Author: bharati

  • आज का राशिफल 24 सितंबर: नौकरी कारोबार धन और रिश्तों के मामले में कैसा रहेगा आपका दिन

    आज का राशिफल 24 सितंबर: नौकरी कारोबार धन और रिश्तों के मामले में कैसा रहेगा आपका दिन


    नई दिल्ली । 24 सितंबर 2026 का दिन सभी 12 राशियों के जातकों के लिए अलग अलग तरह के संकेत लेकर आया है। ज्योतिषीय आकलन के अनुसार आज कुछ लोगों को रुके हुए काम पूरे होने से राहत मिल सकती है तो कुछ जातकों को खर्च और काम के दबाव के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। नौकरी कारोबार धन परिवार और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में आज का दिन कैसा रह सकता है आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी राशियों का राशिफल।

    मेष राशि वालों के लिए आज का दिन आर्थिक मामलों में राहत देने वाला हो सकता है। लंबे समय से अटका कोई काम पूरा होने के संकेत हैं। कारोबार करने वाले लोगों को विस्तार या नए अवसर मिल सकते हैं। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा और किसी पुराने आर्थिक मामले का समाधान मिल सकता है।

    वृषभ राशि के जातकों को आज रुके हुए कामों में गति मिलने के संकेत हैं। निर्माण या संपत्ति से जुड़े मामलों में प्रगति हो सकती है। कारोबार में नए अवसर सामने आ सकते हैं। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह भविष्य के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

    मिथुन राशि वालों के लिए आजीविका और धन से जुड़े मामलों में सुधार के संकेत हैं। अटकी हुई रकम वापस मिलने से आर्थिक राहत महसूस हो सकती है। कामकाज में आपकी सक्रियता बनी रहेगी और किसी महत्वपूर्ण वस्तु की खरीदारी भी संभव है।

    कर्क राशि के जातकों के लिए नए लोगों से संपर्क बढ़ने का दिन है। ये संपर्क आगे चलकर काम आ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में चुनौती सामने आ सकती है लेकिन धैर्य और समझदारी से स्थिति संभाली जा सकती है। परिवार के लोगों का सहयोग मिलेगा।

    सिंह राशि वालों को आज साझेदारी और कार्यक्षेत्र से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण बातचीत करनी पड़ सकती है। टीम के साथ मिलकर काम करने से लाभ मिलेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रह सकती है इसलिए बड़े खर्च में जल्दबाजी करने से बचना बेहतर होगा।

    कन्या राशि वालों के सामने आज नए अवसर आ सकते हैं। नौकरी और कारोबार में आर्थिक लाभ के रास्ते बन सकते हैं। परिवार में किसी शुभ आयोजन से खुशी का माहौल रह सकता है। हालांकि अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।

    तुला राशि के लिए आज मेहनत और संघर्ष का दिन हो सकता है लेकिन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं। आर्थिक परेशानियां धीरे धीरे कम हो सकती हैं। स्वास्थ्य में सुधार महसूस हो सकता है और वाहन खरीदने की योजना भी बन सकती है।

    वृश्चिक राशि वालों के लिए व्यापारिक मामलों में दिन महत्वपूर्ण रह सकता है। नई योजना पर काम शुरू करने का अवसर मिल सकता है। आर्थिक लाभ के संकेत हैं लेकिन किसी भी फैसले से पहले जरूरी जानकारी जुटाना बेहतर रहेगा।

    धनु राशि वालों को आज कामकाज में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। धार्मिक या सामाजिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। आय के नए रास्तों पर विचार हो सकता है। पुराने संपर्कों से भी मदद मिलने की संभावना है।

    मकर राशि के जातकों को आज अपने काम और प्राथमिकताओं पर ध्यान देना होगा। जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं लेकिन व्यवस्थित तरीके से काम करने पर स्थिति संभाली जा सकती है। परिवार से जुड़ा कोई विषय मन को प्रभावित कर सकता है।

    कुंभ राशि वालों की दिनचर्या थोड़ी व्यस्त या अव्यवस्थित रह सकती है। खर्च अपेक्षा से अधिक होने की संभावना है इसलिए बजट बनाकर चलना जरूरी होगा। किसी नई परेशानी को धैर्य और सूझबूझ से हल किया जा सकता है।

    मीन राशि वालों को आज आर्थिक दबाव और मानसिक चिंता से बचने की कोशिश करनी चाहिए। काम के बीच आराम के लिए समय निकालना जरूरी होगा। विवादित लोगों से दूरी रखना बेहतर रहेगा। परिवार का सहयोग तनाव कम करने में मदद कर सकता है।

    कुल मिलाकर 24 सितंबर का दिन किसी के लिए अवसर लेकर आ सकता है तो किसी को खर्च और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना होगा। राशिफल को सामान्य ज्योतिषीय मार्गदर्शन के रूप में लेना चाहिए क्योंकि वास्तविक परिणाम व्यक्ति की जन्मकुंडली और परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकते हैं।

  • मंत्रियों की प्रस्तुतियों से तय होगी आगे की प्राथमिकताएं, विकसित भारत 2047 पर रहेगा फोकस

    मंत्रियों की प्रस्तुतियों से तय होगी आगे की प्राथमिकताएं, विकसित भारत 2047 पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर 23 और 24 सितंबर को आयोजित हो रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य विषय विकसित भारत 2047 है। इसमें सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा के साथ आगे की योजनाओं, सुधारों और प्राथमिकताओं पर विचार किया जा रहा है।

    चिंतन शिविर के पहले दिन कैबिनेट मंत्रियों की ओर से अपने-अपने मंत्रालयों के कामकाज से संबंधित प्रस्तुतियां रखी जा रही हैं। इन प्रस्तुतियों में अब तक किए गए कार्यों, प्रमुख योजनाओं की स्थिति, उपलब्धियों और आगे की कार्ययोजना से जुड़े विषय शामिल हैं।

    दूसरे दिन मंत्रियों और मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। मूल जानकारी के अनुसार, इस समीक्षा के बाद मंत्रियों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाना है। हालांकि, कैबिनेट में फेरबदल को लेकर अंतिम निर्णय के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

    इस बार का चिंतन शिविर कैबिनेट मंत्रियों पर केंद्रित है। इससे पहले राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ अलग-अलग स्तर पर समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं। इसके बाद कैबिनेट मंत्रियों के लिए अलग से दो दिवसीय मंथन रखा गया है।

    बैठक में युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। खासतौर पर जेन जी के साथ बेहतर तालमेल, उनके प्रमुख मुद्दों और सरकार की योजनाओं के साथ उनके जुड़ाव को लेकर मंत्रियों से जानकारी मांगी जा रही है।

    मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में युवाओं की प्राथमिकताओं को समझने और उनके साथ संवाद के लिए किए गए प्रयासों के बारे में भी प्रस्तुति देनी है। रोजगार से जुड़े विषयों पर युवाओं की सोच, उनकी संतुष्टि और असंतुष्टि को समझने के लिए किए गए प्रयास भी चर्चा का हिस्सा हैं।

    महिला आरक्षण से संबंधित संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को लेकर भी मंथन किया जाना है। दिए गए विवरण के अनुसार, अप्रैल में यह विधेयक पारित नहीं हो पाया था। अब इसे आगे बढ़ाने के तरीकों और इससे जुड़े सुझावों पर मंत्रियों के विचार लिए जाने हैं।

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी से जुड़े मुद्दे को भी प्रस्तुतियों में शामिल किया गया है। इस विषय को लेकर जेन जी की सोच, संबंधित क्षेत्र में इसके प्रभाव और आगे की कार्ययोजना पर मंत्रियों से जानकारी रखने को कहा गया है।

    चिंतन शिविर का व्यापक उद्देश्य सरकार के कामकाज का जायजा लेने के साथ अगले चरण के लिए सुधारों और प्राथमिकताओं की पहचान करना है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभिन्न मंत्रालयों के काम को आगे बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हो रही है।

    सरकार की यह समीक्षा प्रक्रिया केवल वर्तमान बैठक तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विकसित भारत 2047 से जुड़ी चर्चाओं और प्रस्तुतियों का क्रम पहले से जारी है। आने वाले समय में भी इस विषय पर आगे के मंथन के दौर आयोजित किए जाने की योजना है।

    वर्ष 2021 में भी केंद्रीय मंत्रिपरिषद के साथ पांच चिंतन शिविर आयोजित किए गए थे। पहला शिविर 14 सितंबर को हुआ था, जबकि अंतिम बैठक नवंबर में हुई थी। प्रत्येक सत्र करीब पांच घंटे चला था। इनमें मंत्रियों के कामकाज, कार्यकुशलता, समय और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, योजनाओं की निगरानी और शासन सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।

    नवंबर 2021 में 77 मंत्रियों को आठ समूहों में बांटकर अलग-अलग प्रशासनिक विषयों पर काम आगे बढ़ाने की कवायद भी की गई थी। वर्तमान चिंतन शिविर में भी सरकार के मौजूदा कामकाज की समीक्षा के साथ भविष्य की योजनाओं और सुधारों की दिशा तय करने पर जोर है।

  • बिप्लब कुमार देव को मिली एमपी बीजेपी प्रभारी की जिम्मेदारी, जानिए कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर

    बिप्लब कुमार देव को मिली एमपी बीजेपी प्रभारी की जिम्मेदारी, जानिए कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर

    मध्य प्रदेश : में भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए नए प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारी की नियुक्ति की है। त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देव को मध्य प्रदेश का नया प्रभारी बनाया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश की नेता और सांसद रेखा वर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव के साथ प्रदेश में प्रभारी पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी विराम लग गया है।

    बिप्लब कुमार देव का राजनीतिक सफर संगठनात्मक गतिविधियों से शुरू हुआ। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे और बाद में दिल्ली में संगठन के वरिष्ठ नेता के.एन. गोविंदाचार्य के सहायक के तौर पर काम करते हुए राजनीतिक संगठन का अनुभव हासिल किया। वर्ष 2016 में उन्हें त्रिपुरा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।

    उनके नेतृत्व में बीजेपी ने वर्ष 2018 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इस चुनाव के बाद राज्य में बीजेपी की सरकार बनी और लंबे समय से सत्ता में रहे वाम दल के शासन का अंत हुआ। 9 मार्च 2018 को बिप्लब कुमार देव ने त्रिपुरा के 10वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। वह वर्ष 2018 से 2022 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे।

    वर्ष 2022 में बिप्लब देव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां दी गईं। वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे और हरियाणा बीजेपी के प्रभारी के तौर पर काम किया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने त्रिपुरा पश्चिम सीट से जीत दर्ज की और लोकसभा पहुंचे।

    इसके बाद पार्टी संगठन में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। बिप्लब कुमार देव को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया। अब उन्हें मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य का प्रभारी नियुक्त किया गया है। प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और केंद्रीय नेतृत्व तथा राज्य इकाई के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी उनके पास होगी।

    मध्य प्रदेश में बिप्लब देव के साथ रेखा वर्मा को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। रेखा वर्मा उत्तर प्रदेश की नेता हैं और धौरहरा लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुकी हैं। पार्टी की राष्ट्रीय टीम में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है। अब वह मध्य प्रदेश में प्रभारी के साथ मिलकर संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का काम करेंगी।

    इससे पहले मध्य प्रदेश के प्रभारी की जिम्मेदारी डॉ. महेंद्र सिंह के पास थी। अब उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में वहां संगठन से जुड़े कामों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मध्य प्रदेश में उनके स्थान पर बिप्लब कुमार देव को जिम्मेदारी दी गई है।

    सह प्रभारी के स्तर पर भी बदलाव हुआ है। इससे पहले यह जिम्मेदारी सतीश कुमार उपाध्याय संभाल रहे थे। अब उनकी जगह रेखा वर्मा को मध्य प्रदेश का सह प्रभारी बनाया गया है। इस बदलाव के बाद प्रदेश संगठन में प्रभारी और सह प्रभारी की नई टीम काम करेगी।

    प्रदेश प्रभारी का मुख्य काम पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य संगठन के बीच तालमेल बनाए रखना होता है। वह प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेताओं के साथ मिलकर संगठनात्मक गतिविधियों, पार्टी कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों से जुड़े मामलों पर काम करते हैं। राज्य संगठन से मिलने वाली जानकारी और फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने में भी प्रभारी की भूमिका होती है। सह प्रभारी संगठनात्मक कार्यों में प्रभारी का सहयोग करते हैं।

  • चुनाव आयोग विवाद पर भाजपा का पलटवार, संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों पर उठाए सवाल

    चुनाव आयोग विवाद पर भाजपा का पलटवार, संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी ने आयोग का बचाव किया है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के भीतर अलग-अलग विषयों पर होने वाली चर्चा और असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

    विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के तीनों आयुक्तों के बीच पिछले करीब 10 महीनों में 14 मौकों पर आधिकारिक आपत्तियों और पत्राचार की बात सामने आई है। इन मामलों में SIR, नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6, मतदाता सूची से जुड़े तकनीकी प्रबंधन और पश्चिम बंगाल में नाम हटाने से संबंधित विषय शामिल बताए गए हैं। आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उसके फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे।

    संबित पात्रा ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच संवाद और अलग-अलग विचार सामने आना अपने आप में किसी संस्थागत संकट का प्रमाण नहीं है। उनके मुताबिक, किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले चर्चा, विचार-विमर्श और असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वाभाविक प्रक्रिया है। भाजपा ने विपक्ष के उस तर्क को भी खारिज किया जिसमें आयोग के भीतर मतभेदों को उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल के तौर पर पेश किया जा रहा है।

    भाजपा नेता ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावी राजनीति में अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के बाद विपक्षी दल लगातार संवैधानिक संस्थाओं को विवाद में खींच रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाना कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक शैली रही है। भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोप मतदाताओं के जनादेश पर भी सवाल खड़ा करते हैं।

    विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की विधानसभा सीटों के आंकड़ों का भी भाजपा ने उल्लेख किया। संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष भाजपा पर मतदाता सूची में नाम हटाकर चुनावी लाभ लेने का आरोप लगाता है, लेकिन जिन 20 विधानसभा सीटों पर सबसे अधिक मतदाता नाम हटाए जाने की बात सामने आई, उनमें 13 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि भाजपा छह सीटों पर विजयी रही। इन 20 सीटों में एक सीट कांग्रेस के खाते में भी गई।

    भाजपा ने इन आंकड़ों के जरिए विपक्ष के उन आरोपों पर सवाल उठाया जिनमें मतदाता सूची में बदलाव को सीधे भाजपा के चुनावी लाभ से जोड़ने की बात कही जा रही है। पार्टी का तर्क है कि यदि मतदाता नाम हटाए जाने की प्रक्रिया से भाजपा को सीधा लाभ हुआ होता, तो सबसे अधिक नाम हटने वाली सभी सीटों पर चुनावी परिणाम एक ही दिशा में नहीं होते।

    दूसरी ओर, विपक्षी दल चुनाव आयोग की पारदर्शिता, मतदाता सूची में बदलाव और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आयोग के भीतर आयुक्तों के बीच हुई आपत्तियों और संवाद को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज है। आयोग की ओर से अपने फैसलों को सामूहिक मंजूरी से लिया गया बताया गया है।

    फिलहाल SIR, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग के भीतर हुई चर्चाओं को लेकर राजनीतिक टकराव जारी है। भाजपा इन घटनाओं को संस्थागत संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, जबकि विपक्ष इन्हीं घटनाक्रमों के आधार पर आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।

  • मंत्री विश्वास सारंग का राहुल गांधी पर हमला, सोनिया गांधी के वोट को लेकर उठाए सवाल

    मंत्री विश्वास सारंग का राहुल गांधी पर हमला, सोनिया गांधी के वोट को लेकर उठाए सवाल


    मध्य प्रदेश:
    सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के शासनकाल में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची के मामले का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

    सारंग ने कहा कि कांग्रेस के समय लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का किस तरह मजाक बनाया जाता था, इसका उदाहरण सोनिया गांधी से जुड़ा मामला है। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि उस दौर में लोकतंत्र की व्यवस्था को लेकर कई ऐसे सवाल सामने आए, जिनका जवाब दिया जाना चाहिए।

    मंत्री ने सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम और उनके मतदान को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में मतदान के अधिकार से संबंधित स्पष्ट प्रावधान हैं और केवल पात्र नागरिकों को ही मतदान का अधिकार प्राप्त है। इसी आधार पर उन्होंने पूछा कि सोनिया गांधी किस हैसियत से वोट दे रही थीं।

    विश्वास सारंग ने राहुल गांधी के संविधान के पालन से जुड़े बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बार-बार संविधान की बात करते हैं, लेकिन मतदान के अधिकार से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

    उन्होंने कांग्रेस पर देश में लंबे समय से कथित वोट चोरी करने का आरोप लगाया। सारंग ने कहा कि यदि किसी ऐसे व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज है, जो भारत का नागरिक नहीं है और उसने मतदान भी किया है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

    मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और मतदान व्यवस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता तथा नियमों का पालन जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

    सारंग ने अपने बयान में कांग्रेस के पुराने राजनीतिक इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के सत्ता में आने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से उनके अनुसार पीछे के दरवाजे से सत्ता हासिल की गई थी, उसी राजनीतिक सोच के प्रभाव आज भी कांग्रेस में दिखाई देते हैं।

    उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस द्वारा संविधान और लोकतंत्र को लेकर उठाए जा रहे मुद्दों पर भी सवाल खड़े किए। सारंग का कहना था कि कांग्रेस को पहले अपने शासनकाल और उससे जुड़े विवादों पर जवाब देना चाहिए, उसके बाद लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाने चाहिए।

    मंत्री ने कहा कि देश की चुनावी व्यवस्था में मतदाता सूची का विशेष महत्व है। किसी योग्य नागरिक का नाम छूटना या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल होना चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। इसलिए ऐसे मामलों की जांच और तथ्यों की स्पष्टता जरूरी है।

    सोनिया गांधी के मतदाता सूची से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए सारंग ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला तेज किया। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस के लोकतंत्र तथा संविधान से जुड़े दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपने अतीत और वर्तमान में उठ रहे सवालों का भी सामना करना चाहिए।

    विश्वास सारंग के बयान के बाद मतदाता सूची, मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। उनके आरोपों के केंद्र में कांग्रेस का शासनकाल, सोनिया गांधी से जुड़ा मतदाता सूची का मुद्दा और राहुल गांधी के संविधान संबंधी बयान रहे।

  • पत्नी प्रीति के जन्मदिन पर रवि किशन ने साझा की तस्वीरें, खास संदेश में बताया जीवन में उनका महत्व

    पत्नी प्रीति के जन्मदिन पर रवि किशन ने साझा की तस्वीरें, खास संदेश में बताया जीवन में उनका महत्व

    नई दिल्ली ।अभिनेता रवि किशन ने पत्नी प्रीति किशन के जन्मदिन के मौके पर उनके साथ अपनी कुछ तस्वीरें साझा करते हुए खास अंदाज में शुभकामनाएं दी हैं। निजी जिंदगी को आमतौर पर ज्यादा सार्वजनिक नहीं करने वाले रवि किशन ने इस अवसर पर पत्नी के प्रति अपने भाव व्यक्त किए और उनके साथ को अपनी जिंदगी की अहम ताकत बताया।

    रवि किशन ने प्रीति के साथ तस्वीरें साझा करते हुए उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। संदेश में उन्होंने पत्नी को अपनी ताकत और अपने बच्चों के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने सुख-दुख में साथ निभाने के लिए प्रीति के प्रति आभार भी जताया और उनके लिए अपने प्यार का इजहार किया।

    अपने संदेश में रवि किशन ने प्रीति के लिए महादेव से आशीर्वाद बनाए रखने की कामना भी की। तस्वीरों में दोनों साथ नजर आ रहे हैं। इस मौके पर साझा की गई तस्वीरों और संदेश में लंबे वैवाहिक रिश्ते के प्रति अभिनेता का जुड़ाव और सम्मान दिखाई दिया।

    रवि किशन और प्रीति की मुलाकात स्कूल के दिनों में हुई थी। अभिनेता ने पहले बताया था कि जब वह 11वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी उन्हें प्रीति पसंद आ गई थीं। स्कूल के समय से शुरू हुआ यह रिश्ता आगे चलकर शादी में बदल गया।

    रवि किशन अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र करते हुए कई बार प्रीति की भूमिका को महत्वपूर्ण बता चुके हैं। मुंबई आने के बाद फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए उन्हें लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान प्रीति उनके साथ खड़ी रहीं और मुश्किल परिस्थितियों में उनका हौसला बनाए रखा।

    अभिनेता के अनुसार, उनके शुरुआती संघर्ष के दौर में परिवार को संभालने में भी प्रीति ने अहम भूमिका निभाई। रवि किशन ने अपनी सफलता के पीछे पत्नी के योगदान को कई मौकों पर स्वीकार किया है। उनके लिए प्रीति केवल जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि मुश्किल समय में भरोसे का आधार भी रही हैं।

    रवि किशन ने एक अवसर पर पत्नी के प्रति अपने सम्मान का जिक्र करते हुए बताया था कि जब प्रीति सो रही होती हैं, तब वह उनके पैर छूते हैं। उन्होंने कहा था कि प्रीति उन्हें अपने पैर छूने नहीं देतीं। इस बात के जरिए उन्होंने पत्नी के प्रति अपने सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव को व्यक्त किया था।

    रवि किशन और प्रीति के परिवार में तीन बेटियां और एक बेटा है। अभिनेता अक्सर अपने परिवार से जुड़े खास पलों की तस्वीरें भी साझा करते रहे हैं। हालांकि, निजी जीवन को लेकर वह सामान्य तौर पर सीमित जानकारी ही सार्वजनिक करते हैं।

    फिल्मी करियर की बात करें तो रवि किशन ने भोजपुरी सिनेमा से अपनी पहचान बनाई और बाद में हिंदी फिल्मों में भी काम किया। अभिनय के साथ उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। उनकी सार्वजनिक जिंदगी में व्यस्तताओं के बावजूद परिवार उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

    पत्नी के जन्मदिन पर साझा किया गया संदेश इसी पारिवारिक जुड़ाव को सामने लाता है। रवि किशन ने अपने शब्दों के जरिए प्रीति को परिवार की प्रेरणा बताते हुए उनके योगदान के लिए आभार जताया। जन्मदिन के अवसर पर साझा की गई तस्वीरों और संदेश के जरिए उन्होंने अपने लंबे रिश्ते के प्रति सम्मान और स्नेह भी व्यक्त किया।

  • शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए बुधवार को बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी-ईरान वार्ता की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों के करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहने से बाजार धारणा को कुछ सहारा मिला। इसके साथ ही घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेतों ने भी निवेशकों के रुख को सकारात्मक बनाए रखा।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स 299.17 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,828.25 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 117.80 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,446.80 के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों ने पिछले सत्र की कमजोरी के बाद अच्छी वापसी की।

    व्यापक बाजार में भी खरीदारी का माहौल देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.70 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.89 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि तेजी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की सक्रियता बनी रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.4 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। इसके अलावा एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, रियल्टी और सीमेंट से जुड़े शेयरों में भी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और मेटल शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।

    दूसरी ओर, आईटी और मीडिया क्षेत्र दबाव में रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मीडिया 0.50 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। आईटी शेयरों में सुस्ती के कारण बाजार की कुल बढ़त ऊपरी स्तरों पर कुछ सीमित रही।

    निफ्टी50 के प्रमुख तेजी वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, हिंडाल्को, टाटा स्टील, अपोलो हॉस्पिटल्स और जेएसडब्ल्यू स्टील शामिल रहे। इनके अलावा ग्रासिम, नेस्ले इंडिया, आईटीसी, एलएंडटी, पावर ग्रिड और अदाणी पोर्ट्स में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं एचसीएल टेक, टाइटन, इंफोसिस, कोल इंडिया, टीसीएस, विप्रो, एनटीपीसी, बीईएल और ट्रेंट जैसे शेयरों में कमजोरी रही।

    बाजार की चाल पर नजर डालें तो कारोबारी सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर बना रहा। मजबूत अमेरिकी डॉलर के बीच भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। हालांकि, सितंबर के फ्लैश पीएमआई के उम्मीद से बेहतर आंकड़ों ने घरेलू आर्थिक गतिविधियों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।

    महंगाई का दबाव बढ़े बिना आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार मजबूत रहने की उम्मीद ने निवेशकों के भरोसे को सहारा दिया। व्यापक बाजार में खरीदारी और एशियाई बाजारों की मजबूती के बीच घरेलू शेयरों में भी सकारात्मक रुख बना रहा। हालांकि, आईटी क्षेत्र की कमजोरी के कारण प्रमुख सूचकांकों की बढ़त दिन के ऊपरी स्तरों तक पूरी तरह कायम नहीं रह सकी।

  • कार्तिक आर्यन की उपलब्धि पर भावुक हुए मुरलीकांत पेटकर, मेहनत और अभिनय की जमकर सराहना

    कार्तिक आर्यन की उपलब्धि पर भावुक हुए मुरलीकांत पेटकर, मेहनत और अभिनय की जमकर सराहना

    नई दिल्ली ।कार्तिक आर्यन के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट एक्टर का सम्मान हासिल करना बेहद खास उपलब्धि रही। फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाने के लिए उन्हें यह पुरस्कार मिला। सम्मान मिलने के बाद कार्तिक को फिल्म जगत से लगातार बधाइयां मिल रही हैं। इनमें सबसे खास बधाई उस वास्तविक शख्स की रही, जिसकी जिंदगी को उन्होंने पर्दे पर जीवंत किया।

    पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर ने कार्तिक आर्यन को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कार्तिक की मेहनत और फिल्म में उनके अभिनय की सराहना करते हुए इसे गर्व का क्षण बताया। मुरलीकांत ने कहा कि कार्तिक ने जिस समर्पण के साथ उनके किरदार को निभाया, वह प्रशंसा के योग्य है।

    मुरलीकांत पेटकर ने कार्तिक की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि ‘चंदू चैंपियन’ के लिए बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिलना गर्व की बात है। उन्होंने फिल्म में किरदार को निभाने के लिए कार्तिक द्वारा की गई मेहनत को भी विशेष रूप से सराहा।

    उन्होंने फिल्म के निर्देशक कबीर खान और निर्माता साजिद नाडियाडवाला के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उनके अनुसार, मुरलीकांत पेटकर की कहानी को बड़े पर्दे पर संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ प्रस्तुत किया गया। फिल्म की पूरी टीम ने मिलकर उनकी जीवन यात्रा और संघर्ष को दर्शकों तक पहुंचाने का काम किया।

    ‘चंदू चैंपियन’ 14 जून 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म का निर्देशन कबीर खान ने किया था और कार्तिक आर्यन ने इसमें मुरलीकांत पेटकर की भूमिका निभाई थी। कहानी एक ऐसे व्यक्ति के जीवन पर आधारित है, जिसने कई कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बाद भी अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा।

    मुरलीकांत पेटकर भारतीय सेना में रह चुके हैं। एक हादसे के बाद उन्हें शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने खेल को अपनी नई दिशा बनाया और पैरालिंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल हासिल किया।

    फिल्म में कार्तिक आर्यन के साथ विजय राज, राजपाल यादव और भाग्यश्री भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए। मुरलीकांत पेटकर के जीवन के अलग-अलग चरणों को पर्दे पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए कार्तिक ने अपनी फिटनेस और शारीरिक क्षमता पर काफी काम किया था।

    कार्तिक ने फिल्म के लिए बॉक्सिंग और तैराकी की ट्रेनिंग ली। उन्होंने अपने शरीर में भी बड़ा बदलाव किया, ताकि किरदार के अलग-अलग दौर को वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया जा सके। उनके अभिनय और तैयारी को मिली राष्ट्रीय स्तर की मान्यता के बाद खुद मुरलीकांत पेटकर की ओर से मिली बधाई ने इस उपलब्धि को और खास बना दिया है।

    फिल्म की कहानी संघर्ष, मेहनत, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति दृढ़ता पर केंद्रित है। मुरलीकांत पेटकर की वास्तविक जीवन यात्रा को पर्दे पर निभाने वाले कार्तिक आर्यन को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना उनके अभिनय सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

  • BJP ने बदली राष्ट्रीय मीडिया टीम आशीष उषा अग्रवाल बने मीडिया सह-संयोजक MP में निभा चुके हैं अहम भूमिका

    BJP ने बदली राष्ट्रीय मीडिया टीम आशीष उषा अग्रवाल बने मीडिया सह-संयोजक MP में निभा चुके हैं अहम भूमिका


    भोपाल । भारतीय जनता पार्टी ने अगस्त 2026 में अपनी नई राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम का ऐलान किया था जिसमें मीडिया विभाग में भी बदलाव किए गए। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में घोषित टीम में अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बनाया गया जबकि मध्यप्रदेश के आशीष उषा अग्रवाल प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। इससे मध्यप्रदेश BJP के मीडिया संगठन से जुड़े आशीष अग्रवाल की भूमिका प्रदेश स्तर से बढ़कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है।

    आशीष उषा अग्रवाल लंबे समय से BJP के मीडिया विभाग से जुड़े रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने मध्यप्रदेश BJP में मीडिया पैनलिस्ट के तौर पर काम किया और इसके बाद प्रदेश प्रवक्ता तथा प्रदेश मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारियां संभालीं। इस दौरान उनका काम पार्टी के राजनीतिक मुद्दों को मीडिया के सामने रखने और प्रदेश संगठन तथा मीडिया के बीच समन्वय से जुड़ा रहा। 2023 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भी वे पार्टी की प्रदेश मीडिया व्यवस्था से जुड़े प्रमुख पद पर रहे।

    अब राष्ट्रीय मीडिया टीम में सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका कार्यक्षेत्र मध्यप्रदेश से आगे बढ़कर पार्टी के राष्ट्रीय संगठन तक हो गया है। BJP की घोषित राष्ट्रीय टीम में मीडिया विभाग की कमान अनिल बलूनी को दी गई है जबकि आशीष अग्रवाल के साथ प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को सह-संयोजक बनाया गया है।

    राष्ट्रीय मीडिया टीम में बदलाव ऐसे समय हुआ है जब BJP ने अपने संगठन में कई स्तरों पर नई जिम्मेदारियां तय की हैं। पार्टी ने मीडिया के साथ सोशल मीडिया संगठन में भी नियुक्तियां की हैं। दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया जबकि प्रीति गांधी शिवानंद द्विवेदी आलोक भट्ट और अरुण यादव को सोशल मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। इस तरह पार्टी के पारंपरिक मीडिया और डिजिटल संचार दोनों क्षेत्रों के लिए नई टीम सामने आई है।

    आशीष अग्रवाल के राजनीतिक और संगठनात्मक सफर की शुरुआत ग्वालियर से जुड़ी रही है। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार वे छात्र जीवन से सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे। इसके बाद BJP की संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता बढ़ी और धीरे धीरे मीडिया विभाग में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती गई। पार्टी के प्रदेश मीडिया संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने के बाद अब उन्हें राष्ट्रीय टीम में स्थान मिला है।

    राजनीति में सक्रिय होने से पहले उनका पेशेवर अनुभव कॉरपोरेट क्षेत्र में भी रहा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने ICICI Bank और उसके समूह में काम किया। उन्होंने Great Lakes Institute of Management Chennai से MBA की पढ़ाई की है जबकि Jiwaji University Gwalior से MA और B.Com की डिग्री हासिल की है।

    BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में आशीष अग्रवाल की नियुक्ति के साथ मध्यप्रदेश के एक और पार्टी पदाधिकारी को राष्ट्रीय संगठन में भूमिका मिली है। अगस्त में घोषित टीम के अनुसार अनिल बलूनी राष्ट्रीय मीडिया संयोजक हैं और आशीष अग्रवाल प्रदीप भंडारी तथा सिद्धार्थ यादव उनके साथ मीडिया सह-संयोजक के रूप में काम करेंगे।

    इस नियुक्ति के बाद आशीष अग्रवाल की जिम्मेदारी अब केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी। राष्ट्रीय मीडिया विभाग में उनकी भूमिका पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के मीडिया समन्वय और संगठनात्मक संचार से जुड़े कामों में होगी। वहीं अलग अलग राज्यों और क्षेत्रों में पार्टी की मीडिया गतिविधियों को राष्ट्रीय संगठन से जोड़ना नई टीम की जिम्मेदारियों का हिस्सा रहेगा।

  • बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, हड़ताल से पहले रविवार को खुलेगा बैंक, जानिए 27 सितंबर के फैसले का पूरा असर

    बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, हड़ताल से पहले रविवार को खुलेगा बैंक, जानिए 27 सितंबर के फैसले का पूरा असर

    नई दिल्ली ।सरकारी बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को देखते हुए केंद्र सरकार ने ग्राहकों को राहत देने के लिए 27 सितंबर 2026, रविवार को बैंक शाखाएं खुली रखने का फैसला किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लगातार छुट्टियों और हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित असर को कम करना है।

    सरकार के इस निर्णय के तहत सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 27 सितंबर को सामान्य कार्यदिवस की तरह काम करेंगे। इससे उन ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेने का अवसर मिलेगा, जिन्हें नकद लेनदेन, दस्तावेजी कामकाज या अन्य जरूरी शाखा संबंधी सेवाओं की आवश्यकता है।

    बैंक कर्मचारियों के संयुक्त संगठन ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। प्रस्तावित हड़ताल से ठीक पहले 26 सितंबर को शनिवार और 27 सितंबर को रविवार है। ऐसे में लगातार छुट्टियों के साथ हड़ताल होने पर बैंकिंग सेवाओं में कई दिनों तक व्यवधान की स्थिति बन सकती थी।

    इसी संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए रविवार को बैंक खोलने का फैसला किया गया है। सरकार का कहना है कि आम नागरिकों की जरूरी बैंकिंग जरूरतें लंबे समय तक प्रभावित न हों और सेवाओं में निरंतरता बनी रहे, इसके लिए पहले से आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

    27 सितंबर को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में भी कामकाज होगा। बैंक शाखाओं के अलावा संबंधित बैंकिंग ढांचे को भी सक्रिय रखने की व्यवस्था की गई है। इसका मकसद ग्राहकों को जरूरी सेवाओं के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराना है।

    हड़ताल का मुख्य मुद्दा बैंकों में सप्ताह के दौरान पांच कार्यदिवस लागू करने की मांग है। बैंक कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मार्च 2024 में हुए द्विपक्षीय वेतन संशोधन समझौते के दौरान पांच कार्यदिवस की व्यवस्था को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया है।

    बैंक कर्मचारी संगठन इसी मांग को लेकर सरकार और बैंक प्रबंधन के समक्ष अपनी बात रखते रहे हैं। प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल भी इसी मुद्दे को लेकर बुलाई गई है। सरकार की ओर से कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की गई है।

    बैंकिंग सेवाएं आम नागरिकों, कारोबारियों और विभिन्न संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। लगातार छुट्टियों के बाद हड़ताल होने की स्थिति में शाखाओं पर काम का दबाव बढ़ सकता है। रविवार को बैंक खोलने का फैसला इसी संभावित व्यवधान को कम करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

    ग्राहकों के लिए 27 सितंबर का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि यह सामान्य रविवार होने के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में बैंकिंग कार्य उपलब्ध रहेगा। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल के कारण शाखाओं के नियमित कामकाज पर असर पड़ सकता है।

    सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से सेवाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया गया है। वहीं कर्मचारी संगठन अपनी पांच दिवसीय कार्यसप्ताह की मांग को लेकर हड़ताल के कार्यक्रम पर कायम हैं। ऐसे में सितंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं की स्थिति पर ग्राहकों और कारोबारियों की नजर रहेगी।