Author: bharati

  • वॉट्सऐप की प्राइवेसी नीति पर छिड़ा विवाद… SC ने लगाई कड़ी फटकार… कहा- नागरिकों की निजता सर्वोपरि

    वॉट्सऐप की प्राइवेसी नीति पर छिड़ा विवाद… SC ने लगाई कड़ी फटकार… कहा- नागरिकों की निजता सर्वोपरि


    नई दिल्ली।
    क्या वाकई आपकी चैट पूरी तरह सुरक्षित है? इस सवाल के बीच भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court.) ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप (Instant messaging platform WhatsApp.) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि डेटा साझा करने के नाम पर देश के नागरिकों की निजता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा की डेटा-शेयरिंग व्यवस्था और प्राइवेसी पॉलिसी पर गंभीर नाराजगी जाहिर की है।

    कोर्ट ने दो टूक कहा कि भारतीय नागरिकों के प्राइवेसी अधिकारों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होगा। वॉट्सऐप डेटा साझा करने की आड़ में निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ तीन फरवरी को मेटा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। गौरतलब है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने वर्ष 2024 में वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने भी सही ठहराया।

    सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप की तथाकथित “टेक इट ऑर लीव इट” प्राइवेसी नीति पर भी सवाल उठाए। अदालत का कहना है कि आम यूजर्स इन जटिल शर्तों को ठीक से समझ ही नहीं पाते। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि कंपनी को भारतीय कानून और संविधान का पालन करना ही होगा, अन्यथा उसे देश छोड़ने तक का विकल्प चुनना पड़ सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी याचिका में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की गई है।


    क्या है वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी?

    वॉट्सऐप ने 8 फरवरी 2021 को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी लागू की थी। कंपनी का दावा है कि उसका एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पूरी तरह सुरक्षित है, यानी यूजर की चैट, वॉइस कॉल और तस्वीरें मेटा नहीं देख सकता। अगर रिसीवर का फोन अस्थायी रूप से बंद हो या वह ऑफलाइन हो, तो संदेश अधिकतम 30 दिनों तक वॉट्सऐप के सर्वर पर एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं ताकि बाद में डिलीवरी हो सके।

    हालांकि चैट कंटेंट निजी रहता है, लेकिन वॉट्सऐप यूजर के “मेटाडाटा” तक पहुंच रखता है। यूजर्स के सामने केवल दो ही विकल्प होते हैं—इन शर्तों को स्वीकार करना या ऐप का इस्तेमाल बंद कर देना।

    एआई आधारित साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स कंपनी इनेफ्यू लैब्स के को-फाउंडर और सीईओ तरुण विज के मुताबिक, वॉट्सऐप मेटाडाटा और व्यवहारिक संकेतों का उपयोग करता है। इसमें यह जानकारी शामिल होती है कि यूजर किससे, कितनी बार और किस समय बात करता है, उसका डिवाइस, लोकेशन, प्रोफाइल फोटो, ग्रुप मेंबरशिप और कॉन्टैक्ट लिस्ट। इसी आधार पर यूजर प्रोफाइलिंग की जाती है। मेटा इस डेटा को इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा कर सकता है, जिससे डेटा लीक और संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है।

    हालांकि यूरोप में यूरोपीय डेटा संरक्षण नियम (जीडीपीआर) के चलते ऐसी डेटा शेयरिंग पर सख्त सीमाएं हैं। तरुण विज बताते हैं कि वॉट्सऐप पर की गई गतिविधियां अन्य प्लेटफॉर्म्स पर दिखने वाले विज्ञापनों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि यूजर अपनी कितनी जानकारी साझा करना चाहता है।


    पहले भी घिर चुका है वॉट्सऐप

    वॉट्सऐप ने अपनी सफाई में कहा है कि उसकी मैसेजिंग सेवा मुफ्त है और दो लोगों के बीच की निजी चैट्स को कंपनी नहीं पढ़ती। वॉट्सऐप और मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि डेटा केवल यूजर की सहमति से ही साझा किया जाता है और प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।

    यह पहला मौका नहीं है जब वॉट्सऐप की नीतियों पर सवाल उठे हों। वर्ष 2021 में आयरलैंड के डेटा रेगुलेटर ने डेटा पारदर्शिता के नियमों के उल्लंघन पर वॉट्सऐप पर 225 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया था। जर्मनी की लाइपजिग रीजनल कोर्ट भी मेटा को दंडित कर चुकी है। अदालत ने कहा था कि मेटा के पास ऐसे टूल्स हैं जिनके जरिए वह यूजर्स के ऑनलाइन व्यवहार को ट्रैक कर टार्गेटेड विज्ञापनों से अरबों डॉलर कमाता है।


    सुरक्षा खामियों के आरोप

    पिछले वर्ष वॉट्सऐप के पूर्व सुरक्षा प्रमुख अत्ताउल्लाह बैग ने अमेरिका में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म पर रोजाना लाखों अकाउंट हैक हो रहे थे और सुरक्षा खामियों के चलते कर्मचारी यूजर्स का निजी डेटा देख सकते थे। बैग के अनुसार, बार-बार चेतावनी देने के बावजूद मेटा ने ठोस कदम नहीं उठाए।

    साल 2025 में शोधकर्ताओं ने “जीरो-क्लिक” हमलों का खुलासा किया, जिनमें बिना किसी क्लिक के वॉट्सऐप के जरिए आईफोन और मैक डिवाइस हैक कर लिए गए। इन हमलों में मैकओएस और आईओएस में इमेज प्रोसेसिंग की खामी और वॉट्सऐप के डिवाइस लिंकिंग फीचर की कमजोरी सामने आई।

    ऑस्ट्रिया के स्वतंत्र शोधकर्ताओं के एक समूह ने भी वॉट्सऐप में ऐसी कमी खोजी, जिसके जरिये 350 करोड़ फोन नंबर, प्रोफाइल फोटो, डिवाइस जानकारी, टाइमस्टैम्प और बिजनेस डिटेल्स तक पहुंच संभव हो गई थी।


    भारत में कानूनी स्थिति

    राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे बताते हैं कि वर्ष 2019 में वॉट्सऐप के जरिए पेगासस स्पायवेयर ने केवल एक मिस्ड कॉल से कई भारतीयों के फोन हैक कर लिए थे। यह स्पायवेयर इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने विकसित किया था। इस मामले में वॉट्सऐप ने एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।

    अमित दुबे के अनुसार, हाल के वर्षों में वॉट्सऐप ने चैट समरी और ऑटो-रिप्लाई जैसे एआई आधारित फीचर्स भी जोड़े हैं, जो यूजर की सहमति से सीमित परिस्थितियों में काम करते हैं। ऐसे में खासकर निजी, चिकित्सकीय या कानूनी बातचीत के दौरान सतर्क रहना जरूरी है।

    भारत में अभी बड़ी टेक कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए सख्त और प्रभावी कानूनों की कमी है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम मौजूद है, लेकिन यह पूरी तरह 13 मई 2027 से लागू होगा। ऐसे में नागरिकों के पास अदालत का रास्ता ही मुख्य विकल्प बचता है। पुट्टस्वामी फैसले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही निजता को मौलिक अधिकार घोषित कर चुका है।


    यूजर क्या करें?

    वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील पवन दुग्गल के अनुसार, आज कई सरकारी और निजी संस्थानों के आधिकारिक ग्रुप्स वॉट्सऐप पर चल रहे हैं, जो चिंता का विषय है। स्पष्ट कानूनी ढांचे के अभाव में डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी काफी हद तक यूजर पर ही है। वे सलाह देते हैं कि ऐप इस्तेमाल करने से पहले उसकी शर्तें और नीतियां ध्यान से पढ़ी जाएं।

    टेकयुगो के सीईओ अभिनव सिंह का कहना है कि प्राइवेसी को लेकर चिंतित यूजर्स सिग्नल, टेलीग्राम या आईफोन पर आईमैसेज जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। सिग्नल विज्ञापनों के लिए डेटा का इस्तेमाल नहीं करता और टेलीग्राम में “सीक्रेट चैट” का विकल्प मिलता है। हालांकि, लोकप्रियता के मामले में ये प्लेटफॉर्म अभी भी वॉट्सऐप से पीछे हैं।

  • पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार

    पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार


    पुणे।
    मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) (Military Engineering Services – MES) में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे के खड़की क्षेत्र से दो अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। सीबीआई ने यह कार्रवाई 5 फरवरी को सुनियोजित ट्रैप के जरिए की, जिसमें जूनियर इंजीनियर को शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया गया। रिश्वत की पूरी रकम उनके कार्यालय से बरामद कर ली गई है, जबकि असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर को भी इस साजिश में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।

    सीबीआई के अनुसार, दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है। एजेंसी ने बताया कि यह केस 3 फरवरी को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता एक निजी कंपनी का पावर ऑफ अटॉर्नी धारक है, जिसने आरोप लगाया था कि कार्य पूरा होने और जरूरी प्रमाणपत्र जमा करने के बावजूद भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा था, ताकि रिश्वत की मांग की जा सके।

    शिकायत में यह भी सामने आया कि शुरुआत में दोनों अधिकारियों ने भुगतान जारी करने के बदले 6 लाख रुपये की मांग की थी। बाद में बातचीत के बाद यह सौदा पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये पर तय हुआ। रिश्वत की मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने सीबीआई से संपर्क किया, जिसके बाद एजेंसी ने जाल बिछाया और आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।


    छापेमारी में मिला अतिरिक्त कैश

    ट्रैप के तुरंत बाद सीबीआई ने दोनों अधिकारियों के आवासीय और कार्यालय परिसरों पर छापेमारी की। इस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ 1 लाख 88 हजार 500 रुपये की अनएक्सप्लेन्ड नकदी भी बरामद की गई। एजेंसी का कहना है कि यह रकम उनकी ज्ञात वैध आय से अधिक प्रतीत होती है और इसकी जांच की जा रही है।

    प्राथमिक जांच में यह मामला सिर्फ एक रिश्वत लेनदेन तक सीमित नहीं दिख रहा है, बल्कि इसे एक संगठित प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें ठेकेदारों को भुगतान के लिए दबाव बनाकर अवैध वसूली की जाती थी। ऐसे कृत्य न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि रक्षा से जुड़े संवेदनशील विभागों में भरोसे को भी कमजोर करते हैं।

    सीबीआई ने कहा है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है और अतिरिक्त सबूत जुटाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाइयां न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मददगार होती हैं, बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही और विश्वास को भी मजबूत करती हैं।

  • कांग्रेस से निष्कासन के बाद नवजोत कौर सिद्धू का तीखा हमला, राहुल गांधी पर की कड़ी टिप्पणी

    कांग्रेस से निष्कासन के बाद नवजोत कौर सिद्धू का तीखा हमला, राहुल गांधी पर की कड़ी टिप्पणी


    चंडीगढ़।
    कांग्रेस पार्टी (Congress Party.) ने पूर्व क्रिकेटर और पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू (Navjot Kaur Sidhu.) को संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस फैसले की जानकारी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने अमृतसर में मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि नवजोत कौर सिद्धू (Navjot Kaur Sidhu) पहले से ही पार्टी से निलंबित थीं और अब संगठन ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें निष्कासित कर दिया है।

    भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस में अनुशासन सर्वोपरि है और पार्टी विरोधी गतिविधियों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले नवजोत कौर सिद्धू खुद सार्वजनिक मंच से कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर चुकी थीं। इसके बावजूद पार्टी ने संगठनात्मक नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें बाहर करने का निर्णय लिया।


    सोशल मीडिया पर निकाली भड़ास

    पार्टी से निष्कासन के बाद नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें “पप्पू” तक कह दिया। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी ने आखिरकार अपने नाम को सही साबित कर दिया है। उनके मुताबिक, राहुल खुद को अकेला ईमानदार और समझदार नेता मानते हैं, जबकि उन्हें जमीनी हकीकत की कोई समझ नहीं है।

    नवजोत कौर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के आसपास मौजूद लोग उन्हें वास्तविक स्थिति से दूर रखते हैं और फैसले होने से पहले ही टिकट बेचकर ऐश करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी इमरजेंसी कॉल का जवाब देने में राहुल को छह महीने से ज्यादा लग जाते हैं, जिससे तब तक नुकसान हो चुका होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि लोगों को साथ जोड़ने से पहले राहुल को अपने तथाकथित समर्थकों से पूछना चाहिए कि क्या वे ईमानदारी से पंजाब के लिए काम करना चाहते हैं।


    राहुल गांधी पर आगे भी साधा निशाना

    अपनी पोस्ट में नवजोत कौर ने आगे कहा कि राहुल गांधी के पास न तो जमीनी सच्चाई सुनने का समय है और न ही इच्छाशक्ति, क्योंकि वे अपनी बनाई हुई दुनिया में रहना पसंद करते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल के अधिकांश समर्थक नि:स्वार्थ सेवा के बजाय अपनी जेबें भरने में लगे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि वे दोबारा सत्ता में नहीं लौटने वाले।

    उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर राहुल में हिम्मत है तो वे अपने समर्थकों से मौजूदा सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने को कहें और अपनी फाइलें खुलवाने के लिए भी तैयार रहें। नवजोत कौर ने राहुल को सलाह दी कि उन्हें सच बोलना और उसका सामना करना सीखना चाहिए, क्योंकि सच वही रहता है जो था और जो है।


    राजनीति और पंजाब पर टिप्पणी

    नवजोत कौर सिद्धू ने खुद को एक शुभचिंतक बताते हुए राहुल गांधी को ज्यादा संवेदनशील, व्यावहारिक और ग्रहणशील बनने की सलाह दी। उन्होंने दावा किया कि राहुल के ज्यादातर कथित समर्थक भाजपा में जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि न तो वे किसी से मिलने गई हैं और न ही कोई उनके पास आया है। उनके अनुसार, वे एक फाउंडेशन के माध्यम से काम कर सकती हैं, लेकिन उनका समय और ऊर्जा केवल पंजाब की भलाई के लिए समर्पित है।

    उन्होंने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि जब पार्टी में भ्रष्ट नेताओं को सम्मान मिलता है, तब ईमानदारी और सच्चाई की बातें बेमानी हो जाती हैं। अंत में उन्होंने राहुल गांधी को “गुड लक” कहते हुए राजनीति में अपना वजूद बचाने की नसीहत दी।


    बीजेपी को लेकर भी की टिप्पणी

    एक अन्य पोस्ट में नवजोत कौर सिद्धू ने भारतीय जनता पार्टी की तारीफ भी की। उन्होंने लिखा कि बीजेपी ने उनके टैलेंट को पहचाना और निष्पक्ष सर्वे के आधार पर उन्हें वर्ष 2012 में विधायक का टिकट दिया। उस समय वे अस्पताल में कार्यरत थीं और डॉक्टर होने के कारण उन्हें सीएपीएस हेल्थ की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा कि बीजेपी में उन्हें ईमानदारी और सच्चाई से काम करने की पूरी आजादी मिली और वे किसी भी विभाग में जाकर उसी दिन काम निपटाकर लौट सकती थीं।

  • 'धुरंधर' देख छलक उठा सुनील शेट्टी का दर्द: आदित्य धर की इस महाफिल्म के बंद होने का आज भी है मलाल

    'धुरंधर' देख छलक उठा सुनील शेट्टी का दर्द: आदित्य धर की इस महाफिल्म के बंद होने का आज भी है मलाल


    नई दिल्ली । इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर निर्देशक आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ का जबरदस्त डंका बज रहा है। फिल्म की अपार सफलता के बाद अब इसके दूसरे भाग ‘धुरंधर 2’ का टीजर भी रिलीज हो चुका है जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। इसी बीच बॉलीवुड के ‘अन्ना’ यानी सुनील शेट्टी ने आदित्य धर के साथ काम न कर पाने को लेकर अपनी निराशा जाहिर की है। सुनील शेट्टी ने खुलासा किया कि वह आदित्य धर की उस फिल्म का अहम हिस्सा थे जिसका इंतजार पूरी दुनिया को था लेकिन अफसोस कि वह फिल्म कभी बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच पाई।

    हाथ से निकली ‘द इम्मोर्टल अश्वत्थामा’ हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सुनील शेट्टी ने बताया कि वह आदित्य धर की मेगा-बजट फिल्म ‘द इम्मोर्टल अश्वत्थामा’ में काम करने वाले थे। इस फिल्म में उनके साथ विक्की कौशल लीड रोल में थे। सुनील ने भारी मन से खुलासा किया कि बजट की सीमाओं और मार्केट बिहेवियर में आए बदलाव के कारण आदित्य धर को इस प्रोजेक्ट को बंद करने का कठिन फैसला लेना पड़ा। सुनील शेट्टी ने कहा कि ‘धुरंधर’ देखने के बाद मुझे महसूस हुआ कि आदित्य एक शानदार विजन वाले निर्देशक हैं और मुझे उनके साथ काम न कर पाने का अफसोस है।

    रणवीर सिंह को बताया सबसे बड़ा परफॉर्मर फिल्म ‘धुरंधर’ के कलाकारों की तारीफ करते हुए सुनील शेट्टी ने बेहद बेबाक राय रखी। जहाँ पूरी दुनिया अक्षय खन्ना के अभिनय की मुरीद है वहीं सुनील शेट्टी का मानना है कि रणवीर सिंह और आदित्य धर ने उनसे भी बेहतर काम किया है। उन्होंने तर्क दिया कि अक्षय खन्ना के किरदार को बैकग्राउंड म्यूजिक और शानदार प्रेजेंटेशन की वजह से काफी माइलेज मिला लेकिन रणवीर सिंह के पास ऐसा कोई सहारा नहीं था फिर भी वह पर्दे पर अपनी चमक छोड़ने में कामयाब रहे। सुनील के मुताबिक रणवीर एक जन्मजात परफॉर्मर हैं।

    आदित्य धर के विजन के कायल हुए ‘अन्ना’ फिल्म मेकिंग की बारीकियों पर चर्चा करते हुए सुनील ने कहा कि आदित्य धर ने दर्शकों की नब्ज को बखूबी पहचाना है। आज के दौर में जहाँ लोगों का अटेंशन स्पैन कम होता जा रहा है वहाँ आदित्य ने 3 घंटे 40 मिनट की लंबी फिल्म बनाने का जोखिम उठाया और सफल रहे। सुनील शेट्टी ने कहा कि आदित्य जानते थे कि कोरोना काल के बाद लोग लंबी वेब सीरीज देखने के आदी हो चुके हैं और इसी आदत को उन्होंने सिनेमाई अनुभव में तब्दील कर दिया। उनका यह आत्मविश्वास ही उन्हें एक महान निर्देशक बनाता है।

  • गरीब नहीं, संघर्षशील महिला कहिए- वकील की दलील पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी

    गरीब नहीं, संघर्षशील महिला कहिए- वकील की दलील पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में रोजाना सैकड़ों मामलों की सुनवाई होती है, लेकिन शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice- CJI) सूर्यकांत (Suryakant.) की टिप्पणी ने सबका ध्यान खींच लिया। मामला एक महिला से जुड़ी लंबित क्लेम याचिका का था, जो लंबे समय से हाई कोर्ट (High Court) में विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान जब महिला की ओर से पेश वकील ने उसे “गरीब महिला” बताया, तो इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने तीखा और चर्चा में रहने वाला जवाब दिया।

    लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता एक गरीब महिला है, सीजेआई सूर्यकांत ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए पूछा, “वह सुप्रीम कोर्ट आने से पहले गरीब थी या सुप्रीम कोर्ट आने के बाद गरीब हुई है?”

    सीजेआई ने वकील को आगे समझाते हुए कहा कि अदालत के सामने इस तरह की शब्दावली का प्रयोग न किया जाए। उन्होंने कहा कि उसे गरीब महिला कहने के बजाय “फाइटर महिला” कहा जाना चाहिए, जो तब तक शांत नहीं बैठेगी जब तक उसका पूरा दावा तार्किक अंजाम तक नहीं पहुंच जाता। सीजेआई ने यह भी जोड़ा कि जब कोई महिला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची है, तो उसे कमजोर या गरीब बताने की जरूरत क्यों पड़ती है।

    यह मामला हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट से संबंधित है, जहां महिला का केस करीब 11 वर्षों से लंबित है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह आग्रह किया गया है कि हाई कोर्ट को निर्देश दिया जाए ताकि मामले की सुनवाई शीघ्र पूरी हो और फैसला सुनाया जा सके।

    इसी दिन एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि अदालतें किसी महिला, विशेषकर नाबालिग लड़की को, जबरन गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं।

    पीठ के समक्ष यह मामला आया था कि एक नाबालिग लड़की पड़ोस के एक लड़के के साथ संबंध में थी और उसी दौरान वह गर्भवती हो गई। लड़की ने अदालत से चिकित्सकीय रूप से गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति मांगी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के जेजे अस्पताल को निर्देश दिया कि नाबालिग की गर्भावस्था को मेडिकल प्रक्रिया के तहत समाप्त किया जाए। साथ ही अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि इस दौरान सभी जरूरी चिकित्सकीय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए।

    इन दोनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को महिला अधिकारों और न्याय तक पहुंच के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।

  • J&K: अनंतनाग में ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल पर बड़ी कार्रवाई… NIA ने की मेडिकल कॉलेज पर छापामारी

    J&K: अनंतनाग में ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल पर बड़ी कार्रवाई… NIA ने की मेडिकल कॉलेज पर छापामारी


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency- NIA) ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के अनंतनाग जिले (Anantnag district) में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में छापेमारी की है। यह कार्रवाई ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी है, जिसमें शिक्षित और प्रतिष्ठित पेशेवर शामिल हैं—जैसे डॉक्टर, तकनीशियन और अन्य लोग—जो पारंपरिक आतंकवादी प्रोफाइल से अलग हैं। एनआईए की टीम ने कॉलेज परिसर में तलाशी ली और खास तौर पर एक डॉक्टर के लॉकर से राइफल बरामद होने के संबंध में साक्ष्य जुटाए।

    यह मॉड्यूल ‘व्हाइट कॉलर’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें आम आतंकवादियों के बजाय समाज के सम्मानित वर्ग के लोग शामिल थे। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने दस्तावेजों और अन्य सबूतों की खोज की, ताकि इस नेटवर्क के गहरे संबंधों और संरचना का पता लगाया जा सके।

    जांच की शुरुआत और लाल किले विस्फोट
    इस जांच की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई, जब दिल्ली के लाल किले के पास एक कार बम विस्फोट हुआ, जिसमें कई लोगों की मौत हुई। इस हमले के बाद ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ, जिसमें डॉक्टरों का एक समूह शामिल था। इस मामले में प्रमुख आरोपी डॉ. आदिल अहमद रदर है, जो पहले GMC अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर रह चुका था। उसकी गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हुई, जहां वह एक निजी अस्पताल में काम कर रहा था।

    डॉ. रदर के लॉकर से AK-56 राइफल और गोला-बारूद बरामद हुआ, जिसके बाद मामला एनआईए को सौंप दिया गया। अब तक इस मॉड्यूल से जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और फरीदाबाद से बड़ी मात्रा में विस्फोटक जब्त किए गए हैं।


    जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

    जांच में यह भी पता चला कि डॉ. आदिल अहमद रदर कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपोरा का रहने वाला है और उसने श्रीनगर के GMC से MBBS की डिग्री हासिल की थी। एनआईए के दावे के मुताबिक, वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा था और दिल्ली में हुए विस्फोट में उसकी भूमिका थी।

    मॉड्यूल में अन्य डॉक्टर भी शामिल थे, जिनमें डॉ. मुजामिल अहमद गनाई और डॉ. शाहीन सईद का नाम सामने आया है। एनआईए ने बताया कि यह समूह पिछले चार वर्षों से सक्रिय था और वैश्विक कॉफी चेन जैसी जगहों पर हमले की साजिश रच रहा था। उनका लक्ष्य इजराइल-गाजा संघर्ष से प्रेरित होकर ऐसे हमले करना था। कुछ सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की भी योजना बनाई थी।


    आतंकवाद का नया चेहरा

    यह मामला आतंकवाद के एक नए रूप को दर्शाता है, जहां समाज के प्रतिष्ठित पेशेवर कट्टरपंथी विचारधारा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं और अपनी शिक्षा तथा सामाजिक स्थिति का गलत उपयोग कर रहे हैं। एनआईए की यह छापेमारी मॉड्यूल के बचे हुए सदस्यों और उनके नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    जांच अभी जारी है और भविष्य में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। इस तरह के मॉड्यूल समाज के लिए अधिक खतरनाक माने जाते हैं, क्योंकि ये सामान्य जीवन में घुलमिलकर काम करते हैं और अपनी पहचान छुपाते हैं। कुल मिलाकर, यह घटना सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तेज कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करती है।

  • इस CM का राज्य के प्रबुद्धजन ही कर रहे विरोध… Ex IAS, डॉक्टरों और लेखकों ने चीफ जस्टिस से लगाई ये गुहार?

    इस CM का राज्य के प्रबुद्धजन ही कर रहे विरोध… Ex IAS, डॉक्टरों और लेखकों ने चीफ जस्टिस से लगाई ये गुहार?


    नई दिल्ली।
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा (Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के खिलाफ राज्य के 40 से अधिक रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों (Retired IAS officers), डॉक्टरों, शिक्षाविदों, लेखकों, पत्रकारों और अन्य प्रसिद्ध नागरिकों ने खुलकर विरोध जताया है। इन प्रबुद्ध नागरिकों ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के कथित “नफरती भाषण” और एक विशेष समुदाय के खिलाफ दिए गए विवादित बयानों पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि संवैधानिक उल्लंघनों के प्रति चुप्पी या निष्क्रियता संविधान की नैतिक शक्ति को कमजोर कर सकती है।

    पत्र में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ( Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने कई सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान दिए हैं जो प्रथम दृष्टया नफरती भाषण, सरकारी धमकी और एक खास समुदाय को बदनाम करने जैसे प्रतीत होते हैं। चिट्ठी में विशेष रूप से मुख्यमंत्री के ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुसलमानों) के खिलाफ दिए गए टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है। इन लोगों ने चीफ जस्टिस से मांग की है कि वह इस मामले में संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करें।


    CM के बयान को संविधान विरोधी बताया

    पत्र में कहा गया है कि बांग्ला भाषी मुसलमान असम के समाज का हिस्सा बन चुके हैं, और मुख्यमंत्री के बयान अमानवीय, सामूहिक बदनामी और राज्य प्रायोजित उत्पीड़न की धमकियों जैसे हैं। यह टिप्पणी संविधान की भावना के खिलाफ मानी जा रही है। यहाँ यह भी महत्वपूर्ण है कि ‘मियां’ शब्द असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए अपमानजनक रूप से इस्तेमाल होता है। गैर-बांग्ला भाषी लोग इन्हें अक्सर बांग्लादेशी प्रवासी मानते हैं, जिससे समुदाय पर सामाजिक और राजनीतिक दबाव बढ़ता है।


    पत्र पर साइन करने वालों में कौन-कौन?

    गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखी इस चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों में कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। इनमें विद्वान डॉ. हिरेन गोहेन, असम के पूर्व DGP हरेकृष्ण डेका, गुवाहाटी के पूर्व आर्कबिशप थॉमस मेनमपारामपिल, राज्यसभा सांसद अजीत कुमार भुइयां, रिटायर्ड IAS अधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। ज्ञापन में हस्ताक्षर करने वालों ने कहा है कि वे मौलिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में गुवाहाटी हाई कोर्ट की संवैधानिक भूमिका में पूर्ण विश्वास रखते हैं और इसी विश्वास के साथ अदालत से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।


    हाई कोर्ट से क्या मांग की गई?

    पत्र में हाई कोर्ट से कई महत्वपूर्ण निर्देशों की मांग की गई है, जिनमें शामिल हैं:
    उचित मामले दर्ज करने के निर्देश
    प्रभावित समुदाय की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय
    सार्वजनिक पद धारकों के लिए संवैधानिक अनुशासन की पुष्टि

    धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने का निर्देश
    विशेष रूप से, यह मांग की गई है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट संविधान की मूल संरचना के हिस्से के रूप में धर्मनिरपेक्षता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए। यह ज्ञापन असम में बढ़ते सामाजिक तनाव और भाषणों के संभावित प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता का संकेत है, और इससे राज्य में संवैधानिक मूल्यों और साम्प्रदायिक सौहार्द की रक्षा के मुद्दे फिर से सामने आए हैं।

  • श्रीलंका को लगा जोर का झटका: टी20 वर्ल्ड कप से बाहर हुए तेज गेंदबाज ईशान मलिंगा

    श्रीलंका को लगा जोर का झटका: टी20 वर्ल्ड कप से बाहर हुए तेज गेंदबाज ईशान मलिंगा


    नई दिल्ली । आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 का बिगुल आज यानी 7 फरवरी से बजने जा रहा है लेकिन टूर्नामेंट के पहले ही दिन श्रीलंका क्रिकेट के खेमे से एक निराशाजनक खबर सामने आई है। टीम के उभरते हुए 25 वर्षीय तेज गेंदबाज ईशान मलिंगा कंधे की गंभीर चोट के कारण इस मेगा इवेंट से बाहर हो गए हैं। मलिंगा का बाहर होना श्रीलंका के लिए एक बड़ा सामरिक नुकसान माना जा रहा है क्योंकि वह टीम के गेंदबाजी आक्रमण की अहम कड़ी थे।

    इंग्लैंड सीरीज के दौरान लगी थी चोट रिपोर्ट्स के अनुसार ईशान मलिंगा को हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ संपन्न हुई टी20 सीरीज के दौरान कंधे में चोट लगी थी। बोर्ड को उम्मीद थी कि वह समय रहते फिट हो जाएंगे लेकिन मेडिकल टीम के गहन परीक्षण के बाद उन्हें आराम की सलाह दी गई है। मलिंगा की गैरमौजूदगी में श्रीलंका की डेथ ओवरों की रणनीति पर गहरा असर पड़ सकता है। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (SLC) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उनके विकल्प की घोषणा की है जिसे आईसीसी की तकनीकी समिति ने भी अपनी हरी झंडी दे दी है। मलिंगा के स्थान पर अब दाएं हाथ के तेज गेंदबाज प्रमोद मदुशन श्रीलंका की जर्सी में नजर आएंगे।

    8 फरवरी को पहला मुकाबला श्रीलंका को इस टूर्नामेंट के ग्रुप B में रखा गया है जहाँ उसका सामना ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, ओमान और जिम्बाब्वे जैसी टीमों से होगा। लंकाई टीम अपने अभियान की शुरुआत कल यानी 8 फरवरी को कोलंबो के ऐतिहासिक आर प्रेमदासा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयरलैंड के खिलाफ करेगी। घरेलू परिस्थितियों में खेलते हुए टीम पर मलिंगा की कमी को न खलने देने का भारी दबाव होगा।

    बदली हुई लंकाई टीम पर एक नजर मदुशन के आने से टीम के अनुभव में इजाफा हुआ है। टीम की कमान दासुन शनाका के हाथों में है और उनके पास वानिंदु हसरंगा, महीश थीक्षाना और मथीशा पथिराना जैसे विश्व स्तरीय गेंदबाज मौजूद हैं। हालांकि मलिंगा की सटीक यॉर्कर और गति को रिप्लेस करना कप्तान शनाका के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। अब देखना यह है कि ऐन मौके पर हुए इस बदलाव के बावजूद क्या श्रीलंका अपने घर में वर्ल्ड कप का विजयी आगाज कर पाती है या नहीं।

    अपडेटेड श्रीलंका टी20 वर्ल्ड कप स्क्वॉड:
    दासुन शनाका (कप्तान), पथुम निसांका, कामिल मिशारा, कुसल मेंडिस, कामिन्दु मेंडिस, कुसल जेनिथ परेरा, चैरिथ असलांका, जेनिथ लियानागे, पवन रथनायके, वानिंदु हसरंगा, डुनिथ वेललागे, महीश थीक्षाना, दुष्मंथा चमीरा, मथीशा पथिराना, प्रमोद मदुशन।

  • रिकॉर्ड्स के सुल्तान बने वैभव सूर्यवंशी, फाइनल और टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का दोहरा खिताब

    रिकॉर्ड्स के सुल्तान बने वैभव सूर्यवंशी, फाइनल और टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का दोहरा खिताब


    नई दिल्ली । क्रिकेट के मैदान पर जब प्रतिभा और जुनून का संगम होता है तो इतिहास जन्म लेता है और दक्षिण अफ्रीका की धरती पर कुछ ऐसा ही करिश्मा 14 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने कर दिखाया है। अंडर-19 वर्ल्ड कप के हाई-वोल्टेज फाइनल मुकाबले में वैभव ने इंग्लैंड के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए वह कर दिखाया जो आज तक इस स्तर पर कोई नहीं कर सका था। वैभव की 175 रनों की तूफानी पारी की बदौलत भारत ने न केवल इंग्लैंड को 100 रनों से पटखनी दी बल्कि रिकॉर्ड छठी बार अंडर-19 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमाया।

    ऐतिहासिक पारी और रिकॉर्ड्स की झड़ी मैच की शुरुआत से ही वैभव के इरादे साफ थे। उन्होंने मैदान के चारों ओर चौकों और छक्कों की ऐसी बारिश की कि विपक्षी टीम के पास कोई जवाब नहीं था। वैभव ने महज 71 गेंदों में अपना 150 रन पूरा किया जो अंडर-19 क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज व्यक्तिगत स्कोर है। उनकी 175 रनों की पारी में 15 गगनचुंबी छक्के और 15 दर्शनीय चौके शामिल रहे। यह किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है। वैभव के इस प्रलयंकारी प्रदर्शन की मदद से भारत ने निर्धारित 50 ओवरों में 9 विकेट खोकर 411 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया।

    भावुक पल और समर्पण मैच के बाद जब प्रेजेंटेशन सेरेमनी में वैभव को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ और ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ के पुरस्कारों से नवाजा गया तो वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। आंखों में खुशी के आंसू लिए वैभव ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय टीम के सपोर्ट स्टाफ को दिया। उन्होंने कहा कि मैं इस अहसास को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। पिछले 7-8 महीनों से हम सभी ने जो मेहनत की है यह उसका परिणाम है। हमारे सपोर्ट स्टाफ ने हर मोड़ पर हमारा साथ दिया चाहे बात हमारी फिटनेस की हो या मानसिक मजबूती की। वैभव ने अपना प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड समर्पित करते हुए कहा कि यह जीत और यह सम्मान उन्हीं के मार्गदर्शन का नतीजा है।

    मैच का लेखा-जोखा लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम वैभव के प्रहारों के सदमे से उबर नहीं पाई। हालांकि कालेब फाल्कनर ने 67 गेंदों में 115 रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेलकर उम्मीदें जगाईं लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर इंग्लैंड की पारी को 311 रनों पर समेट दिया। वैभव सूर्यवंशी ने न केवल बल्ले से बल्कि पूरे टूर्नामेंट में अपनी उपयोगिता साबित की। उन्होंने कुल 439 रन बनाए और एक महत्वपूर्ण विकेट भी झटका।

    आईपीएल में अपनी छोटी सी झलक दिखाने वाले वैभव अब विश्व क्रिकेट के नए पोस्टर बॉय बनकर उभरे हैं। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल भारतीय क्रिकेट के भविष्य को सुरक्षित दिखाया है बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि उम्र महज एक संख्या है जब आपके पास प्रतिभा और संकल्प की शक्ति हो।

  • यात्रा से पहले दिखने वाले संकेत:भारतीय लोकमान्यताओं में शुभ और अशुभ संकेतों का इतिहास

    यात्रा से पहले दिखने वाले संकेत:भारतीय लोकमान्यताओं में शुभ और अशुभ संकेतों का इतिहास


    नई दिल्ली।भारत में यात्रा को केवल एक जगह से दूसरी जगह जाने तक सीमित नहीं माना गया बल्कि इसे निर्णय जोखिम और परिणाम से जुड़ी प्रक्रिया समझा गया है। यही वजह है कि परंपरागत समाज में यात्रा के समय आसपास घटने वाली घटनाओं और दृश्य संकेतों को विशेष महत्व दिया गया। समय के साथ इन संकेतों को शुभ और अशुभ में वर्गीकृत किया गया जो आज भी जनमानस में प्रचलित हैं।

    समाजशास्त्रियों के अनुसार जब वैज्ञानिक जानकारी और पूर्वानुमान के साधन सीमित थे तब मनुष्य अपने अनुभवों के आधार पर प्रकृति और जीव-जंतुओं के व्यवहार को समझने की कोशिश करता था। यात्रा के दौरान बार-बार घटने वाली घटनाओं से लोगों ने निष्कर्ष निकाले और इन्हें संकेतों का रूप दिया। यही प्रक्रिया आगे चलकर शकुन परंपरा के रूप में स्थापित हुई।

    लोक मान्यताओं में कुछ पशु और पक्षियों को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया। यात्रा के समय मोर नीलगाय या नेवले का दिखना कई क्षेत्रों में शुभ संकेत माना जाता रहा। ग्रामीण समाज में आज भी इन दृश्यों को यात्रा की सफलता और कार्य में लाभ से जोड़ा जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे विश्वास व्यक्ति को मानसिक रूप से निश्चिंत करते हैं और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।

    कुछ संकेत सीधे मानव जीवन और सामाजिक मूल्यों से जुड़े हैं। जैसे घर से निकलते समय किसी शांत व्यक्ति गाय या जल से भरे पात्र का दिखना संतुलन स्थिरता और समृद्धि का संकेत माना गया। इतिहासकार बताते हैं कि ये प्रतीक उस समय के सामाजिक और धार्मिक मूल्यों को दर्शाते हैं जब शुद्धता और संतुलन को जीवन का आधार माना गया।

    भारतीय लोक परंपरा में पक्षियों की आवाज़ और दिशा पर भी ध्यान दिया जाता रहा। शांत स्वर में बोलती चिड़िया या स्थिर बैठे पक्षी को लाभकारी माना गया जबकि अचानक घबराहट में उड़ते पक्षियों को सतर्कता का संकेत माना गया। यह पर्यावरणीय बदलावों को समझने की मानवीय कोशिश भी हो सकती है।कुछ मान्यताओं में यह देखा गया कि संकेत किस दिशा से दिखाई दे रहे हैं। दाईं ओर दिखने वाली गतिविधियों को कई क्षेत्रों में सकारात्मक माना गया। ये विश्वास क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार विकसित हुए हैं।

    मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से ऐसे संकेत व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर असर डालते हैं। सकारात्मक संकेत आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और बेहतर निर्णय में मदद करते हैं जबकि नकारात्मक संकेत सतर्कता और जोखिम कम करने में सहायक साबित होते हैं।आधुनिक समय में शहरों और तकनीकी समाज में इन संकेतों को अब व्यक्तिगत आस्था के रूप में देखा जाता है। हालांकि ये पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन्हें अंधविश्वास न मानकर सांस्कृतिक विरासत और व्यवहारिक मनोविज्ञान के संदर्भ में समझना चाहिए।