Author: bharati

  • ईरान पर हमलों को ऑस्ट्रेलिया में कम समर्थन, सेना भेजने का विरोध

    ईरान पर हमलों को ऑस्ट्रेलिया में कम समर्थन, सेना भेजने का विरोध


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के हमलों की वजह से तनाव की स्थिति बरकरार है। एक सर्वे से पता चला है कि ऑस्ट्रेलिया की केवल 26 फीसदी जनता ही ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के हमलों को सही मानती है। वहीं 50 फीसदी आबादी ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की तैनाती को ठीक नहीं मानती।

    न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, स्वतंत्र फर्म ‘एसेंशियल रिसर्च’ के एक मासिक पोल, ‘द एसेंशियल रिपोर्ट’ के ताजा अपडेट में बताया गया है कि 10 फीसदी लोग ईरान पर हमले शुरू करने के अमेरिका-इजरायल के फैसले को पूरी तरह से जायज हमला मानते हैं और 16 फीसदी लोग इसे ठीक-ठाक कार्रवाई करार दे रहे हैं।

    वहीं ऑस्ट्रेलियाई आबादी का 27 फीसदी हिस्सा इस संघर्ष के सख्त खिलाफ है। 15 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इसे नामंजूर करते हैं, जबकि बाकी लोग या तो निष्पक्ष रहने में यकीन रखते हैं या इस फैसले को लेकर असमंजस में हैं।

    संघर्ष में ऑस्ट्रेलिया के शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर, पोल में शामिल 50 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे ईरान में अमेरिका-इजरायल के जमीनी अभियान के समर्थन में सेना भेजने का विरोध करेंगे, जबकि 21 प्रतिशत ने कहा कि वे ऐसे कदम के पक्ष में हैं।

    दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया ने ईरान से आने वाले यात्रियों पर बैन लगाने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से यह खतरा बढ़ गया है कि शॉर्ट-टर्म वीजा खत्म होने के बाद वे घर जाने से मना कर देंगे।

    गृह विभाग का कहना है कि अगले छह महीनों तक ईरानी पासपोर्ट पर यात्रा करने वाले लोगों को पर्यटन या काम के लिए ऑस्ट्रेलिया आने से रोक दिया जाएगा।

    एक बयान में कहा गया है, “ईरान में लड़ाई की वजह से यह खतरा बढ़ गया है कि कुछ अस्थायी वीजा होल्डर्स अपने वीजा खत्म होने पर ऑस्ट्रेलिया से बाहर नहीं जा पाएंगे या शायद ही जा पाएं।”

    विभाग ने आगे कहा कि वीजा मामले में थोड़ी सी राहत कुछ खास मामलों में दी जाएंगी, जैसे कि ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के माता-पिता के लिए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 85,000 से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ईरान में पैदा हुए थे और सिडनी और मेलबर्न जैसे बड़े शहरों में रहने वाले ईरानी समुदाय के पाए जाते हैं।

    इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने मेहमान महिला फुटबॉल टीम की सात खिलाड़ियों और अधिकारियों को अपने देश में शरण दी। ऑस्ट्रेलिया के इस कदम से ईरान में भारी नाराजगी है।

    दरअसल, एशियन कप मैच के दौरान खेल शुरू होने से पहले खिलाड़ियों ने ईरान का राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया। इस कदम के बाद ईरान में इन खिलाड़ियों को देशद्रोही करार दिया गया। खिलाड़ियों की इस हरकत को इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ बगावत के तौर पर देखा गया।

    उन सात में से पांच ने बाद में ऑस्ट्रेलिया में पनाह लेने का अपना फैसला बदल दिया, जिससे यह शक और बढ़ गया कि उनके परिवार खतरे में आ गए हैं।

  • बदलते वैश्विक समीकरण: अमेरिका पर बढ़ा दबाव, चीन-रूस बने चुनौती

    बदलते वैश्विक समीकरण: अमेरिका पर बढ़ा दबाव, चीन-रूस बने चुनौती


    नई दिल्ली।  भारत की वैश्विक कूटनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। एस. जयशंकर दो दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हो रहे हैं, जहां वे जी-7 विदेश मंत्रियों की अहम बैठक में हिस्सा लेंगे। यह दौरा न केवल भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को भी और प्रभावशाली बनाएगा।

    फ्रांस में होगी अहम कूटनीतिक बैठक

    विदेश मंत्री जयशंकर फ्रांस के अब्बे डेस वॉक्स-डी-सेर्ने में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। उन्हें फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने आमंत्रित किया है। इस दौरान जयशंकर कई देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी कर सकते हैं, जिससे भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

    वैश्विक मुद्दों पर होगी गहन चर्चा

    इस जी-7 बैठक में दुनिया के कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसमें यूक्रेन में जारी युद्ध, पुनर्निर्माण की योजनाएं, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। साथ ही, सप्लाई चेन को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुरक्षित रखने पर भी विचार-विमर्श होगा।

    यूक्रेन संकट पर विशेष फोकस

    बैठक में यूक्रेन के पुनर्निर्माण को लेकर खास सत्र आयोजित होंगे। इसमें न्यूक्लियर सेफ्टी, ह्यूमैनिटेरियन डीमाइनिंग और फंडिंग सिस्टम पर चर्चा की जाएगी। यूरोपीय बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट जैसे संस्थानों की भूमिका पर भी जोर रहेगा, जो यूक्रेन की आर्थिक बहाली में मदद कर सकते हैं।

    समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन पर जोर

    वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री रास्तों की सुरक्षा बेहद अहम है। इस बैठक में मैरीटाइम रूट की सुरक्षा, नेविगेशन की स्वतंत्रता और सप्लाई चेन की मजबूती जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थिरता लाने के प्रयास किए जाएंगे।

    ग्लोबल गवर्नेंस सिस्टम में सुधार की पहल

    जी-7 देश वैश्विक शासन प्रणाली को और आधुनिक बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। इसमें ऐसे नए ढांचे तैयार करने पर जोर होगा, जो बदलती वैश्विक चुनौतियों जैसे सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और संप्रभुता से जुड़े जोखिमो का बेहतर तरीके से सामना कर सकें।

    भारत समेत कई देशों की भागीदारी

    इस बैठक की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ जी-7 देश ही नहीं, बल्कि भारत, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब, ब्राजील और यूक्रेन जैसे कई साझेदार देश भी शामिल होंगे। यह जी-7 की बढ़ती आउटरीच और सहयोग की नीति को दर्शाता है।

    इवियन समिट की तैयारी का मंच

    यह बैठक जून में होने वाले जी-7 लीडर्स समिट (इवियन समिट) की तैयारी का अहम चरण मानी जा रही है। यहां होने वाली चर्चाएं भविष्य की वैश्विक रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  • उज्जैन में आस्था का संगम मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अंगारेश्वर महादेव के चरणों में टेका माथा प्रदेश की खुशहाली की कामना

    उज्जैन में आस्था का संगम मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अंगारेश्वर महादेव के चरणों में टेका माथा प्रदेश की खुशहाली की कामना


    उज्जैन । धार्मिक नगरी उज्जैन एक बार फिर आस्था और भक्ति के विशेष माहौल में डूबी नजर आई जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव गुरुवार सुबह श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे जहां उन्होंने पूरे विधि विधान के साथ भगवान शिव की पूजा अर्चना की मुख्यमंत्री अपने परिवार के साथ प्रातःकाल मंदिर पहुंचे और वहां पहुंचते ही उन्होंने भगवान महादेव के चरणों में माथा टेककर प्रदेश की सुख शांति और समृद्धि की कामना की

    मंदिर परिसर में उस समय का दृश्य अत्यंत आध्यात्मिक और भावनात्मक था जब मुख्यमंत्री ने पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक किया और श्रद्धा भाव से पूजन संपन्न किया जैसे ही पूजन प्रारंभ हुआ मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा और वहां उपस्थित श्रद्धालु भी इस भक्ति के वातावरण में पूरी तरह लीन नजर आए मुख्यमंत्री का यह दौरा पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक विश्वास से जुड़ा हुआ था जिसमें उन्होंने अपने परिवार के साथ भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया

    पूजन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना करते हुए भगवान से प्रार्थना की कि मध्यप्रदेश निरंतर विकास की ओर अग्रसर हो और यहां के नागरिकों के जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहे उन्होंने विशेष रूप से प्रदेश की शांति और खुशहाली के लिए भी आशीर्वाद मांगा इस अवसर पर मंदिर में उपस्थित लोगों ने भी मुख्यमंत्री के साथ मिलकर भगवान शिव की आराधना की जिससे पूरे परिसर में एक सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण बन गया

    श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जहां दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं इस मंदिर का महत्व विशेष रूप से शिवभक्तों के बीच अत्यधिक माना जाता है और यहां नियमित रूप से पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते रहते हैं मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर मंदिर परिसर में पहले से ही तैयारियां की गई थीं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए गए थे ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके

    मुख्यमंत्री के इस धार्मिक दौरे ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि आम जनमानस के बीच भी एक सकारात्मक संदेश दिया है कि आस्था और विश्वास भारतीय संस्कृति की मजबूत नींव हैं और जब जनप्रतिनिधि स्वयं इन परंपराओं से जुड़े रहते हैं तो समाज में भी आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है उज्जैन की पावन भूमि पर हुआ यह पूजन कार्यक्रम एक बार फिर यह दर्शाता है कि धर्म और आस्था का संबंध केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का यह दौरा भले ही अल्पकालिक रहा हो लेकिन इसने श्रद्धालुओं के बीच एक गहरी छाप छोड़ी है और लोगों ने इसे प्रदेश की उन्नति और कल्याण के लिए एक शुभ संकेत के रूप में देखा है

  • फ्रांस दौरे पर विदेश मंत्री जयशंकर, G7 बैठक में भारत की होगी अहम भूमिका

    फ्रांस दौरे पर विदेश मंत्री जयशंकर, G7 बैठक में भारत की होगी अहम भूमिका


    नई दिल्ली। भारत की वैश्विक कूटनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। एस. जयशंकर दो दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हो रहे हैं, जहां वे जी-7 विदेश मंत्रियों की अहम बैठक में हिस्सा लेंगे। यह दौरा न केवल भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को भी और प्रभावशाली बनाएगा।

    फ्रांस में होगी अहम कूटनीतिक बैठक

    विदेश मंत्री जयशंकर फ्रांस के अब्बे डेस वॉक्स-डी-सेर्ने में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। उन्हें फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने आमंत्रित किया है। इस दौरान जयशंकर कई देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी कर सकते हैं, जिससे भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

    वैश्विक मुद्दों पर होगी गहन चर्चा

    इस जी-7 बैठक में दुनिया के कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसमें यूक्रेन में जारी युद्ध, पुनर्निर्माण की योजनाएं, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। साथ ही, सप्लाई चेन को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुरक्षित रखने पर भी विचार-विमर्श होगा।

    यूक्रेन संकट पर विशेष फोकस

    बैठक में यूक्रेन के पुनर्निर्माण को लेकर खास सत्र आयोजित होंगे। इसमें न्यूक्लियर सेफ्टी, ह्यूमैनिटेरियन डीमाइनिंग और फंडिंग सिस्टम पर चर्चा की जाएगी। यूरोपीय बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट जैसे संस्थानों की भूमिका पर भी जोर रहेगा, जो यूक्रेन की आर्थिक बहाली में मदद कर सकते हैं।

    समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन पर जोर

    वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री रास्तों की सुरक्षा बेहद अहम है। इस बैठक में मैरीटाइम रूट की सुरक्षा, नेविगेशन की स्वतंत्रता और सप्लाई चेन की मजबूती जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थिरता लाने के प्रयास किए जाएंगे।

    ग्लोबल गवर्नेंस सिस्टम में सुधार की पहल

    जी-7 देश वैश्विक शासन प्रणाली को और आधुनिक बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। इसमें ऐसे नए ढांचे तैयार करने पर जोर होगा, जो बदलती वैश्विक चुनौतियों—जैसे सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और संप्रभुता से जुड़े जोखिमों—का बेहतर तरीके से सामना कर सकें।

    भारत समेत कई देशों की भागीदारी

    इस बैठक की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ जी-7 देश ही नहीं, बल्कि भारत, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब, ब्राजील और यूक्रेन जैसे कई साझेदार देश भी शामिल होंगे। यह जी-7 की बढ़ती आउटरीच और सहयोग की नीति को दर्शाता है।

    इवियन समिट की तैयारी का मंच

    यह बैठक जून में होने वाले जी-7 लीडर्स समिट (इवियन समिट) की तैयारी का अहम चरण मानी जा रही है। यहां होने वाली चर्चाएं भविष्य की वैश्विक रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  • स्पेस रेस में चीन की बढ़त से अमेरिका अलर्ट, अधिकारियों की सख्त चेतावनी

    स्पेस रेस में चीन की बढ़त से अमेरिका अलर्ट, अधिकारियों की सख्त चेतावनी


    नई दिल्ली। अंतरिक्ष की दौड़ एक बार फिर तेज हो गई है और इस बार मुकाबला सीधे तौर पर अमेरिका और चीन के बीच नजर आ रहा है। अमेरिकी सांसदों और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) यानी पृथ्वी की निचली कक्षा में चीन तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, जिससे अमेरिका की स्पेस लीडरशिप को चुनौती मिल सकती है।

    आईएसएस के बाद का दौर बना चुनौती

    इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पिछले 25 सालों से मानव अंतरिक्ष मिशनों और रिसर्च का केंद्र रहा है। लेकिन अब यह स्टेशन पुराना हो रहा है और इसके अगले चरण को लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ गई है। हाउस साइंस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने कहा कि ISS अमेरिकी स्पेस प्रोग्राम की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब इसके बाद की योजना बेहद सावधानी से बनानी होगी।

    चीन की बढ़ती मौजूदगी से बढ़ी टेंशन

    चीन ने तियांगोंग स्पेस स्टेशन के जरिए लो अर्थ ऑर्बिट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कर ली है। 2022 में लॉन्च हुए इस स्टेशन पर लगातार अंतरिक्ष यात्री काम कर रहे हैं। अमेरिकी सांसद माइक हरिडोपोलोस ने कहा कि अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी लीड बनाए रखने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे।

    सुरक्षा और तकनीकी जोखिम भी बड़ी चिंता

    एयरोस्पेस सेफ्टी एक्सपर्ट चार्ल्स जे. प्रीकोर्ट ने चेतावनी दी कि ISS अब अपने सबसे जोखिम भरे दौर में है। पुराने होते सिस्टम और तकनीकी घिसावट के कारण खतरे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार सुरक्षित ऑपरेशन के लिए कड़ी इंजीनियरिंग और रिस्क मैनेजमेंट जरूरी है।

    ‘स्पेस गैप’ का खतरा

    विशेषज्ञों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि ISS से कमर्शियल स्पेस प्लेटफॉर्म पर ट्रांजिशन के दौरान अमेरिका की मानव अंतरिक्ष क्षमता में गैप आ सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो इसका असर रिसर्च और भविष्य के मिशनों पर पड़ेगा।

    तेजी से बढ़ रहा स्पेस बिजनेस

    कमर्शियल स्पेस सेक्टर भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कमर्शियल स्पेस फेडरेशन के अध्यक्ष डेविड कैवोसा के मुताबिक, वैश्विक स्पेस मार्केट पहले ही 57,000 करोड़ डॉलर का हो चुका है और 2035 तक इसके 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में इस क्षेत्र में देरी या नीति की अस्पष्टता निवेश को प्रभावित कर सकती है।

    नासा की नई रणनीति

    नासा अब ISS के बाद के दौर के लिए कमर्शियल स्पेस स्टेशनों पर फोकस कर रहा है। स्पेस ऑपरेशंस के अधिकारी जोएल आर. मोंटालबानो ने कहा कि एजेंसी 2030 तक एक मजबूत कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है, जहां वह खुद भी एक ग्राहक के रूप में शामिल होगी।

    निर्णायक होंगे आने वाले साल

    अमेरिकी सांसदों का मानना है कि अगले कुछ साल यह तय करेंगे कि लो अर्थ ऑर्बिट में किसकी बादशाहत होगी। दशकों तक लगातार अंतरिक्ष में मौजूदगी के बाद अगर अमेरिका के मिशनों में कोई गैप आता है, तो इसका सीधा फायदा चीन को मिल सकता है।

  • सागर में डंपरों का खूनी तांडव: 24 घंटे में पांच युवकों की दर्दनाक मौत

    सागर में डंपरों का खूनी तांडव: 24 घंटे में पांच युवकों की दर्दनाक मौत


    सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में बीते 24 घंटे मौत का पैगाम लेकर आए। शहर की सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ रहे भारी वाहनों ने पांच हंसते-खेलते परिवारों के चिराग बुझा दिए। रफ्तार के इस खूनी खेल में दो अलग-अलग घटनाओं ने न केवल शहर को शोक में डुबो दिया है, बल्कि प्रशासन की लचर व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलम यह था कि हादसों का मंजर इतना खौफनाक था कि जिसने भी देखा, उसका दिल दहल उठा।

    पहली हृदयविदारक घटना सागर के बंडा रोड पर घटित हुई। यहाँ एक तेज रफ्तार डंपर ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए बाइक पर सवार तीन युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो डंपर की गति इतनी अधिक थी कि बाइक सवारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पुलिस के अनुसार, ये तीनों मृतक बंडा क्षेत्र के ही निवासी थे, जो किसी काम से बाहर निकले थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि घर वापसी का रास्ता मौत की गली से होकर गुजरेगा।

    अभी बंडा रोड की घटना की स्याही सूखी भी नहीं थी कि देर रात सागर शहर के खेल परिसर के पास एक और वीभत्स हादसा हो गया। यहाँ से गुजर रहे एक अनियंत्रित ट्राले क्रमांक RJ 06 GD 2973 ने बाइक सवार दो युवकों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। यह हादसा इतना भयावह था कि दोनों युवक ट्राले के पहियों के नीचे आ गए। टक्कर के बाद का दृश्य इतना विचलित करने वाला था कि सड़क पर मांस के टुकड़े बिखरे पड़े थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने इकट्ठा किया। मृतकों की पहचान गोपालगंज निवासी के रूप में हुई है।

    हादसे की खबर मिलते ही गोपालगंज और कोतवाली पुलिस सहित सीएसपी ललित कश्यप दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित किया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बाइक सवार अपनी सही दिशा में जा रहे थे, लेकिन पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें बेरहमी से कुचल दिया। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है।

    हैरानी की बात यह है कि सागर के मुख्य मार्गों पर भारी वाहनों का बेखौफ दौड़ना अब एक आम बात हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीली कोठी से डिग्री कॉलेज चौराहे के बीच का मार्ग ‘डेथ जोन’ बनता जा रहा है। यहाँ आए दिन सड़क हादसे होते हैं, कई मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाले इन भारी वाहनों पर न तो गति सीमा का नियंत्रण है और न ही इनके प्रवेश के समय का कोई सख्ती से पालन हो रहा है।

    इन पांच मौतों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो सागर की सड़कें इसी तरह मासूमों के खून से लाल होती रहेंगी। फिलहाल, पुलिस ने मामलों को जांच में लिया है, लेकिन सवाल वही बरकरार है इन मौतों का जिम्मेदार आखिर कौन है? वह डंपर चालक जो अपनी रफ्तार के नशे में था या वह तंत्र जिसने इन भारी वाहनों को शहर की छाती पर तांडव करने की खुली छूट दे रखी है?

  • FY2026 में क्रेडिट ग्रोथ में उछाल: रिटेल और MSME सेक्टर बने सहारा

    FY2026 में क्रेडिट ग्रोथ में उछाल: रिटेल और MSME सेक्टर बने सहारा


    नई दिल्ली।  भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ ने जोरदार रफ्तार पकड़ी है। यस बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल कर्ज वितरण (क्रेडिट फ्लो) में 61 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह उछाल मुख्य रूप से रिटेल ग्राहकों और MSME सेक्टर की मजबूत मांग की वजह से आया है, जिसने अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है।

    रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में कुल क्रेडिट फ्लो बढ़कर 25.1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो लगभग 26.1 लाख करोड़ रुपए के डिपॉजिट के बराबर है। रिटेल, MSME और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग इस ग्रोथ का प्रमुख आधार रही। हालांकि, डिपॉजिट ग्रोथ की गति धीमी रहने से बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी पर हल्का दबाव भी देखने को मिला है।

    इसी के चलते क्रेडिट-डिपॉजिट (C/D) रेशियो बढ़कर 82.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पिछले एक दशक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि बैंक अब ज्यादा आक्रामक तरीके से कर्ज दे रहे हैं, जबकि जमा की रफ्तार उतनी तेज नहीं है।

    रिटेल लोन इस ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बनकर उभरा है। पर्सनल लोन की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गई है। टैक्स में राहत और GST से जुड़े फायदों के चलते लोगों की आय में बढ़ोतरी हुई है, जिससे उनकी कर्ज लेने की क्षमता भी मजबूत हुई है। खास बात यह है कि इस बार वाहन लोन ने हाउसिंग लोन को पीछे छोड़ दिया है और क्रेडिट ग्रोथ का सबसे बड़ा ड्राइवर बनकर सामने आया है।

    दूसरी ओर, लोन लेने के ट्रेंड में भी बदलाव देखने को मिला है। अब लोग अनसिक्योर्ड (बिना गारंटी) लोन की बजाय सिक्योर्ड लोन की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं, जिससे बैंकिंग सिस्टम में जोखिम भी कम हो सकता है।

    इंडस्ट्रियल क्रेडिट में भी सुधार दर्ज किया गया है, जिसमें MSME सेक्टर की अहम भूमिका रही है। यह सेक्टर अब कुल औद्योगिक कर्ज का करीब एक-तिहाई हिस्सा बन चुका है। सरकार की क्रेडिट गारंटी स्कीम और MSME की नई परिभाषा ने इस सेगमेंट को मजबूती दी है। माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज ने 2.38 लाख करोड़ रुपए का कर्ज जोड़ा, जबकि मीडियम एंटरप्राइज ने 63,000 करोड़ रुपए का योगदान दिया।

    हालांकि, रिपोर्ट में भविष्य को लेकर थोड़ी चिंता भी जताई गई है। FY27 में क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसके पीछे बढ़ती तेल कीमतें, कमजोर निर्यात और खाद्य महंगाई जैसे कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। साथ ही, GST से मिलने वाले फायदों का असर कम होने से भी लोन की मांग प्रभावित हो सकती है।

  • केंद्र का बड़ा प्लान: रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन 5,000 टन तक पहुंचाने की तैयारी

    केंद्र का बड़ा प्लान: रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन 5,000 टन तक पहुंचाने की तैयारी



    नई दिल्ली।  भारत ने रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देश में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों से बनने वाले स्थायी चुंबकों की घरेलू उत्पादन क्षमता वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 5,000 टन करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम इलेक्ट्रिक व्हीकल, रक्षा और हाई-टेक सेक्टर के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

    क्या बोले Jitendra Singh?

    केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत दुर्लभ खनिजों और लिथियम की खोज में तेजी ला रहा है। सरकार का फोकस न सिर्फ इन खनिजों की खोज पर है, बल्कि इनके प्रोसेसिंग और उपयोग के लिए मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना भी है।

    मांग तेजी से बढ़ रही, चुनौती भी बड़ी

    सरकार के मुताबिक, इस समय देश में दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों की जरूरत करीब 4,000 टन है, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 8,000 टन तक पहुंच सकती है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

    नए प्रोजेक्ट्स से मिलेगी रफ्तार

    सरकार ने इस दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं:

    नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) चुंबकों की प्रायोगिक परियोजना शुरू
    विशाखापत्तनम में समैरियम-कोबाल्ट चुंबक प्लांट चालू
    शुरुआती उत्पादन क्षमता 500 टन/वर्ष, जिसे बढ़ाकर 2,000 टन और फिर 5,000 टन करने की योजना

    ये प्रोजेक्ट भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेंगे।

    किन सेक्टरों के लिए जरूरी हैं ये खनिज?

    दुर्लभ पृथ्वी तत्व और लिथियम कई उभरती तकनीकों की रीढ़ माने जाते हैं, जैसे:

    इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
    नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर, विंड)
    इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर
    रक्षा और एयरोस्पेस
    अंतरिक्ष तकनीक

    इनकी मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

    आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

    सरकार का लक्ष्य एक मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाना है, जिससे भारत इन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर कम निर्भर रहे। इसके लिए अलग-अलग मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं और खनन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जा रहा है।

    क्यों है यह रणनीतिक कदम?

    वैश्विक स्तर पर दुर्लभ पृथ्वी खनिजों पर कुछ ही देशों का दबदबा है। ऐसे में भारत का यह कदम न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी विकास और औद्योगिक क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

  • LIC को झटका: वित्त वर्ष 2022 के लिए इनकम टैक्स विभाग का डिमांड नोटिस

    LIC को झटका: वित्त वर्ष 2022 के लिए इनकम टैक्स विभाग का डिमांड नोटिस


    नई दिल्ली।  देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India (एलआईसी) को इनकम टैक्स विभाग से बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने जानकारी दी है कि उसे वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारी भरकम डिमांड नोटिस मिला है, जिसमें टैक्स और ब्याज मिलाकर कुल रकम 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है।

    कितना है टैक्स डिमांड?

    एलआईसी के मुताबिक Income Tax Department की असेसमेंट यूनिट ने:

    6,146.71 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में
    953.25 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में
    की मांग की है।

    यह डिमांड टैक्स अधिकारियों द्वारा मूल्यांकन के दौरान किए गए कुछ समायोजनों (adjustments) के कारण सामने आई है।

    किन वजहों से बना मामला?

    इनकम टैक्स विभाग ने एलआईसी की कुछ वित्तीय गणनाओं और दावों को स्वीकार नहीं किया। प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं:

    अंतरिम बोनस को आय (Income) के रूप में शामिल करना
    जीवन सुरक्षा कोष (Life Fund) से हुए नुकसान को आय में जोड़ना
    नेगेटिव रिजर्व को आय मानना
    धारा 80M के तहत दावा की गई कटौतियों को खारिज करना
    TDS जमा करने में देरी से जुड़े ब्याज खर्च को अस्वीकार करना
    इन सभी कारणों से कंपनी पर यह अतिरिक्त टैक्स बोझ डाला गया है।

    एलआईसी ने क्या कहा?

    एलआईसी ने साफ किया है कि वह इस आदेश से सहमत नहीं है और इसे चुनौती देगी। कंपनी जल्द ही आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दायर करेगी और कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपना पक्ष रखेगी। कंपनी का यह भी कहना है कि इस नोटिस का उसके रोजमर्रा के कारोबार या संचालन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

    निवेशकों के लिए राहत की खबर

    दिलचस्प बात यह रही कि इस बड़े डिमांड नोटिस के बावजूद बाजार में निवेशकों का भरोसा बरकरार दिखा। National Stock Exchange of India पर एलआईसी का शेयर 20.90 रुपये (2.75%) की बढ़त के साथ 779.60 रुपये पर बंद हुआ।

    नियमों के तहत किया खुलासा

    एलआईसी ने यह जानकारी Securities and Exchange Board of India के LODR (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट) नियमों के तहत शेयर बाजार को दी है। इन नियमों के मुताबिक, सूचीबद्ध कंपनियों को ऐसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है।

    आगे क्या होगा?

    अब यह मामला अपील प्रक्रिया में जाएगा, जहां एलआईसी और टैक्स विभाग दोनों अपने-अपने तर्क पेश करेंगे। अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है, लेकिन यह मामला बीमा सेक्टर और टैक्स कानूनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

  • इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव से महंगा हुआ तेल, नेपाल-बांग्लादेश ने बढ़ाईं कीमतें

    इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव से महंगा हुआ तेल, नेपाल-बांग्लादेश ने बढ़ाईं कीमतें


    नई दिल्ली। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते कई देशों ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, जबकि कुछ जगहों पर ईंधन की राशनिंग तक शुरू हो गई है।

    नेपाल में पेट्रोल-डीजल महंगा

    नेपाल में नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) ने पेट्रोल, डीजल और केरोसीन की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें आधी रात से लागू हो गई हैं।

    पेट्रोल: 184.50 से 187 रुपये/लीटर (कैटेगरी के अनुसार)
    डीजल/केरोसीन: 164.50 से 167 रुपये/लीटर

    एनओसी ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी के कारण घरेलू कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था।

    बांग्लादेश में जेट फ्यूल 80% महंगा

    बांग्लादेश में हालात और ज्यादा गंभीर हैं। Bangladesh Energy Regulatory Commission ने जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 80% की भारी बढ़ोतरी की है।

    घरेलू उड़ानों के लिए: 112.41 टका से बढ़कर 202.29 टका/लीटर
    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए: 0.738 डॉलर से बढ़कर 1.3216 डॉलर/लीटर

    इस बढ़ोतरी का सीधा असर हवाई यात्रा और कार्गो लागत पर पड़ेगा।

    पाकिस्तान और यूरोप भी प्रभावित

    पाकिस्तान में पहले से आर्थिक संकट के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20-25% तक उछाल दर्ज किया गया है। वहीं जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों में गैस और पेट्रोल के दाम 10-15% तक बढ़ गए हैं।

    थाईलैंड में शुरू हुई राशनिंग

    थाईलैंड में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि पेट्रोल पंपों पर राशनिंग लागू करनी पड़ी है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है, ताकि सप्लाई संतुलित बनी रहे।

    क्या है राशनिंग का मतलब?

    जब किसी देश में ईंधन की भारी कमी हो जाती है या कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो सरकार या पेट्रोल पंप यह तय कर देते हैं कि एक व्यक्ति एक बार में कितना तेल खरीद सकता है। इससे सीमित संसाधनों का संतुलित वितरण किया जाता है।

    आगे क्या असर पड़ेगा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो:

    तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं
    महंगाई में तेजी आएगी
    ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होंगे
    आम लोगों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा

    ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण तेल महंगा हो रहा है, जिससे नेपाल, बांग्लादेश समेत कई देशों में ईंधन कीमतें बढ़ीं और कुछ जगह राशनिंग तक शुरू हो गई।