Author: bharati

  • हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप

    हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप


    पंचकूला।
    हरियाणा (Haryana) में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) में 590 करोड़ रुपये (590 Crore Rupees) के घोटाले के बाद अब एक और बैंक में स्कैम किया गया है. पंचकूला (Panchkula) के सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) की शाखा में हरियाणा सरकार (Haryana Government) के करीब 160 करोड़ रुपये गायब मिले हैं. इसमें पंचकूला नगर निगम की पांच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का रिकॉर्ड नहीं मिलने से हड़कंप मच गया है. फिलहाल, जांच के आदेश दिए गए हैं. उधर, विजिलेंस ने इस संंबंध में केस दर्ज कर लिया है. बैंक कर्मचारियों और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

    जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने इस बैंक शाखा में कुल 16 एफडी करवाई थीं, जिन्हें पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से ट्रांसफर किया गया था. हाल ही में जब निगम ने एफडी मैच्योर होने पर राशि वापसी के लिए पत्र लिखा, तो बैंक ने जवाब दिया कि संबंधित एफडी का कोई रिकॉर्ड उनके पास मौजूद नहीं है।

    इस खुलासे के बाद नगर निगम ने तत्काल आंतरिक जांच शुरू की. अकाउंट अधिकारियों, कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर की टीम ने दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट सरकार और बैंक को भेजी. शुरुआती जांच में सामने आया कि फर्जी तरीके से समान दस्तावेजों पर अतिरिक्त खाते खोलकर रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर की गई. मामले में एक महिला खाते में बड़ी राशि ट्रांसफर होने की भी आशंका जताई जा रही है. अहम बात है कि पैसा शैल कंपनियों के खाते में जमा किया गया था।

    घोटाले को छिपाने के लिए कथित तौर पर एफडी के रिन्यूअल दस्तावेज नियमित रूप से निगम को भेजे जाते रहे, जिससे अधिकारियों को संदेह नहीं हुआ. हालांकि, जब हालिया घोटालों के बाद राशि वापस मांगी गई, तब पूरा मामला उजागर हुआ. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (इकोनॉमिक्स विंग) को जांच सौंपी गई है. साथ ही बैंक प्रबंधन ने भी शिकायत दर्ज कराई है. यह मामला करीब 590 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले से जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें पहले ही अन्य बैंकों के नाम सामने आ चुके हैं. अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।


    महिला के खाते में ट्रांसफर हुआ पैसा

    अब तक मिली जानकारी के अनुसार, एफडी के नाम पर बैंक में जमा कराई गई राशि को बैंक ने विभिन्न फर्जी खातों में ट्रांसफर किया है. मामले का खुलासा तब हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपये और 102 करोड़ की एफडी की मैच्योरिटी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा और फिर बैंक ने स्टेटमेंट में राशि ट्रांसफर दिखाई और बताया कि वास्तविक खाते में पैसा नहीं पहुंचा. जांच में पता चला कि स्टेटमेंट भी फर्जी थी और रकम गायब है. सूत्रों के अनुसार एक महिला के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर हुई है. बताया जा रहा है कि उसके परिवार में कुछ IAS -IPS अधिकारी हैं।


    पहले हुआ था 590 करोड़ रुपये का स्कैम

    गौर रहे कि इसके पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू बैंक में भी पंचकूला नगर निगम के करोड़ों रुपये का गबन किया गया था. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में कुल 590 करोड़ रुपये की राशि का फ्रॉड हुआ था, हरियाणा सरकार का यह पैसा हालांकि, बैंक ने बाद में लौटा दिया था, लेकिन इस मामले में अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

  • IPL 2026 में तेज गेंदबाज क्यों हो रहे चोटिल? Royal Challengers Bengaluru अधिकारी ने खोला राज

    IPL 2026 में तेज गेंदबाज क्यों हो रहे चोटिल? Royal Challengers Bengaluru अधिकारी ने खोला राज


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 से पहले तेज गेंदबाज की चोट ने सभी टीमों की चिंता बढ़ा दी है। इंडियन प्रीमियर लीग के इस सीजन में कई बड़े नाम चोटिल होने के कारण या तो आउट हो गए हैं या शुरुआती मैचों में नहीं खेल पाएंगे। इसमें जसप्रित बुमरा, जोश हेज़लवुड, पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क जैसे स्टार खिलाड़ी शामिल हैं। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के क्रिकेट डायरेक्टर मो बोबट ने इस समस्या का बड़ा कारण बताया है।

    बेस्ट क्रिकेट कैलेंडर बना सबसे बड़ी वजह

    मो बोबट के मुताबिक, तेज गेंदबाज के कॉन्सटेंट होने की सबसे बड़ी दुनिया अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट की सबसे बड़ी साजिश है। प्लेयर्स को साल भर अलग-अलग अलग-अलग गेम और सीरीज़ वाले गेम्स मिलते हैं, जिससे उनके शरीर पर लगातार दबाव बना रहता है। प्रमाणित पर प्रमाणित नामांकन के लिए और यह भी निजीकरण होता है, क्योंकि उनके अध्ययन में शारीरिक मेहनत और फिटनेस की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लगातार मैच मैच से उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिलता, जिससे चोट का खतरा बढ़ जाता है।

    विचारधारा की रणनीति पर असर पड़ रहा है

    इन दस्तावेजों का सुसंगत सुसंगतता की रणनीति और संतुलन पर ध्यान दिया जा रहा है। आरसीबी को भी अपने स्टार सहयोगी जोश हेजलवुड के शुरुआती शुरुआती मैचों में नहीं जाना चाहिए। वहीं, नैथन ऐलिस पूरे टूर्नामेंट में आउट हो चुके खिलाड़ी हैं। ऐसे में टीमों को अपने फार्मूले में बदलाव करना पड़ रहा है, जिससे प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। बोबट ने कहा कि यह स्थिति सिर्फ एक टीम की नहीं है, बल्कि लगभग सभी टीमों के लिए चुनौती बन गई है।

    समाधान आसान नहीं, बेहतर क्षमता ही रास्ता

    मो बोबट ने सोचा कि इस समस्या का कोई आसान समाधान नहीं है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि फ़्रैंचाइज़ी और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड के बीच बेहतर तालमेल और संवाद ज़रूरी है। इसमें मेडिकल परीक्षाओं की भूमिका भी अहम है, जो खिलाड़ियों की फिटनेस पर लगातार नजर रखते हैं। उन्होंने हवाला देते हुए कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के शानदार प्रदर्शन की वजह से ही हेजलवुड की वापसी बेहतर तरीके से की जा सकी।

    तेजस्वी चुनौती के लिए

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि अगर क्रिकेट कैलेंडर इसी तरह से जुड़ा रहा, तो भविष्य में सूची की सूची जारी की जा सकती है और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में खिलाड़ियों के वर्कलोड और फिटनेस पर खास ध्यान देना होगा, ताकि वे लंबे समय तक खेल में बने रहें।

  • बेंच पर बैठा खिलाड़ी बना अरबों की टीम का मालिक आर्यमान बिड़ला की चौंकाने वाली कहानी

    बेंच पर बैठा खिलाड़ी बना अरबों की टीम का मालिक आर्यमान बिड़ला की चौंकाने वाली कहानी


    नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के आगाज से ठीक पहले Royal Challengers Bengaluru ने ऐसा कदम उठाया है जिसने क्रिकेट और बिजनेस दोनों दुनिया को चौंका दिया है। टीम की मालिकाना हक में बदलाव हुआ है और अब इसकी कमान एक ऐसे शख्स के हाथ में है जो कभी खुद मैदान पर मौका पाने के लिए तरसा था।

    साल 2018 की आईपीएल नीलामी में Rajasthan Royals ने आर्यमान बिड़ला को 30 लाख रुपये में खरीदा था। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 20 साल थी और उम्मीद थी कि उन्हें जल्द ही मौका मिलेगा। लेकिन पूरा सीजन गुजर गया और वह एक भी मैच नहीं खेल पाए। मैदान पर उतरने का सपना अधूरा ही रह गया।

    इस निराशा के बाद उन्होंने 2019 में क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया। यह फैसला आसान नहीं था लेकिन उन्होंने अपने परिवार के बिजनेस को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। उनके पिता Kumar Mangalam Birla के नेतृत्व में Aditya Birla Group पहले से ही देश की बड़ी कंपनियों में शामिल था और आर्यमान ने इसी दुनिया में अपनी नई पहचान बनानी शुरू की।

    समय बदला और किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। आदित्य बिड़ला ग्रुप ने अन्य निवेशकों के साथ मिलकर RCB को लगभग 16660 करोड़ रुपये में खरीद लिया। यह सौदा आईपीएल इतिहास के सबसे बड़े सौदों में शामिल हो गया। इस ऐतिहासिक डील के बाद आर्यमान बिड़ला को टीम का चेयरमैन बनाया गया।

    क्रिकेट से उनका रिश्ता पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था। उन्होंने मध्य प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट खेला और रणजी ट्रॉफी में भी नजर आए। खास बात यह है कि वह मौजूदा RCB कप्तान Rajat Patidar के साथ ओपनिंग भी कर चुके हैं। उनके फर्स्ट क्लास करियर में 9 मैचों में 414 रन शामिल हैं जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक भी है।

    अब उनकी नई भूमिका मैदान के अंदर नहीं बल्कि बोर्डरूम में है जहां वह टीम की रणनीति और भविष्य को दिशा देंगे। यह सफर सिर्फ एक खिलाड़ी का नहीं बल्कि उस सोच का उदाहरण है जहां असफलता अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत बन जाती है।

    आर्यमान बिड़ला की कहानी यह बताती है कि अगर एक रास्ता बंद हो जाए तो दूसरा रास्ता और भी बड़ा अवसर लेकर आ सकता है। कभी डेब्यू के लिए इंतजार करने वाला यह खिलाड़ी आज पूरी टीम का मालिकाना संभाल रहा है और आईपीएल के सबसे बड़े मंच पर अपनी नई पारी शुरू कर चुका है।

  • ‘हैवान’ के लिए अक्षय कुमार की दिलचस्प कोशिश, लेकिन प्रियदर्शन ने नहीं दिया मौका

    ‘हैवान’ के लिए अक्षय कुमार की दिलचस्प कोशिश, लेकिन प्रियदर्शन ने नहीं दिया मौका

    नई दिल्ली। अक्षय कुमार और डायरेक्टर प्रियदर्शन की जोड़ी ने कई हिट फिल्में दी हैं। दोनों के नाम गरम मसाला, हेरा फेरी जैसी फिल्में हैं। और अब आने वाले दिनों में भूत बंगला और हैवान में दोनों का काम नजर आने वाला है। अब हाल में डायरेक्टर ने बताया कि उन्होंने कभी अक्षय को कोई स्क्रिप्ट नहीं सुनाई। दोनों के बीच बस बातचीत होती है और वो फिल्म का हिस्सा बन जाते हैं। प्रियदर्शन ने कहा कि हैवान के लिए खुद अक्षय ने उनसे रोल मांगा था। दोनों के बीच बातचीत हुई और अक्षय को फिल्म मिल गई।

    अक्षय ने खुद मांगा रोल
    बातचीत में प्रियदर्शन ने बताया कि भूत बंगला की शूटिंग के दौरान अक्षय कुमार ने उनसे पूछा था कि वो अगली कौनसी फिल्म बना रहे हैं। डायरेक्टर ने उनसे कह दिया कि वो फिल्म बना रहे हैं लेकिन उन्हें विलेन नहीं मिल रहा है। अक्षय जो जब फिल्म के बारे अक्षय को पता चला तो वो इसका हिस्सा बन गए। प्रियदर्शन ने कहा कि वो बहुत हैरान थे। फिल्म के बारे में कोई डिटेल में डिस्कशन नहीं हुआ। मैंने अक्षय को कभी फिल्म नरेट नहीं की। मैं उन्हें बस कहानी और किरदार बता देता हूं। वो हमेशा मुझसे पूछते हैं कि मैं कितना एक्साइटेड हूं। अगर मैं उन्हें कहता हूं कि मैं एक्साइटेड हूं तो वो खुश नहीं होंगे। अगर मैंने कह दिया कि मैं बहुत एक्साइटेड हूं तो वो कहेगा चलिए फिल्म बनाते हैं सर।

    अब कॉमेडी फिल्म नहीं बनाना चाहते प्रियदर्शन
    डायरेक्टर प्रियदर्शन ने कहा कि वो अब पूरी तरह से कॉमेडी फिल्म नहीं बनाना चाहते। हैवान में भी कुछ सीन कॉमेडी के हैं। लेकिन वो एक थ्रिलर फिल्म है। डायरेक्टर ने कहा कि उन्हें काम करते हुए 45 साल हो गए हैं। अब वो थोड़ा स्लो होना चाहते हैं।

    ओप्पम का हिंदी रीमेक
    बता दें, अक्षय कुमार की हैवान एक मलयालम फिल्म ओप्पम की हिंदी रीमेक है। इस फिल्म की कहानी एक ऐसे कैदी पर आधारित है जो सजा सुनाने वाले जज और उनकी बेटी को मार देना चाहता है। लेकिन इसमें बिल्डिंग का लिफ्टमैन भी है जो जज की बेटी को बचाने की कोशिश करता है। खास बात ये है कि ये किरदार अंधा है। इस किरदार को सैफ अली खान निभाने वाले हैं। फिल्म हैवान इस साल अगस्त में दस्तक देने वाली है।

  • ‘Sabarmati Report’ के बाद Ekta Kapoor का बड़ा ऐलान-अब आएगी ‘The Terror Report’

    ‘Sabarmati Report’ के बाद Ekta Kapoor का बड़ा ऐलान-अब आएगी ‘The Terror Report’


    नई दिल्ली। टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री एकता कपूर ने अपनी नई फिल्म द टेरर रिपोर्ट का ऐलान कर दिया है। ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की सफलता के बाद अब यह फिल्म पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कीमिया पीओके पर आधारित होगी। एकता कपूर ने सोशल मीडिया पर फिल्म का टीजर शेयर करते हुए बताया कि इस बार की कहानी और भी ज्यादा बोल्ड, निडर और दमदार होगी। फिल्म के निर्देशक विष्णुवर्धन होंगे, जो इससे पहले ‘शेरशाह’ जैसी हिट फिल्म दे चुके हैं।

    पिछली फिल्म की झलक में प्रदर्शित अनाउंस वीडियो

    फिल्म के अनाउंसमेंट वीडियो की शुरुआत ‘साबरमती रिपोर्ट’ के कुछ अहम सीन और डायलॉग्स से होती है। इसमें नरेंद्र मोदी को अपनी टीम के साथ फिल्म देखते हुए भी दिखाया गया है। साथ ही योगी आदित्यनाथ का बयान भी शामिल है, जिसमें उन्होंने फिल्म को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री करने का ऐलान किया था। पिछली फिल्म की कहानी और रिसर्च के लिए काफी एक्टर मिले थे, जिसमें विक्रांत मैसी के अभिनय को भी काफी पसंद किया गया था। ऐसे में अब ‘द टेरर रिपोर्ट’ लेकर दर्शकों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

    1998 से 2025 तक की कहानियों पर आधारित कहानी

    ‘डी टेरर रिपोर्ट’ की कहानी 1998 से 2025 तक की उन घटनाओं को दर्शाती है, जो पीओके और उससे जुड़े ऑपरेशनों की कहानी हैं- गिरजाघर। फिल्म में व्हेल, सुरक्षा संचालन और वैज्ञानिक विद्वानों को बड़े पैमाने पर दिखाया गया है। अनाउंसमेंट वीडियो में संकेत दिया गया है कि यह कहानी उन अनसुने बयानों को सामने लाएगी, जिसमें अब तक बड़े पैमाने पर प्रदर्शन नहीं किया गया है। फ़िल्म के क्वेश्चन एक गंभीर और वास्तविक विषय को दर्शकों तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।

    स्टार कास्ट और रिलीज डेट का इंतजार

    एनालॉग फिल्म की स्टार कास्ट और रिलीज डेट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, फिल्म के प्रोडक्शन में शोभा कपूर, तनुज गर्ग, अतुल कस्बेकर और सुधीर चौधरी जैसे नाम जुड़े हुए हैं। ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की सफलता के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘द टेरर रिपोर्ट’ पर दर्शकों की उम्मीदें कितनी खराब हैं।

  • भूटान का पारो फेस्टिवल संस्कृति आस्था और रंगों का अद्भुत उत्सव..

    भूटान का पारो फेस्टिवल संस्कृति आस्था और रंगों का अद्भुत उत्सव..

    नई दिल्ली:  भूटान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहार लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं और सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं। इन्हीं में से सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध उत्सव है पारो त्शेचू फेस्टिवल

    यह उत्सव हर साल वसंत ऋतु में मनाया जाता है, आमतौर पर अप्रैल के शुरुआती दिनों में। इस वर्ष यह फेस्टिवल 29 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित किया जा रहा है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भूटान की आस्था, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रदर्शन है

    पारो त्शेचू के दौरान भिक्षु और स्थानीय लोग पारंपरिक मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं और बौद्ध मंत्रों का जाप करते हैं। यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक मान्यताओं और कहानियों को दर्शाता है

    इस उत्सव में लोग रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में शामिल होते हैं, जिससे पूरा वातावरण जीवंत और आकर्षक बन जाता है। यहां होने वाले मुखौटा नृत्य प्राचीन बौद्ध कथाओं और ऐतिहासिक घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं

    इस फेस्टिवल में गुरु पद्मसंभव की कहानियों को भी दर्शाया जाता है, जिन्होंने भूटान में बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। माना जाता है कि उन्होंने भूटान के सम्राट को ठीक करने में मदद की थी और इसी से तिब्बती बौद्ध धर्म की शुरुआत हुई
     पारो त्शेचू फेस्टिवल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भूटान की संस्कृति, आस्था और विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाला एक भव्य उत्सव है

  • रामनवमी 2026: प्रभु श्री राम से प्रेरित रंगोली से सजाएं घर

    रामनवमी 2026: प्रभु श्री राम से प्रेरित रंगोली से सजाएं घर


    नई दिल्ली । रामनवमी के पावन अवसर पर घर को सजाना और धार्मिक रूप से महत्त्वपूर्ण प्रतीकों से सजावट करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी अवसर पर रंगोली बनाना न केवल घर की खूबसूरती बढ़ाता है, बल्कि इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। 2026 में रामनवमी पर लोग पारंपरिक रंगोली से हटकर प्रभु श्री राम से जुड़ी थीम-बेस्ड रंगोली बनाने को अधिक पसंद कर रहे हैं। ऐसे रंगोली डिज़ाइन न केवल सुंदर दिखाई देते हैं, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं।

    सबसे सरल और प्रभावशाली डिजाइन के रूप में धनुष-बाण वाली रंगोली को अपनाया जा सकता है। इसके लिए लाल और पीले रंगों का उपयोग कर बड़े धनुष का आकार बनाएं और बीच में “जय श्री राम” लिखें। किनारों पर गेंदे के फूल सजाने से रंगोली को एक पेशेवर लुक मिलता है। यह डिजाइन बच्चों और बड़ों दोनों के लिए आसान और आकर्षक होता है।

    भगवान राम के आगमन के प्रतीक के रूप में चरण पादुका वाली रंगोली भी बहुत लोकप्रिय है। मुख्य द्वार पर छोटी-छोटी चरण पादुकाएं कुमकुम और सफेद चौक से बनाई जाती हैं और इनके चारों ओर फूलों की पंखुड़ियों का घेरा तैयार किया जाता है। यह डिज़ाइन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।

    अगर आपको चित्र बनाना कठिन लगता है, तो नाम मंत्र वाली रंगोली एक बेहतरीन विकल्प है। गहरे नीले या केसरिया रंग के बेस पर सफेद रंग से “राम” या “जय श्री राम” लिखें। बिंदुओं की मदद से इसे सजाना बेहद आसान है। इस तरह की रंगोली केवल 5 मिनट में तैयार हो सकती है और घर के मुख्य द्वार को खूबसूरती से सजाती है।

    दीपक और कमल के फूल का संयोजन भी रामलला के स्वागत के लिए अत्यंत आकर्षक विकल्प है। कमल के फूल का डिजाइन बनाएं और उसके बीच में मिट्टी का दीपक जलाएं। यह डिजाइन सादगी और भव्यता का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करता है। यदि सटीक लाइन खींचना मुश्किल हो, तो चूड़ी और चम्मच का उपयोग करके गोल घेरे और उभरे हुए डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं।

    रंगों के साथ-साथ ताजे गेंदे और गुलाब के फूलों का प्रयोग रंगोली को जीवंत और आकर्षक बनाता है। इन डिज़ाइनों से न केवल घर महक उठता है बल्कि आने वाले मेहमान और पड़ोसी भी आपकी रचनात्मकता की तारीफ किए बिना नहीं रह पाते। रंगोली बनाने का यह अनुभव धार्मिक, सौंदर्यात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से आनंददायक होता है।

    इस प्रकार, रामनवमी पर प्रभु श्री राम से प्रेरित रंगोली बनाना न केवल घर को सजाने का माध्यम है बल्कि यह श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी बनता है। चाहे धनुष-बाण हो, चरण पादुका, नाम मंत्र या दीपक-कमल का संयोजन, ये डिज़ाइन सभी उम्र के लोगों के लिए आसान और खूबसूरत विकल्प हैं। इस बार रामनवमी 2026 पर इन रंगोली डिज़ाइनों से घर को सजाएं और प्रभु श्री राम का स्वागत भव्य तरीके से करें।

  • गर्मियों में फटी एड़ियों और टैनिंग से राहत, घर पर करें आसान 15 मिनट पेडिक्योर

    गर्मियों में फटी एड़ियों और टैनिंग से राहत, घर पर करें आसान 15 मिनट पेडिक्योर


    नई दिल्ली । गर्मियों में पैरों की देखभाल पर ध्यान न देने से फटी एड़ियां, टैनिंग और रूखापन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। दिनभर जूतों में बंद रहने, पसीने और धूल के कारण पैर प्रभावित होते हैं और फंगल इंफेक्शन, खुजली और बदबू जैसी परेशानियां घर करने लगती हैं। ऐसे में महंगे पार्लर की बजाय आप घर पर ही आसान और प्राकृतिक उपायों से पैरों को फ्रेश और बेबी सॉफ्ट बना सकते हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं पैरों की सफाई और नमी की सही देखभाल की। नहाने के बाद अक्सर लोग शरीर तो पोंछ लेते हैं, लेकिन पैरों की उंगलियों के बीच के हिस्से गीले छोड़ देते हैं। यही नमी फंगल इंफेक्शन की असली जड़ बन जाती है। इसलिए पैरों को तौलिये से अच्छी तरह सुखाएं और अगर संभव हो तो थोड़ी देर उन्हें हवा या हल्की धूप दिखाएं। यह कदम पैरों को संक्रमण और बैक्टीरिया से बचाने में मदद करता है।

    फुटवियर का चयन भी बेहद महत्वपूर्ण है। गर्मियों में टाइट या सिंथेटिक जूते पहनने से बचें। ऐसे जूते चुनें जिनमें हवा का संचार आसानी से हो सके। कॉटन के मोज़े पहनना और समय-समय पर जूतों को धूप दिखाना पैरों की बदबू रोकने का सरल उपाय है।

    नीम का उपयोग आयुर्वेद में त्वचा की सुरक्षा के लिए सबसे प्रभावशाली माना गया है। गर्मियों में पैरों को फंगल इंफेक्शन और बैक्टीरिया से बचाने के लिए नहाने के पानी में नीम की पत्तियां डालें या नीम के तेल की 3-4 बूंदें मिलाएं। इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण पैरों को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

    पैरों की मृत त्वचा हटाने के लिए किचन में उपलब्ध प्राकृतिक स्क्रब का उपयोग करें। इसके लिए थोड़ी सी शक्कर या चीनी में नारियल तेल मिलाकर पैरों की हल्की मालिश करें। यह सप्ताह में एक बार करें। यह न केवल डेड स्किन को हटाता है बल्कि नारियल तेल पैरों को मखमली कोमलता और पोषण भी देता है। इसके साथ ही रक्त संचार भी बेहतर होता है, जिससे पैरों की त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है।

    इसके अलावा, फटी एड़ियों से राहत पाने के लिए पैरों को नियमित रूप से मॉइश्चराइज करना जरूरी है। रात को सोने से पहले नारियल या बादाम के तेल से एड़ियों की मालिश करें और कपड़े के सोक्स पहन लें। इससे पैरों की त्वचा नमी बनाए रखती है और टैनिंग कम होती है।

    नियमित सफाई, सही फुटवियर, नीम और नारियल आधारित प्राकृतिक उपाय अपनाकर आप गर्मियों में पैरों को स्वस्थ, सुंदर और फ्रेश रख सकते हैं। फटी एड़ियों, टैनिंग और खुजली जैसी परेशानियों से राहत पाने के लिए बस 15 मिनट का नियमित पेडिक्योर काफी है। इस गर्मी अपने पैरों को भी वही देखभाल दें जो आप अपने चेहरे को देते हैं और घर पर ही बेबी सॉफ्ट पैरों का अनुभव पाएं।

  • हफ्ते से ज्यादा खांसी है तो हो जाए सावधान टीबी का संकेत हो सकता है

    हफ्ते से ज्यादा खांसी है तो हो जाए सावधान टीबी का संकेत हो सकता है

    नई दिल्ली:  टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस आज भी भारत में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। बदलते मौसम में खांसी होना आम बात है, लेकिन हर खांसी को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। कई बार साधारण दिखने वाली खांसी किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है

    सामान्य खांसी आमतौर पर 5 से 7 दिनों में ठीक हो जाती है, जो सर्दी, वायरल इंफेक्शन या एलर्जी के कारण होती है। लेकिन अगर खांसी 2 से 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहती है और दवाओं से आराम नहीं मिलता, तो यह टीबी का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है

    टीबी सिर्फ खांसी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है। इसके साथ कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे शाम के समय हल्का बुखार, रात में ज्यादा पसीना आना, बिना कारण वजन कम होना, लगातार थकान महसूस होना और सीने में दर्द

    टीबी के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और दूसरों में भी फैल सकती है। इसलिए अगर खांसी के साथ ये लक्षण नजर आएं, तो देरी न करें और तुरंत जांच कराएं

    विशेषज्ञों के अनुसार, जागरूकता और समय पर इलाज ही टीबी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। अगर शुरुआती लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है
    हर खांसी को नजरअंदाज न करें। अगर यह लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे चेतावनी संकेत मानकर तुरंत मेडिकल सलाह लेना ही समझदारी है

  • UP: रसोई गैस सिलेंडर बुकिंग के अंतराल में बड़ा बदलाव… इन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    UP: रसोई गैस सिलेंडर बुकिंग के अंतराल में बड़ा बदलाव… इन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत


    आगरा।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आगरा (Agra) में रसोई गैस सिलिंडर (LPG cylinders) के बुकिंग अंतराल (Booking Interval.) में तेल कंपनियों ने मंगलवार को बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग की समय सीमा अलग-अलग तय कर दी गई है।

    अब 5 किलो का ‘छोटू’ सिलिंडर उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 16 दिन में, जबकि सामान्य उपभोक्ताओं को 9 दिन में मिल सकेगा। गैस की कालाबाजारी रोकने और खपत के सटीक आकलन के लिए जारी इस नई सूची का सबसे बड़ा असर जिले के 3.41 लाख उज्ज्वला लाभार्थियों पर पड़ेगा।

    नई व्यवस्था के अनुसार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए 14.2 किलोग्राम वाले सिलिंडर की बुकिंग का अंतर बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। वहीं, सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह सीमा 25 दिन निर्धारित की गई है। 10 किलो वाले कंपोजिट सिलिंडर 18 दिन में मिलेगा।

    दोहरे कनेक्शन वालों को 35 दिन बाद मिलेगा दूसरा सिलिंडर
    गैस सिलिंडर की किल्लत और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए तेल कंपनियों ने सॉफ्टवेयर में बड़े तकनीकी बदलाव किए हैं। अब दो सिलिंडर वाले ग्राहकों को रिफिल बुक करने के लिए कम से कम 35 दिनों का इंतजार करना होगा। वहीं, एक सिलिंडर वाले उपभोक्ताओं के लिए यह समय सीमा 25 दिन तय की गई है। जिला पूर्ति अधिकारी आनंद कुमार के मुताबिक, यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।


    गैस किल्लत के बीच बड़ा फैसला

    वहीं, आगरा में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति को लेकर मचे घमासान के बीच जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सिलिंडर सप्लाई करने वाली ऑयल कंपनियों और जिला पूर्ति अधिकारी के साथ अहम बैठक की। बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए डीएम ने साफ कर दिया कि अब व्यावसायिक उपभोक्ताओं को उनके औसत उपभोग का केवल 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा ही आवंटित किया जाएगा।

    भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की नई गाइडलाइन का हवाला देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि उपभोक्ताओं को दो श्रेणियों में बांटा गया है। अस्पताल, रेलवे और शैक्षणिक संस्थान जैसी अति आवश्यक सेवाओं को उनके पिछले तीन माह के औसत उपभोग का 20 प्रतिशत कोटा मिलेगा।

    वहीं, होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा जैसी आवश्यक सेवाओं को केवल 10 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में डीएम ने चेतावनी दी कि गैस सिलिंडरों की किल्लत के बीच यदि कोई एजेंसी, बिचौलिया या व्यक्ति जमाखोरी या घरेलू सिलिंडर का व्यावसायिक उपयोग में लिप्त पाया गया, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पूर्ति विभाग को निर्देश दिए कि इस नई व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए ताकि वास्तविक उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।


    डबल सिलिंडर होने पर गैस बुकिंग अब 35 दिन बाद

    – उपभोक्ताओं की रसोई गैस से जुड़ी समस्याएं और बढ़ सकती है। अब दो सिलिंडर वाले उपभोक्ता 35 दिन बाद गैस बुकिंग करा सकेंगे।
    – उज्ज्वला कनेक्शन धारक 45 दिन बाद सिलिंडर बुक करा सकेंगे। एकल वाले 25 दिन बाद सिलिंडर बुक करा सकेंगे।
    – नए नियम शहरी-ग्रामीण सभी क्षेत्रों में लागू होंगे। तय सीमा से पहले बुकिंग पर सिस्टम स्वतः ब्लॉक कर देगा।
    – 5 किलो घरेलू सिलिंडर के लिए शहरी क्षेत्र में नौ दिन व ग्रामीण क्षेत्र में 16 दिन का अंतराल तय किया है।
    – 10 किलो कंपोजिट सिलिंडर के लिए शहरी क्षेत्र में 18 दिन व ग्रामीण क्षेत्र में 32 दिन का अंतराल तय किया गया है।