Author: bharati

  • छोटे बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें, समझिए बेबी प्रूफिंग का महत्व और जरूरी टिप्स

    छोटे बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें, समझिए बेबी प्रूफिंग का महत्व और जरूरी टिप्स

    नई दिल्ली । हर माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चे की सुरक्षा होती है। छोटे बच्चे स्वभाव से बेहद जिज्ञासु होते हैं और अपने आसपास की हर चीज को छूने, समझने और कभी-कभी मुंह में डालने की कोशिश करते हैं। यही जिज्ञासा उनके विकास का हिस्सा होती है, लेकिन इसी कारण वे कई बार अनजाने में चोट या दुर्घटना का शिकार भी हो सकते हैं। ऐसे में घर को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी हो जाता है, जिसे ‘बेबी प्रूफिंग’ कहा जाता है।

    बेबी प्रूफिंग का मतलब है घर के वातावरण में ऐसे बदलाव करना जिससे बच्चे को किसी भी तरह की चोट, जलन, गिरने, डूबने या जहरीले पदार्थों के संपर्क में आने का खतरा कम हो जाए। इसका उद्देश्य बच्चे की जिज्ञासा को रोकना नहीं बल्कि उसे एक सुरक्षित माहौल देना होता है, जहां वह स्वतंत्र रूप से सीख और खेल सके। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, घर में संभावित खतरे भी बदलते रहते हैं, इसलिए समय-समय पर सुरक्षा उपायों की समीक्षा करना जरूरी है।

    छोटे बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा जलने या झुलसने से जुड़ा होता है। गर्म पेय पदार्थ, स्टोव और गर्म पानी से उन्हें दूर रखना चाहिए। रसोई में बर्तनों के हैंडल अंदर की तरफ रखने और गर्म चीजों को किनारे से हटाकर रखने की सलाह दी जाती है। नहाने के पानी का तापमान भी सावधानी से जांचना चाहिए ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे। इसके साथ ही माचिस, लाइटर और अन्य ज्वलनशील चीजों को बच्चों की पहुंच से दूर रखना जरूरी है।

    दूसरा बड़ा खतरा दम घुटने या गला अटकने का होता है। छोटे बच्चे अक्सर छोटी चीजों को मुंह में डाल लेते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटना हो सकती है। इसलिए छोटे खिलौने, सिक्के, बैटरी और कुछ खाद्य पदार्थों को बच्चों से दूर रखना चाहिए। बच्चों के सोने की जगह को भी सुरक्षित बनाना जरूरी है, जहां ढीले तकिए या भारी कंबल न हों।

    डूबने का खतरा भी बेहद गंभीर माना जाता है क्योंकि बच्चे बहुत कम पानी में भी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। नहाने के दौरान बच्चों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और घर में पानी से भरे बर्तन तुरंत खाली कर देने चाहिए। इसी तरह गिरने से बचाव के लिए सीढ़ियों, खिड़कियों और ऊंची जगहों पर सुरक्षा उपाय अपनाना आवश्यक होता है।

    जहरीले पदार्थों और रसायनों से सुरक्षा भी बेबी प्रूफिंग का अहम हिस्सा है। दवाइयों, डिटर्जेंट और अन्य केमिकल्स को हमेशा बंद अलमारी में रखना चाहिए ताकि बच्चे उनकी पहुंच से दूर रहें। इसके अलावा घर के फर्नीचर के नुकीले किनारों को ढकना और बिजली के सॉकेट को सुरक्षित करना भी जरूरी होता है।

    कुल मिलाकर बेबी प्रूफिंग सिर्फ एक सावधानी नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है, जो बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए अपनाई जाती है। थोड़ी सी जागरूकता और तैयारी से माता-पिता अपने घर को बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित बना सकते हैं और उन्हें बिना डर के सीखने और बढ़ने का अवसर दे सकते हैं।

  • भोजशाला फैसले पर सियासी बयानबाज़ी तेज, ‘न्यायपालिका के जरिए सनातनियों की जीत’ पर गरमाई बहस

    भोजशाला फैसले पर सियासी बयानबाज़ी तेज, ‘न्यायपालिका के जरिए सनातनियों की जीत’ पर गरमाई बहस

    मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर दिए गए फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। अदालत के इस निर्णय के बाद विभिन्न पक्षों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

    फैसले के बाद कुछ जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने इसे सत्य की विजय बताया और कहा कि लंबे समय से चल रहे विवाद पर अब स्थिति स्पष्ट हुई है। उनके अनुसार, यह निर्णय आस्था और परंपरा से जुड़े मुद्दे पर न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि वर्षों से जिस स्थान को लेकर विवाद था, अब उस पर न्यायिक दृष्टिकोण से स्पष्टता आ गई है, जिससे स्थानीय लोगों में संतोष का माहौल देखा जा रहा है।

    इसी क्रम में कुछ जनप्रतिनिधियों ने बयान दिया कि यह निर्णय समाज में आस्था से जुड़े विषयों पर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता को समाप्त करता है। उनके अनुसार, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों को लेकर जो विवाद थे, वे अब न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से एक दिशा में आगे बढ़े हैं। उन्होंने इसे सामाजिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया।

    वहीं याचिकाकर्ताओं और पक्षकारों ने भी फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे उनके लंबे संघर्ष को न्याय मिला है। उन्होंने यह दावा किया कि भोजशाला का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बहुत पुराना है और इससे जुड़े कई साक्ष्य पहले से मौजूद हैं। उनके अनुसार, अब इस स्थल के संरक्षण और पुनर्स्थापना को लेकर आगे की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाएगा।

    कुछ याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर इस स्थान की वास्तविक पहचान को लेकर उनकी ओर से अदालत में दलीलें पेश की गई थीं। अब फैसले के बाद वे आगे की योजना पर काम करेंगे, जिसमें धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं से जुड़े पहलुओं को पुनर्स्थापित करने की बात कही गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में चर्चा और बहस का माहौल बना हुआ है। अलग-अलग पक्ष अपने-अपने नजरिए से इस निर्णय की व्याख्या कर रहे हैं। जहां एक ओर इसे न्यायिक प्रक्रिया की जीत बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

  • सूर्यकुमार यादव बने पिता: बेबी शावर में पत्नी देविशा का ट्रेडिशनल और रॉयल लुक वायरल

    सूर्यकुमार यादव बने पिता: बेबी शावर में पत्नी देविशा का ट्रेडिशनल और रॉयल लुक वायरल



    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव के घर 7 मई 2026 को खुशियों ने दस्तक दी, जब उनकी पत्नी देविशा शेट्टी ने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम रिद्धिमा रखा गया है। बेटी के जन्म के बाद परिवार में जश्न का माहौल देखने को मिला और इस खास मौके पर बेबी शावर की खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

    बेबी शावर में दिखा प्यार और साथ का खूबसूरत अंदाज
    बेबी शावर फंक्शन में सूर्यकुमार यादव और देविशा का प्यार भरा अंदाज फैंस को खूब पसंद आ रहा है।
    तस्वीरों में सूर्यकुमार अपनी पत्नी पर प्यार लुटाते दिखे। कभी उनके बालों में गजरा लगाते नजर आए तो कभी उन्हें प्यार से खाना खिलाते हुए दिखाई दिए।

    वहीं देविशा अपने मॉम टू बी ग्लो और पारंपरिक साड़ी लुक में बेहद खूबसूरत नजर आईं।

    देविशा का ट्रेडिशनल साड़ी लुक बना आकर्षण
    देविशा ने इस खास मौके पर गोल्डन और ऑरेंज टोन की कांजीवरम साड़ी पहनी, जो साउथ इंडियन रॉयल लुक दे रही थी।

    साड़ी में गोल्डन जरी वर्क और ग्रीन बॉर्डर

    नीट ड्रेपिंग के साथ बेबी बंप फ्लॉन्ट

    ऑरेंज हैवी एम्ब्रॉयडरी ब्लाउज

    उनका पूरा लुक बेहद ग्रेसफुल और एलिगेंट नजर आया।

    ज्वेलरी और मेकअप ने बढ़ाया ग्लैमर
    देविशा ने अपने लुक को पारंपरिक साउथ इंडियन टच दिया:

    लेयर्ड नेकलेस और ग्रीन स्टोन चोकर

    झुमके, मांग टीका और कमरबंध

    मेहंदी लगे हाथ और सॉफ्ट वेवी हेयरस्टाइल

    बालों में लगा गजरा, जिसे सूर्यकुमार ने खुद सजाया

    मेकअप को उन्होंने सॉफ्ट और नेचुरल रखा, जिससे उनका प्रेग्नेंसी ग्लो और भी उभरकर सामने आया।

    सूर्यकुमार यादव का सिंपल लेकिन स्टाइलिश लुक
    सूर्यकुमार यादव ने इस मौके पर ऑफ-व्हाइट एथनिक लुक चुना।
    उन्होंने टेक्सचर्ड बंदगला जैकेट को मैचिंग कुर्ता और पैंट के साथ पेयर किया, जो देविशा के हैवी ट्रेडिशनल लुक के साथ शानदार कॉन्ट्रास्ट बना रहा था।

    कपल गोल्स बने सूर्यकुमार और देविशा
    दोनों का यह बेबी शावर लुक सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है।
    जहां एक तरफ देविशा का रॉयल ट्रेडिशनल अंदाज नजर आया, वहीं सूर्यकुमार का सिंपल और एलीगेंट लुक उन्हें परफेक्ट कपल बनाता दिखा। सूर्यकुमार यादव और देविशा की यह खास झलक सिर्फ एक फैमिली मोमेंट नहीं, बल्कि प्यार, साथ और नए जीवन की शुरुआत का खूबसूरत उत्सव है, जिसने फैंस का दिल जीत लिया है।

  • IPO मार्केट में हलचल, SEBI की मंजूरी के बाद 3 कंपनियां लाएंगी पब्लिक ऑफर, निवेशकों की नजर

    IPO मार्केट में हलचल, SEBI की मंजूरी के बाद 3 कंपनियां लाएंगी पब्लिक ऑफर, निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली । बाजार नियामक SEBI ने तीन कंपनियों को अपने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी IPO लाने की मंजूरी दे दी है, जिससे प्राथमिक बाजार में नई हलचल देखने को मिल रही है। ये कंपनियां Neolite ZKW Lightings, SS Retail और Aspri Spirits हैं, जो मिलकर बाजार से 1,200 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की योजना पर काम कर रही हैं। इन सभी कंपनियों ने पिछले साल अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जमा किए थे, जिन पर अब SEBI की ओर से अंतिम स्वीकृति मिल चुकी है।

    इन तीनों कंपनियों के IPO आने से निवेशकों के लिए नए अवसर खुलेंगे और विभिन्न सेक्टर्स में भागीदारी का मौका मिलेगा। ये कंपनियां स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होने के बाद अपनी बाजार मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन IPOs के जरिए जुटाई जाने वाली राशि का उपयोग विस्तार योजनाओं, कर्ज चुकाने और कारोबारी जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा।

    Neolite ZKW Lightings, जो ऑटोमोबाइल लाइटिंग सेक्टर में काम करती है, इस IPO के जरिए करीब 600 करोड़ रुपये जुटाने की योजना में है। कंपनी का एक हिस्सा नए शेयर जारी कर पूंजी जुटाएगा, जबकि मौजूदा निवेशक ऑफर फॉर सेल के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। कंपनी इस फंड का इस्तेमाल उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए प्लांट स्थापित करने में करेगी।

    वहीं SS Retail, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल रिटेल सेक्टर में काम करती है, करीब 500 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। कंपनी इस पूंजी का उपयोग नए स्टोर्स खोलने और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए करेगी। इसका कारोबार कई राज्यों के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिससे इसकी ग्रोथ की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं।

    तीसरी कंपनी Aspri Spirits अल्कोहल और पेय पदार्थों के डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में सक्रिय है और इस लिस्ट में सबसे प्रमुख नामों में शामिल है। कंपनी अपने बड़े ब्रांड पोर्टफोलियो के साथ बाजार में मजबूत स्थिति रखती है। IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी कर्ज चुकाने और विस्तार योजनाओं में करने की योजना बना रही है।

    कुल मिलाकर, SEBI की इस मंजूरी के बाद IPO बाजार में नई गतिविधियां तेज हो गई हैं। निवेशकों के लिए यह आने वाले दिनों में नए निवेश विकल्पों का संकेत माना जा रहा है, जबकि कंपनियों के लिए यह अपने कारोबार को विस्तार देने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।

  • झटपट बनाएं Instant आम का अचार: फीकी दाल-रोटी को दें चटपटा ट्विस्ट, मिनटों में तैयार स्वादिष्ट रेसिपी

    झटपट बनाएं Instant आम का अचार: फीकी दाल-रोटी को दें चटपटा ट्विस्ट, मिनटों में तैयार स्वादिष्ट रेसिपी


    नई दिल्ली । गर्मियों के मौसम में आम का अचार हर भारतीय रसोई की खास पहचान होता है। यह सिर्फ एक साइड डिश नहीं बल्कि खाने के स्वाद को पूरी तरह बदल देने वाला स्वादिष्ट व्यंजन है। आमतौर पर पारंपरिक तरीके से अचार बनाने में कई दिन या हफ्तों का समय लगता है, जिसमें धूप में सुखाना और मसालों को अच्छे से पकने देना शामिल होता है। लेकिन आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हर कोई जल्दी और आसान विकल्प चाहता है, इसलिए इंस्टेंट आम का अचार एक बेहतरीन समाधान बनकर सामने आता है।

    इस झटपट रेसिपी की खास बात यह है कि इसमें न तो लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है और न ही किसी खास मौसम या धूप की जरूरत होती है। कुछ ही सरल स्टेप्स में आप घर पर ही बाजार जैसा चटपटा और तीखा आम का अचार तैयार कर सकते हैं, जिसे तुरंत खाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

    इस रेसिपी के लिए सबसे पहले कच्चे आमों को अच्छी तरह धोकर सुखाया जाता है ताकि उनमें बिल्कुल भी नमी न रहे। फिर इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। इसके बाद मसालों का स्वाद तैयार किया जाता है, जिसमें सौंफ और मेथी दाने को हल्का भूनकर दरदरा पीसा जाता है ताकि उनका असली फ्लेवर निकल सके।

    इसके बाद सरसों के तेल को अच्छी तरह गर्म किया जाता है, जब तक उसमें हल्का धुआं न निकलने लगे। तेल को थोड़ा ठंडा करने के बाद उसमें हींग, कलौंजी, हल्दी, लाल मिर्च और तैयार मसाला डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है। यह मिश्रण अचार को उसका खास स्वाद और सुगंध देता है।

    अब इस मसालेदार तेल में कटे हुए आम के टुकड़े और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। सभी चीजों को अच्छे से मिक्स किया जाता है ताकि हर आम के टुकड़े पर मसाले की परत चढ़ जाए। इस स्टेप के बाद अचार तुरंत खाने के लिए तैयार हो जाता है।

    अगर आप खट्टे-मीठे स्वाद पसंद करते हैं तो इसमें थोड़ी मात्रा में गुड़ भी मिलाया जा सकता है, जिससे इसका स्वाद और भी अलग और आकर्षक बन जाता है। यह इंस्टेंट अचार न सिर्फ समय बचाता है बल्कि खाने के स्वाद को भी दोगुना कर देता है।

    कुल मिलाकर यह रेसिपी उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो बिना लंबा इंतजार किए घर पर ही ताजा और स्वादिष्ट आम का अचार बनाना चाहते हैं। थोड़ी सी मेहनत और सही मसालों के साथ आप किसी भी साधारण भोजन को खास बना सकते हैं।

  • चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    नई दिल्ली । भारत में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच एक और महत्वाकांक्षी परियोजना सुर्खियों में है, जो देश के दक्षिण और मध्य हिस्सों की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से विकसित किया जा रहा बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर हाईस्पीड एक्सप्रेसवे एक ऐसा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जो न केवल यात्रा को तेज बनाएगा बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा।

    यह लगभग 1100 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे चार प्रमुख राज्यों से होकर गुजरेगा, जिनमें कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं। इस मार्ग में आने वाले प्रमुख शहरों में नागपुर, हिंगनघाट, आदिलाबाद, निजामाबाद, हैदराबाद, कुरनूल, अनंतपुर और चिक्काबल्लापुर जैसे महत्वपूर्ण केंद्र शामिल हैं। यह कॉरिडोर इन क्षेत्रों को सीधे एक हाईस्पीड नेटवर्क से जोड़ देगा, जिससे व्यापार और आवागमन दोनों में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।

    वर्तमान समय में महाराष्ट्र के नागपुर से कर्नाटक के बेंगलुरु तक की यात्रा में लगभग 23 से 24 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद यही सफर घटकर लगभग 11 से 12 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इसे 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित और तेज हो जाएगी।

    इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 35 हजार करोड़ रुपये है। शुरुआत में इसे 6-लेन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे भविष्य में बढ़ते यातायात को देखते हुए 8 या 12 लेन तक विस्तारित करने की योजना भी शामिल है। यह एक एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा, जिसमें प्रवेश और निकास के लिए सीमित स्थान निर्धारित किए जाएंगे, जिससे ट्रैफिक फ्लो सुचारू और नियंत्रित रहेगा।

    इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता इसके आसपास विकसित होने वाली औद्योगिक संरचना है। इसके किनारे विशेष आर्थिक क्षेत्र और औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रियल एस्टेट तथा व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

    हाल ही की प्रगति के अनुसार, परियोजना के कई हिस्सों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर काम तेजी से चल रहा है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि पर्यावरणीय मंजूरियों के कारण कुछ चरणों में देरी देखने को मिली, लेकिन अब परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    यह हाईस्पीड एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि एक व्यापक विकास मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और आर्थिक ढांचे को एक नई गति प्रदान करेगा।

  • काजू कतली की रोचक कहानी: 400 साल पुरानी इस मिठाई की शुरुआत कैसे हुई और कैसे बनी भारत की फेवरेट स्वीट

    काजू कतली की रोचक कहानी: 400 साल पुरानी इस मिठाई की शुरुआत कैसे हुई और कैसे बनी भारत की फेवरेट स्वीट


    नई दिल्ली ।
    काजू कतली सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि स्वाद और इतिहास का एक दिलचस्प मेल है। आज यह भारत की सबसे पसंदीदा और प्रीमियम मिठाइयों में गिनी जाती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके पीछे सदियों पुरानी एक रोचक कहानी छिपी हुई है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत लगभग 400 साल पहले हुई थी, जब काजू भारत में नया-नया उपयोग में आने लगा था और शाही रसोई में नए प्रयोग किए जा रहे थे।

    ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, काजू कतली का विकास दक्षिण भारत के दक्कन क्षेत्र में हुआ। उस समय मराठा साम्राज्य के राजघरानों में नए-नए व्यंजन बनाने की होड़ रहती थी। शाही रसोइयों ने काजू को पीसकर और उसे चीनी की चाशनी के साथ मिलाकर एक नई तरह की मिठाई बनाने की कोशिश की, जिसका मकसद कुछ ऐसा तैयार करना था जो स्वाद में अलग हो और शाही परिवार को पसंद आए।

    कहा जाता है कि उस समय काजू को बारीक पीसकर उसका पेस्ट बनाया गया और उसमें घी और चीनी मिलाकर एक चिकना मिश्रण तैयार किया गया। इस मिश्रण को पतली परत के रूप में फैलाया गया और ठंडा होने के बाद इसे हीरे के आकार में काटा गया। इसकी खास बात इसकी पतली बनावट और मुंह में घुल जाने वाला स्वाद था, जिसने इसे बाकी मिठाइयों से अलग पहचान दी।

    एक अन्य मान्यता के अनुसार, मुगल काल के दौरान भी इस तरह की मिठाई का उल्लेख मिलता है, जब शाही दावतों और जश्न के अवसरों पर काजू, घी और चीनी से बनी मिठाइयों को खास तौर पर तैयार किया जाता था। धीरे-धीरे यह मिठाई अलग-अलग क्षेत्रों में फैलती गई और समय के साथ इसका स्वरूप और नाम भी लोकप्रिय होता गया।

    काजू कतली की खासियत यह है कि यह देखने में जितनी आकर्षक लगती है, स्वाद में उतनी ही हल्की और मुलायम होती है। इसमें दूध का उपयोग नहीं होता, जिससे यह लंबे समय तक खराब भी नहीं होती। यही कारण है कि यह त्योहारों और खास मौकों पर सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली मिठाइयों में शामिल है।

    समय के साथ काजू कतली ने भी बदलाव देखे हैं। आज बाजार में इसके कई नए रूप उपलब्ध हैं, जिनमें केसर, पिस्ता, चॉकलेट और अन्य फ्लेवर शामिल हैं। इसके बावजूद इसका पारंपरिक स्वाद आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।

  • NEET पेपर लीक से हिला सिस्टम: ऋतिक मिश्रा की आत्महत्या पर बवाल, राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला, परीक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

    NEET पेपर लीक से हिला सिस्टम: ऋतिक मिश्रा की आत्महत्या पर बवाल, राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला, परीक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल


    नई दिल्ली। NEET परीक्षा विवाद और पेपर लीक मामले ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। इसी बीच लखीमपुर खीरी के 21 वर्षीय NEET उम्मीदवार ऋतिक मिश्रा की आत्महत्या ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। परिवार का कहना है कि ऋतिक ने 3 मई को कानपुर में NEET-UG परीक्षा दी थी और परीक्षा रद्द होने के बाद वह मानसिक तनाव में आ गया था। गुरुवार को उसने अपने घर पर आत्महत्या कर ली, जिसके बाद इलाके में शोक और गुस्से का माहौल है।

    इस घटना पर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि “सिस्टम द्वारा हत्या” है। उन्होंने X पर लिखा कि पिछले कई वर्षों में दर्जनों परीक्षा घोटालों ने करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं की गई। राहुल गांधी ने ऋतिक के आखिरी शब्द “अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा” का हवाला देते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की और कहा कि इस लड़ाई को वह छात्रों के साथ मिलकर लड़ेंगे।

    सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि 2015 से 2026 के बीच कई परीक्षा घोटाले सामने आए हैं, जिनमें NEET और अन्य मेडिकल परीक्षाएं भी शामिल हैं। उनका कहना है कि अधिकांश मामलों में जांच एजेंसियां सक्रिय होने के बावजूद दोषियों को सजा नहीं मिल पाई है, जबकि छात्रों का भविष्य प्रभावित होता रहा है।

    वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पेपर लीक के आरोपों के बाद 3 मई को आयोजित परीक्षा रद्द कर दी गई है और अब इसे 21 जून को दोबारा कराया जाएगा। सरकार ने जांच CBI को सौंपी है, जिसने देश के कई राज्यों में छापेमारी करते हुए अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि भविष्य में NEET परीक्षा को और पारदर्शी बनाने के लिए इसे कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में लाने पर विचार किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं ताकि ऐसे विवाद दोबारा न हों।

    फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और छात्रों में असमंजस का माहौल बना हुआ है। परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर देशभर में गंभीर बहस छिड़ गई है।

  • TET अनिवार्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “नौकरी नहीं, पहले बच्चों की शिक्षा सोचें”, फैसला सुरक्षित

    TET अनिवार्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “नौकरी नहीं, पहले बच्चों की शिक्षा सोचें”, फैसला सुरक्षित



    नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की याचिकाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि शिक्षकों को केवल अपनी नौकरी बचाने की चिंता में नहीं रहना चाहिए, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए।

    यह मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है, जो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के शिक्षक संघों द्वारा दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में 2025 के उस फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी, जिसमें कहा गया था कि कक्षा 1 से 8 तक के सभी सेवारत शिक्षकों को दो साल के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस मनमोहन और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है और इसके लिए योग्य शिक्षकों का होना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक उनके समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।

    तमिलनाडु सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि इस फैसले से राज्य में लगभग चार लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं और कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो जाएगी। इस पर अदालत ने कहा कि केवल नौकरी बचाने के तर्क से बच्चों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

    जस्टिस दत्ता ने सुनवाई के दौरान कड़ा शब्दों में कहा कि यह सोच सही नहीं है कि कोई सिर्फ अदालत से आदेश लेकर अपनी नौकरी सुरक्षित करना चाहता है, जबकि बच्चों की शिक्षा के बारे में गंभीरता से विचार न किया जाए।

    वहीं कुछ याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि लंबे समय से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर TET लागू करना अनुचित है और इससे लाखों शिक्षकों की नौकरी प्रभावित होगी। इस पर अदालत ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सर्वोपरि है और कानून के अनुसार न्यूनतम योग्यता का पालन जरूरी है।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर विस्तार से सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब देशभर के लगभग 25 लाख से अधिक शिक्षकों की नजर इस फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका सीधा असर उनकी नौकरी और सेवा शर्तों पर पड़ सकता है।

  • डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी, 96 के पार पहुंचा स्तर, आम लोगों की जेब पर असर तय

    डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी, 96 के पार पहुंचा स्तर, आम लोगों की जेब पर असर तय

    नई दिल्ली ।भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जब रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान रुपया 96.14 के स्तर तक फिसल गया, जिससे आर्थिक मोर्चे पर चिंता बढ़ गई है। यह गिरावट वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकासी के कारण देखी जा रही है।

    मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से डॉलर की ओर निवेशकों का रुझान तेज हुआ है। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में डॉलर को प्राथमिकता देते हैं। इसी वजह से डॉलर की मांग बढ़ती है और अन्य मुद्राओं पर दबाव बनता है, जिससे वे कमजोर हो जाती हैं।

    भारतीय बाजार में भी यही स्थिति देखने को मिली है। विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार पूंजी निकासी की जा रही है, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। जब निवेशक अपने निवेश को डॉलर में बदलते हैं, तो बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये की कीमत गिरने लगती है।

    इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी रुपये की कमजोरी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे में तेल महंगा होने पर अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और घरेलू मुद्रा कमजोर हो जाती है।

    रुपये में आई इस गिरावट का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ सकता है। आयातित वस्तुएं जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, मोबाइल फोन, लैपटॉप और कच्चा तेल महंगे हो सकते हैं। इसके साथ ही परिवहन लागत बढ़ने की संभावना भी रहती है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी शिक्षा और यात्रा पर जाने वाले लोगों के खर्च में भी बढ़ोतरी होगी, क्योंकि डॉलर में भुगतान अधिक महंगा हो जाएगा। इसके अलावा, आयात आधारित उद्योगों की लागत बढ़ने से उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है, जिसका अंतिम प्रभाव उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

    शेयर बाजार पर रुपये की कमजोरी का मिला-जुला असर देखने को मिलता है। जो कंपनियां निर्यात पर आधारित हैं, जैसे सूचना प्रौद्योगिकी और दवा क्षेत्र, उन्हें इसका फायदा मिल सकता है क्योंकि उन्हें डॉलर में अधिक आय प्राप्त होती है। वहीं, आयात पर निर्भर कंपनियों, खासकर तेल और परिवहन से जुड़ी कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है।

    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में केंद्रीय बैंक की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए रुपये पर दबाव पूरी तरह समाप्त होने की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।

    कुल मिलाकर, रुपये में आई यह गिरावट न केवल वित्तीय बाजारों के लिए बल्कि आम लोगों के दैनिक जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत लेकर आई है, जिससे आने वाले समय में महंगाई और खर्च दोनों पर असर देखने को मिल सकता है।