Author: bharati

  • सचिन की तरह बैटिंग करते है अर्जुन तेंदुलकर, योगराज सिंह का बड़ा दावा

    सचिन की तरह बैटिंग करते है अर्जुन तेंदुलकर, योगराज सिंह का बड़ा दावा


    मुंबई। भारत के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने अर्जुन तेंदुलकर की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए एक बड़ा दावा किया है। योगराज ने कहा कि उन्होंने मुंबई इंडियंस (एमआई) को अर्जुन से ओपनिंग कराने की सलाह दी थी, जिसे फ्रेंचाइजी ने ठुकरा दिया। वह 26 वर्षीय बॉलिंग ऑलराउंडर को ट्रेनिंग दे चुके हैं। महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन पांच साल तक एमआई का हिस्सा रहे लेकिन सिर्फ पांच आईपीएल मैच ही खेल सके। उन्हें मुंबई ने 2021 की आईपीएल नीलामी में खरीदा था।
    एमआई ने आईपीएल 2026 से पहले अर्जुन को लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) को ट्रेड कर दिया। योगराज ने अर्जुन की सचिन से तुलना कर डाली है।

    योगराज ने रवीश बिष्ट के यूट्यूब चैनल पर कहा, “आप उसकी बॉलिंग पर ध्यान दे रहे हैं। मुझे नहीं पता कि कोच को क्या दिक्कत है। वह असल में एक बल्लेबाज है। जब वह कैंप के लिए मेरी एकेडमी आया तो मुझे उसका ध्यान रखने के लिए कहा गया। एक दिन उसे बॉल लग गई और मैं उसे डॉक्टर के पास ले गया। उसके बाद वह ठीक हो गया। जब एक बार मैंने पैड पहनने के लिए कहा तो उसने बताया कि उसे बैटिंग का मौका नहीं मिलता।।”

    बता दें कि अर्जुन ने दिसंबर 2022 में अपने रणजी ट्रॉफी डेब्यू पर गोवा के लिए सेंचुरी लगाई थी और पिता सचिन की उपलब्धि की बराबरी की। सचिन ने भी 1988 में अपने रणजी ट्रॉफी डेब्यू पर सेंचुरी जमाई थी। उन्होंने गुजरात के खिलाफ शतक बनाया था।

    उन्होंने आगे कहा, “मैंने अर्जुन से कहा कि मैंने तुम्हें कभी बैटिंग करते नहीं देखा। हम नेट्स पर गए। उसने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की। फौरन चौके-छक्के लगाना शुरू कर दिए। मैंने उसके कोच से पूछा, ‘आप उसे बैटिंग करने का ज्यादा मौका क्यों नहीं देते?’ लेकिन वह बहाने बना रहे थे। वह शानदार बल्लेबाज है और अपने पिता की तरह खेलता है। अर्जुन ने एक हफ्ते तक मेरी एकेडमी में बैटिंग की और कुछ दिनों बाद रणजी ट्रॉफी में शतक बनाया। जब अर्जुन मुंबई इंडियंस के लिए खेल रहा था, तब भी मैंने मैनेजमेंट को उससे कुछ मैचों में ओपनिंग कराने की सलाह दी थी लेकिन उन्होंने नहीं सुना।” अर्जुन ने 2023 में एमआई की ओर से आईपीएल डेब्यू किया और पूरे सीजन में चार मैच खेले। उन्हें आईपीएल 2024 में सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला था।

  • बलूचिस्तान में सेना तैनात करने जा रहा चीन, भारत को बलोच नेता किया आगाह?

    बलूचिस्तान में सेना तैनात करने जा रहा चीन, भारत को बलोच नेता किया आगाह?


    इस्‍लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में चीन जल्द ही अपनी सेना तैनात कर सकता है। बलूचिस्तान के बड़े नेता ने इस मामले पर चिंता जताते हुए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक खत लिखा है। इस चिट्ठी में बलोच नेता मीर यार बलूच ने चेतावनी देते हुए कहा है कि चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया है कि चीन अगले कुछ महीनों में ही बलूचिस्तान इलाके में अपनी मिलिट्री फोर्स तैनात कर सकता है।
    मीर यार ने बीते गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में एस जयशंकर के नाम एक लिखे एक खुला खत साझा किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बरसों से बलूचिस्तान का शोषण कर रहा है। मीर यार ने लिखा, “बलूचिस्तान के लोग पिछले 79 सालों से पाकिस्तान के सरकारी कब्जे, प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन को झेल रहे हैं।
    अब समय आ गया है कि इस बढ़ती हुई बीमारी को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि हमारे देश में शांति आए और संप्रभुता पक्की हो।”
    पाक-चीन को लेकर जताई चिंता

    खत में मीर यार बलूच ने कहा कि चीन और पाकिस्तान तेजी से चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के आखिरी स्टेज की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते गठबंधन को बहुत खतरनाक मानता है।

    चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को उसके आखिरी स्टेज तक पहुंचा दिया है।”
    बड़े खतरे की आशंका

    उन्होंने आगे कहा कि इस इलाके में जल्द ही चीन की सीधी मिलिट्री मौजूदगी देखी जा सकती है। मीर यार ने कहा, “अगर बलूचिस्तान की डिफेंस और फ्रीडम फोर्स की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया और अगर ऐसे ही नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चीन कुछ महीनों के अंदर बलूचिस्तान में अपनी मिलिट्री फोर्स तैनात कर सकता है।” उन्होंने आगे लिखा, “60 मिलियन बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा और चुनौती होगी।”

  • सिक्किम में सुबह भूकंप के झटकेलोग घरों से बाहर निकले

    सिक्किम में सुबह भूकंप के झटकेलोग घरों से बाहर निकले


    नई दिल्ली । आज सुबहसिक्किम के सोरेंग शहर में 3.9 तीव्रता का भूकंप आया। यह भूकंप 5:58 बजे के आसपास महसूस हुआ और स्थानीय लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए। भूकंप के झटके महसूस होने के बादवहां के निवासी दहशत में थेहालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी प्रकार के जान-माल का नुकसान होने की खबर नहीं आई है।

    भूकंप का केंद्र जमीन के नीचे 5 किलोमीटर की गहराई पर थाजिससे इसे बड़ी तीव्रता का भूकंप नहीं माना गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सोशल मीडिया पर इस घटना की जानकारी दी और बताया कि भूकंप का असर सीमित था।

    सिक्किम में भूकंप की घटनाएं कभी-कभी होती रही हैंलेकिन इस बार तीव्रता बहुत कम थीजिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। हालांकिभूकंप के बाद सतर्कता बनाए रखना हमेशा जरूरी होता हैऔर लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। वर्तमान में स्थानीय प्रशासन ने कोई विशेष कदम नहीं उठाए हैंक्योंकि नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।

  • जापान की संसद में महिला शौचालयों की कमी, पीएम तक दिखीं परेशान

    जापान की संसद में महिला शौचालयों की कमी, पीएम तक दिखीं परेशान

    ताइपे। जापान की संसद में इन दिनों महिला सांसदों को शौचालयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। महिला सांसदों ने इसे लेकर अपनी आवाज भी उठाई है। यह मामला उस वक्त और भी ज्यादा सुर्खियों में आ गया, जब देश की पहली प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने भी इन महिला सांसदों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई।
    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जापानी संसद के मुख्य सदन के पास अभी केवल दो शौचालय क्यूबिकल हैं, जो कि 73 महिला सांसदों के लिए अपर्याप्त हैं। इसके अलावा अगर पूरे संसद भवन की बात करें तो केवल 9 महिला शौचालय हैं, जिनमें केवल 22 क्यूबिकल है। इस मामले पर प्रदर्शन का हिस्सा डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद यासुको कोमियामा ने फेसबुक पर डाले अपने पोस्ट में कहा कि यह समस्या सिर्फ महिला सांसदों तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद परिसर में काम करने वाली महिला पत्रकार और कर्मचारी भी परेशान हैं।

    आपको बता दें जापान की संसद भवन की इमारत करीब 90 साल पुरानी है। इसका निर्माण 1936 में किया गया था। उस वक्त महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं था। इस वजह से वहां पर महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है।

    फिलहाल 2024 में हुए आम चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ है कि 73 महिला सांसद चुनकर आई हैं।

    जापानी मीडिया के मुताबिक कोमियामा ने कहा, “यदि प्रशासन सच में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए गंभीर है तो मुझे उम्मीद है कि इस मामले पर हम उनकी समझ और सहयोग की उम्मीद कर सकते हैं।” जापानी न्यूज आउटलेट आसाही शिंबुन के मुताबिक जापान की निचले सदन के अध्यक्ष ने अधिक महिला शौचालयों के प्रस्ताव पर विचार करने का वादा किया है।

    गौरतलब है कि जापान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर लड़ाई लंबी है। कार्य स्थल पर बराबरी हासिल करने के लिए महिलाओं को एक लंबे संघर्ष का सामना करना पड़ा है। जापानी सरकार ने वर्ष 2020 में समाज के सभी क्षेत्रों में 30 फीसदी नेतृत्व के पदों पर महिलाओं को नियुक्त करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अंदरूनी विरोध के चलते इसे चुपचाप एक दशक के लिए आगे बढ़ा दिया गया था।

  • 2026 में ना शाहरुख ना सलमान, इस एक्टर की फिल्म सबसे महंगी मूवी

    2026 में ना शाहरुख ना सलमान, इस एक्टर की फिल्म सबसे महंगी मूवी

    मुंबई। आज हम आपको बताएंगे साल 2026 की सबसे महंगी फिल्मों के बारे में। इस लिस्ट में कई बड़े स्टार्स की फिल्में शामिल हैं। लेकिन जानें किस हीरो की है सबसे महंगी मूवी।
    बॉलीवुड फिल्में

    साल 2026 में कई बड़े बजट की फिल्में रिलीज होने वाली हैं। इस लिस्ट में शाहरुख खान, आलिया भट्ट, रणबीर कपूर समेत कई एक्टर्स की मूवीज शामिल हैं। चलिए जानते हैं किसकी सबसे महंगी फिल्म है।
    रामायण

    रणबीर कपूर, सई पल्लवी की फिल्म रामायण इसी साल रिलीज होने वाली है। यह फिल्म 4000 करोड़ रुपये में बनी है। नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित इस फिल्म को देखने के लिए फैंस काफी एक्साइटेड हैं।

    अल्फा

    आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की फिल्म अल्फा जो यश राज फिल्म्स की स्पाई यूनिवर्स में से एक फिल्म है। इसका बजट रिपोर्ट्स के मुताबिक 400 करोड़ है।
    किंग

    शाहरुख खान की फिल्म किंग जिसमें उनके साथ दीपिका पादुकोण, बेटी सुहाना खान और अभिषेक बच्चन हैं। इस फिल्म का बजट 350 करोड़ बताया जा रहा है।
    दृश्यम 3

    अजय देवगन की फिल्म दृश्यम 3 जिसका सबको बेसब्री से इंतजार है।

    इस मूवी का बजट भी 300 करोड़ है।
    स्पिरिट

    संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म स्पिरिट जिसमें प्रभास और तृप्ति डिमरी लीड रोल में हैं। इस फिल्म का बजट 300 करोड़ है।
    धुरंधर 2

    रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, आर माधवन, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन की फिल्म धुरंधर 2 का बजट 250 करोड़ बताया जा रहा है।
    लव एंड वॉर

    संजय लीला भंसाली की फिल्म लव एंड वॉर जिसमें रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विकी कौशल हैं। इस फिल्म का बजट 200 करोड़ बताया जा रहा है।
    बैटल ऑफ गलवान

    कोई मोई वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक सलमान खान की फिल्म बैटल ऑफ गलवान का बजट 200 करोड़ है।

  • त्रिवेणी तट पर पौष पूर्णिमा स्नान के साथ माघ मेला शुरू… करोड़ों श्रद्धालु लेंगे पुण्य लाभ

    त्रिवेणी तट पर पौष पूर्णिमा स्नान के साथ माघ मेला शुरू… करोड़ों श्रद्धालु लेंगे पुण्य लाभ


    प्रयागराज।
    पौष पूर्णिमा (Paush Purnima) पर पुण्य की डुबकी के साथ ही प्रयागराज (Prayagraj) के त्रिवेणी तट (Triveni Ghat) पर डेढ़ माह तक चलने वाले माघ मेला 2026 (Magh Mela 2026) का शनिवार को शुभारंभ हो गया है। प्रदेश सरकार और मेला प्रशासन का मानना है कि महाकुंभ 2025 के बाद के इस पहले माघ मेला में श्रद्धालुओं की संख्या 2024 और इससे पूर्व आयोजित माघ मेला की तुलना में ज्यादा हो सकती है। अनुमान है कि पूरे मेला अवधि के दौरान 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आएंगे। इसलिए तैयारियां भी उसी अनुरूप की जा रही हैं। मेला क्षेत्र का विस्तार कर गंगा पर बनने वाले पांटुन पुलों की संख्या में इजाफा किया गया है।

    मेला प्रशासन का अनुमान है कि शनिवार को पहले स्नान पर्व पर 25 से 30 लाख श्रद्धालु पावन त्रिवेणी में पुण्य की डुबकी लगाएंगे। प्रथम स्नान पर्व की पूर्ण संध्या पर मीडिया से मुखातिब हुईं मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने मेला की तैयारियों की जानकारी दी।


    आज शाम 04:03 बजे तक रहेगी पूर्णिमा तिथि

    पौष पूर्णिमा शुक्रवार शाम छह बजकर 12 मिनट से लग गई है। जो शनिवार को शाम चार बजकर तीन मिनट तक रहेगी। तीर्थ पुरोहित राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि स्नान का यही समय रहेगा। उदयातिथि के कारण शनिवार को पूरे दिन स्नान का महत्व है।


    स्नान पर्व पर 30 एंबुलेंस रहेंगी तैयार

    माघ मेला के पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आकस्मिक स्थिति के लिए मेला में 20 एंबुलेंस-108 और 10 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की तैनाती की गई है। संगम नोज पर एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस उपलब्ध रहेंगी। मेला क्षेत्र में 20-20 बेड के दो बड़े अस्पताल और सभी सेक्टर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाएं और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है।

    एलोपैथिक के अलावा चार आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीजों का उपचार किया जाएगा। सीएमओ डॉ. एके तिवारी के अनुसार सभी अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती की गई है। मेला क्षेत्र के अलावा एसआरएन, बेली और कॉल्विन अस्पताल में मरीजों के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। ट्रामा सेंटर में डॉक्टर और फार्मासिस्ट की अतिरिक्त तैनाती की गई है।

  • RSS को लेकर फैलाई जा रही गलत धारणाएं…. यह पैरा-मिलिट्री नहीं : मोहन भागवत

    RSS को लेकर फैलाई जा रही गलत धारणाएं…. यह पैरा-मिलिट्री नहीं : मोहन भागवत


    भोपाल।
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh- RSS) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने बड़ा बयान देते हुए कहा- संघ कोई पैरा-मिलिट्री संगठन (Paramilitary) नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ को लेकर लोगों के मन में गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं, जबकि RSS का असली मकसद समाज को जोड़ना और उसे मजबूत बनाना है। भागवत ने जोर देते हुए कहा कि ऐसे लोग संघ को ठीक से समझते नहीं हैं। जानिए उन्होंने और क्या कुछ कहा?


    ये लगो संघ को ठीक से नहीं समझते

    भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक एक जैसी वर्दी पहनते हैं, मार्च करते हैं और लाठी का अभ्यास भी करते हैं। लेकिन सिर्फ इन बातों के आधार पर यह मान लेना कि RSS कोई पैरा-मिलिट्री संगठन है, गलत है। उन्होंने कहा, “अगर कोई ऐसा सोचता है तो वह संघ को ठीक से नहीं समझता। RSS एक अलग तरह का संगठन है।”


    इंटरनेट या विकिपीडिया पर हर बात सही नहीं

    भागवत ने कहा कि आजकल लोग किसी भी विषय को गहराई से समझने की कोशिश नहीं करते। वे जल्दी-जल्दी जानकारी के लिए इंटरनेट या विकिपीडिया जैसे स्रोतों पर निर्भर हो जाते हैं, जहां हर बात सही हो, यह जरूरी नहीं। उन्होंने कहा कि जो लोग सही और भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी लेते हैं, वे संघ की भूमिका और उद्देश्य को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।


    RSS को लेकर गलत कहानी बनाई जा रही

    उन्होंने यह भी कहा कि RSS को लेकर जानबूझकर एक गलत कहानी बनाई जा रही है। इसी वजह से संघ को अपने काम और सोच के बारे में लोगों को बार-बार समझाना पड़ रहा है। इतिहास की बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत पर हमला करने वाले अंग्रेज पहले लोग नहीं थे। उनसे पहले भी कई बार बाहर से आए लोगों ने भारत को हराया। उन्होंने कहा कि ये लोग न तो भारत से ज्यादा अमीर थे और न ही ज्यादा अच्छे या गुणवान, फिर भी उन्होंने हमें हराया। ऐसा सात बार हुआ और अंग्रेज आठवें आक्रमणकारी थे।

    अपने फायदे में सोचने पर देश कमजोर होगा
    भागवत ने सवाल उठाया कि अगर ऐसा बार-बार हुआ है तो आजादी की असली सुरक्षा क्या है। उन्होंने कहा कि इसका जवाब समाज को खुद तलाशना होगा। जब लोग सिर्फ अपने फायदे के बारे में सोचेंगे, तब देश कमजोर होगा। लेकिन अगर समाज एकजुट रहेगा और अच्छे मूल्यों को अपनाएगा, तो देश मजबूत बनेगा।

  • भाषा विवाद पर CM फडणवीस बोले – महाराष्ट्र में केवल मराठी अनिवार्य, अन्य भाषाओं का भी स्वागत….

    भाषा विवाद पर CM फडणवीस बोले – महाराष्ट्र में केवल मराठी अनिवार्य, अन्य भाषाओं का भी स्वागत….


    मुम्बई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने एक बार फिर से भाषा विवाद (Language dispute) पर अपना रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में केवल मराठी भाषा ही अनिवार्य (Marathi language Compulsory) है, इसके अलावा दूसरी भाषाओं का स्वागत है, लेकिन कोई अनिवार्य नहीं है। गौरतलब है कि पिछले साल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में शुरू करने के अपने फैसले को तीव्र विरोध प्रदर्शनों के बाद रद्द कर दिया और इस मुद्दे की जांच के लिए एक समिति का गठन किया।

    सतारा में 99वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि राज्य में भाषा की अनिवार्यता का मुद्दा व्यापक रूप से बहस का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के तौर पर मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है। कोई अन्य भाषा अनिवार्य नहीं है। हालांकि, तीन-भाषा प्रणाली को लेकर मतभेद थे। छात्रों को अपनी पसंद की कोई भी भारतीय भाषा सीखने की स्वतंत्रता है। सवाल सिर्फ यह था कि तीसरी भाषा किस कक्षा से शुरू की जानी चाहिए।’’

    विवाद का जिक्र करते हुए फडणवीस ने कहा कि महाविकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान तैयार की गई एक रिपोर्ट में पहली कक्षा से ही हिंदी को अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई थी और उनकी सरकार ने शुरू में इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था। उन्होंने कहा, लेकिन पहली कक्षा से ही (हिंदी) भाषा को अनिवार्य बनाने को लेकर व्यापक बहस और विरोध हुआ, इसलिए नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हालांकि, मैं यह दोहराना चाहूंगा कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है, कोई अन्य भाषा नहीं।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह भी कहना चाहूंगा कि हम अंग्रेजी, फ्रेंच और स्पेनिश जैसी भाषाओं का खुले दिल से स्वागत करते हैं… इन भाषाओं के प्रति हमारा रुख सकारात्मक है क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय भाषाएं हैं। लेकिन भारतीय भाषाओं का विरोध करते हुए अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का स्वागत करना अनुचित है। मेरा मानना ​​है कि हमारी भारतीय भाषाओं को भी वही सम्मान मिलना चाहिए, और यही हमारा रुख है।’’

  • Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट

    Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट


    ओटावा।
    कनाडा (Canada) में आने वाले महीनों में बिना वैध दस्तावेजों (Without valid Documents) के रह रहे प्रवासियों (Migrants.) की संख्या में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। इसका मुख्य कारण लाखों अस्थायी वर्क परमिट और स्टडी परमिट (Temporary Work Permits and Study Permits) का समाप्त होना है, जबकि नई वीजा श्रेणियों और स्थायी निवास के रास्ते लगातार सख्त होते जा रहे हैं। ऐसे में कनाडा में रह रहे लाखों अस्थायी निवासियों, विशेष रूप से भारतीयों के लिए एक बड़ा संकट मंडरा रहा है।

    मिसिसॉगा (कनाडा) स्थित इमिग्रेशन कंसल्टेंट कंवर सेराह के अनुसार, 2026 के मध्य तक कम से कम 10 लाख भारतीय अपनी कानूनी स्थिति खोने के जोखिम में हैं। यह अनुमान इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें दिखाया गया है कि 2025 के अंत तक लगभग 10.53 लाख वर्क परमिट समाप्त हो चुके हैं, जबकि 2026 में आगे 9.27 लाख वर्क परमिट की समाप्ति होने वाली है। ये आंकड़े सेराह ने शेयर किए हैं। सेराह ने चेतावनी दी है कि कनाडा में कुल मिलाकर 20 लाख लोग अवैध रूप से रहने वाले हो सकते हैं, जिनमें से आधे भारतीय होंगे। उन्होंने इसे “बहुत रूढ़िवादी अनुमान” बताया और कहा कि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त हो रहे हैं, साथ ही कई शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    वैध दर्जा समाप्त होने का खतरा

    वर्क परमिट की अवधि समाप्त होते ही संबंधित व्यक्ति का कनाडा में वैध दर्जा भी खत्म हो जाता है, जब तक कि वह नया वीजा हासिल न कर ले या स्थायी निवास की ओर ट्रांजिशन न कर पाए। हालांकि, कनाडा सरकार ने हाल के समय में अस्थायी श्रमिकों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़ी नीतियों को सख्त किया है। साथ ही शरण आवेदनों को नियंत्रित करने के लिए भी नए उपाय लागू किए गए हैं, जिससे वैध रास्ते और सीमित हो गए हैं।


    2026 में ‘बॉटलनेक’ की चेतावनी

    कंवर सेराह ने चेतावनी दी कि कनाडा ने पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को आउट ऑफ स्टेटस होते नहीं देखा है। उनके अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में ही करीब 3,15,000 परमिट समाप्त होने वाले हैं, जिससे इमिग्रेशन सिस्टम में गंभीर बॉटलनेक पैदा होगा। तुलना करें तो 2025 की आख़िरी तिमाही में यह संख्या लगभग 2,91,000 थी।

    आवास संकट, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण सरकार ने टेम्परेरी रेजिडेंट्स की संख्या घटाने का लक्ष्य रखा है। 2026-2028 इमिग्रेशन लेवल्स प्लान में टेम्परेरी रेजिडेंट्स को 2026 में 3.85 लाख तक सीमित किया गया है, जो 2025 से 43% कम है। इंटरनेशनल स्टूडेंट परमिट भी आधे से कम हो गए हैं।

    सेराह का अनुमान है कि मध्य-2026 तक कनाडा में कम से कम 20 लाख लोग बिना वैध कानूनी दर्जे के रह रहे हो सकते हैं। इसमें से करीब 50 प्रतिशत भारतीय नागरिक हो सकते हैं। उन्होंने इसे बहुत ही सतर्क अनुमान बताया, क्योंकि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त होंगे और बड़ी संख्या में शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    ग्रेटर टोरंटो एरिया में सामाजिक असर

    बिना दस्तावेजों वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या का असर अब ग्रेटर टोरंटो एरिया के कुछ हिस्सों में दिखने लगा है। खासकर ब्रैंपटन और कैलेडन जैसे इलाकों में जंगलनुमा क्षेत्रों में टेंट कॉलोनियां उभर आई हैं, जहां कथित तौर पर बिना वैध दर्जे के लोग रह रहे हैं।

    ब्रैम्पटन-आधारित पत्रकार निति चोपड़ा, जिन्होंने ऐसी ही एक टेंट सिटी को डॉक्यूमेंट किया, उनका कहना है कि अनौपचारिक सूचनाओं के अनुसार कई भारतीय मूल के आउट-ऑफ-स्टेटस प्रवासी कैश पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ फ्लाई-बाय-नाइट ऑपरेटर सुविधा के लिए शादियों की व्यवस्था करने वाले दफ्तर खोल रहे हैं।


    विरोध प्रदर्शन और मांगें

    इस बीच, श्रमिक अधिकारों की वकालत करने वाला समूह नौजवान सपोर्ट नेटवर्क जनवरी में विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। नेटवर्क के टोरंटो-आधारित कार्यकर्ता बिक्रमजीत सिंह ने कहा कि संगठन इस मुद्दे पर मोमेंटम बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि बिना वैध रास्तों में फंसे प्रवासी श्रमिकों की स्थिति को उजागर किया जा सके।

    नेटवर्क का अभियान नारा- काम करने के लिए काफी अच्छा, रहने के लिए काफी अच्छा – इस मांग को दर्शाता है कि जो लोग कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें देश में कानूनी रूप से बने रहने का अवसर भी मिलना चाहिए।


    सरकार के सामने बड़ी चुनौती

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतिगत स्तर पर जल्द समाधान नहीं खोजा गया, तो बढ़ती अवैध आबादी न सिर्फ मानवीय संकट पैदा करेगी, बल्कि श्रम बाज़ार, आवास और सामाजिक सेवाओं पर भी दबाव बढ़ाएगी। कनाडा सरकार के लिए आने वाला समय इमिग्रेशन सिस्टम को संतुलित रखने की एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

  • हिमाचल के ब्लास्ट मामले में पंजाब पुलिस को पाकिस्तान की ISI का हाथ होने की आशंका

    हिमाचल के ब्लास्ट मामले में पंजाब पुलिस को पाकिस्तान की ISI का हाथ होने की आशंका


    चंडीगढ़।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के सोलन जिले (Solan district) में नलागढ़ पुलिस स्टेशन (Nalagarh Police Station) के पास नए साल के पहले दिन (1 जनवरी) सुबह करीब 9:40 बजे हुए जोरदार विस्फोट ने इलाके में दहशत फैला दी। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पुलिस स्टेशन के स्टोर रूम की खिड़कियां टूट गईं, पास की इमारतों के शीशे चटक गए और करीब 2.5 फुट गहरा गड्ढा बन गया। आवाज 400-500 मीटर दूर तक सुनाई दी। अच्छी बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।

    विस्फोट के एक दिन बाद गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक कथित प्रेस नोट सामने आया, जिसमें प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और पंजाब सॉवरेन्टी अलायंस (PSA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। प्रेस नोट में कहा गया कि यह आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) हमला था, जिसकी योजना और अंजाम देने का काम अमेरिका में रहने वाले गोपी नवांशहरीया और कबाल सिंह ने किया। दोनों संगठनों ने दावा किया कि हमला इसलिए किया गया क्योंकि- हिमाचल प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग्स बनाए जा रहे हैं और उन्हें पंजाब भेजा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन नहीं चेता तो अगली बार पुलिस वाहनों और मुख्यालयों में आईईडी प्लांट किए जाएंगे।

    हालांकि, पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन काल्पनिक दावों को ढोंग करार देते हुए खारिज कर दिया। अधिकारी ने कहा- ये तत्व पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए काम कर रहे हैं। इसमें कोई विचारधारा नहीं है, सिर्फ पैसे के लिए युवाओं को भर्ती किया जाता है। पंजाब पुलिस का मानना है कि यह विस्फोट दिल्ली के उत्तर-पश्चिम और जम्मू-कश्मीर के दक्षिण में स्थित इस क्षेत्र में अशांति पैदा करने की पाकिस्तानी रणनीति का हिस्सा है।

    गोपी नवांशहरीया नवंबर 2024 से पंजाब में पुलिस ठिकानों पर कई हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है। BKI और PSA पहले भी पंजाब में हुए इसी तरह के विस्फोटों की जिम्मेदारी लेते रहे हैं, जो ISI के निर्देश पर किए गए थे। हिमाचल पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। फोरेंसिक टीम ने मौके से सैंपल इकट्ठा किए हैं और सीसीटीवी फुटेज की जांच के लिए टीमें गठित की गई हैं।

    नलागढ़ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 324(4) (उपद्रव), 125 (जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। हिमाचल पुलिस पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है। नलागढ़-बद्दी क्षेत्र फार्मास्यूटिकल हब है, जहां कई दवा फैक्टरियां हैं। पुलिस क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और आगे किसी घटना की आशंका से सतर्क है। जांच जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।