Author: bharati

  • चीन दौरे पर ट्रंप-मस्क का ‘डिजिटल लॉकडाउन’, बिना फोन पहुंचे दिग्गज; साइबर खतरे से क्यों अलर्ट अमेरिका?

    चीन दौरे पर ट्रंप-मस्क का ‘डिजिटल लॉकडाउन’, बिना फोन पहुंचे दिग्गज; साइबर खतरे से क्यों अलर्ट अमेरिका?



    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे को लेकर इस समय सबसे ज्यादा चर्चा किसी राजनीतिक समझौते की नहीं, बल्कि कड़े डिजिटल सुरक्षा प्रोटोकॉल की हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरे में शामिल अमेरिकी अधिकारियों और बड़े टेक दिग्गजों जैसे एलन मस्क, टिम कुक और जेनसन हुआंग ने अपने निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप साथ नहीं ले जाने का फैसला किया है। इसे अमेरिकी मीडिया “डिजिटल लॉकडाउन” कह रही है।

    सूत्रों के मुताबिक, यह कदम चीन में साइबर जासूसी, डेटा ट्रैकिंग और संभावित हैकिंग के खतरे को देखते हुए उठाया गया है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि विदेश यात्राओं, खासकर चीन जैसे देशों में, निजी डिवाइस पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहते और उनमें मौजूद संवेदनशील डेटा को निशाना बनाया जा सकता है। इसी वजह से प्रतिनिधिमंडल को केवल विशेष रूप से तैयार किए गए सुरक्षित डिवाइस, जिन्हें “बर्नर फोन” या क्लीन डिवाइस कहा जाता है, उपलब्ध कराए गए हैं।

    इन डिवाइसों में किसी तरह का निजी डेटा नहीं होता और इनमें सीमित इंटरनेट एक्सेस होता है। यात्रा समाप्त होने के बाद इन उपकरणों को पूरी तरह से साफ किया जाता है या नष्ट कर दिया जाता है। इसके अलावा, इन डिवाइसों में “गोल्डन इमेज” नामक एक सुरक्षित सॉफ्टवेयर सेटअप भी इंस्टॉल किया जाता है, ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ या अनधिकृत एक्सेस की तुरंत पहचान की जा सके।

    सुरक्षा व्यवस्था के तहत चीन में किसी भी अनजान चार्जर, होटल वाई-फाई या सार्वजनिक USB पोर्ट के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, “जूस जैकिंग” नामक साइबर खतरे में पब्लिक चार्जिंग पोर्ट के जरिए मोबाइल और लैपटॉप में मैलवेयर डाले जाने या डेटा चोरी होने की संभावना रहती है। इसी कारण अधिकारियों को केवल सुरक्षित पावर बैंक और अधिकृत चार्जिंग उपकरणों का ही उपयोग करने की अनुमति दी गई है।

    हालांकि, चीन ने इन सभी आरोपों और आशंकाओं को खारिज किया है। चीनी दूतावास का कहना है कि देश किसी भी विदेशी नागरिक या सरकार का डेटा अवैध रूप से न तो एकत्र करता है और न ही एक्सेस करता है, और सभी डिजिटल सिस्टम कानून के तहत सुरक्षित हैं।

    कुल मिलाकर, ट्रंप के इस दौरे में लागू की गई कड़ी डिजिटल सुरक्षा यह दर्शाती है कि अमेरिका और चीन के बीच केवल राजनीतिक या आर्थिक ही नहीं, बल्कि साइबर और तकनीकी स्तर पर भी गहरी प्रतिस्पर्धा और अविश्वास मौजूद है।

  • पटना में ब्लैकआउट ड्रिल के बीच कारोबारी की हत्या, बदमाशों ने अंधेरे का फायदा उठाकर मारी गोली

    पटना में ब्लैकआउट ड्रिल के बीच कारोबारी की हत्या, बदमाशों ने अंधेरे का फायदा उठाकर मारी गोली


    पटना। बिहार की राजधानी पटना में आयोजित ‘ब्लैकआउट मॉक ड्रिल’ के दौरान एक सनसनीखेज हत्या की वारदात सामने आई है। शहर में सुरक्षा अभ्यास के तहत 15 मिनट के लिए बिजली बंद की गई थी, इसी दौरान सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में 25 वर्षीय मसाला कारोबारी पिंटू उर्फ बड़का की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

    मृतक मुसल्लहपुर हाट के पीछे का निवासी था और मसालों का कारोबार करता था। बताया जा रहा है कि अपराधियों ने पहले से घात लगाकर पिंटू को निशाना बनाया। जैसे ही मॉक ड्रिल के तहत इलाके की लाइटें बंद हुईं, बदमाशों ने उसके सिर में गोली मार दी।

    गोली चलते ही मची अफरा-तफरी
    वारदात के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गोली की आवाज सुनते ही मंडी क्षेत्र में भगदड़ मच गई। स्थानीय लोगों ने गंभीर रूप से घायल पिंटू को तुरंत पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी अंधेरे और सन्नाटे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

    पुलिस और एफएसएल टीम जांच में जुटी
    सूचना मिलते ही सुल्तानगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को भी बुलाया गया है, जो घटनास्थल से सबूत जुटाने में लगी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में हत्या के पीछे पुरानी रंजिश की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल आरोपियों की तलाश जारी है।

    प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
    इस घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जिस ब्लैकआउट ड्रिल को आपात स्थिति से निपटने की तैयारी के तौर पर आयोजित किया गया था, उसी दौरान अपराधियों ने हत्या की वारदात को अंजाम दे दिया। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा और गश्त के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे। घटना के बाद इलाके में लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

  • फ्लोरिडा का विमान बीच समुद्र में हुआ क्रैश…. पायलट की सूझबूझ से बची 11 लोगों क जान

    फ्लोरिडा का विमान बीच समुद्र में हुआ क्रैश…. पायलट की सूझबूझ से बची 11 लोगों क जान


    वाशिंगटन।
    अगर प्लेन क्रैश के हादसे (Plane Crash Incidents) में किसी इंसान की जान बच जाए तो आप इसे चमत्कार का ही नाम देंगे। ऐसा ही कुछ यहां फ्लोरिडा (Florida) की एक प्लेन में सवार में 9 लोगों के साथ हुआ। अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean) के बीचो-बीच एक कुछ ऐसा हुआ जिसे देखकर रेस्क्यू टीम भी दंग रह गई। यहां बहामास से उड़ान भरने वाला एक छोटा विमान तकनीकी खराबी के बाद समुद्र में गिर गया। हालांकि पायलट की सूझबूझ और अमेरिकी एयरफोर्स (US Air Force) की जाबांजी की वजह से 11 लोगों की जान बच गई है। रेस्क्यू टीम ने इसे चमत्कार से कम नहीं बताया है।

    इससे पहले 25 साल के अनुभव वाले पायलट इयान निक्सन के लिए यह 20 मिनट की एक रूटीन फ्लाइट थी। लेकिन इसके बाद जो हुआ वह किसी बुरे सपने से कम नहीं। उड़ान के दौरान विमान का नेविगेशन सिस्टम फेल हो गया। फिर रेडियो ने भी काम करना बंद कर दिया और अंत में विमान के दोनों इंजन एक-एक करके ठप हो गए।


    विमान की करानी पड़ी ‘डिचिंग’

    जब पायलट के पास लैंडिंग का कोई रास्ता नहीं बचा, तो उन्होंने मियामी से करीब 175 मील दूर समंदर में विमान की ‘डिचिंग’ यानी पानी पर इमरजेंसी लैंडिंग करने का फैसला लिया। पायलट निक्सन ने एक बयान में बताया, “जैसे ही विमान पानी से टकराया, हमारी सांस अटक गई।” इसके बाद विमान पूरी तरह डूबने से पहले सभी 11 लोग लाइफ राफ्ट पर सवार होने में सफल रहे। हालांकि मदद के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा।

    नाव पर फंसे यात्रियों को करीब 5 घंटे इंतजार करना पड़ा। इस बीच पायलट यात्रियों का हौसला बढ़ाता रहा। उम्मीद की किरण तब जगी जब उन्होंने अमेरिकी एयरफोर्स का रेस्क्यू विंग देखा। यह विमान एक एक ट्रेनिंग मिशन पर था। कोस्ट गार्ड से सिग्नल मिलते ही प्लेन को इस तरफ लाया गया और यात्रियों को बचा लिया गया।


    आज तक नहीं देखा ऐसा…

    रेस्क्यू टीम इस घटना से हैरान रह गई। कैप्टन रोरी व्हिपल ने एक बयान में कहा, “वे करीब 5 घंटे से राफ्ट पर थे। उन्हें देखकर ही पता चल रहा था कि वे शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुके थे। वहीं एयरक्राफ्ट कमांडर एलिजाबेथ पियोवाटी ने कहा, “मैंने समंदर में विमान गिरने के बाद आज तक किसी को जिंदा बचते नहीं देखा। सभी का सुरक्षित होना सचमुच जादू की तरह है।”

    विमान में सवार यात्री ओलंपिया आउटेन ने अस्पताल पहुंचने के बाद कहा, “जब हमें बचाया गया, तो हर कोई खुशी से झूम उठा। हमें लग रहा था कि अब अंत करीब है, वह बिल्कुल किसी फिल्म के सीन जैसा था।” फिलहाल सभी 11 लोगों को फ्लोरिडा के अस्पताल ले जाया गया। इनमें से तीन को मामूली चोटें आई हैं।

  • ट्रंप का बड़ा दावा: चीन अब ईरान को नहीं देगा हथियार, शी जिनपिंग से बातचीत में बनी सहमति

    ट्रंप का बड़ा दावा: चीन अब ईरान को नहीं देगा हथियार, शी जिनपिंग से बातचीत में बनी सहमति

    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ईरान को सैन्य उपकरण नहीं भेजने पर सहमति जताई है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बना हुआ है। माना जा रहा है कि यदि चीन हथियारों की सप्लाई रोकता है तो इसका बड़ा रणनीतिक असर पड़ सकता है।

    बीजिंग बैठक के बाद ट्रंप का बयान
    13 से 15 मई के बीच चीन दौरे पर पहुंचे ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि बीजिंग में हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान ईरान के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया है कि चीन ईरान को सैन्य उपकरण उपलब्ध नहीं कराएगा। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “उन्होंने कहा कि वे ईरान को हथियार या सैन्य उपकरण नहीं देंगे। यह बहुत बड़ा कदम है।”

    तेल कारोबार जारी रखना चाहता है चीन
    हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन ईरान से तेल खरीद जारी रखना चाहता है। उनके मुताबिक चीन ने साफ किया है कि वह ईरानी तेल आयात को बंद नहीं करेगा, क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों के लिए यह महत्वपूर्ण है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2025 और 2026 की पहली तिमाही में चीन ने प्रतिदिन करीब 14 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदा। यह चीन के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा रहा।

    अमेरिका-चीन के बीच तेल पर भी चर्चा
    व्हाइट हाउस की ओर से जानकारी दी गई कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच अमेरिका से तेल खरीद के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। इससे पहले ट्रेड वॉर के दौरान चीन ने अमेरिकी कच्चे तेल पर 20 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था, जिसके बाद मई 2025 में उसने अमेरिकी तेल खरीद लगभग बंद कर दी थी।

    बोइंग को मिल सकता है बड़ा ऑर्डर
    ट्रंप ने बातचीत के दौरान यह दावा भी किया कि चीन अमेरिकी विमान निर्माता बोइंग से 200 विमान खरीदने पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा कि यह डील बोइंग के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी और इससे अमेरिका में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ट्रंप ने कहा, “बोइंग 150 विमानों के ऑर्डर की उम्मीद कर रहा था, लेकिन अब 200 विमानों का ऑर्डर मिलने जा रहा है।”

    पहले भी मिल चुके थे संकेत
    इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी बोइंग को बड़े ऑर्डर मिलने के संकेत दिए थे। वहीं Kelly Ortberg भी ट्रंप के साथ चीन दौरे पर मौजूद हैं, जिससे इस संभावित समझौते को और बल मिला है।

  • भारतीयों और चिल्कूर बालाजी मंदिर पर अमेरिकी सीनेटर का विवादित बयान, H-1B वीजा को बताया ‘कार्टेल’

    भारतीयों और चिल्कूर बालाजी मंदिर पर अमेरिकी सीनेटर का विवादित बयान, H-1B वीजा को बताया ‘कार्टेल’

    नई दिल्ली। अमेरिकी सीनेटर एरिक श्मिट ने H-1B वीजा नीति और भारतीयों को लेकर दिए गए बयान से बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर की गई उनकी टिप्पणी में उन्होंने भारतीय आईटी पेशेवरों, अमेरिकी कंपनियों और वीजा सिस्टम को जोड़ते हुए इसे “वीजा कार्टेल” तक कह दिया। इस टिप्पणी के बाद अमेरिका और भारत दोनों जगह तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

    सबसे ज्यादा विवाद उनके उस बयान पर है जिसमें उन्होंने हैदराबाद के प्रसिद्ध चिल्कूर बालाजी मंदिर का जिक्र करते हुए इसे “वीजा मंदिर” और कथित “वीजा कार्टेल” से जोड़ दिया। श्मिट के अनुसार, यह सिस्टम अमेरिकी नौकरियों और वेतन पर असर डाल रहा है, हालांकि उनके इन दावों को लेकर कई विशेषज्ञ और यूजर्स ने सवाल उठाए हैं और इसे भ्रामक बताया है।

    दरअसल, चिल्कूर बालाजी मंदिर लंबे समय से उन लोगों के बीच लोकप्रिय है जो विदेश जाने की इच्छा रखते हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन और परिक्रमा करने से मनोकामना पूरी होती है, इसी कारण इसे “वीजा टेंपल” भी कहा जाता है। भक्त यहां वीजा आवेदन से पहले 11 परिक्रमा और सफलता मिलने पर 108 परिक्रमा करते हैं।

    श्मिट ने अपने बयान में H-1B, L-1 और F-1 वीजा सिस्टम पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों और वेतन पर असर पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने अमेरिकी टेक कंपनियों पर “मेरिट के बजाय पक्षपात” को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया।

    हालांकि, इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर भारी आलोचना हो रही है और लोग इसे बिना तथ्यों के दिया गया भड़काऊ बयान बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बयान देने से पहले तथ्यों की जांच बेहद जरूरी है।

    कुल मिलाकर, यह विवाद अब सिर्फ वीजा नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों और सांस्कृतिक संवेदनशीलता तक पहुंच गया है।

  • MP: पूर्व CM दिग्विजय सिंह बोले- मेरा मॉडल कर रही लागू मोदी सरकार….. इसके लिए धन्यावाद!

    MP: पूर्व CM दिग्विजय सिंह बोले- मेरा मॉडल कर रही लागू मोदी सरकार….. इसके लिए धन्यावाद!


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Former Chief Minister Digvijay Singh) ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार (Central government) पर अपनी सरकार के फैसले को अपनाने का जिक्र किया और बताया कि मोदी सरकार (Modi government) उनके मुख्यमंत्री काल के ‘पालक-शिक्षक संघ’ (Parent-Teacher Association- PTA) मॉडल को देश के 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही है। उन्होंने बताया कि यह फैसला उन्होंने साल 1993 से 2003 के बीच मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने के दौरान लिया था। खास बात यह है कि इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार को धन्यवाद भी दिया। इस दौरान उन्होंने पूरे देश में लाखों सरकारी स्कूलों को बंद करने के फैसले पर भी आपत्ति जताई।

    इस बारे में ‘एक्स’ पर शेयर की अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘मेरे मुख्यमंत्री काल का पालक शिक्षक संघ (PTA) का मॉडल जिसे अब केंद्र सरकार 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही हैं। धन्यवाद। मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल 1993-2003 में मध्य प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय उपलब्धि में हासिल की थी मुझे उस पर गर्व है। अब BJP सरकार मेरे मॉडल को स्वीकार कर लागू कर रही है मुझे प्रसन्नता है। देर से आए दुरुस्त आए। ‘


    सरकारी स्कूल बंद करने के फैसले पर जताई आपत्ति

    आगे उन्होंने केंद्र सरकार के एक फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि, ‘देश के शासकीय स्कूलों में सुधार आवश्यक है। पूरे देश में लाखों शासकीय स्कूल बंद किए जा रहे हैं। ये उचित नहीं है। अब शासकीय स्कूलों में वही बच्चे पढ़ रहे हैं जो निजी स्कूलों में फीस नहीं दे पा रहे हैं। शासकीय स्कूलों में छात्रों के पालकों को व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी जाना चाहिए। इन शासकीय स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार आवश्यक है। जय सिया राम।’


    पोस्ट के साथ शेयर किया कार्यकर्ता की पोस्ट का लिंक

    अपनी पोस्ट के साथ दिग्विजय सिंह ने अपनी पार्टी के एक कार्यकर्ता की पोस्ट का लिंक भी शेयर किया था, जिसमें उसने केंद्र सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि, ‘पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह जी का पालक-शिक्षक संघ (PTA) का वो मॉडल जिसे केंद्र सरकार 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही हैं। मध्य प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय उपलब्धि आदरणीय दिग्विजय सिंह जी के 10 वर्षीय मुख्यमंत्री काल 1993-2003 में हासिल की, ये अभूतपूर्व हैं।’ अपनी पोस्ट के अंत में उस शख्स ने बताया कि ‘दिग्विजय सिंह जी वर्तमान में शिक्षा, महिला, बाल और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं।’


    शिक्षक-पालक संघ खुद लेगा इतने लाख रुपए तक के फैसले

    पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने जिस कार्यकर्ता की पोस्ट के लिंक को शेयर किया, उसने इस खबर से जुड़ा एक न्यूज आर्टिकल भी शेयर किया था, जिसमें केंद्र सरकार के इस फैसले की जानकारी दी गई थी। इसमें बताया गया कि ‘देश के लगभग 15 लाख स्कूलों का प्रबंधन अब सीधे तौर पर अभिभावकों के हाथों में होगा। नए नियमों के मुताबिक, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) को 30 लाख रुपए तक के निर्माण कार्य बिना लोक निर्माण विभाग की मंजूरी के खुद कराने की वित्तीय शक्ति दी गई है। शिक्षा मंत्रालय ने इन सुधारों को नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 और शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) 2009 के तहत अंतिम रूप दिया है, जिससे अब स्कूल केवल सरकारी संस्थान न रहकर ‘सामुदायिक संपत्ति’ के रूप में विकसित होंगे।’

  • सैफ अली खान का खुलासा: ‘मैं हूं ना’ के लिए शाहरुख ने चुना था, पर फराह खान ने बदला फैसला

    सैफ अली खान का खुलासा: ‘मैं हूं ना’ के लिए शाहरुख ने चुना था, पर फराह खान ने बदला फैसला


    नई दिल्ली सैफ अली खान ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि शाहरुख खान ने उन्हें फिल्म ‘मैं हूं ना’ में रोल ऑफर किया था, लेकिन बाद में फराह खान के दखल के चलते मामला बदल गया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है।

    बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा एक पुराना लेकिन दिलचस्प किस्सा साझा किया, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। सैफ ने बताया कि सुपरस्टार शाहरुख खान ने उन्हें अपनी सुपरहिट फिल्म ‘मैं हूं ना’ में एक रोल ऑफर किया था, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं और वह मौका हाथ से निकल गया।

    सैफ के अनुसार, शाहरुख खान ने खुद उन्हें फोन कर फिल्म ‘मैं हूं ना’ के एक महत्वपूर्ण किरदार के लिए चुना था। उन्होंने कहा कि उन्हें यह रोल काफी पसंद आया था और वह इसे करने के लिए तैयार भी थे। लेकिन इसी दौरान फिल्म की डायरेक्टर फराह खान ने उनसे संपर्क किया और स्पष्ट रूप से कहा कि यह भूमिका उनके लिए नहीं है।

    सैफ ने बताया कि फराह खान के इस कॉल के बाद स्थिति बदल गई और वह प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बन पाए। हालांकि उन्होंने इसे लेकर किसी तरह की नाराजगी नहीं जताई और पूरे किस्से को हल्के अंदाज में साझा किया। बातचीत के दौरान जब उन्हें एहसास हुआ कि यह बयान सुर्खियां बना सकता है, तो वह मुस्कुराते हुए बोले कि “अब यह बात वायरल हो जाएगी।”

    इंटरव्यू में सैफ ने शाहरुख खान और उनकी प्रोडक्शन कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि शाहरुख एक प्रोड्यूसर के तौर पर अपने डायरेक्टर्स को पूरी आज़ादी देते हैं और सेट पर अनावश्यक दखल नहीं करते।

    इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग यह अंदाजा लगा रहे हैं कि सैफ को फिल्म में कौन-सा रोल ऑफर हुआ था, जबकि कुछ इसे सिर्फ एक पुराना कास्टिंग निर्णय मान रहे हैं।

    गौरतलब है कि सैफ अली खान और शाहरुख खान पहले भी फिल्म ‘कल हो ना हो’ में साथ काम कर चुके हैं और दोनों के बीच अच्छे संबंध माने जाते हैं।

    वहीं, सैफ की नई फिल्म ‘कर्तव्य’ भी चर्चा में है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है और इसे शाहरुख खान की रेड चिलीज एंटरटेनमेंट ने प्रोड्यूस किया है।

  • MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त

    MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने गुरुवार को मध्य प्रदेश टेक्स्ट बुक कॉर्पोरेशन (Madhya Pradesh Text Book Corporation) के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह (Saubhagya Singh) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से सादगी बरतने की अपील के बावजूद 200 गाड़ियों की एक जश्न वाली रैली निकालने के लिए दिया गया है।

    अधिकारियों ने बताया कि नोटिस का जवाब मिलने तक सौभाग्य सिंह पर अपने ऑफिस में प्रवेश, सरकारी वाहनों और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने आगे बताया कि जांच पूरी होने तक उन्हें सौंपी गई सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं।

    उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री कार्यालय ने मितव्ययिता उपायों के घोर उल्लंघन का संज्ञान लिया है। सरकार ने वाहन रैली को अनावश्यक और सरकार की सादगी की नीति के खिलाफ माना है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दिखावा और अनुशासनहीनता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”


    भाजपा नेता ने सैकड़ों गाड़ियों संग रैली निकाली, पार्टी ने पद से हटाया

    ऐसे ही एक मामले में सैकड़ों गाड़ियों के साथ रैली निकालने के आरोप में भाजपा ने मध्य प्रदेश के भिंड जिले के किसान मोर्चा अध्यक्ष को पद से हटा दिया है। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, हाल ही में इस पद पर नियुक्त किए गए सज्जन सिंह यादव को मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के आदेश पर पद से हटाया गया है। बताया गया कि सज्जन सिंह यादव के किसान मोर्चा अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के अवसर पर बुधवार को भिंड शहर में एक रैली आयोजित की गई थी, जिसमें सैकड़ों वाहन शामिल हुए थे। भिंड शहर भोपाल से लगभग 500 किलोमीटर दूर है।

    भाजपा ने यादव को जारी पत्र में कहा कि उनका यह आचरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाओ अपील के विपरीत है और गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।


    नियुक्ति निरस्त की गई

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, “यादव की नियुक्ति अनुशासनहीनता और ईंधन बचत एवं मितव्ययिता के उपायों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बार-बार की गई अपील का पालन नहीं करने के कारण निरस्त कर दी गई है।”

    गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने, शहरों में अधिक से अधिक मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कारपूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, पार्सल आवाजाही के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने जैसे उपायों को प्रोत्साहित करने की अपील की थी।

  • थ्यूसीडाइड्स ट्रैप पर जिनपिंग का बड़ा संदेश, ट्रंप से बातचीत में टकराव टालने की अपील; क्या बदलेंगे अमेरिका-चीन रिश्ते?

    थ्यूसीडाइड्स ट्रैप पर जिनपिंग का बड़ा संदेश, ट्रंप से बातचीत में टकराव टालने की अपील; क्या बदलेंगे अमेरिका-चीन रिश्ते?




    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में हुई हालिया उच्च स्तरीय बैठक एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गई है। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, तकनीक और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। लेकिन इस बैठक का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पहलू वह रहा, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र किया और स्पष्ट रूप से टकराव से बचने की अपील की। उनके इस बयान को अमेरिका-चीन रिश्तों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    शी जिनपिंग ने बातचीत के दौरान सवाल उठाया कि क्या दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन इस ऐतिहासिक “ट्रैप” से बाहर निकलकर सहयोग और स्थिरता का नया मॉडल विकसित कर सकती हैं? उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों का साथ आना आवश्यक है, ताकि दुनिया में शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रह सके। उनके बयान का अर्थ यह भी निकाला जा रहा है कि चीन टकराव के बजाय सहयोग की नीति को प्राथमिकता देना चाहता है, हालांकि इसके पीछे वैश्विक शक्ति संतुलन में अपनी भूमिका को मजबूत करने की रणनीति भी देखी जा रही है।

    ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ शब्द कोई नया राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के राजनीतिक वैज्ञानिक ग्राहम एलिसन ने आधुनिक राजनीति में लोकप्रिय बनाया था। यह सिद्धांत प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के अध्ययन पर आधारित है, जिन्होंने लगभग ढाई हजार साल पहले एथेंस और स्पार्टा के बीच हुए पेलोपोनेसियन युद्ध का विश्लेषण किया था। थ्यूसीडाइड्स का मानना था कि जब कोई उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित महाशक्ति को चुनौती देती है, तो दोनों के बीच तनाव बढ़ना लगभग स्वाभाविक हो जाता है और कई बार यह स्थिति युद्ध तक पहुंच जाती है।

    आधुनिक वैश्विक राजनीति में इस सिद्धांत को अमेरिका और चीन के रिश्तों से जोड़ा जाता है। पिछले कुछ दशकों में चीन ने आर्थिक, सैन्य और तकनीकी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आया है। दूसरी ओर अमेरिका लंबे समय से वैश्विक सुपरपावर की भूमिका में रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती गई है। व्यापार युद्ध, टैरिफ विवाद, टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध, साइबर सुरक्षा, ताइवान मुद्दा और दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियों ने इस तनाव को और गहरा किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच मौजूदा हालात काफी हद तक ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ जैसी स्थिति को दर्शाते हैं, जहां एक उभरती हुई शक्ति और एक स्थापित महाशक्ति के बीच टकराव की संभावना बनी रहती है, भले ही कोई भी पक्ष युद्ध नहीं चाहता हो। इसी कारण शी जिनपिंग का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह केवल चेतावनी नहीं बल्कि कूटनीतिक संदेश भी है कि दोनों देशों को बातचीत और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए।

    जिनपिंग ने पहले भी कई मौकों पर इस सिद्धांत का उल्लेख किया है और हमेशा यही संदेश दिया है कि अमेरिका और चीन यदि साझा हितों पर काम करें तो वैश्विक स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान चीन की उस रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिसमें वह खुद को अमेरिका के बराबर एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

    कुल मिलाकर यह बैठक और ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ पर दिया गया बयान केवल एक राजनीतिक चर्चा नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा तय करने वाला संकेत भी माना जा रहा है। दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन, प्रतिस्पर्धा और सहयोग—इन तीनों के बीच आगे का रास्ता किस दिशा में जाएगा, यह वैश्विक राजनीति के लिए सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।

  • US: कोर्ट ने फिर दिया ट्रंप को बड़ा झटका….. 10% टैरिफ को बताया अवैध

    US: कोर्ट ने फिर दिया ट्रंप को बड़ा झटका….. 10% टैरिफ को बताया अवैध


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अमेरिकी अदालत (American Court) में एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा है। गुरुवार को अमेरिकी व्यापार अदालत ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क (10% Global Import Duty) को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि 1970 के दशक के व्यापार कानून का हवाला देकर लगाए गए ये शुल्क तर्कसंगत नहीं हैं। आपको बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी को दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% का नया आयात शुल्क लागू किया था। इसके खिलाफ 24 राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने मुकदमा दायर किया था।

    राज्यों का तर्क था कि ट्रंप ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से बचने के लिए उठाया है, जिसने 2025 में लगाए गए उनके पिछले भारी-भरकम टैरिफ को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया था। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है।


    क्या है धारा 122?

    यह कानून राष्ट्रपति को केवल तब शुल्क लगाने की अनुमति देता है जब देश गंभीर भुगतान संतुलन घाटे का सामना कर रहा हो या डॉलर की कीमत में भारी गिरावट रोकने की जरूरत हो। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि वह 5 दिनों के भीतर इस फैसले का पालन करे और उन आयातकों को पैसे वापस करे जिन्होंने यह टैक्स भरा था।


    इन क्षेत्रों पर असर नहीं

    ध्यान देने वाली बात यह है कि स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगे टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे, क्योंकि वे इस कानूनी चुनौती या सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले के दायरे में नहीं आते हैं।


    सरकार की दलील?

    ट्रंप प्रशासन ने इन शुल्कों का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका का वार्षिक व्यापार घाटा 1.2 ट्रिलियन ड़लर तक पहुंच गया है और चालू खाता घाटा जीडीपी का 4% है। हालांकि अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका किसी भुगतान संतुलन संकट से नहीं जूझ रहा है, इसलिए इन शुल्कों का कोई कानूनी आधार नहीं था।


    आगे क्या होगा?

    अमेरिकी न्याय विभाग इस फैसले को यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती दे सकता है। वर्तमान में लगाए गए ये 10% वैश्विक टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाले थे, लेकिन इस अदालती फैसले ने प्रशासन की व्यापारिक रणनीति को समय से पहले ही संकट में डाल दिया है।