Author: bharati

  • सलमान खान के लिए आदित्य चोपड़ा ने छोड़ी रिलीज डेट, ‘बैटल ऑफ गलवान’ के सामने नहीं लाई आलिया भट्ट की फिल्म

    सलमान खान के लिए आदित्य चोपड़ा ने छोड़ी रिलीज डेट, ‘बैटल ऑफ गलवान’ के सामने नहीं लाई आलिया भट्ट की फिल्म


    नई दिल्ली:बॉलीवुड में जब भी दो बड़ी फिल्मों की रिलीज एक ही तारीख पर तय होती हैतो बॉक्स ऑफिस पर टकराव तय माना जाता है। साल 2026 में भी ऐसा ही एक बड़ा क्लैश देखने को मिल सकता थालेकिन अब यह टल गया है। वजह हैं सलमान खान और उनके लिए दिखाई गई आदित्य चोपड़ा की दोस्ती और सम्मान।

    सलमान खान के 60वें जन्मदिन के खास मौके पर उनकी आने वाली फिल्मबैटल ऑफ गलवान का टीजर रिलीज कर दिया गया है। इस टीजर के साथ ही मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया है। यह फिल्म 17 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। पहले इसी तारीख पर आलिया भट्ट और शरवरी स्टारर स्पाई यूनिवर्स फिल्मअल्फा रिलीज होने वाली थी।अगर दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज होतींतो यह साल 2026 का सबसे बड़ा बॉक्स ऑफिस क्लैश बन सकता था। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक,अल्फा के निर्माता आदित्य चोपड़ा ने सलमान खान के साथ अपने पुराने रिश्ते और आपसी सम्मान के चलते यह तारीख छोड़ने का फैसला किया।

    सूत्रों के अनुसारआदित्य चोपड़ा पहले पूरी प्लानिंग के साथअल्फा को 17 अप्रैल 2026 को रिलीज करने वाले थे। लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि सलमान खान अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्मबैटल ऑफ गलवान इसी दिन लाने वाले हैंउन्होंने अपनी फिल्म की रिलीज डेट बदल दी। इंडस्ट्री में इसे एक बड़ा और सम्मानजनक कदम माना जा रहा है।अब सलमान खान 17 अप्रैल 2026 को पूरी तरह से सोलो रिलीज के साथ सिनेमाघरों में नजर आएंगे। उनके 60वें जन्मदिन पर रिलीज हुआबैटल ऑफ गलवान का टीजर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। टीजर में सलमान एक आर्मी ऑफिसर के रूप में नजर आते हैंजिनके चेहरे पर देशभक्ति का जोश और आंखों में गुस्सा साफ झलकता है।

    टीजर में दमदार डायलॉग्सऊंचे लेवल का बैकग्राउंड म्यूजिक और युद्ध जैसे माहौल की झलक दिखाई गई है। सलमान की भारी आवाज और गंभीर अंदाज दर्शकों को पहली ही झलक में बांध लेता है। यह फिल्म साल 2020 में भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हुए संघर्ष से प्रेरित बताई जा रही है।‘बैटल ऑफ गलवान में उस ऐतिहासिक टकराव को पर्दे पर दिखाया जाएगाजिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। सलमान खान इस फिल्म में एक भारतीय सेना अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। उनके लिए यह फिल्म बेहद खास मानी जा रही हैक्योंकि हाल के वर्षों में उनकी कुछ फिल्में दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई थीं।

    ऐसे मेंबैटल ऑफ गलवान को सलमान खान के करियर का अहम मोड़ माना जा रहा है। फिल्म से दर्शकों और ट्रेड दोनों को काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करेगीबल्कि सलमान की इमेज को भी मजबूती देगी।इसके अलावा खबरें यह भी हैं किबैटल ऑफ गलवान की शूटिंग पूरी होते ही सलमान खान नए प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करेंगे। फिलहाल वह कई स्क्रिप्ट्स सुन रहे हैं और जल्द ही अपने अगले प्रोजेक्ट्स का ऐलान कर सकते हैं।

  • किरदार को सच्चा दिखाने के लिए शबाना आज़मी ने अपनाया अनोखा तरीका, जुगल हंसराज ने किया खुलासा

    किरदार को सच्चा दिखाने के लिए शबाना आज़मी ने अपनाया अनोखा तरीका, जुगल हंसराज ने किया खुलासा


    नई दिल्ली:बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपने किरदार को पर्दे पर जीवंत दिखाने के लिए खुद को पूरी तरह उसमें ढाल लिया। कई बार तो अभिनेता अपने निजी व्यवहार रिश्तों और भावनाओं तक को नियंत्रित कर लेते हैं ताकि फिल्म में दिखाई जाने वाली सच्चाई जरा भी कमजोर न पड़े। ऐसी ही मिसाल 42 साल पहले दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी ने फिल्ममासूम के दौरान पेश की थी जिसका खुलासा अब फिल्म के चाइल्ड आर्टिस्ट रहे जुगल हंसराज ने किया है।

    साल 1983 में रिलीज हुईमासूम आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे संवेदनशील और भावनात्मक फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में शबाना आज़मी और नसीरुद्दीन शाह ने पति-पत्नी की भूमिका निभाई थी जबकि जुगल हंसराज ने उनके पति के नाजायज़ बेटे का किरदार निभाया था। यही रिश्ता कहानी की भावनात्मक धुरी भी था।हाल ही में जुगल हंसराज ने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान शबाना आज़मी उनसे जानबूझकर दूरी बनाकर रखती थीं। उस वक्त जुगल महज 9 साल के थे और उन्हें यह बात समझ में नहीं आती थी कि शबाना जी उनसे बात क्यों नहीं करतीं जबकि सेट पर मौजूद अन्य बच्चों से वह बेहद प्यार और अपनापन दिखाती थीं।

    जुगल ने बताया कि फिल्म में उर्मिला मातोंडकर और आराधना शबाना आज़मी की बेटियों के रोल में थीं। शबाना उनके साथ सेट पर खूब बातें करती थीं हंसती-मुस्कुराती थीं और मां जैसा स्नेह भी देती थीं। लेकिन जुगल के मामले में उनका व्यवहार बिल्कुल अलग था। वह उनसे औपचारिक दूरी बनाए रखती थीं और ज्यादा बातचीत से बचती थीं।जुगल के मुताबिक उस उम्र में उन्हें यह अजीब लगता था लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि यह सब शबाना आज़मी के अभिनय के प्रोसेस का हिस्सा था। दरअसल फिल्म में शबाना का किरदार जुगल के किरदार को सहजता से स्वीकार नहीं कर पाता। दोनों के बीच एक अनकहा तनाव अजनबीपन और असहजता होती है जिसे पर्दे पर दिखाना बेहद जरूरी था।

    शबाना आज़मी नहीं चाहती थीं कि असल जिंदगी में जुगल के साथ अपनापन बढ़े क्योंकि ऐसा होने से कैमरे के सामने वह भावनात्मक दूरी और असहजता स्वाभाविक रूप से नहीं आ पाती। यही वजह थी कि उन्होंने जानबूझकर एक बच्चे से भी भावनात्मक फासला बनाए रखा ताकि दर्शकों को कहानी असली लगे।जुगल हंसराज ने यह भी कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि शबाना आज़मी ने कितनी खूबसूरती और ईमानदारी से अपने किरदार के साथ न्याय किया। उस दौर में इस तरह की तैयारी और किरदार में डूब जाना बहुत कम देखने को मिलता था।गौरतलब है किमासूम का निर्देशन शेखर कपूर ने किया था और फिल्म में सईद जाफरी तनुजा और सुप्रिया पाठक जैसे दमदार कलाकार भी नजर आए थे। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से जबरदस्त सराहना मिली थी और बाद में इसे तेलुगु और तुर्की भाषाओं में भी रीमेक किया गया।आज भीमासूम को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है और शबाना आज़मी का यह समर्पण नए कलाकारों के लिए एक मिसाल माना जाता है।

  • चुटकी भर सेंधा नमक से मिलेगा राहत जानें इसके फायदे और सेवन का तरीका

    चुटकी भर सेंधा नमक से मिलेगा राहत जानें इसके फायदे और सेवन का तरीका


    नई दिल्ली । नमक का प्रयोग हर भारतीय रसोई में आम है और बिना नमक के भोजन अक्सर बेस्वाद सा लगता है। आयोडीन नमक का सेवन तो अधिकांश घरों में होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्राकृतिक रूप से मिलने वाला सेंधा नमक  शरीर के लिए कई फायदे प्रदान कर सकता है? यह नमक न केवल स्वाद बढ़ाने के लिए प्रयोग होता है बल्कि इसमें कई खनिज और लवण पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से मिलता है और इसमें आयोडीन नमक के मुकाबले कम नमकीनता होती है। यह हल्का गुलाबी रंग का होता है लेकिन कभी-कभी सफेद भी हो सकता है। सेंधा नमक में सोडियम क्लोराइड कैल्शियम पोटैशियम मैग्नीशियम ब्रोमाइन और फ्लोराइन जैसे खनिज होते हैं जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।

    सेंधा नमक के फायदेपाचन में सहायता

    अगर पाचन में कोई समस्या हो या पेट में खराबी हो तो सेंधा नमक का सेवन मददगार साबित हो सकता है। यह पाचन रस के निर्माण को बढ़ावा देता है जिससे भोजन बेहतर तरीके से पचता है और पेट में किसी तरह का गड़बड़ नहीं होती। यह विशेष रूप से तब उपयोगी है जब पाचन अग्नि कमजोर हो।

    सर्दी जुकाम और खांसी

    सेंधा नमक सर्दी जुकाम और खांसी में भी राहत देता है। यह शरीर के भीतर जमा कफ को तोड़ने में मदद करता है। इसके सेवन के लिए सेंधा नमक को हल्दी या अदरक के साथ लिया जा सकता है जो जुकाम और खांसी को कम करने में सहायक है।

    सूजन में आराम

    अगर शरीर के किसी हिस्से में सूजन हो तो सेंधा नमक उसके लिए भी लाभकारी हो सकता है। यह अंदरूनी सूजन को कम करने में मदद करता है और बाहरी सूजन के लिए सेंधा नमक के पानी से सेंकाई की जा सकती है।

    बीपी और रक्त संचार में सुधार

    बीपी के मरीजों के लिए सेंधा नमक सीमित मात्रा में फायदेमंद हो सकता है। यदि सही मात्रा में सेवन किया जाए तो यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है जिससे दिल की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ता है।

    दांतों का स्वास्थ्य

    अगर मसूड़ों में सूजन खून आना या दांतों से जुड़ी कोई परेशानी हो तो सेंधा नमक का उपयोग लाभकारी हो सकता है। आप इसे हल्दी और सरसों के तेल के साथ मिलाकर मसूड़ों पर मालिश कर सकते हैं जिससे सूजन कम होगी और खून आना भी बंद हो सकता है।

    सेंधा नमक का सेवन करने का तरीका

    सेंधा नमक का सेवन सामान्य नमक की तुलना में थोड़ी कम मात्रा में करना चाहिए। इसे अपनी रोजमर्रा की डाइट में जोड़ा जा सकता है जैसे सलाद में सब्जियों में या फिर उबले हुए पानी में। एक चुटकी सेंधा नमक को पानी में डालकर पिया जा सकता है जो शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करने में मदद करता है।

    कौन लोग सेंधा नमक का सेवन नहीं करें

    हालांकि सेंधा नमक कई लाभ प्रदान करता है लेकिन कुछ लोगों के लिए इसका सेवन सुरक्षित नहीं हो सकता। गर्भवती महिलाओं थायरायड के मरीजों और किडनी की समस्या से ग्रस्त मरीजों को सेंधा नमक से परहेज करना चाहिए। सेंधा नमक में सोडियम की मात्रा अधिक होती है जो थायरायड और किडनी के मरीजों के लिए ठीक नहीं है। गर्भवती महिलाओं के लिए आयोडीन की जरूरत होती है जो इस नमक में कम होता है। सेंधा नमक एक प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है जो कई प्रकार की परेशानियों से राहत दिला सकता है। हालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए और कुछ विशेष स्थितियों में इससे बचना चाहिए। हमेशा ध्यान रखें कि किसी भी चीज़ का अत्यधिक सेवन शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है।

  • 2025 में हादसों ने देश को दिया गहरा जख्म जून में आई काली आंधी सैकड़ों जानें गईं

    2025 में हादसों ने देश को दिया गहरा जख्म जून में आई काली आंधी सैकड़ों जानें गईं


    नई दिल्ली । साल 2025 में जहाँ भारत ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की वहीं जून महीने ने देश को गहरे जख्म भी दिए। एक के बाद एक दर्दनाक हादसों ने सैकड़ों परिवारों को बर्बाद किया और देशभर में शोक की लहर दौड़ा दी। इन घटनाओं में कहीं आस्था की भीड़ जानलेवा बन गई कहीं उत्सव मातम में बदल गया और कहीं तकनीकी खामियां और लापरवाही ने सैकड़ों घरों के चिराग बुझा दिए।

    प्रमुख हादसों में शामिल घटनाएं -प्रयागराज महाकुंभ जनवरी

    29 जनवरी को प्रयागराज के महाकुंभ में भारी भगदड़ के कारण 37 लोग मारे गए। संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी जब बैरिकेड टूटने से लोग एक-दूसरे के नीचे दब गए। इस घटना में 30 महिलाएं और 7 पुरुष अपनी जान गंवा बैठे।

    दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ फरवरी

    15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में 18 लोग मारे गए। प्लेटफॉर्म पर भारी भीड़ जमा हो गई थी और ट्रेन के देरी से आने की अफवाह के कारण अफरातफरी मच गई जिससे यह हादसा हुआ।

    गोवा नाइट क्लब अग्निकांड दिसंबर

    6 दिसंबर की रात गोवा के एक नाइट क्लब में लगी आग ने देश को झकझोर दिया। आग में 25 लोगों की मौत हो गई और 6 अन्य घायल हुए। यह हादसा गोवा के पर्यटन उद्योग के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।

    हवाई दुर्घटना एयर इंडिया बोइंग 787 जून

    12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से 260 लोग मारे गए। विमान दुर्घटना ने पूरे देश को हिला दिया और इस हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे।

    जश्न के दौरान भगदड़ बेंगलुरु जून

    4 जून को बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर आईपीएल के जश्न के दौरान भारी भीड़ जमा हो गई। इस भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। उत्साह और अव्यवस्था के बीच यह घटना कई परिवारों के लिए दर्द और दुख लेकर आई।

    सड़क हादसे तमिलनाडु कर्नाटक और उत्तर प्रदेश दिसंबर
    दिसंबर के अंतिम दिनों में हुए तीन बड़े सड़क हादसों में 9 लोग तमिलनाडु के कडलूर में 7 लोग कर्नाटक के चित्रदुर्ग में और 18 लोग उत्तर प्रदेश के मथुरा में मारे गए। इन हादसों में बसों और अन्य वाहनों के बीच टक्कर के कारण आग लग गई और कई लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे।

    तेलंगाना फैक्ट्री विस्फोट जून

    तेलंगाना के पाशमेलारम स्थित एक फार्मास्यूटिकल फैक्ट्री में 30 से अधिक लोगों की मौत हुई। 30 जून को हुए इस विस्फोट ने वहां काम कर रहे कर्मचारियों की जिंदगी छीन ली और फैक्ट्री के आसपास के इलाकों में भारी नुकसान हुआ।

    देशभर में शोक की लहर

    इन घटनाओं ने देश को गहरे जख्म दिए हैं। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया और इन हादसों ने राष्ट्रीय सुरक्षा यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा की गंभीर समस्याओं को उजागर किया। कई स्थानों पर हादसों के कारण सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है विशेषकर सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में।

    निरंतर बढ़ते हादसों पर सरकार का ध्यान

    इन हादसों के बाद सरकार और संबंधित एजेंसियों ने सुधारात्मक कदम उठाने का वादा किया है। सुरक्षा प्रोटोकॉल्स को और सख्त करने जन जागरूकता फैलाने और तकनीकी सुधारों पर ध्यान देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। 2025 ने कई क्षेत्रों में भारत की प्रगति को उजागर किया लेकिन इन हादसों ने एक कड़ी चेतावनी दी है कि लोगों की सुरक्षा और जीवन का मूल्य कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।

  • ग्वालियर में बिना नंबर की कार चालक ने ट्रैफिक थाना प्रभारी को कुचलने का प्रयास किया कलाई और पंजे में कांच घुसा

    ग्वालियर में बिना नंबर की कार चालक ने ट्रैफिक थाना प्रभारी को कुचलने का प्रयास किया कलाई और पंजे में कांच घुसा


    ग्वालियर । ग्वालियर में एक हैरान करने वाली घटना में बिना नंबर की तेज रफ्तार कार ने ट्रैफिक थाना प्रभारी को कुचलने का प्रयास किया। यह घटना थीम रोड पर तब हुई जब थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ चेकिंग कर रहे थे। जैसे ही उन्होंने चेकिंग प्वाइंट पर गाड़ियों को रोका बिना नंबर वाली कार के चालक ने अचानक रफ्तार बढ़ा दी और करीब 80 किमी प्रति घंटे की गति से कार दौड़ा दी।
    गाड़ियों की भीड़ के बावजूद चालक ने कार को इतनी तेज रफ्तार से चलाया कि थाना प्रभारी को टक्कर मारते हुए वह गिर पड़े। इस टक्कर से थाना प्रभारी की कलाई और पंजे में कांच के टुकड़े घुस गए जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद चालक कार छोड़कर फरार हो गया।

    सीसीटीवी से पहचान

    पुलिस ने घटना के बाद सीसीटीवी कैमरों को खंगाला और चालक का चेहरा पहचान लिया। अब पुलिस चालक की तलाश कर रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार करने की उम्मीद है।यह घटना ग्वालियर में ट्रैफिक नियमों और पुलिस की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं से न केवल पुलिसकर्मियों की जान को खतरा है बल्कि इससे सड़क सुरक्षा की स्थिति भी बिगड़ सकती है।

  • श्योपुर में अवैध कॉलोनियों पर कड़ा प्रहार बुलडोजर कलेक्टर ने माफिया के खिलाफ शुरू की सख्त कार्रवाई

    श्योपुर में अवैध कॉलोनियों पर कड़ा प्रहार बुलडोजर कलेक्टर ने माफिया के खिलाफ शुरू की सख्त कार्रवाई


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस नीति अब सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर भी दिखाई दे रही है। श्योपुर जिले में कलेक्टर अर्पित वर्मा के नेतृत्व में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ एक जबरदस्त अभियान चलाया गया है जिससे कॉलोनी माफिया की कमर टूट गई है। प्रशासन ने श्योपुर जैदा और जाटखेड़ा क्षेत्रों में पांच अवैध कॉलोनियों पर एक साथ बुलडोजर कार्रवाई की और यह स्पष्ट कर दिया कि अब अवैध कॉलोनी विकास और सरकारी भूमि के गलत इस्तेमाल को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।शनिवार को प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों में बनी सड़कें सीसी रोड और आंतरिक मार्ग ध्वस्त किए और जमीन की बुनियाद पर सीधा वार किया। इस कार्रवाई के दौरान एसडीएम श्योपुर गगन सिंह मीणा तहसीलदार मनीषा मिश्रा और पूरा राजस्व अमला मौके पर मौजूद था।

    शांतिपूर्ण लेकिन सख्त कार्रवाई
    काफी पुलिस बल की मौजूदगी में यह कार्रवाई शांतिपूर्ण लेकिन सख्त रही। तहसीलदार मनीषा मिश्रा ने बताया कि जैदा के सर्वे क्रमांक 75/8 पर अवैध कॉलोनी में बने मार्ग तोड़े गए जबकि जाटखेड़ा में अवैध सीसी सड़कें और रास्ते ध्वस्त किए गए। इसके अलावा श्योपुर कस्बे में पंजाब नेशनल बैंक के पीछे और अस्पताल के पास बने अवैध कॉलोनी के निर्माणों को भी तोड़ा गया।

    कलेक्टर ने 23 कॉलोनियों को रडार पर लिया

    कलेक्टर अर्पित वर्मा ने जिले की 23 कॉलोनियों को संदेह के घेरे में लिया है। उन्होंने एसडीएम श्योपुर को इन कॉलोनियों की जांच के निर्देश दिए हैं जो जमीन पर जाकर हर पहलू की पड़ताल करेंगे। यह जांच कागजी नहीं होगी और इसमें भूमि के मूल स्वरूप कॉलोनी विकास अनुमति ड्रेनेज मार्गों पर अतिक्रमण वृक्षों की अवैध कटाई और प्लॉट विक्रय जैसे सभी बिंदुओं की गहन जांच होगी।

    दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

    कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि यदि किसी कॉलोनी में अवैध गतिविधियाँ पाई जाती हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए एक जिला कॉलोनी सेल का गठन किया गया है जो अवैध कॉलोनियों की जांच करेगी और आम जनता को यह जानकारी देगी कि कौन सी कॉलोनी वैध है और कौन सी अवैध।

    रजिस्ट्री-नामांतरण पर प्रतिबंध
    कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए हैं कि बिना कॉलोनी विकास अनुमति या नियमितीकरण प्रमाणपत्र के किसी भी भूखंड की रजिस्ट्री और नामांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध होगा। संबंधित सर्वे नंबरों पर अवैध कॉलोनियों की प्रविष्टि की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार का क्रय-विक्रय संभव न हो सके। इस निर्णय से कॉलोनी माफिया को बड़ा झटका लगा है क्योंकि यह उनके व्यापार को सीधा नुकसान पहुंचाएगा।

  • उज्जैन में चाइना डोर से बाइक सवार की नाक कटी एक महीने में चार लोग हुए घायल

    उज्जैन में चाइना डोर से बाइक सवार की नाक कटी एक महीने में चार लोग हुए घायल


    उज्जैन । उज्जैन में प्रतिबंध के बावजूद चाइना डोर से होने वाली दुर्घटनाओं का सिलसिला लगातार जारी है। शनिवार को एक और बाइक सवार की नाक चाइना डोर से कट गई जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। तुलसीराम राठौर उम्र 52 वर्ष निवासी गायत्री नगर बाइक से इंदिरा नगर से गुजर रहे थे जब अचानक उनके चेहरे पर चाइना डोर आ गई। राठौर जैसे ही डोर को हटाने की कोशिश करते उसकी नाक कट गई जिससे काफी खून बहने लगा। गनीमत रही कि उनकी आंखें बच गईं हालांकि हाथ में भी गंभीर चोटें आईं।स्थानीय लोगों ने तत्काल राठौर को उपचार के लिए चरक अस्पताल भेजा जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

    एक महीने में चार लोग घायल

    चाइना डोर के कारण हुए हादसों की यह कोई पहली घटना नहीं है। एक महीने के भीतर चार लोग इस खतरनाक डोर की चपेट में आ चुके हैं। 20 दिसंबर को एग्रीकल्चर थर्ड सेमेस्टर के छात्र योगेश आंजना उम्र 20 वर्ष अपने गांव पिपलियाधूमा झारड़ा से उज्जैन परीक्षा देने आया था। परीक्षा के बाद वह बाइक से घर लौट रहा था जब उसे भी चाइना डोर से गंभीर चोटें आईं। इसके अलावा पहले भी इस प्रकार की घटनाएं उज्जैन में हो चुकी हैं जिनमें लोग चाइना डोर से घायल हो चुके हैं।

    गंभीर चिंता का विषय

    चाइना डोर की इन घटनाओं ने शहरवासियों को गंभीर चिंता में डाल दिया है। हालाँकि प्रशासन ने इसके उपयोग पर रोक लगाने के लिए कई प्रयास किए हैं लेकिन इस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। यह जानलेवा डोर न केवल सड़कों पर चलने वाले लोगों के लिए खतरा बन गई है बल्कि इसका इस्तेमाल करने वाले लोग भी इसके खतरों से अनजान रहते हैं।
    शहरवासियों और प्रशासन से अपील की जा रही है कि चाइना डोर के खतरों को लेकर जागरूकता फैलाई जाए और इस पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि और किसी की जान को खतरा न हो।

  • आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा: नौ अस्पताल सस्पेंड, 28 पर कार्रवाई की तैयारी

    आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा: नौ अस्पताल सस्पेंड, 28 पर कार्रवाई की तैयारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस नीति अब सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर भी दिखाई दे रही है। श्योपुर जिले में कलेक्टर अर्पित वर्मा के नेतृत्व में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ एक जबरदस्त अभियान चलाया गया है जिससे कॉलोनी माफिया की कमर टूट गई है। प्रशासन ने श्योपुर जैदा और जाटखेड़ा क्षेत्रों में पांच अवैध कॉलोनियों पर एक साथ बुलडोजर कार्रवाई की और यह स्पष्ट कर दिया कि अब अवैध कॉलोनी विकास और सरकारी भूमि के गलत इस्तेमाल को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।शनिवार को प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों में बनी सड़कें सीसी रोड और आंतरिक मार्ग ध्वस्त किए और जमीन की बुनियाद पर सीधा वार किया। इस कार्रवाई के दौरान एसडीएम श्योपुर गगन सिंह मीणा तहसीलदार मनीषा मिश्रा और पूरा राजस्व अमला मौके पर मौजूद था।

    शांतिपूर्ण लेकिन सख्त कार्रवाई

    काफी पुलिस बल की मौजूदगी में यह कार्रवाई शांतिपूर्ण लेकिन सख्त रही। तहसीलदार मनीषा मिश्रा ने बताया कि जैदा के सर्वे क्रमांक 75/8 पर अवैध कॉलोनी में बने मार्ग तोड़े गए जबकि जाटखेड़ा में अवैध सीसी सड़कें और रास्ते ध्वस्त किए गए। इसके अलावा श्योपुर कस्बे में पंजाब नेशनल बैंक के पीछे और अस्पताल के पास बने अवैध कॉलोनी के निर्माणों को भी तोड़ा गया।

    कलेक्टर ने 23 कॉलोनियों को रडार पर लिया

    कलेक्टर अर्पित वर्मा ने जिले की 23 कॉलोनियों को संदेह के घेरे में लिया है। उन्होंने एसडीएम श्योपुर को इन कॉलोनियों की जांच के निर्देश दिए हैं जो जमीन पर जाकर हर पहलू की पड़ताल करेंगे। यह जांच कागजी नहीं होगी और इसमें भूमि के मूल स्वरूप कॉलोनी विकास अनुमति ड्रेनेज मार्गों पर अतिक्रमण वृक्षों की अवैध कटाई और प्लॉट विक्रय जैसे सभी बिंदुओं की गहन जांच होगी।

    दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

    कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि यदि किसी कॉलोनी में अवैध गतिविधियाँ पाई जाती हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए एक जिला कॉलोनी सेल का गठन किया गया है जो अवैध कॉलोनियों की जांच करेगी और आम जनता को यह जानकारी देगी कि कौन सी कॉलोनी वैध है और कौन सी अवैध।

    रजिस्ट्री-नामांतरण पर प्रतिबंध

    कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए हैं कि बिना कॉलोनी विकास अनुमति या नियमितीकरण प्रमाणपत्र के किसी भी भूखंड की रजिस्ट्री और नामांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध होगा। संबंधित सर्वे नंबरों पर अवैध कॉलोनियों की प्रविष्टि की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार का क्रय-विक्रय संभव न हो सके। इस निर्णय से कॉलोनी माफिया को बड़ा झटका लगा है क्योंकि यह उनके व्यापार को सीधा नुकसान पहुंचाएगा।

  • सर्दी में आंखों की देखभाल के लिए आयुष मंत्रालय के 4 प्रभावी आयुर्वेदिक उपाय

    सर्दी में आंखों की देखभाल के लिए आयुष मंत्रालय के 4 प्रभावी आयुर्वेदिक उपाय


    नई दिल्ली। सर्दी का मौसम आते ही जहां पूरे शरीर की देखभाल जरूरी हो जाती है वहीं आंखों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सर्द हवाएं और बढ़ता प्रदूषण आंखों के लिए खतरे का कारण बन सकते हैं। इस मौसम में आंखों में जलन पानी आना और पलकें चिपचिपी हो जाना सामान्य समस्या बन जाती है। इन समस्याओं से बचने के लिए आयुष मंत्रालय ने चार असरदार आयुर्वेदिक उपाय बताए हैं जिनसे आंखों को तुरंत राहत मिल सकती है और उनकी देखभाल बेहतर तरीके से की जा सकती है।

    आयुष मंत्रालय ने एक पोस्ट के माध्यम से इन चार आसान उपायों को साझा किया है जिनमें से पहला उपाय है आई पामिंग। इस विधि में दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में रगड़कर गर्म किया जाता है और फिर इन्हें आंखों पर रखा जाता है। इससे आंखों की थकान कम होती है और आंखें रिलैक्स महसूस करती हैं। लगातार स्क्रीन पर काम करने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और आई पामिंग इस दबाव को कम करने में मदद करता है।

    दूसरा उपाय है त्राटक। यह एक अभ्यास है जिसमें मोमबत्ती की लौ को बिना पलक झपकाए कुछ देर तक देखा जाता है। यह अभ्यास आंखों की रोशनी को बेहतर करने आंखों की सफाई और आंखों की नमी को बनाए रखने में मदद करता है। त्राटक से आंखों की आंतरिक स्पष्टता बढ़ती है और यह आँखों की थकान को कम करता है।

    तीसरा उपाय है गीले कॉटन पैड का इस्तेमाल। गीले कॉटन पैड से आंखों के तनाव को कम किया जा सकता है और सिर दर्द से भी राहत मिलती है। इसके लिए रूई को ठंडे पानी या गुलाब जल में भिगोकर आंखों पर कुछ देर के लिए रखा जाता है। यह उपाय आंखों के नीचे सूजन को कम करने और आंखों को ताजगी देने के लिए बहुत प्रभावी है। कुछ लोग इसकी जगह खीरे के टुकड़े भी इस्तेमाल करते हैं।

    चौथा उपाय है भाप लेना। सर्दियों में कई बार आंखों में गंदगी जमा हो जाती है जिससे पलके चिपकने लगती हैं। हल्की भाप से आंखों को शुद्ध किया जा सकता है जिससे पलके चिपकने से बचती हैं। हालांकि ध्यान रखें कि अधिक भाप लेने से आंखों की ड्राइनेस बढ़ सकती है इसलिए इसे संतुलित मात्रा में लें।

    इन उपायों को अपनाकर सर्दियों में आंखों की देखभाल की जा सकती है और आंखों को होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। आयुष मंत्रालय का कहना है कि इन सरल आयुर्वेदिक उपायों से न केवल आंखों को आराम मिलता है बल्कि आंखों की सेहत भी बेहतर बनी रहती है।

  • सर्दियों में त्वचा को बनाएं मुलायम और दमकती: अपनाएं ये जरूरी स्किन केयर टिप्स

    सर्दियों में त्वचा को बनाएं मुलायम और दमकती: अपनाएं ये जरूरी स्किन केयर टिप्स

    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आते ही त्वचा की नमी कम होने लगती है। ठंडी हवा और हीटिंग सिस्टम की वजह से चेहरे और हाथों की त्वचा रूखी और खुरदरी हो जाती है। कई लोग महंगी क्रीम और लोशन लगाने के बाद भी खास असर नहीं देखते। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि स्किन केयर केवल प्रोडक्ट्स पर निर्भर नहीं है, बल्कि सही आदतें अपनाना भी बेहद जरूरी है।

    लखनऊ की ब्यूटी एक्सपर्ट अमरीश कौर के अनुसार, सबसे पहला कदम है बार-बार मॉइस्चराइज करना। इसके लिए हैंड क्रीम और फेस मॉइस्चराइजर चुनते समय ऐसे प्रोडक्ट्स का चयन करें जिसमें शीया बटर, एलोवेरा या हयालूरोनिक एसिड हो। हर बार हाथ धोने और चेहरे को साफ करने के बाद मॉइस्चराइज करना बेहद जरूरी है।

    रात में स्किन की देखभाल और भी ज्यादा असरदार होती है। सोने से पहले चेहरे और हाथों पर पेट्रोलियम जेली या विटामिन ई ऑयल लगाकर कॉटन ग्लव्स और मोज़े पहनें। इससे स्किन पूरी रात पोषित और मुलायम रहती है। हफ्ते में एक बार हल्का एक्सफोलिएशन करना भी जरूरी है। चीनी और ऑलिव ऑयल मिलाकर चेहरे और हाथों की मृत त्वचा को हटाएं और फिर मॉइस्चराइज करें।

    नाखून और सनस्क्रीन का महत्व
    सर्दियों में सिर्फ चेहरे और हाथ ही नहीं, बल्कि नाखूनों और क्यूटिकल की देखभाल भी जरूरी है। रात में क्यूटिकल ऑयल लगाकर हल्की मसाज करने से नाखून मजबूत रहते हैं। दिन में बाहर निकलते समय SPF वाली हैंड क्रीम और फेस सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना त्वचा को UV किरणों से बचाता है और झुर्रियों को रोकता है।

    हवा और धूप दोनों ही त्वचा से नमी चुराते हैं, इसलिए ग्लव्स पहनना जरूरी है। घर में बर्तन धोते समय, सफाई करते समय या बगीचे में काम करते समय भी दस्ताने पहनें। माइल्ड साबुन का उपयोग करें और बहुत गर्म पानी की जगह गुनगुना पानी ही इस्तेमाल करें।

    नेचुरल उपाय और पोषण
    त्वचा की सुंदरता सिर्फ बाहरी देखभाल से नहीं आती। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और सही नींद लेना भी जरूरी है। गाजर, पालक, टमाटर और मेवे जैसी चीजें विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं और त्वचा को अंदर से पोषण देती हैं। इसके अलावा, घर पर तैयार नेचुरल फेस पैक और मास्क जैसे हल्दी और दूध, दही और शहद, एवोकैडो और शहद आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये न केवल त्वचा को मॉइस्चराइज करते हैं बल्कि उसे प्राकृतिक चमक भी देते हैं।

    सर्दियों में त्वचा की देखभाल के लिए सही रूटीन अपनाना बेहद जरूरी है। बार-बार मॉइस्चराइज करना, रात की ओवरनाइट केयर, एक्सफोलिएशन, सनस्क्रीन का इस्तेमाल और ग्लव्स पहनना आपकी त्वचा को रूखेपन से बचाएगा। नेचुरल प्रोडक्ट्स और संतुलित जीवनशैली से त्वचा हमेशा मुलायम, नर्म और चमकदार बनी रहेगी। नियमित आदतों और सही प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से सर्दियों में भी त्वचा की खूबसूरती बरकरार रखी जा सकती है।