Author: bharati

  • कार्तिक आर्यन का मानवीय कदम, असम बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 1 करोड़ रुपये का योगदान

    कार्तिक आर्यन का मानवीय कदम, असम बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 1 करोड़ रुपये का योगदान


    नई दिल्ली । असम में आई भीषण बाढ़ से लाखों लोगों का जनजीवन प्रभावित है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं तथा कई सामाजिक संस्थाओं और फिल्मी हस्तियों ने भी प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। इसी कड़ी में बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। उनके इस सहयोग की जानकारी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की और अभिनेता का आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि कार्तिक आर्यन द्वारा दिया गया यह आर्थिक सहयोग बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभिनेता का यह योगदान संकट की इस घड़ी में असम के लोगों के लिए बड़ी मदद साबित होगा और उनकी संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायक है।

    दिलचस्प बात यह रही कि कार्तिक आर्यन ने इस दान का स्वयं कहीं भी प्रचार नहीं किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की। लोगों को इस सहयोग की जानकारी तब मिली जब मुख्यमंत्री कार्यालय ने सार्वजनिक रूप से उनका धन्यवाद किया। इस कदम की सोशल मीडिया पर भी काफी सराहना हो रही है और प्रशंसक अभिनेता की सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना की तारीफ कर रहे हैं।

    असम में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। कई जिलों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और राहत शिविरों में भोजन, दवाइयों तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसे समय में विभिन्न क्षेत्रों से मिल रहा आर्थिक सहयोग राहत कार्यों को गति देने में मददगार साबित हो रहा है।

    कार्तिक आर्यन के अलावा कई अन्य फिल्मी सितारे भी बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आए हैं। अभिनेता सलमान खान ने जरूरतमंदों के बीच भोजन के पैकेट और जरूरी दैनिक उपयोग की सामग्री उपलब्ध कराई है। वहीं आलिया भट्ट, भूमि पेडनेकर समेत कई कलाकारों ने लोगों से राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर सहयोग करने और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है।

    कार्तिक आर्यन के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह हाल ही में फिल्म तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी में नजर आए थे। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसके बावजूद अभिनेता के पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। वह जल्द ही निर्देशक अनुराग बसु की बहुप्रतीक्षित फिल्म में अभिनेत्री श्रीलीला के साथ दिखाई देंगे, जिससे श्रीलीला हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू करेंगी।

    इसके अलावा कार्तिक आर्यन फिल्म नागजिला में भी नजर आएंगे, जिसका निर्माण करण जौहर के प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले किया जा रहा है। वहीं निर्देशक कबीर खान के साथ भी उनकी एक नई फिल्म पाइपलाइन में है। इससे पहले दोनों ने चंदू चैंपियन में साथ काम किया था, जिसके लिए कार्तिक आर्यन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।

  • सलमान खान की जिंदगी का हैरान करने वाला किस्सा, इलाज के दौरान भी नहीं टूटा जज्बा

    सलमान खान की जिंदगी का हैरान करने वाला किस्सा, इलाज के दौरान भी नहीं टूटा जज्बा


    नई दिल्ली । बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान अपनी फिटनेस दमदार पर्सनैलिटी और लंबे समय से बरकरार स्टारडम के लिए जाने जाते हैं लेकिन इस चमक के पीछे कितनी मेहनत और त्याग छिपा होता है इसका एक दिलचस्प खुलासा उनके करीबी दोस्त और फिल्म निर्माता शैलेंद्र सिंह ने किया है। उन्होंने एक पुराने किस्से को साझा करते हुए बताया कि सलमान खान अपने बालों के उपचार के दौरान भी पूरी सहजता के साथ बिरयानी का आनंद ले रहे थे और मजाकिया अंदाज में बोले थे कि स्टार बनने की यही कीमत होती है।

    शैलेंद्र सिंह ने एक पॉडकास्ट में बताया कि वह एक दिन सलमान खान से मिलने उनके मुंबई स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट पहुंचे थे। उस समय सोमवार की नियमित पार्टी का माहौल था। सलमान डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खा रहे थे और सामने लगे शीशे में खुद को देखते हुए दोस्तों से बातचीत कर रहे थे। शैलेंद्र के मुताबिक सलमान को खाना खाते समय शीशे में खुद को देखना पसंद है और उसी दौरान दोनों बातचीत में व्यस्त थे।

    इसी बीच अचानक एक व्यक्ति मेडिकल उपकरणों के साथ वहां पहुंचा। उसने बिना बातचीत में व्यवधान डाले अपने दस्ताने पहने और सलमान खान के सिर पर इंजेक्शन लगाने शुरू कर दिए। यह पूरा दृश्य देखकर शैलेंद्र कुछ पल के लिए हैरान रह गए क्योंकि सलमान बिना किसी परेशानी के आराम से बिरयानी खाते रहे और बातचीत भी जारी रखी।

    जब शैलेंद्र ने उनसे पूछा कि आखिर यह सब क्या हो रहा है तब सलमान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि दोस्त स्टार बनने की यही कीमत है। उनके इस जवाब ने माहौल को हल्का बना दिया लेकिन साथ ही यह भी दिखाया कि अपने व्यक्तित्व और लुक्स को बनाए रखने के लिए कलाकार कितनी मेहनत करते हैं।

    बाद में शैलेंद्र को पता चला कि सलमान खान प्लेटलेट रिच प्लाज्मा यानी पीआरपी थेरेपी करवा रहे थे। इस उपचार में व्यक्ति के अपने ही रक्त से प्लेटलेट्स युक्त प्लाज्मा तैयार किया जाता है और उसे सिर की त्वचा में इंजेक्ट किया जाता है ताकि बालों की जड़ों को मजबूती मिले और हेयर ग्रोथ बेहतर हो सके। आज यह थेरेपी हेयर लॉस की समस्या से जूझ रहे लोगों के बीच काफी लोकप्रिय मानी जाती है।

    शैलेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि उस समय उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। बाद में उन्हें समझ आया कि यह सामान्य मेडिकल ट्रीटमेंट है और कई बड़े कलाकार भी इसका सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ बाल पतले होना स्वाभाविक है और ऐसे में कई अभिनेता अपनी पर्सनैलिटी को बनाए रखने के लिए इस तरह के उपचार करवाते हैं। उन्होंने अभिनेता ऋतिक रोशन का उदाहरण देते हुए कहा कि कई सितारे इस तरह की आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।

    सलमान खान की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो वह जल्द ही अपनी नई फिल्म मातृभूमि में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका निभा रही हैं। फिल्म का शुरुआती नाम बैटल ऑफ गलवान रखा गया था लेकिन बाद में इसे बदलकर मातृभूमि कर दिया गया। हालांकि फिल्म की रिलीज डेट को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

  • लोक सेवा गारंटी से बाहर हुई मिट्टी और बीज जांच, देरी होने पर किसान नहीं कर सकेंगे अपील

    लोक सेवा गारंटी से बाहर हुई मिट्टी और बीज जांच, देरी होने पर किसान नहीं कर सकेंगे अपील


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों से जुड़ी दो महत्वपूर्ण सेवाओं को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने खेतों की मिट्टी परीक्षण और प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण को मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया है। इस फैसले के बाद किसानों को इन सेवाओं के लिए समयबद्ध रिपोर्ट मिलने की कानूनी गारंटी समाप्त हो गई है। साथ ही यदि रिपोर्ट मिलने में देरी होती है तो अब किसान लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अपील भी नहीं कर सकेंगे। ऐसे समय में यह निर्णय सामने आया है जब प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं।

    लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने 29 जुलाई को अधिसूचना जारी कर वर्ष 2017 में अधिसूचित दोनों सेवाओं को डी नोटिफाई कर दिया। इसके साथ ही मिट्टी नमूना परीक्षण और प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण अब लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 के तहत मिलने वाली सेवाओं की सूची से बाहर हो गए हैं। इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ेगा जो खेती से पहले मिट्टी की गुणवत्ता और बीज की प्रमाणिकता की जांच के लिए सरकारी प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहते हैं।

    वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने किसानों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन दोनों सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया था। इसके तहत मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट 30 कार्य दिवस के भीतर उपलब्ध कराने का प्रावधान था। इसके लिए सहायक मिट्टी परीक्षण अधिकारी सहायक मृदा सर्वेक्षण अधिकारी और संबंधित प्रयोगशाला प्रभारी को जिम्मेदार बनाया गया था। वहीं प्रमाणित बीज नमूना परीक्षण की रिपोर्ट 60 कार्य दिवस के भीतर देने की व्यवस्था थी जिसकी जिम्मेदारी संभागीय राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशाला के बीज परीक्षण अधिकारी पर निर्धारित की गई थी।

    यदि निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जाती थी तो किसानों को कानूनी रूप से अपील करने का अधिकार प्राप्त था। मिट्टी परीक्षण के मामलों में किसान पहले जिले के उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास के समक्ष प्रथम अपील कर सकते थे। यदि वहां भी समाधान नहीं मिलता था तो संभागीय संयुक्त संचालक के पास द्वितीय अपील का विकल्प मौजूद था। इसी तरह बीज परीक्षण के मामलों में भी दो स्तर की अपील व्यवस्था लागू थी जिससे किसानों को समय पर सेवा सुनिश्चित कराने का अधिकार मिलता था।

    नई अधिसूचना लागू होने के बाद अब यह पूरी व्यवस्था समाप्त हो गई है। यानी अब मिट्टी और बीज परीक्षण की रिपोर्ट देने के लिए कोई वैधानिक समय सीमा लागू नहीं होगी। यदि रिपोर्ट में देरी होती है तो किसान लोक सेवा गारंटी कानून के तहत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ शिकायत या अपील भी नहीं कर पाएंगे। इससे समयबद्ध सेवा की कानूनी बाध्यता खत्म हो गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी परीक्षण खेती की उत्पादकता बढ़ाने और सही उर्वरक प्रबंधन के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है जबकि प्रमाणित बीज परीक्षण किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इन सेवाओं के लिए समयबद्ध व्यवस्था समाप्त होने से किसानों को रिपोर्ट मिलने में देरी का सामना करना पड़ सकता है जिसका असर बुवाई और फसल प्रबंधन पर भी पड़ सकता है।

    सरकार की ओर से इस बदलाव के पीछे प्रशासनिक कारण बताए जा सकते हैं लेकिन किसानों के लिए यह फैसला कई सवाल भी खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लोक सेवा गारंटी से बाहर होने के बावजूद कृषि विभाग इन सेवाओं को कितनी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करा पाता है।

  • बैतूल हादसे के बाद बढ़ी चिंता, तीन मानसूनी सिस्टम सक्रिय; मध्य प्रदेश के 12 जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात

    बैतूल हादसे के बाद बढ़ी चिंता, तीन मानसूनी सिस्टम सक्रिय; मध्य प्रदेश के 12 जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। प्रदेश में एक साथ तीन मजबूत मौसम प्रणालियों के प्रभाव से अगले 48 घंटे तक भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने खास तौर पर मालवा और निमाड़ क्षेत्र के साथ इंदौर और उज्जैन संभाग के कई जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदी नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने लगा है।

    मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को रतलाम झाबुआ अलीराजपुर और धार जिलों में अति भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा नीमच आगर मालवा उज्जैन देवास बड़वानी खरगोन बुरहानपुर और छिंदवाड़ा में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है। राजधानी भोपाल सहित इंदौर जबलपुर ग्वालियर रायसेन सीहोर विदिशा नर्मदापुरम बैतूल हरदा शाजापुर मंदसौर खंडवा शिवपुरी गुना दतिया मुरैना भिंड सागर रीवा सतना सीधी शहडोल और अन्य जिलों में भी रुक रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई गई है।

    गुरुवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई। भोपाल उज्जैन रतलाम हरदा और खरगोन सहित कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे दर्दनाक घटना बैतूल जिले में हुई जहां मूसलाधार बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल पास की झोपड़ी पर गिर गई। इस हादसे में 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना ने लगातार हो रही बारिश के बीच कमजोर निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    बारिश के बढ़ते दबाव को देखते हुए बैतूल के सारणी स्थित सतपुड़ा बांध के सात गेट इस मानसून में पहली बार खोल दिए गए हैं ताकि अतिरिक्त पानी की निकासी की जा सके। प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और नदी नालों के पास नहीं जाने की सलाह दी है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 14 दशमलव 7 इंच वर्षा दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 17 दशमलव 2 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अभी भी लगभग 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। हालांकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से यह अंतर आने वाले दिनों में कम होने की संभावना है।

    प्रदेश के 47 जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इनमें उज्जैन रतलाम धार झाबुआ बैतूल हरदा छिंदवाड़ा जबलपुर सागर रीवा सतना ग्वालियर शिवपुरी और विदिशा जैसे जिले शामिल हैं। दूसरी ओर भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ भिंड मंदसौर और बुरहानपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक वर्षा हो चुकी है। देवास में सामान्य से लगभग 29 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है और इसी दौरान प्रदेश में कुल वर्षा का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है। यदि अगले दो दिनों तक मौसम विभाग का अनुमान सही साबित होता है तो वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

  • धरती आबा योजना में एमपी का विरोधाभासी प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं में आगे लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में फिसड्डी

    धरती आबा योजना में एमपी का विरोधाभासी प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं में आगे लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में फिसड्डी


    भोपाल। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत आदिवासी क्षेत्रों के समग्र विकास को लेकर संसद में पेश हुई रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की तस्वीर को दो अलग-अलग पहलुओं में सामने ला दिया है। एक ओर राज्य को देश में सबसे अधिक 308 करोड़ 65 लाख रुपए का आवंटन मिला है और कई योजनाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज हुई हैं वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण और जनजातीय छात्रावास जैसे बुनियादी विकास कार्यों में शून्य प्रगति ने गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

    राज्यसभा में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में सबसे अधिक वित्तीय सहायता मिली। इस राशि का उद्देश्य आदिवासी बहुल गांवों में पेयजल आवास सड़क बिजली मोबाइल नेटवर्क शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करना है। हालांकि जमीनी स्तर पर सभी योजनाओं का प्रदर्शन एक समान नहीं रहा।

    नल जल योजना के तहत मध्य प्रदेश ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य के 11309 लक्षित गांवों में से 6112 गांवों तक नल से जल पहुंच चुका है जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर माना गया है। इसी तरह ग्रामीण आवास योजना में भी राज्य को सबसे अधिक 368395 मकानों की स्वीकृति मिली जिनमें से 152309 मकान बनकर तैयार हो चुके हैं। बिजली कनेक्शन के मामले में भी राज्य का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर दर्ज किया गया है और हजारों आदिवासी परिवारों तक बिजली पहुंचाई गई है।

    मोबाइल नेटवर्क विस्तार के क्षेत्र में भी प्रगति देखने को मिली है। नेटवर्क विहीन 776 आदिवासी गांवों में से 571 गांवों तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में संचार व्यवस्था मजबूत हुई है। हालांकि इस क्षेत्र में भी अभी काफी काम बाकी है।

    सबसे बड़ी चिंता सड़क निर्माण और छात्रावास परियोजनाओं को लेकर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में 913 किलोमीटर लंबाई की 345 सड़कें स्वीकृत की गई थीं लेकिन अब तक एक भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसी तरह आदिवासी विद्यार्थियों के लिए 104 छात्रावासों की स्वीकृति और करोड़ों रुपए जारी होने के बावजूद एक भी छात्रावास का निर्माण पूरा नहीं हुआ। यह स्थिति दर्शाती है कि शिक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित गति नहीं मिल सकी है।

    इन कमियों के बावजूद राज्य ने एलपीजी गैस कनेक्शन वितरण में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। स्वीकृत दो लाख से अधिक कनेक्शनों में से लगभग चालीस हजार गैस कनेक्शन आदिवासी परिवारों तक पहुंचाए जा चुके हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन पशुधन विकास और अन्य आजीविका से जुड़ी योजनाओं में भी सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बजट आवंटित करना पर्याप्त नहीं होता बल्कि योजनाओं का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है। यदि सड़क और छात्रावास जैसी बुनियादी परियोजनाओं में तेजी लाई जाए तो आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है। आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि जिन योजनाओं में काम पूरी तरह रुका हुआ है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए ताकि धरती आबा अभियान का वास्तविक लाभ आदिवासी समाज तक पहुंच सके।

  • E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा दावा, वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही देशभर में लागू किया गया ईंधन

    E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा दावा, वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही देशभर में लागू किया गया ईंधन

     नई दिल्ली:  देशभर में एथेनॉल मिश्रित ई20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि इस ईंधन को बिना पर्याप्त वैज्ञानिक परीक्षण के लागू नहीं किया गया। सरकार ने कहा कि ई20 पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से लागू करने से पहले व्यापक लैब परीक्षण, वास्तविक परिस्थितियों में फील्ड ट्रायल और ऑटोमोबाइल उद्योग समेत सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत परामर्श किया गया था। इन सभी परीक्षणों में यह पाया गया कि निर्धारित मानकों के तहत ई20 पेट्रोल नए और पुराने दोनों प्रकार के वाहनों के लिए सुरक्षित है और इससे इंजन या अन्य पुर्जों पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ता।

    लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम को नीति आयोग, ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) और अन्य तकनीकी संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया। सरकार ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिक अध्ययन और विशेषज्ञों की सलाह को प्राथमिकता दी गई।

    सरकार के मुताबिक ई20 ईंधन लागू करने से पहले ARAI, SIAM, इंडियन ऑयल, IIP और प्रमुख वाहन निर्माताओं ने इंजन की मजबूती, ड्राइविंग प्रदर्शन, स्टार्टिंग क्षमता, ईंधन दक्षता, जंग-रोधी क्षमता, उत्सर्जन और विभिन्न ऑटो पार्ट्स की अनुकूलता जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत परीक्षण किए। प्रयोगशाला के साथ-साथ वास्तविक सड़कों पर भी लंबे समय तक वाहनों का परीक्षण किया गया। इन सभी अध्ययनों में यह निष्कर्ष सामने आया कि ई20 पेट्रोल का उपयोग सुरक्षित है और इससे वाहन के प्रदर्शन में कोई उल्लेखनीय गिरावट नहीं आती।

    सरकार ने विशेष रूप से पुराने वाहनों को लेकर फैली आशंकाओं को भी खारिज किया। संसद में बताया गया कि परीक्षणों के दौरान पुराने वाहनों में भी इंजन, ईंधन प्रणाली या अन्य पुर्जों में किसी प्रकार की असामान्य घिसावट या जंग नहीं पाई गई। सरकार ने कहा कि देश में पिछले साढ़े तीन वर्षों से ई15 से अधिक मिश्रण वाला पेट्रोल और लगभग ढाई वर्षों से ई19 से ई20 मिश्रित पेट्रोल का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है। इस दौरान करोड़ों वाहन इन ईंधनों पर चले हैं, लेकिन एथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन खराब होने या बड़े पैमाने पर तकनीकी समस्या का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया।

    सरकार के अनुसार भारत में प्रतिदिन लगभग आठ करोड़ वाहन पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाते हैं, जिनमें करीब 80 प्रतिशत पेट्रोल वाहन हैं। बीते वर्षों में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और तीन करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर चुकी हैं। वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड में भी ई20 के कारण इंजन या अन्य पार्ट्स में किसी असामान्य नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

    सरकार ने यह भी बताया कि सभी प्रमुख वाहन निर्माता अभी भी ई20 ईंधन का उपयोग करने वाले वाहनों पर वारंटी दे रहे हैं। एक प्रमुख कार निर्माता ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे वाहन भी शामिल थे जो मूल रूप से ई20 के लिए प्रमाणित नहीं थे। इसके बावजूद कंपनी को एथेनॉल मिश्रण के कारण जंग, पुर्जों की आयु कम होने या किसी बड़े तकनीकी नुकसान की शिकायत नहीं मिली। इसी तरह प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माताओं और अन्य कंपनियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि लंबे समय तक ई20 के उपयोग के बावजूद किसी गंभीर तकनीकी समस्या का प्रमाण नहीं मिला।

    सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल का एक बड़ा फायदा पर्यावरण संरक्षण भी है। एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर अधिक होने के कारण आधुनिक इंजन बेहतर प्रदर्शन करते हैं और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। साथ ही इसकी ऊष्मा अवशोषण क्षमता अधिक होने से ईंधन का दहन अधिक प्रभावी होता है, जिससे इंजन की कार्यक्षमता में सुधार देखा गया है। सरकार ने दोहराया कि ई20 ईंधन को लागू करने की पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक तथ्यों, उद्योग की सहमति और व्यापक परीक्षणों पर आधारित रही है।

  • हरिद्वार: अचानक धंसी सड़क, पैदल जा रही महिला गड्ढे में गिरी, तत्काल रेस्क्यू से बची जान

    हरिद्वार: अचानक धंसी सड़क, पैदल जा रही महिला गड्ढे में गिरी, तत्काल रेस्क्यू से बची जान


    हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार में शुक्रवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब शहर के व्यस्त ललताराव पुल के समीप अचानक सड़क धंस गई। उसी समय वहां से गुजर रही एक महिला देखते ही देखते बने गहरे गड्ढे में गिर गई। पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला सामान्य रूप से सड़क पर चल रही थी और सड़क पूरी तरह सुरक्षित दिखाई दे रही थी। लेकिन जैसे ही वह एक स्थान पर पहुंची, अचानक जमीन धंस गई और वह सीधे गड्ढे में जा गिरी। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते बचाव होने से बड़ा हादसा टल गया।

    नीचे से गुजर रही थीं गैस पाइपलाइन और बिजली की लाइनें
    जानकारी के मुताबिक, जिस स्थान पर सड़क धंसी, उसके नीचे सीवर लाइन, गैस पाइपलाइन और हाई-टेंशन अंडरग्राउंड बिजली की केबलें बिछी हुई हैं। यदि इस घटना के दौरान गैस रिसाव या बिजली से जुड़ी कोई दुर्घटना होती, तो हालात कहीं अधिक गंभीर हो सकते थे।

    कांवड़ मेले के दौरान बढ़ी चिंता
    यह घटना ऐसे समय हुई है जब हरिद्वार में कांवड़ मेले के चलते भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ललताराव पुल का यह मार्ग हर की पौड़ी आने-जाने वाले कांवड़ियों का प्रमुख रास्ता माना जाता है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच सड़क धंसने की इस घटना ने सुरक्षा इंतजामों और सड़क की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन तथा लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • सावन में शिवभक्ति का महासंगम: 31 जुलाई से निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा भोपाल से नर्मदापुरम तक गूंजेगा हर हर महादेव

    सावन में शिवभक्ति का महासंगम: 31 जुलाई से निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा भोपाल से नर्मदापुरम तक गूंजेगा हर हर महादेव


    भोपाल। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही राजधानी भोपाल शिवभक्ति के रंग में रंगने जा रही है। भगवान भोलेनाथ की आराधना को समर्पित चार दिवसीय विशाल कांवड़ यात्रा 31 जुलाई से प्रारंभ होगी। ॐ शिव सेवा भक्त मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्त भोपाल से नर्मदापुरम पहुंचकर मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर पदयात्रा के माध्यम से वापस राजधानी आएंगे और भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक करेंगे। पूरे आयोजन के दौरान हर हर महादेव और बोल बम के जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहेगा।

    मंडल के पदाधिकारियों के अनुसार श्रद्धालुओं का जत्था 31 जुलाई शुक्रवार को दोपहर दो बजे भोपाल से नर्मदापुरम के लिए रवाना होगा। वहां मां नर्मदा के पावन तट से जल भरने के बाद श्रद्धालु कांवड़ लेकर पैदल यात्रा करते हुए भोपाल लौटेंगे। यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं बल्कि आस्था अनुशासन और सेवा भावना का भी प्रतीक मानी जाती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

    चार दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में श्रद्धालु भजन कीर्तन मंत्रोच्चार और शिव नाम के संकीर्तन के साथ आगे बढ़ेंगे। पूरे मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां भी की गई हैं। जगह जगह पेयजल चिकित्सा और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि कांवड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा भी यात्रा के दौरान सेवा कार्य किए जाएंगे।

    यात्रा का सबसे प्रमुख आयोजन 3 अगस्त सोमवार को होगा। इस दिन प्राचीन श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर पात्रा पुल से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए परम पूज्य बाबा बटेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेगी जहां मां नर्मदा के पवित्र जल से भगवान शिव का महाजलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद यात्रा का समापन बड़े वाले महादेव मंदिर कायस्थपुरा में धार्मिक अनुष्ठानों और आरती के साथ होगा।

    आयोजकों ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान महाआरती शिव भजन रुद्राभिषेक और ॐ नमः शिवाय के मंत्रों की गूंज श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगी। सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि इस दौरान भगवान शिव को नर्मदा और गंगा जैसे पवित्र जल से अभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होने की धार्मिक मान्यता है।

    मंडल ने राजधानी और आसपास के क्षेत्रों के सभी शिवभक्तों से इस पावन यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक एकता सेवा और भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का भी प्रतीक है। सावन के इस पावन अवसर पर निकलेगी यह विशाल कांवड़ यात्रा निश्चित रूप से भोपाल को शिवमय बना देगी और हर ओर हर हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय वातावरण देखने को मिलेगा।

  • ट्रंप का दावा: गाजा से चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना, हमास के निरस्त्रीकरण पर हुआ समझौता

    ट्रंप का दावा: गाजा से चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना, हमास के निरस्त्रीकरण पर हुआ समझौता


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संघर्ष को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की मध्यस्थता में हमास और गाजा में सक्रिय अन्य सशस्त्र संगठनों के पूर्ण निरस्त्रीकरण पर एक “ऐतिहासिक समझौता” हुआ है। ट्रंप के अनुसार, इस प्रक्रिया के पूरा होने के साथ ही इजरायल अपनी सेना को गाजा से चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाएगा।

    निरस्त्रीकरण के साथ होगी सेना की वापसी
    ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि जैसे-जैसे हमास और अन्य हथियारबंद संगठनों का निरस्त्रीकरण पूरा होगा, इजरायली सेना गाजा से पीछे हटेगी। इसके बाद गाजा की सुरक्षा की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय स्टेबलाइजेशन फोर्स और नई फिलिस्तीनी पुलिस संभालेगी। उनका कहना है कि इससे इजरायल की सुरक्षा मजबूत होगी और गाजा का इस्तेमाल भविष्य में किसी आतंकी हमले के लिए नहीं हो सकेगा।

    नई फिलिस्तीनी सरकार बनाने की योजना
    ट्रंप के मुताबिक, समझौते के तहत गाजा में नई फिलिस्तीनी सरकार का गठन किया जाएगा, जो ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के साथ मिलकर प्रशासन, पुनर्निर्माण और सामान्य जनजीवन बहाल करने का काम करेगी। उन्होंने इसे अपने 20-सूत्रीय शांति योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना है।

    मध्यस्थ देशों की सराहना
    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समझौते में मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थता की सराहना की। हालांकि, ट्रंप के दावों पर हमास की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    हिंसा अब भी जारी
    समझौते के दावे के बीच गाजा में हिंसा थमने के संकेत नहीं मिले हैं। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को इजरायली हवाई हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।

    व्हाइट हाउस ने भी किया समर्थन
    व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निरस्त्रीकरण पर ऐतिहासिक समझौता कराया है। इसे क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

    क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
    ट्रंप के अनुसार, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ वर्ष 2026 में गठित एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसे गाजा में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रंप इस संस्था के संस्थापक अध्यक्ष हैं। उनका दावा है कि यह पहल गाजा में नई शासन व्यवस्था स्थापित करने और भविष्य में 7 अक्टूबर जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में अहम साबित होगी।

  • MP: पन्ना के जिला अस्पताल में एक माह में 22 बच्चों की मौत! स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

    MP: पन्ना के जिला अस्पताल में एक माह में 22 बच्चों की मौत! स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप


    पन्ना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पन्ना जिला अस्पताल (Panna District Hospital) एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। यहां नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई यानी एसएनसीयू (Special Newborn Care Unit – SNCU) में पिछले एक महीने के दौरान जन्म से लेकर एक वर्ष तक की उम्र के 22 मासूम बच्चों की मौत ने हड़कंप मचा दिया है। लगातार हो रही इन मौतों के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं, इलाज की गुणवत्ता और जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी स्वयं जिला अस्पताल पहुंचे और एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण किया।

    पन्ना जिला चिकित्सालय की एसएनसीयू यूनिट, जहां गंभीर रूप से बीमार नवजात और छोटे बच्चों का इलाज किया जाता है, इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक माह में यहां 22 बच्चों की मौत हुई है। यह संख्या सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। लगातार हो रही मौतों ने परिजनों की चिंता भी बढ़ा दी है।


    सीएमएचओ खुद पहुंचे

    स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजेश प्रसाद तिवारी जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण किया और डॉक्टरों व स्टाफ से उपचार व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों, दवाइयों, उपकरणों तथा स्टाफ की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही सभी मामलों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश भी दिए।


    स्वास्थ्य विभाग की अलग दलील

    सीएमएचओ राजेश प्रसाद तिवारी का कहना है कि एसएनसीयू में भर्ती होने वाले अधिकांश बच्चे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के साथ रेफर होकर आते हैं। सभी मामलों की जांच की जा रही है और प्रत्येक मौत के कारणों की विस्तृत समीक्षा के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर परिजनों का कहना है कि अस्पताल में बेहतर इलाज और पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


    वो सवाल जिनके जवाब का हर किसी को इंतजार

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक महीने में 22 मासूमों की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं? क्या सभी मौतें केवल गंभीर चिकित्सकीय स्थितियों के कारण हुईं या फिर अस्पताल की व्यवस्थाओं में भी कहीं कोई कमी रही? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की समीक्षा शुरू कर दी है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।