Author: bharati

  • अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    अमित शाह पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं, सुल्तानपुर कोर्ट में अगली सुनवाई 21 मई को तय

    नई दिल्ली ।
    सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई एक बार फिर हुई, जिसमें अब अगली तारीख 21 मई 2026 तय कर दी गई है। यह मामला कई साल पुराने उस बयान से जुड़ा बताया जाता है, जो कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान गृहमंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए कथित टिप्पणी से संबंधित है। इसी टिप्पणी को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

    कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन फिलहाल किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सका। इसी वजह से अदालत ने अगली सुनवाई के लिए नई तारीख निर्धारित कर दी। यह मामला लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में चल रहा है और समय-समय पर इसकी सुनवाई होती रही है।

    इस केस में वादी पक्ष की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि वे कोर्ट के एक पुराने आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। वकील की ओर से यह भी कहा गया कि आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें राहुल गांधी की आवाज का नमूना जांच के लिए देने की बात शामिल थी। इस फैसले के बाद भी मामला आगे बढ़ता रहा और अब अदालत ने वादी पक्ष को अपनी दलीलों के लिए अंतिम मौका भी दिया है।

    यह पूरा मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत में चल रही प्रक्रिया के बीच दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों को मजबूती से पेश कर रहे हैं। अब सभी की नजरें 21 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।

  • शिक्षक बनने का सपना होगा पूरा, CTET 2026 के लिए आवेदन शुरू, जानें पूरी डिटेल

    शिक्षक बनने का सपना होगा पूरा, CTET 2026 के लिए आवेदन शुरू, जानें पूरी डिटेल


    नई दिल्ली । 
    शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे देशभर के लाखों युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी CTET सितंबर 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह परीक्षा उन उम्मीदवारों के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है जो केंद्र सरकार के स्कूलों में शिक्षक के रूप में करियर बनाना चाहते हैं। आवेदन करने की अंतिम तारीख 10 जून 2026 निर्धारित की गई है, इसलिए उम्मीदवारों को समय पर प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी जा रही है।

    इस परीक्षा का आयोजन 6 सितंबर 2026 को पूरे देश में एक साथ किया जाएगा। हर साल बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं क्योंकि इसे शिक्षक भर्ती की दिशा में पहला और अनिवार्य कदम माना जाता है। यह परीक्षा उम्मीदवारों की शिक्षण क्षमता और योग्यता को परखने का माध्यम होती है।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है, जिससे उम्मीदवार आसानी से घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले रजिस्ट्रेशन करना होता है, उसके बाद व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी भरनी होती है। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने और फीस जमा करने के बाद फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट करना होता है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करें।

    CTET परीक्षा देशभर के विभिन्न शहरों में आयोजित की जाएगी और इसे कई भाषाओं में कराया जाएगा ताकि अलग-अलग क्षेत्रों के उम्मीदवार आसानी से परीक्षा दे सकें। यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित मोड में होगी और इसमें दो पेपर शामिल होंगे। पहला पेपर कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए होता है, जबकि दूसरा पेपर कक्षा 6 से 8 तक के लिए निर्धारित है।

    इस परीक्षा को पास करने वाले उम्मीदवार केंद्र सरकार के प्रतिष्ठित विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए पात्र माने जाते हैं। इसमें केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय जैसे संस्थान प्रमुख रूप से शामिल होते हैं। इसके अलावा कई अन्य सरकारी स्कूलों में भी CTET को अनिवार्य योग्यता के रूप में स्वीकार किया जाता है।

    शैक्षणिक योग्यता के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के लिए अलग-अलग मानदंड तय किए गए हैं, जिसमें डिप्लोमा, स्नातक और B.Ed जैसी योग्यताएं शामिल होती हैं।

  • White Hair Solution: किचन इंग्रेडिएंट्स से पाएं काले और मजबूत बाल

    White Hair Solution: किचन इंग्रेडिएंट्स से पाएं काले और मजबूत बाल


    नई दिल्ली । आज के समय में कम उम्र में सफेद बालों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, तनाव और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स के बढ़ते उपयोग को इसका प्रमुख कारण माना जाता है। ऐसे में अधिकतर लोग तुरंत असर के लिए बाजार में मिलने वाले हेयर डाई का इस्तेमाल करने लगते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें मौजूद केमिकल्स बालों को लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं।
    इसी बीच आयुर्वेद आधारित घरेलू उपाय एक सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आ रहे हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे किचन में मौजूद आंवला, मेथी, कड़ी पत्ता, कॉफी, चायपत्ती और मेहंदी जैसी चीजें बालों को प्राकृतिक रूप से काला करने में मदद कर सकती हैं। ये न केवल बालों के रंग को सुधारते हैं, बल्कि जड़ों को मजबूत भी बनाते हैं।
    विशेषज्ञों का मानना है कि आंवला बालों के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करता है, जिसमें मौजूद विटामिन C बालों की जड़ों को मजबूत करता है और समय से पहले सफेद होने की प्रक्रिया को धीमा करता है। वहीं, कॉफी और चायपत्ती बालों को प्राकृतिक गहरा रंग देने में मदद करते हैं, और जब इन्हें मेहंदी के साथ मिलाया जाता है, तो बालों को सुंदर ब्राउन या ब्लैक शेड मिलता है।
    घरेलू हेयर कलर बनाने की प्रक्रिया भी काफी आसान है। इसके लिए पानी में आंवला पाउडर, कड़ी पत्ता, लौंग और थोड़ी कॉफी डालकर उबाला जाता है। फिर इसे छानकर मेहंदी मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है। कुछ घंटों तक रखने के बाद इस मिश्रण को बालों में लगाकर 2 से 3 घंटे तक छोड़ दिया जाता है और फिर धो लिया जाता है।
    यह नेचुरल तरीका बालों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि उन्हें पोषण देता है। जहां केमिकल डाई बालों को रूखा और कमजोर बना देती है, वहीं यह घरेलू नुस्खा बालों को मुलायम, घना और चमकदार बनाने में मदद करता है।
    इसके नियमित उपयोग से न केवल सफेद बालों की समस्या कम हो सकती है, बल्कि डैंड्रफ और हेयर फॉल जैसी समस्याओं में भी राहत मिलने की संभावना रहती है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपाय धीरे-धीरे असर दिखाता है लेकिन लंबे समय तक बालों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है।
    कुल मिलाकर, केमिकल हेयर डाई की जगह प्राकृतिक और घरेलू उपाय अपनाना बालों के लिए अधिक सुरक्षित और लाभकारी विकल्प माना जा रहा है, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के बालों को प्राकृतिक सुंदरता प्रदान कर सकता है।

  • काशी में गरजे सीएम योगी: सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए, ॐ जाप और सोमनाथ महोत्सव में गूंजे नारे

    काशी में गरजे सीएम योगी: सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए, ॐ जाप और सोमनाथ महोत्सव में गूंजे नारे



    नई दिल्ली। काशी विश्वनाथ धाम में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सनातन संस्कृति और भारत की आध्यात्मिक विरासत को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, वे इतिहास में खुद मिट गए हैं। योगी ने मुहम्मद गौरी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आक्रमणकारियों ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन वे भारत की आत्मा को कभी नहीं तोड़ सके। उन्होंने कहा कि भारत की चेतना अजर-अमर है और सनातन परंपरा आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी सदियों पहले थी।

    सीएम योगी ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम और सोमनाथ मंदिर भारत के गौरव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि काशी में आज भव्य और दिव्य धाम का स्वरूप दिखाई दे रहा है, जो भारत की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। इसी तरह सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारत की आध्यात्मिक शक्ति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दोनों मंदिर हमें यह संदेश देते हैं कि भले ही आक्रमण हों, लेकिन सनातन संस्कृति को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।

    इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन किया और परिसर में ‘ॐ’ का जाप भी किया। कार्यक्रम के दौरान सोमनाथ मंदिर के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव का लाइव प्रसारण भी देखा गया। यह वही ऐतिहासिक मंदिर है जिसका 1951 में स्वतंत्र भारत में पुनः प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी।

    कार्यक्रम में धार्मिक माहौल देखने को मिला। छात्र-छात्राओं ने शंखनाद और डमरू वादन किया, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। वहीं गुजरात से आई महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में ‘वोट फॉर भाईसाहब’ के नारे लगाए, जिससे माहौल राजनीतिक रंग भी लेता नजर आया।

    सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को फिर से वैश्विक पहचान दिला रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भारत अपनी परंपराओं पर उतना गर्व नहीं कर पाया, लेकिन अब देश अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है और अपनी पहचान को मजबूती से स्थापित कर रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सोमनाथ मंदिर पर इतिहास में कई बार आक्रमण हुए और उसे नष्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार वह फिर से अपने गौरव के साथ खड़ा हुआ। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है कि यहां विनाश अस्थायी है और सृजन हमेशा स्थायी रहता है।

    कार्यक्रम के अंत में सीएम ने कहा कि भारत के देवस्थल केवल पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि वे हमारी आस्था, संस्कृति और चेतना के प्रतीक हैं। इन्हें कोई शक्ति मिटा नहीं सकती और यही सनातन की सबसे बड़ी विशेषता है।

    इस पूरे आयोजन ने काशी में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को और भी भव्य बना दिया, जहां आस्था, इतिहास और आधुनिक भारत की सोच एक साथ दिखाई दी।

  • कानपुर : पत्नी मायके गई तो पति ने रचाई दूसरी शादी, स्नैपचैट से खुला राज; दहेज, अबॉर्शन और उत्पीड़न के गंभीर आरोप

    कानपुर : पत्नी मायके गई तो पति ने रचाई दूसरी शादी, स्नैपचैट से खुला राज; दहेज, अबॉर्शन और उत्पीड़न के गंभीर आरोप




    नई दिल्ली। कानपुर के चकेरी इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पत्नी के मायके जाने के दौरान पति ने चुपके से दूसरी शादी कर ली। इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा स्नैपचैट पर आई तस्वीरों से हुआ, जिसमें पति दूसरी महिला के साथ “पत्नी” लिखकर नजर आया। मामला सामने आने के बाद पीड़िता ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट और गंभीर शारीरिक शोषण के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पीड़िता ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद उसे लगातार प्रताड़ित किया गया और दो बार जबरन गर्भपात कराया गया। महिला का कहना है कि ससुराल वालों ने खाने में दवा मिलाकर उसे नुकसान पहुंचाया, जिससे उसका गर्भ गिर गया। इसके अलावा, ननदोई पर भी कमरे में घुसकर गलत हरकत और शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश का गंभीर आरोप लगाया गया है।

    शादी 2022 में एक मैट्रिमोनियल साइट के जरिए तय हुई थी। पीड़िता का आरोप है कि शादी से पहले ही ससुराल पक्ष ने भारी दहेज की मांग की थी, जिसमें 50 लाख रुपये नकद, सोने के गहने और अन्य सामान शामिल थे। शादी के बाद भी लगातार पैसों की मांग और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना जारी रही।

    पीड़िता के अनुसार, मई 2025 में वह गर्भावस्था के दौरान मायके आ गई थी, और इसी दौरान पति ने दूसरी शादी कर ली। जब उसने इस बात की जानकारी परिवार से ली तो उसे टाल दिया गया और बाद में मामले की पुष्टि खुद सोशल मीडिया से हुई।

    पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने पति, सास और ससुर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों को बुलाकर बयान दर्ज किए जा रहे हैं और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

  • गुरु प्रदोष व्रत 2026: 14 मई को बन रहा शुभ योग, शिव कृपा से पूरी होंगी मनोकामनाएं, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

    गुरु प्रदोष व्रत 2026: 14 मई को बन रहा शुभ योग, शिव कृपा से पूरी होंगी मनोकामनाएं, जानें मुहूर्त और पूजा विधि



    नई दिल्ली। मई 2026 का पहला प्रदोष व्रत 14 मई, गुरुवार को रखा जाएगा, जिसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ रहा है और इसका विशेष महत्व इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

    पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 14 मई को दिन में लगभग 11:21 बजे शुरू होकर 15 मई सुबह 8:32 बजे तक रहेगी। लेकिन प्रदोष काल (संध्या समय) में तिथि होने के कारण व्रत 14 मई को ही रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:22 बजे से 7:04 बजे तक रहेगा, जो शिव आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय, मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता मिलती है। इसके साथ ही जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

    व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने से होती है। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर घी का दीपक जलाकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिनभर शिव नाम का जप और सात्त्विक विचार रखने की सलाह दी जाती है। शाम के समय शिव मंदिर में जाकर पंचामृत से अभिषेक, बेलपत्र अर्पण, चंदन और दीपदान करना अत्यंत शुभ माना गया है।

    पूजा के अंत में गुरु प्रदोष व्रत कथा का पाठ और आरती की जाती है। प्रसाद का वितरण परिवार में करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

  • राहु का महागोचर 2026! राजनीति से टेक्नोलॉजी तक दिखेगा असर, कई राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ तो कुछ की बढ़ेगी परेशानी

    राहु का महागोचर 2026! राजनीति से टेक्नोलॉजी तक दिखेगा असर, कई राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ तो कुछ की बढ़ेगी परेशानी

    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में राहु को रहस्य, भ्रम, अचानक घटनाओं और अप्रत्याशित बदलावों का ग्रह माना जाता है। यही वजह है कि जब भी राहु राशि परिवर्तन करते हैं तो उसका प्रभाव केवल व्यक्ति के जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि देश-दुनिया, राजनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्रों तक दिखाई देता है। साल 2026 में राहु पूरे समय कुंभ राशि में प्रभाव बनाए रखेंगे और फिर 5 दिसंबर 2026 को शनि की राशि मकर में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह गोचर आने वाले समय में कई बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है।

    माना जा रहा है कि राहु के मकर राशि में प्रवेश करते ही शासन-प्रशासन, आर्थिक नीतियों और वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो सकती है। कई देशों में सत्ता परिवर्तन, नीतिगत फेरबदल और प्रशासनिक स्तर पर बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं। वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और साइबर सेक्टर में अचानक तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि राहु भ्रम और अस्थिरता का भी कारक माना जाता है, इसलिए फेक न्यूज, डिजिटल धोखाधड़ी और अफवाहों जैसी स्थितियां भी बढ़ सकती हैं।

    मेष राशि वालों के लिए यह समय करियर में बदलाव और नई जिम्मेदारियां लेकर आ सकता है। अचानक यात्राओं के योग बनेंगे, लेकिन जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान पहुंचा सकता है। वृषभ राशि वालों को मानसिक तनाव और उलझनों का सामना करना पड़ सकता है, हालांकि विदेश, शिक्षा और लंबी यात्राओं से जुड़े मामलों में लाभ मिलने के संकेत हैं। मिथुन राशि वालों के करियर में नई चुनौतियां आ सकती हैं, इसलिए आर्थिक मामलों और साझेदारी में सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    कर्क राशि वालों को लाभ के अवसर मिलेंगे, लेकिन रिश्तों और दांपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव महसूस हो सकता है। सिंह राशि वालों पर काम का दबाव बढ़ सकता है, जबकि कन्या राशि के लोगों को मेहनत का सकारात्मक परिणाम और आय में वृद्धि मिलने के योग हैं। तुला राशि वालों के लिए विवाह योग और शुभ समाचार के संकेत हैं, वहीं वृश्चिक राशि के लोगों को नए संपर्कों से लाभ मिल सकता है।

    धनु राशि वालों के लिए धन कमाने के नए रास्ते खुल सकते हैं, लेकिन खर्चों में भी तेजी आ सकती है। सबसे ज्यादा असर मकर राशि वालों पर देखने को मिलेगा, क्योंकि राहु इसी राशि में प्रवेश करेंगे। करियर, सोच और जीवनशैली में बड़ा बदलाव महसूस हो सकता है। कुंभ राशि वालों को मानसिक दबाव और भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, जबकि मीन राशि वालों के लिए करियर और सामाजिक जीवन में विस्तार के योग बन रहे हैं।

    ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि राहु का यह गोचर कई लोगों के लिए अचानक सफलता, नई पहचान और बड़े अवसर लेकर आएगा, वहीं कुछ राशियों को धैर्य और समझदारी के साथ फैसले लेने की जरूरत होगी।

  • बांग्लादेश बॉर्डर पर अब होगी लोहे की दीवार, BSF को जमीन देने के फैसले से तेज होगी फेंसिंग

    बांग्लादेश बॉर्डर पर अब होगी लोहे की दीवार, BSF को जमीन देने के फैसले से तेज होगी फेंसिंग



    नई दिल्ली। भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए अब पश्चिम बंगाल में बाड़ेबंदी का काम तेज होने जा रहा है। नई सरकार ने BSF को जमीन देने का फैसला लेते हुए 45 दिनों में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, जिससे लंबे समय से अटकी फेंसिंग परियोजना को बड़ी रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो देश की सबसे बड़ी जमीनी सीमा मानी जाती है। इस सीमा का बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और असम से होकर गुजरता है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 80 फीसदी सीमा पर फेंसिंग का काम पूरा हो चुका है, लेकिन सबसे ज्यादा बिना बाड़ वाला हिस्सा अब भी पश्चिम बंगाल में मौजूद है।

    सीमावर्ती इलाकों में घने जंगल, नदी, दलदल और पहाड़ी क्षेत्रों की वजह से कई जगहों पर पारंपरिक बाड़ लगाना मुश्किल रहा है। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, स्थानीय विरोध और प्रशासनिक देरी भी फेंसिंग की रफ्तार धीमी होने की बड़ी वजह बनी। केंद्र सरकार लंबे समय से आरोप लगाती रही कि पश्चिम बंगाल में जमीन अधिग्रहण की धीमी प्रक्रिया के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा यह अहम प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ।

    कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी यह मुद्दा पहुंचा, जहां अदालतों ने सीमा सुरक्षा को गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने तो देरी पर अधिकारियों को फटकार लगाते हुए जुर्माना तक लगाया था। अब नई सरकार के फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि लंबित जमीन जल्द BSF को सौंपी जाएगी और सीमा पर सुरक्षा मजबूत होगी।

    सरकार का मानना है कि फेंसिंग पूरी होने से अवैध घुसपैठ, मवेशी तस्करी और सीमा पार अपराधों पर लगाम लगेगी। वहीं कई संवेदनशील इलाकों में स्मार्ट फेंसिंग, सीसीटीवी कैमरे और मोशन सेंसर जैसे आधुनिक सुरक्षा उपकरण भी लगाए जाने की योजना है, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

  • वजन घटाने का सुपर ड्रिंक! चिया और सब्जा सीड्स का पानी तेजी से करेगा फैट बर्न

    वजन घटाने का सुपर ड्रिंक! चिया और सब्जा सीड्स का पानी तेजी से करेगा फैट बर्न

    नई दिल्ली। बढ़ता वजन आजकल हर उम्र के लोगों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। ऐसे में लोग तेजी से वजन कम करने के लिए डाइटिंग, जिम और कई तरह के हेल्थ ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं। लेकिन अब एक बेहद आसान और नेचुरल तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक कई विशेषज्ञ और हार्वर्ड से जुड़े डॉक्टर सुबह खाली पेट चिया और सब्जा सीड्स का पानी पीने की सलाह देते हैं। माना जाता है कि यह ड्रिंक मेटाबॉलिज्म को तेज करने और वजन घटाने में काफी मदद करता है।
    चिया सीड्स और सब्जा सीड्स दोनों में फाइबर, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जब इन्हें पानी में भिगोया जाता है तो ये जेल जैसी बनावट ले लेते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग की समस्या कम हो सकती है। यही वजह है कि वजन घटाने वाले लोग इसे अपनी मॉर्निंग रूटीन में शामिल कर रहे हैं।
    विशेषज्ञों के अनुसार, चिया और सब्जा सीड्स का पानी शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है। गर्मियों में यह ड्रिंक शरीर को ठंडक पहुंचाने और एनर्जी बनाए रखने में फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।
    इसे बनाने का तरीका भी बेहद आसान है। एक गिलास पानी में एक चम्मच चिया सीड्स और एक चम्मच सब्जा सीड्स डालकर 20 से 30 मिनट तक भिगो दें। इसके बाद इसमें नींबू और शहद मिलाकर पिया जा सकता है। कुछ लोग स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें पुदीना या फल भी मिलाते हैं।
    हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी चीज का जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है। जिन लोगों को एलर्जी, पाचन संबंधी समस्या या कोई गंभीर बीमारी हो, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे नियमित रूप से लेना चाहिए। सिर्फ इस ड्रिंक पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार और नियमित एक्सरसाइज भी जरूरी है।
  • रोग पंचक 2026 का खतरे वाला दौर शुरू! 5 दिन तक इन कामों से रहें दूर, दक्षिण दिशा की यात्रा मानी गई अशुभ

    रोग पंचक 2026 का खतरे वाला दौर शुरू! 5 दिन तक इन कामों से रहें दूर, दक्षिण दिशा की यात्रा मानी गई अशुभ



    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 10 मई 2026 से शुरू हुआ रोग पंचक 14 मई की रात 10 बजकर 34 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से गुजरता है। रविवार से शुरू होने के कारण इसे ‘रोग पंचक’ कहा जाता है, जिसे स्वास्थ्य, मानसिक तनाव और बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इन पांच दिनों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि छोटी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है।

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पंचक के दौरान नए मकान का निर्माण, नींव भरना, छत डालना या किसी स्थायी निर्माण कार्य की शुरुआत करना अशुभ माना जाता है। लकड़ी से जुड़े काम जैसे पलंग, मेज, कुर्सी या फर्नीचर बनवाने से भी बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि पंचक में शुरू किए गए कामों में रुकावट, नुकसान या मानसिक तनाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि शुभ और स्थायी कार्यों को इन दिनों टालने की परंपरा चली आ रही है।

    ज्योतिष शास्त्र में पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को भी अशुभ बताया गया है। दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, इसलिए इन पांच दिनों तक इस ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। खासकर रोग पंचक में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका मानी जाती है। यदि यात्रा बहुत जरूरी हो तो पूजा-पाठ और शुभ उपाय करने के बाद ही निकलना बेहतर माना जाता है।

    पंचक के प्रकारों की बात करें तो रविवार का पंचक रोग पंचक, सोमवार का राज पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक और शनिवार का मृत्यु पंचक कहलाता है। इनमें राज पंचक को छोड़कर बाकी पंचकों को विशेष सावधानी वाला समय माना गया है।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो अंतिम संस्कार रोका नहीं जाता। अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए कुश से बने पुतले का भी दाह संस्कार किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार पर आने वाले संकट और पंचक दोष का प्रभाव कम हो जाता है।