Author: bharati

  • ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    तेहरान। ईरान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण भड़के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ (HRANA) ने रविवार सुबह बताया कि ईरान के 31 प्रांतों में से 25 प्रांतों में 170 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं। एजेंसी के अनुसार, मरने वालों की संख्या कम से कम 15 पहुंच गई है और 580 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश में अशांति पैदा करने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर कहा कि दंगाइयों को उनके स्थान पर रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर इजरायल की ओर से ऐसा बयान सामने आया है, जिसे सुनकर खामनेई आग-बबूला हो जाएंगे।

    दरअसल, ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर अन्य देशों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि इस सप्ताह इस्लामी गणराज्य के कई शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान इजरायल ईरान के लोगों के साथ पूर्ण एकजुटता के साथ खड़ा है। नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में कहा कि हम ईरानी जनता के संघर्ष तथा उनकी स्वतंत्रता, आजादी और न्याय की आकांक्षाओं के साथ एकजुटता से खड़े हैं। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह बहुत संभव है कि हम ऐसे क्षण में खड़े हैं जब ईरानी लोग अपना भाग्य अपने हाथों में ले रहे हैं। बता दें कि ईरान में प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले रविवार को हुई थी, जब दुकानदारों ने आर्थिक समस्याओं को लेकर हड़ताल की थी। उस वक्त से इसका दायरा और आकार लगातार बढ़ रहा है और प्रदर्शनकारी राजनीतिक मांगें भी उठा रहे हैं।
    जून 2025 में 12 दिनों का चला था युद्ध

    बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच पिछले साल जून में 12 दिनों तक युद्ध चला था, जब इजरायल ने ईरानी परमाणु सुविधाओं के साथ-साथ आवासीय क्षेत्रों पर हमलों की श्रृंखला शुरू की थी। यह कहते हुए कि इसका उद्देश्य इस्लामी गणराज्य की परमाणु अनुसंधान और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना था। ईरान ने इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले करके जवाब दिया। बाद में संघर्ष के दौरान अमेरिका ने इजरायल का साथ देते हुए ईरानी परमाणु स्थलों को निशाना बनाया, जिसके बाद युद्धविराम की घोषणा की गई।

    रविवार को नेतन्याहू ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा की और कहा कि उन्होंने इस सप्ताह अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ इस पर बातचीत की थी। नेतन्याहू ने कहा कि हमने शून्य संवर्धन के अपने साझा रुख को दोहराया तथा ईरान से 400 किलोग्राम संवर्धित सामग्री हटाने और उन स्थलों को सख्त तथा वास्तविक निगरानी के अधीन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • वेनेजुएला में अमेरिकी ऐक्शन से घबराया तानाशाह किम जोंग? मिसाइल का किया परीक्षण

    वेनेजुएला में अमेरिकी ऐक्शन से घबराया तानाशाह किम जोंग? मिसाइल का किया परीक्षण

    प्योंगयांग । अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर हमला करने और उस देश को राष्ट्रपति को उठा कर ले आने के बाद उसके विरोधी देशों में एक डर का माहौल है। ईरान, उत्तर कोरिया और लैटिन अमेरिका के कई देश, जो खुले तौर पर अमेरिका का विरोध करते नजर आते हैं, उन्होंने ट्रंप की इस हरकत की कड़ी निंदा की है।
    यूएस के वेनेजुएला पर किए हमले के एक दिन बाद ही उत्तर कोरिया ने एक ताकतवर मिसाइल का परीक्षण किया। कई विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर कोरिया इसके जरिए यह दिखाना चाहता था कि वह वेनेजुएला नहीं है। इस तरह की स्थिति में वह एक ताकतवर जवाब देने के लिए तैयार है।

    वेनेजुएला पर हुए अमेरिका आक्रमण की निंदा करते हुए किम जोंग उन के प्रशासन ने इसे अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और एक संप्रुभ देश की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया। प्योंगयांग ने कहा कि यह कदम साम्राज्यवादी अमेरिका के बागी और क्रूर स्वाभाव को दर्शाता है।

    प्योंगयांग की तरफ से की गई यह मिसाइल दो लक्ष्यों को साधती हुई नजर आती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति चीन की यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा चीन के साथ दक्षिण अमेरिका की बढ़ती दोस्ती और कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति को बढ़ावा देने के लिए मानी जा रही है। हालांकि, मिसाइल के जरिए उत्तर कोरिया ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं।

    दक्षिण कोरिया की इंस्टीट्यूट फॉर फार ईस्टर्न स्टडीज के प्रोफेसर लिम ने कहा कि कोरिया और जापान के बीच समुद्र में किए गए इस मिसाइल टेस्ट के जरिए दक्षिण कोरिया और चीन के बीच होने वाली बैठक के पहले तानाशाह की तरफ से चीन को दिया गया संदेश है।

    दरअसल, दक्षिण कोरिया कि मुख्य मांग कोरियाई प्रायद्वीप पर परमाणु निरस्रीकरण हैं, जिसके लिए उत्तर कोरिया तैयार नहीं है।

    बकौल, लिम ‘उत्तर कोरिया इसके साथ अमेरिका को भी संदेश देना चाहता था कि वह वेनेजुएला नहीं है। यानी अगर अमेरिका, वेनेजुएला जैसा कोई अभियान उत्तर कोरिया के साथ करने की सोचता है, तो ऐसी स्थिति के लिए वह दिखाना चाहता था कि उसकी तरफ से जबरदस्त प्रतिरोध होगा।

    किम जोंग उन का जिक्र करते हुए योंसई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बोंग यांगशिक ने कहा कि इस समय वेनेजुएला में जो कुछ हुआ है, उसे देखकर सबसे ज्यादा डरने वाला व्यक्ति किम जोंग उन ही है। क्योंकि वह भी एक तानाशाह ही है।

    अन्य विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका द्वारा उत्तर कोरिया में ऐसा कोई हमला करने की संभावना कम है। क्योंकि एक तो उत्तर कोरिया सीधे तौर पर अमेरिका से उलझने से बचता आया है। हालांकि वह धमकी देता रहा है। दूसरी तरफ, वेनेजुएला की तुलना में उत्तर कोरिया की तानाशाही ज्यादा मजबूत और सैन्य शक्ति भी मजबूत है।

  • ममता बनर्जी का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेटर, कहा- तुरंत रोको SIR

    ममता बनर्जी का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेटर, कहा- तुरंत रोको SIR

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को तुरंत रोकने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि इससे बड़े पैमाने मतदाताओं के मताधिकार का हनन हो सकता है तथा भारतीय लोकतंत्र की नींव को ‘अपूरणीय क्षति’ पहुंचा सकती है।
    तीन जनवरी को मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे पत्र में बनर्जी ने राज्य में एसआईआर में कथित अनियमितताओं, प्रक्रियागत उल्लंघनों और प्रशासनिक खामियों पर ‘गंभीर चिंता’ जताई और कहा कि यह प्रक्रिया ‘अनियोजित, अपर्याप्त तैयारी और आननफानन में’ की गई है।
    मुख्यमंत्री ने दावा किया, ‘‘एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और यह हमारे लोकतंत्र के मूल ढांचे और संविधान की भावना पर प्रहार करती है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि ‘अत्यधिक जल्दबाजी’ और ‘पर्याप्त तैयारी की कमी’ के कारण गंभीर खामियां उत्पन्न हुई हैं, जिनमें दोषपूर्ण सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली, असंगत निर्देश और इस कार्य के लिए नियुक्त अधिकारियों का अपर्याप्त प्रशिक्षण शामिल है।
    ‘लोकतंत्र की नींव पर हमला’

    ममता ने पत्र में लिखा, ‘‘यदि इसे वर्तमान स्वरूप में जारी रहने दिया गया, तो एसआईआर से अपूरणीय क्षति होगी, बड़े पैमाने पर मतदाताओं के मताधिकार का हनन होगा और लोकतंत्र की नींव पर हमला होगा।’’ मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग से तत्काल सुधारात्मक उपाय करने का आग्रह किया और कहा कि ऐसा न करने पर ‘मनमानी और अनियोजित प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए’। ममता ने सुनवाई प्रक्रिया के दौरान बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) को कथित रूप से नियुक्त न किए जाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे एसआईआर की ‘निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं’।

    निर्वाचन आयोग को इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए बनर्जी ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग को उसकी देखरेख या निर्देश के तहत की गई किसी भी अवैध, मनमानी या पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के लिए पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

  • AAP सांसद ने राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स को दी बधाई, मोदी सरकार की भी तारीफ

    AAP सांसद ने राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स को दी बधाई, मोदी सरकार की भी तारीफ

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने नए लेबर कोड के तहत गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट जारी करने के लिए केंद्र सरकार की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह गिग वर्कर्स की कड़ी मेहनत को “मान्यता, सुरक्षा और सम्मान” देने की दिशा में पहला कदम है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इस हफ्ते की शुरुआत में ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (सेंट्रल) रूल्स, 2025’ नाम से ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इनमें गिग वर्कर्स को अलग-अलग सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट्स और सुरक्षा पाने के लिए योग्य होने के नियम गए हैं।
    राघव चड्ढा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दी बधाई

    राघव चड्ढा ने आज अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स को बधाई। आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार के सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट आपके काम को मान्यता, सुरक्षा और सम्मान देने की दिशा में पहला कदम है। भले ही Zomato, Swiggy, Blinkit, आदि प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन इस देश के लोगों और सरकार ने सुनी। यह एक छोटी जीत है, लेकिन एक महत्वपूर्ण जीत है।”

    राघव चड्ढा लंबे समय से गिग वर्कर्स के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, यहां तक ​​कि कई बार संसद में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया है।
    केंद्र सरकार के कदम का भी किया स्वागत

    ‘आप’ सांसद ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा, “ये ड्राफ्ट नियम सिर्फ इसलिए नहीं बनाए गए कि मैंने संसद में यह मुद्दा उठाया, बल्कि यह इसलिए हुआ क्योंकि आप सभी ने भी अपनी आवाज उठाई। कंपनियों और प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन सरकार ने सुनी, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।”

    राघव चड्ढा ने कहा कि नए नियमों के तहत, गिग वर्कर्स को कानूनी मान्यता मिलेगी और उन्हें एक यूनिक पहचान दी जाएगी। हाल ही में संसद सत्र में ‘आप’ के राज्यसभा सांसद ने भारत के गिग वर्कर्स के ‘दुख-दर्द” के बारे में बात की थी, जो बहुत ज्यादा दबाव में और कभी-कभी खराब मौसम की स्थिति में काम करते हैं।

    राघव चड्ढा ने क्विक कॉमर्स और दूसरे ऐप-बेस्ड डिलीवरी और सर्विस बिजनेस पर रेगुलेशन की मांग की थी, खासकर गिग वर्कर्स के फायदों की जरूरत पर जोर दिया था।

    उन्होंने संसद में अपने भाषण में गिग वर्कर्स के लिए सम्मान, सुरक्षा और सही वेतन की मांग की थी। पहली बार, ‘गिग वर्कर्स’ और ‘प्लैटफॉर्म वर्कर्स’ की परिभाषा और उनसे जुड़े प्रावधान सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में दिए गए हैं, जो 21 नवंबर, 2025 को लागू हुआ है।
    क्या होंगे फायदे

    यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के लिए जीवन बीमा और विकलांगता कवर, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मैटरनिटी बेनिफिट्स, बुढ़ापा सुरक्षा वगैरह से जुड़े मामलों पर सही सोशल सिक्योरिटी उपायों को बनाने का प्रावधान करता है। यह कोड कल्याणकारी योजनाओं को फाइनेंस करने के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाने का भी प्रावधान करता है। यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण के लिए एक नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड बनाने का भी प्रावधान करता है।

    इसके अलावा, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 26.08.2021 को असंगठित श्रमिकों, जिसमें प्लैटफॉर्म वर्कर्स, प्रवासी श्रमिक आदि शामिल हैं, का एक व्यापक नेशल डेटाबेस बनाने के लिए ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया था। ई-श्रम पोर्टल का मकसद असंगठित श्रमिकों को सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) देकर उन्हें रजिस्टर करना और सपोर्ट करना है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 21.10.2024 को ई-श्रम- ‘वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ भी लॉन्च किया है, जिसमें अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा/कल्याण योजनाओं को एक ही पोर्टल यानी ई-श्रम पर इंटीग्रेट किया गया है।

  • थाईलैंड में ट्रांस वुमन ने भारतीय व्यक्ति को पीटा, जानिए वजह

    थाईलैंड में ट्रांस वुमन ने भारतीय व्यक्ति को पीटा, जानिए वजह


    मुंबई। भारतीयों के बीच में थाईलैंड की एक खास छवि बनी हुई है। हर साल लाखों लोग छुट्टियां मनाने के लिए थाईलैंड जाते हैं। ऐसे में कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जो सोशल मीडिया पर एक शर्म का कारण बन जाती हैं। ऐसी ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें थाईलैंड के पटाया में कुछ ट्रांसजेंडर महिलाएं मिलकर एक भारतीय नागरिक के साथ हाथा-पाई करती नजर आ रही हैं।
    कथित तौर पर व्यक्ति यौन सेवाओं का भुगतान किए बिना भाग रहा था।
    सोशल मीडिया साइट पर वायरल हो रहा यह वीडियो 27 दिसंबर का बताया जा रहा है। इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे तीन महिलाएं मिलकर एक 52 वर्षीय भारतीय व्यक्ति से पैसे की मांग कर रही है। जैसे ही व्यक्ति पैसे देने से इनकार करते हुए कार में बैठकर जाने लगता है, तो विवाद बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों की मदद से वह उसे कार से बाहर खींच लेती हैं और फिर जमकर मारपीट करती हैं। बाद में पुलिस वहां आकर उन्हें अलग करवाती है।

    एक स्थानीय युवक ने बताया कि आरोपी व्यक्ति वॉकिंग स्ट्रीट इलाके में एक ट्रांस सेक्स वर्कर के साथ बहस करत रहा था। जल्दी ही यह बहस एक हिंसक झड़प में बदल गई और फिर मारपीट शुरू हो गई।

    व्यक्ति ने बताया कि इस लड़ाई की शुरूआत रकम तय करने के बाद मुकर जाने की वजह से हुई।

    आपको बता दें, थाईलैंड का पटाया भारतीयों के लिए पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। यहाँ पर अक्सर ऐसे विवाद सामने आते रहते हैं। कुछ समय पहले सिंतबर में भी एक ऐसा वीडियो सामने आया था, जिसमें ट्रांसजेंडर महिला ने आरोप लगाया था कि व्यक्ति ने उसे गलत तरीके से छुआ है। इसी तरह अक्तूबर में भी तीन ट्रांस महिलाओं पर दो भारतीयों ने हमला किया था और उनके पैसे लेकर फरार हो गए थे।

  • सरकार की तैयारी… EV वाहनों से होगी लंबी दूरी की यात्रा, नहीं रहेगा रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर

    सरकार की तैयारी… EV वाहनों से होगी लंबी दूरी की यात्रा, नहीं रहेगा रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric vehicles) को लंबी दूरी की यात्रा के लिए ज्यादा भरोसेमंद बनाने की दिशा में सरकार एक नई पहल पर काम कर रही है। इसके तहत देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे (Major Expressways) और हाईवे (Highway) पर ईवी कमांड सेंटर (EV Command Center) और रास्ते पर सहायता पहुंचाने वाला नेटवर्क विकसित करने की योजना है। इस कदम का मकसद इलेक्ट्रिक वाहन चालकों की सबसे बड़ी चिंता मानी जाने वाली ‘रेंज एंग्जायटी’, यानी रास्ते में बैटरी खत्म होने के डर को कम करना है।

    सरकारी स्तर पर इस बात पर सहमति बन रही है कि केवल चार्जिंग स्टेशन बनाना ही काफी नहीं है। जब तक इलेक्ट्रिक वाहनों को यात्रा के दौरान तकनीकी सहायता, आपात मदद और रियल-टाइम सपोर्ट नहीं मिलेगा, तब तक लंबी दूरी की ईवी यात्रा को लेकर लोगों का भरोसा पूरी तरह नहीं बन पाएगा। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे-आधारित ईवी सपोर्ट सिस्टम तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।


    संकट में आते ही तुरंत मदद मिलेगी

    प्रस्तावित योजना के तहत एक्सप्रेसवे पर ईवी-आधारित कमांड और कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। ये सेंटर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल की तरह काम करेंगे। यहां से यात्रा कर रहे इलेक्ट्रिक वाहनों की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जाएगी।

    इन कमांड सेंटरों से तुरंत रास्ते में ही सहायता, बैटरी से जुड़ी समस्याओं में सहायता, चार्जिंग से संबंधित मार्गदर्शन और वाहन की बेसिक जांच जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे अगर कोई वाहन रास्ते में तकनीकी खराबी या बैटरी समस्या के कारण रुक जाता है, तो उसे तुरंत सहायता मिल सकेगी।


    दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे होगा पहला ईवी कॉरिडोर

    इस योजना के तहत दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। करीब 1,300 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर संपूर्ण सहायता प्रणाली तैयार की जी सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस पूरे मार्ग पर चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्जिंग के साथ-साथ तकनीकी और आपात सहायता भी मिलती रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे देश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किया जा सकता है।


    सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर होगा जोर

    सरकार इस पूरे ढांचे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर विकसित करने पर विचार कर रही है। इसमें वाहन निर्माता कंपनियां, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता और निजी रोडसाइड असिस्टेंस कंपनियां शामिल हो सकती हैं। इससे सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा और सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होने की उम्मीद है।


    ईवी अपनाने को मिलेगा बढ़ावा

    भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन यह बढ़त अभी मुख्य रूप से शहरों तक सीमित है। लंबी दूरी की यात्रा में भरोसे की कमी अब भी एक बड़ी बाधा है। एक्सप्रेसवे पर ईवी-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर और कमांड सेंटर की व्यवस्था होने से ईवी को पेट्रोल-डीजल वाहनों का व्यावहारिक विकल्प बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि देश के स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

  • बीजेपी नेता का आरोप, उद्धव ठाकरे ने किया 3 लाख करोड़ का घोटाला

    बीजेपी नेता का आरोप, उद्धव ठाकरे ने किया 3 लाख करोड़ का घोटाला


    नई दिल्‍ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता अमित साटम ने रविवार को शिवसेना (उबाठा) अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का आरोप लगाया। इसके साथ ही साटम ने कहा कि उन्होंने अपनी टिप्पणियों के माध्यम से ‘मराठी समुदाय का अपमान’ किया है।

    साटम के सहयोगी और राज्य मंत्री आशीष शेलार ने भी ठाकरे पर उस मांग के लिए निशाना साधा जिसमें उन्होंने 68 नगरमहापालिका वार्डों के नतीजों को रद्द करने की मांग की, जहां सत्तारूढ़ ‘महायुति’ पार्टी के उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया है।

    शेलार ने कहा कि शिवसेना (उबाठा)अध्यक्ष 2020 में बिना किसी विरोध के विधान परिषद के सदस्य बनने के बाद मुख्यमंत्री बने थे।

    साटम की ये टिप्पणियां ठाकरे के इस दावे के बीच आई हैं कि अगर बृहन्मुंबई महानगरपालिका का व्यय बजट 15,000 करोड़ रुपये था, तो विभिन्न कार्यों के लिए ठेकेदारों को पेशगी के रूप में दी जाने वाली राशि तीन लाख करोड़ रुपये है, जो एक ‘घोटाला’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निकाय चुनावों के लिए रिश्वत की रकम का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    भाजपा की मुंबई इकाई के अध्यक्ष साटम ने संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि ठाकरे तीन लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार थे। साटम ने ठाकरे के एक हालिया तंज की भी कड़ी निंदा की और कहा कि यह टिप्पणी व्यक्तिगत अपमान नहीं बल्कि हर मराठी व्यक्ति का अपमान है।

    साटम ने कहा, ‘उन्होंने (ठाकरे ने) सिर्फ मुझे ही गाली नहीं दी है। उन्होंने हर मराठी व्यक्ति को गाली दी है। उन्होंने मराठी मानुष का अपमान किया है।’’ उन्होंने कहा कि वह एक साधारण परिवार से आते हैं और किसी के संरक्षण के कारण राजनीति में ऊपर नहीं पहुंचे हैं।

    भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ठाकरे के कार्यकाल के दौरान भारी खर्च के बावजूद मुंबई के बुनियादी ढांचे की स्थिति खराब हो गई थी। साटम ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में सड़कों पर 21,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन शहर की हालत ऐसी थी कि ‘यह बताना मुश्किल था कि सड़कों पर गड्ढे हैं या गड्ढों के अंदर सड़कें हैं’। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पर कोविड-19 महामारी के दौरान अनियमितताओं का भी आरोप लगाया और कहा कि महालक्ष्मी में कोविड-19 देखभाल केंद्र बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए स्थापित किया गया था।
    कोरोना के दौरान जमकर हुई घोटालेबाजी- साटम

    साटम ने आरोप लगाया, ‘हर चीज में भ्रष्टाचार था – शवों को ले जाने वाले बैग से लेकर पीपीई किट तक – किसी भी चीज को बख्शा नहीं गया। भाजपा नेता ने दावा किया कि ठाकरे ने मुख्यमंत्री रहते हुए लगभग 1,700 बार और रेस्तरां मालिकों से जबरन वसूली की थी। उन्होंने तटीय सड़क परियोजना के बारे में ठाकरे के दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान कोई ठोस समयसीमा तय नहीं की गई थी।

    साटम ने जोर देकर कहा,‘तटीय सड़क परियोजना का सारा श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जाता है।’ उन्होंने ठाकरे पर तीन लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के अपने आरोप को दोहराया। उन्होंने ठाकरे से पिछले 25 वर्षों में मराठी लोगों के लिए किए गए एक भी महत्वपूर्ण कार्य को दिखाने को कहा। यह उस अवधि का जिक्र करते हुए कहा जब अविभाजित शिवसेना का बीएमसी पर नियंत्रण था। उन्होंने बीएमसी पर ठाकरे की पार्टी के शासन का संदर्भ देते हुए उन्हें पिछले 25 वर्षों में मराठी लोगों के लिए किए गए एक भी महत्वपूर्ण काम को दिखाने की चुनौती दी।

    साटम ने कहा कि भाजपा बीडीडी चॉल के निवासियों को घर उपलब्ध कराने सहित कम से कम 10 प्रमुख कार्यों की सूची दे सकती है, लेकिन ठाकरे परिवार ने इसके बजाय कई ‘मातोश्री’ आवासों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया।

    इस बीच, मंत्री शेलार ने 68 नगर निगम वार्डों के परिणामों को लेकर ठाकरे की शिकायत को खारिज कर दिया, जहां भाजपा के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया था।

    उन्होंने कहा, ‘उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के बाद 14 मई, 2020 को निर्विरोध विधान परिषद के सदस्य बन गए। उन्होंने इस पर कोई शिकायत नहीं की।’ शेलार ने कहा, ‘अगर ठाकरे को नगर निकाय चुनावों में कुछ उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने पर टिप्पणी करनी है, तो उन्हें पहले विधान परिषद सदस्य(एमएलसी) पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर आलोचना करनी चाहिए।’

  • हवाई यात्रा के दौरान पावर बैंक व लिथियम बैटरी डिवाइसेस पर रोक, DGCA ने कड़े किए नियम

    हवाई यात्रा के दौरान पावर बैंक व लिथियम बैटरी डिवाइसेस पर रोक, DGCA ने कड़े किए नियम


    नई दिल्ली।
    अगर आप भी फ्लाइट (Flights) से सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल, भारत ने फ्लाइट (Flights) में पावर बैंक (Power Bank) और लिथियम बैटरी वाली डिवाइसेस (Lithium batteries Devices) को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं। डीजीसीए ने फ्लाइट के दौरान फोन या अन्य चीजों को चार्ज करने वाले पावर बैंक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। दुनियाभर में पावर बैंक से आग लगने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है।

    डीजीसीए ने इसको लेकर पिछले साल नवंबर में एक एडइवाजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि पावर बैंक और स्पेयर बैटरी सिर्फ हैंड लगेज में ले जाने की इजाजत होगी। उसे ओवरहेड कपार्टमेंट में नहीं रख सकते हैं। इसके पीछे आग लगने की वजह बताई गई थी और कहा गया था कि आग लगने पर उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।

    लिथियम बैटरी से आग बहुत तेजी से पकड़ती है, क्योंकि इस बैटरी में एनर्जी बहुत अधिक होती है। इस आग को कंट्रोल करना भी मुश्किल हो जाता है। एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि एयरक्राफ्ट के केबिन के अंदर छोटी सी बैटरी में लगी आग भी तेजी से फैल सकती है, इसलिए बचाव बहुत जरूरी है।

    डीजीसीए के सर्कुलर में कहा गया है, “अलग-अलग रिचार्जेबल डिवाइस में लिथियम बैटरी के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से हवाई जहाज से लिथियम बैटरी ले जाने में बढ़ोतरी हुई है। पावर बैंक, पोर्टेबल चार्जर और लिथियम बैटरी वाले ऐसे ही डिवाइस आग लगने का कारण बन सकते हैं और जहाज में आग लगा सकते हैं।” आगे कहा गया है, “ओवरहेड स्टोरेज डिब्बे में या कैरी-ऑन बैगेज के अंदर रखी लिथियम बैटरी छिपी हो सकती हैं, उन तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है, या यात्री या क्रू मेंबर उन पर आसानी से नजर नहीं रख सकते। इससे धुआं या आग लगने का पता चलने और उस पर कार्रवाई करने में देरी हो सकती है, जिससे फ्लाइट की सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ सकता है।”

    मौजूदा एविएशन सेफ्टी गाइडलाइंस के अनुसार, पावर बैंक सिर्फ केबिन बैगेज में ले जाने की इजाजत है, चेक-इन लगेज में नहीं। हालांकि, यात्रियों को फ्लाइट के दौरान पावर बैंक से डिवाइस चार्ज करने की इजाजत नहीं है। एयरलाइंस ने अब यात्रियों को इस पाबंदी के बारे में बताने के लिए बोर्डिंग अनाउंसमेंट और इनफ्लाइट ब्रीफिंग के जरिए याद दिलाना शुरू कर दिया है।

  • SC की अनुमति के बावजूद किसी भी हाईकोर्ट में नहीं हुई एड-हॉक जज की नियुक्ति

    SC की अनुमति के बावजूद किसी भी हाईकोर्ट में नहीं हुई एड-हॉक जज की नियुक्ति


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा करीब एक साल पहले लंबित आपराधिक मामलों के निस्तारण के लिए मार्ग प्रशस्त किए जाने के बावजूद अब तक किसी भी हाई कोर्ट (High Court) में तदर्थ (एड-हॉक) न्यायाधीशों की नियुक्ति (Appointment Ad-Hoc Judges) नहीं हुई है। वजह, उच्च न्यायालयों ने इस दिशा में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया से परिचित लोगों के अनुसार, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी ने भी तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश नहीं की है।

    सर्वोच्च न्यायालय ने 18 लाख से अधिक आपराधिक मामलों के लंबित होने पर चिंता व्यक्त करते हुए 30 जनवरी, 2025 को उच्च न्यायालयों को तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की अनुमति दी थी। जिनकी संख्या न्यायालय की कुल स्वीकृत संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। केंद्रीय विधि मंत्रालय को हालांकि, अभी तक किसी भी हाई कोर्ट के कॉलेजियम से सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ आधार पर नियुक्त करने के लिए कोई सिफारिश प्राप्त नहीं हुई है।

    संविधान का अनुच्छेद 224ए उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों के प्रबंधन में सहायता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करने की अनुमति देता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, संबंधित उच्च न्यायालय के कॉलेजियम विधि मंत्रालय के न्याय विभाग को उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले उम्मीदवारों के नाम या सिफारिशें भेजते हैं। इसके बाद विभाग उम्मीदवारों के बारे में जानकारी और विवरण जोड़ता है और फिर उन्हें उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम को भेज देता है। इसके बाद उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम अंतिम निर्णय लेता है और सरकार को चयनित व्यक्तियों को न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश करता है। राष्ट्रपति नवनियुक्त न्यायाधीश के ‘नियुक्ति पत्र’ पर हस्ताक्षर करते हैं।

    तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया स्थायी जैसी ही रहेगी, सिवाय इसके कि राष्ट्रपति नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि एक मामले को छोड़कर, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ उच्च न्यायालय न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने का कोई पूर्व उदाहरण नहीं है। उच्च न्यायालयों में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति पर 20 अप्रैल, 2021 को दिए गए फैसले में उच्चतम न्यायालय ने कुछ शर्तें लगाई थीं। हालांकि, बाद में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी.आर. गवई (एक अन्य पूर्व प्रधान न्यायाधीश) और सूर्यकांत (वर्तमान प्रधान न्यायाधीश) की विशेष पीठ ने कुछ शर्तों में ढील दी और कुछ को स्थगित रखा।

    पूर्व प्रधान न्यायाधीश एसए बोब्डे द्वारा लिखित इस फैसले में, लंबित मामलों को निस्तारित करने के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को दो से तीन साल की अवधि के लिए तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।

  • एशेज : जो रूट ने 41वां टेस्ट शतक जड़ रिकी पोंटिंग के रिकॉर्ड की बराबरी की

    एशेज : जो रूट ने 41वां टेस्ट शतक जड़ रिकी पोंटिंग के रिकॉर्ड की बराबरी की


    सिडनी।
    इंग्लैंड (England) के स्टार बल्लेबाज जो रूट (Star batsman Joe Root) ने ऑस्ट्रेलिया (Australia) के खिलाफ सिडनी में जारी 5वें और आखिरी टेस्ट मैच में शतक जड़ दिग्गजों की बराबरी कर ली है। यह उनका इस सीरीज का दूसरा और करियर का 41वां टेस्ट शतक (41st Test century) है। जो रूट इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया में एक एशेज सीरीज में एक से ज्यादा शतक जड़ने वाले चौथे इंग्लिश बल्लेबाज बन गए हैं। वहीं टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा शतक जड़ने वाले बल्लेबाजों की रेस में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग की बराबरी कर ली है। रूट अब इस लिस्ट में संयुक्त रूप से तीसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। उनके आगे अब सिर्फ जैक कैलिस और ‘क्रिकेट के भगवान’ कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर रह गए हैं।

    जो रूट ने अपना 41वां टेस्ट शतक 146 गेंदों में पूरा किया। वह उस समय बल्लेबाजी करने आए थे जब इंग्लैंड 51 पर 2 विकेट खो चुका था। उन्होंने उप-कप्तान हैरी ब्रूक के साथ 169 रनों की साझेदारी भी की। रूट अपनी पारी में अभी तक 11 चौके लगा चुके हैं।

    जो रूट अब टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की रेस में सचिन तेंदुलकर और जैक कैलिस के बाद संयुक्त रूप से तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। पोंटिंग और रूट के अब बराबर 41-41 शतक हैं। रूट की नजरें अब जैक कैलिस और फिर सचिन तेंदुलकर को पछाड़ने पर होगी।

    टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा शतक
    51 – सचिन तेंदुलकर
    45 – जैक्स कैलिस
    41 – रिकी पोंटिंग
    41 – जो रूट
    38 – कुमार संगकारा

    1994/95 के बाद से घर के बाद एशेज सीरीज में एक से ज्यादा शतक लगाने वाले जो रूट चौथे इंग्लैंड के बल्लेबाज बने हैं। उनसे पहले ये कारनामा माइकल वॉन, एलिस्टर कुक और जोनाथन ट्रॉट कर चुके हैं।


    1994/95 के बाद से इंग्लैंड के लिए अवे एशेज सीरीज में एक से ज्यादा शतक

    3 – माइकल वॉन 2002/03 में
    3 – एलिस्टर कुक 2010/11 में
    2 – जोनाथन ट्रॉट 2010/11 में
    2 – जो रूट 2025/26 में

    2021 के बाद जो रूट ने ऐसी लय पकड़ी है कि उनका कोई सानी नहीं रहा है। वह 2021 से टेस्ट क्रिकेट में कुल 24 शतक ठोक चुके हैं, वहीं इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर मौजूद खिलाड़ियों के 10-10 शतक ही हैं।


    2021 से सबसे ज्यादा टेस्ट शतक

    24 – जो रूट
    10 – स्टीवन स्मिथ
    10 – केन विलियमसन
    10 – हैरी ब्रूक
    10 – शुभमन गिल

    बात मुकाबले की करें तो, इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया था। पहले दिन खराब मौसम की वजह से 45 ओवर का ही खेल हो पाया। दूसरे दिन इंग्लैंड खबर लिखे जाने तक 5 विकेट के नुकसान पर 286 रन बोर्ड पर लगा चुका है।