Author: bharati

  • इकोनॉमी को डिमांड का बूस्ट, FY2027 में भारत की वृद्धि दर अनुमान से ऊपर जा सकती है

    इकोनॉमी को डिमांड का बूस्ट, FY2027 में भारत की वृद्धि दर अनुमान से ऊपर जा सकती है


    नई दिल्ली। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर आशावाद जताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक मजबूत बने हुए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि घरेलू मांग में लगातार सुधार हो रहा है। ऐसे माहौल में वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि दर में ऊपर की ओर संशोधन संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापक आर्थिक स्थिरता-जैसे नियंत्रित मुद्रास्फीति, संतुलित राजकोषीय स्थिति और निवेश में सुधार-नीतिगत समर्थन के साथ विकास को गति दे सकती है। यानी ग्रोथ की कहानी सिर्फ उम्मीदों पर नहीं, ठोस आंकड़ों पर टिकी है।

    बाहरी मांग और निर्यात में सुधार की उम्मीद

    मॉर्गन स्टैनली ने बाहरी मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत देखे हैं। खासकर वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) में सुधार की संभावना जताई गई है। हालिया महीनों में वैश्विक शुल्क दरों में कमी आई है, जो पहले 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थीं। इसके अलावा भारत द्वारा कई मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) सफलतापूर्वक पूरे किए जाने से निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं। यह संकेत देता है कि भारत की ग्रोथ अब केवल घरेलू खपत पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक मांग से भी सहारा मिलेगा।

    नई जीडीपी सीरीज से अधिक सटीक तस्वीर


    सरकार ने जीडीपी गणना का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। संशोधित आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी और सकल मूल्य वर्धन (GVA) दोनों 7.8 प्रतिशत रहे। पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत आंकी गई है, जो पुराने आधार वर्ष के अनुमान 7.4 प्रतिशत से अधिक है।

    नए आधार वर्ष के तहत असंगठित क्षेत्र, डिजिटल इकोनॉमी, जीएसटी संग्रह, ई-वाहन आंकड़े और सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) जैसे नए डेटा स्रोतों को शामिल किया गया है। दोहरी अपस्फीति जैसी उन्नत पद्धतियों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुधारों से अब वृद्धि दर का अनुमान अधिक सटीक माना जा रहा है।

    आगे क्या संकेत?


    मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि यदि मौजूदा नीति समर्थन और मांग का रुझान बना रहता है, तो भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बढ़ने वालों में शामिल रह सकता है। घरेलू खपत, निजी निवेश और निर्यात-तीनों का संतुलित योगदान भारत को वित्त वर्ष 2027 में अनुमान से बेहतर प्रदर्शन की दिशा में ले जा सकता है।

  • खामेनेई की मौत पर PM मोदी की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा

    खामेनेई की मौत पर PM मोदी की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा


    नई दिल्ली। इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद दुनिया भर में हलचल मची हुई है। अमेरिकी सहयोगी इसे जायज ठहरा रहे हैं जबकि विरोधी इसे क्रूर हत्या बता रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत की तरफ से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। विपक्षी दलों ने इस चुप्पी को लेकर मोदी सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं।

    कांग्रेस का हमला: नैतिक नेतृत्व पर प्रश्न

    कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार की चुप्पी भारत की नैतिक नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न उठाती है। उनका कहना था आयतुल्ला खामेनेई और अन्य ईरानी नेताओं की हत्या पर सरकार की चुप्पी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ कुछ भी कहने की उसकी अनिच्छा को दर्शाती है। यह भारत के मूल सिद्धांतों और विदेश नीति से समझौता है। इतिहास में भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद भारत की मौन नीति उसके मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

    समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि इस समय जब घातक हमले और युद्ध आम नागरिकों से लेकर शीर्ष नेताओं तक को प्रभावित कर रहे हैं सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही यह बताना चाहिए कि भारत एक तटस्थ देश के रूप में शांति बहाली के लिए क्या कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।

    मोदी सरकार की मौन नीति और विदेश मंत्रालय का बयान
    ईरान की तरफ से रविवार को खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी थी। इसके बावजूद भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। हालांकि विदेश मंत्रालय ने शनिवार देर रात अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को लेकर एक सामान्य बयान जारी किया। इसमें कहा गया भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम से गहरी चिंता में है। सभी पक्ष संयम बरतें तनाव बढ़ाने से बचें और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाया जाना चाहिए। सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।

  • टी20 में दमदार ओपनर कैसे बने मार्करम? फाफ ने IPL को बताया गेमचेंजर

    टी20 में दमदार ओपनर कैसे बने मार्करम? फाफ ने IPL को बताया गेमचेंजर


    नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका ने टी20 विश्व कप 2026 में ग्रुप स्टेज और सुपर-8 में अजेय रहते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई है, और इस सफर में कप्तान एडन मार्करम की भूमिका बेहद अहम रही है। बतौर ओपनर उन्होंने टीम को तेज और स्थिर शुरुआत दिलाई। पूर्व कप्तान फाफ डू प्लेसिस के मुताबिक, मार्करम के खेल में यह बदलाव यूं ही नहीं आया-इसके पीछे आईपीएल का बड़ा हाथ है। ईएसपीएनक्रिकइंफो से बातचीत में डू प्लेसिस ने कहा कि Lucknow Super Giants के लिए ओपनिंग करते हुए मार्करम ने पावरप्ले में आक्रामक लेकिन संतुलित बल्लेबाजी करना सीखा। आईपीएल 2025 में उनका पावरप्ले स्ट्राइक रेट 151.13 रहा, जो उनके साथी ओपनरों-Quinton de Kock, Rohit Sharma और Will Jacks-से भी बेहतर था।

    स्ट्राइक रेट और तकनीक का संतुलन
    डू प्लेसिस ने खास तौर पर मार्करम की तकनीकी मजबूती और स्ट्राइक रेट में आए सुधार की तारीफ की। उनके मुताबिक, मार्करम ने यह साबित किया कि वह सिर्फ क्लासिकल बल्लेबाज नहीं, बल्कि आधुनिक टी20 की मांग के मुताबिक तेज रन बनाने में भी सक्षम हैं। आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर नियम के तहत मिली स्वतंत्रता ने उन्हें जोखिम लेने और मैच की रफ्तार तय करने का आत्मविश्वास दिया। मार्करम ने टीम मैनेजमेंट का भरोसा जीतते हुए यह दिखाया कि वह ओपनिंग के साथ-साथ मिडिल ऑर्डर में भी प्रभावी रह सकते हैं। लेकिन मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उन्हें अब फुल-टाइम ओपनर की भूमिका दी गई है।

    वर्ल्ड कप 2026 में दमदार प्रदर्शन
    टी20 विश्व कप 2026 में मार्करम का बल्ला जमकर बोला है। सात मैचों में तीन अर्धशतक के साथ उन्होंने 268 रन बनाए हैं। उनकी औसत 53.60 और स्ट्राइक रेट 175.16 रही है, जो उन्हें टूर्नामेंट के सबसे प्रभावशाली बल्लेबाजों में शामिल करता है। वह इस समय दक्षिण अफ्रीका के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं।

    टीम मैनेजमेंट ने SA20 में शानदार प्रदर्शन करने वाले रेयान रिकेल्टन को नंबर-3 पर भेजकर बल्लेबाजी क्रम में संतुलन बनाया है, जबकि मार्करम नई गेंद से आक्रामक शुरुआत दे रहे हैं। साफ है-आईपीएल का मंच मार्करम के लिए सिर्फ एक लीग नहीं, बल्कि टी20 में खुद को नए सांचे में ढालने की प्रयोगशाला साबित हुआ है। अब सेमीफाइनल में सबकी नजरें एक बार फिर उनके बल्ले पर टिकी होंगी।

  • रंगों के त्योहार पर मेट्रो यात्रियों के लिए अहम सूचना, एनसीआरटीसी ने जारी की एडवाइजरी

    रंगों के त्योहार पर मेट्रो यात्रियों के लिए अहम सूचना, एनसीआरटीसी ने जारी की एडवाइजरी

    नई दिल्ली: होली के रंगोत्सव के मौके पर एनसीआरटीसी ने यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। एनसीआरटीसी के अनुसार 4 मार्च को नमो भारत और मेरठ मेट्रो सेवाएं सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक बंद रहेंगी। यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों के संचालन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

    होली पर शहर में लोग रंग और पानी के साथ उत्सव मनाते हैं और इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा होते हैं। ऐसे में मेट्रो सेवाओं के सामान्य संचालन में बाधा आने की संभावना रहती है। एनसीआरटीसी ने बताया कि यही कारण है कि नमो भारत और मेरठ मेट्रो को पूरे दिन अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया है।

    मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि दिनभर चलने वाले रंग खेलने के कार्यक्रम और भीड़भाड़ को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। इस दौरान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ ट्रेनों और स्टेशनों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

    एनसीआरटीसी ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपने यात्रा की योजना बनाते समय इस समय परिवर्तन को ध्यान में रखें। यात्रा में होने वाली असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक परिवहन का उपयोग करना बेहतर होगा। अधिकारीयों ने यह भी बताया कि शाम 5 बजे के बाद सेवाएं फिर से सामान्य रूप से शुरू कर दी जाएंगी और रात 10 बजे तक चलेंगी।

    नमो भारत और मेरठ मेट्रो दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर संचालित होती हैं और रोजाना हजारों यात्रियों को सुविधा प्रदान करती हैं। त्योहार के मद्देनज़र यह अस्थायी बदलाव किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या संचालन में बाधा को रोका जा सके।

    एनसीआरटीसी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय पूरी तरह से सुरक्षा दृष्टिकोण से लिया गया है। रंग और पानी के उपयोग से मेट्रो ट्रेनों के संचालन में तकनीकी और सुरक्षा संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को बनाए रखने के लिए अस्थायी बंद आवश्यक था।

    यात्रियों के लिए सलाह दी गई है कि वे मेट्रो स्टेशन पर जाने से पहले समय का ध्यान रखें और यदि संभव हो तो सार्वजनिक या निजी वाहनों के विकल्प पर विचार करें। इसके अलावा, परिवार और दोस्तों के साथ होली के उत्सव में शामिल होने के लिए योजना बनाते समय मेट्रो की अस्थायी बंदी को ध्यान में रखें।

    एनसीआरटीसी का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि होली के रंगोत्सव का आनंद लेने वाले लोग सुरक्षित रहें और किसी अप्रत्याशित दुर्घटना का सामना न करें। इसके साथ ही ट्रेनों की देखभाल और संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

  • जंग की गूंज क्रिकेट तक! ईरान-इजरायल तनाव से जिम्बाब्वे टीम की वापसी में अड़चन

    जंग की गूंज क्रिकेट तक! ईरान-इजरायल तनाव से जिम्बाब्वे टीम की वापसी में अड़चन


    नई दिल्ली। Iran और Israel के बीच जारी टकराव का असर खेल जगत पर भी साफ दिख रहा है। टी20 विश्व कप 2026 में अपना अभियान समाप्त करने के बाद जिम्बाब्वे की टीम अब तक स्वदेश नहीं लौट पाई है। दरअसल, ईरान के जवाबी हमलों के बाद पश्चिम एशिया के कई देशों में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया, जिसके चलते दुबई एयरपोर्ट अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। जिम्बाब्वे की टीम को नई दिल्ली से दुबई होते हुए अपने देश लौटना था, लेकिन एयरपोर्ट बंद होने से उनकी कनेक्टिंग फ्लाइट रद्द हो गई। फिलहाल पूरी टीम दिल्ली में ठहरी हुई है और नई यात्रा योजना का इंतजार कर रही है।

    कोच जस्टिन सैमन्स बोले – स्थिति को नजरअंदाज करना मुश्किल


    टीम के मुख्य कोच Justin Sammons ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए ऐसी परिस्थिति मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि सभी खिलाड़ी सोमवार सुबह घर लौटने की तैयारी में थे, लेकिन अचानक हालात बदल गए। टीम के भीतर इस विषय पर लगातार चर्चा हो रही है और सभी अगली आधिकारिक सूचना का इंतजार कर रहे हैं। कोच के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच तक भी किसी संभावित व्यवधान की जानकारी नहीं थी। ऐसे में अचानक फ्लाइट रद्द होने से खिलाड़ियों की योजनाएं प्रभावित हुईं।
    वैकल्पिक रूट पर विचार, ICC भी सक्रिय

    दुबई मार्ग बाधित होने के बाद अब अदीस अबाबा के रास्ते इथियोपियन एयरलाइंस से टीम को भेजने का विकल्प तलाशा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने भी स्पष्ट किया है कि विश्व कप के बाद घर लौटने वाली टीमों और अधिकारियों के लिए वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा कार्यक्रम में बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी खिलाड़ी या स्टाफ को जोखिम का सामना न करना पड़े।

    मैदान पर शानदार सफर, सुपर-8 में थमी रफ्तार


    Sikandar Raza की कप्तानी में जिम्बाब्वे ने ग्रुप स्टेज में शानदार प्रदर्शन किया था। टीम ने ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसी मजबूत टीमों को हराकर सुपर-8 में जगह बनाई। हालांकि, अगले दौर में वेस्टइंडीज, भारत और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उसे हार का सामना करना पड़ा और अभियान यहीं समाप्त हो गया। अब टीम की नजरें सुरक्षित स्वदेश वापसी पर टिकी हैं। खेल खत्म हो चुका है, लेकिन हालात ने खिलाड़ियों की यात्रा को अनिश्चित बना दिया है। सभी को उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति सामान्य होगी और टीम सकुशल घर लौटेगी।
  • सोना-चांदी अब आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर: $5390 के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचा गोल्ड, ईरान पर हमले के बाद भारत के हर बड़े शहर में मची खलबली!

    सोना-चांदी अब आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर: $5390 के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचा गोल्ड, ईरान पर हमले के बाद भारत के हर बड़े शहर में मची खलबली!

    नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति और युद्ध की विभीषिका ने आज भारतीय सराफा बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदलकर रख दी है। इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी सीधी जंग ने न केवल मिडिल ईस्ट को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है, बल्कि इसका सीधा और घातक असर सोने-चांदी की कीमतों पर भी पड़ा है। 2 मार्च की सुबह जब देश उठा, तो सोने की कीमतें आसमान छू रही थीं। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,73,240 प्रति 10 ग्राम के अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँच गई, जिसने निवेशकों और आम खरीदारों के होश उड़ा दिए हैं।

    बाजार में इस अभूतपूर्व तेजी का मुख्य कारण 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया हवाई हमला और उसके जवाब में ईरान की भीषण मिसाइल कार्रवाई को माना जा रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। इस अनिश्चितता के माहौल में दुनिया भर के निवेशकों ने शेयर बाजार से अपना पैसा निकालकर सोने जैसे ‘सुरक्षित ठिकाने’ (Safe Haven) की ओर रुख कर लिया है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल के साथ $5,390 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर ट्रेड कर रहा है।

    भारत के महानगरों की बात करें तो मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, पुणे और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,58,660 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि 24 कैरेट की कीमत ₹1,73,090 तक जा पहुँची है। सिर्फ एक हफ्ते के भीतर सोना लगभग ₹9,430 प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली खबर चांदी की कीमतों से आई है। आज सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत में एक ही दिन में ₹35,000 प्रति किलोग्राम की ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई, जिससे दिल्ली में एक किलोग्राम चांदी का भाव ₹3,30,000 के अविश्वसनीय आंकड़े को छू गया।

    MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर भी 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 3.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ खुला, जो बाजार की घबराहट को साफ दर्शाता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और इजराइल के बीच तनाव कम नहीं हुआ और यह युद्ध एक क्षेत्रीय महायुद्ध में तब्दील हुआ, तो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चमक और भी तीखी होगी। मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने कीमती धातुओं को अब आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर कर दिया है।

  • खामेनेई के निधन पर भारत के इस गांव में तीन दिन का शोक, पूरे गांव में बंद रहा व्यापार

    खामेनेई के निधन पर भारत के इस गांव में तीन दिन का शोक, पूरे गांव में बंद रहा व्यापार


    नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के अलीपुर गांव में तीन दिन का अनौपचारिक शोक मनाया गया। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य और उनके 40 से अधिक अधिकारी मारे गए। इस घटना के बाद ईरान ने मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए।

    मिनी ईरान में शोक की लहर

    अलीपुर जिसे लंबे समय से मिनी ईरान कहा जाता है शिया मुस्लिम समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। रविवार को खामेनेई की मृत्यु की खबर की पुष्टि होते ही पूरा गांव थम गया। स्थानीय निवासियों ने स्वेच्छा से तीन दिन के लिए दुकानें और व्यवसाय बंद रखे। सुबह से ही सड़क किनारे ठेले और बाजार बंद रहे लोग समूहों में इकट्ठा हुए और खामेनेई के चित्र के साथ धार्मिक नारे लगाए।

    विरोध जुलूस और शोक प्रदर्शन

    दो दिन के शोक के बाद अंजुमन-ए-जाफरिया कमेटी के नेतृत्व में विरोध जुलूस निकाला गया। लगभग पूरे गांव ने इसमें भाग लिया। कई लोग काले वस्त्र पहनकर खामेनेई के प्रति सम्मान और शोक व्यक्त कर रहे थे।

    ईरान से ऐतिहासिक और व्यक्तिगत संबंध

    अलीपुर गांव का ईरान से जुड़ाव केवल धार्मिक नहीं बल्कि शैक्षिक और व्यापारिक भी रहा है। गांव का मूल नाम बेल्लिकुंटे था। बीजापुर आदिलशाहियों के समय शिया मुस्लिमों का एक समूह यहां बस गया और इसे अलीपुर नाम दिया गया। अधिकांश निवासी आज भी व्यापार और शिक्षा के लिए ईरान और अरब देशों से जुड़े हैं।

    खामेनेई का इस गांव से व्यक्तिगत संबंध 1986 से जुड़ा है जब वह ईरान के राष्ट्रपति के रूप में अलीपुर आए और एक स्थानीय अस्पताल का उद्घाटन किया। स्थानीय निवासी शफीक ने बताया उनका दौरा हमारे आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करने वाला था। हमारा जुड़ाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं बल्कि आस्था और धार्मिक मार्गदर्शन से भी जुड़ा है।

    स्थानीय धर्मगुरुओं का बयान

    गांव के धर्मगुरु मौलाना सैयद इब्राहिम ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह हमला बिना उकसावे के और अत्यंत निंदनीय था। उनका कहना था कि दुर्भाग्य है कि कई इस्लामी देश इस हमले पर मूक दर्शक बने हुए हैं।

  • भोपाल में फिर बम की धमकी से दहशत, 15 दिन में दूसरी बार People’s University खाली, बम निरोधक दस्ता अलर्ट

    भोपाल में फिर बम की धमकी से दहशत, 15 दिन में दूसरी बार People’s University खाली, बम निरोधक दस्ता अलर्ट

    मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal में एक बार फिर दहशत का माहौल बन गया जब People’s University को बम से उड़ाने की धमकी मिली। 15 दिनों के भीतर यह दूसरी बार है जब यूनिवर्सिटी को निशाना बनाते हुए धमकी भरा ईमेल भेजा गया है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया।

    निशातपुरा थाना क्षेत्र स्थित इस निजी विश्वविद्यालय को ईमेल के जरिए धमकी दी गई। जैसे ही प्रबंधन को इसकी जानकारी मिली, तत्काल पुलिस को सूचित किया गया। एहतियातन बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की टीम मौके पर पहुंची और पूरे कैंपस की सघन तलाशी शुरू की गई। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यूनिवर्सिटी परिसर को खाली करा लिया गया ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके।

    बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां हर कोने की बारीकी से जांच कर रही हैं। भवनों, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और हॉस्टल क्षेत्रों की तलाशी ली जा रही है। साथ ही तकनीकी टीम ईमेल भेजने वाले की पहचान और लोकेशन का पता लगाने में जुटी है।

    इससे पहले 19 फरवरी को भी इसी तरह का धमकी भरा ईमेल मिला था जिसमें कॉलेज भवन में सायनाइड जहर वाले बम रखने का दावा किया गया था और एक निश्चित समय पर विस्फोट की बात कही गई थी। उस समय व्यापक जांच के बाद धमकी को अफवाह पाया गया था। हालांकि घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    अब 15 दिन के भीतर दोबारा मिली धमकी ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन भी छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है।

    लगातार मिल रही धमकियों से छात्रों और अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है और पूरी जांच प्रक्रिया सावधानीपूर्वक जारी है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं यह शरारती तत्वों की हरकत तो नहीं या इसके पीछे कोई संगठित साजिश है।

    राजधानी में शैक्षणिक संस्थानों को मिल रही ऐसी धमकियां सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। फिलहाल सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही धमकी देने वाले की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • भक्ति का ढोंग और नियत में खोट: पुणे के जैन मंदिर में 'पुजारी' बनकर आए शातिर चोर ने उड़ाया चांदी का मुकुट, CCTV ने खोली पोल

    भक्ति का ढोंग और नियत में खोट: पुणे के जैन मंदिर में 'पुजारी' बनकर आए शातिर चोर ने उड़ाया चांदी का मुकुट, CCTV ने खोली पोल


    नई दिल्ली/पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में अपराध और आस्था का एक ऐसा संगम देखने को मिला है, जिसने न केवल जैन समुदाय बल्कि आम जनता को भी झकझोर कर रख दिया है। अक्सर लोग मंदिर में शांति और सुकून की तलाश में जाते हैं, लेकिन चिंचवड़ स्थित प्रसिद्ध भगवान श्री आदेश्वर शंकेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर में एक अपराधी “भक्ति का चोला” ओढ़कर पहुँचा। उसकी मंशा भगवान के दर्शन करना नहीं, बल्कि मंदिर की बहुमूल्य संपत्ति पर हाथ साफ करना था। इस शातिर चोर ने पुजारी की वेशभूषा धारण की ताकि किसी को उस पर संदेह न हो, और फिर बड़ी ही चालाकी से करीब ढाई लाख रुपये कीमत का चांदी का मुकुट लेकर फरार हो गया।

    पूरी घटना किसी फिल्मी सीन की तरह मंदिर के CCTV कैमरों में कैद हो गई, जिसे देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि आरोपी सबसे पहले एक सामान्य पुजारी की तरह मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करता है। वह अपनी हरकतों से खुद को एक सच्चा श्रद्धालु दिखाने की कोशिश करता है। उसने बड़ी ही सफाई से मुकुट को एक कपड़े से ढका, फिर भगवान के सामने हाथ जोड़े और कुछ देर के लिए बाहर निकल गया। यह उसकी रेकी का हिस्सा था ताकि वह देख सके कि आसपास कोई उसे देख तो नहीं रहा है। कुछ ही मिनटों के बाद वह दोबारा वापस लौटा और मौका पाते ही एक किलो वजनी चांदी का मुकुट समेटकर चंपत हो गया।

    जब मंदिर प्रबंधन को मुकुट के गायब होने का पता चला, तो इलाके में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पिंपरी-चिंचवड़ क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने तुरंत मोर्चा संभाला। पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती आरोपी की पहचान करना था क्योंकि वह पुजारी के भेष में था। हालांकि, आधुनिक तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने आरोपी के भागने के रूट को ट्रैक किया। पुलिस की मुस्तैदी का नतीजा यह रहा कि इस शातिर अपराधी को महज 48 घंटों के भीतर दबोच लिया गया।

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान नरेश अगरचंद जैन के रूप में हुई है। पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ वह और भी चौंकाने वाला था; नरेश कोई नौसिखिया चोर नहीं बल्कि एक आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ पहले से ही चोरी और सेंधमारी के करीब 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या उसने पहले भी धार्मिक स्थलों को अपना निशाना बनाया है और चोरी का माल वह किसे ठिकाने लगाता था। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने भक्तों के बीच खोई हुई सुरक्षा की भावना को फिर से जगाया है, लेकिन इस घटना ने मंदिरों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए है

  • Wrestling Federation of India ने तिराना में फंसी भारतीय महिला कुश्ती टीम को सुरक्षा का भरोसा दिया, हालात सामान्य होने तक ठहरने की व्यवस्था पुख्ता।

    Wrestling Federation of India ने तिराना में फंसी भारतीय महिला कुश्ती टीम को सुरक्षा का भरोसा दिया, हालात सामान्य होने तक ठहरने की व्यवस्था पुख्ता।

    नई दिल्ली। Iran–Israel तनाव के बीच पश्चिम एशिया में हवाई यातायात प्रभावित हुआ तो असर भारतीय महिला कुश्ती टीम पर भी पड़ा। मुहामेट मालो 2026 टूर्नामेंट के बाद दुबई मार्ग से भारत लौटने वाली टीम की फ्लाइट रद्द हो गई, जिसके कारण 16 महिला पहलवान और सपोर्ट स्टाफ अल्बानिया की राजधानी Tirana में ही रुक गए।

    स्थिति संवेदनशील होने के बावजूद राहत की बात यह है कि टीम सुरक्षित है। एयरस्पेस बंद होने के बाद भारत सरकार और रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने तुरंत दखल देते हुए खिलाड़ियों के ठहरने और सुरक्षा का इंतजाम किया। टीम एयरपोर्ट के पास एक होटल में ठहरी हुई है, जहां सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

    “हमें यहां कोई दिक्कत नहीं” – कोचों का भरोसा
    भारतीय महिला टीम के कोच मंजीत ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं है और वे सुरक्षित माहौल में हैं। मुख्य कोच वीरेंद्र सिंह ने बताया कि फ्लाइट रद्द होते ही खेल मंत्रालय और फेडरेशन की ओर से संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, टीम को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। वीरेंद्र सिंह के मुताबिक, फेडरेशन ने भरोसा दिलाया है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और वापसी की वैकल्पिक व्यवस्था पर लगातार काम किया जा रहा है।

    एयरस्पेस बंद होने से बढ़ी मुश्किलें
    ईरान द्वारा क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर जवाबी हमलों के बाद यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन समेत कई देशों ने एहतियातन अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। इसी के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा और कई रूट अस्थायी रूप से रोक दिए गए। भारतीय महिला टीम भी इसी वजह से निर्धारित समय पर स्वदेश नहीं लौट सकी।

    मुहामेट मालो 2026 में भारत का प्रदर्शन
    मुहामेट मालो 2026 रैंकिंग सीरीज के लिए भारत ने 48 सदस्यीय दल भेजा था, जिसमें फ्रीस्टाइल, महिला और ग्रीको-रोमन-तीनों वर्गों में 16-16 पहलवान शामिल थे। पुरुष फ्रीस्टाइल में अंडर-23 विश्व चैंपियन सुजीत कलकल ने 65 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। कुल मिलाकर भारत ने एक स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य पदक के साथ टूर्नामेंट का समापन किया।
    अब सबकी नजरें हालात सामान्य होने और महिला टीम की सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं। राहत की बात यही है-खिलाड़ी सुरक्षित हैं और सिस्टम उनके साथ मजबूती से खड़ा है।