अपराधियों की रणनीति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
NIA जैसी एजेंसी को अधिकार देने का सुझाव
विशेष अदालत बनाने की वकालत
कानूनी खामियों से अपराधियों को फायदा

अपराधियों की रणनीति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
NIA जैसी एजेंसी को अधिकार देने का सुझाव
विशेष अदालत बनाने की वकालत
कानूनी खामियों से अपराधियों को फायदा

इन विसंगतियों में मुख्य रूप से ‘पिता के नाम में गड़बड़ी’ एक ही अभिभावक से छह या उससे अधिक संतान का नामांकन और असामान्य उम्र के अंतर की प्रविष्टियां शामिल हैं। कुछ मामलों में ऐसे व्यक्ति भी पंजीकृत पाए गए हैं जिनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक थी लेकिन उनका पहले कभी मतदाता सूची में नामांकन नहीं हुआ था। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि SIR के दूसरे चरण में दस्तावेज़ जमा करना अनिवार्य नहीं था जिससे कई अधूरे या गलत विवरण सामने आए। इस दौरान 28 लाख गणना फॉर्म पिछली SIR सूची से मेल नहीं खा पाए जबकि 1.65 करोड़ फॉर्म में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। इन मामलों में मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है और उन्हें सुनवाई के दौरान अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा। यदि वे अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाते हैं तो उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
जिला स्तर पर मतदाता सूची में कटौती की दर में भी बड़ा अंतर देखने को मिला। कोलकाता उत्तर में 25.9 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण में 23.8 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए जबकि पूर्व मेदिनीपुर में यह दर सबसे कम रही केवल 3.3 प्रतिशत। पश्चिम बर्दवान में भी 13.1 प्रतिशत नाम सूची से हटाए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों में नाम कटने की दर राज्य औसत से कम रही। हालांकि इन जिलों में ‘पिता के नाम में असंगति’ की दर अधिक पाई गई। मालदा उत्तर दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में इस दर की 12 से 16 प्रतिशत के बीच वृद्धि हुई जो अन्य जिलों से कहीं अधिक है।
सभी विसंगतियों और गलत नामांकन के बाद चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को मृत स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची सौंपी है। साथ ही ये जानकारी सार्वजनिक वेबसाइटों पर भी उपलब्ध कराई गई है। आयोग के अनुसार 15 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं जबकि सत्यापन प्रक्रिया 7 फरवरी 2026 तक चलेगी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों और अन्य चुनावों की पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेष गहन पुनरीक्षण से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि केवल योग्य और वास्तविक मतदाता ही मतदान में हिस्सा लें।

हादसा इतना भीषण था कि पिकअप गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह से नष्ट हो गया था जिससे सवार लोग अंदर फंस गए और बाहर नहीं निकल सके। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि तीनों लोग जलकर मारे गए। हादसे में पिकअप का ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रेफर कर दिया गया है। मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और पुलिस ने शवों को रैणी अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मृतकों की पहचान के लिए काम चल रहा है और यह जांच की जा रही है कि ये लोग कहाँ के निवासी थे और किस स्थान से आ रहे थे।
हादसा बुधवार तड़के करीब 300 बजे हुआ। दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर अचानक हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया। हादसे की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल विभाग ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन पिकअप पूरी तरह से जल चुकी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह हादसा बेहद दर्दनाक था और उन्होंने पिकअप में सवार लोगों को बाहर निकालने के लिए अपनी ओर से मदद की कोशिश की। लेकिन जलती हुई गाड़ी में फंसे हुए लोगों को बचाना संभव नहीं हो सका।
दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर यह हादसा एक बड़ी दुर्घटना का रूप ले लिया। दुर्घटना की वजह से मार्ग पर कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हो गया था लेकिन पुलिस ने जल्द ही रास्ते को साफ कर दिया।पुलिस अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि टक्कर के कारण क्या था और दुर्घटना के वक्त पिकअप गाड़ी के ड्राइवर की क्या स्थिति थी। हादसा इतना भीषण था कि स्थानीय लोग भी दंग रह गए और कुछ समय के लिए समझ ही नहीं पाए कि क्या हो रहा है।अलवर और रैणी पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और साथ ही मृतकों के परिवारों को सूचना दी जा रही है।

अब राज्य सरकार के सामने दो विकल्प हैं। पहला सरकार इस विधेयक को अगले विधानसभा सत्र में फिर से पारित कराए या दूसरा राज्यपाल की मंजूरी के बिना अध्यादेश लाकर इसे तत्काल लागू किया जाए। अगर सरकार अध्यादेश लाती है तो यह विधेयक तत्काल प्रभाव से लागू हो सकता है लेकिन विधानसभा में इसे फिर से पारित करना अधिक सुरक्षित रास्ता हो सकता है।
यह विधेयक उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण पर सजा को और भी कड़ा करता है। इसे पहले 2018 में लागू किया गया था और 2022 में इसमें कुछ संशोधन किए गए थे। 13 अगस्त 2025 को राज्य सरकार ने एक बार फिर इस कानून में बदलाव करते हुए उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2025 को मंजूरी दी थी। इस बिल के तहत धर्मांतरण के मामलों में सजा को और सख्त किया गया है जिससे राज्य में इस पर पूरी तरह से अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।
नए विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति छल-बल से धर्मांतरण कराता है तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी। पहले यह सजा तीन से 10 साल तक थी जिसे अब बढ़ाकर तीन से 20 साल तक किया गया है। इसके अलावा अगर कोई धर्मांतरण के लिए नाबालिगों का शोषण करता है या महिला को विवाह के झांसे में फंसा कर धर्म परिवर्तन कराता है तो उसे न्यूनतम 20 साल की सजा और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही ऐसे मामलों में जुर्माना भी 10 लाख रुपये तक हो सकता है।
इसके अलावा अब किसी भी व्यक्ति को धर्मांतरण के मामलों की शिकायत करने का अधिकार होगा जबकि पहले यह केवल खून के रिश्तेदारों तक सीमित था। इस विधेयक में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि जिलाधिकारी को गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोपी की संपत्ति कुर्क करने का अधिकार दिया गया है।
हालांकि राज्यपाल ने विधेयक को तकनीकी गलतियों के कारण वापस कर दिया है लेकिन यह स्पष्ट है कि धामी सरकार धर्मांतरण के मामलों में कठोर कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस विधेयक को फिर से कैसे पारित करती है और इसे लागू करने के लिए कौन सा रास्ता अपनाती है।

ऐप से मिलेगी शराब की पूरी जानकारी
प्री-बुकिंग और पिकअप की सुविधा
मिलावटी शराब और ओवरचार्जिंग पर लगेगी लगाम
ग्राहकों और दुकानदारों-दोनों को फायदा
कब होगा लॉन्च?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह निर्देश एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए, जिसमें प्रदेश में खाद की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और कालाबाजारी की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अन्नदाता किसानों की मेहनत और फसलों के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है।
खाद की उपलब्धता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
औचक निरीक्षण और सख्त जवाबदेही
प्रदेश में खाद की वर्तमान स्थिति

यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि चीन और भारत दोनों ही तेजी से शहरीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और इसी कारण प्रदूषण एक साझा चुनौती बन चुका है। उन्होंने बीजिंग और दिल्ली की हवा की गुणवत्ता की तुलना करते हुए तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में बीजिंग का एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI 68 दिखाया गयाजो संतोषजनक श्रेणी में आता हैजबकि दिल्ली का AQI 447 दर्ज किया गयाजिसे गंभीर स्तर माना जाता है।अपने पोस्ट में यू जिंग ने लिखाचीन भी कभी गंभीर स्मॉग से जूझता था। लेकिन पिछले एक दशक में लगातार और सख्त प्रयासों से हमने स्थिति में बड़ा सुधार किया है। आने वाले दिनों में हम अपने अनुभवों को छोटी-छोटी सीरीज के जरिए साझा करेंगे। इस बयान के बाद भारत और चीन के बीच प्रदूषण को लेकर तुलना और चर्चा तेज हो गई है।
दिल्ली में हालात बेहद गंभीर
चीन को क्या नतीजे मिले?
दिल्ली के लिए क्या सबक?

पीला रंग सदैव से ऊर्जा ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यह रंग मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है और व्यक्ति के आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है। यही कारण है कि धार्मिक कार्यों में हल्दी का उपयोग किया जाता है क्योंकि हल्दी का रंग भी पीला होता है और इसे शुभता का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि गुरुवार के दिन पीला रंग पहनने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
गुरुवार को पीले कपड़े पहनने के लाभ
गुरुवार को पीले कपड़े पहनने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। भगवान विष्णु घर में सुख-शांति बनाए रखने वाले देवता माने जाते हैं और उनका आशीर्वाद मिलते ही घर की समस्याएं हल होने लगती हैं। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण उनकी पूजा और पीले वस्त्र पहनने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है जो जीवन में खुशहाली और शांति लेकर आता है।
कार्यों में सफलता मिलती है
गुरुवार को किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति को इंटरव्यू परीक्षा या किसी बड़े व्यापारिक सौदे में सफलता की कामना है तो पीले रंग के कपड़े पहनना विशेष लाभकारी होता है। पीला रंग मन को शांत और सकारात्मक बनाए रखता है जिससे मनोबल बढ़ता है और कार्यों में सफलता प्राप्त करने के अवसर अधिक होते हैं।
मानसिक तनाव से मुक्ति
पीला रंग मानसिक तनाव को कम करने और चिंता को दूर करने में सहायक होता है। विशेषकर उन लोगों के लिए जिनका मानसिक स्वास्थ्य कमजोर होता है या जो तनाव चिंता और अवसाद से जूझ रहे हैं उन्हें गुरुवार को पीले कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। इससे मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है।
विवाह संबंधों में सुधार
यदि किसी लड़की के विवाह में बार-बार अड़चनें आ रही हों या विवाह के मामलों में कोई समस्या हो तो गुरुवार को पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करना एक प्रभावी उपाय माना जाता है। इस उपाय से अच्छे रिश्ते आने लगते हैं और विवाह संबंधी समस्याओं का समाधान होता है। पीला रंग खासतौर पर रिश्तों में संतुलन और सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है।
पीले कपड़े न पहनने पर क्या करें
कभी कभी ऐसी स्थिति आती है जब हम किसी कारणवश पीले कपड़े नहीं पहन पाते हैं। ऐसे में एक सरल और प्रभावी उपाय है हल्दी का उपयोग। हल्दी जो कि पीले रंग की होती है उसे अपने कपड़ों पर लगाकर भी गुरुवार के दिन शुभता प्राप्त की जा सकती है। हल्दी लगाने से भी पीले रंग का प्रभाव पाया जाता है और इसके समान ही मानसिक शांति और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गुरुवार को पीले कपड़े पहनने की परंपरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह मानसिक और शारीरिक लाभ भी प्रदान करती है। पीला रंग ज्ञान खुशी और ऊर्जा का प्रतीक है और इस दिन इसे पहनने से न केवल आंतरिक शांति मिलती है बल्कि कार्यों में सफलता तनाव से मुक्ति और सुख-शांति का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। अगर आप गुरुवार को पीले कपड़े पहनने की परंपरा को अपनाते हैं तो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं और आपका मनोबल बढ़ सकता है।

यह आंकड़ा न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ है, बल्कि एक ही दिन में 167 बिलियन की जबरदस्त बढ़ोतरी और YTD (ईयर-टू-डेट) में +$205 बिलियन का उछाल दर्शाता है। मस्क की संपत्ति में यह उछाल टेस्ला के शेयरों की तेजी और स्पेसएक्स के वैल्यूएशन से जुड़ा है।
130 से अधिक देशों की जीडीपी एलन मस्क की दौलत से कम
IMF डेटा के अनुसार, 2025 के लिए लगभग 130 से अधिक देशों की नाममात्र GDP 600 अरब डॉलर से कम अनुमानित है। दुनिया में कुल 195 संप्रभु देश हैं, जिनमें से शीर्ष 60-65 अर्थव्यवस्थाओं (जैसे अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी आदि) की GDP इससे ऊपर है, जबकि बाकी छोटे द्वीप राष्ट्र, अफ्रीकी और कुछ एशियाई देश इससे नीचे आते हैं। IMF की 2025 अपडेटेड अनुमानों के मुताबिक कई विकासशील देशों की GDP $100B से भी कम है।
टॉप-10 में अमेरिकी टेक मैग्नेट्स का कब्जा
टॉप 10 में अमेरिकी टेक मैग्नेट्स का कब्जा साफ दिख रहा है। गूगल के सह-संस्थापकों लैरी पेज ($265B) और सर्गेई ब्रिन ($246B) ने दूसरे और तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया, हालांकि हालिया बदलाव में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
जेफ बेजोस (246 अरब डॉलर), लैरी एलिसन (238 अरब डॉलर), मार्क जुकरबर्ग (229 अरब डॉलर), स्टीव बाल्मर (166 अरब डॉलर) और एनवीडिया के जेंसन हुआंग (153 अरब डॉलर) भी टेक सेक्टर से ही हैं। हुआंग की संपत्ति में इस साल अबतक 39 अरब डॉलर की शानदार बढ़ोतरी हुई, जो AI चिप डिमांड का असर दिखाती है।
फ्रांस के बर्नार्ड अर्नाल्ट ($202B) लक्जरी कंज्यूमर सेक्टर से अकेले गैर-अमेरिकी नाम हैं, जबकि वॉरेन बफे ($152B) डाइवर्सिफाइड निवेश से 10वें स्थान पर हैं। वॉल्टन फैमिली के जिम वॉल्टन (141 अरब डॉलर) रिटेल से हैं, लेकिन कुल मिलाकर टॉप 11 में 9 अमेरिकी और ज्यादातर टेक से जुड़े हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?
टेक स्टॉक्स की रैली ने इन बिलियनेयर्स को आसमान छू लिया है, खासकर AI और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के बूम से, लेकिन हालिया घाटे (जैसे बेजोस के -$3.47B) बाजार की अस्थिरता की ओर इशारा करते हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह सबक है कि टेक पर दांव लगाना फायदेमंद तो है, मगर जोखिम भरा भी।

क्या है कांट्रैक्ट में
मुंबई स्थित टीसीएस इस कान्ट्रैक्ट के तहत एप्लिकेशन और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा कार्य करेगी। इस सौदे का अधिकतर हिस्सा कंपनी के लिए नया काम है। दो अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त रखी। आने वाले हफ्तों में इसकी आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है।
यूके में चौथी बड़ी डील
यह टीसीएस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन के कार्यकाल में यूनाइटेड किंगडम से मिला चौथा 1 अरब डॉलर का अनुबंध है। कृतिवासन ने जून 2023 में पदभार संभाला था। उसी महीने, कंपनी ने यूके की सबसे बड़ी वर्कप्लेस पेंशन योजना, यूके नेशनल एम्प्लॉयमेंट सेविंग्स ट्रस्ट के साथ 1.1 अरब डॉलर का अनुबंध किया था।
तीन महीने बाद, उसे जगुआर लैंड रोवर के साथ 1 अरब डॉलर का डिजिटल परिवर्तन अनुबंध मिला। पिछले साल जनवरी में, कंपनी को ब्रिटिश बीमा कंपनी एविवा के साथ 2.5 अरब डॉलर का, 15 साल का प्रशासनिक अनुबंध मिला था, जो अब तक का सबसे बड़ा सौदा है।
यूके है अहम बाजार
टीसीएस के लिए अमेरिका के बाद यूनाइटेड किंगडम दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार है, जो उसके 30.18 अरब डॉलर के वार्षिक राजस्व में लगभग 17% का योगदान करता है। इस खबर के प्रकाशन के समय तक, टीसीएस और टेलीफोनिका की ओर से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं मिला था।
मुनाफे पर असर का डर
पहले जिक्र किए गए दोनों अधिकारियों ने टेलीफोनिका यूके सौदे में मुनाफे की दर कम होने की ओर इशारा किया है। उन्होंने दावा किया कि यह दर टीसीएस के 24.2% के परिचालन मार्जिन से कम है, हालांकि उन्होंने अधिक विवरण नहीं दिए।
यह रणनीति में बदलाव का संकेत है, क्योंकि आईटी आउटसोर्सिंग कंपनी पारंपरिक रूप से कंपनी के समग्र मुनाफे से कम दर वाले अनुबंध करने से बचती रही है। यह दूसरा ऐसा सौदा है जो एक दूरसंचार कंपनी के साथ है और कंपनी के समग्र मार्जिन को नुकसान पहुंचा रहा है।
बीएसएनल सौदे जैसी स्थिति
सार्वजनिक दूरसंचार ऑपरेटर भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के साथ कंपनी का 1.83 अरब डॉलर का अनुबंध भी एक ऐसा ही सौदा था जिसने कंपनी की लाभप्रदता को नुकसान पहुंचाया। उस सौदे के तहत टीसीएस ने बीएसएनएल के लिए 4जी नेटवर्क तैनात किया था। हालांकि, एक अधिकारी के अनुसार, टेलीफोनिका यूके सौदे का परिचालन मार्जिन बीएसएनएल के साथ किए गए सौदे से अधिक होने की उम्मीद है।
राजस्व पर प्रभाव
फिलहाल, 10 साल में 1 अरब डॉलर के अनुबंध का मतलब है आईटी सेवा कंपनी के लिए सालाना 100 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त आय। सीधे शब्दों में कहें तो, अगर टीसीएस इस साल कोई व्यवसाय नहीं खोती है, तो अगले वित्तीय वर्ष में उसका राजस्व 0.3% बढ़ने की उम्मीद है।