Author: bharati

  • ईरान युद्ध के बीच एक और समुद्री रास्ता हो सकता है बंद…. हूतियों की एंट्री ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

    ईरान युद्ध के बीच एक और समुद्री रास्ता हो सकता है बंद…. हूतियों की एंट्री ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन


    तेहरान। ई
    रान और अमेरिका-इजरायल (Iran and America-Israel) के बीच जारी युद्ध में अब तक हूती विद्रोही (Houthi Rebels) शामिल नहीं हुए थे लेकिन शनिवार को पहली बार हूतियों ने भी मिसाइल दागकर साफ कर दिया है कि वे भी युद्ध में कूद पड़े हैं। हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) ने बयान देकर कहा कि उन्होंने इजरायल के संवेदनशील सैन्य इलाकों में हमला किया है। वहीं इजरायल ने कहा कि यमन की ओर से आई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया। बता दें कि चार सप्ताह से चल रहे युद्ध की वजह से दुनियाभर में तेल का संकट खड़ा हो गया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आवागमन को सीमित कर दिया है।


    बाब-अल-मंडेब पर भी खतरा

    इजरायल ईरान के अलावा दक्षिण लेबनान में भी लगातार बमबारी कर रहा है। यहां वह ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों को तबाह करने में लगा है। हूतियों के युद्ध में कूदने से ना केवल इसके गंभीर होने का खतरा बना है बल्कि एक और जलडमरूमध्य का रास्ता बंद होने का भी खतरा मंडरा रहा है। यह है बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य। यह लाल सागर के मुहाने पर स्थित है और यहां से होकर बड़ी संख्या में जहाज गुजरते हैं।


    कौन हैं हूती विद्रोही

    यमन के शिया मुस्लिम जैदियों का का सशस्त्र राजनीतिक समूह हूती के नाम से जाना जाता है। हूती विद्रोहियों को हिजबुल्लाह और हमास की तरह ही ईरान का समर्थन प्राप्त है। 1990 में बदरद्दीन अल हूती ने इसकी स्थापना की थी। इसने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। इसका स्लोगन ही था, ‘अल्लाह महान है, अमेरिका मुर्दाबाद, इजरायल मुर्दाबाद।’ हूती खुद को अंसार यानी अल्लाह का साथी कहते हैं।

    हूती 2004 से 2010 तक सालेह की सेना से छह युद्ध लड़े। 2011 में अरब की क्रांति की वजह से सालेह को सत्ता छोड़नी पड़ गई और अब्दरब्बू मंसूर हादी क राष्ट्रपति बनाया गया। यह सरकार भी ज्यादा दिन नहीं टिकी और 2014 में हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लया। इसके बाद शियाओं का समूह मजबूत होने लगा। यह सऊदी अरब और यूएई के लिए सीधा खतरा बन गया। आज भी हूती विद्रोहियों का यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा है।इसमें राजधानी सना और लाल सागर का तटी इलाका शामिल है।


    बाब अल मंडेब पर क्यों है खतरा

    लाल सागर के उस इलाके पर हूतियों का ही कब्जा है जहां बाब अल मंडेब स्ट्रेट है। हूतियों के पास हथियारों की भी कमी नहीं है। उनके पास क्रूज मिसाइल, एंटी शिप मिसाइल, समुद्री ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हैं। बीते दो सालों में हूतियों ने 100 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों पर हमला किया है और इनमें से कई को समंदर में ही डुबो दिया है। लाल सागर के दूसरी ओर स्वेज नहर है जो कि भूमध्य सागर को जोड़ती है। इन दोनों रास्तों से ही यूरोप और उत्तरी अमेरिका को प्राकृतिक गैस और खाड़ी के तेल की सप्लाई होती है। 2013 में स्वेज नहर के रास्ते दुनिया के कुल व्यापारा का 12 से 15 फीसदी व्यापार हुआ था।


    ईरान के साथ कितना मजबूत रिश्ता

    सऊदी अरब और यूएई का कहना है कि ईरान हूती विद्रिहियों को हथियार मुहैया करवाता है। सऊदी अरब और ईरान में जो संघर्ष है उसके बीच यमन एक अलग ही मोर्चा बना हुआ है।


    हूती क्यों हैं ज्यादा खतरनाक

    हूती ब्रिगेडियर याह्या सरी ने कहा कि शनिवार को उन्होंने इजरायल के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल अटैक किया है। इसका सीधा मतलब है कि युद्ध का स्तर अब और गंभीर हो गया है। शिया ताकतें अमेरिका और इजरायल के खिलाफ इकट्ठी हो रही हैं। ऐसे में युद्ध लंबा खिंचने और बढ़ने का खतरा बना हुआ है। गाजा में हमास आज भी ऐक्टिव है और लेबनान से हिजबुल्लाह इजरायल पर हमले कर रहा है। इजरायल तीन मोर्चों से घिरा हुआ है।

    ईरान ने आगे सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उसने दुबई में उन दो विशिष्ट स्थानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है जहां अमेरिकी सैनिक तैनात थे। बयान के अनुसार, एक स्थान पर 400 से अधिक और दूसरे पर 100 से ज्यादा अमेरिकी कर्मी मौजूद थे। ईरानी प्रवक्ता ने डोनल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यह क्षेत्र ‘अमेरिकी सैनिकों के लिए कब्रगाह’ साबित होगा।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सेना के पास ईरान पर हमला करने और अपना सैन्य अभियान पूरा करने के लिए अभी 3,554 लक्ष्य बाकी हैं। मियामी में एक निवेश सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में सहायता न देने के लिए सहयोगियों को ‘कागजी शेर’ करार दिया और कहा कि अमेरिका नाटो की सुरक्षा पर सालाना सैकड़ों अरब डॉलर खर्च कर रहा है, लेकिन जरूरत के समय वे गायब हैं।

    तनाव को देखते हुए अमेरिका ने अपनी नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन तेज कर दिया है। विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश को अब केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के कार्यक्षेत्र में तैनात किया जा रहा है। वर्तमान में इस क्षेत्र में पहले से ही यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में दो स्ट्राइक समूह सक्रिय हैं। इसके अलावा गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक यूएसएस रॉस, यूएसएस डोनाल्ड कुक और यूएसएस मेसन को भी युद्धक संचालन में सहयोग के लिए रवाना कर दिया गया है।

    इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ कर दिया है कि यदि ईरान के आर्थिक केंद्रों या बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, तो इसका जवाब बेहद कड़ा होगा। उन्होंने क्षेत्रीय देशों से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी धरती का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए न होने दें।

  • विराट कोहली का ऐतिहासिक कमाल: IPL में यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले बल्लेबाज बने

    विराट कोहली का ऐतिहासिक कमाल: IPL में यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले बल्लेबाज बने


    नई दिल्ली शनिवार को एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरु में खेले गए IPL 2026 से पहले कोलकाता में रॉयल चैलेंजर्स कॉलेज (RCB) ने सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) से 6 विकेट से धमाकेदार शुरुआत की। RCB की जीत में सबसे बड़ा योगदान विराट कोहली ने निभाया। कोहली ने 69 बल्लेबाजों की रेटिंग हासिल की और IPL में बल्लेबाजों का पीछा करते हुए 4000 रन पूरे किए। पहले वेस्टइंडीज ने नया इतिहास रचा।

    RCB का रोमांचक पीछा

    सनराइजर्स हैदराबाद ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 9 विकेट खोकर 201 रन बनाए। कप्तान ईशान किशन ने 38 गेंदों में 80 रन बनाकर बेहतरीन पारी खेली, जबकि अनिकेत वर्मा ने 18 गेंदों में 43 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। लक्ष्य का पीछा करने में RCB की शुरुआत अच्छी नहीं रही। राइडर्स बल्लेबाज़ फ़िल्ट केवल 8 रन बनाकर आउट हो गए।

    लेकिन इसके बाद विराट कोहली और देवदत्त पडिक्कल ने दूसरे विकेट के लिए प्लेकर टीम में जगह बनाई। कोहली ने 38 गेंद में 5 गेंद और 5 छक्कों की मदद से 69 गेंद में 69 रन बनाए, जबकि पडिक्कल ने 26 गेंद में 61 रन बनाकर शानदार लय दिखाई।

    रिकॉर्ड तोड़ते हुए मैच का अंत

    कोहली-पडिक्कल के दिग्गज बल्लेबाजों में से एक आरसीबी ने 202 बल्लेबाजों का लक्ष्य केवल 15.4 ओवर में हासिल किया, जिससे आईपीएल में सबसे कम ओवर में 200+ बल्लेबाजों का पीछा करने का नया रिकॉर्ड आरसीबी के नाम दर्ज हो गया। इससे पहले यह रिकॉर्ड राजस्थान रॉयल्स के पास था, किंग आईपीएल 2025 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ 210 पूर्वी का चेस 15.5 ओवर में पूरा हुआ था।

    आरसीबी का चयन भी शानदार

    आरसीबी की जीत में जैकब डफी का प्रदर्शन भी अहम रहा। अपने आईपीएल डेब्यू मैच में डफी ने केवल 22 रन देकर 3 विकेट चटकाए और सनराइजर्स की बैटिंग लाइनअप पर चर्चा की। उनकी बोली ने टीम को शुरुआती झटके के बाद संतुलन बनाए रखने में मदद की।

    विराट कोहली की 69 रनों की पारी ने ना सिर्फ आरसीबी को विजयी बनाया, बल्कि उन्हें आईपीएल इतिहास में एक नई जगह भी बना दिया। पडिक्कल के साथ मिलकर शतकीय साझेदारी और डफी की टीम ने मैच को रोमांचक और रिकॉर्ड-ब्रेकिंग बना दिया।

  • ईरान युद्ध में बैकफुट पर ट्रंप….. जेडी वेंस बोले- लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं अमेरिका

    ईरान युद्ध में बैकफुट पर ट्रंप….. जेडी वेंस बोले- लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं अमेरिका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और ईरान (America-Iran War) के बीच जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (US Vice President J.D. Vance) ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान में लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं है और जल्द ही अपने अभियान को समाप्त कर वहां से निकलना चाहता है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान में अपना काम पूरा करना है, न कि एक या दो साल तक वहां मौजूद रहना।

    उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम एक साल या दो साल आगे की योजना नहीं बना रहे हैं। हम अपना काम कर रहे हैं और जल्द ही वहां से बाहर आ जाएंगे।” उनके इस बयान को अमेरिकी रणनीति में सीमित और त्वरित सैन्य हस्तक्षेप के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    वेंस ने यह भी बताया कि अमेरिकी प्रशासन कुछ समय तक अपना अभियान जारी रखेगा, ताकि भविष्य में फिर से ऐसी कार्रवाई की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने इसे एक ऐसी रणनीति बताया, जिसका उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाले युद्ध से बचना है। इस बीच, उन्होंने यह भी दावा किया कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे ईंधन की कीमतों में भी गिरावट आएगी। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ा है।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमलों को 10 दिनों के लिए टालने का फैसला किया है। यह समयसीमा अब 6 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। ट्रंप ने कहा कि यह फैसला ईरान के अनुरोध पर लिया गया है और दोनों देशों के बीच बातचीत काफी अच्छी चल रही है।

    दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पड़ोसी देशों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि वे अपने क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ युद्ध संचालन के लिए न होने दें। इसे उन देशों के लिए संदेश माना जा रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। पेजेशकियान ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी तरह के पूर्व-आक्रमण में विश्वास नहीं करता, लेकिन अगर उसके बुनियादी ढांचे या आर्थिक केंद्रों पर हमला हुआ तो कड़ा जवाब देगा।

    गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। यह टकराव 28 फरवरी को अमेरिकी हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिसमें ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई थी।

  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर… PM मोदी ने बताई वजह

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर… PM मोदी ने बताई वजह


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट (Middle East) में करीब एक महीने से भीषण संघर्ष जारी है। अमेरिका और इजरायल (America and Israel.) जैसे देश तेहरान पर रोज मिसाइल हमले कर रहे हैं। ईरान भी इसका माकूल जवाब दे रहा है। इस सैन्य संघर्ष का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर दिखा है, जहां से कच्चे तेल के जहाज गुजरते हैं। भारत भी इसी रूट से खाड़ी देशों से तेल आयात करता है। पहले की तुलना में जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) शनिवार को जब उत्तर प्रदेश के जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन कर रहे थे तब उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई उथल-पुथल पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने बताया कि आखिर भारत में ईंधन की कीमतें कैसे स्थिर है।


    एथेनॉल मिश्रण से मिली राहत

    उन्होंने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल मिश्रण को एक अहम रणनीति बताया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति लागू नहीं होती तो भारत को हर साल अतिरिक्त 4.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल आयात करना पड़ता, जो करीब 700 करोड़ लीटर के बराबर है। उन्होंने किसानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से इस वैश्विक संकट के समय देश को बड़ी राहत मिली है।


    किसानों की भी बढ़ी आमदनी

    पीएम मोदी ने बताया कि एथेनॉल उत्पादन ने न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि की है। इस पहल के चलते भारत को लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। जेवर क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक इलाकों के करीब है, जहां से एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होता है।

    प्रधानमंत्री ने हाल ही में संसद में दिए अपने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बताया था कि पिछले एक दशक में एथेनॉल ब्लेंडिंग 1-1.5 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। भारत ने 2025 में ही 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया, जो निर्धारित समय से पहले की उपलब्धि है।


    विद्युतीकरण से भी लाभ

    उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे के विद्युतीकरण से हर साल लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हो रही है, जबकि मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भी ईंधन की खपत कम हुई है। वर्तमान में भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2,000 करोड़ लीटर है, जिसमें से 1,000 करोड़ लीटर से अधिक पेट्रोल में मिलाया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान से जुड़े संघर्ष और इजरायल-अमेरिका के साथ जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसके बावजूद भारत सरकार ने ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की है ताकि आम जनता पर कीमतों का अतिरिक्त बोझ न पड़े। उन्होंने कहा, “हम भी युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से ईंधन आयात करते हैं। हर देश इस चुनौती से निपटने के लिए कदम उठा रहा है और हम भी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।” आपको बता दें कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में इसका सीधा असर देखने को नहीं मिला है।

    प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय एकता की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यह एक वैश्विक संकट है और इससे निपटने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया कि ऐसे संवेदनशील समय में गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी से बचें।

  • मिडिल ईस्ट संकटः कड़े पहरे के बीच होर्मुज पार कर भारत पहुंचा LPG से भरा पोत.. क्या ईरान वसूल रहा टोल!

    मिडिल ईस्ट संकटः कड़े पहरे के बीच होर्मुज पार कर भारत पहुंचा LPG से भरा पोत.. क्या ईरान वसूल रहा टोल!


    तेहरान।
    ईरान युद्ध (Iran War) के बीच दुनियाभर में ऊर्जा का बड़ा संकट (Energy Crisis) खड़ा हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस व्यापार होता है। अब कई देशों के जहाज इस रास्ते से निकल ही नहीं पा रहे हैं। ऐसे में दुनियाभर के तमाम देश तेल संकट से जूझ रहे हैं। पाकिस्तान समेत कई देशों ने जनता के लिए नए-नए नियम निकाल दिए हैं। कई जगहों पर कार्य सप्ताह चार दिनों का कर दिया गया है। इसी बीच बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करते हुए भारतीय ध्वज वाला पोत ‘जग वसंत’ 47,000 टन द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर गुजरात के जामनगर स्थित वडीनार बंदरगाह पर पहुंच गया है। ईरान ने साफ कहा है कि भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट में कोई प्रतिबंध नहीं है।


    होर्मुज से कितने शिप निकल पा रहे

    ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध अब दूसरे महीने में प्रवेश कर गया है। जहां युद्ध से पहले होर्मुज स्ट्रेट से रोज 100 जहाज निकल जाते थे, अब 3 से 4 जहाज ही निकल पा रहे हैं। इनमें में भारत के भी व्यापारिक जहाज होते हैं। ईरान ने अपने कुछ दोस्त देशों में भारत का भी नाम लिया है और इससे भारत को बड़ी राहत मिली है। ईरान ने कहा है कि भारत के झंडे वाले जहाजों को यहां नहीं रोका जाएगा।


    कौन से देशों को मिली है छूट

    शनिवार को भी दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी और BW Tyr और BW Elm के जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। पिछले महीने होर्मुज स्ट्रेट से होकर कम से कम पांच जहाज भारत पहुंचे। इनमें पान गैस, जग वसंद, शिवालिक और नंदा देवी शिप शामिल हैं। इनमें एलपीजी और कच्चा तेल भारत पहुंचा है। ईरान ने भारत के साथ चीन, रूस, ईराक और पाकिस्तान को भी छूट दी है।

    गुरुवार को मुंबई में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने एक पोस्ट में कहा था कि ईरानी विदेस मंत्री अब्बास अरागची ने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के लिए होर्मुज को खोल दिया है। इसके बाद थाईलैंड और मलेशिया ने भी दावा किया कि उसके लिए भी होर्मुज कोखोला गया है। ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि इजरायल और अमेरिका के सहयोगियों को यहां से नहीं गुजरने दिया जाएगा।


    क्या ईरान होर्मुज में वसूल रहा है टोल?

    ईरान की संसद ने इस बात का समर्थन किया है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों सो टोल वसूला जाए। इसको लेकर कानून फाइनल होने वाला है। इसके मुताबिक जहाजों की सुरक्षा के बदले ईरान टोल वसूल सकता है। दूसरे कॉरिडोर में भी जहाजों से एक शुल्क लिया जाता है। जानकारी के मुताबिक कुछ जहजों से शुल्क लिया जाने लगा है। होर्मुज के दोनों ओर जहाजों का जमावड़ा लग गया है। दोनों ओर करीब 2000 शिप हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

  • आमिर खान, बोले- बचपन में रोमांटिक फिल्में देखने की नहीं थी अनुमति

    आमिर खान, बोले- बचपन में रोमांटिक फिल्में देखने की नहीं थी अनुमति


    मुंबई। बॉलीवुड के ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ के तौर पर पहचान रखने वाले आमिर खान ने अपने बचपन से जुड़ा दिलचस्प खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वह एक रूढ़िवादी परिवार में पले-बढ़े, जहां फिल्मों को लेकर काफी सख्ती थी और उन्हें खासतौर पर रोमांटिक फिल्में देखने की इजाजत नहीं थी।

    Variety India को दिए इंटरव्यू में आमिर ने कहा कि उन्हें बचपन से ही पढ़ने का ज्यादा शौक था और वह बहुत कम फिल्में देखते थे। उन्होंने बताया कि घर में फिल्मों को लेकर सीमित अनुमति थी और ज्यादातर उन्हें ब्लैक एंड व्हाइट या दूरदर्शन पर आने वाली पुरानी फिल्में ही देखने को मिलती थीं। अगर वह मां से फिल्म देखने की अनुमति मांगते थे तो अक्सर जवाब मिलता था कि रोमांटिक फिल्में देखने की इजाजत नहीं है।

    आमिर ने बताया कि वह आमतौर पर शनिवार और रविवार को ही फिल्में देखते थे और ज्यादातर पुराने दौर के कलाकारों की फिल्में पसंद करते थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने क्षेत्रीय सिनेमा भी काफी देखा, खासकर उन फिल्मों को जिनमें अशोक कुमार और दिलीप कुमार जैसे दिग्गज कलाकार नजर आते थे।

    उन्होंने यह भी कहा कि आज भी वह बहुत कम फिल्में देखते हैं। आमिर के मुताबिक, 18 साल की उम्र में उन्होंने फिल्ममेकिंग की शुरुआत कर दी थी और असिस्टेंट के तौर पर काम करना शुरू किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि कुछ लोग फुटबॉल खेलते हैं और कुछ लोग फुटबॉल देखते हैं—वह फिल्में बनाना पसंद करते हैं, देखने से ज्यादा।

    आमिर ने स्वीकार किया कि वह नई रिलीज फिल्मों से ज्यादा अपडेट नहीं रहते। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी पता नहीं होता कि हॉलीवुड में क्या चल रहा है, क्योंकि वह अपनी ही दुनिया में रहना पसंद करते हैं।

  • LPG संकट के बीच PNG कनेक्शन को बढ़ावा… जानें युद्ध में भी इस पर क्यों नहीं पड़ रहा कोई असर?

    LPG संकट के बीच PNG कनेक्शन को बढ़ावा… जानें युद्ध में भी इस पर क्यों नहीं पड़ रहा कोई असर?


    नई दिल्ली।
    ईरान (Iran) पर अमेरिका और इजरायल के हमले (America and Israeli attacks) ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई की चेन खराब कर दी है। तेल भंडार से भरे, गल्फ क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइलों की बारिश ने तबाही ला दी है। इसका असर भारत समेत दुनिया के कई अन्य देशों पर भी पड़ा है और सभी देश दशकों की सबसे बड़ी फ्यूल क्राइसिस (Biggest Fuel Crisis) से जूझ रहे हैं। भारत (India) में, सरकार लोगों को पीएनजी कनेक्शन (PNG connection) के लिए उत्साहित कर रही है। लोगों से कहा जा रहा है कि अगर उनके घरों तक पीएनजी लाइन पहुंच गई है तो वह एलपीजी सिलिंडर सरेंडर करके पीएनजी में शिफ्ट हो जाएं। बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के चलते एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ा है। आइए समझते हैं कि आखिर क्या है पीएनजी? साथ ही यह भी जानेंगे कि क्या इसकी सप्लाई, एलपीजी सप्लाई की तरह प्रभावित नहीं हुई है।


    क्या है पीएनजी

    पीएनजी यानी पाइपलाइन गैस या पाइप्ड नैचुरल गैस, मुख्य रूप से नैचुरल गैस (अधिकतर मीथेन) है। इसे अंडरग्राउंड पाइपलाइनों के जरिए सीधे घरों तक पहुंचाया जाता है। भारत में पीएनजी को गैस वाले क्षेत्रों से प्राकृतिक ढंग से निकाला जाता है और तरल रूप में, लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) के रूप में सप्लाई किया जाता है। वहीं, दूसरी तरफ एलपीजी रिफाइनरियों में तैयार की जाती है। वहां पर इसे क्रूड ऑयल से बनाया जाता है। पीएनजी लगातार फ्लो में रहती है और इसे रिफिलिंग की जरूरत नहीं होती। यह सिटी गैस नेटवर्क के जरिए लो प्रेशर में सप्लाई की जाती है।

    पीएनजी आती कहां से है
    भारत में घरेलू स्तर पर पीएनजी, गैस क्षेत्रों, जैसे-कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन, आसाम और त्रिपुरा से आती है। उत्तरी तट पर गहरे पानी में स्थित केजी बेसिन, सबसे बड़ा उत्पादक है। केजी बेसिन में तीन क्षेत्र, आर क्लस्टर, सैटेलाइट क्लस्टर और एमजे हैं। यह साल 2024 में भारत में पैदा हुई, कुल 36 बीसीएम पीएनजी का 25 फीसदी है। अनुमान है कि पूरे जीवन में यहां से 85 बीसीएम पीएनजी का उत्पादन होगा। असम और त्रिपुरा के बेसिन रिजर्व से देश के उत्पादन की 47 फीसदी पीएनजी आती है। वहीं, इंपोर्टेड नैचुरल गैस (एलएनजी) भारत में मध्य पूर्व, मुख्य रूप से कतर से आती है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी भारत को एलएनजी सप्लाई करते हैं।


    क्यों प्रभावित हो रही एलपीजी सप्लाई

    एलपीजी प्रोपेन और ब्यूटेन का एक मिश्रण है, जिसे सिलेंडरों में दबाव के तहत तरल रूप में संग्रहित किया जाता है। यह क्रूड ऑयल को प्रोसेस करके निकाला जाता है। इसके लिए दुनिया, मुख्य रूप से मध्य पूर्व पर निर्भर करती है। भारत अपनी एलपीजी खपत का लगभग 60 फीसदी आयात करता है। इसमें से करीब 90 फीसदी होर्मुज से आता है। मिडिल ईस्ट से आयात पर निर्भर होने के चलते एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ रहा है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रखा है। वहां से गिने-चुने टैंकर ही पास हो पा रहे हैं। इसके लिए भी काफी ज्यादा कवायद करनी पड़ रही है। हाल ही में अलग-अलग शहरों में एलपीजी सिलिंडरों के लिए लगने वाली लाइन, इसी डिस्टर्बेंस का नतीजा है।


    पीएनजी सप्लाई पर असर क्यों नहीं

    भारत सरकार लगातार लोगों से अपील कर रही है कि विकल्प होने पर वह एलपीजी सिलिंडरों को छोड़ पाइप से सप्लाई होने वाली पीएनजी पर शिफ्ट हो जाएं। इसकी वजह यह है कि ईरान में चल रहे युद्ध के हालात में भी पीएनजी की सप्लाई प्रभावित नहीं होने वाली है। पीएनजी फिक्स पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए डिलिवर होती है। चूंकि इसके वितरण का तरीका जमीन के नीचे बिछी पाइपों से होता है, ऐसे में इसे सिलिंडरों में भरने की जरूरत नहीं होती। इसलिए अगर वैश्विक स्तर पर किसी तरह का डिस्टर्बेंस भी होता है तो इसकी सप्लाई पर असर नहीं पड़ने वाला है। लोगों को बिना किसी बाधा के गैस मिलनी जारी रहती है और घरों का चूल्हा जलता रहता है।


    एलएनजी का आयात

    भारत हर साल करीब 25-26 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी का आयात करता है। उदाहरण के लिए, एस एंड पी ग्लोबल के अनुसार, भारत ने 2025 में करीब 25.5 मिलियन टन एलएनजी आयात की थी। भविष्य में यह बढ़कर सालाना 28–29 मिलियन टन तक होने का अनुमान है। भारत का आधिकारिक सरकारी आंकड़ा, पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल द्वारा प्रकाशित किया जाता है। यह एलएनजी आयात को ट्रैक करता है और पुष्टि करता है कि भारत की प्राकृतिक गैस की मांग का लगभग 50 फीसदी आयात से पूरा होता है, जो मुख्य रूप से एलएनजी के रूप में होता है। मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते एलएनजी पूरी तरह अप्रभावित नहीं है। बता दें कि वित्त वर्ष 25 में कतर से 41 फीसदी आयात हुआ। वहीं, अमेरिका से भारत के एलएनजी आयात का 19 प्रतिशत रहा।


    एलपीजी बनाम पीएनजी कनेक्शनों की संख्या

    भारत के पास वर्तमान में 16.2 मिलियन घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। इसके मुकाबले 332 मिलियन से अधिक एलपीजी उपभोक्ता हैं। साल 2014 में यह संख्या 140 मिलियन थी। इसमें 105.6 मिलियन बीपीएल परिवार भी हैं, जिनके पास पीएम उज्ज्वला योजना के अंतर्गत सब्सिडी वाले कनेक्शन हैं।

  • क्या ‘हमजा’ का किरदार असली है? धुरंधर 2 से जुड़े कर्नल ने सुनाई रियल जासूस की कहानी

    क्या ‘हमजा’ का किरदार असली है? धुरंधर 2 से जुड़े कर्नल ने सुनाई रियल जासूस की कहानी

    मुंबई। धुरंधर 2 की रिलीज के बाद दर्शकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि फिल्म में दिखाया गया जासूसी किरदार कितना वास्तविक है। इसी बीच फिल्म से जुड़े सैन्य सलाहकार कर्नल भूपेंद्र शाही ने दावा किया है कि कहानी में कई पहलू वास्तविक घटनाओं से प्रेरित हैं। उन्होंने एक ऐसे जासूस का किस्सा भी साझा किया, जिसने सीमा पार जाकर महीनों तक गुप्त मिशन पूरा किया।

    विजय विक्रम सिंह के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कर्नल शाही ने कहा कि जासूसी गतिविधियां हर देश में होती हैं और फिल्म में दिखाया गया अंदाज काफी हद तक वास्तविक है। उन्होंने बताया कि उनके पास एक ऐसा युवक था, जिसे सीमा पार भेजा गया था और उसने महत्वपूर्ण जानकारी जुटाकर वापसी की।

    कर्नल शाही के मुताबिक, वह जासूस पीओके में करीब तीन-चार महीने तक रहा। वहां उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए स्थानीय माहौल में खुद को ढाल लिया, यहां तक कि निकाह भी किया और मदरसे में रहकर गूंगे व्यक्ति का अभिनय करता रहा। मिशन के दौरान एक बार उसकी पहचान उजागर होने का खतरा भी पैदा हुआ, लेकिन स्थानीय महिला की मदद से वह बच निकला।

    उन्होंने बताया कि जासूस को एक तय तारीख तक एलओसी पार कर वापस लौटना था, लेकिन परिस्थितियों के कारण देरी हो गई। इसके बावजूद वह किसी तरह भारतीय सीमा में दाखिल हो गया। बाद में सेना ने उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उसके पास मौजूद जानकारी को सुरक्षित तरीके से निकाला गया।

    कर्नल शाही ने कहा कि मिशन के दौरान जासूस को पर्याप्त नकद राशि भी दी गई थी, जिसे उसने स्थानीय लोगों के बीच विश्वास बनाने में इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, फिल्म में दिखाए गए कई तत्व ऐसे वास्तविक अभियानों से प्रेरित हैं, हालांकि सिनेमा में उन्हें थोड़ा नाटकीय रूप दिया जाता है।

    बताया जाता है कि कर्नल शाही इससे पहले भी कई फिल्मों में सैन्य सलाहकार की भूमिका निभा चुके हैं। उनका काम फिल्मों को यथार्थ के करीब लाना और सैन्य प्रक्रियाओं की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना होता है।

  • Uttarakhand में मदसरों के संचालन पर सख्ती… 11 शर्तों के बाद ही मिलेगी धार्मिक शिक्षा देने की मान्यता

    Uttarakhand में मदसरों के संचालन पर सख्ती… 11 शर्तों के बाद ही मिलेगी धार्मिक शिक्षा देने की मान्यता


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में मदरसों (Madrasas) के संचालन को लेकर नियम सख्त कर दिए गए हैं। अब अल्पसंख्यक प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि धारा-14 के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा किए बिना किसी भी मदरसे को धार्मिक शिक्षा (Religious Education) देने की मान्यता नहीं मिलेगी। इसके साथ ही सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से भी नए सिरे से मान्यता लेनी होगी। इस फैसले के बाद प्रदेश भर में मदरसा संचालकों के बीच हलचल तेज हो गई है।

    शनिवार को अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जेएस रावत (JS Rawat) ने मदरसा संचालकों की बैठक बुलाई, जिसमें सभी को तय मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में मौलाना इफ्तिखार, कारी शहजाद और मौलाना रिहान गनी समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। अधिकारियों ने साफ किया कि नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

    इस समय 482 मान्यता प्राप्त मदरसे
    प्रदेश में इस समय 482 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं, जिनमें 50 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। देहरादून में 36 मदरसों को मान्यता मिली हुई है। मदरसा बोर्ड के निदेशक गिरधारी सिंह रावत ने देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने मदरसे नए मानकों पर खरे उतरते हैं।

    धार्मिक शिक्षा के नाम पर बरगलाना बर्दाश्त नहीं
    सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है। खासतौर पर वित्तीय लेनदेन, शिक्षकों की योग्यता और संस्थानों के संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि धार्मिक शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
    मान्यता के लिए अनिवार्य शर्तें-
    – शैक्षणिक संस्थान अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और संचालित हो।
    – संस्थान का शिक्षा परिषद से संबद्ध होना जरूरी है।
    – सोसायटी रजिस्ट्रार के पास संस्थान का पंजीकरण होना चाहिए।
    – संस्थान की जमीन सोसायटी के नाम पर दर्ज होनी चाहिए।
    – सभी वित्तीय लेनदेन संस्थान के आधिकारिक खाते से ही किए जाएं।
    – संस्थान की सोसायटी के सभी सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से हों।
    – छात्रों और शिक्षकों को किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
    – केवल डिग्रीधारी शिक्षकों की ही नियुक्ति की जाएगी।
    – शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में परिषद और प्राधिकरण के निर्देश लागू होंगे।
    – संस्थान ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा जिससे सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो।

  • IPL 2026 हाइलाइट: मुंबई इंडियंस के बिना इन सितारों के, KKR को कर सकते हैं परेशान

    IPL 2026 हाइलाइट: मुंबई इंडियंस के बिना इन सितारों के, KKR को कर सकते हैं परेशान


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में आज यानी रविवार को क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक रोमांचक मुकाबला होने जा रहा है। 5 बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस (MI) और 3 बार ट्रॉफी जीत चुकी कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) अपना पहला मैच खेलने उतरेगी। यह मुकाबला वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई में शाम 7:30 बजे से शुरू होगा। IPL 2026 के पहले दिन डिफेंडिंग चैंपियन आरसीबी ने सनराइजर्स हैदराबाद को 6 विकेट से हराकर जीत के साथ टूर्नामेंट की शुरुआत की थी। अब MI और KKR के बीच मुकाबला दर्शकों के लिए उत्साह और चुनौती दोनों लेकर आया है।

    मुंबई इंडियंस की प्लेइंग 11 में दो बड़े नाम नहीं

    मुंबई इंडियंस इस बार भी खिताब की प्रबल दावेदार है। टीम में रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या, सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा जैसे धुरंधर मौजूद हैं। लेकिन पहले मुकाबले में न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर और इंग्लैंड के ऑलराउंडर विल जैक्स टीम से जुड़ नहीं पाए हैं। इनके बिना टीम की प्लेइंग 11 में शेरफेन रदरफोर्ड और अफगान स्पिनर अल्लाह गजनफर को मौका मिल सकता है। इस बदलाव के बावजूद मुंबई की बल्लेबाजी और गेंदबाजी का संतुलन अच्छा दिखता है।

    मुंबई इंडियंस संभावित प्लेइंग 11:
    रोहित शर्मा, क्विंटन डी कॉक (विकेटकीपर), सूर्यकुमार यादव, तिलक वर्मा, नमन धीर, हार्दिक पांड्या (कप्तान), शेरफेन रदरफोर्ड, दीपक चाहर, अल्लाह गजनफर/मिचेल सैंटनर, जसप्रीत बुमराह, ट्रेंट बोल्ट।

    KKR के लिए फिन एलन होंगे चुनौती

    कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम भी खतरनाक खिलाड़ियों से भरी है। टीम में फिन एलन, जिन्होंने टी20 विश्व कप 2026 में सिर्फ 33 गेंदों में शतक जड़कर न्यूजीलैंड को फाइनल में पहुंचाया था, शामिल हैं। इस पारी में उन्होंने 10 चौके और 8 छक्के लगाए थे। इस खिलाड़ी की मौजूदगी KKR के लिए बड़ी ताकत है और मुंबई के गेंदबाजों को संभलकर खेलना होगा। KKR की टीम में कैमरून ग्रीन और ब्लेसिंग मुजरबानी जैसे विदेशी खिलाड़ी भी शामिल हैं, जो अकेले मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।

    KKR संभावित प्लेइंग 11:
    अंगकृष रघुवंशी, फिन एलन (विकेटकीपर), कैमरन ग्रीन, अजिंक्य रहाणे (कप्तान), रिंकू सिंह, रमनदीप सिंह, सुनील नरेन, वैभव अरोड़ा, वरुण चक्रवर्ती, उमरान मलिक, ब्लेसिंग मुजरबानी।

    हेड टू हेड रिकॉर्ड

    IPL इतिहास में अब तक MI और KKR के बीच 35 मुकाबले खेले गए हैं। जिसमें MI ने 24 और KKR ने 11 मैच जीते हैं। वानखेड़े स्टेडियम में दोनों टीमों के बीच 12 मैच हुए, जिसमें MI ने 10 और KKR ने सिर्फ 2 जीत हासिल की है। ये आंकड़े मुंबई के पक्ष में भारी हैं, लेकिन KKR के विदेशी धुरंधर मैच में बदलाव ला सकते हैं।

    आईपीएल 2026 में मुंबई इंडियंस मिचेल सैंटनर और विल जैक्स के बिना उतरेगी, जबकि KKR के फिन एलन और विदेशी खिलाड़ियों से लैस टीम के सामने मुंबई को कड़ी चुनौती का सामना करना होगा। यह मुकाबला दोनों टीमों की ताकत और रणनीति की परीक्षा लेने वाला है और क्रिकेट फैंस के लिए रोमांचक शाम लेकर आएगा।