Author: bharati

  • MP में फिर बदलेगा मौसम, 20 जिलों में तीन दिन आंधी-बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में अलर्ट नहीं

    MP में फिर बदलेगा मौसम, 20 जिलों में तीन दिन आंधी-बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में अलर्ट नहीं


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद अब एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। पश्चिमी विक्षोभ और नए चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से 15 से 17 अक्टूबर के बीच प्रदेश के 20 जिलों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश होने की संभावना है। हालांकि, भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में फिलहाल बारिश को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    मौसम केंद्र, भोपाल के अनुसार, अगले तीन दिनों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का असर देखने को मिलेगा। 15 और 16 अक्टूबर को ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में बारिश की संभावना है। इसके बाद 17 अक्टूबर को मौसम का प्रभाव रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग तक पहुंच सकता है।

    इन 20 जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 17 अक्टूबर को प्रदेश के 20 जिलों में आंधी और बारिश का असर रह सकता है। इनमें ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट शामिल हैं।

    इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। वहीं, प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में फिलहाल इस सिस्टम का खास असर होने की संभावना नहीं है।

    मानसून विदा, फिर भी क्यों हो रही बारिश?

    मध्य प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी मौसम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के रुझानों से पता चलता है कि अक्टूबर में गर्मी, बारिश और हल्की ठंड का मिला-जुला असर रहता है।

    इस साल भी मौसम का यही मिजाज दिखाई दे रहा है। दिन में धूप और गर्मी महसूस हो रही है, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ रही है। इसी बीच, मौसमी सिस्टम सक्रिय होने पर कुछ इलाकों में बारिश की स्थिति बन रही है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    सामान्य से 4% कम हुई सीजन की बारिश

    जून से सितंबर तक चले मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच से करीब 4 प्रतिशत कम है। इस तरह प्रदेश में सामान्य के मुकाबले लगभग 1.5 इंच कम पानी बरसा।

    बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच अंतर भी रहा। पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसत से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन और भोपाल समेत अन्य क्षेत्रों में सामान्य से करीब 12 प्रतिशत कम बारिश हुई।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

    प्रदेश के 25 जिलों में बारिश सामान्य या उससे अधिक रही। इनमें भोपाल, ग्वालियर, गुना, छतरपुर और रीवा समेत कई जिले शामिल हैं। वहीं, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रायसेन, देवास और धार समेत 30 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।

    मानसून के शुरुआती दौर में कम बारिश का असर पूरे सीजन के आंकड़ों पर दिखाई दिया। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। बाद के महीनों में हुई बारिश के बावजूद शुरुआती कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी।

  • आज का राशिफल : कुंभ और मकर समेत इन राशियों को मिल सकते हैं तरक्की के अवसर, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

    आज का राशिफल : कुंभ और मकर समेत इन राशियों को मिल सकते हैं तरक्की के अवसर, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल


    नई दिल्ली ।
    14 अक्टूबर 2026, बुधवार का दिन सभी 12 राशियों के जातकों के लिए अलग-अलग संभावनाएं लेकर आ सकता है। कुछ राशियों को करियर और कारोबार में अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिल सकता है, जबकि कुछ लोगों को आर्थिक फैसले लेते समय सतर्क रहने की जरूरत होगी। पारिवारिक संबंधों में तालमेल, कामकाज में अनुशासन और जिम्मेदारियों को समय पर पूरा करना दिन को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है।

    मेष राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र और कारोबार से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। परिवार के सदस्यों की सलाह उपयोगी हो सकती है और निजी मामलों में सुधार की संभावना है। सामाजिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है, लेकिन विरोधियों की गतिविधियों पर ध्यान देना होगा। यात्रा के दौरान सतर्क रहें और जल्दबाजी से बचें। शुभ अंक 3, 6, 8 और 9 हैं। शुभ रंग ऐप्पल रेड है। उपाय के रूप में मां स्कंदमाता की पूजा करें और पीली वस्तुओं का दान करें।

    वृषभ राशि वालों के लिए सहयोग और टीम के साथ बेहतर तालमेल से काम आगे बढ़ाने का अवसर है। कारोबार और साझेदारी को मजबूत करने के साथ आर्थिक मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। परिवार का सहयोग मिलेगा। नियमों का पालन करें और विनम्र व्यवहार बनाए रखें। शुभ अंक 3, 6 और 8 हैं। शुभ रंग क्रीम है। मां स्कंदमाता की पूजा और पीली वस्तुओं का दान करना शुभ उपाय बताया गया है।

    मिथुन राशि के जातकों को करियर और कारोबार में अनुभवी लोगों की सलाह से लाभ मिल सकता है। कार्यस्थल पर अनुशासन बनाए रखें और बातचीत में संयम बरतें। साझेदारी से जुड़े काम आगे बढ़ सकते हैं, जबकि आर्थिक प्रयास सामान्य रह सकते हैं। सेवा क्षेत्र में काम करने वालों को अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए। शुभ अंक 3, 5, 6 और 8 हैं। शुभ रंग ऐप्पल ग्रीन है। मां स्कंदमाता की आराधना करें और मेहनत जारी रखें।

    कर्क राशि के लिए दिन सकारात्मक रहने की संभावना है। मित्रों और करीबियों के साथ संबंध बेहतर हो सकते हैं। मनोरंजन, घूमने-फिरने और आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं। पढ़ाई और प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रयास जारी रखें। पेशेवर कामों में सक्रियता दिखाएं और परिवार से किए वादे निभाएं। शुभ अंक 2, 3, 6 और 8 हैं। शुभ रंग भगवा है। मां स्कंदमाता की पूजा और पीली वस्तुओं का दान करें।

    सिंह राशि वालों को पारिवारिक मामलों में धैर्य रखने और बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करने की जरूरत है। प्रबंधन से जुड़े काम बेहतर तरीके से पूरे हो सकते हैं। फैसले लेने से पहले तथ्यों को समझें और प्रेम संबंधों में सहजता बनाए रखें। अतिउत्साह से बचना बेहतर होगा। शुभ अंक 1, 3 और 9 हैं। शुभ रंग गेरुआ है। मां स्कंदमाता की पूजा करें और परिवार के सदस्यों के प्रति विनम्र रहें।

    कन्या राशि के जातकों को अपनी योग्यता दिखाने और नए लोगों से संपर्क बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। कारोबार विस्तार की योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं और व्यावसायिक यात्राएं उपयोगी रह सकती हैं। जरूरी काम समय पर पूरे करें और अनावश्यक चर्चाओं से बचें। शुभ अंक 3, 5, 6 और 8 हैं। शुभ रंग खाकी है। मां स्कंदमाता की पूजा करें और पीली वस्तुओं का दान करें।

    तुला राशि वालों के लिए कारोबार में तेजी बनाए रखने और जरूरी काम आगे बढ़ाने का समय है। अच्छी सूचना मिलने की संभावना है। घर में सुखद माहौल रह सकता है और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। सामाजिक संबंधों में मधुरता बनाए रखें। शुभ अंक 3, 6 और 8 हैं। शुभ रंग कांसे के समान है। मां स्कंदमाता की आराधना करें और साफ-सफाई पर ध्यान दें।

    वृश्चिक राशि के जातकों को कई मामलों में इच्छित परिणाम मिलने की उम्मीद रह सकती है। परिवार और करीबियों के साथ संबंध मजबूत करने, नए विचारों पर काम करने और जरूरी योजनाओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। विनम्र व्यवहार और बेहतर तालमेल बनाए रखें। शुभ अंक 3, 6, 8 और 9 हैं। शुभ रंग सिंदूरी लाल है। मां स्कंदमाता की पूजा करें और रचनात्मक गतिविधियों में रुचि लें।

    धनु राशि वालों को जरूरी चर्चाओं में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। कारोबार में नियमों का पालन करें और आर्थिक लेनदेन में विशेष सावधानी बरतें। विदेश यात्रा से जुड़े अवसर बन सकते हैं, लेकिन योजनाओं पर आगे बढ़ने से पहले जरूरी जानकारी जुटाना उचित रहेगा। विवादों से दूर रहें। शुभ अंक 3, 6, 8 और 9 हैं। शुभ रंग स्वर्णिम है। मां स्कंदमाता की पूजा करें और बातचीत में विनम्रता रखें।

    मकर राशि के जातकों के लिए कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने और कारोबार को व्यवस्थित करने के अवसर बन सकते हैं। आर्थिक मामलों में सक्रियता बढ़ने के साथ सामाजिक प्रतिष्ठा में सुधार की संभावना है। बड़े फैसले सोच-विचारकर लें और परिवार तथा सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखें। सेहत की अनदेखी न करें। शुभ अंक 6, 8 और 9 हैं। शुभ रंग पीतांबरी है। मां स्कंदमाता की पूजा करें और व्यवहार में विनम्रता रखें।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए करियर और कारोबार में बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिल सकता है। प्रशासनिक और प्रबंधन से जुड़े कामों में सक्रियता बढ़ेगी। पद और प्रतिष्ठा से संबंधित मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति सुधारने वाली योजनाओं पर काम आगे बढ़ सकता है। प्रभावशाली लोगों से बातचीत और कारोबार विस्तार के नए प्रस्ताव मिल सकते हैं। कागजी कामकाज और लेनदेन में स्पष्टता रखें तथा किसी समझौते को ध्यान से पढ़ें। शुभ अंक 3, 6 और 8 हैं। शुभ रंग पीला है। मां स्कंदमाता की पूजा करें और काम में उत्साह बनाए रखें।

    मीन राशि के जातकों को कामकाज और कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं। पेशेवर गतिविधियों में तालमेल बनाने से लाभ हो सकता है। अलग-अलग स्रोतों से आर्थिक फायदा मिलने की संभावना है। वरिष्ठों और परिवार के बड़ों का सहयोग मिल सकता है। बातचीत में विनम्रता रखें और जिम्मेदारियों को धैर्य से पूरा करें। शुभ अंक 3, 6, 8 और 9 हैं। शुभ रंग केसरिया है। मां स्कंदमाता की पूजा करें और दूसरों से किए वादे निभाएं।

  • शिवपुरी में पारस देसी घी में सीसे की मात्रा अधिक मिलने पर बिक्री पर प्रतिबंध

    शिवपुरी में पारस देसी घी में सीसे की मात्रा अधिक मिलने पर बिक्री पर प्रतिबंध

    शिवपुरी। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने पारस देसी घी के एक बैच की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। जांच में इस बैच में सीसे की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। इसके बाद संबंधित घी को मानव उपभोग के लिए असुरक्षित घोषित करते हुए उसके विक्रय, प्रदर्शन और ऑनलाइन आपूर्ति पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

    कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई के संबंध में अभिहित अधिकारी एवं उपसंचालक ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी विष्णुदत्त शर्मा ने नियमित निरीक्षण के दौरान छत्री रोड स्थित ब्लिंक कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड के स्टोर से पारस देसी घी के बैच नंबर GU26FQG55 का नमूना लिया था। इसे जांच के लिए भोपाल भेजा गया था।

    राज्य खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट में नमूने में सीसे की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। इसके आधार पर संबंधित बैच को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत मानव उपभोग के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है।

    अभिहित अधिकारी एवं उपसंचालक डॉ. संजय ऋषिश्वर ने ब्लिंक कॉमर्स और संबंधित विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित बैच के घी का न तो दुकानों पर प्रदर्शन किया जाए और न ही उसकी बिक्री या ऑनलाइन आपूर्ति की जाए। उपलब्ध शेष स्टॉक को तत्काल अलग रखकर उस पर ‘विक्रय हेतु प्रतिबंधित’ अंकित करना होगा।

    संबंधित कारोबारियों को आदेश प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर घी की कुल प्राप्त मात्रा, बेची गई मात्रा और शेष स्टॉक का विवरण बिलों सहित विभाग में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

    विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित बैच का विक्रय करते पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 59 सहित अन्य लागू दंडात्मक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

  • तुर्किये-पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य नजदीकी के बीच भारत की रणनीतिक तैयारी तेज, ग्रीस और साइप्रस के साथ रक्षा सहयोग का रोडमैप तैयार

    तुर्किये-पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य नजदीकी के बीच भारत की रणनीतिक तैयारी तेज, ग्रीस और साइप्रस के साथ रक्षा सहयोग का रोडमैप तैयार

    नई दिल्ली ।तुर्किये और पाकिस्तान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच भारत ने अपनी सामरिक तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में कदम तेज किए हैं। इसके तहत भारत भूमध्यसागर क्षेत्र में अपनी पहुंच बढ़ाने और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को ध्यान में रखते हुए ग्रीस तथा साइप्रस के साथ रक्षा संबंधों का विस्तार कर रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की साइप्रस और ग्रीस की चार दिवसीय यात्रा को इसी व्यापक रणनीतिक प्रयास के संदर्भ में देखा जा रहा है। इस दौरे का मुख्य जोर समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर है।

    भारत और तुर्किये के संबंधों में पाकिस्तान का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्रभावित करती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये ने पाकिस्तान को बेयराक्तार ड्रोन दिए थे, जिनका पाकिस्तान ने सीमा पर इस्तेमाल किया। इसके अलावा तुर्किये पाकिस्तान के साथ मक्का रक्षा गठबंधन में भी शामिल है। अंकारा और इस्लामाबाद ने रक्षा उत्पादन तथा नौसैनिक सहयोग को भी बढ़ाया है। तुर्किये पाकिस्तान के लिए युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम में भी भागीदारी कर रहा है।

    इस पृष्ठभूमि में भारत ने ग्रीस और साइप्रस के साथ अपने रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान दिया है। भारत और साइप्रस के बीच रक्षा सहयोग के लिए छह साल का विशेष रोडमैप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सामरिक सहयोग को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है। वहीं, ग्रीस के साथ भारत ने हाल ही में द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा उद्योगों के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों ने एक साझा घोषणा पत्र का आदान-प्रदान भी किया है।

    ग्रीस की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखती है। यह यूरोप के पूर्वी प्रवेश द्वार के रूप में अहम भूमिका निभाता है और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे के लिए भी महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। यह आर्थिक गलियारा भारत को यूरोपीय बाजारों से जोड़ने की योजना का हिस्सा है। ऐसे में ग्रीस के साथ बढ़ते संबंध केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके व्यापक रणनीतिक और आर्थिक मायने भी हैं।

    आने वाले समय में भारत और ग्रीस सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री निगरानी, रक्षा तकनीक तथा संयुक्त उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इन क्षेत्रों में तालमेल से दोनों देशों को अपनी क्षमताएं मजबूत करने और रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा। समुद्री सुरक्षा पर सहयोग भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि भूमध्यसागर क्षेत्र में रणनीतिक गतिविधियां भारत के व्यापक अंतरराष्ट्रीय हितों से जुड़ी हुई हैं।

    भारत, ग्रीस और साइप्रस के बीच त्रिपक्षीय सामरिक सहयोग को तुर्किये-पाकिस्तान रक्षा साझेदारी के जवाब में एक महत्वपूर्ण विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। भारत के लिए इन दोनों देशों के साथ संबंध मजबूत करना अपनी रणनीतिक संभावनाओं का विस्तार करने का माध्यम है। रक्षा सचिव की यात्रा और हाल में हुए समझौतों से संकेत मिलता है कि भारत क्षेत्रीय समीकरणों पर नजर रखते हुए विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी प्रत्यक्ष सैन्य टकराव या नई सैन्य तैनाती की घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल भारत का जोर रक्षा साझेदारी, सैन्य सहयोग और समुद्री सुरक्षा के जरिए अपने रणनीतिक विकल्प मजबूत करने पर है।

  • अमेरिका के जंगलों में महिलाओं के लिए खास गुस्सा शिविर, चीखने-चिल्लाने से भावनाएं जाहिर करने का मौका, फीस 51 हजार रुपये से शुरू

    अमेरिका के जंगलों में महिलाओं के लिए खास गुस्सा शिविर, चीखने-चिल्लाने से भावनाएं जाहिर करने का मौका, फीस 51 हजार रुपये से शुरू

    नई दिल्ली । रिश्तों में तनाव, निजी जीवन की परेशानियों और दुनिया की घटनाओं से पैदा होने वाला गुस्सा कई बार लोगों के लिए संभालना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अमेरिका में महिलाओं के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां उन्हें बिना किसी डर या आलोचना के अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अवसर मिलता है। इन शिविरों में महिलाएं जंगल के बीच एकत्र होती हैं और आवाज निकालने, चीखने-चिल्लाने तथा शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से अपना गुस्सा जाहिर करती हैं। आयोजकों का कहना है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ऐसी जगह उपलब्ध कराना है, जहां महिलाएं अपनी भावनाओं को लेकर असहज महसूस न करें।

    पोर्टलैंड के पास ओरेगन के जंगलों में एमी आर्मस्ट्रांग के ‘होली रेज रिट्रीट’ में महिलाओं के छोटे समूह हिस्सा लेते हैं। यहां एक समूह में अधिकतम 10 महिलाओं को शामिल किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान एक महिला को जोर से चीखते देखकर दूसरी महिलाओं को भी अपनी आवाज के जरिए भावनाएं व्यक्त करने का अवसर मिलता है। इसके बाद सामूहिक चर्चा होती है, जिसमें प्रतिभागी अपने अनुभव साझा करती हैं। शिविर के एक चरण में लिखे गए पत्रों को जलाया जाता है और अंत में गीत के साथ कार्यक्रम पूरा किया जाता है।

    आर्मस्ट्रांग ने अगस्त 2025 में इन शिविरों की शुरुआत की थी। आधे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत ध्यान अभ्यास से होती है। वह इस अभ्यास को शरीर को कविता के रूप में महसूस करने की प्रक्रिया बताती हैं। इसके बाद प्रतिभागियों को आवाज निकालने और शारीरिक गतिविधियों के जरिए अपनी भावनाएं जाहिर करने का अवसर दिया जाता है। इसमें इच्छानुसार चीखना या गुर्राना भी शामिल है। आयोजक समूह का आकार छोटा रखती हैं, ताकि प्रत्येक महिला को पर्याप्त सहयोग मिल सके।

    इन शिविरों में भाग लेने के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित हैं। आर्मस्ट्रांग साढ़े तीन घंटे के सत्र के लिए करीब 51 हजार रुपये लेती हैं। वहीं, बे एरिया सीबीटी सेंटर कई दिनों के कार्यक्रम आयोजित करता है। इसके पांच दिन के शिविर का शुल्क करीब 2 लाख 97 हजार 500 रुपये और सात दिन के कार्यक्रम का शुल्क लगभग 3 लाख 82 हजार 500 रुपये है। इन पैकेज में रहने, भोजन और थेरेपी सत्र शामिल हैं। लंबे कार्यक्रम में अतिरिक्त गतिविधियां और बाद में सहायता भी दी जाती है।

    एक अन्य विकल्प के तहत लेव की वेबसाइट पर एक से तीन दिन के शिविर के लिए करीब 2 लाख 12 हजार 500 रुपये का शुल्क बताया गया है। इसमें शामिल होने से पहले प्रतिभागियों को एक प्रश्नावली भरनी होती है। इसके जरिए उनकी पसंद, कार्यक्रम की अवधि, अनुभव की तीव्रता और उन विषयों के बारे में जानकारी ली जाती है, जिन पर वे काम करना चाहती हैं। लेव के अनुसार, केंद्र ने मई में 16 प्रतिभागियों के साथ अपना पहला गुस्सा शिविर आयोजित किया था। दूसरा शिविर अक्टूबर के अंत में आयोजित करने की योजना है। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों में महिलाओं की रुचि अधिक रही है और भविष्य में इन्हें विस्तार देने की उम्मीद है।

    आर्मस्ट्रांग के मुताबिक, शिविर में आने वाली महिलाओं की उम्र लगभग 20 से 50 वर्ष के बीच होती है। इनमें कई महिलाएं तलाक, बीमारी, रिश्ते टूटने या अपने धार्मिक विश्वासों पर दोबारा विचार करने जैसे जीवन के बदलावों से गुजर रही होती हैं। उन्होंने कहा कि लोग ऐसी जगह चाहते हैं, जहां उन्हें अपमानित महसूस किए बिना अपनी भावनाएं व्यक्त करने की आजादी मिले। प्रतिभागियों की पहले जांच भी की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भावनात्मक परेशानियों से निपटने के लिए उनके पास उचित सहायता उपलब्ध है। कार्यक्रम में फोटोग्राफी भी की जाती है, जिसे महिलाएं खुद को सामान्य सामाजिक छवि से अलग नजरिए से देखने के अवसर के रूप में अनुभव कर सकती हैं।

  • एलटीसीजी टैक्स में बदलाव पर निर्मला सीतारमण ने कहा- अभी कुछ कहना जल्दबाजी, वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी शुरू

    एलटीसीजी टैक्स में बदलाव पर निर्मला सीतारमण ने कहा- अभी कुछ कहना जल्दबाजी, वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी शुरू


    नई दिल्ली । 
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स व्यवस्था में संभावित बदलाव को लेकर कहा कि फिलहाल इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि अगले केंद्रीय बजट की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और अभी यह तय करने का समय नहीं है कि सरकार किन मुद्दों पर विचार करेगी। वित्त मंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब निवेशक पूंजीगत लाभ पर लगने वाले कर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में संभावित बदलाव को लेकर अपनी राय सामने रख रहे हैं।

    एक कार्यक्रम में बोलते हुए निर्मला सीतारमण ने स्वीकार किया कि भारत और विदेशों के निवेशक एलटीसीजी टैक्स को लेकर अपने विचार रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन मुद्दों पर मिलने वाले सुझावों और विचारों को गंभीरता से सुनेगी। वित्त मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि इस चर्चा में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) का विषय भी जुड़ा हुआ है। बाजार से जुड़े प्रतिभागियों ने यह सवाल उठाया है कि क्या अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों के साथ कर व्यवस्था में समान व्यवहार किया जाना चाहिए।

    सरकार वित्त वर्ष 2027-28 के केंद्रीय बजट की तैयारी कर रही है। इसे 1 फरवरी 2027 को पेश किया जाना है। एलटीसीजी टैक्स में संभावित बदलाव को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है। वित्त मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि बजट से पहले इस विषय पर निवेशकों और बाजार के अन्य प्रतिभागियों की राय सामने आ रही है, लेकिन सरकार की ओर से किसी प्रस्तावित बदलाव की पुष्टि नहीं की गई है।

    मौजूदा नियमों के अनुसार, एक साल से अधिक समय तक रखे गए सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड से होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5 प्रतिशत कर लगता है। हालांकि, एक वित्त वर्ष में ऐसे लाभ के 1.25 लाख रुपये तक के हिस्से पर कर छूट उपलब्ध है। इस व्यवस्था में जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट के दौरान बदलाव किया गया था। उस समय एलटीसीजी टैक्स की दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दी गई थी। साथ ही, कर छूट की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी गई थी।

    बजट 2026 के दौरान बाजार के कुछ वर्गों को उम्मीद थी कि पूंजीगत लाभ कर की दर घटाई जा सकती है या कर छूट की सीमा बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, उस बजट में मौजूदा पूंजीगत लाभ कर व्यवस्था को बरकरार रखा गया था। दूसरी ओर, फ्यूचर्स और ऑप्शंस यानी एफएंडओ कारोबार पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में बढ़ोतरी की गई थी। इस कारण पूंजीगत लाभ कर और प्रतिभूति लेनदेन कर से जुड़े मुद्दे बाजार की चर्चाओं में बने हुए हैं।

    उद्योग संगठनों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कई बार यह दलील दी है कि भारत की पूंजीगत लाभ कर व्यवस्था घरेलू शेयर बाजारों की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर सकती है और निवेश के प्रवाह पर असर डाल सकती है। इसी बीच, इस वर्ष विदेशी निवेशक लंबे समय तक भारतीय इक्विटी बाजारों में शुद्ध बिकवाल बने रहे हैं। इन परिस्थितियों में कर व्यवस्था से जुड़े संभावित बदलावों पर निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

    वित्त मंत्री की टिप्पणियों के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में तेजी दर्ज की गई। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, एलटीसीजी टैक्स में बदलाव को लेकर सरकार की ओर से अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। आगामी बजट प्रक्रिया के दौरान इस विषय पर मिलने वाले सुझावों और सरकार के रुख पर नजर रहेगी।

  • एलटीसीजी टैक्स हटाने पर चर्चा से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 1,109 अंक उछला और निफ्टी 22,721 के पार पहुंचा

    एलटीसीजी टैक्स हटाने पर चर्चा से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 1,109 अंक उछला और निफ्टी 22,721 के पार पहुंचा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को जोरदार तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान प्रमुख सूचकांकों में मजबूत बढ़त देखने को मिली। सेंसेक्स 1,109.10 अंक यानी 1.54 प्रतिशत चढ़कर 73,033.78 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 358.60 अंक यानी 1.60 प्रतिशत की तेजी के साथ 22,721.95 पर बंद हुआ। बाजार में खरीदारी का प्रमुख केंद्र आईटी शेयर रहे। इसके साथ ही अन्य क्षेत्रों के शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली।

    बाजार के प्रदर्शन में आईटी क्षेत्र सबसे आगे रहा। निफ्टी आईटी सूचकांक 5.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन का सबसे बड़ा लाभ दर्ज करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक बना। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी मेटल में भी तेजी दर्ज की गई। ज्यादातर क्षेत्रीय सूचकांक हरे निशान में रहे, जबकि निफ्टी फार्मा लगभग बिना बदलाव के बंद हुआ।

    बड़ी कंपनियों के शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप श्रेणियों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 624.65 अंक यानी 1.06 प्रतिशत बढ़कर 59,459.20 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 21.60 अंक यानी 0.11 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 19,447.40 पर बंद हुआ। इन आंकड़ों से बाजार की विभिन्न श्रेणियों में सकारात्मक रुख दिखाई दिया, हालांकि स्मॉलकैप शेयरों में बढ़त तुलनात्मक रूप से सीमित रही।

    सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा और इन्फोसिस समेत कई प्रमुख शेयरों में तेजी रही। हिंदुस्तान यूनिलीवर, ट्रेंट, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, टाइटन, बीईएल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, एसबीआई, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और अदाणी पोर्ट्स भी बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी और इटरनल के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स यानी एलटीसीजी टैक्स को लेकर सामने आई चर्चा रही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि बजट से संबंधित बातचीत के दौरान सरकार एलटीसीजी टैक्स हटाने को लेकर लोगों की राय जानना चाहती है। इक्विटी निवेश पर लगने वाले कर को लेकर निवेशकों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बीच इस बयान को बाजार की धारणा से जोड़कर देखा गया। हालांकि, टैक्स हटाने के किसी अंतिम फैसले की जानकारी नहीं दी गई।

    इसके अतिरिक्त, प्रौद्योगिकी कंपनियों की उम्मीद से बेहतर कमाई ने कॉर्पोरेट मुनाफे में बढ़ोतरी को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। इससे बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी को समर्थन मिला। रुपये में स्थिरता और बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने भी बाजार के माहौल को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई। इन परिस्थितियों के बीच वित्तीय क्षेत्र के शेयरों पर भी निवेशकों का ध्यान बढ़ा।

    मंगलवार के कारोबार में आईटी शेयरों की अगुवाई, एलटीसीजी टैक्स पर चर्चा और कंपनियों की कमाई से जुड़ी उम्मीदों ने बाजार को सहारा दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। अब निवेशकों की नजर एलटीसीजी टैक्स को लेकर आगे होने वाली चर्चाओं और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन से जुड़े संकेतों पर बनी रहेगी।

  • देवरहा बाबा के जीवन पर बनेगी फिल्म ‘मचान बाबा’, जॉर्ज पंचम, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से जुड़ी मुलाकातों पर भी होगा फोकस

    देवरहा बाबा के जीवन पर बनेगी फिल्म ‘मचान बाबा’, जॉर्ज पंचम, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से जुड़ी मुलाकातों पर भी होगा फोकस


    नई दिल्ली ।
    प्रसिद्ध संत देवरहा बाबा के जीवन और उनसे जुड़े रहस्यमयी प्रसंगों को अब बड़े पर्दे पर दिखाने की तैयारी है। उनके जीवन, अनूठी जीवनशैली और देश-विदेश की प्रमुख हस्तियों से जुड़ी मुलाकातों पर आधारित फिल्म ‘मचान बाबा’ का आधिकारिक टाइटल पोस्टर जारी कर दिया गया है। फिल्म का उद्देश्य संत के जीवन के विभिन्न पहलुओं को शोध के आधार पर दर्शकों के सामने प्रस्तुत करना है। इससे पहले नीब करौरी बाबा से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को मिली सफलता के बाद अब देवरहा बाबा की कहानी को फिल्म के माध्यम से सामने लाने की तैयारी की गई है।

    ‘मचान बाबा’ का निर्माण ओजस फिल्म्स के बैनर तले किया जा रहा है। यह कंपनी सॉफ्टवेयर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में काम करने वाली ओजस सॉफ्टेक की फिल्म और कंटेंट इकाई है। इस परियोजना को ब्रिटेन में स्थापित भारतीय मूल की कारोबारी पूनम गुप्ता और अमेरिका में रहने वाले उद्यमी विकल्प पालीवाल मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है। निर्माताओं के अनुसार, इसकी कहानी में संत के जीवन से जुड़े प्रसंगों को विस्तार से शामिल किया जाएगा।

    फिल्म की खास बात देवरहा बाबा की जीवनशैली और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक मुलाकातों पर किया जा रहा शोध है। देवरहा बाबा पेड़ या बांस से बने मचान पर रहने के अपने अनूठे अंदाज के लिए जाने जाते थे। फिल्म में उनकी रहस्यमयी आयु और जीवन से जुड़े पहलुओं को भी दिखाने की तैयारी है। निर्माताओं के अनुसार, इन विषयों को प्रस्तुत करने के लिए शोध किया जा रहा है, ताकि कहानी में संत के जीवन से संबंधित विभिन्न घटनाओं को शामिल किया जा सके।

    शोध के दायरे में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम, भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से जुड़ी ऐतिहासिक मुलाकातों के प्रसंग भी शामिल हैं। इन प्रमुख हस्तियों के साथ देवरहा बाबा के संबंधों और मुलाकातों को फिल्म में जगह देने की योजना है। इसके अलावा, नीब करौरी बाबा और देवरहा बाबा के बीच आत्मीयता तथा आपसी सम्मान से जुड़े प्रसंगों पर भी काम किया जा रहा है। इस तरह फिल्म में संत के आध्यात्मिक जीवन के साथ उन ऐतिहासिक संदर्भों को भी प्रस्तुत करने का प्रयास होगा, जो उनके जीवन से जुड़े बताए जाते हैं।

    निर्माताओं ने कहा है कि ‘मचान बाबा’ केवल चमत्कारों या अंधविश्वास पर केंद्रित फिल्म नहीं होगी। इसे भारतीय आस्था, समृद्ध इतिहास, राजनीति और संत जीवन से जुड़े गूढ़ पहलुओं को सामने लाने वाली कहानी के रूप में तैयार किया जा रहा है। फिल्म में इन विषयों को प्रमाणिकता के साथ प्रस्तुत करने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि, फिल्म में शामिल किए जाने वाले सभी प्रसंगों और उन्हें पर्दे पर दिखाने के तरीके के बारे में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिल्म को वर्ष 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना बनाई गई है। टाइटल पोस्टर जारी होने के साथ इस परियोजना की औपचारिक घोषणा हो गई है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर रहेगी कि देवरहा बाबा के जीवन से जुड़े आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक प्रसंगों को फिल्म किस रूप में पेश करती है। निर्माताओं के लिए इस संत के जीवन की विशिष्टताओं को शोध के साथ पर्दे पर उतारना परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

  • भारत का फ्लेक्सिबल ऑफिस बाजार 2030 तक 160 मिलियन वर्ग फुट पहुंचने का अनुमान, कंपनियों और एआई कारोबार से बढ़ रही मांग

    भारत का फ्लेक्सिबल ऑफिस बाजार 2030 तक 160 मिलियन वर्ग फुट पहुंचने का अनुमान, कंपनियों और एआई कारोबार से बढ़ रही मांग


    नई दिल्ली ।भारत का फ्लेक्सिबल ऑफिस बाजार आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार कर सकता है। वर्ष 2030 तक इसका कुल आकार लगभग 160 मिलियन वर्ग फुट पहुंचने का अनुमान है। वर्ष 2026 में ही इस बाजार के 100 मिलियन वर्ग फुट का आंकड़ा पार करने की उम्मीद जताई गई है। देश ने फ्लेक्सिबल ऑफिस क्षेत्र में दुनिया के सबसे परिपक्व बाजार के रूप में अपनी स्थिति भी बरकरार रखी है।

    2026 की पहली छमाही में भारत में फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस का कुल स्टॉक बढ़कर 88.7 मिलियन वर्ग फुट हो गया। यह देश के कुल ऑफिस स्पेस का 10.5 प्रतिशत है। बाजार की परिपक्वता को लेकर तैयार किए गए सूचकांक में भारत को 100 प्रतिशत अंक मिले हैं। इससे संकेत मिलता है कि फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस अब कंपनियों के लिए केवल अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि उनकी रियल एस्टेट रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।

    वैश्विक बुकिंग में भी भारत की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 2025 की पहली छमाही में यह हिस्सेदारी 2.2 प्रतिशत थी, जो 2026 की पहली छमाही में बढ़कर 10.2 प्रतिशत हो गई। इस बढ़ोतरी के साथ भारत अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे सक्रिय फ्लेक्सिबल ऑफिस बाजार बन गया है। कंपनियों की मांग, उपलब्ध जगह और इस क्षेत्र में काम करने वाले ऑपरेटरों की गतिविधियों में लगातार मजबूती देखी जा रही है।

    2026 की पहली छमाही में फ्लेक्सिबल ऑफिस ऑपरेटरों ने देश के आठ प्रमुख शहरों में 8.5 मिलियन वर्ग फुट जगह लीज पर दी। पहली छमाही के आधार पर यह अब तक का उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा। देश में कुल ऑफिस लीजिंग में फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की हिस्सेदारी भी बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत हो गई है।

    वर्ष 2023 से 2025 के बीच ऑपरेटरों ने कुल 44.1 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर दिया। इसमें 7.2 लाख से अधिक फ्लेक्स सीटें शामिल थीं। वहीं, मैनेज्ड ऑफिस स्पेस की मांग औसतन 350 से 500 सीटों के बीच रही। इससे पता चलता है कि कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार तैयार और प्रबंधित कार्यस्थलों का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं।

    इस क्षेत्र में सीटों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2020 में यह आंकड़ा लगभग 38,000 सीटों का था, जबकि 2026 में इसके करीब तीन लाख तक पहुंचने का अनुमान है। इस तरह छह वर्षों में मांग लगभग सात गुना बढ़ने की संभावना है। व्यापक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बावजूद फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की मांग में यह वृद्धि दर्ज की गई है।

    बाजार के विस्तार में संस्थागत निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस क्षेत्र में दीर्घकालिक पूंजी आने से निवेश और संचालन में अधिक अनुशासन विकसित हो रहा है। साथ ही, ऑफिस स्पेस इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की बदलती अपेक्षाओं के कारण ऑपरेटर बेहतर गुणवत्ता और उन्नत सुविधाओं वाले कार्यस्थल उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रहे हैं।

    ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) और बहुराष्ट्रीय कंपनियां नए बाजारों में प्रवेश करने तथा अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस का अधिक इस्तेमाल कर रही हैं। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े कारोबार भी इस क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फ्लेक्सिबल ऑफिस क्षेत्र के भीतर एआई इकोसिस्टम विकसित हुआ है। तैयार सुविधाओं वाले और जरूरत के अनुसार आसानी से विस्तार किए जा सकने वाले कार्यस्थल एआई कंपनियों की बदलती जरूरतों के अनुकूल हैं। इन रुझानों से आने वाले वर्षों में बाजार की वृद्धि को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

  • यूपीआई एमडीआर लागू करने की तारीख टली, दीपावली के तुरंत बाद चुनिंदा डिजिटल भुगतानों पर व्यापारियों से लिया जाएगा शुल्क

    यूपीआई एमडीआर लागू करने की तारीख टली, दीपावली के तुरंत बाद चुनिंदा डिजिटल भुगतानों पर व्यापारियों से लिया जाएगा शुल्क

    नई दिल्ली ।भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने प्रस्तावित यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) फ्रेमवर्क लागू करने का समय आगे बढ़ा दिया है। अब इसे दीपावली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। एनपीसीआई ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को जारी अधिसूचना में बताया कि यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। लागू होने की तारीख की जानकारी अलग से दी जाएगी।

    यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब व्यापारी संगठनों, फिनटेक कंपनियों और भुगतान सेवाएं देने वाली कंपनियों ने फ्रेमवर्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की थी। इन संगठनों को आशंका थी कि त्योहारों के दौरान बिक्री अधिक रहने के बीच नए शुल्क की व्यवस्था लागू होने से कारोबार प्रभावित हो सकता है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए इसे दीपावली के बाद लागू करने का फैसला किया गया है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर की दर 0.4 प्रतिशत निर्धारित की गई है। यह दर पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने तय की थी। हालांकि, यह शुल्क सभी यूपीआई लेनदेन पर लागू नहीं होगा, बल्कि निर्धारित श्रेणी के व्यापारी भुगतानों तक सीमित रहेगा।

    एमडीआर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के बदले व्यापारियों से लिया जाता है। निर्धारित दर के हिसाब से 2,000 रुपये के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की गणना करने पर 8 रुपये शुल्क बनता है। इसी तरह 10,000 रुपये के भुगतान पर यह राशि 40 रुपये होती है। यह गणना निर्धारित शुल्क दर के आधार पर है और वास्तविक लागू होने की शर्तें संबंधित व्यवस्था के अनुसार होंगी।

    सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि यूपीआई एमडीआर का भुगतान व्यापारियों को करना होगा। वे इस शुल्क को किसी भी तरीके से ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। इसका अर्थ है कि निर्धारित व्यवस्था के तहत शुल्क की जिम्मेदारी व्यापारी की होगी और ग्राहकों से इसे अलग से वसूलने की अनुमति नहीं होगी।

    इस प्रस्ताव पर भुगतान क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच चर्चा भी हुई है। विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने इससे पहले कहा था कि यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर की अनुमति देना एक अधिकार प्रदान करने वाले नियम की तरह होगा। उनका मानना था कि भुगतान क्षेत्र में मौजूद प्रतिस्पर्धा के कारण शुल्क में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी की आशंका कम है।

    मिश्रा ने कहा था कि बाजार में ऐसी कंपनियां भी रही हैं, जो एमडीआर शुल्क नहीं ले पाने के बावजूद अपना कारोबार जारी रखने और बाजार में बने रहने में सफल रहीं। उनके बयान का मुख्य आधार भुगतान क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा थी। फिलहाल एनपीसीआई ने फ्रेमवर्क लागू करने के लिए दीपावली के बाद का समय तय किया है, जबकि इसकी सटीक तारीख और लागू होने से जुड़ी विस्तृत जानकारी की घोषणा अभी बाकी है।