Author: bharati

  • भारतीय महिला टीम का शानदार आगाज, इंग्लैंड पर 38 रन की जीत

    भारतीय महिला टीम का शानदार आगाज, इंग्लैंड पर 38 रन की जीत


    नई दिल्ली । चेम्सफोर्ड में खेले गए पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में Indian Women’s Cricket Team ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान England Women’s Cricket Team को 38 रनों से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। भारत की जीत में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला।

    टॉस और शुरुआती झटकों के बाद भारत की पारी लड़खड़ा गई थी, जब कप्तानी कर रहीं स्मृति मंधाना पहली ही गेंद पर आउट हो गईं और शेफाली वर्मा भी सस्ते में पवेलियन लौट गईं। ऐसे मुश्किल समय में जेमिमा रोड्रिग्स और यास्तिका भाटिया ने पारी को संभालते हुए भारतीय पारी को मजबूती दी। दोनों बल्लेबाजों ने तीसरे विकेट के लिए 126 रनों की शानदार साझेदारी निभाई, जिसने मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया।

    यास्तिका भाटिया ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों में 54 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और 1 छक्का शामिल रहा। वहीं जेमिमा रोड्रिग्स ने बेहतरीन संयम और तकनीक का प्रदर्शन करते हुए 40 गेंदों में 69 रनों की लाजवाब पारी खेली। इस साझेदारी ने भारतीय टीम को 189 रनों के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम की शुरुआत भी खराब रही। भारतीय गेंदबाजों ने शुरू से ही दबाव बनाए रखा। ऐलिस कैप्सी केवल 6 रन बनाकर आउट हुईं, जबकि सोफिया डंकले भी 16 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। हालांकि इसके बाद हीथर नाइट और एमी जोन्स ने 64 रनों की साझेदारी कर पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने लगातार विकेट निकालकर इंग्लैंड को वापसी का मौका नहीं दिया।

    एमी जोन्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 48 गेंदों में 67 रन बनाए, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। अंततः इंग्लैंड की पूरी टीम 20 ओवर में 8 विकेट खोकर केवल 150 रन ही बना सकी।

    भारत की ओर से गेंदबाजी में नंदिनी शर्मा ने अपने डेब्यू मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 विकेट झटके। उनके अलावा क्रांति गौड़ ने 2 विकेट हासिल किए, जबकि दीप्ति शर्मा और श्री चरणी को 1-1 सफलता मिली।

    इस जीत के साथ भारतीय टीम ने न केवल सीरीज में बढ़त बनाई, बल्कि अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से यह भी साबित किया कि वह विदेशी सरजमीं पर भी मजबूत दावेदारी रखती है।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युद्ध की तस्वीर बदलेगी, पर जीवन-मृत्यु के फैसले मशीनों को नहीं सौंपे जा सकते: जेडी वेंस

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युद्ध की तस्वीर बदलेगी, पर जीवन-मृत्यु के फैसले मशीनों को नहीं सौंपे जा सकते: जेडी वेंस

    नई दिल्ली । अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भविष्य के युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि तकनीक सैन्य रणनीतियों को पूरी तरह बदल सकती है, लेकिन अंतिम नैतिक निर्णयों की जिम्मेदारी हमेशा इंसानों के पास ही रहनी चाहिए। कोलोराडो स्प्रिंग्स स्थित अमेरिकी वायुसेना अकादमी में स्नातक कैडेटों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से उस दौर में प्रवेश कर रही है, जहां साइबर ऑपरेशन, स्वायत्त सिस्टम और एआई आधारित तकनीकें युद्ध के स्वरूप को नए स्तर पर ले जा रही हैं। ऐसे समय में सैन्य नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक नियंत्रण से बाहर न जाए और मानवीय मूल्यों को पीछे न छोड़ दे।

    वेंस ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि एआई के बढ़ते उपयोग को लेकर उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं यह जीवन और मृत्यु जैसे संवेदनशील निर्णयों को मशीनों के हवाले न कर दे। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल रणनीति या तकनीक का खेल नहीं है, बल्कि यह गहरे नैतिक निर्णयों से जुड़ा क्षेत्र है, जहां इंसानी संवेदना और विवेक की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्होंने हाल ही में धार्मिक और नैतिक चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के युग में भी यह सवाल उतना ही प्रासंगिक है कि महत्वपूर्ण निर्णयों का अधिकार मशीनों को दिया जाना चाहिए या इंसानों को।

    उन्होंने भविष्य के सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में सेना में एआई और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग और बढ़ेगा, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और जटिल दोनों होगी। ऐसे में अधिकारियों को यह समझना होगा कि तकनीक का उद्देश्य मानव क्षमता को बढ़ाना होना चाहिए, न कि उसे प्रतिस्थापित करना। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य के युद्ध को मानव सभ्यता के नैतिक मूल्यों के अनुरूप बनाए रखना है, तो अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मशीनों को नहीं दिया जा सकता।

    जेडी वेंस ने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और विभिन्न देश एक-दूसरे की सैन्य क्षमताओं पर लगातार नजर रख रहे हैं। ऐसे माहौल में अमेरिका के सैन्य अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह डेटा, तकनीक और रणनीतिक समझ का भी बड़ा क्षेत्र बन चुका है, जहां एआई तेजी से प्रभाव बढ़ा रहा है।

    अपने संबोधन में उन्होंने अमेरिकी सेना के आधुनिकीकरण और नई तकनीकी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार लगातार रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही सैनिकों के जीवन स्तर में सुधार और आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं के अनुरूप ढांचे को विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय उन अधिकारियों का होगा जो तकनीक और नैतिकता दोनों के बीच संतुलन बनाकर निर्णय लेने में सक्षम होंगे।

    अंत में उन्होंने कैडेटों को सलाह दी कि वे तकनीक को अपने विकास और क्षमता विस्तार का साधन बनाएं, लेकिन कभी भी उसके पूरी तरह अधीन न हो जाएं। उनके अनुसार, युद्ध का संचालन हमेशा इंसानी बुद्धि, विवेक और नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर होना चाहिए, क्योंकि मशीनें केवल निर्देशों का पालन कर सकती हैं, निर्णय नहीं ले सकतीं।

  • डीआरसी में इबोला का 17वां प्रकोप गंभीर मोड़ पर, हिंसा और पलायन से रोकथाम अभियान प्रभावित

    डीआरसी में इबोला का 17वां प्रकोप गंभीर मोड़ पर, हिंसा और पलायन से रोकथाम अभियान प्रभावित

    नई दिल्ली । डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस का नया प्रकोप एक बार फिर गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है, जहां लगातार जारी संघर्ष, असुरक्षा और मानवीय संकट ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहद सीमित कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि न केवल बीमारी के फैलाव को रोकना मुश्किल हो रहा है, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सहायता पहुंचाना भी एक बड़ी समस्या बन गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने हाल ही में इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह प्रकोप कई जटिल परिस्थितियों के कारण और अधिक खतरनाक रूप ले रहा है, जहां स्थानीय आबादी को लगातार पलायन, खाद्य संकट और सुरक्षा की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

    देश के पूर्वी हिस्सों में हालात विशेष रूप से गंभीर बताए जा रहे हैं, जहां स्वास्थ्य कर्मियों को कई बार हिंसा और असुरक्षा की वजह से अपने अभियान रोकने पड़ते हैं। इस वजह से संक्रमित लोगों की पहचान, जांच और इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वातावरण में किसी भी संक्रामक बीमारी पर नियंत्रण पाना बेहद कठिन हो जाता है, क्योंकि निगरानी तंत्र कमजोर हो जाता है और लोगों तक समय पर चिकित्सा सहायता नहीं पहुंच पाती।

    इस नए प्रकोप को कांगो में इबोला का सत्रहवां मामला बताया जा रहा है, जो देश के लिए एक लंबी और चिंताजनक स्वास्थ्य इतिहास को दर्शाता है। रिपोर्टों के अनुसार अब तक हजार से अधिक संदिग्ध मामले और बड़ी संख्या में मौतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे स्वास्थ्य ढांचे पर भारी दबाव बढ़ गया है। वायरस का यह नया स्ट्रेन भी चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसके व्यवहार और फैलाव के पैटर्न को लेकर अभी भी कई पहलुओं पर अध्ययन जारी है।

    अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए इसे वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की श्रेणी में रखा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संसाधनों को तेजी से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके। हालांकि, जमीनी स्तर पर चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं, जहां सुरक्षा जोखिम और सामाजिक अविश्वास अभियान को कमजोर कर रहे हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि केवल चिकित्सा उपायों से इस संकट को नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि क्षेत्र में स्थिरता और शांति भी उतनी ही जरूरी है। बिना सुरक्षा और विश्वास के किसी भी स्वास्थ्य अभियान की सफलता सीमित रहती है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष विराम और मानवीय पहुंच को आसान बनाने की अपीलें लगातार की जा रही हैं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह स्पष्ट है कि कांगो में इबोला का यह प्रकोप केवल एक स्वास्थ्य आपातकाल नहीं, बल्कि एक व्यापक मानवीय संकट भी बन चुका है, जिसमें बीमारी के साथ-साथ संघर्ष और अस्थिरता भी समान रूप से जिम्मेदार हैं।

  • अमेरिका-चीन एआई प्रतिस्पर्धा में नया बयान, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका को बताया अग्रणी शक्ति

    अमेरिका-चीन एआई प्रतिस्पर्धा में नया बयान, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका को बताया अग्रणी शक्ति

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा को लेकर एक बार फिर अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी दूरी और रणनीतिक बढ़त पर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि एआई की दौड़ में संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया की अग्रणी शक्ति बना हुआ है, जबकि चीन इस क्षेत्र में अभी भी काफी पीछे है। उनके इस बयान को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा और भविष्य की आर्थिक दिशा के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि एआई अब केवल एक तकनीक नहीं बल्कि आने वाले दशकों की वैश्विक शक्ति संरचना का आधार बनता जा रहा है।

    वाशिंगटन में एक प्रशासनिक ब्रीफिंग के दौरान दिए गए बयान में स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने एआई अनुसंधान, विकास और इसके व्यावसायिक उपयोग के हर स्तर पर मजबूत पकड़ बना रखी है। उन्होंने कहा कि देश में मौजूद अग्रणी तकनीकी कंपनियां, अनुसंधान संस्थान और सरकारी सहयोग मिलकर एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं जो अमेरिका को इस क्षेत्र में स्पष्ट बढ़त देता है। उनके अनुसार चीन भले ही तेजी से निवेश और विस्तार कर रहा हो, लेकिन तकनीकी नवाचार और उच्च स्तरीय मॉडल विकास के मामले में वह अभी भी पीछे है।

    बेसेंट ने यह भी कहा कि अमेरिकी सरकार एआई से जुड़े जोखिमों को समझते हुए संतुलित नीति पर काम कर रही है। एक तरफ नवाचार को बढ़ावा देने की रणनीति है तो दूसरी तरफ सुरक्षा और नियंत्रण के उपायों को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि बड़े भाषा मॉडल विकसित करने वाली कंपनियों के साथ सरकार का निरंतर संवाद और सहयोग जारी है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई तकनीक का विकास सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से हो।

    इस पूरे मुद्दे को केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और भविष्य की सैन्य क्षमताओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है। एआई तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने इसे वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्रीय बिंदु बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो देश इस क्षेत्र में नेतृत्व हासिल करेगा, वही आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी मानकों को दिशा देगा।

    मध्य प्रदेश सहित भारत जैसे विकासशील देशों के लिए भी यह प्रतिस्पर्धा महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि एआई आधारित तकनीकों का प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और प्रशासन तक तेजी से फैल रहा है। अमेरिका और चीन दोनों ही सेमीकंडक्टर निर्माण, उन्नत कंप्यूटिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रहे हैं, जिससे वैश्विक तकनीकी संतुलन लगातार बदल रहा है।

    अमेरिकी वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में एआई नियमों और नियंत्रण को लेकर सरकारें नई नीतियां तैयार करने में जुटी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह प्रतिस्पर्धा और अधिक तीव्र होगी और इसका सीधा प्रभाव वैश्विक व्यापार, रोजगार और तकनीकी विकास की दिशा पर पड़ेगा।

  • कोतवाली पुलिस का एक्शन: स्मैक के साथ आरोपी दबोचा, पुराना अपराधी भी निकला तस्कर

    कोतवाली पुलिस का एक्शन: स्मैक के साथ आरोपी दबोचा, पुराना अपराधी भी निकला तस्कर


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक स्मैक तस्कर को गिरफ्तार किया है। कोतवाली पुलिस ने आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में स्मैक और एक स्विफ्ट कार जब्त की है, जिसकी कुल कीमत लाखों रुपये आंकी गई है।

    जानकारी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि मेडिकल कॉलेज शिवपुरी के सामने कच्चे रास्ते पर एक युवक स्मैक बेचने की फिराक में खड़ा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां एक व्यक्ति बिना नंबर की स्विफ्ट कार के पास संदिग्ध हालत में खड़ा मिला। पुलिस को देखते ही वह भागने लगा, लेकिन घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया।

    तलाशी के दौरान आरोपी के पास से 33.87 ग्राम स्मैक बरामद हुई, जिसकी बाजार कीमत करीब 6 लाख रुपये बताई जा रही है। इसके साथ ही पुलिस ने स्विफ्ट कार भी जब्त कर ली, जिससे बरामद सामग्री की कुल कीमत लगभग 14 लाख रुपये आंकी गई है।

    आरोपी की पहचान हफीज पुत्र रफीक मोहम्मद (38 वर्ष) निवासी हिम्मतगढ़, थाना पनिहार, जिला ग्वालियर के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी वर्तमान में ग्वालियर के गोल पहाड़िया क्षेत्र में रह रहा था।

    कोतवाली थाना प्रभारी के अनुसार, आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और न्यायालय में पेश किया गया है।

    पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी पहले भी स्मैक तस्करी के मामलों में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है। उसके खिलाफ मारपीट का भी एक मामला दर्ज है। इस वजह से पुलिस इसे आदतन अपराधी मानकर जांच को आगे बढ़ा रही है।

    फिलहाल पुलिस आरोपी से उसके सप्लायर और पूरे नेटवर्क के बारे में गहन पूछताछ कर रही है, ताकि नशे के इस रैकेट की जड़ तक पहुंचा जा सके

  • ‘छोटी सर्जरी’ बनी जिंदगी का संकट: ऑपरेशन के बाद कोमा में इंजीनियर, अस्पताल पर गंभीर सवाल

    ‘छोटी सर्जरी’ बनी जिंदगी का संकट: ऑपरेशन के बाद कोमा में इंजीनियर, अस्पताल पर गंभीर सवाल


    मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले से एक गंभीर मेडिकल मामला सामने आया है, जहां एक मामूली चोट के इलाज के दौरान 36 वर्षीय सिविल इंजीनियर विवेक तिरपुड़े कोमा में चले गए। घटना के बाद परिवार ने अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के ड्रग एडिक्ट होने का दावा किया है।

    जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी को स्कूटी स्लिप होने के बाद विवेक को हाथ की उंगली में चोट आई थी। स्थानीय अस्पताल में जांच के बाद उनके हाथ की एक हड्डी में फ्रैक्चर पाया गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने प्लास्टर कर दिया। परिजनों के मुताबिक, इसके बाद डॉक्टरों ने तेजी से रिकवरी के लिए एक छोटी सर्जरी की सलाह दी और भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया में कोई जोखिम नहीं है।

    परिवार का आरोप है कि सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी हुई, जिसके चलते सांस की नली की ट्यूब गलत स्थान पर चली गई और ब्रेन तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो गई। इसी घटना के बाद मरीज की हालत बिगड़ती गई और वह कोमा में चले गए। पिछले लगभग 100 दिनों से विवेक बेहोशी की हालत में हैं।

    परिजन लगातार अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के लिए भटक रहे हैं और अब तक इलाज पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें शुरुआत में बताया गया था कि यह एक सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया है, लेकिन परिणाम बेहद गंभीर निकले।

    पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल में इमरजेंसी सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी थी, जिसके बावजूद सर्जरी की गई। मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज की गई है और मेडिकल काउंसिल भी जांच कर रही है।

    वहीं अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को खारिज किया है। डायरेक्टर का कहना है कि मरीज ड्रग एडिक्ट था और शराब का सेवन करता था, जिसके कारण एनेस्थीसिया का असर सही तरह से नहीं हुआ। अस्पताल ने लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है।

    इस मामले में डॉक्टरों की अलग-अलग सफाई भी सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि सर्जरी शुरू होने से पहले ही मरीज की स्थिति बिगड़ गई थी।

    फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और मेडिकल लापरवाही के आरोपों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजन न्याय और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।

  • रणवीर-फरहान विवाद पर सलमान खान ने संभाली कमान, फिल्म इंडस्ट्री को नुकसान से बचाने की सलाह

    रणवीर-फरहान विवाद पर सलमान खान ने संभाली कमान, फिल्म इंडस्ट्री को नुकसान से बचाने की सलाह

    नई दिल्ली ।  डाॅन 3 से जुड़ा विवाद अब खत्म होता नजर आ रहा है। दरअसल, रणवीर पर FWICE द्वारा लगाए गए बैन के बाद मामला गर्म हो गया था। कई सारे सेलेब्स ने इस पर रिएक्ट करना और अपनी बात रखना शुरू कर दिया था। इसी बीच खबर आई की अब इस पूरे मामले में सलमान खान की एंट्री हुई है। जी हां, कहा जा रहा है कि सलमान ने रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच चीजें ठीक करने की कोशिश की है।
    सूत्रों ने क्या कहा?
    बॉलीवुड हंगामा को एक सूत्र ने बताया, ‘सलमान खान, रणवीर सिंह को पसंद करते हैं। इतना ही नहीं, फरहान अख्तर के परिवार से भी उनके काफी अच्छे संबंध हैं। ऐसे में उन्होंने दोनों पक्षों से बात की और उनसे कहा कि वे एक-दूसरे को और अपकमिंग प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचाए बिना मसले को सुलझाएं।’

    सलमान ने फरहान अख्तर को समझाया

    सूत्र ने कहा, ‘सलमान ने फरहान को समझाया कि इस इंडस्ट्री में क्रिएटिव डिफरेंस होना आम बात है। उन्होंने रणवीर से भी लंबी बातचीत की, ताकि उनका पक्ष समझ सकें। वह दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश कर रहे हैं ताकि किसी को भी ये न लगे कि उनके साथ कोई साजिश हुई है।’
    सलमान ने निकाला हल
    सूत्र ने आगे ये भी बताया कि सलमान ने फरहान अख्तर और रणवीर सिंह से ये भी कहा कि वे एक ही इंडस्ट्री का हिस्सा होने के नाते साथ बैठकर बात करें और इसका हल निकालें। इतना ही नहीं, उन्होंने दोनों को विवाद के शांत होने के बाद किसी दूसरे प्रोजेक्ट पर साथ काम करने की सलाह भी दी है।

    यहां समझिए पूरा विवाद

    ‘डॉन 3’ को लेकर पिछले कुछ समय से बॉलीवुड में जो ड्रामा चल रहा है, वह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है।
    1. शाहरुख खान का मना करना
    ‘डॉन 2’ (2011) की जबरदस्त कामयाबी के बाद फैंस सालों से ‘डॉन 3’ में शाहरुख खान की वापसी का इंतजार कर रहे थे। फरहान भी चाहते थे कि वह ‘डॉन 3’ में तीनों पीढ़ियों – अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और एक नया एक्टर, को लेकर आएं। लेकिन 2023 के आसपास शाहरुख ने इस प्रोजेक्ट से अपने पैर पीछे खींच लिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहरुख खान ‘डॉन 3’ की स्क्रिप्ट और कॉन्सेप्ट से संतुष्ट नहीं थे। ‘पठान’ और ‘जवान’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बाद, वह ऐसी कमर्शियल फिल्में करना चाहते थे जो मास ऑडियंस को बड़े पैमाने पर जोड़ सकें।
    2. रणवीर सिंह की एंट्री और ट्रोलिंग
    शाहरुख के मना करने के बाद, मेकर्स (एक्सेल एंटरटेनमेंट) ने अनाउंसमेंट की कि वे इस फिल्म में रणवीर सिंह को कास्ट कर रहे हैं। इस अनाउंसमेंट के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। लोग रणवीर सिंह को ट्रोल करने लगे।

    3. रणवीर सिंह का फिल्म छोड़ना

    विवाद तब और गहरा गया जब शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले खबर आई कि रणवीर सिंह ने ‘डॉन 3’ छोड़ दी है। बताया गया कि फिल्म की स्क्रिप्ट में कुछ बड़े बदलाव किए गए थे, जिससे रणवीर सहमत नहीं थे। इतना ही नहीं, रणवीर ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ की सक्सेस के बाद अपनी फिल्मों की चॉइस में बदलाव करना चाहते थे।
    4. बैन
    रणवीर सिंह के अचानक फिल्म छोड़ने के बाद फरहान अख्तर ने FWICE से शिकायत की। उन्होंने कहा कि रणवीर के आखिरी वक्त पर पीछे हटने की वजह से प्री-प्रोडक्शन और ओवरसीज (विदेश) शेड्यूल्स की तैयारियों में लगे 45 करोड़ बर्बाद हो गए हैं। ऐसे में FWICE ने रणवीर से बात करने की कोशिश की, लेकिन रणवीर ने उनके नोटिस का जवाब नहीं दिया। फिर FWICE ने प्रेम कॉन्फ्रेंस कर ये अनाउंस किया कि वे रणवीर के खिलाफ ‘नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव’ जारी कर रहे हैं। इसका मतलब ये है कि यूनियन से जुड़े हजारों तकनीशियन, स्पॉट बॉय और डेली वेज वर्कर्स तब तक रणवीर के किसी प्रोजेक्ट पर काम नहीं करेंगे, जब तक कि वह आकर इस मामले को नहीं सुलझाते।

  • ट्विशा केस में बड़ा अपडेट: पति और सास 5 दिन CBI रिमांड पर, आमने-सामने पूछताछ होगी

    ट्विशा केस में बड़ा अपडेट: पति और सास 5 दिन CBI रिमांड पर, आमने-सामने पूछताछ होगी


    भोपाल । एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच अब एक नए और अहम चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार को इस केस में आरोपी पति समर्थ सिंह और सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को कोर्ट में पेश किया, जहां दोनों को 5-5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।

    कोर्ट में पेशी के दौरान सीबीआई ने दोनों आरोपियों की रिमांड की मांग की, जिसे स्पेशल कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इससे पहले समर्थ सिंह पहले से ही सीबीआई रिमांड पर था, जिसकी अवधि समाप्त होने के बाद उसे दोबारा कोर्ट में पेश किया गया।

    जांच एजेंसी अब इस मामले में गहन पूछताछ की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, रिमांड अवधि के दौरान सीबीआई दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी, ताकि बयानों में मौजूद विरोधाभास सामने लाए जा सकें। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि समर्थ सिंह ने फरारी के दौरान कहां समय बिताया और किन लोगों से संपर्क में रहा।

    सीबीआई इस केस में तकनीकी और डिजिटल जांच को भी अहम हथियार बना रही है। एजेंसी कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल टावर लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और इंटरनेट गतिविधियों की गहन जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि घटना की रात किन लोगों से संपर्क हुआ और बाद में घटनास्थल पर कोई बदलाव तो नहीं किया गया।

    सबसे महत्वपूर्ण कदम के रूप में सीबीआई अब “वर्चुअल रीक्रिएशन” तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। इसके तहत ट्विशा शर्मा के आखिरी घंटों का डिजिटल अवतार तैयार किया जा रहा है। तीन मंजिला मकान की फॉरेंसिक मैपिंग, मोबाइल डेटा और सीसीटीवी टाइमस्टैंप को जोड़कर यह समझने की कोशिश हो रही है कि वह उस समय घर में कहां मौजूद थीं और किस समय क्या गतिविधि हुई।

    जांच एजेंसी “टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन” तकनीक के जरिए पूरे घटनाक्रम का मिनट-टू-मिनट वर्चुअल वॉकथ्रू तैयार कर रही है, जिससे हर गतिविधि को क्रमवार समझा जा सके।

    फिलहाल सीबीआई की यह कार्रवाई केस को निर्णायक मोड़ पर ले जाती दिख रही है, और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासों की उम्मीद जताई जा रही है।

  • जबलपुर में जमीन विवाद ने लिया हिंसक रूप, किसान पर जानलेवा हमला; गिरफ्तारी की मांग तेज

    जबलपुर में जमीन विवाद ने लिया हिंसक रूप, किसान पर जानलेवा हमला; गिरफ्तारी की मांग तेज

    जबलपुर । जबलपुर जिले के बेलखेड़ा थाना क्षेत्र के मातनपुर गांव में जमीन विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। यहां एक किसान पर जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव और दहशत का माहौल बना हुआ है, जबकि पीड़ित परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

    जानकारी के अनुसार, किसान भगवान सिंह ने गांव के ही एक व्यक्ति से लगभग डेढ़ एकड़ जमीन खरीदी थी। इसी जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि गांव के कुछ दबंग इस जमीन को खुद खरीदना चाहते थे, और बिक्री के बाद से ही वे पीड़ित किसान से रंजिश रखने लगे।

    घटना 25 मई की बताई जा रही है, जब भगवान सिंह ट्रैक्टर से खेत से लौट रहे थे। इसी दौरान आरोपियों ने रास्ते में उन्हें रोक लिया और बातचीत के बहाने खड़ा रखा। इसी बीच अन्य आरोपियों ने वहां पहुंचकर लोहे की रॉड से उन पर हमला कर दिया। परिजनों का आरोप है कि हमला इतना गंभीर था कि किसान बेहोश होकर गिर पड़े और आरोपी तब तक मारपीट करते रहे।

    हमले के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल को पहले बेलखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र और फिर जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। डॉक्टरों ने उनके सिर में 20 टांके लगाए। इलाज के बाद उन्हें 28 मई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    परिवार का आरोप है कि हमले के बाद भी दबंग लगातार धमकियां दे रहे हैं और खुलेआम गांव में घूम रहे हैं। इससे पूरा परिवार भय के माहौल में जी रहा है और उन्होंने खेत जाना भी बंद कर दिया है।

    पीड़ित पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनके खेत में तोड़फोड़ की और फसल व संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। परिवार का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई भी संतोषजनक नहीं रही। आरोप है कि पुलिस गांव पहुंची लेकिन बिना किसी ठोस कदम के वापस लौट गई।

    इस मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने गुरुवार को एएसपी कार्यालय पहुंचकर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सुरक्षा की मांग की है।

    वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले में नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर धाराएं बढ़ाई जा रही हैं। पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया है कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

    फिलहाल गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।

  • डिजिटल डिटॉक्स या पब्लिसिटी स्टंट? करण जौहर के बड़े सोशल मीडिया फैसले पर तेज हुई चर्चा

    डिजिटल डिटॉक्स या पब्लिसिटी स्टंट? करण जौहर के बड़े सोशल मीडिया फैसले पर तेज हुई चर्चा


    नई दिल्ली ।  करण जौहर ने कुछ दिन पहले ही अपना जन्मदिन मनाया है। हाल ही में वो उनकी फिल्म चांद मेरा दिल भी रिलीज हुई है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। इस बीच आज यानी गुरुवार को खबर आई कि करण जौहर ने अपने इंस्टाग्राम से शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण, फराह खान समेत बॉलीवुड के लगभग हर स्टार को अनफॉलो कर दिया है। करण बॉलीवुड एक्टर्स में से सिर्फ प्रियंका चोपड़ा को फॉलो कर रहे हैं। इस खबर ने जैसे ही तूल पकड़ा करण जौहर ने अपने इंस्टाग्राम पर लोगों को अनफॉलो करने का कारण भी बताया दिया।

    करण जौहर ने इंस्टाग्राम से शाहरुख समेत तमाम सेलेब्स को किया अनफॉलो
    करण जौहर ने अपने इंस्टाग्राम से शाहरुख खान, अनन्या पांडे, सारा अली खान, आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण, कार्तिक आर्यन, फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा समते लगभग हर बॉलीवुड सेलिब्रिटी जिन्हें वो फॉलो करते थे, सबको अनफॉलो कर दिया है। करण जौहर इस वक्त बॉलीवुड में सिर्फ प्रियंका चोपड़ा को इंस्टाग्राम पर फॉलो कर रहे हैं।

    करण जौहर ने क्यों किया लोगों को अनफॉलो?
    करण जौहर ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी पोस्ट करके बताया कि उन्होंने लोगों को अनफॉलो क्यों किया? उन्होंने बताया- ये डिजिटल डिटॉक्स है। मैं सबको अनफॉलो कर रहा हूं अपना समय और एनर्जी बचाने के लिए जो मैं इंस्टाग्राम पर लगाता हूं। भगवान के लिए, ये नेशनल खबर नहीं हो सकती। प्लीज क्लिकबेट कुछ और करिए…ये महत्व नहीं रखता है।

    केवल 74 लोगों को इंस्टाग्राम पर फॉलो कर रहे हैं करण जौहर
    हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रात 8 बजकर 41 मिनट तक करण जौहर इंस्टाग्राम पर 78 लोगों को फॉलो कर रहे थे। अब खबर लिखे जाने वक्त करण जौहरा की फॉलोइंग लिस्ट 78 से घटकर 74 हो गई है।

    रेडिट पर करण जौहर को लोगों ने किया ट्रोल
    रेडिट पर भी करण जौहर के इस एक्शन की चर्चा हुई। BollyBlindsNGossip पेज पर एक पोस्ट शेयर किया गया कि करण जौहर ने शाहरुख खान और उनके परिवार समेत कटरीना, दीपिका, विकी, आलिया, अनीत समेत बॉलीवुड के लगभग हर सेलिब्रिटी को अनफॉलो कर दिया है। इस पोस्ट के साथ लिखा गया- करण जौहर का एक और अटेंशन अपनी ओर खींचने का तरीका। क्योंकि चांद मेरा दिल डिजास्टर हो गई है।

    क्या बोल रहे रेडिट यूजर्स?
    रेडिट यूजर्स ने करण जौहर को उनके इस एक्शन के लिए उन्हें ट्रोल भी किया। एक यूजर ने लिखा- करण जौहर बहुत बड़े ड्रामा क्वीन हैं। एक दूसरे यूजर ने लिखा- क्या ये सब लोग करण जौहर की बर्थ डे पार्टी में नहीं पहुंचे? एक ने लिखा- शायद बर्थ डे पर मिले गिफ्ट पसंद नहीं आए हों। एक ने लिखा- करण ने उन लोगों को अनफॉलो कर दिया है जो उनके करीबी हैं, वो केवल उन लोगों को फॉलो कर रहे हैं जिनसे उनका फॉर्मल रिश्ता है। एक ने कहा- कल ही तो पार्टी कर रहा था सबके साथ।