Author: bharati

  • बांग्लादेश में इस्लामिक राज्य बनने की संभावना भारत की सुरक्षा पर गंभीर खतरा हसीना के बेटे का दावा

    बांग्लादेश में इस्लामिक राज्य बनने की संभावना भारत की सुरक्षा पर गंभीर खतरा हसीना के बेटे का दावा



    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश में अगले साल फरवरी में होने वाले आम चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की चुनावी भागीदारी पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। इस बीच शेख हसीना के बेटे और सलाहकार सजेब वाजेद जॉय ने बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जॉय ने कहा कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में चल रही सरकार बांग्लादेश को इस्लामिक राज्य बनाने की दिशा में काम कर रही है जो न केवल देश के लिए बल्कि भारत के लिए भी एक बड़ा सुरक्षा खतरा हो सकता है।

    जॉय ने कहा कि इस सरकार के तहत आतंकवादी संगठन जैसे लश्कर-ए-तैयबा को पूरी छूट मिल रही है जिससे भारत के लिए आतंकवाद का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस संगठन की गतिविधियों को रोकने के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत है। जॉय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल में तनाव बढ़ता जा रहा है और चुनावों को लेकर विभिन्न पार्टियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा हो रही है।

    सजेब वाजेद जॉय ने आगे कहा कि बांग्लादेश में मानवाधिकार उल्लंघन की स्थिति भी बहुत गंभीर हो गई है खासकर अल्पसंख्यकों के खिलाफ। उनका आरोप है कि यूनुस सरकार के तहत बांग्लादेश में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है और विपक्षी पार्टियों को दबाया जा रहा है। इस स्थिति ने देश के भीतर असंतोष और अस्थिरता को बढ़ावा दिया है जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए एक खतरे की घंटी है।

    वाजेद जॉय के इस बयान ने बांग्लादेश के राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है और यह दर्शाता है कि बांग्लादेश में शासन के वर्तमान स्वरूप और भविष्य की दिशा को लेकर गहरी चिंताएं हैं। भारत के लिए भी इस स्थिति को नजरअंदाज करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि बांग्लादेश का भारत के साथ गहरा भौगोलिक और राजनीतिक संबंध है।

    इन हालातों में भारत के सुरक्षा तंत्र को बांग्लादेश में चल रही घटनाओं और उनके संभावित परिणामों पर लगातार निगरानी रखनी होगी ताकि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहा जा सके। इस बयान ने भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में न केवल तनाव को बढ़ाया है बल्कि दोनों देशों की सुरक्षा की साझा चिंता को भी उजागर किया है।

  • मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित ‘बाबरी शैली’ मस्जिद पर सियासी हलचल, हुमायूं कबीर का बड़ा दावा-65 फुट से ऊंची होगी इमारत

    मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित ‘बाबरी शैली’ मस्जिद पर सियासी हलचल, हुमायूं कबीर का बड़ा दावा-65 फुट से ऊंची होगी इमारत


    नई दिल्ली / मुर्शिदाबाद /पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक और सियासी मुद्दों का मेल चर्चा का विषय बन गया है। तृणमूल कांग्रेस TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद शैली की मस्जिद को लेकर कई अहम दावे किए हैं। उनका कहना है कि यह मस्जिद पहले से ज्यादा ऊंची चौड़ी और भव्य होगी जिसकी ऊंचाई 65 फुट से भी अधिक रखी जाएगी। कबीर के इन बयानों ने न केवल राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर नजरें टिक गई हैं।समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में हुमायूं कबीर ने कहा कि मस्जिद के निर्माण के लिए अब तक 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जुटाई जा चुकी है। इसके अलावा निर्माण सामग्री भी आ चुकी है जिसकी अनुमानित कीमत डेढ़ से दो करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जिस मॉडल पर यह मस्जिद बनाई जा रही है वह पहले की तुलना में अधिक ऊंचा और चौड़ा होगा ताकि इसे एक भव्य धार्मिक संरचना के रूप में विकसित किया जा सके।

    हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में इस मस्जिद की नींव रखी थी। इसके बाद से ही राजनीतिक विवाद तेज हो गया। माना जा रहा है कि इस कदम से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नाराज हुईं जिसके बाद टीएमसी ने कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया। हालांकि पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। कबीर का कहना है कि उन्होंने यह कदम सामाजिक और धार्मिक भावना के तहत उठाया है न कि किसी राजनीतिक उकसावे के लिए।राजनीतिक भविष्य को लेकर हुमायूं कबीर ने यह भी ऐलान किया है कि वह 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी की घोषणा करेंगे। उनके अनुसार यह घोषणा दोपहर 12 से 1 बजे के बीच की जाएगी। माना जा रहा है कि नई पार्टी के जरिए कबीर राज्य की राजनीति में एक नया विकल्प पेश करने की कोशिश करेंगे खासकर अल्पसंख्यक समुदाय के मुद्दों को लेकर।

    इसी बीच सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन AIMIM की पश्चिम बंगाल इकाई ने हुमायूं कबीर के साथ संभावित गठबंधन के संकेत दिए हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी ने कहा कि कबीर से बातचीत चल रही है और आने वाले विधानसभा चुनावों में कुछ सीटों पर तालमेल की संभावना तलाशी जा रही है। सोलंकी के अनुसार कबीर अल्पसंख्यकों की आवाज के रूप में उभरे हैं और AIMIM उनके साथ राजनीतिक सहयोग पर विचार कर रही है।हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला AIMIM के राष्ट्रीय नेतृत्व यानी असदुद्दीन ओवैसी द्वारा लिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय स्तर पर AIMIM ने फिलहाल किसी भी औपचारिक गठबंधन से इनकार किया है जिससे सियासी तस्वीर और जटिल हो गई है।

    हुमायूं कबीर ने एसआईआर Special Intensive Revision जैसे मुद्दों पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इसका मुर्शिदाबाद में कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उनका दावा है कि स्थानीय स्तर पर जनता उनके साथ है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक लाभ उन्हें मिलेगा।कुल मिलाकर बाबरी मस्जिद शैली की इस प्रस्तावित मस्जिद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। धार्मिक भावनाओं राजनीतिक गठजोड़ और आगामी चुनावों के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और भी तूल पकड़ सकता है।

  • दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण: आज से वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य, बिना PUC पेट्रोल पर रोक और वाहनों पर सख्त पाबंदियां

    दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण: आज से वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य, बिना PUC पेट्रोल पर रोक और वाहनों पर सख्त पाबंदियां

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। लगातार बिगड़ते एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI के कारण लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने आज से कई सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं जिनका असर आम नागरिकों से लेकर दफ्तरों, ट्रांसपोर्ट और निर्माण कार्यों तक साफ तौर पर देखने को मिलेगा। ये सभी कदम GRAP-IV ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लानके तहत उठाए गए हैं ।

    सबसे बड़ा फैसला दफ्तरों को लेकर लिया गया है। दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी और निजी संस्थानों में वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य कर दिया है। श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने साफ कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी। आदेश के मुताबिक, निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारी एक साथ ऑफिस में मौजूद नहीं हो सकते। बाकी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। हालांकि, इमरजेंसी सेवाओं और फ्रंटलाइन वर्कर्स को इससे छूट दी गई है। इसमें अस्पताल, स्वास्थ्य सेवाएं, फायर डिपार्टमेंट, प्रदूषण नियंत्रण, ट्रांसपोर्ट और सैनिटेशन जैसी जरूरी सेवाएं शामिल हैं।

    प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण गतिविधियों पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। सरकार का कहना है कि GRAP-IV लागू रहने तक सभी तरह के निर्माण और तोड़-फोड़ के काम बंद रहेंगे। इससे प्रभावित होने वाले मजदूरों के लिए राहत की घोषणा भी की गई है। दिल्ली सरकार ऐसे पंजीकृत मजदूरों को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी, ताकि उनकी आजीविका पर तत्काल असर न पड़े। इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सरकार ने बिना PUC पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट के पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगा दी है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि अब पेट्रोल पंपों पर PUC सर्टिफिकेट की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों को ईंधन नहीं मिलेगा। PUC सर्टिफिकेट अधिकृत केंद्रों पर वाहन की उत्सर्जन जांच के बाद जारी होता है। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए इसकी फीस 60 रुपये, चारपहिया के लिए 80 रुपये और डीजल वाहनों के लिए 100 रुपये तय की गई है। BS-IV और BS-VI वाहनों के लिए इसकी वैधता 12 महीने की होती है।

    इसके अलावा, निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रकों की दिल्ली में एंट्री पर भी रोक लगा दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-6 से नीचे के सभी वाहनों को GRAP-3 और GRAP-4 के दौरान राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। बाहर से आने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे केवल BS-6 मानक वाले वाहन ही दिल्ली लाएं।दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें पेट्रोल पंपों, प्रमुख सड़कों और बॉर्डर पॉइंट्स पर तैनात की गई हैं, ताकि नियमों का सख्ती से पालन कराया जा सके। साथ ही, सरकार वाहन प्रदूषण कम करने के लिए एक कारपूलिंग ऐप लॉन्च करने की योजना पर भी काम कर रही है।सरकार का मानना है कि ये कड़े फैसले अस्थायी हैं लेकिन इनका मकसद दिल्ली के लोगों को साफ और सुरक्षित हवा देना है। यदि हालात में सुधार होता है तो पाबंदियों में ढील दी जा सकती है, लेकिन फिलहाल सभी नागरिकों से नियमों का पालन करने और सहयोग करने की अपील की गई है।

  • आउटसाइडर से सुपरस्टार: ऋचा चड्ढा की वो कहानी, जो हर सपने देखने वाले के लिए मिसाल है।

    आउटसाइडर से सुपरस्टार: ऋचा चड्ढा की वो कहानी, जो हर सपने देखने वाले के लिए मिसाल है।


    नई दिल्ली /बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता खासकर तब जब कोई फिल्मी बैकग्राउंड या गॉडफादर न हो। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है अभिनेत्री ऋचा चड्ढा की जो आज 18 दिसंबर को अपना जन्मदिन मना रही हैं। अमृतसर पंजाब में जन्मीं ऋचा ने मेहनत टैलेंट और बेबाक अंदाज के दम पर इंडस्ट्री में खुद को साबित किया।कभी मैगजीन में इंटर्न के तौर पर काम करने वाली ऋचा आज बॉलीवुड की बिंदास और बेखौफ हीरोइन के रूप में जानी जाती हैं। उनकी दमदार एक्टिंग के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास और साफगोई भी उन्हें खास बनाता है। यही वजह है कि उनके लुक्स और पर्सनैलिटी परमिर्जापुर फेम अभिनेता अली फजल भी दिल हार बैठे।

    मैगजीन की डेस्क से मायानगरी तक
    बहुत कम लोग जानते हैं कि एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले ऋचा चड्ढा ने मेंस फैशन मैगजीन में इंटर्नशिप की। मीडिया और फैशन इंडस्ट्री का अनुभव लेने के बाद उन्होंने अभिनय की ओर कदम बढ़ाया। साल 2008 में आई फिल्मओए लकी! लकी ओए! से ऋचा ने बॉलीवुड में डेब्यू किया। हालांकि इस फिल्म में उनका रोल छोटा था और उन्हें तुरंत बड़ी पहचान नहीं मिली लेकिन यह उनके संघर्ष की मजबूत नींव बना।

    गैंग्स ऑफ वासेपुर से बदली किस्मत

    ऋचा के करियर में बड़ा मोड़ 2012 में आया जब उन्होंने अनुराग कश्यप की कल्ट फिल्मगैंग्स ऑफ वासेपुर में नगमा का किरदार निभाया। उनके अभिनय को दर्शकों और क्रिटिक्स ने खूब सराहा और उन्हें फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड से नवाजा गया। इसके बादमसान औरगोलियों की रासलीला-रामलीला जैसी फिल्मों में ऋचा ने अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया।

    भोली पंजाबन बनी पहचान

    साल 2013 में आई फिल्मफुकरे ने ऋचा की इमेज पूरी तरह बदल दी। फिल्म में उनकाभोली पंजाबन वाला किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि वही नाम उनकी पहचान बन गया। इसके बादफुकरे रिटर्न्स में भी उनका किरदार हिट रहा और ऋचा बॉलीवुड की सबसे बेबाक अभिनेत्रियों में शुमार हो गईं।

    अली फजल संग प्यार और परिवार

    ऋचा की प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ उनकी पर्सनल लाइफ भी चर्चा में रही।फुकरे के सेट पर उनकी मुलाकात अली फजल से हुई जो दोस्ती से प्यार में बदल गई। 2019 में अली ने मालदीव में ऋचा को प्रपोज किया। 2022 में दोनों शादी के बंधन में बंधे और 2024 में बेटी जुनैरा इदा फजल का स्वागत किया।

  • सर्दियों में भी रहें हाइड्रेटेड: पानी और गर्म ड्रिंक्स के 5 आसान टिप्स

    सर्दियों में भी रहें हाइड्रेटेड: पानी और गर्म ड्रिंक्स के 5 आसान टिप्स


    नई दिल्ली
    /सर्दियों में लोग अक्सर यह सोचते हैं कि गर्म मौसम की तरह डिहाइड्रेशन का खतरा नहीं है। लेकिन सच यह है कि ठंड के मौसम में भी शरीर में पानी की कमी चुपचाप असर डालती है। कम प्यास लगना, हीटर, ब्लोअर और गर्म कपड़े शरीर से नमी को निकाल लेते हैं। इसके अलावा, सर्दियों में चाय, कॉफी या अल्कोहल का ज्यादा सेवन भी डिहाइड्रेशन बढ़ा देता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह थकान, सिरदर्द, रूखी त्वचा और कमजोर इम्यूनिटी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

    क्यों बढ़ता है सर्दियों में डिहाइड्रेशन का खतरा?
    सर्दियों में पसीना जल्दी सूख जाता है, जिससे पानी की कमी महसूस नहीं होती। प्यास का संकेत कमजोर होने के कारण लोग पर्याप्त पानी पीना भूल जाते हैं। हीटर और ब्लोअर से हवा में नमी कम हो जाती है और गर्म कपड़े भी शरीर से पानी सोख लेते हैं। यही कारण है कि ठंड में भी हाइड्रेशन पर ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

    सर्दियों में हाइड्रेटेड रहने के 5 आसान हैक्स

    1. पानी पीने की आदत बनाएं
    सिर्फ प्यास लगने पर पानी पीने की आदत छोड़ दें। सुबह उठते ही 1–2 गिलास गुनगुना पानी पिएं। दिनभर हर 1–2 घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। मोबाइल रिमाइंडर सेट करना इस आदत को बनाए रखने में मदद करता है।

    2. गुनगुने और हेल्दी ड्रिंक्स अपनाएं
    ठंड में ठंडा पानी पीने का मन नहीं करता, इसलिए गुनगुना पानी या हर्बल ड्रिंक्स पीना बेहतर रहता है। नींबू पानी, अदरक और दालचीनी का काढ़ा शरीर को हाइड्रेट रखता है और इम्यूनिटी भी बढ़ाता है। गर्म ड्रिंक्स पाचन को बेहतर बनाने और शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करती हैं।

    3. सूप और शोरबा शामिल करें
    सर्दियों में सूप, सब्जियों का शोरबा, दलिया और दही डाइट में शामिल करें। संतरा, सेब और अमरूद जैसे फलों में भी पानी और पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं। ये न केवल हाइड्रेशन बनाए रखते हैं, बल्कि शरीर को ठंड से लड़ने के लिए आवश्यक विटामिन और मिनरल भी देते हैं।

    4. कैफीन और शराब का संतुलन रखें
    चाय, कॉफी और शराब का ज्यादा सेवन शरीर से पानी निकाल देता है। अगर इनका सेवन करें, तो पर्याप्त पानी पीना सुनिश्चित करें। पानी के साथ ही कैफीन और अल्कोहल के नुकसान को कम किया जा सकता है।

    5. शरीर के संकेतों को पहचानें
    रूखे होंठ, सूखी त्वचा, गहरा पीला यूरिन, थकान, चक्कर और सिरदर्द डिहाइड्रेशन के मुख्य संकेत हैं। इन संकेतों को नजरअंदाज न करें और तुरंत पानी या गर्म ड्रिंक्स लें।सर्दियों में पर्याप्त हाइड्रेशन बनाए रखना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। छोटे-छोटे कदम अपनाकर आप न केवल डिहाइड्रेशन से बच सकते हैं, बल्कि ठंड के मौसम में भी एनर्जी और इम्यूनिटी बनाए रख सकते हैं। गुनगुने पानी, सूप, शोरबा और हेल्दी ड्रिंक्स को अपनी डाइट में शामिल करके आप शरीर को फुली हाइड्रेटेड रख सकते हैं और सर्दियों का मजा सुरक्षित तरीके से ले सकते हैं।

  • दिल्ली से पास ये 5 खूबसूरत हिल स्टेशन, 4 दिन के लॉन्ग वीकेंड में बनाएं परफेक्ट ट्रिप प्लान

    दिल्ली से पास ये 5 खूबसूरत हिल स्टेशन, 4 दिन के लॉन्ग वीकेंड में बनाएं परफेक्ट ट्रिप प्लान


    नई दिल्ली
    /क्रिसमस और न्यू ईयर के आसपास मिलने वाला लॉन्ग वीकेंड घूमने-फिरने के शौकीनों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं होता। दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले लोग अक्सर यह सोचते हैं कि कम समय में कौन-सी जगह जाएंजहां सुकून भी मिले और त्योहारों का मजा भी। अगर आप भी 26 दिसंबर की छुट्टी लेकर 4 दिन का लॉन्ग वीकेंड प्लान कर रहे हैंतो दिल्ली से कुछ ही घंटों की दूरी पर मौजूद ये 5 खूबसूरत हिल स्टेशन आपके लिए परफेक्ट हैं।

    शिमला: ब्रिटिश दौर की पुरानी झलक

    उत्तर भारत का मशहूर हिल स्टेशन शिमला क्रिसमस के समय एक अलग ही रंग में नजर आता है। ब्रिटिश दौर की इमारतेंमॉल रोड और रिज पर सजी रोशनियां क्रिसमस के जश्न को और खास बना देती हैं। यहां चर्च में प्रेयर्स और कैरल सिंगिंग का माहौल देखने लायक होता है। स्थानीय लोग अपने घरों और दुकानों को देवदार के पत्तोंलकड़ी की नक्काशी और हाथ से बनी सजावट से सजाते हैं। शिमला का यह पारंपरिक और गर्मजोशी भरा माहौल फैमिली ट्रिप के लिए बेहतरीन है।

    मनाली: सर्दियों की ताजगी और कैफे कल्चर

    मनाली सर्दियों में अपनी ठंडी हवाबर्फ से ढकी वादियों और खास कैफे कल्चर के लिए जाना जाता है। ओल्ड मनाली के छोटे-छोटे कैफे इस दौरान ओपन माइक नाइट्सआर्ट गेदरिंग्स और क्रिसमस स्पेशल प्रोग्राम आयोजित करते हैं। यहां आप लोकल हिमाचली खाने का स्वाद ले सकते हैं और शांत पहाड़ी गांवों में समय बिता सकते हैं। दोस्तों के साथ ट्रिप प्लान करने वालों के लिए मनाली एक शानदार ऑप्शन है।

    औली: स्कीइंग और सुकून की तलाश

    अगर आप भीड़-भाड़ से दूर शांत जगह पर क्रिसमस मनाना चाहते हैंतो औली आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है। यह जगह स्कीइंग के लिए दुनियाभर में मशहूर है। बर्फ से ढके मैदानखुला नीला आसमान और ठंडी हवा औली की पहचान हैं। यहां की सुबहें बेहद खूबसूरत होती हैंजब सूरज की किरणें बर्फ पर चमकती हैं। कपल्स और एडवेंचर लवर्स के लिए औली एक यादगार अनुभव दे सकता है।

    धर्मशाला: तिब्बती संस्कृति का अनोखा अनुभव

    धर्मशाला और मैक्लोडगंज अपनी तिब्बती संस्कृति और शांत वातावरण के लिए जाने जाते हैं। क्रिसमस के दौरान यहां तिब्बती समुदाय के विंटर मार्केटलोकल चाय और हैंडीक्राफ्ट्स लोगों को आकर्षित करते हैं। छोटे-छोटे मठों में शांत प्रोग्राम और कैफे में एकॉस्टिक म्यूजिक नाइट्स इस जगह के अनुभव को और खास बना देते हैं। जो लोग शांतिमेडिटेशन और कल्चर में रुचि रखते हैंउनके लिए धर्मशाला एक बेहतरीन विकल्प है।

    नैनीताल: झीलरोशनी और सर्दियों का जादू
    नैनीताल दिसंबर के महीने में बेहद खूबसूरत नजर आता है। शहर सफेद और लाल रंगों की सजावट से सजा रहता है। नैनी झील का ठहरा हुआ पानीचारों ओर पहाड़ों का नजारा और ठंडी हवा सर्दियों का पूरा मजा देती है। यहां की लोकल बेकरी में मिलने वाला क्रिसमस ब्रेड और केक जरूर ट्राय करना चाहिए। इसके अलावा अयारपाटा और पंगोट जैसे आसपास के इलाके पक्षी देखने और शांति का अनुभव करने के लिए जाने जाते हैं।

    क्यों बनाएं यहां ट्रिप प्लान?

    इन सभी हिल स्टेशनों की खास बात यह है कि ये दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं हैं और कम समय में आरामदायक यात्रा की जा सकती है। 4 दिन के लॉन्ग वीकेंड में आप ट्रैवलघूमना और आराम-तीनों का मजा ले सकते हैं। चाहे फैमिली के साथ जाना होदोस्तों के साथ एडवेंचर करना हो या पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताना होये डेस्टिनेशन हर तरह के ट्रैवलर्स के लिए परफेक्ट हैं।

  • सर्दियों में डैंड्रफ से हैं परेशान? महंगे शैंपू छोड़ें, अपनाएं ये असरदार घरेलू नुस्खे

    सर्दियों में डैंड्रफ से हैं परेशान? महंगे शैंपू छोड़ें, अपनाएं ये असरदार घरेलू नुस्खे


    नई दिल्ली । सर्दियों का मौसम जहां एक ओर ठंडी हवा और आराम का एहसास कराता है वहीं दूसरी ओर यह कई तरह की स्किन और हेयर प्रॉब्लम्स भी साथ लाता है। इन्हीं में से एक आम समस्या है डैंड्रफ रूसी। ठंड के मौसम में हवा रूखी हो जाती है, जिससे सिर की त्वचा ड्राई होने लगती है। इसका नतीजा होता है खुजली, सफेद परतें और बालों का कमजोर होना। कई बार लोग इससे छुटकारा पाने के लिए महंगे शैंपू और केमिकल प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन ये हर बार असरदार साबित नहीं होते।अगर समय रहते डैंड्रफ पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या धीरे-धीरे बालों की जड़ों को नुकसान पहुंचाने लगती है और बाल झड़ने की शिकायत बढ़ जाती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इस परेशानी से राहत पाने के लिए आपको हमेशा महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं होती। कुछ आसान घरेलू नुस्खे भी डैंड्रफ को जड़ से खत्म करने में मदद कर सकते हैं। 
    सर्दियों में क्यों बढ़ती है डैंड्रफ की समस्या?
    ठंड के मौसम में स्कैल्प में नेचुरल ऑयल कम बनने लगता है। हीटर, गर्म पानी और कम धूप भी सिर की त्वचा को और ज्यादा शुष्क बना देते हैं। इसके अलावा, बालों को बार-बार ड्राय करना और सही पोषण न मिलना भी डैंड्रफ को बढ़ावा देता है। यही वजह है कि सर्दियों में इस समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
    डैंड्रफ से छुटकारा दिलाने वाले असरदार घरेलू उपाय
    1. दही से करें स्कैल्प का ट्रीटमेंट
    दही डैंड्रफ के लिए सबसे असरदार घरेलू उपायों में से एक माना जाता है। इसमें मौजूद नेचुरल एंटी-फंगल तत्व स्कैल्प में जमी रूसी को कम करते हैं।कैसे इस्तेमाल करें ताज़ा दही लें और उसे बालों की जड़ों से लेकर पूरी लंबाई तक लगाएं। करीब 30 मिनट बाद हल्के शैंपू या साफ पानी से बाल धो लें। हफ्ते में दो बार यह उपाय करने से साफ फर्क नजर आने लगता है।
    2. एलोवेरा जेल से मिलेगी

    ठंडक और राहतएलोवेरा में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं,जो खुजली और जलन को कम करते हैं।कैसे इस्तेमाल करें:ताज़ा एलोवेरा जेल निकालकर सीधे स्कैल्प पर लगाएं। 20–30 मिनट बाद बाल धो लें। इससे स्कैल्प हेल्दी रहता है और डैंड्रफ धीरे-धीरे कम होने लगता है।

    3. नींबू का रस रखेगा स्कैल्प साफ
    नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड स्कैल्प को डीप क्लीन करता है और रूसी को हटाने में मदद करता है।कैसे इस्तेमाल करें:नींबू के रस में थोड़ा पानी मिलाकर स्कैल्प पर लगाएं। 10 मिनट बाद बाल धो लें। हफ्ते में एक बार इसका इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है।

    4. नारियल तेल से करें पोषण
    नारियल तेल में प्राकृतिक एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह स्कैल्प को नमी देता है और रूसी को जड़ से खत्म करने में मदद करता है।कैसे इस्तेमाल करें हल्का गुनगुना नारियल तेल लेकर स्कैल्प में अच्छे से मसाज करें। कुछ समय बाद बाल धो लें।स्वच्छता का रखें खास ध्यानडैंड्रफ के इलाज के साथ-साथ साफ-सफाई भी बहुत जरूरी है। अपनी कंघी, तौलिया और तकिए के कवर को नियमित रूप से एं। इससे बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन दोबारा पनपने से रुकता है।सर्दियों में डैंड्रफ की समस्या आम है, लेकिन सही देखभाल और घरेलू नुस्खों से इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। नियमित रूप से इन उपायों को अपनाने से न सिर्फ रूसी खत्म होती है, बल्कि बाल मजबूत, घने और चमकदार भी बनते हैं।

  • माधुरी दीक्षित ने विनोद खन्ना के साथ किसिंग सीन पर तोड़ी चुप्पी कहा मुझे बहुत शर्मिंदगी हुई थी

    माधुरी दीक्षित ने विनोद खन्ना के साथ किसिंग सीन पर तोड़ी चुप्पी कहा मुझे बहुत शर्मिंदगी हुई थी


    नई दिल्ली । माधुरी दीक्षित बॉलीवुड की सबसे सफल और प्रतिष्ठित एक्ट्रेस हैं जिन्होंने अपने अभिनय से लाखों दिलों को जीता। लेकिन उनकी फिल्म दयावान का एक किसिंग सीन आज भी एक चर्चित और विवादित विषय बना हुआ है। यह सीन जो विनोद खन्ना के साथ था उस समय काफी सुर्खियों में रहा था और अब माधुरी ने इस सीन पर अपनी बात रखी है।

    मुझे बहुत शर्मिंदगी हुई थी

    माधुरी ने हाल ही में इस सीन के बारे में खुलकर बात करते हुए कहा कि उन्हें उस सीन के दौरान काफी शर्मिंदगी महसूस हुई थी। जब फिल्म दयावान रिलीज हुई थी तब विनोद खन्ना एक बड़े स्टार थे और माधुरी इंडस्ट्री में नए-नए आकर खुद को साबित कर रही थीं। इस फिल्म के एक गाने आज फिर तुमपे प्यार आया है में उनका और विनोद खन्ना का बोल्ड और किसिंग सीन था जो आज भी चर्चा में रहता है।

    माधुरी ने स्वीकार किया कि यह सीन उनके लिए एक कठिन अनुभव था क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री में एक नए एक्ट्रेस के रूप में उन्हें इस तरह के सीन के साथ सहज होना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा मैं उस सीन के दौरान बहुत असहज महसूस कर रही थी और यह मेरे लिए शर्मिंदगी का कारण था।

    सीन के दौरान विनोद खन्ना का व्यवहार

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सीन के दौरान विनोद खन्ना काफी बहक गए थे और सीन की आवश्यकता से अधिक किस करते रहे थे जिससे माधुरी की आंखों में आंसू भी आ गए थे। हालांकि माधुरी ने इस पर स्पष्ट बयान नहीं दिया था लेकिन उन्होंने इस बात का संकेत दिया कि यह उनके लिए एक बहुत ही व्यक्तिगत और कठिन अनुभव था।

    विनोद खन्ना के साथ सीन और माधुरी का न्यूकमर अनुभव

    यह सीन उस समय इसलिए भी चर्चित हो गया था क्योंकि माधुरी एक नई एक्ट्रेस थीं और विनोद खन्ना पहले से ही एक स्थापित स्टार थे। फिल्म के गाने और खासकर इस किसिंग सीन ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया था। लेकिन माधुरी के लिए यह सीन एक तरह से इंडस्ट्री के एक नए पक्ष का सामना था जिसे वह पहले कभी नहीं जानती थीं।

    माधुरी की यात्रा और करियर

    माधुरी दीक्षित ने उस समय अपनी बहुमुखी प्रतिभा और मेहनत से इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई। इसके बाद उन्होंने दिल तो पागल है बेटा राम लखन कन्हैया हम आपके हैं कौन जैसी कई शानदार फिल्में कीं। माधुरी का करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आज भी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाए रखी है।

    हालांकि उस किसिंग सीन का अनुभव उनके करियर का हिस्सा रहा है माधुरी ने इसे एक व्यक्तिगत अनुभव मानते हुए इसे समय के साथ स्वीकार कर लिया।यह घटना इस बात का उदाहरण है कि बॉलीवुड की चमक-धमक और ग्लैमर के पीछे एक्टर और एक्ट्रेस को कई तरह के संघर्षों और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है जो शायद दर्शकों के लिए हमेशा नजर नहीं आता।

  • विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में 30 करोड़ धोखाधड़ी मामला

    विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में 30 करोड़ धोखाधड़ी मामला


    नई दिल्ली । फिल्म इंडस्ट्री के जानेमाने फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को 30 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में उदयपुर की एक कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह मामला एक बड़े धोखाधड़ी कांड से जुड़ा हुआ है जिसमें दोनों पर उदयपुर के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनियों के फाउंडर डॉ. अजय मुर्डिया के साथ मिलकर करोड़ों की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

    मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम बेल की याचिका खारिज

    9 दिसंबर को विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को सात दिन की पुलिस हिरासत के बाद कोर्ट में पेश किया गया। कपल के वकील ने इस दौरान मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत की याचिका दी थी। उनका तर्क था कि दोनों को मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है इसलिए उन्हें कुछ समय के लिए रिहा किया जाए। हालांकि कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। एडवोकेट मंजूर हुसैन ने कोर्ट के फैसले से पहले ANI को बताया “हमने कोर्ट से मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत की रिक्वेस्ट की है। अगर जमानत मिलती है तो वे मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए कुछ समय के लिए बाहर आ सकते हैं लेकिन यह पूरी तरह से कोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगा।”

    उदयपुर की सेंट्रल जेल में भेजे जाएंगे

    कोर्ट ने विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। इसके बाद पुलिस ने जानकारी दी कि दोनों को अब उदयपुर की सेंट्रल जेल में भेजा जाएगा। DSP सूर्यवीर सिंह ने मीडिया को बताया “कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उदयपुर की सेंट्रल जेल में रखा जाएगा।”

    30 करोड़ का धोखाधड़ी मामला

    विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को 7 दिसंबर को मुंबई में अरेस्ट किया गया था। गिरफ्तार करने के बाद उन्हें उदयपुर लाया गया जहां 8 दिसंबर को कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद 9 दिसंबर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। इस मामले में विक्रम भट्ट उनकी पत्नी और छह अन्य आरोपियों पर इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनियों के फाउंडर डॉ. अजय मुर्डिया के साथ मिलकर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। यह मामला अब पूरे फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन चुका है। विक्रम भट्ट का नाम इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने से उनकी छवि को भी नुकसान पहुंच सकता है।

    न्यायिक प्रक्रिया और आगे की कानूनी कार्रवाई

    अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई चल रही है और आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है। विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद उनकी फिल्म इंडस्ट्री में छवि को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं लेकिन फिलहाल मामले की जांच चल रही है। अगले कुछ दिनों में इस मामले में और अधिक जानकारी सामने आ सकती है जिसमें आरोपियों की जमानत या उनके खिलाफ कोर्ट में चल रहे मुकदमे के बारे में निर्णय लिया जाएगा।

  • जब अमिताभ बच्चन ने मीडिया को बायकॉट कर दिया था: बिना नाम के छपते थे उनकी फिल्मों के रिव्यू

    जब अमिताभ बच्चन ने मीडिया को बायकॉट कर दिया था: बिना नाम के छपते थे उनकी फिल्मों के रिव्यू


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने न केवल अपनी शानदार एक्टिंग से करोड़ों दिलों को जीता बल्कि एक समय ऐसा भी आया था जब उन्होंने मीडिया से दूरी बना ली थी। यह घटना उनके करियर के सबसे शानदार दौर के दौरान घटी जब अमिताभ की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट हो रही थीं और वह बॉलीवुड के सुपरस्टार बन चुके थे। फिर भी उन्होंने मीडिया को बायकॉट करने का फैसला किया था।

    मीडिया से दूरी का कारण
    अमिताभ बच्चन ने मीडिया से इस समय दूरी बना ली थी जब वह अपनी फिल्मों शोले दीवार और त्रिशूल जैसी हिट फिल्मों के साथ दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना चुके थे। मीडिया में उनके बारे में नकारात्मक रिपोर्ट्स और अफवाहों की भरमार थी। इन अफवाहों के चलते अमिताभ ने मीडिया से संवाद कम कर दिया था। यह स्थिति उस समय के जर्नलिस्टों और फिल्म समीक्षकों के लिए चौंकाने वाली थी क्योंकि उनकी फिल्मों के रिव्यू अब उनके नाम के बिना ही छपने लगे थे।

    तरन आदर्श का बयान
    हाल ही में फिल्म ट्रेड एनालिस्ट और जर्नलिस्ट तरन आदर्श ने इस मुद्दे पर ANI से बात की। उन्होंने कहा किसी भी जर्नलिस्ट के पास यह ताकत नहीं है कि वह किसी स्टार को बना दे या गिरा दे। अमिताभ बच्चन ने अपने करियर के सबसे अच्छे दौर में मीडिया को बायकॉट कर दिया था और इसके बावजूद वह अपनी पहचान बनाने में सफल रहे। तरन आदर्श ने यह भी बताया कि उस समय अमिताभ की हिट फिल्मों का रिव्यू बिना उनके नाम के ही छपता था जो इस बात का प्रमाण है कि उनके काम से ही लोग जुड़े थे न कि मीडिया की कवरेज से।
    अमिताभ का सुपरस्टार बनने का सफर
    अमिताभ बच्चन का करियर फिल्म इंडस्ट्री में असाधारण रहा है। चाहे वह शोले जैसी क्लासिक फिल्म हो या दीवार और त्रिशूल जैसी हिट फिल्में उनके अभिनय ने भारतीय सिनेमा के मानक को नया रूप दिया। हालांकि मीडिया के बायकॉट के बावजूद वह सफलता की सीढ़ी चढ़ते गए। उनकी अभिनय क्षमता और पर्दे पर उनकी मौजूदगी ने उन्हें दर्शकों के बीच एक अद्वितीय स्थान दिलाया। इस समय के बाद भी अमिताभ का करियर एक लंबी यात्रा पर चलता रहा और वह आज भी बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में से एक माने जाते हैं।
    मीडिया और अमिताभ बच्चन का रिश्ता
    मीडिया और अमिताभ बच्चन के रिश्ते में एक वक्त ऐसा भी आया जब दोनों के बीच विवाद गहरा गया था। लेकिन फिल्म कुली के सेट पर हुए एक खतरनाक एक्सीडेंट के बाद यह संबंध कुछ बेहतर हुए। इसके बाद जब अमिताभ ने 1984 में राजनीति में कदम रखा और चुनाव लड़ा तो मीडिया ने अहम भूमिका निभाई। यह समय था जब अमिताभ और मीडिया के रिश्ते में सुधार हुआ।
    जया बच्चन का विरोध
    हालांकि आज भी अमिताभ और मीडिया के रिश्ते में कोई खास समस्या नहीं है लेकिन उनकी पत्नी जया बच्चन का मीडिया से कुछ अलग नजरिया है। हाल में जया ने पापराजी कल्चर का खुलकर विरोध किया था और कहा था कि यह स्टार्स के निजी जीवन में हस्तक्षेप करने की हद से आगे बढ़ चुका है। अमिताभ और मीडिया के रिश्ते की यह जटिल कहानी इस बात को दर्शाती है कि कैसे एक अभिनेता अपने काम और व्यक्तित्व के साथ पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है भले ही वह मीडिया के साथ नहीं हो।