Author: bharati

  • कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी ने ड्रैगन की धरती से ट्रंप को दिखाई आंखें

    कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी ने ड्रैगन की धरती से ट्रंप को दिखाई आंखें

    वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों के बीच यूरोपीय देशों के अलावा अब अमेरिका के पड़ोसी देश कनाडा ने भी आंखें दिखानी शुरू कर दी है। चीन की यात्रा पर पहुंचे कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साफ किया कि ओटावा किसी भी सूरत में ट्रंप के ग्रीनलैंड प्लान का समर्थन नहीं करता है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर कनाडा और चीन के बीच चर्चा हुई है। इस पर दोनों देशों के विचार एक जैसे हैं।

    बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के संबोधित करते हुए कार्नी ने अपने नाटो सहयोगी देश डेनमार्क को अपने पूर्ण समर्थन का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि नाटो का सामूहिक रक्षा सिद्धांत किसी अपरिवर्तनीय है। उन्होंने कहा, “हम डेनमार्क के साथ नाटो के साझेदार हैं।

    हमारी पूर्ण साझेदारी कायम है। अनुच्छेद 5 और अनुच्छेद 2 के तहत हमारे दायित्व कायम हैं और हम उनका पूरी तरह से समर्थन करते हैं।”

    कार्नी ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ग्रीनलैंड के भविष्य पर चर्चा की थी और कहा कि संप्रभुता के मुद्दे पर उनके विचार काफी हद तक एक जैसे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने ग्रीनलैंड की स्थिति और डेनमार्क के लोगों की संप्रभुता के बारे में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की है। कनाडा और चीन के विचार इस मामले पर काफी हद तक एक समान हैं।” कनाडा के रुख को दोहराते हुए, कार्नी ने कहा कि डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को बाहरी दबाव के बिना अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार होना चाहिए।

    आपको बता दें, कनाडा के प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने खुले आम अन्य देशों को धमकाते हुए कहा था कि अगर कोई देश उनके ग्रीनलैंड समझौते के खिलाफ जाता है, या उसका समर्थन नहीं करता है, तो उसके ऊपर वह टैरिफ लगा सकते हैं।

    दरअसल, ट्रंप बार-बार अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क देते हुए ग्रीन लैंड को अमेरिकी प्रभुत्व में लाने की वकालत कर रहे हैं। इस मामले में उन्होंने सैन्य शक्ति के प्रयोग का विकल्प भी खुला रखा है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और अब डेनमार्क की जमीन पर अमेरिका की नजर से यूरोपीय देश पिसते नजर आ रहे हैं।
    ग्रीनलैंड को खरीदना चाहता है अमेरिका: रुबियो

    ट्रंप के अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी खुले तौर पर ग्रीनलैंड को लेकर कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र को खरीदना चाहता है। हालांकि उनके इस प्रस्ताव को ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों प्रशासनों ने सिरे से खारिज कर दिया था। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी अधिग्रहण से नाटो का अंत हो जाएगा।

    ट्रम्प ने यह भी दावा किया है कि अमेरिकी नियंत्रण के बिना ग्रीनलैंड रूस या चीन के प्रभाव में आ सकता है, जिसे आर्कटिक विशेषज्ञों ने निराधार बताया है। हालांकि चीन खुद को “निकट-आर्कटिक राज्य” कहता है, विश्लेषकों का कहना है कि इस क्षेत्र में बीजिंग की बढ़ती उपस्थिति में कनाडा के पास और अलास्का के आसपास रूस के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास शामिल हैं।

    रूस और अमेरिका के बीच पिसते यूरोपीय देश

    दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका की गोदी में बैठे यूरोपीय देशों ने अब रूस के साथ सीधी बातचीत का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। कनाडा के पहले इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और जर्मनी के चांसलर फैड्रिक मर्त्ज ने भी रूस के साथ बातचीत करने के प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही है।
    कनाडा और ट्रंप का विवाद

    अमेरिका और कनाडा दोनों ही देश एक-दूसरे के साथ घनिष्ठ संबंध साझा करते हैं। हालांकि, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान कई बार उन्होंने ऐसी बात कही है, जो कनाडाई लीडरशिप के लिए असहज करने वाली स्थिति की वजह बनी है। पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री को ट्रंप बार-बार गवर्नर कहकर संबोधित करते रहे हैं। उनका तात्पर्य कनाडा को भी अमेरिका में 51वें राज्य को रूप में समाहित करने से था।

  • सुनीता आहूजा ने गोविंदा पर फिर खोला मोर्चा, कहा- गोविंदा को कभी माफ नहीं करूंगी, सतर्क हो जा बेटा…

    सुनीता आहूजा ने गोविंदा पर फिर खोला मोर्चा, कहा- गोविंदा को कभी माफ नहीं करूंगी, सतर्क हो जा बेटा…


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के चर्चित कपल सुनीता आहूजा और गोविंदा लंबे समय से अपने रिश्ते को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। कई बार तलाक की अफवाहें आईं, लेकिन दोनों ने उन्हें नकार दिया। वहीं अब सुनीता ने एक बार फिर गोविंदा को लेकर शॉकिंग स्टेटमेंट दिया है, जिसमें उन्होंने गोविंदा के अफेयर और रिश्ते पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी।

    सुनीता ने मिसमालिनी को दिए इंटरव्यू के प्रोमो में कहा, मैं गोविंदा को माफ नहीं करूंगी। मैं नेपाल की हूं।

    इसके बाद उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, खुखरी निकाल दूंगी, ना तो सबकी हालत खराब हो जाएगी। इसलिए बोलती हूं, सतर्क हो जा बेटा अभी भी।
    सुनीता ने आगे बताया कि गोविंदा के आसपास ऐसी लड़कियां अक्सर आती हैं, लेकिन उन्होंने कहा, तुम थोड़ी बेवकूफ हो। तुम 63 के हो गए हो। तुम्हें अभी टीना की शादी करवानी है, यश का करियर है।
    गोविंदा के बेटे यश के करियर में उनके कम शामिल होने पर सुनीता ने कड़ा रुख दिखाया।
    उन्होंने कहा कि गोविंदा ने बेटे की मदद नहीं की और खुद उनसे भी कोई सहयोग नहीं मांगा। उन्होंने कहा, “मैंने उसके मुंह पर बोला कि तू बाप है कि क्या है?

    पिछले साल गणेश चतुर्थी पर सुनीता ने तलाक को लेकर कहा था कि मीडिया उन्हें अलग नहीं कर सकता। उन्होंने कहा था, हमको साथ में देखकर… अगर कुछ होता तो इतने नजदीक थोड़ी दिखते? हमारी दूरियां होती हैं। कोई हम दोनों को अलग नहीं कर सकता। मेरा गोविंदा सिर्फ मेरा है और किसी का नहीं।सूत्रों के मुताबिक सुनीता अपने व्लॉग और इंटरव्यू में गोविंदा के साथ अपने रिश्ते और अनबन पर खुलकर बात करती हैं, लेकिन गोविंदा इस पर कभी प्रतिक्रिया नहीं देते।

  • PM मोदी ने मालदा रैली में की TMC सांसद के पिता की तारीफ, भाषण के दौरान दी श्रद्धांजलि

    PM मोदी ने मालदा रैली में की TMC सांसद के पिता की तारीफ, भाषण के दौरान दी श्रद्धांजलि


    कोलकाता।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने विभाजन के दौरान मालदा (Malda) को भारत (India) में शामिल कराने में भूमिका निभाने को लेकर अनुभवी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय (Shivendu Shekhar Rai) को अपने भाषण के दौरान श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राय को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई। शिवेंदु के बेटे एवं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के राज्यसभा सदस्य सुखेन्दु शेखर राय (Sukhendu Shekhar Roy) ने संयमित प्रतिक्रिया व्यक्त की है।


    शिवेंदु शेखऱ के प्रयास से बचा मालदा

    मोदी ने शनिवार को मालदा में एक जनसभा में अपने भाषण की शुरुआत शिवेंदु शेखर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने 1947 में शिवेंदु शेखर के योगदान को याद किया जब मुस्लिम लीग द्वारा जिले को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में शामिल करने की मांगों के बीच मालदा का भविष्य अनिश्चित बना हुआ था। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं सर्वप्रथम मालदा के महान सपूत शिवेंदु शेखर राय को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं, जिनके प्रयासों से मालदा की पहचान बची रही।’’ उनके इस बयान से श्रोताओं में मौजूद कई लोग चकित हो गये।

    इससे पूर्व दिन में, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने कार्यक्रम में पहले स्मृति चिन्ह के रूप में मोदी को शिवेंदु शेखर राय की एक फ्रेम की हुई तस्वीर भेंट की। यह तस्वीर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने प्रधानमंत्री को दी, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया क्योंकि शिवेंदु शेखर राय के पुत्र तृणमूल सांसद हैं।


    श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सहयोगी थे शिवेंदु शेखर

    स्वतंत्रता-पूर्व मालदा के एक प्रख्यात दीवानी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय, राजनीतिक विचारधाराओं से परे अपनी व्यापक लोकप्रियता के लिए जाने जाते थे। वह विश्वविद्यालय के दिनों से ही शिक्षाविद और महासभा नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के घनिष्ठ सहयोगी थे और विभाजन वार्ता के दौरान उन्होंने पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    उनके बेटे सुखेन्दु शेखर राय का कहना है कि जब मालदा को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल किए जाने की संभावना आसन्न प्रतीत हुई, तो उनके पिता ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के पिता, प्रख्यात बैरिस्टर एन सी चटर्जी से संपर्क करके इस कदम को चुनौती देने के प्रयास शुरू किए।

    सुखेन्दु शेखर राय के अनुसार चूंकि एन सी चटर्जी दक्षिण बंगाल और कोलकाता को सुरक्षित रखने में व्यस्त थे, इसलिए शिवेंदु शेखर राय ने फिर श्यामा प्रसाद मुखर्जी से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें आगे की कार्रवाई के बारे में सलाह दी और उन्हें बंगाल सीमा आयोग के समक्ष मालदा का ऐतिहासिक, जनसांख्यिकीय और प्रशासनिक मामला व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत करने में सहयोग किया।

    राज्यसभा सदस्य ने बताया कि बिधु शेखर शास्त्री और इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार जैसे विद्वानों ने भी आयोग के सामने प्रस्तुत किये गये ज्ञापन तैयार करने में सहायता की।लप्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखेन्दु शेखर राय ने संयमित लेकिन भावुक स्वर में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘‘यह इतिहास है और इसे नकारने की कोई गुंजाइश नहीं है।’’

    उन्होंने कहा कि मालदा भारत में इसलिए बना हुआ है क्योंकि उनके पिता ने इसे भारत में बनाए रखने के आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा, ‘‘कोई राजनीतिक दल इतिहास को अपने हिसाब से ढालने या अस्वीकार करने की कोशिश कर सकता है, इससे मुझे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन एक ऐसे व्यक्ति के पुत्र के रूप में, जिन्होंने मालदा को भारत में बनाए रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, अगर प्रधानमंत्री उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, तो क्या मुझे दुखी होना चाहिए? बिल्कुल नहीं।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि मेरे भाई-बहन, रिश्तेदार और परिवार के सभी सदस्य गर्व महसूस करते हैं। सिर्फ इसलिए कि मैं तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हूं, क्या मुझे दुखी होना चाहिए? यह तो सरासर बेतुका होगा।’’ मोदी द्वारा भाजपा के मंच से तृणमूल सांसद के पिता का जिक्र करना राजनीतिक रूप से भले ही महत्वपूर्ण हो, लेकिन सुखेन्दु शेखर राय ने इसे समकालीन राजनीतिक संदेश के बजाय लंबे समय से प्रतीक्षित ऐतिहासिक मान्यता के रूप में प्रस्तुत करना बेहतर समझा। उन्होंने कहा, ‘‘यह मालदा के विभाजन काल के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जिसे आज के राजनीतिक मतभेदों से परे याद रखा जाना चाहिए।’’

  • बांग्लादेश में चुनाव से पहले मौलाना का भड़काऊ भाषण, बोला-हिंदुओं को वोट देना हराम, मंदिरों को तोड़ दो

    बांग्लादेश में चुनाव से पहले मौलाना का भड़काऊ भाषण, बोला-हिंदुओं को वोट देना हराम, मंदिरों को तोड़ दो


    ढाका। बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार और हिंसा जारी है। फरवरी में होने वाले इलेक्शन से पहले एक से बढ़कर एक खतरनाक भड़काऊ बयान दिए जा रहे हैं। मौलानाओं ने मानो हिंदुओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया हुआ है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में एक मौलाना ‘हिंदुओं को वोट देना हराम’ बता रहा है तो एक वीडियो में एक नेता को “बांग्लादेश से मंदिरों को खत्म करने” की बात कहते सुना जा रहा है। बांग्लादेश में मौलाना अपनी सभाओं में हिंदुओं के खिलाफ लगातार भड़काऊ बयानबाजी कर रहे हैं।

    जिस मौलाना का वीडियो वायरल हुआ है, उसमें उससे एक सवाल पूछा जाता है कि “क्या चुनाव में किसी हिंदू उम्मीदवार को वोट दिया जा सकता है, क्या हिंदू पार्टी को वोट देना चाहिए?” इस सवाल पर मौलाना बिल्कुल है कि “नहीं ये बिल्कुल जायज नहीं है।” इस सवाल पर पहले मौलाना को व्यंग्यात्मक मुस्कान के साथ हंसते देखा जा रहा है और फिर वो कहता है कि ‘हिंदू को वोट देना जायज नहीं है।’ इसके बाद वो अपनी बात को फिर से दोहराता है कि ‘हिंदू को वोट देना जायज नहीं है।’ आगे वो कहता है कि ‘हिंदुओं, काफिरों को वोट देना किसी भी तरीके से जायज नहीं है।’ प्रोग्राम के दौरान वह घोषणा करता है कि किसी भी हिंदू उम्मीदवार या “काफिर” को वोट देना हराम है, यानी इस्लाम में मना है।

    बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ मुहिम
    ये वीडियो कब का है, नवभारत टाइम्स इसकी पुष्टि नहीं कर पाया है। लेकिन एक और क्लिप में, मौलवियों को हिंदू धार्मिक स्थलों और संस्थानों के खिलाफ खुलेआम धमकियां देते हुए सुना जा सकता है। दूसरे वीडियो में एक शख्स को बांग्लादेश से हिंदुओं को मिटाने, सारे मंदिरों को नष्ट करने का आह्नान करते सुना जा सकता है। वो कहता है कि “बांग्लादेश में, मंदिर नष्ट करने के लिए हैं, उनकी मूर्तियां तोड़ देने के लिए है। कोई भी हिंदू बांग्लादेश में नहीं रह सकता, कोई भी इस्कॉन नहीं रह सकता। दिल्ली के दलालों को दिल्ली वापस चले जाना चाहिए।” ये वीडियो उस वक्त सामने आए हैं, जब 2024 के अगस्त में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसक घटनाएं शुरू हो गई। हाल के हफ्तों में दर्जनों हिंदुओं के घरों को तोड़ दिया गया है और कई घरों को बाहर से बंद कर आग लगा दिया गया है।

    बांग्लादेश में पिछले एक सवा महीने में कई हिंदुओं की भीड़ ने हत्या कर दी है। कई देशों ने बांग्लादेश में हिंदुओं से होने वाली हिंसा की आलोचना की है, लेकिन मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार लगातार ऐसे तत्वों का समर्थन कर रही है। बांग्लादेश में कट्टरपंथी बेलगाम हो चुके हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कम से कम पांच हिंदू पुरुषों की हत्या कर दी गई है। जिसके बाद भारत ने बांग्लादेश से देश में सांप्रदायिक घटनाओं से सख्ती से निपटने को कहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि “हम चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर बार-बार होने वाले हमलों का एक परेशान करने वाला पैटर्न देख रहे हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से “तेजी और सख्ती से” निपटा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सांप्रदायिक हमलों को निजी दुश्मनी या राजनीतिक मतभेदों से जोड़ने की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति रही है। जायसवाल ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि “ऐसी अनदेखी अपराधियों को और बढ़ावा देती है और अल्पसंख्यकों के बीच डर और असुरक्षा की भावना को गहरा करती है।”

  • AR Rahman का स्पष्टीकरण: विवादित बयान को लेकर बोले-भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा इरादा नहीं था

    AR Rahman का स्पष्टीकरण: विवादित बयान को लेकर बोले-भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा इरादा नहीं था

    नई दिल्ली। भारतीय संगीत के जादूगर एआर रहमान ने हाल ही में बॉलीवुड में सांप्रदायिक भेदभाव के मुद्दे पर अपनी साफ़गोई भरी प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया और मीडिया में उठी आलोचनाओं के बीच रहमान ने इंस्टाग्राम वीडियो के जरिए अपने दृष्टिकोण और भावनाओं को स्पष्ट किया।

    संगीत का मकसद: जोड़ना, सम्मान देना और प्रेरित करना

    एआर रहमान ने वीडियो में कहा, “मेरे लिए संगीत हमेशा लोगों और संस्कृति से जुड़ने, उन्हें सेलिब्रेट करने और सम्मान देने का जरिया रहा है। भारत सिर्फ मेरा घर नहीं है, बल्कि मेरी प्रेरणा और गुरु भी है। मेरा उद्देश्य कभी किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था। मैं उम्मीद करता हूं कि लोग मेरी ईमानदारी और सच्चे इरादों को समझेंगे।”

    उन्होंने अपने भारतीय होने पर गर्व जताते हुए कहा कि भारत ने उन्हें वह मंच दिया जहां वे पूर्ण स्वतंत्रता के साथ रचनात्मकता दिखा सकते हैं। रहमान ने जोर देकर कहा कि उनका काम विभिन्न संस्कृतियों के लोगों को जोड़ने और संगीत के माध्यम से सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है।

    यादगार प्रोजेक्ट्स और सांस्कृतिक योगदान

    एआर रहमान ने अपने करियर की यादगार परियोजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया, “मैंने जला प्रोजेक्ट में काम किया, नागा संगीतकारों के साथ स्ट्रिंग ऑर्केस्ट्रा बनाया, सनशाइन ऑर्केस्ट्रा को मेंटर किया और सीक्रेट माउंटेन नामक भारत का पहला मल्टीकल्चरल वर्चुअल बैंड स्थापित किया। इसके अलावा, मैंने रामायण के संगीत में हांस जिमर के साथ सहयोग किया।” उनके अनुसार इन सभी अनुभवों ने उनके संगीत के मकसद को और मजबूत किया।

    बीबीसी इंटरव्यू में कहा: कम काम मिलने की वजह रचनात्मक निर्णय

    हाल ही में बीबीसी नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में रहमान ने कहा, “कभी-कभी रचनात्मक निर्णय लेने की ताकत उन लोगों के हाथ में होती है जिनमें असल में क्रिएटिविटी नहीं होती। यह कभी-कभी सांप्रदायिक कारणों से भी हो सकता है, लेकिन यह सीधे तौर पर पता नहीं चलता। अफवाहें आती हैं कि मुझे किसी प्रोजेक्ट में चुना गया था, लेकिन फिर कंपनी ने पांच अन्य कंपोजर्स को हायर कर लिया।”

    संगीत के जरिए संदेश

    वीडियो के अंत में एआर रहमान ने भारत के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की और कहा, “मेरा संगीत हमेशा अतीत का सम्मान करेगा, वर्तमान का जश्न मनाएगा और भविष्य को प्रेरित करेगा। संगीत कभी किसी को चोट पहुँचाने का माध्यम नहीं रहा है, बल्कि यह हमेशा लोगों को जोड़ने और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान करने का जरिया रहा है।”

  • Australia Tour: वनडे और टी20 के लिए भारतीय महिला टीम का ऐलान, दो नए चेहरे शामिल

    Australia Tour: वनडे और टी20 के लिए भारतीय महिला टीम का ऐलान, दो नए चेहरे शामिल


    नई दिल्ली।
    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई (Board of Control for Cricket in India -BCCI) ने शनिवार को भारत (India) के ऑस्ट्रेलिया दौरे (Australia tour) के लिए वनडे और टी20 टीम का ऐलान कर दिया है। हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) की अगुवाई वाली टीम इंडिया अगले महीने यानी फरवरी में ऑस्ट्रेलिया का दौरा करेगी, जहां उन्हें तीन मैच की टी20 और इतने ही मैच की वनडे सीरीज खेलनी है। लिमिटेड ओवर सीरीज के बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक टेस्ट मैच भी खेला जाएगा।

    बीसीसीआई ने व्हाइट बॉल सीरीज के लिए वनडे और टी20 टीम का ऐलान कर दिया है। टी20 टीम में श्रेयंका पाटिल की तो वनडे में शेफाली वर्मा की वापसी हुई है, वहीं जी कमलिनी और बायें हाथ की स्पिनर वैष्णवी शर्मा को पहली बार वनडे टीम में चुना गया है।

    पूरी तरह से फिट श्रेयंका पाटिल ने फरवरी-मार्च में ऑस्ट्रेलिया के आगामी दौरे के लिए T20I टीम में वापसी की है। 2024 T20 वर्ल्ड कप में भारत के लिए आखिरी बार खेलने के बाद, श्रेयंका 2025 के ज्यादातर समय चोटों की वजह से टीम से बाहर थीं। पिछला WPL मिस करने के बाद, उन्होंने RCB के लिए मौजूदा सीजन में जबरदस्त वापसी की।

    भारत ने मिडिल-ऑर्डर बैटर भारती फुलमाली को भी टीम में वापस बुलाया है, जिन्होंने मार्च 2019 में अपने सिर्फ दो T20I मैच खेले थे। फुलमाली का पिछले साल WPL में शानदार सीजन रहा था। वनडे टीम में शामिल हरलीन देयोल 16 सदस्यीय टी20 टीम में नहीं हैं।

    शानदार प्रदर्शन करने वाली जी कमलिनी ने वनडे टीम में जगह बनाई है, जो विकेट-कीपर की भूमिका भी निभा सकती हैं। राधा यादव और अरुंधति रेड्डी, जो भारत की वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम की एकमात्र सदस्य थीं जिन्होंने टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं खेला था, उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया है, जबकि काश्वी गौतम को टीम में शामिल किया गया है।

    ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वनडे और टी20 दोनों टीमों की कप्तान हरमनप्रीत कौर होंगी जबकि स्मृति मंधाना उपकप्तान होंगी। BCCI बाद में एक ही टेस्ट मैच के लिए टीम का ऐलान करेगा। दौरे का व्हाइट-बॉल लेग 15 फरवरी को SCG में पहले T20I से शुरू होगा, अगले दो मैच 19 और 21 फरवरी को क्रमशः मनुका ओवल और एडिलेड ओवल में होंगे। कुछ दिनों के ब्रेक के बाद, एक्शन ब्रिस्बेन में शिफ्ट हो जाएगा, जहां 24 फरवरी को एलन बॉर्डर फील्ड में पहला ODI खेला जाएगा। अगले दो ODI 27 फरवरी और 1 मार्च को होने हैं – दोनों होबार्ट के बेलेरिव ओवल में होंगे।

    भारत की T20I टीम: हरमनप्रीत कौर (C), स्मृति मंधाना (VC), शैफाली वर्मा, रेणुका ठाकुर, श्री चरणी, वैष्णवी शर्मा, क्रांति गौड़, स्नेह राणा, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (WK), जी कमलिनी (WK), अरुंधति रेड्डी, अमनजोत कौर, जेमिमा रोड्रिग्स, भारती फुलमाली, श्रेयंका पाटिल

    भारत की ODI टीम: हरमनप्रीत कौर (C), स्मृति मंधाना (VC), शैफाली वर्मा, रेणुका ठाकुर, श्री चरणी, वैष्णवी शर्मा, क्रांति गौड़, स्नेह राणा, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (WK), जी कमलिनी (WK), काश्वी गौतम, अमनजोत कौर, जेमिमा रोड्रिग्स, हरलीन देओल

  • क्रिकेट अपडेट: भारत–न्यूजीलैंड तीसरा वनडे, जानें मैच के प्रमुख और रोचक आंकड़े

    क्रिकेट अपडेट: भारत–न्यूजीलैंड तीसरा वनडे, जानें मैच के प्रमुख और रोचक आंकड़े

    नई दिल्ली।  भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की एकदिवसीय सीरीज का निर्णायक मुकाबला रविवार को होल्कर स्टेडियम, इंदौर में खेला जाएगा। दोनों टीमों ने अब तक एक-एक मुकाबला जीता है, और इस मैच से ही सीरीज की ट्रॉफी का मालिक तय होगा।

    कीवी टीम के लिए इतिहास बदलने का मौका

    इतिहास बताता है कि भारत की सरजमीं न्यूजीलैंड के लिए हमेशा कठिन रही है। भारत में अब तक खेली गई सात द्विपक्षीय वनडे सीरीज में कीवी टीम ने एक भी जीत नहीं दर्ज की। कुल मिलाकर भारत में खेले गए 41 वनडे मुकाबलों में से न्यूजीलैंड सिर्फ नौ में सफल रहा है। ऐसे में यह मुकाबला मेहमान टीम के लिए इतिहास बदलने का दुर्लभ अवसर होगा।

    बल्लेबाज़ी और ओवर की रणनीति पर नजर

    हालिया आंकड़े बताते हैं कि न्यूजीलैंड का बल्लेबाज़ी प्रदर्शन स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ शानदार रहा है। बीच के ओवरों में रन दर उच्च और डॉट बॉल प्रतिशत न्यूनतम रहने से भारतीय स्पिन आक्रमण को कड़ी चुनौती मिल सकती है।

    वहीं भारत के लिए अंतिम ओवर चिंता का विषय है। पिछले विश्व कप से लेकर अब तक अंतिम दस ओवरों में टीम की रन गति अपेक्षा के अनुसार नहीं रही है। हालांकि, टॉप ऑर्डर की आक्रामक शुरुआत और बीच के ओवरों में मजबूत प्रदर्शन टीम को संतुलन देता रहा है।

    व्यक्तिगत रिकॉर्ड पर सभी की नजर

    विराट कोहली ने हाल की सीरीज में अपनी बल्लेबाजी की रणनीति बदलते हुए शुरुआत से रन गति तेज की है। शुभमन गिल सिर्फ 70 रन दूर हैं अपने वनडे करियर में 3000 रन पूरे करने से। यदि वह अगले छह मैचों में यह आंकड़ा पूरा कर लेते हैं, तो दुनिया के सबसे तेज 3000 रन बनाने वाले खिलाड़ियों में दूसरा स्थान हासिल करेंगे।

    न्यूज़ीलैंड के डैरिल मिचेल भी तेजी से रिकॉर्ड की दौड़ में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने अब तक 53 पारियों में 2553 रन बनाए हैं और शुभमन गिल तथा हाशिम अमला के रिकॉर्ड को चुनौती दे सकते हैं।

    रविंद्र जडेजा घरेलू मैदान पर बड़ी पारी की तलाश में हैं। उन्होंने भारत में वनडे में अब तक सिर्फ दो बार 50+ रन बनाए हैं, और आखिरी बार ऐसा दस साल से भी पहले हुआ था।

    तीसरा वनडे न केवल टीम के लिए बल्कि व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिहाज से भी रोमांचक होने वाला है। फैंस को विराट, गिल और जडेजा से बड़ी पारियों की उम्मीद है।

  • सना खान ने तोड़ी चुप्पी: पति ने नहीं किया ब्रेनवॉश, मैंने खुद लिया बॉलीवुड छोड़ने का फैसला

    सना खान ने तोड़ी चुप्पी: पति ने नहीं किया ब्रेनवॉश, मैंने खुद लिया बॉलीवुड छोड़ने का फैसला



    नई दिल्ली। टीवी की पॉपुलर एक्ट्रेस सना खान ने 2020 में अचानक फिल्म और टीवी इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया था। उस वक्त चर्चा तेज थी कि उनके पति ने उनका ब्रेनवॉश किया है, इसलिए उन्होंने बॉलीवुड छोड़ा। लेकिन अब सना ने रश्मि देसाई के पॉडकास्ट में खुलकर कहा है कि यह सच नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद ही अपने जीवन में बदलाव और शांति की चाहत के चलते इंडस्ट्री छोड़ने का फैसला लिया था।
    सना ने कहा कि उनकी शादी अरेंज थी और वह इसे पूरी तरह गोपनीय रखना चाहती थीं। उनकी शादी का नाम उनकी मां-पिता के अलावा किसी को नहीं पता था। उन्होंने बताया कि मेहंदी के समय तक उन्होंने दूल्हे का नाम किसी से साझा नहीं किया था। सना ने कहा कि वे एक नई जिंदगी की ओर जा रही थीं और उनके पति ने उन्हें इस बदलाव में गाइड किया।

    लोगों ने उन्हें ब्रेनवॉश का शिकार मान लिया क्योंकि वे पहले बिना हिजाब के दिखती थीं और फिर अचानक बुर्का पहनने लगीं। सना ने साफ कहा कि कोई भी आपको ब्रेनवॉश नहीं कर सकता जब तक आप खुद नहीं चाहते।

    उन्होंने कहा कि उन्हें शांति चाहिए थी और फेम, पैसा या स्टेटस के बाद भी हर इंसान की चाहत यही होती है।

    सना ने यह भी बताया कि उन्होंने इंडस्ट्री इसलिए छोड़ी क्योंकि उन्हें अपने आसपास का माहौल सही नहीं लग रहा था और उनके कुछ फैसले गलत दिशा में जा रहे थे। उन्होंने अपने पति अनस सैयद के साथ रिश्ते को बहुत अहमियत दी और कहा कि अनस और उनके परिवार ने शादी के सभी खर्चे भी संभाले थे। अब सना और अनस के दो बच्चे हैं और वे अपनी नई जिंदगी में खुश हैं।

  • शहडोल के धनपुरी का देश में डंका: दिल्ली में सम्मानित हुईं CMO पूजा बुनकर, डिकार्बनाइजेशन में नगर परिषद ने पेश की मिसाल

    शहडोल के धनपुरी का देश में डंका: दिल्ली में सम्मानित हुईं CMO पूजा बुनकर, डिकार्बनाइजेशन में नगर परिषद ने पेश की मिसाल


    शहडोल । पर्यावरण संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की एक छोटी सी नगर परिषद ने देश के सामने बड़ी नजीर पेश की है। नई दिल्ली में आयोजित ‘डिकार्बनाइजेशन भारतीय शहर संवाद एवं विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला’ में धनपुरी नगर परिषद को शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान द्वारा आयोजित इस गरिमामयी समारोह में धनपुरी की मुख्य नगरपालिका अधिकारी CMO पूजा बुनकर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जो पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण है।

    महानगरों को पीछे छोड़ धनपुरी ने किया कमाल अक्सर माना जाता है कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और डिकार्बनाइजेशन जैसे जटिल लक्ष्य केवल बड़े महानगरों तक सीमित हैं। लेकिन धनपुरी नगर परिषद ने इस धारणा को तोड़ दिया है। कार्यशाला में मौजूद देशभर के शहरी विकास विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच धनपुरी द्वारा किए गए नवाचारों की जमकर सराहना की गई। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के भारतीय प्रमुख एवं वरिष्ठ सलाहकार हितेश वैद्य ने धनपुरी के प्रयासों को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि यदि धनपुरी जैसा छोटा शहर संकल्प ले सकता है, तो यह वैश्विक स्तर पर एक मिसाल है। यह साबित करता है कि पर्यावरण बचाने की इच्छाशक्ति भौगोलिक सीमाओं की मोहताज नहीं होती।

    शून्य कार्बन उत्सर्जन का बड़ा संकल्प राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने के बाद CMO पूजा बुनकर ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह उपलब्धि नगर परिषद की पूरी टीम और नागरिकों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने संकल्प लिया कि धनपुरी नगर परिषद शत-प्रतिशत शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर काम करेगी। पूजा बुनकर ने बताया कि दिल्ली में प्राप्त तकनीकी प्रशिक्षण और नीतिगत ज्ञान का उपयोग कर धनपुरी को मध्यप्रदेश की पहली ‘डिकार्बनाइजेशन सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

    विकास और पर्यावरण का संतुलन नगर विकेंद्रीकरण पहल के तहत धनपुरी ने कचरा प्रबंधन, ऊर्जा की बचत और हरियाली बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में जो मॉडल पेश किया है, उसकी गूंज अब राष्ट्रीय राजधानी तक पहुँच गई है। इस उपलब्धि पर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों में खुशी की लहर है। जानकारों का मानना है कि ऐसे प्रयास न केवल प्रदूषण कम करने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सतत और स्वस्थ शहरी जीवन की नींव रखेंगे।

  • गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली समेत कई शहरों में आतंकी हमले की साजिश… सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली समेत कई शहरों में आतंकी हमले की साजिश… सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में लालकिला ब्लास्ट (Red Fort blast) के बाद से सतर्क खुफिया एजेंसियों (Intelligence agencies.) ने गणतंत्र दिवस (गणतंत्र दिवस) से पहले दिल्ली समेत कई राज्यों में बांग्लादेशी आतंकियों (Bangladeshi terrorists) के हमले को लेकर अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों को सतर्क किया गया है कि बांग्लादेशी आतंकी संगठन और खालिस्तान समर्थित संगठन तबाही की साजिश रच रहे हैं।

    दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड में रहने की सलाह दी गई है। साथ ही इन आतंकी संगठनों पर पैनी नजर रखने को कहा गया है।


    एक साथ निशाना बनाने की साजिश

    खुफिया इनपुट के मुताबिक, आतंकी संगठन दिल्ली समेत देश के कई शहरों को एक साथ निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। अलर्ट में कहा गया कि गणतंत्र दिवस से ठीक पहले उत्तर भारत के कुछ शहरों में सक्रिय गैंगस्टरों की इसमें विशेष भूमिका हो सकती है।


    पंजाब के गिरोह मदद कर रहे

    सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क करते हुए कहा गया कि पंजाब में सक्रिय स्थानीय अपराधिक गिरोह और उनके सरगना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से देश में तबाही मचाने की कोशिश कर रहे हैं।


    स्लीपर सेल भी सक्रिय

    खुफिया एजेंसियों के अनुसार, कुछ स्लीपर सेल और गैंगस्टरों के गुर्गे विदेश से संचालित खालिस्तान समर्थक और कट्टरपंथी संगठनों के आकाओं के इशारे पर काम कर रहे हैं। ये तत्व कट्टरपंथी युवाओं को खालिस्तान समर्थक संदिग्धों से जोड़ने की भी कोशिश कर रहे हैं।


    आईएसआई की भूमिका

    खालिस्तानी संगठनों, बांग्लादेशी आतंकी समूहों के एजेंडे को आगे बढ़ाने में आईएसआई सक्रिय है। आंतरिक सुरक्षा पर हमला करने के लिए आपराधिक नेटवर्क के इस्तेमाल की योजना है। ये संदिग्ध गैंगस्टर हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सक्रिय हैं और खालिस्तानी आतंकी तत्वों से संपर्क बढ़ा रहे हैं।


    दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, चार मॉक ड्रिल की गईं

    दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में मॉक ड्रिल कर सुरक्षा तैयारियों का आकलन किया। जनवरी के पहले पखवाड़े में चार मॉक ड्रिल आयोजित की गईं। इन मॉक ड्रिल में लाल किला, आईएसबीटी कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, खारी बावली, सदर बाजार और मेट्रो स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थान शामिल रहे। इसका उद्देश्य आतंकी घटनाओं से निपटने की तैयारी मजबूत करना और आम लोगों को सतर्क करना है।


    कार धमाके में 15 मरे थे

    दिल्ली में पिछले वर्ष 10 नवंबर को लालकिले के करीब मेट्रो स्टेशन के पास कार में आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी। इस मामलें में डॉक्टर समेत कई आरोपी गिरफ्तार किए गए थे।