Author: bharati

  • Skin Care With Curd: चेहरे पर दही लगाने से मिल सकते हैं ये फायदे निखरी त्वचा के लिए ऐसे करें इस्तेमाल

    Skin Care With Curd: चेहरे पर दही लगाने से मिल सकते हैं ये फायदे निखरी त्वचा के लिए ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली। दही सिर्फ खाने के स्वाद को बढ़ाने वाला खाद्य पदार्थ नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल त्वचा की देखभाल के लिए भी किया जाता है। दही में लैक्टिक एसिड पाया जाता है जो त्वचा की ऊपरी सतह पर जमा मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा दही में मौजूद प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व त्वचा को मुलायम बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि घरेलू स्किन केयर में दही का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए चेहरे पर कोई भी घरेलू नुस्खा लगाने से पहले सावधानी रखना जरूरी है।

    अगर त्वचा रूखी और बेजान नजर आती है तो सादा दही चेहरे पर लगाने का आसान तरीका हो सकता है। इसके लिए ताजा और बिना स्वाद वाला दही लें और उसे साफ चेहरे पर हल्की परत में लगाएं। कुछ देर बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। दही त्वचा को नमी देने में मदद कर सकता है और त्वचा को मुलायम महसूस करा सकता है। इसे चेहरे पर जोर से रगड़ने से बचना चाहिए क्योंकि ज्यादा रगड़ने से संवेदनशील त्वचा में जलन हो सकती है।

    दही को शहद के साथ मिलाकर भी फेस पैक की तरह इस्तेमाल किया जाता है। शहद त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद कर सकता है जबकि दही त्वचा को मुलायम रखने में सहायक हो सकता है। दोनों को मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा अधिक हाइड्रेटेड महसूस हो सकती है। इस तरह के घरेलू फेस पैक को आंखों के आसपास की त्वचा पर लगाने से बचना चाहिए।

    अगर त्वचा सामान्य है और हल्की डल नजर आ रही है तो दही में बेसन मिलाकर फेस पैक बनाया जा सकता है। बेसन त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी हटाने में मदद कर सकता है जबकि दही त्वचा को मुलायम बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाकर सूखने के लिए बहुत देर तक न छोड़ें। हल्के हाथों से पानी की मदद से इसे साफ करना बेहतर रहेगा।

    दही का इस्तेमाल करते समय कुछ जरूरी सावधानियां भी रखनी चाहिए। सबसे पहले चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर है। इसके लिए मिश्रण की थोड़ी मात्रा त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर देखें। अगर लालिमा खुजली जलन या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो इसे चेहरे पर इस्तेमाल न करें। बहुत संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    अगर चेहरे पर सक्रिय मुंहासे घाव एलर्जी या त्वचा संबंधी कोई समस्या है तो घरेलू नुस्खों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। दही को चेहरे पर लगाने से तुरंत कोई चमत्कारी बदलाव होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अच्छी त्वचा के लिए पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना पर्याप्त नींद लेना और नियमित रूप से त्वचा की सफाई करना भी जरूरी है।

    कुल मिलाकर दही को घरेलू स्किन केयर रूटीन में शामिल किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से त्वचा को मुलायम और नमीयुक्त महसूस कराने में मदद मिल सकती है। लेकिन हर त्वचा पर इसका असर एक जैसा हो यह जरूरी नहीं है। इसलिए अपनी त्वचा की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए इसका इस्तेमाल करें और किसी भी तरह की जलन या एलर्जी होने पर तुरंत उपयोग बंद कर दें।

  • अनुप्रिया पटेल ने CEC पर विपक्ष के आरोपों का किया बचाव, बोलीं- संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमला आदत

    अनुप्रिया पटेल ने CEC पर विपक्ष के आरोपों का किया बचाव, बोलीं- संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमला आदत

    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री और अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों पर व्यक्तिगत हमला करना विपक्ष की आदत बन गई है। अनुप्रिया पटेल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

    अनुप्रिया पटेल ने विपक्ष के आरोपों को लेकर कहा कि आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विपक्ष को अपनी हार का अंदाजा पहले से ही हो गया है। उनके अनुसार, इसी वजह से विपक्ष चुनाव से पहले ही हार के लिए कारण तलाश रहा है और भविष्य में अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग के सिर पर डालने की तैयारी कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं और उनके पदाधिकारियों पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बनाने के बजाय संस्थागत प्रक्रिया पर चर्चा होनी चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने एनडीए और विपक्ष के बीच चुनावी मुकाबले का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले चुनावों में एनडीए गठबंधन के सामने विपक्ष को लगातार पराजय का सामना करना पड़ा है। उनका कहना था कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी विपक्ष की ओर से अभी से अलग-अलग मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

    उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों ने संगठनात्मक और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। अनुप्रिया पटेल ने अपनी पार्टी की तैयारियों को लेकर कहा कि अपना दल आगामी चुनाव के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ तैयार है।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने में अपना दल ने योगदान दिया था। पार्टी ने दोनों चुनावों में गठबंधन के साथ मिलकर राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी की थी। अनुप्रिया पटेल ने कहा कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में भी उनकी पार्टी पूरी ताकत के साथ गठबंधन के साथ मैदान में उतरेगी।

    अनुप्रिया पटेल ने यह भी दावा किया कि आगामी चुनाव में एनडीए गठबंधन रिकॉर्ड जीत दर्ज करेगा। हालांकि, चुनाव अभी दूर है और राजनीतिक दलों की तैयारियां जारी हैं। ऐसे में उनके बयान को आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन की रणनीति और राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच अनुप्रिया पटेल का बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। विपक्ष जहां चुनाव प्रक्रिया और आयोग की भूमिका को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रहा है, वहीं अनुप्रिया पटेल ने इन आरोपों का बचाव करते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमलों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और आगामी चुनाव में एनडीए की तैयारियों को लेकर विश्वास जताया।

  • भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में दिखे महाकाल जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर

    भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में दिखे महाकाल जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर


    उज्जैन । उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई। पंडे और पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और फिर पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।

    पंचामृत अभिषेक के दौरान दूध दही घी शक्कर और फलों के रस का उपयोग किया गया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर भगवान महाकाल को हरिओम का जल अर्पित किया गया। भस्म आरती की विशेष परंपरा के तहत होने वाले पूजन के बीच गर्भगृह में मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियां जारी रहीं।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल को रजत ओम और बिल्वपत्र से सजा मुकुट धारण कराया गया। इसके साथ ही रुद्राक्ष की माला और शेषनाग का रजत मुकुट भी अर्पित किया गया। भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल सजाया गया जबकि डमरू से भी विशेष शृंगार किया गया।

    बाबा महाकाल को रजत की मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों की मालाएं भी अर्पित की गईं। विशेष शृंगार के बाद भगवान महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। भस्म आरती में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।

    पूजन के दौरान भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का भी विधि विधान से पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई और नैवेद्य चढ़ाया गया। सभी धार्मिक प्रक्रियाओं के बाद भस्म आरती की मुख्य परंपरा संपन्न हुई।

    महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के विशेष दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी बनी रही। जैसे ही पूजन और आरती की प्रक्रिया आगे बढ़ी वैसे ही पूरा परिसर भगवान महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

    महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती प्रतिदिन की धार्मिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरती के दौरान होने वाले अभिषेक पूजन भस्म अर्पण और विशेष शृंगार के बाद भगवान महाकाल के अलग अलग स्वरूप में दर्शन होते हैं। शनिवार की भस्म आरती में भी बाबा महाकाल का रजत ओम बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष से किया गया शृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा।

  • देवास में गणेश विसर्जन का भव्य नजारा देर रात तक उमड़ी भीड़ ऑपरेशन सिंदूर की झांकी रही खास आकर्षण

    देवास में गणेश विसर्जन का भव्य नजारा देर रात तक उमड़ी भीड़ ऑपरेशन सिंदूर की झांकी रही खास आकर्षण


    देवास । देवास में अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शुक्रवार रात गणेश विसर्जन चल समारोह निकाला गया। शहर की सड़कों पर देर रात तक गणपति बप्पा की भक्ति और देशभक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। अलग अलग क्षेत्रों से निकली गणेश प्रतिमाओं और झांकियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। समारोह में धार्मिक और सामाजिक संदेशों के साथ देशभक्ति से जुड़ी झांकियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।

    इस बार गणेश विसर्जन चल समारोह में ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सेना के शौर्य पर आधारित झांकी विशेष रूप से चर्चा में रही। झांकी के जरिए सेना के साहस और देश के प्रति समर्पण को दर्शाने का प्रयास किया गया। इसे देखने के लिए रास्ते के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। जैसे ही झांकी जुलूस के बीच से गुजरी लोगों ने उत्सुकता के साथ इसे देखा।

    समारोह में 80 से ज्यादा गणेश प्रतिमाएं और झांकियां शामिल हुईं। इनमें अलग अलग सामाजिक धार्मिक और देशभक्ति से जुड़े विषयों को प्रदर्शित किया गया। कई प्रतिमाओं को आकर्षक रोशनी और विशेष सजावट से तैयार किया गया था। रंग बिरंगी लाइटों से सजी झांकियां रात के अंधेरे में और भी आकर्षक नजर आ रही थीं।

    गणेश विसर्जन चल समारोह को देखने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचे। जुलूस जिस मार्ग से गुजर रहा था वहां श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। परिवारों के साथ लोग प्रतिमाओं के दर्शन करने के लिए देर रात तक सड़कों पर मौजूद रहे। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और गणेश प्रतिमाओं पर फूल बरसाए।

    धार्मिक आस्था के इस आयोजन में देशभक्ति से जुड़ी झांकियों ने समारोह को अलग पहचान दी। ऑपरेशन सिंदूर की झांकी में भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम को प्रदर्शित किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने रुककर झांकी को देखा और इसके जरिए दिए जा रहे संदेश को समझने की कोशिश की।

    गणेश विसर्जन के दौरान प्रशासन ने भी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रखी। कलेक्टर ऋतुराज सिंह और पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत ने जुलूस मार्ग का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ यातायात और भीड़ नियंत्रण की स्थिति का जायजा लिया। जुलूस के दौरान पुलिस बल को अलग अलग स्थानों पर तैनात किया गया था।

    प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई। भीड़ वाले स्थानों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अमला सक्रिय रहा। जुलूस के दौरान लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए मार्ग और यातायात व्यवस्था पर भी नजर रखी गई।

    देर रात तक देवास की सड़कों पर गणेश प्रतिमाओं और झांकियों का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालु गणपति बप्पा के दर्शन करते रहे और विसर्जन के लिए आगे बढ़ती प्रतिमाओं को देखते रहे। धार्मिक उत्साह के साथ सेना के शौर्य को दर्शाती झांकी ने इस बार के गणेश विसर्जन समारोह को खास बना दिया।

  • जीतन राम मांझी ने लोकसभा स्पीकर से SC-ST सांसदों को सदन में अधिक समय देने का किया आग्रह

    जीतन राम मांझी ने लोकसभा स्पीकर से SC-ST सांसदों को सदन में अधिक समय देने का किया आग्रह

    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आने वाले सांसदों को सदन में बोलने के लिए अधिक समय देने का आग्रह किया है। मांझी ने विशेष रूप से अहम विधेयकों पर चर्चा के दौरान इन सांसदों को अपने समुदायों से जुड़े मुद्दे रखने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है।

    मांझी ने अपने पत्र में कहा है कि SC और ST सांसदों को सदन में अपने समुदायों से संबंधित विषयों को प्रभावी तरीके से उठाने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने और संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

    यह मामला पांच अगस्त को मांझी के दिल्ली स्थित आवास पर हुई एनडीए सांसदों की सामूहिक बैठक के दौरान सामने आया था। बैठक में मध्य प्रदेश के खरगौन से सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने SC और ST सांसदों को सदन में बोलने के लिए मिलने वाले समय को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि सांसदों को बोलने का अवसर मिलता है, लेकिन समुदायों से जुड़े अधिक मुद्दों को सामने रखने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है।

    पटेल के अनुसार, सांसदों को कई बार बोलने का अवसर मिलता है, लेकिन हर बार पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में SC और ST समुदायों से जुड़े अधिक विषयों को सदन के सामने रखने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता महसूस होती है। उनका कहना था कि इन समुदायों से जुड़े मुद्दों को चर्चा में पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए।

    मांझी ने अपने पत्र में इस मांग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि संसद में राजनीतिक दलों को चर्चा के लिए जो समय मिलता है, वह उनके सांसदों के बीच विभाजित होता है। ऐसे में SC और ST समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों के लिए अपने समुदायों से संबंधित विषयों को विस्तार से रखने का पर्याप्त अवसर हमेशा उपलब्ध नहीं हो पाता।

    केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि गजेंद्र सिंह पटेल द्वारा उठाए गए मुद्दे पर आगे की कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की मांग की, ताकि SC और ST सांसदों को महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान अपने समुदायों से जुड़े विषय सदन के सामने रखने के लिए पर्याप्त अवसर मिल सके।

    मांझी की यह पहल संसद में SC और ST सांसदों की चर्चा में भागीदारी तथा उनके समुदायों से जुड़े मुद्दों को सदन में रखने के लिए मिलने वाले समय से संबंधित है। पत्र के माध्यम से उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से इस विषय पर आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

  • MP में पटवारियों को मिलेगा प्रमोशन का मौका 1050 नामों की सूची जारी जून 2007 तक नियुक्त कर्मचारियों पर नजर

    MP में पटवारियों को मिलेगा प्रमोशन का मौका 1050 नामों की सूची जारी जून 2007 तक नियुक्त कर्मचारियों पर नजर


    भोपाल। मध्यप्रदेश में पटवारियों के प्रमोशन को लेकर सरकार ने प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। राजस्व विभाग की ओर से 1050 पटवारियों को राजस्व निरीक्षक यानी RI के पद पर पदोन्नति देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सभी जिलों के कलेक्टरों से संबंधित पटवारियों की सेवा संबंधी जानकारी और सर्विस रिकॉर्ड मांगा गया है। विभाग की ओर से पात्रता से जुड़े नामों की सूची भी जारी की गई है।

    जानकारी के मुताबिक यह पदोन्नति प्रक्रिया सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी पदोन्नति नियम 2025 के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त तृतीय श्रेणी अराजपत्रित कार्यपालिक एवं तकनीकी सेवा भर्ती नियम 2012 में किए गए संशोधन के प्रावधानों को भी आधार बनाया जा रहा है। विभाग ने पात्र पटवारियों की जानकारी जुटाने के लिए जिलों को निर्देश जारी किए हैं।

    इस प्रक्रिया में उम्र और नियुक्ति की तारीख को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। विभाग की ओर से 1 जनवरी 2026 की स्थिति में 50 साल से कम उम्र वाले पटवारियों की सूची तैयार की गई है। इसके साथ ही ऐसे पटवारियों को भी सूची में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं जिनकी पटवारी संवर्ग में नियुक्ति जून 2007 या उससे पहले हुई है।

    राजस्व विभाग ने कलेक्टरों से कहा है कि यदि किसी ऐसे पटवारी का नाम मौजूदा सूची में नहीं है जो निर्धारित उम्र और नियुक्ति संबंधी शर्तों को पूरा करता है तो उसका नाम भी शामिल किया जाए। इसके लिए सेवा से संबंधित रिकॉर्ड और आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है। यह जानकारी संबंधित तहसीलदार या नायब तहसीलदार के माध्यम से तैयार कराई जाएगी।

    विभाग ने जानकारी जमा करने के लिए 30 सितंबर 2026 की समय सीमा तय की है। निर्देश के मुताबिक संबंधित जानकारी 30 सितंबर को सुबह 10 बजे तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी। इसके बाद पदोन्नति से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    पटवारियों के प्रमोशन की यह प्रक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री के काम को लेकर पटवारियों की ओर से आपत्तियां भी जताई गई हैं। योजना के तहत पटवारियों को रजिस्ट्रीकर्ता की भूमिका दिए जाने पर कर्मचारी संगठन और पटवारियों ने भविष्य की कानूनी जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं।

    पटवारियों का कहना है कि जमीन का स्वामित्व लाभार्थी और शासन के बीच दस्तावेजी प्रक्रिया का विषय है। ऐसे में पटवारी को रजिस्ट्री का निष्पादक बनाए जाने से भविष्य में विवाद की स्थिति में व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी का सवाल खड़ा हो सकता है। उनका कहना है कि आबादी भूमि के मामलों में केवल नक्शे और खसरे के आधार पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती।

    पटवारियों के अनुसार वास्तविक कब्जा वारिस सह स्वामित्व चतुर्सीमा पुराने दावे और न्यायालय में लंबित विवाद जैसे कई पहलू भी सामने आ सकते हैं। भविष्य में यदि किसी व्यक्ति की ओर से स्वामित्व को चुनौती दी जाती है तो रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल पटवारी भी कानूनी कार्रवाई का हिस्सा बन सकता है। इसी वजह से इस जिम्मेदारी को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं।

    अब विभाग की ओर से 1050 पटवारियों के सेवा रिकॉर्ड जुटाए जाने के बाद प्रमोशन प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई होगी। जिलों से जानकारी मिलने के बाद पात्रता और सेवा संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

  • रेलवे स्टेशनों पर अब पानी की शुद्धता पर कड़ी नजर 893 सैंपल की जांच किसी में नहीं मिली खामी

    रेलवे स्टेशनों पर अब पानी की शुद्धता पर कड़ी नजर 893 सैंपल की जांच किसी में नहीं मिली खामी


    जबलपुर । ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए पश्चिम मध्य रेलवे ने पेयजल व्यवस्था को लेकर विशेष अभियान शुरू किया है। जबलपुर भोपाल और कोटा मंडल के स्टेशनों पर यात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के लिए पानी की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है। रेलवे की विशेष टीमें पानी के स्रोत से लेकर यात्रियों तक पहुंचने वाले नलों और वाटर बूथों की जांच कर रही हैं।

    पश्चिम मध्य रेलवे के मुताबिक पिछले एक महीने के दौरान 284 स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था की सघन निगरानी की गई। इस दौरान 9850 नलों और वाटर बूथों की सफाई कराई गई। इसके अलावा 893 पानी के नमूने जांच के लिए लिए गए। रेलवे के अनुसार जांच किए गए सभी नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए और कोई भी नमूना अनुपयुक्त नहीं मिला।

    पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए रेलवे केवल नलों की सफाई तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर पुरानी या खराब पाइपलाइन की मरम्मत और बदलाव भी कराया गया है। अब तक 130 स्थानों पर पाइपलाइन से जुड़ा काम पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही 1086 पानी की टंकियों की सफाई कराई गई है। रेलवे स्टेशनों के अलावा रेलवे की आवासीय कॉलोनियों और चिकित्सालयों में भी पेयजल की गुणवत्ता पर निगरानी रखी जा रही है।

    रेलवे की ओर से पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए अलग अलग स्तर पर व्यवस्था की गई है। सबसे पहले पानी में अवशिष्ट क्लोरीन की रोजाना जांच की जाती है। कीटाणुशोधन के बाद पानी में क्लोरीन की निर्धारित मात्रा मौजूद है या नहीं इसकी जांच जल स्रोत से लेकर सप्लाई के अंतिम छोर तक की जाती है। अगर किसी स्थान पर पानी निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं मिलता है तो संबंधित विभाग को सूचना देकर आवश्यक क्लोरीनीकरण की प्रक्रिया कराई जाती है।

    इसके बाद पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच होती है। इसमें ई कोलाई और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी का परीक्षण किया जाता है। बड़े स्टेशनों के साथ रेलवे कॉलोनियों और चिकित्सालयों में यह जांच महीने में एक बार की जाती है। वहीं छोटे स्टेशनों और कॉलोनियों में पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच महीने में दो बार किए जाने का प्रावधान है।

    पानी की रासायनिक गुणवत्ता की जांच भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मौजूदा जल स्रोतों से हर छह महीने में नमूने लेकर रासायनिक परीक्षण किया जाता है। नए जल स्रोत को उपयोग में लेने से पहले भी पानी का नमूना लिया जाता है और आवश्यक रासायनिक जांच पूरी की जाती है। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है कि यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाला पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप रहे।

    पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारियों के अनुसार जल स्रोत से लेकर पाइपलाइन टंकियों और वाटर बूथ तक नियमित सफाई और निगरानी की जा रही है। जहां भी पानी की गुणवत्ता में कमी सामने आती है वहां संबंधित विभाग को जानकारी देकर सुधारात्मक कार्रवाई कराई जाती है।

    मुख्य जनसंपर्क अधिकारी मधुर वर्मा ने बताया कि यात्रियों को दूषित पानी पीने की स्थिति का सामना न करना पड़े इसके लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। इसमें पानी की आपूर्ति करने वाले प्लांट से लेकर पाइपलाइन और नलों के जरिए यात्रियों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। रेलवे का उद्देश्य पूरे सप्लाई सिस्टम पर नजर रखते हुए यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।

  • तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान कई हादसे, सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत, 26 घायल

    नई दिल्ली । तेलंगाना में गणेश उत्सव के समापन के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर कई हादसे सामने आए हैं। इन घटनाओं में अब तक 13 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। हादसों की पूरी परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हो सकी हैं और अलग-अलग घटनाओं की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

    राज्य के पुलिस महानिदेशक सीवी आनंद ने विसर्जन के दौरान हुई इन घटनाओं की जानकारी दी है। उनके मुताबिक, पूरे राज्य में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान अलग-अलग हादसे हुए। इनमें कई लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। संबंधित घटनाओं के कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रत्येक हादसा किस वजह से हुआ।

    गणेश उत्सव के दौरान इस वर्ष तेलंगाना में बड़ी संख्या में प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। शहरों और कस्बों के अलावा घरों, अपार्टमेंट परिसरों और गेटेड सोसाइटी में भी गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। उत्सव समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिमाओं को लेकर अलग-अलग विसर्जन स्थलों तक पहुंचे। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।

    पुलिस और प्रशासन की ओर से विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए इंतजाम किए गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था संभालने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हादसे हुए। इन घटनाओं में पुलिस विभाग से जुड़े एक सब-इंस्पेक्टर की भी मौत हुई है।

    पुलिस महानिदेशक के अनुसार, तेलंगाना में करीब 1.24 लाख गणेश प्रतिमाएं आधिकारिक रूप से स्थापित की गई थीं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में प्रतिमाएं लोगों ने अपने घरों, अपार्टमेंट और गेटेड सोसाइटी में स्थापित की थीं। इन सभी को मिलाकर राज्य में गणेश प्रतिमाओं की कुल संख्या करीब 3.5 लाख से 4 लाख तक होने का अनुमान लगाया गया है।

    इतनी बड़ी संख्या में प्रतिमाओं के विसर्जन के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों की भारी भीड़ जुटी। कई स्थानों पर श्रद्धालु जुलूस के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लेकर पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।

    हादसों में घायल हुए 26 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। प्रशासन की ओर से घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, मृतकों की घटनाओं और हादसों के कारणों को लेकर पूरी जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

    फिलहाल प्रशासन और पुलिस अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटा रहे हैं। विसर्जन कार्यक्रम के दौरान हुई इन घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। राज्य में बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बीच हुए इन हादसों ने 13 लोगों की जान ले ली, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। आने वाले समय में जांच और विस्तृत जानकारी के बाद घटनाओं की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • बारिश में बार बार पड़ रहे बीमार तो बदलें अपनी दिनचर्या खानपान से सफाई तक इन बातों का रखें ध्यान

    बारिश में बार बार पड़ रहे बीमार तो बदलें अपनी दिनचर्या खानपान से सफाई तक इन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान नमी बढ़ने के कारण कई तरह के संक्रमण और मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। जगह जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ सकती है और दूषित पानी या अस्वच्छ भोजन से पेट संबंधी परेशानी हो सकती है। ऐसे में बरसात के मौसम में सेहत का ध्यान रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ जरूरी आदतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर मौसम से जुड़ी कई परेशानियों से बचने में मदद मिल सकती है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले साफ पानी पीने का ध्यान रखें। कोशिश करें कि पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी का ही इस्तेमाल किया जाए। बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना भी जरूरी है। खाना खाने से पहले और शौचालय के इस्तेमाल के बाद हाथों की सफाई संक्रमण से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बच्चों को भी हाथ धोने की सही आदत जरूर सिखाएं।

    बरसात में खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कटे हुए फल और खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचना बेहतर होता है क्योंकि इनमें गंदगी और कीटाणुओं का खतरा बढ़ सकता है। भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि ताजा खाना ही खाया जाए। बहुत ज्यादा तला भुना और मसालेदार भोजन करने से कुछ लोगों को पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है इसलिए संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।

    मच्छरों से बचाव भी बरसात में बेहद जरूरी है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर गमले बाल्टी और अन्य जगहों पर जमा पानी को नियमित रूप से साफ करें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार घर में मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं। अगर किसी क्षेत्र में डेंगू या मलेरिया का प्रकोप हो तो स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की सलाह का पालन करना भी जरूरी है।

    बारिश में भीगे कपड़ों को लंबे समय तक शरीर पर न रखें। बाहर से घर लौटने के बाद गीले कपड़े बदलकर शरीर को अच्छी तरह सुखा लें। पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है क्योंकि लंबे समय तक नमी रहने से त्वचा संबंधी परेशानी हो सकती है। बारिश में बाहर निकलते समय मौसम के अनुसार छाता या रेनकोट साथ रखना उपयोगी हो सकता है।

    इस मौसम में घर की सफाई पर भी ध्यान दें। रसोई और बाथरूम जैसी जगहों पर नमी और गंदगी जमा न होने दें। घर में पर्याप्त हवा और रोशनी आने दें। फफूंद दिखाई देने पर उसकी सफाई करें क्योंकि कुछ लोगों में इससे एलर्जी या सांस संबंधी परेशानी बढ़ सकती है।

    बरसात में पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। मौसम खराब होने पर घर के अंदर हल्की एक्सरसाइज या योग किया जा सकता है। शरीर को पर्याप्त आराम मिलने से रोजमर्रा के काम करने में ऊर्जा बनी रहती है। हालांकि किसी भी व्यक्ति को बुखार लगातार खांसी सांस लेने में परेशानी उल्टी दस्त या शरीर में असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    कुल मिलाकर बरसात में स्वस्थ रहने के लिए साफ पानी सुरक्षित भोजन व्यक्तिगत स्वच्छता मच्छरों से बचाव और घर की साफ सफाई पर ध्यान देना जरूरी है। मौसम का आनंद लेते हुए अगर इन छोटी छोटी बातों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए तो संक्रमण और मौसमी परेशानियों से बचाव में काफी मदद मिल सकती है।

  • Swift टेलिस्कोप को बचाने निकला Link अंतरिक्षयान हुआ नष्ट, 250 करोड़ रुपये का मिशन तकनीकी दिक्कतों से हुआ विफल

    Swift टेलिस्कोप को बचाने निकला Link अंतरिक्षयान हुआ नष्ट, 250 करोड़ रुपये का मिशन तकनीकी दिक्कतों से हुआ विफल


    नई दिल्ली ।
    अंतरिक्ष में 22 वर्षों से काम कर रहे Swift Observatory को बचाने की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। इसे ऊंची और अधिक स्थिर कक्षा में पहुंचाने के लिए भेजा गया Link अंतरिक्षयान अपना मुख्य मिशन पूरा नहीं कर सका और शुक्रवार को धरती के वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद नष्ट हो गया। इस मिशन पर करीब 3 करोड़ डॉलर यानी लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। अब Swift की कक्षा लगातार नीचे आ रही है और उसके नवंबर की शुरुआत में वायुमंडल में प्रवेश करने की संभावना जताई जा रही है।

    Swift Observatory को वर्ष 2004 में अंतरिक्ष में भेजा गया था। इसे ब्रह्मांड में होने वाली बेहद तेज और शक्तिशाली घटनाओं का पता लगाने के लिए तैयार किया गया था। यह गामा-रे विस्फोट, तारों के विस्फोट और अचानक होने वाली अन्य अंतरिक्षीय घटनाओं का तेजी से पता लगाकर अपनी दिशा बदल सकता है। इसकी यही क्षमता इसे खगोलीय घटनाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण बनाती रही है।

    हाल के महीनों में सूर्य से निकलने वाली शक्तिशाली गतिविधियों के कारण Swift की कक्षा अनुमान से अधिक तेजी से नीचे आने लगी थी। इससे उसके धरती के वायुमंडल में प्रवेश करने का खतरा बढ़ गया। स्थिति को देखते हुए उसकी वैज्ञानिक गतिविधियां रोककर कक्षा को कुछ समय तक स्थिर रखने की कोशिश की गई थी, ताकि बचाव अभियान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

    Swift को बचाने के लिए Link को 3 जुलाई को अंतरिक्ष में भेजा गया था। योजना के अनुसार Link को Swift के पास पहुंचकर अपनी तीन रोबोटिक भुजाओं की मदद से उसे पकड़ना था। इसके बाद दोनों अंतरिक्षयानों की स्थिति को नियंत्रित करते हुए Swift को ज्यादा ऊंची कक्षा में पहुंचाने का प्रयास किया जाना था। Link को तैयार करने में एक साल से भी कम समय लगा था।

    हालांकि, प्रक्षेपण के तुरंत बाद Link में तकनीकी समस्याएं सामने आने लगीं। Swift को सही दिशा में नियंत्रित करने के लिए जरूरी तीन रिएक्शन व्हील में से दो खराब हो गए। इसके बाद एक वाल्व में आई खराबी के कारण अंतरिक्षयान तेजी से घूमने लगा। इस स्थिति ने नियंत्रण और संचार दोनों को प्रभावित किया। इंजीनियरों ने बाद में Link पर नियंत्रण हासिल कर लिया, लेकिन तब तक काफी ईंधन खर्च हो चुका था।

    ईंधन की कमी के कारण Link के पास Swift को पकड़कर उसकी कक्षा बदलने के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं बची। इसी वजह से अगस्त में Swift को बचाने की कोशिश को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया गया। इसके बाद Link के बचे हुए समय का इस्तेमाल तकनीकी परीक्षणों और भविष्य के बचाव अभियानों के लिए जरूरी अभ्यास में किया गया।

    मिशन की असफलता के बावजूद Link Swift के करीब पहुंचने में सफल रहा। दोनों अंतरिक्षयानों के बीच दूरी घटकर लगभग 12 से 15 किलोमीटर तक रह गई थी। इस दौरान Link ने Swift की तस्वीरें भी लीं। उसकी तीनों रोबोटिक भुजाओं का संचालन भी किया गया। प्रत्येक भुजा करीब तीन फीट लंबी थी और उसके सिरे पर पकड़ बनाने के लिए ग्रिपर लगा था।

    अब Swift की कक्षा लगातार नीचे जा रही है और उसके पास अंतरिक्ष में काम करने के लिए सीमित समय बचा है। माना जा रहा है कि नवंबर की शुरुआत में वह धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। इसके बाद अंतरिक्ष में अचानक होने वाली शक्तिशाली घटनाओं की निगरानी की उसकी लंबे समय से चली आ रही भूमिका समाप्त हो जाएगी। हालांकि Link अपने मुख्य लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका, लेकिन इस अभियान से भविष्य में अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों को पकड़ने, उनकी स्थिति बदलने और उन्हें बचाने से जुड़ी तकनीक के लिए महत्वपूर्ण अनुभव मिला है।