Author: bharati

  • शेयर बाजार में तेजी से बढ़ रही युवाओं की भागीदारी….. हर 10वां भारतीय बना निवेशक

    शेयर बाजार में तेजी से बढ़ रही युवाओं की भागीदारी….. हर 10वां भारतीय बना निवेशक


    नई दिल्ली।
    भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market) में युवाओं (Youth) की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) (National Stock Exchange – NSE) की मार्केट पल्स-जुलाई 2026 रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अप्रैल से जून के बीच यानी तीन माह में शेयर बाजार में आए नए निवेशकों में जेन जी (Gen Z) की हिस्सेदारी 59% रही। मार्च, 2020 से जून, 2026 तक भी हर साल नए निवेशकों में इनका हिस्सा 53-59 फीसदी रहा।


    नए निवेशकों में जेन जी की हिस्सेदारी कितनी रही?

    रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च, 2020 में देश में 3 करोड़ पंजीकृत निवेशक थे, जो जून, 2026 तक बढ़कर 13.24 करोड़ हो गए। यानी अब देश का लगभग हर 10वां व्यक्ति पंजीकृत निवेशक है। इनमें 4.40 करोड़ सक्रिय निवेशक हैं, जिन्होंने एक साल में कम से कम एक बार ट्रेडिंग की। 3.55 करोड़ कैश मार्केट में सक्रिय रहे, जबकि 85 लाख निवेशकों ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) में कारोबार किया।

    रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार में निवेश करने में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। देश के कुल पंजीकृत निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 24.9 फीसदी है। यानी लगभग हर चार में एक निवेशक महिला है।


    महिलाओं की भागीदारी कितनी बढ़ी है?
    राज्य – हिस्सेदारी

    गोवा – 33.3%
    मिजोरम- 32.6%
    दिल्ली – 31.1%
    महाराष्ट्र – 29%
    तमिलनाडु- 28.7%
    गुजरात – 28.4%
    उत्तर प्रदेश – 19.2%
    बिहार – 16.5%
    एनएसई में 2020 से जून, 2026 के आंकड़ाें से निष्कर्ष


    लंबी अवधि के निवेश का रुझान क्यों बढ़ रहा है?

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कैश मार्केट में लगातार बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि खुदरा निवेशक एफएंडओ में सिर्फ सट्टेबाजी और जल्द पैसा बनाने के बजाय लंबी अवधि के निवेश पर भी जोर दे रहे हैं। सेबी कह चुका है कि एफएंडओ में ज्यादातर नुकसान होता है।

  • US में विदेशी छात्रों को बड़ा झटका देने की तैयारी…. पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए देनी पड़ेगी 83 लाख की फीस!

    US में विदेशी छात्रों को बड़ा झटका देने की तैयारी…. पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए देनी पड़ेगी 83 लाख की फीस!


    वाशिंगटन।
    ट्रंप सरकार (Trump Government) अमेरिका (America) में उच्च शिक्षा लेने वाले विदेशी छात्रों को बड़ा झटका देने की तैयारी में है. इसके तहत अमेरिकी यूनिवर्सिटी (American University) से पढ़ाई पूरी करने के बाद विदेशी छात्रों को काम करने के लिए 1 लाख डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) की फीस देनी पड़ सकती है।

    अमेरिकी सरकार ये फीस ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (OPT) प्रोग्राम पर लागू करेगी. ये व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपने स्टूडेंट वीजा पर ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद एक से तीन साल तक अमेरिका में काम करने की परमिशन देती है।

    साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 4,19,000 विदेशी छात्र इस प्रोग्राम के तहत अमेरिका में काम कर रहे थे. सूत्रों की मानें तो अगर ये नियम लागू होता है, तो अमेरिका जाकर पढ़ाई करने का विदेशी छात्रों का रुझान काफी कम हो सकता है।

    इस कदम को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लीगल इमिग्रेशन को सीमित करने के फैसले के तहत भी देखा जा रहा है. इस फैसले से अमेरिकी विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है, जो विदेशी छात्रों की फीस पर काफी हद तक निर्भर हैं. इसके अलावा सिलिकॉन वैली और वॉल स्ट्रीट की दिग्गज तकनीकी और वित्तीय कंपनियों को भी तकनीकी पदों पर टैलेंट्स हायर करने में भारी मशक्कत करनी पड़ेगी।

    इससे पहले ट्रंप सरकार ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की लेवी लगाने की कोशिश की थी. हालांकि, बोस्टन की एक अदालत ने पिछले सप्ताह ही सरकार को H-1B फीस वसूलने से रोक दिया था. अब माना जा रहा है कि OPT पर ये भारी फीस लगाकर सरकार अपने उसी मकसद को हासिल करना चाहती है।

    हालांकि, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) में अभी इस पर चर्चा जारी है. व्हाइट हाउस इसे अंतिम मंजूरी देगा या नहीं, ये फैसला होना अभी बाकी है. साथ ही ये भी तय नहीं हुआ है कि ये फीस छात्र खुद भरेंगे या उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियां।

  • US: चीनी रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स से देश की सुरक्षा पर खतरा…! ट्रंप सरकार ने किए बैन

    US: चीनी रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स से देश की सुरक्षा पर खतरा…! ट्रंप सरकार ने किए बैन


    वाशिंगटन।
    रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स (Robotic Vacuum Cleaners) इनोवेशन और इंजीनियरिंग (Innovation and Engineering) का शानदार नमूने की तरह हैं. लेकिन रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स सुरक्षा के लिहाज से कई बार खतरनाक साबित हो सकते हैं. अमेरिका (America) में अब रोबोट वैक्यूम क्लीनर को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. अमेरिकी सरकार ने नए नियम लागू किए हैं, जिनकी वजह से चीन समेत दूसरे देशों में बने कई नए रोबोट वैक्यूम क्लीनर अमेरिकी बाजार में नहीं आ पाएंगे. इस फैसले के पीछे वजह नैशनल सिक्योरिटी बताई गई है।

    यह फैसला अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने लिया है. पहले माना जा रहा था कि यह नियम सिर्फ ह्यूमनॉइड रोबोट और रोबोट डॉग पर लागू होगा, लेकिन बाद में साफ किया गया कि इसमें ऐसे रोबोट वैक्यूम क्लीनर भी शामिल हैं जो सेंसर, कैमरा, वायरलेस कनेक्टिविटी और सॉफ्टवेयर की मदद से अपने आसपास का नक्शा बनाकर काम करते हैं।


    रोबोट वैक्यूम से डर क्यों?

    आज के रोबोट वैक्यूम सिर्फ फर्श साफ नहीं करते. इनमें कैमरा, LiDAR सेंसर, Wi-Fi और कई स्मार्ट फीचर होते हैं. ये घर का नक्शा तैयार करते हैं और मोबाइल ऐप से कंट्रोल किए जाते हैं. यही नहीं, रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स आपके घर का पूरा खाका तैयार करते हैं ताकि बेहतर तरीके से सफाई की जा सके. लेकिन इससे ये भी सवाल उठता है कि अगर लोगों के घरों के मैप्स गलती से किसी साइबर क्रिमिनल्स या स्टेट स्पॉन्सर्ड स्पाई एजेंसी को मिल जाए तो किसी मुल्क के लिए काफी खतरनाक हो सकता है.

    रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर में सेंसर्स के साथ कैमरे भी लगे होते हैं. यानी घर का कोना कोना इनकी जद में होता है और बाकायदा रिकॉर्डिंग भी की जाती है. पूरे घर का वीडियो बनता है. घर में कौन रह रहा है कितने लोग हैं और क्या कर रहे हैं सबकुछ रिकॉर्ड हो सकता है. हालांकि बड़ी रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स कंपनियां प्राइवेसी को लेकर बड़े दावे करती हैं. जैसे – यूजर डेटा एन्क्रिप्टेड होता है और इसका मिसयूज किसी भी हालत में नहीं किया जा सकता है।

    बहरहाल, अमेरिकी सरकार का कहना है कि ऐसे डिवाइस बड़ी मात्रा में डेटा इकट्ठा करते हैं. अगर यह डेटा गलत हाथों में चला जाए तो सुरक्षा से जुड़ी चिंता पैदा हो सकती है. इसी वजह से यह कदम उठाया गया है।


    किन कंपनियों पर पड़ सकता है असर?

    रोबोट वैक्यूम बाजार में चीन की कंपनियों का दबदबा है. Roborock, Ecovacs, Xiaomi, Narwal और Dreame जैसे ब्रांड दुनिया के कई देशों में अपने प्रोडक्ट बेचते हैं. नए नियमों का सबसे ज्यादा असर इन्हीं कंपनियों पर पड़ सकता है।


    क्या पुराने रोबोट वैक्यूम बंद हो जाएंगे?

    नहीं. अगर आपने पहले से कोई रोबोट वैक्यूम खरीदा हुआ है तो उसे इस्तेमाल करने पर कोई रोक नहीं है. यह नियम सिर्फ नए मॉडल और फ्यूचर में होने वाले नए आयात पर लागू होगा. यानी पहले से बिक चुके या मंजूरी पा चुके डिवाइस फिलहाल प्रभावित नहीं होंगे।


    क्या सिर्फ रोबोट वैक्यूम पर ही असर होगा?

    नहीं. यह फैसला सिर्फ रोबोट वैक्यूम तक लिमिटेड नहीं है. कुछ दूसरे एडवांस मोबाइल रोबोट भी इस दायरे में आते हैं. हालांकि ड्रोन, मेडिकल रोबोट, कनेक्टेड वाहन और कई दूसरे रोबोट इस नियम से बाहर रखे गए हैं.


    चीन ने क्या कहा?

    अमेरिका के इस फैसले के बाद चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. चीन का कहना है कि नैशनल सिक्योरिटी का हवाला देकर चीनी कंपनियों को निशाना बनाया जा रहा है. उसने चेतावनी दी है कि अगर यह नीति जारी रही तो जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं.


    भारत के यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

    फिलहाल इस फैसले का भारत में सीधे तौर पर कोई असर नहीं पड़ेगा. भारत में Roborock, Dreame, Ecovacs, Xiaomi और दूसरे ब्रांड अपने प्रोडक्ट बेचते रहेंगे. हालांकि अगर अमेरिका में इन कंपनियों की बिक्री प्रभावित होती है, तो फ्यूचर में में उनकी ग्लोबल स्ट्रैटिजी, कीमतों या नए प्रोडक्ट लॉन्च पर कुछ असर देखने को मिल सकता है।

  • उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर… लैंडस्लाइड के कारण रोकी केदारनाथ यात्रा, 850 श्रद्धालु फंसे

    उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर… लैंडस्लाइड के कारण रोकी केदारनाथ यात्रा, 850 श्रद्धालु फंसे


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में भारी बारिश (Heavy rain) के कारण पहाड़ से मैदान तक हर ओर बारिश कहर बरपा रही है। लैंडस्लाइड के कारण केदारनाथ यात्रा (Kedarnath Yatra) रोक दी गई है। कम से कम 850 श्रद्धालु फंसे हुए हैं। हरिद्वार (Haridwar) में दो कारें बह गईं। यमुनोत्री हाईवे पर पत्थर गिरने से कई घंटे यात्रा बाधित रही। देहरादून में भारी बारिश के बाद नाले के तेज बहाव में दो सगी बहनें बह गईं। उनके शव बरामद हुए हैं। मौसम विभाग ने आज 8 जिलों में फ्लैश फ्लड (Flash flood) और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। देहरादून, रुद्रप्रयाग और चमोली समेत कुछ जिलों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

    केदारनाथ हाईवे पर सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच कई स्थानों पर भूस्खलन और पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण गुरुवार को केदारनाथ यात्रा रोक दी गई। भारी बारिश के बीच प्रशासन ने केदारनाथ से वापस आने वाले करीब 600 यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया। केदारनाथ जाने वाले करीब 250 यात्रियों को सोनप्रयाग में रोका गया। बारिश से उत्तराखंड में कुल 91 सड़कें बंद हुईं।


    मुनकटिया में आया मलबा

    केदारनाथ हाईवे सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच मुनकटिया में मलबा आने से बंद है। गौरीकुंड गेट से करीब 200 मीटर पर पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है। केदारनाथ पैदल मार्ग में भी छौड़ी, जंगलचट्टी और चीरबासा के पास कई जगहों पर मलबा बोल्डर गिर रहे हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि मौसम खुलने के साथ ही मार्ग खुलने की स्थिति में यात्रियों की आवाजाही करा दी जाएगी। उधर, कुमाऊं में बारिश के कारण तवाघाट-लिपुलेख हाईवे पर मल्लघाट के पास भूस्खलन हो गया। नौ घंटे बाद इसको खोला जा सका।


    आज 8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    शुक्रवार को भारी बारिश के पूर्वानुमान के मद्दनेजर आठ जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के डीएम को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है।


    कई घरों में घुसा मलबा

    लगातार हो रही बारिश के कारण ज्योतिर्मठ के दूरस्थ गांव किमाणा के 7 आवासीय भवन खतरे की जद में आ गए हैं। लगातर पहाड़ी से बह कर आ रही गाद लोगों के घरों में घुसने लगी है। पहाड़ी से बह कर आ रहे मलबे और बोल्डरों से गांव के संपर्क और काश्तकारी मार्ग भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं पेयजल लाईन टूटने से पेयजल संकट भी गहरा गया है।

    बता दें कि किमाणा गांव की सरहद से लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित पहाड़ी भारी बरसात के कारण बुधवार देर रात से लगातर दरकती रही। पहाडी से टूटकर लगातार बडे़ बडे़ बोल्डर बरसाती नाले में बहकर गाद गांव तक पहुंच रही है। इस मलबे की चपेट में आने से गांव की शीर्ष में स्थित चंडिका मंदिर की भोग मंडी और सभी सुरक्षा दीवारें पूरी तरह से टूट गई है। क्षेत्र पंचायत सदस्य मुकेश सेमवाल ने बताया कि पूरा गांव दहशत में है और गांव के 7 मकानों में लगातार बह कर आ रहा मलबा घुस रहा है। इन घरों के आंगन भी मलबे से भर चुके हैं, जिस कारण से इन परिवारों को भारी परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है।


    हरिद्वार में दो कार बहीं, यमुनोत्री हाईवे पर गिरे पेड़

    हरिद्वार में मूसलाधार बारिश के चलते खड़खड़ी स्थित सूखी नदी उफान पर आ गई। इससे नदी के बीच रपटे पर खड़ी दो कार बह गईं। घटना से मौके पर अफरातफरी मच गई। बहाव कम होने के बाद कारों को नदी से बाहर निकला गया। उधर, स्याना चट्टी और राना चट्टी के बीच भू-धंसाव होने से कई पेड़ यमुनोत्री हाईवे पर गिर गए। पेड़ों के गिरने से कुछ समय के लिए हाईवे पर यातायात बाधित हो गया।


    देहरादून में दो बहनों की दर्दनाक मौत

    इधर, देहरादून के क्लेमनटाउन क्षेत्र की नई बस्ती में बारिश से उफनाई नाली में बहने से दो मासूम बहनों की मौत हो गई। सात वर्षीय लक्ष्मी कुमारी और तीन वर्षीय सोनाक्षी कुमारी के शवों को रैंप के नीचे से निकाला गया। बच्चियों के पिता रुदल सदा और मां रीना कुमारी यहां नई बस्ती में किराये पर रहकर मजदूरी करते हैं। रुदल सदा किसी काम से अपने गांव गए हुए हैं। बच्चियों की मां रीना ने पुलिस को बताया कि दोपहर करीब एक बजे दोनों बहनें खेलने गई थीं।

  • राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन का नया सिस्टम, हर चरण की वीडियोग्राफी और 8 सदस्यीय निगरानी टीम तैनात

    राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन का नया सिस्टम, हर चरण की वीडियोग्राफी और 8 सदस्यीय निगरानी टीम तैनात


    अयोध्या  अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए बड़े बदलाव लागू किए हैं। 25 जुलाई से प्रभावी नई व्यवस्था के तहत अब मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया आठ सदस्यीय निगरानी टीम की देखरेख में संचालित की जा रही है। दानपात्रों को खाली करने से लेकर गणना कक्ष तक पहुंचाने और धनराशि को सीलबंद करने तक हर चरण की वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी गई है। ट्रस्ट का कहना है कि इस नई प्रणाली का उद्देश्य श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करना तथा भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना को समाप्त करना है।

    नई व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में स्थापित लगभग 40 दानपात्रों को अब एक साथ नहीं खोला जाएगा। प्रत्येक दानपात्र को अलग-अलग दिन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खाली किया जाएगा। सबसे पहले गणना कक्ष से खाली बक्सा निकाला जाएगा, जिसे निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के बीच संबंधित दानपात्र तक ले जाया जाएगा। इसके बाद दानराशि उस बक्से में रखी जाएगी और उसे पूरी तरह सीलबंद कर पुनः गणना कक्ष तक पहुंचाया जाएगा। इस दौरान पूरी प्रक्रिया 360 डिग्री कैमरों और एसएलआर कैमरों से रिकॉर्ड की जाएगी ताकि हर गतिविधि का स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

    ट्रस्ट ने इस कार्य के लिए दो पेशेवर वीडियोग्राफरों की नियुक्ति की है। वहीं पूरी प्रक्रिया की निगरानी आठ सदस्यीय टीम करेगी, जिसमें दो बैंक कर्मचारी, दो ट्रस्ट प्रतिनिधि, दो एसआईएस सुरक्षा कर्मी और अन्य अधिकृत सदस्य शामिल रहेंगे। गणना कक्ष में पहुंचने के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी दान से भरे बक्सों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीलबंद करेंगे। इसके बाद धनराशि की गणना और बैंकिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

    इस बीच ट्रस्ट के कोष प्रबंधन एवं निगरानी समिति के सदस्य जगदीश आफले ने स्पष्ट किया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बीच किसी प्रकार का कोई विवाद या गतिरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर के दान की जमा और निकासी की प्रक्रिया पहले की तरह सामान्य रूप से जारी है और मंदिर परिसर में कार्यरत कर्मचारियों को समय पर भुगतान भी किया जा रहा है। ट्रस्ट के सचिव पद को लेकर उन्होंने बताया कि दो सितंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में नए सचिव के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    उधर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले में एसआईटी की जांच का सामना कर रहे ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा करीब एक महीने तक सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहने के बाद फिर सक्रिय नजर आने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में उन्होंने कई धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लिया है तथा रामनगरी के संतों और धर्माचार्यों से मुलाकातें भी की हैं। जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ कर चुकी हैं और मंदिर निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर भी जांच जारी है।

    ट्रस्ट का मानना है कि नई निगरानी व्यवस्था से दान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनेगी और श्रद्धालुओं का भरोसा पहले से अधिक मजबूत होगा। आधुनिक तकनीक, बहुस्तरीय निगरानी और बैंकिंग प्रक्रिया की सीधी भागीदारी के जरिए अब चढ़ावे की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

  • भारत की 117 सबसे प्रभावशाली महिला लीडर्स के पास 39 लाख करोड़ की संपत्ति, 84% ने खुद बनाया कारोबार

    भारत की 117 सबसे प्रभावशाली महिला लीडर्स के पास 39 लाख करोड़ की संपत्ति, 84% ने खुद बनाया कारोबार


    नई दिल्ली। भारत में महिला नेतृत्व लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।  भारत की 117 सबसे प्रभावशाली महिला लीडर्स के पास 39 लाख करोड़ की संपत्ति, 84% ने खुद बनाया कारोबार
    नई दिल्ली। भारत में महिला नेतृत्व लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वर्ष 2026 की कैंडेरे-हुरुन इंडिया वुमन लीडर्स सूची के अनुसार, देश की 117 सबसे प्रभावशाली महिला लीडर्स के पास संयुक्त रूप से करीब 39 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। यह राशि फिनलैंड की अनुमानित जीडीपी (करीब 32 लाख करोड़ रुपये) से भी अधिक है। रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि सूची में शामिल 84 प्रतिशत यानी 98 महिलाओं ने अपनी पहचान और संपत्ति विरासत से नहीं, बल्कि अपने दम पर बनाई है।
    12 क्षेत्रों की महिला लीडर्स को मिली जगह

    रिपोर्ट में कारोबार, खेल, सामाजिक सेवा, स्टार्टअप, मीडिया, कंटेंट क्रिएशन और साहित्य समेत 12 अलग-अलग श्रेणियों की महिलाओं को शामिल किया गया है। इसमें बायोकॉन की किरण मजूमदार शॉ, एचसीएलटेक की रोशनी नादर मल्होत्रा, लेखिका सुधा मूर्ति, पैरा एथलीट अवनि लेखरा और कंटेंट व सोशल मीडिया क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।

    सबसे युवा और सबसे वरिष्ठ कौन?

    इस सूची में 19 वर्षीय पैरा तीरंदाज शीतल देवी सबसे युवा प्रभावशाली महिला हैं, जबकि 86 वर्षीय उद्योगपति रजनी बेक्टर सबसे वरिष्ठ महिला लीडर के रूप में शामिल हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार शॉ के लिंक्डइन पर सबसे अधिक 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। सूची में शामिल 33 महिलाओं ने अपने करियर के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य का रुख किया, जबकि दो महिलाओं ने विदेश जाकर अपनी पेशेवर पहचान बनाई।

    वहीं, एचसीएलटेक की चेयरपर्सन रोशनी नादर मल्होत्रा ‘वेल्थ मल्टीप्लायर’ श्रेणी में शीर्ष पर रहीं। उनकी अनुमानित संपत्ति 2.84 लाख करोड़ रुपये बताई गई है।

    किन शहरों से हैं सबसे ज्यादा महिला लीडर्स?

    प्रभावशाली महिला लीडर्स की संख्या के मामले में मुंबई पहले स्थान पर है, जहां से 26 महिलाओं ने सूची में जगह बनाई। दिल्ली 21 महिलाओं के साथ दूसरे, बेंगलुरु 16 के साथ तीसरे, गुरुग्राम 6 के साथ चौथे और पुणे 5 महिलाओं के साथ पांचवें स्थान पर है।

    हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में मुंबई से सूची में शामिल महिलाओं की संख्या 12 कम हुई है, जबकि दिल्ली से आने वाली प्रभावशाली महिलाओं की संख्या में 8 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    रिपोर्ट बताती है कि भारत में महिला उद्यमिता, नेतृत्व और नवाचार का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है और अधिक महिलाएं अपने दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही हैं।
  • घर में चाहते हैं सुख समृद्धि और वैभव तो जानिए माता लक्ष्मी को क्या पसंद है और किन बातों से होती हैं प्रसन्न

    घर में चाहते हैं सुख समृद्धि और वैभव तो जानिए माता लक्ष्मी को क्या पसंद है और किन बातों से होती हैं प्रसन्न


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में माता लक्ष्मी को धन वैभव सुख समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है वहां कभी अन्न धन और खुशहाली की कमी नहीं होती। हालांकि केवल पूजा पाठ कर लेने से ही लक्ष्मी कृपा नहीं मिलती बल्कि व्यक्ति के कर्म व्यवहार और जीवनशैली का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां लक्ष्मी को स्वच्छता सत्य ईमानदारी और सेवा भाव अत्यंत प्रिय हैं। जो व्यक्ति इन गुणों को अपने जीवन में अपनाता है उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख समृद्धि का मार्ग खुलता है।

    माता लक्ष्मी को सबसे अधिक स्वच्छता पसंद है। इसलिए घर मंदिर रसोई और मुख्य द्वार को हमेशा साफ सुथरा रखना चाहिए। माना जाता है कि जहां गंदगी होती है वहां लक्ष्मी का स्थायी निवास नहीं होता। सुबह और शाम घर में दीपक जलाना और नियमित रूप से पूजा करना भी शुभ माना गया है। इससे घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बना रहता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी को कमल का फूल अत्यंत प्रिय है। कमल पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। शुक्रवार के दिन कमल का फूल अर्पित करके मां लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इसके साथ ही सफेद और गुलाबी पुष्प अर्पित करना भी शुभ माना गया है। पूजा में खीर मिश्री बताशे नारियल और ताजे फलों का भोग लगाने से भी माता प्रसन्न होती हैं।

    दान और सेवा को भी लक्ष्मी प्राप्ति का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भूखे को भोजन कराना और गरीबों को वस्त्र दान करना पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति अपनी आय का एक हिस्सा समाज सेवा और दान में लगाता है उस पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है।

    सत्य और ईमानदारी भी माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं। छल कपट झूठ और बेईमानी से कमाया गया धन कभी स्थायी सुख नहीं देता। इसलिए हमेशा मेहनत और ईमानदारी से कमाई गई आय को ही शुभ माना गया है। परिवार में प्रेम सम्मान और मधुर व्यवहार रखने वाले लोगों के घर भी लक्ष्मी का वास माना जाता है।

    शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष माना गया है। इस दिन सफेद वस्त्र धारण कर श्रद्धा भाव से लक्ष्मी पूजन करना दीपक जलाना और श्रीसूक्त या लक्ष्मी मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। तुलसी के पास दीपक जलाने और शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीप रखने की परंपरा भी समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

    धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि आलस्य क्रोध अपव्यय और नकारात्मक सोच से मां लक्ष्मी दूर हो जाती हैं। इसलिए समय का सदुपयोग करना घर में अनुशासन बनाए रखना और सकारात्मक विचार रखना भी आवश्यक माना गया है। जब व्यक्ति अपने जीवन में सदाचार सेवा स्वच्छता और श्रद्धा को स्थान देता है तब धन के साथ साथ मानसिक शांति और पारिवारिक सुख भी प्राप्त होता है। यही कारण है कि माता लक्ष्मी की कृपा केवल धन तक सीमित नहीं बल्कि संपूर्ण जीवन को सुखमय बनाने वाली मानी गई है।

  • हूती नाकेबंदी के बीच भारत के लिए राहत, सऊदी तेल लेकर लाल सागर से सुरक्षित निकले दो टैंकर

    हूती नाकेबंदी के बीच भारत के लिए राहत, सऊदी तेल लेकर लाल सागर से सुरक्षित निकले दो टैंकर


    नई दिल्ली । यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की तेल आपूर्ति पर नाकेबंदी की घोषणा के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत आ रहे दो बड़े तेल टैंकर लाल सागर के संवेदनशील क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकल गए हैं। इससे फिलहाल भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर तत्काल किसी बड़े असर की आशंका कम हो गई है, हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है।

    सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) द्वारा किराए पर लिया गया सुएजमैक्स श्रेणी का टैंकर अमेजन सऊदी अरब के यनबू बंदरगाह से करीब 10 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर रवाना हुआ था। वहीं मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) के लिए अफ्रामैक्स श्रेणी का टैंकर रोडोस लगभग 7 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है। दोनों जहाज 20 जुलाई के आसपास यनबू बंदरगाह से निकले थे और शुरुआत में स्वेज नहर की दिशा में आगे बढ़े।

    हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी तेल आपूर्ति को निशाना बनाने की चेतावनी के बाद दोनों टैंकरों ने सुरक्षा कारणों से अपनी लोकेशन बताने वाला ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के रास्ते लाल सागर से बाहर निकल गए। यह कदम समुद्री सुरक्षा के लिहाज से एहतियात के तौर पर उठाया गया, क्योंकि हाल के महीनों में इस क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

    लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माने जाते हैं। एशिया और यूरोप के बीच बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य सामान इसी रास्ते से भेजा जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव या नाकेबंदी अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर सीधा असर डाल सकती है।

    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है और सऊदी अरब उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। इसलिए इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा भारतीय अर्थव्यवस्था, ईंधन कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकती है। फिलहाल दोनों टैंकरों के सुरक्षित आगे बढ़ने से तत्काल आपूर्ति बाधित होने का खतरा टल गया है।

    हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या लाल सागर के समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक खतरा बना रहता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इससे भारत जैसे आयातक देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक आपूर्ति और समुद्री मार्गों का उपयोग किया जा सके।

  • संसद की तस्वीर बनी सियासत का केंद्र, टीएमसी सांसद की मौजूदगी से ममता बनर्जी पर उठे सवाल

    संसद की तस्वीर बनी सियासत का केंद्र, टीएमसी सांसद की मौजूदगी से ममता बनर्जी पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । संसद की कैंटीन में हुई एक सामान्य मुलाकात की तस्वीर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय और आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ एक ही टेबल पर भोजन करते नजर आए। तस्वीर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में दोनों नेताओं के भाजपा से नजदीकियां बढ़ने और संभावित दलबदल की अटकलें शुरू हो गईं। हालांकि टीएमसी नेताओं ने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संसद परिसर की सामान्य सामाजिक मुलाकात बताया है।

    तस्वीर वायरल होने के बाद सबसे पहले सौगत रॉय ने पूरे घटनाक्रम पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि संसद की कैंटीन में वे पहले से बैठे थे, बाद में अमित शाह और भाजपा के अन्य नेता उसी मेज पर आकर बैठे और कुछ ही देर में वहां से चले गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान किसी तरह की राजनीतिक बातचीत नहीं हुई। उनका कहना था कि भाजपा की ओर से संपर्क किए जाने की चर्चा निराधार है और वास्तविकता यह है कि उनकी पार्टी उन नेताओं से संपर्क कर रही है जो एनडीए में चले गए हैं, ताकि उन्हें वापस लाया जा सके।

    दूसरी ओर शत्रुघ्न सिन्हा ने भी तस्वीर को लेकर उठे विवाद को अनावश्यक बताया। उन्होंने कहा कि जेपी नड्डा उनके पुराने मित्र हैं और संसद में साथ बैठकर भोजन करना कोई असामान्य बात नहीं है। उन्होंने दोहराया कि इस मुलाकात का राजनीति या पार्टी बदलने जैसी किसी संभावना से कोई संबंध नहीं है।

    टीएमसी के अन्य नेताओं ने भी तस्वीरों को लेकर चल रही चर्चाओं को खारिज किया। सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक कुणाल घोष ने कहा कि संसद या विधानसभा जैसे सार्वजनिक स्थानों पर अलग-अलग दलों के नेताओं का मिलना-जुलना सामान्य प्रक्रिया है। ऐसी तस्वीरों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विचारधारा और राजनीतिक प्रतिबद्धता किसी तस्वीर से तय नहीं होती।

    हालांकि पार्टी के भीतर से अलग स्वर भी सुनाई दिए। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने तस्वीरों को ध्यान से देखा है और संभव है कि इसके पीछे कोई रणनीति हो। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से उनका कोई संबंध नहीं है और राजनीति में इस तरह की गतिविधियां होती रहती हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हाल के दिनों में राज्य की राजनीति में कई नेताओं के दल बदलने और राजनीतिक समीकरण बदलने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में संसद की कैंटीन में सामने आई यह तस्वीर भी चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि फिलहाल न तो सौगत रॉय और न ही शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा में शामिल होने जैसी किसी संभावना के संकेत दिए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के भीतर अलग-अलग दलों के नेताओं के बीच सामाजिक संबंध और औपचारिक मुलाकातें लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा हैं। इसलिए केवल एक तस्वीर के आधार पर किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में यदि इस घटनाक्रम पर कोई नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है, तभी इन अटकलों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

  • 'कैप नंबर 278 अब यहीं तक': अजिंक्य रहाणे ने लिया संन्यास, भारतीय क्रिकेट का भरोसेमंद बल्लेबाज बोला अलविदा

    'कैप नंबर 278 अब यहीं तक': अजिंक्य रहाणे ने लिया संन्यास, भारतीय क्रिकेट का भरोसेमंद बल्लेबाज बोला अलविदा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत, संयमित और भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने जाने वाले अजिंक्य रहाणे ने आखिरकार क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। 2020-21 की ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया की धरती पर टीम इंडिया को अविस्मरणीय जीत दिलाने वाले रहाणे ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए अपने दो दशक लंबे क्रिकेट सफर को विराम दिया। उनके इस फैसले के साथ भारतीय क्रिकेट का एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसे साहस, धैर्य और टीम भावना के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

    संन्यास की घोषणा करते हुए रहाणे ने लिखा कि कैप नंबर 278 अब यहीं तक है। उन्होंने अपने प्रशंसकों, साथियों और भारतीय क्रिकेट से जुड़े हर व्यक्ति का आभार जताते हुए कहा कि हर शुरुआत का एक अंत होता है और उन्हें लगता है कि अब आगे बढ़ने का यही सही समय है। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी में हमेशा सही टाइमिंग पर भरोसा किया और अब संन्यास लेने के लिए भी यही सही समय है।

    मुंबई के डोंबिवली से निकलकर भारतीय टीम तक का सफर तय करने वाले रहाणे ने कहा कि उनका बचपन सिर्फ एक सपना लेकर बीता कि एक दिन भारत की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने हमेशा देश और टीम को खुद से ऊपर रखा और पूरी ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेला। उनका मानना रहा कि अगर नीयत साफ हो तो खेल हमेशा आपका साथ देता है।

    रहाणे के करियर का सबसे स्वर्णिम अध्याय 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा माना जाता है। एडिलेड टेस्ट में भारत के 36 रन पर ऑलआउट होने और विराट कोहली के स्वदेश लौटने के बाद टीम पूरी तरह दबाव में थी। ऐसे मुश्किल समय में रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर शानदार शतक लगाकर टीम में नया आत्मविश्वास भरा। उनकी कप्तानी में युवा और चोटों से जूझ रही भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में 2-1 से हराकर इतिहास रच दिया। यही वजह है कि उन्हें आज भी मेलबर्न का हीरो कहा जाता है।

    रहाणे लंबे समय तक विदेशी परिस्थितियों में भारत के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज रहे। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 5077 रन, 12 शतक और 26 अर्धशतक दर्ज हैं। वनडे में उन्होंने 2962 रन बनाए, जिसमें तीन शतक और 24 अर्धशतक शामिल रहे। टी-20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने 375 रन बनाए। तीनों प्रारूपों को मिलाकर रहाणे ने भारत के लिए 8414 अंतरराष्ट्रीय रन बनाए और 15 शतक जड़े।

    वह 2015 विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली भारतीय टीम का अहम हिस्सा रहे। इसके अलावा 2023 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र में भी उन्होंने भारत के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ आखिरी टेस्ट खेलने के बाद उन्हें टीम में दोबारा मौका नहीं मिला। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर वापसी की कोशिश की, लेकिन राष्ट्रीय टीम में वापसी का सपना पूरा नहीं हो सका।

    अपने विदाई संदेश में रहाणे ने कहा कि क्रिकेट ने उन्हें जीत भी दिखाई और हार भी, लेकिन एक जगह वह कभी नहीं हारे और वह था लोगों का प्यार। उन्होंने कहा कि अब वह अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को अपने अनुभव और खेल से सीखे गए मूल्यों को देना चाहते हैं ताकि भारतीय क्रिकेट आगे भी नई ऊंचाइयों को छूता रहे।

    अजिंक्य रहाणे भले ही मैदान पर अब बल्लेबाजी करते नजर नहीं आएंगे, लेकिन उनकी शांत कप्तानी, कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाने का जज्बा और मेलबर्न में खेली गई ऐतिहासिक पारी भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगी।