Author: bharati

  • दूसरी प्रेग्नेंसी के अंतिम चरण में दीपिका पादुकोण, सोशल मीडिया पोस्ट से साझा की थर्ड ट्राइमेस्टर की चुनौतियां, जल्द घर आएगा नया मेहमान

    दूसरी प्रेग्नेंसी के अंतिम चरण में दीपिका पादुकोण, सोशल मीडिया पोस्ट से साझा की थर्ड ट्राइमेस्टर की चुनौतियां, जल्द घर आएगा नया मेहमान

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी के अंतिम चरण में हैं और जल्द ही अपने दूसरे बच्चे का स्वागत करने वाली हैं। लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रह रही अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर एक हल्के-फुल्के अंदाज में वीडियो साझा कर अपने प्रशंसकों को प्रेग्नेंसी से जुड़ा नया अपडेट दिया। उनकी इस पोस्ट को बड़ी संख्या में लोगों ने पसंद किया और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए शुभकामनाएं दीं।

    दीपिका ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान होने वाली सामान्य शारीरिक असुविधाओं को हास्यपूर्ण अंदाज में दिखाया गया है। वीडियो में एक गर्भवती महिला को धीरे-धीरे चलते हुए दिखाया गया है, जो अंतिम महीनों में होने वाली शारीरिक चुनौतियों की झलक पेश करता है। अभिनेत्री ने इस पोस्ट के साथ केवल एक साधारण इमोजी साझा किया, लेकिन बिना अधिक शब्दों के भी उनका संदेश प्रशंसकों तक आसानी से पहुंच गया।

    प्रेग्नेंसी के इस अंतिम दौर में दीपिका की पोस्ट को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिली। प्रशंसकों ने उनकी सहज अभिव्यक्ति की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने गर्भावस्था के अनुभव को बेहद स्वाभाविक और सकारात्मक तरीके से साझा किया है। कई लोगों ने उनके स्वस्थ रहने और सुरक्षित डिलीवरी की शुभकामनाएं भी दीं।

    दीपिका पादुकोण और अभिनेता रणवीर सिंह ने इसी वर्ष अप्रैल में दूसरी बार माता-पिता बनने की खुशखबरी साझा की थी। दोनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी अपने प्रशंसकों तक पहुंचाई थी, जिसके बाद फिल्म जगत और उनके चाहने वालों ने उन्हें बधाई दी थी। इससे पहले दोनों ने सितंबर 2024 में अपनी पहली संतान, बेटी दुआ का स्वागत किया था। बेटी के जन्म के बाद भी यह जोड़ी लगातार अपने पारिवारिक जीवन को लेकर चर्चा में रही है।

    गर्भावस्था के दौरान भी दीपिका ने अपने पेशेवर दायित्वों को प्राथमिकता दी। जानकारी के अनुसार उन्होंने अपनी आगामी फिल्म ‘किंग’ की अंतरराष्ट्रीय शूटिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा किया और उसके बाद भारत लौट आईं। इस फिल्म में उनके साथ शाहरुख खान, सुहाना खान और अभिषेक बच्चन भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। यह फिल्म वर्ष 2026 के अंत में सिनेमाघरों में रिलीज होने की तैयारी में है और इसे लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही उत्सुकता बनी हुई है।

    इसके अलावा दीपिका आने वाले समय में कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स का भी हिस्सा हैं। बताया जा रहा है कि वह निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘लव एंड वॉर’ में विशेष भूमिका निभाती दिखाई देंगी। साथ ही वह अभिनेता अल्लू अर्जुन की बहुप्रतीक्षित पैन इंडिया फिल्म ‘राका’ से भी जुड़ी हुई हैं। हालांकि फिलहाल अभिनेत्री अपना अधिकतर समय परिवार और स्वास्थ्य पर केंद्रित कर रही हैं।

    दीपिका पादुकोण की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने यह भी दिखाया कि वह अपने निजी अनुभवों को प्रशंसकों के साथ सहजता से साझा करना पसंद करती हैं। उनकी यह सादगी और सकारात्मक प्रस्तुति लोगों को पसंद आई है। अब उनके प्रशंसक बेसब्री से उस पल का इंतजार कर रहे हैं, जब दीपिका और रणवीर अपने दूसरे बच्चे के आगमन की खुशखबरी साझा करेंगे।

  • 'रामायण' की पहली झलक का इंतजार खत्म, 24 जुलाई को दुनिया भर में रिलीज होगा ट्रेलर, भव्य स्टारकास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार फिल्म

    'रामायण' की पहली झलक का इंतजार खत्म, 24 जुलाई को दुनिया भर में रिलीज होगा ट्रेलर, भव्य स्टारकास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार फिल्म


    नई दिल्ली । निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसकी कहानी, कलाकारों और निर्माण स्तर को लेकर चर्चाएं बनी हुई हैं। अब दर्शकों के लंबे इंतजार पर विराम लगाते हुए मेकर्स ने फिल्म के पहले भाग के ट्रेलर की रिलीज तारीख का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इसके अनुसार ‘रामायण पार्ट-1’ का ट्रेलर 24 जुलाई 2026 को दुनिया भर में एक साथ रिलीज किया जाएगा।

    मेकर्स ने सोशल मीडिया पर फिल्म का नया पोस्टर साझा करते हुए ट्रेलर लॉन्च की जानकारी दी। पोस्टर में भगवान राम और माता सीता के वनवास काल से पहले की झलक दिखाई गई है, जिसने दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। पोस्ट के साथ यह भी बताया गया कि फिल्म का ट्रेलर वैश्विक स्तर पर एक साथ रिलीज किया जाएगा, जिससे दुनिया भर के दर्शक एक ही समय पर इसकी पहली विस्तृत झलक देख सकेंगे।

    ‘रामायण’ को भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिना जा रहा है। फिल्म दो भागों में रिलीज होगी, जिसमें पहले भाग में भगवान राम और माता सीता के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रस्तुत किया जाएगा। मेकर्स का उद्देश्य इस पौराणिक कथा को आधुनिक तकनीक, भव्य विजुअल इफेक्ट्स और बड़े पैमाने के निर्माण के साथ दर्शकों के सामने पेश करना है, ताकि इसे वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान मिल सके।

    फिल्म की स्टारकास्ट भी इसकी सबसे बड़ी खासियतों में शामिल है। भगवान राम की भूमिका में रणबीर कपूर नजर आएंगे, जबकि माता सीता का किरदार साई पल्लवी निभा रही हैं। रावण की भूमिका में अभिनेता यश दिखाई देंगे। वहीं, सनी देओल को भगवान हनुमान और रवि दुबे को लक्ष्मण की भूमिका में देखा जाएगा। अलग-अलग फिल्म उद्योगों के प्रमुख कलाकारों को एक साथ लाने की वजह से भी यह परियोजना लगातार चर्चा में बनी हुई है।

    निर्देशक नितेश तिवारी इस फिल्म को बड़े पैमाने पर तैयार कर रहे हैं। निर्माण से जुड़े दावों के अनुसार दोनों भागों पर कुल मिलाकर लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो ‘रामायण’ भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्म परियोजना बन सकती है। बड़े बजट के साथ-साथ फिल्म में अत्याधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय स्तर के विजुअल इफेक्ट्स और विशाल सेटों का उपयोग किए जाने की भी जानकारी सामने आ चुकी है।

    फिल्म की घोषणा के बाद से दर्शकों के बीच इसके हर अपडेट को लेकर विशेष उत्सुकता बनी हुई है। अब ट्रेलर रिलीज की तारीख सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। फिल्म प्रेमियों को उम्मीद है कि ट्रेलर में कहानी, किरदारों के लुक और तकनीकी स्तर की पहली विस्तृत झलक देखने को मिलेगी। आने वाले दिनों में ट्रेलर रिलीज के साथ फिल्म के प्रचार अभियान को भी गति मिलने की संभावना है। ऐसे में 24 जुलाई को रिलीज होने वाला ट्रेलर इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के प्रति दर्शकों की उम्मीदों को और स्पष्ट करेगा तथा इसकी रिलीज से पहले उत्साह को नई ऊंचाई देगा।

  • रेलवे, डिफेंस और ड्रोन सेक्टर पर दांव, 14 जुलाई से खुलेगा मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज का IPO; ग्रे मार्केट में 120% से अधिक प्रीमियम की चर्चा

    रेलवे, डिफेंस और ड्रोन सेक्टर पर दांव, 14 जुलाई से खुलेगा मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज का IPO; ग्रे मार्केट में 120% से अधिक प्रीमियम की चर्चा

    नई दिल्ली । हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में कार्यरत मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड अपना 160.34 करोड़ रुपये का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लेकर आ रही है। रेलवे, एयरोस्पेस, डिफेंस, मेट्रो, ड्रोन और सेमीकंडक्टर जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों के लिए अत्याधुनिक कंपोनेंट तैयार करने वाली कंपनी का यह इश्यू 14 जुलाई से निवेशकों के लिए खुलेगा। ग्रे मार्केट में मजबूत प्रीमियम की चर्चा के कारण इस आईपीओ ने बाजार सहभागियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। हालांकि ग्रे मार्केट प्रीमियम किसी भी शेयर के सूचीबद्ध होने के बाद उसके प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जाता।

    कंपनी का सार्वजनिक निर्गम 14 जुलाई से 16 जुलाई 2026 तक निवेश के लिए खुला रहेगा। शेयरों के आवंटन की प्रक्रिया 17 जुलाई को पूरी होने की संभावना है, जबकि कंपनी के शेयर 21 जुलाई को बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध हो सकते हैं। यह पूरा इश्यू फ्रेश शेयरों का है, इसलिए इससे जुटाई जाने वाली राशि सीधे कंपनी के विस्तार और परिचालन क्षमता बढ़ाने में उपयोग की जाएगी।

    मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज ने आईपीओ का प्राइस बैंड 315 रुपये से 331 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया है। आवेदन के लिए एक लॉट में 400 शेयर रखे गए हैं। खुदरा निवेशकों को न्यूनतम दो लॉट, यानी 800 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा। ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर इसके लिए लगभग 2.65 लाख रुपये का न्यूनतम निवेश आवश्यक होगा। वहीं, उच्च नेटवर्थ निवेशकों के लिए न्यूनतम आवेदन तीन लॉट का निर्धारित किया गया है, जिसके लिए लगभग 3.97 लाख रुपये का निवेश करना होगा।

    कंपनी ने बताया है कि आईपीओ से प्राप्त पूंजी का बड़ा हिस्सा उत्पादन क्षमता बढ़ाने में लगाया जाएगा। लगभग 61.03 करोड़ रुपये नई प्लांट एवं मशीनरी की खरीद पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा करीब 81.50 करोड़ रुपये कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने में लगाए जाएंगे, जबकि शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। कंपनी का मानना है कि इससे उसकी विनिर्माण क्षमता और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी।

    वर्ष 2021 में स्थापित मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग समाधान उपलब्ध कराती है। कंपनी रेलवे कोच के पुर्जे, ब्रेकिंग सिस्टम, डोर मैकेनिज्म, मेट्रो ट्रेन कपलर, एयरोस्पेस कंपोनेंट, ड्रोन पार्ट्स और सेमीकंडक्टर उद्योग में उपयोग होने वाले जटिल इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्माण करती है। इन क्षेत्रों में बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी अपने कारोबार के विस्तार की दिशा में लगातार निवेश कर रही है।

    कर्नाटक के बेंगलुरु में कंपनी की चार आधुनिक विनिर्माण इकाइयां संचालित हैं, जहां उन्नत सीएनसी मशीनिंग सेंटर, वायर ईडीएम मशीन, फाइबर लेजर कटिंग सिस्टम और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जाते हैं। आधुनिक तकनीक और विशेष इंजीनियरिंग क्षमता के कारण कंपनी ने हाई-प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

    बाजार में इस आईपीओ को लेकर उत्साह का एक कारण इसका मजबूत ग्रे मार्केट प्रीमियम भी बताया जा रहा है। हालांकि निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आईपीओ में निवेश का निर्णय केवल ग्रे मार्केट प्रीमियम के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं, जोखिम कारकों और मूल्यांकन का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने के बाद ही निवेश संबंधी फैसला करना चाहिए।

  • Apple ने OpenAI पर दायर किया बड़ा मुकदमा, गोपनीय तकनीक और भविष्य के प्रोडक्ट डिजाइनों की कथित चोरी का लगाया गंभीर आरोप

    Apple ने OpenAI पर दायर किया बड़ा मुकदमा, गोपनीय तकनीक और भविष्य के प्रोडक्ट डिजाइनों की कथित चोरी का लगाया गंभीर आरोप

    नई दिल्ली । वैश्विक प्रौद्योगिकी उद्योग में प्रतिस्पर्धा के बीच Apple और OpenAI के बीच कानूनी विवाद सामने आया है। Apple ने अदालत में दायर शिकायत में आरोप लगाया है कि OpenAI ने उसके गोपनीय ट्रेड सीक्रेट्स, भविष्य के हार्डवेयर उत्पादों से जुड़ी तकनीकी जानकारी और डिजाइन संबंधी सूचनाओं का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास किया है। इस मामले ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उपभोक्ता प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दो प्रमुख कंपनियों के बीच संबंधों को नई दिशा दे दी है।

    Apple का दावा है कि उसके कुछ पूर्व वरिष्ठ कर्मचारी, जिन्हें कंपनी की आगामी तकनीकों और उत्पाद विकास से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच प्राप्त थी, बाद में OpenAI से जुड़े। कंपनी के अनुसार इन कर्मचारियों के माध्यम से गोपनीय सूचनाओं के संभावित दुरुपयोग की आशंका पैदा हुई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूर्व अधिकारियों ने ऐसे कर्मचारियों से संपर्क बनाए रखा जो Apple में कार्यरत थे और उनसे तकनीकी जानकारी तथा उत्पादों से संबंधित विवरण प्राप्त करने का प्रयास किया गया।

    कंपनी ने अपने आरोपों में यह भी कहा है कि OpenAI के हार्डवेयर विकास कार्यक्रम में ऐसी तकनीकों का उपयोग किए जाने की संभावना है, जिन्हें Apple अपनी स्वामित्व वाली बौद्धिक संपदा मानता है। शिकायत के अनुसार कुछ विशेष निर्माण प्रक्रियाओं और मेटल फिनिशिंग तकनीकों के कथित उपयोग को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। Apple का कहना है कि इन तकनीकों का विकास लंबे अनुसंधान और निवेश के बाद किया गया है तथा इनका अनधिकृत उपयोग प्रतिस्पर्धी लाभ को प्रभावित कर सकता है।

    दूसरी ओर OpenAI ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि वह किसी अन्य संगठन की गोपनीय जानकारी का उपयोग नहीं करती और उसके सभी उत्पाद स्वतंत्र अनुसंधान, नवाचार तथा आंतरिक विकास प्रक्रिया पर आधारित हैं। OpenAI ने स्पष्ट किया है कि वह कानूनी प्रक्रिया में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी और लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल दो कंपनियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि तेजी से विकसित हो रहे कृत्रिम बुद्धिमत्ता उद्योग में बौद्धिक संपदा की सुरक्षा, कर्मचारियों की भूमिका और व्यावसायिक गोपनीयता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी सामने लाता है। यदि अदालत में यह मामला लंबा चलता है तो इसका प्रभाव तकनीकी साझेदारियों, निवेशकों के विश्वास और भविष्य की कारोबारी रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार AI आधारित हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर समाधान विकसित करने की प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है। ऐसे माहौल में कंपनियां अपने अनुसंधान, डिजाइन और स्वामित्व वाली तकनीकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही हैं। इस विवाद का अंतिम परिणाम न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल इसने वैश्विक तकनीकी उद्योग में बौद्धिक संपदा संरक्षण और प्रतिस्पर्धी व्यवहार पर नई बहस शुरू कर दी है।

    दोनों कंपनियों की ओर से अपने-अपने दावों पर कायम रहने के कारण अब इस मामले पर उद्योग जगत, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों की नजरें अदालत की आगामी कार्यवाही पर टिकी हुई हैं। आने वाले समय में न्यायिक निर्णय यह तय करेगा कि लगाए गए आरोप कितने तथ्यात्मक हैं और उनका तकनीकी उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ता है।

  • वैश्विक तेल बाजार में मांग सुधार के संकेत, आईईए ने कहा- खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति से ही लौटेगी कच्चे तेल बाजार की स्थिरता

    वैश्विक तेल बाजार में मांग सुधार के संकेत, आईईए ने कहा- खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति से ही लौटेगी कच्चे तेल बाजार की स्थिरता

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने अपनी ताजा ऑयल मार्केट रिपोर्ट में वैश्विक कच्चे तेल की मांग में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिए हैं। एजेंसी का कहना है कि गर्मियों के दौरान यात्रा गतिविधियों में वृद्धि और पहले से दबे उपभोक्ता मांग के बाजार में लौटने से आने वाले महीनों में तेल की खपत बढ़ने की संभावना है। हालांकि एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल के वैश्विक बाजार को पूरी तरह सामान्य स्थिति में लाने के लिए खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति और समुद्री आपूर्ति मार्गों का निर्बाध संचालन अत्यंत आवश्यक होगा।

    रिपोर्ट के अनुसार मई में वैश्विक तेल मांग घटकर लगभग 9.79 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गई थी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी कम थी। इसके बावजूद आईईए का अनुमान है कि अक्टूबर तक मांग में उल्लेखनीय सुधार होगा और यह फरवरी के बाद पहली बार पिछले वर्ष के स्तर से ऊपर पहुंच सकती है। एजेंसी का मानना है कि पर्यटन गतिविधियों और परिवहन क्षेत्र में बढ़ती ईंधन खपत इस सुधार की प्रमुख वजह बनेगी।

    आईईए ने वर्ष 2026 और 2027 के लिए भी तेल मांग का आकलन प्रस्तुत किया है। एजेंसी के अनुसार 2026 में वैश्विक तेल मांग में कुछ कमी देखने को मिल सकती है, जबकि उसके बाद 2027 में मांग दोबारा मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकती है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार मध्यम अवधि में फिर से संतुलन की ओर बढ़ सकता है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष के अंत तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति मांग से अधिक हो सकती है। हालांकि यह स्थिति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले प्रमुख समुद्री मार्गों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल टैंकरों की आवाजाही कितनी तेजी से सामान्य होती है। यदि परिवहन पूरी तरह बहाल होता है तो तेल उत्पादक देश उत्पादन बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर सकेंगे।

    आईईए ने हाल के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि खाड़ी क्षेत्र में फिर से बढ़ा तनाव यह दर्शाता है कि स्थायी शांति के बिना ऊर्जा बाजार में दीर्घकालिक स्थिरता संभव नहीं होगी। एजेंसी के अनुसार किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या आपूर्ति मार्गों में व्यवधान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और आपूर्ति दोनों को प्रभावित कर सकता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक जून के दौरान वैश्विक तेल भंडार में चार महीने बाद पहली बार वृद्धि दर्ज की गई। समुद्र में मौजूद भंडार बढ़ने से कुल स्टॉक में इजाफा हुआ, हालांकि कई देशों में भूमि आधारित भंडार में गिरावट भी देखने को मिली। विशेष रूप से कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी और वाणिज्यिक भंडार दोनों में कमी दर्ज की गई, जिससे बाजार की स्थिति मिश्रित बनी रही।

    आईईए ने यह भी बताया कि जून में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन हाल के तनावपूर्ण घटनाक्रमों के बाद कीमतों में फिर तेजी देखी गई। एजेंसी का मानना है कि भले ही कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ रही हो, लेकिन रिफाइनरियों का संचालन और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। ऐसे में आने वाले महीनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक परिस्थितियों, समुद्री आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा और प्रमुख उत्पादक देशों की उत्पादन रणनीति पर निर्भर करेगी।

  • प्रवासी भारतीयों को पीएम मोदी का भावनात्मक संदेश, 'जोड़ा साहिब' की 300 वर्ष पुरानी विरासत का किया उल्लेख, पटना साहिब दर्शन का दिया आग्रह

    प्रवासी भारतीयों को पीएम मोदी का भावनात्मक संदेश, 'जोड़ा साहिब' की 300 वर्ष पुरानी विरासत का किया उल्लेख, पटना साहिब दर्शन का दिया आग्रह


    नई दिल्ली ।
    न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, सिख परंपरा और आध्यात्मिक धरोहर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल आर्थिक विकास की दिशा में ही आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण को भी समान महत्व दे रहा है। इसी क्रम में उन्होंने पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ के इतिहास का उल्लेख करते हुए प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया कि जब भी वे भारत आएं, श्री पटना साहिब जाकर उसके दर्शन अवश्य करें।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब, चारों साहिबजादों और माता गुजरी के साहस, त्याग और बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, समानता, करुणा और साहस का संदेश दिया है। यही कारण है कि दुनिया के विभिन्न देशों में स्थित गुरुद्वारे आज भी मानव सेवा के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं, जहां जरूरतमंदों को बिना किसी भेदभाव के भोजन, सहायता और सम्मान मिलता है।

    उन्होंने कहा कि संकट के समय भारत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे सम्मान के साथ सुरक्षित भारत लाने का कार्य किया। इसके अलावा जब श्री हरमंदिर साहिब में सेवा से जुड़े कुछ प्रशासनिक विषय सामने आए, तब सरकार ने उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने का प्रयास किया। उन्होंने इसे सरकार की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।

    प्रधानमंत्री ने श्री हेमकुंड साहिब का भी उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित इस पवित्र तीर्थ तक पहुंचना लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए वहां तक रोपवे परियोजना विकसित की जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्थलों तक बेहतर संपर्क और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘वीर बाल दिवस’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चारों साहिबजादों और माता गुजरी के अद्वितीय बलिदान की स्मृति को सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाया जाता है। आज यह दिवस देशभर में नई पीढ़ी को साहस, राष्ट्रसेवा और मूल्यों के प्रति समर्पण की प्रेरणा दे रहा है। उन्होंने कहा कि अब देश के विभिन्न हिस्सों के बच्चे भी इस गौरवशाली इतिहास से परिचित हो रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने ‘जोड़ा साहिब’ से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोविंद सिंह जी के सेवादार थे और उनके परिवार ने लगभग 300 वर्षों तक गुरु गोविंद सिंह तथा माता साहिब कौर जी के पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ को सुरक्षित रखा। विभाजन के समय भी इस धरोहर को सुरक्षित दिल्ली लाया गया। बाद में इसे अधिक से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए श्री गुरु गोविंद सिंह जी के जन्मस्थान श्री पटना साहिब में स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना उनके लिए सौभाग्य की बात रही। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से अपील की कि भारत यात्रा के दौरान वे श्री पटना साहिब अवश्य जाएं और इस पवित्र धरोहर के दर्शन कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत से अपना जुड़ाव और मजबूत करें।

  • आयुष्मान योजना में अनियमितताओं पर योगी सरकार का एक्शन, दोषी अस्पतालों पर 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना

    आयुष्मान योजना में अनियमितताओं पर योगी सरकार का एक्शन, दोषी अस्पतालों पर 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) ने प्रदेशभर में विशेष गुणवत्ता सुधार अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य लाभार्थियों को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

    साचीज की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अर्चना वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) से मान्यता प्राप्त प्रदेश के 800 अस्पतालों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रशिक्षण राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान, लखनऊ द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें अस्पतालों को डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली से जुड़ी प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

    प्रशिक्षण के दौरान अस्पतालों की तकनीकी समस्याओं और शिकायतों का भी मौके पर समाधान किया गया, ताकि उनकी कार्यप्रणाली और सेवा गुणवत्ता में सुधार हो सके। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की ओर से एनएबीएच मान्यता प्राप्त अस्पतालों को गुणवत्ता मानकों के पालन के लिए प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान है। इसी व्यवस्था के तहत साचीज अस्पतालों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है, जिससे मरीजों को सुरक्षित, मानक आधारित और सम्मानजनक उपचार मिल सके।

    गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई

    साचीज ने योजना में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामलों में सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान योजना के तहत अवैध नकद वसूली, अपकोडिंग और अन्य वित्तीय गड़बड़ियों के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू की गई है।

    सीईओ अर्चना वर्मा के अनुसार, जिन अस्पतालों के खिलाफ जांच में शिकायतें सही पाई गईं, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक ऐसे अस्पतालों पर करीब 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। इनमें से लगभग 60 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि शेष राशि की वसूली सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अस्पतालों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।

    उन्होंने बताया कि जो अस्पताल लगातार नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें आयुष्मान भारत योजना के पैनल से निलंबित भी किया जा रहा है। साचीज का उद्देश्य केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसा मजबूत नेटवर्क तैयार करना है जो गुणवत्ता, पारदर्शिता और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के मानकों पर खरा उतरे।

    इसके साथ ही केंद्र सरकार के अस्पतालों को भी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के नेटवर्क से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है। इससे प्रदेश के लाभार्थियों को भविष्य में और अधिक विशेषज्ञ एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

  • आषाढ़ अमावस्या मेले के लिए रेलवे की तैयारी, 13 से 15 जुलाई तक चित्रकूट रूट पर चलेंगी दो स्पेशल ट्रेनें

    आषाढ़ अमावस्या मेले के लिए रेलवे की तैयारी, 13 से 15 जुलाई तक चित्रकूट रूट पर चलेंगी दो स्पेशल ट्रेनें

    झांसी। आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर चित्रकूट में लगने वाले मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे ने 13 से 15 जुलाई तक दो मेला स्पेशल ट्रेनों के संचालन का निर्णय लिया है। इसके अलावा, यात्रियों की संख्या बढ़ने पर झांसी-बांदा मेमू ट्रेन को आवश्यकता के अनुसार चित्रकूटधाम कर्वी तक बढ़ाया जाएगा।

    रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पहली मेला स्पेशल ट्रेन झांसी से सुबह 10:10 बजे रवाना होगी और शाम 5:45 बजे चित्रकूटधाम कर्वी पहुंचेगी। वापसी में यही ट्रेन शाम 7:25 बजे कर्वी से चलेगी और रात 1:00 बजे झांसी पहुंचेगी।

    दूसरी मेला स्पेशल ट्रेन झांसी से रात 8:10 बजे प्रस्थान करेगी और तड़के 3:05 बजे चित्रकूटधाम कर्वी पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन सुबह 4:40 बजे कर्वी से रवाना होकर 11:10 बजे झांसी पहुंचेगी।

    रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रही तो झांसी-बांदा मेमू ट्रेन की अप और डाउन दोनों सेवाओं का विस्तार कर उन्हें चित्रकूटधाम कर्वी तक संचालित किया जाएगा, ताकि यात्रियों को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

  • भूकंप से तबाह वेनेजुएला में मानवीय संकट गहराया, हजारों जानें गईं, अंतरराष्ट्रीय सहायता के सहारे पुनर्वास की चुनौती शुरू

    भूकंप से तबाह वेनेजुएला में मानवीय संकट गहराया, हजारों जानें गईं, अंतरराष्ट्रीय सहायता के सहारे पुनर्वास की चुनौती शुरू

    नई दिल्ली । वेनेजुएला में 24 जून को आए भीषण भूकंप के बाद हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 4,118 हो गई है। हजारों लोग अब भी प्रभावित हैं और सबसे ज्यादा नुकसान वाले इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने, लापता लोगों की तलाश और जरूरी सेवाओं को बहाल करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार, इस आपदा में 16,740 लोग घायल हुए हैं, जबकि अब तक 6,462 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों को चिकित्सा सहायता, भोजन, स्वच्छ पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि दूरदराज के कई क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए विशेष बचाव दलों की मदद ली जा रही है।

    भूकंप के कारण बड़ी संख्या में मकान क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इसके चलते 17,907 लोग बेघर हो चुके हैं, जबकि लगभग 86,794 परिवारों को विभिन्न प्रकार की राहत सहायता उपलब्ध कराई गई है। फिलहाल 17,266 लोग देशभर में बनाए गए 89 अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं, जहां उनके लिए भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी।

    राहत एवं बचाव कार्य को तेज करने के लिए पूरे देश में बड़े पैमाने पर संसाधन लगाए गए हैं। हजारों सरकारी कर्मचारी, स्वयंसेवक और अंतरराष्ट्रीय बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, देशभर में 30,000 से अधिक कर्मियों, लगभग 29,843 स्वयंसेवकों और 3,454 अंतरराष्ट्रीय बचावकर्मियों की सहायता से अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही भूकंप के बाद अब तक 1,171 से अधिक झटके दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे कई इलाकों में लोगों के बीच चिंता और सतर्कता बनी हुई है।

    इस बीच कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपदा के बाद विभिन्न देशों से मिली मानवीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने राजधानी काराकास में राहत सामग्री संग्रह केंद्र का निरीक्षण किया, जहां दो हजार टन से अधिक अंतरराष्ट्रीय सहायता सामग्री को प्रभावित लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थित किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि सभी सहयोगी देशों की सहायता का पारदर्शी तरीके से उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा ताकि जरूरतमंद लोगों तक समय पर राहत पहुंच सके।

    सरकार ने कहा है कि इस कठिन समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग ने राहत कार्यों को मजबूती प्रदान की है। प्रशासन का ध्यान अब केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे की बहाली और विस्थापित परिवारों के स्थायी पुनर्वास पर भी केंद्रित है। अधिकारियों का मानना है कि पुनर्निर्माण की प्रक्रिया लंबी होगी, लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों को फिर से सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास जारी रहेगा।

    भूकंप में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में सरकार पहले ही सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर चुकी है। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए भरोसा दिलाया है कि राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण का कार्य पूरी गंभीरता के साथ जारी रहेगा, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता मिल सके।

  • झांसी की आबादी 125 साल में छह गुना बढ़ी, बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ा दबाव, तैयार हो रहा नया मास्टर प्लान

    झांसी की आबादी 125 साल में छह गुना बढ़ी, बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ा दबाव, तैयार हो रहा नया मास्टर प्लान

    झांसी। विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) के अवसर पर सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पिछले 125 वर्षों में झांसी जिले की आबादी लगभग छह गुना बढ़ चुकी है। हालांकि जनसंख्या के अनुपात में शहर का बुनियादी ढांचा विकसित नहीं हो सका, जिससे पेयजल, सीवर, सड़क, बिजली, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने मास्टर प्लान-2031 तैयार किया है, जिसके तहत करीब 500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का नियोजित विकास किया जाएगा।

    अर्थ एवं संख्यायिकी विभाग के अनुसार वर्ष 1901 में झांसी जिले की आबादी 4.27 लाख थी, जबकि वर्ष 2026 तक इसके लगभग 25 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यानी 125 वर्षों में जिले की आबादी में 20.73 लाख लोगों की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में जनसंख्या 485.65 प्रतिशत यानी करीब 5.86 गुना बढ़ी। औसतन हर वर्ष लगभग 16,585 लोग जिले की आबादी में जुड़े हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या वृद्धि का कारण केवल प्राकृतिक वृद्धि नहीं है, बल्कि बेहतर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक सुविधाओं की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से शहर की ओर लगातार बढ़ते पलायन ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है।

    वर्तमान अनुमान के मुताबिक जिले की 58.3 प्रतिशत आबादी, यानी करीब 14.58 लाख लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि 41.7 प्रतिशत आबादी, यानी लगभग 10.42 लाख लोग शहरी क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं। शहरी आबादी तेजी से बढ़ी है, लेकिन उसी अनुपात में सड़क, सीवर, पेयजल, सार्वजनिक परिवहन और आवास जैसी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया है।

    सीवर नेटवर्क सबसे बड़ी चुनौती
    बढ़ती आबादी के बीच झांसी की सबसे बड़ी समस्या सीवर व्यवस्था को माना जा रहा है। शहर का बड़ा हिस्सा आज भी सीवर नेटवर्क से नहीं जुड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए समय पर निवेश नहीं किया गया, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

    जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी (डीएसटीओ) अर्चना सिंह के अनुसार, वर्ष 1901 की तुलना में जिले की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि वर्ष 2001 से 2011 के बीच जनसंख्या वृद्धि दर में कमी दर्ज की गई, जिसका प्रमुख कारण परिवार नियोजन के प्रति बढ़ती जागरूकता है।

    500 वर्ग किलोमीटर में होगा नियोजित विस्तार
    तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए झांसी विकास प्राधिकरण ने मास्टर प्लान-2031 तैयार किया है। जेडीए के टाउन प्लानर विजय कुमार सिंह के अनुसार यह योजना लगभग 13 लाख की प्रस्तावित शहरी आबादी को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसके तहत शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का नियोजित विकास किया जाएगा। इनमें लगभग 19 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को शहरीकरण के लिए चिह्नित किया गया है।

    योजना के तहत निजी क्षेत्र में 250-250 एकड़ की दो टाउनशिप विकसित की जाएंगी, जबकि जेडीए स्वयं 1000 एकड़ में एक एकीकृत टाउनशिप विकसित करेगा। यह परियोजना ग्वालियर-कानपुर हाईवे और ग्वालियर रोड स्थित अंबावाय क्षेत्र में प्रस्तावित है।

    मास्टर प्लान के साथ जोनल प्लान भी तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से नई कॉलोनियों और विकसित होने वाले क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, सीवर, बिजली, अस्पताल, स्कूल, पार्क तथा अन्य नागरिक सुविधाओं का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित किया जाएगा।