Author: bharati

  • प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद पर बाल यौन शोषण FIR, पुलिस ने शुरू की गहन जांच

    प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद पर बाल यौन शोषण FIR, पुलिस ने शुरू की गहन जांच


    प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ बाल यौन शोषण के गंभीर आरोपों पर FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने गहन जांच शुरू कर दी है। मामला POCSO कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और पीड़ित शिष्यों ने अदालत में बच्चों के कथित शोषण के बयानों को दर्ज कराया था, जिनके आधार पर पुलिस ने देर रात FIR को औपचारिक रूप दिया।

    पुलिस की पांच सदस्यीय टीम, जिसका नेतृत्व डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य कर रहे हैं, ने घटना स्थल का नक्शा तैयार कर लिया है और पीड़ितों के मेडिकल परीक्षण के बाद साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। टीम ने माघ मेला शिविर और अन्य कथित घटनास्थलों का निरीक्षण भी किया है। पुलिस का मुख्य फोकस अब उन पीड़ितों और शिकायतकर्ता तक पहुंचकर कलम बंद बयान और सबूत दर्ज करना है, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी सुनिश्चित हो सके।

    अविमुक्तेश्वरानंद ने FIR दर्ज होने के बाद कहा कि वे जांच से भागेंगे नहीं और उनके मठ के दरवाजे पुलिस के लिए हमेशा खुले हैं। उन्होंने बताया कि कई वकीलों ने उनका केस मुफ्त में लड़ने का प्रस्ताव दिया है और उनकी लीगल टीम अब अग्रिम कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है। वहीं, उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के आपराधिक इतिहास पर सवाल उठाया और दावा किया कि वह कांधला थाना क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी रह चुका है।

    इस हाई‑प्रोफाइल मामले में पुलिस ने स्पेशल टीम बनाई है जिसमें एसीपी और इंस्पेक्टर झूंसी समेत पांच वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम निष्पक्ष और तेज़ जांच सुनिश्चित कर रही है। POCSO Act के तहत यह मामला तीव्र और संवेदनशील माना जा रहा है, इसलिए पुलिस मेडिकल, फोरेंसिक और गवाह सबूत के आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई तय करेगी।

    इस बीच समाज और धार्मिक जगत में भी इस मामले पर बहस जारी है। स्वामी ने आरोपों को झूठा और साजिशपूर्ण बताया है और कहा कि न्याय जल्द ही दोनों न्यायालयों में सही रूप से होगा। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के बयानों का उन्होंने समर्थन करते हुए उन्हें जनता की आवाज बताया।

  • अमेरिका के लोग ट्रंप की नीतियों और देश चलाने के तरीके से खुश नहीं… 60% टैरिफ फैसलों से नाराज

    अमेरिका के लोग ट्रंप की नीतियों और देश चलाने के तरीके से खुश नहीं… 60% टैरिफ फैसलों से नाराज


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) अपने कामों से अधिक अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। कब क्या कहेंगे, शायद ट्रंप खुद नहीं जानते। यही कारण है कि वे अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। इस बीच एक सर्वे रिपोर्ट सामने आया है। इस सर्वे के अनुसार, अधिकतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की नीतियों और देश चलाने के तरीके से खुश नहीं है। फरवरी 2026 के सर्वेक्षण में ट्रंप की कुल अस्वीकृति दर (Disapproval Rating) लगभग 60% पहुंच गई है, जो उनके दूसरे कार्यकाल में अब तक की सबसे ऊंची दरों में से एक है और 2021 में पद छोड़ते समय वाली स्थिति के समान है। सर्वे के अनुसार, अधिकतर लोग महंगाई, टैरिफ, विदेश संबंध, आव्रजन और समग्र अर्थव्यवस्था जैसे रोजमर्रा के महत्वपूर्ण मुद्दों पर ट्रंप के तरीके से असहमत हैं।

    यह सर्वेक्षण ABC न्यूज/वाशिंगटन पोस्ट/इप्सोस द्वारा इप्सोस के नॉलेजपैनल के जरिए किया गया था, और यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पहले के वैश्विक टैरिफ को रद्द करने से ठीक पहले हुआ था। सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग दो-तिहाई अमेरिकी (करीब 65%) ट्रंप द्वारा महंगाई से निपटने के तरीके से असहमत हैं। आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगाने के उनके तरीके को 64% लोग नापसंद करते हैं, जबकि 62% लोग विदेशी संबंधों को संभालने के तरीके से असहमत हैं। 58% प्रतिभागियों ने आव्रजन (इमिग्रेशन) को संभालने के तरीके का विरोध किया, और 57% ने कहा कि समग्र अर्थव्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है। इनमें से किसी भी मुद्दे पर ट्रंप को जनता से स्पष्ट समर्थन नहीं मिल रहा है।


    ट्रंप से नाखुश लेकिन डेमोक्रेट्स पर भरोसा नहीं

    सर्वे के अनुसार, अधिकतर लोग ट्रंप से नाखुश हैं, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स पर भी पूरा भरोसा नहीं है। दरअसल, जब लोगों से पूछा गया कि देश की सबसे बड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए वे किस पर ज्यादा भरोसा करते हैं, तो राय लगभग बराबर बंट गई। ट्रंप (33%), डेमोक्रेट्स (31%), या ‘दोनों में से कोई नहीं’ (31%)। सर्वे रिपोर्ट से साफ है कि कई अमेरिकी दोनों पक्षों से नाखुश हैं।

    सर्वे के अनुसार, ट्रंप को सबसे कम समर्थन डेमोक्रेट्स और निर्दलीय (इंडिपेंडेंट) मतदाताओं से मिला, जिन्होंने लगभग हर मुद्दे पर उनसे असहमति जताई। इतना ही नहीं, रिपब्लिकन पार्टी में भी मतभेद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) आंदोलन के मजबूत समर्थक ज्यादातर ट्रंप के फैसलों से सहमत थे, लेकिन MAGA से खुद को अलग मानने वाले रिपब्लिकन अधिक आलोचनात्मक थे, खासकर महंगाई और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर। कुल मिलाकर, ट्रंप की अस्वीकृति दर लगभग 60% है, जो उनके दूसरे कार्यकाल में अब तक की सबसे ऊंची दरों में से एक है और 2021 में पद छोड़ते समय वाली दर के बराबर है।


    ट्रंप के सत्ता संभालने के हालात और हुए खराब

    इस बीच, अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों का नजरिया भी निराशाजनक है। लगभग आधे अमेरिकियों का कहना है कि ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद हालात और खराब हुए हैं। सिर्फ करीब 3% लोगों ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है। सर्वेक्षण में शामिल केवल 22% लोगों ने ही आर्थिक रूप से खुद को बेहतर महसूस किया, जबकि अधिकांश ने कहा कि उनकी स्थिति पहले जैसी है या और खराब हो गई है।

    सर्वेक्षण में ट्रंप की राष्ट्रपति बनने की योग्यता पर भी सवाल उठे। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, आधे से ज्यादा अमेरिकियों ने कहा कि उनमें राष्ट्रपति बनने के लिए जरूरी मानसिक क्षमता नहीं है, और लगभग आधे ने कहा कि वे शारीरिक रूप से भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं। रिपब्लिकन इस पर काफी हद तक असहमत थे, लेकिन डेमोक्रेट्स और निर्दलीय मतदाताओं ने इन चिंताओं को मजबूती से साझा किया।

    भरोसा भी एक बड़ी समस्या है। लगभग 70% अमेरिकियों (दस में से सात) ने कहा कि ट्रंप ईमानदार या भरोसेमंद नहीं हैं। कई लोगों का मानना है कि वे राष्ट्रपति पद का दुरुपयोग अपने निजी फायदे के लिए कर रहे हैं, और अधिकांश को लगता है कि उन्होंने अपनी कानूनी शक्तियों का उल्लंघन किया है। वहीं, खास कार्रवाइयों के बारे में ज्यादातर अमेरिकी बच्चों के लिए अनुशंसित टीकों में कटौती का विरोध करते हैं और अन्य देशों में बदलाव लाने के लिए अमेरिकी सेना के इस्तेमाल का समर्थन नहीं करते। कई लोगों का यह भी मानना है कि प्रशासन जेफरी एपस्टीन फाइलों जैसे संवेदनशील मामलों पर पारदर्शी नहीं रहा है। बता दें कि यह सर्वेक्षण अमेरिका भर में 2500 से ज्यादा वयस्कों पर किया गया है।

  • US में हिंदू सबसे अधिक शिक्षित धार्मिक समुदाय, प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

    US में हिंदू सबसे अधिक शिक्षित धार्मिक समुदाय, प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट में हुआ खुलासा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में हिंदू सबसे अधिक शिक्षित धार्मिक समूह (Hindus most Educated Religious Group) हैं। प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) की नई रिपोर्ट (New report ) से यह सामने आया है। 2023-24 के रिलिजियस लैंडस्केप स्टडी (RLS) में पाया गया कि यूएस में रहने वाले 70 प्रतिशत हिंदू वयस्कों के पास कम से कम बैचलर डिग्री या उससे उच्च शिक्षा है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है, जहां सभी अमेरिकी वयस्कों में मात्र 35 प्रतिशत के पास ही बैचलर डिग्री या उससे ज्यादा है। यह अध्ययन अमेरिका में धर्म और सार्वजनिक जीवन पर सबसे व्यापक सर्वेक्षणों में से एक माना जाता है, जिसमें 36908 वयस्कों से जुलाई 2023 से मार्च 2024 तक जानकारी ली गई।

    रिपोर्ट 19 फरवरी 2026 को जारी की गई। हिंदू समुदाय की यह उपलब्धि इमिग्रेशन पैटर्न से जुड़ी हुई है, क्योंकि अधिकांश हिंदू उच्च शिक्षा या कुशल वीजा के माध्यम से अमेरिका आए हैं। इस अध्ययन में हिंदुओं के बाद यहूदी दूसरे स्थान पर हैं, जहां 65 प्रतिशत वयस्कों के पास बैचलर डिग्री या उससे अधिक शिक्षा है। मुसलमान, बौद्ध और ऑर्थोडॉक्स ईसाई भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर हैं। इनमें 40 प्रतिशत से अधिक (मुसलमानों में 44 प्रतिशत) वयस्कों के पास उच्च शिक्षा है। ये अल्पसंख्यक धार्मिक समूह अमेरिकी आबादी का छोटा हिस्सा हैं- हिंदू लगभग 0.5-1 प्रतिशत, मुसलमान 1-1.3 प्रतिशत और यहूदी लगभग 2 प्रतिशत।

    ईसाई समुदाय कुल आबादी का 70%
    अमेरिका में ईसाई समुदाय कुल आबादी का बड़ा हिस्सा लगभग 70 प्रतिशत है, लेकिन उनके कई उपसमूह जैसे इवैंजेलिकल प्रोटेस्टेंट (29 प्रतिशत) और ऐतिहासिक रूप से ब्लैक प्रोटेस्टेंट (24 प्रतिशत) में कॉलेज ग्रेजुएट्स का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से कम है। रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा स्तर में अंतर मुख्य रूप से इमिग्रेशन और जनसांख्यिकीय कारकों से जुड़ा है। हिंदू, मुसलमान और बौद्ध समुदायों में से अधिकांश विदेशी मूल के हैं, जो अमेरिका में उच्च शिक्षा या स्किल्ड जॉब वीजा पर आते हैं। इससे इन समूहों में उच्च शिक्षित व्यक्तियों का अनुपात बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए हिंदुओं में 77 प्रतिशत विदेश में जन्मे हैं।

    रिसर्च के नतीजे क्या कह रहे
    यह पैटर्न दिखाता है कि अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियां कुशल और शिक्षित प्रवासियों को आकर्षित करती हैं, जिससे छोटे धार्मिक समूहों में शिक्षा का स्तर ऊंचा रहता है। कुल मिलाकर यह अध्ययन US में धार्मिक विविधता और शिक्षा के बीच संबंध को उजागर करता है। हिंदू और यहूदी जैसे समूह सबसे आगे हैं, जबकि मुसलमान और अन्य अल्पसंख्यक भी औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह निष्कर्ष अमेरिकी समाज में अल्पसंख्यक समुदायों की सफलता और योगदान को सामने रखता है। साथ ही, इमिग्रेशन के सकारात्मक प्रभाव को भी दर्शाता है।

  • Odisha में भीषण सड़क हादसा… बेकाबू ट्रेलर ने पुलिस की बोलेरो को टक्कर, 5 जवानों की मौत, 3 घायल

    Odisha में भीषण सड़क हादसा… बेकाबू ट्रेलर ने पुलिस की बोलेरो को टक्कर, 5 जवानों की मौत, 3 घायल


    झारसुगुड़ा।
    ओडिशा (Odisha) के झारसुगुड़ा जिले (Jharsuguda district) में रविवार तड़के एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। एक तेज रफ्तार ट्रेलर (High Speed Trailer) ने पुलिस की बोलेरो गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे पांच पुलिस कर्मियों (Five Police Personnel) की मौके पर ही मौत हो गई। तीन अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हैं। यह दुर्घटना इतनी भीषण थी कि पुलिस वाहन के परखच्चे उड़ गए। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना झारसुगुड़ा सदर पुलिस स्टेशन के पास सुबह के समय हुई।

    पुलिस की बोलेरो ड्यूटी पर थी, तभी विपरीत दिशा से आ रहे एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार ट्रेलर ने उसे सामने से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बोलेरो पूरी तरह पिचक गई, जिससे उसमें सवार पांच कर्मियों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले जवानों की पहचान कर ली गई है। पुलिस विभाग ने मृतकों के नाम साझा करते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में ड्रिल सब-इंस्पेक्टर निरंजन कुजूर, एपीआर कर्मी काशीराम भोई, एपीआर कर्मी देबदत्त सा, एपीआर हवलदार लिंगराज धुरुआ और होमगार्ड भक्तबंधु मिर्धा का निधन हुआ है।

    दुर्घटना में घायल हुए तीन अन्य कर्मियों में आर्म्ड पुलिस रिजर्व (APR) के दो सदस्य और एक सार्जेंट शामिल हैं। स्थानीय पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उन्हें बाहर निकाला और तुरंत झारसुगुड़ा जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के अनुसार, तीनों की हालत काफी नाजुक बनी हुई है और उन्हें विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में रखा गया है। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने आरोपी ट्रेलर चालक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह हादसा चालक की लापरवाही, नींद आने या किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ।

    ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए जिले भर में लोग एकत्र हो रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।

  • MP: जबलपुर में रेलवे क्रॉसिंग ब्रिज का हिस्सा गिरा… NH-15 पर करोड़ों की लागत से 5 साल पहले ही बना था पुल

    MP: जबलपुर में रेलवे क्रॉसिंग ब्रिज का हिस्सा गिरा… NH-15 पर करोड़ों की लागत से 5 साल पहले ही बना था पुल


    जबलपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर (Jabalpur) में रविवार शाम नेशनल हाइवे (National Highway) नंबर-45 का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हाइवे का ये क्षतिग्रस्त हिस्सा शहपुरा के पास रेलवे क्रॉसिंग (Railway crossing) के ऊपर बने ब्रिज का है। सड़क धंसने के बाद प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर मार्ग को बंद कर दिया है।

    मौके पर पहुंची पुलिस ने बैरेकेडिंग कर दी है और ताकि कोई भी वाहन ब्रिज के इस हिस्से तक न पहुंच सके। मौके पर पुलिसबल भी मौजूद है और स्थिति को संभालने में जुटा है और ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था को भी संभाल जा रहा है। आपको बता दें कि इस ब्रिज पर हैवी ट्रैफिक रहता है और नीचे से ट्रेनें गुजरती हैं। इस ब्रिज पर आने और जाने के दो रास्ते हैं।

    एक हिस्सा दिसंबर में भी क्षतिग्रस्त हुआ था
    बताया जा रहा है कि ब्रिज का एक हिस्सा दिसंबर में भी क्षतिग्रस्त हुआ था जिसके चलते एक ही लेन से वाहनों का आवागमन हो रहा था। मगर अब मरम्मत के बीच ही ब्रिज का एक और हिस्सा टूट चुका है। टेक्नीकल टीम मौके ने पहुंचकर ब्रिज के धंसे हुए हिस्से का मुआयना किया है। अधिकारियों ने कहा कि निर्माण पूरा होने तक आवागमन पर असर जारी रहेगा।


    ट्रैफिक वैकल्पिक रूट पर शिफ्ट

    जबलपुर-भोपाल मार्ग पर वाहनों का आवागमन प्रभावित होने के चलते ट्रैफिक को शहपुरा बस्ती मार्ग की ओर डायवर्ट किया गया है। इस वैकल्पिक रूट पर सिर्फ हल्के वाहनों को जाने की अनुमति दी गई है जबकि भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है। बहरहाल ब्रिज के दो हिस्सों के बीते कुछ दिनों में ही टूटने पर गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


    अभी गारंटी पीरियड में है ब्रिज

    इस ब्रिज का निर्माण कार्य 2015 में शुरू हुआ था और 2020 में इस पूरा कर लिया गया था। बताया जा रहा है कि ये ब्रिज अभी गारंटी पीरियड में है। ब्रिज का निर्माण मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) की देखरेख में हुआ था। इसके निर्माण में करीब 628.45 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

  • MP: CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा… विश्वविद्यालयों में शुरू किया जाएगा मंदिर प्रवंधन का कोर्स

    MP: CM मोहन यादव की बड़ी घोषणा… विश्वविद्यालयों में शुरू किया जाएगा मंदिर प्रवंधन का कोर्स


    भोपाल।
    एमपी (MP) के सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने घोषणा की है कि अब राज्य के विश्वविद्यालयों (Universities) में मंदिर प्रबंधन (Temple Management) को एक सब्जेक्ट के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसका मकसद धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इन पाठ्यक्रमों में मंदिरों की सुरक्षा, वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय (Vikram University) ने डिप्लोमा और पीजी कोर्स शुरू भी कर दिए हैं।


    अकादमिक पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को घोषणा की कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य के विश्वविद्यालयों में मंदिर प्रबंधन को एक विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। इंदौर में संवाददाताओं से बात करते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा कि उन्होंने मंदिर प्रबंधन को यूनिवर्सिटी की पढ़ाई से जोड़ने और इस विषय पर अकादमिक पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है।


    मंदिरों की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा की पढ़ाई

    सीएम मोहन यादव ने बताया कि इन पाठ्यक्रमों में धार्मिक पर्यटन के साथ ही मंदिरों की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा की पढ़ाई कराई जाएगी। उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने इस दिशा में पहल करते हुए मंदिर प्रबंधन विषय पर डिप्लोमा और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इनके जरिए विद्यार्थियों को विद्वानों द्वारा सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।


    13 तीर्थस्थलों पर बनाए जा रहे धार्मिक गलियारे

    मोहन यादव ने कहा कि मंदिर हमेशा से हमारी आस्था और विश्वास के केंद्र रहे हैं। हम मंदिरों के सही प्रबंधन से अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उज्जैन के महाकाल महालोक की तरह राज्य के 13 तीर्थस्थलों पर धार्मिक गलियारे बनाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने महाकाल महालोक परिसर से फाइबर की मूर्तियां हटाकर वहां पत्थर और धातु की प्रतिमाएं लगाने का फैसला किया है।


    उज्जैन में बनाई जा रही प्रतिमाएं

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि देश की प्राचीन स्थापत्य कला पर आधारित ये प्रतिमाएं उज्जैन में ही गढ़ी जा रही हैं। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को एक अन्य कार्यक्रम में कहा कि मध्य प्रदेश दिव्यांग खेलों का प्रमुख केंद्र बन रहा है और यहां के खिलाड़ी दुनिया भर में नाम रोशन कर रहे हैं। सीएम भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।

  • टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोने-चांदी के दामों में जबरदस्त उछाल….

    टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोने-चांदी के दामों में जबरदस्त उछाल….


    नई दिल्ली।
    सोने और चांदी के भाव (Gold-Silver Rate) में आज सोमवार को जबरदस्त उछाल (Tremendous Surge) देखने को मिला। सोने की कीमतों में 1.61% और चांदी की कीमतों में 5% तक की तेजी दर्ज की गई। यह तेजी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) के एक फैसले के बाद आई है, जिसमें अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को खारिज कर दिया। निवेशक अब इसके बाद अमेरिका की ओर से संभावित नए कदमों का आकलन कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में आज स्पॉट गोल्ड की कीमत 1.61% बढ़कर 5,160 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 5% उछलकर 86 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।


    क्यों बढ़ रहे हैं सोना-चांदी के दाम?

    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर पर “पारस्परिक” टैरिफ लगाने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का उल्लंघन किया था। इस फैसले के साथ ही ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में लगाए गए कई महत्वपूर्ण टैरिफ अब समाप्त हो गए हैं।

    इस फैसले के जवाब में ट्रंप ने कहा है कि रद्द किए गए टैरिफ को बदलने के लिए वैकल्पिक तंत्र लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह मौजूदा शुल्कों के अलावा, कानून की धारा 122 के तहत 10% का वैश्विक टैरिफ लागू करेंगे। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य मामलों से जुड़े मौजूदा टैरिफ पूरी तरह से लागू रहेंगे।

    वहीं, जियो-पॉलिटिकल मोर्चे पर भी तनाव बना हुआ है। अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। ट्रंप ने ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर चेतावनी दी है, जिससे क्षेत्र में टकराव की आशंका और बढ़ गई है। ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले से वहां पहले से मौजूद आंतरिक अस्थिरता और गहरी हो सकती है और यह अमेरिका के लिए एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।


    क्या सोना-चांडी के भाव में और तेजी आ सकती है?

    जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी के अनुसार, हालांकि मजबूत डॉलर और बदलती ब्याज दर की उम्मीदें कीमतों में तेज उछाल को फिलहाल रोक सकती हैं, लेकिन लगातार बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर ले जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    हरीश ने कहा, “निवेशक आमतौर पर भू-राजनीतिक संकटों के दौरान सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं, क्योंकि ये धातुएं मूल्य संरक्षण करती हैं, बाजार में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करती हैं और मुद्राओं व वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता के समय एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में काम करती हैं।”


    नई ऊंचाई छूने की संभावना

    एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने सोने की कीमतों के तकनीकी परिदृश्य पर कहा कि कीमतों में हालिया गिरावट मुनाफावसूली का हिस्सा है और व्यापक रुझान तेजी वाला ही बना हुआ है। उन्होंने कहा कि 4,500-4,700 डॉलर के बीच मजबूत खरीदारी देखी जा रही है और अगर कीमतें 5,100-5,200 डॉलर के स्तर को पार कर जाती हैं, तो नई ऊंचाई छूने की संभावना बन सकती है।

    वहीं, चांदी के भाव पर पोनमुडी ने कहा कि हालिया गिरावट के बावजूद, बड़े समय के फ्रेम में तेजी वाली संरचना बरकरार है। 65-70 डॉलर के बीच मजबूत खरीदारी का समर्थन स्तर है। अगर यह आधार बना रहता है और कीमतें 85-92 डॉलर के स्तर को पार करके वापसी करती हैं, तो तेजी का रुख फिर से मजबूत हो सकता है। मिड टू लॉन्ग टर्म नजरिए से चांदी के लिए संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।

  • ISI ने रची थी दिल्ली में होली पर बड़े हमले की साजिश… पकड़े गए आतंकियों की जांच में हुए चौकाने वाले खुलासे

    ISI ने रची थी दिल्ली में होली पर बड़े हमले की साजिश… पकड़े गए आतंकियों की जांच में हुए चौकाने वाले खुलासे


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के संदिग्ध मॉड्यूल की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (Pakistan’s Intelligence Agency ISI) की साजिश के तहत बांग्लादेशी मूल के युवकों का नेटवर्क तैयार किया गया। इस नेटवर्क का संचालन बांग्लादेश में बैठा लश्कर का एक कमांडर कर रहा था, जिसने वहीं बैठक कर हमलों की पूरी रूपरेखा बनाई।

    जांच में सामने आया है कि मॉड्यूल के निशाने पर देश के बड़े मेट्रो शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई थे। सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों की रेकी भी कर ली गई थी और होली के मौके पर हमले की तैयारी थी। खुफिया इनपुट के बाद स्पेशल सेल ने कार्रवाई तेज की और मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया।


    हाफिज सईद और लखवी से सीधा संपर्क

    जांच से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि बांग्लादेशी हैंडलर शब्बीर अहमद लोन सीधे लश्कर प्रमुख हाफिज सईद और आतंकी सरगना जैकी उर रहमान लखवी के संपर्क में था।पुलिस का कहना है कि आईएसआई भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के जरिए लोकल मॉड्यूल खड़ा कर रही थी। इसके लिए फंडिंग भी की जा रही थी, ताकि बड़े शहरों में समन्वित हमले किए जा सकें। शब्बीर इस नेटवर्क में आईएसआई और बांग्लादेशी मूल के आतंकी सैदुल इस्लाम के बीच कड़ी का काम कर रहा था। सैदुल संदिग्धों को निर्देश देता था और उन्हें टारगेट तय करने में मदद करता था।


    2007 में पकड़ा गया, 2018 में फिर सक्रिय

    स्पेशल सेल के अनुसार शब्बीर अहमद लोन 2007 में आत्मघाती हमले की साजिश में एके-47 और हैंड ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया था। सजा पूरी करने के बाद 2018 में जेल से बाहर आया और दोबारा लश्कर से जुड़ गया। उसने अपना बेस बांग्लादेश में बनाया, जबकि कनेक्शन पाकिस्तान से बनाए रखे।

    अधिकारियों का कहना है कि जेल से रिहाई के बाद उसने पुराने नेटवर्क को फिर सक्रिय किया और सोशल मीडिया के जरिए युवकों को जोड़ना शुरू किया। जांच एजेंसियों को उसके डिजिटल ट्रेल से कई अहम सुराग मिले हैं।


    सोशल मीडिया से जोड़ा गया मॉड्यूल

    पुलिस के मुताबिक पकड़े गए संदिग्धों को पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में लाया गया। इसके बाद उन्हें बांग्लादेश बुलाकर बैठक की गई। कोलकाता से पकड़े गए उमर फारूक को संवेदनशील स्थानों की रेकी का जिम्मा दिया गया था। संदिग्धों को किराए पर अपार्टमेंट लेने और सुरक्षित ठिकाने बनाने के निर्देश भी दिए गए। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में हथियार जुटाने की कोशिशों से जुड़े वीडियो और चैट सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है।


    ऑपरेशन जारी, कई राज्यों में छापे

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का ऑपरेशन अभी जारी है। कुछ संदिग्धों के फरार होने की आशंका में कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है। सभी आरोपियों को दिल्ली लाकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि समय रहते साजिश नाकाम कर दी गई, लेकिन नेटवर्क के बाकी सिरों तक पहुंचना अभी बाकी है।

    सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और देश के बड़े शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मॉड्यूल लंबी योजना का हिस्सा था। अगर समय पर कार्रवाई नहीं होती तो होली के मौके पर बड़ा नुकसान हो सकता था।


    विवादित पोस्टर से खुला मॉड्यूल का राज

    स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े आठ संदिग्धों में से चार दिल्ली में ‘फ्री कश्मीर’ जैसे विवादित पोस्टर लगाकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल लौट गए थे। जांच यहीं से आगे बढ़ी और नेटवर्क का सिरा हाथ लगा। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टरबाजी महज ट्रायल रन थी, असली मकसद बड़े हमले की तैयारी था। खुफिया एजेंसियों ने पहले अलर्ट जारी किया था कि आईएसआई समर्थित लश्कर लोकल मॉड्यूल तैयार कर रहा है। एक अन्य इनपुट में लाल किले के आसपास हमले की आशंका जताई गई थी। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है।

  • टैरिफ पर ट्रंप को SC के बड़े झटके के बाद अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील…. अब नए सिरे से होगी चर्चा

    टैरिफ पर ट्रंप को SC के बड़े झटके के बाद अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील…. अब नए सिरे से होगी चर्चा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से टैरिफ (Tariff) को लेकर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को करारा झटका लगने के बाद भारत (India) के साथ व्यापार समझौते (Trade Agreements) को अंतिम रूप देने के लिए प्रस्तावित बैठक को भी नए सिरे से तय करने का फैसला किया गया है। भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते के प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए वाशिंगटन में अपने मुख्य वार्ताकारों की प्रस्तावित बैठक को नए सिरे से तय करने का फैसला किया है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।


    फिर से तय की जाएगी तारीख

    भारतीय दल 23 फरवरी से तीन दिन की बैठक शुरू करने वाला था। वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव दर्पण जैन इस समझौते के लिए भारत के लिए मुख्य वार्ताकार हैं। एक सूत्र ने कहा, ”भारत-अमेरिका व्यापार करार के लिए भारतीय वार्ताकारों की अमेरिका यात्रा के संदर्भ में दोनों पक्षों का मानना है कि अब यह बैठक तब होनी चाहिए जबकि दोनों पक्ष ताजा घटनाक्रमों और उसके प्रभाव का आकलन कर लें। इसके लिए दोनों पक्षों को समय चाहिए। अब इस बैठक की तारीख दोनों पक्षों की सुविधा के हिसाब से नए सिरे से तय की जाएगी।’

    डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के पहले के बड़े शुल्क के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण हो जाता है। ट्रंप ने शुक्रवार को भारत समेत सभी देशों पर 24 फरवरी से 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लगाया था। हालांकि, शनिवार को उन्होंने शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की।

    ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उनके आर्थिक एजेंडा को एक बड़ा झटका देते हुए अमेरिकी शीर्ष अदालत ने उनके द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों पर लगाए गए शुल्कों को गैरकानूनी करार दिया है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक अधिकार कानून (आईईईपीए) का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया है। अमेरिका ने अगस्त, 2025 में भारत पर 25 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाया था। बाद में, रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया। इससे भारत पर कुल शुल्क दर 50 प्रतिशत हो गई थी।


    15 फीसदी किया टैरिफ

    भारत और अमेरिका इस महीने की शुरुआत में एक अंतरिम व्यापार करार को अंतिम रूप देने के लिए रूपरेखा पर सहमत हुए। इसके तहत अमेरिका शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। साथ ही रूस से तेल खरीद के लिए लगाए गए 25 प्रतिशत के अतिरिक्त शुल्क को भी हटाएगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने फिर से इन शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का ऐलान किया है। अगर यह शुल्क अधिसूचित होता है, तो यह अमेरिका में मौजूदा एमएफएन या आयात शुल्क के अलावा होगा।

    उदाहरण के लिए, अगर किसी उत्पाद पर पांच प्रतिशत एमएफएन शुल्क लगता है, तो 15 प्रतिशत और जोड़कर यह 20 प्रतिशत हो जाएगा। हालांकि, इस बारे में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है कि 150 दिन के समय के बाद भारत जैसे देशों पर अमेरिकी शुल्क क्या होगा। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत और आयात में 6.22 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2024-25 में, दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर था।

  • राजस्थानः पूर्व MP ने मुस्लिम महिला को नाम पूछने के बाद कंबल देने से किया इनकार…. कही ये बात

    राजस्थानः पूर्व MP ने मुस्लिम महिला को नाम पूछने के बाद कंबल देने से किया इनकार…. कही ये बात


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) के टोंक-सवाई माधोपुर के पूर्व भाजपा सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया (Former BJP MP Sukhbir Singh Jaunapuria) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में जौनापुरिया एक कंबल वितरण कार्यक्रम (Blanket Distribution Program) में नजर आ रहे हैं। इसमें वह एक महिला से उसका नाम पूछते हैं। वह मुस्लिम महिला जब अपना नाम बताती है तो सुखबीर सिंह जौनापुरिया उसे कंबल नहीं देने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं। वह कह रहे हैं कि जो मोदी को गाली देता है उसे कंबल लेने का हक नहीं है।


    कंबल वितरण कार्यक्रम में पहुंची थीं महिलाएं

    एक रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को निवाई क्षेत्र के करेड़ा बुजुर्ग गांव के सीताराम जी मंदिर में कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें आसपास के गांवों से महिलाएं बड़ी संख्या में पहुंची थीं। मौके पर बैठी महिलाओं को पूर्व भाजपा सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया की ओर से कंबल बांटा जा रहा था। सभी महिलाएं कंबल पाने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रही थीं। इसी दौरान एक हैरान करने वाला वाकया होता है।


    पूछा नाम, बोले- जो मोदी को गाली देता है, उसे नहीं

    इसी दौरान पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया एक महिला से कहते हैं क्या नाम है तेरा.. महिला अपना नाम सकुरान खान बताती है। इस पर जौनापुरिया कहते हैं तुम एक तरफ हट जाओ। वायरल वीडियो में वह कहते नजर आ रहे हैं कि जो मोदी को गाली देता है, उसे कंबल लेने का हक नहीं है। बताया जाता है कि इसके बाद मौके पर पहुंची अन्य महिलाओं को भी कंबल नहीं दिया जाता है। यही नहीं मुस्लिम महिलाओं को दिए कंबल वापस ले लिए जाते हैं।


    बताया निजी कार्यक्रम

    इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस पर लोगों तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देते नजर आ रहे हैं। बताया जाता है कि मौके पर कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई तो जौनापुरिया ने इसे निजी कार्यक्रम बताकर उन्हें शांत करा दिया। वीडियो में वह कहते दिख रहे हैं कि कंबल बांटना उनका खुद का कार्यक्रम है। वहीं मुस्लिम महिलाओं का कहना था कि इस व्यवहार से वे अपमानित महसूस कर रही हैं।