Author: bharati

  • मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत

    मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार इस समय मानसून ट्रफ साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं जिसके कारण अगले चार दिनों तक पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इन सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। इसके चलते प्रशासन को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह से लगातार रुक रुककर बारिश हो रही है। वहीं इंदौर ग्वालियर जबलपुर रीवा सतना और कई अन्य जिलों में भी गरज चमक के साथ बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले चौबीस घंटों में कुछ इलाकों में चार इंच से अधिक बारिश हो सकती है जिससे नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है।

    बारिश के बीच बैतूल जिले से एक दुखद हादसा भी सामने आया है। गंज थाना क्षेत्र में देर रात हुई तेज बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल पास बनी एक झोपड़ी पर गिर गई। हादसे के समय झोपड़ी में सो रहे 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके मलबे में दब गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनके साथी शनि सिंह को मामूली चोटें आई हैं। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति का जायजा लिया।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अलग अलग स्तर के अलर्ट जारी किए हैं। धार देवास बुरहानपुर हरदा और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उज्जैन शाजापुर सीहोर बड़वानी खरगोन खंडवा रायसेन सागर बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    लगातार हो रही बारिश का असर प्रदेश के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। बालाघाट में कई नदी नाले उफान पर हैं और ग्रामीण इलाकों के कई मार्ग बंद हो गए हैं। बैहर परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हुआ। ग्वालियर और अन्य शहरों में भी जलभराव की स्थिति बनने लगी है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय किया जा रहा है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार वर्तमान मौसमी सिस्टम दो अगस्त तक सक्रिय बने रहेंगे। इस दौरान प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि लगातार वर्षा से नदी नालों में अचानक जलस्तर बढ़ सकता है। किसानों के लिए यह बारिश फायदेमंद मानी जा रही है लेकिन शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और अनावश्यक जोखिम से बचना बेहद जरूरी होगा।

  • CSK के गोल्डन कोच स्टीफन फ्लेमिंग अब इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट की बदलेंगे तस्वीर रिपोर्ट्स में बड़ा दावा

    CSK के गोल्डन कोच स्टीफन फ्लेमिंग अब इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट की बदलेंगे तस्वीर रिपोर्ट्स में बड़ा दावा


    नई दिल्ली। इंग्लैंड क्रिकेट टीम को जल्द ही नया टेस्ट मुख्य कोच मिल सकता है और इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार के रूप में न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान तथा चेन्नई सुपर किंग्स के सबसे सफल कोच स्टीफन फ्लेमिंग का नाम सामने आया है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने लंबी चयन प्रक्रिया के बाद फ्लेमिंग को अपनी पहली पसंद माना है। यदि अंतिम औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं तो फ्लेमिंग इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कमान संभालेंगे और यह उनके कोचिंग करियर का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अध्याय होगा।

    स्टीफन फ्लेमिंग का नाम क्रिकेट जगत के सबसे सफल और सम्मानित कोचों में लिया जाता है। उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग में चेन्नई सुपर किंग्स को पांच बार चैंपियन बनाया और टीम को लगातार सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई। शांत स्वभाव शानदार रणनीति और खिलाड़ियों से बेहतर तालमेल उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है। इसी कारण उन्हें आधुनिक क्रिकेट का बेहतरीन मैनेजर और रणनीतिकार माना जाता है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने कई उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया लेकिन फ्लेमिंग अनुभव नेतृत्व क्षमता और लंबे समय तक सफल टीम तैयार करने की योग्यता के कारण सबसे आगे निकल गए। उनके सामने टॉम मूडी जोनाथन ट्रॉट और रिचर्ड डॉसन जैसे दावेदार भी थे लेकिन बोर्ड का झुकाव फ्लेमिंग की ओर दिखाई दिया।

    बताया जा रहा है कि इंग्लैंड की टेस्ट टीम में यह बदलाव ब्रेंडन मैकुलम के टेस्ट कोच पद से हटने के बाद किया जा रहा है जबकि सीमित ओवरों की टीम के साथ उनकी भूमिका अलग बनी रह सकती है। ऐसे में इंग्लैंड पहली बार टेस्ट और व्हाइट बॉल क्रिकेट के लिए अलग कोचिंग मॉडल अपनाने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

    फ्लेमिंग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंग्लैंड की टेस्ट टीम को फिर से मजबूत बनाना होगी। उन्हें नए कप्तान के चयन टीम संयोजन युवा खिलाड़ियों को तैयार करने और आगामी बड़ी टेस्ट सीरीज के लिए मजबूत रणनीति बनानी होगी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनका शांत नेतृत्व और खिलाड़ियों को आत्मविश्वास देने की शैली इंग्लैंड के ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

    हालांकि इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन लगभग सभी प्रमुख रिपोर्ट्स में फ्लेमिंग को इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार बताया गया है। यदि नियुक्ति तय होती है तो यह केवल इंग्लैंड क्रिकेट ही नहीं बल्कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट के इतिहास में भी एक बड़ा बदलाव माना जाएगा क्योंकि IPL के सबसे सफल कोचों में शामिल फ्लेमिंग अब अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी करेंगे

  • गुरुवार को पीला रंग पहनने से क्यों मिलती है सुख समृद्धि और सफलता भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए जानें इसका पूरा महत्व

    गुरुवार को पीला रंग पहनने से क्यों मिलती है सुख समृद्धि और सफलता भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए जानें इसका पूरा महत्व


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित माना गया है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीला रंग केवल एक रंग नहीं बल्कि ज्ञान समृद्धि सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि गुरुवार के दिन अधिकतर श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण करते हैं और भगवान विष्णु को पीले पुष्प हल्दी चने की दाल और केले का भोग अर्पित करते हैं।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु पीतांबर धारण करते हैं। उनका यह स्वरूप संसार के पालनकर्ता के रूप में शांति संतुलन और समृद्धि का संदेश देता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति गुरुवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करता है तथा पीले रंग का प्रयोग करता है उसके जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है। परिवार में खुशहाली बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां धीरे धीरे दूर होने लगती हैं।

    ज्योतिष शास्त्र में भी गुरुवार का संबंध देवगुरु बृहस्पति ग्रह से बताया गया है। बृहस्पति को ज्ञान धर्म शिक्षा संतान विवाह धन और सम्मान का कारक ग्रह माना जाता है। पीला रंग बृहस्पति का प्रिय रंग माना जाता है। इसलिए गुरुवार को पीले वस्त्र पहनना पीली वस्तुओं का दान करना और भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे कुंडली में बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं।

    गुरुवार के दिन पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल चने की दाल हल्दी केसर और केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ या ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं और जरूरतमंद लोगों को पीले वस्त्र भोजन या पीली दाल का दान करते हैं। दान और सेवा को भी इस दिन विशेष पुण्यदायी माना गया है।

    पीले रंग का मनोवैज्ञानिक महत्व भी काफी खास माना जाता है। यह रंग आशा आत्मविश्वास उत्साह और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ साथ यह व्यक्ति के मन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करने वाला रंग भी माना जाता है। यही वजह है कि गुरुवार को पीला रंग पहनना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि सकारात्मक जीवनशैली का भी प्रतीक माना जाता है।

    ध्यान रखने योग्य बात यह है कि किसी भी पूजा या व्रत का सबसे महत्वपूर्ण आधार सच्ची श्रद्धा अच्छे कर्म और सकारात्मक सोच होती है। पीले वस्त्र धारण करना और पूजा करना आस्था का विषय है। यदि व्यक्ति भगवान विष्णु की भक्ति के साथ सदाचार सेवा और ईमानदारी का मार्ग अपनाता है तो जीवन में सुख शांति और समृद्धि का मार्ग स्वयं प्रशस्त होने लगता है।

  • सावन में करें इन पवित्र पौधों का रोपण भगवान शिव की कृपा के साथ घर में बढ़ेगी खुशहाली और दूर होंगी परेशानियां

    सावन में करें इन पवित्र पौधों का रोपण भगवान शिव की कृपा के साथ घर में बढ़ेगी खुशहाली और दूर होंगी परेशानियां


    नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ प्रकृति के सबसे सुंदर रूप का भी प्रतीक माना जाता है। चारों ओर हरियाली और बारिश का मौसम पौधारोपण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस पवित्र महीने में कुछ विशेष पौधे लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख समृद्धि का आगमन माना जाता है। यही कारण है कि सावन के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घर आंगन और आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाने की परंपरा निभाते हैं।

    इन पौधों में सबसे पहला स्थान तुलसी का माना जाता है। भारतीय संस्कृति में तुलसी को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। मान्यता है कि घर में तुलसी का पौधा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बढ़ता है। प्रतिदिन सुबह तुलसी में जल अर्पित करना और शाम को दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है।

    केले का पौधा भी सावन में लगाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका संबंध भगवान विष्णु और गुरु ग्रह से माना जाता है। घर के खुले स्थान या पिछले हिस्से में केले का पौधा लगाने और गुरुवार के दिन उसकी पूजा करने से पारिवारिक सुख समृद्धि में वृद्धि होने की मान्यता है। ऐसा भी माना जाता है कि इससे आर्थिक स्थिरता और जीवन में शुभ अवसर बढ़ते हैं।

    अनार का पौधा केवल घर की सुंदरता ही नहीं बढ़ाता बल्कि इसे समृद्धि और शुभता का प्रतीक भी माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इसे घर के मुख्य प्रवेश द्वार से थोड़ी दूरी पर लगाना अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि यह पौधा नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करता है और परिवार की उन्नति के नए मार्ग खोलने में सहायक माना जाता है।

    शमी का पौधा भी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इसका संबंध शनिदेव से जोड़ा जाता है। सावन के शनिवार को शमी का पौधा लगाने और उसके पास सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। ऐसी मान्यता है कि इससे कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक विश्वास है।

    पीपल का वृक्ष भारतीय संस्कृति में अत्यंत पूजनीय माना गया है। इसे घर के भीतर लगाने की बजाय मंदिर परिसर पार्क या सार्वजनिक स्थान पर लगाना अधिक उचित माना जाता है। पीपल का पौधा पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लंबे समय तक ऑक्सीजन प्रदान करने वाले प्रमुख वृक्षों में शामिल है। इसकी देखभाल करना धार्मिक आस्था के साथ साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी संदेश देता है।

    सावन का महीना केवल पूजा और व्रत का ही नहीं बल्कि प्रकृति से जुड़ने का भी अवसर है। इस दौरान पौधारोपण करने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और हरियाली में वृद्धि होती है। यदि धार्मिक आस्था के साथ इन पौधों का रोपण किया जाए और नियमित रूप से उनकी देखभाल की जाए तो यह न केवल घर की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि पर्यावरण को भी स्वच्छ और संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इस सावन पौधे लगाने की परंपरा को अपनाकर प्रकृति और संस्कृति दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई जा सकती है।

  • बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर

    बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर


    नई दिल्ली। जिम्बाब्वे दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम ने सिर्फ सीरीज जीतकर ही नहीं बल्कि अपने बदले हुए अंदाज से भी सभी का ध्यान आकर्षित किया है। इस बदलाव के केंद्र में अंतरिम मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण रहे जिन्होंने बिना किसी बयानबाजी और विवाद के केवल तीन मैचों में टीम के भीतर नया आत्मविश्वास पैदा कर दिया। खिलाड़ियों पर भरोसा जताने की उनकी शैली और शांत नेतृत्व ने यह साबित किया कि सफल कोचिंग केवल रणनीति तक सीमित नहीं होती बल्कि ड्रेसिंग रूम का माहौल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

    इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के दौरान भारतीय टीम लगातार हार और आलोचनाओं का सामना कर रही थी। टीम चयन से लेकर रणनीति तक कई फैसलों पर सवाल उठे थे। ऐसे समय में जब गौतम गंभीर उपलब्ध नहीं थे तब वीवीएस लक्ष्मण ने अंतरिम कोच की जिम्मेदारी संभाली और खिलाड़ियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित किया। उन्होंने किसी भी खिलाड़ी पर सार्वजनिक दबाव बनाने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाने पर जोर दिया।

    इसका असर मैदान पर भी साफ दिखाई दिया। कप्तान श्रेयस अय्यर और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी समेत कई खिलाड़ियों ने खुलकर लक्ष्मण के मार्गदर्शन की सराहना की। टीम के भीतर आत्मविश्वास और सहजता का माहौल बना जिससे खिलाड़ी बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपना स्वाभाविक खेल दिखा सके। लंबे समय बाद भारतीय ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा स्पष्ट नजर आई।

    वीवीएस लक्ष्मण की चयन नीति भी चर्चा का विषय बनी। उन्होंने टीम में बदलाव जरूर किए लेकिन केवल प्रयोग करने के लिए नहीं बल्कि खिलाड़ियों की क्षमता और टीम की जरूरत को ध्यान में रखकर फैसले लिए। दूसरे टी20 मुकाबले में यश ठाकुर को मौका दिया गया जबकि सीरीज अपने नाम करने के बाद तीसरे मैच में सूर्यांश शेडगे को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। इससे खिलाड़ियों को यह संदेश मिला कि प्रदर्शन और तैयारी के आधार पर सभी को अवसर मिलेगा।

    युवा खिलाड़ियों के साथ लक्ष्मण का जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लंबे समय तक काम करने के कारण वह उभरते क्रिकेटरों की मानसिकता और उनकी जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं। शुभमन गिल यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे कई खिलाड़ियों ने उनके मार्गदर्शन में अपने खेल को निखारा है। यही अनुभव अंतरिम कोच के रूप में भी उनके काम आया।

    हालांकि तीन मैचों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि टीम की सभी समस्याएं समाप्त हो गई हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने कई आसान कैच छोड़े जिससे फील्डिंग अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। बल्लेबाजी और रणनीति में सुधार जरूर दिखाई दिया लेकिन फील्डिंग में निरंतरता लाने की जरूरत बनी हुई है।

    वीवीएस लक्ष्मण इससे पहले भी कई बार अंतरिम मुख्य कोच की भूमिका निभा चुके हैं और हर बार उनके काम की सराहना हुई है। इसके बावजूद उन्होंने स्थायी मुख्य कोच बनने के बजाय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। अब उनके हालिया प्रदर्शन के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भारतीय क्रिकेट को भविष्य में अलग अलग प्रारूपों के लिए अलग मुख्य कोच की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    फिलहाल इतना तय है कि जिम्बाब्वे दौरे ने यह साबित कर दिया है कि टीम की सफलता केवल रणनीति या तकनीक पर निर्भर नहीं करती बल्कि खिलाड़ियों के भीतर विश्वास जगाने और उन्हें खुलकर खेलने का माहौल देने वाला नेतृत्व भी उतना ही अहम होता है। वीवीएस लक्ष्मण ने अपने शांत स्वभाव और संतुलित फैसलों से यही संदेश पूरी क्रिकेट दुनिया को दिया है।

  • 16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई

    16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । देश में लगातार सामने आ रहे फूड पॉइजनिंग के मामलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में 16 राज्यों में भोजन से जुड़ी बीमारियों के मामले दर्ज होने और 11 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की खबर ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना केवल किसी एक राज्य या एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह संकेत देती है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

    फूड पॉइजनिंग तब होती है जब दूषित भोजन या पेय पदार्थ शरीर में पहुंचकर बैक्टीरिया वायरस परजीवी या हानिकारक रसायनों के माध्यम से संक्रमण फैला देते हैं। इसके कारण उल्टी दस्त पेट दर्द बुखार कमजोरी और कई बार गंभीर स्थिति तक पैदा हो सकती है। छोटे बच्चों बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में इसका खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खराब गुणवत्ता वाले कच्चे पदार्थों का उपयोग स्वच्छता की अनदेखी निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही गलत तरीके से पैकेजिंग और खाद्य पदार्थों का अनुचित भंडारण फूड पॉइजनिंग की प्रमुख वजह बनते हैं। यदि किसी कंपनी द्वारा तय मानकों का पालन नहीं किया जाता तो बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है।

    भारत में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई पर है। यह संस्था खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तय करती है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। समय समय पर खाद्य नमूनों की जांच भी की जाती है लेकिन देश की विशाल आबादी और तेजी से बढ़ते खाद्य बाजार को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    उपभोक्ताओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पैक्ड फूड खरीदते समय निर्माण तिथि समाप्ति तिथि एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और पैकेज की स्थिति जरूर जांचनी चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को खरीदते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा भोजन खाने से बचना चाहिए और हमेशा साफ पानी का ही उपयोग करना चाहिए।

    यदि किसी व्यक्ति को भोजन करने के कुछ समय बाद लगातार उल्टी दस्त तेज बुखार या पेट में असहनीय दर्द जैसी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

    16 राज्यों में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि कंपनियों विक्रेताओं और उपभोक्ताओं सभी को अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी होगी। सुरक्षित भोजन हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए गुणवत्ता नियंत्रण सख्त निगरानी तथा जनजागरूकता तीनों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि सभी स्तरों पर जिम्मेदारी के साथ काम किया जाए तो फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है और लोगों का स्वास्थ्य बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। ग्लासगो में आयोजित खेलों के सातवें दिन भारत ने एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में शानदार दौड़ लगाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 10.71 सेकंड का समय निकालते हुए नया गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। वहीं उनके साथी मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड के साथ सिल्वर जीतकर भारत को शानदार वन टू फिनिश दिलाई।

    भारत की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार दूसरा सिल्वर मेडल है। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम 2022 में भी रजत पदक जीता था। फाइनल मुकाबले में जमैका के ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड हासिल किया जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने ब्रॉन्ज जीता। श्रीशंकर ने पूरे मुकाबले में शानदार निरंतरता दिखाई और अंतिम प्रयास तक पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।

    एथलेटिक्स के अलावा भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय बॉक्सिंग दल के सभी 10 खिलाड़ियों ने अपने अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाला प्रत्येक खिलाड़ी कम से कम कांस्य पदक का दावेदार बन जाता है। इस तरह भारत ने मुक्केबाजी में कम से कम 10 पदक पहले ही सुनिश्चित कर लिए हैं जो बर्मिंघम 2022 के प्रदर्शन से भी बेहतर उपलब्धि मानी जा रही है।

    इन शानदार प्रदर्शनों के बाद भारत की पदक तालिका भी मजबूत हुई है। देश के खाते में अब 15 पदक हो चुके हैं जिनमें 3 स्वर्ण 9 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों की निरंतर सफलता ने भारतीय दल का मनोबल और बढ़ा दिया है।

    दिलीप गावित की ऐतिहासिक जीत और श्रीशंकर की शानदार छलांग ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलेटिक्स लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वहीं मुक्केबाजों का दमदार प्रदर्शन आने वाले दिनों में भारत के पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद जगा रहा है। ग्लासगो से लगातार मिल रही इन सफलताओं ने भारतीय खेल प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया है और अब सभी की नजर आगामी फाइनल मुकाबलों पर टिकी हुई है जहां भारत के पास कई और पदक जीतने का सुनहरा अवसर होगा।

  • चौकों छक्कों की बारिश से चमकी स्मृति मंधाना भारत की स्टार बल्लेबाज ने द हंड्रेड में रचा नया इतिहास

    चौकों छक्कों की बारिश से चमकी स्मृति मंधाना भारत की स्टार बल्लेबाज ने द हंड्रेड में रचा नया इतिहास


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उप कप्तान स्मृति मंधाना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह दुनिया की सबसे खतरनाक सलामी बल्लेबाजों में क्यों गिनी जाती हैं। द हंड्रेड 2026 टूर्नामेंट में मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की ओर से खेलते हुए मंधाना ने ऐसी विस्फोटक पारी खेली जिसने न केवल उनकी टीम को रोमांचक जीत दिलाई बल्कि कई बड़े रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज करा दिए। उनकी शानदार बल्लेबाजी ने दर्शकों को आखिरी गेंदों तक रोमांचित रखा और विरोधी टीम के गेंदबाजों की रणनीति पूरी तरह ध्वस्त कर दी।

    सनराइजर्स लीड्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 100 गेंदों में चार विकेट के नुकसान पर 142 रन बनाए। टीम की ओर से फोएबे लिचफील्ड ने 31 रन एनाबेल सदरलैंड ने 35 रन ब्रायोनी स्मिश ने 26 रन और कप्तान डैनी गिब्सन ने नाबाद 18 रन की उपयोगी पारी खेली। लक्ष्य चुनौतीपूर्ण जरूर था लेकिन मंधाना के इरादे उससे भी बड़े थे।

    143 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही। कप्तान मेग लैनिंग 24 रन बनाकर आउट हो गईं और इसके बाद लगातार विकेट गिरते रहे। महज 71 रन तक टीम के पांच बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। ऋचा घोष पेज शॉल्फिल्ड और मैडी विलियर्स जैसी प्रमुख बल्लेबाज भी बड़ी पारी नहीं खेल सकीं। ऐसे मुश्किल समय में स्मृति मंधाना ने एक छोर संभालकर टीम को जीत की राह पर बनाए रखा।

    मंधाना ने शुरुआत से ही संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। उन्होंने केवल 33 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और इसके बाद मैच का पूरा रुख बदल दिया। जब आखिरी 25 गेंदों में टीम को 44 रन की जरूरत थी तब मंधाना ने अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए बड़े शॉट खेलने शुरू किए। भारतीय खिलाड़ी दीप्ति शर्मा की गेंद पर लगाया गया लंबा छक्का मुकाबले का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। इसके बाद उन्हें एक जीवनदान भी मिला जिसका पूरा फायदा उठाते हुए उन्होंने लगातार दो छक्के जड़कर मैच समाप्त कर दिया।

    स्मृति मंधाना ने 50 गेंदों में नाबाद 88 रन बनाए जिसमें सात चौके और चार शानदार छक्के शामिल रहे। उनकी इस पारी की बदौलत मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने चार गेंद शेष रहते चार विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया। यह जीत टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही और मंधाना की पारी पूरे टूर्नामेंट की सबसे यादगार पारियों में शामिल हो गई।

    इस शानदार प्रदर्शन के साथ स्मृति मंधाना ने कई रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए। नाबाद 88 रन द हंड्रेड 2026 के मौजूदा सीजन का अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बन गया। इसके साथ ही यह द हंड्रेड के इतिहास में मंधाना का सर्वश्रेष्ठ स्कोर भी है। इससे पहले उनका सर्वोच्च स्कोर 2021 में सदर्न ब्रेव के लिए बनाया गया 78 रन था। इसके अलावा द हंड्रेड में किसी भारतीय बल्लेबाज का यह दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर भी बन गया। इस सूची में शीर्ष स्थान पर जेमिमा रोड्रिग्स हैं जिन्होंने नाबाद 92 रन बनाए थे।

    स्मृति मंधाना की यह पारी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने यह भी दिखाया कि दबाव की परिस्थितियों में वह अकेले दम पर मैच का परिणाम बदलने की क्षमता रखती हैं। उनकी शानदार फॉर्म भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए भी बेहद सकारात्मक संकेत है क्योंकि आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में उनसे ऐसी ही दमदार पारियों की उम्मीद की जाएगी।

  • दोस्ती निभाने के साथ करें कमाई, दो दोस्तों के लिए ये बिजनेस आइडिया बन सकते हैं शानदार शुरुआत

    दोस्ती निभाने के साथ करें कमाई, दो दोस्तों के लिए ये बिजनेस आइडिया बन सकते हैं शानदार शुरुआत

    नई दिल्ली। इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे 30 जुलाई को मनाया जाएगा। यह दिन सिर्फ दोस्ती का जश्न मनाने का अवसर ही नहीं, बल्कि अपने सबसे भरोसेमंद साथी के साथ नए सपनों को साकार करने की शुरुआत भी हो सकता है। आज के समय में कई ऐसे बिजनेस मॉडल मौजूद हैं जिन्हें दो दोस्त मिलकर कम लागत में शुरू कर सकते हैं। सही योजना, स्पष्ट जिम्मेदारियां और आपसी भरोसे के साथ शुरू किया गया छोटा कारोबार भी समय के साथ अच्छी आय का स्रोत बन सकता है।

    यदि दोनों दोस्तों के पास अलग-अलग कौशल हैं तो फ्रीलांसिंग एजेंसी शुरू करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, एक व्यक्ति कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग या ग्राफिक डिजाइनिंग का काम संभाल सकता है, जबकि दूसरा क्लाइंट्स से बातचीत, मार्केटिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी निभा सकता है। डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण इस क्षेत्र में अच्छी कमाई की संभावना बनी रहती है।

    अगर किसी दोस्त के पास कैमरा, लैपटॉप, ड्रोन, बाइक या अन्य महंगे उपकरण हैं जिनका नियमित उपयोग नहीं हो रहा, तो उन्हें किराये पर देकर भी अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। इस तरह बिना अधिक निवेश किए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है और दोनों साझेदार नियमित कमाई कर सकते हैं।

    खाने-पीने का व्यवसाय भी दो दोस्तों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकता है। कम निवेश के साथ क्लाउड किचन शुरू कर ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा सकती है। स्वादिष्ट भोजन, अच्छी गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी के जरिए इस व्यवसाय को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इस कारोबार को शुरू करने से पहले आवश्यक खाद्य लाइसेंस और अन्य नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट क्रिएशन भी आज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। दो दोस्त मिलकर यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम पेज या पॉडकास्ट शुरू कर सकते हैं। एक व्यक्ति कैमरे के सामने प्रस्तुति दे सकता है, जबकि दूसरा शूटिंग, एडिटिंग और सोशल मीडिया मैनेजमेंट संभाल सकता है। लगातार गुणवत्तापूर्ण कंटेंट तैयार करने पर विज्ञापन, ब्रांड सहयोग और स्पॉन्सरशिप के जरिए अच्छी कमाई की जा सकती है।

    यदि कम पूंजी में ऑफलाइन कारोबार शुरू करना चाहते हैं, तो चाय या स्नैक्स स्टॉल भी अच्छा विकल्प हो सकता है। भीड़भाड़ वाले स्थान, कार्यालय, कॉलेज या बाजार के आसपास शुरू किया गया छोटा फूड बिजनेस पूरे साल ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है। अच्छी गुणवत्ता, साफ-सफाई और बेहतर सेवा इस कारोबार की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    किसी भी साझेदारी वाले व्यवसाय में सफलता के लिए केवल अच्छा आइडिया ही पर्याप्त नहीं होता। शुरुआत से ही जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा, निवेश और मुनाफे का पारदर्शी हिसाब तथा आपसी विश्वास बनाए रखना भी जरूरी है। सही योजना और निरंतर मेहनत के साथ दो दोस्तों की साझेदारी न केवल मजबूत दोस्ती को नई पहचान दे सकती है, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहतर भविष्य की राह खोल सकती है।

  • शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

    शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल


    नई दिल्ली । 30 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की चाल कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित हो सकती है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल देखने को मिला है और अब निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों वैश्विक बाजारों की चाल विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी रहेगी। ऐसे में बाजार खुलने से पहले निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किन वजहों से सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो भारतीय बाजार में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह की आर्थिक या भू राजनीतिक चिंता बढ़ती है तो बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि निवेशकों को हर खबर पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

    इन दिनों कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर होंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजे देने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव बन सकता है। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर निवेशकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने रह सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी करते हैं तो बाजार को मजबूती मिलती है जबकि बिकवाली का असर पूरे बाजार पर दिखाई देता है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती या कमजोरी और रुपये की स्थिति भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करती है।

    कच्चे तेल की कीमतों पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। वहीं तेल की कीमतों में नरमी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को किसी भी तेजी या गिरावट में भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए। मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना बेहतर रणनीति मानी जाती है। जिन लोगों की जोखिम उठाने की क्षमता कम है उन्हें एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए। साथ ही पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जरूरी है ताकि किसी एक सेक्टर में गिरावट आने पर पूरे निवेश पर बड़ा असर न पड़े।

    30 जुलाई का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए कई नए अवसर लेकर आ सकता है लेकिन बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सतर्क रहना भी उतना ही जरूरी होगा। सही जानकारी मजबूत रिसर्च और धैर्य के साथ लिया गया निवेश निर्णय भविष्य में बेहतर रिटर्न देने में मदद कर सकता है।