Author: bharati

  • राहुल–प्रियंका के बीच तकरार के दावे: विदेश दौरे पर गए राहुल गांधी को लेकर केंद्रीय मंत्री बिट्टू का बड़ा हमला

    राहुल–प्रियंका के बीच तकरार के दावे: विदेश दौरे पर गए राहुल गांधी को लेकर केंद्रीय मंत्री बिट्टू का बड़ा हमला


    नई दिल्ली/कांग्रेस पार्टी की आंतरिक राजनीति को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बाद अब केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच कथित विवाद का दावा किया है। बिट्टू का कहना है कि दोनों के बीच गंभीर मतभेद चल रहे हैं और इसी वजह से राहुल गांधी परिवार और पार्टी से नाराज होकर विदेश चले गए हैं। रवनीत सिंह बिट्टू ने यह बयान एनडीटीवी से बातचीत के दौरान दिया। उनसे कांग्रेस द्वारा वीबी जी राम जी बिल को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन पर सवाल किया गया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बिट्टू ने कांग्रेस नेतृत्व और गांधी परिवार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अब न तो विचारधारा बची है और न ही जमीन पर प्रदर्शन करने के लिए लोग।

    केंद्रीय मंत्री ने कहाकांग्रेस का महात्मा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है। इनके लिए गांधी का मतलब सिर्फ प्रियंका गांधीराहुल गांधीइंदिरा गांधीराजीव गांधी और संजय गांधी तक सीमित रह गया है। उन्हें उस गांधी से समस्या है जो देश और समाज के लिए खड़ा था। बिट्टू ने दावा किया कि जनता अब उस नाम वाले गांधी को नकार चुकी हैजबकि महात्मा गांधी का सम्मान देश में हमेशा बना रहेगा।राहुल गांधी के विदेश दौरे को लेकर बिट्टू ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का नाम रोशन करने के लिए विदेश जाते हैंजबकि राहुल गांधी सैर-सपाटे के लिए विदेश रवाना हो जाते हैं। उन्होंने कहा मैंने अभी राहुल गांधी की तस्वीरें जर्मनी से देखीं। सवाल यह है कि राहुल गांधी हैं कहां? देश के अहम मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिएलेकिन वो विदेश में घूमते नजर आते हैं।

    इसके बाद बिट्टू ने राहुल और प्रियंका गांधी के बीच कथित टकराव को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि संसद में हाल के दिनों में दिए गए भाषणों को लेकर दोनों के बीच तुलना होने लगी है। बिट्टू के मुताबिककई लोगों ने प्रियंका गांधी के भाषणों की तुलना राहुल गांधी से कीजिससे राहुल नाराज हो गए। उन्होंने कहादोनों गांधी के बीच बड़ी भारी लड़ाई चल रही है। राहुल गांधी इसी नाराजगी में परिवार और पार्टी से झगड़ा कर विदेश चले गए हैं।केंद्रीय मंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर गंभीर समस्याएं हैं। उनके अनुसारराहुल गांधी का विदेश जाना केवल व्यक्तिगत दौरा नहींबल्कि पार्टी और परिवार के अंदरूनी तनाव का नतीजा है। हालांकिइन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा नेताओं ने कांग्रेस में अंदरूनी कलह का दावा किया हो। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला भी सोशल मीडिया पर कांग्रेस को लेकर ऐसे ही आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने लिखा था किटीम प्रियंका बनाम टीम राहुल अब खुलकर सामने आ गई है और कांग्रेस की आंतरिक कलह सार्वजनिक हो चुकी है।शहजाद पूनावाला ने ओडिशा से कांग्रेस के पूर्व नेता मोहम्मद मुकीम के पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि पार्टी में नेतृत्व संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि मुकीम ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर मल्लिकार्जुन खरगे को हटाने और प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल उठाए थे।

    भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस समय संगठनात्मक और वैचारिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस और आपसी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। दूसरी ओरकांग्रेस की चुप्पी ने इन आरोपों को और हवा दे दी है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इन दावों पर सफाई आ सकती हैलेकिन फिलहाल भाजपा इन बयानों के जरिए विपक्ष को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के रिश्तों को लेकर लगाए गए ये आरोप सियासी बयानबाजी का हिस्सा हैं या वास्तव में पार्टी के भीतर किसी बड़े बदलाव का संकेतयह आने वाला समय ही बताएगा।

  • TMC सांसद की सिगरेट पीते वीडियो ने मचाई हलचल BJP ने ममता बनर्जी से मांगा जवाब

    TMC सांसद की सिगरेट पीते वीडियो ने मचाई हलचल BJP ने ममता बनर्जी से मांगा जवाब


    नई दिल्ली । लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस TMC के सांसद कीर्ति आजाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है जिसमें वह सदन के अंदर ई-सिगरेट पीते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में कीर्ति आजाद कैमरे की ओर कई बार देख रहे हैं और फिर चुपके से अपना हाथ मुंह के पास ले जाते हैं जिससे यह संकेत मिलता है कि वह ई-सिगरेट की कश ले रहे हैं। हालांकि वीडियो में ई-सिगरेट या धुआं स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता।

    भाजपा ने इस वीडियो पर त्वरित प्रतिक्रिया दी है और ममता बनर्जी से सवाल किया है कि उनके सांसद ने सदन के अंदर इस तरह का व्यवहार क्यों किया। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने वीडियो को शेयर करते हुए कहा यह व्यक्ति मानो संसद के अंदर नियमों और कानूनों को नजरअंदाज करने में कोई शर्म महसूस नहीं करता। उन्होंने कहा सदन में इस तरह का व्यवहार बिल्कुल अस्वीकार्य है। ममता बनर्जी को इस पर जवाब देना चाहिए।

    इस वीडियो के वायरल होने के बाद भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखित शिकायत सौंपते हुए इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि कीर्ति आजाद लंबे समय से सदन में ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रहे हैं जो सदन के नियमों के खिलाफ है।

    यह घटना तब सामने आई जब पिछले हफ्ते लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान अनुराग ठाकुर ने एक TMC सांसद द्वारा ई-सिगरेट पीने का आरोप लगाया था। हालांकि उन्होंने उस वक्त सांसद का नाम नहीं लिया था लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया कि वह कीर्ति आजाद की ओर इशारा कर रहे थे। भाजपा ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा है कि संसद जैसे प्रतिष्ठित स्थल पर इस तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि लोकसभा अध्यक्ष इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं और ममता बनर्जी इस पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।

  • बंगाल चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान कहा 'कांग्रेस की हमें नहीं जरूरत इंडिया गठबंधन पर भी दिया बयान'

    बंगाल चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान कहा 'कांग्रेस की हमें नहीं जरूरत इंडिया गठबंधन पर भी दिया बयान'


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस TMC के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए उनकी पार्टी को कांग्रेस की जरूरत नहीं है। हालांकि अभिषेक ने यह भी साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस अब भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है।

    अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कहा कांग्रेस के पास बंगाल में ऐसा कुछ नहीं है जिसकी हमें जरूरत हो या जो वह हमें दे सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल की जबकि तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें गठबंधन का प्रस्ताव दिया था जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया। अभिषेक ने कहा इसका परिणाम सबके सामने है उनकी सीट अब घटकर एक रह गई है।

    अभिषेक ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कोई भी निर्णय ममता बनर्जी ही लेंगी। उन्होंने कहा जब पार्टी कोई फैसला लेगी तो आपको पता चल जाएगा। फिलहाल कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं है।
    इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर भी हमला किया और मनरेगा का नाम बदलने के मुद्दे पर कहा कि इसका नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने सरकार से पश्चिम बंगाल को बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की। केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल का बकाया भुगतान करना चाहिए। मनरेगा का नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा उन्होंने कहा।

    अभिषेक ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बंगाल के खिलाफ काम कर रही है और गांधीजी के नाम को हटाना बंगाल विरोधी कदम है। उन्होंने कहा गांधीजी को ‘महात्मा’ की उपाधि रवींद्रनाथ टैगोर ने दी थी इसलिए बंगाल से गांधीजी का नाम हटाना गलत है।इस बयान ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को निशाने पर लिया है और यह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक रणनीतियों का इशारा है। अब यह देखना होगा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस क्या कदम उठाती है और कांग्रेस के साथ गठबंधन का कोई नया मोड़ आता है या नहीं।

  • IFFK विवाद पर शशि थरूर का तीखा हमला: फिल्मों पर रोक से भारत की वैश्विक छवि को खतरा

    IFFK विवाद पर शशि थरूर का तीखा हमला: फिल्मों पर रोक से भारत की वैश्विक छवि को खतरा

    तिरुवनंतपुरम।केरल में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल IFFK से जुड़ा विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा कई फिल्मों को स्क्रीनिंग की अनुमति न देने के फैसले पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बताया बल्कि यह भी कहा कि ऐसे कदम भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    मीडिया से बातचीत के दौरान शशि थरूर ने कहा कि भारत में सिनेमा और रचनात्मक स्वतंत्रता की एक समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि देश में गोवा और केरल जैसे राज्यों में वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म फेस्टिवल आयोजित होते रहे हैं जिन्हें दुनियाभर में सम्मान की नजर से देखा जाता है। ऐसे में फिल्मों की स्क्रीनिंग पर रोक लगाना न केवल कलाकारों के साथ अन्याय है बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान पर भी सवाल खड़े करता है।थरूर ने कहा यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। हमारे देश में सिनेमाई संस्कृति का हमेशा सम्मान किया गया है। लेकिन आज स्थिति यह है कि फिल्मों की एक सूची को सीमित कर दिया गया है और कुछ फिल्मों को बिना ठोस वजह के रोका जा रहा है। किसी भी फिल्म को इस तरह से नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले जिन फिल्मों को बैन किया गया या जिन्हें मंजूरी नहीं दी गई उनके पीछे दिए गए कारण अक्सर हास्यास्पद रहे हैं।

    कांग्रेस सांसद ने नौकरशाही की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को ज्यादा समझदारी और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए क्योंकि ऐसे फैसलों का असर केवल एक फेस्टिवल तक सीमित नहीं रहता। थरूर के मुताबिक जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की रचनात्मक स्वतंत्रता पर सवाल उठते हैं तो इससे देश की छवि को गंभीर नुकसान होता है।इससे पहले सोशल मीडिया पर भी शशि थरूर ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि तिरुवनंतपुरम में आयोजित केरल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली 19 फिल्मों को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी न दिए जाने से एक अजीब और अनावश्यक विवाद खड़ा हो गया है। उनका कहना था कि यह फैसला कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भावना के खिलाफ है।

    केवल कांग्रेस ही नहीं बल्कि केरल सरकार ने भी केंद्र सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने साफ शब्दों में कहा कि IFFK में तय फिल्मों की स्क्रीनिंग की अनुमति न देना अस्वीकार्य है। उन्होंने इसे रचनात्मक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया और कहा कि इस तरह के कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि फिल्म फेस्टिवल में लगाई गई सेंसरशिप मौजूदा केंद्र सरकार के तानाशाही रवैये को दर्शाती है। उनके मुताबिक यह सरकार देश में विरोध की आवाजों और अलग-अलग रचनात्मक अभिव्यक्तियों को दबाने की कोशिश कर रही है। पिनाराई विजयन ने यह भी स्पष्ट किया कि जागरूक केरल ऐसे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

    राज्य सरकार ने यह ऐलान किया है कि जिन फिल्मों को केंद्र सरकार ने अनुमति नहीं दी थी उन्हें फिर भी फेस्टिवल में दिखाया जाएगा। केरल सरकार का मानना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि यह समाज के सवालों विचारों और सच्चाइयों को सामने लाने का एक सशक्त जरिया है। IFFK से जुड़ा यह विवाद अब केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केंद्र और राज्य के रिश्तों और भारत की सांस्कृतिक पहचान जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ गया है। शशि थरूर और केरल सरकार के बयानों के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में यह मामला और गहराने वाला है।

  • कांग्रेस ने BJP पर साधा निशाना पप्पू यादव भी उखड़े मनरेगा के विरोध में सियासी घमासान

    कांग्रेस ने BJP पर साधा निशाना पप्पू यादव भी उखड़े मनरेगा के विरोध में सियासी घमासान


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार द्वारा 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किए गए VB-G RAM G विधेयक ने भारतीय राजनीति में एक नई सियासी हलचल मचा दी है। यह विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा की जगह लेगा जिसे विपक्षी दलों ने गरीब और किसान विरोधी करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने पहले मनरेगा को कमजोर किया और अब इसे खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया है जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और समानता की गारंटी देने वाले कानून के खिलाफ है।
    कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS का एजेंडा बताया। कांग्रेस नेता बेन्नी बेहनान ने कहा गांधीजी ने गरीबों के लिए जो विचार रखे थे वह मनरेगा के रूप में साकार हुए थे लेकिन अब सरकार इसे खत्म कर रही है। यह गरीबों के हितों के खिलाफ है और लोग इसे कभी माफ नहीं करेंगे।

    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सेल्वाराज वी ने भी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा गरीबों के पास न खाने के लिए है न पहनने के लिए। काम न मिलने पर वे क्या खाएंगे? बच्चों के लिए दूध नहीं है। यह विधेयक गरीबों के खिलाफ है और हम इसका विरोध करते हैं। वहीं शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने भी सरकार के फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा मनरेगा को खत्म करने के बाद सरकार गरीबों को चैरिटी की ओर धकेल रही है। राज्य सरकारों को कम धन देने से पंजाब जैसे राज्यों में गरीबों को काम कैसे मिलेगा?

    बीजेपी के राजकुमार चाहर ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा यह विधेयक गरीबों के लिए फायदेमंद होगा। अब उन्हें 100 की बजाय 125 दिनों का काम मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी का सपना एक विकसित भारत इसे पूरा करने में मदद करेगा। कुल मिलाकर इस विधेयक को लेकर सियासी घमासान जारी है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह गरीबों और किसानों के खिलाफ कदम है जबकि भाजपा इसे विकास और गरीबों की भलाई का कदम बता रही है।

  • सीएम नीतीश को पाकिस्तानी डॉन की धमकी, हिजाब विवाद ने पकड़ा सियासी तूल; महिला चिकित्सक के नौकरी छोड़ने की चर्चा

    सीएम नीतीश को पाकिस्तानी डॉन की धमकी, हिजाब विवाद ने पकड़ा सियासी तूल; महिला चिकित्सक के नौकरी छोड़ने की चर्चा


    नई दिल्ली।
    बिहार की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक आस्था महिला सम्मान और सुरक्षा का मुद्दा केंद्र में आ गया है। आयुष चिकित्सकों के नियुक्तिपत्र वितरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला चिकित्सक से हिजाब हटाने को कहे जाने की घटना अब राज्य से बाहर तक चर्चा का विषय बन गई है। इस मामले ने इतना तूल पकड़ लिया है कि सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को धमकी देने का वीडियो सामने आया है जिसकी जांच बिहार पुलिस ने शुरू कर दी हैबताया जा रहा है कि पाकिस्तान के कुख्यात डॉन शहजाद भट्टी की ओर से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खुलेआम धमकी दी गई है। वीडियो में कहा गया है कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से माफी मांगें अन्यथा भविष्य में होने वाली घटनाओं की शिकायत न करें। इस धमकी को गंभीरता से लेते हुए बिहार पुलिस के साइबर थाना को जांच सौंपी गई है।

    डीजीपी विनय कुमार ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वीडियो की सत्यता और उसके स्रोत की जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं आर्थिक अपराध इकाईईओयू के अपर पुलिस महानिदेशक नैयर हसनैन खान ने कहा कि ईओयू का साइबर प्रभाग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर एक और दावा तेजी से वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि जिस महिला आयुष चिकित्सक को नियुक्तिपत्र देने के दौरान मुख्यमंत्री ने हिजाब हटाने को कहा था उसने नौकरी ज्वॉइन न करने का फैसला किया है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। न तो संबंधित महिला चिकित्सक की ओर से कोई सार्वजनिक बयान आया है और न ही विभाग की तरफ से इस पर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई है।

    विभागीय अधिकारी इस मुद्दे पर फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नियुक्तिपत्र मिलने के बाद ज्वॉइनिंग के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। गौरतलब है कि 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद भवन में आयुष चिकित्सकों का नियुक्तिपत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में कुल 1283 नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्तिपत्र सौंपे गए थे जिनमें से 10 चिकित्सकों को प्रतीकात्मक रूप से मुख्यमंत्री ने स्वयं नियुक्तिपत्र दिया था।हिजाब विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दलराजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस घटना को धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया है। उन्होंने कहा कि नियुक्तिपत्र वितरण जैसे गरिमामय कार्यक्रम में एक मुस्लिम महिला से हिजाब हटाने को कहना न केवल महिला सम्मान के खिलाफ है बल्कि यह अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति सरकार की सोच को भी दर्शाता है। एजाज अहमद ने मुख्यमंत्री और सरकार से इस घटना के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

    वहीं सत्तारूढ़ जनता दलयूनाइटेड ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जदयू के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेटियों के सशक्तीकरण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने हर धर्म जाति और वर्ग की महिलाओं की सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक उन्नति के लिए लगातार काम किया है। नीरज कुमार ने राजद पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को पहले अपने अतीत पर नजर डालनी चाहिए। फिलहाल हिजाब विवाद महिला चिकित्सक के नौकरी छोड़ने की चर्चा और पाकिस्तान से आई धमकी-इन तीनों मुद्दों ने बिहार की राजनीति को गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगी।

  • नाथन लियोन बने ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले दूसरे बॉलर, ग्लेन मैक्ग्रा का रिकॉर्ड तोड़ा

    नाथन लियोन बने ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले दूसरे बॉलर, ग्लेन मैक्ग्रा का रिकॉर्ड तोड़ा


    एडिलेड।
    ऑस्ट्रेलिया के ऑफ स्पिनर (Australian off-spinner) नाथन लियोन (Nathan Lyon) ने जैसे ही एडिलेड टेस्ट मैच (Adelaide Test match) में दूसरा विकेट निकाला, वैसे ही उन्होंने महान गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा (Great bowler Glenn McGrath) का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नाथन लियोन अब टेस्ट क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के लिए दूसरे सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उनसे आगे सिर्फ शेन वॉर्न हैं, जिन्होंने 708 विकेट टेस्ट क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के लिए निकाले थे। खास बात ये थी कि इस दौरान ग्लेन मैक्ग्रा भी स्टेडियम में मौजूद थे, जो कमेंट्री कर रहे थे। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा का रिऐक्शन देखने वाला था।

    नाथन लियोन ने जैसे ही बेन डकेट को क्लीन बोल्ड किया, वैसे ही टेस्ट क्रिकेट में उनके विकेटों की संख्या 564 हो गई और वे ऑस्ट्रेलिया के लिए दूसरे सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट निकालने वाले गेंदबाज बन गए। इस मैच से पहले तक ग्लेन मैक्ग्रा के पास ये रिकॉर्ड था, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के लिए 563 विकेट निकाले थे। नाथन लियोन ने इंग्लैंड के खिलाफ जारी पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के तीसरे मुकाबले में पहले तो ओली पोप को चलता किया और फिर डकेट के स्टंप्स बिखेरकर इतिहास रच दिया। इस दौरान ग्लेन मैक्ग्रा ने कुर्सी उठाई और अपने पास के कमेंट्री बॉक्स में मारने की कोशिश की। हालांकि, ये सब मजाकिया अंदाज में उन्होंने अपने एक साथी कमेंटेटर के लिए किया। वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल है।

    महान स्पिनर नाथन लियोन अब टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में छठे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उनसे आगे इस लिस्ट में श्रीलंका के महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन, ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉर्न, इंग्लैंड के जेम्स एंडरसन, भारत के अनिल कुंबले और इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड शामिल हैं। मुरलीधरन ने 800, वॉर्न ने 708, एंडरसन ने 704, कुंबले ने 619 और ब्रॉड ने 604 विकेट टेस्ट क्रिकेट में चटकाए हुए हैं। नाथन लियोन टॉप 5 में शामिल होने से अभी 40 विकेट दूर हैं। हाल-फिलहाल में तो ऐसा होने वाला नहीं है, लेकिन कुछ और सीरीज वे खेलते हैं तो जरूर उस उपलब्धि तक पहुंच सकते हैं। कुछ नहीं तो स्टुअर्ट ब्रॉड और अनिल कुंबले के रिकॉर्ड को जरूर धराशायी कर सकते हैं।

  • बूंद-बूंद पानी को तरसेगा पाकिस्तान…! अफगानिस्तान से पंगा लेना पड़ा भारी, $4.5 अरब का नुकसान

    बूंद-बूंद पानी को तरसेगा पाकिस्तान…! अफगानिस्तान से पंगा लेना पड़ा भारी, $4.5 अरब का नुकसान


    इस्लामाबाद।
    पिछले दिनों अफगानिस्तान और पाकिस्तान (Pakistan-Afghanistan) के बीच तनावपूर्ण माहौल हो गया था। दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति भी आ गई, जहां पाकिस्तान ने तालिबान के शासन वाले अफगानिस्तान (Afghanistan) में कई हवाई हमले भी किए। इसके बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से होने वाले सीमा व्यापार को भी बंद कर दिया। पाकिस्तान को लगा था कि इस कदम से तालिबान को आर्थिक झटका लगेगा, लेकिन अब उलटा हो गया। व्यापार को बंद करने से पाकिस्तान (Pakistan) को साढ़े चार अरब डॉलर का नुकसान (Loss of $4.5 billion) हुआ है। इससे शहबाज शरीफ के देश की कमर टूट गई है।

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान जॉइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PAJCCI) का कहना है, ”बॉर्डर बंद होने से अब तक पाकिस्तान के व्यापार को $4.5 बिलियन से ज़्यादा का नुकसान हुआ है।” पाकिस्तानी मीडिया ने चैंबर के हवाले से बताया कि खेती और कंस्ट्रक्शन के पीक टाइम में रोजाना एक्सपोर्ट $50 मिलियन से $60 मिलियन के बीच पहुंच गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो दिसंबर और मार्च के बीच संतरे और आलू जैसे मौसमी एक्सपोर्ट को लगभग $200 मिलियन का और नुकसान हो सकता है।

    बता दें कि पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) के लड़ाके उसके देश में आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं। टीटीपी के कथित हमलों में पाकिस्तानी सेना के कई जवानों की मौत हो चुकी है, जबकि आम नागरिकों की भी जान गई है। इसी के चलते पाकिस्तान ने लगभग दो महीने पहले अफगानिस्तान के साथ सभी व्यापार मार्ग बंद कर दिए थे, जिसके जवाब में अफगान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी।

    अफगानिस्तान ने भी की थी जवाबी कार्रवाई
    इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान (IEA) ने भी पाकिस्तान के साथ व्यापार निलंबित कर दिया और उद्योगपतियों और व्यापारियों से वैकल्पिक व्यापार मार्गों का उपयोग करने का आग्रह किया। अफगान अधिकारियों का कहना है कि व्यापार मार्गों को बार-बार बंद करने और वाणिज्यिक और मानवीय मामलों के राजनीतिकरण के कारण IEA के पास यह कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।


    पाक को उलटा पड़ा अपना कदम

    पाकिस्तान के अखबार ने PAJCCI का हवाला देते हुए बताया कि इस बंद होने की वजह से महत्वपूर्ण व्यापार गलियारे को लगभग खत्म कर दिया, जिसकी कीमत सालाना अरबों डॉलर थी। बंदी से पहले, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग $2-3 बिलियन प्रति वर्ष था, जिसमें पाकिस्तान उच्च मूल्य वाले सामान निर्यात करता था, जबकि अफगानिस्तान आवश्यक वस्तुओं के लिए पाकिस्तान पर निर्भर था और बदले में कृषि उत्पाद निर्यात करता था। पाकिस्तान को अब अपना ही कदम उलटा पड़ गया है। एक तरफ भारत उसे सालों से आर्थिक झटका देता रहा है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान से भी उसे अरबों का नुकसान होने लगा।

    भारत के बाद अफगानिस्तान का बड़ा कदम

    भारत के बाद अब अफगानिस्तान पाकिस्तान का पानी रोकने वाला है। तालिबान सरकार यह योजना बना रही है कि कुनार नदी का बहाव अफगानिस्तान नांगरहार क्षेत्र की तरफ मोड़ दिया जाए। अगर ऐसा होता है कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पानी की भारी किल्लत हो जाएगी। बता दें कि भारत द्वारा सिंधु नदी समझौता रद्द करने के बाद पाकिस्तान पहले ही पानी के लिए मुहाल है। ऐसे में अगर अफगानिस्तान ने भी पानी रोक दिया तो पाकिस्तान के लिए मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ जाएंगी। वहीं, पहले ही पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर जारी तनाव के बीच एक नया मोर्चा भी खुलने का अंदेशा है।

    जानकारी के मुताबिक इसको लेकर बैठकें भी हो चुकी हैं और फैसले पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है। अफगानिस्तान की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री के आर्थिक आयोग की तकनीकी कमेटी की बैठक में एक प्रस्ताव पास हुआ है। यह प्रस्ताव कुनार नदी के पानी को नांगरहार के दारुंता डैम में ट्रांसफर करने को लेकर है। अब इसे अंतिम फैसले के लिए आर्थिक आयोग के पास भेजा गया है। एक बार यह प्रस्ताव लागू हो गया तो अफगानिस्तान के नांगरहार इलाके में बड़ी संख्या में खेती वाली जमीनों के लिए पानी की समस्या हल हो जाएगा। लेकिन पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में पानी की बेहद कमी हो जाएगी।


    पाकिस्तान कैसे होगा प्रभावित

    कुनार नदी करीब 500 किमी लंबी है। यह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चित्रल जिला स्थित हिंदुकुश पहाड़ी से निकलती है। इसके बाद यह दक्षिणी अफगानिस्तान में कुनार और नांगरहार प्रांतों में बहती है। इसके बाद यह काबुल नदी में जाकर मिल जाती है। इन दोनों नदियों से पेच नदी भी जुड़ती और यह फिर से पूरब की तरफ मुड़ती हुई पाकिस्तान पहुंच जाती है। यहां पर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित अटॉक सिटी में सिंधु नदी से मिलती है।

    इस नदी का पाकिस्तान में बहाव सबसे ज्यादा है। सिंधु नदी की तरह यह वहां पर सिंचाई, पीने के पानी और हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर के इस्तेमाल में आती है। खासतौर पर यह खैबर पख्तूनख्वा इलाके लिए बेहद अहम, जहां अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच भिड़ंत होती है। अब अगर अफगानिस्तान उस जगह पर बांध बना देता है, जहां से कुनार पाकिस्तान में एंट्री करती है तो वहां पर हालात खराब हो जाएंगे। इसके चलते पाकिस्तान में सिंचाई, पीने के पानी और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के लिए पानी मिलना मुहाल हो जाएगा। बता दें कि भारत द्वारा सिंधु नदी जल समझौता रद्द होने के चलते पाकिस्तान के लोग पहले ही परेशान हैं।


    यह भी परेशानी का सबब

    सबसे खास बात यह है कि अफगानिस्तान को रोकने के लिए पाकिस्तान कोई दबाव भी नहीं बना सकता। वजह, भारत के साथ तो पाकिस्तान का सिंधु नदी जल समझौता था, लेकिन अफगानिस्तान के साथ उसका कोई ऐसा समझौता नहीं है।

  • नेहरू के लेटर्स निजी संपत्ति नहीं…सरकार ने सोनिया गांधी से कहा- इन्हें वापस लौटाएं

    नेहरू के लेटर्स निजी संपत्ति नहीं…सरकार ने सोनिया गांधी से कहा- इन्हें वापस लौटाएं


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने जवाहरलाल नेहरू से संबंधित दस्तावेज (Documents related Jawaharlal Nehru) के 51 बक्से अपने पास रखने के लिए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी (Congress leader Sonia Gandhi) की कड़ी आलोचना की। साथ ही मांग उठाई कि इन्हें प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) को वापस किया जाए। सरकार ने स्पष्ट कहा है कि 2008 में सोनिया गांधी ने इन लेटर्स को लिया था। अब इसे लौटा दें, यह उनकी निजी संपत्ति नहीं है। इससे विद्वानों और संसद की नेहरू काल के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अभिलेखों तक पहुंच संभव होगी। सरकार ने जोर देकर कहाकि ये दस्तावेज ‘सार्वजनिक अभिलेखागार में होने चाहिए, किसी बंद कमरे में नहीं।’ केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहाकि चूंकि इन कागजातों का स्थान ज्ञात है, इसलिए वे लापता नहीं हैं।


    मंत्री ने संसद में क्या कहा

    कांग्रेस ने संस्कृति मंत्री शेखावत के लोकसभा में लिखित उत्तर का हवाला देते हुए मंगलवार को कहा था कि प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) से पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित कोई दस्तावेज गायब नहीं होने की सच्चाई सामने आ गई है तो क्या अब इस मामले में माफी मांगी जाएगी? दरअसल, सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता संबित पात्रा ने लोकसभा में लिखित प्रश्न किया था कि क्या 2025 में पीएमएमएल के वार्षिक निरीक्षण के दौरान भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित कतिपय दस्तावेज संग्रहालय से गायब पाए गए हैं?इसके उत्तर में संस्कृति मंत्री शेखावत ने कहाकि 2025 में पीएमएमएल के वार्षिक निरीक्षण के दौरान संग्रहालय से भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित कोई दस्तावेज गायब नहीं पाया गया है।


    विवादास्पद मुद्दा रहा है नेहरू दस्तावेज

    गौरतलब है कि नेहरू दस्तावेज सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। पीएमएमएल के भीतर एक वर्ग इन दस्तावेजों को वापस लेने के लिए दबाव बना रहा है, जिन्हें सोनिया गांधी ने कई साल पहले ले लिया था। शेखावत ने एक्स पर पोस्ट में कहाकि नेहरू दस्तावेज पीएमएमएल से लापता नहीं हैं। लापता होने का अर्थ मौजूदगी का स्थान अज्ञात होना है, इस विषय में तो ज्ञात है कि दस्तावेज कहां और किसके अधिकार में हैं। उन्होंने कहाकि जवाहरलाल नेहरू जी से जुड़े कागजात वाले 51 बक्सों को गांधी परिवार ने 2008 में पीएमएमएल (तत्कालीन एनएमएमएल) से ले लिया था। इनका स्थान ज्ञात है, इसलिए, वे लापता नहीं हैं। ये दस्तावेज 2008 में विधिवत प्रक्रिया के तहत परिवार को सौंपे गए थे और पीएमएमएल में इनके रिकॉर्ड मौजूद हैं।


    ताकि लोग समझ पाएं वो दौर

    केंद्रीय मंत्री ने कहाकि विद्वानों, शोधकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को यह अधिकार है कि वे मूल दस्तावेजों तक पहुंच पाएं, ताकि जवाहरलाल नेहरू के जीवन और उनके दौर को समझने के लिए सत्य पर आधारित संतुलित दृष्टिकोण विकसित हो सके। उन्होंने कहाकि एक तरफ हमें उस दौर की गलतियों पर चर्चा न करने को कहा जाता है, दूसरी ओर उनसे जुड़े मूल दस्तावेज सार्वजनिक पहुंच से बाहर रखे जा रहे हैं, जबकि उनके माध्यम से तथ्यपरक चर्चा हो सकती है। शेखावत ने कहाकि यह कोई साधारण मामला नहीं है। इतिहास को चुनकर नहीं लिखा जा सकता। लोकतंत्र की बुनियाद पारदर्शिता है और अभिलेख उपलब्ध कराना नैतिक दायित्व, जिसे निभाना सोनिया गांधी और उनके ‘परिवार’ की भी जिम्मेदारी है।


    कई बार मांगने पर भी वापस नहीं

    केंद्रीय मंत्री ने कहाकि मूल प्रश्न यह है कि क्यों इन दस्तावेजों को अब तक वापस नहीं किया गया, जबकि पीएमएमएल की ओर से इस बारे में कई बार पत्र भेजे गए, विशेषकर जनवरी और जुलाई 2025 में। शेखावत ने कहा, ‘मैं आदरपूर्वक सोनिया गांधी से पूछना चाहता हूं कि क्या छिपाया जा रहा है? वैसे भी दस्तावेज वापस न करने के लिए दिए जा रहे तर्क असंगत और अस्वीकार्य हैं।’ उन्होंने कहाकि सवाल यह भी है कि इतने महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज सार्वजनिक अभिलेखागार के बाहर क्यों हैं? ये निजी पारिवारिक दस्तावेज तो बिल्कुल भी नहीं हैं, ये भारत के प्रथम प्रधानमंत्री से जुड़े महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभिलेख हैं। ऐसे दस्तावेज सार्वजनिक अभिलेखागार में होने चाहिए, किसी बंद कमरे में नहीं।

  • जोफ्रा आर्चर का पांच विकेट हॉल बेकार ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे एशेज टेस्ट में कसा शिकंजा

    जोफ्रा आर्चर का पांच विकेट हॉल बेकार ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे एशेज टेस्ट में कसा शिकंजा


    नई दिल्ली । तीसरे एशेज टेस्ट के दूसरे दिन इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच विकेट लिए। हालांकि इस गेंदबाजी प्रदर्शन के बावजूद ऑस्ट्रेलिया ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत रखी और इंग्लैंड को बैकफुट पर धकेल दिया।

    एडिलेड में खेले जा रहे इस टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। हालांकि ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही लेकिन एलेक्स कैरी 106 और उस्मान ख्वाजा 82 की शानदार पारियों ने ऑस्ट्रेलिया को 371 रनों के स्कोर तक पहुंचाया। इस बीच मिचेल स्टार्क 54 और जोश इंग्लिस 32 ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जिससे इंग्लैंड की टीम को कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा।

    इंग्लैंड के लिए जोफ्रा आर्चर ने मैच के दूसरे दिन जबरदस्त गेंदबाजी की और पांच विकेट हॉल लिया लेकिन इसके बावजूद इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया के विशाल स्कोर का पीछा करने में मुश्किलें आ रही हैं। इसके अलावा ब्रायडन कार्स और विल जैक्स ने भी 2-2 विकेट हासिल किए लेकिन इंग्लैंड की टीम ने जल्द ही अपने सभी विकेट गंवा दिए और 371 रनों के स्कोर पर आउट हो गई।

    इंग्लैंड के लिए अब संघर्ष और भी बढ़ गया क्योंकि पहली पारी में बल्लेबाजी करते हुए उनकी शुरुआत खराब रही। 37 रन पर पहला विकेट गिरने के बाद इंग्लैंड की स्थिति और भी नाजुक हो गई। इंग्लैंड ने अगले 5 रनों में 2 और विकेट खो दिए जिससे उनकी पारी पर संकट मंडराता दिख रहा है।

    इस सीरीज में इंग्लैंड पहले ही दो मैच हार चुका है और यदि वे इस टेस्ट मैच में भी हार जाते हैं तो वे एशेज ट्रॉफी हारने के कगार पर पहुंच जाएंगे। इस स्थिति में इंग्लैंड के लिए सीरीज को बचाने के लिए इस मैच में दमदार वापसी करना आवश्यक होगा। हालांकि दो मुकाबले अभी बाकी हैं लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पास 3-0 की बढ़त के साथ एशेज ट्रॉफी की ओर कदम बढ़ाए हुए हैं।