Author: bharati

  • वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय ऑटो सेक्टर चमका, मई में 4.4 लाख वाहन बिके..

    वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय ऑटो सेक्टर चमका, मई में 4.4 लाख वाहन बिके..

    नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था की गति को नई मजबूती प्रदान की है। मई 2026 में यात्री वाहन बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होने के बाद केंद्र सरकार ने इसे देश की बढ़ती आर्थिक क्षमता, मजबूत उपभोक्ता विश्वास और विनिर्माण क्षेत्र की सफलता का संकेत बताया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की विकास यात्रा निरंतर गति पकड़ रही है और विभिन्न क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।

    मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में बताया कि मई 2026 के दौरान देश में लगभग 4.4 लाख यात्री वाहनों की बिक्री हुई। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 23 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार संबंधी चुनौतियों का माहौल बना हुआ है।

    पीयूष गोयल के अनुसार इस उपलब्धि में देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विशेष रूप से मारुति सुजुकी इंडिया, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने बाजार में मजबूत प्रदर्शन करते हुए बिक्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। इन कंपनियों की बेहतर बिक्री ने पूरे ऑटोमोबाइल उद्योग को सकारात्मक दिशा दी है।

    मंत्री ने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं का घरेलू स्तर पर निर्मित वाहनों पर बढ़ता भरोसा देश के विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का सकारात्मक परिणाम बताते हुए कहा कि इस पहल ने देश में औद्योगिक उत्पादन, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी अधिक सक्षम बनाया है।

    उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र में दिखाई दे रही यह प्रगति केवल बिक्री के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक संरचना में हो रहे व्यापक बदलावों की भी झलक प्रस्तुत करती है। तकनीकी नवाचार, उत्पादन क्षमता में विस्तार और उपभोक्ताओं की बढ़ती क्रय शक्ति जैसे कारकों ने इस क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान की है।

    इस बीच देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने भी मई महीने में नया रिकॉर्ड कायम किया है। कंपनी ने घरेलू बाजार में डीलरों को 1,90,337 यात्री वाहन भेजे, जो उसके इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिक्री मानी जा रही है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही कंपनी ने अप्रैल में स्थापित अपने पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती वाहन बिक्री से जुड़े आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग की मजबूती का संकेत देते हैं। यदि आने वाले महीनों में यह रुझान जारी रहता है तो ऑटोमोबाइल क्षेत्र देश के आर्थिक विकास में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मजबूत मांग, बढ़ते निवेश और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के बीच भारत का ऑटो उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

  • रेपो रेट यथावत रखकर आरबीआई ने दिया स्थिरता का संदेश, विशेषज्ञ बोले- दीर्घकालिक विकास को मिलेगा मजबूत आधार

    रेपो रेट यथावत रखकर आरबीआई ने दिया स्थिरता का संदेश, विशेषज्ञ बोले- दीर्घकालिक विकास को मिलेगा मजबूत आधार

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत रेपो दर को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के निर्णय को अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत ने संतुलित तथा दूरदर्शी कदम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू चुनौतियों के बीच लिया गया यह फैसला वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के साथ-साथ दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करेगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था कई प्रकार की चुनौतियों से गुजर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बढ़ते दबाव का असर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में ब्याज दरों को स्थिर रखना आरबीआई की सतर्क और संतुलित नीति को दर्शाता है।

    पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अधिकारियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक ने विकास और महंगाई के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर जोखिम बढ़ने के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है और मौजूदा नीति से मध्यम तथा दीर्घकालिक विकास को समर्थन मिलेगा।

    विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई अभी आरबीआई के निर्धारित लक्ष्य के आसपास बनी हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति संबंधी व्यवधान और मानसून की स्थिति जैसे कारक आगे चलकर आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद मजबूत घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने का काम कर रही है।

    बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले महीनों में महंगाई अपेक्षा से अधिक बढ़ती है तो वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। हालांकि फिलहाल आरबीआई ने विकास की गति को बनाए रखने और बाजार को स्थिर संदेश देने को प्राथमिकता दी है। इससे उद्योगों और निवेशकों को नीति संबंधी स्पष्टता मिलेगी।

    आरबीआई द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए किए गए उपायों को भी सकारात्मक कदम माना जा रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा जमा से जुड़े फैसलों से बाजार में तरलता बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से भारतीय वित्तीय बाजारों की स्थिति और मजबूत हो सकती है तथा विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है।

    इंडियन बैंक के प्रबंधन का कहना है कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। ऐसे में ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय यह संकेत देता है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक गतिविधियों को गति देने और विकास को समर्थन देने के पक्ष में है। इससे खुदरा, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्रों में मांग को बल मिलने की संभावना है।

    आवास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि स्थिर ब्याज दरों का माहौल घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत लेकर आएगा। इससे होम लोन लेने वाले ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा और आवास बाजार में मांग को मजबूती मिलेगी। साथ ही ऋण वितरण में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

    आर्थिक जानकारों के अनुसार आरबीआई का यह निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती पर भरोसे को दर्शाता है। वर्तमान परिस्थितियों में स्थिर ब्याज दरें निवेश, उपभोग और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने का काम करेंगी। आने वाले महीनों में महंगाई, मानसून और वैश्विक बाजारों की दिशा पर नजर रहेगी, लेकिन फिलहाल केंद्रीय बैंक का यह कदम विकास और स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

  • मैनपुरी में बड़ा राजनीतिक-सांस्कृतिक दृश्य: डिंपल यादव ने शंकराचार्य के सामने टेका माथा, मांगी माफी

    मैनपुरी में बड़ा राजनीतिक-सांस्कृतिक दृश्य: डिंपल यादव ने शंकराचार्य के सामने टेका माथा, मांगी माफी


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही हलकों में चर्चा तेज कर दी। बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी गौ रक्षा यात्रा के तहत जिले में पहुंचे थे। इसी दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव उनसे मिलने पहुंचीं और उनके चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    कार्यक्रम के दौरान डिंपल यादव ने शंकराचार्य को शॉल भेंट की और जमीन पर बैठकर उनसे बातचीत की। इस मुलाकात में उन्होंने सबसे पहले कन्नौज की उस घटना का जिक्र किया, जिसमें शंकराचार्य को कथित तौर पर रात सड़क पर गुजारनी पड़ी थी। डिंपल यादव ने इस घटना को लेकर खेद जताते हुए माफी भी मांगी और कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा।

    डिंपल यादव ने शंकराचार्य के गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने के अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मुद्दे पर उनके साथ हैं और आगे भी सहयोग करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से शंकराचार्य का अपमान हुआ है, वह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। अपने बयान में डिंपल यादव ने कहा कि “प्रकृति ऐसे अपमान का जवाब जरूर देती है।”

    मुलाकात के दौरान शंकराचार्य ने भी अपनी यात्रा और गौ रक्षा आंदोलन की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का है और जब तक इसे संवैधानिक मान्यता नहीं मिलती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान कई स्थानों पर प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका अभियान नहीं रुकेगा।

    करीब एक घंटे चली इस मुलाकात के बाद शंकराचार्य किशनी के लिए रवाना हो गए। इससे पहले वे सपा नेता और पूर्व विधायक राजकुमार यादव के मैरिज हॉल में ठहरे हुए थे। बातचीत के दौरान डिंपल यादव ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव को इस पूरे घटनाक्रम का दुख है और यदि उन्हें जानकारी होती तो बेहतर व्यवस्थाएं की जातीं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर इसे धार्मिक संत के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर भी समझा जा रहा है।

    कुछ महीने पहले ही लखनऊ में अखिलेश यादव ने भी शंकराचार्य से मुलाकात की थी, जहां वह उनके सामने जमीन पर बैठे नजर आए थे। उसी मुलाकात के बाद से दोनों के बीच संवाद और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा लगातार सुर्खियों में बनी हुई है।

    मैनपुरी की यह मुलाकात अब सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखी जा रही है, जिस पर आगे भी चर्चाएं तेज रहने की संभावना है।

  • यूपी में मौसम का अलर्ट: 38 शहरों में आंधी-तूफान की चेतावनी, 70 जिलों में बारिश की संभावना

    यूपी में मौसम का अलर्ट: 38 शहरों में आंधी-तूफान की चेतावनी, 70 जिलों में बारिश की संभावना


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। Uttar Pradesh के कई हिस्सों में तेज आंधी-तूफान और बारिश को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार 38 शहरों में तेज हवाओं के साथ मौसम बिगड़ने की आशंका है, जबकि लगभग 70 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है।

    लखनऊ सहित कई प्रमुख जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है। हालांकि तेज हवाओं और बदलते मौसम के कारण कुछ इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव प्री-मानसून गतिविधियों का हिस्सा है, जिसमें गर्म हवाओं और नमी के मिलने से बादल तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। इसी कारण कुछ स्थानों पर तेज बारिश और कहीं-कहीं आंधी जैसी स्थिति बन रही है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी जताई गई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

    शहरी इलाकों में भी मौसम का असर दिखाई दे रहा है, जहां दोपहर के बाद अचानक काले बादल छा गए और कई जगहों पर हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई।

    कुल मिलाकर यूपी में मौसम का यह बदला मिजाज अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत के साथ-साथ सतर्कता भी बरतनी होगी।

  • नोएडा हाईराइज में आग का तांडव: 12वें फ्लोर तक पहुंची लपटें, 6वीं मंजिल तक ही सीमित रही दमकल की धार

    नोएडा हाईराइज में आग का तांडव: 12वें फ्लोर तक पहुंची लपटें, 6वीं मंजिल तक ही सीमित रही दमकल की धार


    नोएडा। नोएडा के सेक्टर-75 स्थित IVY काउंटी सोसाइटी की 28 मंजिला इमारत शुक्रवार सुबह अचानक आग की चपेट में आ गई। आग 12वें फ्लोर पर स्थित एक फ्लैट में लगी और तेज हवा के कारण कुछ ही मिनटों में लपटें पूरे फ्लैट में फैल गईं। खिड़कियों से आग की ऊंची लपटें और काले धुएं का गुबार उठता रहा, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

     दमकल की पहुंच 6वीं मंजिल तक ही सीमित
    घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन शुरुआती राहत कार्यों में बड़ा संकट सामने आया। दमकल की साधारण गाड़ियों का पानी केवल 5 से 6वीं मंजिल तक ही पहुंच सका, जबकि आग 12वीं मंजिल पर विकराल रूप ले चुकी थी। इसी दौरान मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी देखने को मिली। एक व्यक्ति ने कहा कि सिस्टम की स्थिति बेहद खराब है और यह केवल “गमलों में पानी डालने जैसा” प्रतीत हो रहा है।

    हाइड्रोलिक क्रेन से पाया गया काबू
    स्थिति बिगड़ते देख फायर विभाग ने हाइड्रोलिक क्रेन को मौके पर बुलाया। इसके बाद ऊंचाई पर पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू हुई। करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया। राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली।

    अफरा-तफरी में खाली कराई गई सोसाइटी
    आग लगते ही सोसाइटी में अफरा-तफरी मच गई। लोग सीढ़ियों के जरिए बाहर भागने लगे। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के टावर भी खाली करा दिए गए। फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय होने के कारण एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

    एक और घटना: PG रेस्टोरेंट में आग, 15 लोग सुरक्षित निकाले गए
    इसी बीच सेक्टर-52 स्थित ई-3 शताब्दी विहार के एक PG और रेस्टोरेंट में भी आग लग गई। प्रारंभिक जांच में आग का कारण फ्रीजर में शॉर्ट सर्किट बताया गया। दमकल विभाग ने समय रहते कार्रवाई करते हुए ऊपर फंसे 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

     हाईराइज फायर सेफ्टी की हकीकत उजागर
    नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में ऊंची इमारतों के लिए फायर सेफ्टी सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में उपलब्ध हाइड्रोलिक उपकरण अधिकतम 42 मीटर तक ही प्रभावी हैं, जबकि कई इमारतें 30 से 80 मंजिल तक पहुंच चुकी हैं। फायर विभाग भविष्य में 72 और 102 मीटर क्षमता वाली मशीनें लाने की योजना पर काम कर रहा है, लेकिन फिलहाल यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा रही।

    यह घटना स्पष्ट करती है कि तेजी से बढ़ते शहरी विकास के मुकाबले आपातकालीन सेवाओं की क्षमता अभी पीछे है। नोएडा की यह आग केवल एक हादसा नहीं, बल्कि हाईराइज सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी है।

  • मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर बने अर्थव्यवस्था के इंजन, भारत ने दर्ज की 7.7 प्रतिशत विकास दर

    मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर बने अर्थव्यवस्था के इंजन, भारत ने दर्ज की 7.7 प्रतिशत विकास दर

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 7.7 प्रतिशत की रियल जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की है। यह पिछले वित्त वर्ष की 7.1 प्रतिशत वृद्धि दर की तुलना में उल्लेखनीय सुधार माना जा रहा है। ताजा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों और सेवा क्षेत्र की मजबूती ने आर्थिक विकास को नई गति प्रदान की है।

    वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 8.9 प्रतिशत रही। इसके साथ ही रियल और नॉमिनल ग्रॉस वैल्यू एडेड में क्रमशः 7.9 प्रतिशत और 9.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।

    विकास दर में सबसे बड़ा योगदान द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों का रहा। औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े द्वितीयक क्षेत्र ने 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि सेवा क्षेत्र की विकास दर 9.3 प्रतिशत रही। मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, परिवहन, संचार, होटल, स्टोरेज, वित्तीय सेवाओं और रियल एस्टेट से जुड़े क्षेत्रों में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला।

    विशेष रूप से सेवा क्षेत्र ने आर्थिक वृद्धि को गति देने में अहम भूमिका निभाई। वित्तीय सेवाओं, पेशेवर सेवाओं, व्यापार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में बढ़ोतरी ने अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन और निवेश गतिविधियों के विस्तार का सकारात्मक असर भी समग्र विकास दर पर दिखाई दिया।

    हालांकि प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम रही। कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को शामिल करने वाले प्राथमिक क्षेत्र ने वित्त वर्ष के दौरान 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके बावजूद समग्र आर्थिक प्रदर्शन पर इसका सीमित प्रभाव देखने को मिला क्योंकि औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों ने विकास की गति बनाए रखी।

    जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही के आंकड़े भी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। इस अवधि में देश की रियल जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जबकि नॉमिनल जीडीपी में 9.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी दौरान रियल जीवीए में 7.9 प्रतिशत और नॉमिनल जीवीए में 9.9 प्रतिशत का विस्तार हुआ।

    चौथी तिमाही में भी सेवा और औद्योगिक क्षेत्र विकास के प्रमुख आधार बने रहे। द्वितीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 9.9 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियों में निरंतर विस्तार बना हुआ है और विकास की रफ्तार स्थिर बनी हुई है।

    इस बार आर्थिक आंकड़े नए आधार वर्ष 2022-23 के अनुसार जारी किए गए हैं। इससे अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना और उपभोग पैटर्न को अधिक सटीक रूप से दर्शाने में मदद मिलेगी। नए आधार वर्ष के तहत जारी आंकड़े देश की आर्थिक स्थिति का अधिक यथार्थवादी आकलन प्रस्तुत करते हैं।

    वैश्विक स्तर पर जारी अस्थिरता, व्यापारिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत की मजबूत विकास दर यह संकेत देती है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में लचीलापन बना हुआ है। आने वाले समय में निवेश, उत्पादन और सेवा गतिविधियों में निरंतर वृद्धि देश को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • अंडमान सागर में ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी सफलता, ऑयल इंडिया के तीसरे खोजी कुएं में मिली प्राकृतिक गैस

    अंडमान सागर में ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी सफलता, ऑयल इंडिया के तीसरे खोजी कुएं में मिली प्राकृतिक गैस

    नई दिल्ली । देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड को अंडमान के अपतटीय क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की खोज के रूप में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। कंपनी ने घोषणा की है कि अंडमान सागर में ड्रिल किए गए अपने तीसरे खोजी कुएं में प्राकृतिक गैस और हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इस उपलब्धि को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू संसाधनों की खोज के प्रयासों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    कंपनी के अनुसार, यह खोज विजयपुरम-3 नामक खोजी कुएं में हुई है, जिसे ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत अंडमान के अपतटीय ब्लॉक में विकसित किया गया है। यह कुआं अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है। समुद्री क्षेत्र में लगभग 355 मीटर की जल गहराई पर स्थित इस स्थान पर उन्नत तकनीक की सहायता से ड्रिलिंग कार्य किया गया।

    ऑयल इंडिया ने बताया कि ड्रिलिंग अभियान के दौरान इयोसीन भू-स्तर में 1,900 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंचकर परीक्षण किए गए। प्रारंभिक उत्पादन परीक्षणों के दौरान प्राकृतिक गैस की मौजूदगी के स्पष्ट संकेत प्राप्त हुए। परफोरेशन प्रक्रिया के बाद लगातार गैस का प्रवाह और उसका जलना इस बात का प्रमाण माना गया कि क्षेत्र में व्यावसायिक महत्व की गैस मौजूद हो सकती है।

    कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार परीक्षण के दौरान कुएं के भीतर दबाव में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई, जिसके बाद गैस का प्रवाह शुरू हुआ। यह संकेत ऊर्जा विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन प्रणाली की सक्रियता की पुष्टि होती है। फिलहाल प्राप्त गैस के नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है ताकि उसकी रासायनिक संरचना और ऊष्मीय क्षमता का सटीक आकलन किया जा सके।

    इसके साथ ही विशेषज्ञ आइसोटोप अध्ययन भी कर रहे हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य गैस और अन्य हाइड्रोकार्बन के स्रोत, उत्पत्ति तथा भूगर्भीय विकास को समझना है। इन परीक्षणों के परिणाम भविष्य में क्षेत्र की ऊर्जा संभावनाओं का अधिक सटीक मूल्यांकन करने में मदद करेंगे।

    यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अंडमान अपतटीय ब्लॉक में यह हाइड्रोकार्बन की दूसरी पुष्टि है। इससे पहले सितंबर 2025 में विजयपुरम-2 नामक खोजी कुएं में भी प्राकृतिक गैस मिलने की पुष्टि हुई थी। अब तक इस ब्लॉक में कुल तीन खोजी कुएं ड्रिल किए जा चुके हैं, जिनमें से दो में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी के स्पष्ट संकेत मिले हैं। इससे पूरे क्षेत्र की ऊर्जा क्षमता को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि लगातार मिल रही सफलताएं अंडमान क्षेत्र को भविष्य के महत्वपूर्ण गैस उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती हैं। यदि आगे के परीक्षण और अन्वेषण भी सकारात्मक रहते हैं तो इससे देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है।

    ऑयल इंडिया ने इस खोज को भविष्य की अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक बताया है। कंपनी का मानना है कि अंडमान क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की मौजूदगी के बढ़ते प्रमाण आने वाले वर्षों में नई ऊर्जा परियोजनाओं और निवेश के अवसरों को भी बढ़ावा देंगे। यह खोज भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

  • सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त संदेश, आतंकवाद बंद होने तक पाकिस्तान को नहीं मिलेगी कोई राहत

    सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त संदेश, आतंकवाद बंद होने तक पाकिस्तान को नहीं मिलेगी कोई राहत

    नई दिल्ली । सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर कूटनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारत ने पाकिस्तान के हालिया आरोपों और बयानों का कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक सिंधु जल संधि स्थगित ही रहेगी। भारत ने दोहराया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर उसका रुख पूरी तरह स्पष्ट और अडिग है।

    विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान भारत ने पाकिस्तान के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि भारत चिनाब नदी के जल प्रवाह से जुड़े ऐसे कदम उठा रहा है जो सिंधु जल संधि के प्रावधानों के खिलाफ हैं। भारत ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पाकिस्तान तथ्यों से परे जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

    हाल के दिनों में पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि भारत चिनाब नदी के जल को दूसरी दिशा में मोड़ने की संभावित योजनाओं पर काम कर रहा है, जिससे सिंधु जल संधि प्रभावित हो सकती है। पाकिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि भारत ने इन दावों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि संधि के भविष्य को लेकर उसका निर्णय सुरक्षा परिस्थितियों और आतंकवाद से जुड़े व्यवहार पर निर्भर करेगा।

    भारत का कहना है कि सीमा पार से लगातार आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन मिलने के कारण दोनों देशों के बीच विश्वास का माहौल कमजोर हुआ है। ऐसे में सामान्य द्विपक्षीय व्यवस्थाओं को पहले की तरह जारी रखना संभव नहीं है। सरकार का मानना है कि जब तक आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं दिखाई देती, तब तक किसी भी संवेदनशील समझौते पर आगे बढ़ना कठिन होगा।

    सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों के उपयोग को नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण समझौता है। यह समझौता दशकों से दोनों देशों के बीच जल बंटवारे की व्यवस्था का आधार रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में सुरक्षा संबंधी तनाव और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे ने इस समझौते को भी राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का विषय बना दिया है।

    भारत ने यह भी संकेत दिया है कि राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में वह किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। सरकार का मानना है कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। इसी वजह से संधि को लेकर उठाए गए कदमों को सुरक्षा परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इस बीच भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। दोनों देशों के बीच हालिया वार्ताओं में आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने और व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा हुई है। अधिकारियों का कहना है कि वार्ता रचनात्मक रही है और आने वाले समय में इस दिशा में और प्रगति देखने को मिल सकती है।

    फिलहाल सिंधु जल संधि को लेकर भारत का संदेश स्पष्ट है। सरकार ने संकेत दिया है कि जब तक आतंकवाद के मुद्दे पर ठोस बदलाव नहीं दिखता, तब तक इस समझौते की बहाली की संभावना सीमित रहेगी। ऐसे में आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति पर इस मुद्दे का प्रभाव बना रह सकता है।

  • गुजरात दौरे पर पीएम मोदी, हथियार निर्माण केंद्र का किया निरीक्षण; रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को देंगे नई गति

    गुजरात दौरे पर पीएम मोदी, हथियार निर्माण केंद्र का किया निरीक्षण; रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को देंगे नई गति

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात दौरे के दौरान सूरत के हजीरा स्थित अत्याधुनिक रक्षा निर्माण केंद्र का दौरा कर देश की रक्षा आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास को नया संदेश दिया। अपने कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने लार्सन एंड टुब्रो के आर्म्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स का निरीक्षण किया, जहां भारतीय सेना के लिए विकसित किए जा रहे आधुनिक सैन्य उपकरणों, बख्तरबंद वाहनों, टैंकों और ड्रोन तकनीक का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी भी प्राप्त की।

    हजीरा स्थित यह रक्षा निर्माण परिसर देश के प्रमुख सैन्य उत्पादन केंद्रों में शामिल माना जाता है। यहां आधुनिक बख्तरबंद वाहन, तोप प्रणाली और कई अन्य रक्षा प्लेटफॉर्म का निर्माण, एकीकरण और परीक्षण किया जाता है। प्रधानमंत्री ने परिसर में तैयार किए जा रहे स्वदेशी रक्षा उपकरणों का बारीकी से निरीक्षण किया और देश में विकसित हो रही तकनीकी क्षमताओं की समीक्षा की। इस दौरे को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

    रक्षा निर्माण केंद्र के निरीक्षण के बाद प्रधानमंत्री ने सूरत में 200 बिस्तरों वाले नए ईएसआईसी अस्पताल का उद्घाटन भी किया। इस अस्पताल के शुरू होने से क्षेत्र के श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को मजबूती देने के उद्देश्य से इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने सूरत और आसपास के क्षेत्रों के लिए लगभग 18,800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत भी की। इनमें सड़क, परिवहन, रेलवे और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना और औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करना है।

    प्रधानमंत्री ने वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के पैकेज छह और सात का उद्घाटन भी किया। इसके अलावा कई बड़े और छोटे पुलों, रेलवे ओवरब्रिज, फ्लाईओवर और अंडरपास परियोजनाओं को जनता को समर्पित किया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की कई नई परियोजनाओं का शिलान्यास भी कार्यक्रम का हिस्सा रहा। इन परियोजनाओं से गुजरात के विभिन्न हिस्सों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने दमन से लक्षद्वीप को जोड़ने वाली बंदरगाह और पर्यटन विकास परियोजनाओं का भी वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। इन योजनाओं को समुद्री संपर्क और पर्यटन क्षेत्र के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे तटीय क्षेत्रों के विकास और स्थानीय रोजगार सृजन को भी बल मिलेगा।

    विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी गई। आयोजन स्थल पर पारंपरिक प्रचार सामग्री और बड़े बैनरों का उपयोग सीमित रखा गया। कार्यक्रम में शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं और समर्थकों को साइकिल तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया। आम नागरिकों की सुविधा के लिए नगर निगम की ओर से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी किया गया।

    प्रधानमंत्री का यह दौरा रक्षा उत्पादन, आधारभूत संरचना विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रहा। राजनीतिक और औद्योगिक दृष्टि से इसे गुजरात के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जा रहा है, जिससे राज्य में विकास परियोजनाओं और निवेश गतिविधियों को और गति मिलने की संभावना है।

  • Beauty Tips: ग्लोइंग स्किन पाने के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार घरेलू उपाय

    Beauty Tips: ग्लोइंग स्किन पाने के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार घरेलू उपाय


    नई दिल्ली । आज के समय में हर कोई साफ, चमकदार और हेल्दी त्वचा चाहता है। लेकिन प्रदूषण, तनाव, गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या का असर सबसे पहले चेहरे पर दिखाई देता है। ऐसे में महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की बजाय कुछ आसान और नियमित आदतें अपनाकर त्वचा को प्राकृतिक रूप से ग्लोइंग बनाया जा सकता है।

    1. पर्याप्त पानी पीना है सबसे जरूरी कदम
    त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए शरीर का हाइड्रेट रहना बेहद जरूरी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीने से शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, जिससे त्वचा साफ और चमकदार बनती है। पानी की कमी से त्वचा रूखी, बेजान और थकी हुई दिखने लगती है, इसलिए नियमित रूप से पानी पीने की आदत जरूरी है।

    2. दिन में दो बार चेहरा साफ करें
    धूल, प्रदूषण और गंदगी चेहरे पर जमकर पिंपल्स और डलनेस का कारण बनती है। इसलिए सुबह और रात को हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करना चाहिए। इससे त्वचा फ्रेश रहती है और रोमछिद्र (pores) साफ बने रहते हैं। बहुत ज्यादा केमिकल प्रोडक्ट्स से बचना भी जरूरी है।

    3. सनस्क्रीन का नियमित उपयोग करें
    सूरज की हानिकारक UV किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे टैनिंग, पिगमेंटेशन और समय से पहले झुर्रियों की समस्या हो सकती है। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले अच्छी गुणवत्ता वाली सनस्क्रीन लगाना जरूरी है, चाहे मौसम कोई भी हो।

    4. हेल्दी डाइट अपनाएं
    त्वचा की असली चमक अंदर से आती है। ताजे फल, हरी सब्जियां और विटामिन युक्त भोजन त्वचा को जरूरी पोषण देते हैं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को डैमेज से बचाते हैं और नेचुरल ग्लो बढ़ाते हैं।

    5. पर्याप्त नींद लें
    अच्छी और पूरी नींद त्वचा की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। रोज 7–8 घंटे की नींद लेने से त्वचा खुद को रिपेयर करती है। नींद की कमी से डार्क सर्कल्स, थकान और चेहरे की चमक कम हो सकती है।

    6. छोटी आदतें बदल सकती हैं आपकी स्किन
    ग्लोइंग स्किन पाने के लिए महंगे ट्रीटमेंट्स की जरूरत नहीं होती। नियमित स्किन केयर, सही खानपान, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद जैसी आदतें अपनाकर आप अपनी त्वचा को लंबे समय तक हेल्दी और सुंदर बना सकते हैं।

    अगर आप रोजमर्रा की जिंदगी में इन आसान ब्यूटी टिप्स को अपनाते हैं, तो आपकी त्वचा प्राकृतिक रूप से ग्लोइंग, साफ और स्वस्थ बनी रह सकती है।