Author: bharati

  • पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ये जगहें जरूर देखें झरनों पहाड़ों और मंदिरों के बीच यादगार होगा सफर

    पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ये जगहें जरूर देखें झरनों पहाड़ों और मंदिरों के बीच यादगार होगा सफर


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में अगर आप ऐसी जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं जहां पहाड़ों की खूबसूरती के साथ हरियाली झरने और शांत वातावरण का आनंद लिया जा सके तो पचमढ़ी आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी प्रदेश का प्रसिद्ध हिल स्टेशन है। यहां का प्राकृतिक वातावरण शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय सुकून के साथ बिताने का मौका देता है। परिवार दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने के लिए भी पचमढ़ी की यात्रा यादगार हो सकती है।

    पचमढ़ी की सबसे खास बात यहां का प्राकृतिक सौंदर्य है। चारों तरफ फैली हरियाली ऊंची पहाड़ियां और जंगल इस जगह को अलग पहचान देते हैं। बारिश के मौसम में यहां का नजारा और भी आकर्षक हो जाता है। पहाड़ियों से गिरते झरने और बादलों से ढके रास्ते पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं। सर्दियों में मौसम सुहावना रहता है और सुबह तथा शाम के समय हल्की ठंड के बीच घूमने का अलग आनंद मिलता है।

    पचमढ़ी में घूमने के लिए कई प्रसिद्ध स्थान हैं। बी फॉल यहां के लोकप्रिय झरनों में शामिल है जहां ऊंचाई से गिरता पानी और आसपास का हराभरा वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है। झरने तक पहुंचने का रास्ता भी यात्रा को रोमांचक बनाता है। इसके अलावा अप्सरा विहार भी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां पानी और चट्टानों के बीच कुछ समय बिताकर प्रकृति को करीब से महसूस किया जा सकता है।

    धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले स्थानों में पांडव गुफाएं भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इन गुफाओं से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं इन्हें खास बनाती हैं। यहां आने वाले लोग प्राकृतिक वातावरण के साथ इस स्थान से जुड़ी धार्मिक परंपराओं को भी करीब से देखते हैं। चौरागढ़ और जटाशंकर जैसे स्थान भी पचमढ़ी यात्रा को खास बना सकते हैं। जटाशंकर मंदिर प्राकृतिक चट्टानों के बीच स्थित है और भगवान शिव से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    अगर आपको सूर्योदय और सूर्यास्त के खूबसूरत नजारे पसंद हैं तो पचमढ़ी में सनसेट प्वाइंट और अन्य ऊंचे स्थानों का रुख किया जा सकता है। ऊंचाई से आसपास की पहाड़ियों और जंगलों का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। शाम के समय आसमान के बदलते रंगों के बीच पहाड़ियों का नजारा पर्यटकों को काफी पसंद आता है।

    पचमढ़ी जाने से पहले मौसम की जानकारी लेना जरूरी है। मानसून के दौरान बारिश के कारण कुछ रास्तों और प्राकृतिक स्थानों पर सावधानी की जरूरत पड़ सकती है। आरामदायक जूते पहनना और जरूरी सामान साथ रखना बेहतर रहता है। झरनों या पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा नियमों का पालन करना भी जरूरी है। प्रकृति के बीच घूमते समय प्लास्टिक या कचरा फैलाने से बचना चाहिए ताकि इस खूबसूरत पर्यटन स्थल की प्राकृतिक सुंदरता बनी रहे।

    रुकने के लिए पचमढ़ी में अलग अलग बजट के अनुसार होटल और अन्य ठहरने के विकल्प मिल जाते हैं। स्थानीय भोजन का स्वाद लेने के साथ आसपास के बाजारों में खरीदारी भी की जा सकती है। यहां की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए कम से कम दो दिन का समय रखा जा सकता है ताकि प्रमुख पर्यटन स्थलों को जल्दबाजी के बिना देखा जा सके।

    कुल मिलाकर पचमढ़ी उन लोगों के लिए खास जगह है जो पहाड़ों और प्रकृति के बीच कुछ समय बिताना चाहते हैं। यहां झरनों की आवाज हरियाली से घिरी पहाड़ियां धार्मिक स्थल और शांत वातावरण एक साथ देखने को मिलता है। यही वजह है कि पचमढ़ी मध्यप्रदेश में घूमने के लिए लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है।

  • जवाई बांध में 24 फीट से भी कम पानी, 500 से ज्यादा मगरमच्छ और लाखों मछलियों पर संकट

    जवाई बांध में 24 फीट से भी कम पानी, 500 से ज्यादा मगरमच्छ और लाखों मछलियों पर संकट


    पाली।
    पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा और पाली जिले की पहचान माने जाने वाले जवाई बांध में जल संकट गहराता जा रहा है। 61.25 फीट की भराव क्षमता वाले बांध में पानी का स्तर घटकर 24 फीट से भी नीचे पहुंच गया है। कम होते जलस्तर का असर अब इंसानों के साथ-साथ बांध के जलीय जीवों पर भी दिखाई देने लगा है। जवाई में रहने वाले 500 से ज्यादा मगरमच्छों और लाखों मछलियों के सामने पानी और भोजन का संकट खड़ा हो गया है।

    जलस्तर लगातार घटने से मगरमच्छों के लिए तैरने और सुरक्षित स्थानों की उपलब्धता कम होती जा रही है। वहीं, पानी का तापमान बढ़ने से मछलियों के जीवन पर भी असर पड़ रहा है। बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की स्थिति में बांध का पानी दूषित होने का खतरा भी बढ़ सकता है। इससे मगरमच्छों के लिए भोजन की उपलब्धता पर भी असर पड़ेगा।

    तीन महीने का पानी बचने का दावा

    विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा स्थिति में जवाई बांध में करीब तीन महीने का पानी ही बचा है। इसके बाद बांध के डेड स्टोरेज में पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में जल संकट का असर केवल मानव आबादी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बांध के पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।

    500 से अधिक मगरमच्छ और बड़ी संख्या में मछलियां जवाई के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में जलस्तर में और गिरावट आने पर इनके संरक्षण के लिए प्रशासन और वन्यजीव विभाग के सामने चुनौती बढ़ सकती है। समय रहते जल प्रबंधन और वन्यजीवों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले समय में जलीय जीवों के सामने गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

    मगरमच्छों के लिए मशहूर है जवाई

    जवाई बांध और इसके आसपास का क्षेत्र अपनी अनूठी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां के तेंदुओं के साथ-साथ विशालकाय मगरमच्छ भी पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं। पहाड़ियों से घिरे बांध के पानी और चट्टानी किनारों पर धूप सेंकते मगरमच्छों को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर पहुंचते हैं।

    जवाई क्षेत्र में तेंदुओं और मगरमच्छों का प्राकृतिक सह-अस्तित्व इसकी खास पहचान है। जवाई सफारी के दौरान पर्यटक बांध के उथले पानी और चट्टानों पर मगरमच्छों की गतिविधियों को करीब से देखते हैं। वन्यजीव पर्यटन यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    ऐसे में जवाई बांध का लगातार घटता जलस्तर केवल जल संकट नहीं, बल्कि यहां के वन्यजीव और पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।

  • 308 पहियों वाले ‘बाहुबली’ ट्रक का क्यों बदला गया रूट? फुट ओवरब्रिज काटकर निकाला, अब इस रास्ते से लखीमपुर पहुंचेगा

    308 पहियों वाले ‘बाहुबली’ ट्रक का क्यों बदला गया रूट? फुट ओवरब्रिज काटकर निकाला, अब इस रास्ते से लखीमपुर पहुंचेगा


    लखीमपुर।
    उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में निर्माणाधीन चीनी मिल के प्लांट के लिए बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए लाया गया विशाल बॉयलर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस भारी-भरकम मशीन से ज्यादा 308 पहियों वाला ट्रेलर लोगों का ध्यान खींच रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस ‘बाहुबली’ ट्रक के वीडियो तेजी से चर्चा में हैं। इसे देखने और वीडियो बनाने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जुट रही है। फोटो और सेल्फी लेने के लिए उमड़ रही भीड़ के कारण ट्रेलर को आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है। इसी के चलते इसके निर्धारित मार्ग में बदलाव करना पड़ा है।

    ट्रेलर को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए पुलिस की टीम साथ चल रही है। रास्ते में आने वाले संकेतक बोर्ड और फुट ओवरब्रिज जैसी बाधाओं को हटाने के लिए भी इंतजाम किए जा रहे हैं। गुरुवार को यह ट्रेलर हरहुआ से रिंग रोड फेज-1 होते हुए संदहा के पास पहुंचा। स्वर्वेद महामंदिर के नजदीक बने फुट ओवरब्रिज को इसके गुजरने के लिए देर शाम तक काटकर हटाया गया। इसके बाद ट्रेलर को वहां से निकाला गया।

    स्वर्वेद मंदिर के पास फुट ओवरब्रिज बना बाधा

    करीब 200 टन वजनी बॉयलर लेकर चल रहा 308 पहियों वाला ट्रेलर हरहुआ से आगे बढ़ते हुए उमरहां के पास पहुंचा तो स्वर्वेद महामंदिर के सामने बना पैदल फुट ओवरब्रिज रास्ते में बाधा बन गया। भारी-भरकम ट्रेलर को निकालने के लिए ओवरब्रिज के हिस्से को काटने का काम शुरू किया गया। इस दौरान आसपास के लोग विशाल ट्रक को देखने के लिए जमा रहे।

    ट्रेलर के हरहुआ, संदहा और उमरहां सहित विभिन्न स्थानों से गुजरने के दौरान बड़ी संख्या में लोग वीडियो और रील बनाते नजर आए। लोगों की भीड़ के चलते वाहन की रफ्तार प्रभावित हुई। संभावना जताई गई कि ट्रेलर गुरुवार देर रात उमरहां पहुंचेगा, जिसके बाद वह गाजीपुर की ओर रवाना होगा।

    डाफी टोल प्लाजा पर 693 रुपये का टोल

    लखीमपुर खीरी के लिए बॉयलर लेकर जा रहा मल्टी-एक्सल वैक्यूम ट्रेलर बुधवार दोपहर करीब 12 बजे के बाद डाफी टोल प्लाजा से आगे बढ़ा। यहां ट्रेलर से 693 रुपये टोल लिया गया। इसके बाद वाहन उल्टी लेन से रखौना होते हुए रिंग रोड पर पहुंचा। गंजारी स्टेडियम के पास ट्रेलर अपनी निर्धारित लेन में आया और देर शाम कोईराजपुर के पास पहुंचा।

    बॉयलर लेकर चलने वाला यह ट्रेलर डाफी टोल प्लाजा से अखरी, लठिया, कन्नाडाड़ी और मोहनसराय होते हुए राजातालाब की ओर बढ़ा था। गुरुवार सुबह इसे संदहा के रास्ते आगे गाजीपुर की ओर रवाना किया गया।

    ट्रेलर निकालने के लिए हटाए गए संकेतक और ओवरब्रिज

    करीब 200 टन वजनी यह विशाल ट्रेलर बॉयलर के साथ दोपहर करीब 1:30 बजे मोहनसराय पहुंचा। यहां रास्ते में लगे संकेतक बोर्ड को हटाना पड़ा। मोहनसराय-गंगापुर मोड़ पर फुट ओवरब्रिज को भी पहले ही काटकर हटाया जा चुका था।

    ट्रेलर के पहुंचने पर जेसीबी की मदद से संकेतक और फुट ओवरब्रिज के हिस्सों को ऊपर उठाकर रास्ता साफ किया गया। वाहन के गुजरने के बाद आवश्यक हिस्सों को दोबारा व्यवस्थित किया गया। ट्रेलर रखौना होते हुए रिंग रोड फेज-2 से आगे बढ़ा। इसके सुरक्षित आवागमन के लिए संबंधित मार्गों पर कुछ समय के लिए सामान्य यातायात भी रोका जाता रहा।

    दलदली जमीन में फंस गया था ट्रेलर

    इससे पहले भी 308 पहियों वाले ट्रेलर को रास्ते में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए ओडिशा पहुंचे इस ओवर डायमेंशन कार्गो बॉयलर को सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश लाया जा रहा है। बिहार के नौबतपुर बॉर्डर पर पहुंचने के बाद ट्रेलर शुक्रवार को कटसिला के पास हाईवे पर रात होने के कारण रोक दिया गया था।

    शनिवार को पचफेड़वा के पास रिंग रोड के पुल के कारण ट्रेलर को वैकल्पिक मार्ग से निकालने की योजना बनाई गई, लेकिन निर्धारित तरीके से आगे बढ़ना संभव नहीं हो सका। रविवार को बॉयलर लेकर चल रहा ट्रेलर रेवसा के पास रिंग रोड की पूर्वी सर्विस लेन पर पहुंचा। आगे जमीन दलदली होने के कारण उसे वहीं रोकना पड़ा। बाद में देर शाम ट्रेलर रिंग रोड पार कर पश्चिमी लेन तक पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, वाहन चंदौली में भी करीब दो दिन तक फंसा रहा, जहां से उसे निकालने के लिए रास्ता तैयार किया गया।

    देश के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए लाया जा रहा बॉयलर

    यह विशाल बॉयलर लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में मैसर्स बलराम चीनी मिल लिमिटेड की ओर से बनाए जा रहे बायोप्लास्टिक यानी पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) विनिर्माण संयंत्र के लिए लाया जा रहा है। इसे देश के पहले बायोप्लास्टिक विनिर्माण संयंत्र के रूप में बताया जा रहा है।

    इस विशेष उपकरण की लंबाई करीब 41 मीटर, चौड़ाई 6 मीटर और ऊंचाई 7 मीटर है। इसका वजन 164.28 मीट्रिक टन बताया गया है। इसे ले जाने के लिए 308 पहियों वाले विशेष ट्रेलर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    ट्रैफिक पुलिस ने ट्रेलर को चंदौली जिले की सीमा से सुरक्षित निकालकर वाराणसी में प्रवेश कराया। अब सड़क की स्थिति, रास्ते में आने वाली बाधाओं और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • छावनी में फिर चला बुलडोजर, मथुरावाला बिल्डिंग पर निगम की कार्रवाई, रोड चौड़ीकरण को लेकर क्यों मचा हड़कंप

    छावनी में फिर चला बुलडोजर, मथुरावाला बिल्डिंग पर निगम की कार्रवाई, रोड चौड़ीकरण को लेकर क्यों मचा हड़कंप


    इंदौर। मास्टर प्लान के तहत रोड चौड़ीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए नगर निगम की टीम शुक्रवार सुबह एक बार फिर छावनी क्षेत्र पहुंची। निगम के अमले ने छावनी चौराहे के आसपास सड़क चौड़ीकरण में बाधक मकानों और प्रतिष्ठानों के हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान मथुरावाला प्रतिष्ठान की पुरानी बिल्डिंग के बाधक हिस्से भी तोड़े गए। कार्रवाई के लिए नगर निगम की टीम तीन पोकलेन और दो जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची थी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

    सुबह निगम का अमला मशीनों के साथ छावनी चौराहे पर पहुंचा और कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक पहले कुछ हिस्सों को मैन्युअल तरीके से हटाने का काम किया गया। इसके बाद भारी मशीनों की मदद से सड़क चौड़ीकरण में बाधा बन रहे हिस्सों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान आसपास के क्षेत्र में लोगों की आवाजाही बनी रही। फिलहाल कार्रवाई के दौरान किसी बड़े विवाद या विरोध की सूचना सामने नहीं आई है।

    नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर प्रखर सिंह के मुताबिक मास्टर प्लान में शामिल छावनी रोड के चौड़ीकरण के लिए जिन हिस्सों को हटाया जाना बाकी था उन पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ मकानों के छज्जे और अन्य बाधक हिस्से हटाए गए हैं। निगम का कहना है कि पहले से लंबित कार्रवाई को पूरा करने के बाद रोड चौड़ीकरण के काम को आगे बढ़ाया जाएगा।

    छावनी क्षेत्र में रोड चौड़ीकरण को लेकर नगर निगम पहले भी कार्रवाई कर चुका है। मई में भी निगम का अमला क्षेत्र में पहुंचा था और सड़क के लिए जरूरी बाधक हिस्सों को हटाया गया था। इसके बाद रोड निर्माण और चौड़ीकरण से जुड़े काम को आगे बढ़ाया गया। उस समय कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला था। कांग्रेस की ओर से क्षेत्र में जन अधिकार यात्रा निकालकर कार्रवाई का विरोध किया गया था। अब कई महीने बाद निगम ने एक बार फिर लंबित हिस्सों को हटाने की कार्रवाई शुरू की है।

    छावनी क्षेत्र में इस तरह की कार्रवाई के दौरान पहले हादसा भी हो चुका है। पिछली कार्रवाई के दौरान मशीन में बिजली के तार उलझ गए थे। तार हटाने के प्रयास में जेसीबी चालक ने जोर लगाया था जिसके बाद बिजली का खंभा उखड़कर नीचे गिर गया। हादसे में होम्योपैथिक डॉक्टर कपिल दीक्षित घायल हो गए थे। इस घटना के बाद बिजली लाइनों और मशीनों से जुड़ी सुरक्षा को लेकर भी सावधानी जरूरी मानी गई थी।

    छावनी की खास बात यह है कि यहां कई मकान और प्रतिष्ठान सौ साल से भी अधिक पुराने बताए जाते हैं। पुराने निर्माण और घनी आबादी वाले इलाके में रोड चौड़ीकरण की कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है। शुक्रवार को जिन हिस्सों पर निगम ने कार्रवाई की उनमें मथुरावाला बिल्डिंग भी शामिल रही। यह पुरानी इमारत पांच मंजिला बताई जा रही है और इसमें बेसमेंट भी है। सड़क चौड़ीकरण के लिए इसके बाधक हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की गई।

    नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद अब छावनी रोड चौड़ीकरण के काम में तेजी आने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में शेष बाधक हिस्सों को हटाने और सड़क से जुड़े निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रह सकती है।

  • MP Politics, नए प्रभारी के सामने संगठन की चुनौतियां, राहुल गांधी के दौरे पर वार-पलटवार, समोसे तलते सांसद ने खींचा ध्यान

    MP Politics, नए प्रभारी के सामने संगठन की चुनौतियां, राहुल गांधी के दौरे पर वार-पलटवार, समोसे तलते सांसद ने खींचा ध्यान


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों संगठन से लेकर सरकार और विपक्ष तक कई घटनाक्रम एक साथ चर्चा में हैं। भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब के पहले दौरे के दौरान संगठन में बेहतर तालमेल और मतभेदों को लेकर दिए गए संदेश ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। देब ने सरकार और संगठन के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया है। साथ ही पार्टी के अलग अलग स्तरों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलकर काम करने की नसीहत दी है।

    बिप्लब देब के दौरे के दौरान पार्टी की संगठनात्मक बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने नेताओं से सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने नहीं लाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े संगठन में मतभेद हो सकते हैं लेकिन इन्हें पार्टी के कामकाज पर हावी नहीं होना चाहिए। इस दौरान संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने पर भी जोर दिया गया।

    दरअसल बिप्लब देब को हाल ही में मध्यप्रदेश भाजपा का नया प्रभारी बनाया गया है। उनके सामने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की चुनौती बताई जा रही है। उनके पहले दौरे में ही सरकार और संगठन के बीच समन्वय का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। हालांकि भाजपा नेताओं की ओर से सार्वजनिक तौर पर संगठन में एकजुटता और बेहतर तालमेल पर ही जोर दिया गया है।

    इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बालाघाट दौरे को लेकर भी मध्यप्रदेश की सियासत गरमाई रही। राहुल गांधी ने आदिवासी बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। जीतू पटवारी ने भी सरकार पर तीखे आरोप लगाए।

    राहुल गांधी के दौरे के जवाब में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के पुराने शासन और मौजूदा दौरे को लेकर सवाल उठाए। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने राहुल गांधी के दौरे को राजनीतिक बताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कहा कि अगर राहुल गांधी मौजूदा समस्याओं पर सवाल उठा रहे हैं तो कांग्रेस के शासनकाल का हिसाब भी उन्हें देना चाहिए।

    इसी राजनीतिक बयानबाजी के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर से स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर की गई टिप्पणी भी चर्चा में रही। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। ऐसे मामलों में राजनीतिक पलटवार के दौरान नेताओं के बयानों और नामों को लेकर हुई चूक भी चर्चा का विषय बन जाती है।

    दूसरी ओर सीधी से भाजपा सांसद राजेश मिश्रा के एक स्थानीय दुकान पर समोसे तलने का वीडियो भी चर्चा में रहा। रिपोर्ट के अनुसार सांसद ने दुकानदार से बातचीत की और उसकी रोजमर्रा की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान सरकारी सहायता और पीएम स्वनिधि योजना का भी जिक्र हुआ। इस घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

    मध्यप्रदेश भाजपा के भीतर संगठनात्मक बैठकों और आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। पार्टी ने उन विधानसभा क्षेत्रों पर भी संगठनात्मक फोकस बढ़ाने की बात कही है जहां उसे 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में नए प्रदेश प्रभारी के सामने संगठन में तालमेल मजबूत करना और जमीनी नेटवर्क को सक्रिय रखना महत्वपूर्ण एजेंडा बना हुआ है।

  • पश्चिम बंगाल में एक साल के दौरान जारी OBC सर्टिफिकेट होंगे अमान्य? सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला

    पश्चिम बंगाल में एक साल के दौरान जारी OBC सर्टिफिकेट होंगे अमान्य? सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाणपत्रों की वैधता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई करने की बात कही। मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका से संबंधित है, जिसमें 8 मई 2025 से 18 मई 2026 के बीच राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए सभी ओबीसी प्रमाणपत्रों को अमान्य करार दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

    जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिका को इसी तरह के मुद्दे से संबंधित एक अन्य लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से आग्रह किया कि मामले का अंतिम फैसला आने तक कुछ रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं की जाएं।

    इस पर पीठ ने कहा कि सरकारी पदों को खाली नहीं रखा जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि इस दौरान की जाने वाली नियुक्तियां विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगी। राज्य सरकार को सफल उम्मीदवारों को जारी किए जाने वाले नियुक्ति पत्रों में भी इस शर्त का उल्लेख करना होगा।

    मई 2024 के फैसले से शुरू हुआ विवाद

    ओबीसी आरक्षण को लेकर विवाद मई 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद शुरू हुआ था। अदालत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा 2010 से 2012 के बीच जारी कार्यकारी आदेशों के तहत ओबीसी सूची में शामिल की गई कई श्रेणियों को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही ओबीसी-ए और ओबीसी-बी में उप-वर्गीकरण तथा दोनों श्रेणियों के बीच 17 प्रतिशत आरक्षण के वितरण से संबंधित प्रावधान भी निरस्त कर दिए गए थे।

    इसके बाद राज्य सरकार ने मई और जून 2025 में नई अधिसूचनाएं जारी कर संशोधित ओबीसी आरक्षण नीति लागू करने की कोशिश की। हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने 17 जून 2025 को इन अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी। अदालत का कहना था कि राज्य सरकार कार्यकारी आदेश जारी करके न्यायालय के फैसले को निष्प्रभावी नहीं कर सकती।

    ओबीसी-ए प्रमाणपत्र को लेकर भी पहुंचा मामला

    बाद में पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दायर अपनी अपीलें वापस ले लीं।

    वर्तमान याचिकाएं कलकत्ता हाईकोर्ट के 12 अगस्त के आदेश के बाद दायर की गई हैं। उस आदेश में अदालत ने एक ऐसे उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी थी, जिसने 2025 की अधिसूचना के तहत अप्रैल 2026 में जारी ओबीसी-ए प्रमाणपत्र के आधार पर राहत मांगी थी।

    अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान ओबीसी प्रमाणपत्रों की वैधता और उनसे जुड़े नियुक्ति मामलों पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • अमित शाह के भोपाल दौरे में कई बड़े कार्यक्रम गोपालक सम्मेलन से डेयरी प्लांट तक जानिए 3 अक्टूबर का पूरा एजेंडा

    अमित शाह के भोपाल दौरे में कई बड़े कार्यक्रम गोपालक सम्मेलन से डेयरी प्लांट तक जानिए 3 अक्टूबर का पूरा एजेंडा


    भोपाल। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 2 अक्टूबर की रात भोपाल पहुंचेंगे और 3 अक्टूबर को राजधानी में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे। उनके दौरे का प्रमुख कार्यक्रम भेल दशहरा मैदान में आयोजित होने वाला राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन है। इसमें मध्यप्रदेश के अलग अलग जिलों से 35 हजार से अधिक गोपालकों और दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े सदस्यों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। शाह के दौरे में पशुपालन और डेयरी के साथ सहकारिता पुलिसिंग उच्च शिक्षा और सड़क अधोसंरचना से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल हैं।

    गोपालक सम्मेलन में भोपाल के अलावा सीहोर बैतूल राजगढ़ हरदा गुना अशोकनगर शाजापुर विदिशा रायसेन और नर्मदापुरम समेत कई जिलों से प्रतिभागियों के पहुंचने की तैयारी है। कार्यक्रम में राज्य सरकार की ओर से कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किए गए कामों और बलराम कृषि महोत्सव से जुड़ी गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। गृह पशुपालन एवं डेयरी सहकारिता लोक निर्माण और परिवहन विभाग भी अपनी योजनाओं और कार्यों की जानकारी देंगे।

    सम्मेलन में पशुपालकों और दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े लोगों के लिए कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों को बोनस राशि वितरित की जाएगी। गौशालाओं को सहायता देने के साथ गोपालक दीदियों का सम्मान किया जाएगा। डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र भी वितरित किए जाने की जानकारी है।

    शाह के दौरे में डेयरी क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं पर भी विशेष फोकस रहेगा। उज्जैन में 255 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट प्रस्तावित है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसकी शुरुआती क्षमता रोजाना 3 लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण की होगी जिसे भविष्य में 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने का लक्ष्य है। यहां दूध के साथ दही छाछ घी और अन्य डेयरी उत्पादों के प्रसंस्करण की क्षमता विकसित की जाएगी।

    भोपाल सहकारी दुग्ध संघ परिसर में तैयार फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का उद्घाटन भी प्रस्तावित कार्यक्रम में शामिल है। करीब 16.80 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस प्लांट में रोजाना 40 हजार लीटर दूध के प्रसंस्करण की क्षमता बताई गई है। इससे दही छाछ लस्सी श्रीखंड और मावा जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन को बढ़ाने की योजना है।

    अमित शाह के कार्यक्रम में नए आपराधिक कानूनों पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन और अवलोकन भी प्रस्तावित है। इसके अलावा भौंरी स्थित IISER परिसर से जुड़ा कार्यक्रम और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अनावरण की जानकारी भी सामने आई है। सड़क अधोसंरचना से जुड़े कार्यक्रम भी दौरे का हिस्सा बताए गए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शाह के दौरे की तैयारियों की समीक्षा की है। प्रशासन को बैठक व्यवस्था पेयजल स्वच्छता सुरक्षा यातायात और अन्य व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह 3 अक्टूबर को भोपाल में होने वाला कार्यक्रम केवल गोपालक सम्मेलन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि डेयरी सहकारिता पुलिसिंग उच्च शिक्षा और अधोसंरचना से जुड़े कई कार्यक्रमों को एक साथ जोड़ेगा।

  • MP Sub Engineer भर्ती में नया नियम लागू, संविदाकर्मियों के लिए 50% आरक्षण, 13 अक्टूबर से दोबारा आवेदन शुरू

    MP Sub Engineer भर्ती में नया नियम लागू, संविदाकर्मियों के लिए 50% आरक्षण, 13 अक्टूबर से दोबारा आवेदन शुरू


    भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। सब इंजीनियर ड्राफ्ट्समैन लैब टेक्नीशियन समेत अन्य समकक्ष पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया एक बार फिर शुरू होने जा रही है। हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद भर्ती नियमों में बदलाव किया गया है। अब पात्र संविदाकर्मियों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही अलग अलग विभागों से अतिरिक्त रिक्त पदों की मांग भी प्राप्त हुई है। इन बदलावों के बाद मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल यानी MPESB ने समूह 3 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2026 के आवेदन दोबारा लेने का फैसला किया है।

    नई व्यवस्था के तहत अभ्यर्थी 13 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 27 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। वहीं आवेदन पत्र में संशोधन की सुविधा 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक उपलब्ध रहेगी। भर्ती परीक्षा दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है। संशोधित नियम पुस्तिका भी जल्द जारी की जाएगी। ऐसे में पहले आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों के साथ नए उम्मीदवारों को भी संशोधित भर्ती प्रक्रिया और पदों की संख्या से जुड़ी जानकारी पर नजर रखनी होगी।

    दरअसल जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की ओर से 29 अगस्त 2026 को उपयंत्री पदों की भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। उस समय पात्र संविदाकर्मियों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान नहीं किया गया था। इसके बाद जबलपुर के आधारताल निवासी राजू यादव समेत 24 संविदाकर्मियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता नवीन सैनी ने वर्ष 2023 की संशोधित नीति का हवाला देते हुए पात्र संविदाकर्मियों को सीधी भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की मांग रखी थी।

    इस मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक कुमार सिंह की कोर्ट में होनी थी। सुनवाई से पहले ही जल संसाधन और पीएचई विभाग ने भर्ती नियम में संशोधन कर दिया। संशोधित आदेश में उपयंत्री भर्ती में पात्र संविदाकर्मियों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान शामिल किया गया। इसके बाद MPESB ने भी भर्ती प्रक्रिया को संशोधित करते हुए आवेदन दोबारा लेने का निर्णय किया है।

    इससे पहले MPESB ने 18 अगस्त को समूह 3 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2026 का विज्ञापन जारी किया था। इसमें कुल 1040 पदों पर भर्ती प्रस्तावित थी और 29 अगस्त से 12 सितंबर तक आवेदन लिए गए थे। बाद में विभिन्न विभागों और शासकीय उपक्रमों की ओर से उपयंत्री के अतिरिक्त रिक्त पदों के मांगपत्र मंडल को प्राप्त हुए। दूसरी ओर आरक्षण से जुड़े नियमों में भी बदलाव हुआ। इसी वजह से भर्ती प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

    अब अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तारीख 13 अक्टूबर है। इसी दिन से आवेदन की प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी। संशोधित नियम पुस्तिका जारी होने के बाद पदों की संख्या आरक्षण व्यवस्था और पात्रता से जुड़ी शर्तों की पूरी जानकारी स्पष्ट होगी। उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले नए नियमों को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी जाएगी ताकि किसी तरह की गलती से बचा जा सके।

  • 2 अक्टूबर को भारत का कमाल लवलीना का गोल्ड और तीरंदाजी में ऐतिहासिक जीत से बढ़ा मेडल का आंकड़ा

    2 अक्टूबर को भारत का कमाल लवलीना का गोल्ड और तीरंदाजी में ऐतिहासिक जीत से बढ़ा मेडल का आंकड़ा


    नई दिल्ली। आइची नागोया एशियन गेम्स 2026 में 2 अक्टूबर का दिन भारतीय खिलाड़ियों के नाम रहा। 13वें दिन भारत की नजरें बॉक्सिंग तीरंदाजी कुश्ती हॉकी और कई अन्य खेलों पर थीं और दिन आगे बढ़ने के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने पदकों की झड़ी लगा दी। सबसे खास प्रदर्शन स्टार बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन का रहा जिन्होंने अपने जन्मदिन के दिन देश को गोल्ड मेडल का तोहफा दिया। इसके अलावा भारतीय महिला रिकर्व टीम ने भी ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    लवलीना बोरगोहेन ने महिला 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। 2 अक्टूबर को अपना 29वां जन्मदिन मना रहीं लवलीना के लिए यह जीत बेहद खास रही। इस स्वर्ण के साथ वह एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बन गईं। उनसे पहले यह उपलब्धि मैरी कॉम ने 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में हासिल की थी।

    लवलीना की जीत के कुछ ही समय बाद तीरंदाजी से भी भारत के लिए बड़ी खबर आई। अंकिता भकत कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोड की भारतीय महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया को फाइनल में 5-3 से हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। यह इस स्पर्धा में भारतीय महिला रिकर्व टीम का पहला एशियन गेम्स स्वर्ण पदक है। मुकाबले में भारतीय तीरंदाजों ने तेज हवा के बीच दबाव बनाए रखा और मजबूत कोरियाई टीम के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया।

    हालांकि पुरुष रिकर्व टीम को फाइनल में दक्षिण कोरिया के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। धीरज बोम्मादेवरा नीरज चौहान और यशदीप भोगे की भारतीय टीम को 1-5 से शिकस्त मिली और उसे सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। इससे पहले भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में ईरान को 6-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।

    कुश्ती में भी भारत की उम्मीदें बनी रहीं। सुजीत कलकल ने 65 किलोग्राम वर्ग में ओलंपिक चैंपियन को हराकर फाइनल में जगह बनाई। ऐसे में उनके मुकाबले पर भी भारतीय प्रशंसकों की नजरें टिकी रहीं। दिन के मुकाबलों में भारत ने बॉक्सिंग और तीरंदाजी के अलावा कई अन्य खेलों में भी पदक की उम्मीद बनाए रखी।

    1 अक्टूबर यानी 12वें दिन भारत ने छह पदक जीते थे जिनमें दो सिल्वर और चार ब्रॉन्ज शामिल थे। इसके बाद 2 अक्टूबर के मुकाबलों ने भारत की पदक तालिका को और मजबूत किया। दिन के दौरान भारत 70 पदकों के आंकड़े तक पहुंच गया जिसमें 12 गोल्ड 24 सिल्वर और 34 ब्रॉन्ज शामिल थे।

    एशियन गेम्स के 13वें दिन का सबसे बड़ा आकर्षण लवलीना का जन्मदिन पर गोल्ड जीतना और भारतीय महिला रिकर्व टीम का ऐतिहासिक स्वर्ण रहा। वहीं पुरुष रिकर्व टीम का सिल्वर भी भारत की मजबूत तीरंदाजी अभियान को दर्शाता है। अब प्रतियोगिता के बाकी मुकाबलों में भी भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद बनी हुई है और मेडल टैली में भारत की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं।

  • विजय सलगांवकर का आखिरी खेल शुरू पुलिस के हाथ लगे पुख्ता सबूत Drishyam The Conclusion में क्या बच पाएगा परिवार

    विजय सलगांवकर का आखिरी खेल शुरू पुलिस के हाथ लगे पुख्ता सबूत Drishyam The Conclusion में क्या बच पाएगा परिवार


    नई दिल्ली। अजय देवगन की चर्चित फिल्म फ्रैंचाइजी दृश्यम का तीसरा और अंतिम हिंदी पार्ट Drishyam The Conclusion सिनेमाघरों में रिलीज हो चुका है। करीब 11 साल पहले शुरू हुई इस कहानी ने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई थी। विजय सलगांवकर का किरदार हर बार अपनी सूझबूझ से पुलिस को मात देता आया है और अब तीसरे पार्ट में उसके सामने पहले से भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। फिल्म में एक बार फिर परिवार को बचाने की कोशिश और पुलिस की जांच के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिलता है।

    कहानी में विजय अब अपने परिवार के साथ सामान्य जिंदगी जीना चाहता है लेकिन पुराने मामले का पीछा उसका पीछा नहीं छोड़ता। मीरा और महेश देशमुख अपने बेटे सैम की मौत का सच सामने लाने के लिए विजय के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू करते हैं। इस बार मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच के एसपी राजवीर सिंह तोमर की एंट्री होती है। इसके साथ ही देश के चर्चित वकील इंद्रजीत शेट्टी भी केस का हिस्सा बनते हैं। पुलिस के हाथ ऐसे सबूत लगते हैं जो विजय और उसके परिवार के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं।

    फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि विजय इस बार किस तरह इन परिस्थितियों से बाहर निकलने की कोशिश करता है। पुलिस के पास पुराने मामले से जुड़े लोगों और फॉरेंसिक जांच से संबंधित महत्वपूर्ण कड़ियां मौजूद हैं। ऐसे में दर्शकों के सामने लगातार यही सवाल बना रहता है कि क्या विजय की बनाई पूरी कहानी इस बार भी पुलिस के सामने टिक पाएगी।

    Drishyam The Conclusion की खास बात यह है कि इसे मलयालम दृश्यम 3 का सीधा रीमेक नहीं बताया गया है। फिल्म की कहानी को अलग तरीके से आगे बढ़ाया गया है। निर्देशक अभिषेक पाठक और उनकी राइटर्स टीम ने फ्रैंचाइजी के पुराने अंदाज को बरकरार रखते हुए नए ट्विस्ट जोड़ने की कोशिश की है। फिल्म का पहला हिस्सा कहानी और किरदारों के लिए माहौल तैयार करता है जबकि दूसरा हिस्सा मुख्य टकराव को आगे बढ़ाता है। कुछ मोड़ ऐसे हैं जो दर्शकों को चौंका सकते हैं।

    हालांकि फिल्म की सबसे बड़ी कमी यह महसूस होती है कि इसका मूल ढांचा पिछली दृश्यम फिल्मों की याद दिलाता है। सस्पेंस और ट्विस्ट मौजूद हैं लेकिन कहानी में ऐसा बहुत कुछ नया नहीं है जो फ्रैंचाइजी के पुराने अनुभव से बिल्कुल अलग लगे। कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जहां कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय खींचा हुआ महसूस किया जा सकता है।

    अभिनय की बात करें तो अजय देवगन एक बार फिर विजय सलगांवकर के किरदार में नजर आते हैं और उनकी गंभीर अदाकारी फिल्म का अहम हिस्सा है। श्रिया सरन और इशिता दत्ता ने भी अपने किरदारों को अच्छी तरह निभाया है। नई एंट्री के तौर पर जयदीप अहलावत और प्रकाश राज खास ध्यान खींचते हैं। प्रकाश राज का वकील इंद्रजीत शेट्टी वाला किरदार प्रभाव छोड़ता है। वहीं जयदीप अहलावत पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आते हैं।

    तब्बू के किरदार को इस बार भी कहानी में बेटे के लिए न्याय की तलाश तक सीमित रखा गया है। उनके किरदार को पिछली फिल्मों की तुलना में ज्यादा विस्तार नहीं मिलता। कुल मिलाकर Drishyam The Conclusion में सस्पेंस और पारिवारिक तनाव का सिलसिला जारी रहता है। फिल्म फ्रैंचाइजी के पुराने प्रशंसकों के लिए विजय सलगांवकर की आखिरी बाजी देखने का मौका देती है हालांकि नएपन की तलाश करने वाले दर्शकों को कहानी कुछ जानी पहचानी लग सकती है।