Author: bharati

  • जबलपुर में पकड़े गए बांग्लादेशी अवैध प्रवासी, सजा पूरी होने पर देश वापसी..

    जबलपुर में पकड़े गए बांग्लादेशी अवैध प्रवासी, सजा पूरी होने पर देश वापसी..


    जबलपुर।बांग्लादेश से अवैध रूप से मध्यप्रदेश पहुंचे मीनारा बेगम और मोहम्मद मोसूर को दो साल की जेल की सजा पूरी होने के बाद जबलपुर से उनके देश भेज दिया गया। दोनों आरोपी 2023 में गुजरात के मार्ग से भारत में प्रवेश कर चुके थे और जबलपुर में छिपकर भीख मांगकर जीवन यापन कर रहे थे।पुलिस ने बताया कि दोनों संदिग्ध गतिविधियों के कारण निगरानी में आए और पूछताछ में अपनी पहचान साबित नहीं कर सके। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वे अवैध बांग्लादेशी नागरिक हैं। गोरखपुर थाना पुलिस ने दोनों को विदेशी अधिनियम की धारा 14ए के तहत गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया।

    सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने प्रारंभ में दोनों को चार-चार साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की। सरकारी वकील की पैरवी के बाद सजा घटाकर दो साल कर दी गई। दिसंबर 2025 में दोनों आरोपी अपनी सजा पूरी कर चुके थे। मीनारा बेगम को महिला सुधार केंद्र और मोहम्मद मोसूर को सिविल लाइन थाने में अस्थायी रूप से रखा गया।सजा पूरी होने के बाद केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से डिपोर्टेशन की कार्रवाई की गई। दोनों को सड़क मार्ग से पश्चिम बंगाल के मालदा जिले होते हुए बांग्लादेश सीमा तक पहुंचाया गया। लगभग 1200 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर उन्हें बीएसएफ की मदद से बांग्लादेश सरकार को सौंपा गया।

    एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि दोनों आरोपी अवैध रूप से भारत में प्रवेश किए थे और उनके पास कोई वैध पहचान या निवास दस्तावेज नहीं थे। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि बेहतर जीवन की तलाश में वे भारत आए थे। पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि प्रदेश में अवैध घुसपैठ पर सतर्कता जारी है और सजा पूरी होने के बाद आरोपियों की वतन वापसी सुनिश्चित की जाती है।जबलपुर पुलिस ने बताया कि मीनारा और मोसूर गोरखपुर मैदान में रात बिताते और दिन में भीख मांगते थे। सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने उन्हें पकड़ा। इससे पहले भी जबलपुर और प्रदेश के अन्य जिलों में कई अवैध बांग्लादेशी नागरिक पकड़े जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि सीमापार से बेहतर जीवन या रोजगार की तलाश में लोग प्रवेश करते हैं, लेकिन कानून की निगरानी सख्त है।

    यह मामला राज्य और केंद्र सरकार की अवैध घुसपैठ रोकने की नीति का उदाहरण है। पुलिस लगातार निगरानी, गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन सुनिश्चित कर रही है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसी अवैध गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और राज्य की सुरक्षा तथा सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता जारी रहेगी।इस घटना से यह संदेश भी जाता है कि अवैध प्रवेश करने वालों को कानून के तहत सजा दी जाएगी और उनके देश वापसी की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही यह प्रदेश में कानून और सामाजिक सुरक्षा बनाए रखने में प्रशासन की सतर्कता और सक्रियता को भी उजागर करता है।

  • नए साल 2026 से पहले ग्वालियर अलर्ट मोड पर: 2 हजार पुलिसकर्मी, 40 चेकिंग पॉइंट्स, ड्रिंक एंड ड्राइव पर सख्ती

    नए साल 2026 से पहले ग्वालियर अलर्ट मोड पर: 2 हजार पुलिसकर्मी, 40 चेकिंग पॉइंट्स, ड्रिंक एंड ड्राइव पर सख्ती


    ग्वालियर। नए साल 2026 के स्वागत को लेकर ग्वालियर शहर में जश्न की तैयारियों के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह कसी गई है। पुलिस प्रशासन ने 31 दिसंबर और 1 जनवरी को शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा प्लान लागू किया है। इस दौरान शहर भर में 2 हजार से अधिक पुलिस जवान और अधिकारी तैनात रहेंगे। प्रमुख सड़कों तिराहों और चौराहों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा, ताकि नए साल का जश्न सुरक्षित और अनुशासित माहौल में मनाया जा सके।पुलिस ने शहर में कुल 40 चेकिंग पॉइंट बनाए हैं। इनमें से 35 स्थान विशेष रूप से ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों पर नजर रखने के लिए चुने गए हैं। इन पॉइंट्स पर पुलिसकर्मी ब्रीथ एनालाइजर के साथ तैनात रहेंगे और वाहन चालकों की जांच करेंगे। शराब पीकर वाहन चलाते पाए जाने पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 10 हजार रुपये तक का जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    निगरानी की शुरुआत 30 दिसंबर से हो चुकी है। पुलिस ने ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाना, स्टंटबाजी और सार्वजनिक स्थानों पर हंगामा करने वालों पर विशेष नजर रखी है। अधिकारियों का कहना है कि 31 दिसंबर की रात और 1 जनवरी को भीड़ बढ़ने की संभावना रहती है इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को अतिरिक्त रूप से मजबूत किया गया है।एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने होटल, रेस्टोरेंट, बार और रिसॉर्ट संचालकों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया है कि नए साल के कार्यक्रम पूरी तरह नियमों के अनुसार ही आयोजित किए जाएं। डीजे और साउंड सिस्टम की आवाज तय मानकों के भीतर रखनी होगी, ताकि आसपास के इलाकों में शांति भंग न हो। किसी भी तरह की अव्यवस्था या नियम उल्लंघन पाए जाने पर आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए साल के नाम पर हुड़दंग मारपीट या कानून तोड़ने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में आरोपियों को हिरासत में लिया जाएगा और उनकी नई साल की रात हवालात में भी गुजर सकती है। आपात स्थितियों से निपटने के लिए डायल-112 की टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सख्ती लोगों के उत्सव में बाधा डालने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। प्रशासन चाहता है कि शहरवासी नए साल का स्वागत शांति जिम्मेदारी और उत्साह के साथ करें।

    सुरक्षा की इस तैयारियों में पैदल और वाहन निगरानी, चेकिंग पॉइंट्स पर ब्रीथ एनालाइजर कंट्रोल रूम से निगरानी और आपातकालीन टीमों की तैनाती शामिल है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, शराब पीकर वाहन न चलाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।इस व्यापक योजना से ग्वालियर पुलिस का उद्देश्य है कि शहरवासी अपने परिवार और दोस्तों के साथ सुरक्षित तरीके से नए साल का जश्न मनाएं और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

  • इंदौर में दूषित पानी से मौतों का संकट: 8 की आशंका, 111 मरीज अस्पतालों में भर्ती..

    इंदौर में दूषित पानी से मौतों का संकट: 8 की आशंका, 111 मरीज अस्पतालों में भर्ती..


    इंदौर। देश के स्वच्छ शहरों की सूची में शीर्ष पर रहने वाले इंदौर में अचानक दूषित पानी से फैलने वाली बीमारी ने शहर में गंभीर संकट पैदा कर दिया है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित जल पीने से अब तक 8 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर 3 मौतों की पुष्टि की है। इस घटना के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। वर्तमान में 111 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनका इलाज जारी है।

    घटना तब उजागर हुई जब बीते एक सप्ताह से इलाके में उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायतें लगातार बढ़ने लगीं। सोमवार रात स्थिति गंभीर हो गई और बड़ी संख्या में लोग निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए। मंगलवार को दिनभर मौतों की सूचनाएं मिलती रहीं, और देर रात तक कुल 8 मौतों की जानकारी सामने आई। प्रशासन ने बताया कि मौतों का कारण डायरिया और जलजनित संक्रमण है।स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार अब तक क्षेत्र के 2700 से अधिक घरों का सर्वे किया जा चुका है और लगभग 12,000 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई है। मौके पर 1,100 से अधिक लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर स्थिति वाले मरीजों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया। कई अस्पतालों में विशेष वार्ड और अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है जबकि कुछ मरीजों को आईसीयू में रखा गया।

    जांच के दौरान भागीरथपुरा इलाके में एक चौंकाने वाली वजह सामने आई। चौकी से सटे शौचालय के नीचे से गुजर रही मुख्य जल आपूर्ति लाइन में लीकेज पाया गया, जिससे गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया। माना जा रहा है कि इसी कारण संक्रमण बड़े पैमाने पर फैला। मरम्मत के लिए संबंधित संरचना को तोड़कर लाइन की तत्काल मरम्मत कराई गई। इसके अलावा नर्मदा जल आपूर्ति लाइन से भी बदबूदार पानी आने की शिकायतें मिली हैं।प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में डॉक्टरों की टीमें, पैरामेडिकल स्टाफ और आशा कार्यकर्ताओं को तैनात किया है। लोगों को उबला हुआ पानी पीने, बाहर का भोजन न करने और लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी जा रही है। राहत के तौर पर टैंकरों से साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।

    इस गंभीर मामले के बाद नगर निगम और जल आपूर्ति से जुड़े अधिकारियों पर निलंबन और सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई की गई है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने और सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने की घोषणा की है।यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है बल्कि स्वच्छता के राष्ट्रीय मॉडल माने जाने वाले शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी होंगी।

  • जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

    जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई


    भोपाल। प्रदेश के जनजातीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों, खासकर छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। अब छात्रावासों में अधीक्षक का रातभर परिसर में रहना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने वाले अधीक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पद से हटाया जा सकता है।सरकार ने यह निर्णय छात्रावासों में लगातार मिल रही शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को ध्यान में रखते हुए लिया है। वर्तमान में कई अधीक्षक मूल रूप से शिक्षक हैं, जो न तो नियमित रूप से पढ़ा रहे हैं और न ही छात्रावासों में पर्याप्त समय दे रहे हैं। बच्चों के हित में उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नई अधीक्षक कैडर प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। योजना के तहत अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूर्णकालिक अधीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि मौजूदा शिक्षक अधीक्षक अपने मूल शिक्षण कार्य में लौटेंगे।
    छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार ने तय किया है कि प्रत्येक छात्रावास में अधीक्षक के लिए आवासीय व्यवस्था होगी। अधीक्षक को बच्चों के साथ ही परिसर में रुकना होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही संभाग स्तर पर विशेष निगरानी टीमें बनाई जाएंगी, जो छात्रावासों का औचक निरीक्षण करेंगी और व्यवस्थाओं की रिपोर्ट तैयार करेंगी।तकनीकी निगरानी को भी मजबूत किया जाएगा। प्रदेश के लगभग 2500 जनजातीय छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे और बायोमेट्रिक/थंब इम्प्रेशन सिस्टम लगवाए जाएंगे। इससे यह रिकॉर्ड रखा जा सकेगा कि कौन व्यक्ति कब छात्रावास में आया और कब गया। इसके अलावा, भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए रोजाना परोसी जाने वाली थाली की तस्वीर भेजना भी अनिवार्य किया जाएगा।
    इस बीच, भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की जमीन को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया कि इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर ही लिया जाएगा। लंबे समय से लंबित कचरा निष्पादन की प्रक्रिया को पूरा करना सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि आगामी शिक्षा सत्र से पहले किसी भी छात्रावास में बिना पुलिस सत्यापन के कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं होगा। सुरक्षा गार्ड से लेकर अन्य स्टाफ की पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य होगी।
    इसके अलावा, जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रत्येक विकासखंड में आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूल, छात्रावास और सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के अवसर प्रदान करना है।सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षा के इस सुधार से यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और उनकी पढ़ाई पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से छात्राओं और छात्रों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम होगी।

  • कनाडा की नेवी को ईरान ने घोषित किया आतंकी संगठन, जानिए वजह ?

    कनाडा की नेवी को ईरान ने घोषित किया आतंकी संगठन, जानिए वजह ?

    तेहरान । कनाडा की नेवी को ईरान ने आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। मंगलवार को शिया इस्लामिक देश ने यह फैसला लिया। उसका कहना है कि कनाडा ने 2024 में ईरान की सेना रिवॉलूशनरी गार्ड्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। उसके जवाब में ही यह कदम उठाया गया है। ईरान की ओर से कहा गया कि ओटावा ने हमारी सेना की वैचारिक शाखा को आतंकी समूह घोषित किया था। यह फैसला पूरी तरह से गलत था और अंतरराष्ट्रीय कानूनों एवं सिद्धांतों के विपरीत था। उसी का जवाब देते हुए हम ऐसा कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को यह अधिकार है कि वह अपने खिलाफ उठाए गए किसी कदम का जवाब दे सके।

    उन्होंने कहा कि हम अपने जवाब देने के अधिकार का ही इस्तेमाल करते हुए रॉयल कनैडियन नेवी को आतंकी संगठन घोषित करते हैं। ईरान ने कहा कि यदि कोई हमारे खिलाफ आता है तो हमें भी कुछ कदम तो उठाने ही होंगे। दरअसल कनाडा ने 19 जून, 2024 को ईरान के रिवॉलूशनरी गार्ड्स को एक आतंकी समूह घोषित कर दिया था। इसके तहत ईरान की सेना की इस यूनिट के किसी भी मेंबर के कनाडा में प्रवेश पर पाबंदी लगाई गई थी। इसके अलावा कनाडा के किसी भी नागरिक या समूह के साथ किसी भी तरह की डीलिंग करने से भी रोका था।

    इसके अलावा यह आदेश भी कनाडा की ओर से था कि यदि ईरानी सेना की कोई संपत्ति कनाडा में है तो उसे भी जब्त कर लिया जाए। कनाडा ने इस फैसले के पीछे दलील दी थी कि ईरान की सेना अपने देश में और बाहर मानवाधिकारों का हनन कर रही है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया था। दरअसल तेहरान से जनवरी 2020 में उड़ाने भरने वाले एक कनाडाई विमान को मार गिराया गया था। इस घटना में 176 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 85 कनाडाई नागरिक थे।
    इस घटना को लेकर ईरान के रिवॉलूशनरी गार्ड्स ने गलती मानी थी और उसका कहना था कि हमसे चूक हुई है। हमने किसी भ्रम के चलते ऐसी घटना को अंजाम दिया था। हम इसके लिए माफी मांगते हैं। फिर भी कनाडा ने ईरान की सेना पर पाबंदियां थोप दी थीं। बता दें कि ईरान के साथ कनाडा ने 2012 में ही कूटनीतिक संबंध खत्म कर दिए थे। कनाडा का कहना था कि ईरान वैश्विक शांति के लिए खतरा है और इसीलिए हम ऐसा कदम उठा रहे हैं।

  • बांग्लादेश तुर्की से खरीदने जा रहा सिरिट लेजर मिसाइल

    बांग्लादेश तुर्की से खरीदने जा रहा सिरिट लेजर मिसाइल

    ढाका। भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई तल्खी के बीच ढाका अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से मजबूत कर रहा है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के नेतृत्व में बांग्लादेश ने तुर्की का रुख किया है और सिरिट (Cirit) लेजर-गाइडेड मिसाइलों खरीदने का फैसला लिया है। ये ‘स्मार्ट’ मिसाइलें, जो पहले से बांग्लादेश के ड्रोनों और आने वाले हमलावर हेलीकॉप्टरों पर एकीकृत हैं, आधुनिक युद्ध में सटीक हमलों की क्षमता बढ़ाएंगी। दरअसल, शेख हसीना के कार्यकाल के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंध मजबूत हुए हैं। पाकिस्तान पहले से ही तुर्की से बड़े पैमाने पर हथियार खरीदता है।

    गौरतलब है कि बांग्लादेश ने तुर्की से बायराकटार टीबी-2 ड्रोन पहले ही खरीद लिए हैं, जिनका उपयोग भारतीय सीमा की निगरानी में हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्रालय की निविदा प्रक्रिया के बावजूद तुर्की की सिरिट मिसाइल प्रणाली चुने जाने की संभावना मजबूत है। तुर्की की कंपनी रोकेत्सन द्वारा निर्मित यह मिसाइल सटीक और किफायती है, जिसे हमलावर हेलीकॉप्टरों पर भी लगाया जा सकता है। यह स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है, जिसमें बख्तरबंद और गैर-बख्तरबंद वाहन शामिल हैं।

    अब सवाल है कि सिरिट मिसाइल का भारत पर क्या असर हो सकता है? दरअसल, यह मिसाइल छोटे रॉकेट और निर्देशित टैंक-रोधी मिसाइलों के बीच की कमी को पूरा करती है। निर्माता के अनुसार, इसे विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर आसानी से लगाया जा सकता है। बांग्लादेशी रक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह देश की सैन्य जरूरतों के लिए आदर्श है। ड्रोन और हमलावर हेलीकॉप्टरों पर इसका परीक्षण हो चुका है। इन मिसाइलों से बांग्लादेश वायु सेना भारत के निकट चटगांव पहाड़ी क्षेत्र में दुश्मन ठिकानों को निशाना बना सकती है।

    इतना ही नहीं, बांग्लादेश तुर्की से छह टी-129 अटैक हमलावर हेलीकॉप्टर खरीदने की बातचीत कर रहा है। भविष्य में देश शक्तिशाली चौथी पीढ़ी के यूरोफाइटर जेट हासिल करना चाहता है।

  • पाकिस्तान की हालत खस्ता : एयरलाइंस के बाद अब बैंक, होटल बेचने की तैयारी में शरीफ सरकार

    पाकिस्तान की हालत खस्ता : एयरलाइंस के बाद अब बैंक, होटल बेचने की तैयारी में शरीफ सरकार


    इस्‍लामाबाद। बीते दिनों सरकारी एयरलाइंस की सार्वजनिक नीलामी के बाद अब पाकिस्तान की सरकार बैंकों और होटलों को भी बेचने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आर्थिक तंगी से जूझ रहे PAK के पास निजीकरण के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है और इस क्रम में शहबाज शरीफ की सरकार ने बैंक, होटल, बिजली कंपनियां, बीमा और यहां तक की रिटेल नेटवर्क तक को बेचने की योजना बना ली है।

    पाकिस्तानी हुकूमत के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों को पूरा करने और डिफॉल्ट से बचने के लिए सरकार को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा है। पाकिस्तानी अफसरों ने तो यह तक कह दिया है कि स्थिति ‘करो या मरो’ जैसी बन गई है। न्यूज 18 की एक रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेजों और कैबिनेट मीटिंग्स का हवाला देकर बताया गया है कि 2026 के अंत तक कई बड़े सरकारी आउटलेट प्राइवेट हाथों में सौंपे जा सकते हैं। इनमें बिजली वितरण कंपनियां, बैंक, होटल, इंश्योरेंस और एनर्जी सेक्टर शामिल हैं।
    क्या है ‘एजेंडा-5’?

    जानकारी के मुताबिक शरीफ सरकार ने निजीकरण के लिए अगले 12 महीनों में पांच बड़े सेक्टर चिन्हित किए हैं, जिसे अनौपचारिक तौर पर ‘एजेंडा-5’ का नाम दिया गया है। इनमें बिजली वितरण कंपनियां, बैंकिंग सेक्टर, होटल और रियल एस्टेट, एनर्जी जनरेशन कंपनियां और बीमा और रिटेल नेटवर्क के कुछ वर्टिकल शामिल हैं।

    यह पूरा प्राइवेटाइजेशन प्रोग्राम पाकिस्तान के हाइब्रिड पॉलिटिकल सिस्टम के तहत चल रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की भूमिका अहम बताई जा रही है। हालांकि इस फैसले का पाकिस्तान में भारी विरोध भी हो रहा है। जहां समर्थकों का कहना है कि आर्थिक सुधार का यह इकलौता रास्ता है, वहीं दूसरी तरफ विरोधियों का आरोप है कि यह शहबाज शरीफ की सरकार की नाकामी दिखाती है। इसे देश की संप्रभुता से खिलवाड़ भी कहा जा रहा है।
    पाकिस्तान की हालत खस्ता

    पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते दिनों पाक को अपनी सरकारी एयरलाइंस, नेशनल एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की सार्वजनिक नीलामी करनी पड़ी। वहीं पाकिस्तान पर मौजूदा समय में करीब 131 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी कर्ज है। हालात यह हैं कि सरकार रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए भी उधार ले रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की स्थिति अगर यही बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान में श्रीलंका जैसे हालात पैदा हो जाएं।

  • पाक आर्मी चीफ मुनीर ने सगे भाई के बेटे से ही करा दिया बेटी का निकाह

    पाक आर्मी चीफ मुनीर ने सगे भाई के बेटे से ही करा दिया बेटी का निकाह

    लाहोर। पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बेटी की शादी हो गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि मुनीर ने अपने ही सगे भाई के बेटे से अपनी बेटी की शादी कराई है। यह शादी पिछले हफ्ते रावलपिंडी में हुई और इसमें तमाम राजनीतिक हस्तियों और सैन्य अफसरों ने हिस्सा लिया। हालांकि हाई प्रोफाइल मेहमानों के बावजूद, इसे बिल्कुल निजी रखा गया था।

    पत्रकार ने की परिवार में शादी की पुष्टि
    पाकिस्तानी पत्रकार जाहिद गिशकोरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि आसिम मुनीर की बेटी का निकाह उनके भाई के बेटे से हुआ है। एक अन्य पत्रकार रजा मुनीब ने भी इस बात की पुष्टि की है। रजा ने कहा कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी बेटी की शादी, भाई कासिम मुनीर के बेटे से की है। यह शादी रावलपिंडी में हुई।

    पिछले हफ्ते हुआ निकाह
    अपने वीडियो में गिशकोरी ने बताया कि दूल्हे का नाम अब्दुर रहमान है। यह एक हाई प्रोफाइल शादी थी। उन्होंने आगे बताया कि रहमान पहले पाकिस्तान आर्मी में कैप्टन था। गिशकोरी ने इस वीडियो में आसिम मुनीर की बेटियों के बारे में भी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मुनीर की चार बेटियां हैं। यह उनकी तीसरी बेटी की शादी है, जिसका नाम महनूर है।

    क्या करता है दूल्हा?
    दूल्हे के बारे में और ज्यादा जानकारी देते हुए गिशकोरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना में कैप्टन रहने के बाद वह सिविल सर्विसेज की तरफ चला गया। फिलहाल वह आर्मी अफसरों के सिविल सर्विसेज कोटा के तहत असिस्टेंट कमिश्नर है। गिशकोरी ने बताया कि इस शादी में वर्तमान पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पाकिस्तान स्थित पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ समेत कई रिटायर्ड जनरल्स और पूर्व आर्मी चीफ मौजूद रहे।
    पूरी तरह गोपनीय रखी गई शादी
    इस शादी में यूएई के राष्ट्रपति के शामिल होने की भी खबरें थीं। हालांकि गिशकोरी ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया कि यूएई के राष्ट्रपति वहां आए नहीं थे। उन्होंने बताया कि इस शादी में 400 से ज्यादा मेहमान मौजूद थे और सुरक्षा कारणों से शादी को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था।

  • ‘धुरंधर’ की सफलता के बीच श्रीराम राघवन बोले- ऐसी फिल्में बनाना मेरा पागलपन होगा, 1 जनवरी को आएगी इक्कीस

    ‘धुरंधर’ की सफलता के बीच श्रीराम राघवन बोले- ऐसी फिल्में बनाना मेरा पागलपन होगा, 1 जनवरी को आएगी इक्कीस


    नई दिल्ली।बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर फिल्म की सफलता के चर्चे जोरों पर हैं। रणवीर सिंह की यह स्पाई थ्रिलर भारत और विदेश में रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर चुकी है। भारत में 700 करोड़ रुपये से अधिक और विदेश में 1100 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुकी यह फिल्म 2025 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शुमार हो चुकी है।लेकिन इस फिल्म की सफलता के बीच फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग इसे लेकर ज्यादा कम्फर्टेबल नहीं हैं। इक्कीस फिल्म के डायरेक्टर श्रीराम राघवन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में साफ कहा कि वह इस तरह की फिल्में कभी नहीं बनाएंगे। उन्होंने कहाअगर मैं ऐसी फिल्में करने लगा तो यह मेरा सबसे बड़ा पागलपन होगा।

    श्रीराम राघवन ने यह भी कहा कि धुरंधर अच्छी बनी फिल्म है और इसके परफॉर्मेंस भी शानदार हैं लेकिन यह उनकी शैली की फिल्म नहीं है। उन्होंने आगे कहाहमें समझना चाहिए कि सब अलग समय में अलग फॉर्मेट की फिल्में बना रहे हैं। धुरंधर शानदार कर रही है लेकिन यही मेरी फिल्में नहीं हैं। अगर मैं ऐसा करूं तो यह मेरा पागलपन होगा।डायरेक्टर ने धुरंधर के निर्देशक आदित्य धर की तारीफ भी की। उन्होंने कहाआदित्य का अलग सेंस और क्राफ्ट है और मुझे उनकी फिल्में देखना पसंद है लेकिन मैं ऐसा कुछ नहीं बना सकता।अब बात करें श्रीराम राघवन की फिल्म इक्कीस की। यह फिल्म सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की जिंदगी पर आधारित है जिन्हें सबसे कम उम्र में परमवीर चक्र सम्मान प्राप्त हुआ था। फिल्म में अगस्त्य नंदा ने अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है। उनके अपोजिट सिमर भाटिया हैं जो अक्षय कुमार की भांजी हैं। दोनों की यह पहली फिल्म है जो थिएटर में रिलीज़ हो रही है।

    फिल्म में धर्मेंद्र जयदीप अहलावत और दीपक डोबरियाल भी अहम भूमिकाओं में हैं। रिलीज़ से पहले ही फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने इस मूवी की सराहना की है और इसे शानदार बताया।इक्कीस फिल्म 1 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है। फिल्म के रिलीज़ होते ही दर्शकों और समीक्षकों के बीच इसका क्रेज़ देखने को मिलेगा। इस फिल्म से दर्शकों को एक प्रेरणादायक कहानी देखने को मिलेगी और यह भारतीय वीरता की मिसाल पेश करेगी।

  • MP: सतना में 26 साल पुराना कर्ज उतारने के लिए सफाईकर्मी के घर पहुंचे DSP

    MP: सतना में 26 साल पुराना कर्ज उतारने के लिए सफाईकर्मी के घर पहुंचे DSP


    सतना।
    पद और प्रतिष्ठा मिल जाए, लेकिन इंसान को अपना अतीत और किसी का उपकार कभी नहीं भूलना चाहिए। मध्य प्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh Police) के चर्चित और संवेदनशील अधिकारी DSP संतोष पटेल ने इस बात को साबित कर दिखाया है। वे अपने ऊपर चढ़े हुए 26 साल पुराने एक कर्ज (A 26-year-old Debt) को उतारने के लिए सतना (Santa) की तंग गलियों में मौजूद एक झुग्गी बस्ती (Slum) में पहुंचे। यह कर्ज पैसों का नहीं था, बल्कि खून का था। जिस सफाईकर्मी संतु मास्टर ने बचपन में अपना खून देकर संतोष पटेल की जान बचाई थी, वे उसी से मिलने के लिए शहर में आए थे। हालांकि यहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि संतु अब दुनिया में नहीं रहे, जिसके बाद वे उनके परिवार का पता लगाकर उनसे मिलने के लिए यहां आ गए। यहां संतु मास्टर की बेटियों से मिलकर वह भावुक हो गए और इस दौरान उन्होंने उनकी बड़ी बेटी के चरण स्पर्श कर परिवार की जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया।

    यहां पहुंचकर DSP संतोष पटेल ने एकबार फिर अपने बचपन का वो डरावना मंजर याद किया, जब उनकी जान पर बन आई थी। बात साल 1999 की है, जब वे महज 8-9 साल के थे। एक गंभीर बीमारी ने उन्हें जकड़ लिया था। शरीर का खून पानी बनकर मवाद में बदल गया था। इस दौरान उनके पिता और दादा ने 6 महीने झाड़-फूंक में गंवा दिए। हालत बिगड़ने पर उन्हें पन्ना जिला अस्पताल और फिर सतना के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि तत्काल ऑपरेशन करना होगा, और खून की सख्त जरूरत है।


    खून देने से पहले पिता को लगाई थी फटकार

    DSP ने बताया कि उस दौर में रक्तदान को लेकर कई भ्रांतियां थीं और कोई डोनर नहीं मिल रहा था। लेकिन इसी बीच अस्पताल में एक अजीब संयोग बना। संतोष के पिता ने गलती से पान-सुपारी खाकर अस्पताल परिसर में थूक दिया। वहां सफाई कर रहे संतु ने उन्हें देखा और दौड़कर आया। इसके बाद उसने पिता को डांटा-फटकारा और चला गया। हालांकि इसी दौरान जब बेटे की हालत की वजह से संतोष के पिता जब वहां पर निराश बैठे हुए थे, तो उसी सफाईकर्मी संतु ने उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा था, ‘आप हताश मत हो, आपका बेटा जिंदा रहेगा।’

    इसी बीच जब संतु मास्टर को पता चला कि बच्चे को खून की जरूरत है, तो उसने बिना किसी स्वार्थ के अपना ब्लड डोनेट किया था। उसी खून से ऑपरेशन सफल रहा और आज संतोष पटेल जिंदा हैं और पुलिस अधिकारी है।

    ‘अधिकारी नहीं, बेटा बनकर आया हूं’
    DSP बनने के बाद संतोष पटेल सतना के उसी अस्पताल पहुंचे। वे संतु मास्टर को गले लगाना चाहते थे, लेकिन वहां पता चला कि उनका निधन हो चुका है और पत्नी भी नहीं रहीं। अस्पताल की एक बुजुर्ग महिला कर्मचारी ने बताया कि संतु की दो बेटियां झुग्गी बस्ती में रहती हैं। इसके बाद DSP उनका पता लेकर तुरंत यहां पहुंचे। वर्दी पहने एक बड़े अफसर को अपनी झोपड़ी में देख बेटियां सहम गईं, लेकिन जब DSP ने झुककर उनके पैर छुए, तो सबकी आंखें नम हो गईं।


    DSP बोले- मैं करूंगा कन्यादान

    DSP ने संतु की बेटियों से कहा,मैं संतु मास्टर का मुंह नहीं देख पाया, इसका अफसोस जीवन भर रहेगा, लेकिन मेरी रगों में भी उनका खून दौड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि वे लोग अकेले नहीं हैं। DSP ने संकल्प लिया कि वे संतु मास्टर की छोटी बेटी की शादी धूमधाम से कराएंगे। उन्होंने कहा, ‘अगर समय और संयोग रहा, तो मैं खुद भाई और पिता का फर्ज निभाते हुए कन्यादान भी करूंगा’।