Author: bharati

  • घुड़चढ़ी की रस्म का क्या है महत्व? शौर्य, जिम्मेदारी और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी अनोखी मान्यताएं

    घुड़चढ़ी की रस्म का क्या है महत्व? शौर्य, जिम्मेदारी और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी अनोखी मान्यताएं

    नई दिल्ली । भारतीय विवाह समारोहों में दूल्हे का घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर पहुंचना सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। घुड़चढ़ी की यह रस्म आज भी अधिकांश क्षेत्रों में पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाई जाती है। समय के साथ विवाह के तौर-तरीकों में कई बदलाव आए हैं, लेकिन दूल्हे की घोड़ी पर सवारी आज भी भारतीय शादियों की सबसे प्रमुख रस्मों में शामिल है। इस परंपरा के पीछे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक मान्यताओं का विशेष महत्व माना जाता है।

    भारतीय समाज में घोड़ा और विशेष रूप से घुड़सवारी लंबे समय तक शौर्य, सम्मान और नेतृत्व का प्रतीक रहे हैं। प्राचीन काल में राजा, योद्धा और सेनापति घोड़े पर यात्रा करते थे। इसी कारण विवाह के अवसर पर दूल्हे का घोड़ी पर बैठकर आना इस बात का प्रतीक माना गया कि वह अब परिवार की नई जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार है। विवाह केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का सामाजिक और सांस्कृतिक मिलन माना जाता है, इसलिए इस रस्म को सम्मानजनक स्थान मिला।

    घुड़चढ़ी को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे दूल्हे के आत्मविश्वास, संयम और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक मानते हैं। वहीं, कई सांस्कृतिक व्याख्याओं के अनुसार यह रस्म विवाह से पहले दूल्हे के धैर्य और जिम्मेदारी का प्रतीकात्मक प्रदर्शन मानी जाती रही है। हालांकि इन मान्यताओं को ऐतिहासिक परंपराओं के रूप में देखा जाता है और इनके समर्थन में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

    घोड़ी के चयन को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। लोक परंपराओं में माना जाता है कि घोड़ी अपेक्षाकृत शांत और नियंत्रित स्वभाव की होती है, इसलिए विवाह जैसे सार्वजनिक आयोजन में उसका उपयोग अधिक उपयुक्त माना गया। कुछ सांस्कृतिक व्याख्याएं इसे संवेदनशीलता और संतुलित व्यवहार का प्रतीक भी बताती हैं। हालांकि यह कहना कि घोड़ी का चयन किसी निश्चित वैज्ञानिक कारण से किया गया था, उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों से स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं होता।

    इतिहासकारों का मानना है कि पुराने समय में बारातें लंबी दूरी तय करके दूसरे गांव या नगर पहुंचती थीं। उस दौर में यात्रा अपेक्षाकृत कठिन और जोखिमपूर्ण होती थी। ऐसे में घोड़े या घोड़ी पर सवारी व्यावहारिक आवश्यकता भी थी। समय बीतने के साथ यह आवश्यकता धीरे-धीरे एक सांस्कृतिक परंपरा और विवाह की पहचान बन गई। आज परिवहन के आधुनिक साधन उपलब्ध होने के बावजूद घुड़चढ़ी की रस्म अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए हुए है।

    आधुनिक समय में इस परंपरा का स्वरूप पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। कई स्थानों पर दूल्हा घोड़ी के बजाय बग्घी, विंटेज कार या अन्य वाहनों से भी विवाह स्थल तक पहुंचता है। फिर भी पारंपरिक परिवारों में घुड़चढ़ी को शुभ माना जाता है और इसे विवाह संस्कार का महत्वपूर्ण हिस्सा समझा जाता है। यह रस्म भारतीय समाज की उन सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है, जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं और आज भी उत्सव, सम्मान तथा सामाजिक एकता का संदेश देती हैं। इसलिए घुड़चढ़ी को केवल एक औपचारिक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय विवाह संस्कृति की ऐतिहासिक विरासत और प्रतीकात्मक परंपरा के रूप में देखा जाता है।

  • एनजीटी के आदेशों की अनदेखी कर वेटलैंड में मड रैली जैव विविधता पर मंडराया खतरा प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

    एनजीटी के आदेशों की अनदेखी कर वेटलैंड में मड रैली जैव विविधता पर मंडराया खतरा प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल


    भोपाल । भोपाल के कलियासोत डैम के वेटलैंड क्षेत्र में आयोजित मड रैली एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पर्यावरणविदों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस आयोजन को प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा बताते हुए आयोजकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में सैकड़ों लोग और दर्जनों वाहन पहुंचे वहां पहले से ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद खुलेआम मड रैली का आयोजन होना कई सवाल खड़े करता है।

    रविवार को कलियासोत डैम के किनारे बड़ी संख्या में ऑफरोड वाहनों की रेस आयोजित की गई। आयोजन में पचास से अधिक गाड़ियों ने हिस्सा लिया जबकि सैकड़ों लोग वहां मौजूद रहे। इस दौरान कई वाहन आपस में टकरा गए और कुछ लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई। इतनी बड़ी गतिविधि होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वेटलैंड केवल जलभराव वाला क्षेत्र नहीं होता बल्कि यह अनेक दुर्लभ जलीय जीव जंतुओं पक्षियों और वनस्पतियों का प्राकृतिक आवास होता है। यहां मगरमच्छ घड़ियाल कछुए मछलियां और कई प्रवासी पक्षी निवास करते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही तेज आवाज और भीड़भाड़ से इन जीवों का प्राकृतिक जीवन प्रभावित होता है। इतना ही नहीं कई जीवों के घोंसले और अंडे भी ऐसे आयोजनों के कारण नष्ट हो सकते हैं।

    विशेषज्ञों ने याद दिलाया कि वर्ष 2019 में भी इसी तरह की मड रैली के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की गई थी। इसके बाद जनवरी 2020 में एनजीटी ने देशभर के वेटलैंड क्षेत्रों में मड रैली और इसी तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। उस समय भोपाल जिला प्रशासन ने भी ऐसे आयोजन की अनुमति निरस्त कर दी थी। इसके बावजूद दोबारा ऐसे आयोजन का होना नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    वन विभाग के अनुसार कलियासोत और आसपास के जंगलों में बाघ तेंदुए सहित कई वन्यजीवों की आवाजाही रहती है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों और अत्यधिक शोर से वन्यजीवों के व्यवहार पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे आयोजनों पर रोक नहीं लगी तो क्षेत्र की जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

    घटना के बाद प्रशासन भी सक्रिय हुआ है। राजस्व अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं और अवैध रूप से मड रैली आयोजित करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में हर शनिवार और रविवार को विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि इस तरह की गतिविधियों को रोका जा सके।

    जानकारों के मुताबिक ऐसे आयोजनों की जानकारी आम तौर पर सार्वजनिक नहीं की जाती। सोशल मीडिया और निजी मैसेजिंग ग्रुप के माध्यम से चुनिंदा लोगों को सूचना दी जाती है जिससे बड़ी संख्या में ऑफरोड वाहन चालक और दर्शक मौके पर पहुंच जाते हैं। यही वजह है कि प्रशासन को समय रहते सूचना नहीं मिल पाती।

    पर्यावरण विशेषज्ञों ने मांग की है कि वेटलैंड क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही पूरी तरह नियंत्रित की जाए नियमित गश्त बढ़ाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका मानना है कि प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।

  • 29 जुलाई को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में शुक्र का गोचर, 4 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं चुनौतियां, जाने उपाय

    29 जुलाई को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में शुक्र का गोचर, 4 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं चुनौतियां, जाने उपाय


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को सुख, वैभव, समृद्धि, प्रेम और भौतिक सुविधाओं का कारक माना जाता है। शुक्र की चाल या नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 29 जुलाई 2026 को शुक्र ग्रह सूर्य के स्वामित्व वाले उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस परिवर्तन का कुछ राशियों पर सकारात्मक असर रहेगा, जबकि कुछ जातकों को आर्थिक, पारिवारिक और पेशेवर जीवन में सतर्क रहने की जरूरत होगी।

    मेष राशि
    मेष राशि के लोगों के लिए यह गोचर खर्चों में बढ़ोतरी का संकेत दे सकता है। बजट बिगड़ने की आशंका रहेगी और अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ विवाद से बचें और किसी भी वित्तीय लेन-देन में पूरी सावधानी बरतें।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों को इस दौरान स्वास्थ्य और पारिवारिक रिश्तों पर विशेष ध्यान देना होगा। घर-परिवार में मतभेद या तनाव की स्थिति बन सकती है। वाणी पर संयम रखें और किसी भी बड़े निवेश से पहले अनुभवी व्यक्ति की सलाह अवश्य लें।

    सिंह राशि
    उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्य हैं, इसलिए इसका प्रभाव सिंह राशि पर अधिक देखने को मिल सकता है। अहंकार या अत्यधिक आत्मविश्वास के कारण काम प्रभावित हो सकते हैं। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखें। प्रेम संबंधों में गलतफहमियों से बचने के लिए संवाद बनाए रखना जरूरी होगा।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के लोगों को करियर और कारोबार में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। साझेदारी में काम करने वालों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। धन संबंधी मामलों में लिखित दस्तावेजों का ध्यान रखें। कामकाज के सिलसिले में अनावश्यक यात्राएं होने से थकान और आर्थिक नुकसान की संभावना भी रहेगी।

    अशुभ प्रभाव कम करने के उपाय
    – प्रत्येक शुक्रवार मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें और सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं।
    – “ॐ शुं शुक्राय नमः” मंत्र का नियमित जाप करें।
    – शुक्रवार को जरूरतमंद लोगों को चावल, दूध, चीनी जैसी सफेद वस्तुओं का दान करें।

  • मानसून में टायर प्रेशर से न करें समझौता, सही हवा और बेहतर ग्रिप से कम होगा हादसों का जोखिम

    मानसून में टायर प्रेशर से न करें समझौता, सही हवा और बेहतर ग्रिप से कम होगा हादसों का जोखिम


    नई दिल्ली ।
    बारिश का मौसम शुरू होते ही सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं और ऐसे में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए वाहन की तकनीकी स्थिति पर विशेष ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। अधिकांश चालक इस दौरान वाइपर, ब्रेक और हेडलाइट की जांच तो कराते हैं, लेकिन टायर प्रेशर की अनदेखी कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सही टायर प्रेशर वाहन की ग्रिप, ब्रेकिंग क्षमता और सड़क पर संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए मानसून के दौरान टायर में हवा का स्तर हमेशा निर्माता कंपनी की सिफारिश के अनुरूप ही होना चाहिए।

    हर वाहन के लिए टायर प्रेशर अलग-अलग निर्धारित किया जाता है। इसकी जानकारी आमतौर पर ड्राइवर साइड के दरवाजे पर लगे स्टिकर या वाहन के ओनर मैनुअल में उपलब्ध रहती है। मौसम बदलने के कारण अपनी ओर से टायर में हवा कम या ज्यादा करना उचित नहीं माना जाता। वाहन निर्माता जिस प्रेशर की सलाह देते हैं, उसी का पालन करने से टायर का सड़क से संपर्क संतुलित बना रहता है और वाहन की पकड़ बेहतर रहती है।

    यदि टायर में आवश्यकता से अधिक हवा भर दी जाए तो उसका सड़क से संपर्क क्षेत्र कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में गीली सड़क पर टायर की ग्रिप कमजोर पड़ सकती है। तेज गति में अचानक ब्रेक लगाने या मोड़ लेने पर वाहन के फिसलने की आशंका बढ़ जाती है। अधिक हवा होने से बारिश के दौरान नियंत्रण बनाए रखना कठिन हो सकता है, जिससे दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    दूसरी ओर, कई लोगों का मानना है कि बारिश में टायर का प्रेशर थोड़ा कम रखने से सड़क पर पकड़ बेहतर होती है। हालांकि विशेषज्ञ इस धारणा को सही नहीं मानते। कम हवा होने पर टायर का घिसाव तेजी से बढ़ सकता है, ईंधन की खपत अधिक हो सकती है और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान टायर का तापमान भी सामान्य से अधिक बढ़ सकता है। इससे टायर की कार्यक्षमता प्रभावित होने के साथ उसके क्षतिग्रस्त होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

    मानसून के दौरान केवल टायर प्रेशर ही नहीं, बल्कि टायर की स्थिति की नियमित जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि टायर का ट्रेड काफी घिस चुका हो या उसकी ग्रिप कमजोर हो गई हो, तो समय रहते उसे बदल देना चाहिए। घिसे हुए टायर गीली सड़क पर पानी को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाते, जिससे वाहन के फिसलने का खतरा बढ़ सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महीने में कम से कम एक बार टायर प्रेशर की जांच अवश्य करानी चाहिए। यदि लंबी यात्रा पर जाना हो तो प्रस्थान से पहले टायर की हवा, ट्रेड की गहराई और किसी भी प्रकार की क्षति की जांच कर लेना बेहतर होता है। साथ ही स्पेयर टायर की स्थिति भी देखनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में परेशानी न हो।

    बारिश के मौसम में सुरक्षित ड्राइविंग केवल सावधानी से वाहन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन के रखरखाव पर भी समान रूप से निर्भर करती है। सही टायर प्रेशर, अच्छी ग्रिप वाले टायर और नियमित निरीक्षण न केवल वाहन के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना को भी कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में मानसून के दौरान टायरों की नियमित देखभाल को अपनी ड्राइविंग आदत का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए।

  • ग्लासगो में भारत का परचम लहराया शर्मिला बनीं गोल्डन गर्ल चार नए पदकों के साथ मेडल टैली में मजबूत हुई दावेदारी

    ग्लासगो में भारत का परचम लहराया शर्मिला बनीं गोल्डन गर्ल चार नए पदकों के साथ मेडल टैली में मजबूत हुई दावेदारी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। सोमवार देर रात भारतीय दल ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित करते हुए चार और पदक अपने नाम किए। इन उपलब्धियों में सबसे बड़ी सफलता पैरा एथलीट शर्मिला ने दिलाई जिन्होंने महिला शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को प्रतियोगिता का दूसरा गोल्ड दिलाया। इसके अलावा भारत को दो रजत और एक कांस्य पदक भी मिला जिससे कुल पदकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई। भारत अब दो स्वर्ण पांच रजत और तीन कांस्य पदकों के साथ पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।

    महिला शॉट पुट एफ57 वर्ग के फाइनल में शर्मिला ने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने छह प्रयासों में लगातार बेहतरीन थ्रो किए और तीसरे प्रयास में 9 दशमलव 81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनका इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। पूरे मुकाबले में उन्होंने आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया जिससे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी उनके आसपास भी नहीं पहुंच सके।

    इस स्पर्धा में घाना की जिनाबु इसाह ने 8 दशमलव 65 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक हासिल किया जबकि भारत की शिल्पा कंचुगरकोप्पालु शायला ने 7 दशमलव 26 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह एक ही स्पर्धा में भारत ने स्वर्ण और कांस्य दोनों पदक जीतकर शानदार उपलब्धि दर्ज की।

    एथलेटिक्स में भी भारत को बड़ी सफलता मिली। पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में सर्वेश अनिल कुशारे ने 2 दशमलव 25 मीटर की ऊंची छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। गोल्ड मेडल की दौड़ बेहद रोमांचक रही क्योंकि सर्वेश और जमैका के रोमेन बेकफोर्ड दोनों ने समान ऊंचाई पार की। हालांकि प्रयासों की संख्या के आधार पर स्वर्ण पदक जमैका के खिलाड़ी के नाम रहा जबकि सर्वेश को रजत से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    वेटलिफ्टिंग में भी भारत ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। पुरुषों के 79 किलोग्राम वर्ग में वल्लूरी अजय बाबू ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 149 किलोग्राम का गेम रिकॉर्ड बनाया और क्लीन एंड जर्क में 181 किलोग्राम भार उठाया। हालांकि मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने कुल 331 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद कांटे का रहा और अजय बाबू केवल एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए।

    भारतीय खिलाड़ियों के लगातार शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि देश के खिलाड़ी अब हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर दमदार चुनौती पेश कर रहे हैं। पैरा खेलों से लेकर एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग तक भारतीय प्रतिभाएं लगातार पदक जीतकर देश का मान बढ़ा रही हैं। आने वाले दिनों में भी कई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद बनी हुई है और खेल प्रेमियों की नजर अब अगले मुकाबलों पर टिकी है।

  • बिहार-असम में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज केस होंगे वापस, सरकार से वार्ता के बाद CJP का बड़ा अपडेट

    बिहार-असम में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज केस होंगे वापस, सरकार से वार्ता के बाद CJP का बड़ा अपडेट


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद बताया कि बिहार और असम समेत विभिन्न राज्यों में आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने देर रात सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार की ओर से इस संबंध में सकारात्मक आश्वासन मिला है।

    सौरभ दास ने बताया कि पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचे। करीब डेढ़ से दो घंटे तक चली बैठक में सरकार की ओर से किए गए वादों के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा हुई।

    उन्होंने कहा कि पुलिस प्रतिनिधि अपने साथ बिहार सरकार के गृह विभाग की एक प्रेस विज्ञप्ति भी लाए थे, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी और भविष्य में भी उनके विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    सौरभ दास के मुताबिक बैठक में उन अन्य राज्यों पर भी चर्चा हुई, जहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जिन राज्यों को लेकर चिंता जताई गई है, वहां भी जल्द इसी तरह की अधिसूचनाएं जारी की जाएंगी। यदि किसी राज्य में मामलों की वापसी नहीं होती है, तो पार्टी संबंधित सरकार से सीधे संपर्क कर समाधान सुनिश्चित करेगी। शेष राज्यों की सूची भी सरकार को उपलब्ध कराई जाएगी।

    उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत से ही पार्टी हर प्रदर्शनकारी के साथ मजबूती से खड़ी रही है और आगे भी किसी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। इस दौरान उन्होंने रत्ना, आशु, अभिजीत और वैष्णवी समेत टीम के अन्य सदस्यों के योगदान का भी उल्लेख किया।

    वहीं, रत्ना सिंह ने कानूनी सहायता को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की मदद करने वाले वकीलों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया है। फिलहाल औपचारिक लीगल टीम का गठन नहीं हुआ है, लेकिन इसे जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने यह सुनिश्चित किया है कि वकीलों के प्रयास व्यर्थ न जाएं और इस संबंध में लिखित आश्वासन भी प्राप्त हो चुका है।

  • झड़ते बालों से हैं परेशान तो अपनाएं एलोवेरा का आसान घरेलू उपाय जड़ों से मजबूत होंगे बाल और लौटेगी प्राकृतिक चमक

    झड़ते बालों से हैं परेशान तो अपनाएं एलोवेरा का आसान घरेलू उपाय जड़ों से मजबूत होंगे बाल और लौटेगी प्राकृतिक चमक


    नई दिल्ली। आज के समय में खराब खानपान बढ़ता प्रदूषण तनाव और केमिकल युक्त हेयर प्रोडक्ट्स के कारण बालों का झड़ना रूखापन डैंड्रफ और समय से पहले सफेद होने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं लेकिन कई बार इनका असर लंबे समय तक नहीं टिकता। यदि आप प्राकृतिक तरीके से अपने बालों की देखभाल करना चाहते हैं तो एलोवेरा सबसे बेहतरीन विकल्पों में से एक माना जाता है। आयुर्वेद में एलोवेरा को औषधीय गुणों से भरपूर पौधा बताया गया है जो त्वचा के साथ साथ बालों के लिए भी बेहद लाभकारी होता है।

    एलोवेरा में विटामिन ए विटामिन सी विटामिन ई फोलिक एसिड विटामिन बी12 और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद प्रोटियोलिटिक एंजाइम सिर की त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करते हैं जिससे नए और स्वस्थ बाल उगने का रास्ता साफ होता है। नियमित रूप से एलोवेरा का उपयोग करने से बालों की जड़ों को पोषण मिलता है और हेयर फॉल की समस्या धीरे धीरे कम होने लगती है।

    अगर आपके सिर में डैंड्रफ या खुजली की समस्या रहती है तो एलोवेरा जेल काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण स्कैल्प को साफ रखने में मदद करते हैं। सप्ताह में दो से तीन बार ताजा एलोवेरा जेल को सीधे स्कैल्प पर लगाकर लगभग तीस मिनट तक छोड़ दें और फिर हल्के शैंपू से बाल धो लें। इससे स्कैल्प स्वस्थ रहेगा और बालों की जड़ें मजबूत बनेंगी।

    बालों की चमक बढ़ाने के लिए एलोवेरा को नारियल तेल या बादाम के तेल के साथ मिलाकर भी लगाया जा सकता है। यह मिश्रण बालों को गहराई से मॉइस्चराइज करता है और रूखेपन को दूर करता है। वहीं यदि बाल तेजी से झड़ रहे हैं तो एलोवेरा जेल में थोड़ा सा प्याज का रस मिलाकर लगाने से भी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं क्योंकि यह जड़ों तक पोषण पहुंचाने में मदद करता है।

    हेयर ग्रोथ बढ़ाने के लिए एलोवेरा और मेथी दाने का पेस्ट भी काफी लोकप्रिय घरेलू उपाय है। मेथी में मौजूद प्रोटीन और निकोटिनिक एसिड बालों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं जबकि एलोवेरा स्कैल्प को हाइड्रेट रखता है। दोनों का मिश्रण बालों की ग्रोथ को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

    ध्यान रखें कि एलोवेरा का उपयोग हमेशा साफ और ताजा जेल के रूप में करना बेहतर माना जाता है। यदि बाजार से एलोवेरा जेल खरीद रहे हैं तो उसकी गुणवत्ता और सामग्री जरूर जांचें। किसी भी नए घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा पर पैच टेस्ट करना भी जरूरी है ताकि किसी प्रकार की एलर्जी की संभावना न रहे।

    स्वस्थ बाल केवल बाहरी देखभाल से ही नहीं बल्कि संतुलित आहार पर्याप्त पानी नियमित व्यायाम और अच्छी नींद से भी मिलते हैं। यदि बाल अत्यधिक झड़ रहे हों या लंबे समय तक समस्या बनी रहे तो त्वचा रोग विशेषज्ञ या हेयर एक्सपर्ट की सलाह लेना उचित रहेगा। सही दिनचर्या और एलोवेरा जैसे प्राकृतिक उपायों की मदद से बालों को लंबे समय तक स्वस्थ मजबूत और चमकदार बनाए रखा जा सकता है।

  • 28 जुलाई का करियर राशिफल: चंद्रमा के राशि परिवर्तन से करियर और धन के नए अवसर, कई राशियों को मिलेगा लाभ

    28 जुलाई का करियर राशिफल: चंद्रमा के राशि परिवर्तन से करियर और धन के नए अवसर, कई राशियों को मिलेगा लाभ

    नई दिल्ली । 28 जुलाई का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के अनुसार करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों में संतुलित निर्णय लेने का संकेत दे रहा है। दिन की शुरुआत में चंद्रमा धनु राशि में रहेंगे, जिससे नई योजनाओं पर काम करने का उत्साह बढ़ेगा। शाम के समय चंद्रमा मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके बाद कार्यों में अनुशासन, जिम्मेदारी और व्यावहारिक सोच का प्रभाव अधिक दिखाई देगा। सूर्य और बृहस्पति की स्थिति भी निर्णय क्षमता को मजबूत करने में सहायक मानी जा रही है, जबकि शनि धैर्य और नियमित प्रयासों का महत्व बढ़ाएंगे।

    मेष राशि के लोगों के लिए दिन आर्थिक स्थिरता का संकेत दे रहा है। पुराने वित्तीय मामलों में प्रगति हो सकती है और कार्यस्थल पर योजनाबद्ध तरीके से काम करने से लाभ मिलेगा। वृष राशि के जातकों को अपने प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। बजट पर नियंत्रण और नियमित कार्यशैली उनके लिए लाभदायक साबित हो सकती है।

    मिथुन राशि के लोगों के लिए संवाद और संपर्क सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। मीटिंग, इंटरव्यू और व्यावसायिक बातचीत में सफलता मिलने के योग हैं। हालांकि किसी भी वित्तीय दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कर्क राशि के लिए आय के नए अवसर बन सकते हैं और कार्यस्थल पर जिम्मेदारी निभाने की क्षमता की सराहना हो सकती है।

    सिंह राशि के जातकों को अनावश्यक खर्चों से बचने और बजट पर ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी। व्यापार और साझेदारी से जुड़े मामलों में स्थिरता बनी रह सकती है। कन्या राशि के लिए दिन योजनाबद्ध निवेश और कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियों का संकेत दे रहा है। बारीकियों पर ध्यान देने से महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरे हो सकते हैं।

    तुला राशि के लोगों को आर्थिक मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी गई है। टीमवर्क और सहयोग के माध्यम से कार्यक्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। वृश्चिक राशि के लिए पुराने निवेश और आर्थिक योजनाओं की समीक्षा लाभदायक रहेगी। धैर्य और संयम के साथ लिए गए निर्णय भविष्य में सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं।

    धनु राशि के जातकों में दिन के शुरुआती हिस्से में आत्मविश्वास और नई योजनाओं पर काम करने की ऊर्जा बनी रहेगी। शाम के बाद बचत और लंबी अवधि की वित्तीय योजना पर ध्यान देना अधिक उपयोगी रहेगा। मकर राशि के लिए चंद्रमा का गोचर विशेष महत्व रखता है। कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और आर्थिक अनुशासन बनाए रखने से भविष्य मजबूत होगा।

    कुंभ राशि के लोगों को नियमित आय और पुराने आर्थिक मामलों की समीक्षा पर ध्यान देना चाहिए। जल्दबाजी में बड़े खर्च से बचना बेहतर रहेगा। वहीं मीन राशि के लिए दिन पुराने निवेश, बचत और वित्तीय योजनाओं का मूल्यांकन करने के लिए अनुकूल माना गया है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन धैर्य और अनुभव के बल पर उन्हें सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा।

    ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार 28 जुलाई का दिन अधिकांश राशियों के लिए अनुशासन, योजनाबद्ध कार्यशैली और सोच-समझकर लिए गए आर्थिक निर्णयों पर केंद्रित रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दबाजी से बचकर और दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखकर किए गए प्रयास आने वाले समय में बेहतर परिणाम दे सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों के साथ-साथ व्यापारियों और निवेश से जुड़े लोगों के लिए भी यह दिन संतुलित रणनीति अपनाने का संदेश देता है।

  • कांवड़ यात्रा के लिए सख्त नियम: 12 फीट से ऊंचा डीजे नहीं, अश्लील और भड़काऊ गानों पर प्रतिबंध

    कांवड़ यात्रा के लिए सख्त नियम: 12 फीट से ऊंचा डीजे नहीं, अश्लील और भड़काऊ गानों पर प्रतिबंध


    मेरठ। सावन की कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बनाने के लिए मेरठ पुलिस ने डीजे संचालकों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में 50 से अधिक डीजे संचालकों को स्पष्ट किया गया कि यात्रा के दौरान शासन और जिला प्रशासन के सभी नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।

    पुलिस अधीक्षक (नगर) विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि कांवड़ यात्रा में इस्तेमाल होने वाले किसी भी डीजे सिस्टम की ऊंचाई 12 फीट और चौड़ाई 10 फीट से अधिक नहीं होगी। साथ ही ध्वनि का स्तर भी निर्धारित मानकों के भीतर रखना होगा, ताकि श्रद्धालुओं और आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    भड़काऊ और अश्लील गानों पर रोक
    प्रशासन ने साफ किया है कि यात्रा के दौरान डीजे पर अश्लील, आपत्तिजनक या भड़काऊ गीत और ऑडियो सामग्री बजाने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे गाने, जो धार्मिक या सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं, पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। अधिकारियों ने कहा कि कांवड़ यात्रा आस्था का पर्व है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    तय रूट पर ही चलेंगे डीजे वाहन
    पुलिस ने निर्देश दिया है कि डीजे वाहन किसी भी स्थिति में सड़क पर जाम या यातायात बाधित नहीं करेंगे। सभी वाहन केवल प्रशासन द्वारा निर्धारित कांवड़ मार्गों पर ही संचालित होंगे। बिना अनुमति रूट बदलने या मनमाने तरीके से वाहन चलाने की इजाजत नहीं होगी।

    आपात स्थिति में तुरंत दें सूचना
    डीजे संचालकों से कहा गया है कि यात्रा के दौरान यदि कोई दुर्घटना, आपात स्थिति या अप्रिय घटना होती है तो इसकी सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस या प्रशासन को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों ने यात्रा के दौरान पुलिस और प्रशासन का पूरा सहयोग करने की भी अपील की।

    बिजली लाइनों के नीचे बरतनी होगी सतर्कता
    प्रशासन ने ऊंचे डीजे वाहनों के संचालन के दौरान ओवरहेड बिजली लाइनों के नीचे विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दुर्घटना संभावित स्थानों पर भी सतर्क रहने और डीजे वाहनों व उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    डीजे संचालकों के लिए प्रमुख नियम
    – डीजे सिस्टम की ऊंचाई 12 फीट से अधिक नहीं होगी।
    – डीजे की चौड़ाई 10 फीट से ज्यादा नहीं रखी जाएगी।
    – ध्वनि स्तर निर्धारित सीमा के भीतर रहेगा।
    – अश्लील, आपत्तिजनक और भड़काऊ गानों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
    – धार्मिक एवं सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली ऑडियो सामग्री नहीं बजाई जाएगी।
    – डीजे वाहन यातायात में बाधा नहीं बनेंगे।
    – केवल निर्धारित कांवड़ मार्गों पर ही वाहन संचालित किए जाएंगे।
    – किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत पुलिस को देनी होगी।
    – हाईटेंशन बिजली लाइनों और संवेदनशील स्थानों पर विशेष सावधानी बरतना अनिवार्य होगा।

    मेरठ पुलिस का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य किसी पर प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि लाखों कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और यात्रा को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना है। प्रशासन ने सभी डीजे संचालकों से नियमों का पालन करते हुए सहयोग करने की अपील की है।

  • मंगलवार को भूलकर भी न करें ये वास्तु गलतियां वरना बढ़ सकती हैं आर्थिक संकट और घर में बनी रह सकती है अशांति

    मंगलवार को भूलकर भी न करें ये वास्तु गलतियां वरना बढ़ सकती हैं आर्थिक संकट और घर में बनी रह सकती है अशांति


    नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और मंगल देव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन किए गए शुभ कार्य और सही उपाय जीवन में आने वाली कई परेशानियों को कम करने में सहायक माने जाते हैं। मान्यता है कि यदि घर में वास्तु दोष मौजूद हो तो व्यक्ति को बार बार आर्थिक हानि मानसिक तनाव पारिवारिक कलह और कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में मंगलवार के दिन कुछ विशेष उपाय और सावधानियां अपनाकर इन दोषों के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का दक्षिण दिशा से जुड़ा भाग मंगल ग्रह का क्षेत्र माना जाता है। यदि इस दिशा में गंदगी टूटा फर्नीचर कबाड़ या बेकार सामान रखा हो तो यह नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है। मंगलवार के दिन इस स्थान की अच्छी तरह सफाई करना और अनावश्यक वस्तुओं को हटाना शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के सदस्यों के आत्मविश्वास तथा साहस में वृद्धि होती है।

    धार्मिक मान्यता है कि मंगलवार को मुख्य द्वार और पूजा स्थल को विशेष रूप से स्वच्छ रखना चाहिए। सुबह स्नान के बाद घर के प्रवेश द्वार पर दीपक जलाना और भगवान हनुमान की पूजा करना शुभ फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान सिंदूर चमेली का तेल लाल पुष्प और गुड़ चना अर्पित करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करते हैं। हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से घर का वातावरण भी सकारात्मक बना रहता है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार मंगलवार के दिन रसोईघर और अग्नि से जुड़े स्थानों की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि मंगल ग्रह का संबंध अग्नि तत्व से माना गया है। गैस चूल्हे के आसपास गंदगी नहीं रहने देना चाहिए। साथ ही घर में टूटे हुए बिजली के उपकरण या खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए क्योंकि इन्हें भी वास्तु दोष का कारण माना जाता है।

    मंगलवार के दिन दक्षिण दिशा में लाल रंग का स्वच्छ कपड़ा या भगवान हनुमान का चित्र स्थापित करना शुभ माना जाता है। यदि पहले से चित्र लगा हो तो उसकी नियमित सफाई करें और वहां दीपक जलाकर प्रार्थना करें। इससे घर में साहस आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जिन लोगों के जीवन में बार बार बाधाएं आ रही हों या मंगल दोष से जुड़ी समस्याएं हों उन्हें इस दिन विशेष रूप से बजरंगबली की आराधना करनी चाहिए।

    वास्तु शास्त्र यह भी कहता है कि मंगलवार को किसी भी प्रकार का विवाद क्रोध या कटु वचन बोलने से बचना चाहिए क्योंकि इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना बंदरों को गुड़ और चना खिलाना तथा लाल वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। इन उपायों से मंगल ग्रह की शुभता बढ़ती है और जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे धीरे कम होने लगती हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वास्तु उपाय तभी अधिक प्रभावी माने जाते हैं जब उनके साथ सदाचार संयम और सकारात्मक सोच भी जुड़ी हो। इसलिए मंगलवार के दिन भगवान हनुमान की भक्ति के साथ घर की स्वच्छता वास्तु संतुलन और सेवा भाव को अपनाना चाहिए। ऐसा करने से परिवार में सुख शांति समृद्धि और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होने की मान्यता है।