Author: bharati

  • ईरान युद्ध के चलते भारतीय एयरलाइंस आर्थिक संकट में… हवाई यात्रियों पर बढ़ा बोझ

    ईरान युद्ध के चलते भारतीय एयरलाइंस आर्थिक संकट में… हवाई यात्रियों पर बढ़ा बोझ

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    नई दिल्ली। घरेलू विमान उद्योग (Domestic Aircraft Industry) पहले से ही भारत-पाक संघर्ष, एयर इंडिया विमान दुर्घटना और इंडिगो की उड़ानें रद्द होने के संकट से जूझ रहा था। अब पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध भारतीय एयरलाइंस (Indian Airlines) को बड़े घाटे की ओर ले जा रहा है। भारतीय एयरलाइंस का भविष्य खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भर है, क्योंकि भारत के कुल अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात का 51% हिस्सा सिर्फ खाड़ी देशों (बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई) से आता है।


    हवाई यात्रियों की जेब पर असर

    तनाव और संघर्ष का असर हवाई यात्रियों की जेब पर दिखने लगा है। इंडिगो, एयर इंडिया और अकासा एयर ने पहले 199 से 2,300 रुपये तक की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र पहले से ही बंद है। ऐसे में पश्चिम एशिया के वैकल्पिक रास्तों में बाधा आने से यात्रा का समय और ईंधन की लागत दोनों बढ़ गए हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा लिमिटेड की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट किंजल शाह ने बताया कि पश्चिम एशिया के लिए होने वाला परिचालन भारतीय विमानन उद्योग के कुल राजस्व का 15-20 फीसदी हिस्सा है।

    आंकड़ों से पता चलता है कि मुख्य भारतीय एयरलाइंस को वित्त वर्ष 2025 में कुल 4,600 करोड़ का नुकसान हुआ। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान स्थिति और भी खराब थी, जब एयरलाइंस को मुख्य रूप से एटीएफ की ऊंची कीमतों और रुपये के अवमूल्यन के कारण लगभग 20 हजार करोड़ का भारी नुकसान हुआ था।


    वर्ष 2025 में भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्री यातायात का विवरण (प्रतिशत में)

    खाड़ी देश – 51 फीसदी, अन्य 48 प्रतिशत
    – तीन देश – 1 फीसदी- इसमें अजरबैजान, जॉर्डन और तुर्किये शामिल)
    (स्रोत: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय)


    टॉप-7 अंतरराष्ट्रीय रूट में पांच संघर्षरत

    गत 14-28 मार्च के दौरान 3,288 अंतराष्ट्रीय विमानों के शेड्यूल विश्लेषण से पता चलता है कि इंडियन एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय बिजनेस पर बहुत ज्यादा दबाव है। शीर्ष सात इंटरनेशनल रूट में से पांच दुबई, अबू धाबी और शारजाह, दोहा और जेद्दा संघर्षग्रस्त हैं। इन्हीं रूट पर इंडियन एयरलाइंस की 1,303 फ्लाइट्स या कुल इंटरनेशनल फ्लाइट्स का 40 फीसदी हिस्सा ऑपरेट होता है।

    एयरलाइन-वार एनालिसिस से पता चलता है कि एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर और स्पाइसजेट की लगभग 90 फीसदी फ्लाइट्स पश्चिम एशिया से आने-जाने के लिए शेड्यूल थीं, जबकि एयर इंडिया और इंडिगो के लिए यह हिस्सा 22-51 फीसदी था।


    अंतरराष्ट्रीय रूट से आने-जाने वाली शेड्यूल फ्लाइट्स की संख्या (14-28 मार्च के बीच)

    रूट संख्या
    दुबई (यूएई) 498
    अबुधाबी (यूएई) 256
    सिंगापुर 193
    बैंकॉक(थाइलैंड) 190
    शारजहां (यूएई) 188
    दोहा (कतर) 187
    जेद्दा (सऊदी अरब) 174
    काठमांडू (नेपाल) 141
    लंदन (ब्रिटेन) 111
    कोलंबो (श्रीलंका) 90
    (स्रोत – डीजीसीए)


    मुख्य भारतीय एयरलाइंस का नुकसान बढ़ रहा

    पिछले साल 11 दिसंबर को संसद में शीर्ष पांच सरकारी और निजी एयरलाइंस के बारे में साझा डेटा से पता चलता है कि मुख्य भारतीय एयरलाइंस (एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर, इंडिगो और स्पाइसजेट) को वित्त वर्ष 2025 में कुल 4,600 करोड़ का नुकसान हुआ। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान स्थिति और भी खराब थी, जब एयरलाइंस को मुख्य रूप से एटीएफ की ऊंची कीमतों और रुपये के अवमूल्यन के कारण लगभग 20 हजार करोड़ का भारी नुकसान हुआ था। मौजूदा समय में भारतीय एयरलाइंस ज्यादातर घाटे में हैं और लगातार आने वाले संकट उन्हें और अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

  • Crude Oil के दाम आसमान पर, लागत बढ़ने से तेल कंपनियों का मुनाफा घटा… बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमत!

    Crude Oil के दाम आसमान पर, लागत बढ़ने से तेल कंपनियों का मुनाफा घटा… बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमत!


    नई दिल्ली।
    अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Prices) आसमान छू रही हैं। खाड़ी क्षेत्र में जंग शुरू होने के बाद से भारतीय रिफाइनरियों (Indian Refineries) के लिए कच्चे तेल की लागत में 93% का भारी उछाल आया है। शुक्रवार को यह कीमत 136.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जिससे इंडियन ऑयल, एचपीसीएल, बीपीसीएल और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी घरेलू तेल कंपनियों के मुनाफे में भारी गिरावट आई है। लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम अभी नहीं बढ़ रहे हैं। दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है, मुंबई में भी यही स्थिति। ये कीमतें आगे भी कुछ समय के लिए बनी रह सकती हैं।


    पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर

    अमेरिका सहित कई देशों ने कच्चे तेल की कीमतों के अनुरूप खुदरा कीमतें बढ़ा दी हैं। अमेरिका में पेट्रोल 3.7 डॉलर प्रति गैलन है। वहीं भारत में तेल कंपनियों ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। पिछले कुछ महीनों में मुनाफा कमाने के बाद, अब इन कंपनियों को अपने मार्जिन में नुकसान उठाना पड़ रहा है।


    राज्य चुनाव बने वजह?

    सरकार की ओर से 31 मार्च तक कीमतों या करों में कोई बदलाव किए जाने की संभावना नहीं है, ताकि बजट लक्ष्यों के अनुरूप राजकोषीय संतुलन बनाए रखा जा सके। इसके अलावा, चार राज्यों और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों के मद्देनजर, 29 अप्रैल को अंतिम चरण के मतदान तक भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के आसार कम ही हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में 40% से अधिक और रूसी यूराल क्रूड में 50% से अधिक की वृद्धि हुई है। 26 फरवरी को भारतीय बास्केट की कीमत 70.9 डॉलर प्रति बैरल थी। 12 मार्च को यह बढ़कर 127.2 डॉलर हो गई और शुक्रवार को 7.3% उछलकर 136.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।


    संकट का मुख्य कारण: होर्मुज जलडमरूमध्य

    भारत पिछले कई महीनों से रियायती दर पर रूसी तेल खरीदकर एक लाभदायक स्थिति में था, लेकिन अब उसकी कीमतें भी बढ़ गई हैं। इस वैश्विक कमी का सबसे बड़ा कारण ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करना है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का 20% हिस्सा संभालता है। भारत के लिए इसका असर और भी गंभीर है, क्योंकि देश की कुल प्रसंस्कृत ऊर्जा का 60% हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से आता है।

    9 मार्च को ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने के फैसले के बाद कीमतों में थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन जब तक जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होती, कीमतें अस्थिर रहने की उम्मीद है।


    अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव

    आर्थिक विशेषज्ञों ने इस संकट के कारण भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य नीलकंठ मिश्रा के अनुसार, यदि कच्चा तेल एक साल तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तो भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ेगा। इससे व्यापार संतुलन को लगभग 80 अरब डॉलर (जीडीपी का 2.1%) का भारी नुकसान हो सकता है।

    रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग मार्गों में लंबे समय तक व्यवधान से भारत के वृहद-आर्थिक परिदृश्य पर असर पड़ेगा। कच्चे तेल की औसत कीमत में मात्र 10 डॉलर की वृद्धि से देश का चालू खाता घाटा 30-40 बेसिस पॉइंट बढ़ सकता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने बताया कि इसका असर वैश्विक विकास पर पड़ेगा। उन्होंने रविवार को ‘X’ पर लिखा कि अगर 2026 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो वैश्विक विकास दर 0.3-0.4 प्रतिशत अंक गिर सकती है और मुख्य मुद्रास्फीति 60 बेसिस पॉइंट बढ़ सकती है।

  • गौरीघाट की नर्मदा महाआरती में बड़ा बदलाव गंगा आरती मॉडल से बनेगी पारदर्शी फंडिंग व्यवस्था

    गौरीघाट की नर्मदा महाआरती में बड़ा बदलाव गंगा आरती मॉडल से बनेगी पारदर्शी फंडिंग व्यवस्था

    जबलपुर के गौरीघाट में होने वाली प्रसिद्ध नर्मदा महाआरती की व्यवस्था में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है प्रशासन अब इसकी वित्तीय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में सक्रिय हो गया है हाल ही में मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है और जांच के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे

    प्रशासन का साफ कहना है कि धार्मिक गतिविधियों में किसी तरह का अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा लेकिन यदि फंडिंग और प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है उद्देश्य यह है कि महाआरती से जुड़ी आर्थिक व्यवस्था पारदर्शी हो और आम लोगों का विश्वास मजबूत बना रहे

    इस सुधार प्रक्रिया में वाराणसी की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती को मॉडल के रूप में अपनाने की योजना बनाई जा रही है वाराणसी में गंगा आरती का संचालन मुख्य रूप से दान स्थानीय समितियों और श्रद्धालुओं के स्वैच्छिक योगदान से होता है इसके अलावा विशेष अवसरों और VIP बैठने की व्यवस्था के लिए शुल्क भी लिया जाता है जिससे आयोजन के लिए आवश्यक धन जुटाया जाता है

    वाराणसी के दशाश्वमेघ घाट पर होने वाली आरती में चंदा और बुकिंग की सुव्यवस्थित प्रणाली है जिसे स्थानीय समितियां और पुजारी मिलकर संचालित करते हैं वहीं गंगा सेवा निधि जैसी संस्थाएं पूरे आयोजन के प्रबंधन और वित्तीय संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं जरूरत पड़ने पर घाटों के विकास के लिए सरकारी सहयोग भी लिया जाता है

    इसी व्यवस्था से प्रेरणा लेते हुए जबलपुर में भी नर्मदा महाआरती के लिए एक संगठित और जवाबदेह तंत्र तैयार करने की योजना है जिससे दान राशि का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश खत्म हो

    नर्मदा महाआरती का इतिहास भी काफी दिलचस्प है वर्ष 2012 में इसकी शुरुआत हुई थी जब स्थानीय निवासी सुधीर अग्रवाल और उनकी नर्मदा भक्त मंडली ने 28 जनवरी को पहली बार आरती का आयोजन किया था बाद में 3 फरवरी को इसे भव्य रूप दिया गया शुरुआती आयोजन के दौरान बारिश होने जैसी घटनाएं भी हुईं लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह ने इसे एक बड़े धार्मिक आयोजन में बदल दिया

    हालांकि हाल के दिनों में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे सवालों पर महाआरती की व्यवस्था देख रहे ओंकार दुबे ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है उनका कहना है कि पूरी व्यवस्था ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है और जो भी धनराशि प्राप्त होती है उसका बड़ा हिस्सा दैनिक और विशेष आयोजनों में खर्च हो जाता है

    अब देखना यह होगा कि प्रशासन की जांच और प्रस्तावित सुधारों के बाद नर्मदा महाआरती का प्रबंधन किस तरह से नया स्वरूप लेता है लेकिन इतना तय है कि पारदर्शिता बढ़ने से श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा और यह आयोजन और भी व्यवस्थित रूप में सामने आएगा

  • ईरान पर अमेरिकी हमले तेज: 7000 से ज्यादा ठिकाने तबाह, 100 जहाज नष्ट होने का ट्रंप का दावा

    ईरान पर अमेरिकी हमले तेज: 7000 से ज्यादा ठिकाने तबाह, 100 जहाज नष्ट होने का ट्रंप का दावा


    वाशिंगटन। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान को लेकर बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक 7000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं, जिनमें ज्यादातर सैन्य और व्यावसायिक ठिकाने शामिल हैं।

    व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरानी खतरे को खत्म करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। उनके मुताबिक, इन हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

    मिसाइल और ड्रोन हमलों में भारी गिरावट का दावा
    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपणों में 90% और ड्रोन हमलों में 95% तक की कमी आई है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने मिसाइल और ड्रोन निर्माण से जुड़े कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें हाल ही में तीन प्रमुख संयंत्रों पर हमले शामिल हैं।

    100 से ज्यादा नौसैनिक जहाज नष्ट
    अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, बीते हफ्तों में ईरान के 100 से अधिक नौसैनिक जहाजों को डुबोया या नष्ट किया जा चुका है। उन्होंने खास तौर पर खार्ग द्वीप पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के सभी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया, हालांकि तेल ढांचे को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया।

    होर्मुज को लेकर कड़ी चेतावनी
    ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर भी सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान या कोई अन्य पक्ष यहां वाणिज्यिक जहाजों के रास्ते में बाधा डालता है, तो अमेरिका तेल ढांचे पर भी हमला करने का फैसला ले सकता है।

    उनका कहना था कि यह कार्रवाई कुछ ही मिनटों में की जा सकती है, लेकिन उसके असर लंबे समय तक रहेंगे।

    समुद्री क्षमता को भी झटका
    ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिकी सेना ने 30 से अधिक माइन बिछाने वाले जहाजों और उनसे जुड़ी सैन्य सुविधाओं को नष्ट कर दिया है, जिससे ईरान की समुद्री क्षेत्र में धमकी देने की क्षमता काफी कमजोर हुई है।

    दुनिया से सहयोग की अपील
    अंत में ट्रंप ने अन्य देशों से अपील करते हुए कहा कि जिन देशों की अर्थव्यवस्था होर्मुज जलडमरूमध्य पर ज्यादा निर्भर है, उन्हें इस संकट में अमेरिका का साथ देना चाहिए।

    इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में आई तकनीकी खराबी…

    न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में आई तकनीकी खराबी…


    नई दिल्ली।
    न्यूयॉर्क से दिल्ली (New York to Delhi) की तरफ आ रही एयर इंडिया (Air India flight) की फ्लाइट संख्या ए350 को तकनीकी खराबी (Technical fault) की वजह से आयरलैंड की तरफ मोड़ दिया गया है। यहां शैनन शहर में विमान की इमरजैंसी लैंडिग (Emergency Landing) की जाएगी। तकनीकि जांच के बाद फ्लाइट फिर से उड़ान भर पाने में सक्षम होगी। सूत्रों के अनुसार विमान में करीब 300 लोग सवार हैं। शैनन शहर की ओर मोड़े जाने से पहले यह 6 घंटे की यात्रा पूरी कर चुका था।

    एअरलाइन ने शाम को जारी एक बयान में इस घटना की जानकारी दी। एयरलाइन की तरफ से कहा गया, “15 मार्च को न्यूयॉर्क (जेएफके) से दिल्ली जा रहे विमान एआई102 को तकनीकी खराबी की आशंका के चलते एहतियाती तौर पर आयरलैंड के शैनन की ओर मोड़ दिया गया। एयर इंडिया के उच्च सुरक्षा मानकों के अनुरूप विमान का वर्तमान में व्यापक तकनीकी मूल्यांकन किया जा रहा है, जिसमें अतिरिक्त समय लगेगा।”सूत्रों ने बताया कि विमान में कंपन और शोर उत्पन्न हुआ, जिसके बाद उसे शैनन की ओर मोड़ दिया गया।

    इस विमान को अप्रैल 2024 में एअर इंडिया के बेड़े में शामिल किया गया था। यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए एअर इंडिया ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि यात्री जल्द से जल्द अपनी दिल्ली की यात्रा जारी रख सकें। इससे पहले दिन में एअरलाइन ने कहा कि विमान स्थानीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे शैनन हवाई अड्डे पर सुरक्षित रूप से उतर गया और सभी यात्री और चालक दल सुरक्षित हैं। प्रवक्ता ने कहा, “तय सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार विमान की विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है।” फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विमान शैनन की ओर मोड़े जाने से पहले लगभग छह घंटे तक हवा में रहा।

  • पाकिस्तान में गहराता ऊर्जा संकट: इस तारीख के बाद गैस आपूर्ति ठप होने की चेतावनी

    पाकिस्तान में गहराता ऊर्जा संकट: इस तारीख के बाद गैस आपूर्ति ठप होने की चेतावनी

    इस्‍लामाबाद। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण कतर से LNG की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। इसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है। पाकिस्तान में गैस सप्लाई को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया गया है, जिसके मुताबिक आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
    सरकारी सूत्रों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा भंडार और आपूर्ति व्यवस्था को देखते हुए निर्धारित तारीख के बाद गैस की उपलब्धता लगभग खत्म होने जैसी स्थिति बन सकती है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर उद्योगों तक पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
    पाकिस्तान में 14 अप्रैल के बाद लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) उपलब्ध नहीं रहेगी। सीनेट की पेट्रोलियम कमिटी को अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि कतर से पाकिस्तान का LNG आयात 2 मार्च से पूरी तरह निलंबित है। कतर अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LNG निर्यातक है।
    मार्च महीने के लिए निर्धारित 8 LNG कार्गो में से केवल 2 ही पाकिस्तान पहुंचे हैं। वहीं, अप्रैल में आने वाले 6 कार्गो के भी देश में पहुंचने की कोई संभावना नहीं है। युद्ध के कारण प्रमुख संकरे समुद्री जलमार्गों से शिपिंग लगभग रुक गई है, जिससे दुनिया भर की लगभग 20% तेल और LNG आपूर्ति बाधित हुई है। इसके चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 2022 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
    महंगी बिजली और गैस की किल्लत
    इस कमी को पूरा करने के लिए पाकिस्तान अजरबैजान से स्पॉट मार्केट से LNG खरीदने पर विचार कर रहा है। लेकिन यह सौदा 24 डॉलर प्रति यूनिट पड़ेगा, जबकि कतर के साथ कॉन्ट्रैक्ट के तहत यह केवल 9 डॉलर प्रति यूनिट था। इससे बिजली उत्पादन काफी महंगा हो जाएगा। बिजली क्षेत्र को गैस की आपूर्ति 300 mmcfd से घटाकर 130 mmcfd कर दी गई है। इसके अलावा, सुई सदर्न गैस कंपनी (SSGC) ने एक उर्वरक संयंत्र की गैस आपूर्ति में 50% की कटौती की है।
    पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के बढ़ने के कारण पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम में 55 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) के अनुसार, 7 मार्च से अब तक डीजल की कीमतों में लगभग 100% और पेट्रोल की कीमतों में लगभग 70% की वृद्धि हुई है। वैश्विक स्तर पर हाई-स्पीड डीजल 88 डॉलर से बढ़कर 187 डॉलर प्रति बैरल और पेट्रोल 74 डॉलर से बढ़कर 130 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।
    पाकिस्तान के पास मौजूदा ईंधन भंडार

    पेट्रोलियम सचिव मिर्जा नसीर-उद-दीन अहमद ने समिति को देश के मौजूदा स्टॉक की जानकारी दी:

    पेट्रोल: 27 दिनों का भंडार

    डीजल: 21 दिनों का भंडार

    कच्चा तेल: 11 दिनों का भंडार

    LPG: 9 दिनों का भंडार

    JP-1 (विमानन ईंधन): 14 दिनों का भंडार

    पाकिस्तानी सीनेटर मंजूर अहमद और सादिया अब्बासी ने सवाल उठाया कि जब देश के पास 28 दिनों तक का रिजर्व स्टॉक था, तो सरकार ने कीमतें क्यों बढ़ाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुराने स्टॉक पर दाम बढ़ाकर मुनाफा कमा रही है। पेट्रोलियम सचिव ने स्पष्ट किया कि कीमतों में यह बढ़ोतरी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि जमाखोरी को हतोत्साहित करने और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
    सरकार के आगामी कदम और भारत की स्थिति

    मोटरसाइकिल और रिक्शा चालकों के लिए पाक सरकार एक राहत पैकेज पर काम कर रही है। आपूर्ति के दबाव को कम करने के लिए शहबाज सरकार ने अस्थायी रूप से यूरो-5 (Euro-5) मानक से कम गुणवत्ता वाले तेल के आयात की अनुमति दे दी है। अधिकारियों ने समिति को यह भी बताया कि इस क्षेत्रीय संकट से भारत भी अछूता नहीं है; वहां भी पेट्रोल के लगभग 60% आयात पर असर पड़ा है।

  • होर्मुज खुलवाने पर अलग-थलग पड़े अमेरिकी राष्ट्रपति…. फ्रांस-ब्रिटेन के रूख पर जताया असंतोष

    होर्मुज खुलवाने पर अलग-थलग पड़े अमेरिकी राष्ट्रपति…. फ्रांस-ब्रिटेन के रूख पर जताया असंतोष


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French President Emmanuel Macron) के होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए प्रस्तावित गठबंधन में शामिल न होने के रुख पर असंतोष जताया है। ट्रंप ने कहा कि वे इस मुद्दे पर मैक्रों से बात कर चुके हैं और उन्हें 0 से 10 के पैमाने पर 8 अंक देते हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि वे मदद करेंगे। ट्रंप ने ट्रंप कैनेडी सेंटर बोर्ड सदस्यों के साथ दोपहर के भोजन के दौरान अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे मजबूत सेना करार देते हुए कहा कि अमेरिका को किसी की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं और हमारी सेना सबसे मजबूत है।

    इस दौरान ट्रंप ने ब्रिटेन पर भी नाराजगी जाहिर की और कहा कि वे ब्रिटेन से खुश नहीं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्रिटेन पूरे उत्साह से गठबंधन में शामिल होगा। ट्रंप ने कहा कि हम वर्षों से नाटो के जरिए इन देशों की रक्षा कर रहे हैं। पुतिन हमसे डरते हैं, यूरोप से नहीं। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के संदर्भ में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित स्थिति में रखा है। उन्होंने कहा कि ईरान ने हमेशा इस जलडमरूमध्य को आर्थिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, लेकिन अब यह लंबे समय तक नहीं चलेगा।

    ट्रंप ने खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि सैन्य ठिकानों को नष्ट किया गया है, लेकिन तेल ढांचे को बरकरार रखा गया है। उन्होंने ईरान के रक्षा आधार, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को लगभग समाप्त करने का दावा किया। ट्रंप के अनुसार, 30 से अधिक बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर दिया गया है और ईरान भर में 7000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए हैं, जिससे बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपणों में 90 प्रतिशत और ड्रोन हमलों में 95 प्रतिशत की कमी आई है।

    उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने से अभी तक 00 से अधिक ईरानी नौसैनिक पोत डुबोए या नष्ट किए गए हैं। ट्रंप ने ईरानी वायुसेना, नौसेना और नेतृत्व को लगभग पूरी तरह नष्ट होने का दावा किया। वहीं, वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पत्रकारों से कहा कि ट्रंप इस महीने के अंत में चीनी नेता शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए उत्सुक हैं, लेकिन तारीखों में बदलाव संभव है। उनकी प्राथमिकता ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता है। लीविट ने ब्रिटेन से होर्मुज में मदद के लिए पहले और तेज कदम उठाने की अपेक्षा जताई और कहा कि ट्रंप यूरोपीय सहयोगियों से समर्थन मांगना जारी रखेंगे।

  • छात्राओं के गर्भवती होने के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; सरकार पर आरोपों की बौछार

    छात्राओं के गर्भवती होने के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; सरकार पर आरोपों की बौछार


    रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को बीजापुर जिले के एक पोर्टा केबिन स्कूल हॉस्टल से जुड़ा मामला सियासी तूफान बन गया। तीन छात्राओं के गर्भवती होने के आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जो अंततः हंगामे और वॉकआउट में बदल गई।

    विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
    कांग्रेस विधायकों ने सदन में आरोप लगाया कि बीजापुर के हॉस्टल में रहने वाली तीन छात्राएं गर्भवती पाई गई हैं। इस मुद्दे पर जवाब की मांग करते हुए विक्रम मंडावी, चरण दास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा।

    शिक्षा मंत्री का जवाब, लेकिन विवाद बरकरार
    राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन तीन छात्राओं की बात की जा रही है, उनमें से दो हॉस्टल में रहती ही नहीं हैं, जबकि एक छात्रा दिवाली की छुट्टियों के बाद से वापस नहीं लौटी है।

    हालांकि मंत्री के इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

    ‘मामला दबाने की कोशिश’ का आरोप
    ‘शून्य काल’ के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस गंभीर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि जैसे ही छात्राओं के गर्भवती होने की बात सामने आई, उन्हें घर भेज दिया गया और अब प्रशासन यह कहकर मामले को कमजोर करने में जुटा है कि वे हॉस्टल में रह ही नहीं रही थीं।

    विपक्ष ने यह भी कहा कि मामला आदिवासी क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।

    आरोपियों को बचाने का आरोप
    विपक्षी विधायकों का आरोप है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाया जा रहा है। इसी कारण सदन में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की अनुमति भी नहीं दी जा रही।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने जताई चिंता
    पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि आवासीय स्कूल से जुड़ी ऐसी खबर बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि तीन में से दो छात्राएं नाबालिग हैं और मामले की पूरी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • SC की फटकार से नाराज थे HC जज….510 प्रकरणों में से 508 में आरोपी को दे दी जमानत

    SC की फटकार से नाराज थे HC जज….510 प्रकरणों में से 508 में आरोपी को दे दी जमानत


    इलाहाबाद।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के जज, जस्टिस भाटिया, ने बीते महीने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से आहत होकर देश के मुख्य न्यायधीश से अनुरोध किया था कि उन्हें जमानत से जुड़े मामलों की सुनवाई का दायित्व ना दिया जाए। दरअसल सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दहेज हत्या के एक मामले में आरोपी को जमानत देने के जस्टिस भाटिया के फैसले पर नाराजगी जताई थी और इस फैसले को निराशाजनक बताया था। अब जस्टिस भाटिया के फैसलों को लेकर कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक अक्तूबर से दिसंबर 2025 के बीच उन्होंने दहेज हत्या से जुड़े 510 नियमित जमानत मामलों में फैसला सुनाया। इनमें से 508 मामलों में उन्होंने आरोपी को जमानत दे दी। यह कुल मामलों का लगभग 99.61 प्रतिशत है। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में इन जमानत आदेशों की भाषा, फैसले की संरचना और जमानत राशि भी लगभग एक जैसी पाई गई, जबकि अलग-अलग मामलों में पीड़ितों की मौत की परिस्थितियां अलग-अलग थीं।


    रिपोर्ट में क्या?

    रिपोर्ट के मुताबिक इन आदेशों में लगभग आधे मामलों में जस्टिस भाटिया ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह लगे कि मृत्यु से ठीक पहले दहेज के कारण प्रताड़ना हुई थी। जांच में पाया गया कि 340 मामलों में मृत्यु का कारण फांसी बताया गया। 27 मामलों में जहर खाने, 16 में गला घोंटने, 11 में जलने की चोट, 7 में दबाकर मारने और 7 में सिर पर चोट लगने का उल्लेख था। 4 मामलों में डूबने से मृत्यु दर्ज की गई। वहीं केवल 10 मामलों को छोड़कर बाकी सभी में अदालत ने कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।


    सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी नाराजगी

    इससे पहले बीते 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस भाटिया के फैसलों पर नाराजगी जताई थी। याचिका में जस्टिस भाटिया द्वारा 10 अक्टूबर, 2025 को दी गई जमानत को चुनौती दी थी। HC ने उस मामले में दहेज हत्या के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत दी थी। आरोपी 27 जुलाई, 2025 से जेल में था और जमानत याचिका के अनुसार उसका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं था।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए टिप्पणी की, “10 अक्टूबर, 2025 का विवादित आदेश अब तक के सबसे चौंकाने वाले और निराशाजनक आदेशों में से एक है।” शीर्ष न्यायालय ने सवाल उठाया कि दहेज हत्या जैसे गंभीर अपराध में आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाते समय उच्च न्यायालय ने किन बातों को आधार बनाया। कोर्ट ने जमानत आदेश को रद्द करने के बाद निर्देश दिया कि जमानत आदेश पारित करने के तरीके के संबंध में समीक्षा के लिए निर्णय की एक प्रति इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजी जाए।


    CJI के पास पहुंचे थे जस्टिस भाटिया

    इसके बाद जस्टिस भाटिया ने उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि वह भविष्य में जमानत संबंधी मामलों की सुनवाई नहीं करना चाहते और उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि उन्हें ऐसे मामले सुनवाई के लिए आवंटित ना किए जाएं। उन्होंने कहा था कि उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों का उन पर बहुत निराशाजनक और हतोत्साहित करने वाला प्रभाव पड़ा है।

  • ईरान से भारतीयों की सुरक्षित वापसी जारी: आर्मेनिया-अजरबैजान के रास्ते निकाले गए सैकड़ों नागरिक, सरकार ने दी जानकारी

    ईरान से भारतीयों की सुरक्षित वापसी जारी: आर्मेनिया-अजरबैजान के रास्ते निकाले गए सैकड़ों नागरिक, सरकार ने दी जानकारी

    तेहरान/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान तेजी से जारी है। भारत सरकार ने बताया कि अब तक सैकड़ों नागरिक पड़ोसी देशों के जरिए ईरान से बाहर निकल चुके हैं।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इंटर-मिनिस्ट्री ब्रीफिंग में जानकारी देते हुए कहा कि करीब 550 भारतीय जमीनी रास्ते से आर्मेनिया पहुंचे हैं, जबकि लगभग 90 नागरिक अजरबैजान में प्रवेश कर चुके हैं।

    तीर्थयात्री और छात्र भी सुरक्षित निकाले गए
    सरकार के मुताबिक, 284 भारतीय तीर्थयात्रा के लिए ईरान गए थे, जिनमें से कुछ पहले ही भारत लौट चुके हैं, जबकि बाकी को जल्द वापस लाने की तैयारी है। इसके अलावा तेहरान में मौजूद भारतीय छात्रों को भी एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

    दूतावास कर रहा लगातार समन्वय
    तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों का समन्वय कर रहा है। केंद्र सरकार राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के संपर्क में है, जबकि हेल्पलाइन के जरिए नागरिकों की सहायता जारी है।

    खाड़ी देशों से बढ़ाई गई उड़ानें
    अधिकारियों ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ओमान और कतर से सोमवार को ही 45 उड़ानें भारत पहुंचने वाली हैं। 28 फरवरी से अब तक करीब 2.2 लाख भारतीय इन क्षेत्रों से वापस लौट चुके हैं।

    कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुलने के बाद वहां से उड़ानें फिर शुरू हो गई हैं, जबकि कुवैत का एयरस्पेस अभी भी बंद है। आने वाले दिनों में और विशेष उड़ानें शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।

    अन्य देशों से भी निकासी जारी
    बहरीन और इराक में फंसे भारतीयों को सऊदी अरब के रास्ते निकाला जा रहा है।

    इस बीच सोहर में दो भारतीय नागरिकों की मौत की भी पुष्टि हुई है। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास पीड़ित परिवारों के संपर्क में है और जल्द ही शव भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    सरकार ने भरोसा दिलाया है कि विदेश में फंसे हर भारतीय की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।