
मां ब्रह्मचारिणी का नाम ही उनके स्वरूप का परिचायक है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। यही कारण है कि उनका पूजन साधना और संयम का अभ्यास करवा कर व्यक्ति को अडिग बनाता है। जीवन या व्यवसाय में अगर कोई बड़ी बाधा बार-बार आती है तो इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा आपकी इच्छाओं को पूरा करने में मदद कर सकती है और आत्मविश्वास को नया बल देती है।
इस दिन का शुभ-मुहूर्त सुबह का समय माना गया है लेकिन विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक है। इस समय में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और सफेद या हल्के पीले वस्त्र धारण करना शुभ होता है। इससे मन और शरीर दोनों में शुद्धता आती है।
पूजन विधि सरल है लेकिन प्रभावशाली। मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और अपने कृतज्ञता भाव व्यक्त करें। मां को चमेली या कमल के फूल अर्पित करें क्योंकि ये उनके प्रिय माने जाते हैं। भोग में चीनी मिश्री या पंचामृत चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करना आवश्यक है जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र है:
“या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू।
देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥”
इस मंत्र का अर्थ है कि देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अद्भुत और दिव्य है। माता के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। साधारण मंत्र भी है: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः जिसका जाप कर श्रद्धा और भक्ति से मां की आराधना की जाती है।
इस प्रकार चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा न केवल आत्मविश्वास और संयम की शक्ति देती है बल्कि जीवन में सुख शांति और समृद्धि भी लाती है। इस दिन विधि-विधान और उचित मुहूर्त में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

20 साल बाद एशियन कप में भारत की वापसी:
भारतीय टीम 20 साल बाद एशियन कप के मुकाबले करने में सफल हुई है। टूर्नामेंट में भारत 2 अप्रैल को जापान, 5 अप्रैल को ऑस्ट्रेलिया और 8 अप्रैल को चीनी ताइपे से भिड़ेगा। ग्रुप की टॉप दो टीमें और तीनों ग्रुप में तीसरे नंबर पर रहने वाली दो सबसे अच्छी टीमें क्वार्टरफाइनल में पहुँचेंगी। चार क्वार्टर-फाइनल विजेता टीमें FIFA अंडर-20 महिला विश्व कप पोलैंड 2026 के लिए क्वालिफिकेशन हासिल करेंगी।
ट्रेनिंग और तैयारी:
स्वीडिश हेड कोच जोआकिम एलेक्जेंडरसन के नेतृत्व में टीम ने जनवरी में बेंगलुरु में ट्रेनिंग कैंप शुरू किया। इसके बाद खिलाड़ियों ने स्वीडन में एक महीने का कैंप किया, जहाँ उन्होंने स्वीडिश क्लब सीनियर टीमों के खिलाफ पांच मैत्रीपूर्ण मैच खेले। स्कैंडिनेविया से वापसी के बाद ट्रेनिंग कोलकाता में जारी रहा। कोलकाता से ही टीम शुक्रवार सुबह थाईलैंड के लिए रवाना हुई।
फाइनल टीम और कोचिंग स्टाफ:
कोच एलेक्जेंडरसन टूर्नामेंट के करीब फाइनल 23 सदस्यों वाली टीम की घोषणा करेंगे। वर्तमान 24 टीमें में गोलकीपर, डिफेंडर, मिडफील्डर और फॉरवर्ड खिलाड़ी शामिल हैं।
टीम स्ट्रक्चर:
गोलकीपर: मोनालिशा देवी मोइरंगथेम, नंदिनी, रिबंसी जामू
डिफेंडर: अलका इंदवार, सिंडी रेमरूअतपुई कोलनी, निशिमा कुमारी, रेमी थोकलोम, रुचि यादव, साहेना टीएच, शुभांगी सिंह, थोबिसाना चानू तोइजाम
मिडफील्डर: अंजू चानू कायेनपैबम, अरीना देवी नामीराकपम, भूमिका देवी खुमुकचम, मोनिशा सिंघा, नेहा, पूजा, श्रुति कुमारी
फॉरवर्ड: बबीता कुमारी, दीपिका पाल, लहिंगडेइकिम, शिल्जी शाजी, सिबानी देवी नोंग्मीकापम, सुलंजना राउल
कोचिंग स्टाफ:
हेड कोच: जोआकिम एलेक्जेंडरसन
असिस्टेंट कोच: पारोमिता सिट
गोलकीपिंग कोच: हमीद केके
भारतीय टीम की स्ट्रैटेजी और उम्मीदें
कोच एलेक्जेंडरसन का पढ़ाई है कि युवा खिलाड़ी स्कैंडिनेविया और भारत में हुई कड़ी तैयारी से मजबूत मानसिक और शारीरिक स्थिति में हैं। टीम का उद्देश्य ग्रुप स्टेज में अच्छा प्रदर्शन कर क्वार्टरफाइनल में जगह बनाना और विश्व कप के लिए क्वालीफाई करना है।

अक्सर यह देखा जाता है कि दर्शक किसी गाने को उस अभिनेता से जोड़ लेते हैं जो स्क्रीन पर नजर आता है. जबकि असल में उस गाने के पीछे एक प्लेबैक सिंगर की मेहनत और आवाज होती है. यही कारण है कि कई बार गायकों को यह महसूस होता है कि उनका योगदान उतना नहीं पहचाना जाता जितना होना चाहिए. इसी मुद्दे पर अभिजीत भट्टाचार्य ने अपने अंदाज में टिप्पणी करते हुए ध्यान खींचा.
शो में होस्ट आदित्य नारायण ने जब उनसे पूछा कि क्या अभिनेता गानों का ज्यादा क्रेडिट ले जाते हैं तो अभिजीत ने हल्के अंदाज में कहा कि अभिनेता बहुत अच्छा गाते हैं लेकिन असली फर्क यह है कि गायक दिल से गाते हैं. उनके इस बयान ने वहां मौजूद सभी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला दी लेकिन साथ ही एक गहरी बात भी सामने रख दी. उन्होंने यह संकेत दिया कि गायक अपनी भावनाओं और आत्मा को अपनी आवाज के जरिए गाने में डालते हैं जो उसे खास बनाता है.
यह बयान केवल एक मजाक नहीं था बल्कि इसमें एक गंभीर संदेश भी छिपा था. अभिजीत भट्टाचार्य ने यह जताने की कोशिश की कि गाने की असली पहचान उसकी आवाज और भावनाओं से होती है. अभिनेता भले ही उस गाने को पर्दे पर जीवंत करता है लेकिन असली मेहनत उस व्यक्ति की होती है जिसने उसे गाया है.
इस बातचीत के दौरान एक और दिलचस्प पहलू सामने आया जब आदित्य नारायण ने बताया कि अभिजीत भट्टाचार्य और उनके पिता उदित नारायण ने लगभग पैंतीस साल पहले एक साथ डुएट गाना गाया था. यह सुनकर वहां मौजूद दर्शक भावुक हो गए और पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं. यह पल भारतीय संगीत के सुनहरे दौर की एक झलक भी पेश करता है.
अभिजीत भट्टाचार्य का करियर भी इस बात का प्रमाण है कि उनकी आवाज ने भारतीय फिल्म संगीत को एक अलग पहचान दी है. उन्होंने चांद तारे मैं कोई ऐसा गीत गाऊं और तौबा तुम्हारे इशारे जैसे कई सुपरहिट गाने दिए हैं जो आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं. उनकी गायकी में एक खास तरह की भावनात्मक गहराई होती है जो श्रोताओं को सीधे जोड़ती है.
इंडियन आइडल का आने वाला एपिसोड भी खास होने वाला है जिसमें 90 के दशक के दो दिग्गज गायक अभिजीत भट्टाचार्य और कविता कृष्णमूर्ति एक साथ नजर आएंगे. यह एपिसोड पुराने दौर के संगीत को याद करने और नई पीढ़ी को उस विरासत से जोड़ने का एक सुंदर प्रयास होगा. इस तरह के एपिसोड न केवल मनोरंजन करते हैं बल्कि संगीत की असली आत्मा को भी उजागर करते हैं.

व्रत की थाली में ये चीजें जरूर शामिल करें
व्रत के दौरान प्रभाव, सुपाच्य और मोनसायटिक भोजन लेना चाहिए। थाली में मखाना, साबूदाना, कुट्टू और समुद्री फल जरूर शामिल करें। ये सभी शरीर को आवश्यक पोषक तत्व देते हैं और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं।
मखाना: परमाणु बम का सबसे अच्छा विकल्प
मखाना लो कैलोरी और हाई चॉकलेट वप्रोटीन से भरपूर होती है। इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं। इसे भूनकर या खेडगेरे का खजाना पाया जा सकता है। यह ब्लड डीवीडी कंट्रोलर और किडनी को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।
साबूदाना: तत्काल ऊर्जा का स्रोत
साबूदाना कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। यह प्रभाव और आसानी से पचने वाला होता है। इसे वड़ा या खेड के रूप में खाया जाता है। बेहतर पोषण के लिए इसे दही या मूंगफली के साथ लेना खतरनाक होता है।
कुट्टू: लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखें
कुट्टू का आटा प्रोटीन, आयरन और विविधता से भरपूर होता है। यह ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है और लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराता है। कुट्टू की रोटी, पूरी या चीला व्रत में अच्छे विकल्प हैं।
चमत्कारी फल: ताजगी और इम्युनिटी का खजाना
सेब, केला, सेंट्रा और अनार जैसे फलों को विटामिन और वस्तुएं दी जाती हैं। ये शरीर को बनाए रखते हैं, डिटॉक्स करते हैं और इम्युनिटी को मजबूत बनाते हैं।
ध्यान में क्या रखें?
व्रत के दौरान अधिकतर ताला-भुना खाने से अर्थव्यवस्था और पानी का ठहराव होता है। श्रेणी आहार लेने से शरीर पर प्रभाव, मन शांत और ऊर्जा संरक्षित रहता है।

नासिक। महाराष्ट्र के नासिक से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आध्यात्मिकता और ज्योतिष के नाम पर महिलाओं के साथ कथित यौन शोषण किए जाने का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में 67 वर्षीय ज्योतिषी अशोक खरात को गिरफ्तार किया है, जिस पर 35 वर्षीय महिला के साथ बार-बार दुष्कर्म करने का आरोप है।
पीड़िता के मुताबिक, आरोपी ने अनुष्ठान के बहाने उसे अपने पास बुलाया, नशीला पदार्थ पिलाया और सम्मोहित कर उसकी आस्था का फायदा उठाते हुए यौन उत्पीड़न किया। जांच में यह भी सामने आया है कि यह मामला केवल एक महिला तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य महिलाओं के साथ भी इसी तरह की वारदातें की गईं।
एफआईआर के अनुसार, अशोक खरात खुद को ‘कैप्टन’ बताता था और मर्चेंट नेवी से सेवानिवृत्त होने का दावा करता था। वह महिलाओं को उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं के समाधान का झांसा देकर अपने कार्यालय में बुलाता था। वहां पहुंचने के बाद उन्हें नशीला पदार्थ देकर काबू में कर लिया जाता था और फिर डर तथा अंधविश्वास का सहारा लेकर उनका शोषण किया जाता था। आरोपी महिलाओं को उनके पतियों की मौत या तंत्र-मंत्र से जुड़े भय दिखाकर चुप रहने के लिए मजबूर करता था।
जांच एजेंसियों को आरोपी के ठिकाने से एक पेन ड्राइव बरामद हुई है, जिसमें कथित तौर पर 58 महिलाओं से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो क्लिप मिले हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह एक सुनियोजित और लंबे समय से चल रहा अपराध हो सकता है।
आरोपी नासिक के पॉश कैनेडा कॉर्नर इलाके में ‘ओकस प्रॉपर्टी डीलर्स एंड डेवलपर्स’ के नाम से कार्यालय चलाता था, लेकिन पुलिस के अनुसार वहां असल में आपराधिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। उसने समाज में खुद को एक प्रभावशाली ज्योतिषी और ‘दैवीय शक्तियों’ के जानकार के रूप में स्थापित कर रखा था।
मीरगांव में उसके पास ईशान्येश्वर मंदिर और एक आलीशान विश्राम गृह भी है, जहां कथित तौर पर प्रभावशाली लोग आते-जाते थे। सिन्नर स्थित श्री ईशान्येश्वर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में भी उसकी पहचान थी और कई राजनेताओं, व्यवसायियों तथा अन्य चर्चित लोगों से उसके संबंध होने की चर्चा है।
गिरफ्तारी का नाटकीय घटनाक्रम
पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए बेहद गोपनीय अभियान चलाया। जानकारी लीक न हो, इसके लिए टीम ने रात के अंधेरे में ‘चोर-चोर’ का शोर मचाकर उसके फार्महाउस के बाहर अफरा-तफरी पैदा की और इसी दौरान घर में घुसकर उसे शयनकक्ष से गिरफ्तार कर लिया।
छापेमारी के दौरान फार्महाउस से एक पिस्तौल, जिंदा कारतूस और कई खाली खोखे बरामद हुए। इसके अलावा मंदिर और आश्रम में भी तलाशी ली गई, जहां से कई संदिग्ध दस्तावेज मिले हैं। पुलिस अब आरोपी की अन्य संपत्तियों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
एसआईटी गठित, जांच जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने आईपीएस अधिकारी तेजस्विनी सतपुते के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। नासिक क्राइम ब्रांच की टीम बरामद वीडियो और दस्तावेजों की विस्तृत जांच में जुटी है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
घटना सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू हो गई है। उद्धव ठाकरे गुट की नेता सुषमा अंधारे ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं का शोषण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और सरकार को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं तथा कितनी महिलाएं इसका शिकार बनीं।

इससे पहले कोरिया की सरकारी मीडिया आउटलेट KCNA ने बताया कि किम जोंग उन ने एक और बड़ी चुनावी जीत हासिल की है। उनकी ‘वर्कर्स पार्टी ऑफ़ कोरिया’ और उसके सहयोगियों ने 2026 के संसदीय चुनावों में 99.97% वोट और सभी सीटें जीत ली हैं। यह चुनाव 15 मार्च को 15वीं ‘सुप्रीम पीपल्स असेंबली’ (Supreme People’s Assembly) के सदस्यों को चुनने के लिए हुआ था।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक चुनाव में 99.99% रजिस्टर्ड वोटरों ने चुनाव में हिस्सा लिया। इनमें से सिर्फ 0.0037 फीसदी लोग विदेश में होने या समुद्र में काम करने की वजह से वोट नहीं डाल पाए। वहीं देश में मौजूद महज 0.00003 फीसदी लोग वोट डालने नहीं आए।
चुनाव में जिन लोगों ने वोट डाला, उनमें से 99.93% ने किम जोंग की पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन किया। हालांकि 0.07 फीसदी ने उनके खिलाफ वोट दिया। चुनावों में इतनी बड़ी जीत के बाद भी यह एक असामान्य आंकड़ा माना जा रहा है। खास बात यह है कि सरकारी मीडिया ने 1957 के बाद पहली बार ‘सुप्रीम पीपल्स असेंबली’ के चुनाव में विरोध में पड़े वोटों की बात स्वीकार की है।
सोशल मीडिया पर क्या कह रहे लोग
सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस पर खूब मजे ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर किम जोंग के होते हुए 0.07 फीसदी लोगों ने उन्हें वोट ना देने की हिम्मत कैसे कर ली। एक यूजर ने इंटरनेट पर लिखा, “एक नई खबर: इस गर्मी में देश की आबादी 0.07% कम होने की उम्मीद है।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “उन 0.07% लोगों के लिए थोड़ी देर का मौन।” एक दूसरे यूजर ने लिखा, “वो 0.07 फीसदी लोग अब देश के मोस्ट ‘वॉन्टेड’ लोग बन गए हैं।”

दो अहम समुद्री रास्ते खतरे में
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक कनेक्टिविटी के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गहॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब मार्ग इस समय जोखिम में हैं। इन दोनों इलाकों के समुद्र तल में फाइबर ऑप्टिक केबलों का विशाल नेटवर्क फैला हुआ है, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ता है।
बताया जा रहा है कि हॉर्मुज क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और संभावित सुरंगों के कारण शिपिंग और बीमा कंपनियां पहले ही सतर्क हो गई हैं। वहीं लाल सागर क्षेत्र में Houthis के हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
इंटरनेट की रीढ़ हैं ये केबल
समुद्र के नीचे बिछी ये फाइबर केबलें हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं और दुनिया के अधिकांश डेटा ट्रांसफर का आधार हैं। वीडियो कॉल, ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेवाएं—सब कुछ इन्हीं पर निर्भर करता है।
हॉर्मुज के संकरे हिस्सों में समुद्र की गहराई लगभग 200 फीट तक ही है, जिससे इन केबलों को निशाना बनाना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।
करीब 20 केबलों पर मंडरा रहा खतरा
लाल सागर और हॉर्मुज क्षेत्र में करीब 20 प्रमुख केबल मौजूद हैं, जिनमें 17 लाल सागर से होकर गुजरती हैं। हॉर्मुज मार्ग में AAE-1, Falcon, Gulf Bridge International और Tata TGN-Gulf जैसी महत्वपूर्ण लाइनें शामिल हैं। ये केबल सीधे तौर पर भारत के अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक को सपोर्ट करती हैं।
डिजिटल दुनिया पर बड़ा असर संभव
Amazon, Microsoft और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों के मिडिल ईस्ट में स्थापित डाटा सेंटर भी इन्हीं केबलों से जुड़े हैं। ऐसे में अगर कनेक्टिविटी प्रभावित होती है, तो क्लाउड सेवाएं, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर व्यापक असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, यह संकट दिखाता है कि आधुनिक दुनिया की डिजिटल लाइफलाइन कितनी नाजुक है—जहां एक क्षेत्रीय संघर्ष भी वैश्विक इंटरनेट और अर्थव्यवस्था को झकझोर सकता है।

वॉशिंगटन। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी जमीनी सैनिक नहीं भेजेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब युद्ध चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और अमेरिका की भूमिका को लेकर अटकलें तेज थीं।
व्हाइट हाउस में Sanae Takaichi के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं… और अगर भेज भी रहा होता, तो आपको नहीं बताता। लेकिन स्पष्ट कर दूं—हम वहां सैनिक नहीं भेज रहे।”
गौरतलब है कि युद्ध की शुरुआत के कुछ दिन बाद ट्रंप ने जमीनी सेना भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया था, लेकिन अब उनका रुख बदलता नजर आ रहा है।
‘जरूरत पड़ी तो कार्रवाई करेंगे’
हालांकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका पूरी तरह पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि हालात के मुताबिक जो जरूरी होगा, वह किया जाएगा। ट्रंप लंबे समय से विदेशी जमीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने के आलोचक रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने Afghanistan से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया शुरू की थी।
ईरान को बताया बड़ा खतरा
ट्रंप ने Iran को वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि “जब यह अभियान खत्म होगा, तो दुनिया पहले से ज्यादा सुरक्षित होगी।”
उन्होंने अमेरिकी सेना की ताकत का जिक्र करते हुए दावा किया कि हालिया हमलों में दागे गए 114 रॉकेट्स को एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया।
जंग लंबी खिंचने के संकेत
28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में United States और Israel एक ओर हैं, जबकि दूसरी ओर Iran डटा हुआ है। शुरुआती आकलन था कि ईरान में सत्ता परिवर्तन जल्दी हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हवाई हमलों के जरिए न तो सत्ता परिवर्तन संभव है और न ही ईरान के संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है, क्योंकि इसे गहरे भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित रखा गया है।
जमीनी युद्ध से क्यों बच रहा अमेरिका?
विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान में जमीनी युद्ध बेहद महंगा और जोखिम भरा साबित हो सकता है। वहां की भौगोलिक परिस्थितियां और सैन्य ताकत अमेरिकी सेना के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
ऐसे में ट्रंप का सैनिक न भेजने का फैसला संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल इस युद्ध को सीमित दायरे में रखकर ही आगे बढ़ना चाहता है, ताकि बड़े और लंबे जमीनी संघर्ष से बचा जा सके।