Author: bharati

  • देवताओं की होली रंग पंचमी कल जानें तिथि पूजा विधि और भगवान को किस रंग का गुलाल चढ़ाना होता है शुभ

    देवताओं की होली रंग पंचमी कल जानें तिथि पूजा विधि और भगवान को किस रंग का गुलाल चढ़ाना होता है शुभ


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में होली के बाद आने वाला रंग पंचमी का पर्व बेहद खास और आध्यात्मिक महत्व वाला माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी को अबीर गुलाल अर्पित करने की परंपरा है इसलिए इसे देवताओं की होली भी कहा जाता है। देश के कई हिस्सों में यह पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है और भगवान को रंग अर्पित कर भक्त उनकी कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवी देवताओं को अबीर गुलाल चढ़ाने से कुंडली के दोष कम होते हैं और जीवन में सुख समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    हिंदू पंचांग के अनुसार रंग पंचमी का पर्व चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष पंचमी तिथि 7 मार्च को शाम 7 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर 8 मार्च को रात 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। पंचमी तिथि उदया तिथि के अनुसार 8 मार्च को पड़ रही है इसलिए इस वर्ष रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन कई स्थानों पर धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा होती है और कई जगह भव्य शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं। ढोल नगाड़ों की गूंज और भक्ति संगीत के साथ पूरा वातावरण उत्सवमय हो जाता है।

    रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। कई श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि विधि विधान के साथ पूजा करने से घर परिवार में सुख समृद्धि और शांति बनी रहती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर एक चौकी रखकर उस पर राधा कृष्ण की प्रतिमा स्थापित की जाती है। भगवान को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराया जाता है और उन्हें फूल माला तथा फल अर्पित कर सुंदर श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद श्रद्धा भाव से भगवान को अबीर गुलाल अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान दीपक और धूप जलाकर मंत्रों का जाप किया जाता है और अंत में भगवान की आरती उतारी जाती है तथा प्रसाद का वितरण किया जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में रंग पंचमी के दिन अलग अलग रंग के गुलाल का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि अलग अलग रंग जीवन के अलग अलग क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। लाल रंग को ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है और इसे सूर्य तथा मंगल से जुड़ा हुआ रंग बताया गया है। यदि किसी व्यक्ति के कामों में बाधा आ रही हो या आत्मविश्वास में कमी महसूस हो रही हो तो भगवान को लाल रंग का गुलाल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    पीला रंग शुभता और मंगल कार्यों से जुड़ा माना जाता है और इसे देवगुरु बृहस्पति का रंग कहा जाता है। यदि विवाह या अन्य मांगलिक कार्यों में रुकावट आ रही हो या संतान की शिक्षा में परेशानी हो तो भगवान को पीले रंग का गुलाल अर्पित करना लाभकारी माना जाता है।

    हरा रंग समृद्धि शांति और संतुलन का प्रतीक माना जाता है और ज्योतिष के अनुसार इसका संबंध बुध ग्रह से होता है। यदि वाणी और बुद्धि में असंतुलन के कारण जीवन में समस्याएं आ रही हों तो रंग पंचमी के दिन भगवान को हरे रंग का गुलाल चढ़ाना शुभ माना जाता है।

    वहीं नीले रंग को वास्तु और ज्योतिष दोनों में विशेष महत्व दिया गया है। यह रंग सुरक्षा सत्य और गहराई का प्रतीक माना जाता है और इसे शनि ग्रह से जोड़ा जाता है। जीवन में आ रही कठिनाइयों को दूर करने और मानसिक स्थिरता प्राप्त करने के लिए भगवान को नीले रंग का गुलाल अर्पित करना लाभकारी माना जाता है।

    इस तरह रंग पंचमी केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।

  • ऑनलाइन खाने की गुणवत्ता पर फिर सवाल सागर के रेस्टोरेंट में छापा बासी पनीर और खराब सूप मिलने से मचा हड़कंप

    ऑनलाइन खाने की गुणवत्ता पर फिर सवाल सागर के रेस्टोरेंट में छापा बासी पनीर और खराब सूप मिलने से मचा हड़कंप


    मध्य प्रदेश के सागर शहर में ऑनलाइन मंगाए गए खाने की गुणवत्ता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है जहां एक परिवार द्वारा ऑर्डर किए गए छोले कुलचे खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। घटना के बाद परिजनों ने भोजन की गुणवत्ता पर संदेह जताते हुए खाद्य विभाग से शिकायत की जिसके बाद विभाग की टीम ने संबंधित रेस्टोरेंट पर छापेमारी कर जांच की। जांच के दौरान किचन में कई तरह की अनियमितताएं सामने आईं और कुछ खाद्य सामग्री संदिग्ध अवस्था में पाई गई जिससे ऑनलाइन फूड डिलीवरी की सुरक्षा और गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार सागर निवासी अभिषेक अग्रवाल ने एक प्रसिद्ध रेस्टोरेंट से ऑनलाइन ऐप के माध्यम से छोले कुलचे का ऑर्डर दिया था। खाना घर पहुंचने के बाद बच्चों ने उसे खाया लेकिन कुछ ही समय बाद बच्चों को पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत होने लगी। बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने पर परिजनों को भोजन की गुणवत्ता पर शक हुआ। जब खाने की स्थिति को ध्यान से देखा गया तो उन्हें लगा कि खाना बासी हो सकता है। इसके बाद अभिषेक अग्रवाल ने बिना देर किए पूरे मामले की शिकायत खाद्य विभाग से की ताकि मामले की जांच हो सके और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आए तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

    शिकायत मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हुई और सागर के सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित सागर गैरे नामक रेस्टोरेंट पहुंचकर निरीक्षण किया। टीम ने किचन और स्टोर रूम की जांच की तो वहां कई गंभीर खामियां सामने आईं। अधिकारियों को किचन में साफ सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं लगी और खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने के मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा था। जांच के दौरान टीम को बासी पनीर खराब गुणवत्ता का हॉट एंड सॉर सूप और कुछ अन्य खाद्य पदार्थ संदिग्ध हालत में मिले। इसके अलावा किचन की स्वच्छता व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई जिस पर अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई।

    खाद्य विभाग की टीम ने मौके से पनीर सूप और अन्य खाद्य सामग्री के सैंपल लिए हैं जिन्हें जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि संबंधित खाद्य सामग्री मानकों के अनुरूप थी या नहीं। यदि जांच में खाद्य पदार्थ अमानक या असुरक्षित पाए जाते हैं तो संबंधित रेस्टोरेंट के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता अभिषेक अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने बच्चों के लिए छोले कुलचे मंगवाए थे लेकिन खाना खाने के तुरंत बाद बच्चों की तबीयत खराब हो गई। उन्हें भोजन की स्थिति संदिग्ध लगी इसलिए उन्होंने तुरंत विभाग में शिकायत दर्ज कराई ताकि अन्य लोगों की सेहत को खतरा न हो और इस तरह की लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई हो सके।

    खाद्य विभाग ने इस घटना के बाद आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। विभाग का कहना है कि यदि किसी भी रेस्टोरेंट ढाबे या ऑनलाइन फूड डिलीवरी से मिलने वाले भोजन में बासीपन मिलावट या खराब गुणवत्ता का संदेह हो तो तुरंत इसकी जानकारी विभाग को दें ताकि समय रहते जांच कर कार्रवाई की जा सके और लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

  • मुरैना: 16 दिन पहले पिता बना था लवकुश, पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर सोते हुए पति को उतार दिया मौत के घाट

    मुरैना: 16 दिन पहले पिता बना था लवकुश, पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर सोते हुए पति को उतार दिया मौत के घाट


    नई दिल्ली।  रिश्तों के कत्ल की एक रूह कंपा देने वाली साजिश का सिहोनिया पुलिस ने महज 4 दिनों में पर्दाफाश कर दिया है। 3 मार्च की रात जिस लवकुश माहौर की मौत को उसकी पत्नी ने ‘आत्महत्या’ करार दिया था, वह दरअसल एक सोची-समझी ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ जैसी वारदात निकली। पुलिस ने मृतक की पत्नी राखी और उसके पड़ोसी प्रेमी विक्रम परमार को गिरफ्तार कर लिया है।

    वारदात: बेटे के जन्म की खुशी और खूनी अंत
    लवकुश माहौर गुजरात के सूरत में मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता था। करीब 16 दिन पहले उसके घर में बेटे का जन्म हुआ, जिसकी खुशी मनाने वह अपने गांव सिहोनिया आया था। वह होली का त्योहार मनाकर वापस सूरत जाने की तैयारी में था, लेकिन उसे क्या पता था कि उसके घर में ही उसकी मौत का जाल बुना जा चुका है।

    खौफनाक रात: 3 मार्च की रात करीब 3 बजे, जब लवकुश गहरी नींद में था, पड़ोसी विक्रम परमार कमरे में दाखिल हुआ और बेहद करीब से लवकुश को गोली मार दी।वारदात के बाद विक्रम फरार हो गया, जबकि पत्नी राखी ने शोर मचाते हुए यह कहानी रची कि लवकुश ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है।

    मोबाइल चैट ने खोला ‘बेवफाई’ का राज
    पुलिस को शुरुआत से ही पत्नी के बयानों पर संदेह था। एसडीओपी विजय भदौरिया के नेतृत्व में जब जांच आगे बढ़ी, तो पुलिस ने राखी का मोबाइल खंगाला।

    साजिश के सबूत: मोबाइल में पड़ोसी विक्रम परमार के साथ राखी की लंबी बातचीत और हत्या की प्लानिंग से जुड़ी चैट्स मिलीं। कड़ाई से पूछताछ करने पर राखी टूट गई और उसने स्वीकार किया कि लवकुश उनके प्रेम संबंधों में कांटा बन रहा था, इसलिए उसे रास्ते से हटाने के लिए विक्रम के साथ मिलकर यह साजिश रची।

    जनाक्रोश और पुलिस की मुस्तैदी
    घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने लवकुश की मौत को संदिग्ध बताते हुए नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया था। लोगों की मांग थी कि असली कातिलों को पकड़ा जाए। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और डिजिटल फॉरेंसिक (मोबाइल चैट) के आधार पर 4 दिन के भीतर कातिल पत्नी और उसके प्रेमी को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।

    यह घटना समाज की गिरती नैतिक मर्यादाओं का उदाहरण है; जहाँ एक तरफ पालने में 16 दिन का मासूम सो रहा था, वहीं दूसरी तरफ उसकी माँ अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसके पिता की हत्या की पटकथा लिख रही थी।

    मुख्य कीवर्ड्स (Keywords with Comma)
    मुरैना हत्याकांड, सिहोनिया न्यूज़, लवकुश माहौर मर्डर, पत्नी ने की पति की हत्या, अवैध संबंध, मोबाइल चैट से खुलासा, एमपी पुलिस, 16 दिन का नवजात, ग्वालियर-चंबल क्राइम, विक्रम परमार गिरफ्तार।

  • होटल में साइलेंट अटैक से मालिक की मौत: थाली में सब्जी रखते ही गिरा, भाई की CPR भी काम नहीं आई

    होटल में साइलेंट अटैक से मालिक की मौत: थाली में सब्जी रखते ही गिरा, भाई की CPR भी काम नहीं आई


    नई दिल्ली। नर्मदापुरम के ग्वालटोली रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक होटल में गुरुवार रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें होटल संचालक अशोक नवलानी (60) का साइलेंट अटैक से निधन हो गया। घटना उस समय हुई जब अशोक नवलानी ग्राहकों को खाना परोस रहे थे। जैसे ही उन्होंने एक थाली में सब्जी रखी, अचानक वह जमीन पर गिर पड़े। घटना का सीसीटीवी वीडियो शनिवार सुबह सामने आया, जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि गिरते ही आसपास के लोग समझ नहीं पाए कि क्या हुआ। कुछ ही पलों में अशोक के भाई पप्पन नवलानी और अन्य कर्मचारी दौड़कर उन्हें उठाने पहुंचे और तुरंत सीपीआर देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
     
    अशोक नवलानी गोकुलपुरी की सिंधी कॉलोनी के निवासी थे और अपने भाई पप्पन नवलानी के साथ मिलकर ‘चाचा-भतीजा’ नाम से होटल चला रहे थे। पप्पन ने बताया कि गुरुवार रात दोनों दुकान पर ही थे। वह सब्जी बना रहे थे और अशोक ग्राहकों को टेबल पर खाना परोस रहे थे। थाली में सब्जी रखते ही अचानक गिरने के बाद उन्होंने सीपीआर की कोशिश की, लेकिन अशोक अचेत हो गए। डॉक्टरों ने अस्पताल पहुंचते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पप्पन ने आगे बताया कि अशोक परिवार में सबसे बड़े भाई थे, उनके छह भाई-बहन हैं, और उनकी एक बेटी की शादी हो चुकी है। पिछले तीन साल में गर्मियों में उन्हें दो-तीन बार हल्की घबराहट और बीपी कम होने की समस्या हुई थी, लेकिन हार्ट की कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।

    नर्मदापुरम जिला अस्पताल के क्लिनिकल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील जैन ने कहा कि आजकल असीमित दिनचर्या, तनाव, बिगड़ा खानपान और व्यायाम की कमी से हार्ट अटैक की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने सभी से कहा कि स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, नियमित रूटीन चेकअप कराएं, 7-8 घंटे की नींद लें और रोजाना व्यायाम या योग से तनाव कम करें।

    होटल में हुए इस हादसे ने स्थानीय लोगों और परिवार में शोक की लहर फैला दी है। अशोक नवलानी का निधन इस बात का भी संदेश देता है कि व्यस्त दिनचर्या और स्वास्थ्य पर ध्यान न देना गंभीर परिणाम ला सकता है।

    इस घटना की वजह से लोगों में चेतना बढ़ी है कि कार्यस्थल पर भी स्वास्थ्य और आराम को महत्व देना जरूरी है, खासकर व्यवसायिक जीवन में तनाव और थकान के बीच।

  • रंग पंचमी: क्यों कहा जाता है इसे देवताओं की होली, जानिए धार्मिक महत्व और खास परंपराएं

    रंग पंचमी: क्यों कहा जाता है इसे देवताओं की होली, जानिए धार्मिक महत्व और खास परंपराएं


    नई दिल्ली। होली के रंगों और उत्साह से भरे माहौल के बीच आने वाला रंग पंचमी का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह त्योहार हर वर्ष होली के पांचवें दिन यानी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च रविवार को मनाया जाएगा। भारत के कई हिस्सों में इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है हालांकि मध्यप्रदेश महाराष्ट्र गुजरात और ब्रज क्षेत्र में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

    रंग पंचमी को देव पंचमी या कृष्ण पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी देवता पृथ्वी पर आकर भक्तों के साथ होली खेलते हैं। यही कारण है कि इसे देवताओं की होली भी कहा जाता है। जिस तरह कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं की दिवाली मानी जाती है उसी तरह रंग पंचमी को देवताओं की होली के रूप में देखा जाता है।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रज में इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी और गोपियों के साथ रंगों की होली खेली थी। इसी परंपरा के चलते आज भी कई मंदिरों में इस दिन विशेष रंगोत्सव आयोजित किए जाते हैं। मंदिरों में चंदन हल्दी और फूलों से बने प्राकृतिक रंगों से भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है और भक्त भी एक दूसरे पर रंग लगाकर इस उत्सव में शामिल होते हैं।

    ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव लगभग 40 दिनों तक चलता है और रंग पंचमी के साथ इस उत्सव का समापन माना जाता है। इसलिए यह पर्व होली की विदाई का भी प्रतीक है। इस दिन लोग एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं और आपसी प्रेम भाईचारे और सद्भाव का संदेश फैलाते हैं।

    रंग पंचमी के दिन मंदिरों और घरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। भक्त सबसे पहले राधा कृष्ण की पूजा करते हैं और गुलाल उनके चरणों में अर्पित करते हैं। कई मंदिरों में इस दिन भगवान की विशेष झांकियां सजाई जाती हैं और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था की जाती है। इसके साथ ही सामूहिक रंगोत्सव भी आयोजित किए जाते हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं।

    इस अवसर पर कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं जिनमें लोकगीत नृत्य और पारंपरिक कार्यक्रम शामिल होते हैं। शहरों कस्बों और गांवों में लोग मिलकर रंगों का उत्सव मनाते हैं और पुराने मतभेदों को भुलाकर नए सिरे से रिश्तों को मजबूत करते हैं।

    घर घर में इस दिन विशेष पकवान भी बनाए जाते हैं और परिवार के सभी सदस्य मिलकर उत्सव का आनंद लेते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई रंग पंचमी के रंगों में सराबोर दिखाई देता है। इस तरह रंग पंचमी न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है बल्कि यह सामाजिक एकता प्रेम और भाईचारे का भी प्रतीक माना जाता है।

  • इंडिगो की बड़ी उपलब्धि, बनी एक हजार से अधिक महिला पायलट वाली देश की पहली एयरलाइंस

    इंडिगो की बड़ी उपलब्धि, बनी एक हजार से अधिक महिला पायलट वाली देश की पहली एयरलाइंस


    नई दिल्ली। भारत के विमानन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। इसी कड़ी में देश की प्रमुख एयरलाइंस में से एक इंडिगो ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के बेड़े में अब 1000 से अधिक महिला पायलट कार्यरत हैं। यह उपलब्धि न केवल इंडिगो के लिए बल्कि पूरे भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इंडिगो में कुल पायलटों में 17.5 प्रतिशत महिलाएं हैं जो वैश्विक औसत से लगभग तीन गुना अधिक है।

    महिलाओं को अवसर देने पर फोकस

    2015 के बाद से इंडिगो ने पायलट भर्ती और प्रशिक्षण में महिलाओं को विशेष अवसर देने की दिशा में कदम उठाए। कंपनी ने कई प्रशिक्षण कार्यक्रम और छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू कीं जिससे महिला उम्मीदवारों को पायलट बनने का मौका मिला। इसी रणनीति के चलते इंडिगो अब उन एयरलाइंस में शामिल हो गई है जहां महिला पायलटों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

    भारत में इस समय लगभग 15 हजार कमर्शियल पायलट हैं जिनमें लगभग 12–15 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह अनुपात कई विकसित देशों से बेहतर माना जाता है। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस ने महिला पायलटों को अवसर देकर इस आंकड़े को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

    वैश्विक स्तर पर विमानन क्षेत्र में लैंगिक अंतर

    वैश्विक स्तर पर अभी भी विमानन क्षेत्र में लैंगिक अंतर बड़ा है। दुनिया भर में पायलटों में महिलाओं की हिस्सेदारी औसतन केवल 5–6 प्रतिशत है। ऐसे में भारत उन देशों में शामिल हो गया है जहां महिला पायलटों की भागीदारी अपेक्षाकृत अधिक है।

    पायलट बनने के लिए सबसे पहले 12वीं में भौतिकी और गणित होना आवश्यक है। इसके बाद उम्मीदवार को डीजीसीए से मान्यता प्राप्त उड़ान स्कूल से प्रशिक्षण लेना होता है। कमर्शियल पायलट लाइसेंस पाने के लिए लगभग 200 घंटे की उड़ान प्रशिक्षण पूरी करनी पड़ती है। उसके बाद एयरलाइंस में नौकरी के लिए आवेदन किया जा सकता है।

    महिला पायलटों की संख्या में हो रही वृद्धि

    पिछले एक दशक में भारत में महिला पायलटों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। कई एयरलाइंस अब महिला उम्मीदवारों के लिए विशेष प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति कार्यक्रम चला रही हैं। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी कंपनियों में अब बड़ी संख्या में महिलाएं कॉकपिट की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

    भारत की पहली महिला पायलट सरला ठकराल थीं। उन्होंने 1936 में केवल 21 वर्ष की आयु में पायलट लाइसेंस हासिल किया था और उस दौर में महिलाओं के लिए विमानन क्षेत्र में कदम रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था। आज भारतीय विमानन क्षेत्र में महिलाओं के लिए नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इंडिगो में 1000 महिला पायलटों का आंकड़ा इसी बदलाव का प्रतीक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में एयरलाइंस में महिला पायलटों की संख्या और बढ़ेगी और यह क्षेत्र लैंगिक समानता की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।

  • नेपाल चुनाव में बालेन शाह की RSP ने मारी बाजी: केपी ओली अपने ही गढ़ में 43,000 वोटों से हार गए

    नेपाल चुनाव में बालेन शाह की RSP ने मारी बाजी: केपी ओली अपने ही गढ़ में 43,000 वोटों से हार गए


    नई दिल्ली। नेपाल में आम चुनाव का परिणाम राजनीतिक इतिहास में एक नया मोड़ लेकर आया है। रैपर और काठमांडू के मेयर रह चुके बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) इस बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। शुरुआती रुझानों के अनुसार RSP ने अब तक 58 सीटें जीत ली हैं और 63 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यह पार्टी सिर्फ चार साल पहले पत्रकार रहे रबि लामिछाने के प्रयासों से बनाई गई थी और अब यह युवा नेतृत्व नेपाल की राजनीति में अपनी मजबूती दिखा रहा है।

    पूर्व प्रधानमंत्री और भारत विरोधी रवैये के लिए जाने जाने वाले केपी शर्मा ओली को झापा-5 सीट पर बालेन शाह के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। यहां ओली को केवल 16,350 वोट मिले, जबकि बालेन शाह को 59,568 वोट मिले, यानी 43,000 से अधिक मतों की भारी अंतर से वे पिछड़ गए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि ओली का अपना गढ़ भी अब उन्हें समर्थन नहीं दे रहा। ओली ने 2017 और 2022 में इसी सीट से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार युवा नेतृत्व और जनता की बदलती पसंद ने उनकी चुनौती को बढ़ा दिया।

    नेपाल की चुनाव प्रणाली मिश्रित मॉडल पर आधारित है। संसद की कुल 275 सीटों में से 165 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जहां निर्वाचन क्षेत्र के वोटरों का पसंदीदा उम्मीदवार जीतता है। बाकी 110 सीटें पार्टियों को कुल वोट प्रतिशत के आधार पर दी जाती हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य छोटे दलों और विभिन्न सामाजिक समूहों को भी संसद में प्रतिनिधित्व देना है। इस बार भी Balen Shah की RSP ने 54.8 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं, जो उसे संसद में मजबूत स्थिति प्रदान करता है।

    पिछले साल सितंबर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद नेपाल में 5 मार्च को हुए चुनाव में लगभग 58% मतदाताओं ने हिस्सा लिया। चुनाव आयोग के अनुसार वोटों की गिनती पूरी करने में 3-4 दिन लग सकते हैं और 9 मार्च तक परिणाम आने की संभावना है।

    इस चुनाव के नतीजे नेपाल की राजनीति में युवा नेतृत्व के उदय और पुराने नेताओं के प्रभाव में गिरावट को दर्शाते हैं। बालेन शाह की RSP ने युवा और अलग सोच रखने वाले मतदाताओं का समर्थन हासिल किया, वहीं केपी ओली जैसी स्थापित पार्टी और नेता अब नए राजनीतिक परिदृश्य में चुनौती का सामना कर रहे हैं। इससे नेपाल की संसद में बदलाव की उम्मीद और नए गठबंधनों की संभावनाएं भी सामने आ रही हैं।

    कुल मिलाकर, नेपाल के इस चुनाव ने स्पष्ट कर दिया कि जनता अब युवा और नए दृष्टिकोण वाले नेताओं को प्राथमिकता दे रही है, और पारंपरिक, पुराने नेताओं को अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए नई रणनीतियों की आवश्यकता है।

  • भोपाल में बिना अनुमति जुलूस धरना पर दो माह की रोक, उज्जैन में पानी के टैंक में गिरने से 7 वर्षीय मासूम की मौत

    भोपाल में बिना अनुमति जुलूस धरना पर दो माह की रोक, उज्जैन में पानी के टैंक में गिरने से 7 वर्षीय मासूम की मौत


    भोपाल । मध्यप्रदेश में एक ओर जहां राजधानी भोपाल में कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है वहीं उज्जैन जिले के खाचरोद से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। भोपाल में पुलिस प्रशासन ने बिना अनुमति किसी भी प्रकार के जुलूस धरना प्रदर्शन और रैली पर दो महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं उज्जैन के खाचरोद क्षेत्र में सात वर्षीय मासूम के पानी के टैंक में गिरने से मौत हो गई जिसके बाद मामले में नया मोड़ आ गया है और परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है।

    राजधानी भोपाल में पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह आदेश जारी किया है। आदेश के तहत शहर में बिना प्रशासनिक अनुमति के किसी भी प्रकार के जुलूस आंदोलन रैली धरना प्रदर्शन घेराव और सरकारी भवनों के घेराव पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यह आदेश आगामी दो महीनों तक प्रभावी रहेगा। पुलिस प्रशासन का कहना है कि शहर में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि कोई संगठन समूह या व्यक्ति किसी प्रकार का सार्वजनिक कार्यक्रम रैली या प्रदर्शन करना चाहता है तो उसे पहले प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अनुमति के बिना किए गए किसी भी आयोजन को अवैध माना जाएगा और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने सभी विभागों संगठनों और नागरिकों से इस आदेश का पालन करने की अपील की है।

    इधर उज्जैन जिले के खाचरोद क्षेत्र की लंगर कॉलोनी में सात वर्षीय मासूम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार ध्रुव नामक बच्चा खेलते समय पानी के टैंक में गिर गया। घटना के बाद परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    मृतक ध्रुव 7 देवास निवासी धर्मेंद्र बलाई का बेटा था। बताया जा रहा है कि ध्रुव अपनी मां ममता बाई के साथ खाचरोद में किराए के मकान में रह रहा था। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। हालांकि मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब बच्चे के पिता धर्मेंद्र बलाई ने अपनी पत्नी ममता बाई और खाचरोद थाने में पदस्थ एएसआई प्रभुलाल डालमिया पर हत्या की आशंका जताई है। पिता ने इस संबंध में एसडीओपी को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि घटना संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।

    फिलहाल पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • इंदौर मुक्तिधाम हड़कंप: 13 नंबर के तीन टोकन की चूक से अस्थियां गड़बड़, दो परिवारों में हंगामा, तीन घंटे बाद सुलझा मामला

    इंदौर मुक्तिधाम हड़कंप: 13 नंबर के तीन टोकन की चूक से अस्थियां गड़बड़, दो परिवारों में हंगामा, तीन घंटे बाद सुलझा मामला


    इंदौर इंदौर में पचकुइया मुक्तिधाम पर शनिवार को अस्थियों की अदला-बदली से हंगामा मच गया। मामला तब सामने आया जब एक ही नंबर (13) के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए। इसी कारण गलती से एक अन्य परिवार स्व. मदनलाल विश्वकर्मा की अस्थियों को अपने स्वजन समझकर ले गया। जब परिवार अस्थियां लेने पहुंचा, तब उन्हें यह पता चला कि अस्थियां उनके स्वजन की नहीं हैं।

    विश्वकर्मा परिवार के अनुसार, 55 वर्षीय मदनलाल विश्वकर्मा का निधन कुछ दिनों पहले हुआ था। उनके अंतिम संस्कार के लिए पंडित ने अस्थि संचय की तिथि रविवार तय की थी, लेकिन शनिवार को परिवार जब संग्रह के लिए मुक्तिधाम पहुंचे तो अस्थियां वहां नहीं मिलीं। इसके बाद परिवार ने ड्यूटी पर मौजूद निगमकर्मी से जानकारी ली, लेकिन कर्मचारी नशे में होने के कारण मदद नहीं कर सके।

    घटना की तहकीकात में पता चला कि 13 नंबर के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए थे। इसी कारण चौबे परिवार, जिनके 65 वर्षीय स्व. सुनील चौबे का निधन 5 मार्च को हुआ था, ने गलती से विश्वकर्मा परिवार की अस्थियां ले ली। सुबह लगभग 8.30 बजे चौबे परिवार अस्थियों को संग्रह कर खेड़ी घाट के लिए रवाना हुआ, तभी उन्हें मुक्तिधाम से फोन आया कि उन्होंने गलत अस्थियां ले ली हैं। इसके बाद दोनों परिवारों की अस्थियां तीन घंटे बाद सही ढंग से लौटाई गईं।

    विश्वकर्मा परिवार के नजदीकी मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि मुक्तिधाम में तैनात पंचकुइया मोक्ष विकास समिति के कर्मचारी की लापरवाही से यह स्थिति बनी। उन्होंने बताया कि कर्मचारी से गलती हुई और उसने टोकन संख्या में गड़बड़ी कर दी।

    मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष वैभव बाहेती ने खेद जताते हुए बताया कि गलती करने वाला कर्मचारी 35 सालों से मुक्तिधाम में सेवाएं दे रहा है और कोरोना महामारी के दौरान भी उसने अहम योगदान दिया। उन्होंने कहा कि यह मानवीय भूल थी और संबंधित कर्मचारी को चेतावनी दी गई है।

    इंदौर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर डायल 100 भेजा और एडी. डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने कहा कि यदि किसी पक्ष ने शिकायत दर्ज कराई, तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर मुक्तिधाम संचालन में कर्मचारियों की सतर्कता और टोकन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता उजागर कर दी है।

  • लाड़ली बहना योजना से बदली मंजू यादव की किस्मत: घर से शुरू किया सिलाई काम, आज चला रहीं रोजगार देने वाला सेंटर

    लाड़ली बहना योजना से बदली मंजू यादव की किस्मत: घर से शुरू किया सिलाई काम, आज चला रहीं रोजगार देने वाला सेंटर


    भोपाल ।मध्यप्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है। इस योजना के माध्यम से कई महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नर्मदापुरम जिले की रहने वाली मंजू यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई हैं जिन्होंने योजना से मिली आर्थिक सहायता का सदुपयोग करते हुए अपनी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। आज वे न केवल आत्मनिर्भर बन चुकी हैं बल्कि अपने प्रयासों से अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर रही हैं।

    नर्मदापुरम जिले के वार्ड क्रमांक 31 दीवान चौक ग्वालटोली निवासी 30 वर्षीय मंजू यादव कभी सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने परिवार का सहारा बनने का सपना देखती थीं। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उनके लिए यह सपना पूरा करना आसान नहीं था लेकिन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई। जून 2023 से उन्हें इस योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिलने लगी जिससे उन्हें अपने भविष्य के लिए कुछ नया करने का आत्मविश्वास मिला।

    मंजू यादव ने योजना से प्राप्त राशि को खर्च करने के बजाय सोच समझकर उसका उपयोग करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने घर से ही सिलाई का छोटा सा काम शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने धीरे धीरे इस छोटे से प्रयास को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। आसपास के लोगों से कपड़ों की सिलाई के ऑर्डर मिलने लगे और उनका काम लगातार बढ़ने लगा।

    फरवरी 2026 तक मंजू यादव को योजना की 33वीं किश्त सहित कुल 43 हजार 500 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो चुकी है। इस आर्थिक सहयोग और सिलाई के काम से हुए मुनाफे को उन्होंने अपने व्यवसाय के विस्तार में लगाया। उन्होंने सिलाई के लिए अतिरिक्त मशीनें खरीदीं और धीरे धीरे अपने काम को बढ़ाते हुए एक सिलाई सेंटर की शुरुआत कर दी। आज उनके सेंटर में पांच सिलाई मशीनें संचालित हो रही हैं और काम भी नियमित रूप से मिल रहा है।

    मंजू यादव की इस पहल का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि उन्होंने केवल खुद को ही आत्मनिर्भर नहीं बनाया बल्कि अपने सिलाई सेंटर के माध्यम से अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान किया है। उनके साथ काम करने वाली कई महिलाएं अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो रही है।

    मंजू यादव भावुक होकर बताती हैं कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास और उम्मीद जगाई है। इस योजना ने उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया। आज वे गर्व के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं और अपने काम के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक संदेश भी दे रही हैं कि सही अवसर और थोड़े से सहयोग से महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

    उनकी सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि यदि योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए तो वे न केवल व्यक्तिगत जीवन में बदलाव ला सकती हैं बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन की राह खोल सकती हैं।