Author: bharati

  • स्वस्थ भोजन और फिर भी मोटापा: इन आदतों को बदलकर रखें फिट और तंदुरुस्त

    स्वस्थ भोजन और फिर भी मोटापा: इन आदतों को बदलकर रखें फिट और तंदुरुस्त

    नई दिल्ली। आज के दौर में युवाएं फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर घरों की रसोई तक, हर जगह हेल्दी खाने और व्यायाम की चर्चा होने लगी है। लेकिन इसके बावजूद कई महिलाएं हेल्दी डायट लेने के बावजूद वजन घटने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ता देख रही हैं।

    मेटाबॉलिज्म और पाचन शक्ति का महत्व

    आयुर्वेद के अनुसार शरीर केवल भोजन से नहीं बल्कि ‘अग्नि’ यानी पाचन शक्ति से चलता है। विज्ञान इसे मेटाबॉलिज्म कहता है। अगर यह सिस्टम धीमा या गड़बड़ हो जाए, तो सबसे पौष्टिक खाना भी शरीर में जाकर फैट का रूप ले सकता है। यही कारण है कि हेल्दी खाना और वजन घटाना हमेशा साथ नहीं चलते।

    हेल्दी फूड्स की मात्रा का असर

    एक आम गलतफहमी यह है कि हेल्दी चीजें जितनी चाहें उतनी खाई जा सकती हैं। ड्राई फ्रूट्स, घी, शहद, मूंगफली का मक्खन या एवोकाडो जैसी चीजें पौष्टिक होते हुए भी भारी होती हैं और शरीर को इन्हें पचाने में ज्यादा समय लगता है। कैलोरी की अधिकता होने पर शरीर अतिरिक्त ऊर्जा फैट के रूप में जमा कर देता है।

    छिपी चीनी और प्रोसेस्ड हेल्दी फूड

    आज बाजार में मिलने वाले कई ‘हेल्दी’ प्रोडक्ट भी वजन बढ़ाने में योगदान करते हैं। लो-फैट दही, मल्टीग्रेन बिस्कुट और एनर्जी बार में छिपी शुगर इंसुलिन बढ़ाती है, जिससे शरीर फैट स्टोर करने लगता है। आयुर्वेद में अत्यधिक मीठा कफ दोष बढ़ाने वाला माना गया है।

    हार्मोन और शारीरिक असंतुलन

    कई बार वजन बढ़ने की वजह खाना नहीं बल्कि हार्मोन असंतुलन होता है। थायरॉइड, पीसीओएस या लंबे समय तक तनाव में रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है। आयुर्वेद में इसे दोषों का असंतुलन कहा गया है, खासकर कफ दोष का बढ़ना। ऐसे में शरीर ऊर्जा जलाने के बजाय जमा करने लगता है।

    नींद, मानसिक स्थिति और मांसपेशियों का योगदान

    अधूरी नींद पाचन शक्ति को कमजोर करती है। विज्ञान के अनुसार, कम सोने से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ‘घ्रेलिन’ बढ़ता और पेट भरने वाला हार्मोन ‘लेप्टिन’ घट जाता है। साथ ही उम्र बढ़ने या शारीरिक गतिविधि कम होने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है क्योंकि मांसपेशियों की कमी से कैलोरी बर्न कम होती है।

    हेल्दी खाने के बावजूद वजन बढ़ना मेटाबॉलिज्म, हार्मोन असंतुलन, नींद और शारीरिक सक्रियता पर निर्भर करता है, इसलिए सिर्फ डायट से परिणाम नहीं मिलते।

  • कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल ने बिना स्पीच पढ़े किया बहिर्गमन, सरकार-राज्यपाल के बीच टकराव तेज

    कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल ने बिना स्पीच पढ़े किया बहिर्गमन, सरकार-राज्यपाल के बीच टकराव तेज



    नई दिल्ली। 22 जनवरी 2026 कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्पीच पढ़ना शुरू किया, लेकिन 2-4 लाइन के बाद कागज रख दिया और सदन से बाहर निकल गए। इस घटना से राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच अनबन का विवाद कर्नाटक तक पहुंच गया है।

    संसद में स्पीकर यूटी खादर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, मंत्री एचके पाटिल, प्रियांक खरगे, सलीम अहमद और बसवराज होरट्टी सहित कई नेता राज्यपाल का इंतजार कर रहे थे।

    लेकिन गहलोत ने भाषण पूरा नहीं पढ़ा और सदन छोड़ दिया। बीके हरिप्रसाद ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे वापस नहीं आए।

    क्या है वजह?
    राज्यपाल और सरकार के बीच संवैधानिक परंपरा और भाषण के कंटेंट को लेकर विवाद चल रहा है। गहलोत का कहना है कि सरकार के तैयार किए गए भाषण के 11 पैराग्राफ में बदलाव जरूरी हैं। इनमें केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना वाले हिस्से शामिल हैं। गहलोत ने इन हिस्सों को पूरी तरह हटाने की मांग की, जबकि सरकार केवल भाषा में सीमित बदलाव करने को तैयार थी।

    सरकार ने भी की थी कोशिश
    कर्नाटक के लॉ और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने राज्यपाल से मुलाकात की और कहा कि संविधान के अनुच्छेद 176(1) के तहत राज्यपाल का संयुक्त सत्र को संबोधित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अगर भाषण में आपत्तिजनक भाषा है तो सरकार संशोधन कर सकती है, लेकिन पूरा पैराग्राफ हटाना स्वीकार्य नहीं।

    ये मामला और बड़ा हो सकता है
    कर्नाटक की घटना के पहले तमिलनाडु में भी 20 जनवरी को राज्यपाल आरएन रवि विधानसभा सत्र बीच में छोड़कर बाहर चले गए थे। दोनों राज्यों में राज्यपाल-सरकार की टकराहट राजनीतिक और संवैधानिक बहस को तेज कर रही है।

  • धार्मिक बदलाव: गायत्री परिवार ने महिलाओं को दिया मंत्र का अधिकार, अमित शाह ने सराहा

    धार्मिक बदलाव: गायत्री परिवार ने महिलाओं को दिया मंत्र का अधिकार, अमित शाह ने सराहा

    नई दिल्ली। उत्तराखंड के हरिद्वार में गुरुवार को ‘अखिल विश्व गायत्री परिवार’ द्वारा माता भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी और अखंड दीप शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित ‘शताब्दी वर्ष समारोह 2026’ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए। उन्होंने पारंपरिक दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया और उपस्थित जनों को दिव्य ऊर्जा का अनुभव कराया।

    अमित शाह ने दी आध्यात्मिक संदेश

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पंडित श्रीराम शर्मा और माता भगवती देवी ने अपने जीवनकाल में कई युगों का काम किया। उनके आंदोलन के तहत 15 करोड़ से अधिक अनुयायी आध्यात्मिकता के मार्ग पर चल रहे हैं। आज अखंड ज्योति की शताब्दी मनाई जा रही है, और इन लाखों लोगों की जिम्मेदारी है कि वे नई ऊर्जा और उत्साह के साथ अगले सौ सालों तक इसे आगे बढ़ाएं।” उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और इतिहास को जानते हैं, वे विश्वास करते हैं कि विश्व की समस्याओं का समाधान भारतीय परंपरा में ही निहित है।

    हरिद्वार: आस्था और संस्कृति का संगम

    अमित शाह ने हरिद्वार को आध्यात्म और संस्कृति का संगम बताते हुए कहा कि यह भूमि हजारों वर्षों से तपस्या, साधना और कुंभ की महिमा से ओत-प्रोत है। उन्होंने पंडित श्रीराम शर्मा द्वारा गायत्री ऊर्जा को जागृत करने के कार्य को सराहा और कहा कि इसने व्यक्ति-निर्माण के मार्ग को नया जीवन दिया।

    गायत्री मंत्र और सामाजिक बदलाव

    गृह मंत्री ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा ने कठोर परंपराओं को तोड़ते हुए महिलाओं और समाज के हर वर्ग को गायत्री मंत्र के माध्यम से आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर किया। उन्होंने बताया कि इससे जाति, समुदाय या लिंग की परवाह किए बिना हर व्यक्ति के लिए आध्यात्मिक लाभ संभव हुआ।

    पतंजलि योगपीठ अस्पताल का उद्घाटन

    कार्यक्रम के दौरान अमित शाह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, योग गुरु रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के एमडी आचार्य बालकृष्ण की उपस्थिति में महर्षि दयानंद ग्राम, हरिद्वार में पतंजलि आपातकालीन और क्रिटिकल केयर अस्पताल का उद्घाटन भी किया गया।

    हरिद्वार में शताब्दी वर्ष समारोह में अमित शाह ने अखंड ज्योति और गायत्री मंत्र के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश देते हुए महिलाओं और समाज के लिए नए आध्यात्मिक मार्ग की अहमियत बताई।

  • Stock Market Update: बाजार शानदार लिवल पर खुला, सेंसेक्स में रिकॉर्ड 500 से अधिक अंकों की बढ़त

    Stock Market Update: बाजार शानदार लिवल पर खुला, सेंसेक्स में रिकॉर्ड 500 से अधिक अंकों की बढ़त


    नई दिल्ली। ग्रीनलैंड से जुड़े ट्रेड वॉर की चिंताओं में कमी आने के साथ भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को तीन दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए शानदार वापसी की। बीएसई सेंसेक्स 500 से ज्यादा अंकों की तेजी के साथ 82,459.66 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 25,344.15 पर ट्रेडिंग शुरू हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 523 अंक ऊपर 82,432.69 पर और निफ्टी 152.55 अंक बढ़कर 25,310.05 पर था।

    व्यापक बाजार में तेजी, मिड और स्मॉलकैप भी हरे निशान में

    व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.4 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सभी प्रमुख सेक्टर हरे निशान में रहे, जिसमें निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 2 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो और बैंक इंडेक्स 1 प्रतिशत और निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.9 प्रतिशत ऊपर बंद हुए।

    कौन से शेयर चमके?

    सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में बढ़त रही। टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, बीईएल, एसबीआई, कोटक बैंक, सन फार्मा, ट्रेंट, एम एंड एम, बजाज फिनसर्व, इंडिगो और आईटीसी सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों में शामिल थे। केवल आईसीआईसीआई बैंक के शेयर में गिरावट दर्ज हुई।

    अमेरिका-यूरोप तनाव में कमी, ट्रेड वॉर का खतरा टला

    जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर बलपूर्वक कब्जे की धमकी से पीछे हटते हुए समझौते का फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसके साथ ही अमेरिका ने यूरोप पर टैरिफ लगाने से फिलहाल परहेज किया, जिससे अमेरिकी-यूरोपीय ट्रेड वॉर का खतरा टल गया। इन सकारात्मक संकेतों ने बाजार में रिलीफ रैली को जन्म दिया।

    शॉर्ट-कवरिंग और अगले दौर की तेजी की संभावना

    डॉ. विजयकुमार ने बताया कि बाजार में करीब 2 लाख शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स बने हुए हैं, जो शॉर्ट-कवरिंग के लिए अनुकूल स्थिति बनाते हैं। इसका मतलब है कि बाजार में आगे और तेजी की संभावना है। हालांकि, कंपनियों की तीसरी तिमाही के मुनाफे पर नए लेबर कोड से जुड़ी अतिरिक्त प्रावधानों का असर देखा गया है, लेकिन इसे बाजार एक बार के खर्च के रूप में ही देख रहा है।

    ट्रेड वॉर की चिंताओं में कमी और शॉर्ट-कवरिंग के चलते गुरुवार को सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा उछला, व्यापक बाजार और प्रमुख सेक्टरों में भी तेजी दर्ज की गई।

  • मत्स्य पालन में भारत की बड़ी छलांग: जलीय कृषि क्षेत्र में वैश्विक पहचान, केंद्रीय मंत्री का दावा

    मत्स्य पालन में भारत की बड़ी छलांग: जलीय कृषि क्षेत्र में वैश्विक पहचान, केंद्रीय मंत्री का दावा

    नई दिल्ली। भारत ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में बड़ी वैश्विक पहचान बना ली है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी एवं पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा है कि मजबूत सरकारी नीतियों, आधुनिक प्रोसेसिंग क्षमता और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था के चलते भारत अब दुनिया के प्रमुख मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर देशों में शामिल हो चुका है। बीते 10 वर्षों में भारत के सीफूड निर्यात का मूल्य दोगुना हो गया है, जो इस क्षेत्र में देश की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

    नई नीतियों से पारदर्शिता और टिकाऊ विकास पर जोर

    मंत्री ललन सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी फ्रेमवर्क-2025, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) नियम-2025 और अपडेटेड हाई सी फिशिंग गाइडलाइंस-2025 के जरिए नियमों के अनुपालन और पारदर्शिता को और मजबूत किया जा रहा है। इन नीतियों का मकसद टिकाऊ, जिम्मेदार और निर्यात आधारित विकास को बढ़ावा देना है। खासतौर पर अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे द्वीप क्षेत्रों में मत्स्य संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    आधुनिक तकनीक और निजी भागीदारी के बड़े अवसर

    ललन सिंह ने कहा कि भारत में आधुनिक एक्वाकल्चर और मैरीकल्चर तकनीक, प्रोसेसिंग यूनिट्स, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, मछली पकड़ने वाले जहाजों की आधुनिक डिजाइन, डिजिटल निगरानी प्रणाली और संयुक्त अनुसंधान के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता विकसित करने, टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन और तकनीक हस्तांतरण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बड़ी भूमिका हो सकती है। निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी सरकार लगातार प्रोत्साहित कर रही है।

    40 देशों के राजनयिकों की मौजूदगी में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा

    मंत्री यह बातें एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कह रहे थे, जिसमें 40 देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस सम्मेलन में भारत और अन्य देशों के बीच मत्स्य पालन और सीफूड सेक्टर में बढ़ती साझेदारी को रेखांकित किया गया।
    सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और महासागरों का स्वास्थ्य, टिकाऊ विकास, जिम्मेदार मत्स्य पालन, हरित नवाचार, क्षमता निर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने जैसे मुद्दों को सहयोग के प्रमुख स्तंभ बताया गया। इसके साथ ही सजावटी मछली पालन और समुद्री शैवाल की खेती जैसे नए क्षेत्रों में भी साझेदारी की संभावनाओं पर जोर दिया गया।

    सीफूड से पोषण, रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूती

    केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि सीफूड पोषण का अहम स्रोत है और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में इसकी बड़ी भूमिका है। यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करता है और देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है। उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन विभाग उत्पादन से लेकर निर्यात तक पूरी वैल्यू-चेन आधारित रणनीति पर काम कर रहा है।

    निर्यात को 1 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य

    केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि भारत में एक्वाकल्चर का तेजी से विस्तार हो रहा है और उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। विभाग का लक्ष्य सीफूड निर्यात को 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है। उन्होंने बताया कि पिछले सात महीनों में निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस क्षेत्र की मजबूत प्रगति का संकेत है।

    मजबूत नीतियों और आधुनिक तकनीक के सहारे भारत वैश्विक सीफूड हब बनता जा रहा है, जहां पिछले 10 वर्षों में निर्यात दोगुना हुआ और सरकार का लक्ष्य इसे 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है।

  • भारत बना निवेशकों की पसंद: 2025 में एफडीआई 73% बढ़ा, UNCTAD रिपोर्ट में खुलासा

    भारत बना निवेशकों की पसंद: 2025 में एफडीआई 73% बढ़ा, UNCTAD रिपोर्ट में खुलासा

    नई दिल्ली। वर्ष 2025 में भारत ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एफडीआई 73 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी के साथ 47 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह उछाल ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा कमजोर बना हुआ है। इसके बावजूद भारत सेवा, उत्पादन और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।

    सेवा क्षेत्र बना निवेश का सबसे बड़ा इंजन

    यूएनसीटीएडी के मुताबिक, एफडीआई में इस तेज वृद्धि की सबसे बड़ी वजह सेवा क्षेत्र में हुआ भारी निवेश है। वित्तीय सेवाएं, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) जैसे क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर पूंजी लगाई। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए भरोसेमंद बाजार बना दिया।

    उत्पादन क्षेत्र को भी मिला वैश्विक समर्थन

    सेवा क्षेत्र के साथ-साथ उत्पादन क्षेत्र में भी विदेशी निवेश बढ़ा है। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और वैश्विक आपूर्ति शृंखला से भारत को जोड़ने वाली नीतियों ने इस क्षेत्र को मजबूती दी। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ा, जिससे भारत की औद्योगिक क्षमता को नई गति मिली।

    एआई और डाटा सेंटर बने नए आकर्षण

    रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में एआई और डाटा सेंटर सेक्टर ने विदेशी निवेश को नई दिशा दी। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ट्रेंड्स मॉनिटर के मुताबिक, पिछले साल की पहली तीन तिमाहियों में भारत में डाटा सेंटर्स में करीब 7 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जिससे भारत इस क्षेत्र में निवेश पाने वाले देशों में सातवें स्थान पर रहा। चौथी तिमाही में इसमें और तेजी आई।
    अक्टूबर में गूगल ने आंध्र प्रदेश में एआई हब के लिए 15 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की, जबकि दिसंबर में माइक्रोसॉफ्ट ने एआई, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डाटा सेंटर्स में 17.5 अरब डॉलर निवेश का ऐलान किया। इसी तरह अमेजन ने भी एआई और अन्य क्षेत्रों में 35 अरब डॉलर निवेश की योजना सामने रखी।

    वैश्विक परिदृश्य में भारत बना अपवाद

    वैश्विक स्तर पर वर्ष 2025 में एफडीआई 14 प्रतिशत बढ़कर 1.6 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा, लेकिन यह बढ़ोतरी असमान रही। विकसित देशों में निवेश 43 प्रतिशत बढ़ा, जबकि विकासशील देशों में एफडीआई 2 प्रतिशत घट गया। ऐसे माहौल में भारत का 73 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मजबूत प्रदर्शन उसे एक सकारात्मक अपवाद बनाता है।
    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि चीन में लगातार तीसरे साल एफडीआई में गिरावट दर्ज की गई, जबकि भारत निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने में सफल रहा।

    निवेशकों का भरोसा अभी भी चुनौती

    यूएनसीटीएडी ने आगाह किया है कि आंकड़ों में दिख रही बढ़ोतरी पूरी तस्वीर नहीं बताती। अंतरराष्ट्रीय विलय एवं अधिग्रहण में गिरावट और परियोजना वित्त पोषण में कमी निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाती है। ऐसे में नीति निर्माताओं के लिए जरूरी है कि वे केवल पूंजी प्रवाह ही नहीं, बल्कि वास्तविक निवेश और रोजगार सृजन पर भी ध्यान दें।

    वर्ष 2025 में भारत में एफडीआई 73% बढ़कर 47 अरब डॉलर पहुंचा, जहां सेवा, उत्पादन, एआई और डाटा सेंटर सेक्टर में बड़े वैश्विक निवेश ने भारत को दुनिया के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में शामिल कर दिया।

  • Jubin Garg Death Case: असम कोर्ट में आज सुनवाई, पांच आरोपियों की बेल प्ली पर फैसला संभव

    Jubin Garg Death Case: असम कोर्ट में आज सुनवाई, पांच आरोपियों की बेल प्ली पर फैसला संभव

    नई दिल्ली। असम के प्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग की मौत से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। गुरुवार को असम के कामरूप जिले की जिला एवं सत्र न्यायालय इस हाई-प्रोफाइल केस में नामजद पांच आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। यह सुनवाई ऐसे समय हो रही है, जब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) अपनी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और जांच से जुड़े कई नए तथ्य सामने आए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, मामले में आरोपी बनाए गए सभी पांच लोगों ने अदालत से जमानत की मांग की है। इनमें श्यामकानु महंता और अमृतप्रभा महंता के नाम प्रमुख हैं। आरोपियों का कहना है कि वे जांच एजेंसियों के साथ लगातार सहयोग कर रहे हैं और अब जांच लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसे में उन्हें न्यायिक हिरासत में बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है।

    चार्जशीट में गंभीर आरोप

    एसआईटी की चार्जशीट ने इस केस को और गंभीर बना दिया है। चार्जशीट में दिवंगत गायक के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और उनके बैंडमेट शेखरज्योति गोस्वामी पर हत्या का आरोप लगाया गया है। वहीं, जुबीन गर्ग के कजिन और निलंबित असम पुलिस अधिकारी संदीपन गर्ग पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

    एसआईटी ने चार्जशीट में घटनाक्रम का विस्तार से जिक्र करते हुए यह बताने की कोशिश की है कि जुबीन गर्ग की मौत किन परिस्थितियों में हुई। जांच के लिए असम पुलिस ने विशेष जांच दल का गठन किया था, जिसने गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर से मिली जानकारियों के आधार पर अभियोजन पक्ष का केस तैयार किया।

    सिंगापुर पुलिस की रिपोर्ट से बदली बहस

    जमानत याचिकाओं पर सुनवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि सिंगापुर पुलिस की रिपोर्ट ने मामले को नया मोड़ दिया है। सिंगापुर पुलिस ने अदालत को बताया कि उनकी जांच में जुबीन गर्ग की मौत में किसी तरह की साजिश या आपराधिक मंशा के संकेत नहीं मिले।

    रिपोर्ट के मुताबिक, गायक की मौत डूबने से हुई और इसमें किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका साबित नहीं हो सकी। घटना से पहले जुबीन गर्ग कथित तौर पर नशे की हालत में थे और एक यॉट पर मौजूद थे, जहां उन्होंने काफी मात्रा में शराब का सेवन किया था।

    मेडिकल और फॉरेंसिक पहलू

    जांच अधिकारियों ने अदालत को बताया कि जुबीन गर्ग पहले पानी में तैरने गए थे और वापस आकर थकान की बात कही थी। कुछ देर बाद वह दोबारा पानी में उतरे। उनकी मेडिकल हिस्ट्री में हाई ब्लड प्रेशर और मिर्गी की बीमारी सामने आई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में उनके खून में इन बीमारियों से जुड़ी दवाओं के अंश मिले, हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उन्होंने घटना वाले दिन मिर्गी की दवा ली थी या नहीं।

    यॉट के कैप्टन ने भी गवाही में बताया कि जुबीन गर्ग को यॉट पर चढ़ते समय दो दोस्तों का सहारा लेना पड़ा था और उन्हें बिना लाइफ जैकेट पानी में उतरने से रोका गया था।

  • माघ मेले में बग्घी विवाद: मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा, जमीन आवंटन रद्द और आजीवन प्रतिबंध की धमकी

    माघ मेले में बग्घी विवाद: मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा, जमीन आवंटन रद्द और आजीवन प्रतिबंध की धमकी



    प्रयागराज।माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्राधिकरण के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। मेला प्रशासन ने अब दूसरी बार नोटिस जारी करते हुए उनकी संस्था को दी गई भूमि आवंटन रद्द करने और उन्हें मेले से आजीवन प्रतिबंधित करने की बात कही है।
    प्रशासन ने नोटिस का जवाब 24 घंटे में मांगा है।

    नोटिस में क्या लिखा है?
    प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस में कहा है कि मौनी अमावस्या के दिन पुलिस ने संगम क्षेत्र में सभी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई थी। इसी दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बग्घी लेकर संगम नोड पर जाने का प्रयास किया, जिससे भगदड़ की संभावना बढ़ गई और मेला प्रबंधन की व्यवस्था प्रभावित हुई।

    नोटिस में यह भी कहा गया है कि उन्होंने मेले में अपने आप को शंकराचार्य बताकर बोर्ड लगवाए, जो सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दायरे में आता है।

    इसलिए प्राधिकरण ने पूछा है कि उनकी संस्था का भूमि आवंटन और सुविधाएं निरस्त कर उन्हें माघ मेले में हमेशा के लिए प्रतिबंधित क्यों न किया जाए।

    शंकराचार्य ने क्या जवाब दिया?
    मेला प्रशासन के नोटिस पर शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने प्रेस नोट जारी कर इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि नोटिस बैक डेट में चस्पा किया गया और प्रशासन अब कह रहा है कि जवाब नहीं दिया गया।

    शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने आरोपों को दुर्भावनापूर्ण, भ्रामक और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि जिस बग्घी का उल्लेख किया जा रहा है, वह उनके शिविर में कभी नहीं थी।

    उनका दावा है कि यह आरोप CCTV फुटेज से भी आसानी से गलत साबित किया जा सकता है।

    उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि धार्मिक कार्यों में मेला प्रशासन का दखल अस्वीकार्य है और यदि यह जारी रहा तो अंजाम बुरा हो सकता है।

    क्यों बढ़ रहा है विवाद?
    माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन संगम पर स्नान को लेकर पहले ही तनाव देखने को मिला था। इस विवाद ने शंकराचार्य और मेला प्राधिकरण के बीच रिश्तों में और खटास ला दी है। अब प्रशासन द्वारा भूमि आवंटन रद्द करने और आजीवन प्रतिबंध की धमकी से यह मामला और ज्यादा संवेदनशील बन गया है।

    अगला कदम क्या हो सकता है?
    प्रशासन ने नोटिस का जवाब 24 घंटे में मांगा है।
    यदि शंकराचार्य की संस्था द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो मेला प्राधिकरण भूमि आवंटन रद्द और प्रतिबंध जैसे कदम उठा सकता है। इससे माघ मेले के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के मुद्दे और भी अधिक बढ़ सकते हैं।

  • बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की 11 साल की यात्रा: पीएम मोदी के गुजरात मॉडल ने कैसे बदला एजुकेशन सिस्टम

    बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की 11 साल की यात्रा: पीएम मोदी के गुजरात मॉडल ने कैसे बदला एजुकेशन सिस्टम

    नई दिल्ली। भारत में बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए शुरू किया गया ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान आज एक मजबूत जन आंदोलन का रूप ले चुका है। 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की थी। अभियान के 11 साल पूरे होने पर ‘मोदी आर्काइव’ ने इसे लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक प्रयास बताया है।

    गुजरात से तैयार हुआ था राष्ट्रीय अभियान का खाका

    ‘मोदी आर्काइव’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा पोस्ट में बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर लागू होने से पहले इस अभियान की नींव गुजरात में रखी गई थी। गुजरात में चलाए गए ‘कन्या केलवणी’ और ‘शाला प्रवेशोत्सव’ जैसे कार्यक्रमों ने आंकड़े बदलने से पहले समाज की सोच बदली। खराब महिला साक्षरता, स्कूल छोड़ने की ऊंची दर और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे राज्य में इन योजनाओं ने बड़ा बदलाव लाया।

    2001 की सच्चाई और बदलाव का संकल्प

    वीडियो में बताया गया कि साल 2001 में जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, तब महिला साक्षरता दर केवल 57.80 प्रतिशत थी। लगभग 38.92 प्रतिशत लड़कियां स्कूल बीच में छोड़ देती थीं, जबकि 42 हजार स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय तक नहीं थे। इन हालातों को बदलने के लिए मुख्यमंत्री मोदी ने ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया।

    गांव-गांव जाकर बदली सोच

    मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी खुद गांव-गांव पहुंचे। भीषण गर्मी में तीन दिन तक चलने वाले अभियानों में मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल और सैकड़ों वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते थे। हर साल 634 अधिकारी 18 हजार से अधिक गांवों में जाकर माता-पिता से अपील करते थे “अपनी बेटियों को स्कूल भेजिए।” इस अभियान का एक ही लक्ष्य था हर लड़की को स्कूल तक पहुंचाना।

    इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर आर्थिक सहायता तक

    इस दौरान सिर्फ बेटियों के लिए 42,371 शौचालय, 58,463 नई कक्षाएं और 22,758 स्कूलों में बिजली पहुंचाई गई। ‘कन्या केलवणी’ योजना के तहत 55 हजार से अधिक लड़कियों को आर्थिक सहायता दी गई। सरस्वती साइकिल योजना, विद्या लक्ष्मी बॉन्ड और छात्राओं को टैबलेट देने जैसे प्रयासों से शिक्षा को प्रोत्साहन मिला।

    आंकड़ों में दिखा असर

    इन प्रयासों का नतीजा यह रहा कि महिला साक्षरता दर 57.80 प्रतिशत से बढ़कर 70.73 प्रतिशत हो गई। स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या 38.92 प्रतिशत से घटकर 7.08 प्रतिशत रह गई। ‘मोदी आर्काइव’ के अनुसार, इस तरह राष्ट्रीय नारा बनने से पहले ही ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ एक सफल जमीनी आंदोलन बन चुका था।

  • अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच 19 साल बाद चारों शंकराचार्य एक मंच पर? दिल्ली में गो रक्षा को लेकर हो सकता है बड़ा आयोजन

    अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच 19 साल बाद चारों शंकराचार्य एक मंच पर? दिल्ली में गो रक्षा को लेकर हो सकता है बड़ा आयोजन



    नई दिल्ली। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। कहा जा रहा है कि 19 साल बाद चारों चतुष्पीठों के शंकराचार्य एक मंच पर आ सकते हैं। यह आयोजन 10 मार्च 2026 को दिल्ली में गो रक्षा को लेकर हो सकता है, जिसमें ‘गो माता राष्ट्र माता अभियान’ के मंच पर चारों शंकराचार्य शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।अगर ऐसा होता है तो यह न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि ज्योतिषपीठ विवाद में नया मोड़ भी ला सकता है।

    क्या है खास बात?
    ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को पहले से दो पीठों का समर्थन मिल चुका है। उनके अनुसार द्वारका शारदा पीठ और शृंगेरी शारदा पीठ के शंकराचार्य उन्हें ज्योतिषपीठ के वैध शंकराचार्य के रूप में मान्यता देते हैं।
    उन्होंने यह भी कहा कि पिछले माघ मेले के दौरान इन दोनों पीठों के शंकराचार्यों ने उनके साथ संगम में स्नान किया था, जो उनकी मान्यता का प्रतीक माना जाता है।

    अब यदि तीसरी पीठ का समर्थन भी मिल जाता है, तो विवाद में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    हालांकि अभी तक पूरी पीठ की ओर से निश्चलानंद (और अन्य शंकराचार्यों) के नाम पर खुली सहमति सामने नहीं आई है, लेकिन माघ मेले में दो दिन पहले अविमुक्तेश्वरानंद को अपना ‘लाडला’ कहने की चर्चा ने संकेत दिया कि माहौल नरम पड़ रहा है।

    गो रक्षा आंदोलन और शंकराचार्यों की सक्रियता
    गो रक्षा आंदोलन को लेकर चारों शंकराचार्य पहले से ही सक्रिय हैं।
    गाय की रक्षा के व्रत के लिए शंकराचार्य निश्चलानंद ने सिंहासन और छत्र का त्याग भी कर रखा है। ऐसे में चारों शंकराचार्यों का एक मंच पर आना यह संकेत होगा कि अविमुक्तेश्वरानंद पर सभी शंकराचार्यों की सहमति बनती जा रही है।
    आयोजन के लिए सभी शंकराचार्यों को आमंत्रण भेजने की तैयारी भी बताई जा रही है।

    इतिहास में तीसरी बार होगा ऐसा दृश्य
    चारों शंकराचार्यों का एक मंच पर दिखना धार्मिक इतिहास में तीसरी बार होगा।
    पहली बार 1779 में श्रृंगेरी में पहला चतुष्पीठ सम्मेलन हुआ था।
    दूसरी बार 19 मई 2007 को बेंगलुरु में रामसेतु मुद्दे पर सम्मेलन में चारों शंकराचार्य एक साथ थे।
    इसके बाद जून 1993 में भी शृंगेरी में एक ऐतिहासिक बैठक हुई थी, जिसमें राष्ट्रीय अखंडता और शांति के लिए चारों शंकराचार्यों ने संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया था।

    अगर दिल्ली में 10 मार्च 2026 का यह आयोजन सफल होता है, तो इसे सनातन परंपरा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण माना जाएगा।

    क्या है आगे का परिदृश्य?
    हाल ही में महाकुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान शंकराचार्यों के एक साथ आने की चर्चा रही है, जो इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। गो रक्षा आंदोलन को लेकर पहले भी कई बड़े आंदोलन हुए हैं, और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी इस विषय पर कई बार खुलकर बोल चुके हैं।
    इसलिए दिल्ली में होने वाले संभावित आयोजन पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह न केवल धार्मिक एकता का संदेश देगा, बल्कि ज्योतिषपीठ विवाद में भी संतुलन और समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।