Author: bharati

  • 27% OBC आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का CM मोहन यादव को पत्र, 2022 से नियुक्ति के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए उठाई आवाज

    27% OBC आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का CM मोहन यादव को पत्र, 2022 से नियुक्ति के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए उठाई आवाज


    भोपाल। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण और इससे जुड़ी रुकी नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की है। 22 सितंबर को लिखे गए पत्र को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी सार्वजनिक किया। उन्होंने यह मुद्दा इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान सामने आने के बाद उठाया है।

    राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि इंदौर के कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के कई छात्रों ने शिक्षा रोजगार और भविष्य से जुड़े सवाल उनके सामने रखे थे। इनमें OBC आरक्षण के तहत रुकी नियुक्तियों का मामला भी प्रमुखता से सामने आया। राहुल गांधी के अनुसार छात्रों ने बताया कि उन्होंने परीक्षाएं पास करने के साथ चयन प्रक्रिया भी पूरी कर ली है लेकिन 87:13 व्यवस्था के तहत OBC आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां लंबित हैं। उनके मुताबिक इन पदों पर चयनित अभ्यर्थी वर्ष 2022 से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने पत्र में यह भी कहा कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया था लेकिन इसके बावजूद मामला अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर रास्ता निकालने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे युवाओं का समय और अधिक नहीं बीतना चाहिए।

    यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के प्रावधान और इसके खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इसके बाद इस बढ़ोतरी को अदालत में चुनौती दी गई। इसी कानूनी विवाद के बीच भर्ती प्रक्रिया में 87:13 व्यवस्था अपनाई गई जिसमें 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां की जाती रहीं जबकि विवादित 13 प्रतिशत पदों को लंबित रखा गया।

    इंदौर के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में भी इसी मुद्दे को लेकर अभ्यर्थियों ने राहुल गांधी के सामने अपनी बात रखी थी। छात्रों ने बताया था कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नियुक्तियां लंबित रहने से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी बातचीत के बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले के समाधान की मांग की।

    दूसरी ओर इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि OBC आरक्षण से जुड़े विवाद को तथ्यों के साथ समझना चाहिए और सरकार की ओर से 13 प्रतिशत पदों को मनमाने तरीके से रोकने की बात सही नहीं है। वहीं मंत्री विश्वास सारंग ने राहुल गांधी के पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि OBC आरक्षण का विवाद पिछली कांग्रेस सरकार के फैसले से जुड़ा है और मौजूदा सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    इस बीच OBC आरक्षण से जुड़ा मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। भर्ती और आरक्षण से जुड़े अलग अलग मामलों में अदालत की कार्यवाही के कारण 27 प्रतिशत आरक्षण के विवादित हिस्से पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार बना हुआ है। अदालत में 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर पक्ष और विपक्ष में दलीलें पेश की जा चुकी हैं।

    राहुल गांधी की चिट्ठी के बाद अब 27 प्रतिशत OBC आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। एक ओर चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति और आरक्षण से जुड़े मामले के समाधान की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर सरकार इस विवाद की जिम्मेदारी को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठा रही है। ऐसे में आगे की स्थिति न्यायिक प्रक्रिया और सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर रहेगी।

  • राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर

    राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों कई ऐसे मामले चर्चा में हैं जिनमें नेताओं के बयान कार्यक्रमों की व्यवस्थाएं और प्रशासनिक घटनाक्रम सुर्खियां बटोर रहे हैं। इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखी चिट्ठी से लेकर जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा की दिशा को लेकर सामने आए अलग अलग बयानों और बड़वानी में दिव्यांगों के उपकरण वितरण कार्यक्रम के टलने तक तीन मामले चर्चा में हैं।

    इंदौर में 19 सितंबर को हुए छात्रों की गूंज कार्यक्रम में ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा उठा था। इसके बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की। राहुल गांधी ने 22 सितंबर को पत्र लिखा था और 23 सितंबर को इसे सार्वजनिक किया। उन्होंने पत्र में छात्रों की ओर से उठाए गए शिक्षा रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।

    हालांकि पत्र सार्वजनिक होने के बाद इसका एक संशोधित संस्करण सामने आया। शुरुआती पोस्ट में पत्र के अंतिम हिस्से के दो पैराग्राफ दोहराए गए थे। इसके बाद पुरानी पोस्ट हटाकर संशोधित पत्र साझा किया गया। इस वजह से पत्र में हुई टाइपिंग या संपादन संबंधी गलती भी चर्चा में आ गई। दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि 13 प्रतिशत पदों का मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे में इस मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप भी देखने को मिल रहे हैं।

    दूसरा मामला जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा के स्वागत से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के तहत यात्राएं निकाली जा रही हैं। जबलपुर में यात्रा के स्वागत के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों और यात्रा के साथ चल रहे कलश पर लिखी जानकारी में अंतर की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री राकेश सिंह और भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने यात्रा के वडनगर से वाराणसी जाने की जानकारी दी जबकि यात्रा के साथ मौजूद कलश पर वाराणसी से वडनगर की दिशा लिखी होने का उल्लेख किया गया। इसी वजह से स्वागत कार्यक्रम के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर चर्चा शुरू हुई।

    तीसरा मामला बड़वानी के पानसेमल का है जहां करीब 200 दिव्यांग और उनके परिजन सहायक उपकरण लेने पहुंचे थे। 21 सितंबर को आयोजित सामाजिक सशक्तीकरण शिविर में व्हीलचेयर ट्राइसाइकिल और दूसरे उपकरण वितरित किए जाने थे। शिविर की तैयारियां पूरी थीं और लाभार्थी भी पहुंच चुके थे लेकिन कार्यक्रम अचानक स्थगित हो गया। रिपोर्टों के अनुसार निर्धारित कार्यक्रम में विधायक की मौजूदगी नहीं हो पाने के कारण वितरण टल गया और लाभार्थियों को बिना उपकरण लिए लौटना पड़ा।

    बाद में दोबारा कार्यक्रम आयोजित कर उपकरण वितरित किए गए। इस घटनाक्रम के बाद कार्यक्रमों की तैयारी और लाभार्थियों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठे। रिपोर्ट में विधायक की ओर से कार्यक्रम की जानकारी नहीं होने की बात भी सामने आई है जबकि कार्यक्रम के बैनर पर उनका नाम मुख्य अतिथि के रूप में दर्ज था।

    इन तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े अलग अलग पहलुओं को सामने रखा है। एक तरफ ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। दूसरी तरफ सेवा संकल्प यात्रा के दौरान सामने आया दिशा संबंधी अंतर चर्चा में रहा। वहीं पानसेमल में दिव्यांग लाभार्थियों को कार्यक्रम टलने के कारण दोबारा इंतजार करना पड़ा। इन घटनाओं के जरिए प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों के साथ साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों की योजना और क्रियान्वयन भी चर्चा में आ गया है।

  • बीच सड़क बेरिकेड्स, दोनों तरफ गड्ढे, रायसेन रोड पर कैसे निकलें वाहन, मेट्रो काम के बीच बढ़ी परेशानी

    बीच सड़क बेरिकेड्स, दोनों तरफ गड्ढे, रायसेन रोड पर कैसे निकलें वाहन, मेट्रो काम के बीच बढ़ी परेशानी


    भोपाल। भोपाल में बारिश और मेट्रो प्रोजेक्ट के चलते कई इलाकों की सड़कों की हालत खराब हो गई है। रायसेन रोड पर स्थिति ज्यादा परेशानी वाली नजर आ रही है। सुभाषनगर चौराहे से रत्नागिरी तक सड़क जगह जगह से उखड़ गई है। कई हिस्सों में गड्ढे और कीचड़ के कारण वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश रुकने के बाद इन्हीं सड़कों से धूल के गुबार उठ रहे हैं। इस बीच सड़क के बीचोंबीच मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बेरिकेडिंग की गई है जिससे वाहनों के निकलने की जगह और कम हो गई है।

    कॅरियर कॉलेज से रत्नागिरी के बीच कई स्थानों पर सड़क की हालत इतनी खराब है कि वाहन चालकों को संभलकर निकलना पड़ रहा है। रायसेन रोड पर बस और लोडिंग वाहन भी फंसने की स्थिति सामने आ रही है। इससे कई बार यातायात प्रभावित हो जाता है। कांग्रेस नेता अभिनव बारोलिया ने सड़क की बदहाल स्थिति और फंसे वाहनों का वीडियो जारी किया है। वीडियो के जरिए उन्होंने सड़क की स्थिति को लेकर जिम्मेदार विभागों पर सवाल उठाए हैं।

    कांग्रेस नेता के अनुसार रायसेन रोड पर हर दिन करीब 15 से 20 वाहन फंस जाते हैं। इनमें लोडिंग वाहनों के पहिए गड्ढों में फंसने के साथ बसों के कारण भी यातायात प्रभावित होने की बात कही गई है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति का असर आम वाहन चालकों के साथ आसपास के रहवासियों और सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ रहा है।

    रायसेन रोड पर मेट्रो की ब्लू लाइन का काम भी चल रहा है। भदभदा से रत्नागिरी तक प्रस्तावित ब्लू लाइन का रूट करीब 14.16 किलोमीटर लंबा बताया गया है। भदभदा से जवाहर चौक के बीच मेट्रो निर्माण कार्य के चलते सड़क के बीच में बेरिकेडिंग की गई है। निर्माण कार्य के लिए की गई खुदाई और लगातार बारिश के कारण सड़क के दोनों ओर की सतह कई जगह खराब हो गई है। संकरी सड़क और जर्जर हिस्सों के कारण वाहन चालकों की परेशानी और बढ़ गई है।

    भोपाल के दूसरे इलाकों में भी बारिश के बाद सड़कों की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। करोंद एमपी नगर पॉलीटेक्निक चौराहा अवधपुरी रोहित नगर और अयोध्या बायपास सहित कई क्षेत्रों में सड़कें जगह जगह से उखड़ने की बात सामने आई है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी और कीचड़ भरने से वाहन चालकों को परेशानी होती है जबकि मौसम साफ होने पर धूल की समस्या बढ़ जाती है।

    कोहेफिजा क्षेत्र में भी सड़क की खराब हालत के कारण हादसे की स्थिति सामने आई है। सड़क से उखड़ी गिट्टी के कारण एक टू व्हीलर फिसल गई और एक बुजुर्ग गिरकर घायल हो गए। इस घटना ने सड़क की सतह और यातायात सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। शहर में चल रहे निर्माण कार्यों के बीच सड़क की मरम्मत और यातायात व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    रायसेन रोड पर मेट्रो निर्माण और जर्जर सड़क के बीच लोगों को रोजाना आवागमन करना पड़ रहा है। अब जरूरत इस बात की है कि निर्माण क्षेत्र में सुरक्षित आवाजाही के लिए पर्याप्त जगह और सड़क की स्थिति को बेहतर करने के इंतजाम किए जाएं ताकि मेट्रो प्रोजेक्ट का काम भी चलता रहे और आम लोगों को आवागमन में कम से कम परेशानी हो।

  • भोपाल में गणेश विसर्जन के लिए प्रशासन तैयार 13 क्रेन 12 पोकलेन और 184 गोताखोर तैनात घाटों पर भक्तों की सुरक्षा का खास प्लान

    भोपाल में गणेश विसर्जन के लिए प्रशासन तैयार 13 क्रेन 12 पोकलेन और 184 गोताखोर तैनात घाटों पर भक्तों की सुरक्षा का खास प्लान


    भोपाल। भोपाल में गणेश उत्सव के बाद अब प्रथम पूज्य भगवान गणेश की विदाई का सिलसिला शुरू हो गया है। डोल ग्यारस से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का क्रम शुरू हो चुका है जो अनंत चतुर्दशी तक जारी रहेगा। शहर के अलग अलग इलाकों से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस निकलेंगे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रमुख घाटों तक पहुंचेंगे। इसे देखते हुए जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं। खासतौर पर विसर्जन घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर इंतजाम किए गए हैं।

    भोपाल के प्रमुख सात विसर्जन घाटों पर 13 क्रेन और 12 पोकलेन मशीनें तैनात की गई हैं। इनके जरिए गणेश प्रतिमाओं को सुरक्षित तरीके से पानी में विसर्जित करने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही 184 गोताखोरों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाई जा सके। घाटों पर श्रद्धालुओं के पानी में उतरने पर रोक रहेगी। नगर निगम के कर्मचारी लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने के साथ विसर्जन प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

    विसर्जन के दौरान सुरक्षा के लिए घाटों पर लाइफ जैकेट लाइफ बॉय ट्यूब रस्सी बंडल और पीए सिस्टम जैसे संसाधन उपलब्ध रहेंगे। तैराकों की भी ड्यूटी लगाई गई है। पुलिस और प्रशासन की टीमें घाटों पर लगातार निगरानी रखेंगी। इसके अलावा पुलिस कंट्रोल रूम से भी प्रमुख घाटों की स्थिति पर नजर रखी जाएगी। खटलापुरा प्रेमपुरा संत हिरदाराम नगर बैरागढ़ हथाईखेड़ा डैम शाहपुरा और आर्च ब्रिज क्षेत्र के घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इन घाटों पर पिछले दो दिनों में ही डेढ़ हजार से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हो चुका है।

    नगर निगम ने प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए शहर के अलग अलग इलाकों में दो दर्जन से ज्यादा स्टॉल भी लगाए हैं। लालघाटी चौराहा गांधी नगर करोंद चौराहा कोलार रायसेन रोड और अवधपुरी समेत कई स्थानों पर श्रद्धालु पूजा के बाद गणेश प्रतिमाएं इन स्टॉल पर जमा कर सकेंगे। इसके बाद नगर निगम की टीम इन प्रतिमाओं का सामूहिक रूप से विसर्जन करेगी। इससे घाटों पर भीड़ और प्रत्यक्ष रूप से पानी में उतरने वाले लोगों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।

    विसर्जन जुलूस और चल समारोह को देखते हुए शहर के रास्तों पर प्रकाश व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। नगर निगम के अनुसार प्रेमपुरा रानी कमलापति शाहपुरा खटलापुरा हथाईखेड़ा मालीखेड़ी और बैरागढ़ विसर्जन घाटों पर 1090 एलईडी फ्लड लाइट लगाई गई हैं। इसके अलावा चल समारोह वाले मार्गों पर 575 अतिरिक्त फ्लड लाइट लगाई गई हैं। इस तरह घाटों और विसर्जन मार्गों पर कुल 1665 लाइटों की व्यवस्था की गई है।

    गणेश विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सड़कों पर उतरने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण यातायात व्यवस्था और घाटों पर सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती रहेगी। नगर निगम पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मिलकर व्यवस्थाओं को संभालेंगी। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं को श्रद्धा के साथ विदाई दें और विसर्जन प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से पूरी हो।

  • फंक्शन से पहले चेहरे की थकान और रूखापन कैसे करें कम, घर की इन चीजों से तैयार करें आसान फेस पैक

    फंक्शन से पहले चेहरे की थकान और रूखापन कैसे करें कम, घर की इन चीजों से तैयार करें आसान फेस पैक


    नई दिल्ली ।पार्टी, फंक्शन या किसी खास मौके से पहले हर कोई अपने चेहरे को फ्रेश और ग्लोइंग देखना चाहता है। लेकिन कई बार लगातार व्यस्तता, थकान या मौसम के असर से त्वचा रूखी और बेजान नजर आने लगती है। ऐसे में आखिरी समय पर पार्लर जाने के बजाय घर पर उपलब्ध कुछ सामान्य चीजों से आसान फेस पैक तैयार किए जा सकते हैं।

    घरेलू स्किन केयर में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें चेहरे को साफ और तरोताजा महसूस कराने में मदद कर सकती हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और किसी भी नए मिश्रण को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है।

    बेसन और दही का फेस पैक एक आसान विकल्प है। इसके लिए बेसन और दही को मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाकर सूखने दें और फिर पानी से धीरे-धीरे साफ कर लें। चेहरे को साफ करते समय ज्यादा रगड़ने से बचना चाहिए।

    अगर त्वचा रूखी या बेजान महसूस हो रही है, तो एलोवेरा जेल और शहद का मिश्रण इस्तेमाल किया जा सकता है। दोनों को थोड़ी मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है। यह घरेलू पैक त्वचा को नमी देने वाले विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

    पका हुआ पपीता और शहद भी घर पर तैयार किए जाने वाले फेस पैक में शामिल किए जा सकते हैं। पपीते को अच्छी तरह मैश करके उसमें थोड़ी मात्रा में शहद मिलाएं। तैयार मिश्रण को कुछ देर चेहरे पर रखने के बाद पानी से धो लें। इसके बाद त्वचा के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है।

    हल्दी और दही से भी फेस पैक तैयार किया जा सकता है। इसके लिए दही में बहुत थोड़ी मात्रा में हल्दी मिलाकर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर पतली परत लगाएं। कुछ समय बाद इसे पानी से साफ कर लें। हल्दी की मात्रा ज्यादा रखने पर चेहरे पर पीला रंग दिखाई दे सकता है, इसलिए इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना चाहिए।

    रूखी या खिंची हुई त्वचा के लिए ओट्स और शहद का पैक भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ओट्स को हल्का पीसकर उसमें शहद मिलाएं और तैयार मिश्रण को चेहरे पर हल्के हाथ से लगाएं। इसे त्वचा पर जोर से रगड़ने से बचना चाहिए, खासकर अगर स्किन संवेदनशील हो।

    खीरे का पैक भी घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। खीरे को पीसकर उसका पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं। इससे त्वचा को ठंडक और ताजगी महसूस हो सकती है। गर्म मौसम या लंबे दिन के बाद यह एक सरल घरेलू स्किन केयर विकल्प हो सकता है।

    इनमें से किसी भी फेस पैक को पहली बार इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना जरूरी है। अगर जलन, खुजली, चुभन या किसी तरह की असहजता महसूस हो तो इसे तुरंत पानी से धो देना चाहिए। बहुत अधिक फेस पैक लगाने या बार-बार त्वचा को एक्सफोलिएट करने से जलन और ड्राईनेस बढ़ सकती है। इसलिए फंक्शन से पहले स्किन केयर करते समय त्वचा की जरूरत और संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।

  • UP-बिहार समेत 4 राज्यों के पुरुषों को नौकरी नहीं देगा बेंगलुरु का CEO, इस घटना का दिया हवाला

    UP-बिहार समेत 4 राज्यों के पुरुषों को नौकरी नहीं देगा बेंगलुरु का CEO, इस घटना का दिया हवाला


    नई दिल्ली। बेंगलुरु की एक कंपनी के CEO के भर्ती संबंधी फैसले ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। एवन स्पोर्ट्स वर्ल्ड के फाउंडर और CEO कार्तिक एसजी ने कहा है कि उनकी कंपनी अब उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी नहीं देगी। CEO ने इस फैसले के पीछे कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी के कथित व्यवहार से जुड़ी घटना को वजह बताया है।

    एक्स पर पोस्ट कर दी फैसले की जानकारी

    कार्तिक एसजी ने 22 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी के भीतर काफी चर्चा और बहस के बाद यह निर्णय लिया गया है। पोस्ट में उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश का स्पष्ट तौर पर उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को कंपनी में नियुक्त नहीं किया जाएगा।

    CEO ने यह भी बताया कि कंपनी में राजस्थान की एक महिला कर्मचारी पहले से काम कर रही हैं और उन्होंने इस फैसले का समर्थन किया है। पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भर्ती के लिए अपनाए गए इस तरीके और चार राज्यों के पुरुष उम्मीदवारों को एक साथ बाहर रखने के फैसले पर सवाल उठाए।

    पूर्व कर्मचारी के व्यवहार को बताया वजह

    सोशल मीडिया पर आलोचना के बीच कार्तिक ने एक अन्य पोस्ट में फैसले के पीछे की वजह बताई। उनके अनुसार, करीब दो सप्ताह पहले कंपनी के एक कर्मचारी को नौकरी से निकाला गया था। CEO ने दावा किया कि यह कर्मचारी उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में से किसी एक राज्य का रहने वाला था।

    कार्तिक के मुताबिक, महिला कर्मचारियों के साथ कथित बदतमीजी को लेकर उक्त कर्मचारी को दो बार चेतावनी दी गई थी। उनका दावा है कि चेतावनी के बावजूद उसके व्यवहार में सुधार नहीं आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारी ने एक महिला सहकर्मी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी। हालांकि, इस घटना को लेकर CEO की ओर से किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    बोले- टीम की सुरक्षा सबसे अहम

    कार्तिक ने कहा कि उनकी कंपनी में काफी कम उम्र के कर्मचारी काम करते हैं, इसलिए टीम की सुरक्षा उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, जिस कर्मचारी को नौकरी से निकाला गया, वह MBA ग्रेजुएट था। कंपनी में नियुक्ति से पहले उसका रिज्यूमे और बैकग्राउंड सामान्य और साफ दिखाई दे रहा था।

    CEO के अनुसार, कर्मचारी के कंपनी में शामिल होने के करीब दो महीने बाद उसके व्यवहार को लेकर शिकायतें आने लगी थीं। महिला कर्मचारियों के साथ कथित बदतमीजी के बाद उसे चेतावनी दी गई, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया।

    कार्तिक ने कहा कि उनके लिए केवल बिजनेस चलाना ही प्राथमिकता नहीं है। कंपनी में काम करने वाली टीम और युवा कर्मचारियों की सुरक्षा भी उनके लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    32 कर्मचारियों में 14 महिलाएं

    CEO ने कंपनी के कर्मचारियों से जुड़ा आंकड़ा भी साझा किया। उनके मुताबिक, एवन स्पोर्ट्स वर्ल्ड में कुल 32 कर्मचारी हैं, जिनमें 14 महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी में अलग-अलग राज्यों और पृष्ठभूमि से आने वाले लोग काम करते हैं।

    कार्तिक के अनुसार, कंपनी के 20 कर्मचारी दूसरे राज्यों से हैं। इनमें 12 कर्मचारी ऐसे हैं, जो दक्षिण भारत के राज्यों से नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कंपनी अलग-अलग धर्मों और पृष्ठभूमि के लोगों के साथ काम करती है।

    सोशल मीडिया पर फैसले को लेकर बंटी राय

    CEO के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स का कहना है कि किसी एक कर्मचारी के कथित गलत व्यवहार की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होनी चाहिए। उनके मुताबिक, एक कर्मचारी की घटना के आधार पर पूरे राज्य के पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी से बाहर करना सवाल खड़े करता है। कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि किसी व्यक्ति के व्यवहार को उसके राज्य की पहचान से किस आधार पर जोड़ा जा सकता है।

    दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने CEO की ओर से बताई गई घटना और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता का समर्थन किया। इस फैसले के बाद भर्ती में क्षेत्रीय आधार पर लिए जाने वाले निर्णय, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और किसी व्यक्ति के व्यवहार को उसकी क्षेत्रीय पहचान से जोड़ने जैसे मुद्दों पर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।

  • गुरुवार के दिन क्या करें और क्या नहीं बाल काटने से लेकर कपड़े धोने तक जानिए पूरी मान्यता

    गुरुवार के दिन क्या करें और क्या नहीं बाल काटने से लेकर कपड़े धोने तक जानिए पूरी मान्यता


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सप्ताह का गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और बृहस्पति देव का स्मरण करने से जीवन में सुख समृद्धि और सकारात्मकता आती है। गुरुवार को कई लोग व्रत रखते हैं और पीले रंग के वस्त्र धारण करने के साथ भगवान विष्णु को पीले फूल और पीले रंग की वस्तुओं का भोग लगाते हैं। मान्यता है कि गुरुवार का दिन धार्मिक कार्यों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। हालांकि इस दिन कुछ कामों को करने से बचने की भी परंपरा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। कई परिवारों में इस दिन शेविंग करने की भी मनाही मानी जाती है। इसके पीछे धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं को आधार माना जाता है। मान्यता है कि गुरुवार को शरीर से जुड़ी इन चीजों को काटने से बृहस्पति ग्रह से जुड़े शुभ प्रभाव कमजोर हो सकते हैं। हालांकि यह धार्मिक विश्वास है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

    गुरुवार के दिन कपड़े धोने और घर की विशेष साफ सफाई से जुड़े कुछ कामों से भी बचने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है। खासतौर पर पुराने समय से चली आ रही मान्यताओं में इस दिन कपड़े धोने और घर के कुछ हिस्सों की सफाई को लेकर अलग नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर की सुख समृद्धि प्रभावित हो सकती है। अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में इन मान्यताओं को लेकर अलग परंपराएं भी देखने को मिलती हैं।

    गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा के दौरान पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त भगवान विष्णु को पीले फूल और पीले फल अर्पित करते हैं। केले के पेड़ की पूजा करने की परंपरा भी कई जगह प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को पीले रंग की वस्तुएं दान करना भी शुभ माना जाता है। चने की दाल गुड़ हल्दी और पीले वस्त्र का दान करने की परंपरा भी कई स्थानों पर है।

    गुरुवार के दिन पूजा पाठ के साथ अपनी वाणी और व्यवहार को लेकर भी संयम रखने की सलाह दी जाती है। किसी व्यक्ति का अपमान करने या अनावश्यक विवाद में पड़ने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सकारात्मक विचारों के साथ भगवान विष्णु का ध्यान करने से मन को शांति मिलती है। कई लोग इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं।

    गुरुवार को बृहस्पति देव से जुड़े उपाय करने की भी मान्यता है। कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर होने पर ज्योतिषीय सलाह के अनुसार पूजा पाठ और दान किया जाता है। पीली वस्तुओं का दान और जरूरतमंदों की सहायता को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि किसी भी ज्योतिषीय उपाय को व्यक्तिगत कुंडली और परंपरा के अनुसार ही अपनाने की सलाह दी जाती है।

    कुल मिलाकर गुरुवार को भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना का दिन माना जाता है। इस दिन पूजा पाठ के साथ संयम और सेवा भाव रखने की परंपरा है। बाल काटने से लेकर कुछ घरेलू कार्यों तक कई तरह की मान्यताएं इस दिन से जुड़ी हैं। इन नियमों को धार्मिक विश्वास और परंपरा के रूप में देखा जाना चाहिए। इनका पालन व्यक्ति अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार कर सकता है।

  • आज से शनि के पुष्य नक्षत्र में मंगल, 17 अक्टूबर तक 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    आज से शनि के पुष्य नक्षत्र में मंगल, 17 अक्टूबर तक 3 राशियों को रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, भूमि, पराक्रम और सेना का कारक ग्रह माना गया है। वहीं शनि के स्वामित्व वाले पुष्य नक्षत्र को ज्योतिष में महत्वपूर्ण नक्षत्र माना जाता है, जो पोषण, स्थिरता और शुभता से जुड़ा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 24 सितंबर 2026 को मंगल पुनर्वसु नक्षत्र से निकलकर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। मंगल यहां 17 अक्टूबर 2026 तक रहेंगे।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मंगल के शनि के नक्षत्र में आने से इस अवधि में कुछ लोगों को विचारों के टकराव, गुस्सा, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों या कामकाज में अचानक आने वाली रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर मिथुन, तुला और मकर राशि के जातकों को इस दौरान निर्णय लेते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    मिथुन राशि

    मंगल का पुष्य नक्षत्र में गोचर मिथुन राशि से जुड़े जातकों के दूसरे भाव को प्रभावित करेगा। यह भाव धन, वाणी और परिवार से संबंधित माना जाता है।

    ज्योतिषीय फलादेश के अनुसार इस दौरान बातचीत के दौरान गुस्सा या कठोर शब्द परेशानी बढ़ा सकते हैं। परिवार के सदस्यों या कार्यस्थल पर किसी से विवाद की स्थिति बन सकती है। अचानक आने वाला कोई बड़ा खर्च आर्थिक बजट को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इस अवधि में बिना पूरी जानकारी के बड़ा निवेश करने या किसी को बड़ी रकम उधार देने से बचने की सलाह दी जाती है।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों के लिए मंगल का यह गोचर दसवें भाव में होगा, जिसे कर्म, करियर और कारोबार से जोड़ा जाता है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों के साथ मतभेद हो सकते हैं। ऑफिस में किसी विवाद या राजनीति का हिस्सा बनने से बचना बेहतर रहेगा। इस दौरान जल्दबाजी में नौकरी बदलने या किसी कारोबारी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले उसके सभी पहलुओं की अच्छी तरह जांच कर लेने की सलाह दी जाती है। अपने काम पर फोकस बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के स्वामी शनि हैं और मंगल का पुष्य नक्षत्र में गोचर मकर राशि के सातवें भाव को प्रभावित करेगा। ज्योतिष में सातवें भाव का संबंध दांपत्य जीवन, साझेदारी और व्यापार से माना जाता है।

    इस अवधि में जीवनसाथी के साथ छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव या मतभेद बढ़ने की आशंका बताई गई है। ऐसे में बातचीत के दौरान धैर्य रखना जरूरी होगा। कारोबार में पार्टनरशिप करने वाले लोगों को लेन-देन और कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि गलतफहमी की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न बरतें। खासकर ब्लड प्रेशर (BP) और जोड़ों से जुड़ी परेशानी होने पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मंगल के अशुभ प्रभाव से बचने के ज्योतिषीय उपाय

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मंगल के नक्षत्र परिवर्तन के दौरान हनुमान जी की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने की भी मान्यता है।

    इसके अलावा मंगलवार को जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर में लाल मसूर की दाल, गुड़ या लाल वस्त्र दान करने की सलाह दी जाती है। ये उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।

  • भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए ऐसे रखें गुरुवार का व्रत पूजा विधि से लेकर भोग तक जानें सबकुछ

    भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए ऐसे रखें गुरुवार का व्रत पूजा विधि से लेकर भोग तक जानें सबकुछ


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है। कई लोग विवाह में आ रही बाधा दूर करने और परिवार में शांति के लिए भी गुरुवार का व्रत रखते हैं। मान्यता है कि नियमित रूप से श्रद्धा के साथ गुरुवार का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। हालांकि ये सभी बातें धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं।

    गुरुवार का व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी करनी चाहिए। पूजा स्थल को साफ करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है। पूजा में पीले फूल और पीले रंग की वस्तुओं का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। भक्त भगवान विष्णु को पीले फल और प्रसाद अर्पित करते हैं।

    पूजा के दौरान भगवान विष्णु के साथ देवगुरु बृहस्पति का भी स्मरण किया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा की जाती है। कई लोग इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं। इसके अलावा भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप भी किया जाता है। गुरुवार व्रत कथा सुनने या पढ़ने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए भगवान का ध्यान करना चाहिए और अपनी मनोकामना उनके सामने रखनी चाहिए।

    गुरुवार व्रत में भोजन को लेकर भी विशेष नियम बताए गए हैं। कुछ लोग पूरे दिन निराहार रहते हैं जबकि कई भक्त फलाहार करते हैं। व्रत रखने की अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार भोजन का तरीका चुना जा सकता है। फल दूध और अन्य सात्विक चीजों का सेवन कई लोग करते हैं। धार्मिक परंपराओं में इस दिन नमक का सेवन न करने की मान्यता भी कुछ स्थानों पर प्रचलित है। हालांकि व्रत के दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    गुरुवार की पूजा में केले के पेड़ की पूजा की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार केले के पेड़ को भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है। पूजा के दौरान केले के पेड़ पर जल अर्पित किया जाता है और दीपक जलाया जाता है। इसके साथ ही पीले फूल और हल्दी अर्पित करने की परंपरा भी है। पूजा के बाद भगवान विष्णु को भोग लगाया जाता है और प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटा जाता है।

    व्रत के दौरान दान पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को पीले वस्त्र चने की दाल गुड़ हल्दी या पीले फल दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान पुण्य के कार्यों में शामिल होता है। गुरुवार के दिन किसी जरूरतमंद की सहायता करना भी शुभ माना जाता है।

    गुरुवार व्रत में पूजा के साथ संयम और सात्विक आचरण पर भी जोर दिया जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को क्रोध और विवाद से बचने तथा सकारात्मक विचार रखने की कोशिश करनी चाहिए। दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए शाम को पूजा और आरती की जा सकती है। इसके बाद व्रत का पारण अपनी परंपरा के अनुसार किया जाता है। इस तरह श्रद्धा और नियम के साथ गुरुवार का व्रत किया जा सकता है। व्रत से जुड़े नियम अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकते हैं इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार इन्हें अपनाना उचित माना जाता है।

  • MP में आज 10 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी, पूर्वी हिस्से में अति भारी बारिश के आसार

    MP में आज 10 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी, पूर्वी हिस्से में अति भारी बारिश के आसार


    भोपाल। मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में एक बार फिर बारिश का सिस्टम सक्रिय हो गया है। गुरुवार को 10 जिलों में तेज बारिश का अनुमान है, जबकि 25 और 26 सितंबर को इसका असर और बढ़ने की संभावना है। इन दोनों दिनों में पूर्वी मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट है। प्रदेश में अब तक औसत 34.3 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे की 91.9% है।

    मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना अवदाब अब महत्वपूर्ण मौसमी सिस्टम के रूप में विकसित हो रहा है। अगले 24 घंटे के बाद इसके और मजबूत होने की संभावना है। इसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    आज इन 10 जिलों में तेज बारिश

    गुरुवार को छतरपुर, पन्ना, सतना, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश होने का अनुमान है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    25-26 सितंबर को बढ़ेगा बारिश का असर

    बंगाल की खाड़ी से बने सिस्टम के मजबूत होने के बाद 25 और 26 सितंबर को प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। खासकर पूर्वी हिस्से के अधिकांश जिलों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है। मानसून की विदाई से पहले सिस्टम का सक्रिय होना प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का एक और दौर ला सकता है।

    मानसून की विदाई में अब सिर्फ 6 दिन

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य समय 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है। ऐसे में मानसून की औपचारिक विदाई में अब छह दिन बाकी हैं। इस बार भी सितंबर के आखिरी सप्ताह से मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है।

    बुधवार को कई जिलों में हुई तेज बारिश

    इससे पहले बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहा। राजधानी भोपाल में रुक-रुककर कभी तेज तो कभी हल्की बारिश हुई। नर्मदापुरम के इटारसी में करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। खरगोन में भी करीब आधे घंटे हुई तेज बारिश के कारण अनाज मंडी में रखा लगभग 200 क्विंटल मक्का भीग गया। इसके अलावा खंडवा, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई।

    सामान्य से 2.4 इंच कम बारिश

    IMD के मुताबिक प्रदेश में अब तक 870.5 मिमी यानी 34.3 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके मुकाबले अब तक सामान्य बारिश 36.7 इंच यानी 931.7 मिमी होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में सामान्य से 2.4 इंच कम बारिश हुई है। ओवरऑल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 7% कम है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 2% और पश्चिमी हिस्से में 11% कम बारिश हुई है।

    पूर्वी हिस्से में इन जिलों में कमी

    जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 2% तक कम है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 23% तक कम बारिश दर्ज हुई है। हालांकि पिछले एक सप्ताह में इन जिलों के आंकड़ों में सुधार आया है। बुधवार को पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी का आंकड़ा माइनस 2% रहा।

    पश्चिमी हिस्से के इन जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 8% से 50% तक कम बारिश हुई है। यहां दिए आंकड़ों में खंडवा का नाम स्रोत में दो बार दर्ज है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    प्रदेश के अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।