Author: bharati

  • ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंचे कांग्रेस MLA, पुलिस से झूमाझटकी, 'नारी शक्ति वंदन’ पर गरमाई बहस

    ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंचे कांग्रेस MLA, पुलिस से झूमाझटकी, 'नारी शक्ति वंदन’ पर गरमाई बहस


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन’ विषय पर चर्चा के बीच जमकर हंगामा देखने को मिला। सदन के भीतर तीखी बहस हुई, जबकि बाहर कांग्रेस विधायक के ट्रैक्टर लेकर पहुंचने की कोशिश ने माहौल और गरमा दिया। हंगामे के चलते कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट भी किया।

    ट्रैक्टर लेकर पहुंचे विधायक, पुलिस से हुई बहस
    कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर विधानसभा जाने के लिए निकले थे, लेकिन मंत्रालय के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। शाह का कहना था कि उन्होंने ट्रैक्टर के लिए पास बनवाया था, जबकि पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा कि ट्रैक्टर को अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। बाद में विधायक गेहूं का गठ्ठा लेकर विधानसभा पहुंचे, जो विरोध का प्रतीक बना।

    सदन में ‘नारी शक्ति वंदन’ पर तीखी बहस
    विधानसभा के अंदर ‘नारी शक्ति वंदन’ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण बिल राजनीतिक कारणों से लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी से मुकाबला नहीं कर पाने के कारण यह कदम उठाया गया।

    महिलाओं की उम्मीदों से खिलवाड़
    मंत्री कृष्णा गौर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में बिल पास न होने से महिलाओं को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उम्मीद थी कि उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, लेकिन कांग्रेस और विपक्ष ने उनकी उम्मीदें तोड़ दीं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को अधिकार देने का प्रयास किया, लेकिन विपक्ष ने इसका विरोध किया।

    परिसीमन पर विपक्ष के सवाल, वॉकआउट
    कांग्रेस विधायक नितेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि यदि महिलाओं को अधिकार देना है तो परिसीमन का इंतजार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया और इसे “दिखावा” बताया।

    इतिहास पर भी छिड़ी बहस
    कांग्रेस विधायक राजेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि पहले भी महिला आरक्षण को लेकर पहल की गई थी। इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सवाल उठाते हुए उस दावे को चुनौती दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर भी तीखी बहस हुई।

    महिलाओं के मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप तेज
    पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनकी सोच महिलाओं को आगे बढ़ाने की नहीं रही। उन्होंने कहा कि महिलाएं हर तीसरी सीट पर प्रतिनिधित्व की उम्मीद कर रही थीं, लेकिन उन्हें निराशा मिली। वहीं हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि आरक्षण परिसीमन के साथ ही लागू होगा, ताकि जनसंख्या के अनुसार संतुलित प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की योजनाओं से बेटियों की स्थिति में सुधार हुआ है और कई योजनाओं का लाभ लाखों को मिला है।

    तुरंत आरक्षण लागू करने की मांग
    कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने मांग की कि मौजूदा सीटों पर ही महिलाओं को आरक्षण दिया जाए। उन्होंने “कोटे में कोटा” की भी वकालत की, ताकि अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्ग की महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने कहा कि परिसीमन और जनगणना जैसी प्रक्रियाओं के नाम पर महिलाओं को इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए।

  • वाराणसी में विकास परियोजनाओं का बड़ा ऐलान, पीएम दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

    वाराणसी में विकास परियोजनाओं का बड़ा ऐलान, पीएम दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

    नई दिल्ली। वाराणसी इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक और विकासात्मक आयोजन की तैयारियों का केंद्र बना हुआ है, जहां प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दो दिवसीय दौरे को लेकर पूरे शहर में गतिविधियां तेज हो गई हैं। यह दौरा न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इसमें शामिल विकास परियोजनाओं के कारण स्थानीय स्तर पर भी बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।

    दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया जाएगा, जिनका कुल मूल्य हजारों करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इन परियोजनाओं में सड़क, पुल, शहरी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े कई बड़े कार्य शामिल हैं, जिनका उद्देश्य शहर की कनेक्टिविटी और जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।

    स्थानीय प्रशासन ने बताया है कि इस पूरे दौरे को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। विभिन्न विभाग लगातार कार्यों की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रह जाए। शहर के प्रमुख मार्गों और आयोजन स्थलों पर विशेष व्यवस्था की जा रही है, जिससे कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

    इस दौरे का एक प्रमुख आकर्षण जनभागीदारी भी होगा, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से महिला सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए अलग से कार्यक्रम तैयार किए गए हैं, जिससे सामाजिक समावेशन को भी मजबूती मिलेगी।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों को कड़ी निगरानी में रखा जा रहा है। आधुनिक तकनीक से लैस निगरानी प्रणाली के साथ-साथ सुरक्षा बलों की तैनाती बड़े स्तर पर की गई है, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

    भीड़ प्रबंधन और यातायात नियंत्रण के लिए पूरे क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में बांटा गया है। मार्गों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है और प्रवेश-निकास बिंदुओं को नियंत्रित तरीके से संचालित किया जाएगा। इससे कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था की संभावना को कम किया जा सकेगा।

    महिला सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत सुरक्षा व्यवस्था में महिला कर्मियों की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। आयोजन स्थल के अंदरूनी हिस्सों की जिम्मेदारी विशेष रूप से महिला सुरक्षा बल को सौंपी गई है, जबकि बाहरी सुरक्षा की निगरानी अन्य बलों द्वारा की जाएगी।

    इसके साथ ही आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा टीमें भी तैनात की गई हैं, जो हर परिस्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन का मानना है कि यह दौरा शहर के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और आने वाले समय में इन परियोजनाओं का प्रभाव आम जनता के जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

  • भारत-न्यूजीलैंड व्यापार सहयोग मजबूत, निवेश और सेवाओं के क्षेत्र में खुले नए अवसर..

    भारत-न्यूजीलैंड व्यापार सहयोग मजबूत, निवेश और सेवाओं के क्षेत्र में खुले नए अवसर..

    नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिसे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना और निवेश के नए रास्ते खोलना है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सके।

    इस पहल के तहत यह तय किया गया है कि व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंचने में किसी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े। इससे निर्यात और आयात दोनों क्षेत्रों में तेजी आने की उम्मीद है।

    भारत और न्यूजीलैंड के मौजूदा व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत हैं, लेकिन इस नए समझौते के बाद इनके और विस्तार की संभावना बढ़ गई है। खासतौर पर सेवा क्षेत्र और तकनीकी उद्योगों में नए अवसर खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस साझेदारी में केवल वस्तुओं का व्यापार ही नहीं, बल्कि सेवाओं के क्षेत्र को भी प्राथमिकता दी गई है। आईटी, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं और पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं।

    साथ ही निवेश को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया है, जिससे दोनों देशों में नए उद्योग स्थापित हो सकते हैं और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। यह आर्थिक सहयोग दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    लोगों के बीच संपर्क और यात्रा सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया गया है, ताकि व्यापार के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी मजबूत हो सकें। इससे दोनों देशों के बीच भरोसा और सहयोग और गहरा होगा।

    न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय को भी इस साझेदारी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है, जो व्यापार और निवेश को आगे बढ़ाने में सेतु का काम कर सकता है।

    यह समझौता भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों को व्यापार और निवेश के क्षेत्र में बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

  • ऑफिस मार्केट में तेजी का नया दौर, भारत में लीजिंग गतिविधियों ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    ऑफिस मार्केट में तेजी का नया दौर, भारत में लीजिंग गतिविधियों ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    नई दिल्ली। भारत का कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर 2026 की पहली तिमाही में एक मजबूत और रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन के साथ सामने आया है। देशभर में ऑफिस स्पेस की मांग लगातार बढ़ती हुई दिखाई दी और यह आंकड़ा 21.5 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गया, जो अब तक के हालिया वर्षों में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक माना जा रहा है।

    इस तेज वृद्धि के पीछे मुख्य कारण ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स की बढ़ती भागीदारी रही है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत को केवल सपोर्ट सेंटर के तौर पर नहीं देख रही हैं, बल्कि इसे अपने इनोवेशन, रिसर्च और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट का महत्वपूर्ण केंद्र बना रही हैं।

    ऑफिस लीजिंग में हुई इस बढ़ोतरी से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक पसंदीदा निवेश और ऑपरेशन डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। जीसीसी की भूमिका इस बदलाव में सबसे अहम रही है, जिन्होंने अपने विस्तार को तेज गति से आगे बढ़ाया है और कुल लीजिंग गतिविधियों में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की है।

    इन सेंटर्स में अब पारंपरिक बैक-ऑफिस कार्यों से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट डिजाइन और इंजीनियरिंग जैसे हाई-वैल्यू काम किए जा रहे हैं। इससे भारत के टैलेंट मार्केट को भी बड़ा फायदा मिल रहा है।

    इसके साथ ही फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की मांग भी तेजी से बढ़ी है। कंपनियां अब हाइब्रिड और रिमोट वर्क मॉडल को ध्यान में रखते हुए अधिक लचीले ऑफिस स्पेस की ओर बढ़ रही हैं, जिससे इस सेगमेंट में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है।

    देश के प्रमुख शहरों में इस वृद्धि का असर साफ दिखाई दिया है। बेंगलुरु ने ऑफिस लीजिंग में सबसे आगे रहकर अपनी स्थिति मजबूत की है, जबकि मुंबई और हैदराबाद ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। पुणे और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों ने भी स्थिर और मजबूत योगदान दिया है।

    बेंगलुरु में जीसीसी की हिस्सेदारी विशेष रूप से काफी अधिक रही, जिससे यह शहर टेक्नोलॉजी और ग्लोबल इनोवेशन के सबसे बड़े केंद्रों में से एक बनता जा रहा है।

  • भू-राजनीतिक तनाव का असर, तेल कीमतों को लेकर नया वैश्विक अनुमान..

    भू-राजनीतिक तनाव का असर, तेल कीमतों को लेकर नया वैश्विक अनुमान..

    नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर गहरा प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आए नए आकलनों में यह संकेत दिया गया है कि आने वाले समय में तेल की कीमतें पहले के अनुमान से अधिक रह सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

    मध्यपूर्व लंबे समय से विश्व ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया है। तनाव बढ़ने के कारण तेल उत्पादन और परिवहन दोनों पर दबाव बढ़ा है, जिससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। इसी अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि के संकेत दिए हैं।

    नए अनुमान के अनुसार ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड दोनों की औसत कीमतों में पहले की तुलना में वृद्धि देखी जा सकती है। यह बदलाव मुख्य रूप से आपूर्ति में संभावित कमी और बाजार में बढ़ते जोखिम के कारण हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो तेल भंडार में गिरावट और तेज हो सकती है, जिससे कीमतों पर और अधिक दबाव बढ़ेगा।

    तेल बाजार में इस बदलाव का एक बड़ा कारण सप्लाई चेन में आने वाली बाधाएं भी हैं। मध्यपूर्व से होने वाली सप्लाई में कमी के कारण वैश्विक भंडार स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति ऊर्जा बाजार के संतुलन को प्रभावित कर रही है और निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा रही है।

    हालांकि मांग की स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है, लेकिन आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा सीधे कीमतों को प्रभावित कर रही है। इसी कारण बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना लगातार बनी हुई है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भू-राजनीतिक तनाव केवल अल्पकालिक प्रभाव ही नहीं डालता, बल्कि यह दीर्घकालिक निवेश और ऊर्जा रणनीतियों को भी प्रभावित करता है। यही कारण है कि वैश्विक बाजार में सतर्कता का माहौल देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर, यदि आने वाले समय में स्थिति में सुधार होता है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होती है, तो कीमतों में स्थिरता लौटने की संभावना भी मौजूद है। लेकिन फिलहाल बाजार अनिश्चितता की स्थिति में है और हर नई घटना इसका सीधा असर ऊर्जा कीमतों पर डाल रही है।

  • भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड समझौता साइन, दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार

    भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड समझौता साइन, दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार


    नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देते हुए एक महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। इस समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में आयात-निर्यात और निवेश के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले लगभग सभी उत्पादों को टैरिफ छूट का लाभ मिलेगा। इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों को होगा, क्योंकि उनके उत्पाद वहां के बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड से भारत आने वाले अधिकतर उत्पादों पर भी टैरिफ कम किया जाएगा या समाप्त किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी।

    यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद अंतिम रूप में पहुंचा है और इसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने वाला अहम समझौता माना जा रहा है। इससे व्यापार की रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ नए निवेश के अवसर भी पैदा होंगे।

    समझौते में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि निवेश और मानव संसाधन से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत न्यूजीलैंड आने वाले वर्षों में भारत में बड़े स्तर पर निवेश करने की योजना बना सकता है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

    इसके अलावा इस समझौते में छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही को भी आसान बनाने पर जोर दिया गया है। भारतीय छात्रों को न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान काम करने और बाद में रोजगार के अवसरों तक पहुंच मिलने की सुविधा इस समझौते का अहम हिस्सा है।

    कौशल आधारित भारतीय पेशेवरों के लिए भी अस्थायी वर्क वीजा की सुविधा रखी गई है, जिससे वे निर्धारित अवधि तक न्यूजीलैंड में काम कर सकेंगे। इससे दोनों देशों के बीच स्किल एक्सचेंज और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

    हालांकि भारत ने अपने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते में सुरक्षित रखा है, ताकि घरेलू उद्योगों पर किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े।

  • राज्यसभा का समीकरण बदला, राघव चड्ढा के फैसले से NDA बहुमत के और करीब पहुंचा..

    राज्यसभा का समीकरण बदला, राघव चड्ढा के फैसले से NDA बहुमत के और करीब पहुंचा..

    नई दिल्ली। राज्यसभा की राजनीति में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसने पूरे सत्ता समीकरण को प्रभावित कर दिया है। सदन में हुए हालिया घटनाक्रम के बाद नंबर गेम पूरी तरह बदल गया है और इसका सीधा असर राजनीतिक ताकतों के संतुलन पर पड़ा है।

    इस पूरे घटनाक्रम में Raghav Chadha का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। उनके राजनीतिक कदम और उससे जुड़े बदलावों के बाद राज्यसभा में सत्ता पक्ष की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है। माना जा रहा है कि इससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को सीधा फायदा मिला है।

    सूत्रों के अनुसार, कुछ सांसदों के दलगत बदलाव और विलय की प्रक्रिया के बाद सदन में सीटों का गणित बदल गया है। इस बदलाव के बाद सत्ता पक्ष की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जबकि विपक्ष की स्थिति कमजोर हुई है।

    राज्यसभा में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां बहुमत का सीधा असर कानून निर्माण और बड़े विधायी फैसलों पर पड़ता है। अब बदले हुए समीकरण के बाद सत्ता पक्ष बहुमत के आंकड़े के और करीब पहुंच गया है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बदलाव आने वाले समय में संसद की कार्यवाही और महत्वपूर्ण बिलों पर असर डाल सकते हैं। खासकर उन मुद्दों पर जहां दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, वहां अब स्थिति पहले से ज्यादा अनुकूल दिखाई दे रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, जहां इसे सत्ता पक्ष की बड़ी रणनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे अपने लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति मान रहा है।

  • जब बॉलीवुड के 'राज' ने अपने ही परिवार का किरदार निभाकर रचा इतिहास..

    जब बॉलीवुड के 'राज' ने अपने ही परिवार का किरदार निभाकर रचा इतिहास..

    नई दिल्ली। बॉलीवुड के इतिहास में कई ऐसी फिल्में आई हैं जिन्होंने अपनी अनूठी कहानी और कलाकारों के शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई है। ऐसी ही एक यादगार फिल्म साल 2000 में बड़े पर्दे पर उतरी थी, जिसने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े, बल्कि अभिनय की दुनिया में एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया।

    इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसके मुख्य अभिनेता गोविंदा थे, जिन्होंने एक या दो नहीं, बल्कि पूरे छह अलग-अलग किरदारों को एक साथ पर्दे पर जीवंत कर दिया था। उस दौर में इस तरह का प्रयोग करना न केवल चुनौतीपूर्ण था, बल्कि दर्शकों के लिए भी यह एक बिल्कुल नया और रोमांचक अनुभव था।

    फिल्म की कहानी मुख्य रूप से राज मल्होत्रा नाम के एक युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी चुलबुली और मजाकिया हरकतों से सबको हंसने पर मजबूर कर देता है। लेकिन कहानी में असली मोड़ तब आता है जब राज के पूरे परिवार की एंट्री होती है।

    पर्दे पर जब राज के दादा, उसकी दादी, पिता, मां और बहन एक साथ नजर आते हैं, तो दर्शक यह देखकर दंग रह जाते हैं कि इन सभी किरदारों को निभाने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि खुद गोविंदा ही थे। हर किरदार के लिए उन्होंने अपनी आवाज, बोलने के लहजे और शारीरिक हाव-भाव को इतनी बारीकी से बदला था कि फिल्म देखते समय एक पल के लिए भी ऐसा महसूस नहीं होता था कि ये सभी भूमिकाएं एक ही कलाकार द्वारा निभाई जा रही हैं।

    व्यावसायिक मोर्चे पर भी इस फिल्म ने अपनी चमक बिखेरी। मध्यम बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने सिनेमाघरों में जबरदस्त भीड़ जुटाई और अपनी लागत से दोगुने से भी ज्यादा की कमाई करने में सफल रही। इस फिल्म की सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर अभिनेता में प्रतिभा हो और पटकथा में दम हो, तो दर्शक उसे भरपूर प्यार देते हैं।

    फिल्म के संवाद और कॉमेडी सीन आज भी सोशल मीडिया पर खासे लोकप्रिय हैं। इस प्रोजेक्ट ने गोविंदा को एक ऐसे वर्सटाइल एक्टर के रूप में स्थापित किया जो किसी भी सांचे में ढल सकता था, चाहे वह एक बुजुर्ग दादी का किरदार हो या एक शरारती जवान लड़के का।

    अभिनय के अलावा फिल्म की स्टारकास्ट ने भी इसकी सफलता में अहम भूमिका निभाई। मुख्य अभिनेत्री के साथ गोविंदा की जोड़ी को काफी सराहा गया और दोनों के बीच की केमिस्ट्री ने पर्दे पर जादू बिखेरा। साथ ही, कॉमेडी जगत के अन्य दिग्गज कलाकारों ने भी अपनी उपस्थिति से फिल्म को और भी मजेदार बना दिया।

    दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में केवल मुख्य नायक ने ही बहुमुखी भूमिका नहीं निभाई थी, बल्कि एक अन्य मशहूर कॉमेडियन ने भी दोहरी भूमिका निभाकर हंसी का तड़का लगाया था। तकनीकी रूप से यह फिल्म उस समय की अन्य फिल्मों से काफी आगे थी क्योंकि इसमें कई किरदारों को एक ही फ्रेम में कुशलतापूर्वक दिखाया गया था।

    आज दशकों बीत जाने के बाद भी यह फिल्म भारतीय सिनेमा प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है। यह फिल्म उस दौर का प्रतीक है जब पारिवारिक मनोरंजन और शुद्ध कॉमेडी ही सिनेमा की जान हुआ करती थी।

    बिना किसी विवाद या भारी भरकम स्पेशल इफेक्ट्स के, केवल सादगी और बेहतरीन टाइमिंग के दम पर इस फिल्म ने जो मुकाम हासिल किया, वह आज के दौर की फिल्मों के लिए एक मिसाल है। गोविंदा के वे छह यादगार चेहरे आज भी दर्शकों को गुदगुदाते हैं और सिनेमाई पर्दे पर उनके उस अनोखे ‘सिक्सर’ की याद दिलाते हैं।
  • MP: मुरैना में भक्ति की अनोखी मिसाल… खड़ियाहार गांव की रेखा ने भगवान ठाकुर जी से रचाया विवाह

    MP: मुरैना में भक्ति की अनोखी मिसाल… खड़ियाहार गांव की रेखा ने भगवान ठाकुर जी से रचाया विवाह


    मुरैना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुरैना (Morena) जिले के खड़ियाहार गांव (Khadiyahar village) में भक्ति की अनोखी मिसाल देखने को मिली. 42 साल की रेखा तोमर (Rekha Tomar) ने भगवान ठाकुर जी (Bhagwan Thakur ji) को अपना दूल्हा मानकर वैदिक रीति से विवाह रचा लिया. पूरे गांव में भजन-कीर्तन और राधे-राधे के जयकारे गूंजे. इस आयोजन को ग्रामीणों ने आस्था और समर्पण का दुर्लभ उदाहरण बताया।

    मुरैना जिले के एक छोटे से गांव खड़ियाहार में 42 वर्षीय रेखा तोमर ने भगवान श्री ठाकुर जी को अपना जीवनसाथी मानते हुए पूरे विधि-विधान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह रचा लिया. यह घटना सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उस आस्था की अभिव्यक्ति है, जिसमें व्यक्ति अपने जीवन को पूरी तरह ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देता है. गांव में हुए इस आयोजन ने हर किसी को चौंकाया भी और भावुक भी किया.

    इस अनोखे विवाह की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है. ग्रामीणों के मुताबिक, यह आयोजन पूरी तरह पारंपरिक हिंदू रीति से किया गया, जिसमें विवाह की हर रस्म को विधिवत निभाया गया. रेखा तोमर लंबे समय से ठाकुर जी की भक्ति में लीन थीं और उन्होंने पहले ही यह संकल्प लिया था कि वह अपना जीवन प्रभु को समर्पित करेंगी. यही संकल्प इस विवाह का आधार बना. भक्ति के इस रूप ने एक बार फिर यह साबित किया कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती और यह व्यक्ति को अलग पहचान देती है.

    वैदिक रीति से संपन्न हुआ विवाह

    ग्राम खड़ियाहार के प्राचीन देवालय में यह विवाह संपन्न हुआ. मंदिर के पुजारी रामदुलारे बाबा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी धार्मिक रस्में पूरी कराईं. लग्न पत्रिका का वाचन हुआ. पूजन और पैर पूजाई जैसी परंपराएं निभाई गईं. पूरा आयोजन एक पारंपरिक शादी की तरह ही आयोजित किया गया, जिसमें हर विधि का पालन किया गया.


    भाई ने किया कन्यादान, भावुक हुआ माहौल

    इस विवाह का सबसे भावुक पल तब आया, जब रेखा तोमर के भाई सुरेंद्र ने उनका कन्यादान किया. परिवार के लिए यह क्षण आस्था और भावना का संगम था. ग्रामीणों ने भी इस दृश्य को श्रद्धा के साथ देखा. यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक अलग अनुभव लेकर आया.


    भजन-कीर्तन से गूंजा पूरा गांव

    विवाह के दौरान पूरे गांव में भक्ति का माहौल रहा. भजन-कीर्तन और राधे-राधे के जयकारों से वातावरण गूंज उठा. बड़ी संख्या में ग्रामीण इस आयोजन में शामिल हुए. लोगों ने इसे आस्था और समर्पण की अनोखी मिसाल बताया. गांव के कई प्रमुख लोग भी कार्यक्रम में मौजूद रहे और उन्होंने इसे दुर्लभ आयोजन माना.


    कौन हैं रेखा तोमर

    रेखा तोमर, पिता लाखन सिंह, लंबे समय से धार्मिक प्रवृत्ति की रही हैं. ग्रामीणों के अनुसार, वह अधिकतर समय पूजा-पाठ और भजन में व्यतीत करती थीं. उनका यह निर्णय अचानक नहीं था, बल्कि वर्षों की भक्ति और साधना का परिणाम था. उन्होंने सामाजिक जीवन से अलग हटकर आध्यात्मिक जीवन को प्राथमिकता दी.


    ईश्वर को जीवनसाथी मानने की परंपरा नई नहीं

    धार्मिक मान्यताओं में ईश्वर को जीवनसाथी मानने की परंपरा नई नहीं है. इतिहास और भक्ति परंपरा में कई उदाहरण मिलते हैं, जहां भक्त ने ईश्वर को अपना सर्वस्व मान लिया. ऐसे आयोजन समाज में आस्था और विश्वास को मजबूत करते हैं. हालांकि, यह व्यक्तिगत आस्था का विषय होता है और हर व्यक्ति इसे अपने तरीके से समझता है।

  • US: ट्रंप के डिनर हमले को लेकर नया खुलासा, हमलावर ने गोलीबारी से पहले परिवार को भेजा था मैसेज

    US: ट्रंप के डिनर हमले को लेकर नया खुलासा, हमलावर ने गोलीबारी से पहले परिवार को भेजा था मैसेज


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के डिनर कार्यक्रम (Dinner program) में हुए हमले को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं। हमलावर ने गोलीबारी करने के कुछ मिनट पहले अपने परिवार को एक संदेश भेजा था। इसमें उसने हमला करने की वजह को भी लिखा था। इस संदेश के मुताबिक काश पटेल को छोड़कर ट्रंप प्रशासन की पूरी टीम उसके निशाने पर थी।

    न्यूयॉर्क पोस्ट ने हमलावर एलन के द्वारा परिवार को भेजे गए इस मैसेज को प्रकाशित किया है। इस मैसेज में वह साफ तौर पर कहता हुआ नजर आता है कि काश पटेल को छोड़कर ट्रंप प्रशासन के सभी अधिकारी मेरे निशाने पर हैं। उसने लिखा, “मैं अब यह और स्वीकार करने को तैयार नहीं हूं कि एक पीडोफाइल, बलात्कारी और गद्दार मेरे हाथों को उसके अपराधों से रंगे।” कथित तौर पर इस मैसेज में एलन ने सीधे तौर पर ट्रंप का नाम नहीं लिया। लेकिन ट्रंप का नाम यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ लगातार जोड़ा जाता रहा है। ऐसे में संभव है कि वह ट्रंप की ही बात कर रहा हो।

    न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा देखे गए इस मैसेज में कोल ने लिखा, “ट्रंप प्रशासन के सभी अधिकारी, पटेल को छोड़कर मेरे निशाने पर हैं। और उन्हें इसमें उनके पद के अनुसार प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही उसने यह भी लिखा कि संयुक्त राज्य सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स को केवल जरूरत पड़ने पर ही निशाना बनाया जाएगा। अगर वह नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं करते हैं, तो उन्होंने गैर घातक तरीके से रास्ते से हटाया जाएगा।


    होटल की सुरक्षा पर भी बात

    हमले के ठीक पहले परिवार को भेजे गए इस मैसेज में एलन ने होटल में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था के बारे में भी लिखा। उसने लिखा कि यहां कि सुरक्षा व्यवस्था केवल प्रदर्शनकारियों को रोकने तक ही सीमित थी। उसने लिखा, “मैं कई हथियारों के साथ अंदर चला जाता हूँ और वहाँ कोई भी यह नहीं सोचता कि मैं खतरा हो सकता हूं।” एलन ने अंत में संभावित तौर पर ट्रंप को निशाना बनाते हुए लिखा, “इस स्तर पर ऐसी अक्षमता पागलपन हैं। मैं ईमानदारी के साथ उम्मीद करता हूं कि जब इस देश को वास्तव में सक्षम नेतृत्व मिलेगा, तब तक इसे सुधार लिया जाएगा।”

    इससे पहले, रविवार को एक वाइट हाउस की तरफ से होटल में आयोजित इस डिनर में लगभग अमेरिकी प्रशासन के सभी बड़े लोग मौजूद थे। उसी वक्त वहां पर गोलियों की आवाज सुनाई दी। हमला होने का संकेत मिलते हैं वहां पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने सभी राजनेताओं और उनके साथियों को वहां से बाहर निकाल दिया। हमलावर कोल एलन को भी गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में इस हमले को लेकर ट्रंप ने कहा कि हमलावर में ईसाइयों को लेकर नफरत भरी हुई है।

    बता दें, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप के ऊपर जानलेवा हमला करने की कोशिश हुई हो। 2024 में चुनावी रैली के दौरान भी ट्रंप के ऊपर हमला हुआ था। इस हमले में गोली ट्रंप के कान को घायल करती हुई निकल गई थी। इसके कुछ समय बाद ट्रंप के घर के बाहर भी हमला हुआ था। और अब यह तीसरी बार उनके ऊपर जानलेवा हमला करने की कोशिश हुई है।