Author: bharati

  • खंडवा में दर्दनाक हादसा: पुल से 200 फीट गहरी खाई में गिरी बोलेरो, ड्राइवर की मौत

    खंडवा में दर्दनाक हादसा: पुल से 200 फीट गहरी खाई में गिरी बोलेरो, ड्राइवर की मौत


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में शुक्रवार सुबह एक भयावह सड़क हादसा हो गया। खंडवा-भोपाल हाईवे पर स्थित नर्मदानगर ओवरब्रिज से एक बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 200 फीट गहरी खाई में गिर गया। हादसा इतना भीषण था कि वाहन पूरी तरह चकनाचूर हो गया और ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई।

    यह दुर्घटना इंदिरा सागर बांध के बाहरी हिस्से में बने ओवरब्रिज पर हुई। बताया जा रहा है कि भोपाल की ओर से आ रही तेज रफ्तार बोलेरो अचानक अनियंत्रित हो गई और सुरक्षा जाल पार करते हुए नीचे जा गिरी। वाहन ने गिरते समय पावर स्टेशन की रिटेनिंग वॉल को भी तोड़ दिया। अधिकारियों के अनुसार यदि यह दीवार नहीं होती, तो बोलेरो सीधे टरबाइन से निकलने वाले तेज बहाव वाले पानी में समा सकती थी।

    सूचना मिलते ही पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची। करीब 200 फीट नीचे उतरकर पुलिसकर्मियों ने क्षतिग्रस्त बोलेरो के गेट तोड़े और अंदर फंसे ड्राइवर को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक की पहचान अभिषेक नरगावे (26) निवासी ग्राम अंजनिया खुर्द के रूप में हुई है।

    नर्मदानगर थाना प्रभारी के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और छाती में गंभीर चोटों को मौत का कारण बताया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों ने बताया कि अभिषेक खुद अपनी बोलेरो टैक्सी के रूप में चलाता था। गुरुवार रात वह कुछ यात्रियों को छोड़ने राजगढ़ गया था और लौटते समय यह हादसा हो गया। बताया जा रहा है कि दुर्घटना सुबह करीब 4 बजे हुई। अभिषेक अविवाहित था और परिवार का सहारा माना जाता था।

  • अरावली पर्वतमाला विवाद पर SC की टिप्पणी, पर्यावरण सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

    अरावली पर्वतमाला विवाद पर SC की टिप्पणी, पर्यावरण सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता


    नई दिल्ली । देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली पर्वतमाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने संकेत दिया है कि इस पूरे मामले में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और जब तक सभी पहलुओं पर पूरी तरह संतुष्टि नहीं मिलती, तब तक किसी भी प्रकार की खनन गतिविधियों को लेकर कोई राहत देने पर विचार नहीं किया जाएगा।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसे अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला क्षेत्र में चल रही खनन गतिविधियों को लेकर लगातार गंभीर और चिंताजनक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हो रही हैं। इन प्रतिक्रियाओं को देखते हुए अदालत ने फिलहाल खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई भी आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि गहरे पारिस्थितिकीय प्रभावों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें अत्यधिक सावधानी आवश्यक है।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले की सुनवाई को टुकड़ों में नहीं करेगा, बल्कि सभी पहलुओं पर एक साथ विचार करेगा। अदालत ने यह संकेत दिया कि जब तक पूरे मामले की व्यापक समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक किसी भी नई गतिविधि या निर्णय की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह टिप्पणी इस बात को दर्शाती है कि न्यायालय इस पर्यावरणीय मुद्दे को बेहद गंभीरता से देख रहा है।

    इससे पहले भी न्यायालय ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाए थे और विशेषज्ञों की एक समिति से सुझाव मांगे थे। इस समिति ने सुझाव दिया था कि स्थानीय भू-स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचना को अरावली पहाड़ी माना जाए, जबकि 500 मीटर के भीतर स्थित दो या अधिक पहाड़ियों के समूह को अरावली पर्वतमाला के रूप में परिभाषित किया जाए। हालांकि, इस परिभाषा को लेकर कई पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों के बीच चिंता भी जताई गई थी।

    न्यायालय ने यह भी माना कि इस परिभाषा के लागू होने से कुछ क्षेत्रों में पर्यावरणीय संरक्षण की स्थिति प्रभावित हो सकती है, जिस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। इसी कारण अदालत ने पहले दिए गए आदेशों को अस्थायी रूप से स्थगित भी किया था और सभी खनन गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्देश दिया था।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी खनन पट्टे को रद्द किया जाता है, तो संबंधित पक्ष को उसे चुनौती देने का पूरा अधिकार होगा। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में किसी भी तरह का पक्षपातपूर्ण आदेश देने से बचा जाएगा। अदालत का यह रुख स्पष्ट करता है कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी से जुड़े मामलों में न्यायालय संतुलित और सतर्क दृष्टिकोण अपना रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली पर्वतमाला न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र भू-जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता के लिए भी अत्यंत आवश्यक भूमिका निभाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अनियंत्रित खनन गतिविधि लंबे समय में गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा कर सकती है।

  • भोजशाला की पहचान अब स्पष्ट': हाईकोर्ट की बड़ी मुहर, हिंदुओं की आस्था की हुई जीत

    भोजशाला की पहचान अब स्पष्ट': हाईकोर्ट की बड़ी मुहर, हिंदुओं की आस्था की हुई जीत


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के चर्चित धार भोजशाला विवाद मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला सामने आया। Madhya Pradesh High Court की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना और हिंदुओं को वहां पूजा करने का अधिकार दिए जाने की बात कही। अदालत ने कहा कि यह स्थान परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र और देवी सरस्वती का मंदिर था।

    कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की रिपोर्ट और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। अदालत ने यह भी माना कि पुरातत्व एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है और उसके निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है।

    कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कई अहम बातें कहीं भोजशाला परिसर एक संरक्षित स्मारक है, यह मूल रूप से हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र था, हिंदुओं को पूजा का अधिकार है, ASI परिसर का संरक्षण और प्रबंधन जारी रखेगा, सरकार संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था पर भी विचार करे ,श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, अदालत ने कहा कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

    नमाज की अनुमति वाला आदेश रद्द
    हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 में ASI द्वारा दिए गए उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी। हालांकि अदालत ने मुस्लिम पक्ष को यह छूट दी है कि वे नमाज के लिए धार जिले में अलग जमीन उपलब्ध कराने को लेकर सरकार से संपर्क कर सकते हैं।

    ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन पर भरोसा
    कोर्ट ने साफ कहा कि ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन में मिले तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जज ने सुनवाई के दौरान सभी वकीलों का आभार जताते हुए कहा कि अदालत ने सभी तथ्यों, ASI एक्ट और संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखकर फैसला दिया है।

    लंबे समय से चल रहा था विवाद
    धार भोजशाला मामला लंबे समय से विवाद और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। हिंदू पक्ष लगातार इसे देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र बताता रहा, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद मानता था। अब हाईकोर्ट के इस फैसले को इस मामले में एक बड़ा और अहम निर्णय माना जा रहा है। प्रशासन ने फैसले के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

  • उन्नाव में शिक्षिका का दर्दनाक कदम: VIDEO बनाकर बोलीं- ये सुसाइड नहीं, मेरा मर्डर है, फिर खा लिया जहर

    उन्नाव में शिक्षिका का दर्दनाक कदम: VIDEO बनाकर बोलीं- ये सुसाइड नहीं, मेरा मर्डर है, फिर खा लिया जहर


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उन्नाव से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां प्राथमिक विद्यालय में तैनात 40 वर्षीय शिक्षिका नाजिया सुल्ताना ने कथित मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। गंभीर हालत में उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। घटना से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

    आत्महत्या का प्रयास करने से पहले नाजिया सुल्ताना ने करीब एक मिनट का वीडियो रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह रोते हुए शिक्षामित्र पुष्कर वाजपेयी पर गंभीर आरोप लगाती नजर आ रही हैं। नाजिया ने कहा कि पिछले दो से ढाई साल से उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था और पिछले कई महीनों से उनकी जिंदगी बेहद मुश्किल हो गई थी।

    वीडियो में नाजिया कहती हैं, “मैं आज खुदकुशी कर रही हूं और इसका जिम्मेदार शिक्षामित्र पुष्कर वाजपेयी है। इन्होंने मेरी जिंदगी दुश्वार कर दी है। अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता। ये सुसाइड नहीं, मेरा मर्डर है।” शिक्षिका की भावुक अपील ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

    यह मामला सिकंदरपुर कर्ण ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बदरका प्रथम का बताया जा रहा है, जहां नाजिया और शिक्षामित्र पुष्कर वाजपेयी दोनों तैनात हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। हालांकि विवाद की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    घटना की जानकारी मिलते ही बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश पांडेय अस्पताल पहुंचे और शिक्षिका का हालचाल लिया। उन्होंने कहा कि स्कूल में तैनात शिक्षिका और शिक्षामित्र के बीच मतभेद की बात सामने आई है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।

    वहीं पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। अचलगंज थाने के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक परिवार की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है, लेकिन वायरल वीडियो और अन्य तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है।

    इस घटना ने एक बार फिर कार्यस्थल पर मानसिक उत्पीड़न और तनाव जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है। सोशल मीडिया पर लोग शिक्षिका को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी लंबी अवधि तक विवाद चलने के बावजूद समाधान क्यों नहीं निकाला गया।

  • गर्मी से फसलों पर संकट: किसानों ने पपीता बचाने के लिए लगाए क्रॉप कवर

    गर्मी से फसलों पर संकट: किसानों ने पपीता बचाने के लिए लगाए क्रॉप कवर


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में इन दिनों गर्मी अपने चरम पर है। जिले का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि दोपहर के समय लगभग 25 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही गर्म हवाएं लोगों को झुलसा रही हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक हीट वेव का अलर्ट जारी किया है, जिससे लोगों के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।

    भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर पपीता की खेती पर देखने को मिल रहा है। खेतों का तापमान तेजी से बढ़ने के कारण छोटे पौधों के झुलसने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में किसान अपनी फसल को बचाने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं। कई किसान खेतों में क्रॉप कवर लगा रहे हैं, जबकि कुछ किसान पुराने कपड़े, जालियां और साड़ियों का इस्तेमाल कर पौधों को तेज धूप और लू से बचा रहे हैं।

    विशेषज्ञ किसान विजय यादव के अनुसार, नर्सरी और खुले खेत के तापमान में करीब 15 डिग्री सेल्सियस का अंतर देखा जा रहा है। यही कारण है कि शुरुआती अवस्था में पौधों को अतिरिक्त सुरक्षा देना जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि जब तक तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास स्थिर नहीं हो जाता, तब तक क्रॉप कवर हटाना जोखिम भरा हो सकता है।

    उद्यानिकी विभाग के अनुसार जिले में करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पपीता की खेती की गई है। उद्यानिकी उपसंचालक केके गिरवाल ने किसानों को सलाह दी है कि तेज धूप से बचाने के लिए पौधों के चारों ओर घेरा बनाएं और नियमित सिंचाई करते रहें, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे।

    गर्मी का असर आम जनजीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सुबह 11 बजे के बाद से ही सड़कों पर सन्नाटा छाने लगता है और लोग शाम तक घरों में रहने को मजबूर हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान और गुजरात की ओर से आ रही शुष्क और गर्म हवाओं के कारण हीट वेव की स्थिति बनी हुई है। अनुमान है कि 20 मई तक इसी तरह भीषण गर्मी और लू का असर जारी रह सकता है।

  • आज का राशिफल 15 मई: जानें किस राशि को होगा लाभ और किसे रहना होगा सतर्क

    आज का राशिफल 15 मई: जानें किस राशि को होगा लाभ और किसे रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली।15 मई 2026 शुक्रवार को ग्रहों की विशेष स्थिति कई राशियों के लिए धन लाभ, करियर ग्रोथ और रिश्तों में मजबूती लेकर आ रही है, जबकि कुछ राशियों को स्वास्थ्य, खर्च और विवादों से सतर्क रहने की जरूरत है। जानिए सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल।

    मेष राशि
    आज आत्मविश्वास और ऊर्जा चरम पर रहेगी। करियर में नेतृत्व करने का मौका मिल सकता है। बिजनेस में नए निर्णय लाभ दिलाएंगे। प्रेम संबंध मजबूत होंगे।
    शुभ रंग: लाल
    लकी नंबर: 9

    वृषभ राशि
    अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में विरोधियों से सतर्क रहें। मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। निवेश सोच-समझकर करें।
    शुभ रंग: सफेद
    लकी नंबर: 6

    मिथुन राशि
    आर्थिक लाभ और करियर में तरक्की के मजबूत योग हैं। नई योजनाएं सफल होंगी। दोस्तों और परिवार का सहयोग मिलेगा।
    शुभ रंग: हरा
    लकी नंबर: 5

    कर्क राशि
    कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। मेहनत का फल मिलेगा। परिवार का सहयोग रहेगा, लेकिन तनाव से बचें।
    शुभ रंग: सिल्वर
    लकी नंबर: 2

    सिंह राशि
    भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। रुके हुए काम पूरे होंगे। यात्रा और निवेश दोनों लाभदायक रह सकते हैं।
    शुभ रंग: सुनहरा
    लकी नंबर: 1

    कन्या राशि
    आज सावधानी जरूरी है। स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है। वाहन चलाते समय सतर्क रहें।
    शुभ रंग: नीला
    लकी नंबर: 7

    तुला राशि
    साझेदारी में लाभ मिलेगा। दांपत्य जीवन सुखद रहेगा। नौकरी और बिजनेस दोनों में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
    शुभ रंग: गुलाबी
    लकी नंबर: 6

    वृश्चिक राशि
    प्रतिस्पर्धियों पर जीत मिलेगी। पुराने विवाद खत्म हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
    शुभ रंग: मरून
    लकी नंबर: 8

    धनु राशि
    विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन शानदार रहेगा। नई योजनाओं में सफलता मिलेगी। प्रेम जीवन में मधुरता बढ़ेगी।
    शुभ रंग: पीला
    लकी नंबर: 3

    मकर राशि
    परिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। भावनाओं में बहकर निर्णय न लें।
    शुभ रंग: ग्रे
    लकी नंबर: 4

    कुंभ राशि
    साहस और आत्मविश्वास बढ़ेगा। करियर में बड़ी उपलब्धि मिल सकती है। यात्रा और नए संपर्क लाभकारी रहेंगे।
    शुभ रंग: आसमानी
    लकी नंबर: 11

    मीन राशि
    धन लाभ के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में सराहना मिलेगी। रिश्तों में गंभीरता और स्थिरता आएगी।
    शुभ रंग: क्रीम
    लकी नंबर: 7

  • भोजशाला विवाद पर MP हाईकोर्ट की टिप्पणी चर्चा में, नमाज की अनुमति संबंधी मांग खारिज

    भोजशाला विवाद पर MP हाईकोर्ट की टिप्पणी चर्चा में, नमाज की अनुमति संबंधी मांग खारिज


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के भोजशाला को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हालिया फैसले में भोजशाला को देवी वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर माना है। अदालत ने अपने निर्णय में ऐतिहासिक तथ्यों, पुरातात्विक साक्ष्यों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक रिपोर्ट को अहम आधार बनाया। फैसले के बाद जहां हिंदू संगठनों में उत्साह का माहौल है, वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई है।

    करीब 30 वर्षों से भोजशाला विवाद धार्मिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ था। हिंदू पक्ष का दावा रहा कि यह स्थल परमार राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा। प्रशासन ने वर्षों तक संतुलन बनाए रखने के लिए मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज की व्यवस्था लागू की थी।

    विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर ASI ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया। सर्वे के दौरान मिली तस्वीरों और अवशेषों ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। रिपोर्ट में प्राचीन मंदिर स्थापत्य शैली, देवी-देवताओं की आकृतियों वाले स्तंभ, संस्कृत शिलालेख, कमल और हाथी जैसे हिंदू प्रतीक चिन्हों का उल्लेख किया गया। कई स्तंभों पर टूटी मूर्तियों और नक्काशी के प्रमाण भी मिले, जिन्हें हिंदू पक्ष मंदिर के साक्ष्य के रूप में पेश कर रहा है।

    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक साहित्य और पुरातात्विक रिपोर्ट यह दर्शाती है कि विवादित स्थल का संबंध भोजशाला और देवी सरस्वती की आराधना से रहा है। अदालत ने यह भी माना कि यहां हिंदू पूजा की परंपरा पूरी तरह कभी समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने ASI को परिसर का प्रशासन जारी रखने और केंद्र सरकार को प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

    फैसले के बाद धार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और RAF की तैनाती की गई तथा भोजशाला परिसर के बाहर बैरिकेडिंग की गई। हिंदू संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे “ऐतिहासिक न्याय” बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वे कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे।

    यह फैसला केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और पुरातात्विक साक्ष्यों के बीच लंबे समय से चल रही बहस का महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है।

  • हरिद्वार में होगा प्रतीक यादव का अस्थि विसर्जन, अपर्णा यादव परिवार संग होंगी रवाना; यादव परिवार में पसरा मातम

    हरिद्वार में होगा प्रतीक यादव का अस्थि विसर्जन, अपर्णा यादव परिवार संग होंगी रवाना; यादव परिवार में पसरा मातम



    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव के निधन के बाद अब परिवार हरिद्वार में अस्थि विसर्जन की तैयारी में जुट गया है। जानकारी के मुताबिक, उनकी पत्नी अपर्णा यादव जल्द ही पूरे परिवार के साथ हरिद्वार रवाना होंगी, जहां गंगा घाट पर विधि-विधान के साथ अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा।

    प्रतीक यादव का बुधवार तड़के निधन हो गया था। उन्हें गंभीर हालत में लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को लखनऊ के भैंसाकुंड धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शुक्रवार को फूल चुनने की रस्म पूरी की गई, जिसके बाद अब परिवार हरिद्वार जाकर गंगा में अस्थि विसर्जन करेगा।

    सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें फेफड़ों से जुड़ी दिक्कत बताई जा रही थी और कुछ समय पहले उनका इलाज मेदांता अस्पताल में भी चला था। वहीं, पोस्टमॉर्टम से पहले उनके शरीर पर चोट के निशान मिलने की चर्चा भी सामने आई, जिसके बाद मामले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि परिवार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

    बताया जा रहा है कि घटना के समय अपर्णा यादव लखनऊ में मौजूद नहीं थीं। वह असम के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गई थीं। पति के निधन की सूचना मिलते ही वह तुरंत लखनऊ लौट आईं।

    प्रतीक और अपर्णा यादव की शादी साल 2011 में हुई थी। दोनों एक-दूसरे को स्कूल के दिनों से जानते थे और बाद में यह दोस्ती रिश्ते में बदल गई। परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक, दोनों के बीच गहरी समझ और मजबूत रिश्ता था। अब प्रतीक यादव के निधन से परिवार और समर्थकों में शोक का माहौल है।

  • भोजशाला मामले में सामने आईं ऐतिहासिक तस्वीरें, हिंदू पक्ष ने बताए मंदिर से जुड़े प्रमाण

    भोजशाला मामले में सामने आईं ऐतिहासिक तस्वीरें, हिंदू पक्ष ने बताए मंदिर से जुड़े प्रमाण


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हालिया फैसले में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर हिंदू पक्ष के दावों को महत्वपूर्ण आधार दिया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि भोजशाला राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है।

    यह विवाद 1990 के दशक से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। पूजा और नमाज के अधिकार को लेकर कई बार तनाव की स्थिति भी बनी। प्रशासन ने हालात को संभालने के लिए अलग-अलग दिनों में पूजा और नमाज की व्यवस्था लागू की थी। मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी जाती थी, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष नमाज अदा करता था।

    मामले ने नया मोड़ तब लिया जब वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराया। लंबे समय तक चली इस जांच में परिसर से कई ऐसे अवशेष मिले, जिन्हें हिंदू धार्मिक और स्थापत्य परंपरा से जुड़ा बताया गया। रिपोर्ट में देवी-देवताओं की आकृतियां, प्राचीन मूर्तिकला, स्तंभों पर उकेरी गई कलाकृतियां और संस्कृत शिलालेखों का उल्लेख सामने आया।

    हिंदू पक्ष का दावा है कि ये सभी प्रमाण स्पष्ट करते हैं कि भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी का मंदिर था, जिसे बाद में मस्जिद के रूप में उपयोग किया गया। ASI की रिपोर्ट में परिसर के कई स्तंभों और संरचनाओं को मंदिर वास्तुकला से जुड़ा बताया गया है। यही वजह है कि हाईकोर्ट का फैसला हिंदू पक्ष के लिए बड़ी कानूनी और धार्मिक जीत माना जा रहा है।

    वहीं, मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट और अदालत में पेश किए गए कई तथ्यों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भोजशाला लंबे समय से मस्जिद के रूप में उपयोग होती रही है और धार्मिक स्वरूप को लेकर केवल एक पक्ष के दावों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार का तनाव न फैले। संवेदनशील इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    भोजशाला विवाद केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व का विषय बन चुका है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़े कानूनी और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन सकता है।

  • झांसी में रफ्तार का कहर: ट्रक ने चाचा-भतीजे को 100 मीटर तक घसीटा, सड़क पर बिखरे शव के टुकड़े, घर में मचा कोहराम

    झांसी में रफ्तार का कहर: ट्रक ने चाचा-भतीजे को 100 मीटर तक घसीटा, सड़क पर बिखरे शव के टुकड़े, घर में मचा कोहराम

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। झांसी-कानपुर हाईवे पर चिरगांव थाना क्षेत्र के बाईपास के पास तेज रफ्तार और बेकाबू ट्रक ने बाइक सवार चाचा-भतीजे को कुचल दिया। हादसा इतना भयावह था कि दोनों को ट्रक करीब 100 मीटर तक घसीटता हुआ ले गया। टक्कर और घसीटने की वजह से एक युवक का सिर धड़ से अलग हो गया, जबकि शव के कई टुकड़े सड़क पर बिखर गए। हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।

    जानकारी के अनुसार, दोनों रिश्तेदार बाजार से सब्जी खरीदकर बाइक से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे ट्रक ने बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन रोकने के बजाय भागने की कोशिश करता रहा और बाइक समेत दोनों युवकों को काफी दूर तक घसीटता चला गया। सड़क पर खून और शव के टुकड़े बिखरने से वहां मौजूद लोग सहम गए।

    बताया जा रहा है कि हादसे में जान गंवाने वाले भतीजे की शादी दो दिन पहले ही तय हुई थी। घर में शादी की तैयारियों और खुशियों का माहौल था, लेकिन एक पल में मातम छा गया। परिवार को जैसे ही हादसे की खबर मिली, घर में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी शोक का माहौल बना हुआ है।

    हादसे के बाद बाइक ट्रक के नीचे फंस गई, जिससे चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों की मदद से सड़क पर बिखरे शव के टुकड़ों को इकट्ठा कर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजा। हादसे की भयावह तस्वीरें देखकर पुलिसकर्मी भी स्तब्ध रह गए।

    पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर आरोपी चालक की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और जल्द ही चालक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं स्थानीय लोगों ने हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों पर लगाम लगाने और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाह ड्राइविंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आए दिन तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण होने वाले हादसे कई परिवारों की खुशियां छीन रहे हैं। झांसी की यह घटना भी उन दर्दनाक हादसों में शामिल हो गई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।