Author: bharati

  • लू का असर तेज, रतलाम में मोबाइल बंद होने तक पहुंचा तापमान

    लू का असर तेज, रतलाम में मोबाइल बंद होने तक पहुंचा तापमान


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। राज्य के 15 से ज्यादा शहरों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया है। शनिवार को खंडवा और नौगांव में पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया, जिससे हालात और भी गंभीर हो गए हैं।

    इंदौर और उज्जैन संभाग सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां दिन के समय लू जैसे हालात बन गए हैं। रतलाम में तेज धूप और गर्म हवाओं का असर इतना ज्यादा रहा कि मोबाइल फोन तक बंद हो गए। वहीं, राजधानी भोपाल में गर्मी के कारण बाजारों में भी सन्नाटा पसरा रहा और आम जनजीवन प्रभावित हुआ।

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में स्थिति और खराब हो सकती है। रतलाम, खरगोन और खंडवा में लू चलने का अलर्ट जारी किया गया है, जहां तापमान 44 डिग्री से ऊपर जा सकता है।

    इसके अलावा इंदौर, उज्जैन, धार, बड़वानी, झाबुआ, गुना, विदिशा, सागर और अन्य कई जिलों में भी तेज गर्मी और लू का असर देखने को मिलेगा। भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर सहित अन्य शहरों में भी तापमान सामान्य से काफी अधिक बना रहेगा।

    मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे के बीच घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। साथ ही पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है।

  • जबलपुर में बाराती बस पर 51 हजार का चालान, बिना परमिट दौड़ रही थी गाड़ी

    जबलपुर में बाराती बस पर 51 हजार का चालान, बिना परमिट दौड़ रही थी गाड़ी


    जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर में परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बाराती बस पर ₹51,500 का जुर्माना लगाया और उसे जब्त कर लिया। यह कार्रवाई आयुक्त उमेश जोगा के निर्देश पर उड़नदस्ता टीम द्वारा की गई।

    बिना परमिट चल रही थी बाराती बस
    जांच के दौरान सामने आया कि मंडला से जबलपुर जा रही राधिका ट्रैवल्स की बस (MP 13 P 1949) बिना वैध दस्तावेजों के संचालित हो रही थी। बस के पास-
    वैध परमिट नहीं था
    बीमा (Insurance) नहीं था
    प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) भी नहीं था
    इस गंभीर लापरवाही के बाद कार्रवाई की गई।

    बरगी के पास रोकी गई बस
    उड़नदस्ता प्रभारी के अनुसार बस को बरगी क्षेत्र के पास रोका गया। जब चालक से दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद मौके पर ही बस को जब्त कर लिया गया।

    बस जब्त, यात्रियों को सुरक्षित भेजा गया
    कार्रवाई के बाद बस को आरटीओ परिसर में खड़ा कराया गया। साथ ही बस में सवार यात्रियों को किसी अन्य वाहन से उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया गया।

    हादसे के बाद बढ़ी सख्ती
    हाल ही में मध्य प्रदेश में इंदौर से शिवपुरी जा रही एक बस में आग लगने की दर्दनाक घटना हुई थी, जिसमें एक 4 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद परिवहन विभाग ने राज्यभर में बसों की जांच तेज कर दी है।

    कई जिलों में चल रहा जांच अभियान
    परिवहन मंत्री और विभागीय निर्देशों के बाद जबलपुर, सिवनी और मंडला में बसों की सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि बिना फिटनेस और दस्तावेजों के चल रहे वाहनों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
     
    प्रशासन की चेतावनी
    परिवहन विभाग ने सभी वाहन संचालकों को चेतावनी दी है कि वे अपने सभी दस्तावेज—परमिट, बीमा और PUC—अद्यतन रखें। नियमों का उल्लंघन करने पर भविष्य में और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    जबलपुर में हुई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि सड़क सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन अब बेहद सख्त हो गया है। बिना वैध दस्तावेजों के चलने वाले वाहनों पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।

  • हावड़ा में सख्त अभियान: जेसीबी की गड़गड़ाहट से खाली हुए स्टेशन के बाहर के अतिक्रमण

    हावड़ा में सख्त अभियान: जेसीबी की गड़गड़ाहट से खाली हुए स्टेशन के बाहर के अतिक्रमण

    नई दिल्ली । स्वीर बदल दी, जब वर्षों से जमे हुए अवैध अतिक्रमणों पर जेसीबी और बुलडोजर की मदद से सख्त और सुनियोजित कदम उठाया गया। यह अभियान उस समय चलाया गया जब स्टेशन परिसर और आसपास का क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत था, ताकि किसी भी प्रकार की भीड़ या अव्यवस्था से बचते हुए कार्रवाई को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके। स्टेशन के बाहर फुटपाथों, प्रवेश मार्गों और बस स्टैंड के आसपास लंबे समय से अस्थायी और स्थायी अतिक्रमण फैल गए थे, जिनकी वजह से यात्रियों को आवाजाही में लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही थी और कई बार यह स्थिति गंभीर जाम और अव्यवस्था का कारण भी बनती थी।
    इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने इस क्षेत्र को प्राथमिकता में रखकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाने का निर्णय लिया, जिसमें रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से सक्रिय भूमिका निभाई और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर कार्रवाई को अंजाम दिया।

    कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीनों ने एक-एक कर फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर बने अवैध ढांचों को हटाना शुरू किया और कुछ ही घंटों में पूरा इलाका काफी हद तक अतिक्रमण मुक्त दिखाई देने लगा।

    अचानक हुई इस कार्रवाई से क्षेत्र में मौजूद दुकानदारों और अवैध कब्जाधारियों के बीच हलचल और अफरा-तफरी का माहौल जरूर देखने को मिला, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के कारण स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और किसी बड़े विरोध या टकराव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। वर्षों से यह स्थान लगातार भीड़भाड़, अव्यवस्थित यातायात और पैदल यात्रियों की कठिनाइयों का केंद्र बना हुआ था, जहां सार्वजनिक जगहों पर अनियंत्रित कब्जे के कारण लोगों को स्टेशन तक पहुंचने और बाहर निकलने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
    इस पृष्ठभूमि को देखते हुए प्रशासन ने इस बार बिना किसी देरी और ढिलाई के सख्त कार्रवाई को अंजाम देने का निर्णय लिया, ताकि लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

    प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई के बाद स्पष्ट संदेश दिया कि सार्वजनिक संपत्ति और रेलवे क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी इस तरह के अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे। उनका कहना था कि यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन और सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसके लिए किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

    इस अभियान के बाद स्थानीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली, जहां कुछ लोगों ने इसे आवश्यक और जनहित में लिया गया कदम बताया, वहीं प्रभावित लोगों में असंतोष और चिंता का माहौल भी नजर आया। इसके बावजूद पूरे क्षेत्र में अब पहले की तुलना में अधिक खुलापन, साफ-सफाई और बेहतर आवागमन व्यवस्था दिखाई देने लगी है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में स्टेशन के बाहर की स्थिति और अधिक व्यवस्थित होगी और यात्रियों को बेहतर सुविधा और राहत प्राप्त होगी।
  • भारत बनाम पाकिस्तान न्यूक्लियर ताकत: अग्नि बनाम शाहीन, कौन कितना मजबूत? परमाणु रणनीति और क्षमता का पूरा विश्लेषण

    भारत बनाम पाकिस्तान न्यूक्लियर ताकत: अग्नि बनाम शाहीन, कौन कितना मजबूत? परमाणु रणनीति और क्षमता का पूरा विश्लेषण



    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा समीकरण लंबे समय से परमाणु हथियारों पर आधारित रणनीतिक संतुलन पर टिके हुए हैं। दोनों देशों के पास लगभग समान संख्या में परमाणु वॉरहेड हैं, लेकिन उनकी रणनीति, तकनीक और डिलीवरी सिस्टम में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

    ताजा आकलनों के अनुसार, भारत के पास करीब 172 और पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु वॉरहेड मौजूद हैं। हालांकि संख्या लगभग बराबर है, लेकिन क्षमता और संरचना के स्तर पर भारत को अधिक उन्नत माना जाता है।

    भारत की परमाणु रणनीति “नो फर्स्ट यूज” यानी पहले इस्तेमाल न करने की नीति पर आधारित है। इसके साथ ही भारत ने जमीन, हवा और समुद्र—तीनों माध्यमों से परमाणु हथियार लॉन्च करने की क्षमता विकसित कर ली है, जिसे “न्यूक्लियर ट्रायड” कहा जाता है।

    भारत के पास अग्नि सीरीज की मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज करीब 700 किलोमीटर (Agni-I) से लेकर 5000+ किलोमीटर (Agni-V) तक जाती है। इसके अलावा पृथ्वी-II जैसी शॉर्ट-रेंज मिसाइलें और राफेल, मिराज-2000H और जगुआर जैसे विमान भी परमाणु मिशन में सक्षम माने जाते हैं।

    समुद्री क्षमता की बात करें तो भारत के पास INS Arihant और INS Arighat जैसी परमाणु पनडुब्बियां हैं, जो K-15 और K-4 जैसी सबमरीन लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलें दागने में सक्षम हैं। इससे भारत की “सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” मजबूत होती है।

    वहीं पाकिस्तान की परमाणु नीति अधिक आक्रामक और अस्पष्ट मानी जाती है। उसने “फुल स्पेक्ट्रम डिटरेंस” की रणनीति अपनाई है, जिसका उद्देश्य भारत की पारंपरिक सैन्य बढ़त को न्यूक्लियर धमकी से संतुलित करना है।

    पाकिस्तान के पास शाहीन-1 से शाहीन-3 तक बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज लगभग 750 किलोमीटर से 2750 किलोमीटर तक जाती है। इसके अलावा बाबर क्रूज मिसाइलें और कम दूरी की नस्र मिसाइल भी मौजूद है, जिसे टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन माना जाता है।

    हवाई क्षमता के लिए पाकिस्तान के पास मिराज फाइटर जेट और JF-17 जैसे प्लेटफॉर्म हैं, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। हालांकि उसकी नौसैनिक परमाणु क्षमता अभी विकास के शुरुआती चरण में मानी जाती है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका न्यूक्लियर ट्रायड, मजबूत सेकंड स्ट्राइक क्षमता और तेजी से विकसित होती मिसाइल टेक्नोलॉजी है। दूसरी ओर पाकिस्तान अपनी रणनीति में कम दूरी के सामरिक परमाणु हथियारों पर अधिक निर्भर करता है।

    रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत की नीति स्थिर और स्पष्ट है, जबकि पाकिस्तान की परमाणु रणनीति अधिक जोखिमभरी और अनिश्चित मानी जाती है, जिससे क्षेत्रीय तनाव की संभावना बढ़ जाती है।

    कुल मिलाकर, भले ही दोनों देशों की परमाणु ताकत संख्या में लगभग बराबर हो, लेकिन तकनीकी क्षमता, रणनीति और डिलीवरी सिस्टम के मामले में भारत को अधिक उन्नत स्थिति में माना जाता है।

  • चीन के भरोसे शुरू हुआ पाकिस्तान का हैंगोर-क्लास पनडुब्बी प्रोजेक्ट, कराची शिपयार्ड में अटका काम; तकनीकी क्षमता पर उठे सवाल

    चीन के भरोसे शुरू हुआ पाकिस्तान का हैंगोर-क्लास पनडुब्बी प्रोजेक्ट, कराची शिपयार्ड में अटका काम; तकनीकी क्षमता पर उठे सवाल



    नई दिल्ली। पाकिस्तान की नौसेना को मजबूत करने के लिए शुरू किया गया हैंगोर-क्लास पनडुब्बी प्रोजेक्ट अब गंभीर चुनौतियों में फंसता नजर आ रहा है। चीन के सहयोग से चल रही इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर अब कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (KSEW) की तकनीकी क्षमता और निर्माण प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

    पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर कुल 8 आधुनिक हैंगोर-क्लास पनडुब्बियां बनाने का समझौता किया था, जिनमें से 4 का निर्माण पाकिस्तान में स्थानीय स्तर पर करने का दावा किया गया था। सरकार ने इसे देश की नौसैनिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया था, लेकिन अब स्थिति उम्मीद के मुताबिक नहीं दिख रही है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, कराची शिपयार्ड को जिन पनडुब्बियों के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है, उसके पास पहले से किसी भी सबमरीन को बनाने का कोई अनुभव नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि पनडुब्बी निर्माण बेहद जटिल तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाली धातु, प्रेशर-रेजिस्टेंट ढांचा, एडवांस वेल्डिंग तकनीक और सख्त परीक्षण प्रणाली की जरूरत होती है।

    इसी वजह से दुनिया में केवल कुछ ही देश जैसे अमेरिका, रूस, चीन और जर्मनी इस तकनीक में पूरी तरह सक्षम माने जाते हैं। यहां तक कि कई विकसित देशों को भी पनडुब्बी तकनीक विकसित करने में दशकों लग गए हैं।

    रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के उदाहरण बताते हैं कि पनडुब्बी निर्माण क्षमता विकसित करना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से तेजी से स्थानीय निर्माण का दावा तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, फरवरी 2025 में कराची शिपयार्ड में छठी पनडुब्बी की नींव रखी गई थी, लेकिन परियोजना की प्रगति धीमी बनी हुई है। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि इन पनडुब्बियों की पूरी डिलीवरी 2030 के दशक की शुरुआत तक ही संभव हो पाएगी।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस पूरे प्रोजेक्ट में चीन की भूमिका बेहद अहम है और डिजाइन से लेकर तकनीकी सहायता तक अधिकांश काम उसी पर निर्भर है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान वास्तव में पनडुब्बी निर्माण में आत्मनिर्भर बन रहा है या सिर्फ असेंबली स्तर पर काम कर रहा है।

    रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अगर निर्माण में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों से समझौता किया गया, तो यह समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान के लिए रणनीतिक महत्व का जरूर है, लेकिन इसकी रफ्तार और गुणवत्ता दोनों पर निगरानी बनी हुई है।

  • चांदी आयात पर बड़ा सरकारी फैसला: विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए सख्त नियंत्रण लागू

    चांदी आयात पर बड़ा सरकारी फैसला: विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए सख्त नियंत्रण लागू

    नई दिल्ली । देश की अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और लगातार बढ़ते व्यापार घाटे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने चांदी के आयात को लेकर एक अहम और सख्त निर्णय लागू किया है, जिसे आर्थिक प्रबंधन की दिशा में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
    इस नए बदलाव के तहत 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सिल्वर बार को अब तक की ‘फ्री’ श्रेणी से हटाकर तत्काल प्रभाव से ‘रिस्ट्रिक्टेड’ श्रेणी में शामिल कर दिया गया है, जिससे इसके आयात पर अब सीधे बाजार आधारित खरीद की जगह सरकारी अनुमति और लाइसेंस व्यवस्था लागू हो गई है। इस निर्णय का उद्देश्य उन अनावश्यक आयातों को नियंत्रित करना है, जिनके कारण देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से बाहर जा रहा था और डॉलर पर दबाव बढ़ रहा था, जिससे रुपये की स्थिरता भी प्रभावित हो रही थी।
    वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ते जोखिमों के बीच भारत पर आयात बिल का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, विशेष रूप से कीमती धातुओं के आयात में भारी विदेशी मुद्रा खर्च होता है, जो देश के व्यापार घाटे को और अधिक गहरा करता है। महानिदेशालय द्वारा जारी संशोधित नीति के अनुसार अब कोई भी व्यापारी या आयातक बिना पूर्व अनुमति के सीधे चांदी का आयात नहीं कर सकेगा और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा, जिससे आयात की मात्रा और प्रवाह पर सरकार की सीधी निगरानी संभव हो सकेगी।
    यह कदम केवल चांदी तक सीमित नहीं है बल्कि पिछले कुछ समय से सरकार ने सोना, प्लैटिनम और अन्य बहुमूल्य धातुओं के आयात पर भी शुल्क संरचना को सख्त किया है, ताकि घरेलू बाजार में अनियंत्रित खरीद और बाहरी मुद्रा पर निर्भरता को कम किया जा सके। पहले ही प्लैटिनम पर आयात शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की जा चुकी है और सोने व चांदी से जुड़े कई उत्पादों पर भी शुल्क संरचना को संशोधित किया गया है, जिससे इन वस्तुओं की गैर-जरूरी मांग को नियंत्रित किया जा सके। इसके साथ ही एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत भी नियमों को और सख्त किया गया है, जिसके अंतर्गत ज्वेलरी निर्यातकों के लिए कच्चे माल के आयात पर अब स्पष्ट सीमाएं तय कर दी गई हैं, ताकि आयात और निर्यात के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
    विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के कदम अल्पकाल में बाजार पर कुछ दबाव डाल सकते हैं, लेकिन दीर्घकाल में यह विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर करने और रुपये को मजबूती देने में मदद कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि जब तक आयात और निर्यात के बीच संतुलन नहीं बनेगा, तब तक व्यापार घाटे पर नियंत्रण कठिन रहेगा, इसलिए यह नीति आर्थिक अनुशासन और बाहरी निर्भरता को कम करने की दिशा में एक निर्णायक पहल के रूप में देखी जा रही है।
  • ग्वालियर में सहायक कुल सचिव परीक्षा आज, 1277 अभ्यर्थी देंगे परीक्षा

    ग्वालियर में सहायक कुल सचिव परीक्षा आज, 1277 अभ्यर्थी देंगे परीक्षा


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग) द्वारा सहायक कुल सचिव परीक्षा-2025 का आयोजन आज रविवार को ग्वालियर में किया जा रहा है। इस परीक्षा में शहर के तीन केंद्रों पर कुल 1277 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा एक ही सत्र में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक आयोजित की जा रही है।

    परीक्षा केंद्रों पर सख्त नियम लागू
    परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए इस बार बेहद सख्त नियम लागू किए गए हैं। अभ्यर्थियों के लिए कई वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है-
    जूते और मोजे पहनकर प्रवेश नहीं मिलेगा
    मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर प्रतिबंध
    बेल्ट, क्लचर, बक्कल और हाथ के बैंड भी वर्जित
    केवल पारदर्शी पानी की बोतल ले जाने की अनुमति
    उम्मीदवारों को केवल चप्पल या सैंडल पहनकर ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जा रहा है।

    त्रिस्तरीय जांच और CCTV निगरानी
    परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अभ्यर्थियों की त्रिस्तरीय जांच की व्यवस्था की गई है।
    पहले चरण में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन
    सभी केंद्रों पर CCTV कैमरों से निगरानी
    कलेक्टर कार्यालय में डिजिटल कंट्रोल रूम की स्थापना
    यह कंट्रोल रूम सुबह 8 बजे से परीक्षा समाप्ति तक सक्रिय रहेगा।

    शिकायत के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय
    परीक्षा से संबंधित किसी भी समस्या या शिकायत के लिए कंट्रोल रूम में संपर्क किया जा सकता है।
    दूरभाष: 0751-2446214
    मोबाइल: 9425135143
    निगरानी की जिम्मेदारी अधीक्षक आर.आई. भगत के निर्देशन में की जा रही है।

    ग्वालियर में आयोजित यह परीक्षा कड़े सुरक्षा इंतजामों और डिजिटल निगरानी के बीच संपन्न हो रही है। सख्त नियमों का उद्देश्य केवल एक ही है-निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करना।

  • नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव, बालेन शाह ने बढ़ाया सत्ता केंद्रीकरण की ओर कदम, खुफिया एजेंसी सीधे PMO के अधीन

    नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव, बालेन शाह ने बढ़ाया सत्ता केंद्रीकरण की ओर कदम, खुफिया एजेंसी सीधे PMO के अधीन




    नई दिल्ली। नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है, जहां प्रधानमंत्री Balen Shah की सरकार ने सत्ता के केंद्रीकरण की दिशा में अहम कदम उठाया है। सरकार ने राष्ट्रीय जांच विभाग को सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अधीन कर दिया है, जिससे देश की प्रशासनिक व्यवस्था में नई बहस शुरू हो गई है।

    नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार को मंजूर की गई “सरकार कार्य विभाजन नियमावली” के तहत इस खुफिया एजेंसी को गृह मंत्रालय से हटाकर PMO के नियंत्रण में लाया गया है। यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब देश में यह चर्चा चल रही थी कि खुफिया तंत्र को फिर से गृह मंत्रालय के अधीन किया जाए या प्रधानमंत्री कार्यालय के सीधे नियंत्रण में रखा जाए।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli की नीतियों की याद दिलाता है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में कई अहम विभागों को PMO के अधीन कर सत्ता को केंद्रीकृत किया था। उस समय उनकी सरकार पर विपक्ष और जनता ने तानाशाही शैली में शासन करने के आरोप लगाए थे।

    बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश Sushila Karki के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इन फैसलों को पलटते हुए खुफिया और अन्य एजेंसियों को उनके मूल मंत्रालयों के अधीन वापस कर दिया था। लेकिन अब बालेन शाह सरकार द्वारा इन्हें दोबारा PMO के अधीन लाने के फैसले ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

    जानकारों के मुताबिक, इस बदलाव के साथ ही राजस्व जांच विभाग को भी भंग कर दिया गया है, जिसे पहले ओली सरकार के दौरान PMO के अधीन किया गया था। इसे सीधे तौर पर सत्ता के बढ़ते केंद्रीकरण की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

    नेपाल की राजनीति में इस फैसले के बाद नई बहस छिड़ गई है कि क्या यह प्रशासनिक सुधार है या फिर सत्ता को एक ही केंद्र में सीमित करने की कोशिश। विपक्षी दलों और विशेषज्ञों का कहना है कि इससे संस्थागत संतुलन प्रभावित हो सकता है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने वाला कदम बता रही है।

  • नई शिक्षा नीति के अनुरूप CBSE का निर्णय: 9वीं कक्षा में तीन भाषाएं अनिवार्य, 1 जुलाई से लागू नियम

    नई शिक्षा नीति के अनुरूप CBSE का निर्णय: 9वीं कक्षा में तीन भाषाएं अनिवार्य, 1 जुलाई से लागू नियम

    नई दिल्ली । भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी बदलाव की घोषणा की गई है, जिसने स्कूल शिक्षा के ढांचे को नई दिशा देने की शुरुआत कर दी है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए एक नई भाषा नीति लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत अब छात्रों को कम से कम तीन भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।

    यह व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से पूरे देश के विद्यालयों में लागू की जाएगी और इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे के अनुरूप एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी क्षमता को विकसित करना, भारतीय भाषाओं के प्रति रुचि बढ़ाना और शिक्षा को अधिक समावेशी एवं व्यावहारिक बनाना है। नए नियम के अनुसार प्रत्येक छात्र को आर1, आर2 और आर3 के रूप में तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी आवश्यक हैं।

    यदि कोई छात्र विदेशी भाषा का चयन करता है तो उसे पहले दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा, इसके बाद ही वह तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में विदेशी भाषा चुन सकेगा। इस निर्णय को शिक्षा विशेषज्ञ छात्रों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं, क्योंकि इससे न केवल भाषाई दक्षता बढ़ेगी बल्कि सांस्कृतिक समझ और संचार कौशल भी मजबूत होंगे।

    बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 में आर3 भाषा के लिए किसी प्रकार की बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी, बल्कि इसका मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का अतिरिक्त बोझ कम करना और सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाना है।

    हालांकि, आर3 विषय का प्रदर्शन छात्रों के प्रमाणपत्र में दर्ज किया जाएगा, जिससे उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों का उचित मूल्यांकन हो सके। इस नीति के लागू होने से विद्यालयों को भी अपनी तैयारी मजबूत करनी होगी क्योंकि उन्हें योग्य भाषा शिक्षकों की व्यवस्था करनी होगी। जिन स्कूलों में संसाधनों की कमी है, वहां अंतर-विद्यालय सहयोग, ऑनलाइन शिक्षण और मिश्रित शिक्षण मॉडल का सहारा लिया जा सकता है।

    इसके अलावा सेवानिवृत्त शिक्षकों और योग्य स्नातकोत्तर उम्मीदवारों की सेवाएं लेने की भी अनुमति दी गई है ताकि शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी छात्र को इस नई व्यवस्था के कारण बोर्ड परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा और विशेष आवश्यकता वाले छात्रों के लिए आवश्यक छूट भी प्रदान की जाएगी। साथ ही विदेश से लौटने वाले छात्रों को भी विशेष परिस्थितियों में छूट देने का प्रावधान रखा गया है।

    कुल मिलाकर यह निर्णय भारतीय शिक्षा प्रणाली को एक बहुभाषी और आधुनिक ढांचे में ढालने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में छात्रों की भाषा क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई मजबूती प्रदान करेगा।

  • बिना OTP और कॉल के व्यापारी से बड़ी ठगी, सिम क्लोनिंग का शक

    बिना OTP और कॉल के व्यापारी से बड़ी ठगी, सिम क्लोनिंग का शक


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अब आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। नगर निगम ने करीब ₹2 करोड़ की लागत से एक AI आधारित फायर फाइटिंग रोबोट तैनात किया है, जो उन जगहों पर जाकर आग बुझा सकता है, जहां इंसानों का जाना बेहद खतरनाक होता है। यह रोबोट जयपुर की रोबोटिक्स कंपनी द्वारा विकसित किया गया है और इसे विशेष रूप से औद्योगिक और उच्च जोखिम वाली आग की घटनाओं के लिए तैयार किया गया है।

    कैसे काम करता है यह रोबोट?
    यह फायर फाइटिंग रोबोट पूरी तरह रिमोट ऑपरेटेड है और इसे दूर से नियंत्रित किया जाता है। इसमें लगा कैमरा और डिस्प्ले सिस्टम ऑपरेटर को लाइव स्थिति दिखाता है, जिससे यह पता चलता है कि आगे क्या हो रहा है। यह एक तरह का क्रॉलर टैंक सिस्टम है, जो खराब रास्तों, मलबे और सीढ़ियों पर भी आसानी से चल सकता है।

    500°C की आग में भी काम करने की क्षमता
    इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसकी गर्मी सहने की क्षमता है। यह लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम कर सकता है।

    इसके अलावा इसमें-
    थर्मल इमेजिंग कैमरा
    AI आधारित ऑब्जेक्ट डिटेक्शन
    हाई प्रेशर वाटर और फोम सिस्टम
    मजबूत क्रॉलर ट्रैक
    जैसी आधुनिक तकनीकें लगी हैं, जो इसे बेहद प्रभावी बनाती हैं।

    8 से 10 घंटे तक लगातार काम
    यह रोबोट एक बार चार्ज होने पर लगभग 8 से 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। इसकी बैटरी सिस्टम और कूलिंग तकनीक इसे लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करती है। यह फायर टैंकर से जुड़कर पानी और फोम दोनों के जरिए आग पर काबू पा सकता है।

    कहां-कहां किया जा चुका है इस्तेमाल?
    इंदौर में इस रोबोट का इस्तेमाल कई बड़े हादसों में किया गया है, जिनमें शामिल हैं-
    नवदा पंथ प्लास्टिक फैक्ट्री आग
    परदेशीपुरा की आग
    सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र की घटना
    पीथमपुर की बड़ी औद्योगिक आग
    इन सभी मामलों में इस रोबोट ने जोखिम भरे हालात में फायरफाइटिंग में अहम भूमिका निभाई।

    क्यों है यह तकनीक खास?
    यह रोबोट खास तौर पर उन जगहों के लिए बनाया गया है जहां-
    तेल और गैस प्लांट
    केमिकल और पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री
    बड़े गोदाम और लॉजिस्टिक हब
    बिजली संयंत्र और ट्रांसफॉर्मर यूनिट
    जैसे हाई रिस्क क्षेत्र शामिल हैं।
    यह लगभग 500 किलो तक का भार भी संभाल सकता है और भारी मलबे में भी आसानी से मूव कर सकता है।

    अधिकारियों का बयान
    नगर निगम कमिश्नर के अनुसार, यह रोबोट फायर टैंकर से जुड़कर काम करता है और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी लंबे समय तक आग बुझाने में सक्षम है। इससे फायरफाइटर्स की जान का जोखिम काफी कम हो जाता है। इंदौर का यह फायर फाइटिंग रोबोट आधुनिक आपदा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह तकनीक न सिर्फ आग बुझाने की क्षमता बढ़ाती है, बल्कि दमकलकर्मियों की सुरक्षा को भी नए स्तर पर ले जाती है।