Author: bharati

  • नीरव मोदी को झटका: भारत के आश्वासनों के बाद ब्रिटेन कोर्ट में प्रत्यर्पण अपील 2026 तक टली

    नीरव मोदी को झटका: भारत के आश्वासनों के बाद ब्रिटेन कोर्ट में प्रत्यर्पण अपील 2026 तक टली


    नई दिल्ली ।नीरव मोदी की भारत प्रत्यर्पण अपील पर सुनवाई ब्रिटेन की हाई कोर्ट में टाल दी गई है। यह मामला रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस में लॉर्ड जस्टिस जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे की पीठ के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि नीरव मोदी पहले भी भारत प्रत्यर्पण रोकने की कई कोशिशें कर चुका है, जो असफल रही हैं। भारत सरकार ने उसकी मुंबई की आर्थर रोड जेल में प्री-ट्रायल हिरासत की शर्तों के बारे में ठोस और विस्तृत आश्वासन पेश किए। इन्हीं आश्वासनों के आधार पर सुनवाई मार्च 2026 तक स्थगित कर दी गई।

    सुनवाई की प्रक्रिया और समय-सीमा

    अदालत ने फरवरी 2026 के मध्य तक लिखित दलीलें दाखिल करने की समय-सीमा तय की।मार्च या अप्रैल 2026 में दो दिन की सुनवाई होगी।इस सुनवाई में यह तय होगा कि नीरव मोदी की अपील दोबारा खोली जाए या नहीं।अनुमति न मिलने की स्थिति में नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण तुरंत संभव हो सकेगा।

    सुनवाई के दौरान प्रमुख बातें
    54 वर्षीय नीरव मोदी वीडियो लिंक के जरिए उत्तर लंदन की पेंटनविल जेल से पेश हुए। CPS ने बताया कि भारत से CBI और ED के चार वरिष्ठ अधिकारी लंदन पहुंचे थे। नीरव मोदी के वकीलों ने संजय भंडारी मामले का हवाला दिया, जिसमें मानवाधिकार आधार पर राहत मिली थी। CPS ने कहा कि यह मामला नीरव मोदी के केस पर लागू नहीं होता।

    पृष्ठभूमि

    नीरव मोदी मार्च 2019 से ब्रिटेन में हिरासत में हैं। उन पर PNB से लगभग 2 अरब डॉलर की धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और सबूतों में छेड़छाड़ के तीन अलग-अलग मामले दर्ज हैं।अप्रैल 2021 में तत्कालीन ब्रिटिश गृह मंत्री प्रीति पटेल ने प्रत्यर्पण का आदेश दिया था।नीरव मोदी लगातार कानूनी दांव-पेंच अपनाते रहे हैं, लेकिन भारत के ठोस आश्वासनों और कोर्ट के सख्त समय-निर्धारण के बाद उनका प्रत्यर्पण अब और लंबित नहीं रह पाएगा।

  • हिजाब हटाने को लेकर विवाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी की मांग इमारत-ए-शरिया के सचिव भड़के

    हिजाब हटाने को लेकर विवाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी की मांग इमारत-ए-शरिया के सचिव भड़के


    पटना । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला आयुष चिकित्सक के चेहरे से हिजाब हटाने का विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना पर अब इमारत-ए-शरिया के सचिव मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सईदउर रहमान कासमी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को ऐसा नहीं करना चाहिए था और इस कदम की सख्त निंदा करते हुए उन्होंने नीतीश कुमार से माफी की मांग की है।

    घटना उस समय की है जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक कार्यक्रम में नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र दे रहे थे। कार्यक्रम के दौरान जब नुसरत परवीन नामक महिला चिकित्सक की बारी आई तो वह हिजाब पहने हुए थीं। मुख्यमंत्री ने यह देखकर कहा यह क्या है और फिर महिला के चेहरे से हिजाब हटा दिया। इससे महिला असहज हो गई और एक अधिकारी ने जल्दी से उन्हें एक और कर दिया। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिस पर इमारत-ए-शरिया के सचिव ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

    मौलाना रहमान कासमी ने कहा कि पर्दा महिलाओं और समाज की इज्जत है और हिजाब को हटाना महिला का अपमान है। मुख्यमंत्री को ऐसा नहीं करना चाहिए था क्योंकि यह महिलाओं की इज्जत और गरिमा की तौहीन है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उन्होंने महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाई है।

    मुख्यमंत्री कार्यालय ने हालांकि इस घटना पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन यह मामला अब राजनीति में भी गहरे विवाद का कारण बन गया है। विपक्षी दलों खासकर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने इस वीडियो को साझा करते हुए इसे मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाया है। राजद ने एक्स पर पोस्ट किया नीतीश जी का क्या हो गया है अब उनकी मानसिक स्थिति पूरी तरह से अस्थिर हो गई है।

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने हाल ही में 685 आयुर्वेद 393 होम्योपैथी और 205 यूनानी पद्धति के चिकित्सकों को नियुक्त किया था जिनमें से कुछ को मंच से नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे। हालांकि यह घटना और इसके बाद की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति में नई बहस का कारण बन गई है। विपक्षी नेताओं ने इसे नीतीश कुमार के विचारधारा परिवर्तन के रूप में भी देखा है और इसपर तीखे हमले किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद आने वाले समय में बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।

  • IPL 2026 Mini Auction: स्टीव स्मिथ और जैक फ्रेजर समेत 5 बड़े नाम अनसोल्ड

    IPL 2026 Mini Auction: स्टीव स्मिथ और जैक फ्रेजर समेत 5 बड़े नाम अनसोल्ड


    नई दिल्ली:आईपीएल 2026 का मिनी ऑक्शन 16 दिसंबर 2025 को अबू धाबी में हुआ। 156 खिलाड़ियों के लिए बोली लगी, जिसमें 10 टीमों ने 77 खिलाड़ी खरीदे और कुल 215.45 करोड़ रुपये खर्च किए। केकेआर ने कैमरन ग्रीन को 25.20 करोड़ रुपये में और मथीशा पथिराना को 18 करोड़ में खरीदा।

    हालांकि, कई बड़े नाम इस बार अनसोल्ड रहे। आइए जानते हैं टॉप-5 खिलाड़ियों के बारे में जिन्हें कोई खरीदार नहीं मिला:

    – जैक फ्रेजर मैकगर्क बेस प्राइस: 2 करोड़ रुपये पिछले सीजन तक: दिल्ली कैपिटल्स
    आईपीएल 2024-2025 में 15 मैच, 385 रन ऑक्शन में कोई रुचि नहीं दिखी और वह अनसोल्ड रहे

    – स्टीव स्मिथ बेस प्राइस:2करोड़ रुपये आखिरी आईपीएल सीजन: 2021 IPL करियर:103 मैच, 2485 रन दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा रह चुके इस बार किसी ने उन्हें खरीदा नहीं

    – महेश थीक्षणा पिछले सीजन तक: राजस्थान रॉयल्स बेस प्राइस: नीलामी में 4.40 करोड़ रुपये में खरीदे गए थे इससे पहले CSK का हिस्सा रहे इस बार ऑक्शन में अनसोल्ड

    -रहमानुल्लाह गुरबाज अफगानिस्तान के विकेटकीपर-बैटर  बेस प्राइस: -50 करोड़ रुपये पिछले सीजन केकेआर का हिस्सा  ऑक्शन में किसी ने खरीदा नहीं

    – डेवोन कॉनवे न्यूजीलैंड के बैटर बेस प्राइस: 2 करोड़ रुपये पिछले सीजन तक CSK का हिस्सा
    पिछली बार सीएसके ने 6.25 करोड़ में बरकरार रखा था

    इस बार अनसोल्ड 

    इस साल के IPL 2026 मिनी ऑक्शन में बड़े खिलाड़ियों के अनसोल्ड रहना दर्शाता है कि फ्रेंचाइजी इस बार नई रणनीतियों और टीम बैलेंस पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।

  • NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी

    NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ को लेकर अब एनडीए में भी विरोध की स्थिति बन गई है। जहां एक ओर विपक्ष ने इस विधेयक को महात्मा गांधी का अपमान मानते हुए उसका विरोध किया है वहीं एनडीए का एक प्रमुख सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी  भी सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया है।

    यह विधेयक मनरेगा योजना के स्थान पर लाया गया है लेकिन विपक्ष और सरकार के सहयोगी दलों में इसके नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तेलुगु देशम पार्टी के सांसद लवु श्री कृष्ण देवरयालु ने विधेयक के तहत राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश जैसे राज्य पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और इस नए बदलाव से उन्हें और ज्यादा बोझ पड़ेगा।

    देवरयालु ने आगे कहा “कुछ सालों से मनरेगा में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी और यह विचार संसद के बाहर और अंदर कई बार उठाए गए थे। हाल ही में काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 किया गया जो एक सकारात्मक कदम है। लेकिन इस योजना का खर्च राज्यों पर डालने का प्रस्ताव खासकर आंध्र प्रदेश जैसे राज्य के लिए सही नहीं है।
    टीडीपी के प्रवक्ता एन विजय कुमार ने इस नए वर्जन का स्वागत तो किया लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार से 40 फीसदी भुगतान के प्रावधान पर पुनः विचार करने की अपील की। उनका कहना था कि इस भुगतान व्यवस्था से राज्यों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

    वहीं कांग्रेस ने भी इस विधेयक पर विरोध जताया है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम हटाना उनके अपमान के समान है। कांग्रेस ने इसे एक “राजनीतिक कदम बताया है और दावा किया कि मोदी सरकार गांधी के विचारों से मुंह मोड़ रही है। कांग्रेस ने इसके खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।

    ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस विधेयक को संसद में पेश करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं और उनका नाम किसी योजना से हटाना उनका अपमान नहीं है। यह सरकार गांधीजी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय भी ‘जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला गया था और तब क्या यह पंडित नेहरू का अपमान था?

    चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं और अब इस नए विधेयक के तहत 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इस योजना के लिए प्रावधानित की गई है जो गांवों के समग्र विकास के लिए उपयोग की जाएगी।

    यह विधेयक ध्वनिमत से पास हुआ है लेकिन इसके बावजूद विपक्ष और एनडीए के भीतर ही इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर उन राज्यों के लिए यह विधेयक एक चुनौती बन सकता है जो पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। सरकार की योजना है कि इस विधेयक से ग्रामीण भारत का समग्र विकास होगा और विकसित भारत की दिशा में एक ठोस कदम उठाया जाएगा। लेकिन इसके नाम उद्देश्य और वित्तीय बोझ को लेकर बढ़ते विवाद से यह साफ है कि आगामी दिनों में इस पर और भी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।

  • NCR में अपराध पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, एक ही पुलिस और विशेष अदालत की वकालत

    NCR में अपराध पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, एक ही पुलिस और विशेष अदालत की वकालत


    नई दिल्ली /राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में बढ़ते संगठित अपराध और अपराधियों की बदलती रणनीतियों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक अहम सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि दिल्ली नोएडा गुरुग्राम फरीदाबाद और गाजियाबाद जैसे NCR के अलग-अलग इलाकों में अपराध करने वाले गिरोह अक्सर राज्य सीमाओं का फायदा उठाकर पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे NCR में एक समान पुलिस एजेंसी और विशेष अदालत की व्यवस्था पर विचार करने की सलाह दी है।यह टिप्पणी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ ने की जिसमें मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे। अदालत का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों की पुलिस और अदालतों के अधिकार क्षेत्र के चलते संगठित अपराधियों को अनुचित लाभ मिल जाता है।

    अपराधियों की रणनीति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NCR में सक्रिय अपराधी गिरोह अक्सर दिल्ली में वारदात को अंजाम देने के बाद तुरंत उत्तर प्रदेश या हरियाणा के इलाकों-जैसे नोएडा गुरुग्राम या फरीदाबाद-में भाग जाते हैं। इस तरह वे गिरफ्तारी से बचने या जांच और ट्रायल में देरी करने में सफल हो जाते हैं। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि यदि कोई गैंगस्टर या संगठित गिरोह कई राज्यों में अपराध करता है तो उसके खिलाफ एक ही एजेंसी द्वारा कार्रवाई और एक ही अदालत में मुकदमा चलाया जाना ज्यादा प्रभावी होगा।

    NIA जैसी एजेंसी को अधिकार देने का सुझाव

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संगठित अपराध से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी को पूरे NCR में जांच और ट्रायल का अधिकार दिया जा सकता है। इससे अपराधी यह तर्क नहीं दे पाएंगे कि अपराध अलग-अलग राज्यों में हुआ है और इसलिए अलग-अलग अदालतों में मुकदमा चले।अदालत ने माना कि एकीकृत व्यवस्था से जांच तेज होगी और न्यायिक प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी बनेगी।

    विशेष अदालत बनाने की वकालत

    मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ASG ऐश्वर्य भाटी से सवाल किया कि क्यों न NCR के लिए एक विशेष अदालत बनाई जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह यूएपीए पीएमएलए और एनडीपीएस जैसे केंद्रीय कानूनों के तहत विशेष अदालतें बनाई गई हैं उसी तर्ज पर NCR में संगठित अपराध के मामलों के लिए भी एक सक्षम और केंद्रीकृत अदालत हो सकती है।ऐसी अदालत में यह मायने नहीं रखेगा कि अपराध किस राज्य में हुआ है बल्कि पूरा मामला एक ही जगह सुना और निपटाया जा सकेगा।

    कानूनी खामियों से अपराधियों को फायदा

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि वर्तमान व्यवस्था में क्षेत्राधिकार जूरिस्डिक्शन की जटिलता संगठित अपराधियों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। अलग-अलग राज्यों में एफआईआर जांच और ट्रायल होने से मामलों में देरी होती है। इसका नतीजा यह होता है कि कई कुख्यात अपराधी जमानत पाने में सफल हो जाते हैं जो समाज और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
    समाज और जनहित के लिए जरूरी कदम
    पीठ ने जोर देकर कहा कि NCR जैसे संवेदनशील और घनी आबादी वाले क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए मजबूत और प्रभावी कानूनी ढांचे की जरूरत है। एक ही पुलिस एजेंसी और विशेष अदालत से न केवल त्वरित कार्रवाई संभव होगी बल्कि पीड़ितों को भी जल्द न्याय मिल सकेगा।सुप्रीम कोर्ट ने इसे जनहित और समाज की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।फिलहाल यह एक सुझाव है लेकिन अगर इसे लागू किया जाता है तो NCR में अपराध से निपटने की रणनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। आने वाले समय में केंद्र सरकार इस पर क्या फैसला लेती है इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • पश्चिम बंगाल में SIR के दूसरे चरण के बाद 58 लाख मतदाताओं के नाम कटे 1.9 करोड़ को नोटिस जारी

    पश्चिम बंगाल में SIR के दूसरे चरण के बाद 58 लाख मतदाताओं के नाम कटे 1.9 करोड़ को नोटिस जारी


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR के दूसरे चरण के तहत मंगलवार को जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक राज्य में अब कुल 7.1 करोड़ मतदाता रह गए हैं जबकि 29 अक्टूबर 2025 तक 7.6 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम मृत स्थानांतरित अनुपस्थित या डुप्लीकेट होने के कारण हटाए गए हैं। इसके अलावा 1.9 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किया जाएगा क्योंकि उनकी पंजीकरण जानकारी में तार्किक विसंगतियां पाई गईं हैं जिन्हें चुनाव अधिकारियों के अनुसार अगले चरण में स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

    इन विसंगतियों में मुख्य रूप से ‘पिता के नाम में गड़बड़ी’ एक ही अभिभावक से छह या उससे अधिक संतान का नामांकन और असामान्य उम्र के अंतर की प्रविष्टियां शामिल हैं। कुछ मामलों में ऐसे व्यक्ति भी पंजीकृत पाए गए हैं जिनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक थी लेकिन उनका पहले कभी मतदाता सूची में नामांकन नहीं हुआ था। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि SIR के दूसरे चरण में दस्तावेज़ जमा करना अनिवार्य नहीं था जिससे कई अधूरे या गलत विवरण सामने आए। इस दौरान 28 लाख गणना फॉर्म पिछली SIR सूची से मेल नहीं खा पाए जबकि 1.65 करोड़ फॉर्म में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। इन मामलों में मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है और उन्हें सुनवाई के दौरान अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा। यदि वे अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाते हैं तो उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।

    जिला स्तर पर मतदाता सूची में कटौती की दर में भी बड़ा अंतर देखने को मिला। कोलकाता उत्तर में 25.9 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण में 23.8 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए जबकि पूर्व मेदिनीपुर में यह दर सबसे कम रही केवल 3.3 प्रतिशत। पश्चिम बर्दवान में भी 13.1 प्रतिशत नाम सूची से हटाए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों में नाम कटने की दर राज्य औसत से कम रही। हालांकि इन जिलों में ‘पिता के नाम में असंगति’ की दर अधिक पाई गई। मालदा उत्तर दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में इस दर की 12 से 16 प्रतिशत के बीच वृद्धि हुई जो अन्य जिलों से कहीं अधिक है।

    सभी विसंगतियों और गलत नामांकन के बाद चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को मृत स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची सौंपी है। साथ ही ये जानकारी सार्वजनिक वेबसाइटों पर भी उपलब्ध कराई गई है। आयोग के अनुसार 15 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं जबकि सत्यापन प्रक्रिया 7 फरवरी 2026 तक चलेगी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों और अन्य चुनावों की पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेष गहन पुनरीक्षण से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि केवल योग्य और वास्तविक मतदाता ही मतदान में हिस्सा लें।

  • दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा पिकअप गाड़ी में लगी आग 3 की जलकर मौत

    दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा पिकअप गाड़ी में लगी आग 3 की जलकर मौत


    अलवर । राजस्थान के अलवर जिले में दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसमें तीन लोग जिंदा जलकर मारे गए। यह हादसा रैणी थाना क्षेत्र के चैनल नंबर 131 के पास हुआ जब एक पिकअप गाड़ी दिल्ली से जयपुर जा रही थी और दूसरे वाहन से टकरा गई। टक्कर के बाद पिकअप गाड़ी में आग लग गई और इसमें सवार तीनों लोग अंदर फंसे रह गए। आग लगने के बाद मौके पर पहुंचे लोग पिकअप में फंसे लोगों को बचाने का प्रयास करते रहे लेकिन सब बेकार गया।

    हादसा इतना भीषण था कि पिकअप गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह से नष्ट हो गया था जिससे सवार लोग अंदर फंस गए और बाहर नहीं निकल सके। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि तीनों लोग जलकर मारे गए। हादसे में पिकअप का ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रेफर कर दिया गया है। मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और पुलिस ने शवों को रैणी अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मृतकों की पहचान के लिए काम चल रहा है और यह जांच की जा रही है कि ये लोग कहाँ के निवासी थे और किस स्थान से आ रहे थे।

    हादसा बुधवार तड़के करीब 300 बजे हुआ। दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर अचानक हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया। हादसे की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल विभाग ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन पिकअप पूरी तरह से जल चुकी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह हादसा बेहद दर्दनाक था और उन्होंने पिकअप में सवार लोगों को बाहर निकालने के लिए अपनी ओर से मदद की कोशिश की। लेकिन जलती हुई गाड़ी में फंसे हुए लोगों को बचाना संभव नहीं हो सका।

    दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर यह हादसा एक बड़ी दुर्घटना का रूप ले लिया। दुर्घटना की वजह से मार्ग पर कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हो गया था लेकिन पुलिस ने जल्द ही रास्ते को साफ कर दिया।पुलिस अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि टक्कर के कारण क्या था और दुर्घटना के वक्त पिकअप गाड़ी के ड्राइवर की क्या स्थिति थी। हादसा इतना भीषण था कि स्थानीय लोग भी दंग रह गए और कुछ समय के लिए समझ ही नहीं पाए कि क्या हो रहा है।अलवर और रैणी पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और साथ ही मृतकों के परिवारों को सूचना दी जा रही है।

  • उत्तराखंड धर्मांतरण कानून पर राज्यपाल ने दी ब्रेक सरकार को वापस लौटा बिल

    उत्तराखंड धर्मांतरण कानून पर राज्यपाल ने दी ब्रेक सरकार को वापस लौटा बिल


    नई दिल्ली । उत्तराखंड की धामी सरकार ने जबरन धर्मांतरण के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान रखने वाले संशोधित उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2025 को राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा था। हालांकि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेनि ने विधेयक को मंजूरी देने के बजाय तकनीकी आधार पर पुनर्विचार के लिए सरकार को लौटा दिया है। सूत्रों के मुताबिक लोकभवन ने विधेयक के ड्राफ्ट में कुछ तकनीकी गलतियों की वजह से यह कदम उठाया है।

    अब राज्य सरकार के सामने दो विकल्प हैं। पहला सरकार इस विधेयक को अगले विधानसभा सत्र में फिर से पारित कराए या दूसरा राज्यपाल की मंजूरी के बिना अध्यादेश लाकर इसे तत्काल लागू किया जाए। अगर सरकार अध्यादेश लाती है तो यह विधेयक तत्काल प्रभाव से लागू हो सकता है लेकिन विधानसभा में इसे फिर से पारित करना अधिक सुरक्षित रास्ता हो सकता है।

    यह विधेयक उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण पर सजा को और भी कड़ा करता है। इसे पहले 2018 में लागू किया गया था और 2022 में इसमें कुछ संशोधन किए गए थे। 13 अगस्त 2025 को राज्य सरकार ने एक बार फिर इस कानून में बदलाव करते हुए उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2025 को मंजूरी दी थी। इस बिल के तहत धर्मांतरण के मामलों में सजा को और सख्त किया गया है जिससे राज्य में इस पर पूरी तरह से अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।

    नए विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति छल-बल से धर्मांतरण कराता है तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी। पहले यह सजा तीन से 10 साल तक थी जिसे अब बढ़ाकर तीन से 20 साल तक किया गया है। इसके अलावा अगर कोई धर्मांतरण के लिए नाबालिगों का शोषण करता है या महिला को विवाह के झांसे में फंसा कर धर्म परिवर्तन कराता है तो उसे न्यूनतम 20 साल की सजा और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही ऐसे मामलों में जुर्माना भी 10 लाख रुपये तक हो सकता है।

    इसके अलावा अब किसी भी व्यक्ति को धर्मांतरण के मामलों की शिकायत करने का अधिकार होगा जबकि पहले यह केवल खून के रिश्तेदारों तक सीमित था। इस विधेयक में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि जिलाधिकारी को गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोपी की संपत्ति कुर्क करने का अधिकार दिया गया है।

    हालांकि राज्यपाल ने विधेयक को तकनीकी गलतियों के कारण वापस कर दिया है लेकिन यह स्पष्ट है कि धामी सरकार धर्मांतरण के मामलों में कठोर कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस विधेयक को फिर से कैसे पारित करती है और इसे लागू करने के लिए कौन सा रास्ता अपनाती है।

  • दिल्ली में शराब खरीदने का बदलेगा तरीका, मोबाइल ऐप से बुकिंग और पिकअप की सुविधा..

    दिल्ली में शराब खरीदने का बदलेगा तरीका, मोबाइल ऐप से बुकिंग और पिकअप की सुविधा..


    नई दिल्ली /दिल्ली में शराब खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राजधानी में अक्सर लोगों को अपनी पसंदीदा शराब ढूंढने के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान के चक्कर लगाने पड़ते हैं। खासकर वीकेंड त्योहारों या शादी के सीजन में यह परेशानी और भी बढ़ जाती है। अब इस समस्या का समाधान निकालते हुए दिल्ली आबकारी विभाग ने एक नया मोबाइल ऐप तैयार किया है जिसका नामई-आबकारी दिल्ली रखा गया है। इस ऐप के जरिए शराब खरीदने की प्रक्रिया को न सिर्फ आसान बनाया जाएगा बल्कि इसे ज्यादा पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल भी बनाया जाएगा। विभाग का कहना है कि ऐप फिलहाल ट्रायल मोड में है और जल्द ही इसे आम लोगों के लिए आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा।

    ऐप से मिलेगी शराब की पूरी जानकारी

    ई-आबकारी दिल्ली ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए उपभोक्ता घर बैठे यह जान सकेंगे कि उनकी पसंदीदा शराब किस दुकान पर उपलब्ध है। ऐप पर ब्रैंड का नाम उपलब्ध स्टॉक और संबंधित दुकान की लोकेशन जैसी जानकारी रियल-टाइम में दिखाई जाएगी।अब ग्राहकों को यह जानने के लिए अलग-अलग दुकानों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि किसी खास ब्रैंड की बोतल उपलब्ध है या नहीं। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि बेवजह की भागदौड़ भी खत्म होगी।

    प्री-बुकिंग और पिकअप की सुविधा

    इस ऐप में प्री-बुकिंग का विकल्प भी प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत ग्राहक अपनी पसंद की शराब को पहले से बुक कर सकेंगे। बुकिंग के बाद दुकानदार ग्राहक के लिए उस ब्रैंड को एक तय समय तक रिजर्व रखेगा।प्रस्तावित नियमों के अनुसार ग्राहक को बुकिंग के बाद एक घंटे के भीतर दुकान पर पहुंचकर अपना ऑर्डर पिकअप करना होगा। यदि तय समय में ग्राहक नहीं पहुंचता है तो दुकानदार उस शराब को किसी अन्य ग्राहक को बेचने के लिए स्वतंत्र होगा।इस व्यवस्था से दुकानों पर भीड़ कम होगी और स्टॉक मैनेजमेंट भी बेहतर तरीके से हो सकेगा। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्री-बुकिंग पर कोई अतिरिक्त चार्ज लिया जाएगा या नहीं। इस पर अंतिम फैसला ऐप लॉन्च के समय लिया जा सकता है।

    मिलावटी शराब और ओवरचार्जिंग पर लगेगी लगाम

    ई-आबकारी ऐप का एक अहम उद्देश्य मिलावटी शराब और अधिक कीमत वसूलने जैसी शिकायतों पर नियंत्रण करना भी है। ऐप के जरिए उपभोक्ता सीधे आबकारी विभाग तक अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।यदि किसी दुकान पर तय कीमत से ज्यादा पैसे लिए जाते हैं या शराब की गुणवत्ता को लेकर संदेह होता है तो ग्राहक ऐप के माध्यम से तुरंत शिकायत कर सकता है। इसके अलावा शराब की प्रमाणिकता से जुड़ी जानकारी भी ऐप पर उपलब्ध होगी जिससे नकली और मिलावटी शराब पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

    ग्राहकों और दुकानदारों-दोनों को फायदा

    यह ऐप न केवल उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद साबित होगा बल्कि दुकानदारों के लिए भी राहत लेकर आएगा। ग्राहकों को सही जानकारी मिलने से दुकानों पर अनावश्यक भीड़ कम होगी और दुकानदार बेहतर तरीके से अपने स्टॉक का प्रबंधन कर सकेंगे।साथ ही डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध गतिविधियों पर भी नजर रखना आसान होगा।

    कब होगा लॉन्च?

    दिल्ली आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार ई-आबकारी दिल्ली ऐप फिलहाल ट्रायल मोड में है। तकनीकी खामियों को दूर करने और फीडबैक लेने के बाद इसे जल्द ही आम जनता के लिए लॉन्च किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यह ऐप दिल्ली में शराब खरीदने के अनुभव को पूरी तरह बदल देगा। कुल मिलाकर यह पहल दिल्ली के लोगों के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकती है। मोबाइल ऐप के जरिए शराब की जानकारी बुकिंग और शिकायत की सुविधा मिलने से खरीदारी आसान तेज और पारदर्शी हो जाएगी।

  • CM योगी का सख्त संदेश: नकली डीएपी-यूरिया बेचने वालों पर लगेगा NSA, किसानों से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त

    CM योगी का सख्त संदेश: नकली डीएपी-यूरिया बेचने वालों पर लगेगा NSA, किसानों से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त


    नई दिल्ली /उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नकली, मिलावटी खाद और उर्वरकों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि डीएपी, यूरिया या किसी भी प्रकार की खाद में मिलावट कर किसानों के साथ धोखा करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम NSA जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह निर्देश एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए, जिसमें प्रदेश में खाद की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और कालाबाजारी की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अन्नदाता किसानों की मेहनत और फसलों के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है।

    खाद की उपलब्धता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खाद की समुचित उपलब्धता और उसका पारदर्शी वितरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सहकारिता और कृषि विभाग को निर्देश दिए कि वे प्रतिदिन खाद की उपलब्धता और वितरण की समीक्षा करें। मुख्यमंत्री कार्यालय से सभी जिलों की सीधी निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डीएपी, यूरिया और पोटाश केवल निर्धारित सरकारी दरों पर ही किसानों को उपलब्ध कराए जाएं। ओवर रेटिंग, जबरन टैगिंग या खाद के साथ अन्य सामान बेचने जैसी शिकायतें बिल्कुल भी स्वीकार नहीं की जाएंगी।

    औचक निरीक्षण और सख्त जवाबदेही

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों और उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे खाद की दुकानों, सहकारी समितियों और वितरण केंद्रों पर नियमित और औचक निरीक्षण करें। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या कालाबाजारी सामने आती है तो तुरंत जिम्मेदार अधिकारियों और दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर खुले रूप से विजिलेंस जांच कराई जाए और दोषियों को कानून के तहत सख्त सजा दी जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि कृत्रिम खाद संकट पैदा करने या किसानों को गुमराह करने वालों के खिलाफ सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करेगी।

    प्रदेश में खाद की वर्तमान स्थिति

    बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रदेश में खाद की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। बताया गया कि 16 दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश में कुल 9.57 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 3.77 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 3.67 लाख मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है।यूरिया की बात करें तो सहकारी क्षेत्र में 3.79 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 5.78 लाख मीट्रिक टन का भंडार मौजूद है। डीएपी में सहकारी क्षेत्र के पास 1.47 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र के पास 2.30 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध है। वहीं एनपीके उर्वरक में सहकारी क्षेत्र में 0.88 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 2.79 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक है।

    किसानों को न हो कोई परेशानी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि रबी फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और इस समय गेहूं की फसल में टॉप ड्रेसिंग के लिए यूरिया की सबसे अधिक जरूरत होती है। वर्तमान में प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 54,249 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा रहा है।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को खाद के लिए भटकना न पड़े और समय पर उन्हें जरूरत के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी सुरक्षा व सुविधा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।