Author: bharati

  • सावन में इन 5 छिपे हुए पावन शिव धामों में सुकून से होते हैं दर्शन… यहां नहीं मिलती लंबी कतारें…

    सावन में इन 5 छिपे हुए पावन शिव धामों में सुकून से होते हैं दर्शन… यहां नहीं मिलती लंबी कतारें…


    नई दिल्ली।
    सावन (Sawan) का महीना आते ही देशभर के मशहूर शिव मंदिरों (Famous Shiva temples) में भक्तों का तांता लग जाता है. महाकाल, काशी विश्वनाथ और देवघर जैसे धामों में घंटों लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता है. कई बार बुजुर्गों और बच्चों के लिए इतनी भारी भीड़ में दर्शन करना काफी मुश्किल हो जाता है।

    अगर आप भी इस सावन में शांति से भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा करना चाहते हैं, तो देश में कई ऐसे पावन और खूबसूरत शिव मंदिर हैं जहां भारी भीड़ नहीं मिलती. इन जगहों पर आप परिवार के साथ सुकून से बैठकर भोलेनाथ का ध्यान लगा सकते हैं।


    तुंगनाथ मंदिर, उत्तराखंड

    उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है. यह मंदिर पंच केदार में से एक है और हिमालय की गोद में बसा है. यहां पहुंचने के लिए चोपता से करीब चार किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।

    शांत वादियों, ठंडी हवाओं और घने जंगलों के बीच यहां का माहौल बहुत आध्यात्मिक लगता है. यहां आने वाले भक्तों को शिव भक्ति के साथ साथ प्रकृति का एक अद्भुत नजारा भी देखने को मिलता है।


    नीलकंठ महादेव मंदिर, ऋषिकेश

    ऋषिकेश के पास मणिकूट पर्वत पर बसा नीलकंठ महादेव मंदिर एक बेहद पवित्र और शांत धाम है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले विष को पीने के बाद भगवान शिव ने इसी स्थान पर विश्राम किया था।

    चारों ओर ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों से घिरे इस मंदिर में बहुत सुकून मिलता है. सावन के मुख्य दिनों को छोड़ दें, तो यहां आम दिनों में आप बहुत आराम से जल चढ़ा सकते हैं और दर्शन कर सकते हैं।


    भूतनाथ मंदिर, हिमाचल प्रदेश

    हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर को छोटी काशी भी कहा जाता है. मंडी के बीचों बीच स्थित भूतनाथ मंदिर सदियों पुराना और ऐतिहासिक स्थल है. यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है. यहां सावन के दौरान स्थानीय भक्त तो आते हैं, लेकिन बड़े ज्योतिर्लिंगों जैसी दम घोटने वाली भीड़ नहीं होती. यहां आप बिना किसी भागदौड़ के मंदिर प्रांगण में बैठकर भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।


    कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक

    दक्षिण भारत के कर्नाटक में स्थित कोटिलिंगेश्वर मंदिर अपनी तरह का एक अनोखा और भव्य शिव धाम है. इस मंदिर परिसर में कोटि यानी करोड़ों की संख्या में छोटे बड़े शिवलिंग स्थापित हैं। इसके साथ ही यहां 108 फीट ऊंचा एक विशाल शिवलिंग भी बना हुआ है, जो देखते ही बनता है. इतने विशाल परिसर में फैला होने की वजह से यहां भीड़ महसूस नहीं होती और भक्त आराम से एक एक शिवलिंग के दर्शन कर सकते हैं।


    यात्रा की योजना और जरूरी सुझाव

    सावन के दौरान इन शांत शिव मंदिरों की यात्रा पर जाने से पहले थोड़ी तैयारी जरूर कर लें. पहाड़ी इलाकों में जाते समय मौसम का हाल पहले ही चेक कर लें और साथ में जरूरी दवाएं जरूर रखें। मंदिरों में दर्शन के समय स्थानीय नियमों और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें. सुबह सुबह या दोपहर की आरती के समय जाने से दर्शन आसानी से हो जाते हैं. इन पावन धामों में बिताया समय आपकी आत्मा को एक नई ऊर्जा और असीम शांति देगा।

  • राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त

    राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त


    अयोध्या।
    अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) में दान चोरी की घटना के बाद से मची उथल-पुथल थम नहीं रही है। चंपतराय (Champat Rai), डॉ. अनिल मिश्र (Dr. Anil Mishra) और गोपाल राव (Gopal Rao) के हटने के बाद अब संगठन संरक्षक के तौर पर राम मंदिर के पालक नियुक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी भैयाजी जोशी (Bhaiyaji Joshi) भी दायित्व से मुक्त कर दिए गए हैं। सूत्रों की मानें तो पालक की जिम्मेदारी के लिए दूसरे बड़े और कद्दावर चेहरे की तलाश शुरू हो चुकी है। इसमें दिल्ली के वरिष्ठ प्रचारक का नाम सबसे ऊपर चल रहा है।

    संघ का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर अंतर्द्वंद्व में फंसा है। इस विषय पर संघ का थिंक टैंक दो खेमों में बंट गया है। एक खेमा राम मंदिर मामलों से संघ को दूर रखने का हिमायती है तो दूसरा वकालत कर रहा है कि मंदिर पर संगठन का अंकुश जरूरी है। इसके पीछे दोनों खेमों के अपने-अपने तर्क हैं। इस कारण पालक का नाम घोषित करने में देरी हो रही है।


    ट्रस्ट की बैठकों में हमेशा शामिल होते रहे

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन और जमीन खरीद फरोख्त को लेकर हुए विवाद के बाद संघ नेतृत्व ने सर कार्यवाह पद से स्वास्थ्य कारणों से सेवामुक्त हुए भैयाजी जोशी को राम मंदिर का पालक नियुक्त कर उनका केंद्र लखनऊ तय किया था। इसके कारण वह प्रायः ट्रस्ट की बैठकों में शामिल होते थे।


    चंपत राय के लेटर बम से चिंतित था नेतृत्व

    चढ़ावा चोरी की घटना के दौरान भी मंदिर पालक का नाम चर्चा में आया, लेकिन उनका कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया। फिर भी 12 जून को लखनऊ में ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में वह शामिल रहे। इसके पहले छह जून को चढ़ावा चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराने गए चंपतराय को रोकने में उनका हाथ होने की आशंका जताई गई मगर यह पुष्ट नहीं हो सका। अब पालक के पद से मुक्ति को उसी घटना से जोड़ा जा रहा है। खास बात यह भी है कि एफआईआर न कराने की वजह ही चंपत राय के त्यागपत्र का सबसे प्रमुख कारण थी।

    छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के ऐलान के बाद सात जुलाई को चंपतराय ने लेटर बम फोड़ा था। इस लेटर के जरिए चंपतराय ने चढ़ावा गिनती के अनुबंध से सम्बन्धित जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने उस पत्र में कहा था कि फिलहाल मैं मौन हूं लेकिन एसआईटी की जांच के बाद हर सवाल का उत्तर दूंगा। उन्होंने कहा कि कलंक लेकर नहीं जाऊंगा। उनके इस ऐलान से शीर्ष नेतृत्व चिंतित था कि कहीं कोई नया बखेड़ा न खड़ा हो जाए, इसीलिए उन्हें मनाने की कोशिशें हुईं। संतों को भी उनके समर्थन में कर उन्हें दिलासा दी गई।

  • केंद्र सरकार आज लोकसभा में पेश करेगी 3 विधेयक…. राम मंदिर चढ़ावा मामले में हंगामे के आसार….

    केंद्र सरकार आज लोकसभा में पेश करेगी 3 विधेयक…. राम मंदिर चढ़ावा मामले में हंगामे के आसार….


    नई दिल्ली
    । संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में केंद्र सरकार (Central government) ने लोकसभा (Lok Sabha) में तीन विधेयकों को सूचीबद्ध किया है। सरकार की कोशिश बिलों को पारित कराने की होगी। वहीं, विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, चढ़ावा चोरी समेत अन्य मुद्दों पर हमलावर रहेगा। केंद्र सरकार (Central government) जिन विधेयकों को पेश करेगा उनमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 करने संबंधी विधेयक भी शामिल है। इसके अलावा, सरकार भारतीय सांख्यिकी संस्थान (इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टीट्यूट) के लिए व्यापक वैधानिक ढांचा उपलब्ध कराने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास अधिनियम में संशोधन से जुड़े विधेयक भी संसद में पेश करने की तैयारी में है।


    चढ़ावा चोरी को मुद्दा बना रहा विपक्ष

    दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने चढ़ावा चोरी के मुद्दे को धार देना शुरू कर दिया है। विपक्ष चंदा चोरी का सांकेतिक नाट्य रुपांतरण कर प्रदर्शन कर चुका है। मानसून सत्र के पहले दो सप्ताह विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़े। नीट मुद्दे पर आंदोलन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में चल रहे हंगामे के बीच कांग्रेस ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को धार देनी शुरू कर दी है। इससे पहले विपक्ष संसद भवन परिसर में चंदा चोरी का सांकेतिक नाट्य रुपांतरण कर प्रदर्शन कर चुका है।


    शिला पूजन से ही होने लगी चोरी- कांग्रेस

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा का हर नेता चंदा चोर नहीं है, पर सभी चंदा चोर सत्ताधारी दल में ही हैं। पार्टी ने दावा किया कि राम मंदिर में चोरी सिर्फ चढ़ावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इस चोरी की शुरुआत शिला पूजन के वक्त से हो गई थी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में सिर्फ चढ़ावे की चोरी नहीं हुई, बल्कि शिला पूजन से चोरी शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि वह खुद अवध के रहने वाले हैं। 1985 से 90 के बीच पर्यटन मंत्री रहे हैं और उन्होंने पूरे आंदोलन को करीब से देखा है।

    तिवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीतिक लाभ के लिए लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर चाहते थे। इसलिए उन्होंने एक अधूरे मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह कर दिया, जो कि एक अशुभ कार्य था। वहीं, इस समारोह में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शंकराचार्यों को भी आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरी प्रक्रिया की कमान खुद संभाली और मंदिर ट्रस्ट के प्रत्येक सदस्य की नियुक्ति उनकी व्यक्तिगत पसंद के आधार पर की गई। ऐसे में पीएम ने इसका श्रेय लिया है, तो उनकी पसंद से नियुक्त किए गए लोगों की चोरी से वह खुद को अलग नहीं कर सकते। क्योंकि, उन्होंने ही जिम्मेदारी सौंपी थी।

    भाजपा बोली- राहुल गांधी और पप्पू यादव माफी मांगें
    राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर संसद परिसर में किए गए एक व्यंग्य-नाटक को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने रविवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर हिंदू भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की।

    भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि इस प्रदर्शन से करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से हिंदू आस्था पर हमला है। चुघ ने कहा कि राहुल गांधी और इस प्रदर्शन में शामिल सभी नेताओं को देश और दुनिया भर के हिंदुओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया था और राम मंदिर के निर्माण का बहिष्कार किया था, वे अब मंदिर से जुड़े प्रतीकों का मजाक उड़ा रहे हैं।

    भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की राजनीति अब केवल सनातन का विरोध करने तक सीमित रह गई है। चुघ ने कहा कि पहले सनातन को ‘डेंगू’ और ‘वायरस’ कहा गया और अब राम मंदिर से जुड़े आस्था के प्रतीकों का मजाक उड़ाया जा रहा है। वीएचपी नेता सुरेंद्र गुप्ता ने भी प्रदर्शन को अशोभनीय बताते हुए कहा कि इससे सनातन धर्म और संत समाज का अपमान हुआ है। उन्होंने विपक्ष से राजनीतिक विरोध के नाम पर भारत की संस्कृति, हिंदुओं, संतों और मंदिरों का अपमान बंद करने की अपील की। वहीं, पप्पू यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन सनातन और करोड़ों लोगों की आस्था की रक्षा के लिए था। उन्होंने कहा कि वे किसी भी प्राथमिकी या कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।

  • नेपाल में हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग हुई तेज…. सड़कों पर उतरे लोग

    नेपाल में हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग हुई तेज…. सड़कों पर उतरे लोग


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) को हिन्दू राष्ट्र (Hindu Nation) घोषित करने की मांग तेज हो रही है। यह मुद्दा केवल संगठनों और प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम लोग अपने जनप्रतिनिधियों से भी सीधे जवाब मांग रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सांसदों का घेराव कर उनसे हिन्दू समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों के पक्ष में खुलकर बोलने की मांग की जा रही है।


    सांसद के सामने विरोध

    सिरहा जिले (Siraha District) में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद बबलू गुप्ता (MP Bablu Gupta) को लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि उन्होंने परिवर्तन और नेपाल को पुन: हिन्दू राष्ट्र बनाने की उम्मीद के साथ अपने जनप्रतिनिधियों का समर्थन किया था, लेकिन अब उनकी अपेक्षाओं की अनदेखी की जा रही है।


    ठंडी हुई सांप्रदायिक हिंसा की आंच

    नेपाल में 26 जुलाई की रात से शुरू हुई हिंसा की आंच अब मंद पड़ चुकी है। कई जिलों में बने तनाव के हालात अब काबू में हैं। हालांकि, इस घटना के बाद अब हिंदूवादी संगठनों ने सरकार को 15 सूत्री मांगपत्र सौंपते हुए नेपाल को पुन: हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने समेत कई बड़े फैसले लेने की मांग की है।

    मांगपत्र में सुनसरी जिले के देवानगंज में हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच, घटना के दोषियों एवं साजिशकर्ताओं की शीघ्र गिरफ्तारी तथा जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है। साथ ही गोली चलाने का आदेश देने वाले अधिकारियों की पहचान उजागर कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग रखी गई है। प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

    मांगपत्र में घटना में जान गंवाने वाले लोगों को शहीद का दर्जा देने, उनके परिजनों को उचित मुआवजा उपलब्ध कराने तथा घायलों का निशुल्क और प्रभावी इलाज सुनिश्चित करने की भी मांगें शामिल हैं। साथ ही नेपाल को बौद्ध एवं किरात परंपराओं के सम्मान के साथ ‘वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र’ के रूप में पुन:स्थापित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की मांग की गई है। संगठनों ने रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें निष्कासित करने, सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा वर्ष 1990 के बाद जारी नेपाली नागरिकताओं की जांच कराने की मांग भी उठाई है।


    क्या बोले पीएम बालेन शाह

    पीएम बालेन शाह का कहना है कि हिंदू राष्ट्र की बहाली के साथ राजशाही का मुद्दाभी जुड़ता है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा कोई भी फैसला लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार फेडरल व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है और मजबूती से इसका पालन करेगी। उनका कहना है कि हिंदू राष्ट्र घोषित कर देने से संघीय व्यवस्था कमजोर हो जाएगी।

  • PM मोदी को गाली देने वाली नाबालिग लड़की पर नहीं होगी FIR… दिल्ली पुलिस ने किया माफ

    PM मोदी को गाली देने वाली नाबालिग लड़की पर नहीं होगी FIR… दिल्ली पुलिस ने किया माफ


    नई दिल्ली।
    दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने पिछले महीने जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) (‘Cockroach Janata Party’ – CJP) के विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को गंदी-गंदी गालियां देने की आरोपी नाबालिग लड़की पर कोई केस दर्ज नहीं करने का फैसला किया है। इस लड़की का वीडियो सोशल मीडिया में खूब तेजी से वायरल हुआ था। एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस सूत्रों ने रविवार को इस बारे में जानकारी दी।

    नोएडा पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्द कहने की आरोपी नाबालिग लड़की के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कर दिल्ली पुलिस को भेज दी थी। एफआईआर में उसकी उम्र 25 साल बताई गई थी। हालांकि उस लड़की ने बाद में एक वीडियो में माफी मांगते हुए बताया था कि वह अभी 15 साल की है और उसने विरोध प्रदर्शन में शामिल दूसरे लोगों के बहकावे में आकर ये टिप्पणियां की थीं।


    ‘खुद से नजर भी नहीं मिला पा रही, मुझे माफ कर दीजिए’

    हाल ही में उसने एक वीडियो में कहा था, “मैं सिर्फ 15 साल की हूं। मैंने जो कुछ भी किया, वो माफी के लायक नहीं है। मैंने बहुत-सी गलत बातें कही हैं। यह मेरी पहली और आखीरी गलती है। मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं। मुझे बहुत शर्म आ रही है। मैं खुद से नजर भी नहीं मिला पा रही हूं। प्लीज, मुझे माफ कर दीजिए।”


    पीएम मोदी ने प्रदर्शन में शामिल बच्चों को किया माफ

    प्रदर्शनकारियों पर नरमी बरतने की अपीलों के बीच इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले शुक्रवार को एक इंस्टाग्राम वीडियो मैसेज के माध्यम से कहा कि उन्होंने उन सभी भटके हुए बच्चों को माफ कर दिया है जिन्होंने उन्हें गालियां दीं और अपशब्द कहे थे।

    पीएम मोदी में कहा कि उन्हें सजा देने, अदालतों के चक्कर लगवाने और परेशान करने से हालात नहीं बदलेंगे। मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं। मैं समाज से भी गुजारिश करता हूं कि वे मेरी बात को स्वीकार करें।


    लड़की की मां ने PM से की थी ये अपील

    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बच्चों को माफ करने संबंधी वीडियो जारी किए जाने के बाद आरोपी नाबालिग लड़की की मां ने उनसे अपील की थी कि वे अधिकारियों को उनकी बेटी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने का निर्देश दें। मां ने कहा कि पीएम ने देश की एक बेटी को माफ करके बड़प्पन दिखाया है, जिसने बहुत ही गंदे शब्दों का इस्तेमाल किया था। मैं हाथ जोड़कर उनका धन्यवाद करती हूं। आज उसका नया जन्म हुआ है। प्रधानमंत्री ने उसे जीवनदान दिया है। उन्होंने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजारिश करती हूं कि कृपया उसके खिलाफ गलत नाम और उम्र के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करा दें, अब वह आपकी शरण में है।

  • Bihar के सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन के इंजन में लगी आग…. मची भगदड़

    Bihar के सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन के इंजन में लगी आग…. मची भगदड़


    सहरसा।
    बिहार (Bihar) के सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन (Simri Bakhtiyarpur Station) पर सोमवार तड़के बड़ा रेल हादसा टल गया। समस्तीपुर से सहरसा जा रही पैसेंजर ट्रेन (Passenger Train) (संख्या 63344) के इंजन (Engine) और उससे सटी एक बोगी में अचानक आग (Massive Fire) लग गई। घटना सुबह करीब 3 बजे की है। अंधेरे में ट्रेन से उठती लपटों और धुएं को देखकर स्टेशन परिसर में हड़कंप मच गया और यात्रियों के बीच अफरातफरी फैल गई।

    जानकारी के अनुसार, ट्रेन जैसे ही सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पहुंची, उसके इंजन से धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और लपटें पास की एक बोगी तक पहुंच गईं। उस समय अधिकांश यात्री नींद में थे। आग और धुएं का पता चलते ही बोगी में चीख-पुकार मच गई और यात्री जान बचाने के लिए बाहर निकलने लगे। स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों की मुस्तैदी से सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    सूचना मिलते ही आरपीएफ, स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने में दमकल कर्मियों को करीब ढाई घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी। सुबह लगभग 5:30 बजे आग पूरी तरह बुझा दी गई। इसके बाद सुबह 6 बजे के बाद रेल यातायात सामान्य हो सका।

    सिमरी बख्तियारपुर के स्टेशन अधीक्षक संजय कुमार सज्जन ने बताया कि घटना के कारण रेल परिचालन प्रभावित हुआ। इसके चलते कोसी एक्सप्रेस (सहरसा–पटना), जानकी एक्सप्रेस (मनिहारी–जयनगर), सहरसा–समस्तीपुर पैसेंजर और श्रावणी स्पेशल (सहरसा–देवघर) निर्धारित समय से देरी से चलीं। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी करते रहे। रेलवे ने घटना के वास्तविक कारणों की जांच शुरू कर दी है।

  • आम सिर्फ स्वाद ही नहीं, त्वचा की देखभाल में भी हो सकता है उपयोगी, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल

    आम सिर्फ स्वाद ही नहीं, त्वचा की देखभाल में भी हो सकता है उपयोगी, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल

    नई दिल्ली ।आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी लोकप्रियता केवल स्वाद तक सीमित नहीं है। पोषक तत्वों से भरपूर यह फल शरीर के साथ-साथ त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट त्वचा की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि कई लोग इसे अपने दैनिक आहार के साथ-साथ प्राकृतिक स्किनकेयर रूटीन का भी हिस्सा बनाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार आम में पर्याप्त मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है, जो शरीर में कोलेजन बनने की प्रक्रिया को समर्थन देता है। कोलेजन त्वचा को मजबूती, लचीलापन और स्वस्थ बनावट बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कोलेजन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे त्वचा पर महीन रेखाएं और ढीलापन दिखाई देने लगता है। ऐसे में विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं।

    आम में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन-ए में परिवर्तित हो सकता है। यह पोषक तत्व त्वचा की नई कोशिकाओं के निर्माण और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत की प्रक्रिया में मदद करता है। नियमित और संतुलित मात्रा में आम का सेवन त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में योगदान दे सकता है। विशेष रूप से रूखी और बेजान त्वचा वाले लोगों के लिए यह पोषण का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत माना जाता है।

    इस फल में विटामिन-ई भी पाया जाता है, जो त्वचा की नमी बनाए रखने में सहायक माना जाता है। यह त्वचा की बाहरी परत को पोषण देकर उसे मुलायम और कोमल बनाए रखने में मदद कर सकता है। जिन लोगों की त्वचा जल्दी रूखी हो जाती है, उनके लिए विटामिन-ई युक्त खाद्य पदार्थ लाभदायक माने जाते हैं। इसके अलावा आम में मौजूद कॉपर, पॉलीफेनोल्स और अन्य एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। फ्री रेडिकल्स को समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेतों का एक प्रमुख कारण माना जाता है।

    आम का उपयोग केवल भोजन के रूप में ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक स्किनकेयर में भी किया जाता है। इसके गूदे को दही या शहद के साथ मिलाकर फेस पैक तैयार किया जाता है, जिसे त्वचा को नमी और ताजगी देने के लिए उपयोग किया जाता है। वहीं, आम के गूदे में ओट्स जैसी प्राकृतिक सामग्री मिलाकर हल्का स्क्रब भी बनाया जाता है, जो त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने और त्वचा को साफ महसूस कराने में मदद कर सकता है।

    आम की गुठली से प्राप्त मैंगो बटर भी त्वचा की देखभाल में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें मौजूद फैटी एसिड त्वचा को गहराई से नमी प्रदान करने में सहायक होते हैं। इसी वजह से मैंगो बटर का उपयोग कई मॉइस्चराइजर, बॉडी लोशन और अन्य त्वचा देखभाल उत्पादों में किया जाता है। यह त्वचा को मुलायम बनाए रखने और उसकी प्राकृतिक नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि आम का सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है और अत्यधिक सेवन कुछ लोगों में त्वचा पर तेलीयपन या मुंहासों की समस्या बढ़ा सकता है। जिन लोगों की त्वचा पहले से ऑयली है या जिन्हें एक्ने की समस्या रहती है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा कुछ लोगों को आम के रस, गूदे या छिलके से एलर्जी भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार के प्रयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित माना जाता है।

  • बारिश में ऑयली स्किन से बढ़ सकती हैं त्वचा की समस्याएं, सही फेस वॉश का चुनाव बन सकता है असरदार उपाय

    बारिश में ऑयली स्किन से बढ़ सकती हैं त्वचा की समस्याएं, सही फेस वॉश का चुनाव बन सकता है असरदार उपाय

    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन बढ़ी हुई नमी और उमस त्वचा से जुड़ी कई परेशानियों को भी बढ़ा सकती है। विशेष रूप से ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वाले लोगों को इस मौसम में अतिरिक्त सीबम, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण चेहरे पर चिपचिपाहट महसूस होती है। यदि त्वचा की नियमित सफाई पर ध्यान न दिया जाए, तो मुंहासे, ब्लैकहेड्स, खुले रोमछिद्र और त्वचा की चमक कम होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में त्वचा के प्रकार के अनुसार सही फेस वॉश का चयन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान ऐसा फेस वॉश चुनना चाहिए जो त्वचा की गहराई से सफाई करे, अतिरिक्त तेल को नियंत्रित रखे और साथ ही त्वचा की प्राकृतिक नमी को भी बनाए रखे। अत्यधिक कठोर उत्पादों का इस्तेमाल करने से त्वचा रूखी हो सकती है, जबकि हल्के और संतुलित फॉर्मूले वाले फेस वॉश त्वचा को साफ रखने के साथ उसे ताजगी भी प्रदान करते हैं।

    ऑयली और मुंहासों की समस्या से परेशान लोगों के लिए सैलिसिलिक एसिड युक्त फेस वॉश उपयोगी विकल्प माना जाता है। यह रोमछिद्रों के भीतर जमा अतिरिक्त तेल और गंदगी को साफ करने में मदद करता है तथा ब्लैकहेड्स और पिंपल्स बनने की संभावना को कम करने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञ इसकी सलाह त्वचा की आवश्यकता के अनुसार दिन में एक या दो बार तक उपयोग करने की देते हैं।

    नीम और टी ट्री ऑयल वाले फेस वॉश भी मानसून में काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। इन प्राकृतिक तत्वों में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने और मुंहासों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन वाले लोगों के लिए यह संयोजन लाभदायक माना जाता है।

    यदि त्वचा पर धूल, प्रदूषण और अतिरिक्त तेल अधिक जमा होता है, तो एक्टिवेटेड चारकोल युक्त फेस वॉश भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह त्वचा की गहराई से सफाई करने में मदद करता है और चेहरे को ताजगी का एहसास देता है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसका अत्यधिक उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि बार-बार इस्तेमाल करने से कुछ लोगों की त्वचा रूखी महसूस हो सकती है।

    जेल बेस्ड फेस वॉश भी मानसून के मौसम में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। इनमें एलोवेरा, खीरा या हायल्यूरोनिक एसिड जैसे तत्व शामिल हो सकते हैं, जो त्वचा को बिना अधिक रूखा किए साफ करने में मदद करते हैं। यह फेस वॉश अतिरिक्त तेल हटाने के साथ त्वचा की हल्की नमी बनाए रखते हैं, जिससे चेहरा लंबे समय तक फ्रेश महसूस होता है। ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वाले लोगों के लिए इन्हें उपयुक्त माना जाता है।

    विटामिन सी युक्त फेस वॉश भी त्वचा की देखभाल में उपयोगी माने जाते हैं। यह चेहरे की डलनेस कम करने, त्वचा को ताजगी देने और पर्यावरणीय प्रभावों से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक हो सकते हैं। नियमित स्किनकेयर रूटीन के साथ इनका उपयोग त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फेस वॉश बदलना ही पर्याप्त नहीं है। मानसून में दिन में दो बार चेहरे की सफाई करना, पर्याप्त पानी पीना, हल्का मॉइश्चराइजर लगाना और त्वचा के अनुसार उपयुक्त स्किनकेयर उत्पादों का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या अपनाकर बारिश के मौसम में भी त्वचा को साफ, ताजा और स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।

  • ट्रंप के बयान से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर से नीचे

    ट्रंप के बयान से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर से नीचे


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ट्रंप ने संकेत दिए कि वह अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले रोकने का निर्देश देंगे और मध्य पूर्व में संघर्ष समाप्त करने की दिशा में समझौता करीब है। इसके बाद वैश्विक तेल बाजार में राहत देखने को मिली।

    ब्रेंट और अमेरिकी क्रूड दोनों सस्ते
    रविवार रात कारोबार के दौरान अमेरिकी WTI क्रूड करीब 5 प्रतिशत गिरकर 80.79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड भी लगभग 5 प्रतिशत लुढ़ककर 83.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 84 डॉलर के स्तर से नीचे है। हालांकि, मौजूदा कीमतें अब भी संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक बनी हुई हैं।

    संघर्ष से बाजार में बना रहा उतार-चढ़ाव
    फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से तेल बाजार में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। इस दौरान कई बार कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी पहुंच गई थीं।

    संघर्ष थमने से सप्लाई सुधरने की उम्मीद
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव कम होता है, तो फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति सामान्य हो सकेगी। पिछले कई महीनों से संघर्ष के कारण तेल और अन्य सामान लेकर चलने वाले कई टैंकर प्रभावित हुए थे, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना रहा।

    महंगाई पर भी पड़ा था असर
    तेल की ऊंची कीमतों का असर दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (ATF) की लागत पर पड़ा। कई देशों में ईंधन महंगा होने से परिवहन खर्च बढ़ा, हवाई किराए महंगे हुए और कुछ जगहों पर ईंधन की कमी के चलते राशनिंग जैसी व्यवस्था भी लागू करनी पड़ी।

    तेल कंपनियों को मिला फायदा
    ऊंची कीमतों के दौर में तेल और गैस कंपनियों को अच्छा मुनाफा हुआ। सप्लाई बाधित होने और परिवहन लागत बढ़ने से ईंधन की कीमतों में तेजी आई, जिसका लाभ ऊर्जा कंपनियों को मिला।

    भारत में तुरंत नहीं घटते पेट्रोल-डीजल के दाम
    विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने का असर भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर तुरंत नहीं दिखता। यहां ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव, रुपये-डॉलर विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत और केंद्र व राज्यों के टैक्स जैसे कई कारकों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं। इसलिए वैश्विक बाजार में आई गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

  • मोबाइल का लगातार बढ़ता इस्तेमाल बन रहा टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की वजह, समय से पहले कमजोर हो सकती है गर्दन

    मोबाइल का लगातार बढ़ता इस्तेमाल बन रहा टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की वजह, समय से पहले कमजोर हो सकती है गर्दन

    नई दिल्ली ।डिजिटल तकनीक ने लोगों की जिंदगी को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाया है, लेकिन इसके लगातार और गलत तरीके से इस्तेमाल के कारण कई नई स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इनमें टेक्स्ट नेक सिंड्रोम तेजी से बढ़ने वाली ऐसी समस्या है, जो लंबे समय तक मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की स्क्रीन पर झुककर देखने की आदत से जुड़ी मानी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सही सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है।

    टेक्स्ट नेक सिंड्रोम मुख्य रूप से गर्दन और सर्वाइकल स्पाइन से संबंधित समस्या है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक सिर को आगे झुकाकर मोबाइल या अन्य डिजिटल स्क्रीन देखता है, तो गर्दन की मांसपेशियों और रीढ़ पर सामान्य से कई गुना अधिक दबाव पड़ने लगता है। सामान्य स्थिति में सिर का भार सीमित रहता है, लेकिन जैसे-जैसे सिर आगे की ओर झुकता है, गर्दन को अधिक वजन संभालना पड़ता है। यही अतिरिक्त दबाव धीरे-धीरे मांसपेशियों में थकान, दर्द और संरचनात्मक बदलाव का कारण बन सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार मोबाइल देखने की आदत गर्दन की मांसपेशियों को तनावग्रस्त बनाए रखती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और रीढ़ की प्राकृतिक बनावट भी प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि इसे डिजिटल युग से जुड़ी ऐसी समस्या माना जा रहा है, जो समय से पहले गर्दन को कमजोर और कम लचीला बना सकती है।

    इस समस्या के कई शुरुआती संकेत दिखाई दे सकते हैं। गर्दन में लगातार दर्द या अकड़न, कंधों में जकड़न, पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, बार-बार सिरदर्द, गर्दन घुमाने में कठिनाई, मांसपेशियों में खिंचाव तथा हाथों या उंगलियों में सुन्नपन जैसे लक्षण इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं। कुछ लोगों में लंबे समय तक गलत पोश्चर बनाए रखने के कारण कंधे झुकने और गर्दन आगे की ओर निकलने जैसी शारीरिक स्थिति भी विकसित हो सकती है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक माना जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि टेक्स्ट नेक सिंड्रोम का सबसे बड़ा कारण आधुनिक जीवनशैली और स्क्रीन के सामने बिताया जाने वाला लंबा समय है। बिना ब्रेक लिए लगातार मोबाइल चलाना, लैपटॉप पर गलत मुद्रा में काम करना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना और कार्यस्थल पर उचित एर्गोनॉमिक व्यवस्था का अभाव इस समस्या के जोखिम को बढ़ा सकता है। बच्चों और युवाओं में बढ़ता स्क्रीन टाइम भी चिंता का विषय माना जा रहा है।

    इस समस्या से बचाव के लिए कुछ सरल आदतों को अपनाना प्रभावी हो सकता है। मोबाइल या टैबलेट का उपयोग करते समय स्क्रीन को आंखों के स्तर के करीब रखने का प्रयास करना चाहिए, ताकि गर्दन को बार-बार नीचे न झुकाना पड़े। बैठते समय रीढ़ को सीधा रखना और कंधों को संतुलित स्थिति में रखना भी जरूरी है। लगातार स्क्रीन देखने के बजाय नियमित अंतराल पर छोटे-छोटे ब्रेक लेना, गर्दन और ऊपरी पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग करना तथा शारीरिक गतिविधि को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना भी लाभदायक माना जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल उपकरणों का संतुलित और सही तरीके से उपयोग करने के साथ-साथ सही पोश्चर अपनाकर टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सुधारात्मक कदम उठाना लंबे समय तक गर्दन और रीढ़ के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।