जहां एक ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी की रेटिंग और अनुमानित लक्ष्य मूल्य दोनों में कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद निवेशकों के बीच हलचल बढ़ गई है और शेयर पर दबाव साफ नजर आने लगा है।

    ब्रोकरेज फर्म ने पहले जहां कंपनी को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ रखा था, वहीं अब उसे न्यूट्रल श्रेणी में डाल दिया गया है। इसके साथ ही टारगेट प्राइस को भी पहले के मुकाबले नीचे संशोधित किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में शेयर में तेज उछाल की उम्मीदें कम हो सकती हैं।

    इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और विमानन उद्योग पर पड़ रहा लागत का दबाव माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों के परिचालन खर्च को काफी बढ़ा दिया है, जिससे उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है।

    हालांकि इंडिगो को अपने बड़े नेटवर्क और मजबूत ऑपरेशनल सिस्टम की वजह से उद्योग में अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति वाली कंपनियों में गिना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात ने इसके भविष्य के अनुमान को प्रभावित किया है। बढ़ती लागत और अस्थिर वैश्विक माहौल ने कंपनी की ग्रोथ संभावनाओं पर सवाल खड़े किए हैं।

    घरेलू स्तर पर सरकार की ओर से ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयासों से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन यह राहत पूरी तरह पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति अब भी एयरलाइंस के लिए चुनौती बनी हुई है।

    शेयर बाजार में भी इंडिगो के स्टॉक ने पिछले कुछ समय में उतार-चढ़ाव का सामना किया है। कभी हल्की बढ़त तो कभी गिरावट के चलते निवेशकों के लिए यह स्टॉक अस्थिर बना हुआ है। लंबी अवधि के प्रदर्शन में भी दबाव देखने को मिला है, जिससे बाजार में सतर्कता का माहौल है।