Author: bharati

  • महंगे ट्रीटमेंट छोड़िए! किचन में मौजूद इन 5 देसी नुस्खों से बाल बनेंगे घने और मजबूत

    महंगे ट्रीटमेंट छोड़िए! किचन में मौजूद इन 5 देसी नुस्खों से बाल बनेंगे घने और मजबूत


    नई दिल्ली।आज के दौर में प्रदूषण तनाव और गलत लाइफस्टाइल का सबसे पहला असर हमारे बालों पर पड़ता है। बालों का झड़ना रूखापन दोमुंहे बाल और कमजोर जड़ें अब आम समस्या बन चुकी हैं। ऐसे में लोग अक्सर महंगे सैलून ट्रीटमेंट और केमिकल प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं जो कुछ समय के लिए फायदा तो देते हैं लेकिन लंबे समय में बालों को और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ बालों के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं बल्कि प्राकृतिक देखभाल ज्यादा जरूरी है। अच्छी बात यह है कि आपकी रसोई में ही ऐसी कई चीजें मौजूद हैं जो बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें घना मजबूत और चमकदार बना सकती हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 देसी और असरदार हेयर मास्क के बारे में।

    एलोवेरा और नारियल तेल
    एलोवेरा में मौजूद प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम स्कैल्प की डेड स्किन हटाकर उसे स्वस्थ बनाते हैं। नारियल तेल बालों की जड़ों में नमी पहुंचाकर टूटने से बचाता है।कैसे लगाएं: एलोवेरा जेल और नारियल तेल मिलाकर स्कैल्प की मसाज करें और 30 मिनट बाद धो लें।

    अंडा और दही
    बाल केराटिन से बने होते हैं और अंडा प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है। दही बालों को कंडीशन करता है और उन्हें सॉफ्ट बनाता है।विधि: एक अंडा और आधा कप दही फेंटकर जड़ों से लेकर बालों की लंबाई तक लगाएं।
    सावधानी: इसे धोने के लिए ठंडे पानी का ही इस्तेमाल करें।

    प्याज का रस और शहद
    प्याज में मौजूद सल्फर ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और नए बालों के उगने में मदद करता है। शहद बालों की नमी को लॉक करता है।
    टिप: रुई की मदद से सिर्फ स्कैल्प पर लगाएं और 20–30 मिनट बाद माइल्ड शैम्पू से धो लें।

    मेथी दाना और सरसों तेल
    मेथी बालों के फॉलिकल्स को मजबूत करती है जबकि सरसों का तेल स्कैल्प को पोषण और गर्माहट देता है।
    प्रयोग: रातभर भीगी मेथी पीसकर उसमें सरसों तेल मिलाएं और 1 घंटे तक लगाकर रखें।

    केला और जैतून का तेल

    दोमुंहे और बेजान बालों के लिए यह मास्क बेहद फायदेमंद है। यह बालों की इलास्टिसिटी बढ़ाता है और टूटने से बचाता है।
    कैसे लगाएं: पका केला मैश कर उसमें जैतून का तेल मिलाएं और 20–25 मिनट बाद धो लें।

    जरूरी सलाह
    किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। बेहतर परिणाम के लिए इनमें से किसी एक मास्क का इस्तेमाल हफ्ते में एक बार नियमित रूप से करें।याद रखें सुंदर और मजबूत बालों के लिए धैर्य और प्राकृतिक देखभाल सबसे बड़ा इलाज है।

  • गनमास्टर जी9’ से जेनेलिया देशमुख की नई पारी, एक्शन और जासूसी में दिखेगा नया अवतार

    गनमास्टर जी9’ से जेनेलिया देशमुख की नई पारी, एक्शन और जासूसी में दिखेगा नया अवतार


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में अपनी मासूम मुस्कान और चुलबुले अभिनय से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री जेनेलिया देशमुख एक बार फिर दर्शकों के सामने नए अवतार में लौटने जा रही हैं। चुनिंदा फिल्मों के बाद जेनेलिया अब अपने करियर की एक नई शुरुआत कर रही हैं। उन्होंने अपनी अगली फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी है और इसे अपने लिए एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।जेनेलिया ने इस नई शुरुआत की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक तस्वीर साझा की जिसमें उनका साइड प्रोफाइल नजर आ रहा है। तस्वीर के साथ उन्होंने सिर्फ दो शब्द लिखे-नई शुरुआत। इस पोस्ट ने उनके प्रशंसकों की उत्सुकता बढ़ा दी और थोड़ी ही देर में यह साफ हो गया कि जेनेलिया किस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुकी हैं।

    जिस फिल्म से जेनेलिया देशमुख यह नई पारी शुरू कर रही हैं उसका नाम है नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में अपनी मासूम मुस्कान और चुलबुले अभिनय से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री जेनेलिया देशमुख एक बार फिर दर्शकों के सामने नए अवतार में लौटने जा रही हैं। चुनिंदा फिल्मों के बाद जेनेलिया अब अपने करियर की एक नई शुरुआत कर रही हैं। उन्होंने अपनी अगली फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी है और इसे अपने लिए एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।जेनेलिया ने इस नई शुरुआत की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक तस्वीर साझा की जिसमें उनका साइड प्रोफाइल नजर आ रहा है। तस्वीर के साथ उन्होंने सिर्फ दो शब्द लिखे-नई शुरुआत। इस पोस्ट ने उनके प्रशंसकों की उत्सुकता बढ़ा दी और थोड़ी ही देर में यह साफ हो गया कि जेनेलिया किस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुकी हैं।

    जिस फिल्म से जेनेलिया देशमुख यह नई पारी शुरू कर रही हैं उसका नाम है गनमास्टर जी9। यह फिल्म एक्शन और जासूसी की दुनिया पर आधारित है। खास बात यह है कि इस फिल्म में जेनेलिया के साथ इमरान हाशमी मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। दोनों कलाकार पहली बार इस तरह की जॉनर फिल्म में साथ दिखाई देंगे जिससे दर्शकों की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।फिल्म का निर्देशन आदित्य दत्त कर रहे हैं जो इससे पहले भी थ्रिल और एक्शन से जुड़ी कहानियों के लिए जाने जाते हैं। फिल्म में अभिनेता अपारशक्ति खुराना भी अहम भूमिका निभा रहे हैं जिससे कहानी को एक अलग रंग मिलने की उम्मीद है।

    गनमास्टर जी9 को साल 1979 में बनी सुपरहिट जासूसी फिल्म सुरक्षा से प्रेरित बताया जा रहा है। उस दौर में गनमास्टर जी9 का किरदार मिथुन चक्रवर्ती ने निभाया था और यह किरदार दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। अब इसी जासूस की कहानी को नए जमाने की सोच तकनीक और स्टाइल के साथ फिर से पेश किया जा रहा है। मेकर्स का दावा है कि फिल्म में पुराने दौर का रोमांच भी होगा और आधुनिक सिनेमा की तेज रफ्तार भी।

    फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी हिमेश रेशमिया संभाल रहे हैं। माना जा रहा है कि एक्शन और सस्पेंस से भरपूर इस कहानी में संगीत भी अहम भूमिका निभाएगा और दर्शकों को यादगार गाने मिल सकते हैं।गनमास्टर जी9 के अलावा जेनेलिया एक और दिलचस्प प्रोजेक्ट में नजर आने वाली हैं। वह जल्द ही राम गोपाल वर्मा की हॉरर कॉमेडी फिल्म पुलिस स्टेशन में भूत में दिखाई देंगी। इस फिल्म में उनके साथ मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका निभाएंगे। यह पहली बार होगा जब जेनेलिया और मनोज बाजपेयी एक साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। फिल्म में डर और हास्य का अनोखा मेल देखने को मिलेगा।

    कुल मिलाकर गनमास्टर जी9 जेनेलिया देशमुख के करियर में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है जहां वह एक्शन और जासूसी की दुनिया में अपनी नई पहचान बनाती नजर आएंगी।गनमास्टर जी9। यह फिल्म एक्शन और जासूसी की दुनिया पर आधारित है। खास बात यह है कि इस फिल्म में जेनेलिया के साथ इमरान हाशमी मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। दोनों कलाकार पहली बार इस तरह की जॉनर फिल्म में साथ दिखाई देंगे जिससे दर्शकों की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।फिल्म का निर्देशन आदित्य दत्त कर रहे हैं जो इससे पहले भी थ्रिल और एक्शन से जुड़ी कहानियों के लिए जाने जाते हैं। फिल्म में अभिनेता अपारशक्ति खुराना भी अहम भूमिका निभा रहे हैं जिससे कहानी को एक अलग रंग मिलने की उम्मीद है।

    गनमास्टर जी9 को साल 1979 में बनी सुपरहिट जासूसी फिल्म सुरक्षा से प्रेरित बताया जा रहा है। उस दौर में गनमास्टर जी9 का किरदार मिथुन चक्रवर्ती ने निभाया था और यह किरदार दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। अब इसी जासूस की कहानी को नए जमाने की सोच तकनीक और स्टाइल के साथ फिर से पेश किया जा रहा है। मेकर्स का दावा है कि फिल्म में पुराने दौर का रोमांच भी होगा और आधुनिक सिनेमा की तेज रफ्तार भी।फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी हिमेश रेशमिया संभाल रहे हैं। माना जा रहा है कि एक्शन और सस्पेंस से भरपूर इस कहानी में संगीत भी अहम भूमिका निभाएगा और दर्शकों को यादगार गाने मिल सकते हैं।

    गनमास्टर जी9 के अलावा जेनेलिया एक और दिलचस्प प्रोजेक्ट में नजर आने वाली हैं। वह जल्द ही राम गोपाल वर्मा की हॉरर कॉमेडी फिल्म पुलिस स्टेशन में भूत में दिखाई देंगी। इस फिल्म में उनके साथ मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका निभाएंगे। यह पहली बार होगा जब जेनेलिया और मनोज बाजपेयी एक साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। फिल्म में डर और हास्य का अनोखा मेल देखने को मिलेगा।कुल मिलाकर गनमास्टर जी9 जेनेलिया देशमुख के करियर में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है जहां वह एक्शन और जासूसी की दुनिया में अपनी नई पहचान बनाती नजर आएंगी।

  • मर्दानी से थप्पड़ तक: 2014 के बाद बॉलीवुड ने महिलाओं की आवाज़ को बनाया ताकत

    मर्दानी से थप्पड़ तक: 2014 के बाद बॉलीवुड ने महिलाओं की आवाज़ को बनाया ताकत


    नई दिल्ली। 2014 के बाद बॉलीवुड में हीरोइन की परिभाषा बदल गई। अब महिलाएं केवल कहानी का हिस्सा नहीं बल्कि कहानी की धुरी बन चुकी हैं। इस दौर में फिल्में न केवल मनोरंजन का माध्यम बनी हैं बल्कि समाज में बदलाव और महिलाओं के सशक्तिकरण का संदेश देने का भी जरिया हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 जनवरी 2015 को शुरू किया गया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान और सुकन्या समृद्धि योजना के साथ इस बदलाव ने देश में बालिकाओं और महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण को भी नया आयाम दिया।

    रानी मुखर्जी की मर्दानी फ्रैंचाइजी इसकी बेहतरीन मिसाल है। 2014 में रिलीज हुई फिल्म मर्दानी में रानी ने शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार निभाया। यह निडर पुलिस अधिकारी महिला उत्पीड़न और अपराध के खिलाफ लड़ती है। गोपी पुथरान के निर्देशन में बनी यह क्राइम थ्रिलर पुरुष प्रधान मानसिकता के खिलाफ महिला की ताकत और साहस को प्रदर्शित करती है।2018 में रानी मुखर्जी की हिचकी ने महिलाओं की मानसिक और शारीरिक चुनौतियों पर भी ध्यान खींचा। नैना माथुर के किरदार में रानी ने टॉरेट सिंड्रोम जैसी चुनौती का सामना करते हुए बच्चों को पढ़ाने और अपने सपनों को पूरा करने का संदेश दिया।

    आलिया भट्ट की फिल्में डियर जिंदगी और राजी महिलाओं के आत्मविश्वास और साहस को अलग अंदाज में पेश करती हैं। डियर जिंदगी मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करती है जबकि राजी में आलिया की भूमिका देशभक्ति और बुद्धिमानी से जोखिम भरे कार्यों में सफल होने की मिसाल बनती है।अनुभव सिन्हा की फिल्म थप्पड़ ने घरेलू हिंसा और पारिवारिक दबाव की कहानियों को पर्दे पर उतारा। तापसी पन्नू ने अमृता के किरदार में दिखाया कि कैसे एक छोटे से थप्पड़ ने उसकी जिंदगी बदल दी और उसने अपने हक के लिए आवाज उठाई।

    2023 में द केरल स्टोरी ने महिलाओं की पहचान और स्वतंत्रता की लड़ाई को नए ढंग से पेश किया। अदा शर्मा के किरदार फातिमा के माध्यम से फिल्म दिखाती है कि डर और पीड़ा के बावजूद महिलाएं अपनी हिम्मत और समझदारी से संघर्ष कर सकती हैं।2014 के बाद की ये फिल्में साबित करती हैं कि बॉलीवुड अब महिलाओं की आवाज़ को ताकत बना रहा है। ये फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता और महिलाओं के आत्मविश्वास की मिसाल भी हैं।

  • फरवरी में घूमने की परफेक्ट लिस्ट: न ठंड की मार, न गर्मी की तपिश, ये 6 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार

    फरवरी में घूमने की परफेक्ट लिस्ट: न ठंड की मार, न गर्मी की तपिश, ये 6 जगहें बना देंगी ट्रिप यादगार



    नई दिल्ली। अगर भारत में घूमने का सबसे परफेक्ट महीना कोई है, तो वह फरवरी है। इस दौरान सर्दी धीरे-धीरे विदा लेने लगती है, गर्मी आने में अभी समय होता है और मौसम एकदम सुहावना रहता है। यही वजह है कि फरवरी में नॉर्थ से साउथ तक भारत की कई जगहें घूमने के लिए बेस्ट बन जाती हैं। साथ ही इस महीने देशभर में कला, साहित्य, संगीत और संस्कृति से जुड़े बड़े आयोजन भी होते हैं, जो यात्रा को और खास बना देते हैं।
    1. जयपुर – इतिहास और रंगों की रॉयल झलक
    फरवरी में जयपुर की सुबहें हल्की ठंडक लिए होती हैं और दिन धूप से भरे रहते हैं। आमेर किला, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर घूमने का यही सबसे अच्छा वक्त है।
    इसी महीने होने वाला जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल और जयपुर आर्ट वीक शहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाते हैं। हेरिटेज वॉक, लोक संगीत और हस्तशिल्प जयपुर को एक यादगार अनुभव बना देते हैं।

    2. दिल्ली – इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता का संगम
    फरवरी की हल्की ठंड दिल्ली को एक्सप्लोर करने के लिए परफेक्ट बना देती है। लाल किला, कुतुब मीनार, इंडिया गेट और लोधी गार्डन इस मौसम में बेहद खूबसूरत लगते हैं।
    इंडिया आर्ट फेयर, म्यूजियम्स और कैफे कल्चर दिल्ली को सांस्कृतिक रूप से जीवंत बना देते हैं। पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमना और स्ट्रीट फूड का मजा लेना फरवरी की खास पहचान है।

    3. अहमदाबाद – विरासत और स्वाद का शहर
    गुजरात का अहमदाबाद फरवरी में घूमने के लिए शानदार है। साबरमती रिवरफ्रंट, ऐतिहासिक पोल्स, बावड़ियां और साबरमती आश्रम शहर की ऐतिहासिक पहचान को दर्शाते हैं।
    उत्तरायण के बाद भी उत्सव का माहौल बना रहता है और उंधियू जैसे पारंपरिक गुजराती व्यंजन स्वाद को यादगार बना देते हैं।

    4. मुंबई – समुद्र, कला और संगीत
    फरवरी में मुंबई की समुद्री हवा मौसम को बेहद खुशनुमा बना देती है। कला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल और महिंद्रा ब्लूज़ फेस्टिवल शहर को रचनात्मक ऊर्जा से भर देते हैं।
    आर्ट डेको इमारतें, गैलरी, ईरानी कैफे और मरीन ड्राइव की शामें मुंबई को घूमने के लिए खास बनाती हैं।

    5. ओडिशा – संस्कृति और प्रकृति का अनोखा मेल
    फरवरी में ओडिशा का मौसम बेहद सुखद रहता है। कोणार्क डांस एंड म्यूजिक फेस्टिवल सूर्य मंदिर की पृष्ठभूमि में शास्त्रीय नृत्य और संगीत का अद्भुत अनुभव देता है।
    चिलिका झील में हजारों प्रवासी पक्षी दिखाई देते हैं, जो नेचर और फोटोग्राफी लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं।

    6. काजीरंगा – वाइल्डलाइफ का रोमांच
    असम का काजीरंगा नेशनल पार्क फरवरी में घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। यहां सफारी के दौरान एक-सींग वाला गैंडा, हाथी, हिरण और कभी-कभी बाघ भी देखने को मिल जाते हैं।ठंड कम होने के कारण जंगल सफारी आरामदायक और रोमांचक दोनों होती है।
    फरवरी यात्रा के लिए ऐसा महीना है, जहां मौसम, संस्कृति और प्रकृति का परफेक्ट बैलेंस मिलता है। अगर आप सुकून, रोमांस या एडवेंचर की तलाश में हैं, तो ये 6 जगहें आपकी ट्रैवल बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।

  • प्रधानमंत्री मोदी का केरल दौरा : तिरुवनंतपुरम में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन

    प्रधानमंत्री मोदी का केरल दौरा : तिरुवनंतपुरम में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को केरल दौरे पर तिरुवनंतपुरम पहुंचेंगे और सुबह करीब 10:45 बजे विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर वे सभा को भी संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार इस दौरे का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, शहरी आजीविका, विज्ञान, नवाचार और स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।

    रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी चार नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाएंगे। इनमें तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें और एक पैसेंजर ट्रेन शामिल हैं। इन नई ट्रेन सेवाओं से केरल, तमिलनाडु कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच लंबी दूरी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी। बेहतर कनेक्टिविटी से पूरे दक्षिण भारत में पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी मजबूती मिलेगी।

    प्रधानमंत्री मोदी शहरी आजीविका को मजबूत करने के लिए ‘पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड’ लॉन्च करेंगे। यह स्ट्रीट वेंडरों को वित्तीय समावेशन का अगला चरण उपलब्ध कराएगा। यूपीआई से लिंक्ड ब्याज-मुक्त रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा तत्काल लिक्विडिटी प्रदान करेगी, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देगी और लाभार्थियों को औपचारिक क्रेडिट इतिहास बनाने में मदद करेगी। इस दौरान प्रधानमंत्री एक लाख लाभार्थियों को ‘पीएम स्वनिधि लोन’ भी वितरित करेंगे। 2020 में शुरू हुई इस योजना ने शहरी अनौपचारिक श्रमिकों को पहली बार औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच दिलाई है और आजीविका सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई है।

    विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी सीएसआईआर-एनआईआईएसटी इनोवेशन टेक्नोलॉजी और एंटरप्रेन्योरशिप हब का शिलान्यास करेंगे। यह हब जीवन विज्ञान और बायो-इकोनॉमी पर ध्यान केंद्रित करेगा। आयुर्वेद जैसी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल पैकेजिंग और ग्रीन हाइड्रोजन के साथ जोड़ा जाएगा। हब स्टार्टअप निर्माण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देगा और अनुसंधान को बाजार तैयार समाधानों और उद्यमों में बदलने का प्लेटफॉर्म बनेगा।

    स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेस एंड टेक्नोलॉजी में अत्याधुनिक रेडियोसर्जरी सेंटर की आधारशिला रखेंगे। इसके साथ ही तिरुवनंतपुरम में नए पूजापुरा हेड पोस्ट ऑफिस का उद्घाटन भी किया जाएगा।इस दौरे के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने केरल में रेल कनेक्टिविटी, शहरी आजीविका, विज्ञान नवाचार और स्वास्थ्य क्षेत्र को एक साथ बढ़ावा देने का संदेश दिया है। इस प्रकार यह दौरा क्षेत्रीय विकास, डिजिटल समावेशन और आधुनिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने में अहम साबित होगा।

  • भोपाल में कर्मचारी मोर्चा: दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी सत्याग्रह पर, महिला कर्मचारी भी शामिल

    भोपाल में कर्मचारी मोर्चा: दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी सत्याग्रह पर, महिला कर्मचारी भी शामिल


    भोपाल में सरकारी कर्मचारियों ने अपने अधिकारों और मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। स्थायी दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी एकजुट होकर सतपुड़ा गेट पर सत्याग्रह पर बैठे हैं। आंदोलन में महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। यह आंदोलन कर्मचारियों की पांच सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा है जो लंबे समय से प्रतीक्षित थे।

    प्रांत अध्यक्ष अशोक पांडे के अनुसार कर्मचारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं: पहला उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर के आदेशानुसार सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए या उन्हें नियमित किया जाए। दूसरा शासन द्वारा अस्थाई पदों को सांख्येत्तर घोषित करने वाले आदेश दिनांक 22 दिसंबर 2025 को निरस्त किया जाए। तीसरा दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित किया जाए ताकि उनके अधिकार सुनिश्चित हो सकें। चौथा अंशकालीन कर्मचारियों को श्रमायुक्त द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन या कलेक्टर दर के अनुसार वेतन भुगतान किया जाए। पांचवा अस्थाई कर्मचारियों को पेंशन सुविधा का लाभ प्रदान किया जाए।

    सत्याग्रह में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी आवाज़ सुनी नहीं जा रही और उनकी न्यायसंगत मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की अनदेखी और समय पर समाधान न मिलने के कारण उन्हें मजबूर होकर सड़क पर आंदोलन करना पड़ा है। महिला कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल होकर यह संदेश दे रही हैं कि कर्मचारियों की समस्याएं केवल पुरुष कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं बल्कि सभी वर्गों को समान अधिकार मिलने चाहिए।स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा दृष्टि से सत्याग्रह स्थल पर विशेष व्यवस्था की है। हालांकि कर्मचारियों का आंदोलन शांतिपूर्ण है लेकिन इसका असर प्रशासन पर निश्चित रूप से पड़ेगा। कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी जायज़ मांगों को मान्यता दिलाना है न कि किसी तरह का विवाद खड़ा करना।

    इससे पहले भी विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की समान मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया था लेकिन इसे लागू करने में ढिलाई बरती गई। अब कर्मचारियों ने सत्याग्रह के माध्यम से सीधे सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचने का निर्णय लिया है।सत्याग्रह में भाग लेने वाले कर्मचारी मानते हैं कि यह आंदोलन उनके अधिकारों की लड़ाई है और यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आगे और बड़े पैमाने पर आंदोलन की संभावना भी बनी हुई है। कर्मचारी मंच इस आंदोलन को लंबी लड़ाई के रूप में तैयार कर रहा है और इसका असर न केवल भोपाल बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी दिखाई देगा।

  • क्रिकेट अपडेट: अक्षर पटेल की चोट से टीम इंडिया की तैयारी प्रभावित, 2026 टी20 वर्ल्ड कप पर नजर

    क्रिकेट अपडेट: अक्षर पटेल की चोट से टीम इंडिया की तैयारी प्रभावित, 2026 टी20 वर्ल्ड कप पर नजर

    नई दिल्ली। टी20 क्रिकेट के दौरान टीम इंडिया के उपकप्तान और ऑलराउंडर अक्षर पटेल की चोट ने भारतीय क्रिकेट फैंस और टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी है। नागपुर में 21 जनवरी को खेले गए पहले टी20 मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ अक्षर गेंदबाजी करते समय चोटिल हो गए। डेरिल मिचेल के शॉट को रोकने की कोशिश में गेंद उनके बाएं हाथ की तर्जनी उंगली पर जा लगी, जिससे तुरंत खून निकलने लगा और उन्हें मैदान छोड़कर बाहर जाना पड़ा।

    चोट लगने के समय अक्षर ने अपने ओवर की केवल तीन गेंदें ही फेंकी थीं। चूंकि वे बाएं हाथ के गेंदबाज हैं, इस उंगली की चोट को गंभीर माना जा रहा है। उनके ओवर की शेष गेंदें अभिषेक शर्मा ने डालीं। अब सवाल उठ रहा है कि यह चोट उनकी 2026 टी20 वर्ल्ड कप की तैयारियों पर कितना असर डालेगी। फिलहाल टीम और फैंस उनकी मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    उपकप्तान अक्षर की भूमिका और चिंता

    अक्षर पटेल को आगामी टी20 वर्ल्ड कप के लिए उपकप्तान नियुक्त किया गया है। ऐसे में उनकी चोट ने टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि बीसीसीआई की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। चोट की गंभीरता और अक्षर को मैदान से कितने समय तक दूर रहना पड़ेगा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

    नागपुर में टी20 मुकाबला: भारत ने बनाई बढ़त

    पहले टी20 में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को 48 रन से हराकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 238 रन बनाए, जो न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत का अब तक का सबसे बड़ा टी20 स्कोर है। इस बड़े स्कोर की नींव अभिषेक शर्मा की विस्फोटक पारी ने रखी। उन्होंने सिर्फ 35 गेंदों में 84 रन ठोक दिए, जिसमें 5 चौके और 8 छक्के शामिल थे। उनकी तेजतर्रार बल्लेबाजी ने मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया।

    न्यूजीलैंड की चुनौती और अगला मुकाबला

    लक्ष्य का पीछा करते हुए कीवी टीम दबाव में नजर आई और 20 ओवर में 7 विकेट पर 190 रन ही बना सकी। ग्लेन फिलिप्स ने संघर्ष करते हुए 40 गेंदों में 78 रन बनाए, लेकिन यह प्रयास भारत की जीत के लिए पर्याप्त नहीं था। सीरीज का दूसरा टी20 मुकाबला 23 जनवरी, रविवार को खेला जाएगा। इस मुकाबले में न्यूजीलैंड वापसी की कोशिश करेगा, जबकि भारत अपनी बढ़त मजबूत करने उतरेगा।

  • सर्दियों का ग्लो: त्वचा की डलनेस और झाइयों से छुटकारा, 2-3 हजार खर्च किए बिना पाएं विंटर ग्लो

    सर्दियों का ग्लो: त्वचा की डलनेस और झाइयों से छुटकारा, 2-3 हजार खर्च किए बिना पाएं विंटर ग्लो

    नई दिल्ली। सर्दियां शुरू होने के साथ ही तापमान गिरने लगा है, ऐसे में आपको अपनी त्वचा की देखभाल पर खास ध्यान देने की जरूरत है। ठंडी और शुष्क हवा के कारण सर्दियों में त्वचा का रंग अक्सर डार्क होने लगता है।

    डॉ चांदनी जैन गुप्ता, त्वचा विशेषज्ञ और सौंदर्य चिकित्सक, एलांटिस हेल्थकेयर, लाजपत नगर, नई दिल्ली,के अनुसार, कम तापमान के कारण त्वचा की ऊपरी परत कमजोर हो जाती है और उसमें सूजन आ सकती है, जिसे ‘पोस्ट-इन्फ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन’ कहते हैं।

    अगर इसे वक्त रहते ठीक ना किया जाए, तो ये जिद्दी झाइयों का भी रूप ले सकते हैं। अगर आप नहीं चाहते कि इस मौसम में आपकी त्वचा का रंग काला हो, तो इस ठंडे सीजन में अपनी त्वचा की देखभाल खास तरीके से करें।
    सर्दियों में त्वचा काली क्यों हो जाती है?
    1. ठंडी और सूखी हवा आपकी त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को कमजोर कर देती है, जिससे त्वचा को नुकसान पहुंचने और जलन होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे स्किन काली भी पड़ सकती है।

    2. ठंडी हवा से त्वचा में जलन होती है और सूजन आ जाती है। इस सूजन से बचने के लिए त्वचा ज्यादा मेलेनिन बनाना शुरू कर देती है, जिसके परिणामस्वरूप काले धब्बे बन जाते हैं। इसी को ‘पोस्ट-इन्फ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन’ भी कहते हैं।

    3. सर्दियों में स्किन डेड सेल्स को धीरे-धीरे हटाती है। जब ये डेड सेल्स त्वचा की सतह पर जमा हो जाते हैं, तो त्वचा बेजान, रूखी, अनइवेन और डार्क दिखने लगती है।

    4. रूखेपन और जलन के कारण त्वचा में खुजली हो सकती है। खुजलाने की आदत से जलन और बढ़ जाती है, जिससे हाइपरपिग्मेंटेशन की पुरानी समस्याएं और बिगड़ सकती हैं या नई समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं
    त्वचा को रखें मॉइस्चराइज
    अगर सर्दियां शुरू होते ही आपकी भी त्वचा काली दिखने लगी है, तो आपको मॉइस्चराइजिंग का खास ख्याल रखना चाहिए। नियमित रूप से मॉइस्चराइजर लगाएं। अपनी त्वचा को ड्राईनेस से बचाने के लिए, एक अच्छे मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करते रहें। यह आपकी त्वचा को नमी से भरपूर रखेगा और उसकी सेफ्टी लेयर को मजबूत बनाएगा।
    धूप से करें त्वचा की देखभाल
    भले ही सर्दियों में धूप कमजोर लगती हो, फिर भी यूवी किरणें आपकी त्वचा को टैन कर सकती हैं। ये किरणें बादलों वाले दिनों में भी त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। ये बर्फीले मौसम में भी आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में जरूर है कि आप रोजाना स्किन पर एक अच्छी क्वालिटी की सन
    चेहरे को हमेशा ढककर रखें
    सर्दियों के मौसम में चेहरे को शुष्क हवा से बचाकर रखना बहुत ही जरूरी है। यही त्वचा को डार्क बनाती हैं। ऐसे में बाहर निकलने से पहले अपनी त्वचा को ढकें। ठंडी और शुष्क हवा के साथ-साथ धूप से अपने चेहरे की सुरक्षा के लिए टोपी और स्कार्फ का इस्तेमाल करें।

    चेहरे पर ना लगाएं बार-बार हाथ
    अगर आपको अक्सर हाइपरपिग्मेंटेशन की दिक्कत रहती है, तो आपको सर्दियों के मौसम में इससे बचने के लिए चेहरे को खुजलाने से बचना चाहिए। चेहरे पर बार-बार हाथ ना लगाएं। इससे स्किन की डार्कनेस और भी बढ़ सकती है और हाइपरपिग्मेंटेशन की समस्या गंभीर हो सकती है।

    चेहरे पर लगाएं ग्लिसरीन नाइट क्रीम
    सर्दियों में त्वचा के निखार को बनाए रखने के लिए ग्लिसरीन, विटामिन-ई, नारियल तेल और गुलाबजल को मिक्स करके एक मिश्रण तैयार करें। इस मिश्रण को नाइट क्रीम की तरह रोजाना रात को सोने से पहले चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे पर निखार आएगा और कालापन भी दूर होगा।

  • Chandigarh Municipal Polls Update: AAP-Congress ने अलग होकर जारी की उम्मीदवारों की सूची

    Chandigarh Municipal Polls Update: AAP-Congress ने अलग होकर जारी की उम्मीदवारों की सूची

    नई दिल्ली।  चंडीगढ़ में मेयर पद के लिए होने वाले नगर निगम चुनावों में इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल, आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस, अब अलग-अलग मैदान में हैं। गठबंधन टूटने के बाद दोनों ही पार्टियों ने मेयर, डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर पदों के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। यह ऐलान नगर निगम चुनाव की तैयारियों को और रोचक बना रहा है और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू कर दी है।

    कांग्रेस के उम्मीदवार

    कांग्रेस ने इस चुनाव में मेयर पद के लिए गुरप्रीत गाबी को मैदान में उतारा है। पार्टी ने सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए सचिन गालव और डिप्टी मेयर पद के लिए निर्मला देवी को उम्मीदवार घोषित किया है। कांग्रेस का मानना है कि उनके उम्मीदवारों के अनुभव और नगर निगम में सक्रिय भूमिका के कारण वे जनता का भरोसा जीत सकते हैं।

    AAP के उम्मीदवार

    वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। AAP की ओर से मेयर पद के लिए योगेश ढींगरा (वार्ड नं. 25) को उतारा गया है। सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए पार्टी ने मुन्नवर खान (वार्ड नं. 29) और डिप्टी मेयर पद के लिए जसविंदर कौर (वार्ड नं. 1) को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। AAP का मानना है कि उनके युवा और सक्रिय उम्मीदवार जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।

    गठबंधन क्यों नहीं बना?

    इस बार AAP और कांग्रेस ने गठबंधन न बनाने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य कारण यह है कि अगले साल पंजाब विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। अगर नगर निगम चुनाव में दोनों दल गठबंधन करते, तो पंजाब विधानसभा चुनाव में रणनीतिक रूप से उनकी स्थिति कमजोर हो सकती थी। इसलिए कम पार्षद होने के बावजूद दोनों दल स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय दोनों पार्टियों के लिए अगली रणनीति तय करने में अहम साबित होगा।

    बीजेपी की स्थिति मजबूत

    नगर निगम में कुल 35 पार्षद और 1 सांसद हैं। बीजेपी के पास 18 पार्षद हैं, जबकि AAP के पास 11 और कांग्रेस के पास 6 पार्षद + 1 सांसद है। इन आंकड़ों के आधार पर राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि बीजेपी के लिए मेयर, डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर पदों पर जीत हासिल करना अपेक्षाकृत आसान होगा। बीजेपी की मजबूत स्थिति और पार्षद संख्या का संतुलन इसे इस चुनाव का बड़ा दावेदार बनाता है।

    चुनाव की राजनीतिक चुनौतियां

    विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव केवल मेयर पद तक सीमित नहीं रहेगा। यह पंजाब विधानसभा चुनाव के पूर्वाभ्यास के रूप में भी देखा जा रहा है। AAP और कांग्रेस दोनों ही अपने उम्मीदवारों के जरिए स्थानीय जनता का भरोसा हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, बीजेपी अपने मजबूत पार्षदों और संगठनात्मक नेटवर्क के बल पर सत्ता में बने रहने की रणनीति पर काम कर रही है।

    AAP और कांग्रेस ने चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में गठबंधन तोड़कर अलग उम्मीदवार घोषित किए हैं, जबकि बीजेपी की मजबूत स्थिति से मेयर पद पर उनकी जीत की संभावना प्रबल है।

    कुल मिलाकर, चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव 2026 न केवल मेयर, डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर पदों के लिए, बल्कि पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संकेत देने वाले चुनाव के रूप में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।