Author: bharati

  • IND vs NZ: कमेंट्री में संजय बांगर की भाषा पर मचा बवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस

    IND vs NZ: कमेंट्री में संजय बांगर की भाषा पर मचा बवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस


    नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले जा रहे मुकाबले के दौरान पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय बांगर एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। लाइव कमेंट्री के दौरान उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों और भाषा को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। कई दर्शकों ने उनके बयान को आपत्तिजनक बताया, जबकि कुछ लोग इसे जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाना मान रहे हैं।

    मैच के दौरान, जब बांगर ने एक खिलाड़ी के प्रदर्शन पर टिप्पणी की, उसका एक छोटा सा क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गया। देखते ही देखते यह बयान चर्चा का केंद्र बन गया और ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर यूजर्स ने अपनी-अपनी राय देना शुरू कर दिया। कई दर्शकों ने कहा कि कमेंट्री करते समय शब्दों का चयन बेहद संवेदनशील होना चाहिए, खासकर जब करोड़ों लोग लाइव प्रसारण देख रहे हों।

    इस पर पूर्व खिलाड़ी और कमेंटेटर की जिम्मेदारी को लेकर भी बहस हुई। आलोचकों का मानना है कि संजय बांगर जैसे अनुभवी खिलाड़ी और कोच से जिम्मेदार भाषा की उम्मीद की जाती है। उनका कहना है कि क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा विषय है, और किसी भी तरह की टिप्पणी खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों को प्रभावित कर सकती है। कई यूजर्स ने यह भी कहा कि कमेंट्री का स्तर बनाए रखना ब्रॉडकास्टर्स और एक्सपर्ट्स की जिम्मेदारी है।

    वहीं, संजय बांगर के समर्थन में भी बड़ी संख्या में लोग सामने आए हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया और इसका गलत अर्थ निकाला जा रहा है।

    इस विवाद के पीछे एक और बात भी सामने आई है। कमेंटेटर वरुण आरोन ने मैच के दौरान सुझाव दिया था कि विकेटकीपर केएल राहुल को वाशिंगटन सुंदर से तमिल भाषा में बात करनी चाहिए, क्योंकि सुंदर को हिंदी समझने में थोड़ी मुश्किल होती है। जब वरुण आरोन ने इस पर बांगर से राय मांगी, तो उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रीय भाषा में थोड़ा ज्यादा विश्वास करता हूँ।” यही बयान सोशल मीडिया पर बहस का नया केंद्र बन गया।

    इस पूरे विवाद ने एक बार फिर क्रिकेट कमेंट्री में भाषा और शब्दों की मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी कई पूर्व खिलाड़ी और कमेंटेटर अपने बयानों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। लाइव टीवी पर बोले गए शब्द अक्सर रिकॉर्ड होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं, जिससे किसी भी टिप्पणी की गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है।

    फिलहाल, संजय बांगर या ब्रॉडकास्टिंग चैनल की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चैनल आंतरिक रूप से मामले पर नजर बनाए हुए है। क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में स्पष्टता और संतुलित प्रतिक्रिया बेहद जरूरी होती है, ताकि विवाद और ज्यादा न बढ़े।

    इस बीच, भारत और न्यूजीलैंड के बीच चल रहे मुकाबले की चर्चा भी इस विवाद के कारण थोड़ी पीछे छूट गई। जहां एक ओर मैदान पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन सुर्खियां बटोर रहा है, वहीं दूसरी ओर कमेंट्री बॉक्स से उठा यह बयान सोशल मीडिया पर बहस का केंद्र बन गया है।

    कुल मिलाकर, यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि सार्वजनिक मंच पर बोले गए हर शब्द की जिम्मेदारी होती है। खासकर क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में, जहां खिलाड़ी, कमेंटेटर और दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि संजय बांगर या ब्रॉडकास्टर इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या इससे कमेंट्री की भाषा को लेकर कोई नई गाइडलाइन सामने आती है या नहीं।

  • खंडवा के 7 गांवों में ज़हरीला पानी बना अभिशाप, फ्लोराइड संकट पर कांग्रेस हमलावर; बीजेपी विधायक मीडिया सवालों से बचते नजर आए

    खंडवा के 7 गांवों में ज़हरीला पानी बना अभिशाप, फ्लोराइड संकट पर कांग्रेस हमलावर; बीजेपी विधायक मीडिया सवालों से बचते नजर आए


    खंडवा । मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पीने के पानी को लेकर एक गंभीर स्वास्थ्य संकट सामने आया है। किल्लौद ब्लॉक के सात गांवों में लोग लंबे समय से फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। पानी में फ्लोराइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंचने के बावजूद न तो प्रशासन ने ठोस कदम उठाए और न ही जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने आया है। इस मुद्दे को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है।

    कांग्रेस ने खंडवा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किल्लौद ब्लॉक के ग्रामीण कई दिनों से दूषित और फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे हैं जिससे उन्हें गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकता निभाते हुए हैंडपंप और ट्यूबवेल पर लाल निशान लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। न तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों की मेडिकल जांच कराई गई और न ही पीने के सुरक्षित पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है जैसा कि हाल ही में इंदौर में देखने को मिला। नेताओं ने कहा कि हादसे के बाद नेता और अधिकारी पीड़ित परिवारों के यहां पहुंचकर संवेदनाएं जताते हैं लेकिन समय रहते अगर व्यवस्था सुधारी जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। कांग्रेस का आरोप है कि ग्रामीणों की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है।

    इस पूरे मामले पर जब स्थानीय बीजेपी विधायक नारायण पटेल से मीडिया ने सवाल पूछे तो उनका रवैया और भी विवादों में आ गया। पहले अन्य मुद्दों पर मीडिया से बातचीत करने वाले विधायक जैसे ही किल्लौद ब्लॉक में फ्लोराइड युक्त पानी का सवाल सामने आया बिना कोई जवाब दिए वहां से चले गए। मीडियाकर्मी लगातार सवाल पूछते रहे लेकिन विधायक ने चुप्पी साधे रखी। उनके इस रवैये ने न केवल विपक्ष बल्कि आम लोगों में भी नाराजगी बढ़ा दी है।ग्रामीणों का कहना है कि फ्लोराइड की अधिक मात्रा ने उनकी जिंदगी मुश्किल कर दी है। कई गांवों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 2.0 से 5.0 पीपीएम तक पाई गई है जबकि सुरक्षित सीमा इससे कहीं कम मानी जाती है। इसके चलते लोग फ्लोरोसिस दांत गिरने आंखों की रोशनी कमजोर होने बाल सफेद होने और जोड़ों में असहनीय दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई परिवारों में बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। साफ पानी की मांग और स्वास्थ्य जांच की अपील सिर्फ आश्वासनों तक सीमित रह गई है।यह मामला केवल पानी की गुणवत्ता का नहीं बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही और संवेदनशीलता का भी है। सवाल यह है कि क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद ही कार्रवाई होगी या फिर समय रहते ग्रामीणों को इस धीमे जहर से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल किल्लौद के गांवों में रहने वाले लोग उम्मीद और चिंता के बीच अपनी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

  • ATM ही नहीं, UPI से भी निकाल सकेंगे PF का पैसा; जानिए कब से लागू होगा नया नियम?

    ATM ही नहीं, UPI से भी निकाल सकेंगे PF का पैसा; जानिए कब से लागू होगा नया नियम?

    नई दिल्ली। अगर आप भी जरूरत के समय पीएफ का पैसा निकालने की लंबी प्रक्रिया से परेशान रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बड़ी राहत लेकर आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों खाताधारकों के लिए ऐसा बदलाव करने जा रहा है, जो पीएफ निकासी की परिभाषा ही बदल देगा। बहुत जल्द पीएफ का पैसा निकालने के लिए न तो दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे और न ही कई दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा। अब एटीएम ही नहीं, बल्कि UPI के जरिए भी पीएफ की रकम सीधे निकाली जा सकेगी।अगर आप भी यह सोचकर परेशान रहते हैं कि जरूरत के वक्त पीएफ का पैसा निकालना इतना कठिन क्यों है, तो अब यह परेशानी जल्द ही खत्म होने वाली है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों सदस्यों के लिए एक ऐसा डिजिटल बदलाव लाने जा रहा है, जिससे पीएफ से पैसे निकालना आसान हो जाएगा।

    अप्रैल से शुरू हो सकती है नई सुविधा
    सूत्रों के मुताबिक, EPFO अप्रैल 2026 तक एटीएम और UPI आधारित पीएफ निकासी सुविधा शुरू कर सकता है। इसके लिए संगठन अपने डिजिटल सिस्टम को पूरी तरह अपग्रेड कर रहा है। बीते साल श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने घोषणा की थी कि ईपीएफओ सदस्यों के लिए पीएफ निकासी को आसान और तेज बनाया जाएगा। इसी कड़ी में अब बिना किसी अन्य अनुमति के तय सीमा तक राशि निकालने की सुविधा देने की तैयारी है।
    EPFO 3.0 का ट्रायल पूरा
    जानकारी के अनुसार, EPFO 3.0 से जुड़े सभी मॉड्यूल्स का ट्रायल पूरा कर लिया गया है। फिलहाल कोई बड़ी तकनीकी दिक्कत सामने नहीं आई है, लेकिन इसके बावजूद संगठन किसी भी तरह की खामी से बचना चाहता है। यही वजह है कि हर एंगल से सिस्टम की टेस्टिंग की जा रही है, ताकि सुविधा लागू होने के बाद खाताधारकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
    नए सिस्टम के तहत कर्मचारियों को पीएफ खाते से जुड़ा एक एटीएम कार्ड दिया जा सकता है, जिसके जरिए वे तय सीमा तक रकम सीधे एटीएम से निकाल सकेंगे। इसके अलावा UPI के माध्यम से भी पीएफ बैलेंस से भुगतान या ट्रांसफर संभव होगा। इससे इमरजेंसी में तुरंत कैश या डिजिटल पेमेंट करना आसान हो जाएगा।

    पहले ही मिल चुकी है 75% निकासी की छूट
    गौरतलब है कि कुछ महीने पहले EPFO ने सदस्यों को पीएफ में जमा राशि का 75 प्रतिशत तक निकालने की सुविधा दी थी। इस कदम के बाद कर्मचारियों को आर्थिक संकट के समय बड़ी राहत मिली थी। अब ATM और UPI से निकासी की सुविधा शुरू होने के बाद यह प्रक्रिया और ज्यादा सरल और तेज हो जाएगी।

  • बजट फ्रेंडली एडवेंचर: हनुवंतिया टापू पर टेंट सिटी और वॉटर स्पोर्ट्स का अनुभव

    बजट फ्रेंडली एडवेंचर: हनुवंतिया टापू पर टेंट सिटी और वॉटर स्पोर्ट्स का अनुभव




    नई दिल्ली।
    यदि आप गोवा या मालदीव जैसी खूबसूरत छुट्टियों का सपना देख रहे हैं, लेकिन बजट या समय की कमी है, तो मध्यप्रदेश का हनुवंतिया टापू आपके लिए परफेक्ट विकल्प है। इंदिरा सागर बांध के विशाल जलाशय पर बसा यह ‘मिनी गोवा’ कम खर्च में समुद्र जैसी खूबसूरती, एडवेंचर और सुकून दोनों का अनुभव देता है। खासकर ठंड के मौसम में यहां का दृश्य और गतिविधियां पर्यटकों को बीच वेकेशन जैसा अहसास कराती हैं।

    हनुवंतिया टापू: एडवेंचर और प्रकृति का संगम
    हनुवंतिया टापू, जो खंडवा जिले में स्थित है, एडवेंचर प्रेमियों और नेचर लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं। यहां वॉटर स्पोर्ट्स हब तैयार किया गया है, जहां पर्यटक क्रूज राइड, स्पीड बोट, जेट स्की, बनाना राइड और वॉटर सर्फिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं।

    शांति पसंद करने वालों के लिए झील में बोटिंग का अनुभव किसी जादू से कम नहीं।

    इसके अलावा पैरासेलिंग और पैरामोटरिंग जैसी गतिविधियां टापू और आसपास फैले जलाशय का हवाई नजारा देती हैं। अगर आप एडवेंचर का और मज़ा लेना चाहते हैं तो ATV राइड (क्वाड बाइकिंग) और क्लब हाउस में मौजूद गेम्स आपकी यात्रा को और रोमांचक बना देंगे।

    प्रकृति के करीब रहना चाहते हैं तो पास के बोरियानल टापू की सैर कर सकते हैं। यहां जंगल ट्रेकिंग और वाइल्डलाइफ का अनुभव मिलता है, जो नेचर लवर्स के लिए खास है।

    कैसे पहुंचे
    हनुवंतिया टापू तक पहुंचना बेहद आसान है:
    एयरपोर्ट: नज़दीकी एयरपोर्ट इंदौर, 150 किमी दूर। टैक्सी या बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
    रेलवे: खंडवा स्टेशन सबसे नज़दीक, वहां से 50 किमी की दूरी तय करनी होती है।

    सड़क मार्ग: इंदौर, खंडवा और मुंदी होते हुए टापू तक यात्रा करना बेहद सुखद और खूबसूरत दृश्य अनुभव देता है।

    अनुमानित बजट
    अकेले यात्रा और बेसिक स्टे (2 दिन): ₹3,000–5,000
    कपल या परिवार सहित एडवेंचर: ₹8,000–12,000
    वॉटर स्पोर्ट्स: ₹300 से शुरू
    पैरासेलिंग और पैरामोटरिंग: ₹2,000 या अधिक

    रुकने की जगहें
    MPT हनुवंतिया रिजॉर्ट: झील के किनारे शानदार नजारे
    बजट विकल्प: मुंदी और खंडवा में गेस्ट हाउस और होटल्स
    टेंट सिटी: जल महोत्सव के दौरान लग्जरी कैंपिंग का अहसास

    खाना-पानी
    स्थानीय व्यंजन: मालवी थाली, दाल-बाफले, चूरमा, लड्डू
    नाश्ता: पोहा-जलेबी
    सर्दियों में: गरमा-गरम रतालू और भुट्टे का कीस

    गाइड और सुरक्षा
    स्थानीय गाइड आसानी से उपलब्ध; MPT रिजॉर्ट और टूरिज्म काउंटर से बुक करें
    जल महोत्सव में लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य
    ऑनलाइन बुकिंग पहले से कर लें और मोबाइल नेटवर्क की स्थिति जान लें

    क्यों है हनुवंतिया टापू पर जाना जरूरी?
    हनुवंतिया टापू आपकी बजट फ्रेंडली छुट्टियों की जरूरतों को पूरा करता है। चाहे आप एडवेंचर पसंद करते हों या सुकून, यहाँ की झील, टेंट सिटी, वॉटर स्पोर्ट्स और नेचर ट्रेकिंग सभी तरह के पर्यटकों को संतुष्ट करते हैं।

    इसे मिनी गोवा कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि यहां का अनुभव गोवा जैसी छुट्टी का अहसास देता है, लेकिन खर्च कम और सुविधाएं आपके बजट में आसान हैं।

    हनुवंतिया टापू की यात्रा न केवल रोमांचक है, बल्कि यह प्रकृति के करीब समय बिताने का भी मौका देती है। अगर आप इस सर्दियों में कम खर्च में शानदार एडवेंचर और नेचर का संगम अनुभव करना चाहते हैं, तो हनुवंतिया टापू आपका बेस्ट चॉइस है।

  • रांची: 10 दिन से लापता दो मासूमों का सुराग नहीं, धुर्वा में फूटा जनाक्रोश; SIT के हाथ अब भी खाली

    रांची: 10 दिन से लापता दो मासूमों का सुराग नहीं, धुर्वा में फूटा जनाक्रोश; SIT के हाथ अब भी खाली


    रांची । झारखंड की राजधानी रांची का धुर्वा इलाका इन दिनों एक गहरे गम और गुस्से की लहर में डूबा हुआ है। महज चार और पांच साल की उम्र के दो मासूम भाई-बहन, अंश और अंशिका, पिछले 10 दिनों से लापता हैं, लेकिन पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। प्रशासन की इस विफलता से स्थानीय लोगों का सब्र जवाब दे गया, जिसके परिणामस्वरूप रविवार को पूरा धुर्वा क्षेत्र बंद रहा और सड़कों पर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।

    घटना की शुरुआत 2 जनवरी 2026 को हुई थी, जब ये दोनों मासूम अपने घर के पास ही एक किराने की दुकान से सामान लेने निकले थे। खेलकूद की उम्र में दुकान तक गए ये बच्चे वापस घर नहीं लौटे। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन जब बच्चों का पता नहीं चला तो 3 जनवरी को धुर्वा थाने में औपचारिक रूप से गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। देखते ही देखते 10 दिन बीत गए लेकिन पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। बच्चों की सुरक्षित बरामदगी न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने रविवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया, जिससे इलाके का आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया।

    इस बंद का नेतृत्व राष्ट्रीय जनता दल आरजेडी के प्रदेश महासचिव कैलाश यादव द्वारा गठित एक विशेष समिति ने किया। प्रदर्शनकारियों ने मौसीबाड़ी और धुर्वा गोल चक्कर जैसे प्रमुख स्थानों पर टायर जलाकर सड़कों को जाम कर दिया। सुबह से ही प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण घंटों तक यातायात बाधित रहा जिससे राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कैलाश यादव ने कहा कि यह उन माता-पिता के लिए असहनीय पीड़ा का समय है जिनका हर पल अपने बच्चों की वापसी के इंतज़ार में बीत रहा है।

    प्रशासनिक स्तर पर, रांची पुलिस ने बच्चों की तलाश के लिए 40 पुलिसकर्मियों की एक विशेष जांच टीम SIT का गठन किया है। हालांकि, इतने बड़े कार्यबल के बावजूद अब तक कोई ठोस जानकारी हाथ न लगना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। शनिवार की शाम को भी स्थानीय निवासियों ने मौसीबाड़ी से बिरसा चौक तक एक विशाल मशाल जुलूस निकालकर सो रहे प्रशासन को जगाने की कोशिश की थी। वर्तमान में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति को हिरासत में भी लिया है। पूरा इलाका अब बस एक ही दुआ और मांग कर रहा है अंश और अंशिका की सुरक्षित वापसी।

  • ग्वालियर में देर रात बाइक सवार बदमाशों का तांडव, डंडों से एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियों के कांच फोड़े

    ग्वालियर में देर रात बाइक सवार बदमाशों का तांडव, डंडों से एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियों के कांच फोड़े


    ग्वालियर /मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में देर रात बाइक सवार बदमाशों ने जमकर आतंक मचाया। थाना क्षेत्र में रात करीब एक बजे तीन बदमाशों ने सड़कों पर उत्पात मचाते हुए घरों के बाहर और सड़क किनारे खड़ी एक दर्जन से अधिक गाड़ियों के कांच तोड़ दिए। अचानक हुई इस तोड़फोड़ से इलाके में दहशत का माहौल बन गया और सुबह जब लोग अपने घरों से बाहर निकले तो टूटे कांच देखकर सन्न रह गए।

    घटना ग्वालियर थाना क्षेत्र के रामटापुरा इलाके से शुरू हुई, जहां से बाइक सवार बदमाश सेवा नगर होते हुए किला गेट तक पहुंचे। इस पूरे रास्ते में जहां-जहां उन्हें कार, लोडिंग वाहन या अन्य गाड़ियां खड़ी मिलीं, उन्होंने बिना किसी डर के डंडों से उनके शीशे तोड़ दिए। बदमाश लगातार चलते रहे और पीछे तबाही के निशान छोड़ते गए।सुबह जब वाहन मालिकों ने अपनी गाड़ियों को देखा तो कई कारों के आगे और साइड के कांच टूटे हुए थे। इससे न केवल आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

    इस मामले में एक अहम सुराग उस समय मिला जब रामटापुरा इलाके में लगे एक सीसीटीवी कैमरे की फुटेज सामने आई। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि बदमाश बाइक से उतरकर हाथ में डंडा लिए दौड़ रहे हैं और एक घर के बाहर खड़ी लोडिंग गाड़ी के कांच बेरहमी से तोड़ रहे हैं। वीडियो में बदमाशों की हरकतें इतनी बेखौफ नजर आईं कि लोगों में नाराजगी और डर दोनों बढ़ गए।सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती पूछताछ में बदमाशों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्होंने इस वारदात को क्यों अंजाम दिया। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना के पीछे कोई आपसी रंजिश, नशे की हालत या किसी अन्य कारण की भूमिका तो नहीं है।

    गाड़ी मालिकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं आम लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं। उनका आरोप है कि रात के समय पुलिस गश्त और निगरानी मजबूत होती तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं होती। पीड़ितों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई इस तरह का दुस्साहस न कर सके।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चारों संदिग्धों के खिलाफ वाहन क्षति और सार्वजनिक शांति भंग करने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गश्त बढ़ाई जाएगी।

  • पश्चिम बंगाल: हुगली में नाबालिग से दरिंदगी, TMC नेता समेत दो गिरफ्तार; सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

    पश्चिम बंगाल: हुगली में नाबालिग से दरिंदगी, TMC नेता समेत दो गिरफ्तार; सुरक्षा पर फिर उठे सवाल


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक बंद पड़ी फैक्ट्री के भीतर 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि राज्य की सियासत में भी उबाल ला दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस TMC का स्थानीय युवा नेता बताया जा रहा है।

    पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह वीभत्स घटना गुरुवार शाम की है जब उत्तरपाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बंद पड़ी हिंद मोटर फैक्ट्री के परिसर में पीड़िता अपनी एक सहेली के साथ गई थी। आरोप है कि वहाँ आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर नाबालिग को बंधक बनाया और उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच शुरू की गई। शनिवार को पुलिस ने बताया कि इस मामले में पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपांकर अधिकारी उर्फ सोनाई और एक अन्य नाबालिग के रूप में हुई है।

    दीपांकर अधिकारी इलाके में टीएमसी का सक्रिय युवा चेहरा माना जाता है। वहीं दूसरा आरोपी कथित तौर पर पीड़िता का पूर्व परिचित बताया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भाजपा की वरिष्ठ नेता और विधायक अग्निमित्रा पॉल ने ममता बनर्जी सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बंगाल में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। पॉल ने दुख जताते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि एक महिला मुख्यमंत्री के शासन में इस तरह की आपराधिक गतिविधियां आम हो गई हैं।
    उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग की है।दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में खुद को कानून के साथ खड़ा बताया है। स्थानीय टीएमसी नेता निताई दासगुप्ता ने स्वीकार किया कि गिरफ्तार आरोपी उनकी पार्टी का सदस्य है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी तरह के अपराध का समर्थन नहीं करती। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से आरोपी को तुरंत निष्कासित करने की मांग की है। टीएमसी नेता अजय शंकर ने भी दोहराया कि कानून अपना काम करेगा और जो भी दोषी होगा उसे कड़ी सजा भुगतनी होगी। फिलहाल पुलिस अन्य फरार संदिग्धों की तलाश में जुटी है और इलाके में तनाव को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

  • BMC चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की बढ़ी टेंशन, अपनों के बयानों से बिगड़ सकते हैं सियासी समीकरण

    BMC चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की बढ़ी टेंशन, अपनों के बयानों से बिगड़ सकते हैं सियासी समीकरण


    नई दिल्ली । एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के चुनाव से ठीक 48 घंटे पहले सियासी माहौल अचानक गरमा गया है। 15 जनवरी 2026 को होने वाले मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी के लिए हालात आसान नहीं दिख रहे। वजह विपक्ष नहीं, बल्कि पार्टी के अपने नेताओं के बयान हैं, जिन्होंने मुंबई की पहचान और मराठी अस्मिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    चुनावी प्रचार के दौरान बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी। अन्नामलाई ने कहा कि मुंबई सिर्फ महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि एक इंटरनेशनल शहर है। उन्होंने मुंबई के 75 हजार करोड़ रुपये के बजट की तुलना चेन्नई और बेंगलुरु से करते हुए इसे वैश्विक शहर बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब बीएमसी चुनाव में मराठी अस्मिता एक संवेदनशील और निर्णायक मुद्दा बना हुआ है।अन्नामलाई के बयान को महाराष्ट्र में कई राजनीतिक दलों ने मराठी पहचान पर हमला करार दिया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे मुंबई को महाराष्ट्र से अलग दिखाने की कोशिश बताया। राज ठाकरे के अलावा शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और बीजेपी पर मराठी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।

    इसी बीच उत्तर प्रदेश के जौनपुर से बीजेपी के पूर्व सांसद कृपाशंकर सिंह के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया। चुनाव प्रचार के दौरान सिंह ने कहा कि मीरा-भाईंदर का मेयर उत्तर भारतीय होना चाहिए और इतने हिंदी भाषी पार्षद चुने जाने चाहिए कि महानगर पालिका में उत्तर भारतीय मेयर बने। इस बयान ने भी स्थानीय राजनीति में भूचाल ला दिया।शिवसेना उद्धव गुट और मनसे ने इन बयानों को मुद्दा बनाते हुए बीजेपी की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। मनसे नेता अविनाश जाधव ने कहा कि बीजेपी मराठी लोगों का वोट सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए चाहती है, जबकि असल में पार्टी की नीति उत्तर भारतीय राजनीति को बढ़ावा देने की है। शिवसेना नेताओं ने भी प्रचार में इसे मराठी मानुष के अपमान के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है।

    बढ़ते विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कई चुनावी सभाओं में दोहराया कि बीजेपी ने कभी मराठी अस्मिता से समझौता नहीं किया है और न ही भविष्य में करेगी। सीएम फडणवीस ने कहा कि बीजेपी ही मराठी मानुष, मराठी माटी और महाराष्ट्र की संस्कृति की सच्ची आवाज है।हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान से ठीक पहले इस तरह के बयान बीजेपी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। बीएमसी जैसे बड़े नगर निगम में स्थानीय पहचान और भावनाएं हमेशा निर्णायक भूमिका निभाती रही हैं। ऐसे में अपनों के बयान चुनावी समीकरणों को अंतिम समय में बदल सकते हैं और इसका सीधा असर मतदान पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • Lohri 2026 Items: लोहरी की आग में अर्पित करें ये 4 खास चीजें, सुख-समृद्धि में होगी वृद्धि

    Lohri 2026 Items: लोहरी की आग में अर्पित करें ये 4 खास चीजें, सुख-समृद्धि में होगी वृद्धि

    नई दिल्ली। भारत के प्रमुख लोक पर्वों में शामिल लोहड़ी इस वर्ष 13 जनवरी 2026 को पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। खासतौर पर उत्तर भारत, पंजाब, हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में इस पर्व का विशेष महत्व है। लोहड़ी रबी फसलों की कटाई की शुरुआत, ठंड के मौसम के समापन और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन किसान अच्छी फसल के लिए ईश्वर का आभार प्रकट करते हैं और आने वाले साल में समृद्धि की कामना करते हैं।

    लोहड़ी की रात और अग्नि पूजा का महत्व
    लोहड़ी की रात को पवित्र अग्नि प्रज्वलित कर उसकी परिक्रमा करने की परंपरा है। मान्यता है कि अग्नि में अर्पित की गई सामग्री के माध्यम से अग्निदेव और सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। श्रद्धालु अग्नि के चारों ओर घूमते हुए सुख-शांति, स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। यह पर्व सामाजिक एकता और पारिवारिक मेल-मिलाप का भी प्रतीक है।

    लोहड़ी की पवित्र अग्नि में क्या अर्पित करना होता है शुभ
    लोहड़ी के अवसर पर अग्नि में कुछ विशेष चीजें अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि इन वस्तुओं का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है।

    तिल: नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक
    लोहड़ी की अग्नि में तिल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिल पापों का नाश करता है और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। साथ ही तिल वातावरण को भी शुद्ध करता है, जिससे घर और परिवार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    गुड़: रिश्तों में मिठास और सौहार्द
    गुड़ को मिठास और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी की अग्नि में गुड़ डालने से पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में मधुरता आती है। मान्यता है कि इससे आपसी मतभेद दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

    मूंगफली: अच्छी फसल और समृद्धि की कामना
    मूंगफली को अन्न का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से किसानों के लिए लोहड़ी के दिन अग्नि में मूंगफली अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। ऐसा करने से आने वाले वर्ष में अच्छी फसल और आर्थिक समृद्धि की संभावना बढ़ती है।

    रेवड़ी: खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा
    लोहड़ी के पर्व पर रेवड़ी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि अग्नि में रेवड़ी अर्पित करने से बुरी शक्तियों का नाश होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    आस्था और परंपरा का संगम
    लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। अग्नि में अर्पित की जाने वाली ये चार चीजें जीवन में खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मकता लाने का प्रतीक मानी जाती हैं।

  • Mardaani 3 Trailer: 93 बच्चियों की जिंदगी बचाएंगी रानी मुखर्जी, 'अम्मा' से होगी भिडंत, खतरनाक है 'मर्दानी 3' का ट्रेलर

    Mardaani 3 Trailer: 93 बच्चियों की जिंदगी बचाएंगी रानी मुखर्जी, 'अम्मा' से होगी भिडंत, खतरनाक है 'मर्दानी 3' का ट्रेलर

    नई दिल्ली।मर्दानी 3 का ट्रेलर देखकर आपके भी मुंह से शायद यही लफ्ज निकलेगा. बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी की मच-अवेटेड फिल्म ‘मर्दानी 3’ का ट्रेलर रिलीज हो चुका है. 3 मिनट 16 सेकेंड का ये ट्रेलर आपके रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है. एक्ट्रेस एक बार फिर अपने आइकॉनिक किरदार शिवानी शिवाजी रॉय के रूप में बड़े पर्दे पर वापसी करने के लिए तैयार हैं.
    मर्दानी 3 का ट्रेलर रिलीज
    फिल्म भले ही सच्ची घटनाओं से इंस्पायर्ड बताई जाती है, लेकिन ट्रेलर में कहानी का कहने का अंदाज बेहद डरावना है. मर्दानी 3 आपको अंदर तक उस जुर्म का एहसास कराती है.
    ट्रेलर शुरू होता है, एक खेलती हुई बच्ची के किडनैप होने से. इसके बाद बताया जाता है कि शहर में लगातार छोटी-छोटी बच्चियों का अपहरण हो रहा है. इस केस को सॉल्व करने के लिए शिवानी शिवाजी रॉय को बुलाया जाता है. जब केस की पड़ताल की जाती है तो पता चलता है कि पिछले तीन महीनों में 93 बच्चियों को किडनैप किया जा चुका है. और इन सब अपराध के पीछे ‘अम्मा’ का हाथ है.

    अम्मा किसी डरावने सपने से भी ज्यादा डरावनी है. वो बच्चियों का अपहरण करके उनके साथ क्या करती है क्या नहीं ये ट्रेलर में करीने से छुपाया गया है. लेकिन जितनी कहानी भी ये झलक कहती है वो आपके दिल को जोर से धड़काने के लिए काफी है.
    ‘मर्दानी 3’ के ट्रेलर में जबरदस्त एक्शन सीक्वेंस, तगड़े डायलॉग्स और मजबूत बैकग्राउंड स्कोर देखने को मिलता है. रानी का रफ-टफ पुलिस अवतार फैंस को फिर से ‘मर्दानी’ और ‘मर्दानी 2’ की याद दिला देता है. ट्रेलर में दिखाया गया है कि इस बार शिवानी शिवाजी रॉय की लड़ाई सिर्फ अपराधियों से नहीं, बल्कि एक खतरनाक सिस्टम से भी है.

    ट्रेलर रिलीज होते ही फैंस ने रानी मुखर्जी की जमकर तारीफ शुरू कर दी है. कमेंट सेक्शन में ‘रानी इज बैक’ की भरमार है. कोई उनके एक्शन अवतार को सलाम कर रहा है, तो कोई कह रहा है कि ‘मर्दानी 3’ अब तक की सबसे पावरफुल फिल्म साबित हो सकती है.

    मर्दानी फ्रेंचाइजी की तीसरी किस्त

    ‘मर्दानी’ साल 2014 में रिलीज हुई थी, जबकि ‘मर्दानी 2’ 2019 में आई थी. दोनों ही फिल्मों को दर्शकों और क्रिटिक्स से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था. अब ‘मर्दानी 3’ से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं. फिल्म पूरी तरह से फीमेल सेंट्रीक होने वाली है. इसमें जानकी बोड़ीवाला और मल्लिका प्रसाद भी अहम रोल में हैं. मर्दानी 3 सिनेमाघरों में 30 जनवरी को रिलीज होगी