Author: bharati

  • चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन, हाथी पर प्रस्थान, जानें क्या संकेत दे रहा है समय

    चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन, हाथी पर प्रस्थान, जानें क्या संकेत दे रहा है समय


    नई दिल्ली। देशभर में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से हो चुका है और श्रद्धालु माँ भवानी के नौ रूपों की आराधना में जुटे हैं। नवरात्रि न केवल हिंदू नववर्ष का प्रतीक है, बल्कि देवी के आगमन और प्रस्थान की सवारी भविष्य के शुभ-अशुभ संकेतों का मार्गदर्शन भी करती है।

    इस वर्ष मां जगदंबा का आगमन गुरुवार को पालकी पर हुआ, जबकि प्रस्थान शुक्रवार को हाथी पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, पालकी पर आगमन सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता। यह प्राकृतिक आपदाओं, सामाजिक उपद्रव, दंगे या आर्थिक चुनौतियों का संकेत दे सकता है। गुरुवार को आगमन से जुड़े संकेतों को सावधानी और वित्तीय सतर्कता से जोड़ा जा रहा है।

    वहीं, प्रस्थान का समय और सवारी विशेष महत्व रखते हैं। शुक्रवार को मां का हाथी पर प्रस्थान शुभ माना गया है। हाथी स्थिरता, सुख-संपत्ति और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। इसका अर्थ है कि आने वाला समय अप्रिय घटनाओं के साथ-साथ जीवन में स्थिरता और अवसर भी लाएगा। शास्त्रों के अनुसार वार दिन और सवारी का तालमेल भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है। उदाहरण के लिए:

    रविवार और सोमवार को प्रस्थान – भैंसे की सवारी- रोग, शोक, अशुभता।

    मंगलवार और शनिवार को प्रस्थान – मुर्गा की सवारी – महामारी और जनहानि।

    बुधवार और शुक्रवार को प्रस्थान – हाथी की सवारी – सुख, समृद्धि और स्थिरता।

    गुरुवार को प्रस्थान – मानव पर सवार – भक्त पर विशेष कृपा और जीवन में संतुलन।

    इस साल आगमन पालकी पर और प्रस्थान हाथी पर होने से मिश्रित संकेत मिलते हैं। आगमन से सावधानी और चुनौतियों की चेतावनी मिलती है, जबकि प्रस्थान सुख-समृद्धि और स्थिरता की संभावना दर्शाता है। ऐसे में यह समय जीवन में सतर्क रहकर अवसरों का लाभ उठाने का प्रतीक है।

    पिछले वर्ष शारदीय नवरात्रि में मां का आगमन हाथी पर हुआ था और प्रस्थान भक्तों के कंधे पर हुआ था। यह दोनों ही शुभ संकेतों का प्रतीक थे। इस वर्ष के संकेत कुछ मिश्रित हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार सावधानी के साथ श्रद्धा और कर्म से जीवन में संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

  • जोमैटो यूज़र्स के लिए अपडेट, प्रति ऑर्डर शुल्क हुआ बढ़कर लगभग 15 रुपए

    जोमैटो यूज़र्स के लिए अपडेट, प्रति ऑर्डर शुल्क हुआ बढ़कर लगभग 15 रुपए


    नई दिल्ली। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने अपने प्लेटफॉर्म फीस में 19.2 प्रतिशत यानी 2.40 रुपये प्रति ऑर्डर की बढ़ोतरी कर दी है। ऐप के लेटेस्ट बिलिंग डेटा के अनुसार, अब प्लेटफॉर्म फीस 14.90 रुपये प्रति ऑर्डर होगी, जो पहले 12.50 रुपये थी।

    फीस बढ़ोतरी के पीछे कारण

    प्लेटफॉर्म फीस में यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब एलपीजी की प्लेटफॉर्म में पहुंचा हुआ है, जिससे रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी कंपनियों की लागत बढ़ेगी है। जोमैटो ने यह कदम यूनिट इकोनॉमिक्स और मार्जिन सुधार के उद्देश्य से उठाया है, ताकि बढ़ती परिचालन लागतों के बीच संचालन को स्थिर रखा जा सके।

    फीस बढ़ोतरी का इतिहास

    जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस में आखिरी बार सितंबर 2025 में बदलाव किया था। इससे पहले, फरवरी 2025 में त्योहारी सीजन के दौरान यह फीस 6 रुपये प्रति ऑर्डर से बढ़कर 10 रुपये कर दिया गया था। अगस्त 2023 में कंपनी ने प्रति ऑर्डर 2 रुपये का प्लेटफॉर्म फीस लागू किया था, जिसे बाद में प्रमुख बाजारों में धीरे-धीरे बढ़ाया गया।

    प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना

    प्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी वर्तमान में कर सहित 14.99 रुपए प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म फीस ले रही है। इसका मतलब है कि जोमैटो और स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस अब लगभग बराबर हो गई है।

    शेयर बाजार में असर

    जोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल के शेयर शुक्रवार को 1.55 प्रतिशत यानी 3.55 रुपए की तेजी के साथ 232.29 रुपए पर बंद हुए। दिन के दौरान शेयर ने 236.70 रुपए का सर्वोच्च स्तर और 230.10 रुपए का न्यूनतम स्तर जारी किया।

    वित्तीय प्रदर्शन

    दिसंबर तिमाही के बढ़ोतरी में कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रेशर इंडेक्स आधार पर 72.88 प्रतिशत बढ़कर 102 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल समान अवधि में 59 करोड़ रुपए था। इसी दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू करीब तीन गुना बढ़कर 16,315 करोड़ रुपए हो गया, जो कि एक साल पहले समान अवधि में 5,405 करोड़ रुपए था।

    ब्रांडिंग और भविष्य की योजना

    मार्च 2025 में जोमैटो ने अपने आपको इटरनल के नाम से रीब्रांड किया था। प्लेटफॉर्म फीस में यह बढ़ोतरी कंपनी की लॉन्ग-टर्म बढ़ोतरी और स्टेबिलिटी सुनिश्चित करने की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भविष्य में भी अपनी प्राइस स्ट्रक्चर और फीस मॉडल में बदलाव कर सकते हैं।

  • रणवीर सिंह की धुरंधर 2 को मिला साउथ का सपोर्ट महेश बाबू और जूनियर एनटीआर ने कही बड़ी बात

    रणवीर सिंह की धुरंधर 2 को मिला साउथ का सपोर्ट महेश बाबू और जूनियर एनटीआर ने कही बड़ी बात

    नई दिल्ली:फिल्म धुरंधर 2 द रिवेंज इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है और रिलीज के साथ ही चर्चा का बड़ा विषय बन गई है. जहां एक तरफ फिल्म ने शानदार कमाई करते हुए भारत में 139 करोड़ से ज्यादा का आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं वर्ल्डवाइड कलेक्शन भी तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि फिल्म को दर्शकों से मिले-जुले रिव्यू मिल रहे हैं, लेकिन साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों ने इसे लेकर खुलकर तारीफ की है.

    सुपरस्टार महेश बाबू ने सोशल मीडिया पर फिल्म की सराहना करते हुए इसे एक शानदार सिनेमैटिक अनुभव बताया. उन्होंने खासतौर पर रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस की तारीफ की और कहा कि यह उनका अब तक का सबसे बेहतरीन अवतार है. इसके साथ ही उन्होंने फिल्म के निर्देशक आदित्य धर की भी जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने हर फ्रेम को परफेक्शन के साथ पेश किया है. महेश बाबू ने फिल्म के म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर को भी खास बताया, जिससे फिल्म का इमोशनल और एक्शन प्रभाव और मजबूत हुआ.

    वहीं दूसरी ओर जूनियर एनटीआर ने भी फिल्म को लेकर लंबा चौड़ा रिएक्शन शेयर किया. उन्होंने पूरी टीम की तारीफ करते हुए कहा कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा के लिए एक दमदार पेशकश है. जूनियर एनटीआर ने रणवीर सिंह की एक्टिंग को शानदार बताया और कहा कि उन्होंने स्क्रीन पर एक अलग ही स्तर की परफॉर्मेंस दी है.

    उन्होंने आगे आर माधवन, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल के अभिनय की भी सराहना की और कहा कि सभी कलाकारों ने अपने किरदारों को पूरी गहराई और मजबूती के साथ निभाया है. खासतौर पर फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर शाश्वत सचदेव के काम को उन्होंने अलग ही स्तर का बताया, जिसने हर सीन को और ज्यादा प्रभावी बना दिया.

    जूनियर एनटीआर ने एक अलग पोस्ट में अक्षय खन्ना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इस फ्रेंचाइजी की मजबूत नींव रखी थी. पार्ट 1 में उनका शांत लेकिन खतरनाक अंदाज आज भी यादगार है और उनकी परफॉर्मेंस ने फिल्म को एक अलग पहचान दी थी.

    फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त चर्चा हो रही है. जहां एक तरफ फैंस अपने पसंदीदा सितारों की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि रिलीज के पहले ही दिन दोनों साउथ सुपरस्टार्स ने फिल्म कैसे देख ली. इस पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिसमें कुछ लोग मजाक कर रहे हैं तो कुछ इसे प्रमोशन का हिस्सा बता रहे हैं.

    धुरंधर 2 द रिवेंज ने रिलीज के साथ ही एक बड़ा माहौल बना दिया है. फिल्म की कमाई, स्टार पावर और बड़े सितारों की तारीफ ने इसे और भी चर्चा में ला दिया है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितनी दूर तक जाती है और दर्शकों के दिलों में कितनी गहरी छाप छोड़ पाती है.

  • Chaitra Navratri 2026: उज्जैन के महाकाल वन क्षेत्र में मां हरसिद्धि मंदिर माता सती की कोहनी से लेकर 51 शक्तिपीठों की महिमा तक

    Chaitra Navratri 2026: उज्जैन के महाकाल वन क्षेत्र में मां हरसिद्धि मंदिर माता सती की कोहनी से लेकर 51 शक्तिपीठों की महिमा तक


    उज्जैन। सप्तपुरियों में स्थित प्राचीन धर्म नगरी उज्जैन में मां हरसिद्धि मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि इसी स्थल पर देवी सती का दाहिना हाथ  कोहनी का अंश गिरा था, जिससे यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।

    मंदिर का स्थान और विशेषताएँ

    स्थान: महाकाल वन क्षेत्र, रुद्रसागर के किनारे मुख्य आकर्षण: 51 फीट ऊँचे दो दीप स्तंभ, जिन पर प्रतिदिन संध्या समय दीप प्रज्वलित होते हैं धार्मिक महत्व: यह स्थल तंत्र साधना और महालक्ष्मी-महासरस्वती के संयुक्त स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है

    सम्राट विक्रमादित्य और माता हरसिद्धि सम्राट विक्रमादित्य माता हरसिद्धि के अनन्य भक्त थे। उन्होंने अपनी कृपा प्राप्त करने हेतु 11 बार अपने मस्तक की बलि दी, जो हर बार पुनः जुड़ गया। 12वीं बार जब सिर नहीं जुड़ा, माना गया कि उनका शासन सम्पूर्ण हुआ। इस स्थान को परमार वंशीय राजाओं की कुलदेवी का स्थान भी कहा जाता है। मंदिर के पीछे सिरसिन्दूर चढ़े हुए रखे हैं, जिन्हें विक्रमादित्य के सिर के रूप में जाना जाता है।

    देवी हरसिद्धि का नामकरण और दैत्य वध

    कीवदंति अनुसार, उज्जैन की रक्षा के लिए कई देवीयाँ तैनात हैं, जिनमें हरसिद्धि देवी प्रमुख हैं।  पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, दैत्य चण्ड और मुण्ड कैलाश पर कब्जा करने आए। शिवजी के आदेश पर देवी चंडी ने उनका वध किया। शंकरजी ने प्रसन्न होकर कहा कि आपने दुष्टों का वध किया, इसलिए आपका नाम हरसिद्धि से प्रसिद्ध होगा।

    शक्तिपीठ का महत्व

    उज्जैन स्थित माता हरसिद्धि शक्तिपीठ में माता सती की दाहिनी कोहनी गिरने के कारण यह स्थान प्रमुख माना जाता है।यह शक्तिपीठ भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से खंडित सती से संबंधित है और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र है।

  • गर्मियों में सूरज की तीखी धूप से जलती त्वचा? अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय

    गर्मियों में सूरज की तीखी धूप से जलती त्वचा? अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली। गर्मी में महिलाओं को अक्सर कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है उसमें से एक है स्क्रीन। आप कितना भी स्क्रीन केयर कर लें लेकिन गर्मी में इसमें कई बदलाव देखने को मिलते हैं। कई लोगों को बाहर निकलते ही त्वचा में जलन, लालपन और टैनिंग की समस्या होने लगती है।तो चलिए इसके लिए कुछ उपाय जानते हैं।

    इस प्रकार गर्मी में स्क्रीन का ध्यान
    गर्मी शुरू होते ही स्क्रीन पर काफी प्रभाव पड़ता है जिसके कारण आपकी त्वचा से निखार दूर जाने लगता है। ऐसे में ये जरूरी है कि, गर्मियों में अपनी त्वचा की खास देखभाल की जाए। कुछ आसान और रोजाना अपनाए जाने वाले स्किन केयर टिप्स आपकी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रख सकते हैं।

    सनस्क्रीन लगाना हमेशा रखें याद
    गर्मी में घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना बहुत जरूरी होता है। तेज धूप में मौजूद यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए बाहर जाने से करीब 20 मिनट पहले एसपीएफ 30 या उससे ज्यादा वाली सनस्क्रीन जरूर लगाएं।

    त्वचा को रखें हाइड्रेटेड
    गर्मी में शरीर के साथ-साथ त्वचा को भी हाइड्रेशन की जरूरत होती है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और त्वचा भी फ्रेश और ग्लोइंग नजर आती है। अगर यह आप बरकरार रखती हैं तो आपकी त्वचा में हमेशा निखार और ग्लो बना रहेगा।

    दिन में दो-तीन बार धोने फेस
    बाहर कई प्रकार की धूल,मिट्टी गर्म हवाएं और पसीना आपके चेहरे को खराब कर देती है।इसलिए सुबह और रात को चेहरे को अच्छे फेसवॉश से साफ करना चाहिए। इससे स्किन साफ रहती है और पिंपल्स की समस्या भी कम होती है।

    धूप से बचाव करें
    तेज धूप में बाहर निकलते समय छाता, टोपी या स्कार्फ का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे त्वचा सीधे धूप के संपर्क में आने से बच जाती है और टैनिंग की समस्या भी कम होती है।

  • चेटीचंड पर्व अखंड भारत की याद दिलाता है, हृदय में जागृत रखता है अखंड भारत का सपना: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    चेटीचंड पर्व अखंड भारत की याद दिलाता है, हृदय में जागृत रखता है अखंड भारत का सपना: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल । भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के टावर चौक पर चेटीचंड महापर्व पर आयोजित सिंधी समाज के चल समारोह का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि चेटीचंड का पर्व न केवल धार्मिक और सामाजिक उत्सव है, बल्कि यह अखंड भारत की स्मृति दिलाकर भारतीयों के हृदय में अखंड भारत का सपना जागृत रखता है।

    सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक उत्सवों से लोगों में आपसी प्रेम और आत्मीयता बढ़ती है। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य को उनकी वीरता, न्यायप्रियता और दानशीलता के लिए याद किया और कहा कि शासन इन्हीं गुणों से प्रेरित होकर सुशासन के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

    विकास और सिंहस्थ-2028 की तैयारी
    विक्रम संवत 2083 में बाबा श्री महाकाल की नगरी से देश और प्रदेशवासियों को चेटीचंड की मंगलकामनाएं दी गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सरकार उज्जैन में विकास कार्य कर रही है, जिससे प्रदेश और उज्जैन को वैश्विक पहचान मिलेगी।

    चल समारोह का विवरण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवा ध्वज लहराकर समारोह का शुभारंभ किया। रैली में उपस्थित गणमान्य अतिथियों में शामिल थे: राज्यसभा सांसद और अभिनेत्री सुश्री जयाप्रदा अभिनेता श्री आफताब शिवदासानी तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम गोली सांसद श्री अनिल फिरोजिया, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर श्री मुकेश टटवाल अन्य गणमान्यजन और सिंधी समाज के अनेक सदस्य चेटीचंड महापर्व ने उज्जैन में धार्मिक आस्था, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक गौरव का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे अखंड भारत की स्मृति और सामाजिक प्रेम का प्रतीक बताया और उज्जैन को आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

  • बिना UPSC पास किए भी बन पाएंगे IAS अधिकारी, जानिए कैसे होगा ये संभव?

    बिना UPSC पास किए भी बन पाएंगे IAS अधिकारी, जानिए कैसे होगा ये संभव?

    नई दिल्ली देश में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जो देश सेवा के लिए UPSC का रास्ता चुनते हैं और दिन रात एक करने पढ़ने के बाद IAS नियुक्त होते हैं। हालांकि बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि बिना UPSC पास किए भी IAS की पदवी हासिल की जा सकती है। कई सरकारी अधिकारी अपने अनुभव और काम के आधार पर प्रमोशन के जरिए भी IAS कैडर में शामिल हो सकते हैं। हालांकि यह सुनने में जितना आसान लग रहा है उससे कहीं ज्यादा मुश्किल काम है। इसके लिए कई शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं।
    बिना UPSC कैसे बनें IAS?
    बहुत सीमित मात्रा में लोग जानते हैं कि स्टेट सिविल सर्विस के अधिकारी भी बिना यूपीएससी पास किए IAS बनने का सपना पूरा कर सकते हैं। यह सफर PCS से शुरु होता है जो IAS तक पहुंचती है। उत्तर प्रदेश में UP PCS,मध्य प्रदेश में State Administrative Service,अन्य राज्यों में भी इसी तरह की प्रशासनिक सेवाएं होती हैं, इन सेवाओं में चयनित अधिकारी शुरुआत में SDM, डिप्टी कलेक्टर जैसे पदों पर काम करते हैं और जिलों में प्रशासनिक अनुभव हासिल करते हैं।

    राज्य के सिविल सर्विस अधिकारी कब बन सकते हैं IAS?
    राज्य के जो सिविल सर्विस अधिकारी 10 से 12 साल तक अपनी सेवा पूरी कर लेते हैं तो वह प्रमोशन के लिए पात्र हो जाते हैं। हालांकि इसके लिए एक कड़ी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके लिए कई जरूरी शर्तें होती हैं और पूरी प्रक्रिया नियमानुसार होती है। PCS से IAS बनने के लिए इस बिंदुओं को ध्यान में रखा जाता है।

    अधिकारी का काम और प्रदर्शन अच्छा होना चाहिए।
    सेवा रिकॉर्ड मजबूत होना चाहिए।
    IAS कैडर में खाली पद होना जरूरी है।
    राज्य सरकार की सिफारिश महत्वपूर्ण होती है।
    इन सभी चीजों के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया शुरू होती है।
    हालांकि, IAS प्रमोशन का फैसला चयन समिति करती है। इस समिति में आमतौर पर राज्य के मुख्य सचिव ,वरिष्ठ IAS अधिकारी,UPSC का प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

  • सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के राम घाट पर आयोजित विक्रमोत्सव-2026 और गुड़ी पड़वा सृष्टि आरंभ उत्सव के अवसर पर कहा कि उज्जैन का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व विश्व स्तर पर अनोखा है। उन्होंने कहा कि आगामी सिंहस्थ-2028 में पूरी दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव को देखेगी।

    उज्जैन का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
    उज्जैन प्राचीन अवंतिका और उज्जयिनी के नाम से विख्यात 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर का धाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन का पावन शिप्रा तट और यह नगरी जीवन में आस्था और आध्यात्मिक संबल देती है। उन्होंने महान सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा का उल्लेख किया जिनके 32 पुतलियों वाले सिंहासन नवरत्नों की विद्वता और वीरता आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

    सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ

    उज्जैन के सभी मार्गों को फोरलेन और सिक्सलेन बनाया जा रहा है। मां शिप्रा के तट पर लगभग 30 किलोमीटर लंबे नवीन घाट विकसित किए जा रहे हैं। शहर को व्यापार और उद्योग के दृष्टिकोण से भी विकसित किया जा रहा है विक्रम उद्योगपुरी मेडिकल डिवाइस पार्क 12,500 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र और अतिरिक्त 5,000 एकड़ में नया पार्क तैयार। नए एयरपोर्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं से तीर्थाटन को नई ऊंचाई देने का प्रयास।

    सृष्टि आरंभ उत्सव की भव्य झलक

    कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पार्श्व गायक श्री विशाल मिश्रा के संगीत से हुई। भव्य ड्रोन-शो लेजर-शो और आतिशबाजी ने शिप्रा तट के आकाश को रोशनी और रंगों से भर दिया। उत्सव ने आस्था संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

    साहित्य और ज्ञान का विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ का विक्रम पंचांग 2083 संस्कृति संचालनालय का कला पंचांग विभिन्न ग्रंथों और मोनोग्राफ का विमोचन किया। विमोचित ग्रंथों में अष्टावक्र गीता नारद गीता ब्राह्मण गीता गर्भ गीता समेत महर्षियों और वीर भारत न्यास के विभिन्न ग्रंथ शामिल थे।

    राष्ट्रीय और स्थानीय गणमान्यजन उपस्थित

    राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा महापौर श्री मुकेश टटवाल नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव शोधपीठ निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी और अन्य गणमान्यजन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन को धार्मिक सांस्कृतिक औद्योगिक और वैश्विक पहचान का केंद्र बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों का विवरण दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिंहस्थ-2028 में दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव और उज्जैन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देखेगी।

  • फ्लिपकार्ट के वित्तीय नेतृत्व में हड़कंप, सीएफओ श्रीराम वेंकटरमन का इस्तीफा

    फ्लिपकार्ट के वित्तीय नेतृत्व में हड़कंप, सीएफओ श्रीराम वेंकटरमन का इस्तीफा


    नई दिल्ली दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स ने शुक्रवार को घोषणा की कि उनके मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) श्रीराम वेंकटरमैन कंपनी छोड़ देंगे। वेंकटरमैन ने कंपनी में एक दशक से अधिक समय तक सेवा दी है। हालाँकि, उन्होंने अगले कुछ महीनों तक अपनी भूमिका नहीं छोड़ी, ताकि बदलाव की प्रक्रिया क्रमिक रूप से पूरी तरह से हो सके।

    वित्त विभाग में अंतरिम व्यवस्था

    कंपनी ने बताया कि यह कदम फाइनेंशियल ऑपरेशन की स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इस दौरान रवि अभिनव अंतरिम रूप से कंपनी के वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे, जब तक नए सीएफओ की नियुक्ति नहीं हो जाती।

    आई मंडल की तैयारी के बीच बदलाव

    यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भारत में अपनी आई.आई.वी. की तैयारी कर रही है। लीडरशिप में बदलावों की नज़रों में महत्वपूर्ण घटनाएँ होती हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसकी डिजाइन योजना तय समय पर आगे बढ़ रही है। साथ ही, बेकर ने अपनी लीडरशिप टीम को मजबूत करते हुए निशांत वर्मा को सचिवालय और मैड्रिडशिप के लिए सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया है। यह संकेत बताता है कि कंपनी अपने अगले पैमाने के चरणों के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स का नवीनीकरण कर रही है।

    वित्तीय प्रदर्शन: राजस्व में वृद्धि, घाटा बढ़ा

    मार्च 2025 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में कंपनी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का समेकित घाटा 5,189 करोड़ रुपये तक बढ़ गया। पिछले वित्तीय वर्ष 2024 में यह घाटा 4,248.3 करोड़ रुपये था।

    हालाँकि, कुल राजस्व 17.3 प्रतिशत प्रतिशत 82,787.3 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 70,541.9 करोड़ रुपये था। कंपनी का कुल खर्च भी इसी तरह बढ़ा, 17.4 प्रतिशत उछाल 88,121.4 करोड़ रुपये हो गया।

    स्टॉक-इन-ट्रेड और फाइनेंस कॉस्ट पर खर्च

    सबसे बड़ा खर्च स्टॉक-इन-ट्रेड की खरीद पर हुआ, जो 87,737.8 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 74,271.2 करोड़ रुपये था। इसके अलावा, फाइनेंस कॉस्ट में 57 फीसदी की तेजी आई और यह 454 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    भविष्य की दिशा

    इन बदलावों और वित्तीय प्रदर्शनों के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि जल्द ही आई फिल्में और सार्वजनिक बाजार में विस्तार की तैयारी की जा रही है। कंपनी का लक्ष्य मजबूत सुदृढ़ीकरण और सुव्यवस्थित वित्तीय संरचना के साथ वृद्धि और उद्यमियों का विश्वास सुनिश्चित करना है।

  • एक तस्वीर ने बदली जिंदगी परवीन बाबी से मिलने आया शख्स बना 80s का खतरनाक विलेन

    एक तस्वीर ने बदली जिंदगी परवीन बाबी से मिलने आया शख्स बना 80s का खतरनाक विलेन

    नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के 80 और 90 के दशक को याद किया जाए तो जहां एक तरफ दमदार हीरो का दौर था, वहीं दूसरी तरफ खतरनाक विलेन भी फिल्मों की जान हुआ करते थे. इसी दौर में एक ऐसा विदेशी चेहरा बार-बार बड़े पर्दे पर दिखाई देता था, जिसने अपनी मजबूत कद-काठी और डरावने अंदाज से दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली. यह अभिनेता थे बॉब क्रिस्टो, जिनकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है.

    20 मार्च 1938 को सिडनी में जन्मे बॉब क्रिस्टो का असली नाम रॉबर्ट जॉन क्रिस्टो था. वह पेशे से सिविल इंजीनियर थे और पढ़ाई के साथ-साथ थिएटर में भी रुचि रखते थे. उनकी जिंदगी सामान्य ढंग से चल रही थी, लेकिन एक दुखद घटना ने सबकुछ बदल दिया. उनकी पत्नी का एक सड़क हादसे में निधन हो गया, जिससे वह पूरी तरह टूट गए और उनकी जिंदगी एक नए मोड़ की ओर मुड़ गई.

    उनकी जिंदगी का सबसे दिलचस्प अध्याय तब शुरू हुआ जब उन्होंने एक मैगजीन के कवर पर मशहूर अभिनेत्री परवीन बाबी की तस्वीर देखी. इस एक तस्वीर ने उन पर ऐसा असर डाला कि वह उनसे मिलने भारत चले आए. मुंबई पहुंचकर उन्होंने परवीन बाबी को ढूंढ निकाला और उनसे मुलाकात की. यही मुलाकात उनकी किस्मत बदलने वाली साबित हुई.

    परवीन बाबी की मदद से उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री मिली और फिल्म अब्दुल्ला के जरिए उन्हें पहला बड़ा मौका मिला. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 80 और 90 के दशक में वह बॉलीवुड के सबसे चर्चित विदेशी विलेन बन गए. उनकी दमदार पर्सनैलिटी और एक्शन सीन ने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दिलाई.

    उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में काम किया, जिनमें कालिया, नमक हलाल, मर्द और मिस्टर इंडिया शामिल हैं. खास बात यह रही कि उनकी भिड़ंत अक्सर महानायक अमिताभ बच्चन और सुपरस्टार धर्मेंद्र जैसे सितारों के साथ होती थी. जब भी वह स्क्रीन पर इन बड़े सितारों के सामने आते, तो थिएटर में सीटियां और तालियां गूंज उठती थीं.

    बॉब क्रिस्टो की लंबी-चौड़ी काया और रौबदार व्यक्तित्व उन्हें परफेक्ट विलेन बनाता था. उन्होंने अपने करियर में करीब 200 फिल्मों में काम किया और हिंदी के साथ-साथ साउथ सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई. उनकी मौजूदगी ही किसी भी फिल्म में खतरे का एहसास पैदा कर देती थी.

    हालांकि समय के साथ उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली और बेंगलुरु में बस गए. वहां उन्होंने योगा इंस्ट्रक्टर के रूप में एक नई जिंदगी शुरू की. ग्लैमर की दुनिया से दूर वह एक साधारण जीवन जीने लगे.

    20 मार्च 2011 को 72 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी यादें आज भी फिल्मों के जरिए जिंदा हैं. बॉब क्रिस्टो की कहानी यह साबित करती है कि कभी-कभी एक छोटा सा पल या एक तस्वीर भी किसी इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकती है.