Author: bharati

  • Pahalgam आतंकी हमले में मारे गए LIC अफसर के बेटे का दर्द: ‘अगर घुड़सवारी की जिद न करता तो पिता जिंदा होते’

    Pahalgam आतंकी हमले में मारे गए LIC अफसर के बेटे का दर्द: ‘अगर घुड़सवारी की जिद न करता तो पिता जिंदा होते’


    इंदौर। कश्मीर की वादियों में 22 अप्रैल 2025 को हुआ पहलगाम आतंकी हमला आज भी कई परिवारों के जख्मों को ताजा कर देता है। इस हमले में मारे गए 26 लोगों में इंदौर के एलआईसी अधिकारी सुशील नथानियल भी शामिल थे। घटना को एक साल बीत चुका है, लेकिन उनके घर की खामोशी आज भी उस दर्दनाक मंजर की गवाही देती है। परिवार के लिए यह सिर्फ एक बरसी नहीं, बल्कि अपनों को खोने की पीड़ा को फिर से जीने जैसा दिन है।
    सुशील नथानियल अपने मिलनसार स्वभाव और मददगार व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। परिवार के अनुसार, हमले के समय भी वे अपनी जान बचाने के बजाय दूसरों की मदद करने में जुटे रहे। चश्मदीदों का कहना है कि जब आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की तो सुशील वहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान आतंकियों ने उन्हें निशाना बना लिया और उनकी सीने में गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई।
    परिवार आज भी उस आखिरी दिन को भूल नहीं पाया है। उनकी पत्नी जेनिफर नथानियल सुबह से ही उस आखिरी तस्वीर को देख भावुक हो जाती हैं, जिसमें पूरा परिवार मुस्कुराता नजर आ रहा है। जेनिफर वर्तमान में एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं, लेकिन पति को खोने का दर्द उनके जीवन का हिस्सा बन चुका है।
    बेटे ऑस्टिन नथानियल के लिए यह हादसा जिंदगी भर का बोझ बन गया है। वह आज भी उस दिन को याद कर भावुक हो जाते हैं। ऑस्टिन कहते हैं, “अगर उस दिन मैंने घुड़सवारी की जिद न की होती, तो शायद पापा आज हमारे साथ होते।” यह एक वाक्य उनके दिल में हमेशा टीस की तरह चुभता है। वह मानते हैं कि उस दिन का हर फैसला उनकी जिंदगी को बदल गया।
    हमले के वक्त सुशील अपने परिवार के साथ कश्मीर घूमने गए थे। परिवार का यह सफर बेहद उत्साह के साथ शुरू हुआ था। पहले सूरत, फिर चंडीगढ़ और उसके बाद कश्मीर जाने का प्लान बना था। यात्रा के दौरान हर पल को कैमरे में कैद किया गया था, लेकिन किसी को क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
    परिवार के मुताबिक, सुशील का सपना था कि वे रिटायरमेंट के बाद इंदौर में शांतिपूर्ण जीवन बिताएंगे और बेटे को अच्छे कॉलेज में पढ़ाएंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। आतंकियों की गोली ने न सिर्फ एक व्यक्ति की जान ली, बल्कि पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं।
    आज एक साल बाद भी नथानियल परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। घर में अब भी सन्नाटा पसरा है और हर आहट पर पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। परिवार का कहना है कि सुशील सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि दूसरों की मदद करने वाला एक सच्चा इंसान था, जिसने आखिरी सांस तक मानवता का धर्म निभाया।
    पहलगाम हमले की यह बरसी न सिर्फ एक परिवार के दर्द की कहानी है, बल्कि उन मासूम जिंदगियों की भी याद दिलाती है जो आतंक की भेंट चढ़ गईं।
  • पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाया, अमित शाह ने कांग्रेस और टीएमसी पर साधा निशाना

    पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाया, अमित शाह ने कांग्रेस और टीएमसी पर साधा निशाना


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है। दम दम उत्तर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने अपने संबोधन में राज्य की राजनीतिक स्थिति और आगामी मतदान को लेकर कई महत्वपूर्ण दावे किए, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गरम हो गया है।

    सभा के दौरान उन्होंने दावा किया कि इस बार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है और मौजूदा नेतृत्व को जनता का समर्थन कम होता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव की ओर देख रही है और आगामी चुनाव परिणाम इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस पार्टी को भी निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में उसका प्रभाव काफी कमजोर हो चुका है। उनके अनुसार, कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने में असफल रही है और इस बार भी उसके लिए स्थिति अनुकूल नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने में संघर्ष कर रही है।

    सभा में दिए गए भाषण के दौरान राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने विपक्षी नेताओं की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक विमर्श में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ बयान देना आवश्यक है ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान बना रहे।

    इसके अलावा उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि राज्य में कई मुद्दों पर जनता असंतोष व्यक्त कर रही है और यह आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे मतदान के दिन सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और अपने मताधिकार का प्रयोग करें।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के बयान चुनावी माहौल में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास माने जाते हैं। पश्चिम बंगाल में पहले से ही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र है और विभिन्न दल अपनी रणनीति के तहत मतदाताओं को आकर्षित करने में जुटे हुए हैं।

    चुनाव आयोग की निगरानी में राज्य में मतदान प्रक्रिया की तैयारी चल रही है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर प्रचार अभियान को अंतिम चरण में पहुंचा रहे हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक परिदृश्य लगातार बदलता दिखाई दे रहा है।

    आने वाले दिनों में मतदान और उसके बाद के परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सभी दल अंतिम चरण के प्रचार में पूरी ताकत लगा रहे हैं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।

  • नई दिल्ली में एलपीजी व्यवस्था को लेकर न्यायिक टिप्पणी, नीति निर्धारण को कार्यपालिका का विषय बताया गया

    नई दिल्ली में एलपीजी व्यवस्था को लेकर न्यायिक टिप्पणी, नीति निर्धारण को कार्यपालिका का विषय बताया गया


    नई दिल्ली :में एलपीजी सिलेंडर की कमी और कथित कालाबाजारी से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने इस याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मामलों का समाधान न्यायपालिका के बजाय कार्यपालिका के स्तर पर किया जाना चाहिए। इस फैसले के बाद एलपीजी आपूर्ति और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।
    याचिका में यह दावा किया गया था कि राजधानी में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में कमी के कारण आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और कई स्थानों पर कालाबाजारी के चलते उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। याचिकाकर्ता ने सरकार पर पर्याप्त कदम न उठाने का आरोप लगाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की थी।
    सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, वितरण और मूल्य निर्धारण से जुड़े निर्णय सरकार और प्रशासनिक तंत्र के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि नीति निर्धारण और संसाधन प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर न्यायिक आदेश देना उचित नहीं होगा, क्योंकि यह कार्यपालिका की जिम्मेदारी है।
    न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि सामाजिक और आर्थिक समस्याओं जैसे गरीबी, शिक्षा और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता से जुड़े विषयों का समाधान सरकार की नीतियों और योजनाओं के माध्यम से किया जाता है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि वह ऐसे मामलों में प्रशासनिक निर्णयों की जगह नहीं ले सकती, चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।
    एलपीजी आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर हाल के समय में कुछ क्षेत्रों में अस्थायी बाधाएं और वितरण संबंधी शिकायतें सामने आई थीं, जिससे उपभोक्ताओं में असंतोष देखा गया। कुछ स्थानों पर कीमतों में अनियमितता और जमाखोरी की शिकायतें भी दर्ज की गई थीं, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई थी। संबंधित एजेंसियों ने ऐसे मामलों में जांच और छापेमारी की प्रक्रिया भी अपनाई थी।
    अदालत के इस निर्णय के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि एलपीजी आपूर्ति और वितरण से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान सरकार और संबंधित विभागों द्वारा ही किया जाएगा। न्यायालय ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में नीति सुधार और प्रशासनिक दक्षता ही मुख्य समाधान का आधार हैं।
    यह फैसला इस बात को भी रेखांकित करता है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जैसे विषयों में संतुलन बनाए रखना प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इससे यह संदेश भी जाता है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका की भूमिकाएं स्पष्ट रूप से अलग हैं और दोनों अपने अपने दायरे में कार्य करते हैं।
  • अदालत की रिकॉर्डिंग साझा करने के आरोपों पर कानूनी कार्रवाई की मांग, कई नाम शामिल..

    अदालत की रिकॉर्डिंग साझा करने के आरोपों पर कानूनी कार्रवाई की मांग, कई नाम शामिल..

    नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर होने के बाद न्यायिक प्रक्रिया की गोपनीयता और डिजिटल युग में उसकी सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत की एक सुनवाई के दौरान हुई कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिससे न्यायिक मर्यादा प्रभावित हुई है। मामले में कई राजनीतिक नेताओं और एक पत्रकार सहित कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम भी शामिल किए गए हैं, जिन पर इस सामग्री के प्रसार में भूमिका निभाने का आरोप है।

    याचिका के अनुसार यह घटना उस सुनवाई से जुड़ी है, जिसमें एक महत्वपूर्ण मामले में न्यायाधीश से स्वयं को अलग करने की मांग की गई थी। आरोप है कि उस दौरान अदालत में हुई बहस और टिप्पणियों को रिकॉर्ड कर सार्वजनिक मंचों पर प्रसारित किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कार्य न केवल अदालत की गोपनीयता का उल्लंघन है, बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

    मामले में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित सामग्री को कुछ लोगों द्वारा साझा किया गया और बाद में यह व्यापक रूप से विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल गई। याचिका में इसे एक संगठित प्रयास बताया गया है, जिसका उद्देश्य अदालत की कार्यवाही को प्रभावित करना या उसकी छवि को नुकसान पहुंचाना हो सकता है। इस आधार पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

    याचिका में यह अनुरोध भी किया गया है कि संबंधित वीडियो और ऑडियो सामग्री को सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही, जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में न्यायिक प्रक्रिया की गोपनीयता को गंभीर खतरा हो सकता है।

    कानूनी दृष्टि से ऐसे मामलों में अदालत यह देखती है कि क्या वास्तव में किसी ने जानबूझकर न्यायिक कार्यवाही की गोपनीयता भंग की है और क्या इससे न्यायालय की गरिमा या निष्पक्षता पर प्रभाव पड़ा है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो अदालत अवमानना के तहत कार्रवाई कर सकती है, जिसमें दंडात्मक प्रावधान भी शामिल होते हैं।

    इस मामले को लेकर कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के साथ न्यायिक कार्यवाही की सुरक्षा एक नई चुनौती बन गई है। अदालतों में पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन बनाए रखना अब पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

    फिलहाल यह याचिका न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है और आने वाली सुनवाई में इस पर प्रारंभिक विचार होने की संभावना है। इस दौरान अदालत यह तय कर सकती है कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाए और किन बिंदुओं पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है।

  • काला नमक: छोटी मात्रा में बड़ा फायदा, शरीर का संतुलन बनाए रखने में है बेहद मददगार

    काला नमक: छोटी मात्रा में बड़ा फायदा, शरीर का संतुलन बनाए रखने में है बेहद मददगार


    नई दिल्ली। काला नमक भारतीय रसोई का एक ऐसा साधारण लेकिन बेहद असरदार घटक है, जो स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी कई तरह से लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद में इसे “सौवर्चला लवण” कहा गया है और सामान्य सफेद नमक की तुलना में इसे अधिक औषधीय गुणों वाला बताया गया है।

    खास बात यह है कि काला नमक पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है। भोजन के बाद होने वाली गैस, पेट फूलना, कब्ज और भारीपन जैसी समस्याओं में यह राहत देने का काम करता है। यह पेट को हल्का रखता है और मेटाबॉलिज्म को सुधारने में सहायक माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार काले नमक की तासीर गर्म होती है, इसलिए यह शरीर में पित्त को संतुलित करने में मदद करता है। सुबह खाली पेट एक चुटकी काला नमक गुनगुने पानी के साथ लेने से शरीर डिटॉक्स होता है और पाचन क्रिया सक्रिय रहती है। हालांकि, इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा नुकसान भी पहुंचा सकती है।

    काला नमक सिर्फ पाचन ही नहीं, बल्कि सूजन और दर्द में भी राहत देने वाला माना जाता है। जोड़ों के दर्द में इसकी सिकाई उपयोगी हो सकती है। वहीं गर्मियों में छाछ में भुना जीरा और काला नमक मिलाकर पीने से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट की जलन कम होती है।

    हालांकि हाई ब्लड प्रेशर, किडनी या हड्डियों से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। सही मात्रा में इस्तेमाल किया गया काला नमक शरीर के संतुलन को बनाए रखने में एक सरल और प्राकृतिक सहायक बन सकता है।

  • शाहरुख खान की अजमेर यात्रा से जुड़ा अनुभव सामने आया, भीड़ प्रबंधन बना बड़ी चुनौती…

    शाहरुख खान की अजमेर यात्रा से जुड़ा अनुभव सामने आया, भीड़ प्रबंधन बना बड़ी चुनौती…


    नई दिल्ली ।सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रमुख कलाकारों की लोकप्रियता कई बार सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन जाती है। हाल ही में सामने आए एक अनुभव ने इस विषय को फिर चर्चा में ला दिया है, जिसमें एक पूर्व सुरक्षा कर्मी ने अभिनेता शाहरुख खान की अजमेर स्थित दरगाह यात्रा के दौरान की परिस्थितियों का उल्लेख किया है। यह घटना दर्शाती है कि भीड़भाड़ वाले धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की मौजूदगी किस प्रकार अचानक जटिल हालात पैदा कर सकती है।

    बताया गया कि यह घटना उस समय की है जब अभिनेता दरगाह में दर्शन के लिए पहुंचे थे। यह समय विशेष रूप से व्यस्त माना जाता है, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। अभिनेता के वहां पहुंचने की जानकारी मिलते ही लोगों की भीड़ तेजी से उनकी ओर बढ़ने लगी। कुछ ही पलों में स्थिति ऐसी हो गई कि सुरक्षा कर्मियों के लिए नियंत्रण बनाए रखना कठिन हो गया।

    स्थिति के बिगड़ने के साथ ही सुरक्षा टीम ने अभिनेता को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ के दबाव के कारण यह कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया। स्थानीय स्तर पर व्यवस्था संभालने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए गए और हालात को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाने पड़े। इस दौरान कुछ समय के लिए अव्यवस्था का माहौल बना रहा, जिससे सुरक्षा व्यवस्था की सीमाएं भी सामने आईं।

    पूर्व सुरक्षा कर्मी के अनुसार उस समय प्राथमिकता केवल अभिनेता की सुरक्षा सुनिश्चित करना थी। टीम के सदस्यों को एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम करना पड़ा और हर निर्णय तेजी से लेना पड़ा। भीड़ के कारण सामान्य रूप से चलना भी संभव नहीं था, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अभिनेता का व्यवहार शांत और संयमित रहा। उन्होंने परिस्थितियों को समझते हुए किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी और सुरक्षा टीम के साथ सहयोग बनाए रखा। यह पहलू यह दर्शाता है कि लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने वाले लोग ऐसी परिस्थितियों के प्रति मानसिक रूप से तैयार रहते हैं।

    यह घटना केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि यह व्यापक स्तर पर सुरक्षा प्रबंधन की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। विशेष रूप से धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में, जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की जरूरत होती है।

    इस तरह की परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि भविष्य में बेहतर समन्वय, पूर्व योजना और प्रभावी भीड़ नियंत्रण उपायों के माध्यम से ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता है, ताकि सभी संबंधित पक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

  • आज का राशिफल 22 अप्रैल 2026, रवि योग और स्कंद षष्ठी का विशेष संयोग, कई राशियों को लाभ के संकेत

    आज का राशिफल 22 अप्रैल 2026, रवि योग और स्कंद षष्ठी का विशेष संयोग, कई राशियों को लाभ के संकेत


    नई दिल्ली। 22 अप्रैल 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है क्योंकि आज रवि योग और स्कंद षष्ठी का संयोग बन रहा है। इस योग के प्रभाव से कई राशियों के लिए प्रगति और अवसरों के संकेत मिल रहे हैं, वहीं कुछ राशियों को अपने निर्णयों और व्यवहार में अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। चंद्रमा का मिथुन राशि में गोचर आज विचारों, संवाद और निर्णय क्षमता को प्रभावित करेगा, जिससे कई लोगों के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं।
    मेष, वृषभ, मिथुन और सिंह राशि के जातकों के लिए आज का दिन विशेष रूप से अनुकूल रहने की संभावना है। इन राशियों के लोगों को करियर में प्रगति, आर्थिक लाभ और रुके हुए कार्यों में सफलता मिल सकती है। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और नए अवसरों का लाभ उठाने का मौका मिलेगा। पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर भी सहयोग और सकारात्मक माहौल देखने को मिल सकता है।
    वहीं कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु और मकर राशि के लोगों को आज सतर्क रहने की जरूरत है। इन राशियों के जातकों को अनावश्यक खर्च, निर्णयों में भ्रम और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले सोच-विचार करना आवश्यक होगा। कार्यक्षेत्र में भी संयम और धैर्य बनाए रखना फायदेमंद रहेगा।
    कर्क, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए दिन मिला-जुला प्रभाव लेकर आ सकता है। इन राशियों के जातकों को मेहनत के अनुरूप परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन इसके लिए धैर्य और संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। पारिवारिक मामलों में सहयोग मिलेगा, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है।
    आज का दिन करियर के लिहाज से कई लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। जहां कुछ लोगों को नई जिम्मेदारियां और अवसर मिल सकते हैं, वहीं कुछ को कार्यक्षेत्र में अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत पड़ेगी। आर्थिक मामलों में भी संतुलन बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि जहां लाभ के योग बन रहे हैं, वहीं अनावश्यक खर्च बढ़ने की भी संभावना है।
    प्रेम संबंधों के संदर्भ में आज का दिन भावनात्मक रूप से सक्रिय रहेगा। कुछ राशियों के लिए संबंधों में मजबूती आएगी, जबकि कुछ को संवाद में स्पष्टता बनाए रखने की जरूरत होगी ताकि गलतफहमियों से बचा जा सके। पारिवारिक जीवन में सहयोग और समझदारी बनाए रखना दिन को बेहतर बना सकता है।
    स्वास्थ्य के मामले में सामान्य सावधानी बरतने की आवश्यकता है। बदलते मौसम और कार्यभार के कारण थकान, सिरदर्द या हल्की शारीरिक समस्याएं सामने आ सकती हैं। नियमित दिनचर्या और संतुलित आहार अपनाना लाभकारी रहेगा।
  • ई दिल्ली में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल, मौन अवधि उल्लंघन के आरोपों ने बढ़ाई चिंता

    ई दिल्ली में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल, मौन अवधि उल्लंघन के आरोपों ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली। में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान से ठीक पहले राज्य की राजनीति में नया मोड़ देखने को मिला है। अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम को लेकर उठे आरोपों ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। मतदान से पहले लागू मौन अवधि के दौरान कथित तौर पर प्रचार गतिविधियों की योजना को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, जिससे चुनावी नियमों के पालन को लेकर बहस तेज हो गई है।

    निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदान से 48 घंटे पहले मौन अवधि लागू की जाती है, जिसका उद्देश्य मतदाताओं को बिना किसी बाहरी प्रभाव के स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अवसर देना होता है। इस दौरान किसी भी प्रकार का प्रचार, चाहे वह सार्वजनिक रूप से हो या डिजिटल माध्यमों के जरिए, प्रतिबंधित रहता है। इसी संदर्भ में आरोप सामने आए हैं कि संबंधित पार्टी इस अवधि के दौरान ऑनलाइन प्रचार अभियान चलाने की तैयारी कर रही है, जो नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।

    इस मामले में दर्ज शिकायत में कहा गया है कि चुनावी कानूनों के तहत इस तरह की गतिविधियों पर स्पष्ट रोक है। आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने की बात भी सामने आई है, जिसके बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए संभावित प्रचार सामग्री को हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब यह राजनीतिक दल पहली बार विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहा है। राज्य की राजनीति में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही इस पार्टी के लिए यह विवाद एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी पार्टी पर आचार संहिता से जुड़े कुछ मामलों को लेकर चर्चा हो चुकी है, जिससे उसकी छवि पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के अंतिम चरण में इस प्रकार के आरोप किसी भी पार्टी के लिए संवेदनशील स्थिति पैदा कर सकते हैं। इससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है और चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों के लिए नियमों का पालन करना और जिम्मेदार आचरण बनाए रखना आवश्यक माना जा रहा है।

    तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान होना है, जिसमें बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। मौन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के प्रचार पर रोक को लेकर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    यह पूरा घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि आधुनिक चुनावों में डिजिटल माध्यमों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते चुनावी नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाना और तकनीकी स्तर पर सतर्कता बढ़ाना समय की आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है।

  • वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में कंपनी के प्रदर्शन पर दबाव, आय और लाभ दोनों प्रभावित…

    वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में कंपनी के प्रदर्शन पर दबाव, आय और लाभ दोनों प्रभावित…


    नई दिल्ली । ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ी कंपनी Maharashtra Scooters Limited ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं, जिनमें मुनाफे में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर लगभग 92 प्रतिशत घटकर 4.01 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 51.63 करोड़ रुपये था। इस गिरावट ने कंपनी के समग्र प्रदर्शन पर दबाव को स्पष्ट रूप से सामने रखा है।

    कंपनी की आय में भी इस तिमाही के दौरान कमी देखी गई है। कुल राजस्व सालाना आधार पर 3.55 प्रतिशत घटकर 6.51 करोड़ रुपये पर आ गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम है। इसके साथ ही कर पूर्व मुनाफा भी करीब 91 प्रतिशत गिरकर 5.46 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले 62.05 करोड़ रुपये था। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि कंपनी की लाभप्रदता पर कई स्तरों पर असर पड़ा है।

    हालांकि लागत के मोर्चे पर कंपनी ने कुछ राहत दर्ज की है। मार्च तिमाही में कुल खर्च में सालाना आधार पर लगभग 55 प्रतिशत की गिरावट आई और यह घटकर 1.05 करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद कर्मचारी लागत में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो तीन गुना से अधिक बढ़कर 0.22 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वहीं अन्य खर्चों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 0.83 करोड़ रुपये पर आ गया।

    कमजोर वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड की घोषणा की है। बोर्ड ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए प्रति शेयर 60 रुपये का अंतिम डिविडेंड प्रस्तावित किया है, जो अंकित मूल्य के आधार पर 600 प्रतिशत के बराबर है। यह प्रस्ताव आगामी वार्षिक आम बैठक में अनुमोदन के अधीन रहेगा। यदि इसे स्वीकृति मिलती है तो भुगतान 4 अगस्त 2026 तक किया जा सकता है, जबकि पात्र शेयरधारकों के निर्धारण के लिए रिकॉर्ड तिथि 30 जून 2026 तय की गई है।

    कंपनी का मुख्य व्यवसाय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए डाई, जिग्स, फिक्स्चर और डाई कास्टिंग कंपोनेंट्स के निर्माण से जुड़ा है, हालांकि वर्तमान में यह एक सक्रिय वाहन निर्माता के बजाय मुख्य रूप से निवेश कंपनी के रूप में कार्य कर रही है। यह कंपनी Bajaj Holdings and Investment Limited की सहायक इकाई है और एक गैर पंजीकृत कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में संचालित होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार कंपनी की आय का प्रमुख स्रोत उसके निवेश पोर्टफोलियो से प्राप्त रिटर्न है, जिसमें समूह की अन्य कंपनियों में किया गया निवेश शामिल है। ऐसे में बाजार की परिस्थितियों और निवेश से मिलने वाले लाभ में उतार चढ़ाव का सीधा असर इसके वित्तीय परिणामों पर पड़ता है। हालिया तिमाही के नतीजे भी इसी प्रवृत्ति को दर्शाते हैं, जहां निवेश आधारित आय में कमी ने समग्र लाभप्रदता को प्रभावित किया है।

  • नई दिल्ली में शेयर बाजार में तेज गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आए..

    नई दिल्ली में शेयर बाजार में तेज गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आए..


    नई दिल्ली । में भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को तेज गिरावट दर्ज की गई, जहां प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में आ गए। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में कमजोरी देखने को मिली और दिन बढ़ने के साथ गिरावट और गहरी होती गई। सेंसेक्स में लगभग 600 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। इस अचानक आई बिकवाली ने निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना दिया।

    बाजार में आई इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार पर सीधा असर डाला। एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी बाजारों में गिरावट ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिससे घरेलू बाजार में भी दबाव बढ़ गया। इसके साथ ही भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों को जोखिम कम करने की ओर प्रेरित किया।

    भारतीय बाजार में इस गिरावट का सबसे बड़ा असर आईटी सेक्टर पर देखने को मिला, जहां भारी बिकवाली दर्ज की गई। आईटी सूचकांक में तेज गिरावट ने पूरे सेक्टर को नीचे खींच लिया। कुछ बड़ी कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन और भविष्य को लेकर सतर्क रुख अपनाने से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ, जिससे इस क्षेत्र में बिकवाली और तेज हो गई।

    इसके अलावा हाल के दिनों में बाजार में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। लगातार बढ़त के बाद ऊंचे स्तरों पर निवेशकों ने लाभ सुरक्षित करने के लिए शेयरों की बिक्री शुरू की, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। यह मुनाफावसूली गिरावट का एक अहम कारण बनकर उभरी और बाजार की दिशा को प्रभावित किया।

    हालांकि बाजार में पूरी तरह नकारात्मक माहौल नहीं रहा और कुछ सेक्टरों में खरीदारी भी देखने को मिली। उपभोक्ता आधारित कंपनियों और कुछ चुनिंदा शेयरों में मजबूती दर्ज की गई, जिससे बाजार को आंशिक सहारा मिला। इसके बावजूद समग्र रूप से बाजार में अस्थिरता और अनिश्चितता का माहौल बना रहा।

    कच्चे तेल की कीमतों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाए रखी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंचे दाम और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण तेल की कीमतें दबाव में बनी हुई हैं। इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित होती है और बाजार में अस्थिरता बढ़ती है।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार बाजार में कुछ महत्वपूर्ण समर्थन और प्रतिरोध स्तर बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार इन स्तरों से नीचे जाता है तो गिरावट और बढ़ सकती है, जबकि स्थिरता आने पर सुधार की संभावना भी बनी रह सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजर आगामी कॉर्पोरेट नतीजों और वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।