Author: bharati

  • मध्य प्रदेश में डीजल की कीमतें स्थिर, 18 जुलाई को भी नहीं बदले ईंधन के दाम; जिलों में टैक्स के अनुसार दिखा मूल्य अंतर

    मध्य प्रदेश में डीजल की कीमतें स्थिर, 18 जुलाई को भी नहीं बदले ईंधन के दाम; जिलों में टैक्स के अनुसार दिखा मूल्य अंतर


    मध्य प्रदेश:  में 18 जुलाई 2026 को डीजल की कीमतों में कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। राज्य में डीजल का औसत खुदरा मूल्य लगभग 100.50 रुपये प्रति लीटर बना हुआ है। एक दिन पहले यानी 17 जुलाई को भी कीमतें इसी स्तर पर थीं। लगातार स्थिर बने हुए ईंधन दामों से वाहन चालकों, परिवहन क्षेत्र और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को फिलहाल राहत मिली हुई है। हालांकि राज्य के विभिन्न जिलों में स्थानीय करों और परिवहन लागत के कारण प्रति लीटर कीमतों में अंतर बना हुआ है।

    मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों और जिलों की बात करें तो राजधानी भोपाल में डीजल 99.33 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है, जबकि इंदौर में इसकी कीमत 100.09 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। जबलपुर में डीजल 99.69 रुपये, ग्वालियर में 99.59 रुपये और उज्जैन में 100.11 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है। वहीं रीवा, अनूपपुर, मंडला, धार, छतरपुर, शाहडोल, उमरिया और सतना जैसे कई जिलों में डीजल का मूल्य 101 रुपये प्रति लीटर से अधिक है। दूसरी ओर अशोकनगर, भोपाल, ग्वालियर और सीहोर जैसे कुछ जिलों में कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर से नीचे बनी हुई हैं।

    राज्य में जिलावार कीमतों का यह अंतर मुख्य रूप से स्थानीय वैट, परिवहन व्यय और अन्य करों के कारण देखने को मिलता है। इसी वजह से एक ही राज्य के भीतर अलग-अलग स्थानों पर उपभोक्ताओं को डीजल के लिए अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। ईंधन कंपनियां प्रत्येक जिले के कर ढांचे और वितरण लागत के आधार पर खुदरा मूल्य तय करती हैं।

    देश में ईंधन की कीमतें डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग प्रणाली के तहत निर्धारित की जाती हैं। इस व्यवस्था के अनुसार पेट्रोल और डीजल के दामों की समीक्षा प्रतिदिन की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर नई दरें रोज सुबह 6 बजे लागू होती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार, विनिमय दर या अन्य आर्थिक संकेतकों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता तो कीमतें कई दिनों तक स्थिर भी रह सकती हैं।

    डीजल की कीमत तय करने में कई महत्वपूर्ण आर्थिक कारकों की भूमिका होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रुपये और अमेरिकी डॉलर के बीच विनिमय दर, वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति, शिपिंग लागत तथा कर संरचना जैसे तत्व अंतिम खुदरा मूल्य को प्रभावित करते हैं। इन सभी कारकों में बदलाव होने पर ईंधन की कीमतों में वृद्धि या कमी देखने को मिल सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल केवल निजी वाहनों के लिए ही नहीं बल्कि माल परिवहन, कृषि, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में इसकी कीमतों में स्थिरता का सीधा असर परिवहन लागत और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ता है। लंबे समय तक कीमतें स्थिर रहने से व्यापारिक गतिविधियों की लागत नियंत्रित रहती है और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं बढ़ता।

    फिलहाल मध्य प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि जुलाई महीने में डीजल की कीमतों में कोई उल्लेखनीय बदलाव दर्ज नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार नई कीमतें तय होंगी, जिनकी घोषणा प्रतिदिन सुबह की जाएगी। वाहन चालकों और व्यवसायों के लिए सलाह है कि ईंधन भरवाने से पहले अपने जिले की ताजा कीमत की जानकारी अवश्य प्राप्त करें, क्योंकि स्थानीय करों के कारण अलग-अलग शहरों में दरों में अंतर बना रह सकता है।

  • मध्य प्रदेश के कई शहरों की तैयारी पर उठे सवाल, अर्बन चैलेंज फंड में उज्जैन-इंदौर को बढ़त, छिंदवाड़ा और कटनी को करना होगा इंतजार

    मध्य प्रदेश के कई शहरों की तैयारी पर उठे सवाल, अर्बन चैलेंज फंड में उज्जैन-इंदौर को बढ़त, छिंदवाड़ा और कटनी को करना होगा इंतजार


    मध्य प्रदेश:
    भारत सरकार के अर्बन चैलेंज फंड के पहले चरण में मध्य प्रदेश के लिए 2753.10 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। यह स्वीकृति राज्य के कई शहरों में जल प्रदाय, सीवरेज नेटवर्क, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक पर्यटन से जुड़े विकास कार्यों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि इस प्रक्रिया में कुछ प्रमुख नगर निगम आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी नहीं कर सके, जिसके कारण उन्हें पहले चरण का लाभ नहीं मिल पाया।

    पहले चरण में सबसे बड़ा झटका छिंदवाड़ा, कटनी और ग्वालियर नगर निगमों को लगा। इन शहरों की परियोजनाएं समय पर निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रस्तुत नहीं हो सकीं, जिससे इन्हें अब अगले चरण की प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। अधिकारियों के अनुसार परियोजनाओं की तकनीकी और वित्तीय तैयारी में कमी के कारण प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति तक नहीं पहुंच पाए।

    छिंदवाड़ा नगर निगम ने लगभग 67 करोड़ रुपये की जल प्रदाय परियोजना तैयार की थी, लेकिन इसके लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था और ऋण संबंधी दस्तावेज स्पष्ट नहीं होने के कारण प्रस्ताव अधूरा माना गया। इसी प्रकार कटनी नगर निगम ने लगभग 600 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों की योजना बनाई थी, लेकिन समय पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं होने से परियोजना पहले चरण में शामिल नहीं हो सकी।

    ग्वालियर नगर निगम की स्थिति भी इससे अलग नहीं रही। यहां जल प्रदाय और सीवरेज से जुड़े 1500 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य प्रस्तावित थे, लेकिन विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन समय पर तैयार नहीं हो पाया। इसके कारण इतने बड़े निवेश वाली योजना भी फिलहाल अगले चरण के लिए स्थगित कर दी गई। राजधानी भोपाल को भी पहले चरण में परियोजना के तहत राशि नहीं मिल सकी।

    इसके विपरीत इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और रीवा जैसे शहरों की परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इंदौर में जल प्रदाय व्यवस्था और वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए 907 करोड़ रुपये तथा सीवर नेटवर्क उन्नयन और ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 306 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जबलपुर में जल प्रदाय विस्तार के लिए 64 करोड़ और सीवरेज परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। रीवा को जल प्रदाय व्यवस्था के लिए 99 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है।

    धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उज्जैन को इस चरण में सबसे बड़ी मंजूरी मिली है। यहां 11 प्रमुख मंदिर परिसरों के समग्र विकास और कॉरिडोर निर्माण के लिए 1124 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और शहरी अधोसंरचना को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण निवेश माना जा रहा है।

    अर्बन चैलेंज फंड के तहत केंद्र सरकार परियोजना लागत का 25 प्रतिशत, यानी लगभग 688.28 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी। शेष राशि में 50 प्रतिशत संबंधित नगरीय निकायों को बॉण्ड, ऋण या अन्य वित्तीय साधनों के माध्यम से जुटानी होगी, जबकि निजी निवेश को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। राज्य का कुल हिस्सा लगभग 5000 करोड़ रुपये रहेगा और इसके माध्यम से अगले पांच वर्षों में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की शहरी विकास परियोजनाएं पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    इस पूरी प्रक्रिया ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल योजनाएं तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय पर वित्तीय, तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां पूरी करना भी उतना ही आवश्यक है। जिन नगर निगमों की परियोजनाएं पहले चरण से बाहर रह गई हैं, उनके लिए अगले चरण से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी करना बड़ी चुनौती होगी। यदि ऐसा किया जाता है तो भविष्य में इन शहरों को भी आधुनिक शहरी सुविधाओं और आधारभूत विकास का लाभ मिल सकेगा।

  • सांदीपनि विद्यालयों पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा दावा, बोले- निजी स्कूल छोड़कर सरकारी विद्यालयों में बढ़ रहा विद्यार्थियों का भरोसा

    सांदीपनि विद्यालयों पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा दावा, बोले- निजी स्कूल छोड़कर सरकारी विद्यालयों में बढ़ रहा विद्यार्थियों का भरोसा

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में दो नए सांदीपनि विद्यालयों के लोकार्पण अवसर पर कहा कि प्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित सांदीपनि विद्यालयों के कारण अब विद्यार्थी निजी विद्यालयों से निकलकर शासकीय संस्थानों में प्रवेश ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर संसाधनों के माध्यम से राज्य सरकार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मैत्री भारतीय संस्कृति में समानता, आत्मीयता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा प्राप्त कर ज्ञान और संस्कार का महत्व स्थापित किया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से युक्त सांदीपनि विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं, जहां पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा का संतुलित समावेश किया गया है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने झिंझरी और बहोरीबंद में निर्मित दो नए सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण किया। इन विद्यालयों में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ डिजिटल शिक्षा, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, साइकिलें और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उपलब्ध करा रही है। बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप तथा विद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को स्कूटी प्रदान की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ किसानों के कल्याण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर भी सरकार समान रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने स्लीमनाबाद टनल परियोजना को बघेलखंड और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे रीवा, सतना, मैहर, पन्ना और कटनी सहित कई जिलों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और इसका लाभ बड़ी संख्या में किसानों को मिलेगा।

    उन्होंने आगे कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना तथा पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना भी प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने और कृषि उत्पादन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश के कई जिलों में खेती की स्थिति बेहतर होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी विधानसभा सत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार समान नागरिक संहिता के प्रारूप को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र से पहले जगदीशपुर में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित कर इस संबंध में आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है।

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में 1500 रुपये की राशि हस्तांतरित की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा, सिंचाई, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत विकास से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिले CM योगी, बोले- दोषियों को नहीं बख्शेंगे, आर्थिक सहायता का किया ऐलान

    मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिले CM योगी, बोले- दोषियों को नहीं बख्शेंगे, आर्थिक सहायता का किया ऐलान


    गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को मेरठ छात्रा हत्याकांड के पीड़ित परिवार से गाजियाबाद स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए परिवार को हरसंभव न्याय दिलाने का भरोसा दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जघन्य अपराध में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सभी आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    लापरवाही पर भी होगी कार्रवाई
    मुख्यमंत्री ने मामले की जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस अधिकारियों को अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाने का निर्देश भी दिया।

    पीड़ित परिवार के लिए राहत पैकेज
    मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को तत्काल राहत देने के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

    इसके अलावा उन्होंने मृतका के पिता और परिवार के एक अन्य पात्र सदस्य को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। इस दौरान समाज कल्याण मंत्री एवं मेरठ के जिला प्रभारी मंत्री असीम अरुण के साथ वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।

  • सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज पर जमीन कब्जाने के आरोप, ग्रामीणों ने दी आत्मदाह करने की चेतावनी

    सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज पर जमीन कब्जाने के आरोप, ग्रामीणों ने दी आत्मदाह करने की चेतावनी


    आजमगढ़। जिले के लालगंज तहसील क्षेत्र स्थित मोहनपुर पटवास गांव में सार्वजनिक तालाब और ग्रामीणों की जमीन पर कथित अवैध कब्जे को लेकर विवाद गहरा गया है। गांव के कई लोगों ने मंडलायुक्त को शिकायत पत्र सौंपते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद दरोगा प्रसाद सरोज और उनके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, सांसद ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए किसी भी स्तर की जांच कराने की बात कही है।

    ग्रामीणों की ओर से शिकायत करने वाली गीता सरोज ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह करने के लिए मजबूर होंगी।

    तालाब और ग्रामीणों की जमीन पर कब्जे का आरोप
    शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गांव की आराजी संख्या 137, जिसका क्षेत्रफल 7.798 हेक्टेयर है और जो राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है, उस पर फार्म हाउस बना दिया गया है। उनका कहना है कि वहां खेती और मछली पालन किया जा रहा है, जबकि पहले इस तालाब का उपयोग ग्रामीण और पशु करते थे। गीता सरोज का आरोप है कि सांसद ने करीब 50 बीघे तालाब क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के गरीब ग्रामीणों की जमीनों पर भी कब्जा कर लिया है।

    धमकी और अवैध गतिविधियों के भी आरोप
    शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि फार्म हाउस के चारों ओर बिजली के तार लगाए गए हैं, कई बोरिंग कराई गई हैं तथा वहां अवैध मछली पालन और पेड़ों की कटाई की जा रही है। ग्रामीणों ने सांसद के बेटे मनोज सरोज, प्रमोद सरोज और पोते अभिषेक सरोज पर शराब के नशे में हंगामा करने और लोगों को धमकाने का भी आरोप लगाया है।

    गीता सरोज का कहना है कि उनकी एक बीघा जमीन पर भी कब्जा कर पोखरा पाट दिया गया। उन्होंने एसडीएम, तहसीलदार समेत अन्य अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

    सांसद ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
    सांसद दरोगा प्रसाद सरोज ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित जमीन का बैनामा शारदा विश्वकर्मा से करीब 3.5 से 4 बीघा कराया था और प्रशासन द्वारा कराई गई पैमाइश में उनकी भूमि सही पाई गई है। उन्होंने बताया कि अन्य जमीनें भी उन्होंने संबंधित मालिकों से नियमानुसार खरीदी हैं और किसी की भूमि पर अवैध कब्जा नहीं किया है।

    सांसद ने अपने परिजनों पर लगाए गए मारपीट और धमकी के आरोपों को भी झूठा बताया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, मंडलायुक्त या तहसील प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए। उनका दावा है कि यदि एक इंच भी अवैध कब्जा साबित होता है तो वे लाखों रुपये का जुर्माना भरने के लिए तैयार हैं।

  • UP: ईडी की जांच में सामने आया घुसपैठ नेटवर्क, विदेशी फंडिंग और बिना KYC खातों को लेकर बड़े खुलासे

    UP: ईडी की जांच में सामने आया घुसपैठ नेटवर्क, विदेशी फंडिंग और बिना KYC खातों को लेकर बड़े खुलासे


    लखनऊ। बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की अवैध घुसपैठ तथा फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से जुड़े नेटवर्क की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कई अहम सुराग मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, एटीएस की कार्रवाई के बाद भी पश्चिम बंगाल में यह नेटवर्क सक्रिय बना रहा और विदेश से मिलने वाली फंडिंग के जरिए अपनी गतिविधियां संचालित करता रहा।

    ईडी की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि कुछ गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को विदेश से प्राप्त धनराशि को जांच एजेंसियों की नजर से बचाने के लिए दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।

    कई राज्यों में ईडी की छापेमारी
    प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में 17 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दायरे में कई एनजीओ भी शामिल रहे। ईडी के अनुसार, तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं। एजेंसी का दावा है कि जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ संस्थाएं अब भी विदेश से फंडिंग प्राप्त कर रही हैं।

    FCRA खातों और बैंकों की होगी जांच
    ईडी के मुताबिक, अब इस मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। एजेंसी उन बैंकों से भी जवाब मांगेगी, जहां संबंधित एनजीओ के एफसीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) खाते खोले गए थे और जिनके माध्यम से विदेश से धनराशि प्राप्त की जाती थी।

    इसके अलावा, जांच एजेंसी उन छोटे बैंकों की भूमिका की भी पड़ताल करेगी, जिन पर बिना आवश्यक केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी किए खाते खोलने का संदेह है। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    यूपी में नेटवर्क की गहरी पैठ का दावा
    जांच एजेंसियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों के नेटवर्क की जड़ें गहरी रही हैं। खास तौर पर सहारनपुर का देवबंद इस मामले में जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है। बीते पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश एटीएस ने ऐसे तीन मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें से एक मामले में हाल ही में राजधानी की एक अदालत ने 15 आरोपियों को सजा सुनाई है। राज्य सरकार ने भी अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया के तहत डिटेंशन सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई थी।

  • मंत्री तुलसी सिलावट ने डॉ. ए.के. द्विवेदी के सुझावों को सराहा, अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

    मंत्री तुलसी सिलावट ने डॉ. ए.के. द्विवेदी के सुझावों को सराहा, अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

    मध्य प्रदेश में जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद एवं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी द्वारा प्रस्तुत जल संरक्षण संबंधी सुझावों की सराहना करते हुए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने कहा कि जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इस दिशा में किए गए प्रयास भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपयोगी साबित होंगे।

    डॉ. ए.के. द्विवेदी ने मंत्री से मुलाकात के दौरान प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में प्रतिवर्ष “जल ही जीवन है” विषय पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव सौंपा। उनका मानना है कि यदि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए, तो समाज में पानी के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी और भविष्य में जल संकट की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकेगा।

    प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया कि इस विषय को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय के सीपीग्राम्स पोर्टल के माध्यम से भी सुझाव भेजे गए थे। इसके बाद संबंधित विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए अधिकारियों को मामले पर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री सिलावट ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि प्रस्ताव का सकारात्मक परीक्षण करते हुए प्रमुख सचिव को आवश्यक अनुशंसा शीघ्र भेजी जाए, ताकि इसे प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा सकें।

    डॉ. द्विवेदी ने अपने प्रस्ताव में प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों को “वॉटर कंजर्वेशन कैंपस” के रूप में विकसित करने की अवधारणा भी प्रस्तुत की है। इसके तहत परिसरों में वर्षा जल संचयन व्यवस्था को बढ़ावा देने, भूजल संवर्धन के उपाय लागू करने तथा जल संरक्षण को व्यवहारिक शिक्षा का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया गया है। उनका मानना है कि जब विद्यार्थी स्वयं इन गतिविधियों से जुड़ेंगे, तो समाज में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

    प्रस्ताव के अनुसार विद्यार्थियों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जा सकता है। इनमें निबंध लेखन, भाषण, वाद-विवाद, पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिताएं, स्लोगन लेखन, जन-जागरूकता रैलियां तथा जल संरक्षण की शपथ जैसे कार्यक्रम शामिल किए जाने का सुझाव दिया गया है। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहारिक रूप से जल बचाने के लिए प्रेरित करना है।

    मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि शिक्षण संस्थानों के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जाते हैं, तो जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है। इससे जल संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी विकसित होगा।

    डॉ. ए.के. द्विवेदी ने उम्मीद जताई कि यदि उनके सुझावों पर प्रभावी अमल होता है, तो मध्य प्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है। उनका मानना है कि विद्यार्थियों में जल बचाने के संस्कार विकसित करना भविष्य की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों का स्थायी समाधान साबित हो सकता है।

  • 'कहानी का जनक और मालिक मैं ही हूं'; परेश रावल के आरोपों पर बोले फिल्म निर्माता अमित राय, पटकथा में बदलाव के दावों को नकारा

    'कहानी का जनक और मालिक मैं ही हूं'; परेश रावल के आरोपों पर बोले फिल्म निर्माता अमित राय, पटकथा में बदलाव के दावों को नकारा

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की बेहद सफल और सामाजिक विषय पर आधारित फिल्म ‘ओह माय गॉड 2’ (ओएमजी 2) को लेकर अभिनेता परेश रावल के हालिया बयान के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दिग्गज अभिनेता परेश रावल ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि इस फिल्म का मूल विचार और अवधारणा उनकी थी, लेकिन अभिनेता अक्षय कुमार के इस परियोजना से जुड़ने के बाद पटकथा में व्यापक बदलाव किए गए और उन्हें इसका उचित श्रेय नहीं दिया गया। अब इस पूरे विवाद पर पहली बार फिल्म के लेखक और निर्देशक अमित राय ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और फिल्म की मौलिकता को लेकर अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है।

    अमित राय ने एक विशेष साक्षात्कार में वरिष्ठ अभिनेता परेश रावल के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि वह एक महान कलाकार हैं और उनके द्वारा लिए गए नाम कद में काफी बड़े हैं, इसलिए वह उन पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, फिल्म के लेखन और उसके स्वामित्व के कानूनी पक्ष पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फिल्म का विचार पूरी तरह से उनके अपने मस्तिष्क की उपज है। इस कहानी के सृजनकर्ता, लेखक और विधिक रूप से मालिक वही हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह भावनात्मक और रचनात्मक दोनों ही स्तरों पर इस फिल्म की पटकथा के वास्तविक जनक हैं।

    क्रेडिट न दिए जाने के आरोपों का तार्किक जवाब देते हुए निर्देशक ने कहा कि यदि इस प्रकार के दावे किए जा रहे हैं, तो संबंधित पक्षों को फिल्म के आधिकारिक क्रेडिट रोल को पुनः खोलकर ध्यान से देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि फिल्म के शुरुआती और मुख्य क्रेडिट्स में परेश रावल की पत्नी और उनके व्यावसायिक साझीदार का नाम बतौर निर्माता स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है। ऐसे में यह कहना कि उन्हें या उनके परिवार को इस परियोजना से अलग रखा गया या कोई श्रेय नहीं दिया गया, पूरी तरह से अनुचित और तथ्यों से परे है।

    फिल्म उद्योग के भीतर चल रही उन चर्चाओं को भी निर्देशक ने पूरी तरह से नकार दिया जिनमें यह कहा जा रहा था कि सुपरस्टार अक्षय कुमार के फिल्म में शामिल होने के बाद इसकी मूल कहानी और पटकथा की संरचना में बड़े बदलाव किए गए थे। अमित राय ने कहा कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री उनके इस स्वभाव से भली-भांति परिचित है कि वह अपनी लिखी हुई चार पंक्तियों को भी किसी के दबाव में आकर नहीं बदलते हैं। अपनी कलात्मक दृढ़ता को रेखांकित करने के लिए उन्होंने संगीतकार आर.डी. बर्मन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक सच्चा संगीतकार अपनी बनाई धुनों से कोई समझौता नहीं करता, उसी प्रकार वह भी अपनी कहानी के मूल स्वरूप की रक्षा करते हैं।

    उन्होंने अपने लंबे संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि यदि वह परिस्थितियों के अनुसार अपनी पटकथाओं और विचारों को बदलने वाले लचीले व्यक्ति होते, तो उन्हें फिल्म उद्योग में काम पाने के लिए 14 वर्षों तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। इस स्पष्टीकरण के साथ निर्देशक ने यह साफ कर दिया है कि ‘ओएमजी 2’ पूरी तरह से उनकी मौलिक सिनेमाई अभिव्यक्ति है, जिसमें व्यावसायिक सफलताओं के लिए कोई कृत्रिम बदलाव नहीं किए गए थे। इस बयान के बाद फिल्म के वैधानिक और रचनात्मक अधिकारों को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया है।

  • पूर्व अभिनेत्री सोमी अली ने बयां किया बचपन का गहरा मानसिक आघात; चार साल की उम्र से ही घर के भीतर हुईं गंभीर उत्पीड़न का शिकार

    पूर्व अभिनेत्री सोमी अली ने बयां किया बचपन का गहरा मानसिक आघात; चार साल की उम्र से ही घर के भीतर हुईं गंभीर उत्पीड़न का शिकार

    नई दिल्ली । मनोरंजन जगत की कई जानी-मानी हस्तियां समय-समय पर अपने जीवन के ऐसे अनसुने और संवेदनशील पहलुओं को उजागर करती हैं, जो न केवल समाज को झकझोर देते हैं बल्कि सुरक्षा और सामाजिक मानसिकता पर भी बड़े सवाल खड़े करते हैं। इसी क्रम में, पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री सोमी अली का एक नवीनतम साक्षात्कार इन दिनों व्यापक चर्चा में है। उन्होंने अपने बचपन के दौरान घरेलू परिवेश में झेले गए गंभीर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न को लेकर कई अत्यंत दुखद और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सोमी अली ने स्पष्ट किया कि मात्र चार वर्ष की कोमल आयु से ही वह अपने ही घर के घरेलू सहायकों द्वारा निरंतर यौन शोषण और प्रताड़ना का शिकार होती रहीं, जिसका गहरा मानसिक आघात वह आज भी महसूस करती हैं।

    अपने हर विचार को बिना किसी झिझक के साझा करने के लिए पहचानी जाने वाली सोमी अली ने एक हालिया साक्षात्कार में बाल शोषण की इस वीभत्स हकीकत पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि यह दर्दनाक सिलसिला तब शुरू हुआ जब वह महज चार वर्ष की थीं। इसके बाद, जब वह पांच वर्ष की हुईं, तो उनके घर के मुख्य रसोइए (खानसामे) ने उनके साथ कई बार अनैतिक और गंदी हरकतें कीं। यहीं पर यह ज्यादती नहीं रुकी, बल्कि जब वह नौ वर्ष की आयु में पहुंचीं, तो घर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बहला-फुसफुसाकर सर्वेंट क्वार्टर में ले जाकर शारीरिक रूप से गंभीर प्रताड़ना दी। इन घटनाओं ने उनके बाल मन को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया था।

    इस दर्दनाक घटनाक्रम के दौरान पारिवारिक प्रतिक्रिया और प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई के अभाव पर बात करते हुए पूर्व अभिनेत्री ने बताया कि उस दौर में उनके पिता एक संपन्न फिल्म निर्माता, निर्देशक और वितरक थे और उनका परिवार एक भव्य बहुमंजिला इमारत में निवास करता था। जब उन्होंने पहली बार अपनी मां के माध्यम से और बाद में इंटरकॉम पर अपने पिता को रसोइए अब्दुल द्वारा चूजे दिखाने के बहाने कमरे में ले जाकर तीन बार की गई इस हैवानियत के बारे में सूचित किया, तो उनके पिता ने आरोपी को कानूनी रूप से पुलिस के हवाले करने के बजाय एक अनुचित और हिंसक मार्ग चुना।

    सोमी अली के अनुसार, उनके पिता ने आरोपी रसोइए को अन्य कर्मचारियों के माध्यम से सेट पर ही अत्यधिक लहूलुहान होने तक पिटवाया और बिना किसी पुलिस शिकायत के नौकरी से निष्कासित कर दिया। एक पांच वर्ष की अबोध बच्ची के लिए अपने सामने इस प्रकार का अत्यधिक खून-खराबा और मारपीट देखना एक अन्य गहरे मनोवैज्ञानिक आघात (ट्रॉमा) का कारण बन गया। इससे भी अधिक दुखद स्थिति तब उत्पन्न हुई जब नौ वर्ष की आयु में उनके साथ दोबारा ऐसी ही घटना घटी और उनकी माता ने इस विषय पर वैधानिक कार्रवाई करने के स्थान पर उन्हें लोकलाज के डर से पूरी तरह चुप रहने की नसीहत दे डाली।

    साक्षात्कार के दौरान सोमी अली ने भारतीय और दक्षिण एशियाई समाज की इस रूढ़िवादी और शोषक मानसिकता पर गहरा क्षोभ और दुख व्यक्त किया, जहां पीड़ित बच्ची को ही यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि यदि समाज को इस सच का पता चला तो भविष्य में कोई उससे विवाह नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि माता-पिता का यह सुरक्षाहीन रवैया और सामाजिक दृष्टिकोण बच्चों के मानसिक विकास पर अत्यंत विनाशकारी प्रभाव डालता है। अपने इस सच को सार्वजनिक करने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य समाज में बाल सुरक्षा के प्रति चेतना जागृत करना और पीड़ित बच्चों को अपनी आवाज उठाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि भविष्य में कोई अन्य बच्चा इस प्रकार के एकाकी संघर्ष और आघात से न गुजरे।

  • राज कपूर के गैर-पेशेवर व्यवहार के कारण उनसे नाराज थीं साधना; 'दूल्हा दुल्हन' के बाद फिर कभी साथ काम न करने की खाई थी कसम

    राज कपूर के गैर-पेशेवर व्यवहार के कारण उनसे नाराज थीं साधना; 'दूल्हा दुल्हन' के बाद फिर कभी साथ काम न करने की खाई थी कसम


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के इतिहास में ‘शोमैन’ के नाम से विख्यात दिग्गज अभिनेता और निर्देशक राज कपूर अपनी बेहतरीन फिल्मों के साथ-साथ सह-कलाकारों के साथ अपने संबंधों को लेकर भी सदैव चर्चा में रहे। जहां एक ओर फिल्म उद्योग की अधिकांश अभिनेत्रियां उनके साथ काम करने के अवसर तलाशती थीं, वहीं दूसरी ओर साठ के दशक की शीर्ष और बेहद खूबसूरत अभिनेत्री साधना शिवदसानी के साथ उनके रिश्तों में एक ऐसी तल्खी आई जो जीवनभर बरकरार रही। फिल्मी गलियारों में यह बात आज भी बेहद चर्चा का विषय रहती है कि अपनी बेमिसाल खूबसूरती और अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली साधना, राज कपूर के एक विशेष व्यवहार के कारण उनसे अत्यधिक नाराज थीं और उन्होंने जीवन में दोबारा कभी उनके साथ स्क्रीन साझा नहीं की।
    इस ऐतिहासिक तल्खी और विवाद की मुख्य वजह वर्ष 1964 में प्रदर्शित हुई लोकप्रिय फिल्म ‘दूल्हा दुल्हन’ के निर्माण के दौरान सामने आई थी। तत्कालीन समय की फिल्मी पत्रिकाओं और सूत्रों के अनुसार, इस फिल्म के मुख्य अभिनेता राज कपूर उस दौर में अपने कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स और निर्देशन कार्यों में अत्यधिक व्यस्त थे। इस व्यस्तता के कारण वह अक्सर फिल्म ‘दूल्हा दुल्हन’ के सेट पर काफी विलंब से पहुंचते थे, जिसके चलते पूरी यूनिट का काम प्रभावित होता था। सेट पर समय की पाबंद और अपने काम के प्रति बेहद गंभीर रहने वाली अभिनेत्री साधना को राज कपूर के इस इंतजार में घंटों बैठना पड़ता था, जिसे उन्होंने पूरी तरह से गैर-पेशेवर आचरण माना।

    साधना ने इस व्यवहार को अपने काम और समय का अनादर समझा और इसी स्वाभिमान के चलते उन्होंने निर्णय लिया कि वह भविष्य में कभी भी राज कपूर के साथ किसी भी फिल्म में काम नहीं करेंगी। यद्यपि इस तल्खी को लेकर दोनों ही कलाकारों ने कभी सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया और न ही इसके कोई लिखित पुख्ता प्रमाण मिलते हैं, परंतु इसके बाद का फिल्मी इतिहास गवाह है कि इस सुपरहिट जोड़ी को दोबारा किसी फिल्म निर्माता ने एक साथ साइन नहीं किया। दोनों ने अपने पूरे करियर में मुख्य भूमिकाओं के रूप में केवल इसी एक फिल्म में साथ काम किया।

    दिलचस्प बात यह है कि व्यावसायिक रूप से ‘दूल्हा दुल्हन’ बॉक्स ऑफिस पर एक बेहद सफल फिल्म साबित हुई थी और इसके मधुर गीत आज भी संगीत प्रेमियों द्वारा बेहद पसंद किए जाते हैं। बहुत कम लोग इस ऐतिहासिक तथ्य से परिचित हैं कि इस मुख्य फिल्म से कई वर्ष पूर्व, जब साधना मात्र 15-16 वर्ष की थीं और एक स्थानीय डांस स्कूल में नृत्य की शिक्षा ले रही थीं, तब उन्होंने राज कपूर की कालजयी फिल्म ‘श्री 420’ के प्रसिद्ध गीत ‘मुड़ मुड़ के न देख’ में एक साधारण बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम किया था। उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि पृष्ठभूमि में नाचने वाली यही बच्ची आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे बड़ी स्टार बनेगी और शोमैन के सामने अपने सिद्धांतों के लिए खड़ी होगी।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के पुराने सिनेमा प्रेमी आज भी इन दोनों कलाकारों के अभिनय और उनके बीच की इस मूक असहमति को बॉलीवुड के स्वर्णिम युग की एक अनसुनी दास्तान के रूप में याद करते हैं। साधना का यह कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि उस दौर की अभिनेत्रियां न केवल अपने स्टारडम बल्कि अपने आत्मसम्मान और कार्यस्थल पर व्यावसायिकता को लेकर कितनी सजग थीं, भले ही सामने फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा नाम ही क्यों न खड़ा हो। राज कपूर के साथ दोबारा काम न करने के फैसले के बावजूद साधना ने अपने दौर के अन्य सभी सुपरस्टार्स के साथ एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं और हिंदी सिनेमा में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया।