Author: bharati

  • इंदौर में युवक की गला रेतकर हत्या का खुलासा, लूट के इरादे से वारदात; नाबालिग समेत दो आरोपी गिरफ्तार

    इंदौर में युवक की गला रेतकर हत्या का खुलासा, लूट के इरादे से वारदात; नाबालिग समेत दो आरोपी गिरफ्तार


    इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर में हुए सनसनीखेज हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। बाणगंगा थाना पुलिस ने युवक की गला रेतकर की गई निर्मम हत्या के मामले में एक नाबालिग सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हत्या पैसे और मोबाइल लूटने के इरादे से की गई थी।

    पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान खोजराम के रूप में हुई है। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने पहले युवक को बहाने से एक सुनसान इलाके में बुलाया। वहां पहले से ही लूट की योजना बनाई गई थी। मौका मिलते ही आरोपियों ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। पोस्टमार्टम और घटनास्थल की जांच में युवक के शरीर पर चाकू के 18 गहरे घाव पाए गए, जिससे वारदात की क्रूरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। गला रेतने के बाद भी आरोपियों ने कई वार किए, ताकि वह बच न सके।

    हत्या के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश की। मृतक का मोबाइल फोन और सिम कार्ड तोड़कर अलग अलग स्थानों पर फेंक दिए, ताकि पुलिस लोकेशन ट्रेस न कर सके। इतना ही नहीं, वारदात को हादसा दर्शाने के उद्देश्य से शव को रेलवे पटरी के पास फेंक दिया गया, जिससे प्रथम दृष्टया मामला ट्रेन से कटने का लगे। लेकिन पुलिस की सतर्कता ने आरोपियों की योजना पर पानी फेर दिया।

    बाणगंगा पुलिस ने घटनास्थल से मिले तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मुखबिर तंत्र की मदद से संदिग्धों की पहचान की। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में एक नाबालिग है, जिसे किशोर न्याय अधिनियम के तहत प्रक्रिया में लिया जाएगा, जबकि दूसरे आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा।

    पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने पहले भी इस तरह की लूट या आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वारदात में और कोई व्यक्ति शामिल तो नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

    इस घटना ने शहर में सनसनी फैला दी है। एक मामूली लूट के लालच में जिस तरह बेरहमी से हत्या की गई, उसने कानून व्यवस्था और युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड लेने की तैयारी कर रही है, ताकि आगे की पूछताछ में और खुलासे हो सकें।

  • MP विधानसभा बजट सत्र 2026 की शुरुआत हंगामे से, राज्यपाल के अभिभाषण के बीच विपक्ष का जोरदार विरोध

    MP विधानसभा बजट सत्र 2026 की शुरुआत हंगामे से, राज्यपाल के अभिभाषण के बीच विपक्ष का जोरदार विरोध


    भोपाल । राजधानी भोपाल में सोमवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 की शुरुआत तीखे राजनीतिक माहौल के बीच हुई। सदन की कार्यवाही प्रारंभ होते ही परंपरा के अनुसार संपूर्ण छह छंदों में वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसके बाद मंगुभाई पटेल ने अभिभाषण पढ़ना शुरू किया लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी और अंततः इसे अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

    राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में राज्य सरकार की उपलब्धियों विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश आज उस ऐतिहासिक दहलीज पर खड़ा है जिसे केंद्र सरकार ने अमृत काल की संज्ञा दी है। उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है और निवेश को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। हाल ही में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    राज्यपाल ने वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पीएम जनमन योजना के तहत 1 लाख 35 हजार से अधिक आवास निर्मित किए गए हैं। साथ ही उज्जैन में मां शिप्रा को प्रदूषण मुक्त बनाने के प्रयासों नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी भी सदन के समक्ष रखी।

    हालांकि अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर आपत्ति जताई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल को बीच में टोकते हुए आरोप लगाया कि नलजल योजना और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों जैसे गंभीर विषयों का अभिभाषण में उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी जिससे सदन का माहौल गरमा गया।

    विपक्ष का आरोप था कि सरकार जमीनी समस्याओं से ध्यान हटाकर केवल उपलब्धियों का बखान कर रही है। वहीं सत्तापक्ष ने इसे राजनीतिक रणनीति बताते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान हर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा का अवसर मिलेगा। लगातार हो रहे शोर-शराबे के बीच राज्यपाल ने अपना अभिभाषण पूरा किया लेकिन स्थिति सामान्य न होने पर विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया।

    अब राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा मंगलवार से शुरू होगी जहां सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं। बजट सत्र की शुरुआत जिस तरह हंगामे के साथ हुई है उससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर राजनीतिक तापमान और बढ़ सकता है।

  • जबलपुर के भेड़ाघाट में ‘जहरीला प्रसाद’ बना काल, पिस्ता बर्फी खाने से एक की मौत, 18 अब भी अस्पताल में

    जबलपुर के भेड़ाघाट में ‘जहरीला प्रसाद’ बना काल, पिस्ता बर्फी खाने से एक की मौत, 18 अब भी अस्पताल में


    जबलपुर। मध्य प्रदेश की संस्कार धानी जबलपुर के प्रसिद्ध पर्यटन और धार्मिक स्थल भेड़ाघाट से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। यहां आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में वितरित किए गए प्रसाद को खाने के बाद 19 लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। इनमें से एक पीड़ित भेड़ाघाट निवासी इंद्रपाल पटेल ने सोमवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। बाकी 18 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है जिनमें से कुछ की हालत अब भी नाजुक बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार घटना दो दिन पहले की है जब भेड़ाघाट क्षेत्र में एक धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया था। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए थे। आयोजन के समापन पर प्रसाद के रूप में पिस्ता बर्फी बांटी गई जिसे भेड़ाघाट चौराहे स्थित मिठाई की दुकानों से मंगाया गया था। प्रसाद ग्रहण करने के कुछ ही देर बाद लोगों को घबराहट उल्टी दस्त और तेज पेट दर्द जैसी शिकायतें होने लगीं। देखते ही देखते एक दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    स्थिति गंभीर होते देख सभी बीमार लोगों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच में इसे गंभीर फूड पॉइजनिंग का मामला बताया। चिकित्सकों के अनुसार दूषित खाद्य पदार्थ के सेवन से शरीर में तेजी से संक्रमण फैल सकता है जिससे जान का खतरा भी उत्पन्न हो जाता है। इंद्रपाल पटेल की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

    घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भेड़ाघाट चौराहे पर स्थित मिठाई दुकानों बीकानेर स्वीट्स और राजस्थान स्वीट्स पर दबिश दी। टीम ने संदिग्ध पिस्ता बर्फी और अन्य मिठाइयों के सैंपल जब्त कर लिए हैं। इन नमूनों को विस्तृत जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य स्तरीय प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद यदि लापरवाही या मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि मिठाई बनाने में इस्तेमाल की गई सामग्री खराब थी या भंडारण और स्वच्छता में किसी प्रकार की अनदेखी की गई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सामूहिक आयोजन में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्रोत की जांच अवश्य सुनिश्चित करें। इस दर्दनाक घटना ने धार्मिक आयोजनों में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक श्रद्धालु की मौत और कई लोगों की जिंदगी अस्पताल में जूझती हालत में होना पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि लापरवाही की छोटी सी चूक भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।

  • धार भोजशाला विवाद: वकीलों की हड़ताल के चलते टली सुनवाई, अब 18 फरवरी को पेश होगी ASI की सर्वे रिपोर्ट

    धार भोजशाला विवाद: वकीलों की हड़ताल के चलते टली सुनवाई, अब 18 फरवरी को पेश होगी ASI की सर्वे रिपोर्ट


    इंदौर/धार। मध्य प्रदेश की सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक धार भोजशाला मामले में चल रही कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है। जिला अदालत में आज होने वाली बहुचर्चित सुनवाई को वकीलों की काम से विमुक्ति हड़ताल के चलते स्थगित कर दिया गया है। अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को निर्धारित की गई है। उल्लेखनीय है कि शिवपुरी में हुए एक वकील के हत्याकांड के विरोध में प्रदेश भर के वकील न्यायिक कार्यों से दूर हैं जिसका सीधा असर भोजशाला केस पर पड़ा है।

    सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के पालन में आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI को अपनी विस्तृत सर्वे रिपोर्ट अदालत के पटल पर रखनी थी। इस रिपोर्ट में भोजशाला परिसर के भीतर किए गए वैज्ञानिक सर्वे खुदाई के दौरान मिले साक्ष्य डिजिटल फोटोग्राफी और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेजों को शामिल किया गया है। हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों को उम्मीद थी कि आज रिपोर्ट पेश होने के बाद स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी लेकिन अब यह सस्पेंस 18 फरवरी तक बना रहेगा।

    मुस्लिम पक्ष के गंभीर आरोप और हिंदू पक्ष की मांग

    जैसे-जैसे सुनवाई की तारीखें बदल रही हैं दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज होता जा रहा है। मुस्लिम पक्ष मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने एएसआई के सर्वे की निष्पक्षता पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। उनका आरोप है कि सर्वे के दौरान कुछ पत्थर की मूर्तियां पिछले रास्ते से गुपचुप तरीके से परिसर के अंदर लाकर रखी गईं और बाद में उन्हें सर्वे रिपोर्ट का हिस्सा बना लिया गया। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश है।

    दूसरी ओर हिंदू पक्ष महाराजा भोज उत्सव समिति अपने दावों पर अडिग है। हिंदू पक्ष की ओर से कोर्ट में यह मांग प्रमुखता से उठाई गई है कि भोजशाला वाग्देवी मां सरस्वती का मंदिर है इसलिए वहां हिंदुओं को 24 घंटे पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने परिसर में होने वाली नमाज को पूरी तरह से बंद करने की भी मांग की है। हिंदू पक्ष का तर्क है कि सर्वे में मिले अवशेषों से यह स्वतः सिद्ध हो जाता है कि यह एक प्राचीन मंदिर है।

    क्या है भोजशाला का महत्व?

    धार की भोजशाला सदियों से सांप्रदायिक सद्भाव और विवाद दोनों का केंद्र रही है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार यहां मंगलवार को हिंदू पूजा करते हैं और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज अदा करते हैं। एएसआई का वैज्ञानिक सर्वे इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए किया गया है कि क्या इस इमारत का मूल स्वरूप मंदिर था। अब सबकी निगाहें 18 फरवरी पर टिकी हैं जब कोर्ट के रिकॉर्ड पर एएसआई के साक्ष्य आएंगे और इस ऐतिहासिक विवाद की दिशा तय होगी।

  • PM मोदी ने US ट्रेड डील को बताया अहम… पूर्ववर्ती UPA सरकार पर जमकर साधा निशाना

    PM मोदी ने US ट्रेड डील को बताया अहम… पूर्ववर्ती UPA सरकार पर जमकर साधा निशाना


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार (UPA Government) पर निशाना साधा। उन्होंने कहाकि यूपीए सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत व्यापार वार्ताओं (India Trade Negotiations) में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख सका। इस वजह से एक भी बातचीत निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी।‘एक इंटरव्यू में मोदी ने कहाकि भारत ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए, खास तौर पर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में, इन देशों में लगभग शून्य शुल्क या अन्य देशों की तुलना में काफी कम शुल्क पर वस्तुओं के निर्यात के रास्ते खुल गए हैं।

    प्रधानमंत्री कहाकि इन व्यापार समझौतों पर भले ही हाल ही में मुहर लगी हो, लेकिन ये अधिक प्रतिस्पर्धी घरेलू उद्योग, आत्मविश्वास से भरपूर दृष्टिकोण और खुले विचारों का नतीजा हैं। ये आज की दुनिया में पाए जाने वाले दुर्लभ गुण हैं। हाल के वर्षों में भारत की ओर से किए गए व्यापार समझौतों की बात करने से पहले यह याद करना अहम है कि हम एक दशक पहले कहां खड़े थे। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने अपने शासनकाल में कछ व्यापार समझौते करने की कोशिश की, लेकिन यह यात्रा अनिश्चितता और अस्थिरता से भरी रही।

    मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहाकि मुख्यतः उनके आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत मजबूती के साथ अपना पक्ष नहीं रख सका। उन्होंने बातचीत को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए अनुकूल माहौल नहीं बनाया। बातचीत शुरू होती और फिर ठप पड़ जाती। अंत में लंबी बातचीत के बावजूद कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाता था।

    उन्होंने कहा कि लेकिन सत्ता में आने के बाद हमने नीति-आधारित शासन के जरिये आर्थिक पुनरुत्थान का नेतृत्व किया, हमारे आर्थिक ढांचे को मजबूत किया और एक नियम-आधारित प्रणाली का निर्माण किया। जब हमने राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत पूर्वानुमान और सुधार-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित किया, तो दुनिया भारत में निवेश करने के लिए इच्छुक हो गई।

    मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की ओर से किए गए सुधारों से भारत के विनिर्माण और सेवा जैसे दोनों क्षेत्रों को मदद हासिल हुई तथा एमएसएमई के बीच उत्पादकता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास से भरपूर, प्रतिस्पर्धी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के उभार के कारण कई देशों को नई दिल्ली के साथ व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने में फायदा दिखा।

    मोदी ने लिखित साक्षात्कार में कहाकि पूर्व की सरकार के रुख और हमारे दृष्टिकोण में मौजूद अंतर को समझने के लिए यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौते पर गौर करें। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में भी इस पर चर्चा और बातचीत हुई थी। लेकिन अंततः हमारी सरकार में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी समझौते पर मुहर लगी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी सरकार ने मुक्त व्यापार समझौतों का एक रणनीतिक और उद्देश्यपूर्ण नेटवर्क बनाया है।

  • ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है US…. मिडल ईस्ट में तैनात किया बड़ा सैन्य बेड़ा!

    ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है US…. मिडल ईस्ट में तैनात किया बड़ा सैन्य बेड़ा!


    वाशिंगटन।
    ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi) और उनका प्रतिनिधिमंडल पिछले सप्ताह ओमान (Oman) में हुए अप्रत्यक्ष वार्ता के पहले दौर के बाद रविवार को स्विट्जरलैंड (Switzerland) की राजधानी जिनेवा (Geneva) पहुंचा है। ओमान जिनेवा में होने वाली वार्ता में मध्यस्थता करेगा।
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    अमेरिका (America) ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है और अगर दोनों देशों के बीच जारी परमाणु वार्ता फेल हुई तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह दावे पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी (Former US Defense Official) ने किए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बीते कई हफ्तों से जारी तनाव के बीच अमेरिका की पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर इंटरनेशनल सिक्योरिटी अफेयर्स सेलेस्टे ए. वॉलेंडर (Celeste A. Wallander) ने कहा है कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बहुत बड़ा सैन्य बेड़ा तैनात कर दिया है और यह इस बात का इशारा है कि अगर बातचीत फेल होती है तो अमेरिका ईरान पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।

    पूर्व पेंटागन अधिकारी ने एक इंटरव्यू में यह बातें कही हैं। वॉलेंडर के मुताबिक अमेरिका ने इलाके में अपना सबसे बड़ा सैन्य बेड़ा यूंही नहीं भेजा है या यह सिर्फ संदेश देने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका ने ईरान पर पहले से कहीं ज्यादा दबाव बनाया है और उसे सामान्य डिटरेंस सिग्नलिंग के बजाय संभावित मिलिट्री एक्शन की चेतावनी के तौर पर समझा जाना चाहिए।

    युद्ध की तैयारी कर रहा अमेरिका
    वॉलेंडर ने कहा कि अमेरिका इमरजेंसी की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा, “अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में जिस तरह के मिलिट्री एयरक्राफ्ट कैरियर भेजे हैं, वे ईरान पर दबाव डालने के लिए अमेरिका द्वारा पहले की गई मिलिट्री डिप्लॉयमेंट की तुलना में काफी अलग हैं।” उन्होंने आगे कहा कि हालांकि इस तरह की तैनाती संदेश देने और डराने के लिए काम आ सकती हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति से पता चलता है कि अमेरिका सिर्फ ताकत नहीं दिखा रहा है। बल्कि अमेरिका इमरजेंसी के लिए तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ बातचीत करने के तरीके खोजने होंगे।”


    एक और युद्धपोत तैनात

    पूर्व पेंटागन अधिकारी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सबसे उन्नत और परमाणु संचालित विमानवाहक पोत ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ और उसके स्ट्राइक ग्रुप को कैरिबियन सागर से हटाकर पश्चिम एशिया में तैनात करने का आदेश दिया है। यह युद्धपोत अब फारस की खाड़ी और अरब सागर क्षेत्र में पहले से मौजूद ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ और उसके सहायक बेड़े के साथ शामिल हो गया है। इससे ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि ओमान में ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम पर चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता में कोई ठोस परिणाम ना मिलने से अमेरिका असंतुष्ट है।


    ट्रंप ने फिर दिया सत्ता परिवर्तन का इशारा

    इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिनों एक बार फिर कहा है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन से बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता। ईरान में इस्लामी शासन के अंत के प्रयासों के बारे में पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने कहा, ”इससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता। वे 47 सालों से सिर्फ बातें कर रहे हैं।” वहीं विमानवाहक पोत की तैनाती के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, “अगर हम कोई समझौता नहीं कर पाए, तो हमें इसकी जरूरत पड़ेगी।” हालांकि अरब देशों ने पहले ही चेतावनी दी है कि किसी भी हमले से क्षेत्रीय संघर्ष भड़क सकता है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया अब भी गाजा पट्टी में इजराइल-हमास युद्ध के प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रहा है।


    दूसरे दौर की बातचीत जल्द

    इस बीच ईरान और अमेरिका मंगलवार को जिनेवा में अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के दूसरे दौर में प्रवेश करेंगे। ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त रवांची ने तेहरान में बीबीसी को दिए साक्षात्कार में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि किसी समझौते तक पहुंचने के लिए अमेरिका को अपनी गंभीरता साबित करनी होगी। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईमानदारी दिखाता है, तो दोनों पक्षों के बीच पुनः शुरू हुई अप्रत्यक्ष वार्ताएं किसी समझौते तक पहुंच सकती हैं। बता दें कि दोनों देशों के बीच वार्ता का पहला दौर छह फरवरी को ओमान की राजधानी मस्कट में हुआ था। रवांची ने कहा कि ईरान की ओर से 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम को काफी हद तक निष्क्रिय (डायल्यूट) करने की पेशकश इस बात का प्रमाण है कि देश समझौता करना चाहता है। उन्होंने कहा, “अगर वे प्रतिबंधों पर बात करने को तैयार हैं, तो हम इस मुद्दे और अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अन्य विषयों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।”

  • T20 World Cup में फिर भारत के आगे फुस्स हुई पाकिस्तानी टीम… आखिरी मैच हारी तो टूर्नामेंट से बाहर

    T20 World Cup में फिर भारत के आगे फुस्स हुई पाकिस्तानी टीम… आखिरी मैच हारी तो टूर्नामेंट से बाहर

    Pakistan

    नई दिल्ली। टी-20 विश्व कप 2026 (T20 World Cup 2026) में लगातार दो मैच ग्रुप फेज में जीतने के बाद पाकिस्तान की टीम (Pakistan Team) अपने तीसरे मैच में भारत (India) के सामने खड़ी थी। कोलंबो (Colombo.) के आर प्रेमदासा स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच रविवार 14 फरवरी को ब्लॉकबस्टर मैच की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि, पाकिस्तान की टीम इस मैच में फुस्स हो गई। पाकिस्तान को भारतीय टीम ने बुरी तरह से हराया। इसी हार की वजह से पाकिस्तान की टीम पर टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है।

    दरअसल, पाकिस्तान की टीम टी20 विश्व कप 2026 में ग्रुप ए में है। पाकिस्तान के अलावा ग्रुप में चार और टीमें भी हैं। पांच में से कोई दो टीमें ही सुपर 8 के लिए क्वालीफाई करेंगी। अगले फेज के लिए भारतीय टीम ने क्वालीफाई कर लिया है। इसके अलावा एक टीम इस ग्रुप से एलिमिनेट हो गई है। ऐसे में तीन टीमों के बीच अब एक पायदान के लिए जंग होने वाली है और इस जंग में अगर पाकिस्तान की टीम मात खा जाए तो वह टी20 विश्व कप से बाहर हो जाएगी।

    ग्रुप ए में इस समय 3 मैचों में जीत दर्ज करने के बाद भारतीय टीम शीर्ष पर है और सुपर 8 में पहुंच गई है। दूसरे नंबर पर ग्रुप में यूएसए की टीम है, जो 4 में से दो मैच जीत चुकी है और दो मैच हारी है। सभी लीग मैच यूएसए के समाप्त हो चुके हैं। हालांकि, नेट रन रेट यूएसए का पाकिस्तान से बेहतर है, क्योंकि 3 मैचों के बाद 4 अंक हासिल कर चुकी पाकिस्तान की टीम तीसरे स्थान पर है। यूएसए का नेट रन रेट प्लस में है, जबकि पाकिस्तान का नेट रन रेट माइनस में है।

    नीदरलैंड 3 में से एक मैच जीतने के बाद चौथे स्थान पर है और नामीबिया की टीम 3 मैच हार चुकी है और सबसे आखिरी पायदान पर है, जो एलिमिनेट हो गई है। हालांकि, यूएसए, पाकिस्तान और नीदरलैंड इस ग्रुप से सुपर 8 में जाने की रेस में हैं। अब सिनेरियो ये कहता है कि अगर पाकिस्तान की टीम अपने आखिरी मैच में नामीबिया से हार जाती है तो फिर पाकिस्तान की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी, क्योंकि नेट रन रेट यूएसए का बेहतर है।

    थोड़े बहुत ही सही, लेकिन उम्मीद नीदरलैंड के भी सुपर 8 में जाने की हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें पहले तो भारत को बड़े अंतर से हराना होगा और उम्मीद करनी होगी कि पाकिस्तान की टीम को नामीबिया से हार मिल जाए। इसके अलावा उनका नेट रन रेट इतना बेहतर हो जाए कि यूएसए के नेट रन रेट को पीछे छोड़ दें, क्योंकि यूएसए के चार अंक हो चुके हैं और सभी मुकाबले उनके खेले जा चुके हैं। अगर पाकिस्तान की टीम नामीबिया को भले ही एक रन से ही क्यों न हराए, वह सुपर 8 में 6 अंकों के साथ क्वालीफाई कर जाएगी।

  • तारिक रहमान का शपथग्रहण कल…. ओम बिरला होंगे शामिल, PM मोदी नहीं जाएंगे बांगलादेश

    तारिक रहमान का शपथग्रहण कल…. ओम बिरला होंगे शामिल, PM मोदी नहीं जाएंगे बांगलादेश

    ढाका। बांग्लादेश (Bangladesh.) के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tariq Rahman.) के शपथग्रहण समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi.) नहीं जाएंगे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) को भारत बांग्लादेश भेज रहा है। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी होंगे। यह समारोह 17 फरवरी को ढाका के राष्ट्रीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में आयोजित होगा।

    एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया कि यह प्रतिनिधिमंडल भारत-बांग्लादेश के गहरे और स्थायी दोस्ती को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रण मिला था, लेकिन वे मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय वार्ता और दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट की तैयारी के कारण नहीं जा पा रहे।

    हाल ही में बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी जीत दर्ज की। तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में लंदन से वापस लौटे थे, अब प्रधानमंत्री पद संभालने जा रहे हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बीएनपी के संस्थापक थे और मां खालिदा जिया पूर्व प्रधानमंत्री रही हैं। 2008 में भ्रष्टाचार के आरोपों में देश छोड़ने वाले रहमान ने चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया। यह चुनाव 2024 के छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद पहला था। रहमान ने जीत के बाद राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया और कहा कि वे लोकतंत्र, कानून व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेंगे।


    भारत के साथ कैसे होंगे रिश्ते

    प्रधानमंत्री मोदी ने 13 फरवरी को तारिक रहमान को फोन पर बधाई दी और उन्हें लोकतंत्र की रक्षा करने वाले सभी बलिदानों को याद किया। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने 13 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया, जिसमें चीन, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मलेशिया जैसे देश शामिल हैं। भारत की ओर से उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला दोनों देशों के बीच नई शुरुआत का प्रतीक है। बीएनपी ने हमेशा भारत के साथ संतुलित संबंधों पर जोर दिया है और रहमान ने कहा है कि वे किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता नहीं रखेंगे, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनाएंगे।

    यह शपथ ग्रहण समारोह बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी का प्रतीक माना जा रहा है। तारिक रहमान ने युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने, भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती और रोजगार सृजन का वादा किया है। भारत के लिए बांग्लादेश एक अहम पड़ोसी है और दोनों देश साझा इतिहास, संस्कृति व सीमा से जुड़े हैं। ओम बिरला और विक्रम मिस्री की उपस्थिति से व्यापार, सुरक्षा, जल संसाधन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई गति मिलने की उम्मीद है। दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि के लिए काम करेंगे, जो दक्षिण एशिया के भविष्य के लिए अहम है।

  • J&K में ‘म्यूल खातों’ के बढ़ते नेटवर्क का भंडाफोड़… राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में धन के दुरुपयोग की आशंका

    J&K में ‘म्यूल खातों’ के बढ़ते नेटवर्क का भंडाफोड़… राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में धन के दुरुपयोग की आशंका


    नई दिल्ली।
    सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में ‘म्यूल खातों’ (‘Mule Accounts’) के लगातार बढ़ते नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों को आशंका है कि इन खातों के माध्यम से भेजे गए धन का उपयोग अलगाववादी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों (Separatist and Anti-National Activities) के लिए किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि तीन साल में इस क्षेत्र में 8,000 से अधिक संचालित ‘म्यूल खातों’ की पहचान की गई है। साथ ही इनसे लेन-देन रोक दिया गया है, जिससे धन शोधन के एक जटिल नेटवर्क का खुलासा हुआ है। उन्होंने इन खातों को साइबर अपराध श्रृंखला में ‘सबसे कमजोर, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी’ बताया। क्योंकि इन खातों के बिना हेर-फेर किए गए पैसे का क्रिप्टोकरेंसी में बदलना और इसका पता लगाना असंभव होगा।


    एजेंसियों को भी हिदायत

    अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों को बैंकों के साथ परामर्श करने के लिए कहा है। ताकि ‘म्यूल खातों’ की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाया जा सके और ऐसी वित्तीय धोखाधड़ी को सुविधाजनक बनाने वाले बिचौलियों की पहचान की जा सके। अधिकारियों को संदेह है कि एनआईए द्वारा 2017 में जम्मू-कश्मीर में अवैध धन के प्रवाह पर की गई कार्रवाई के बाद, राष्ट्रविरोधी तत्व ‘डिजिटल हवाला’ के एक नए मॉडल की ओर रुख कर सकते हैं, जिसमें बिचौलियों द्वारा प्राप्त राशि का उपयोग देश के खिलाफ गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।


    ऐसे करता है काम

    आमतौर पर, ‘म्यूल खाते’ उपलब्ध कराने वाला बिचौलिया व्यक्ति न तो पीड़ितों से संपर्क करता है और न ही फर्जी लिंक भेजता है। इसके बजाय, उनकी भूमिका गुप्त लेकिन महत्वपूर्ण होती है। वे ऐसे खातों की निरंतर आपूर्ति की व्यवस्था और रख-रखाव करते हैं, जिनका उपयोग साइबर अपराधी अपनी पहचान उजागर किए बिना ठगी गए पैसे को प्राप्त पाने और ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। ये ‘म्यूल खाते’ अक्सर आम लोगों के होते हैं, जिन्हें कमीशन और न्यूनतम जोखिम के आश्वासन का लालच दिया जाता है। उन्हें यह कहकर अपने बैंक खातों का पूरा नियंत्रण, जिसमें नेट बैंकिंग विवरण भी शामिल हैं, सौंपने के लिए राजी किया जाता है कि इन खातों का उपयोग थोड़े समय के लिए किया जाएगा।


    बड़ी रकम की लेन-देन

    अक्सर एक ही साइबर अपराधी को एक समय में 10 से 30 म्यूल खाते उपलब्ध कराए जाते हैं। इतना ही नहीं कई मामलों में, बैंक खाते फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले जाते हैं, ताकि एक ही दिन में 40 लाख रुपए जैसी बड़ी रकम का लेन-देन बिना किसी संदेह के करना संभव हो जाता है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों का मानना है कि ‘म्यूल खाते’ उपलब्ध कराने वाले बिचौलिये सीधे तौर पर पीड़ित को शिकार नहीं बनाते, लेकिन कमीशन लेकर धन शोधन में अहम भूमिका निभाते हैं, जिसमें धोखाधड़ी से प्राप्त धन को तेजी से कई खातों में स्थानांतरित किया जाना और पकड़े जाने से बचने के लिए इसे छोटे-छोटे लेन-देन में विभाजित करना शामिल है।

  • 2026 Holiday: भारत में मिलती है सबसे ज्यादा छुट्टियां…. 190 देशों की सूची में सबसे शीर्ष पर

    2026 Holiday: भारत में मिलती है सबसे ज्यादा छुट्टियां…. 190 देशों की सूची में सबसे शीर्ष पर


    नई दिल्ली।
    दुनिया भर में छुट्टियों का कैलेंडर (Holiday Calendar) बताता है कि कोई देश अपनी संस्कृति, धर्म और काम के बीच कैसे संतुलन बनाता है। 2026 में छुट्टियों को लेकर जारी नए इंडेक्स में भारत (India) दुनिया के 190 देशों की सूची में सबसे शीर्ष (Top) पर है। अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के कारण भारत 42 सार्वजनिक छुट्टियों के साथ पहले स्थान पर है। वहीं दुनिया का औसत मात्र 13 छुट्टियां हैं। इस सूची में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश अमेरिका (America) छुट्टियों के मामले में वैश्विक औसत से भी नीचे है। यह रिपोर्ट दुनिया भर के सांस्कृतिक, धार्मिक और राष्ट्रीय त्योहारों के आधार पर तैयार की गई है।


    भारत में ज्यादा छुट्टियां क्यों

    भारत की रैंकिंग इतनी अधिक होने का मुख्य कारण यहां की धार्मिक विविधता है। भारत इकलौता ऐसा देश है, जहां हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन सभी प्रमुख धर्मों के त्योहारों पर राष्ट्रीय या क्षेत्रीय अवकाश दिया जाता है। वहीं भारत में केंद्र सरकार की लगभग 17 राजपत्रित छुट्टियों के अलावा विभिन्न राज्यों के अपने स्थानीय अवकाश से मिलने के बाद यह संख्या 42 के पास हो जाती है।


    न्यू ईयर पर कई देशों में अवकाश

    रिपोर्ट में बताया गया कि न्यू ईयर डे (1 जनवरी) दुनिया में सबसे ज्यादा मनाई जाने वाली छुट्टी है, जो कम से कम 169 देशों में आधिकारिक अवकाश है। वहीं 187 देशों में अपने स्वतंत्रता दिवस या राष्ट्रीय दिवस पर अनिवार्य सार्वजनिक अवकाश रखा जाता है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि अधिक छुट्टियाँ काम और जीवन संतुलन में सुधार करती हैं, वहीं भारत में बिजनेस प्रोडक्टिविटी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।


    अनेक धर्मों के त्योहार

    कई देश राष्ट्रीय स्तर पर अनेक धर्मों के प्रमुख पर्व मनाते हैं। उदाहरण के लिए, कम से कम 52 देशों में क्रिसमस और ईद के लिए सार्वजनिक अवकाश होते हैं। इनमें से आधे से अधिक देश (30) अफ्रीका में हैं।


    सबसे अधिक छुट्टियों वाले शीर्ष देश

    रैंक देश कुल छुट्टियां (2026)
    1. भारत – 42
    2. नेपाल – 35
    3. म्यांमार – 30
    4. ईरान – 26
    5. श्रीलंका – 25


    इन देशों में छुट्टियां सीमित :

    – वियतनाम: 6 अवकाश हैं, दुनिया में सबसे कम
    – मेक्सिको: 8 छुट्टियां
    – ब्रिटेन : 8-10 बैंक हॉलिडे
    – नीदरलैंड: 9 छुट्टियां