Author: bharati

  • होली पर यात्रियों को बड़ी सौगात, मध्य प्रदेश से चलेंगी स्पेशल ट्रेनें; इंदौर-दिल्ली ट्रेन हिसार तक बढ़ी

    होली पर यात्रियों को बड़ी सौगात, मध्य प्रदेश से चलेंगी स्पेशल ट्रेनें; इंदौर-दिल्ली ट्रेन हिसार तक बढ़ी


    नई दिल्ली। होली के त्योहार पर बढ़ती यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को बड़ी राहत दी है। मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों का संचालन करने का फैसला लिया गया है, जिससे हजारों यात्रियों को आसानी से सफर करने का मौका मिलेगा। खासतौर पर रानी कमलापति (भोपाल) और रीवा के बीच 4 जोड़ी होली स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसके साथ ही रानी कमलापति–दानापुर के बीच द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन भी शुरू की जा रही है। इन ट्रेनों से सतना, कटनी, सागर, बीना सहित कई जिलों के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।

    रेलवे ने जानकारी दी है कि रानी कमलापति से दानापुर के बीच चलने वाली स्पेशल ट्रेन (01667) 27 फरवरी और 2 मार्च 2026 को दोपहर 2:25 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 8:45 बजे दानापुर पहुंचेगी। वहीं वापसी में गाड़ी संख्या 01668 दानापुर से 28 फरवरी और 3 मार्च को सुबह 11:15 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 8:55 बजे भोपाल पहुंचेगी। यह ट्रेन नर्मदापुरम, इटारसी, गाडरवारा, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी।

    रीवा और रानी कमलापति के बीच भी साप्ताहिक और द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। गाड़ी संख्या 02192, 28 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे रीवा से चलकर रात 9:15 बजे रानी कमलापति पहुंचेगी। वापसी में 02191 उसी रात 10:15 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 7:30 बजे रीवा पहुंचेगी। इसी तरह द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन (02186/02185) 2 और 3 मार्च को चलेगी। इन ट्रेनों का ठहराव सतना, मैहर, कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, बीना और विदिशा स्टेशनों पर रहेगा।

    इसके अलावा भोपाल से रीवा के बीच भी एक विशेष ट्रेन चलाई जाएगी। गाड़ी संख्या 01704, 5 मार्च को सुबह 10:30 बजे भोपाल से रवाना होकर रात 8:45 बजे रीवा पहुंचेगी। वापसी में 01703 उसी दिन रात 10:20 बजे रीवा से चलकर अगले दिन सुबह 9:05 बजे भोपाल पहुंचेगी। इस ट्रेन का ठहराव भी प्रमुख मध्य प्रदेश के स्टेशनों पर रहेगा।

    रेल यात्रियों के लिए एक और बड़ी खबर यह है कि इंदौर से नई दिल्ली के बीच चलने वाली इंदौर-नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20957/20958) का मार्ग बढ़ाकर हरियाणा के हिसार तक कर दिया गया है। यह बदलाव 11 मार्च 2026 से लागू होगा। इसके बाद यह ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की जगह दिल्ली सफदरजंग होते हुए हिसार तक जाएगी। पुराने रूट के लिए बुकिंग 5 मार्च 2026 तक ही उपलब्ध रहेगी, जबकि नए रूट की बुकिंग जल्द ही आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर शुरू की जाएगी।

    नए शेड्यूल के अनुसार गाड़ी संख्या 20957 इंदौर से प्रत्येक बुधवार, शुक्रवार और रविवार को शाम 4:45 बजे रवाना होगी, अगले दिन सुबह 4:52 बजे दिल्ली सफदरजंग और सुबह 9:20 बजे हिसार पहुंचेगी। वहीं गाड़ी संख्या 20958 हिसार से 12 मार्च 2026 से प्रत्येक सोमवार, गुरुवार और शनिवार को दोपहर 1:20 बजे चलेगी, शाम 6:15 बजे दिल्ली सफदरजंग पहुंचेगी और अगले दिन सुबह 6:45 बजे इंदौर पहुंचेगी। यह ट्रेन शकूर बस्ती, रोहतक, महम और हांसी स्टेशनों पर भी रुकेगी, जबकि कोटा, सवाई माधोपुर, भरतपुर और मथुरा जैसे पुराने स्टॉपेज पहले की तरह बने रहेंगे।

    इसी बीच अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए उधना-अयोध्या कैंट-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन (09093/09094) चलाने का भी निर्णय लिया गया है। यह ट्रेन 13 फरवरी से 27 मार्च 2026 तक हर शुक्रवार को उधना से सुबह 7:25 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 10:30 बजे अयोध्या कैंट पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन 14 फरवरी से 28 मार्च तक हर शनिवार को दोपहर 2:45 बजे अयोध्या से चलकर अगले दिन शाम 5:15 बजे उधना पहुंचेगी।

    यह ट्रेन भरूच, वडोदरा, गोधरा, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, सीहोर, संत हिरदाराम नगर, बीना, झांसी, उरई, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ और बाराबंकी जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी। इससे भोपाल और सागर संभाग के यात्रियों को भी विशेष सुविधा मिलेगी।

  • महाशिवरात्रि के बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण, तीन राशियों के लिए सावधानी का संकेत

    महाशिवरात्रि के बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण, तीन राशियों के लिए सावधानी का संकेत


    नई दिल्ली। फरवरी का महीना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से हमेशा खास माना जाता है। इस दौरान कई व्रत, त्योहार और पूजा-अनुष्ठान होते हैं, जो लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का संचार करते हैं। इस बार भी महाशिवरात्रि के तुरंत बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण पड़ने जा रहा है, जिसने लोगों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय केवल खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि जीवन पर प्रभाव डालने वाला महत्वपूर्ण काल भी माना जाता है।

    सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों के मन में हमेशा कई तरह के सवाल रहते हैं, क्या इसका असर जीवन पर पड़ेगा, क्या सावधानी रखनी चाहिए और किन राशियों पर इसका प्रभाव ज्यादा होगा। ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार का सूर्य ग्रहण कुछ राशियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण समय लेकर आ सकता है, इसलिए उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगेगा। भारतीय समय के मुताबिक यह ग्रहण शाम 5 बजकर 31 मिनट पर शुरू होकर लगभग रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जब ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तो उसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाता। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने जैसी परंपराएं लागू नहीं होंगी।

    फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की स्थिति का प्रभाव राशियों पर देखा जाता है। इस बार सूर्य ग्रहण शनि की राशि कुंभ में लग रहा है और इसी राशि में बुध और शुक्र की मौजूदगी भी बताई जा रही है। यही कारण है कि इसे सामान्य ग्रहण की तुलना में थोड़ा अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है।

    ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है। इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं, जिससे कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश ढक जाता है। मान्यता है कि इस समय ग्रहों की ऊर्जा का प्रभाव मन, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता पर पड़ सकता है। कई लोगों को इस दौरान मानसिक अस्थिरता, उलझन या थकान का अनुभव हो सकता है, इसलिए इस समय शांत रहकर सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।

    इस बार सभी 12 राशियों पर ग्रहण का अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन कर्क, सिंह और कुंभ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई जा रही है।

    कर्क राशि के लोगों के लिए यह समय मानसिक रूप से थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। निर्णय लेने में दुविधा की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य के मामले में भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि कोई पुरानी बीमारी दोबारा परेशान कर सकती है। खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। वाहन चलाते समय भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

    सिंह राशि वालों के लिए यह ग्रहण करियर और आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने का संकेत दे रहा है। इस समय जल्दबाजी में लिया गया फैसला आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है। व्यापार या निवेश से जुड़े लोगों को नई डील या बड़ा निवेश फिलहाल टाल देना बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र में भी संयम और धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके।

    कुंभ राशि में ही यह सूर्य ग्रहण लग रहा है, इसलिए इसका प्रभाव इस राशि के जातकों पर ज्यादा देखा जा सकता है। बुध और शुक्र की मौजूदगी के कारण मन में भ्रम और असमंजस की स्थिति बन सकती है। आर्थिक मामलों में भी सावधानी जरूरी है, क्योंकि गलत निवेश या जल्दबाजी में किया गया लेन-देन नुकसान दे सकता है। मानसिक थकान और तनाव महसूस हो सकता है, ऐसे में योग, ध्यान और परिवार के साथ समय बिताना फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • शिवनवरात्रि उत्सव: महाकाल का दिव्य श्रृंगार, 15 फरवरी तक अलग-अलग स्वरूपों में होंगे दर्शन

    शिवनवरात्रि उत्सव: महाकाल का दिव्य श्रृंगार, 15 फरवरी तक अलग-अलग स्वरूपों में होंगे दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि उत्सव धूमधाम और श्रद्धा-उल्लास के साथ जारी है। शनिवार को शिवनवरात्रि के दूसरे दिन मंदिर प्रांगण में कोटितीर्थ के तट पर सुबह 8 बजे से ही भक्तों का तांता लगा रहा। इस अवसर पर सुबह श्री गणेश पूजन के साथ ही श्री कोटेश्वर महादेव का विशेष पूजन, अभिषेक और आरती संपन्न हुई।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा भगवान महाकाल का अभिषेक एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ के साथ विधिवत रूप से किया गया। अभिषेक में भक्तों की आस्था के अनुसार विशेष विधियों का पालन किया गया और मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान की पवित्रता बनी रही।

    दोपहर तीन बजे के बाद संध्या पूजन के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान भगवान को नवीन वस्त्रों से सजा कर मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला, छत्र आदि से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही भांग, चंदन और सूखे मेवों से दिव्य श्रृंगार कर भगवान को नारंगी माला और मुंड-माला अर्पित की गई। भगवान महाकाल का यह श्रृंगार भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षण का केंद्र बना।

    शिवनवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। हर समय भक्तों का उत्साह देखने लायक है और लोग भगवान के दर्शन के लिए कतार में लगे रहते हैं। मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि भक्तों को बिना किसी असुविधा के दर्शन-पूजन का अवसर मिल सके।

    विशेष रूप से यह बताया गया है कि भगवान श्री महाकालेश्वर 15 फरवरी तक प्रतिदिन सायंकाल अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। शिवनवरात्रि के इन दिनों में महाकालेश्वर का श्रृंगार और विशेष पूजा-आराधना का क्रम जारी रहेगा, जिससे भक्तों को भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

    शिवनवरात्रि उत्सव का यह दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष रूप से यादगार रहा। मंदिर के पवित्र वातावरण में सुबह से शाम तक चलने वाले अनुष्ठान और श्रृंगार ने भक्तों के मन में एक अलग ही ऊर्जा और श्रद्धा का संचार किया।

  • कौन बन सकता है RSS चीफ… मोहन भागवत ने चुनाव प्रक्रिया और उम्मीदवारी को लेकर की खुलकर बात

    कौन बन सकता है RSS चीफ… मोहन भागवत ने चुनाव प्रक्रिया और उम्मीदवारी को लेकर की खुलकर बात


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh- RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने अपने रिटायरमेंट को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि 75 वर्ष का होने के बाद भी संघ ने उनसे काम जारी रखने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि संघ के कहने पर वह काम छोड़ सकते हैं पर काम से रिटायर नहीं होंगे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संघ प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया और उम्मीदवारी पर भी बात की।


    कैसे होता है चुनाव

    भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘RSS प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।’


    RSS में कैसे होता है प्रमोशन

    भागवत ने कहा कि RSS में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर प्रमोशन पाते हैं। उन्होंने बताया कि जब RSS की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा ऐसे संगठन की तलाश करते हैं जिसमें उनके समुदाय के प्रतिनिधि हों।


    SC-ST से होगा प्रमुख?

    भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है।


    मोहन भागवत ने बताई अपनी नियुक्ति की कहानी

    उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं ‘सबसे योग्य उम्मीदवार’ के मानदंड को अपनाता। जब मुझे RSS प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था।’ भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन ‘अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है’। उन्होंने दावा किया कि RSS के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो।

  • MP: खरगोन में शख्स ने 20 साल की उम्र में चुराया था 100 रु का गेहूं, पुलिस ने 45 साल बाद किया गिरफ्तार

    MP: खरगोन में शख्स ने 20 साल की उम्र में चुराया था 100 रु का गेहूं, पुलिस ने 45 साल बाद किया गिरफ्तार


    खरगोन।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के खरगोन जिले (Khargone district) से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, क्योंकि यहां पर पुलिस ने एक बार फिर यह साबित करके दिखा दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे (Law Arm too Long) होते हैं और अपराधी चाहकर भी उसके चंगुल से नहीं बच सकता है। दरअसल यहां पर पुलिस 65 वर्षीय एक बुजुर्ग को उस अपराध के मामले में गिरफ्तार किया है, जो उसने 45 साल पहले किया था और जिस समय उसकी उम्र मात्र 20 साल थी। आरोपी की पहचान सलीम के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक सलीम की गिरफ्तारी साल 1980 में दर्ज गेहूं चोरी के एक मामले को लेकर हुई है।


    1980 में चुराया था 100 रुपए का गेहूं

    मंडलेश्वर की अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (SDOP) श्वेता शुक्ला ने मामले की जानकारी देते हुए रविवार को बताया कि सलीम और उसके छह अन्य साथियों ने साल 1980 में बालसमुंद के काकड़ इलाके में खेतों से गेहूं चुराया था। आरोपियों ने वारदात के वक्त जो गेहूं चोरी किया था, वह करीब एक क्विंटल यानी 100 किलोग्राम था और उस समय उसकी कीमत लगभग 100 रुपए थी। क्योंकि तब अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं की कीमत करीब 1.15 रुपए प्रति किलोग्राम थी।


    किराने की दुकान चला रहा था आरोपी

    SDOP ने आगे बताया कि बलकवाड़ा थाना क्षेत्र के बलखड गांव का रहने वाला सलीम चोरी की उस घटना के बाद भाग गया था और पड़ोसी धार जिले के बाग कस्बे में जाकर अपने बेटे के साथ किराने की दुकान चलाने लगा। उन्होंने कहा कि यह मामला अदालतों में लंबित रहा इस दौरान सलीम के खिलाफ कई बार वारंट भी जारी किया गया था।


    पुलिस को यूं मिला आरोपी का सुराग

    खलटका थाने के प्रभारी मिथुन चौहान ने बताया कि एक अन्य आरोपी को तलाश करने के दौरान पुलिस को पता चला कि सलीम किराने की दुकान के जरिए जीवन यापन चला रहा है। उन्होंने कहा कि पहचान की पुष्टि होने के बाद उसे शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस अधिकारी श्वेता शुक्ला ने कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसका मानना था कि इतने सालों के बाद मामले को भुला दिया गया होगा और वह कानूनी कार्रवाई से बच गया है। हालांकि उसका ये अनुमान पूरी तरह गलत साबित हो गया। चौहान ने बताया कि सलीम को यहां एक अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

  • MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में QR कोड वाले फर्जी डॉक्टर ने कई लोगों को लूटा… ऐसा हुआ भंडाफोड़

    MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में QR कोड वाले फर्जी डॉक्टर ने कई लोगों को लूटा… ऐसा हुआ भंडाफोड़


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भोपाल (Bhopal) में हमीदिया अस्पताल (Hamidia Hospital) से एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया । यहां एक जालसाज (Fraudulent) डॉक्टर ( Doctor) बनकर मरीजों के परिजनों को लूट रहा था। आरोपी जितेंद्र खागरे केवल फोन पर ही डॉक्टर नहीं बनता था, बल्कि अस्पताल के भीतर जाकर परिजनों से आमने-सामने मिलता था और उनका भरोसा जीतकर इलाज के नाम पर पैसे ऐंठता था। जांच में पता चला है कि इस बड़े घोटाले में कथित तौर पर अस्पताल के ही कुछ कर्मचारी शामिल थे, जो मरीजों की निजी जानकारी, वार्ड नंबर और बीमारी की रिपोर्ट आरोपी को लीक करते थे। बदले में इन कर्मचारियों को 20 प्रतिशत तक का कमीशन मिलता था।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक जालसाजी का तरीका बेहद शातिर थी। वह परिजनों को फोन कर डराता था कि उनका मरीज खतरे में है और जल्दी इलाज या टेस्ट के लिए तुरंत पैसे जमा करने होंगे। एक मामले में उसने दिल की बीमारी से जूझ रहे बच्चे के पिता को एक महीने तक इंतजार करने के बजाय तुरंत इकोकार्डियोग्राम कराने का झांसा देकर 10,000 रुपये ऐंठ लिए। उसने पिता से कहा कि आप पैसे भेजिए और मैं तुरंत टेस्ट करवा दूंगा। बाद में मैं एंबुलेंस का इंतजाम भी करवा दूंगा। एक अन्य पीड़ित को उसने डराया कि उसकी गर्भवती पत्नी और नवजात की जान जोखिम में है और उनसे हजारों रुपये ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस को मिले ऑडियो रिकॉर्डिंग से खुलासा हुआ है कि वह क्यूआर कोड भेजकर तुरंत पेमेंट का दबाव बनाता था और पैसे मिलते ही नंबर ब्लॉक कर देता था।


    10 परिवारों के साथ ठगी

    अस्पताल प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस और साइबर टीम ने आरोपी को इंदौर से गिरफ्तार कर लिया है। अब तक कम से कम 10 परिवारों के साथ ठगी की बात सामने आई है, जिनमें से तीन पीड़ितों ने 30,000 रुपये से अधिक के नुकसान की बात की है। पुलिस अब उन संदिग्ध अस्पताल कर्मचारियों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने डेटा लीक कर इस गैंग की मदद की। अस्पताल के अधीक्षक ने लोगों को सचेत किया है कि कोई भी असली डॉक्टर या स्टाफ कभी क्यूआर कोड भेजकर पैसे नहीं मांगता, और ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत सुरक्षा विभाग या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

    वहीं पुलिस प्रमुख (सीएसपी) अनिल बाजपेयी ने कहा, हमने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जो हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों के रिश्तेदारों से डॉक्टर बनकर संपर्क करता था और उन्हें ठगता था। हमें अधीक्षक से शिकायत मिली, जिसके आधार पर कोहेफिजा पुलिस स्टेशन और क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरफ्तारी की। अपने बयान में उसने बताया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे जानकारी दी थी। संभव है कि वे एक गैंग के रूप में काम कर रहे थे।

  • चंद्रयान-4 मिशन धरती पर वापस लौटेगा भारत, ISRO ने लैंडिंग के लिए खोजी जगह

    चंद्रयान-4 मिशन धरती पर वापस लौटेगा भारत, ISRO ने लैंडिंग के लिए खोजी जगह


    नई दिल्ली।
    चंद्रयान-4 मिशन (Chandrayaan-4 Mission) को लेकर ISRO को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इसरो के स्पेस ऐप्लिकेशन सेंटर (Space Applications Center-SAC) ने अब तक के सबसे कठिन मून मिशन के लिए लैंडिंग की जगह खोज ली है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लगभग 1 वर्ग किलोमीटर का पैच है जहां चंद्रयान-4 की सफल लैंडिंग करवाई जा सकती है। बता दें कि यह इसरो का पहला रिटर्न मिशन होगा। यानी चंद्रयान-4 को वापस धरती पर भी लाना है।

    चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से भजी गई हाई रिजोल्यूशन तस्वीरों से इस जगह को खोजा है जहां चंद्रयान-4 को उतारा जा सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा अध्ययन अमिताभ के सुरेश, अजय के पाराशर, कनन वी अय्यर, अब्दुल एस, श्वेता वर्मा त्रिवेदी और नितांत दुबे ने की है। इस मिशन में प्रोपल्सन मॉड्यूल के अलावा डिसेंटर और असेंडर मॉड्यूल भी होंगे। इसके अलावा ट्रांसफर मॉड्यूल और रीएंट्री मॉड्यूल भी काम करेगा।


    क्या होगी चंद्रयान- 4 की खासियत

    यह मिशन भारत के लिए बहुत खास होने वाला है। इसका उद्देश्य चंद्रमा पर लैंडिंग करके मिट्टी और पत्थरों के सैंपल इकट्ठे करना और फिर वापस धरती पर लौटना है। इसरो का चंद्रयान -3 मिशन पूरी तरह से सफल हुआ था। इसके बाद इसरो ने यह कठिन कदम उठाने का फैसला किया है। चंद्रयान-4 अगर सफलतापूर्वक वापस लौटता है तो आगे मानव मिशन का भी रास्ता खुल जाएगा।


    चंद्रयान-4 कहां उतरेगा

    वैज्ञानिकों ने ऑर्बिटर से भेजी गई तस्वीरों में से चार जगहों के बारे में अध्ययन किया था। इसमें एमएम-4 नाम की जगह को सुरक्षित पाया गया है। यह जगह नॉविस माउटन पहाड़ी के पास है लेकिन समतल है। ऐसे में लैंडर को नुकसान पहु्ंचने का खतरा नहीं है। इस जगह पर सूरज की रोशनी भी अच्छी रहती है। ऐसे में लैंडिंग के लिए जगह उपयुक्त है। यहां बड़े गड्ढे ना होने की वजह से लैंडर को चलने में भी आसानी होगी।

    अब तक के अध्ययन से इतना स्पष्ट हो गया है कि इसी इलाके में चंद्रयान-4 को उतारा जाएगा। यह शिव-शक्ति पॉइंट से बहुत दूर नहीं है। वहीं इस इलाके में गड्ढों के पास अंधेरा रहता है। इसरो का कहना है कि इस इलाके में पानी या बर्फ के सैंपल भी मिल सकतेहैं। इसके अलावा यहां से मिले सैंपल से चंद्रमा के निर्माण और यहां उपस्थिति संसाधनों के बारे में जानकारी मिलेगी।

  • UP: आज राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू होगा विधानसभा का बजट सत्र, पहले ही दिन लाए जाएंगे 11 विधेयक

    UP: आज राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू होगा विधानसभा का बजट सत्र, पहले ही दिन लाए जाएंगे 11 विधेयक


    लखनऊ।
    यूपी विधानमंडल (UP Legislature) का बजट सत्र (Budget Session) सोमवार से शुरू हो रहा है। तय कार्यक्रम के मुताबिक बजट सत्र ((Budget Session) ) के लिए 20 फरवरी तक का कार्यक्रम जारी किया गया है। सत्र के पहले दिन राज्यपाल आनंदी बेन पटेल (Governor Anandiben Patel) का अभिभाषण होगा। पहले दिन ही सदन में 11 विधेयक को मंजूरी के लिए रखा जाएगा। विधानसभा का बजट सत्र हंगामी होने के आसार है। सपा और कांग्रेस ने सरकार को एसआईआर, प्रदेश की कानून व्यवस्था, केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका से किए जा रहे ट्रेड डील के मसले पर घेरने की तैयारी की है।


    यूपी सरकार का बजट 11 को

    विधानमंडल का बजट सत्र सोमवार को 11 बजे शुरू होगा। राज्यपाल के अभिभाषण के बाद अध्यादेशों, अधिसूचनाओं, नियमों आदि को सदन की पटल पर रखा जाएगा। मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही विधायक के निधन पर शोक बाद स्थगित हो जाएगी। इसके अगले दिन 11 फरवरी को यूपी सरकार का बजट आएगा।

    वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा बजट पढ़ा जाएगा। विधानसभा के बजट सत्र में विरोधी दलों ने जहां सरकार को घेरने की तैयारी की है, वहीं सरकार की ओर से जवाब देने के लिए पुरी तरह से मुस्तैद रहेगी। कुल मिलाकर बजट सत्र में जोरदार हंगामे के आसार हैं।

    उधर, सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बजट सत्र से एक दिन पहले रविवार को विधायकों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा, अमेरिका के साथ ट्रेड डील से खेती किसानी पर संकट आएगा। सपा विधायक बजट सत्र में बढ़ती मंहगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी व अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरेंगे।


    एसआईआर का काम प्रभावित न हो : सीएम

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विधायकों को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में जुटे रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने रविवार को भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में कहा कि बजट सत्र के दौरान भी सभी विधायक अपना कार्यालय खोलें और एसआईआर का काम प्रभावित न होने दें। बैठक में दोनों उप मुख्यमंत्री, यूपी भाजपा के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और विधायकगण भी मौजूद रहे। ब्योरा P04

    सदस्यों को मौके देने के लिए देर शाम तक चलाएंगे सदन: सतीश महाना
    विधान सभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने दलीय नेताओं की बैठक में कहा है कि सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर देर शाम तक सदन की कार्यवाही संचालित की जाएगी, ताकि प्रत्येक सदस्य को अपनी बात रखने का अवसर मिल सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि पूर्व के इतिहास पर दृष्टि डाली जाए तो विगत चार वर्षों में इस विधानसभा में सर्वाधिक चर्चा हुई है। विधान सभा अध्यक्ष ने सभी दलों के नेताओं से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने पक्ष को सदन में शालीनता एवं संसदीय मर्यादा के अंतर्गत रखें और प्रेमपूर्ण वातावरण में बहस करें।

    उन्होंने अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार पूर्व के सत्रों में सभी का सहयोग प्राप्त हुआ है, उसी प्रकार इस सत्र में भी सहयोग की आशा है। सतीश महाना की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

  • सिंधु जल संधि सस्पेंड के बाद बड़ा कदम, चिनाब नदी पर 5129 करोड़ का सावलकोट पावर प्रोजेक्ट शुरू

    सिंधु जल संधि सस्पेंड के बाद बड़ा कदम, चिनाब नदी पर 5129 करोड़ का सावलकोट पावर प्रोजेक्ट शुरू


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने अब बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सरकारी कंपनी एनएचपीसी (NHPC) ने जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में चिनाब नदी पर बनने वाले सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया है। इस परियोजना को देश की ऊर्जा जरूरतों और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक बड़ा और रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को करीब 5129 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा। एनएचपीसी द्वारा जारी टेंडर के तहत पूरे निर्माण कार्य को एक ही पैकेज में शामिल किया गया है, ताकि काम को तेज गति से पूरा किया जा सके। टेंडर दस्तावेजों के अनुसार, इस पैकेज में डाइवर्जन टनल का निर्माण, एडिट, डीटी और कोफर डैम बनाने जैसे प्रमुख कार्य शामिल हैं।

    इसके अलावा मांडिया नाला डीटी का निर्माण, उससे संबंधित सड़क, राइट बैंक स्पाइरल टनल, एक्सेस टनल और डैम से जुड़े सभी सहायक कार्य भी इसी प्रोजेक्ट के अंतर्गत किए जाएंगे। चिनाब नदी पर बनने वाला यह प्रोजेक्ट बिजली उत्पादन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे जम्मू-कश्मीर सहित देश के कई हिस्सों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

    एनएचपीसी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए बोली प्रक्रिया 12 मार्च से शुरू होगी और 20 मार्च तक चलेगी। बोली की वैधता 180 दिनों के लिए तय की गई है। वहीं, इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए लगभग 3285 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है, यानी इसे चरणबद्ध तरीके से दीर्घकालिक योजना के तहत तैयार किया जाएगा।

    सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के जरिए कुल 1856 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इतना बड़ा उत्पादन देश के पावर ग्रिड को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खासकर जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी इलाकों में बिजली की उपलब्धता बेहतर होगी और औद्योगिक व घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, यह परियोजना जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और क्षेत्रीय विकास को भी गति देगी।

    भारत सरकार ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में चिनाब नदी पर इस तरह की बड़ी परियोजना को रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भारत अपने जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेगा और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति और जल प्रबंधन योजना का भी अहम हिस्सा है। आने वाले वर्षों में इसके पूरा होने पर देश की ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

  • साबरकांठा में ‘जहर का कारोबार’: डिटर्जेंट-यूरिया मिलाकर 5 साल से बन रहा था नकली दूध

    साबरकांठा में ‘जहर का कारोबार’: डिटर्जेंट-यूरिया मिलाकर 5 साल से बन रहा था नकली दूध


    नई दिल्ली। गुजरात के साबरकांठा जिले में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यहां डिटर्जेंट, यूरिया और अन्य खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल कर नकली दूध और छाछ बनाने वाली एक फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया है, जो पिछले करीब पांच वर्षों से अवैध रूप से संचालित हो रही थी। इस कार्रवाई में अधिकारियों ने करीब 71 लाख रुपये का सामान जब्त किया है और एक नाबालिग समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    यह छापेमारी श्री सत्य डेयरी प्रोडक्ट्स नाम की यूनिट पर की गई, जहां कथित तौर पर पानी, मिल्क पाउडर, कास्टिक सोडा, रिफाइंड पामोलिन तेल, सोयाबीन तेल, डिटर्जेंट पाउडर और यूरिया खाद मिलाकर बड़े पैमाने पर नकली दूध तैयार किया जा रहा था। यह मिलावटी दूध आसपास के कई गांवों में पाउच में पैक कर सप्लाई किया जाता था, जिससे हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा था।

    300 लीटर असली दूध से बनाते थे 1800 लीटर नकली दूध

    जांच में सामने आया कि आरोपी बेहद संगठित तरीके से इस धंधे को चला रहे थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपी रोजाना लगभग 300 लीटर असली दूध का इस्तेमाल करते थे। इसमें विभिन्न केमिकल और पाउडर मिलाकर वे 1,700 से 1,800 लीटर तक नकली दूध तैयार कर लेते थे। यानी कम मात्रा में असली दूध को आधार बनाकर उसकी मात्रा छह गुना तक बढ़ा दी जाती थी। इसके बाद इस दूध को पाउच में पैक कर गांव-गांव पहुंचाया जाता था, जहां आम लोग इसे असली समझकर इस्तेमाल करते थे। इसी तरह मिलावटी छाछ भी तैयार की जाती थी, जिससे यह कारोबार और अधिक फैल गया था।

    छापे में मिली खतरनाक सामग्री

    लोकल क्राइम ब्रांच, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी FSL और फूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर इस फैक्ट्री पर कार्रवाई की। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में खतरनाक केमिकल और मिलावट में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया। जब्त किए गए सामान में 450 किलो व्हे पाउडर, 625 किलो स्किम्ड मिल्क पाउडर, 300 किलो प्रीमियम SMP पाउडर, यूरिया खाद, कास्टिक सोडा, डिटर्जेंट पाउडर, सोयाबीन तेल और पामोलिन तेल शामिल हैं। इसके अलावा मौके से 1,962 लीटर तैयार मिलावटी दूध और 1,180 लीटर मिलावटी छाछ भी बरामद की गई, जिन्हें बाजार में भेजने की तैयारी थी।  अधिकारियों के अनुसार, इन केमिकल्स का इस्तेमाल दूध की मोटाई, झाग और प्रोटीन की मात्रा को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए किया जाता था, ताकि देखने में यह असली लगे और ग्राहक आसानी से धोखा खा जाएं।

    स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिटर्जेंट, यूरिया और कास्टिक सोडा जैसे तत्वों का सेवन शरीर के लिए बेहद खतरनाक होता है। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी दूध का सेवन करने से पेट, किडनी और लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी ज्यादा हानिकारक साबित हो सकता है।

    पांच साल से चल रहा था गोरखधंधा

    जांच में यह भी सामने आया है कि यह फैक्ट्री करीब पांच वर्षों से लगातार चल रही थी। इतने लंबे समय तक इस यूनिट का संचालन होना इस बात का संकेत है कि यह नेटवर्क काफी संगठित और योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था। गांवों में इसकी नियमित सप्लाई के कारण इसका दायरा भी काफी बड़ा हो गया था। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से दूध बनाने और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण भी बरामद किए गए। अधिकारियों ने मौके पर ही यूनिट को सील कर दिया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

    एक नाबालिग समेत पांच गिरफ्तार

    इस मामले में एक नाबालिग सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस धंधे से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे और सप्लाई चेन कितनी दूर तक फैली हुई थी। जांच के दौरान और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही, जिन इलाकों में यह दूध सप्लाई किया गया, वहां लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मिलावट के खिलाफ सख्ती जारी

    फूड एंड ड्रग्स विभाग ने साफ किया है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा। खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि आम लोगों की सेहत से कोई समझौता न हो।