Author: bharati

  • शाहीन अफरीदी की कप्तानी में पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को चटाई धूल, गद्दाफी स्टेडियम में रोमांचक मुकाबले के साथ जीती ऐतिहासिक वनडे सीरीज

    शाहीन अफरीदी की कप्तानी में पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को चटाई धूल, गद्दाफी स्टेडियम में रोमांचक मुकाबले के साथ जीती ऐतिहासिक वनडे सीरीज

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पटल पर पाकिस्तान ने एक बार फिर घरेलू मैदान पर अपना दबदबा साबित किया है। लाहौर के ऐतिहासिक गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए तीसरे और अंतिम निर्णायक मुकाबले में पाकिस्तान ने मेहमान ऑस्ट्रेलियाई टीम को 4 विकेट से पराजित कर दिया। इस शानदार जीत के साथ ही शाहीन शाह अफरीदी की कप्तानी वाली मेजबान टीम ने तीन मैचों की वनडे सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया है। पाकिस्तान की इस ऐतिहासिक जीत के सूत्रधार खुद कप्तान शाहीन अफरीदी और अनुभवी बल्लेबाज बाबर आजम रहे।

    निर्णायक मुकाबले में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक और लड़खड़ाती हुई रही। पाकिस्तानी गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाल रहे शाहीन अफरीदी ने मैच के पहले ही ओवर की दूसरी गेंद पर सलामी बल्लेबाज मैथ्यू शॉट को पवेलियन का रास्ता दिखाकर कंगारू टीम को पहला बड़ा झटका दिया। इसके बाद जोश इंग्लिस ने एक छोर संभालकर पारी को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से किसी भी बल्लेबाज का ठोस सहयोग नहीं मिल सका।

    मध्यक्रम के प्रमुख बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन और विकेटकीपर बल्लेबाज एलेक्स कैरी ने क्रीज पर टिकने के लिए 30 से अधिक गेंदों का सामना जरूर किया, मगर दोनों में से कोई भी खिलाड़ी 20 रन के निजी आंकड़े को पार करने में पूरी तरह असफल रहा। लगातार गिरते विकेटों के बीच कप्तान जोश इंग्लिस पर रन गति बढ़ाने का भारी दबाव था। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में धैर्य दिखाते हुए 8 चौकों और 1 छक्के की मदद से 65 रनों की शानदार अर्धशतकीय पारी खेली, जो अंततः ऑस्ट्रेलियाई पारी का एकमात्र बड़ा स्कोर साबित हुई।

    मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 27वें ओवर की पहली गेंद पर आया जब शाहीन अफरीदी ने अर्धशतक जमा चुके जोश इंग्लिस को आउट कर पवेलियन भेजा। इस विकेट के गिरते ही ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। एक समय 3 विकेट पर 119 रन बनाकर सम्मानजनक स्कोर की ओर बढ़ रही ऑस्ट्रेलियाई टीम महज 157 रनों पर ऑलआउट हो गई। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने अपने आखिरी 7 विकेट महज 38 रनों के भीतर गंवा दिए और पूरी टीम 42 ओवरों में ही सिमट गई।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम की शुरुआत संतुलित रही। सलामी बल्लेबाज माज सदाकत ने 26 रनों का योगदान दिया, जबकि साहिबजादा फरहान केवल 6 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। लाहौर की धीमी पिच पर 158 रनों का यह छोटा लक्ष्य भी ट्रिकी नजर आ रहा था, लेकिन पूर्व कप्तान बाबर आजम ने बेहतरीन खेल कौशल और संयम का परिचय दिया। बाबर आजम ने 84 गेंदों का सामना करते हुए सूझबूझ से भरी 40 रनों की पारी खेली, जिससे टीम लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच सकी।

    मैच में एक समय रोमांच तब बढ़ गया जब 112 के कुल योग पर बाबर आजम आउट हो गए और पाकिस्तानी खेमे में भी मध्यक्रम के ढहने की आशंका पैदा हो गई। हालांकि, अनुभवी ऑलराउंडर शादाब खान ने परिस्थितियों को संभाला और 42 गेंदों पर धैर्यपूर्ण 29 रन बनाकर 42वें ओवर में पाकिस्तान को जीत की दहलीज के पार पहुंचा दिया। सांख्यिकीय और रणनीतिक रूप से यह पाकिस्तान की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार तीसरी द्विपक्षीय वनडे सीरीज जीत है, जिसने पाकिस्तानी टीम के मनोबल को एक नई ऊंचाई दी है।

  • पेड्डी' में स्क्रीन स्पेस को लेकर बोलीं जाह्नवी कपूर, कहा- मेरे रोल को नहीं मिला पूरा सम्मान

    पेड्डी' में स्क्रीन स्पेस को लेकर बोलीं जाह्नवी कपूर, कहा- मेरे रोल को नहीं मिला पूरा सम्मान


    नई दिल्ली। राम चरण और जाह्नवी कपूर स्टारर फिल्म ‘पेड्डी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह तो था, लेकिन रिलीज के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स फिल्म में जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अच्चियम्मा’ के चित्रण को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि फिल्म में पुरुष नायक को जहां मजबूत सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि दी गई है, वहीं महिला किरदार को पर्याप्त महत्व नहीं मिला। कुछ दर्शकों ने आरोप लगाया कि अभिनेत्री के किरदार को केवल ग्लैमर तक सीमित कर दिया गया है।

    वायरल पोस्ट ने छेड़ी नई बहस
    एक वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में दावा किया गया कि फिल्म में मुख्य महिला किरदार के साथ न्याय नहीं किया गया। पोस्ट में कहा गया कि कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों में पुरुष किरदार को विकास और उद्देश्य दिया गया, जबकि महिला किरदार को सीमित और सतही तरीके से प्रस्तुत किया गया। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि फिल्म के अंतिम संस्करण में अभिनेत्री के किरदार की गहराई और प्रभाव को कम कर दिया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस विषय पर बहस तेज हो गई है।

    जाह्नवी कपूर के एक ‘लाइक’ ने बढ़ाई अटकलें
    विवाद उस समय और गहरा गया जब लोगों ने नोटिस किया कि जाह्नवी कपूर ने इस आलोचनात्मक पोस्ट को लाइक किया है। अभिनेत्री ने इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पोस्ट को लाइक करने को कई लोग उनकी अप्रत्यक्ष सहमति के रूप में देख रहे हैं। हालांकि किसी पोस्ट को लाइक करना हमेशा उसके हर दावे का समर्थन माना जाए, यह जरूरी नहीं है। फिर भी सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    निर्देशक पर भी उठे सवाल
    पोस्ट में फिल्म के निर्देशक Buchi Babu Sana पर भी सवाल उठाए गए हैं। आलोचकों का आरोप है कि महिला किरदार के विकास और प्रस्तुति को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। हालांकि फिल्म की टीम या निर्देशक की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    बड़ी स्टारकास्ट, बड़ी उम्मीदें
    ‘पेड्डी’ का निर्देशन बुच्ची बाबू सना ने किया है। फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर के अलावा Shiva Rajkumar और Divyenndu Sharma भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए हैं। फिल्म की रिलीज के बाद जहां एक तरफ इसके तकनीकी पक्ष और प्रदर्शन की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ महिला किरदारों के चित्रण को लेकर उठे सवाल भी सुर्खियां बटोर रहे हैं।

  • 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान…

    10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान…


    नई दिल्ली।
    भारत (India) के 10 राज्यों की 24 सीटों पर राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha elections) होने जा रहे हैं। 18 जून को मतदान (Voting June 18) होगा और संभावनाएं हैं कि एक ही दिन में नतीजे भी घोषित कर दिए जाएं। खास बात है कि यह चुनाव केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन NDA के लिए बेहद अहम होने जा रहा है। आंकड़े बता रहे हैं कि उच्च सदन में एनडीए दो तिहाई के आंकड़े से महज 15 सांसद दूर है। अब सवाल है कि गठबंधन का सबसा बड़ा सदस्य भारतीय जनता पार्टी कितनी सीटें जीत सकती है।


    समझें राज्यसभा का गणित

    245 सदस्यों वाले राज्यसभा में एनडीए के पास कुल 148 सांसद हैं। इनमें से सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के पास 113 सांसद हैं। अब इस गठबंधन को दो तिहाई का जादुई आंकड़ा छूने के लिए 15 और सांसदों की जरूरत है। खास बात है कि कोई भी संविधान संशोधन बिल पार कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। हालांकि, कहा जा रहा है कि इस चुनाव में एनडीए का इस आंकड़े तक पहुंचना तय नहीं है, लेकिन भाजपा कई राज्यों में बढ़त बना सकती है।


    कहां कितनी सीटें हो रही हैं खाली

    आंध्र प्रदेश और गुजरात में 4-4 सीटों पर चुनाव होने हैं। जबकि, मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्रत्येक में 3 सीटों पर चुनाव हैं। इसके अलावा मणिपुर, मेघालाय में 1-1, झारखंड में 2, अरुणाचल प्रदेश में 1, कर्नाटक में 4 और मिजोरम की 1 सीट पर चुनाव होगा। साथ ही 2 राज्यसभा सीट पर उपचुनाव के लिए भी वोट डाले जाएंगे।


    कर्नाटक

    कर्नाटक में एनडीए के खाते में 1 सीट आना तय है। जबकि, कांग्रेस 2 सीटें अपने नाम कर सकती है। कहा जा रहा है कि चौथी सीट इस बात पर निर्भर करेगा कि विधायक किस ओर अपना वोट डाल रहे हैं।


    आंध्र प्रदेश

    175 विधायकों वाले आंध्र प्रदेश में टीडीपी के पास 135 और जन सेना पार्टी के पास 21 विधायक हैं। जबकि, भाजपा के पास 8 और YSRCP के 11 विधायक हैं। इस लिहाज से 164 सीटों वाली एनडीए यहां चारों राज्यसभा सीट जीत सकती है।


    गुजरात

    गुजरात की 182 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के पास 161 विधायकों का भारी बहुमत है। इस मजबूत आंकड़े के दम पर पार्टी को 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में सभी चारों सीटों पर अपनी आसान और पक्की जीत का पूरा भरोसा है।


    राजस्थान

    राजस्थान विधानसभा में सदस्यों की संख्या 200 है। यहां भाजपा के पास 115 और कांग्रेस के 69 विधायक हैं। इस लिहाज से माना जा रहा है कि भाजपा 2 और कांग्रेस 1 सीट जीत सकती है।


    मध्य प्रदेश

    मध्य प्रदेश के नतीजे चौंकाने वाले साबित हो सकते हैं। 163 विधायकों वाली भाजपा यहां 2 सीटें अपने नाम कर सकती है। वहीं, एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है।


    झारखंड

    INDIA गठबंधन के शासन वाले राज्य में दोनों ही सीटें सत्तारूढ़ गठबंधन को मिल सकती हैं। हालांकि, कहा जा रहा है कि रणनीति के तहत एनडीए एक सीट हासिल कर सकता है। यहां कुल 81 विधायक हैं, जिनमें 56 INDIA गठबंधन और 24 एनडीए के हैं।

  • मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में बड़ी गिरावट…5 माह में गंवा दिए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक

    मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में बड़ी गिरावट…5 माह में गंवा दिए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक


    नई दिल्ली।
    यह साल अबतक मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के लिए अच्छा नहीं रहा। न केवल उनके सिर से भारत और एशिया (India and Asia) के सबसे अमीर का ताज छिना बल्कि नेटवर्थ के मोर्चे पर भी बहुत बड़ा झटका लगा, जिसकी वजह रिलायंस इंडस्टीज के शेयरों (Reliance Industries shares) में भारि गिरावट है। अंबानी अब दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 26वें स्थान पर आ गए हैं।

    ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 85.8 अरब डॉलर आंकी गई है। इस साल उनकी संपत्ति में 21.9 अरब डॉलर (करीब ₹2,09,583 करोड़) की गिरावट दर्ज की गई है। यह उनकी कुल संपत्ति में लगभग 20.4 प्रतिशत की कमी के बराबर है।

    ब्लूमबर्ग के अनुसार 5 जून 2026 को मुकेश अंबानी की संपत्ति में एक ही दिन 4 जून को 617 मिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई। इसके बावजूद वह एशिया और भारत के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में शामिल हैं। एशिया के अरबपतियों में उनकी पोजीशन नंबर तीन और भारत में नंबर दो की है। एशिया में पहले स्थान पर चीन के झांक यिमिन हैं और भारत में हमवतन गौतम अडानी।


    रिलायंस इंडस्ट्रीज है सबसे बड़ी संपत्ति का स्रोत

    मुकेश अंबानी की संपत्ति का बड़ा हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनकी हिस्सेदारी से आता है। रिलायंस दुनिया के सबसे बड़े ऑयल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का संचालन करती है।मार्च 2025 तक कंपनी का सालाना रेवेन्यू 114 अरब डॉलर रहा।

    कंपनी पेट्रोकेमिकल्स, रिटेल, डिजिटल सेवाओं, टेलीकॉम एंड एनर्जी सेक्टर में सक्रिय है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक अंबानी के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज में प्रमोटर समूह के जरिए करीब 42 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसे ब्लूमबर्ग अपनी गणना में उनकी संपत्ति का प्रमुख आधार मानता है।


    जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में भी बड़ी हिस्सेदारी

    रिलायंस से अलग हुई जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में भी मुकेश अंबानी की लगभग 41 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह हिस्सेदारी सीधे और प्रमोटर समूह के माध्यम से उनके नियंत्रण में है।


    एंटीलिया की कीमत 400 मिलियन डॉलर से ज्यादा

    मुंबई स्थित अंबानी परिवार का आलीशान घर “एंटीलिया” भी उनकी संपत्ति का अहम हिस्सा है। 27 मंजिला इस इमारत का मूल्य 400 मिलियन डॉलर से अधिक माना जाता है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस भवन के निर्माण पर 1 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए गए थे। इसमें हेलिपैड, थिएटर, स्पा, फिटनेस सेंटर, बॉलरूम और सैकड़ों कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था है।


    कारोबार संभालने के लिए छोड़ दी थी स्टैनफोर्ड की पढ़ाई

    मुकेश अंबानी 1979 में अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए गए थे, लेकिन एक साल बाद उनके पिता धीरूभाई अंबानी ने उन्हें भारत बुला लिया। इसके बाद उन्होंने रिलायंस के विस्तार और नई परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाली।

    धीरूभाई अंबानी के 2002 में निधन के बाद मुकेश और अनिल अंबानी के बीच कारोबारी विवाद हुआ। वर्ष 2005 में परिवार की मध्यस्थता से दोनों भाइयों के बीच कारोबार का बंटवारा हुआ।


    मुंबई इंडियंस टीम के भी मालिक हैं मुकेश अंबानी

    मुकेश अंबानी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की सबसे सफल फ्रेंचाइजी में से एक मुंबई इंडियंस के मालिक भी हैं। इसके अलावा उन्होंने टेलीकॉम, डिजिटल सेवाओं और रिटेल कारोबार में भी बड़े निवेश किए हैं।


    क्यों घटी संपत्ति?

    विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता और निवेशकों की बदलती धारणा के कारण अंबानी की संपत्ति में इस साल बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। हालांकि, 85.8 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ मुकेश अंबानी अभी भी दुनिया के सबसे प्रभावशाली अरबपतियों में शामिल हैं और भारतीय उद्योग जगत में उनकी स्थिति मजबूत बनी हुई है।

  • शिल्पा शिंदे के बयान से मचा बवाल, बोलीं- मैं अपनी बीमारी का ढिंढोरा नहीं पीटती

    शिल्पा शिंदे के बयान से मचा बवाल, बोलीं- मैं अपनी बीमारी का ढिंढोरा नहीं पीटती


    नई दिल्ली। टीवी जगत में इन दिनों शिल्पा शिंदे और हिना खान के बीच बयानबाजी चर्चा का विषय बनी हुई है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिल्पा शिंदे ने हाल ही में स्वीकार किया कि उन्होंने वर्षों पहले लोकप्रिय धारावाहिक ‘भाभी जी घर पर हैं’ के निर्माता पर लगाया गया यौन उत्पीड़न का आरोप झूठा था। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा और कई कलाकारों ने भी उनके बयान पर नाराजगी जताई।

    इसी क्रम में हिना खान ने भी शिल्पा के बयान को शर्मनाक बताते हुए सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। हिना का कहना था कि इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नुकसान उस व्यक्ति को हुआ, जिस पर आरोप लगाए गए थे। उनके इस बयान के बाद अब शिल्पा शिंदे ने भी तीखा जवाब दिया है।

    एक बातचीत के दौरान शिल्पा ने कहा कि लोग उनके नाम का इस्तेमाल कर सुर्खियां बटोरना बंद नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग अपनी बीमारी, निजी परेशानियों और परिवार के सदस्यों की मृत्यु जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाकर सहानुभूति और पब्लिसिटी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

    हालांकि शिल्पा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को हिना खान की ओर इशारा माना जा रहा है। हाल के वर्षों में हिना खान ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और निजी जीवन के कठिन दौर को लेकर खुलकर बात की है, जिसके चलते शिल्पा की टिप्पणी को सीधे उन्हीं से जोड़कर देखा जा रहा है।

    शिल्पा शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अब जाकर पुराने मामले की सच्चाई इसलिए बताई क्योंकि वह इस बात का बोझ और नहीं उठाना चाहती थीं। उनके मुताबिक, उस समय वह कॉन्ट्रैक्ट और भुगतान से जुड़े विवादों में फंसी हुई थीं और उन्हें लगा था कि उस परिस्थिति से निकलने का यही रास्ता है। उन्होंने कहा कि यदि उस मामले में गलत कानूनी कार्रवाई होती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

    दूसरी ओर, हिना खान पहले ही शिल्पा के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं और इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना बताया था। ऐसे में दोनों अभिनेत्रियों के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का केंद्र बन गई है।

    फिलहाल, इस विवाद ने टीवी इंडस्ट्री में एक नई बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए पुराने आरोपों और बाद में उनके खंडन का असर संबंधित लोगों की प्रतिष्ठा और करियर पर कितना गहरा पड़ सकता है।

  • EPFO ने EPF की ब्याज दर को 8.25% पर रखा बरकार….. करोड़ों सदस्यों को होगा फायदा

    EPFO ने EPF की ब्याज दर को 8.25% पर रखा बरकार….. करोड़ों सदस्यों को होगा फायदा


    नई दिल्ली।
    ईपीएफओ (EPFO) ने वित्तवर्ष 2026 के लिए 8.25% ब्याज दर बरकरार रखी है और यह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organization- EPFO) के करोड़ों सदस्यों के लिए राहत की खबर है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 2 मार्च 2026 को इसकी जानकारी दी थी। हालांकि ब्याज दर (Interest Rate) की घोषणा हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक अधिकांश खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि दिखाई नहीं दी है।


    कब खाते में आएगा EPF का ब्याज?

    EPFO द्वारा ब्याज दर की घोषणा के बाद उसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिलनी होती है। इसके बाद करोड़ों खातों का मिलान और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसी वजह से ब्याज जमा होने में कुछ समय लगता है। आमतौर पर EPF खातों में पिछले वित्त वर्ष का ब्याज जून से सितंबर के बीच जमा किया जाता है। इसलिए सदस्य आने वाले महीनों में अपने खाते में ब्याज की एंट्री देख सकते हैं।


    देरी हो सकती है, लेकिन पूरा ब्याज मिलेगा

    EPFO ने स्पष्ट किया है कि भले ही ब्याज जमा होने में कुछ समय लगे, लेकिन सभी पात्र सदस्यों को पूरा ब्याज मिलेगा। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सभी खातों की पासबुक में ब्याज की एंट्री एक साथ दिखाई नहीं देती। अलग-अलग खातों में यह अपडेट अलग-अलग समय पर नजर आ सकता है।


    कैसे चेक करें कि ब्याज जमा हुआ या नहीं?

    EPF सदस्य कई तरीकों से यह जांच सकते हैं कि उनके खाते में ब्याज जमा हुआ है या नहीं।
    1. UMANG ऐप: UMANG ऐप में लॉगिन कर EPF पासबुक देख सकते हैं।
    2. EPFO पोर्टल: EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पासबुक चेक की जा सकती है।
    3. मिस्ड कॉल सेवा: रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से EPFO की मिस्ड कॉल सेवा का उपयोग किया जा सकता है।
    4. SMS सुविधा: UAN से जुड़े मोबाइल नंबर से SMS भेजकर खाते की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।


    EPFO 3.0 में मिलेगा UPI से पैसा निकालने का विकल्प

    EPFO जल्द ही अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म EPFO 3.0 के तहत बड़ी सुविधा शुरू करने जा रहा है। इसके बाद सदस्य अपने पीएफ खाते से सीधे बैंक खाते में राशि ट्रांसफर कर सकेंगे।

    EPFO 3.0 के तहत UPI के माध्यम से सीधे बैंक खाते में PF राशि ट्रांसफर, UMANG ऐप पर उपलब्ध निकासी राशि की जानकारी और QR कोड के जरिए सुरक्षित ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी। बैंक खाते में पैसा आने के बाद ATM या UPI से उपयोग की सुविधा भी मिलेगी। वहीं, ऑटो-सेटलमेंट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई है।


    अब नहीं होगी लंबी प्रक्रिया

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद पीएफ निकासी के लिए लंबी प्रतीक्षा और कई स्तर की मंजूरी की जरूरत कम हो जाएगी। सदस्य सीधे अपने लिंक्ड बैंक खाते में राशि प्राप्त कर सकेंगे और जरूरत के अनुसार उसका उपयोग कर सकेंगे।

    करोड़ों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा: EPFO 3.0 को कर्मचारियों के लिए एक बड़ा डिजिटल सुधार माना जा रहा है। इससे पीएफ निकासी प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, आसान और पारदर्शी होने की उम्मीद है।

  • क्यों ऋषिकेश मुखर्जी की 'बावर्ची' के बाद जया बच्चन और राजेश खन्ना की जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई

    क्यों ऋषिकेश मुखर्जी की 'बावर्ची' के बाद जया बच्चन और राजेश खन्ना की जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में कलाकारों के आपसी संबंध और सेट पर हुए विवाद कई बार बड़े फैसलों की वजह बन जाते हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक और दिलचस्प किस्सा हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना और मशहूर अभिनेत्री जया बच्चन (तब जया भादुड़ी) से जुड़ा है। साल 1972 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की क्लासिक फिल्म ‘बावर्ची’ में एक साथ काम करने के बाद इस जोड़ी ने हमेशा के लिए एक-दूसरे के साथ काम करने से तौबा कर ली थी। इसके पीछे की मुख्य वजह कोई व्यावसायिक मतभेद नहीं, बल्कि महानायक अमिताभ बच्चन से जुड़ा एक वाक्या था।

    उस दौर में राजेश खन्ना भारतीय फिल्म उद्योग के शीर्ष शिखर पर थे और उनकी लगातार हिट फिल्मों के कारण उनका एकछत्र राज था। दूसरी ओर, अमिताभ बच्चन उस समय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे। ‘आनंद’ जैसी सफल फिल्म में साथ काम करने के बावजूद राजेश खन्ना तत्कालीन परिस्थितियों में अमिताभ बच्चन को केवल एक संघर्षरत अभिनेता के रूप में ही देखते थे और उनके प्रति उनका रवैया बहुत सकारात्मक नहीं रहता था।

    ‘बावर्ची’ की शूटिंग के दिनों में जया बच्चन और अमिताभ बच्चन एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। अमिताभ बच्चन अक्सर जया बच्चन से मिलने के लिए फिल्म के सेट पर आया करते थे। दोनों को इस तरह साथ देखना उस समय के सुपरस्टार राजेश खन्ना को रास नहीं आता था। वह अक्सर सेट पर जया बच्चन को टोकते थे और उनसे पूछते थे कि वह इस संघर्षरत अभिनेता के साथ अपना समय क्यों बर्बाद कर रही हैं।

    राजेश खन्ना के जीवन पर आधारित संस्मरणों और वरिष्ठ पत्रकार अली पीटर जॉन के हवाले से सामने आए विवरणों के अनुसार, राजेश खन्ना अक्सर जया से कहते थे कि उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ घूमना-फिरना बंद कर देना चाहिए। उनके शब्द इतने कड़े थे कि उन्होंने यहां तक कह दिया था कि इस आदमी के साथ रहने से उनका करियर भी आगे नहीं बढ़ पाएगा। राजेश खन्ना का यह रवैया जया बच्चन को लगातार परेशान कर रहा था।

    विवाद तब और बढ़ गया जब एक दिन अमिताभ बच्चन हमेशा की तरह जया बच्चन से मिलने सेट पर पहुंचे। उस दौरान राजेश खन्ना ने वहां मौजूद अमिताभ बच्चन को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और उनके प्रति बेहद उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया। अपने होने वाले जीवनसाथी का ऐसा अपमान देखकर जया बच्चन का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने उसी वक्त बेहद आक्रामक अंदाज में राजेश खन्ना को जवाब देते हुए कहा था कि एक दिन वक्त बदलेगा और तब देखा जाएगा कि कौन किस मुकाम पर खड़ा है।

    इस घटना से आहत और नाराज जया बच्चन ने तत्काल यह कड़ा फैसला लिया कि वह अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगी। उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद साफ कर दिया था कि वह भविष्य में कभी भी राजेश खन्ना के साथ स्क्रीन साझा नहीं करेंगी। उन्होंने कड़े शब्दों में टिप्पणी की थी कि वह ऐसे व्यक्ति के साथ काम करना पसंद नहीं करेंगी जो खुद को बहुत ऊपर समझता हो।

    प्रशासनिक और व्यावसायिक दृष्टि से ‘बावर्ची’ साल 1972 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने राजेश खन्ना को उनकी पारंपरिक रोमांटिक और गंभीर छवि से निकालकर एक बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग वाले अभिनेता के रूप में स्थापित किया था। आज भी इस फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग 8.1 है, लेकिन इस बड़ी सफलता के बावजूद जया बच्चन ने अपने फैसले को कायम रखा और कूटनीतिक रूप से इस सुपरस्टार के साथ दोबारा कभी कोई फिल्म साइन नहीं की।

  • इंडिगो की 6 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण जुलाई से अस्थाई रूप से होगी बंद

    इंडिगो की 6 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण जुलाई से अस्थाई रूप से होगी बंद


    नई दिल्ली।
    विमान कंपनी इंडिगो (Airline company Indigo) ने जुलाई महीने से छह डेस्टिनेशंस (Six Destinations) के लिए अपनी उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है. विमानन कंपनी ने ये कदम कमजोर मांग और लगातार बढ़ रही ऑपरेटिंग कॉस्ट (Increasing Operating Costs) को देखते हुए उठाया है।

    इंडिगो का ये फैसला गर्मियों की छुट्टियों मौजूदा सीजन में आया है. इंडिगो के मुताबिक, मलेशिया के लांगकावी, थाईलैंड के क्राबी और वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी के लिए उड़ानें 1 जुलाई से सस्पेंड यानी बंद कर दी जाएंगी। इसके अलावा, हांगकांग और चीन के शंघाई, कंबोडिया के सिएम रीप के लिए उड़ानों को 3 जुलाई से रोक दिया जाएगा।

    इन सभी छह रूटों पर उड़ानों का सस्पेंशन 30 सितंबर तक लागू रहेगा. ये सभी रूट भारतीय यात्रियों के बीच काफी पॉपुलर हैं. ये रूट दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन के प्रमुख पर्यटन और व्यावसायिक शहरों के लिए सीधी कनेक्टिविटी मुहैया कराते हैं।


    अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी बुकिंग

    इंडिगो ने बताया है कि इन सभी छह रूटों के लिए टिकटों की बुकिंग 1 अक्टूबर से दोबारा शुरू कर दी जाएगी. हालांकि, अगर मार्किट में मांग में सुधार होता है, तो इन सेवाओं को तय समय से पहले भी बहाल किया जा सकता है. एयरलाइंस ने इस कदम को इंटरनेशनल नेटवर्क में एक सीमित और छोटा सा बदलाव बताया है।

    कंपनी के मुताबिक, साल की ये तिमाही आमतौर पर यात्रा के लिहाज से कमजोर होती है. इसके साथ ही मौजूदा समय में लागत का माहौल भी काफी चुनौतियों से भरा है. अस्थायी कटौती के बावजूद एयरलाइंस ने कहा है कि वो हर हफ्ते 1,800 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जारी रखेगी. कंपनी अपने विदेशी नेटवर्क के बड़े हिस्से को पहले की तरह ही बरकरार रख रही है।

    इंडिगो ने कहा कि वो अंतरराष्ट्रीय परिचालन पर कोई भी अगला फैसला लेने से पहले मार्किट की कंडीशन, बढ़ती परिचालन लागत और एयरस्पेस के प्रतिबंधों पर नजर रखेगी। इस फैसले से प्रभावित होने वाले यात्रियों को पहले से सूचित किया जाएगा. यात्रियों को रिफंड या दूसरे उपलब्ध विकल्प भी दिए जाएंगे.


    ईरान युद्ध के चलते मैनचेस्टर उड़ान पर भी लगा ब्रेक

    दो दिन पहले ही इंडिगो ने 31 अगस्त से मैनचेस्टर के लिए अपनी उड़ानें बंद करने की बात कही थी. एयरलाइंस ने इसके पीछे ईरान युद्ध के चलते इंटरनेशनल एयरस्पेस में लंबे समय से जारी प्रतिबंधों और बढ़ती परिचालन लागत का हवाला दिया था.

    कंपनी का कहना है कि इन वजहों से ये रूट कमर्शियल रूप से काफी नुकसानदेह साबित हो रहा था. इंडिगो के मुताबिक, कुछ एयर कॉरिडोर्स के लगातार बंद रहने की वजह से उड़ानों के समय और खर्चों में भारी बढ़ोतरी हुई है. इससे लंबी दूरी की हवाई सेवाओं को जारी रखना मुश्किल हो गया है.

    इंडिगो फिलहाल दिल्ली और मुंबई से ब्रिटेन के मैनचेस्टर के लिए उड़ानों का संचालन करती है. इस रूट की शुरुआत पिछले साल जुलाई में एयरलाइंस की लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजना के तहत की गई थी।

  • Bihar: पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बड़ा बदलाव….., Z+ सुरक्षा हटी

    Bihar: पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बड़ा बदलाव….., Z+ सुरक्षा हटी


    पटना।
    बिहार (Bihar) के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav ) और राबड़ी देवी (Rabri Devi) की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. दोनों नेताओं को पहले Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन अब उनकी सुरक्षा में कटौती कर दी गई है. वहीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की Y+ कैटेगरी की सुरक्षा पहले की तरह जारी रहेगी. जानकारी के अनुसार, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी दोनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पहले उन्हें सुरक्षा खतरों को देखते हुए Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी, हाउस गार्ड और एस्कॉर्ट वाहन शामिल होते थे।

    हालांकि वर्तमान सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी शख्स की सुरक्षा उसके मौजूदा संवैधानिक पद और उपलब्ध खुफिया इनपुट के आधार पर तय की जाती है. चूंकि दोनों नेता लंबे समय से किसी सक्रिय प्रशासनिक या संवैधानिक पद पर नहीं हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

    दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की Y+ श्रेणी की सुरक्षा को बरकरार रखा गया है. सुरक्षा समिति का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष का पद कैबिनेट मंत्री के समकक्ष होता है. इसके अलावा उनकी लगातार राजनीतिक गतिविधियों, जनसभाओं और दौरों को देखते हुए मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था जारी रखने का फैसला लिया गया है.

    पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में भी कटौती की गई है. पहले उन्हें Y कैटेगरी की सुरक्षा मिलती थी, लेकिन अब उन्हें केवल एक व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी यानी अंगरक्षक उपलब्ध कराया जाएगा. सुरक्षा में यह बदलाव मंत्री पद छोड़ने के बाद लागू होने वाले नियमों के तहत किया गया है।


    राजश्री यादव की सुरक्षा के लिए एक बॉडीगार्ड की तैनाती

    लालू यादव की बड़ी बेटी और सांसद मीसा भारती को अब तीन सुरक्षाकर्मियों का सुरक्षा कवर मिलेगा. यह व्यवस्था सांसदों के लिए निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत तय की गई है. वहीं तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव को एक सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराया जाएगा. राजश्री का कोई राजनीतिक या संवैधानिक पद नहीं है, लेकिन परिवार की सार्वजनिक गतिविधियों और व्यक्तिगत सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें एक अंगरक्षक दिया गया है. इस तरह लालू परिवार के विभिन्न सदस्यों की सुरक्षा व्यवस्था को उनके वर्तमान पद और सुरक्षा मानकों के अनुरूप पुनर्गठित किया गया है।

  • TMC के विद्रोह में मुस्लिम MLA भी पीछे नहीं…. मुर्शिदाबाद के 9 में से 8 ने छोड़ा ममता का साथ

    TMC के विद्रोह में मुस्लिम MLA भी पीछे नहीं…. मुर्शिदाबाद के 9 में से 8 ने छोड़ा ममता का साथ


    कोलकाता।
    तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) में हुए विद्रोह में टीएमसी (TMC) के अल्पसंख्यक विधायक (Minority MLA) भी पीछे नहीं हैं. इन विधायकों ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee .) की बजाय ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) के साथ जाना ज्यादा बेहतर समझा है. मुर्शिदाबाद में TMC के जो 9 विधायक जीते थे उनमें से 8 ने ममता का साथ छोड़ दिया है और ऋतब्रत बनर्जी का दामन थाम लिया है।

    इस सूची में तृणमूल कांग्रेस के लंबे समय से विश्वसनीय और वरिष्ठ नेता जावेद खान के साथ-साथ काजल शेख जैसे प्रभावशाली नेता भी शामिल हैं। बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने इन मुस्लिम विधायकों को बगावत का भरपूर इनाम दिया है. बागियों में शामिल जावेद खान को विधानसभा में विपक्ष का उपनेता बनाया गया है. वहीं दूसरी ओर अखुरुज्जमां को चीफ व्हिप बनाया गया है।


    तृणमूल की ‘टूट’ बीजेपी के लिए बंगाल से ज्यादा दिल्ली में फायदेमंद

    एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले मंत्रिमंडल के चार अल्पसंख्यक मंत्री भी आंदोलनकारी विधायकों के इस समूह में शामिल हैं. ये विधायक हैं- जावेद खान, सबीना यास्मीन, गुलाम रब्बानी और अखरूजमां।

    तृणमूल के आंदोलनकारी खेमे के जिन अल्पसंख्यक विधायकों के नाम अब तक सामने आए हैं, वे इस प्रकार हैं – जावेद खान, अखरूजमां, काजल शेख, गुलाम रब्बानी, डॉ. मोशर्रफ हुसैन, इमानी बिस्वास, नियामत शेख, रेयात हुसैन, गुलशन मल्लिक, तौसीफुर रहमान, मुस्तफिजुर रहमान, बहारुल इस्लाम।

    लेकिन कुल आंकड़ा कही ज्यादा है. रिपोर्ट के अनुसार तृणमूल के टिकट पर चुनाव जीतने वाले 34 मुस्लिम विधायकों में से 17 बागी खेमे में शामिल हो गए हैं।

    सबसे खास बात यह है कि मुर्शिदाबाद के 9 अल्पसंख्यक विधायकों में से 8 ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल हो गए हैं. अखरुजमां कहते हैं, ‘मुर्शिदाबाद जिले के 9 विधायकों में से 8 ने हमारा समर्थन किया है. हमने पार्टी के बहुमत के साथ खड़े रहने का फैसला किया है.’ केवल नव निर्वाचित विधायक और शिक्षाविद बाबर अली (जलंगी विधायक) ने ही पार्टी नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।

    रघुनाथगंज के विधायक अख्रुज्जमां को इस ‘विद्रोह’ के सूत्रधारों में से एक माना जा रहा है. अखरूजमां ने 2018 में कांग्रेस छोड़ दी थी और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे, तब शुभेंदु अधिकारी मुर्शिदाबाद जिले में तृणमूल कांग्रेस के पर्यवेक्षक थे. इस बार वे ऋतब्रता के साथ आए हैं. जिले के दूसरे विधायकों शमशेरगंज के नूर आलम, सुती विधायक इमानी बिस्वास, लालगोला के अब्दुल अजीज, भगवानगोला के रियात हुसैन सरकार और हरिहरपारा के नियामत शेख तथा भरतपुर के विधायकों मुस्तफिजुर रहमान।

    आंकड़ों के अनुसार 2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने मुर्शिदाबाद जिले की 22 सीटों में से 20 सीटें जीती थीं. तृणमूल कांग्रेस के सुनहरे दिनों में जब अभिषेक बनर्जी या ममता बनर्जी कोलकाता में बैठक बुलाते थे तो मुर्शिदाबाद जिले से बुलाए गए सभी विधायक लगभग एक दिन पहले ही कोलकाता में होटल बुक कर लेते थे, ताकि वे समय पर बैठक में पहुंच सकें और पीछे की पंक्ति में न बैठना पड़े. लेकिन इस विधानसभा चुनाव के बाद स्थिति बदल गई है।

    पिछले रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर पर हुई तृणमूल कांग्रेस विधायक दल की बैठक में ये विधायक नजर नहीं आए. 2011 से ही मुस्लिम बड़ी संख्या में तृणमूल को वोट देते आ रहे हैं. ममता बनर्जी को लगता था कि मुस्लिम उनके स्थायी वोट बैंक रहेंगे. लेकिन इस चुनाव में पूरी तस्वीर बदल गई है।