Author: bharati

  • वोटर लिस्ट की नई जंग: SIR के तीसरे चरण में 16 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश होंगे शामिल

    वोटर लिस्ट की नई जंग: SIR के तीसरे चरण में 16 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश होंगे शामिल


    नई दिल्ली ।देश की चुनावी व्यवस्था में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है क्योंकि चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के तीसरे चरण की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह प्रक्रिया केवल वोटर लिस्ट का सामान्य अपडेट नहीं बल्कि एक व्यापक सत्यापन अभियान है, जिसका उद्देश्य देश की मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। तीसरे चरण में 16 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश शामिल किए गए हैं, जहां कुल 36 करोड़ से अधिक मतदाताओं का विस्तृत वेरिफिकेशन किया जाएगा।

    SIR प्रक्रिया को चुनाव आयोग ने इसलिए लागू किया है ताकि मतदाता सूची में मौजूद उन नामों को हटाया जा सके जो अब वास्तविक रूप से पात्र नहीं हैं। इसमें मृत व्यक्तियों के नाम, स्थानांतरित हो चुके मतदाता, दोहराए गए रिकॉर्ड और गलत प्रविष्टियां शामिल हैं। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि जिन नागरिकों की उम्र 18 वर्ष हो चुकी है या जो पहले किसी कारणवश सूची में शामिल नहीं हो पाए थे, उन्हें भी मतदान का अवसर मिल सके। आयोग का मानना है कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती उसकी मतदाता सूची की शुद्धता पर निर्भर करती है।

    अब तक के दो चरणों में इस अभियान का व्यापक असर देखा गया है। पहले चरण की शुरुआत बिहार से हुई थी, जिसे एक तरह का पायलट प्रोजेक्ट माना गया। इसके बाद दूसरे चरण में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया, जहां करोड़ों नामों की समीक्षा की गई और बड़ी संख्या में नाम सूची से हटाए भी गए। इन प्रक्रियाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि SIR केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक गहन और सख्त सत्यापन अभियान है, जिसका प्रभाव सीधे तौर पर देश की चुनावी संरचना पर पड़ता है।

    तीसरे चरण को अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक चरण माना जा रहा है क्योंकि इसमें देश की बड़ी आबादी शामिल होगी। इस चरण में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, ओडिशा, झारखंड, आंध्र प्रदेश, दिल्ली सहित कई महत्वपूर्ण राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। इस चरण के दौरान लाखों बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी की जांच करेंगे और दस्तावेजों का मिलान करेंगे। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी इस प्रक्रिया में सहयोग करेंगे ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

    इस पूरे अभियान में तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बड़ी तैयारी की गई है। लाखों की संख्या में बूथ लेवल अधिकारी और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त एजेंट इस प्रक्रिया को सफल बनाने में जुटे रहेंगे। इसके तहत हर नागरिक की पहचान, निवास स्थान और पात्रता की जांच की जाएगी, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी या दोहराव को रोका जा सके।

    SIR प्रक्रिया को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में पहले ही कई तरह की राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं देखने को मिली हैं। कुछ जगहों पर इसे मतदाता सूची सुधार का जरूरी कदम बताया गया है, तो वहीं कुछ आलोचक इसे जटिल और विवादास्पद प्रक्रिया भी मानते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां बड़ी संख्या में नामों में बदलाव हुआ है, वहां इस प्रक्रिया पर लगातार निगरानी और बहस जारी है।

    तीसरे चरण के पूरा होने के बाद देश के लगभग पूरे चुनावी ढांचे की मतदाता सूची को नए सिरे से अपडेट कर दिया जाएगा। केवल कुछ ही क्षेत्र इस प्रक्रिया से बाहर रहेंगे, जहां प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से बाद में इसे लागू किया जाएगा। इस बड़े अभियान के बाद भारत की चुनावी व्यवस्था को और अधिक सटीक और मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • पीएम की अपील पर सवाल: 9 BJP नेताओं ने निकाले काफिले, एक पर कार्रवाई से उठा विवाद

    पीएम की अपील पर सवाल: 9 BJP नेताओं ने निकाले काफिले, एक पर कार्रवाई से उठा विवाद


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में ईंधन के संयमित उपयोग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील के बाद मध्य प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। पीएम ने हाल ही में देशवासियों से कार पूलिंग, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की बात कही थी, ताकि वैश्विक परिस्थितियों में संसाधनों की बचत की जा सके।

    हालांकि, इस अपील के बाद भी राज्य में कई नेताओं के बड़े-बड़े काफिले निकलते नजर आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां दर्जनों से लेकर सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन किया।

    कुछ मामलों में पार्टी स्तर पर कार्रवाई भी हुई है। भिंड में किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया, क्योंकि वे लगभग 100 वाहनों के काफिले और बग्घी के साथ कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहीं, पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष पर भी कार्रवाई करते हुए उनका अधिकार सीमित कर दिया गया, जब उन्होंने उज्जैन से भोपाल तक करीब 700 वाहनों का काफिला निकाला, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।

    लेकिन कई अन्य मामलों में अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। कुछ विधायकों और मोर्चा पदाधिकारियों पर भी इसी तरह के काफिलों के आरोप लगे हैं, जहां 200 से अधिक गाड़ियों के साथ रैलियां निकाली गईं। इनमें मंदिर दर्शन, स्वागत कार्यक्रम और पार्टी आयोजनों के दौरान शक्ति प्रदर्शन के दृश्य सामने आए हैं।

    वहीं दूसरी ओर कुछ उदाहरण ऐसे भी सामने आए हैं जो अलग संदेश देते हैं, जैसे एक मंत्री द्वारा बस से यात्रा कर आम लोगों के बीच पहुंचना और ईंधन बचत की अपील को समर्थन देना।

    इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि जहां एक तरफ जनता से संयम की अपील की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी संस्कृति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है और लोग नेताओं के इस दोहरे रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।

    अब देखना होगा कि सरकार और पार्टी संगठन इस पर आगे क्या सख्त कदम उठाते हैं, या यह विवाद सिर्फ नोटिस और बयानबाजी तक सीमित रह जाता है।

  • NEET परीक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा, अब कंप्यूटर पर होगी मेडिकल प्रवेश परीक्षा

    NEET परीक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा, अब कंप्यूटर पर होगी मेडिकल प्रवेश परीक्षा

    नई दिल्ली ।देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। हाल ही में सामने आए पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों के बीच सरकार ने यह साफ कर दिया है कि अब परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसी क्रम में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की है कि अगले वर्ष से नीट परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित यानी सीबीटी मोड में आयोजित किया जाएगा।

    इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। अब तक नीट परीक्षा ओएमआर शीट आधारित ऑफलाइन मोड में आयोजित होती रही है, जिसमें लाखों छात्र एक साथ परीक्षा केंद्रों पर पहुंचकर पेन-पेपर के जरिए परीक्षा देते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में परीक्षा सुरक्षा और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने इस प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार का मानना है कि डिजिटल परीक्षा प्रणाली अपनाने से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

    शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या असामाजिक गतिविधियों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में हुई परीक्षा में कुछ अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतें सामने आने के बाद तत्काल जांच के आदेश दिए गए और आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और किसी भी कीमत पर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से समझौता नहीं किया जाएगा।

    सरकार ने यह भी घोषणा की है कि पुनः आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए छात्रों को अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा शहर चुनने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए एक निश्चित समय सीमा भी तय की गई है, ताकि छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही प्रवेश पत्र जारी करने की प्रक्रिया को भी समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनी रहे।

    नीट परीक्षा को लेकर उठाए गए इस नए कदम को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली न केवल सुरक्षा के लिहाज से बेहतर होगी, बल्कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया भी तेज और अधिक सटीक हो सकेगी। हालांकि, इसके लिए देशभर में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि लाखों छात्रों को एक साथ परीक्षा देने के लिए पर्याप्त तकनीकी संसाधनों की आवश्यकता होगी।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार की यह प्रक्रिया किसी एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहे सुधारों का हिस्सा है। उद्देश्य केवल इतना है कि देश के प्रतिभाशाली छात्रों को एक निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराई जा सके।

    इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें अगले वर्ष होने वाली नीट परीक्षा पर टिकी हैं, जो नई तकनीकी व्यवस्था के साथ एक नए दौर की शुरुआत कर सकती है।

  • ना बड़े स्टार, ना भारी बजट, सिर्फ दमदार कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास

    ना बड़े स्टार, ना भारी बजट, सिर्फ दमदार कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास



    नई दिल्ली। बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में अक्सर माना जाता है कि बड़ी फिल्में सिर्फ बड़े स्टार्स और भारी बजट से चलती हैं, लेकिन कई ऐसी फिल्में भी रही हैं जिन्होंने इस धारणा को पूरी तरह तोड़ दिया है। इन फिल्मों ने साबित किया कि अगर कहानी मजबूत हो तो कम बजट में भी रिकॉर्ड तोड़े जा सकते हैं।

    कंतारा
    ऋषभ शेट्टी द्वारा निर्देशित और अभिनीत फिल्म कंतारा (2022) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। लगभग 16 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में करीब 411 करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्म की कहानी, लोक संस्कृति और दमदार प्रस्तुति ने इसे ब्लॉकबस्टर बना दिया।

    777 चार्ली
    यह फिल्म एक इंसान और एक कुत्ते की भावनात्मक कहानी पर आधारित थी। धीरे-धीरे यह फिल्म दर्शकों के दिलों में उतर गई और इसे बेहद सराहा गया। कम बजट में बनी इस फिल्म ने भी शानदार प्रदर्शन किया।

    द केरल स्टोरी
    अदा शर्मा स्टारर द केरल स्टोरी ने 15 करोड़ के बजट में करीब 303 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। विवादों के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई।

    12वीं फेल
    विक्रांत मैसी की यह फिल्म सच्ची कहानी पर आधारित थी। लगभग 20 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 70 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों का दिल जीत लिया।

    सीता रामम
    दुलकर सलमान और मृणाल ठाकुर स्टारर यह रोमांटिक ड्रामा फिल्म भी कम बजट में बनी लेकिन अपनी कहानी और इमोशन की वजह से दर्शकों को खूब पसंद आई।

    हनुमान
    तेजा सज्जा स्टारर हनुमान (2024) ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। लगभग 30 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 220 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और सुपरहीरो जॉनर में बड़ी पहचान बनाई।

    महावतार नरसिम्हा
    यह एनिमेटेड फिल्म भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली एनिमेटेड फिल्मों में शामिल हो गई। लगभग 15 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 300 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया।

    इन सभी फिल्मों ने यह साबित कर दिया है कि आज के समय में दर्शक सिर्फ स्टार पावर नहीं, बल्कि मजबूत कहानी और कंटेंट को ज्यादा महत्व देते हैं। यही वजह है कि कम बजट की ये फिल्में भी बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स को टक्कर देने में सफल रहीं।

  • पब्लिक वाहनों को पैनिक बटन के बगैर न दिया जाए फिटनेस सर्टिफिकेट…SC का सख्त निर्देश

    पब्लिक वाहनों को पैनिक बटन के बगैर न दिया जाए फिटनेस सर्टिफिकेट…SC का सख्त निर्देश


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सड़क सुरक्षा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि टैक्सी, बस और अन्य पब्लिक सर्विस वाहनों (Public Transport Vehicle) को तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट न दिया जाए जब तक उनमें पैनिक बटन और व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस (Vehicle Tracking Device:) यानी की वीएलटीडी न लगाए जाएं। कोर्ट के अनुसार यह कदम यात्रियों खासकर बच्चें, महिला और बुजुर्ग के लिए उठाए जा रहे हैं।


    Panic Button आखिर क्या होता है?

    पैनिक बटन एक इमरजेंसी सेफ्टी फीचर होता है, जिसे खतरे या आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल किया जाता है। जैसे मान लीजिए अगर कोई यात्री खतरा महसूस करे, हादसे का शिकार हो जाए या फिर कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए। यानी किसी भी प्रकार का संकट हो, तो इस बटन को दबाकर तुरंत मदद मांगी जा सकती है। यह बटन दबाते ही वाहन की GPS लोकेशन कंट्रोल रूम, पुलिस या इमरजेंसी सिस्टम तक पहुंच जाती है।


    गाड़ियों में कहां लगाया जाता है यह बटन?

    आमतौर पर यह बटन वाहन के सीट के पास, दरवाजे के आसपास या वाहन के पिलर पर लगाया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर यात्री इसे तुरंत इस्तेमाल कर सके। अधिकतर मामलों में यह लाल रंग का छोटा बटन होता है, जिसे आसानी से पहचाना जा सके।


    किन परिस्थितियों में इस्तेमाल करें ?

    हमेशा याद रखें कि इस बटन का इस्तेमान किसी गंभीर और वास्तविक स्थिति में करें। जैसे:
    दुर्घटना होने पर: अगर गाड़ी किसी सुनसान इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और फोन का नेटवर्क नहीं है, तो फौरन इस बटन का इस्तेमाल करें, इससे समय रहते आप तक मदद पहुंच सकती है।
    खतरा महसूस होने पर: अगर सफर के दौरान कोई अजनबी पीछा करे, ड्राइवर बदतमीजी करे या कोई वाहन में जबरन घुसने की कोशिश करे, तो यात्री इसे दबाकर मदद मांग सकते हैं। यह महिलाओं के लिए काफी सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
    मेडिकल इमरजेंसी: अगर ड्राइविंग के दौरान चालक या यात्री की अचानक तबीयत खराब हो जाए, तो इस बटन के जरिए एम्बुलेंस या मेडिकल टीम को तुरंत बुलाया जा सकता है।
    सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश सड़क सुरक्षा के क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो डिजिटल निगरानी के जरिए अपराध और हादसों पर लगाम लगाने में मदद कर सकता है।


    Vehicle Tracking Device कैसे करता है काम?

    सुप्रीम कोर्ट ने व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस को लेकर भी निर्देश दिए हैं। आपको बता दें यह एक स्मार्ट ट्रैकिंग सिस्टम होता है, जो वाहन की लाइव लोकेशन लगातार मॉनिटर करता रहता है। यह सिस्टम सीधे कंट्रोल रूम और इमरजेंसी नेटवर्क से जुड़ा होता है। जैसे ही कोई यात्री पैनिक बटन दबाता है, वाहन की सटीक लोकेशन तुरंत संबंधित कंट्रोल सेंटर तक पहुंच जाती है। इससे पुलिस, एम्बुलेंस या सुरक्षा एजेंसियों को वाहन तक जल्दी पहुंचने में मदद मिलती है। खासकर टैक्सी, बस और कैब जैसी पब्लिक गाड़ियों में यह फीचर यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत बनाता है।


    क्या इससे सच में सुरक्षा बढ़ेगी?

    अभी इसपर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सभी पब्लिक सर्विस वाहनों में पैनिक बटन या व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम को सख्ती से लगा दिया जाए, तो काफी हद तक सुधार देखने को मिल सकता है। हो सकता है कि इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को ज्यादा सुरक्षा मिले। साथ ही अपराध और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। सड़क हादसों या मेडिकल इमरजेंसी के दौरान भी राहत और मदद तेजी से पहुंचाई जा सकेगी, जिससे कई जानें बचाई जा सकती हैं।

  • PBKS vs MI के बाद ऑरेंज कैप की रेस में कोई बड़ा बदलाव नहीं, क्लासेन टॉप पर कायम; संजू सैमसन पर रहेंगी निगाहें

    PBKS vs MI के बाद ऑरेंज कैप की रेस में कोई बड़ा बदलाव नहीं, क्लासेन टॉप पर कायम; संजू सैमसन पर रहेंगी निगाहें


    नई दिल्ली। IPL 2026 के 58वें मुकाबले में पंजाब किंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच हुए मैच के बाद ऑरेंज कैप की रेस में ज्यादा बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है। टॉप-5 बल्लेबाजों की सूची में फिलहाल हेनरिक क्लासेन, साई सुदर्शन, विराट कोहली, अभिषेक शर्मा और केएल राहुल अपनी जगह बनाए हुए हैं।

    सनराइजर्स हैदराबाद के हेनरिक क्लासेन इस समय सबसे आगे चल रहे हैं और उनके नाम 508 रन दर्ज हैं। उनके बाद गुजरात टाइटंस के साई सुदर्शन 501 रनों के साथ दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। विराट कोहली ने हाल ही में शतक लगाकर अपनी स्थिति मजबूत की है और 484 रनों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। चौथे नंबर पर अभिषेक शर्मा 481 रनों के साथ मौजूद हैं, जबकि केएल राहुल 477 रनों के साथ पांचवें स्थान पर हैं।

    टॉप-5 के बल्लेबाजों के बीच रनों का अंतर बहुत कम है, जिससे हर मैच के बाद ऑरेंज कैप की स्थिति बदल सकती है। इस सीजन अब तक यह देखा गया है कि किसी भी खिलाड़ी के पास यह कैप लंबे समय तक नहीं टिक पाई है।

    टॉप-10 में भी हलचल
    टॉप-10 में भी कुछ बदलाव देखने को मिले हैं। पंजाब किंग्स के प्रभसिमरन सिंह 439 रनों के साथ 8वें स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि कूपर कोनोली 436 रनों के साथ 9वें स्थान पर हैं। मुंबई इंडियंस के रायन रिकल्टन 430 रनों के साथ संयुक्त रूप से 10वें स्थान पर बने हुए हैं।

    आज संजू सैमसन पर रहेंगी नजरें
    आज का आईपीएल मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स और लखनऊ सुपर जाएंट्स के बीच खेला जाएगा, जिसमें सभी की नजरें संजू सैमसन पर रहेंगी। सैमसन इस समय 430 रनों के साथ ऑरेंज कैप रेस में 10वें स्थान पर हैं। अगर वह आज बड़ा स्कोर करते हैं तो टॉप-5 में एंट्री कर सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अगर संजू सैमसन बड़ी पारी खेलते हैं तो वह इस सीजन की ऑरेंज कैप रेस को और भी रोमांचक बना सकते हैं और शीर्ष स्थान के लिए क्लासेन को चुनौती दे सकते हैं।

    इसके अलावा लखनऊ सुपर जाएंट्स के मिचेल मार्श पर भी नजर रहेगी, जो इस सीजन अपनी टीम के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक रहे हैं और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

    कुल मिलाकर, IPL 2026 में ऑरेंज कैप की रेस बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां हर मैच के साथ रैंकिंग बदलने की पूरी संभावना बनी हुई है।

  • अडानी का US के साथ सेटलमेंट…. दो केस खत्म करने के बदले 10 अरब डॉलर निवेश और 15 हजार नौकरियां

    अडानी का US के साथ सेटलमेंट…. दो केस खत्म करने के बदले 10 अरब डॉलर निवेश और 15 हजार नौकरियां


    वाशिंगटन।
    अडानी ग्रुप (Adani Group) के चेयरमैन और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी (Gautam Adani) पर अमेरिका (America) में दो तरह के कानूनी मामले चल रहे हैं। अब अमेरिकी अधिकारी इन मामलों को खत्म करने की तैयारी में हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का न्याय विभाग भारतीय अरबपति गौतम अडानी पर लगे रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के सभी आपराधिक मामलों को वापस ले रहा है।


    क्या है पूरा मामला?

    साल 2024 के अंत में, अमेरिका के शेयर बाजार नियामक ‘सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन’ (SEC) ने भारत के दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी पर एक गंभीर आरोप लगाया था। ये दोनों अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के शीर्ष पदों पर हैं।


    रिश्वत का आरोप:

    SEC का आरोप था कि अडानी ग्रुप ने भारत में एक बहुत बड़े सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट का सरकारी ठेका ऊंचे दामों पर हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करोड़ों डॉलर (सैकड़ों मिलियन डॉलर) की रिश्वत देने का वादा किया था।


    निवेशकों से धोखाधड़ी:

    इसी दौरान, कंपनी ने वॉल स्ट्रीट (अमेरिकी शेयर बाजार) के निवेशकों से अरबों डॉलर का फंड भी जुटाया। निवेशकों को यह भरोसा दिलाया गया था कि कंपनी में रिश्वतखोरी को रोकने के लिए सख्त नियम हैं और टॉप मैनेजमेंट ने वादा किया था कि कोई भी गलत काम नहीं होगा। SEC के मुताबिक, निवेशकों से यह बात छिपाना अमेरिकी कानूनों के तहत धोखाधड़ी है।


    सेटलमेंट और जुर्माना

    अब अमेरिकी सरकार इस मामले को सुलझाने यानी सेटलमेंट के लिए राजी हो गई है। कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार: गौतम अडानी 60 लाख डॉलर का जुर्माना भरेंगे। उनके भतीजे सागर अडानी 1 करोड़ 20 लाख डॉलर (लगभग $12 मिलियन) का जुर्माना भरेंगे।

    अहम बात:
    इस समझौते में यह शामिल है कि अडानी अपनी गलती या अपराध स्वीकार नहीं कर रहे हैं। अडानी ग्रुप ने शुरुआत में भी इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया था।


    आपराधिक मामले (क्रिमिनल केस) रद्द होने की संभावना

    न्यूयॉर्क में दोनों पर धोखाधड़ी और साजिश रचने के क्रिमिनल चार्ज भी लगे थे। द न्यूयॉर्क टाइम्स और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अब इन आपराधिक मामलों को भी रद्द किया जा सकता है।


    ऐसा क्यों हो रहा है?:

    इसके पीछे एक बड़ा कारण अमेरिका में हुए राजनीतिक बदलाव को माना जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद गौतम अडानी ने उनकी खूब तारीफ की थी।

    मार्च 2025 में, ट्रंप सरकार ने ‘फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट’ (FCPA) पर रोक लगा दी थी। यह वह कानून है जो अमेरिकी कंपनियों या निवेशकों से जुड़े विदेशी व्यापार में रिश्वतखोरी को रोकता है। इस कानून पर रोक लगने से ही यह तय माना जा रहा था कि अडानी के खिलाफ चल रहा केस कमजोर पड़ जाएगा।


    क्या है 10 अरब डॉलर और 15 हजार नौकरियों का ऑफर?

    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में अडानी की लीगल टीम ने वाशिंगटन में अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इस दौरान वकीलों ने सरकार के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा- उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे केस को खत्म कर देता है, तो अडानी समूह अमेरिका की अर्थव्यवस्था में 10 अरब डॉलर (लगभग 90 हजार करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश करेगा। इसके अलावा, इस निवेश के जरिए अमेरिका में 15,000 नई नौकरियां पैदा की जाएंगी।


    डोनाल्ड ट्रंप के वकील की एंट्री

    इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब गौतम अडानी ने अपना केस लड़ने के लिए एक नई लीगल टीम उतारी। इस टीम का नेतृत्व ‘रॉबर्ट जे. गिफ्रा जूनियर’ कर रहे हैं। रॉबर्ट जे. गिफ्रा कोई आम वकील नहीं हैं, बल्कि वे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी (पर्सनल) वकीलों में से एक हैं।


    मीटिंग में 100 स्लाइड का प्रेजेंटेशन

    न्याय विभाग के मुख्यालय में हुई उस बैठक में वकील रॉबर्ट ने अधिकारियों को करीब 100 स्लाइड का एक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिखाया। शुरुआती स्लाइड्स में उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि अमेरिकी जांच एजेंसियों के पास अडानी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं और न ही अमेरिका के पास इस मामले में केस चलाने का अधिकार क्षेत्र बनता है। इसी प्रेजेंटेशन की आखिरी कुछ स्लाइड्स में सरकार को खुश करने के लिए 10 अरब डॉलर के निवेश और नौकरियों का यह आकर्षक ऑफर पेश किया गया।


    अमेरिकी अधिकारियों का क्या रुख रहा?

    हालांकि अमेरिकी वकीलों और न्याय विभाग ने आधिकारिक तौर पर यह कहा कि इस 10 अरब डॉलर के ऑफर का इस कानूनी मामले के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि मीटिंग में मौजूद कम से कम एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इस निवेश के ऑफर पर बेहद ‘सकारात्मक प्रतिक्रिया’ दी थी। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही हफ्तों के भीतर अमेरिका ने अडानी पर लगे क्रिमिनल चार्ज हटाने की योजना बना ली।


    अडानी का कारोबार और पिछला विवाद

    गौतम अडानी ने 1990 के दशक में कोयले के व्यापार से अपनी किस्मत बनाई थी। धीरे-धीरे उन्होंने ग्रीन एनर्जी, रक्षा (डिफेंस) और कृषि जैसे कई बड़े सेक्टर्स में अपना बिजनेस फैला लिया। “ग्रोथ विद गुडनेस” के नारे के साथ, कंपनी ने 20 गीगावाट से ज्यादा का क्लीन एनर्जी पोर्टफोलियो बना लिया है, जिसमें तमिलनाडु का दुनिया के सबसे बड़े सोलर पावर प्लांट में से एक भी शामिल है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक इस सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी बनना है।

  • 2027 वर्ल्ड कप में ओपनिंग को लेकर चर्चा तेज, संजू सैमसन को लेकर बढ़ी अटकलें; भारत की रणनीति पर सबकी नजर

    2027 वर्ल्ड कप में ओपनिंग को लेकर चर्चा तेज, संजू सैमसन को लेकर बढ़ी अटकलें; भारत की रणनीति पर सबकी नजर



    नई दिल्ली। भारत के 2027 वनडे वर्ल्ड कप को लेकर अभी से चर्चाएं और संभावित प्लेइंग इलेवन पर बहस तेज हो गई है। यह टूर्नामेंट अक्टूबर-नवंबर 2027 में दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाएगा, जहां तेज और उछाल भरी पिचें टीमों की असली परीक्षा लेंगी।

    हालांकि अभी तक टीम इंडिया की फाइनल स्क्वॉड या ओपनिंग जोड़ी तय नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा प्रदर्शन और खिलाड़ियों की भूमिका के आधार पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि भारत की ओपनिंग जिम्मेदारी कौन संभालेगा और क्या किसी नए कॉम्बिनेशन को आजमाया जा सकता है।

    संजू सैमसन को लेकर अक्सर यह चर्चा होती है कि वह आक्रामक बल्लेबाजी के कारण टॉप ऑर्डर में एक विकल्प हो सकते हैं, लेकिन अब तक भारतीय टीम में उनकी भूमिका मुख्य रूप से मिडिल ऑर्डर या विकेटकीपर बैट्समैन के रूप में रही है। वहीं मौजूदा समय में शुभमन गिल और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी टीम इंडिया के प्रमुख ओपनर के रूप में स्थापित हैं और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में टीम प्रबंधन आमतौर पर स्थिर और अनुभवी ओपनिंग जोड़ी को प्राथमिकता देता है, ताकि दबाव की स्थिति में शुरुआत मजबूत हो सके। ऐसे में किसी भी नए ओपनिंग प्रयोग का फैसला पूरी तरह फॉर्म, फिटनेस और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

    मिडिल ऑर्डर की बात करें तो विराट कोहली, श्रेयस अय्यर और अन्य बल्लेबाज टीम की रीढ़ माने जाते हैं, जबकि हार्दिक पांड्या और रवींद्र जडेजा जैसे ऑलराउंडर संतुलन प्रदान करते हैं। गेंदबाजी विभाग में जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और कुलदीप यादव जैसे खिलाड़ी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की पिचों पर तेज गेंदबाजों और तकनीकी बल्लेबाजों की बड़ी परीक्षा होगी। ऐसे में टीम का चयन केवल संभावित ओपनिंग जोड़ी पर नहीं, बल्कि पूरे संतुलन और परिस्थितियों के अनुसार प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

    कुल मिलाकर, 2027 वर्ल्ड कप के लिए भारत के पास कई मजबूत विकल्प मौजूद हैं, लेकिन अंतिम फैसला खिलाड़ियों के प्रदर्शन, निरंतरता और रणनीति के आधार पर ही लिया जाएगा।

  • MP: देवास ब्लास्ट में गई 5 की जान, धूल का काम बताकर बिहार से बुलाए गए थे मजदूर

    MP: देवास ब्लास्ट में गई 5 की जान, धूल का काम बताकर बिहार से बुलाए गए थे मजदूर


    देवास।
    आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे (Agra-Mumbai National Highway) पर स्थित टोंककला इलाके की एक पटाखा फैक्ट्री (Firecracker factory) गुरुवार सुबह 11 बजे खंडहर में तब्दील हो गई. एक जोरदार धमाके के साथ उठी आग की लपटों ने वहाँ काम कर रहे दर्जनों मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री की छत उड़ गई और घटनास्थल पर मानव अंग बिखरे पड़े मिले।

    शुरुआत में तीन मजदूरों की मौत की खबर आई थी, लेकिन देर रात अमलतास हॉस्पिटल में भर्ती दो और मजदूरों अमर और गुड्डू ने दम तोड़ दिया. दोनों 99% तक झुलस चुके थे. अस्पताल में भर्ती 25 अन्य घायलों का उपचार जारी है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है।


    आरोपी पर NSA और 4 के खिलाफ FIR

    जिलाधिकारी ऋतुराज सिंह ने फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ (NSA) लगाया है. पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, लाइसेंस की शर्तों का घोर उल्लंघन किया गया था. टोंकखुर्द थाना पुलिस ने मामले में कुल 4 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।


    ‘धूल का काम’ बताकर बिहार से लाए गए थे मजदूर

    हादसे में जीवित बचे बिहार के मजदूर नवीन कुमार ने रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती सुनाई. नवीन ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, ”मजदूरों को 14000 रुपये महीने की तनख्वाह पर यह कहकर लाया गया था कि उन्हें केवल धूल से जुड़ा काम करना होगा, लेकिन उन्हें बारूद के साथ 25×25 के छोटे कमरे में झोंक दिया गया।

    नवीन ने धुएं और मलबे के बीच से अपने भाई निरंजन को जलते हुए बाहर निकाला. उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री में आग बुझाने का कोई इंतजाम नहीं था.


    भीषण गर्मी बनी धमाके की वजह?

    मजदूरों का आरोप है कि भीषण गर्मी के बावजूद बारूद वाले कमरे में पानी का छिड़काव नहीं किया गया. गौरतलब है कि देवास समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश इस समय ‘हीट ज़ोन’ में है. केंद्रीय संगठन (PESO) और फोरेंसिक टीमें अब इस बात की तकनीकी जांच कर रही हैं कि क्या अत्यधिक तापमान के कारण बारूद में स्वतः स्फोट हुआ।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज का ऐलान किया है. उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना.


    विपक्ष का हमला

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घटनास्थल का दौरा कर सरकार पर ‘बारूद माफिया’ को संरक्षण देने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि कृषि गोदामों में अवैध रूप से पटाखे जमा थे और कलेक्टर को निलंबित करने की मांग की।


    लाइसेंस पर सवाल

    जांच में सामने आया कि अनिल मालवीय को दिसंबर 2025 तक के लिए दो लाइसेंस जारी किए गए थे, जिनका हाल ही में 6 मई को नवीनीकरण हुआ था. प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि रिहायशी इलाके के पास इतनी खतरनाक यूनिट को अनुमति कैसे मिली.


    दिल्ली से सीधे इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री

    CM मोहन यादव ने नई दिल्ली से इंदौर पहुंचकर अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती घायलों से भेंट की. मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम एयरपोर्ट से चोइथराम हॉस्पिटल पहुंचकर देवास के हादसे के कारण घायल हुए नागरिकों से मुलाकात की और उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों को जरूरी निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने एमवाय अस्पताल में दाखिल घायलों से भी मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हालचाल जाना. CM यादव ने सभी घायलों के समुचित उपचार के निर्देश चिकित्सा अधिकारियों को दिए. इस अवसर पर अन्य जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

    बता दें कि गुरुवार दोपहर इस हादसे की जानकारी मिलते होते ही सीएम यादव ने देवास जिला प्रशासन को हादसे से प्रभावित नागरिकों की हर संभव सहायता के निर्देश दिए थे. इसके साथ ही CM ने दिवंगत नागरिकों के परिजन को मध्यप्रदेश शासन की ओर से 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने और घायलों का निःशुल्क इलाज करने का ऐलान किया।

  • UP में आंधी-बारिश ने मचाई तबाही. अब तक 111 लोगों की मौत, 170 पशुओं की भी गई जान

    UP में आंधी-बारिश ने मचाई तबाही. अब तक 111 लोगों की मौत, 170 पशुओं की भी गई जान


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आंधी, तेज बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है. राज्य के कई जिलों में आए भीषण तूफान (Severe Storms) और खराब मौसम (Bad Weather) के कारण अब तक कम से कम 111 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 72 लोग घायल बताए जा रहे हैं. इसके अलावा 170 पशुओं की मौत और 227 घरों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है।

    गुरुवार को राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि 13 मई को हुए खराब मौसम के कारण राज्य के 26 जिलों से मौतों की सूचना मिली है. तेज हवाओं के चलते कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और मकानों को नुकसान पहुंचा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों तक 24 घंटे के अंदर राहत सामग्री और आर्थिक सहायता पहुंचाई जाए. उन्होंने सभी मंडलायुक्तों और जिला मजिस्ट्रेटों से घटनाओं का पूरी संवेदनशीलता के साथ सत्यापन करने और पीड़ित परिवारों से सीधा संपर्क स्थापित कर हर संभव मदद उपलब्ध कराने को कहा है.

    राहत आयुक्त कार्यालय ने बताया कि राज्य स्तर से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जिला प्रशासन के साथ सीधे समन्वय के जरिए राहत कार्य संचालित किए जा रहे हैं. प्रभावित जिलों को आवश्यक धनराशि भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि राहत और बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।


    प्रयागराज में सबसे ज्यादा तबाही

    प्रयागराज जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, गुरुवार सुबह तक तूफान और बारिश के कारण 17 लोगों की मौत की सूचना थी. बाद में अन्य क्षेत्रों से भी जानकारी आने के बाद प्रशासन ने बुधवार की घटनाओं में कुल 24 लोगों की मौत की पुष्टि की. तेज हवाओं और बारिश के चलते कई ग्रामीण इलाकों में मकानों को नुकसान पहुंचा और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई. प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य जारी है।


    भदोही में 16 लोगों की मौत

    भदोही जिले में तूफान से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कुंवर वीरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि कई क्षेत्रों में तेज आंधी के कारण पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए. कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।


    फतेहपुर में दीवार गिरने और हादसों में गई जान

    फतेहपुर जिले में तूफान और बारिश से जुड़ी घटनाओं में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 16 लोग घायल हो गए. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि खागा तहसील में पांच महिलाओं सहित आठ लोगों की मौत हुई. वहीं सदर तहसील में एक घर की दीवार गिरने से एक महिला की जान चली गई. घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में कराया जा रहा है।


    प्रतापगढ़ में शेड और दीवार गिरने से मौतें

    प्रतापगढ़ जिले में तेज हवाओं और बारिश के बीच दीवार गिरने, सीमेंटेड शेड ढहने और बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हुई. पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि लालगंज कोतवाली क्षेत्र के ओझा का पुरवा गांव में एक सीमेंटेड शेड गिरने से भीम यादव (25) मलबे के नीचे दब गए और उनकी मौत हो गई. उन्होंने बताया कि बघराई थाना क्षेत्र के सरी स्वामी गांव में दीवार गिरने से भूषण पांडे (56) की मौत हुई. इसके अलावा नारंगपुर गांव की शांति देवी (46) और छत्रपुर शिवाला रघना गांव के लाल बहादुर (44) की भी तूफान से जुड़ी घटनाओं में जान चली गई।


    कानपुर देहात में बिजली गिरने से युवती की मौत

    कानपुर देहात जिले में बारिश से संबंधित घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई. पुलिस सूत्रों के अनुसार, रसूलाबाद क्षेत्र के भौथारी गांव में भारी बारिश के दौरान 19 वर्षीय रुचि बकरियों के साथ नीम के पेड़ के नीचे खड़ी थी, तभी बिजली गिरने से उसकी मौत हो गई. इस घटना में कई बकरियों की भी मौत हो गई. पास में खड़ा एक 60 वर्षीय व्यक्ति भी घायल हो गया. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) दुष्यंत कुमार ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों से मानव और पशुधन नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है और सरकारी नियमों के अनुसार सहायता दी जाएगी।


    देवरिया और सोनभद्र में भी हादसे

    देवरिया जिले के भीमपुर गौरा गांव निवासी कोमल यादव (62) की बिजली गिरने से मौत हो गई. इस घटना में दो अन्य लोग घायल हुए हैं. एक अन्य घटना में नेरुअरी गांव निवासी रामनाथ प्रसाद (65) की भी बिजली गिरने से मौत हो गई. वहीं सोनभद्र जिले में माधव सिंह (38) की तेज बारिश और तूफान के दौरान उखड़े पेड़ के नीचे दबने से मौत हो गई.


    CM योगी ने दिए सख्त निर्देश

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और पीड़ितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है. साथ ही राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों को नुकसान का सर्वेक्षण कर सरकार को जल्द रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है. राज्य सरकार का कहना है कि राहत और पुनर्वास कार्य तेजी से जारी हैं और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।